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‘फैक्ट चेकर बहुत बड़े झूठे और पक्षपाती होते हैं’ : एलन मस्क का ट्वीट देख भारतीयों को आई मोहम्मद जुबैर की याद, टैग करके बोले- तेरी बात हो रही

फैक्टचेकिंग नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाना अब पुराना पैंतरा हो गया है। 13 जून 2023 को एक रिपोर्ट आई जिसमें दावा किया ग.ा कि अमेरिका में सौ फीसद फैक्ट चेकर सिर्फ डेमोक्रेट्स पार्टी के पक्ष में अपनी फैक्ट चेकिंग करते हैं। वहीं जो डोनेशन पिछले 4 साल में आया है वो भी 22, 683 डॉलर में से 22,580 डॉलर डेमोक्रेट्स के पास गया है, शेष रिपब्लिकन्स को।

अब इसी रिपोर्ट पर ट्विटर मालिक एलन मस्क ने रिप्लाई किया है। उन्होंने कहा, “ये तथाकथित फैक्टचेकर बहुत बड़े झूठे होते और बहुत पक्षपाती होते हैं।”

अब उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रिआएँ आ रही हैं। लेकिन भारतीय यूजर इसे सीधे ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर से जोड़ रहे हैं। एलन मस्क के ट्वीट के नीचे जुबैर के नाम के कई कमेंट हैं।

एक यूजर लिखते हैं, “ऐसा एक फैक्टचेक भारत में मोहम्मद जुबैर भी है।”

राजेश आचार्य बोलते हैं, “सही कह रहे हो। भारतीय तो इसके सबसे उत्कृष्ट उदाहरण मोहम्मद जुबैर को भी जानते हैं।”

एक अन्य यूजर कहते हैं, “ओये मोहम्मद जुबैर तेरे बारे में बात हो रही है।”

दिलचस्प यह है कि एक तरफ जहाँ ट्विटर मालिक का इस प्रकार फैक्टचेकर्स के लिए का बयान आया है। वहीं इससे पहले 2021 में फेसबुक ने फैक्टचेकर्स के लिए स्वीकारा था कि फैक्ट चेक के नाम पर केवल लोगों की राय बनाने का काम हो रहा है। उन्होंने एक पत्रकार द्वारा किए गए केस पर सुनवाई के दौरान कहा था कि फैक्टचेक सिर्फ राय बनाते हैं जो अमेरिका के लोग पढ़ते और देखते हैं।

दिल्ली की ‘IAS फैक्ट्री’ में आग, तार से लटक-लटक कर तीसरी मंजिल से नीचे आए छात्र-छात्राएँ… मुखर्जी नगर का Video वायरल

दिल्ली में UPSC की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की पसंदीदा जगह मुखर्जी नगर के एक कोचिंग सेंटर में गुरुवार (15 जून 2023) को आग लग गई। तीसरी मंजिल पर फँसे छात्र-छात्राओं ने किसी तरह तार और रस्सी के सहारे कूद कर अपनी जान बचाई।

आज दोपहर 12 बजे के करीब ‘संस्कृति कोचिंग सेंटर’ में आग लग गई। यह कोचिंग सेंटर बत्रा सिनेमा के पास ज्ञाना बिल्डिंग में स्थित है। इसके कारण छात्र-छात्राओं में भगदड़ मच गई। कुछ लोगों को चोटें भी आई हैं। कुछ विद्यार्थी रस्सी के सहारे निकलने के चक्कर में फिसलकर नीचे गिर गए और जख्मी हो गए।

सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि किस तरह छात्र-छात्राएँ अपनी अपनी जान की बाजी लगाकर कोचिंग से निकल रहे हैं। वहीं, सूचना के बाद फायर ब्रिगेड की 11 गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं और बहुत मशक्कत के बाद आग पर काबू पाई।

इस दौरान बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। कोई वीडियो बना रहा था तो कोई नीचे ही उनके गिरने की आशंका जाहिर कर रहा था। हालाँकि, जिस तरह से 10-10 छात्र-छात्राएँ एक ही रस्सी से लटकर अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही थीं, उससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी।

जिस समय कोचिंग सेंटर में आग लगी, उस समय वहाँ 200 से ज्यादा विद्यार्थी मौजूद थे। वहाँ फायर एग्जिट की भी व्यवस्था नहीं थी। इसके कारण विद्यार्थी खिड़की से कूदकर जान बचाने को मजबूर हुए।

पुलिस ने बताया कि आग बिल्डिंग के मीटर में लगी थी। इसके कारण ऊपरी मंजिल पर धुआँ फैल गया। इससे अफरा-तफरी मच गई। कुल चार-पाँच छात्र घायल बताए जा रहे हैं।

फेसबुक से उखड़ा कर्नाटक हाईकोर्ट, कहा- देश भर में बैन कर देंगे: CAA समर्थक को फेक अकाउंट से सऊदी अरब में फँसाने से जुड़ा है मामला

भारतीय एजेंसियों को सहयोग नहीं करने पर कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक (Facebook) को चेतावनी दी है। हाईकोर्ट ने बुधवार (14 जून 2023) को फेसबुक को पूरे भारत में बंद करने की चेतावनी दी है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश कृष्णा एस दीक्षित ने यह टिप्पणी सऊदी अरब की जेल में कैद एक भारतीय व्यक्ति से जुड़े केस में की है। दरअसल, उस व्यक्ति से संबंधित जानकारी कर्नाटक पुलिस फेसबुक से माँग रही थी, लेकिन सोशल मीडिया कंपनी एजेंसी को सहयोग नहीं कर रहा था। इस मामले में अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

उच्च न्यायालय ने फेसबुक को निर्देश दिया कि जरूरी जानकारी के साथ पूरी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर कोर्ट के सामने पेश करे। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार भारतीय नागरिक की अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी के संबंध में अब तक की गई कार्रवाई की भी जानकारी दे। इसके साथ ही मंगलुरु पुलिस को जाँच जारी रखने और रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। 

दरअसल, दक्षिण कन्नड़ जिले के बिकरनकाट्टे की रहने वाली कविता ने हाईकोर्ट में एक याचिका की थीं। इस याचिका में कविता ने कहा है कि उनके पति शैलेश कुमार (52) पिछले 25 साल से सऊदी अरब की एक कंपनी में काम कर रहे थे, जबकि वह अपने बच्चों के साथ मंगलुरु के पास स्थित अपने घर पर रह रही थीं।

कविता ने कहा कि साल 2019 में केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) कानून लाई थी। उसके समर्थन में उनके पति ने फेसबुक पर पोस्ट डाला था। इस बीच कुछ अज्ञात लोगों ने उनके नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर सऊदी अरब के शासक और इस्लाम के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट डाल दिए।

याचिका में आगे कहा गया है कि शैलेश की नजर में जैसे ही यह बात आई, उन्होंने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कविता ने इस मामले में मंगलुरु पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस बीच सऊदी अरब की पुलिस ने शैलेश को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। 

मंगलुरु पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और फेसबुक से फर्जी फेसबुक अकाउंट खोले जाने की जानकारी माँगी। हालाँकि, फेसबुक ने पुलिस द्वारा माँगी गई जानकारी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस बीच कविता ने साल 2021 में जाँच में देरी को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। 

दिलनूर जैसी मुस्लिम युवतियों को कौन दिलाएगा मुक्ति, भाभी देती है ताने- तेरे साथ तो बकरा भी नहीं रहेगा: ‘पैगाम’ वाली रवायत से निकाह मुश्किल

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वतंत्रता… कोई भी पैमाना उठा लीजिए और उस पर मुस्लिमों औरतों की स्थिति तौलिए। हालात बेहद निराशाजनक मिलेंगे। बावजूद इनकी स्थिति में सुधार के लिए कोई आवाज, कोई आंदोलन आपको नहीं दिखेगा। इस्लामी कानून, रवायत और कठमुल्ले किसी के लिए उनकी आवाज का मोल नहीं। उलटे मुल्लों की तकरीरों में उन्हें इस तरह पेश किया जाता है जैसे ‘भोग की वस्तु’ से अधिक औरतों का मोल न हो।

शाहबानो केस जैसे प्रकरणों से जब अदालतों ने उनकी मुक्ति का रास्ता दिखाने के प्रयास किए तो उनका भी गला ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के कारण घोंट दिया गया। केंद्र की मोदी सरकार ने भले कानून बनाकर तीन तलाक को अवैध बना दिया हो पर हकीकत यही है कि आज भी मुस्लिम महिलाओं से ‘तलाक तलाक तलाक’ कहा जा रहा। ऐसे कुछेक मामलों का पता हमें तब चल पाता है कि जब कोई मुस्लिम महिला हिम्मत कर इसके खिलाफ शिकायत करने पुलिस तक पहुँच जाती है। शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाने या समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे वे प्रयास जिनसे उनकी स्थिति में सुधार आ सकता है कि सुगबुगाहट सुनते ही कट्टरपंथी इस्लामी रवायतों का हवाला देते हुए अपनी खोल से निकल आते हैं।

कई इस्लामी रवायतें तो ऐसी हैं जिनकी आम लोगों को जानकारी तक नहीं है और उसके कारण मुस्लिम महिलाओं का दम घुट रहा है। ऐसी ही एक रवायत निकाह के लिए लड़की वालों के घर ‘पैगाम’ भेजने की है। यदि पैगाम न आए तो लड़की की निकाह की उम्र बीत जाती है, क्योंकि जिस लड़की के परिजनों ने खुद से रिश्ता खोजने की कोशिश की मुस्लिम समाज के लिए वह लड़की ‘चालू’ हो जाती है।

पैगाम वाली रवायत की मारी कुछ युवतियों से बातचीत पर आधारित एक रिपोर्ट दैनिक भास्कर ने प्रकाशित की है। ऐसी युवतियों से दैनिक भास्कर के रिपोर्टर पूनम कौशल की मुलाकात बिहार के किशनगंज इलाके में हुई। इन्हीं लड़कियों में से एक 26 साल की दिलनूर है। निकाह की प्रतीक्षा करती उसकी बहन आरजन बेगम 40 साल की हो गई है। दिलनूर के 5 भाई हैं। लेकिन इनमें से कोई भी अपनी बहन के लिए रिश्ता नहीं खोजता, क्योंकि रवायत के अनुसार दिलनूर और आरजन को उनका समाज ‘चालू लड़की’ मान लेगा।

शेरशाहबादी समाज से आने वाली दोनों बहनें इस इंतजार में बैठी हैं कि कब कोई आकर उनके भाई के सामने उनसे रिश्ते की इच्छा जताएगा। पर बढ़ती उम्र के साथ उनकी यह उम्मीद दम तोड़ती जा रही है। अब तो भाभी भी ताने देते हुए कहती है- कोई मर्द तुझ जैसी काली कलूटी से क्यों शादी करेगा, तेरे साथ तो कोई बकरा भी नहीं रहेगा।

इस रवायत की शिकार केवल दो बहनें ही नहीं हैं। न ही यह रवायत मुस्लिमों के शेरशाहबादी समाज तक सिमटी है। सुरजापुरी मुस्लिमों की लड़कियाँ भी इस रवायत के कारण निकाह की प्रतीक्षा में बूढ़ी होती जा रही हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्टर ने कई युवतियों से बात की है। सबका दर्द एक जैसा ही है। एक स्थानीय व्यक्ति के अनुसार इस इलाके में यदि कोई लड़की 25 साल की उम्र पार कर ले तो यह मान लिया जाता है कि उसकी निकाह की उम्र बीत गई है। ज्यादातर ऐसी लड़कियाँ गरीब परिवार की होती हैं। इसके कारण रिश्ता करवाने में अगुवा बनने वाले मुल्ले भी इनसे कन्नी काटते हैं।

बांग्लादेश की सीमा से सटा किशनगंज वह इलाका है, जिसकी डेमोग्राफी घुसपैठियों ने पूरी तरह बदल रखी है। जो पूरी तरह से इस्लामी कट्टरपंथ की जकड़ में है। लेकिन इस्लामी रोशनी में भी इन लड़कियों की मुक्ति का मार्ग तलाशने की कोई कोशिश नहीं हो रही। उन्हें उसी रवायत से दबाया जा रहा जिसे कभी औरतों के दमन के लिए कुछ कठमुल्लों ने थोप दिया होगा।

एक तरफ रवायत के कारण निकाह की प्रतीक्षा करती मुस्लिम लड़कियाँ, दूसरी ओर वह इस्लामी परिभाषा जो पीरियड आते ही मुस्लिम लड़कियों के निकाह को जायज मान लेता है। जिसका हवाला देकर छोटी उम्र की बच्चियों को भी किसी खूँटे से बाँध दिया जाता है, जबकि भारत का कानून 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को अवैध मानता है। इसी समाज का एक स्याह पक्ष वह भी है जिसके अनुसार लिंग प्रवेश छोड़कर दूध पीती बच्ची से भी हर कामुक हरकत जायज है।

सवाल केवल कानूनों के होने या न होने का नहीं है। सवाल यह है कि बाबा आदम जमाने की रवायतों से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाने की पहल कौन करेगा, क्योंकि स्वयंभू नारीवादियों को तो आज भी बुर्के में ही मजहब मजबूत होता दिखता है। इन नारीवादियों का छद्म ही दिलनूर जैसों का जख्म नासूर बना देता है और कठमुल्ले हर मरहम को इस्लाम पर हमला बता देते हैं।

20 दिन से बुर्का पहन अस्पताल में घूम रहा था जावेद, पुलिस ने पकड़ा तो बताया- समलैंगिक हूँ, डॉक्टर बन पुरुष मरीजों से करता था बात

महाराष्ट्र के नागपुर के इंदिरा गाँधी मेडिकल अस्पताल एवं कॉलेज परिसर में एक युवक पिछले 20 दिन से बुर्का पहनकर मरीजों से मुलाकात कर रहा था। हाल में उसकी चाल-ढाल देखकर एक सुरक्षाकर्मी को संदेह हुआ जिसके बाद अकेले में ले जाकर उसका बुर्का उतरवाया गया और पूरी हकीकत सामने आई। जावेद नाम के युवक ने बताया कि वो समलैंगिक है और अस्पताल में पुरुषों से दोस्ती करने के लिए आता था। वो बुर्का पहनकर महिला डॉक्टर होने का नाटक इसिलए करता था ताकि पुरुष मरीजों को आसानी से फँसा सके।

जानकारी के मुताबिक जावेद की उम्र 32 साल है और वो पेशे से एक कंप्यूटर मैकेनिक है। उसने 20 दिन से बुर्का पहनकर अस्पताल में आना-जाना शुरू किया था। बुर्के के ऊपर वो सफेद एप्रोन पहनता था और मरीजों के पास जाकर उनसे बातें करता था, उनका नंबर लेता था। महिला की आवाज बना लेने के कारण पहले तो उसपर किसी को संदेह नहीं हुआ, लेकिन एक दिन सुरक्षाकर्मी संतोषी ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम आयशा सिद्दीकी बताया। लेकिन सुरक्षाकर्मी को यकीन नहीं हुआ। उन्होंने उसे बुर्का उतारने को कहा। जावेद ने बचने के बहाने बनाए। ये भी कहा कि पुरुषों के सामने वो बुर्का नहीं उतार सकता।

इसपर संतोषी ने उसे अलग ले जाकर बुर्का उतरवाया और जावेद की हकीकत सामने आने के बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस में शिकायत होने पर जावेद ‘मुझे बचा लो-बचा लो’ की मिन्नतें करने लगा। जावेद ने बताया कि वो समलैंगिक है और पुरुषों की ओर आकर्षित होता है। इसलिए वह डॉक्टर बन अस्पताल में घुसता में पुरुष मरीजों और उनके रिश्तेदारों से उनका नंबर लेता था।

पुलिस को पहले तो जावेद की कहानी पर यकीन ही नहीं हुआ। हालाँकि जब उसके फोन की छानबीन हुई तो उसे फोन में माय लव के नाम से एक नंबर सेव था। पुलिस ने उस पर कॉल किया तो सामने से पुरुष की आवाज सुनाई पड़ी। उसने भी पुलिस को यही बताया कि वह जावेद को एक महिला समझकर उससे बात करता था। अब पुलिस ने जावेद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दायर किया है। पुलिस पता लगा रही है कि कहीं जावेद ने एप्रोन पहनकर किसी का कोई उपचार तो नहीं किया।

ब्लड कैंसर से मरा खालिस्तानी अवतार सिंह खांडा या जहर देकर मारा गया? अमृतपाल का था हैंडलर, तिरंगे का किया था अपमान

ब्रिटेन में रह रहे खालिस्तान समर्थक अवतार सिंह खांडा (Avatar Singh Khanda) की बर्मिंघम (Birmingham, England) के एक अस्पताल में मौत हो गई है। खांडा हाल ही में जेल भेजे गए खालिस्तानी अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) का हैंडलर भी था और उसे 37 दिनों तक छिपने में मदद की थी। खांडा NIA की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था।

बताया जा रहा है कि की खांडा को पिछले सप्ताह बर्मिंघम के सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वह ICU में लाइफ सपोर्ट पर था। पिछले कुछ दिनों से उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। आखिरकार उसने देर रात को दम तोड़ दिया। उसे पहली स्टेज का ब्लड कैंसर था। यह भी संदेह जाहिर किया गया कि खांडा को जहर दिया गया था।

खांडा लंदन में भारतीय दूतावास पर हुए हमले का मुख्य आरोपित था और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) उसे प्रत्यर्पित कर भारत लाने की लगातार कोशिश में जुटी हुई थी। खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के संस्थापक दीप सिद्धू से भी खांडा की काफी अच्छी बातचीत थी।

खांडा ने साल 2019 में लंदन में स्थित भारतीय दूतावास पर लगे तिरंगे को उतार दिया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इतना ही नहीं, अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद भी खांडा ने लंदन में प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। बम बनाने में महारथी खांडा का पूरा परिवार खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा हुआ है।

यह भी कहा जाता है कि अमृतपाल को पंजाब भेजने और ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया बनाकर खालिस्तान आंदोलन को धार देने की कोशिश के पीछे भी यही खांडा था। खांडा खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) के आतंकी कुलवंत सिंह खुकराना का बेटा है और KLF की लंदन इकाई का प्रमुख था।

खांडा खालिस्तान का समर्थन करने वाले संगठनों को भी एक करने का प्रयास कर रहा था। उसने सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) से भी हाथ मिलाया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि खांडा खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंह पम्मा का बेहद करीबी था।

अवतार सिंह खांडा पंजाब के मोगा जिले का रहने वाला था। साल 1988 में रोडे गाँव स्थित भिंडरावाले के घर में खांडा का जन्म हुआ था। उसी साल खांडा के चाचा बलवंत सिंह खुकराना को सुरक्षाबलों ने एक एनकाउंटर में मार गिराया था। 3 मार्च 1991 को उसके पिता कुलवंत सिंह खुकराना का भी एनकाउंटर हो गया।

अवतार के मामा गुरजंत सिंह बुधसिंहवाला खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) का प्रमुख था। 22 साल की उम्र में साल 2007 में जब खांडा पढ़ाई के लिए ब्रिटेन गया तो वहाँ वह खालिस्तानियों से संपर्क में आ गया और खालिस्तान मूवमेंट का सक्रिय सदस्य बन गया। इसके बाद 2012 में उसने वहाँ शरण ले लिया।

2015 में भारत ने ब्रिटिश सरकार को भारत विरोधी कुछ लोगों के नाम सौंपे थे। इनमें अवतार सिंह खांडा का नाम भी शामिल था। खांडा का परिवार मोगा में ही रहता है। उसकी माता चरनजीत कौर एक स्कूल में टीचर है। उसकी एक बहन भी है, जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करती है।

मायावती थीं UP की CM, भाई और भौजाई ने नोएडा के एक ही अपार्टमेंट में ले लिए 261 फ्लैट: ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा, 46% की छूट मिली

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) के कार्यकाल में उनके परिजनों को अवैध तरीके से लाभ देने का मामला सामने आया है। मायावती के भाई आनंद कुमार और भाभी विचित्र लता को नोएडा के एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में 46 प्रतिशत की छूट देकर 261 फ्लैट आवंटित किए गए थे।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस डील से जुड़े दस्तावेजों की जाँच-पड़ताल कर इसका खुलासा किया है। अंग्रेजी समाचार पत्र ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स को रियल एस्टेट फर्म लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (Logix Infratech Private Ltd) द्वारा विकसित किया गया था।

दस्तावेजों की पड़ताल में पाया गया है कि मायावती के भाई-भाई को आवंटित फ्लैटों में धोखाधड़ी और अंडरवैल्यूएशन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में कंपनी की स्थापना से लेकर इसके दिवालिया होने और मई 2023 के बाद के फोरेंसिक ऑडिट तक की पड़ताल में इस फर्जीवाड़े का पैटर्न सामने आया है।

मई 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा की जीत हुई थी और मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं। वहीं, लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना मई 2010 में हुई थी। अपनी स्थापना के दो महीने के भीतर यानी जुलाई 2010 में कंपनी ने मायावती के भाई-भाभी से बिक्री का समझौता कर लिया।

कंपनी ने अपने नोएडा प्रोजेक्ट ‘ब्लॉसम ग्रीन्स’ में लगभग 2 लाख वर्ग फुट स्पेस क्रमशः 2,300 रुपए प्रतिवर्ग फुट और 2,350 रुपए प्रतिवर्ग फुट पर बेचने के लिए आनंद कुमार और उनकी पत्नी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर लिया। इस प्रकार, आनंद कुमार ने 92.95 करोड़ रुपए की कुल खरीद की।

इन समझौतों के 3 महीने के भीतर यानी सितंबर 2010 में उत्तर प्रदेश सरकार के नोएडा प्राधिकरण ने लॉजिक्स इंफ्राटेक को ‘ब्लॉसम ग्रीन्स’ में 22 टावर विकसित करने के लिए 1,00,112.19 वर्ग मीटर यानी 24.74 एकड़ जमीन लीज पर दे दी।

इसके बाद सितंबर 2010 से 2022-23 तक यानी 13 वर्षों में लॉजिक्स ने ब्लॉसम ग्रीन्स में कुल 2,538 आवासीय फ्लैट में से 2,329 फ्लैट बेची गईं। कंपनी ने 8 टावरों के 944 फ्लैटों का पजेशन दिया है, जिनमें से 848 खरीदारों ने फ्लैट पजेशन हासिल भी कर लिया। बाकी 14 टावरों का सिविल स्ट्रक्चर पूरा हो चुका है, लेकिन फ्लैट्स अभी पजेशन नहीं दिया जाना बाकी है।

4 अप्रैल 2016 को आनंद कुमार को 28.24 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान के बाद 135 अपार्टमेंट और विचित्र लता को 28.19 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान करने के बाद 126 अपार्टमेंट आवंटित किए गए।

इस बीच 15 फरवरी 2020 को लॉजिक्स इंफ्राटेक को अहलूवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड से 7.72 करोड़ रुपए के बकाया की माँग करते हुए पहला नोटिस दिया। लॉजिक्स ने अहलूवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड को अपने ‘ब्लॉसम ग्रीन्स’ प्रोजेक्ट के लिए 259.80 करोड़ रुपए के सिविल और स्ट्रक्चरल कार्यों का ठेका दिया था।

हालाँकि, लॉजिक्स ने बकाए की रकम का भुगतान करने में अपनी असमर्थता जाहिर की। अक्टूबर 2020 में लॉजिक्स ने इसके लिए कोविड-19 की वजह से साल 2019 के अंत तक एनसीआर में निर्माण पर प्रतिबंध और श्रमिकों की अनुपलब्धता का हवाला दिया। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने लॉजिक्स के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही का आदेश दिया।

इस बीच आनंद कुमार और उनकी बीवी ने दिवालियापन की कार्यवाही के तहत 96.64 करोड़ रुपए की राशि का दावा किया है। इस दौरान पड़ताल में पता चला आनंद कुमार और उनकी पत्नी को जिस रेट पर फ्लैट दिए गए, वे कम कीमत पर दिए गए। इतनी ही नहीं, सौदों में भी धोखाधड़ी की गई।

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि आनंद कुमार को ब्लॉसम ग्रीन्स में 2,300 रुपए प्रति वर्ग फुट और उनकी पत्नी को 2,350 रुपए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से फ्लैटों बेचा गया था। वहीं, वित्त वर्ष 2016-17 में घर के अन्य खरीदारों को फ्लैट 4,350.85 रुपए प्रति वर्ग फुट पर दिए गए थे।

ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आनंद कुमार के 28.24 करोड़ रुपए के भुगतान दिखाने वाले वाउचर को इन्वेस्टमेंट के बजाय ‘ग्राहकों से अग्रिम भुगतान’ के रूप में दिखाया गया है। यही हाल आनंद कुमार की पत्नी विचित्र लता के साथ भी हुई।

इसी तरह आनंद कुमार की पत्नी विचित्र लता के के साथ हुए सौदे को लेकर ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि विचित्र लता के 125 फ्लैट्स में से 24 दूसरों को आवंटित किए गए हैं और उसके भुगतान का 28.85 करोड़ रुपए लॉजिक्स द्वारा संबंधित पार्टियों को बिना स्पष्टीकरण के स्थानांतरित किया गया है। इसलिए, 28.85 रुपए के इस लेनदेन को धोखाधड़ी माना जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में स्थापित लॉजिक्स ग्रुप की कई कंपनियाँ हैं। साल 2021 की कैग (CAG) रिपोर्ट के अनुसार, लॉजिक्स समूह पर 2005 से 2018 तक नोएडा प्राधिकरण ने जितने भी व्यवसायिक भूमि आवंटित की गईं, उसका 22 प्रतिशत लॉजिक्स समूह को आवंटित किए गए। वहीं, 31 मार्च 2020 तक लॉजिक्स ग्रुप पर नोएडा प्राधिकरण का 5,839.96 करोड़ रुपए बकाया था।

नरेंद्र मोदी को फँसाने की थी साजिश, अहमद पटेल ने तीस्ता सीतलवाड़ को दिए थे ₹30 लाख: हाई कोर्ट से गुजरात सरकार, कहा- जमानत मिली तो करेगी सबूतों से छेड़छाड़

साल 2002 के गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने की साजिश रचने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका का गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में विरोध किया है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि तीस्ता राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए एक नेता (अहमद पटेल) की ओर से टूल की तरह काम कर रही थीं। अगर उन्हें जमानत मिलती है तो वह अपने खिलाफ मिलने वाले सबूतों को नष्ट कर सकती हैं।

गुजरात सरकार के वकील मितेश अमीन ने कोर्ट में कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ पर केस भी सबूतों से छेड़छाड़ करने और उसके आधार पर प्रोपेगेंडा चलाने का ही चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल, जिनका देहांत साल 2020 में हुआ था, उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ को 30 लाख रुपए दिए थे।

यह रकम तीस्ता को गोधरा दंगों के बाद प्रोपेगेंडा चलाने के लिए दी गई थी ताकि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों को फँसाया जा सके। सरकारी वकील ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ ने पुलिस अधिकारियों आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट के साथ मिलकर गुजरात सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची थी।

कोर्ट में तीस्ता की बेल याचिका का विरोध करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के दावे का हवाला भी दिया गया। जिसमें तीस्ता के खिलाफ सबूत मिलने की बात थी। इसमें कहा गया था कि कैसे तीस्ता ने एक राजनीतिक पार्टी के नेता से रुपयों की मदद लीं।

इसके अलावा इस दौरान रईस खान के बयान का भी जिक्र किया। जिन्होंने तीस्ता-अहमद पटेल के बीच हुई डील के बारे में सामने आकर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि जब सीतलवाड़ की मुलाकात अहमद से हुई उसकी जानकारी उन्हें थी। तीस्ता को काम दिया गया था कि नरेंद्र मोदी व अन्य लोगों को गोधरा कांड में कैसे भी सजा मिले और वो जेल जाएँ।

बता दें कि, गुजरात दंगा मामले में निर्दोष लोगों को फँसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़ने के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद गुजरात पुलिस के विशेष जाँच दल की ओर से कोर्ट में पेश किए गए एक हलफनामे में भी कहा गया था कि तीस्ता का उद्देश्य बड़े षड़यंत्र को अंजाम देते हुए गुजरात सरकार को गिराना या अस्थिर करना था।

उत्तराखंड में गाय से रेप करता पकड़ा गया हाफिज, लोगों ने कपार छील पुलिस के किया हवाले: हाथ में कलावा भी बँधा था, हल्द्वानी की घटना

उत्तराखंड के हल्द्वानी में गाय के साथ रेप करते एक मुस्लिम युवक पकड़ा गया। नाराज लोगों ने सिर मुंडने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपित का नाम हाफिज है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर के स्वार का रहने वाला है। शुरुआत में वह अपना नाम नफीस बता रहा था। उसने हाथ में कलावा भी बाँध रखा था। घटना बुधवार (14 जून 2023) की है।

मामला हल्द्वानी के थाना क्षेत्र मुखानी का है। यहाँ के रहने वाले महेश चंद्र ने बुधवार (14 जून) को इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। महेश के मुताबिक उन्होंने अपनी गाय को चरने के लिए खेतों में छोड़ रखा था। दोपहर में वे गाय को देखने गए। इसी दौरान उन्होंने बाग़ के अंदर एक व्यक्ति को गाय से रेप करते देखा। रेप कर रहे व्यक्ति ने गाय को रस्सी से बाँध दिया था। शिकायत में बताया गया है कि जब आरोपित ने महेश को अपनी तरफ आते देखा तो वह पैंट बंद करते हुए भागने लगा।

महेश ने भागते हाफिज को पकड़ लिया। इस बीच कई अन्य लोग भी मौके पर पहुँच गए। आरोपित की उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जा रही है। फिलहाल वह हल्द्वानी के बरेली रोड में रह रहा था। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। घटना से नाराज लोगों ने न सिर्फ हाफ़िज़ की धुनाई की, बल्कि उसका सिर भी मुंडन कर दिया। इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है।

जैसे ही मामले की सूचना पुलिस को मिली वो मौके पर पहुँची। आरोपित हाफिज को हिरासत में ले लिया गया। उस पर IPC की धारा 377 के तहत कार्रवाई की गई है और जेल भेज दिया गया है। हिन्दू संगठनों ने उस पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

नाबालिग पहलवान के यौन शोषण में बृजभूषण सिंह को क्लीनचिट, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की 1000 पन्नों की चार्जशीट

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। दिल्ली कोर्ट ने उन्हें नाबालिग के आरोपों के मामले में क्लीन चिट दे दी है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने भाजपा सांसद के खिलाफ 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। दरअसल, बृजभूषण सिंह के खिलाफ 7 महिला पहलवानों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इसको लेकर 2 एफआईआर दर्ज की गई थी।

एक FIR में 6 महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जबकि दूसरी FIR में नाबालिग द्वारा यौन शोषण का आरोप लगाया गया था हालाँकि, नाबालिग लड़की ने बाद में यौन शोषण के आरोपों से इनकार कर दिया था और उसके पिता कहा था कि टूर्नामेंट में हारने के कारण उसने गलत आरोप लगाए थे।

दिल्ली पुलिस ने दोनों मामलों में गुरुवार (15 जून 2023) को दो अलग-अलग कोर्ट में चार्जशीट फाइल की। एक चार्जशीट राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की गई है, जिसमें 6 बालिग महिला पहलवानों ने शिकायत दर्ज है। वहीं, दूसरी चार्जशीट पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल की गई, जिसमें नाबालिग की शिकायत है।

नाबालिग के मामले में दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल है। इसकी अगली सुनवाई 4 जुलाई 2023 को है। कैंसिलेशन रिपोर्ट उन मामलों में दायर की जाती है, जब पुष्टि वाले कोई साक्ष्य नहीं मिलते हैं।

उधर, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक क्षेत्र से भाजपा के विधान पार्षद देवेंद्र प्रताप सिंह ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि WFI Election में बृजभूषण शरण सिंह के परिवार और सहयोगियों को चुनाव लड़ने से रोकना आत्मघाती कदम होगा। इसके अलावा यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ भी होगी।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह फैसला क्षत्रिय समाज के लिए अपमानजनक है और इस फैसले से समाज का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा अपमानित महसूस करेगा। उन्होंने कहा कि और अनुराग ठाकुर को ऐसी सहमति देने से आपको बचना चाहिए। भाजपा विधायक ने कहा कि अध्यक्ष पद का चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिये खुला अवसर उपलब्ध होना चाहिए।

भाजपा MLC ने कहा कि पहलवानों का धरना राजनीति से प्रेरित और पीएम मोदी के विरोधियों का खेल संघ पर कब्जे के प्रयास की रणनीति है। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आधारहीन, कपोलकल्पित और झूठे आरोप लगाए गए हैं। धरना देने वाले पहलवान मोदी विरोधियों द्वारा टूलकिट की तरह इस्तेमाल होते रहे हैं।

बता दें कि धरना देने वाले विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे लोगों ने खेल मंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने इस दौरान WFI के चुनाव से बृजभूषण सिंह के परिवार और सहयोगियों को अलग रखने की माँग की थी।