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स्वरा भास्कर प्रेग्नेंट: निकाह के 8वें महीने ही हो जाएगा बच्चा, ‘असलम’ ने कहा – हर साल चाहिए खुशखबरी

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर (Swara Bhaskar) गर्भवती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने शौहर फहाद अहमद के साथ फोटो शेयर करते हुए इसकी जानकारी दी है। स्वरा भास्कर के गर्भवती होने को लेकर नेटीजेन्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। असलम नामक यूजर ने तो यहाँ तक कह दिया कि उसे स्वरा से हर साल ऐसी ही खुशखबरी चाहिए।

दरअसल, स्वरा भास्कर ने इसी साल 16 फरवरी को सपा नेता फहाद अहमद से निकाह किया था। इसके बाद अब 3 महीनों के भीतर ही गर्भवती हैं। इसकी जानकारी देते हुए स्वरा ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कभी-कभी आपकी सभी प्रार्थनाओं का जवाब एक साथ मिलता है। खुश, आभारी और उत्साहित हूँ। अब हम एक नई दुनिया में कदम रखने वाले हैं।” इसके साथ ही उन्होंने हैशटैग के साथ ‘अक्टूबर बेबी’ लिखा है। यानि कि वह निकाह के 8वें महीने में ही माँ बन जाएँगीं।

स्वरा के इस ट्वीट के बाद नेटीजेन्स की प्रतिक्रिया सामने आई है। अर्पिता नामक यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “मामू और अब्बू बनने की खुशी एक साथ।” दरअसल, स्वरा भास्कर ने निकाह से 14 दिन पहले फहद अहमद को भाईजान कहा था। इसलिए लोग ऐसे कमेंट कर रहे हैं।

विपिन तिवारी नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “एक और क्रांतिकारी औरंगजेब भास्कर धरती में आने को तैयार है।”

@aslam_daddy नामक यूजर ने लिखा, “स्वरा भाभी और फहाद भाई जान को इस शानदार गिफ्ट के लिए बधाई। हमें हर साल खुशखबरी देते रहें।”

अभिषेक नामक यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “भाई से पत्नी तक का सफर तय करके भाई के बच्चे को जन्म देने पर अग्रिम शुभकामनाएँ।”

Rising India नामक यूजर ने कहा, “बच्चा पहले अब्बू बोलेगा या मामा।”

 लगभग दिल्ली का मालिक नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “करीना और आप मिलकर बहुत जल्द ही मुगल काल ले आओगी।”

सड़क पर बस रोककर पढ़वाई नमाज… शिकायत के बाद कंडक्टर की सेवा समाप्त, ड्राइवर सस्पेंड: UP पुलिस कर रही केस की जाँच, Video वायरल

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने रोडवेज बस रोक कर नमाज़ पढ़ाने जाने के मामले में बरेली डिपो के बस ड्राइवर को सस्पेंड कर दिया है। इसी बस के कंडक्टर के अनुबंध को भी खत्म कर दिया गया है। रामपुर पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए वीडियो की जाँच शुरू कर दी है और कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। यह मामला शनिवार (3 जून 2023) का है जिसके वायरल वीडियो में 2 नमाज़ियों को नमाज़ पढ़ाने के लिए पूरी बस को रोक दिया गया था। विश्व हिन्दू परिषद ने भी मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

क्या था पूरा मामला

शनिवार (3 जून 2023) को यह जनरथ बस बरेली से गाजियाबाद के कौशाम्बी स्टॉप तक जा रही थी। शनिवार (4 जून 2023) को सत्येंद्र नाम के एक व्यक्ति ने खुद को बस यात्री बता कर परिवहन विभाग मुख्यालय को एक शिकायती ट्वीट किया। अपनी शिकायत के समर्थन में सत्येंद्र ने टिकट के साथ एक वीडियो भी अटैच किया था। इस वीडियो में इस्लामी वेशभूषा में सड़क पर 2 लोगों को नमाज़ पढ़ते देखा जा सकता है। बस के यात्री कंडक्टर से नमाज़ के लिए यात्रा रोके जाने का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि इन सभी के जवाब में कंडक्टर उन्हें हिन्दू-मुस्लिम न करने की नसीहत देता दिखाई दे रहा है।

अपने ट्वीट में सत्येंद्र ने लिखा, “रात मैंने बरेली से दिल्ली के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की जनरथ बस ली। जिस का प्रस्थान समय 7pm था। बस 8:25 pm में रुकी। मैंने जा कर देखा कि 2 मुस्लिम बस से उतरे और बस के सामने बैठ कर नमाज़ पढ़ने लगे। मैने बरेली डिपो के ARM,SM,RM से शिकायत की है। सत्येंद्र की इस शिकायत पर बरेली डिपो के ARM ने अगले दिन 5 जून 2023 (सोमवार) को कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बस पर कार्यरत ड्राइवर कृष्ण पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है और कंडक्टर मोहित यादव की संविदा समाप्त कर दी गई है। ARM के मुताबिक कंडक्टर मोहित यादव ने घटना को स्वीकार करते हुए इसे अपनी भूल माना।

वहीं वायरल हुए इसी वीडियो पर रामपुर पुलिस ने भी जाँच जारी होने की जानकारी दी है। जिस स्थान पर बस को रोका गया था वो जगह रामपुर के मिलक क्षेत्र में पड़ती है। रामपुर पुलिस के मुताबिक ड्राइवर और कंडक्टर से पुलिस बातचीत कर रही है। मामले की जाँच मिलक सर्किल के डिप्टी SP को सौंपे जाने की जानकारी देते हुए पुलिस ने कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी बात कही है।

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी इस मामले को अति बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए सभी आरोपितों पर कठोर एक्शन की माँग की है।

रिलीज से पहले ’72 हूरें’ निकली दंगल से आगे: IMDb रेटिंग में RRR-KGF जैसी फिल्मों को पछाड़ा, ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रेटिंग सबसे ज्यादा

डायरेक्टर संजय पूरन सिंह के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ’72 हूरें’ टीजर जारी होने के बाद से खासा चर्चा में है। यह फिल्म 7 जुलाई 2023 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। खास बात यह है कि रिलीज से पहले ही ’72 हूरें’ फिल्म ने कई बड़ी फिल्मों को IMDb रेटिंग में पछाड़ दिया है। आमिर खान की दंगल (IMDb 8.3), केजीएफ 2 (IMDb 8.3), आरआरआर (IMDb 7.8), बाहुबली 2 (IMDb 8.2) और द केरल स्टोरी (IMDb 7.4) को पटखनी देते हुए ’72 हूरें‘ फिल्म को IMDb पर 8.5 रेटिंग मिली है। लेकिन यह फिल्म विवे​क अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से आगे नहीं निकल पाई। सबसे ज्यादा ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रेटिंग (IMDb 8.7) है।

’72 हूरें’ (72 Hoorain Teaser) फिल्म का टीजर रविवार (4 जून 2023) को रिलीज किया गया था। इसमें साल 2011 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेन सेंटर में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार ओसामा बिन लादेन से लेकर, मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब, 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में शामिल याकूब मेनन, 1999 में दिल्ली प्लेन हाईजैक मामले के आरोपित आतंकी मसूद अजहर और 2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट के आरोपित आतंकी हाफिज सईद समेत कई आतंकियों के 72 हूरों से मिलने के लिए आतंकी बनने के बारे में बताया गया है।

इस फिल्म को साल 2019 में गोवा में आयोजित हुए ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ (IFFI) के इंडियन पैनरोमा सेक्शन में दिखाया गया था। गुलाब सिंह तंवर, किरण डागर, अनिरूद्ध तँवर, अशोक पंडित फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। इसमें पवन मल्होत्रा और आमिर बशीर लीड रोल में हैं।

बता दें कि फिल्म ’72 हूरें’ आतंक के आकाओं द्वारा मुस्लिमों को बहकाकर उन्हें 72 हूरों का लालच देकर आतंकी बनाने की घटनाओं पर आधारित है। दहशतगर्द उनसे कहते हैं कि अगर वे अपनी जिंदगी अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर देंगे, तो उन्हें जन्नत में इनाम के तौर पर 72 हूरें मिलेंगी। वहीं, फिल्म का टीजर शेयर करते हुए निर्माता अशोक पंडित ने 4 जून को ट्वीट किया था, “हम आपके लिए हमारी फिल्म ’72 हूरें’ का फर्स्ट लुक पेश कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि यह आपको पसंद आएगा।”

खालिस्तानी नारे, भिंडरावाला के पोस्टर और भड़काऊ भाषण: ऑपरेशन ब्लू स्टार पर गोल्डन टेंपल से आई तस्वीरें, पंजाब पुलिस अलर्ट पर

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 39वीं बरसी पर एक बार फिर पंजाब के अमृतसर में खालिस्तानी नारे सुनाई पड़े। यहाँ स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थकों ने भिंडरावाले के पोस्टर और तलवारें लहराते हुए खालिस्तानी नारे लगाए। वहीं श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिख कौम को श्री अकाल तख्त की अगुवाई में एकजुट होने को कहा।

अब हालात देखते हुए पंजाब में पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है। पुलिस की ओर से हरमिंदर साहिब के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यहाँ अर्धसैनिक बल चार कंपनियाँ और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिख कौम को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी कौम और धार्मिक संस्थाएँ इस समय विभाजित हैं। इन्हें श्री अकाल तख्त की अगुवाई में इकट्ठा करना समय की जरूरत है।” वह बोले कि एकता के लिए जरूरी है कि सिख संगठनों एवं अकाली दलों को मतभेद दूर करने होंगे।

ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बिखरी हुई शक्ति को एकजुट करके सरकार के खिलाफ संघर्ष शुरू करने की घोषणा की और बोले कि सरकारों से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। सिखों को राजनीतिक तथा आर्थिक तौर से मजबूत होते हुए खुद ही इंसाफ के लिए संघर्ष करना होगा।

इस दौरान सिखों को भड़काते हुए ये भी कहा गया कि सरकार ने जो सिखों को घाव दिए हैं वो कभी भुलाए नहीं जा सकते। ये घाव गहरे हैं और कभी नहीं भरेंगे। सरकारों से उम्मीद ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि हमारी शक्ति कम है लेकिन हमारी शक्ति बिखरी हुई है। 1984 के बाद हम यहाँ और झुकते हैं और चले जाते हैं। लेकिन अब मतभेदों को दूर करने की जरूरत है।

गौरतलब है कि 6 जून ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी होती है। साल 1984 में भारतीय सेना ने खालिस्तानी जरनैल सिंह भिंडरावाले और उसके समर्थकों को मारकर इस ऑपरेशन को खत्म किया था। यह ऑपरेशन रात के अंधेरे में हुआ था इसलिए इसका नाम ऑपरेशन ब्लू स्टार पड़ा। तत्कालीन पीएम इंदिरा गाँधी के आदेश पर यह कार्रवाई आगे बढ़ी थी।

बृजभूषण सिंह के घरों तक पहुँची दिल्ली पुलिस, कर्मचारियों से पूछताछ: बोलीं बबीता फोगाट- पहलवानों का इस्तेमाल कर रहा है विपक्ष

दिल्ली पुलिस ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के कर्मचारियों से पूछताछ की है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के रेलवे की नौकरी पर लौटने के बाद से पहलवानों के आंदोलन के भविष्य को लेकर अटकलें लग रही है। इस बीच ओलंपियन और बीजेपी नेता बबीता फोगाट ने विपक्ष पर पहलवानों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। वहीं पहलवानों के खंडन के बाद अब इंडियन एक्सप्रेस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ नाबालिग पहलवान की शिकायत वापस लिए जाने की खबर छापी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस सोमवार (5 जून, 2023) देर रात बृजभूषण शरण सिंह के लखनऊ स्थित घर पहुँची। यहाँ 5 पुलिसकर्मियों ने घर में मौजूद 3 कर्मचारियों से पूछताछ की। इसके बाद पुलिस गोंडा स्थित घर के लिए निकल गई। यहाँ करीब डेढ़ घंटे तक बृजभूषण के ड्राइवर से लेकर गार्ड, माली और नौकर तक कुल मिलाकर 12 कर्मचारियों से पूछताछ हुई।

पहलवानों का हो रहा इस्तेमाल: बबीता फोगाट

कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहलवान और कुश्ती महासंघ की निगरानी समिति की सदस्य बबीता फोगाट ने विपक्ष पर पहलवानों को गुमराह कर उनका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा है, “मैं पूछना चाहती हूँ कि जब पहलवानों को गिरफ्तार किया जा रहा था तो विपक्ष कहाँ था? उन्होंने पहलवानों को गुमराह किया और जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर रही थी तो वे भाग गए।” बबीता फोगाट ने यह भी कहा है कि सरकार पहलवानों के इस मुद्दे को सुलझाना चाहती है। पहलवानों को कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।

नाबालिग पहलवान ने वापस ली शिकायत?

बजरंग पूनिया ने सोमवार (5 जून, 2023) को नाबालिग पहलवान द्वारा बृजभूषण सिंह के खिलाफ की गई शिकायत वापस लेने से जुड़ी खबरों को खारिज किया था। लेकिन अब इंडियन एक्सप्रेस ने भी सूत्रों के हवाले से कहा है कि नाबालिग महिला पहलवान ने दो बार बयान दर्ज कराने के बाद अपनी शिकायत वापस ले ली है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नाबालिग पहलवान ने पहले पुलिस के सामने तथा बाद में कोर्ट में बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ बयान दिए थे। लेकिन अब उसने शिकायत वापस ले ली है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नाबालिग महिला पहलवान ने कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाए थे। इन बयानों को सबूत के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में अब यह कोर्ट पर निर्भर है कि वह इस मामले की सुनवाई जारी रखता है या फिर केस बंद कर देता है।

बता दें कि इससे पहले टाइम्स नाउ नवभारत ने बताया था कि नाबालिग पहलवान ने शुक्रवार (2 जून, 2023) को पटियाला हाउस कोर्ट में जाकर अपनी शिकायत वापस ले ली थी। पहलवान ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि बृज भूषण शरण ने सिंह ने कभी भी उसका यौन उत्पीड़न नहीं किया। हालाँकि, हिंदुस्तान लाइव ने नाबालिग पहलवान के पिता के हवाले से शिकायत वापस लेने के दावों को बेबुनियाद बताया था। नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा था कि पहलवानों को लेकर फेक न्यूज चलाई जा रही। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस संबंध में उसके सवालों का जवाब नाबालिग पहलवान के पिता ने नहीं दिया है।

‘गढ़ी माज़ी लड़की’ और ‘गनीमी कावा’: वो 2 रणनीति जिससे अटक (अब पाकिस्तान में) से तमिलनाडु तक फैला छत्रपति शिवाजी महाराज का हिंदवी स्वराज्य

शिवाजी महाराज एक ऐसे साहसी और संकल्पित योद्धा थे, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में ‘हिंदवी स्वराज्य’ के संस्थापक के रूप में ऐतिहासिक कार्य किया। 6 जून, 1674 को अपूर्व भव्यता के साथ, वह छत्रपति, ‘सर्वोच्च संप्रभु’ के रूप में सिंहासन पर बैठे। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिससे इस संप्रभु और शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य की नींव पड़ी।

यह साम्राज्य गुप्त, मौर्य, चोल, अहोम और विजयनगर साम्राज्य की ही तरह शक्तिशाली, सुसंगठित और सुशासित था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350वें वर्ष की स्मृति को शिव शक पंचांग के अनुसार ‘शिवराज्याभिषेक सोहला’ के रूप में भी जाना जाता है।

हिंदुओं की चोटी और गरीब की रोटी-बेटी के रखवाले शिवाजी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत थे। कवि भूषण ने शिवराजभूषण और शिवा बावनी जैसी रचनाओं में छत्रपति शिवाजी महाराज की देशभक्ति, वीरता और प्रजावत्सलता का विशद वर्णन किया है।

भारतीय इतिहास में शानदार राजाओं, बहादुर योद्धाओं और दूरदर्शी नेताओं की लंबी सूची है। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज का असाधारण जीवन अदम्य साहस, अद्वितीय नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प और लोक कल्याणकारी संवेदनशील और सक्षम प्रशासन का पुंजीभूत है।

विभाजित और पराजित हिंदू समाज निराश और कुंठित था। लम्बे इस्लामी शासन ने उसे असहाय, आत्मविश्वासहीन और अस्थिर बना दिया था। भारत का बौद्धिक परिदृश्य क्रमशः बंजर हो रहा था और सांस्कृतिक सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ रहा था। ऐसे में ‘म्लेच्छाक्रान्त देशेषु’ जैसे विषम वातावरण में भारत माँ के देशभक्त सपूत शिवाजी का उदय धूमकेतु की तरह होता है।

उन्होंने एक महान ‘हिंदवी साम्राज्य’ की स्थापना करते हुए विभाजनकारी और दमनकारी इस्लामी शासन का प्रतिरोध किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू धर्म का पुनरुत्थान और प्रसार सुनिश्चित किया। अपनी माँ जीजाबाई, समर्थ गुरु रामदास और भारत के अन्य संतों और सम्राटों के उच्चतम आदर्शों से प्रेरित होकर, उन्होंने न केवल हिंदुओं की सुषुप्त चेतना को जागृत किया, बल्कि उन्हें संगठित करते हुए मुगल शक्ति को खुली चुनौती दी।

शिवाजी ने एक ऐसे संप्रभु और स्वदेशी साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें प्रजाजनों का हित संरक्षण सर्वोपरि था। हिंदू राष्ट्रवाद के कट्टर समर्थक और हिंदू हितों के संरक्षक के रूप में, उन्होंने सक्रिय रूप से हिंदू अस्मिता को प्रतिष्ठापित करने, सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करने और मंदिरों के संरक्षण और निर्माण कार्य पर सर्वाधिक बल दिया। इसीलिए वे हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलनों, विचारधाराओं और व्यक्तियों के प्रेरणा-स्रोत हैं। उनके शासन में संस्कृत और मराठी आदि भारतीय भाषाओं को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया। यह सनातन सांस्कृतिक मूल्यों से संचालित देशज साम्राज्य था।

शिवाजी ने हिंदुओं को संगठित करते हुए एक अपराजेय शक्ति बना दिया। इस महान योद्धा का अदम्य साहस युद्ध-कौशल और सैन्य-संगठन किशोरावस्था से ही प्रकट होने लगे थे।

उन्होंने 1646 में आदिल शाही सल्तनत को चुनौती देते हुए तोरण किले पर कब्जा कर लिया। इस साहसिक विजय ने मुगल साम्राज्य और आदिल शाही सल्तनत जैसी दुर्जेय शक्तियों को स्तब्ध कर दिया था। बाद में पुरंदर के युद्ध में उन्होंने फत्तेखान के नेतृत्व वाली विशाल सेना को बुरी तरह पराजित किया।

प्रतापगढ़ की लड़ाई में शिवाजी की सेना ने बीजापुर सल्तनत की सेना पर विजय प्राप्त की। उनके नेतृत्व में, मराठा एक अपराजेय राष्ट्रीय शक्ति के रूप में उभरते गए। उन्होंने मुगल साम्राज्य को तब चुनौती दी, जब वह औरंगजेब के शासन काल में अपने गौरव के चरम पर था।

उन्होंने औरंगजेब के जबरन धर्मांतरण द्वारा भारत के इस्लामीकरण के एजेंडे का सक्रिय विरोध करते हुए गैर-मुस्लिमों के धर्म और संस्कृति का संरक्षण किया। भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली राज्यों में से एक यह साम्राज्य अटक (अब पाकिस्तान का हिस्सा) से लेकर तमिलनाडु में तंजावुर तक फैला हुआ था।

मराठों ने न केवल मुगलों को हराया, बल्कि 18वीं शताब्दी के अधिकांश समय में ब्रिटिश सेना को भी भारत पर कब्जा करने से रोका। इस प्रकार शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित ‘हिंदवी स्वराज्य’ ने विदेशी और औपनिवेशिक शक्तियों का निरंतर प्रतिकार किया।

शिवाजी के नेतृत्व में उनकी सेना ने युद्ध में अनूठी रणनीतियों का प्रयोग किया। उनके अपरंपरागत गुरिल्ला युद्ध (गनीमी कावा) की रणनीति और जांबाजी युद्ध के मैदान में उनकी जीत की आधारशिला थी।

उन्होंने छोटे-छोटे किलों का एक रणनीतिक नेटवर्क/संजाल बनाते हुए ‘गढ़ी माज़ी लड़की’ या ‘किले हमारी ताकत हैं’ का सूत्रवाक्य दिया। इन किलों ने सेना के लिए महत्वपूर्ण संचालन-केंद्रों के रूप में कार्य किया, इससे वे अधिक साधन-संपन्न, शक्तिशाली और स्थापित शत्रु-शक्तियों को चुनौती देने और उन्हें नियंत्रित करने में सक्षम हुए।

शिवाजी की सैन्य सफलताएँ समकालीन सेनानायकों के लिए भी हैरतअंगेज हैं। समुद्री सुरक्षा के सामरिक महत्व को स्वीकार करते हुए उन्होंने एक दुर्जेय नौसैनिक बेड़े की स्थापना की। उन्होंने अरब सागर को नियंत्रित करने और अपने साम्राज्य के तटीय क्षेत्रों को सुरक्षित करने के महत्व को समझते हुए ऐसा किया। उनकी नौसेना ने न केवल कोंकण तट को समुद्री खतरों से बचाया, बल्कि हिंद महासागर के व्यापार मार्गों में यूरोपीय शक्तियों के प्रभुत्व को भी चुनौती दी।

इस साम्राज्य की विशिष्टता सैन्य विजय के अलावा सुशासन के क्षेत्र में भी थी। उन्होंने परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की। स्थानीय शासन, स्व-शासन, त्वरित और निष्पक्ष न्याय प्रणाली और सुव्यवस्थित और समुचित राजस्व संग्रह उनके सुशासन की आधारशिला बने।

सत्ता के विकेंद्रीकरण और शासन के जनतंत्रीकरण द्वारा लोककल्याण,सम्मान और सुरक्षा ‘हिंदवी स्वराज्य’ की पहचान थे। वे वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ में आस्था रखते थे और उसी नीति का अनुसरण करते थे। उन्होंने व्यक्ति-केन्द्रित शासन के स्थान पर व्यवस्था-आधारित शासन के सृजन पर बल दिया।

एक उल्लेखनीय पहल ‘अष्ट प्रधान’ या आठ मंत्रियों की परिषद का गठन था। इस परिषद में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। नीति-निर्माण और कार्यान्वयन में उनकी निर्णायक भूमिका होती थी। विचार-विमर्श पर आधारित सामूहिक और सहकारी निर्णय-प्रक्रिया ने शासन को पारदर्शी, जबावदेह और संवेदनशील बनाया।

इसके अलावा राजस्व आकलन की नई प्रणाली भी शुरू की गई, जिसमें कर आकलन और संग्रह की एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की गई। इस नई व्यवस्था ने समुचित राजस्व-संग्रह सुनिश्चित करते हुए भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया। इस व्यवस्था के निर्माण में दादाजी कोंडदेव की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

भूमि माप के मानकीकरण और मिट्टी के प्रकार के आधार पर उपज का अनुमान लगाने की शुरुआत की गई। आर्थिक विकास के लिए किसानों को बंजर भूमि पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बेरोजगार किसानों को कृषि उद्यम शुरू करने के लिए राज्याश्रय भी दिया गया। इन नीतियों से किसानों, कारीगरों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली।

अर्थ-व्यवस्था में क्रमिक वृद्धि से ‘हिंदवी स्वराज्य’ न सिर्फ शक्तिशाली बना बल्कि समृद्ध और विकसित भी हुआ। इन प्रशासनिक व्यवस्थाओं ने आधुनिक भारत की शासन प्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव डाला।

‘हिंदवी स्वराज्य’ मूलतः स्व-शासन पर आधारित था, जिसमें स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण और भागीदारी पर जोर दिया गया। उन्हें अपने मामलों को संचालित करने और निर्णय लेने की स्वायत्तता दी गई थी।

समर्थ गुरु रामदास की शिक्षाओं से प्रेरित होकर शिवाजी ने सभी हिंदुओं की एकता को प्रोत्साहित किया और ‘सनातन धर्म’ का प्रचार किया। जिसका अर्थ था जातिगत भेदभाव से मुक्त एक ऐसे उदार धर्म को प्रोत्साहन, जिसमें महिलाओं को प्रतिष्ठा और अधिकार देना, कर्मकांडों पर भक्तिभाव को प्राथमिकता देना आदि प्रमुख तत्व थे। विभिन्न पृष्ठभूमि के विद्वानों, कलाकारों और कवियों को संरक्षण प्रदान किया गया। सामाजिक न्याय और समानता उनके प्रशासन की आधारशिला थी।

स्व-शासन, सांस्कृतिक गौरव, सनातन धर्म और विदेशी वर्चस्व के अटूट और अनवरत प्रतिरोध के सिद्धांत पर स्थापित ‘हिंदवी स्वराज्य’ की विरासत ने बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर आदि विचारकों और स्वतंत्रता सेनानियों के ऊपर अमिट छाप छोड़ी। इस विरासत ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वातन्त्र्योत्तर भारत को भी प्रभावित किया। निष्कर्षतः ‘हिंदवी स्वराज्य’ के संस्थापक शिवाजी आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक थे।

BBC ने कम टैक्स देना कबूला, ₹40 करोड़ रुपए भरने को तैयार: रिपोर्ट में बताया, आयकर सर्वे के बाद रुदाली दल को दिख रहा था ‘आपातकाल’

फरवरी 2023 में जब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के दफ्तरों में आयकर सर्वे हो रहा था तो लेफ्ट-लिबरल गैंग इसे ‘आपातकाल’ बता रहा था। मोदी सरकार पर बदले की कार्रवाई का आरोप लगा रहा था। अब यह बात सामने आई है कि टैक्स चोरी से लगातार इनकार करने और जाँच में सहयोग करने की बात कहने वाली बीबीसी ने कम टैक्स देने की बात कबूल ली है।

इंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार बीबीसी ने 2016 से 2022 के बीच कम टैक्स देने की बात मानी है। इसकी भरपाई के लिए उसने करीब 40 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आयकर विभाग को अर्जी दी है। रिपोर्ट के अनुसार अभी विभाग का असेसमेंट आना बाकी है। लेकिन केस से बचने के लिए बीबीसी ने यह अर्जी लगाई है।

TOI की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बीबीसी ने न तो अभी बकाया इनकम टैक्स की भरपाई की है और न ही इसके लिए लिखित रूप से कोई आवेदन दिया गया। इनकम टैक्स भरने के लिए बीबीसी की ओर से सिर्फ एक बयान दिया गया है।

बात दें कि इनकम टैक्स विभाग ने 14 फरवरी को बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में छापेमारी कर 3 दिन तक सर्वे किया था। 16 फरवरी 2023 को सर्वे पूरा होने के बाद इनकम टैक्स विभाग ने एक बयान में बीबीसी का नाम लिए बिना कहा था कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 133ए के तहत एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंपनी के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालयों में सर्वे की कार्रवाई की गई।

इस सर्वे में सामने आया था कि मीडिया कंपनी विभिन्न भारतीय भाषाओं में व्यवसाय कर रही है। लेकिन कंपनी द्वारा बताई गई कमाई उसके व्यवसाय से मेल नहीं खाती है। कंपनी जिस तरह का व्यवसाय कर रही है, उस हिसाब से आय अधिक होनी चाहिए। इस सर्वे के दौरान ऐसे कई सबूत मिले जो बताते हैं कि आय के अनुसार टैक्स नहीं भरा गया। इनकम टैक्स विभाग ने बीबीसी दफ्तर में मौजूद डिजिटल सबूत व आवश्यक दस्तावेज जब्त करने के साथ ही उसके कर्मचारियों से पूछताछ भी की थी। इनकम टैक्स विभाग ने कहा था कि आवश्यकता पड़ने पर इन सबूतों की जाँच की जाएगी।

‘स्वर्ग जैसी अनुभूति हो रही’: CM सरमा ने वापस लाया असम के 5000 वर्ष पुराने शिव मंदिर का गौरव, अतिक्रमण हटा कर हुआ पुनर्निर्माण

असम के दरांग जिले में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार (5 जून, 2023) को 5000 साल पुराने ऐतिहासिक शिव मंदिर का उद्घाटन किया। इस मंदिर को अतिक्रमण मुक्त कराकर इसे नए सिरे से बनवाया गया है। इस मौके पर सीएम सरमा ने कहा है कि इस मंदिर में आकर उन्हें स्वर्ग जैसी अनुभूति हो रही है।

दरांग जिले के सिझापार इलाके के धौलपुर में स्थित भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर के उद्घाटन करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है, “मुझे धौलपुर में ऐतिहासिक शिव मंदिर के साथ एक गेस्ट हाउस और पुजारी गृह का उद्घाटन करने का मौका मिला। इसके लिए मैं खुद को धन्य समझता हूँ।”

सीएम सरमा ने भी कहा है कि असम के श्रद्धालुओं को इस शिव मंदिर में आने-जाने में समस्या न हो इसके लिए धौलपुर में बेहतरीन सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। चूँकि यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है, इसलिए बार-बार आने वाली बाढ़ से धौलपुर के बचाने के लिए बाँध भी बनाया जाएगा। साथ ही मंदिर को लेकर जिस प्रकार की समस्याएँ सामने आएँगी उनका हर संभव निराकरण किया जाएगा।

वहीं, मंदिर के उद्घाटन के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “गरुखुटी में अतिक्रमण के दौरान हमने प्रण लिया था कि हम वहाँ के 5000 वर्ष प्राचीन शिवालय को अपनी पुरानी महिमा में लाने का प्रयास करेंगे। आज इस कार्य को भोलेनाथ के चरणों में समर्पित किया। महादेव के आशीर्वाद और सभी के सहयोग से, गरुखुटी अपनी प्राचीन विरासत को पुनः प्राप्त कर रही है।”

चूँकि, मंदिर के उद्घाटन के साथ ही रविवार (5 जून, 2023) को पर्यावरण दिवस भी था। ऐसे में मुख्यमंत्री सरमा ने मंदिर प्रांगण में वृक्षारोपण भी किया। साथ ही उन्होंने कहा कि असम सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री बनने के बाद 7 जून, 2021 को पहली बार धौलपुर पहुँचे सीएम सरमा ने इस प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण कराने का ऐलान किया था। इसी के तहत इस मंदिर को फिर से बनाया गया और अब सीएम सरमा ने खुद ही इसका उद्घाटन किया।

‘जीवंत लोकतंत्र है भारत, जिसे शक हो वो दिल्ली जाकर खुद देख ले’: व्हाइट हाउस के बयान से राहुल गाँधी को झटका, PM मोदी के स्टेट विजिट को लेकर उत्साह में USA

अमेरिका ने स्पष्ट कहा है कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और जिसे भी कोई शक हो वो नई दिल्ली जाकर खुद इसे देख सकता है। बता दें कि अमेरिकी सरकार का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अमेरिका दौरे पर हैं और वहाँ विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्र्पति जो बायडेन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिनर कार्यक्रम भी इसी महीने होना है।

व्हाइट हाउस की ‘नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ में बतौर स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन्स सेक्रेटरी काम कर रहे जॉन किर्बी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती और सेहत चर्चा का विषय बना रहे। हम कभी इसमें शर्माते नहीं हैं और दोस्तों के बीच ये चलता रहता है। दुनिया में किसी के साथ भी हम अपनी चिंताओं को साझा कर सकते हैं। पीएम मोदी का दौरा गहरे और मजबूत दोस्ती एवं साझेदारी को आगे लेकर जाएगा।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जो बायडेन भी पीएम मोदी के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं। 22 जून को पीएम मोदी यूएस हाउस में सीनेट और रेप्रेसेंटेटिव्स की जॉइंट मीटिंग को भी संबोधित करेंगे। अमेरिका में किसी विदेशी अतिथि के लिए ये सबसे बड़ा सम्मान होता है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का ये छठा अमेरिका दौरा होगा। उधर राहुल गाँधी अमेरिका जाकर भारत में सत्ताशाही होने के आरोप मढ़ रहे हैं।

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने भी पीएम मोदी के दौरे को लेकर बयान दिया है। विभाग के प्रिंसिपल डिप्टी सेक्रेटरी वेदांत पटेल ने कहा कि भारत के साथ साझेदारी अमेरिका के सबसे बड़े रिश्तों में से एक है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था, कारोबार और सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका-भारत के संबंध और मजबूत होंगे। अमेरिकी सांसदों ने पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके संबोधन में भारत के भविष्य को लेकर उनके विजन और दोनों देशों की चुनौतियों के बारे में पता चलेगा।

इलाज से लेकर व्हीलचेयर और कृत्रिम अंग तक… पूरे 10 तरीकों से ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करेगा ‘रिलायंस फाउंडेशन’; राशन, रोजगार और ट्रेनिंग भी

ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए अडानी ग्रुप के बाद अब ‘रिलायंस फाउंडेशन’ भी आगे आया है। दरअसल, ‘रिलायंस फाउंडेशन’ ने हादसे के शिकार लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए 10 बड़े ऐलान किए हैं। इसमें, मुफ्त इलाज से लेकर, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग तथा परिवार के जीवन यापन के लिए पशुधन देने समेत कई तरह के ऐलान किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने सोमवार (5 जून 2023) को पीड़ितों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही कहा है कि रिलायंस की टीम पीड़ितों की सहायता के लिए 24 घण्टे उपलब्ध है और सहायता प्रदान कर रही है।

नीता अंबानी ने एक बयान में कहा है, “मैं बेहद दुःखी मन से रिलायंस फाउंडेशन की ओर से ओडिशा ट्रेन हादसे के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूँ। जैसे ही हमें दुर्घटना के बारे में पता चला, वैसे ही हमारी विशेष आपदा प्रबंधन टीम को राहत और बचाव के लिए मौके पर भेजा गया है। हमारी टीम घायलों को 24 घंटे सहायता प्रदान कर रही है।”

रिलायंस फाउंडेशन ने Jio-BP नेटवर्क (रिलायंस पेट्रोल पंप) के माध्यम से आपदा से निपटने में तैनात एंबुलेंस के लिए मुफ्त ईंधन देने का ऐलान किया है। साथ ही, रिलायंस स्टोर्स के माध्यम से प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीनों के लिए आटा, चीनी, दाल, चावल, नमक और खाना पकाने के तेल सहित मुफ्त राशन देने का भी ऐलान किया गया है। इसके अलावा, रिलायंस फाउंडेशन घायलों के इलाज के लिए मुफ्त दवा और इलाज उपलब्ध कराने की बात कही है।

यही नहीं, रिलायंस फाउंडेशन मृतक परिवारों के एक सदस्य को आवश्यकतानुसार Jio और Reliance Retail के माध्यम से रोजगार के अवसर भी देगा। साथ ही, घायलों को व्हीलचेयर व कृत्रिम अंग देकर विकलांगों को सहायता तथा उनका स्किल डेवलपमेंट कर उन्हें रोजगार के नए अवसर प्रदान करने का भी ऐलान किया है।

यही नहीं, रिलायंस फाउंडेशन ने परिवार के एक मात्र कमाने वाले व्यक्ति की मौत के बाद पीड़ित महिलाओं को माइक्रोफाइनेंस तथा अन्य प्रशिक्षण देगा। इसके अलावा, दुर्घटना से प्रभावित ग्रामीण परिवारों की आजीविका के लिए गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी जैसे पशुधन देने का भी ऐलान किया। यही नहीं, पीड़ित परिवार के सदस्य को रोजगार हासिल करने के लिए 1 साल के लिए मुफ्त इंटरनेट व कॉलिंग की सुविधा देने का ऐलान किया है।

अडानी ने भी किया था ऐलान

बता दें कि इससे पहले, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने रविवार (4 जून, 2023) को ट्वीट कर इस रेल दुर्घटना पर दुःख जताया है। साथ ही उन्होंने हादसे के चलते अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने की जिम्मेदारी लेने का ऐलान किया था। अडानी ने ट्वीट कर लिखा था, “उड़ीसा की रेल दुर्घटना से हम सभी बेहद व्यथित हैं। हमने फैसला लिया है कि जिन मासूमों ने इस हादसे में अपने अभिभावकों को खोया है उनकी स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी अडानी समूह उठाएगा। पीड़ितों एवं उनके परिजनों को संबल और बच्चों को बेहतर कल मिले यह हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है।”