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लड़की की गर्दन काटी, फिर लाश से सेक्स… लेकिन हाई कोर्ट ने नहीं माना ‘रेप’ का दोषी, कहा- मृत शरीर को ‘मानव’ नहीं मान सकते

कर्नाटक के तुमकुर के एक गाँव में 25 जून 2015 को 21 साल की एक लड़की की गर्दन काटकर हत्या कर दी गई। फिर उसके शव के साथ बलात्कार किया गया। निचली अदालत ने आरोपित को दोषी ठहराया। लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट ने उसे रेप के आरोप से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा है कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो लाश के साथ यौन संबंध बनाने पर आरोपित को दोषी ठहराता हो।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा है कि लाश के साथ शारीरिक संबंध बनाने को नेक्रोफीलिया माना जा सकता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 में इसके लिए सजा का कोई प्रावधान नहीं है। इसे देखते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से आईपीसी की धारा 377 में संशोधन करने अथवा नेक्रोफिलिया को अपराध बनाने के लिए कानून बनाने पर विचार करने की सिफारिश भी की है।

इस मामले पर सुनवाई जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस टी वेंकटेश नाइक की पीठ ने की। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार पीठ ने कहा, “भारतीय दंड संहिता की धारा 375 और धारा 377 के प्रावधानों को पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि मृत शरीर को मानव या व्यक्ति नहीं कहा जा सकता। लिहाजा हत्या कर शव के साथ यौन संबंध बनाने को भारतीय दंड संहिता की धारा 375 या 377 के प्रावधानों के तहत यौन अपराध नहीं माना जा सकता। इसे परपीड़न, नेक्रोफीलिया माना जा सकता है। लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत इसके लिए दोषी मानने का प्रावधान नहीं है।”

रेप के मामले में बरी होने के बावजूद आरोपित रिहा नहीं हो पाएगा। हत्या के मामले में कोर्ट ने उसे आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी माना है। कठोर उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 में एक व्यक्ति के जीवन के जो अधिकार परिभाषित हैं, उसमें उसके मृत शरीर का अधिकार भी शामिल है। ब्रिटेन और कनाडा का उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों में शव के साथ अपराध भी दंडनीय है। ऐसे कानून भारत में भी बनाए जाने चाहिए। पीठ ने कहा, “मृत शरीर की गरिमा की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को आईपीसी के प्रावधानों में संशोधन पर विचार करना चाहिए।” शवों के साथ अपराध रोकने के लिए अदालत ने राज्य सरकार को छह महीने के भीतर सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के मुर्दाघरों में सीसीटीवी लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपित ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपनी अपील में कहा था कि उसका कथित कृत्य ‘नेक्रोफीलिया’ है और इसके लिए सजा का आईपीसी में कोई प्रावधान नहीं है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह आईपीसी की धारा 375 (ए) और (सी) के प्रावधानों के तहत आता है और आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय है। हाई कोर्ट ने मामले में सुझाव के लिए एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की थी। उनका कहना था कि भारत में ‘नेक्रोफीलिया’ को अपराध के रूप में मान्यता नहीं है। लेकिन संविधान का अनुच्छेद 21 केवल गरिमा और सम्मान के साथ जीवन का ही अधिकार नहीं देता, बल्कि गरिमापूर्ण तरीके से मृत्यु और उसके बाद अंतिम संस्कार को भी मान्यता प्रदान करता है।

इन दलीलों पर विचार करने के बाद पीठ इस निष्कर्ष पहुँची कि आईपीसी के तहत बलात्कार एक व्यक्ति के साथ होना चाहिए न कि लाश के साथ। बलात्कार वह स्थिति है जो किसी की इच्छा के विरुद्ध होता है, जबकि लाश न तो इसके लिए सहमति दे सकता है या विरोध कर सकता है। पीठ ने कहा, “बलात्कार के अपराध में आरोपित के प्रति आक्रोश और पीड़ित की भावनाएँ शामिल हैं। एक मृत शरीर में आक्रोश की कोई भावना नहीं होती है।”

साक्षी को पता चल गया था साहिल का मजहब, इसीलिए कर दी हत्या? जो पत्रकार पहुँचा सबसे पहले, उसने खोले मर्डर के कई राज

दिल्ली में हुए श्रद्धा वाकर हत्याकांड के बाद साक्षी मर्डर केस ने देश को हिला कर रख दिया है। रविवार (28 मई, 2023) की रात साहिल सरफराज खान नाम के सिरफिरे ने दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके में नाबालिग साक्षी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। हत्या के अगले ही दिन पुलिस ने उसे यूपी के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया था। हत्या की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इसमें देखा जा सकता है कि साहिल ने साक्षी पर 20 से ज्यादा बार चाकू से हमला किया। उसके बाद कई बार पत्थर से उसे कुचलता रहा।

दिल्ली पुलिस हत्या मामले की जाँच ‘लव जिहाद’ के एंगल से भी कर रही है। इस बीच ऑपइंडिया की टीम मौका-ए-वारदात पर पहुँची। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि क्या साक्षी को साहिल के मुस्लिम होने की बात पता चल गई थी और इसी विवाद की वजह से उसे मार डाला गया? पहले की रिपोर्टों में यह सामने आ चुका है कि साहिल अक्सर हाथ पर कलावा बाँधता था और साक्षी उसे एक हिंदू समझती थी। हत्या से ठीक एक दिन पहले दोनों का किसी बात को लेकर जम कर झगड़ा हुआ था।

इस मर्डर केस को कवर कर रहे देव सिंह नाम के स्थानीय पत्रकार ने भी इस संबंध में ऑपइंडिया से बातचीत की। ‘तेज़ टी24’ न्यूज़ के लिए काम करने वाले देव सिंह ने आशंका जताई कि हो सकता है साक्षी को साहिल के मजहब के बारे में जानकारी हो गई हो। इसके बाद साक्षी ने साहिल से दूरी बनाने की कोशिश की होगी। ये बात साहिल को नागवार गुजरी और उसने साक्षी की बेरहमी से हत्या कर दी।

देव आगे बताते हैं कि लड़की के हाथ पर प्रवीण के नाम का टैटू बना हुआ था। हत्या से एक दिन पहले साक्षी और साहिल की जबरदस्त लड़ाई हुई थी। हो सकता है साहिल की असलियत जानने के बाद वह उससे दूरी बनाने की कोशिश कर रही थी और इसलिए यह लड़ाई हुई हो। अगले दिन साहिल ने उसे फोन किया और मिलने के लिए बुलाया लेकिन साक्षी नहीं मानी। 28 मई को जैसा की सीसीटीवी फुटेज में भी देखा जा सकता है, साहिल ने साक्षी को देखा और थोड़ी सी बातचीत के बाद उसे चाकू से गोदना शुरू कर दिया।

बता दें कि पत्रकार देव सिंह मौका-ए-वारदात से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। साक्षी मर्डर केस की पहली रिपोर्टिंग देव ने ही की थी। देव के अनुसार हत्या से 15 दिन पहले ही साहिल ने चाकू खरीद लिया था। हालाँकि, साहिल किसी बात को लेकर साक्षी से बहुत नाराज था। इतना नाराज की उसने 2-3 बार नहीं बल्कि 20 से ज्यादा बार साक्षी पर चाकू से हमला किया। उसके बाद साहिल ने अचेत साक्षी के सिर को पत्थर से कई बार कुचला। वह किसी ड्रग या शराब के नशे में था यह जाँच का विषय है लेकिन फुटेज से इतना तो साफ था कि गुस्से में उसने आपा खो दिया था।

देव सिंह ने ‘लव जिहाद’ पर कहा कि साहिल जैसे हजारों लोग स्लीपर सेल्स की तरह काम करते हैं, जिनका पहला मकसद हिंदू लड़कियों को फँसाना है। उसके बाद वे उनके साथ अलग-अलग तरह की ज्यादतियाँ करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें उनकी सच्चाई पता चलने या इस्लाम न कबूलने पर हत्या कर दी जाती है।

पत्रकार ने कहा कि आरोपितों में दिल्ली पुलिस का डर नहीं है। पीड़ित परिवार वाले आरोपितों से डरते हैं। उन्हें डर लगता है कि यदि उन्होंने आरोपितों के खिलाफ मुँह खोला तो उन्हें भी मार दिया जाएगा। ऐसे मामलों में दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लोग भी दबाव बनाकर मीडिया को दूर रखने की कोशिश करते हैं।

नाले में पड़ी थी साक्षी की आधी बॉडी

देव सिंह बताते हैं कि उन्हें फोन पर पता चला कि इलाके में एक लड़की की हत्या कर दी गई है। इसके ठीक 10 मिनट के बाद वे मौके पर पहुँचे। देव ने देखा कि साक्षी का शव आधा सड़क किनारे वाले नाले में और आधा सड़क पर पड़ा हुआ था। तब तक दिल्ली पुलिस घटनास्थल पर पहुँच चुकी थी। शुरुआत में दिल्ली पुलिस मीडिया के सवालों से बचने की कोशिश कर रही थी। हत्या की खबर सुनने के फौरन बाद साक्षी की दोस्त मौके पर पहुँचे थे।

उस समय उन लोगों ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हो सकता है वे साहिल से डर रहे हों क्योंकि उस वक्त तक साहिल गिरफ्तार नहीं हुआ था। साक्षी की दोस्त नीतू पहले ही बता चुकी है कि किसी बात को लेकर कई दिनों से साक्षी और साहिल का झगड़ा चल रहा था। जबकि साक्षी की एक अन्य दोस्त आरती का ने खुलासा किया है कि वह साहिल को हिंदू के तौर पर जानती थी।

साहिल की गिरफ्तारी के बाद नीतू ने तोड़ी चुप्पी

साहिल की गिरफ्तारी के बाद नीतू ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात की। उसने बताया कि एक मामले में उसके पति जेल में हैं। इसलिए साक्षी अक्सर उसके घर पर रहा करती थी। साक्षी, साहिल को तीन चार सालों से जानती थी। नीतू ने बताया कि रविवार की रात साक्षी उसके बेटे के जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने के लिए आई हुई थी। इस मौके पर उनकी दोस्त आरती भी आने वाली थी।

रास्ते में वह अपनी दोस्त आरती का इंतजार कर रही थी। उसी वक्त साहिल वहाँ आ धमका और दोनों के बीच कहासुनी होने लगती है। इसके बाद साहिल हत्या के इरादे से साक्षी पर ताबड़तोड़ हमला कर देता है। वह साक्षी पर तब तक चाकू चलाता रहा जब तक वह अचेत हो कर गिर नहीं गई। इसके बाद उसने पास रखे पत्थर से उसके सर पर कई बार हमले किए। इससे साक्षी की खोपड़ी फट गई।

‘हिटलर युग की ओर बढ़ रहा देश’: लिबरल गिरोह की फ़िल्में फ्लॉप होने पर भड़के नसीरुद्दीन शाह, ‘The Kerala Story’ को कह दिया प्रोपेगंडा

लव जिहाद और धर्मांतरण पर आधारित फिल्म केरल स्टोरी (The Kerala Story) देश ही नहीं, दुनिया भर में सराही जा रही है और बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई भी कर रही है। हालाँकि, कट्टरपंथी इस इसकी सच्चाई को पचा नहीं पा रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Nasiruddin Shah) ने कहा कि यह फिल्म एक प्रोपोगेंडा है। इसलिए इसे देखने का उनका कोई इरादा नहीं है।

IndiaToday.in के साथ खास बातचीत में नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “भीड़, अफ़वाह, फ़राज़ जैसी सार्थक फ़िल्में धराशायी हो गईं। कोई भी उन्हें देखने नहीं गया, लेकिन लोग केरल स्टोरी देखने के लिए जा रहे हैं। मैं इसे देखने का इरादा नहीं रखता, क्योंकि मैंने इसके बारे में काफी कुछ पढ़ा है। ये खतरनाक चलन है।”

नसीरुद्दीन ने कहा, “यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, इसमें कोई संदेह नहीं है। ऐसा लगता है कि हम नाजी जर्मनी की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ हिटलर के समय में फिल्म निर्माताओं को सर्वोच्च नेता हिटलर द्वारा उस समय के फिल्ममेकर्स को ऐसी फिल्में बनाने के लिए कहा जाता था, जिसमें उसकी तारीफ हो और यहूदियों को नीचा दिखाया जाए।”

भाजपा सरकार, संघ और पीए मोदी पर परोक्ष रूप स कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कई सारे दिग्गज फिल्ममेकर्स ने जर्मनी छोड़ दिया और वो हॉलीवुड आ गए। यहाँ पर वे फिल्में बनाने लगे थे। यहाँ भी कुछ ऐसा ही होता नजर आ रहा है। या तो सही पक्ष में रहें, तटस्थ रहें या सत्ता समर्थक रहें।”

बदलाव की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि नफरत का यह माहौल थका देने वाला हो जाएगा। कब तक नफरत फैलाते रहोगे? मैं सोचता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि जिस तरह से इसने अचानक हम सबको अपनी चपेट में ले लिया है, उसी तरह गायब हो जाएगा। हालाँकि, ऐसा जल्द नहीं होगा।”

बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुस्लिमों से नफरत करना आज फैशन बन गया है। उन्होंने कहा था, “पढ़े-लिखे लोगों में भी मुस्लिमों से नफरत करना आजकल फैशन बन गया है। सत्ताधारी दल ने बहुत चतुराई से इसका इस्तेमाल किया है। हम सेक्युलर लोग लोकतंत्र की बात करते हैं तो आप हर चीज में धर्म का परिचय क्यों दे रहे हैं?”

इसी तरह मुगलों की तरफदारी करते हुए उन्होंने कहा था कि नादिर शाह और तैमूर जैसे लोग यहाँ लूट के लिए आए थे। मुगल यहाँ लूट-मार करने नहीं, बल्कि बसने आए थे। उनके योगदान को कौन नकार सकता है? उन्होंने कहा कि मुगलों को हर बात के लिए दोषी ठहरा देना इतिहास के साथ इंसाफ नहीं होगा।

जहाँ साहिल खान ने की साक्षी की हत्या, वहाँ AAP पार्षद ने चुनाव जीत बनवाई थी अवैध मजार… मंदिर बनाने पर रोक: स्थानीय लोगों की आपबीती

दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके में रविवार (28 मई 2023) को साहिल खान नामक युवक ने 16 वर्षीय साक्षी की निर्मम हत्या कर दी थी। साहिल ने साक्षी पर चाकू से इतने वार किए थे कि गर्दन से लेकर पेट तक कुल 16 बड़े कट-मार्क पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आए। इससे उसकी आँतें बाहर निकल आईं थीं। चाकू से हमले के बाद साहिल ने पास पड़े कॉन्क्रिट स्लैब से भी बार-बार साक्षी के सिर पर वार किया था। इससे उसका सिर बुरी तरह टूट गया था।

ऑपइंडिया ने ग्राउंड पर जाकर वहाँ के हालातों का जायजा लिया। इस हत्या के पीछे का मकसद, फिलहाल के हालात, आस-पास की जानकारी और दिल दहला देने वाले वीडियो से प्रभावित हुए स्थानीय लोगों से बातचीत करना हमारी प्राथमिकता थी।

स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए हम सबसे पहले जा रहे थे उस जगह पर, जहाँ साक्षी की हत्या हुई थी। वहाँ तक पहुँचने से पहले हमें तमाम मीडियाकर्मी बड़े-बड़े कैमरों के साथ एक जगह बैठे दिख गए। पूछने पर पता चला कि वो आम आदमी पार्टी के विधायक का ऑफिस है। वहाँ किसी नेता-विधायक के ऑफिस जैसा बोर्ड-बैनर वगैरह हालाँकि कुछ नहीं लगा हुआ था। बाद में इसके पीछे की भी कहानी पता चली।

जहाँ साक्षी की हत्या की गई, वहाँ मामला शांत था। एक-दो यूट्यूबर थे, वीडियो बना रहे थे। मुख्यधारा की मीडिया दूर बैठी थी। घटना वाली जगह और आम आदमी पार्टी के विधायक का ऑफिस महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों के बीच एक पार्क है, बिना पेड़ और घास के। पार्क से सटा एक बड़ा सा मजार भी है। यहीं हमें एक स्थानीय निवासी मिल गए। दलीप कुमार है उनका नाम।

ऑपइंडिया ने साक्षी की हत्या को लेकर दलीप कुमार से बात की है। इस बातचीत में हमने उनसे हत्या वाली जगह से करीब 50 मीटर की दूरी पर स्थित एक पार्क और उससे सटे मजार को लेकर सवाल किया। इस पर दलीप ने कहा:

“पार्क में पहले मजार नहीं थी। 10-15 साल पहले यहाँ मजार के नाम पर कुछ ईंटों से घेरा किया गया था। इसके बाद 5-7 साल पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद जय भगवान उपकार (जो अब वर्तमान में विधायक हैं) ने यहाँ से जीतने के बाद सबसे पहले मजार की छत डलवाई। जब हिंदुओं ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने इस पर रोक लगाने की जगह हिंदुओं को ही फटकार लगा दी।”

दलीप कुमार के अनुसार आम आदमी पार्टी और केजरीवाल इस तरह की राजनीति को सह देते हैं। ऐसी राजनीति में मुस्लिम-हितों का साधा जाता है, हिंदुओं को नजरअंदाज किया जाता है। अगर हिंदू विरोध करते हैं तो उनको धमकाया भी जाता है।

पार्क की जमीन पर अवैध मजार, मंदिर को अभी भी छत का इंतजार

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दलीप ने बताया, “पार्क के बगल में ही सड़क किनारे पीपल के पेड़ के नीचे एक देवी की मूर्ति थी। स्थानीय हिंदू वहाँ पूजा करते थे। मजार बनने के बाद विरोध-स्वरूप जब हिंदुओं ने मूर्ति की जगह पर मंदिर बनाने की कोशिश की तो उसका निर्माण-कार्य रुकवा दिया गया। आधे-अधूरे मंदिर में अभी भी मूर्तियाँ विराजमान हैं, लेकिन मंदिर नहीं बनने देते।”

स्थानीय विधायक के बोर्ड-बैनर गायब क्यों?

जिस स्थान पर साक्षी की हत्या की गई, उससे महज 200 मीटर की दूरी पर यहाँ के आम आदमी पार्टी विधायक जय भगवान उपकार का कार्यालय है। दलीप कुमार के अनुसार विधायक ऐसे नेता हैं, जो साक्षी के अंतिम संस्कार में भी नहीं गए। विधायक के मुख्य कार्यालय के बाहर से बोर्ड-बैनर क्यों हटा हुआ है, इस पर दलीप ने जो बताया, वो चौंकाने वाला है:

“हत्या से पहले विधायक कार्यालय के बाहर बोर्ड लगे हुए थे। लेकिन अगली ही सुबह बोर्ड हटा दिए गए। ताकि लोगों को यह न लगे कि विधायक के कार्यालय के पास हत्या हुई है।”

बता दें कि रविवार (28 मई 2023) को साक्षी अपनी दोस्त नीतू के बेटे के जन्मदिन में शामिल होने जा रही थी। तभी घात लगाए साहिल ने उसे रोक लिया। इसके बाद उसके पेट में ताबड़तोड़ चाकू बरसाने लगा। लगातार हुए हमले से साक्षी बुरी तरह घायल हो गईं और जमीन पर गिर गईं। इसके बाद भी साहिल नहीं रुका और वह जमीन पर पड़े कॉन्क्रिट स्लैब को उठाकर उनके सिर पर पटकने लगा। पेट पर चाकू के हमले और सिर पर कई बार पत्थर लगने से उनकी मौत हो गई।

यह भी जानने लायक बात है कि साक्षी की हत्या अचानक नहीं हुई। साहिल कई दिनों से इसकी साजिश रच रहा था। सिर्फ साक्षी ही नहीं, बल्कि उसने 5 लोगों की हत्या का प्लान बना रखा था। साक्षी के साथ-साथ उसके पुरुष दोस्तों को भी खत्म करने की साजिश थी। उस दिन उसे रास्ते में इन पाँचों में से जो भी मिलता, उसकी वो हत्या कर देता। साक्षी और उसके दोस्त इन्हीं रास्तों से आते-जाते हैं, ये भी उसने रेकी कर रखा था। उसने गाँजा और शराब का भी सेवन कर रखा था।

अहमदनगर नहीं, अब अहिल्यानगर कहिए… महाराष्ट्र सरकार ने मिटा दी निज़ाम शाही की निशानी, महारानी की जयंती पर फैसला

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra CM Eknath Shinde) ने बुधवार (31 मई 2023) को कहा कि अहमदनगर (Ahmednagar) जिले को अहिल्या बाई होलकर के नाम पर अहिल्यानगर (Ahilyanagar) के रूप में जाना जाएगा।

सीएम शिंदे ने इसकी घोषणा एक कार्यक्रम में की। इस कार्यक्रम में इस महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Dy CM Devendra Fadnavis), महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधायक गोपीचंद पाडलकर सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

अहमदनगर के चोंडी में आयोजित 18वीं सदी में मालवा के होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई होलकर की 298वीं जयंती के अवसर पर सीएम शिंदे ने यह घोषणा की। निजामशाही के अंतर्गत आने के कारण निजामों ने इस शहर का नाम बदल दिया था और इसका नाम अहमदनगर रख दिया था।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे कहा, “यह फैसला राज्य सरकार ने लिया है और मुझे गर्व है कि देवेंद्र जी (देवेंद्र फडणवीस) और मैं दोनों इस ऐतिहासिक क्षण के हिस्सा बने हैं।” देवेंद्र फडणवीस ने भी इस निर्णय पर खुशी जाहिर की।

बता दें कि अहमदनगर इस साल का तीसरा शहर है, जिसका नाम बदला गया है। इसके पहले फरवरी 2023 में महाराष्ट्र की सरकार ने औपचारिक रूप से औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव कर दिया था।

बताते चलें कि अहमदनगर का नाम बदलने की माँग लंबे समय से की जा रही थी। महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने दिसंबर 2022 में विधान परिषद को बताया था कि अहमदनगर जिले का नाम बदलकर पुण्यश्लोक अहिल्यानगर करने के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव माँगा गया है।

इसके पहले भाजपा नेता गोपीनाथ पाडलकर ने अहमदनगर का नाम बदलने के लिए एक पत्र लिखा था। उस पत्र में कहा गया था कि अहिल्याबाई होलकर का जन्म अहमदनगर के चौंडी गाँव में हुआ था। इसलिए इस गाँव का नाम उनके नाम पर होना चाहिए।

9वीं की छात्रा के अपहरण का प्रयास, उत्तरकाशी में सड़क पर उतरा आक्रोशित हिन्दू समाज: रातोंरात फरार हुए 42 मुस्लिम दुकानदार

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला इलाके में एक नाबालिग हिंदू छात्रा के अपहरण का प्रयास किए जाने के बाद बवाल मचा हुआ है। छात्रा पुरोला बाजार के ही एक दुकानदार की बेटी है। मामले को लव जिहाद से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मई, 2023 को 2 युवकों ने छात्रा के अपहरण की कोशिश की थी। इसे लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार (31 मई, 2023) को उवेद खान और उसका साथी जितेंद्र सैनी खरसाड़ी इलाके की रहने वाली कक्षा नौवीं की छात्रा को बहला-फुसला कर अपने साथ ले जा रहे थे। छात्रा पुरोला में अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई करती है। छात्रा को दोनों युवकों के साथ ऑटो रिक्शा पर जाता देख राहगीरों को शक हुआ। उन्होंने रिक्शा रुकवाकर पूछताछ की तो सच्चाई का पता चल सका।

दोनों नौजवानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है। मामला सामने आने के बाद पुरोला और आसपास के लोगों ने मुस्लिम तबके के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों ने आपराधिक किस्म के बाहरी लोगों पुरोला छोड़कर जाने की चेतावनी दे दी। मंगलवार (30 मई ) को भी स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और सड़कों पर रैली निकाली।

आरोपित युवक इलाके के कुमोला रोड पर दुकानें चलाते हैं। प्रदर्शन कर रहे पुरोला के स्थानीय लोगों ने अपराधिक किस्म के बाहरी लोगों को जल्द से जल्द पुरोला छोड़ने की चेतावनी दी है। इस संबंध में लोगों ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर अपराधिक किस्म के व्यापारियों व अन्य लोगों को तत्काल हटाने की माँग की है। लोगों की नाराजगी को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के 42 दुकानदार अपनी दुकानें छोड़कर रातों रात फरार हो गए हैं।

वीएचपी के स्थानीय नेता वीरेंद्र रावत ने का कहना है कि पुरोला में बाहर से आकर मुस्लिम समुदाय के लोग दुकानें खोलते हैं और मजदूरी करते हैं। इसके साथ-साथ वे स्थानीय लोगों का खासकर हिंदू युवतियों का ब्रेन वॉश करते हैं। उन्होंने बाहरी लोगों के पुलिस सत्यापन पर जोर दिया। स्थानीय लोगों ने सोमवार (29 मई) को एसडीएम देवानंद शर्मा से मुलाकात कर गैर-स्थानीय लोगों के पुलिस वेरिफिकेशन की माँग की।

वहीं उत्तरकाशी के एसपी अर्पण यदुवंशी ने वीडियो जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि नाबालिग लड़की के अपहरण की कोशिश करने वाले दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। मामले में अनावश्यक और भ्रामक खबरें न फैलाई जाए। कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करें।

‘ज्ञानवापी ढाँचे की जगह भव्य शिव मंदिर जल्द’: इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका, खारिज की आपत्ति

श के विभिन्न धार्मिक स्थलों को मुक्त कराने के लिए अदालत में लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे की जगह पर भव्य शिव मंदिर बनेगा। बताते चलें कि ज्ञानवापी ढाँचा (Gyanvapi Masjid) मामले में भी हरिशंकर जैन (Hari Shankar Jain) हिंदू पक्ष के वकील हैं। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (31 मई 2023) को ढाँचा परिसर में स्थित माता श्रृंगार गौरी पूजा को लेकर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया।

भगवान विश्वेश्वर के मंदिर को तोड़कर मुगल आक्रांता औरंगजेब (Mughal Invader Aurangzeb) द्वारा बनवाए गए ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वकील जैन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब वर्तमान ढाँचे को हटा दिया जाएगा और हम (हिंदू समुदाय) वहाँ एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करेंगे।”

वकील हरिशंकर जैन ने कहा, “353 साल से हिंदू जनता संघर्ष कर रही है और चाहती है कि वहाँ से ढाँचा हटे और भगवान भोलेनाथ प्रकट हों। वहाँ भगवान भोलेनाथ प्रकट हो गए हैं। उनकी भी साइंटिफिक जाँच होगी और मालूम पड़ जाएगा कि वहाँ पर शिवजी हैं।ठ

ज्ञानवापी ढाँचे की जाँच को लेकर उन्होंने आगे कहा, “हमने पूरे-के-पूरे परिसर की वैज्ञानिक जाँच के लिए प्रार्थना-पत्र दिया है और उससे साबित हो जाएगा कि पूरा परिसर हिंदुओं का है। भगवान भोलेनाथ चाहते हैं कि मंदिर बने और हम उसी तरफ आगे बढ़ रहे हैं।”

बताते चलें कि वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में ही माता श्रृंगार स्थित हैं। इनकी पूजा करने को लेकर राखी सिंह के नेतृत्व में 5 महिलाओं ने कोर्ट से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, मस्जिद पक्ष से जुड़े अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इसका विरोध करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) ने याचिका दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया।

इस अर्जी के खारिज होते ही माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली अर्जी पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। अब वाराणसी की जिला कोर्ट माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करेगी।हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्ष के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने इस मामले में 23 दिसंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिसंबर में ही इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने जिला जज वाराणसी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी अर्जी में कहा था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के उपबंधों के तहत अदालत को वाद सुनने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कमेटी की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

दरअसल, रेखा सिंह एवं अन्य महिलाओं ने माता श्रृंगार गौरी की हर दिन पूजा करने की इजाजत कोर्ट से माँगी थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर परिसर का सर्वे हुआ था। सर्वे के दौरान ढाँचे के तहखाने में कई हिंदू प्रतीक मिले। इसके साथ ही एक शिवलिंग भी मिला। मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता आ रहा है।

इसके बाद 18 अगस्त 2021 को इन महिलाओं ने ज्ञानवापी परिसर में माता श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान समेत मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत माँगने के लिए कोर्ट पहुँची। अभी यहाँ साल में एक बार ही पूजा होती है। अब हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज होने के बाद परिसर में स्थित भगवानों की नियमित पूजा पर सुनवाई होगी।

प्रवासी बनकर आए मुस्लिम और बदल दी स्पेन की डेमोग्राफी: 30 साल में 10 गुना बढ़े, ग्रैंड मस्जिद में हर जुमे हो रहा धर्मांतरण; इबादतगाह 2000 के पार

पिछले 30 वर्षों में स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 10 गुना बढ़ गई है। ये जानकारी खुद स्पेन के ही ‘सेक्रेटरी ऑफ द इस्लामिक कमीशन’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम यूरोप के इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 25 लाख के पार चली गई है। मोहम्मद अजाना ने ‘Anadolu’ मीडिया संस्थान को बताया कि अनाधिकारिक आँकड़ों की मानें तो स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 30 लाख के भी पार चली गई है।

उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिमों की जनसंख्या में अधिकतर प्रवासी ही होते थे, लेकिन अब मुस्लिम समुदाय स्पेन के नागरिकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। 10 लाख से अधिक मुस्लिम स्पेन के नागरिक हैं, बाकियों में प्रवासी और स्पेनिश मूल के मुस्लिम शामिल हैं। मोरक्को, पकिस्तान, बांग्लादेश, सेनेगल और अल्जीरिया के कई मुस्लिमों ने स्पेन को अपना ठिकाना बनाया है। स्पेन के अधिकतर मुस्लिम वहाँ के औद्योगिक इलाकों में रहते हैं, जैसे – कैटेलोनिया, वालेंसिया, आंदालुसिया और मैड्रिड।

ये जानकारी भी दी गई है कि स्पेन में फ़िलहाल 53 मुस्लिम संगठन हैं और मस्जिदों की संख्या 2000 के पार चली गई है। साथ ही 40 कब्रिस्तान भी हैं। हालाँकि, मोहम्मद अजाना ने कहा कि मस्जिदें वगैरह बनाने के लिए लाइसेंस मिलने में समस्या आती है। स्पेन के आंदालुसिया इलाके में तो हर शुक्रवार (जुमे के दिन) कोई न कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाता है। धर्मांतरण की इस प्रक्रिया को ‘शहादा’ कहा जाता है। आंदालुसिया स्थित ग्रैंड मस्जिद में जुमे के दिन कलमा पढ़वा कर इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।

इस मस्जिद में तो एक पादरी ने ही इस्लाम कबूल कर लिया। ‘स्पेनिश इस्लामिक सोसाइटी एसोसिएशन’ और ‘ग्रानाडा ग्रैंड मॉस्क फाउंडेशन’ के अध्यक्ष उमर देल पोजो ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान धर्मांतरण में तेज़ी आई थी। उन्होंने इसे खुश करने वाला और गौरव करने वाली घटना करार दिया। ग्रानाडा में 36,000 मुस्लिम हैं, जिनमें से 3700 धर्मांतरित हैं। मस्जिद में धर्मांतरण के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आती रहती हैं।

प्रेशर कुकर में 10 किलो IED रखकर घुस रहे थे आतंकी, फायरिंग के बाद पकड़े गए: भारी मात्रा में हथियार और ₹100 करोड़ की ड्रग्स भी बरामद

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना ने तीन आतंकियों को पकड़ा है। ये खराब मौसम और बारिश का फायदा उठाकर 30 मई 2023 की रात करमारा सेक्टर से घुसपैठ कर रहे थे। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार, 10 किलो आईईडी और हेरोइन के 20 पैकेट बरामद हुए हैं। आईईडी ये प्रेशर कुकर में लेकर आ रहे थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर के पुंछ के करमारा सेक्टर में LOC पर संदिग्ध गतिविधि नजर आई। इसके बाद जवानों ने तड़के करीब 4 बजे सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सेना के जवानों को देख घुसपैठ कर रहे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की। इस दौरान एक आतंकी के पैर में चोट लगी। वहीं सेना का एक जवान भी घायल हो गया।

सर्च ऑपरेशन के बाद सेना और पुलिस के जवानों ने तीनों आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान मोहम्मद रियाज, मोहम्मद फारूक और मोहम्मद जुबैर के रूप में हुई। इनमें से मोहम्मद फारूक घायल है। तीनों आतंकी करमारा के ही बताए जा रहे हैं। आतंकियों के पास से पुलिस ने एके-56 राइफल, 2 पिस्टल, 2 पिस्टल की मैग्जीन, 6 चीनी ग्रेनेड, हेरोइन के 20 पैकेट और प्रेशर कुकर में बंद 10 किलो आईईडी बरामद किया है। बरामद की गई हेरोइन की कीमत 100 करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है। वहीं, आईईडी को सेना के बम निरोधक दस्ते ने डिस्पोज (निष्क्रिय) कर दिया है।

सेना के अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल ऐसा माना जा रहा है तीनों आतंकियों को बॉर्डर पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स की खेप मिली थी। वे इसकी तस्करी कर भारत लाने की कोशिश में जुटे हुए थे। दो आतंकियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, घायल होने के चलते तीसरे आतंकी को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

पुष्कर में ब्रह्मा जी की पूजा-अर्चना, अजमेर में गिनाए नव-निर्माण के कार्य: राजस्थान की रैली में बोले PM मोदी- कॉन्ग्रेस 85% कमीशान खाने वाली पार्टी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती की, पुजारियों से मंदिर को लेकर बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने एक अजमेर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने देवी अहिल्याबाई होल्कर की जन्म-जयंती पर उन्हें याद करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के कार्यों के लिए देश के लोगों को कर्तव्य-पथ की दिशा दिखाने के लिए देवी अहिल्याबाई होल्कर को देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने पुष्कर में जन-कल्याणकारी नीतियों के लाभार्थियों से भी बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर में दर्शन करने के अनुभव की भी बात की। इसे सौभाग्य बताते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता कहा गया है, उनके आशीर्वाद से ही आज भारत में नव-निर्माण का दौर चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार के 9 साल भी पूरे हो गए हैं और ये 9 साल देशवासियों की सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए समर्पित रहे हैं।

पीएम मोदी ने इस दौरान जनता को ये भी बताया कि 2014 से पहले देश की क्या स्थिति थी, जैसे – पूरे देश में जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़क पर उतरी हुई थी, कॉन्ग्रेस सरकार सीमा पर सड़कें बनाने से भी डरती थी, बड़े-बड़े शहरों में आए दिन आतंकी हमले होते थे, प्रधानमंत्री के ऊपर सुपरपावर थी और कॉन्ग्रेस सरकार रिमोट कंट्रोल से चला करती थी। उन्होंने बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस की नीति रही है- गरीबों को भरमाओ, गरीबों को तरसा, जिसका राजस्थान के लोगों ने भी बहुत बड़ा नुकसान उठाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज देखिए, पूरी दुनिया में भारत का यशगान हो रहा है। दुनिया के बड़े एक्सपर्ट्स ये बोल रहे हैं कि भारत अति गरीबी को समाप्त करने के बहुत निकट है। कॉन्ग्रेस ने वीरों के साथ भी हमेशा धोखा किया है। ये कॉन्ग्रेस ही है जो ‘वन रैंक वन पेंशन’ के नाम पर हमारे पूर्व सैनिकों से विश्वासघात करती रही। भाजपा सरकार ने ना सिर्फ ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया बल्कि पूर्व सैनिकों को एरियर भी दिया।”

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में विकास के काम के लिए पैसे की कमी कभी भी नहीं रही है, लेकिन ये बहुत जरूरी होता है कि जो पैसा सरकार भेजे वो पूरा का पूरा विकास के कार्यों में लगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस ने अपने शासन में देश का खून चूसने वाली ऐसी भ्रष्ट व्यवस्था बना दी थी, जो देश के विकास को खाए जा रही थी। उन्होंने याद किया कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भी माना था कि कॉन्ग्रेस सरकार 100 पैसे भेजती है तो उसमें से 85 पैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते थे।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस को हर योजना में 85% कमीशन खाने वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि जब लूट की बात होती है तो कॉन्ग्रेस किसी में भेदभाव नहीं करती है और इस पार्टी ने देश के हर नागरिक को – गरीब, शोषित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग सबको समान भाव से लूटती है। उन्होंने कहा कि देश की हर सफलता के पीछे भारत के लोगों की मेहनत है, भारत के लोगों का पसीना है। ये भारत के लोग ही हैं जिन्होंने महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।

पीएम मोदी ने कहा, “ये भारत के लोग ही हैं, जिनकी वजह से आज दुनिया कह रही है कि ये दशक भारत का दशक है, ये सदी भारत की सदी है। भारत को नया संसद भवन मिला है, लेकिन कॉन्ग्रेस ने भारत के गौरव के इस क्षण को भी अपने स्वार्थी विरोध की भेंट चढ़ा दिया। इस पार्टी ने 60 हज़ार श्रमिकों के परिश्रम का, देश की भावनाओं और आकांक्षाओं का अपमान किया है। बता दें कि राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।