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वो दोस्ती का वास्ता देकर गिड़गिड़ाती रही, साहिल करता रहा वार: साक्षी ही नहीं कुल 5 लोगों की हत्या का था प्लान, सुबह से गाँजा-शराब ले रहा था हत्यारा

दिल्ली के रोहिणी स्थित शाहबाद डेयरी के पास साक्षी नाम की 16 वर्षीय लड़की की हत्या की खबरें सुर्ख़ियों में है। साहिल ने कैसे न सिर्फ उसे कई बार चाकुओं से गोदा जिससे उसकी आँतें बाहर निकल आईं, बल्कि उसने एक बड़ा पत्थर उठा कर उसका सिर भी कुचल डाला। घटना के CCTV वीडियोज भी सामने आए हैं। ये अचानक हुई हत्या नहीं है, बल्कि साहिल पिछले 3-4 दिन से इसकी साजिश रच रहा था। सिर्फ साक्षी ही नहीं, बल्कि उसने 5 लोगों की हत्या का प्लान बना रखा था।

साक्षी के साथ-साथ उसके पुरुष दोस्तों को भी खत्म करने की साजिश थी। रविवार (28 मई, 2023) को उसे रास्ते में जो भी इन पाँचों में से मिलता उसकी वो हत्या कर देता। साक्षी और उसके दोस्त इन्हीं रास्तों से आते-जाते हैं, ये भी उसने रेकी कर रखा था। वो उस दिन सुबह से चाकू लेकर घूम रहा था। सुबह 11 बजे उसने गाँजा और शराब का भी सेवन किया था। वो बीच-बीच में नशीले पदार्थ ले रहा था। हत्या के समय भी वो नशे में धुत था।

पूछताछ में साहिल ने बताया कि साक्षी दोस्ती का वास्ता देकर उस पर हमला न करने को कह रही थी, लेकिन वो लगातार वार करता रहा। हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू उसने हरिद्वार से खरीदा था। CCTV फुटेज में वो एक युवक से बात करते हुए भी दिखा था, जिससे पूछताछ होगी। हालाँकि, चूँकि साहिल पहले उसी इलाके में रहता था इसीलिए लोगों से उसकी जान-पहचान थी। रिठाला जाते समय उसने गुप्ता कॉलोनी में हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू फेंका।

रात भर साहिल सड़क पर सोया रहा, जिसके बाद वो बुलंदशहर स्थित अटरेनी गाँव पहुँचा, जहाँ उसकी बुआ रहती है। साहिल के मनोवैज्ञानिक परीक्षण की भी तैयारी है। उसके सोशल मीडिया हैंडल्स को पुलिस खँगाल रही है। साहिल ने साक्षी की एक झबरू (असली नाम अजय) नामक लड़के से नजदीकी की बात कही है, जिस पर अजय ने कहा कि वो खुद मरेगा ही और अब फँसाने के लिए उसका नाम ले रहा। बकौल अजय, उसने सिर्फ साहिल को समझाया था कि लड़की को प्रताड़ित मत करो।

13वीं सदी का मस्जिद तोड़ रहा चीन, पत्थरबाजों की कुटाई भी: सोशल मीडिया में Video वायरल, प्रदशर्नकारी मुस्लिमों को सरेंडर का अल्टीमेटम

मुस्लिमों की मजहबी और सांस्कृतिक पहचान मिटाने पर अमादा चीन के निशाने पर अब 13वीं सदी की एक मस्जिद है। युन्नान प्रांत के नागू कस्बे स्थित नाजियिंग मस्जिद की गुंबद और मीनारों को गिराने की कोशिश का विरोध हो रहा है। इसके वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हैं। लेकिन उम्माह के ठेकेदार बनने वाले इस्लामी मुल्कों ने इस पर चुप्पी साध रखी है।

बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह चीन की पुलिस ने इस मस्जिद में घुसने की कोशिश की। लेकिन उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सैकड़ों की संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए बल प्रयोग भी किया। वायरल वीडियो में पत्थरबाजी करने वालों की पुलिस पिटाई करती भी दिख रही है। कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को सरेंडर का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में नाजियिंग मस्जिद का विस्तार हुआ है। नई मीनारें और गुंबद जोड़े गए हैं। स्थानीय कोर्ट ने इन निर्माणों को अवैध करार देते हुए तोड़ने का आदेश दिया है। इसी के तहत कार्रवाई करने शनिवार (27 मई 2023) को पुलिस पहुँची थी। चीन के युन्नान प्रांत में मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। यह इलाका हुई मुस्लिमों का गढ़ है।

मुस्लिमों के भारी विरोध के चलते पुलिस मस्जिद के अवैध निर्माण नहीं तोड़ पाई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मस्जिद के बाहर पुलिसकर्मियों और मुस्लिमों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। इस दौरान मुस्लिमों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मस्जिद में घुसने की कोशिश कर रही पुलिस पर पथराव भी किया गया।

इस घटना के बाद पुलिस ने रविवार को (28 मई 2023) को एक बयान जारी करते हुए विरोध करने वालों को सरेंडर करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। पुलिस ने कहा है कि जो लोग 6 जून तक खुद से सरेंडर करते हुए अपना बयान दर्ज कराएँगे उन्हें कम सजा दी जाएगी। चीनी अधिकारियों ने इस घटना को कानून-व्यवस्था में बाधा डालने की एक गंभीर कोशिश करार दिया। साथ ही विरोध करने वाले लोगों के बारे में जानकारी देने की जनता से अपील की है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि चीनी पुलिस अब तक विरोध-प्रदर्शन में शामिल दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

बता दें कि इससे पहले साल 2018 में भी चीनी सरकार हुई मुस्लिमों की निंगशिया में स्थित एक मस्जिद को तोड़ना चाहती थी। लेकिन मुस्लिमों के विरोध के बाद सरकार ने कुछ दिनों की शांति पकड़ ली थी। तथा बाद में मीनारों और गुंबदों को तोड़कर उसे चीनी संस्कृति के पगोडा में बदल दिया गया था। इसी तरह अक्टूबर 2021 में चीन के उत्तर-पश्चिमी शहर जिनिंग में स्थित डोंगुआन मस्जिद चीन की कम्युनिस्ट सरकार की शिकार हुई थी। लगभग 700 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक मस्जिद के हरे गुंबदों को नष्ट कर दिया गया था।

ज्ञात हो कि कम्युनिस्ट चीन में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है। साल 2021 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘धर्म का चीनीकरण’ करने की बात कही थी। इसका सीधा मतलब यह है कि चीन धार्मिक आस्थाओं को चीनी संस्कृति और समाज के अनुकूल बनाना चाहता है। 

टिकैत नहीं, मैग्नेट के कारण गंगा में नहीं बहे मेडल: बजरंग-विनेश-साक्षी ने बताई ‘इनसाइड स्टोरी’, कहा- FIR के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

ऐलान 30 मई 2023 की दिन में ही हो गया था। शाम होते-होते दल-बल के साथ बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक हरिद्वार में गंगा तट पर थे। मुहुर्त तय था। शाम के 6 बजते ही मेडल गंगा में बहने थे। लाइव कैमरों के बीच ड्रामा-एक्शन होने को था। लेकिन कहानी सास-बहू की डेली सोप की तरह खिंच गई। मेडल गंगा में नहीं बहे। गोदी मीडिया ने पहले खबर फैलाई कि नरेश टिकैत के इंतजार में मुहुर्त का टाइम निकल गया। फिर दावा कर दिया कि टिकैत के कहने पर मेडल नहीं बहे। पाँच दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। खाप पंचायतों की इमरजेंसी बैठक होनी है। ब्ला ब्ला ब्ला

लेकिन हमसे एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बजरंग, विनेश और साक्षी ने गोदी मीडिया के इन तमाम दावों को फेक न्यूज बताया है। जंतर-मंतर पर अगल-बगल खड़े होकर बारी-बारी से बाइट देने वाले इन पहलवानों ने पहली बार एक साथ किसी मीडिया हाउस को इंटरव्यू दिया है। कहा है कि बृज भूषण शरण सिंह की ‘थैली’ मिलने के बाद गोदी मीडिया झूठी खबर फैला रही है। इन्होंने मेडलों के गंगा में नहीं बहने और मुहुर्त बीत जाने की चौंकाने वाली वजह बताई है! वजह पर आने से पहले आप एक वीडियो देखिए, क्योंकि इस वीडियो को देखे बिना आप को समझ ही नहीं आएगा कि पहलवानों की बातें क्यों और कितनी प्रमाणिक हैं।

करीब ढाई मिनट के इस वीडियो में आपने देखा होगा कि एक व्यक्ति ​हरिद्वार में गंगा जी की धारा में कुछ फेंकता है और बहता हुआ माल खींचता है। हरिद्वार में ऐसा करने वालों की कमी नहीं है। यह जानने के लिए आपको हरिद्वार जाने की जरूरत भी नहीं है। यूट्यूब पर सर्च करेंगे तो ऐसे ढेरों वीडियो मिलेंगे। ये उसी तरह से गंगा में बहती हर चीज को खींच लेते हैं, जैसे पाकिस्तान के वैज्ञानिक कबूतर के पिछवाड़े का इस्तेमाल कर आपके नाभि से हेपेटायटिस का कीड़ा खींच सकते हैं।

हमसे एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में तिकड़ी पहलवान ने बताया कि मैग्नेट फेंककर गंगा की धारा से माल खींचने वालों के कारण ही उनका मुहुर्त बीत गया। दरअसल मैग्नेटबाज गंगा तट पर खड़े थे कि इधर ये मेडल बहाएँ और उधर वे गंगा जी से मेडल खींच लें। ये लोग इस तैयारी में भी थे कि तत्काल इन मेडलों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वे देश के लिए मेडल लाने का दावा कर सकें। फिर उनकी देहरादून से दिल्ली तक जाने की तैयारी थी ताकि जमीन-नौकरी-पैसा सब कुछ हासिल हो सके। तिकड़ी पहलवान को यह खबर भी मिल गई थी कि इनसे मोलभाव के लिए सरकार कमेटी का गठन करने जा रही है। बृज भूषण शरण सिंह भी इन्हें सम्मानित कर फोटो खिंचवाने की तैयारी में थे। यूट्यूबर रवीश कुमार के मार्फत यह सूचना भी आई थी कि मैग्नेटबाजों को उसी जमीन-नौकरी-पैसा में से हिस्सा मिलेगा जो तिकड़ी पहलवान को पूर्व में दी गई थी। अचानक पैदा हुई इन परिस्थितियों की वजह से ही गंगा में मेडल नहीं बहे। तिकड़ी पहलवान का यह भी कहना है कि उनके खिलाफ साजिश कर मैग्नेटबाज खड़े किए गए थे। इस शोषण की एफआईआर दर्ज करवाने वे सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

तिकड़ी पहलवानों ने उस खबर को भी झूठ बताया है, जिसमें कहा गया था कि इनके समर्थन में अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया है कि दरअसल तिहाड़ जेल ने उनसे कहा है कि वे उनके साथ हैं। अपना समर्थन जताने के लिए अब सुशील कुमार को वे तिहाड़ में नहीं रखेंगे, क्योंकि सुशील कुमार ने भी देश के लिए मेडल जीता है। अब जिन्होंने मेडल जीता है उनकी गुंडई का वीडियो हो या फिर उनके आरोपों की पुष्टि करते सबूत न हो, यह मायने नहीं रखता है। मायने यह रखता है कि उन्होंने देश के लिए जीता है। मेडल!!!

मलेशिया ने फिर जब्त किया पाकिस्तान का विमान, लीज का नहीं चुका रहा था पैसा: कंगाली के कगार पर खड़े मुल्क को ‘दोस्त’ ने किया बेइज्जत

कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान को उसके मित्र मुल्क मलेशिया ने फिर से झटका दिया है। पैसे का भुगतान नहीं करने पर उसने पाकिस्तान की सरकारी विमानन कंपनी PIA का बोइंग 777 विमान जब्त कर लिया है। विमान को कुआलालंपुर हवाईअड्डे पर जब्त किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने मलेशिया से बोइंग 777 विमान लीज पर लिया था। कंपनी बार-बार कहने के बाद भी लीज के बकाया का भुगतान नहीं कर रही थी। करीब 40 लाख डॉलर (करीब 33 करोड़ भारतीय रुपए) बकाया है। इसे देखते हुए एक स्थानीय अदालत के आदेश के बाद कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर PIA का विमान जब्‍त कर लिया गया। विमान जब्त होने के बाद PIA को पायलट, एयर होस्टेस व यात्रियों को लाने के लिए एक अन्य विमान कुआलालंपुर भेजना पड़ा।

डेली पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीआईए के एक प्रवक्ता ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा है कि बोइंग 777 विमान का मालिकाना हक PIA के पास है। मलेशिया की कंपनी ने विमान जब्त करने के लिए कोर्ट में झूठे सबूत पेश किए। प्रवक्ता का दावा है कि PIA विमान का किराया चुका है।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब पैसा नहीं देने पर मलेशिया ने पाकिस्तान का विमान जब्त किया है। इससे पहले 2021 में भी ऐसा हुआ था। उस समय कराची से मलेशिया पहुँचे पीआइए के बोइंग विमान में बैठे यात्री और चालक दल को बेइज्जत कर कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर उतार दिया गया था। हालाँकि उस समय पाकिस्तान ने राजनयिक माध्यमों से पैसा चुकाने का भरोसा दिलाते हुए उड़ान की अनुमति हासिल कर ली थी।

गए थे गंगा में मेडल बहाने, नरेश टिकैत को देकर आ गए… पहलवानों से BKU नेता ने कहा – 5 दिन में गिरफ्तार होंगे बृजभूषण सिंह, केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम

दिल्ली में कुछ पहलवानों द्वारा भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण के खिलाफ चलाए जा रहे कथित आंदोलन में अब भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत की एंट्री हो गई है। दरअसल, धरना दे रहे पहलवानों ने विरोध जताते हुए अपने मेडल गंगा में बहाने का फैसला लिया था। पहलवान मेडल ले कर हरिद्वार भी पहुँचे। पहलवानों के हरिद्वार पहुँचने के बाद बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत भी हरिद्वार पहुँछ गए और पहलवानों ने अपने मेडल गंगा में बहाने का फैसला टाल दिया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास नरेश टिकैत ने पहलवानों से उनके मेडल्स और मोमेंटो वाली पोटली ले ली। टिकैत ने केंद्र सरकार को कार्रवाई के लिए 5 दिन का वक्त दिया है। टिकैत का कहना है कि जैसे ही उन्हें पता चला कि देश के लिए पदक जीतने वाले पहलवान अपने मेडल गंगा में प्रवाहित करने वाले हैं वो भी हरिद्वार के लिए निकल गए और पहलवानों से मेडल न प्रवाहित करने का निवेदन किया।

एबीपी न्यूज से बात करते हुए नरेश टिकैत ने कहा, “हमने सिर पर हाथ रखकर उन्हें (खिलाड़ियों को) आश्वासन दिया है कि हम पाँच दिन में सब ठीक कर देंगे। खिलाड़ियों ने मुझसे कहा कि अगर सबकुछ ठीक नहीं हुआ और इंसाफ नहीं मिला तो वो आत्महत्या कर लेंगे। इसपर मैंने कहा कि ऐसी नौबत नहीं आने दी जाएगी।”

बता दें कि पहलवानों ने ऐलान किया था कि वे अपने मेडल गंगा में प्रवाहित कर देंगे। साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट जैसे पहलवान हरिद्वार पहुँच भी जाते हैं। इसे प्रवाहित करने की जगह पहलवान लगभग एक घँटे तक हर की पौड़ी में बैठे रहे और मेडल पकड़े रोते रहे। तब तक बीकेयू अध्यक्ष की एंट्री हो जाती है।

उधर, मेडल बहाने के फैसले पर गंगा समिति ने नाराजगी जताई है। समिति के तरफ से पहलवानों को कहा गया कि हर की पौड़ी पूजा-पाठ की जगह है राजनीति की नहीं।

बता दें कि पहलवानों ने WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। वे उनकी गिरफ्तारी की माँग पर अड़े हुए हैं। इसे लेकर कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। रविवार (28 मई) को पुलिसके साथ हुई झड़प के बाद उन्हें जंतर-मंतर से हटा दिया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक पहलवानों ने पुलिस द्वारा रखी गई शर्तों का पालन नहीं किया। इसलिए अब उन्हें जंतर-मंतर में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

IPL में CSK की जीत के बाद BJP विधायक रीवाबा ने छुए पति रवींद्र जडेजा के पाँव, साड़ी में देख कर गदगद लोगों ने कहा – ये है भारतीय संस्कृति

आईपीएल 2023 का खिताब चेन्नई सुपर किंग्स ने जीत लिया है। बारिश से प्रभावित फाइनल मुकाबले में CSK ने गुजरात टाइटन्स को 5 विकेट से हरा दिया। रोमांचक मुकाबले की आखिरी दो गेंदों पर छक्का और चौका लगाकर रविंद्र जडेजा ने अपनी टीम को जीत दिलाई। इसके बाद मैदान पर पहुँची रिवाबा जडेजा ने रविंद्र जडेजा के पाँव छुए। रविंद्र जडेजा ने उन्हें गले से लगा लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। नेटिजन्स रिवाबा की सादगी की तारीफ करते नहीं थक रहे।

आईपीएल 2023 के फाइनल मुकाबले को जीतने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की एमएलए पत्नी रिवाबा जडेजा साड़ी पहनी नजर आ रही हैं। वे सादगी के साथ अपने पति के पैर छूती हैं। इसके बाद जब रिवाबा और रविंद्र गले मिलते हैं तो उनकी आँखों से खुशी के आँसू भी छलक पड़ते हैं। इस दौरान रिवाबा और रविन्द्र की बेटी भी उनके साथ नजर आई। रिवाबा का यह अंदाज नेटिजन्स को बहुत पसंद आया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर यूजर्स रिवाबा के संस्कार की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

ट्विटर यूजर श्रवण बिश्नोई ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि रविन्द्र जडेजा और उनकी धर्म पत्नी रिवाबा भारतीय संस्कृति और सभ्यता से ओतप्रोत हैं। सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा के अनुसार रिवाबा साड़ी से सर ढक कर अपने पति से आशिर्वाद ले रही हैं।

रिवाबा की तारीफ करते हुए @CricWorld77 नाम के यूजर ने लिखा कि यही भारतीय संस्कृति यही है। कृपया अपने पितृसत्तात्मक ट्वीट्स के साथ कमेंट न करें। यह अपने पति को सम्मान देने का एक तरीका है।

दीपक पहाड़ी नाम के यूजर ने रिवाबा और रविंद्र की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “मर्यादा, संस्कृति, संस्कार, परंपरा ही हमारी पहचान हैं। पहली बार किसी क्रिकेटर की पत्नी को सर पे पल्लू डाल साड़ी पहने स्टेडियम में देखा। जीत हार चलती है। जश्न और दुःख दोनो होते हैं।

यूजर @Ajayrajsinh_GDL ने लिखा, “मर्यादा, संस्कार, खुशी, मुस्कान और जश्न”

55 साल के शख्स ने 9 साल की बच्ची का किया अपहरण, इस्लामी धर्मांतरण करा के कर लिया निकाह: पाकिस्तान में 1 साल में 124 अल्पसंख्यक लड़कियों पर जुल्म

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस महीने की शुरुआत में सिंध प्रांत में 55 साल के एक शख्स ने 9 साल की हिंदू लड़की का उसके घर से अपहरण कर उससे निकाह किया। आरोपित पर नाबालिग का जबरन धर्मांतरण कराने का भी आरोप है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने पाकिस्तान से अपने अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ भयावह अत्याचार की घटनाओं में काफी वृद्धि देखने को मिली है। पाकिस्तान के कब्जे वाले पंजाब के सिंध प्रांत में बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। यहाँ लगातार हिंदू लड़कियों और महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले साल के अंत में सिंध में एक 44 वर्षीय हिंदू महिला की हत्या कर उसके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया गया था। इन घटनाओं से अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल है। इसके अलावा पिछले साल सुक्कुर में अपहरण करने वालों का विरोध करने वाली एक 18 वर्षीय लड़की को मौत के घाट उतार दिया गया था।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले 1 साल में पाकिस्तान से अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों और महिलाओं के जबरन धर्मांतरण व निकाह के 124 मामले सामने आए हैं। पीड़ितों में कई नाबालिग हैं। अल्पसंख्यक समुदायों के कई लोग आज भी डर के साये में रहने को मजबूर हैं। भारत सरकार का मानना है कि पाकिस्तान में स्थानीय पुलिस और अन्य अधिकारियों ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करके उनके डर को और बढ़ा दिया है।

बता दें कि भारत ने इस साल मार्च में UNHRC में लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराकर उनसे निकाह करने वाले मामलों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की थी। भारत सरकार की ओर से कहा गया था कि अल्पसंख्यक समुदायों की कम उम्र की लड़कियों को एक हिंसक देश और एक उदासीन न्यायपालिका द्वारा इस्लाम में कन्वर्ट किया जा रहा है। हिंदू और सिख समुदाय के पूजा स्थलों पर हमलों और उनकी कम उम्र की लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले लगातार सामना आते रहे हैं। इन जघन्य अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने की इच्छा रखने वालों पर देश की कार्रवाई अतुलनीय है।

इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा था कि कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय आज पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से नहीं रह सकता है और न ही अपने धर्म का पालन कर सकता है। अहमदिया समुदाय को केवल अपने धर्म का पालन करने के लिए पाकिस्तान द्वारा सताया जा रहा है। भारत भी सिख समुदाय और हिंदुओं पर हमलों से संबंधित मामलों की निगरानी कर रहा है। पेशावर में पिछले महीने एक सिख दुकानदार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उससे ठीक पहले सिंध में एक हिंदू डॉक्टर की हत्या कर दी गई थी।

दोस्तों के साथ ग्रुप में होता तो साहिल पहनता था कलावा, साक्षी की हत्या के समय नहीं पहना था: देखें CCTV वीडियो और सोशल मीडिया से क्या पता चला

राजधानी दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके में रविवार (28 मई, 2023) की रात साक्षी नाम की एक नाबालिग लड़की की बेरहमी से हत्या कर दी गई। कातिल कोई और नहीं साक्षी का दोस्त साहिल था। हत्या की घटना पास के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इसमें देखा जा सकता है कि साहिल ने साक्षी पर 20 से ज्यादा बार चाकू से हमला किया। उसके बाद कई बार पत्थर से उसे कुचलता रहा। साक्षी के परिजनों का कहना था कि चाकू के हमले से जख्मी साक्षी की आँतें बाहर आ गई थीं। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसकी खोपड़ी फट चुकी थी।

दिल्ली पुलिस ने आरोपित साहिल को यूपी के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी की तस्वीरें भी वायरल हुईं। न्यूज़ एजेंसी ANI द्वारा जारी तस्वीरों में देखा जा सकता है कि साहिल की कलाई पर कलावा (रक्षा सूत्र) बंधा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, साक्षी और साहिल के बीच दोस्ती थी और हत्या से एक दिन पहले दोनों के बीच कहासुनी भी हुई थी। रविवार की रात साक्षी अपनी एक दोस्त के बेटे की जन्मदिन की पार्टी में जा रही थी।

साहिल ने उसका रास्ता रोका और चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वह साक्षी पर तब तक चाकू चलाता रहा जब तक वह अचेत हो कर गिर नहीं गई। इसके बाद उसने पास रखे पत्थर से उसके सर पर कई बार हमले किए। जिससे साक्षी की खोपड़ी फट गई।

साक्षी की हत्या के बाद कई बड़े खुलासे हुए। उनमें से एक बड़ा खुलासा साक्षी की दोस्त ने किया। उसने बाताया कि वह साहिल को हिंदू समझती थी। न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने हत्या से ठीक पहले का एक दूसरा सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है। इसमें हत्यारा साहिल किसी से हाथ लहराते हुए बात करता नजर आ रहा है। दोस्त से बातचीत के बाद वह यहाँ से चला जाता है।

इस वीडियो को गौर से देखने पर पता चलता है कि साहिल ने हत्या से पहले हाथ में कलावा नहीं पहना हुआ था। यहाँ वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट्स हैं (यह एक स्लाइड शो है, कृपया सभी तस्वीरों को देखने के लिए आगे क्लिक करें)।

  • स्क्रीन शॉट

रात का दृश्य होने की वजह से सीसीटीवी फुटेज ज्यादा साफ तो नहीं हैं, लेकिन वीडियो को गौर से देखने और लिए गए स्क्रीनशॉट्स के आधार पर यह कहा जा सकता है कि साक्षी की हत्या से पहले साहिल ने कलावा नहीं बाँधा हुआ था। ANI द्वारा जारी दोनों वीडियो के टाइमस्टैम्प से यह साफ है कि हत्या से पहले जारी वीडियो और हत्या में 1 मिनट से भी कम का फासला है। इतने कम समय में साहिल का कलावा पहनकर आना और फिर साक्षी पर हत्या के इरादे से टूट पड़ना कम संभव है।

एक तरफ सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि हत्या के समय साहिल ने कलावा नहीं पहना हुआ है। दूसरी तरफ गिरफ्तारी के बाद साहिल की तस्वीर देखें तो उसके एक हाथ पर कलावा बँधा हुआ नजर आता है। साहिल को हत्या के अगले दिन (29 मई) को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले तक उसके पास कलावा बाँधने का पर्याप्त समय था।

  • गिरफ्तारी के बाद साहिल की तस्वीर
  • गिरफ्तारी के बाद साहिल की तस्वीर

इन सबके बीच तर्क दिया जा रहा है कि साहिल हमेशा कलावा पहनता है और साक्षी की हत्या से पहले इसे हटा दिया था। क्या साहिल हमेशा कलावा बाँधे रहता है, इस बात की पुष्टि के लिए हमने साहिल के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अपलोड की गई तस्वीरों और रील्स की जाँच की। हमें 2-3 तस्वीरें मिलीं जिसमें उसने कलावा पहना हुआ था। ज्यादातर वीडियो या तस्वीरों में उसने कलावा नहीं पहना हुआ था।

  • कलावा पहने साहिल की तस्वीर
  • कलावा पहने साहिल की तस्वीर
  • कलावा पहने साहिल की तस्वीर

पोस्ट की गई तस्वीरों से पता चलता है कि साहिल कभी-कभार ही कलावा पहना करता था ज्यादातर तब जब वह अपने दोस्तों के ग्रुप में होता था। इससे कई सवाल पैदा होते हैं।

इंस्टाग्राम से ली गई साहिल की तस्वीर

सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर साक्षी की हत्या के बाद उसे कलावा बाँधने की क्या जरूरत पड़ गई?

संभव है कि वह अपनी पहचान छुपाकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था। उसे पता था कि साक्षी की हत्या के बाद उसकी पहचान हो जाएगी। साहिल के परिजनों तक पुलिस पहुँचेगी और पुलिस को पता चल जाएगा कि हत्यारा एक मुस्लिम है जिसका नाम साहिल सरफराज है। साहिल को ऐसा लगा होगा कि कलावा पहनने से उसकी मुस्लिम पहचान छिप जाएगी और वह गिरफ्तारी से बच जाएगा।

हालाँकि अब भी यह स्पष्ट नहीं होता कि पहले वह कलावा क्यों बाँधता था। जैसा कि उसकी इंस्टाग्राम तस्वीरों से पता चलता है। यहाँ हमें ध्यान रखना होगा कि साक्षी की एक दोस्त ने यह कहा है कि वह साहिल को हिंदू समझती थी। हो सकता है साहिल साक्षी या अन्य दोस्तों के बीच जाने से पहले कलावा बाँधता हो ताकि उसके हिंदू होने पर किसी को संदेह न हो। देश में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिसमें मुस्लिमों ने अपनी पहचान छुपाकर हिंदू लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया है। साक्षी की दोस्त के बयान के बाद इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ऑपइंडिया की टीम ने साहिल के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अपलोड एक वीडियो का पता लगाया है। इसमें वॉयसओवर के साथ एक बंदूक लिए हुए शख्स यह कहते हुए दिखाया गया है कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और से डरना शिर्क (गुनाह) माना जाता है। इससे यह साबित होता है कि साहिल मजहब-ए-इस्लाम को ही मानता था।

इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए अटकलबाजी की जा सकती है। सच्चाई पूरी जाँच के बाद ही सामने आ सकती है। बता दें कि साहिल ने साक्षी की हत्या से 15 दिन पहले ही हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू खरीदा था। पुलिस को अंदेशा है कि साक्षी की हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई है। मामले की जाँच लव जिहाद के एंगल से भी की जा रही है।

PM किसान निधि के साथ-साथ अब ‘नमो किसान निधि’: महाराष्ट्र के किसानों को हर साल ₹6000 एक्स्ट्रा सीधे बैंक खाते में, CM एकनाथ शिंदे का ऐलान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। ‘नमो शेतकारी महा सम्मान निधि योजना’ के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपए दिए जाएँगे। ये पहले से चल रही ‘पीएम किसान सम्मान निधि योजना’ के अतिरिक्त होगा। इस तरह महाराष्ट्र के किसानों को अब केंद्र और राज्य सरकार से सालाना 12,000 रुपए मिलेंगे। ताज़ा योजना की राशि भी 3 किस्तों में किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी।

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। बता दें कि महाराष्ट्र में फ़िलहाल ‘बाळासाहेबांची शिवसेना’ और भाजपा की गठबंधन सरकार चल रही है। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस राज्य के उप-मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वित्त मंत्री भी हैं। ताज़ा योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास मूल निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाता का विवरण, आय प्रमण पत्र, जमीनी दस्तावेज, मोबाइल नंबर होना आवश्यक है।

‘नमो शेतकारी महा सम्मान निधि योजना’ का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो महाराष्ट्र के स्थायी निवासी हैं। किसानों के पास खुद की जमीन भी होनी चाहिए, जिस पर वो खेती करते हों। जो महाराष्ट्र के कृषि विभाग में रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जो बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा होगा, पैसा उसमें ही जाएगा। महाराष्ट्र में कपास का उत्पादन करने वाले इलाकों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई टेक्सटाइल नीति को भी मंजूरी दे दी गई है।

इसके जरिए 25,000 करोड़ रुपए का निवेसन आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। नए श्रम नियम को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यों को लेकर उनके हित में नियम बनाए गए हैं। सिल्लोड तालुका में मक्का अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है। महिला केंद्रित पर्यटन नीति बनाई गई है। नई सूचना प्रौद्योगिकी समर्थन सेवा नीति भी लागू हो गई है, जिसके तहत 95,000 करोड़ का निवेश लाया जाएगा।

शुरू से एक्शन लेती रही सरकार, फिर भी राजनीति की गंगा में बहे पहलवान: बृजभूषण बनाम हुड्डा की लड़ाई में मेडल भी दाँव पर लगाया, खेल संघों में दखल नहीं दे सकता मंत्रालय

भारत में पहलवानों के एक वर्ग द्वारा चलाया जा रहा कथित आंदोलन के लिए ज़्यादा से ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश तेज़ हो गई हैं। पहले तो नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन उस तरफ मार्च करने की कोशिश की गई, विफल होने पर गंगा दशहरा के दिन हरिद्वार में मेडल्स बहाने की कोशिश की। आंदोलन ये कह कर किया जा रहा है कि ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों का यौन शोषण किया।

कोई व्यक्ति अगर एक भी महिला का यौन शोषण करता है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और उसे सज़ा दिलाने के लिए पुलिस से लेकर अदालत तक को देर नहीं करनी चाहिए। पुलिस की जाँच में अगर भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह दोषी पाए जाते हैं तो वो कार्रवाई से नहीं बचेंगे। लेकिन, यौन शोषण के आरोप को राजनीति का मुद्दा बनाना भी ठीक नहीं है। ऐसे गंभीर मसले को जंतर-मंतर से नहीं, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा देखा जाता है।

इस मुद्दे को राजनीति का मसला बना कर केंद्र सरकार के खिलाफ बयान देना ये बताता है कि पहलवानों के एक समूह को देश की व्यवस्था में भरोसा ही नहीं है। उन्हें तय कानूनी प्रक्रिया में कोई विश्वास ही नहीं है। खिलाड़ियों ने इस आंदोलन को एकदम राजनीतिक रंग दे दिया है, ऊपर से ‘किसान आंदोलन’ वाले राकेश टिकैत ने भी इनके पक्ष में धरना दे दिया। प्रियंका गाँधी से लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पप्पू यादव तक को पहलवानों के मंच पर जाकर राजनीतिक बयानबाजी करने का मौका दिया गया।

पहलवानों का आंदोलन: केंद्रीय खेल मंत्रालय ने लिया हरसंभव एक्शन

आइए, आगे बढ़ने से पहले बात कर लेते हैं कि ये सब कब से शुरू हुआ। 18 जनवरी, 2023 को पहलवान पहली बार जंतर-मंतर पर जुटे। विनेश फोगाट ने तो WFI अधिकारियों द्वारा हत्या की धमकी मिलने तक की बात कर डाली। उन्होंने तो WFI को भंग करने की माँग करते हुए ये तक कह दिया कि सारे राष्ट्रीय कोच मिले हुए हैं। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, बल्कि हर आरोप को गंभीरता से लिया गया।

अनुराग ठाकुर के केंद्रीय खेल मंत्रालय ने WFI से 72 घंटे में जवाब तलब किया। अगले ही दिन पहलवानों की केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ उनके आवास पर 5 घंटे तक बैठक हुई। बैठक के बाद बजरंग पूनिया ने कहा भी कि सरकार ने हमारे बातें सुनी है। उसी दिन पहलवान से नेता बनीं बबीता फोगाट ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर सरकार तक उनकी बात पहुँचाने का आश्वासन दिया। 20 जनवरी को ‘भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)’ की अध्यक्ष PT उषा को पत्र लिखा गया।

21 जनवरी को पहलवानों की अनुराग ठाकुर के साथ फिर बैठक हुई और आंदोलन को खत्म करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद सरकार ने न सिर्फ WFI को सारी गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया, बल्कि संस्था के अस्सिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को भी पद से हटा दिया। WFI ने मंत्रालय को अपना जवाब भी सौंपा। 23 जनवरी को कमिटी गठित कर दी गई और बॉक्सर मैरी कॉम को इसका अध्यक्ष बनाया गया।

इस समिति में पहलवान बबीता फोगाट और योगेश्वर दत्त भी शामिल थे। इन्हें 4 हफ़्तों में जाँच रिपोर्ट सबमिट करने को कहा गया। अब प्रदर्शनकारी पहलवान कहने लगे कि जाँच समिति भी उनके हिसाब से होनी चाहिए। यानी, सरकार जाँच करने के लिए किन लोगों को चुने ये भी वही तय करेंगे। उधर 23 फरवरी को जाँच समिति को 2 हफ़्तों का समय और दिया गया। इधर 23 अप्रैल को पहलवानों ने अपना प्रदर्शन जंतर-मंतर पर फिर से शुरू कर दिया।

केंद्रीय खेल मंत्रालय इस दौरान भी पहलवानों के आरोपों पर गौर कर के कार्रवाई करता रहा। IOA को कहा गया कि वो WFI को चलाए और अगला चुनाव कराए। साथ ही WFI के आंतरिक चुनाव को भी रद्द कर दिया गया। इस बीच देश भर से कई विपक्षी नेता आंदोलन में पहुँच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयान देते रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर FIR भी दर्ज हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी पहलवानों को लौटा दिया।

अब सवाल उठता है कि इन सबके बावजूद आंदोलनकारी पहलवानों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह को बाधित करने और हरिद्वार में गंगा नदी में मेडल बहाने की योजना क्यों बनाई? इससे तो हमें ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ की याद आने लगी। कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा नवाजे गए कई तथाकथित बुद्धिजीवियों ने 2016 में अवॉर्ड लौटाने शुरू कर दिया थे। नौटंकी इतनी बढ़ गई थी कि टीवी न्यूज़ शो में अवॉर्ड लौटाए जाने लगे थे।

WFI की चुनावी राजनीति: दीपेंद्र हुड्डा बनाम बृजभूषण शरण सिंह

WFI की चुनावी राजनीति की बात करनी भी यहाँ ज़रूरी है। आपने प्रदर्शनकारी पहलवानों का वो वीडियो देखा होगा, जिसमें वो कहते हैं कि वो नेशनल्स नहीं खेलेंगे बल्कि सीधा ओलंपिक में जाएँगे। साथ ही आपने भूपेंद्र हुड्डा को भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते देखा होगा। 2011 में हुए संस्था के चुनाव में जम्मू कश्मीर के दुष्यंत सिंह अध्यक्ष बने थे, लेकिन हरियाणा की कुश्ती संघ ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और फिर से चुनाव हुए।

इस बार कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा (तब रोहतक से सांसद, अब राज्यसभा MP) और तब समाजवादी पार्टी के सांसद रहे सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच मुख्य लड़ाई थी। अंततः हुड्डा को पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा और बरिसजभूषण शरण सिंह तब से लेकर अब तक लगातार 3 बार संस्था के अध्यक्ष बन चुके हैं। वो 6 बार सांसद भी रह चुके हैं। उनका एक बेटा भी विधायक हैं। उनकी पत्नी भी एक बार सांसद रह चुकी हैं।

उधर 2011, 2015 और 2019 में दीपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष बनते रहे। बृजभूषण शरण सिंह के कार्यकाल में कई मेडल भारतीय पहलवानों को मिले। उधर दीपेंद्र सिंह हुड्डा को हटा कर रोहतास सिंह को हरियाणा कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनाया गया। हर राज्य का कोटा तय होने और नई सिलेक्शन नीति बनने से हरियाणा के कुछ पहलवान नाराज़ हो गए। हरियाणा में अगले साल ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में इस आंदोलन को लेकर राज्य में राजनीति और तेज हो जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

खेल संघों में दखल नहीं दे सकती केंद्र सरकार, उनका अपना प्रबंधन

अब सवाल ये उठता है कि आखिर केंद्र सरकार WFI में कितना दखल दे सकती है? देश भर के 27 प्रदेशों में WFI से सम्बद्ध संस्थाएँ हैं। इसे केंद्रीय खेल मंत्रालय और IOA की मान्यता प्राप्त है। संस्था ने ‘प्रो रेसलिंग लीग’ की भी शुरुआत की, जिससे भारत में इस खेल को लेकर लोकप्रियता बढ़ी। WFI पहलवानों के लिए देश-विदेश से कोच की व्यवस्था करता है। TATA मोटर्स संस्था की स्पॉन्सर है। WFI को ‘समिति रजिस्ट्रेशन अधिनियम’ के तहत मान्यता मिली हुई है, जिसके तहत चैरिटेबल और अव्यवसायिक संस्थाएँ पंजीकृत की जाती हैं।

सबसे पहले तो आप ये जान लीजिए कि खेल संघों के प्रबंधन में केंद्र सरकार का कोई दखल नहीं होता है। वो स्वतंत्र होते हैं। वो देश भर में टूर्नामेंट आयोजित करते हैं और पुरस्कार देते हैं। जैसे क्रिकेट का काम BCCI देखता है, वैसे ही बाकी ऐसे संघ भी गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय हैं। इनमें नेशनल और स्टेट फेडरेशंस होते हैं। किसी संघ को निलंबित कर देने से घाटा खिलाड़ियों का है, क्योंकि फिर वो भारत के झंडे के तले नहीं खेल पाएँगे।

सरकार ज़्यादा से ज़्यादा इन संघों को फंडिंग और सहायता रोक सकती है, लेकिन इससे भी खिलाड़ियों को ही नुकसान होगा। कोई भी खेल संघ बना सकता है, बशर्ते वो उस खेल की अंतरराष्ट्रीय संस्था से संबद्ध हो। अधिकतर खेल ‘इंटरनेशनल ओलंपिक संघ (IOC)’ से जुड़े हैं, ऐसे में उसकी मान्यता ज़रूरी होती है। ऐसे में पहलवान ये माँगें क्यों कर रहे हैं कि WFI को भंग कर दिया जाए? केंद्र सरकार अपनी शक्तियों से बाहर जाकर ये सब कैसे कर सकती है?

ऐसे में पहलवानों को IOC के पास जाना चाहिए और उन्हें कहना चाहिए कि वो WFI की मान्यता रद्द कर दे। केंद्र सरकार से ये सब माँगें करने का कोई फायदा नहीं है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था। सरकार खेलों के लिए नियम-कानून बना सकती है। अमेरिका में तो कोई खेल मंत्रालय ही नहीं है, भारत में भी 1982 से पहले नहीं था।

जो पहलवान आज आंदोलन में लगे हुए हैं, उनमें से अधिकतर ने बृजभूषण शरण सिंह की पहले तारीफ की थी। 2022 के एक वीडियो में साक्षी मलिक को मेडल जीतने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की तारीफ़ करते हुए देखा गया। विनेश फोगाट ने 2018 में कहा था कि उनके खेल में किसी प्रकार के यौन शोषण की उन्हें कोई जानकरी नहीं है। साक्षी मलिक ने बृजभूषण शरण सिंह को 2017 में अपने शादी समारोह में भी आमंत्रित किया था और परिवार के साथ तस्वीरें क्लिक करवाई थीं।