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मुस्लिम लड़कियों से दुर्व्यवहार, उनके हिन्दू दोस्तों की पिटाई… देखिए हाल में हुई ऐसी 7 घटनाएँ, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा शरिया चलाए जाने की कोशिश

मुस्लिम लड़कियों का हिंदू लड़कों से दोस्ती करना इस्लामी कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रहा है। देश के कई शहरों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जब हिंदू लड़कों से दोस्ती करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुस्लिम लड़कियों को परेशान किया है। कई जगह मुस्लिम युवतियों के हिंदू दोस्तों के साथ मारपीट और गाली गलौच की घटनाएँ भी सामने आई हैं। विगत कुछ महीनों में इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं जब मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिजाब या बुर्का पहनी लड़की को सार्वजनिक स्थानों पर घेर लिया हो, उनका वीडियो बनाया हो और उन्हें अपमानित किया हो।

इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बालिग़ होने के बाद कौन किसे अपना दोस्त बनाता है और किसके साथ घूमता है, इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए बशर्ते कि किसी की मंशा गलत हो। स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएँ आपस में साथ मिल कर घूमते हैं, ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा बेवजह मुस्लिम लड़कियों को प्रताड़ित करना और उनके हिन्दू दोस्तों को पीटना दोनों ही पक्षों को दहशत में डालने का प्रयास है।

16 मई: पटना में मुस्लिम लड़की के हिंदू दोस्त की पिटाई

पटना के पीर बहोर थानाक्षेत्र में एक हिन्दू युवक मुस्लिम लड़की के साथ अंजुमन इस्लामिया हॉल के पास बाइक से गुजर रहा था। इस दौरान सड़क पर खड़े कुछ लोगों ने बाइक को रोका। रोकने वालों ने पहले युवक का नाम पूछा। बाद में बाइक सवार युवक को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए उसकी पिटाई शुरू कर दी गई। हिंसा के दौरान बुर्का पहने लड़की हमलावरों को रोकने का प्रयास करती है। कट्टरपंथी उलटे उसी लड़की को लानत देते हैं।

वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है, “मंदिर में ले जा रहा है।” कुछ समय बाद हमलावरों ने लड़की से कहा, “तुम्हे शर्म नहीं आ रहा है ?” हिंदू युवक के पिटाई के दौरान माँ-बहन की गालियाँ देते हुए सॉरी बोलने पर “** फाड़ देंगे तुम्हारा’ जैसे शब्द बोले गए। बाद में हमलावरों ने कहा, “मुस्लिम लड़की को घुमाएगा तू।” हमलावरों ने मारपीट के दौरान पीड़ित युवक से कहा, “भगवा लटकाए हुए हो।”

13 मई: मुजफ्फरनगर में जाट युवक के साथ घूम रही मुस्लिम महिला के साथ अभद्रता

मुजफ्फरनगर के थाना क्षेत्र नई मंडी इलाके में एक जाट युवक अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ बाइक पर जा रहे होते हैं। तभी जाट युवक की बुलेट का रास्ते में कुछ लोग पीछा करते हैं। बाद में बाइक रोक कर महिला और युवक से एक भीड़ सवाल-जवाब करती है। दोनों के पते पूछे जाते हैं। महिला का बुर्का जबरन नोचा जाता है। इस दौरान वीडियो बना रहे व्यक्ति ने कहा, “मुँह खोल इसका।” अभद्रता के दौरान महिला अपना चेहरा ढँकने की कोशिश करती दिख रही है।

इस वीडियो को ‘द जाट एसोसिएशन’ नाम के वेरिफाइड हैंडल द्वारा शेयर किया गया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामला दर्ज कर आरोपितों की तलाश तेज कर दी है।

13 मई: मेरठ के बाजार में मुस्लिम महिलाओं के साथ बदसलूकी

मुजफ्फरनगर के पड़ोसी जिले मेरठ से भी इसी से मिलता जुलता एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में बाजार में घूम रहीं 2 मुस्लिम लड़कियों से कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दू के साथ आने का आरोप लगा कर बदसलूकी की थी। दरअसल दो मुस्लिम युवतियाँ अपने हिंदू दोस्त के साथ बाजार में घूम रही थीं। कट्टरपंथियों की नजर दोनों लड़कियों और साथ घूम रहे लड़के पर थी। देखते-देखते भीड़ ने तीनों को घेर लिया। भीड़ में शामिल कट्टर मुस्लिमों ने लड़कियों से कहा, “हिन्दुओं को दोस्त बनाओगी तुम?” जबरन उन मुस्लिम युवतियों के नकाब भी उतार दिए गए।

जानकारी के अनुसार भीड़ ने पहले हिन्दू युवक से मारपीट की। उसके बाद मुस्लिम लड़कियों से उनके अब्बा का नाम पूछा जाने लगा। सोशल मीडिया पर इसके 2-3 वीडियो सामने आए हैं। इस मामले में भी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और आरोपितों की तलाश की जा रही है।

अहमदाबाद में मुस्लिम लड़की को नसीहत – ‘दोस्ती नहीं कर सकते’

फैक्ट्स (Facts) नाम के ट्विटर यूजर ने 29 अप्रैल 2023 को एक वीडियो शेयर किया। वीडियो अहमदाबाद के जुहापुर की है। इसमें एक शख्स कैमरा लेकर बुर्काधारी लड़की के पास आकर उससे सवाल जवाब करता है। वह उस लड़के बारे में पूछता है। लड़की उसे अपना दोस्त बताती है। इस पर कट्टरपंथी भड़क जाता है और भीड़ इकट्ठी कर लड़की को नसीहत देने लगता है। ट्टरपंथी उस पर चिल्लाता है और कहता है, “क्या आप वॉट्सएप नहीं चलाते, आपको नहीं पता कि कैसे इतने घपले होते हैं, आप लोग दूसरों के साथ घूमती हो, उन्हें गले लगाती हो।”

एक औरत इस बीच कहती है- “हट जाओ मैं पकड़ के धो देती हूँ इसे।” वहीं स्कूटर पर बैठा आदमी कहता है- “तुम काफिर के साथ क्यों आती हो।” तभी, वो लड़का जो वीडियो बना रहा होता है वो कहता है, “आपा सीधी बात बताता हूँ, यहाँ बहुत सारे मुसलमान है। अखलाख तुम्हारा बहुत खराब है। इतना सारा हमारे को जुनून आ जाता है कि माँ फाड़ डालें उसकी। मैं झूठ नहीं बोलता मैं काट डालता उसको।”

मेरठ के गाँधी बाग में मुस्लिम लड़की का पीछा कर वीडिया वायरल करने की धमकी

ऐसा ही एक वीडियो कथिततौर पर मेरठ के गाँधी बाग का है। इस वीडियो में एक हिजाब पहनी लड़की के पीछे पीछे कुछ लड़के चलते हैं और फिर कहते हैं- “देख तेरी वीडियो वायरल होगी।” लड़कों को कहते सुना जा सकता है, “देख लो मुसलमान की लड़की हिंदू के साथ घूम रही।” इस वीडियो में लड़की अपने दोस्त के साथ आगे बढ़ती है पर कट्टरपंथी लगातार उसका पीछा करते रहते हैं।

24 अप्रैल: महाराष्ट्र के संभाजीनगर में तीन कट्टरपंथियों को पुलिस ने दबोचा

संभाजी नगर (पहले औरंगाबाद) में हिजाब पहने लड़की को बीच सड़क पर परेशान करने के आरोप में पुलिस ने तीन कट्टरपंथियों को दबोच लिया। इन कट्टरपंथियों ने काफी दूर तक मुस्लिम लड़की का पीछा किया, फिर उसका मोबाइल छीनने की कोशिश की और उसे गालियाँ भी दीं। उन्होंने उसके साथ ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वह एक हिंदू लड़के के साथ बीबी का मकबरा देखने गई थी। घटना बेगमपुरा इलाके की है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो में ये कट्टरपंथी कॉलेज की छात्रा को रोकने की कोशिश करते हैं। वे उसका हाथ पकड़ते हैं। उसका बैग छीनने कोशिश करते हैं और हिजाब खींचते हैं। लड़की सड़क पर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती है और बार-बार ‘मुझे छोड़ो, मुझे छोड़ो’ कहती है। लेकिन वे उसे छोड़ने की बजाए उसका फोन छीनने लगते हैं। वे उससे पूछते हैं, “वो लड़का कौन है। तुम किसी और धर्म के लड़के के साथ क्यों हो?” इस दौरान जमा भीड़ भी लड़की की मदद नहीं करती।

16 अप्रैल: मध्य प्रदेश के खंडवा में दोस्तों के साथ जूस पी रही लड़की के साथ मारपीट

16 अप्रैल की दोपहर मुस्लिम युवती सत्यम बवाने और अतुल के साथ आनंद नगर के टी कैफे गई थी। तभी अजहर अली, मोहम्मद इरफान, शादाब और मोहसिन 3-4 अन्य लोगों के साथ आए। तीनों को खींचकर कैफे के बाहर ले गए और मारपीट करने लगे। उनलोगों ने लड़की से कहा कि तुम इनके साथ क्यों आई हो। क्या मुसलमान कम पड़ गए हैं। युवती को अश्लील गालियाँ दी गई। मारपीट की गई। लड़की के अनुसार शादाब नाम के शख्स ने उसे जोर से थप्पड़ मारकर नीचे गिरा दिया और जान से मारने की धमकी दी।

मुस्लिम भीड़ लड़कों को उठाकर खानशाहवली कॉलोनी में दरगाह के पास ले गए। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने लड़कों को छुड़ाया। इसके बाद देर रात मुस्लिमों ने मोघट थाने का घेराव किया। भीड़ ने पत्थरबाजी और नारेबाजी भी की। जिसके बाद प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी।

राजेश माँझी का गुनाह क्या, दलित होना या आरोपितों का मुस्लिम होना? हत्या पर केरल से बिहार तक वे चुप, जिनका जुनैद-इशरत पर उमड़ा था प्रेम

भारतीय मीडिया का एक बड़ा धड़ा तब कुछ ज़्यादा ही सक्रिय हो जाता है, जब किसी भाजपा शासित राज्य में कोई घटना होती है। लेकिन, जहाँ विपक्षी दलों की सरकारें हैं वहाँ कितनी भी वीभत्स घटना क्यों न हो जाए, उन्हें रियायत दी जाती है। क्या आपने सोशल मीडिया के बुद्धिजीवियों या फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में कहीं इस खबर पर बहस होते देखा कि केरल में बिहार के एक दलित मजदूर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, वो भी मुस्लिमों द्वारा?

मेनस्ट्रीम मीडिया के स्टार एंकर्स इस घटना को कवर करने के लिए केरल नहीं पहुँचे। अख़बारों में इस घटना पर संपादकीय नहीं दिखे। सोशल मीडिया में बुद्धिजीवियों ने CPM सरकार की आलोचना नहीं की। दलित हितों की बात करने वाले खामोश रहे। यूट्यूब से कमाई करने वाले नए-नवेले वरिष्ठ पत्रकारों की जमात ने अख़बारों की कटिंग शेयर नहीं की। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के शासन पर सवाल नहीं उठाए गए। मृतक के परिवार के लिए किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की गई।

क्या आप जानते हैं इसका कारण क्या है? इसका कारण ये है कि केरल में वामपंथी दलों की सरकार है, भाजपा की विरोधी दलों की। इसीलिए, एक दलित मजदूर की मॉब लिंचिंग पर अंतरराष्ट्रीय अख़बारों में भी संपादकीय नहीं आता है। वहीं अगर उत्तर प्रदेश में दलितों का आपस का झगड़ा भी होगा तो उसे ऐसे पेश किया जाता है जैसे दलित पर अत्याचार हो रहा हो। आगे बढ़ने से पहले आइए जान लेते हैं कि केरल में हुआ क्या है।

केरल में भाजपा के दलित मजदूर की पीट-पीट कर हत्या

केरल के मलप्पुरम में चोरी के शक में बिहार के पूर्वी चम्पारण के रहने वाले 36 वर्षीय दलित मजदूर को बाँध कर पीटा गया। शनिवार (6 मई, 2023) को दोपहर हुई इस घटना में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है – अफजल, फाजिल, शराफुद्दीन, महबूब, अब्दुसमद, नासिर, हबीब, अयूब और जैनुल। इस घटना की कोई चर्चा न होने का एक कारण ये भी है कि हत्यारे मुस्लिम समुदाय से आते हैं। मुस्लिमों द्वारा किए जाने वाले अपराधों को छिपाना कोई नया ट्रेंड नहीं है, काफी पहले से चला आ रहा है।

लगभग ढाई घंटे तक उक्त मजदूर के हाथ बाँध कर उसे पीटा गया, पाइप और लाठियों द्वारा। फिर उसे एक दुकान के बाहर फेंक दिया गया। इसके एक घंटे बाद पुलिस को सूचना मिली। राजेश माँझी को इसके बाद नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हत्यारों ने सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ किया, सर्विलांस कैमरे के फुटेज को डिलीट कर दिया गया। कॉन्डोत्ती के पास किझिसेरी इलाके में उक्त युवक पर चोरी का इल्जाम लगाया गया था।

वहाँ कुछ दिनों पहले मृतक ने एक चिकन की दुकान पर काम किया था। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि मृतक को क्रूरता से पीटा गया था, जिससे उसकी कई पसलियाँ टूट गई थीं। हत्यारों ने झूठ बोल कर बचने की कोशिश की कि राजेश माँझी चोरी की कोशिश में पहले माले से गिर गए। केरल में इस तरह की ये पहली घटना नहीं है। फरवरी 2018 में मधु नाम के जनजातीय समाज के युवक की इसी तरह हत्या कर दी गई थी। ताज़ा मामले पर बिहार के सामाजिक कल्याण मंत्री मदन साहनी ने निंदा कर के इतिश्री कर ली है।

जुनैद के परिजनों को केरल सरकार ने दिया था मुआवजा, राजेश माँझी को क्या?

22 जून, 2017 को एक आपसी झगड़े में ट्रेन में जुनैद नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी। अपना अम्मी-अब्बू की 8 संतानों में छठे नंबर का जुनैद इमाम बनना चाहता था। उसकी हत्या के बाद देश भर में मॉब लिंचिंग वाला प्रोपेगंडा चलाया गया और कहा गया कि उसके मजहब के कारण हिन्दू गुंडों ने उसे मारा है। जुनैद और उसके साथी ईद की शॉपिंग कर के दिल्ली से लौट रहे थे, रास्ते में सीट के लिए एक दूसरे समूह से उनका झगड़ा हो गया था।

जुनैद का केरल से कोई लेनादेना नहीं था। न तो वो केरल का रहने वाला था और न ही केरल में ये घटना हुई थी। लेकिन, केरल की वामपंथी सरकार ने जुनैद के परिजनों को रुपए देने का ऐलान किया था। अगस्त 2017 में केरल की सत्ताधारी पार्टी CPI(M) ने ऐलान किया था कि जुनैद के परिजनों को 10 लाख रुपए दिए जाएँगे। पार्टी की राज्य कमिटी की बैठक में ये फैसला लिया गया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी परिवार से मिले थे।

कुख्यात वामपंथी महिला नेता वृंदा करात के साथ जुनैद के परिवार ने दिल्ली स्थित ‘केरल हाउस’ में सीएम से मुलाकात की थी। CPI(M) ने ऐलान किया था कि पार्टी की सेन्ट्रल कमिटी द्वारा ये रकम जुनैद के परिवार वालों को दिए जाने की बात कही गई थी। पार्टी ने सीधा कह दिया था कि RSS ने जुनैद की हत्या की। क्या राजेश माँझी के परिवार से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इसीलिए मुलाकात नहीं करेंगे और CPI(M) वित्तीय सहायता नहीं करेगी, क्योंकि वो जुनैद की तरह किसी मदरसे में नहीं पढ़ते थे?

जब हजारों किलोमीटर दूर हुई एक घटना को लेकर केरल की सत्ताधारी पार्टी और सरकार वित्तीय सहायता कर सकती है, तो फिर उनके राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई दलित प्रवासी मजदूर की हत्या पर क्या वो परिवार की सहायता नहीं कर सकते? खुद मलप्पुरम के पुलिस अधीक्षक ने इसे मॉब लिंचिंग का मामला माना है। हत्यारे मुस्लिम हैं, इसीलिए केरल सरकार चुप्पी साधे हुए बैठी है?

केरल कॉन्ग्रेस की चुप्पी का कारण क्या?

न सिर्फ केरल की सत्ताधारी पार्टी और मीडिया, बल्कि केरल की मुख्य विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने भी इस घटना को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए हैं। गुजरात के ‘अमूल’ और कर्नाटक की ‘नंदिनी’ को लेकर क्षेत्रवाद की राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस बिहार के एक दलित मजदूर के लिए आवाज़ उठाएगी, इसकी उम्मीद भी शायद ही है। वैसे भी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत को एक देश की जगह ‘यूनियन ऑफ स्टेट्स’ कहते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर, जो केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद हैं, वो इस पर कुछ बोलेंगे? ‘The Kerala Story’ फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे वहाँ हिन्दू लड़कियों को फँसा कर उनका इस्लामी धर्मांतरण करा दिया जाता है और फिर उनकी मानव तस्करी कर के उन्हें ISIS का सेक्स स्लेव बनने भेज दिया जाता है। इस पर तो शशि थरूर ने खूब हंगामा मचाया था कि ये सच्चाई नहीं है। उम्मीद नहीं ही है कि दलित मजदूर की हत्या पर वो कुछ बोलेंगे।

कॉन्ग्रेस बिहार के महागठबंधन में शामिल है, जो राज्य की सत्ताधारी पार्टी भी है। इस हिसाब से भी उसे इस मामले पर आवाज़ उठानी चाहिए थी। बिहार सरकार तो इस मामले पर बोलने से रही। तमिलनाडु में जब बिहारी प्रवासी मजदूरों के साथ हिंसा की खबरें आईं तो बिहार सरकार ने यूट्यूबर मनीष कश्यप पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगा कर उन्हें तमिलनाडु पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब उन पर NSA के तहत कार्रवाई की जा रही है।

शर्म की बात है कि एक पिछड़ राज्य के पिछड़े समाज का कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में मॉब लिंचिंग का शिकार हो जाता है और उस राज्य का मुख्यमंत्री अपने लोगों के हितों की रक्षा करने की बजाए देश भर में घूम-घूम कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन बनाने में लगा है। वो अलग बात है कि उससे ये भी नहीं हो पा रहा। बिहार जैसे पिछड़े राज्य का दुर्भाग्य है कि यहाँ ऐसे नेता सत्ता में हैं। इस स्थिति में उन्हें इसकी चिंता करनी चाहिए थी कि राजेश माँझी का शव बिहार कैसे आएगा, अंतिम संस्कार कैसे होगा और उनके परिवार का क्या होगा।

ये वही नीतीश कुमार हैं, जिनका एक आतंकी को लेकर ऐसा प्यार उमरा था कि उन्होंने गुजरात पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहाँ को ‘बिहार की बेटी’ कह दिया था। तेज प्रताप यादव ने बाद में उनके इस बयान का समर्थन किया था। लालू यादव के बेटे तेज प्रताप इस समय नीतीश सरकार में मंत्री भी हैं। जबकि CBI कोर्ट ने भी 2021 में कहा कि इसे फेक एनकाउंटर मानने का कोई सवाल ही नहीं उठता और वो आतंकी नहीं थे ये मानने के लिए कोई तथ्य ही नहीं हैं। तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस पर खूब राजनीति की थी।

मस्तक पर तिलक, घर के आगे धर्म ध्वज… बागेश्वर सरकार ने बिहार से बताया ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए 5 करोड़ वाला संकल्प: कहा- हम जगाते रहेंगे

बागेश्वर सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों बिहार में हैं। पटना में उनकी हनुमंत कथा चल रही है। मंगलवार (16 मई 2023) को उनकी कथा का चौथा दिन था। यहीं से उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का रोडमैप बताया।

उन्होंने कहा कि उनका हिंदू राष्ट्र का संकल्प बिहार से पूरा होता दिख रहा है। इसके लिए उन्होंने भक्तों से तिलक लगाकर घर से निकलने और अपने घरों के बाहर ध्वज लगाने को कहा। बागेश्वर सरकार ने कहा कि वे लोगों को जगाने निकले हैं और जब तक लोग जाग नहीं जाते, वे जगाते रहेंगे।

पटना के नौबतपुर में हनुमंत कथा के चौथे दिन बागेश्वर बाबा ने कहा कि बिहार की आबादी 13 करोड़ है। यदि सिर्फ 5 करोड़ लोग ही अपने मस्तक पर तिलक लगाकर निकले और अपने घरों पर धर्म ध्वज लगा लें तो भारत हिंदू राष्ट्र बनने की तरफ अग्रसर हो जाएगा। साथ ही अगर आपके घर के बाहर धर्म ध्वज रहेगा तो हनुमान जी स्वंय आपकी रक्षा करेंगे।

उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति की रक्षा आपको ही करनी होगी। इसके लिए रामचरितमानस का पाठ, मस्तक पर तिलक और घर के बाहर ध्वज हर एक सनातनी को लगाना चाहिए। बागेश्वर सरकार ने कहा कि ऐसा सिर्फ भक्ति के लिए ही नहीं करना है। जिस घर में राम की पूजा होती है, उस घर के रक्षक हनुमान जी हो जाते हैं और घर की सारी विपदाएँ दूर हो जाती हैं।

बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री ने मंगलवार को पटना हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनका स्वागत और सम्मान किया गया। इसके पहले पटना के एक होटल के पास लगे उनके पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई थी। बागेश्वर सरकार के पाँच दिवसीय कार्यक्रम का समापन बुधवार (17 मई) को होना है। भीषण गर्मी के बावजूद कथा सुनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

ट्रेन में ईसाइयत का प्रचार, हिंदू महिला ने ठुकरा दिया ‘प्यार का प्रस्ताव’: कहा- दुनिया को बेवकूफ मत बनाओ, देखिए Video

सोशल मीडिया पर मुंबई की लोकल ट्रेन का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक लड़की को एक दूसरी लड़की से ईसाई और हिन्दू धर्म पर बहस करते देखा जा सकता है। लगभग 2 मिनट 45 सेकेण्ड लम्बे इस वीडियो में हिंदू महिला को ये जवाब देते भी सुना जा सकता है कि ईसाई मिशनरियाँ देश में धर्मान्तरण कराने में जुटी हुईं हैं। ईसाई मत का प्रचार करने वाली महिला को भी ये कहते सुना जा सकता है कि वो हिन्दुओं का ध्यान रखती है इसलिए उन्हें जीजस का संदेश सुना रही है।

9 मई 2023 को मुंबई न्यूज़ नाम के एक ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया है। वीडियो के साथ कैप्शन के तौर पर लिखा, “मुंबई की लोकल ट्रेन में एक महिला धर्मांतरण का प्रचार करती हुई जिसे हिन्दू धर्म को मानने वाली महिलाओं ने सबक सिखाया है।” हालाँकि, ये वीडियो कब और कहाँ का है इसकी सटीक जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है।

इस बहस में एक काले रंग की टी शर्ट पहनी महिला ने लाल रंग के कपड़ों में बैठी दूसरी महिला से जीसस के बारे में सवाल किया। महिला ने पूछा कि कौन है जीसस ? साथ ही कहा, “दुनिया को चू$$या बना रहे हो। जो 4 कीलों में टंग गया वो हमें प्रोटेक्ट करेगा? परमेश्वर को मानते हो न? जाओ अपने घर में मानो। आप अपने चर्च में मनाओ। यहाँ दुनिया को बेवकूफ मत बनाओ।”

इसी बीच वीडियो दूसरी तरफ से एक महिला ने सवाल किया, “हमारे सनातनी भाई-बहन किसी को ऐसे ट्रेन में पकड़ रहे हैं क्या? हमारे हिन्दू भाई खुद क%ने हैं जो आप लोगों की बातों में आ जाते हैं और कन्वर्ट हो जाते हैं।” इन बातों के जवाब में जीसस का प्रचार कर रही महिला ने कहा कि हम लोग आप से प्यार करते हैं। हालाँकि, ट्रेन में बैठी हिन्दू महिलाओं ने उस महिला के ‘प्यार के प्रस्ताव’ को ठुकरा दिया और कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं क्योंकि हमारे पास लोग हैं। एक महिला ने कहा, “हमारे पास इतने सरे देवी-देवता हैं कि हमें आपके भगवान की कोई जरूरत नहीं है।”

इसी वीडियो में दूसरी तरफ से सवाल किया गया, “आपके भगवान में इतनी शक्ति होती तो वो 3 कीलों में मर गया होता क्या? हम सिर्फ चक्रधारी को फॉलो करते हैं और किसी को नहीं। हम कट्टर हिन्दू हैं और किसी की बातों में नहीं आते। आप लोग घूम-घूम कर लोगों को ब्रेनवाश करते हैं।” इसी वीडियो में काली टी-शर्ट वाली महिला ने ईसाईयत का प्रचार कर रही लड़की को धर्मांतरण की कोशिश न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इनकी बातों में कई लोग आ जाते हैं।

वायरल वीडियो के अंतिम में ट्रेन में मौजूद अन्य महिलाएँ ईसाई महिला पर धर्मांतरण के बदले पैसे पाने का आरोप लगाती हैं। हालाँकि, ईसाईयत का प्रचार कर रही महिला इस आरोप से इनकार करती है। इस बीच वही महिला भगवत गीता वालों पर भी अपने जैसी हरकत का आरोप लगाती है। ईसाई प्रचारक के इन आरोपों के जवाब में उसे जवाब दे रही हिन्दू महिला ने कहा कि भगवत गीता वाले ढोल बजाते हैं और भक्ति का प्रचार कर रहे हैं।

दूसरी महिला ने भी ईसाईयत का प्रचार करने वाली महिला से अपने गॉड को खुद मानने और दूसरों पर न थोपने की हिदायत दी। अंत में ईसाई महिला ने कहा कि उनके परमेश्वर ज़िंदा हैं और उठ कर चली गई।

तीन तलाक देकर शौहर बनाता था हलाला का दबाव, नसरीन ने हिंदू बन ‘राहुल’ से की शादी, बोली- मैं देवी-देवताओं की शरण में जाना चाहती हूँ

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक युवती ने धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कर हिंदू धर्म अपना लिया। इसके बाद अपने प्रेमी के साथ हिन्दू रीति रिवाज से विवाह कर लिया। नसरीन ने धर्मांतरण के बाद अपना नाम नेहा रख लिया है। शादी के बाद उसने अपने परिवार वालों से जान का खतरा जताया है। नेहा पति राहुल के साथ सोमवार (15 मई 2023) को एसएसपी दफ्तर पहुँची और दोनों की सुरक्षा की गुहार लगाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला भमोरा थाना क्षेत्र का है। नेहा उर्फ नसरीन सिहौलिया दिगोई की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि भले ही उनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ हो, लेकिन उनकी हिंदू धर्म में आस्था रही है। वह हिंदू देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा रखती हैं और उनकी शरण में जाना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने धर्म परिवर्तन करने का फैसला किया। नेहा ने कहा कि वह राहुल से शादी करके बहुत खुश हैं और उसके साथ हँसी-खुशी रहना चाहती हैं। राहुल भी नेहा से शादी करके बेहद खुश है।

नेहा के मुताबिक, उसने अपनी मर्जी से यह शादी की है। उस पर किसी का दबाव नहीं था। उसके परिजनों के संबंध कुख्यात अपराधियों से हैं, जिससे उसकी और राहुल की जान को खतरा है। नवदंपती ने एसएसपी को लिखे पत्र में बताया कि उनकी शादी से उसके (नेहा) परिवार वाले बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। इसलिए उन्होंने सुरक्षा देने की माँग की है।

नेहा ने आरोप लगाया है कि उसका पूर्व शौहर शराब पीकर उसके साथ आए दिन मारपीट करता था। उसके चरित्र पर शक करता था। महिला ने बताया कि उसके तीन बच्चे भी हैं, लेकिन उसके पूर्व शौहर ने इन्हें अपने बच्चे मानने से मना कर दिया और कहा, “कहीं भी जाएगी, मुँह काला करवाकर आएगी और कह देगी ये मेरे बच्चे हैं। ये मेरे नहीं तेरे यार के बच्चे हैं।” उसने उसे तीन त​लाक देकर घर से बाहर निकाल दिया और अब उस पर हलाला का दबाव बना रहा था। इसके बाद नसरीन उससे परेशान होकर अपने मायके चली गई।

एक साल पहले दिल्ली में काम के दौरान उसकी मुलाकात राहुल नाम के शख्स से हुई। दोनों की फोन पर बातचीत होने लगी। बातचीत के दौरान राहुल और नसरीन में नजदीकियाँ बढ़ीं और 4 से 5 दिन पहले ही दोनों ने ​शादी कर ली।

दिल्ली का पत्रकार निकला जासूस, विदेश भेजता था DRDO और भारतीय सेना की सूचनाएँ: 12 ठिकानों पर CBI की छापेमारी, कई दस्तावेज हाथ लगे

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने देश की सुरक्षा से जुड़ी खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेजने के आरोप में एक पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपित की पहचान विवेक रघुवंशी के रूप में हुई। वह DRDO और सेना से जुड़ी जानकारी लीक कर रहा था। सीबीआई ने विवेक से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी कर कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की जाँच कर रही सीबीआई का कहना है कि पत्रकारिता की आड़ में विवेक रघुवंशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सेना की संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर रहा था। इसी कड़ी में उसने डीआरडीओ और भारतीय सेना द्वारा भविष्य में किन चीजों की खरीद करने वाली है इसकी जानकारी उसने इकट्ठी कर ली थी।

साथ ही डीआरडीओ किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है और आगे की योजना क्या है, इस बारे में भी वह जानकारियाँ जुटा रहा था। यही नहीं, उसने भारत के मित्र देशों के साथ चल रही कूटनीतिक और रणनीतिक वार्ताओं की जानकारी इकट्ठा कर रहा था। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा है कि वह देश की सुरक्षा और अखंडता से जुड़ी इन जानकारियों को इकट्ठा कर कथित तौर पर विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेज रहा था।

इसी सिलसिले में सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और जयपुर में 12 ठिकानों पर छापेमारी की है। कहा जा रहा है कि इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सीबीआई के हाथ लगे हैं। फिलहाल, सीबीआई आरोपित विवेक रघुवंशी के खिलाफ सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है। सरकारी गोपनीयता अधिनियम को जासूसी विरोधी अधिनियम भी कहा जाता है।

DRDO डायरेक्टर की भी हुई थी गिरफ्तारी

बता दें कि इससे पहले इसी महीने 3 मई को महाराष्ट्र एटीएस ने डीआरडीओ के डायरेक्टर प्रदीप कुरुलकर को पुणे से गिरफ्तार किया था। प्रदीप कुरुलकर पर व्हाट्सएप मैसेज, वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को जानकारी देने का आरोप है। यही नहीं, प्रदीप का पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) की महिला एजेंट को भी खुफिया जानकारी देने का आरोप है। बताया जा रहा है कि PIO एजेंट ने हनी ट्रैप में फँसाकर प्रदीप से कई महत्वपूर्ण और खुफिया जानकारी हासिल कर ली।

प्रदीप कुरुलकुर को मंगलवार (16 मई 2023) को पुणे की विशेष अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

प्रदीप कुरुलकुर को मंगलवार (16 मई, 2023) को पुणे की विशेष अदालत में पेश किया गया था। वहाँ से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

अब टाटा भी बनाएगा iPhone, एप्पल के दो मॉडल का होगा प्रोडक्शन: बेंगलुरु में खरीदा प्लांट, सितंबर में लॉन्चिंग संभव

आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल (Apple) ने अपने iPhone 15 सीरीज के दो मॉडल बनाने के लिए भारत को चुना है। टाटा ग्रुप एप्पल के अपकमिंग मॉडल iPhone 15 और iPhone 15 Plus को भारत में असेंबल करेगा। इससे पहले भारत में फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और लक्सशेयर जैसी कंपनियाँ iPhone को असेंबल करती रही हैं। लेकिन अब इस रेस में टाटा ग्रुप भी शामिल हो गया है। टाटा ग्रुप भारत में iPhone बनाने वाली चौथी कंपनी बनेगी।

TrendForce की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में टाटा ग्रुप को iPhone 15 और iPhone 15 Plus के प्रोडक्शन का एक छोटा हिस्सा मिलेगा। यानी टाटा, दोनों मॉडल्स का सिर्फ 5 प्रतिशत ही असेंबल करेगा। वहीं, फॉक्सकॉन नए आईफोन के रेगुलर वेरिएंट के 70 प्रतिशत और लक्सशेयर रेगुलर वेरिएंट का 25 प्रतिशत असेंबल करेंगी। कहा जा है कि लक्सशेयर को प्लस वेरिएंट के असेंबली ऑर्डर का 60 प्रतिशत और पेगाट्रॉन को प्लस वेरिएंट के असेंबली ऑर्डर का 35 प्रतिशत मिला है। टाटा ग्रुप पहले ही बेंगलुरु में विस्ट्रॉन का आईफोन प्लांट खरीद चुका है, जहाँ iPhone 15 सीरीज को असेंबल किया जाएगा।

हर साल सितंबर के महीने में iPhone सीरीज को लॉन्च किया जाता है। इस साल एप्पल की तरफ से iPhone 15 को सितंबर में लॉन्च किया जा सकता है। 2023 में आईफोन सीरीज के चार मॉडल- आईफोन 15, आईफोन 15 प्लस, आईफोन 15 प्रो और आईफोन 15 प्रो मैक्स इसमें शामिल हो सकते हैं। दरअसल, कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक संबंधों के कारण उपजे तनाव के बाद Apple का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। वहीं चीन से दूर Apple की मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन के चल रहे बदलाव ने Tata Group को iPhone असेंबल ऑर्डर हासिल करने में मदद की है।

बता दें कि 2022 में चीन के झेंगझू में स्थित एप्पल के प्लांट में कामगारों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में प्रदर्शनकारियों को हंगामा करते और लाठी से सीसीटीवी कैमरों को तोड़ते हुए देखा गया था। इस हिंसा का कारण वेतन का भुगतान और प्लांट में कठोर कोविड गाइडलाइन को लेकर था। एप्पल के इस फैसिलिटी सेंटर में लगभग 3,00,000 कर्मचारी काम करते थे और यहाँ iPhone प्रो के 85 प्रतिशत हिस्से का काम होता था। इसकी वजह एप्पल अपनी उत्पादन फैक्ट्री को चीन से निकालकर भारत और वियतनाम जैसे एशियाई देशों में स्थानांतरित करना चाहता है।

8वीं की छात्रा के पीछे पड़ा था शादीशुदा आरिफ, खुद को बता रहा था ‘राजा’: पोल खुलने पर लोगों ने धुन कर सिर मूँड़ दिया, पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरिफ नाम का एक शादीशुदा मुस्लिम युवक नाम बदल कर लड़कियों को परेशान करता था। मंगलवार (16 मई 2023) को आरिफ लोगों के हत्थे जब चढ़ गया जब वो एक स्कूल के पास एक नाबालिग लड़की से जबरन बात करने की कोशिश कर रहा था। लोगों ने आरिफ की पिटाई कर के उसका सिर मूँड़ा दिया। पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र का है। जिस लड़की से आरिफ़ बात करने की कोशिश कर रहा था, वह नाबालिग है और क्लास 8 की छात्रा है। पीड़िता के घर वालों के मुताबिक आरिफ उसे जबरन अपना मोबाइल नंबर एक पर्ची पर लिख कर देने की कोशिश कर रहा था। लड़की ने मदद के लिए शोर भी मचाया। इस दौरान आस-पास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने आरिफ को पकड़ लिया। जब आरिफ का नाम पूछा गया तो उसने खुद को राजा बताया।

हालाँकि, आधार कार्ड चेक करने पर उसकी पोल खुल गई और वह औरैया जिले के विधूना क्षेत्र का रहने वाला आरिफ निकला। इसके बाद मौके पर जमा लोगों ने उसकी पिटाई की। पिटाई के बाद वीडियो बनाते हुए आरिफ का सिर मुंडा दिया गया। इस घटना का 41 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में लोग आरिफ के परिवार वालों को बुलाने के साथ उसके शादीशुदा होने और कानपुर में किराए पर रहने की बात करते दिख रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बाद में लोगों ने आरिफ को थाना रावतपुर के हवाले कर दिया। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच करवाए जाने की बात कही है। रावतपुर SHO नीरज ओझा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि नाबालिग के परिजन शिकायत दे रहे हैं, जिसके आधार पर आरोपित पर कार्रवाई की जा रही है। आरोपित आरिफ पुलिस हिरासत में है।

शिवलिंग ही नहीं पूरे ज्ञानवापी परिसर का हो ASI सर्वेक्षण: वाराणसी कोर्ट करेगी हिंदू महिला उपासकों की याचिका पर सुनवाई

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराने को लेकर याचिका दायर की गई है। चार हिंदू महिला उपासकों ने जिला जज को इस संबंध में याचिका दी है। इस पर 22 मई 2023 को सुनवाई होगी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एएसआई को परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के निर्देश दिए थे।

यह याचिका (सीपीसी की धारा 75 (ई) और आदेश 26 नियम 10ए के तहत) उन हिंदू महिलाओं (वादी) द्वारा दायर की गई है, जो ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में साल भर से पूजा करने का अधिकार माँग रही हैं। हिंदू याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी में ऐसे कई सच हैं, जिनका सामने आना जरूरी है। इसलिए एएसआई सर्वे की माँग की जा रही है। इससे यह पता चल सकता है कि क्या स्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हिंदू मंदिर के ढाँचे पर किया गया था।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “पूरा परिसर हिंदू मंदिर का है। सर्वे के दौरान गुंबद के नीचे हिंदू मंदिर के शिखर मिले हैं। उसकी कार्बन डेटिंग जाँच की माँग हम कर रहे हैं। हमारी माँग है कि विवादित ढाँचे की पश्चिमी दीवार की भी जाँच हो। हम चाहते हैं कि तहखाने की भी वैज्ञानिक जाँच की जाए। चूँकि, हाई कोर्ट शिवलिंग की वैज्ञानिक जाँच का आदेश कर चुका है। ऐसे में पूरे परिसर की वैज्ञानिक जाँच एवं कार्बन डेटिंग की जा सकती है।”

जैन ने कहा, “मंदिर के ढाँचे को औरंगजेब ने तोड़कर बनवाया है, ये भी ASI जाँच में स्पष्ट हो जाएगा। अयोध्या केस में ASI का सर्वे मील का पत्थर साबित हुआ था। ज्ञानवापी में भी एएसआई के सर्वे से चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं। इसलिए हम सभी पूरे परिसर की वैज्ञानिक एवं कार्बन डेटिंग जाँच की माँग कर रहे हैं।”

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग एवं साइंटिफिक सर्वे की माँग वाली याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) को बिना शिवलिंग को क्षति पहुँचाए कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिया था। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान 16 मई 2022 को शिवलिंग मिला था। इस शिवलिंग की ASI से साइंटिफिक सर्वे कराने की माँग को लेकर वाराणसी की जिला अदालत में वाद दाखिल किया गया था। हालाँकि, कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

स्वतंत्र भारत में जमींदारी खत्म हो गई, पर पैदा हो गया एक ‘मजहबी जमींदार’: वक्फ बोर्ड के बारे में जानिए सब कुछ

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद वक्फ बोर्ड की बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शफी सादी ने जहाँ इस जीत के बाद कहा कि अब नई सरकार में मुस्लिम समुदाय का उप-मुख्यमंत्री बनना चाहिए और 5 मुस्लिम विधायकों को खास विभाग दिया जाना चाहिए। वहीं गुलबर्गा के वक्फ जिला अध्यक्ष सैयद हबीब सरमस्त का एक बयान वायरल हुआ कि मुसलमानों को किसी रिजर्वेशन की जरूरत नहीं है। उनके पास गुलबर्गा में ही 27000 एकड़ से ज्यादा वक्फ की जमीन है। अगर मुसलमान वक्फ को सही से संभालते हैं तो उनके पास इतना है कि वो हुकूमत को कर्जा दे सकते हैं। 

अब ये वक्फ बोर्ड है क्या चीज? जिसके बूते इतने बड़े दावे हो रहे हैं। इसका काम क्या है? जो इसके सदस्य राज्य में जीतने वाली कॉन्ग्रेस को कह रहे हैं कि सरकार में उनके समुदाय के डिप्टी सीएम चुने जाएँ। इनके पास कितनी संपत्ति है? जो हुकूमत को कर्जा देने की बात खुलेआम कर रहे हैं। आइए इस वक्फ बोर्ड के बारे में सारी जानकारी लेते हैं और बताते हैं कि कैसे लोकतांत्रिक देश में मजहब के नाम पर शुरू संस्था का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि वो धीरे-धीरे देश के तीसरे सबसे बड़े जमींदार बन गए हैं।

वक्फ बोर्ड होता क्या है?

वक्फ बोर्ड वो संस्था है जो अल्लाह के नाम पर दान में दी गई संपत्ति का रख-रखाव करता है। जैसे इस्लाम मजहब मानने वाले जब अपनी किसी चल या अचल संपत्ति को जकात में देते हैं तो वो संपत्ति तभी से ‘वक्फ’ कहलाती है। जकात दिए जाने के बाद इस संपत्ति पर किसी का मालिकाना अधिकार नहीं होता। उसे अल्लाह की संपत्ति माना जाता है और उसकी देख-रेख ‘वक्फ-बोर्ड’ को दी जाती है। ये संस्थान उस संपत्ति से जुड़े सारे कानूनी काम को संभालती है जैसे उसे बेचने-खरीदना-किराए पर देना आदि। एक बार यदि कोई व्यक्ति ये वक्फ दे देता है तो फिर उसके बाद उसका उस संपत्ति को कभी वापस नहीं ले सकता। वक्फ बोर्ड उसे जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करता है।

आजाद भारत में कैसे हुई ‘वक्फ’ की शुरूआत?

आजादी के बाद भारत में वक्फ एक्ट 1954 नेहरू सरकार लेकर आई थी। साल 1995 में एक्ट कुछ संशोधन हुए। इन संशोधनों के बाद प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्डों के गठन की अनुमति दी गई और कुछ ऐसे बदलाव हुए जिनपर अक्सर विवाद होता रहता है।

सेंट्रल वक्फ काउंसिल करता है वक्फ बोर्डों की देखरेख

सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना 1964 में भारत सरकार द्वारा 1954 के इस वक्फ अधिनियम के तहत की गई थी। यह केंद्रीय निकाय वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9 (1) के प्रावधानों के तहत स्थापित विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करता है।

देश भर में कितने वक्फ बोर्ड?

देश में एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल और 32 स्टेट बोर्ड है। हर राज्य के अलग-अलग वक्फ बोर्ड होते हैं। जबकि केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सेंट्रल वक्फ काउंसिल का पदेन अध्यक्ष होता है।

वक्फ बोर्ड में कौन होता है शामिल?

बात करें वक्फ बोर्ड के सदस्यों की तो इसमें शीर्ष पर सारे मुस्लिम अधिकारी होते हैं। जैसे एक अध्यक्ष, राज्य सरकार की ओर से एक या दो नामित व्यक्ति, मुस्लिम विधायक, मुस्लिम एमपी, मुस्लिम वकील, मुस्लिम आईएएस, इस्लामी स्कॉलर, टाउन प्लॉनर और इनके अलावा एक लोकल लेवल पर मुतवल्ली भी होता है।

वक्फ के पास कितनी संपत्तियाँ हैं?

पिछले दिनों खबरें आई थीं कि वक्फ बोर्ड रेल और सेना के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बनता जा रहा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार वक्फ बोर्ड के पास पूरे देश भर में 8,65,646 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं। इनमें से 80 हजार से ज्यादा संपत्ति वक्फ के पास केवल बंगाल में हैं। इसके बाद पंजाब में वक्फ बोर्ड के पास 70,994, तमिलनाडु में 65,945 और कर्नाटक में 61,195 संपत्तियाँ हैं। देश के अन्य राज्यों में भी इस संस्थान के पास बड़ी संख्या में संपत्तियाँ हैं।

कानूनी वैधता पर सवाल, याचिका खारिच

वक्फ के नाम पर वक्फ बोर्ड में जोड़ी गई इतनी संपत्तियाँ पर पिछले दिनों बहुत सवाल उठे। यूपी जैसे राज्यों में तो वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर जाँच के लिए राज्य सरकार जाँच के आदेश भी दे चुकी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल वक्फ बोर्ड को अंसवैधानिक करार देने के लिए एक याचिका डाली गई थी। हालाँकि कोर्ट ने याचिका ये कहकर खारिज कर दी कि इस मामले में याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हुए।

याचिका डालने वाले अश्विनी उपाध्याय इसकी संवैधानिक मान्यताओं पर सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं, “वक्फ के नाम से भारतीय संविधान में एक शब्द नहीं है। सरकार ने 1995 में वक्फ एक्ट बनाया और ये सिर्फ मुस्लिमों के लिए बना दिया।” उन्होंने पूछा कि जब संविधान में ही ऐसा शब्द नहीं था तो ये वक्फ एक्ट बना कैसे। इसमें मुस्लिम विधायक, एमपी, वकील, आईएएस, स्कॉलर और टाउन प्लॉनर और एक मुतवल्ली होता है। मगर जो इसका पूरा खर्चा होता है वो पूरा का पूरा जनता के टैक्स से दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार मस्जिद, मजारों से पैसे ही नहीं लेते और वक्फ पर उसके सदस्यों के वेतन में पैसे खर्च करेंगे तो ये आर्टिकल 27 का उल्लंघन नहीं हुआ?

उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड 1995 के जरिए वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियाँ दे दी गईं। उन्हें ये अधिकार दे दिया गया है कि उनके सब धार्मिक संपत्तियों से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल कोर्ट में जाएँगे। वो सवाल करते हैं कि देश में इतनी ट्रिब्यूनल कोर्ट नहीं है ऐसे में अगर वक्फ जाकर किसी की संपत्ति पर दावा ठोंकता है तो लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है तब सुनवाई होती है जबकि बाकी धर्मों के मामले आराम से सिविल कोर्ट में सुन लिए जाते हैं।

लोकतांत्रिक देश में वक्फ के मायने

सुप्रीम में भले ही वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन उठाए सवाल गलत नहीं थे। भारत जैसे लोकतांत्रित देश में मजहबी आधार पर ऐसे बोर्ड और कानून बनाना कहाँ तक उचित है। पिछले ही दिनों ये खबर आई कि एक पूरे गाँव पर वक्फ बोर्ड ने अपना अधिकार बता दिया है जबकि लोग उस पर सालों से रह रहे हैं और जमीन पर मंदिर भी है।

ये भेदभाव नहीं तो क्या है कि किसी भी अन्य धर्म की संपत्ति से जुड़े मामलों पर सिविल कोर्ट सुनवाई कर लेता है जबकि अगर किसी वक्फ की संपत्ति का विवाद है हो तो वो केवल ट्रिब्यूनल कोर्ट में सुनी जाती है। यानी अगर वक्फ कभी कहता है कि किसी गैर इस्लामी शख्स की जमीन भी उसके हिस्से में आती है तो उस व्यक्ति को ट्रिब्यूनल कोर्ट जाकर शिकायत करनी पड़ती है और देश में इन कोर्टों की संख्या मात्र 14 है। वहीं अगर यही विवाद किसी अन्य धर्म के व्यक्ति से जुड़ा है तो बड़े आराम से मामला सिविल कोर्ट में सुना जाता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि वक्फ का कॉन्सेप्ट इस्लामी देशों तक में नहीं है। फिर वो चाहे तुर्की, लिबिया, सीरिया या इराक हो। लेकिन भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आज हालात ऐसे हैं कि इन्हें देश में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बताया जा रहा है। इनके पास अकूत संपत्ति है।