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सिद्धारमैया के घर के बाहर से हटाया गया भगवान श्रीराम और बजरंग बली वाला पोस्टर, चुनाव के दौरान लगाया था: लोगों ने बताया ‘चुनावी हिन्दू’

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के साथ ही कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया के घर के बाहर लगी भगवान श्रीराम और हनुमान जी की तस्वीर को हटा दिया गया है। चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में लिखा था कि सरकार बनाने के बाद ‘बजरंग दल’ को बैन किया जाएगा। साथ ही इसने हिन्दू संगठन की तुलना प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI से भी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर बजरंग बली के अपमान का आरोप लगाया था।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी खुद को हनुमान जी का भक्त दिखाना शुरू कर दिया था। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आवास के बाहर दोनों ही देवताओं की तस्वीरें लगाई गई थीं। लेकिन, अब इन पोस्टरों को हटा दिया गया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर लगे इस पोस्टर में उनकी फोटो भी थी। कर्नाटक में 135 सीटों के साथ कॉन्ग्रेस को बहुमत मिला है, जबकि भाजपा 66 सीटें ही प्राप्त कर पाई।

इसके बाद लोगों ने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनावी हिन्दू बताना शुरू कर दिया। एक ने तंज कसते हुए लिखा कि कहीं मुस्लिम अपनी वोटिंग वापस लेने की धमकी दे रहे होंगे, इसीलिए ऐसा किया गया है। लोगों ने कहा कि चुनाव के साथ-साथ ही इनकी भक्ति भी खत्म हो जाती है। एक ने ‘भाई, ये तो शुरू होते ही ख़त्म हो गया’ वाला मीम भी शेयर किया। कॉन्ग्रेस पर हिन्दुओं को बेवकूफ बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। एक ने याद दिलाया कि इस पार्टी ने कभी भगवान राम का अस्तित्व नकार दिया था।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता का फ़िलहाल चयन नहीं हुआ है। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया में से किसी एक को मुख्यमंत्री बनाया जाना है। वहीं देश भर के विपक्षी नेता अब 2024 लोकसभा चुनाव के लिए इसे शुरुआत बताते हुए ये कह रहे हैं कि पीएम मोदी अजेय नहीं हैं। डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए कई बार त्याग किया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मालिएकर्जुन खड़गे ने सीएम चुनने के लिए तीन सदस्यीय कमिटी भी बना दी है।

बिहार में शराब खोजने निकला ₹60 लाख का हाईटेक ड्रोन, कहाँ गया अब तक कोई अता-पता नहीं: जानकारी देने वाले को मिलेगा इनाम

बिहार में रेल इंजन और पुल चोरी होने जैसी घटनाएँ हो चुकी हैं। इसलिए एक ड्रोन जैसी चीज का लापता होना बड़ी बात नहीं है। हालाँकि, बड़ी बात ये है कि जिस ड्रोन से नीतीश कुमार की सरकार शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब खोजने का काम करती थी, वही पिछले 10 दिनों से गायब हो गया है। सरकार ने 60 साथ रुपए खर्च करके इस ड्रोन को खरीदा था।

यह ड्रोन पटना से 10 दिन पहले 4 मई 2023 को उड़ाया गया और छपरा के दियारा इलाके में शराब की तलाश कर रहा था। इसी दौरान ड्रोन का संपर्क टूट गया और वह लापता हो गया। लाख कोशिश करने के बाद भी अधिकारी उसका पता नहीं लगा पाए। बिहार सरकार ने इसकी जानकारी देने वाले को 25 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा की है।

फिक्स विंग नाम का यह ड्रोन बिहार का एकमात्र ड्रोन था। यह हवाई जहाज की तरह दिखता था और दियारा की शराब की फैक्ट्रियों को चिन्हित कर अधिकारियों के नंबर पर जीपीएस मैसेज भेजता था। इसके बाद अधिकारी उस इलाके में कार्रवाई करते थे। यह पटना के मद्य निषेध विभाग के कंट्रोल रूम से ऑपरेट होता था।

ड्रोन की उड़ान क्षमता 100 किलोमीटर तक की थी। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगे। यह ड्रोन काफी ऊँचाई से भी साफ तस्वीर कैद कर लेता था। जिस इलाके में यह निगरानी करता था, उसे लोग जहाज समझ लेते थे। कहा जाता है कि इसकी कीमत 60 लाख रुपए थे। अब मद्य निषेध विभाग के अधिकारी इसे खोज रहे हैं।

अधिकारियों को आशंका है कि यह तेज हवाल या ऊंचाई पर उड़ने वाले पक्षियों से टकराकर क्रैश हो गया होगा और कहीं दलदली इलाके या घनी झाड़ियों में गिर गया होगा। इसलिए इसे खोजने में समस्या हो रही है। यह ड्रोन से लगभग 500 मीटर की ऊँचाई से तस्वीरें लेता था। इसलिए इसे जमीन से मारकर गिराने की आशंका कम है।

ड्रोन के गुम हो जाने के बाद नीतीश कुमार के सहयोगी रहे और राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने उन पर तंज कसा है। कुशवाहा ने ट्वीट करके कहा, “माननीय मुख्यमंत्री नीतीश जी, शराब खोजने के चक्कर में पुलिस, अन्य एजेंसियाँ, करोड़ों का बजट सब लापता होते जा रहा है।”

उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा, “बस लापता नहीं हो रही है तो आपकी ज़िद्द और शराब तथा शराब बंदी के नाम पर ग़रीबों पर चल रही बर्बरता। सावधान होइए, सर । वरना यह जो शराब है न, आपकी कुर्सी को लापता किए बिना मानेगी नहीं, क्योंकि शराब के नशा से बड़ा नशा है गरीबों पर ज़ुल्म ढाने की ज़िद।”

WFI के अधिकारियों पर लगा तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध, ए़़डहॉक कमिटी लेगी सारे निर्णय: ओलंपिक संघ का फैसला, 45 दिन के भीतर होंगे चुनाव

पहलवानों के प्रदर्शन के बीच भारतीय ओलंपिक संघ ने कुश्ती महासंघ के सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। कुश्ती महासंघ के अधिकारी अब कोई भी प्रशासनिक कार्य नहीं कर सकेंगे। ओलिंपिक संघ ने इसको लेकर शुक्रवार (12 मई 2023) को एक आदेश जारी किया।

ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव और कार्यवाहक सीईओ कल्याण चौबे ने आदेश जारी कर कहा है कि अब एडहॉक कमिटी कुश्ती महासंघ के सभी कामों को सँभालेगी। इसी के तहत कुश्ती महासंघ से जुड़े निवर्तमान अध‍िकारियों को किसी भी तरह के कामकाज करने से रोक लगाने का आदेश दिया है। यही नहीं, कुश्ती महासंघ के अधिकारियों को ऑफिस के दस्तावेज, वेबसाइट मैनेजमेंट, वित्तीय कामों से जुड़ी चीजें चीजें और लॉगिन डिटेल्स एडहॉक कमिटी को सौंपने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि ओलंपिक संघ के इस फैसले से पहले एक एडहॉक कमिटी बनाई गई थी। यह कमिटी कुश्ती महासंघ की हर गतिविधि पर नजर रख रही है। यह कमिटी आने वाले दिनों में कुश्ती महासंघ के चुनाव भी कराएगी। कुश्ती महासंघ के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर ओलंपिक संघ द्वारा जारी किए गए आदेश में खेल मंत्रालय के एक पत्र का हवाला दिया गया है। दरअसल, खेल मंत्रालय ने 24 अप्रैल को जारी एक आदेश में ओलंपिक संघ ने कुश्ती महासंघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एडहॉक कमिटी बनाने का आदेश दिया था।

खेल मंत्रालय के आदेश के बाद ओलंपिक संघ ने 27 अप्रैल को एग्जीक्यूटिव काउंस‍िल की आपातकालीन बैठक हुई। इस बैठक में एडहॉक कमिटी बनाने का फैसला हुआ। इसके बाद इस एडहॉक कमिटी में ओलंपिक संघ के कार्यकारी परिषद के सदस्य भूपेंदर सिंह बाजवा और ओलिंपिक संघ की उत्कृष्ट योग्यता की प्लेयर सुमा श‍िरूर को शामिल किया गया। यही नहीं, कुश्ती महासंघ के चुनाव में पारदर्शिता बरतने के लिए इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को भी शामिल करने के लिए कहा गया है। ज्ञात हो कि एडहॉक कमिटी को 45 दिनों के भीतर चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

बता दें कि पहलवान भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की माँग करते हुए धरना दे रहे हैं। बृजभूषण सिंह पर पहलवानों ने यौन उत्पीड़न समेत कई तरह के आरोप लगाए हैं। पहलवानों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत 2 FIR दर्ज हुई है। हालाँकि अब पहलवान WFI अध्यक्ष की गिरफ्तारी की माँग पर अड़े हुए हैं। वहीं, बृज भूषण शरण सिंह अपने कई बयानों में खुद को बेगुनाह बता चुके हैं।

ना BJP हिंदुत्व से भटकी, ना ही हिन्दू नाराज़ हैं… ऐसा होता तो नहीं हारते CT रवि जैसे नेता, हिजाब-मुस्लिम आरक्षण-ईदगाह मैदान सब पर रहा कड़ा स्टैंड

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम जारी हो गए हैं। 224 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के जहाँ 135 विधायक होंगे, वहीं भाजपा को 66 सीटों से संतोष करना पड़ा। JDS तो मात्र 19 सीटों पर सिमट गई। कॉन्ग्रेस पार्टी का वोट शेयर 42.9% रहा, जबकि भाजपा 36% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जेडीएस 13.3% वोट शेयर ही पा सकी। इस तरह, भाजपा का वोट शेयर लगभग बरकरार रहा जबकि JDS को जितना नुकसान हुआ, कॉन्ग्रेस को लगभग उतना ही फायदा हुआ।

हार-जीत हर राजनीतिक दल के लिए चलता रहता है। लेकिन, भाजपा की हर हार पर आजकल काफी विश्लेषण किया जाता है और इसे मोदी लहर का अंत मान लिया जाता है। याद रखने की ज़रूरत है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में सरकार बनाई थी। फिर 2019 में क्या हुआ, वो बताने की ज़रूरत नहीं है। इसी तरह, ताज़ा हार का भी खूब पोस्टमॉर्टम हो रहा है।

सोशल मीडिया के प्रादुर्भाव के बाद से ही एक अच्छी बात ये रही है कि एक आम आदमी भी अपनी बात को हजारों-लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। लेकिन, इसका एक नुकसान ये भी है कि किसी ऐसे नैरेटिव को भी फैलाया जा सकता है, जो ग्राउंड पर वास्तविकता न हो। भाजपा की ताज़ा हार का कारण लोग ये बता रहे हैं कि पार्टी हिंदुत्व से भटक गई है। दूसरा, ये कहा जा रहा है कि हिन्दू नाराज़ हैं और भाजपा ने उनके साथ धोखा किया है, इसीलिए हिन्दुओं ने उसे वोट नहीं दिया।

यहाँ हम चुनावी परिणामों का विश्लेषण कर के जानते हैं कि क्या सच में ऐसा हुआ? भाजपा के एक नेता हैं CT रवि, कर्नाटक में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय के रूप में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक उनकी सक्रियता को देखा जा सकता है, खासकर हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर। वो भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी भी हैं। बाबा बदन गिरि की पहाड़ी का नाम सुना है आपने? यहाँ एक मजार भी है, हिन्दू धर्म में दत्तात्रेय के अवतार की मान्यता भी यहीं है।

इसे दक्षिण का अयोध्या भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ नियंत्रण के लिए हिन्दुओं और मुस्लिमों में बड़ा संघर्ष हुआ। इस दौरान CT रवि ने बढ़-चढ़ कर हिन्दू युवाओं का नेतृत्व किया था। चिकमंगलूर में दत्ता जयंती के दिन एक अलग ही माहौल रहता है, लाखों हिन्दू इस पहाड़ी पर दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ये मामला 70 के दशक से ही अदालत में चल रहा है। दिसंबर 2022 में यहाँ 21 वर्षों बाद हिन्दू रीति-रिवाज से पूजा-पाठ संपन्न हुआ।

मुस्लिम इसे दरगाह कहते हैं, जबकि हिन्दू पीठ मानते हैं। पिछले साल हुए आयोजन में यहाँ सीटी रवि भी शामिल हुए थे। कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के बाद दत्ता जयंती मनाने का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। चिकमंगलुरु की सीट से CT रवि को कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने 5926 वोटों से हरा दिया। अब आप कहिए, अगर भाजपा की हार का कारण हिन्दुओं की नाराज़गी होती तो क्या एक फायरब्रांड नेता को इस तरह हार का सामना करना पड़ता?

अब चलते हैं गुलबर्गा नॉर्थ सीट पर। क्या आपको पता है कि जब स्कूल-कॉलेजों में बुर्का और हिजाब के पक्ष में उपद्रव खड़ा किया गया तब भाजपा का क्या रुख रहा था? पार्टी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में समान यूनिफॉर्म ही चलेगा और बुर्का-हिजाब की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय में भी राज्य सरकार ने अपने इस स्टैंड का बचाव किया। हिजाब आंदोलन के पक्ष में कॉन्ग्रेस की विधायक कनीज़ फातिमा खुल कर खड़ी थीं।

इस सीट पर भाजपा के चद्रकांत पाटिल को 2712 वोटों से हार का सामना करना पड़ा और कनीज़ फातिमा जीत गईं। इसका अर्थ है कि कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मुस्लिमों की गोलबंदी हुई होगी। लेकिन, उनके विरोधी उम्मीदवार के पक्ष में हिन्दुओं की गोलबंदी उस तरीके से नहीं हो पाई। अगर कर्नाटक के हिन्दुओं में भाजपा के प्रति नाराज़गी होगी तो इसका अर्थ ये नहीं है कि वो CAA आंदोलन का वहाँ चेहरा रहीं कनीज़ फातिमा को जिता देंगे।

भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे से अगर भटकी होती तो क्या उसने मुस्लिम आरक्षण हटाया होता? ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ – इस नारे का अर्थ ये नहीं है कि मुस्लिमों को प्राथमिकता दी जाए, बल्कि विकास योजनाओं और देश को आगे बढ़ाने में सबका भला हो, सबका योगदान हो। मुस्लिम आरक्षण को न सिर्फ भाजपा ने डंके की चोट पर हटाया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में इस पर कड़ा स्टैंड भी लिया।

चलिए, थोड़ा और पीछे चलते हैं कर्नाटक में ही। 2022 के मध्य में ही जिस तरह से बेंगलुरु में स्थित ईदगाह मैदान को लेकर विवाद हुआ था, तब भी कर्नाटक की भाजपा सरकार ने सही स्टैंड लिया था। गणेश चतुर्थी के आयोजन की अनुमति दी गई। मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट पहुँचा और उसने इस फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने फिर इस फैसले को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही वहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना भी हो गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने आयोजन पर रोक लगा दी।

कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर मुखर रहे वहाँ के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश भी हार गए। अगर मुद्दा हिन्दुओं की नाराजगी का ही होता, तो वो नहीं हारते। इसका अर्थ है कि अन्य फ़ैक्टरों ने इस चुनाव में काम किया, जिस पर विश्लेषण हो ही रहे हैं। उन्हें त्रिपुर से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने हरा दिया। उन्होंने सरकार में रहने के दौरान स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कर्नाटक सरकार में रहने के दौरान भी भाजपा ने कभी हिंदुत्व के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया। जुलाई 2020 में कर्नाटक सरकार ने टीपू सुल्तान पर आधारित कक्षा 7 के पाठ्यक्रम से एक चैप्टर को हटा दिया। 2022 में भी इस संबंध में निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा गठित पैनल ने टीपू सुल्तान का महिमामंडन किए बिना उसके बारे में पढ़ाए जाने की वकालत की। इसीलिए, ये आरोप गलत है कि भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे से भटक गई।

अक्सर जोश-जोश में ये कह दिया जाता है कि भाजपा अब ‘बजरंग दल’ जैसे संगठनों से खुद को अलग दिखाती रही है। लेकिन, जब कॉन्ग्रेस ने ‘बजरंग दल’ की तुलना आतंकी संगठन PFI से करते हुए अपने घोषणापत्र में इसे प्रतिबंधित करने का वादा किया, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी भाजपा ने इसके विरोध में दिन-रात एक कर दिया। ‘बजरंग दल’ के समर्थन मे आवाज़ उठाई गई। इसका साफ़ सन्देश है कि हिन्दू हित की बात करने वाले हर तत्व के साथ भाजपा खड़ी है।

एक और अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण। फिल्म ‘The Kerala Story’ ने कमाई के मामले में 125 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है। हिन्दू महिलाओं को फँसाने, उनके धर्मांतरण, तस्करी और ISIS का सेक्स स्लेव बनाने की घटनाओं का पर्दाफाश करती इस फिल्म की स्क्रीनिंग में खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुँचे। पीएम मोदी ने इस फिल्म का समर्थन किया। क्या कोई दल जो हिन्दुओं से खुद को अलग दिखाना चाहे, कभी ऐसा करेगा?

जब BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या हुई तो उसके बाद कुछ दिनों तक ज़रूर भाजपा के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला था। लेकिन, राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया कि आरोपितों की धर-पकड़ की जाए। साथ ही दिवंगत नेता के परिवार वालों के लिए एक अच्छा घर भी पार्टी फंड से बना कर उन्हें दिया गया। घर के पूजन कार्यक्रम में कई बड़े नेता पहुँचे। इससे कार्यकर्ताओं में सन्देश गया कि पार्टी उनके साथ है, उनके परिवार के साथ है।

भाजपा की हार के कई कारण हो सकते हैं। येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटा कर कम लोकप्रिय बसवराज बोम्मई को लाया गया, कुछ इसे कारण बता रहे। कुछ कह रहे लिंगायत वोट पार्टी को थोक में नहीं मिला। मुस्लिमों का ध्रुवीकरण एक कारण है ही। भ्रष्टाचार के आरोपों का ठीक से जवाब न दे पाना एक कारण बताया जा रहा। एंटी-इंकंबेंसी से लेकर कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव प्रचार को ‘सुपर लोकल’ रखने को भी कारण बताया जा रहा। मीडिया से लेकर पार्टी तक, हर जगह इसका मंथन चलता रहेगा।

17 + 813 + 88 + 1359 + 195 + 1403… नगरपालिका और नगर निगम से लेकर नगर पंचायत तक, पूरी यूपी में ऐसे बजा BJP का डंका: देखें आँकड़े

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanth) के नेतृत्व में नगर निकाय चुनावों जबरदस्त सफलता हासिल की है। भाजपा ने यूपी के सभी 17 मेयर सीटों पर कब्जा कर लिया है। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष के 199 में से 88 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज किया है। इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने सीएम योगी को बधाई दी है।

यूपी भाजपा को जीत की बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “निकाय चुनावों में इस शानदार विजय के लिए यूपी बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को बहुत-बहुत बधाई। यह सफलता योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे अभूतपूर्व विकास को लेकर जन-जन के समर्थन को अभिव्यक्त करती है।”

यूपी के मेयर के 17 में से 17 सीटें, नगरपालिका अध्यक्ष के 199 में से 88 सीटें और नगर पंचायत अध्यक्ष के 544 सीटों में से 191 सीटें भाजपा ने जीतकर इतिहास रच दिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी को नगरपालिका अध्यक्ष की 35 सीटें, बसपा को 16 सीटें, कॉन्ग्रेस को 4 सीटें, आम आदमी पार्टी को 3 सीटें और अन्य को 52 सीटें मिली हैं।

अगर नगर पंचायत अध्यक्ष की बात की जाए तो 544 में से भाजपा को 191, सपा को 78, बसपा को 37, कॉन्ग्रेस को 14, आम आदमी पार्टी को 6 सीटें और अन्य को 217 सीटें मिली हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी को नगर निगम पार्षद की 8 सीटें, नगरपालिका परिषद सदस्य की 30 सीटें 6 और नगर पंचायत सदस्य की 61 सीटें भी मिली हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा 9 अप्रैल 2023 को की गई थी। इसमें 17 महापौर (मेयर), 1420 पार्षद, नगरपालिका परिषदों के 199 अध्यक्ष, नगरपालिका परिषदों के 5327 सदस्य, नगर पंचायतों के 544 अध्यक्ष और नगर पंचायतों के 7178 सदस्यों के लिए 4 और 11 मई को मतदान हुए। वोटों की गिनती 13 मई 2023 को हुई थी।

चुनाव के दौरान भाजपा ने तरह-तरह के नारों का प्रयोग किया। इनमें ‘बुलडोजर बाबा चाँप रहे हैं… माफिया हाँफ रहे हैं’, ‘रंगदारी न फिरौती, यूपी नहीं है अब किसी की बपौती’, ‘माफिया नहीं अब महोत्‍सव हमारी पहचान है’ और ‘नो कर्फ्यू नो दंगा, यूपी में सब चंगा’ जैसे स्‍लोगन का खूब प्रयोग हुआ। इन नारों को सुनकर मतदाता खूब उत्साहित नजर आए थे।

कोच्चि में पकड़ी गई ₹12000 करोड़ की 2500 किलो ड्रग्स, रैपर पर लिखा मिला ‘हाजी दाऊद एन्ड सन्स’ : संदिग्ध पाकिस्तानी हिरासत में, 134 बोरे भी बरामद

भारतीय नौसेना ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ एक साझा अभियान चला कर केरल के कोच्चि से ड्रग्स की एक बड़ी खेप पकड़ी है। इस अभियान के तहत अब तक 2500 किलोग्राम से भी ज्यादा ड्रग्स पकड़ने का दावा किया जा रहा है। ड्रग का नाम मेथमफेटामिन बताया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस ड्रग की कीमत करीब 12 हजार करोड़ रुपए आँकी जा रही है। शनिवार (13 मई 2023) को हुई इस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को भी हिरासत में लिया गया है जो पाकिस्तान का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान को ‘ऑपरेशन समुद्रगुप्त’ नाम दिया गया था। बरामद किया गया ड्रग एक बड़े जहाज के जरिए जलमार्ग से लाया जा रहा था। एक जहाज में ड्रग पाकिस्तान और ईरान की समुद्री सीमा के पास लोड किया गया था। बाद में इसे छोटी-छोटी जहाज़ों के जरिए अलग-अलग जगहों पर उतारा जाता है। बरामद ड्रग्स को ‘खुशबू’ और ‘555’ लिखे 134 बोरों में पैक किया गया था। फिलहाल NCB यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि ये शब्द या नंबर पैकिंग हैं या कोई कोड।

ड्रग्स का मूल सोर्स पाकिस्तान बताया जा रहा है। इसके रैपर पर हाजी दाऊद एन्ड सन्स लिखा हुआ है। बरामद ड्रग का कुल वजन ढाई टन है। हिरासत में लिए गए संदिग्ध से एजेंसियों की पूछताछ जारी है। बरामद सभी वस्तुओं को मट्टनचेरी घाट लाया गया है। NCB के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है। बताया यह भी रहा है कि NCB और नौसेना को इस कार्रवाई के पहले मालदीव और श्रीलंका से भी इनपुट मिले थे। मेथमफेटामिन की यह भारत में सबसे बड़ी जब्ती बताई जा रही है। यह एक्शन NCB के महानिदेशक संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में हुआ। अभियान में DRI गुजरात ATS भी साझीदार की भूमिका में थी।

कर्नाटक में CM पद को लेकर कॉन्ग्रेस में छिड़ा पोस्टर वार: सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के समर्थकों ने घर के बाहर ‘अलग-अलग’ होर्डिंग्स लगाए

कर्नाटक विधानसभा चुनावों (Karnataka Assembly Election 2023) में कॉन्ग्रेस (Congress) ने भारी जीत हासिल की है, लेकिन अब मुख्यमंत्री पद को लेकर राज्य में संग्राम छिड़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar)और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के बीच मुख्यमंत्री बनने को लेकर पोस्टर वार शुरू हो गया है।

राजस्थान की कर्नाटक में भी कॉन्ग्रेस पार्टी दो खेमों में बँट गई है। एक खेमा है डीके शिवकुमार का और दूसरा है सिद्धारमैया है। दोनों खेमों अपने-अपने लोगों को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं। इसको लेकर बड़े-बड़े पोस्टर छपवाकर लगाए गए हैं।

सिद्धारमैया के समर्थकों ने राजधानी बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें उन्हें ‘कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री’ बताया गया है। वहीं, डीके शिवकुमार के समर्थकों ने भी बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर पोस्टर लगाया है। इसमें उन्हें राज्य का अगला ‘मुख्यमंत्री’ घोषित करने की माँग की है।

बताते चलें कि कर्नाटक चुनावों की 13 मई 2023 को हुई मतगणना में कॉन्ग्रेस पार्टी को कुल 224 सीटों में से 135 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 113 से 23 सीटें अधिक हैं। वहीं, भाजपा को सिर्फ 66 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। राज्य की जेडीएस को भारी नुकसान हुआ है और उसे 19 सीटें मिली हैं।

मुख्यमंत्री पद को लेकर आज रविवार (14 मई 2023) को शाम 5:30 बजे कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक है। इस दौरान कॉन्ग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल रहेंगे। इसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी। कर्नाटक के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के अनुसार, सीएम पद का फैसला पार्टी हाईकमान लेगा।

मोदी सरकार ने देश में बनाए 50 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर… 3 माह पहले टारगेट पूरा किया: जल संरक्षण के साथ रोजगार के नए अवसर देना है उद्देश्य

भारतीय जनता पार्टी ने 13 मई 2023 (शनिवार) को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बताया है कि देश में 50 हजार से ज्यादा अमृत सरोवरों के निर्माण का काम पूरा हो चुका है। अपने इसी ट्वीट में बीजेपी का दावा है कि यह कार्य तय समय से 3 महीने पहले ही हुआ है। इन सरोवरों के लिए तय सीमा आने वाले स्वतंत्रता दिवस की रखी गई थी। इस अभियान का नाम ‘मिशन अमृत सरोवर’ दिया गया था।

अपने इसी आधिकारिक ट्वीट में भाजपा ने बताया है कि मिशन अमृत सरोवर के तहत देश भर में 50 हजार से अधिक जलाशयों के निर्माण का लक्ष्य बनाया गया था। इसकी शुरुआत 24 नवम्बर 2022 को हुई थी। इसे 15 अगस्त 2023 तक सम्पन्न करने का लक्ष्य भी रखा गया था। अभियान के तहत इन जलाशयों को अमृत सरोवर का नाम दिया गया है। पंचायती राज्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के आधार पर भाजपा का दावा है कि इस लक्ष्य को 3 महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो लगा कर भाजपा ने इस ट्वीट का शीर्षक ‘तय समय से पहले पूरा किया संकल्प’ दिया है। इस अभियान को जल संरक्षण और संचयन के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

गौरतलब है कि मिशन अमृत सरोवर के लिए कोई अलग से धनराशि जारी नहीं हुई थी। इसमें भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और तकनीकी संगठनों की भागीदारी है। इस अभियान के तहत सिंचाई, मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सिंघाड़े की खेती, जल पर्यटन आदि से रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। साथ ही अमृत ​​सरोवर अपने इलाके में सामाजिक सभा स्थल के रूप में प्रयोग होगा। अमृत ​​सरोवर की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय आदि में प्रयोग के लिए भेजा जाता है।

‘लोग क्या चु%^&* हैं…लोगों में अक्ल नहीं है’: पाकिस्तानी सेना पर भड़कते क्या-क्या कह गए इमरान खान, बताया- ‘रची गई थी मेरी हत्या की साजिश’

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के अलावा, इस्लामाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान ने शनिवार (13 मई 2023) को अपने मुल्क को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी शरबाज शरीफ की सरकार के साथ-साथ सेना पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने इस दौरान ‘चुतिंयां’ जैसे असंसदीय शब्द का भी इस्तेमाल किया।

इमरान खान ने कहा, “मेरी वजह से फौज को बुरा-भला गया या उस आदमी (आर्मी प्रमुख) की वजह से? उसने क्या समझा कि लोग ये… क्या लोग चुतिंयां हैं या लोगों मेें अकल नहीं है या लोग बेवकूफ हैं कि जिस आप लगाएँगे उधर लोग लग जाएँगे?” इमरान ने अपने संबोधन के दौरान कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

अपने संबोधन में इमरान खान ने कहा, “आज हमारा लोकतंत्र एक धागे से लटका हुआ है और न्यायपालिका ही इसे बचा सकती है। यह माफिया न्यायपालिका पर हमला करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इसलिए मैं सबसे पहले देश से हमारी न्यायपालिका और संविधान के साथ खड़े होने के लिए कहता हूँ।” PTI चीफ ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज 145 मामले निराधार हैं।

अल-कादिर मामले: जिस मामले में इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था, उसको लेकर उन्होंने कहा, “अल-कादिर ट्रस्ट की स्थापना के पीछे मेरा उद्देश्य पैगंबर मोहम्मद के आलोक में नेताओं का निर्माण करना था। मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि बुशरा बीबी को भी इस संबंध में नोटिस जारी किया गया था।”

इमरान खान ने कहा कि अल-कादिर विश्वविद्यालय में उनकी बीवी ट्रस्टी थीं। ट्रस्टी वेतन नहीं लेता और वह सेवा के इरादे से काम करा है। खान ने कहा कि उन्होंने अपनी बीवी बुशरा को ट्रस्टी इसलिए बनाया, क्योंकि उन्हें ‘सीरतुन नबी का पूरा ज्ञान’ है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ट्रस्ट का ऑडिट भी कराया जाता है।

हत्या कराने का आरोप: इमरान खान ने शहबाज शरीफ की सरकार और सेना पर अपनी हत्या कराने के इरादे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि मुझे मारने के लिए एक योजना तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें पता कि उनकी हत्या की हरी झंडी किसने दी और इसे अंजाम देने वाले कौन थे। उन्होंने कहा कि इन सबसे के बावजूद वे हिंसा में विश्वास नहीं करते।

अराजकता फैलाने का आरोप: इमरान ने देश में अराजकता फैलाने का आरोप आर्मी और शरीफ सरकार पर लगाया। उन्होंने कहा, “18 मार्च को जब मैं इस्लामाबाद में मजिस्ट्रेट की अदालत में गया… उन्होंने लाहौर में मेरे घर पर हमला किया। उन्होंने बख्तरबंद वाहन से गेट तोड़ दिया। लाहौर उच्च न्यायालय का फैसला था कि केवल दो लोग ही सर्च वारंट के साथ मेरे घर आ सकते हैं। इसके बाद भी 35 पुलिसकर्मी घर में घुसकर लूटपाट और मारपीट की।”

ISPR DG को लताड़ा: इमरान खान ने पाकिस्तानी सेना के प्रोपेगेंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक जनरल अहमद शरीफ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। इस महीने की शुरुआत में शरीफ ने कहा था कि इमरान खान ने पाकिस्तानी सेना की छवि को नुकसान पहुँचाया।

इमरान खान ने कहा, “[डीजी] आईएसपीआर साहब, जब मैं जेल में था तब आपने कहा था कि मैं एक पाखंडी हूँ। मैंने सेना को उस हद तक नुकसान पहुँचाया, जितना किसी और ने नहीं। आपने हमें कुचलने की बात कही। डीजी आईएसपीआर साहब, मैं दुनिया भर में अपने देश का प्रतिनिधित्व तब से कर रहा था, जब आप पैदा भी नहीं हुए थे। मैंने सभी मंचों पर अपनी सेना का बचाव किया है।”

सेना पर हमला बोला: इमरान खान ने सेना को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, “कोई भी किसी राजनीतिक दल को बलपूर्वक समाप्त नहीं कर सकता है और ना ही उसके नेता को जबरन जेल में डाल सकता है। आप मेरी बात नहीं मानेंगे लेकिन मेरा सुझाव है कि आप छोटे, बंद कमरे से बाहर निकलें।”

मीडिया पर रोक: इमरान खान ने कहा, “मेरी गिरफ्तारी के तुरंत बाद मीडिया पर शिकंजा कसा गया। केवल स्टेट वर्जन चलाया जा रहा था, जो हैंडलर्स द्वारा उपलब्ध कराया गया था। उनके (हैंडरलर्स) के पास पर्याप्त समझ नहीं है। वे सभी चैनलों को एक ही फीड दे रहे थे। पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में भी ऐसा ही हुआ – मीडिया को नियंत्रित किया गया था।”

पहले 160 वोटों से घोषित हुईं विजयी, दोबारा मतगणना में 16 वोटों से मिली हार: कर्नाटक के जयनगर में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के समर्थकों ने मचाया हंगामा, BJP उम्मीदवार जीते

कर्नाटक विधानसभा चुनवों में जयनगर विधानसभा सीट पर भाजपा के राममूर्ति ने कॉन्ग्रेस की सौम्या रेड्डी को बेहद काँटे के मुकाबले में 16 वोटों से हरा दिया है। पहले हुई मतगणना में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को 160 वोटों से विजयी घोषित किया गया था। भाजपा प्रत्याशी की माँग पर इस सीट पर फिर से मतगणना करवाई गई थी। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की हार पर उनके समर्थकों ने देर रात तक हंगामा किया और सरकारी मशीनरी पर धाँधली का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जयनगर विधानसभा सीट के लिए वोटों की गिनती एसएसएमआरवी कॉलेज में हुई थी। भाजपा ने यहाँ सी के राममूर्ति को मैदान में उतारा था। वहीं कॉन्ग्रेस की तरफ से कर्नाटक इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष रामलिंगा रेड्डी की बेटी सौम्या रेड्डी प्रत्याशी थीं। 13 मई 2023 (शनिवार) को यहाँ मतगणना केंद्र पर तनाव की स्थिति बन गई थी क्योंकि पहले सौम्या रेड्डी को 160 वोटों से जीता बता दिया गया। भाजपा प्रत्याशी राममूर्ति इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने फिर से गिनती की माँग की।

भाजपा प्रत्याशी की इस माँग के दौरान वहाँ तेजस्वी सूर्या भी मौजूद थे। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस समर्थक जीत की ख़ुशी में जश्न मनाने लगे। हालाँकि कुछ देर बाद फिर से वोटों की गिनती शुरू की गई। इस दोबारा हो रही गिनती का कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सौम्या और उनके पिता रामलिंगा रेड्डी ने विरोध किया। रिकाउंटिंग के बाद भाजपा प्रत्याशी राममूर्ति को 16 वोटों से जीता घोषित कर दिया गया। अंतिम परिणाम के तौर पर राममूर्ति को 57797 वोट और सौम्या को 57781 वोट मिले।

नए चुनाव परिणाम से कॉन्ग्रेस समर्थक नाराज हो गए और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। इस नारेबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कॉन्ग्रेस समर्थकों का आरोप था कि भाजपा प्रत्याशी को सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके जिताया गया है। धरने में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डी के शिवकुमार भी शामिल थे।

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के परिणामों में कॉन्ग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। 224 सीटों पर हुए इस चुनाव में कॉन्ग्रेस के हिस्से में 136 सीटें आईं। भाजपा को महज 65 सीटें ही मिल पाईं। 19 सीटों के साथ JDS तीसरे नंबर पर रही।