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‘कर्नाटक में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की जीत के बाद पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे’: वहाँ मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर ने भी माना, कट्टरपंथियों को बचाने में लगा है जुबैर

कर्नाटक के बेलगावी में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी आसिफ सैत की जीत के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगने का वीडियो सामने आया था। यह वीडियो तिलकवाड़ी के मतगणना केंद्र का है। इस मामले में पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

वीडियो वायरल होने के बाद तिलकवाड़ी पुलिस इंस्पेक्टर दयानंद जी. शेगुनासी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज की है। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की जीत के बाद जब मुस्लिम युवक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे तब वह मौके पर मौजूद थे। इस मामले में दर्ज एफआईआर में इंस्पेक्टर दयानंद ने ही बयान दर्ज कराया है। उन्होंने कहा है, “विधानसभा चुनाव में सुरक्षा को लेकर मेरी व अन्य लोगों की ड्यूटी तिलकवाड़ी आरपीडी कॉलेज में लगाई गई थी।

जब मैं और अन्य स्टाफ सदस्य आरपीडी कॉलेज के पास दोपहर करीब 2:30 बजे पहुँचे तब कॉन्ग्रेस के कई प्रत्याशी वहाँ आ गए और उनके समर्थकों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में नारेबाजी कर जश्न मनाया।”

उन्होंने आगे कहा, “उस दौरान कॉन्ग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे मुस्लिम युवकों की ओर से ‘जिंदाबाद जिंदाबाद पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए गए। इससे राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया और समाज के बीच नफरत पैदा हो गई। हम अलगाववाद के इरादे से कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार की ओर से “ज़िंदाबाद जिंदाबाद पाकिस्तान जिंदाबाद” जैसे नारे लगाने वाले आरोपितों के खिलाफ हैं।”

पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 153, 153 (बी) के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की जाँच की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में कथित फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज का सह-संस्थापक समेत कई लोग आरोपितों का बचाव करने में जुटे हुए हैं। मोहम्मद जुबैर ने एक ट्वीट कर दावा किया, “मैंने बेलगावी के पुलिस इंस्पेक्टर दयानंद से बात की। उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि नारे “पाकिस्तान जिंदाबाद” के लग रहे थे या “आसिफ (राजू) सैत जिंदाबाद” के। वे वायरल वीडियो को आगे की जनक के लिए फोरेंसिक लैब भेज रहे हैं।”

जुबैर के ट्वीट से यह स्पष्ट है कि वह इस्लमावादी आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रहा है। जबकि इंस्पेक्टर दयानंद ने FIR में कहा है कि नारेबाजी के दौरान वह खुद ही वहाँ मौजूद थे।

3 गायों पर धारदार हथियार से हमला, मालिक की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया मामला: VHP बोली – हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए जानबूझकर कर रहे ऐसा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के संगम विहार इलाके में तीन गायें गंभीर रूप से घायल पाई गईं। तीनों पर ही धारदार हथियार से हमला किया गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

इन तीन गायों में से एक गाय के मालिक रणजीत भडाना ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी सफेद रंग की गाय गुरुवार (11 मई, 2023) को घर से शाम करीब 4.00 बजे चली गई थी। लेकिन घर लौटकर नहीं आई। इसके बाद शुक्रवार (12 मई, 2023) सुबह करीब 7 बजे स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि उनकी गाय गंभीर रूप से घायल है।

काफी तलाश करने के बाद शाम में उनके बेटे को गाय मिली। इसके बाद वे उसे लेकर हॉस्पिटल चले गए। रणजीत भड़ाना का आरोप है कि उनकी गाय पर किसी ने जानबूझकर धारदार हथियार से हमला किया। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

इस मामले में ‘विश्व हिंदू परिषद’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी ट्वीट कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, “दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार में तेज धारदार हथियार से तीन गायों को एक ही तरीके से घायल कर रास्ते में छोड़ देना हिन्दू समाज को चिढ़ाने जैसा है। घटना के दो दिन बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री और दिल्ली पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में समाज में असंतोष बढ़ रहा है।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “यह कोई अनायास घटी घटना नहीं है। बल्कि गौ भक्त हिन्दू समाज की भावनाओं को भड़काने हेतु कुछ असामाजिक तत्वों या जिहादियों द्वारा षड्यंत्र पूर्वक किए गए हमले प्रतीत होते हैं। इनके विरुद्ध दिल्ली द्वारा त्वरित कठोरतम कार्यवाही अपेक्षित है।”

इस मामले में, दिल्ली पुलिस का कहना है कि गुरुवार (11 मई 2023) रात तीन गायें गंभीर रूप से घायल पाई गईं थीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया। जहाँ इलाज के दौरान एक गाय की मौत हो गई। गायों पर किए गए जानलेवा हमले को लेकर दिल्ली पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अज्ञात आरोपितों के खिलाफ 2 मामले दर्ज किए हैं।

‘असम में 600 मदरसों को बंद किया, इस साल 300 को बंद कर दूँगा’: तेलंगाना में CM सरमा ने ओवैसी को ललकारा, बहुविवाह बैन करने के लिए भी बना है पैनल

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा रविवार (14 मई, 2023) को तेलंगाना के दौरे पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को भी ललकारा। भाजपा दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के क्रम में तेलंगाना पर खासा जोर दे रही है। कर्नाटक में जीत से तेलंगाना में पार्टी कैडर का उत्साह बढ़ता, लेकिन इस हार के बाद नए सिरे से जान फूँकने की कोशिश चल रही है। राज्य की स्थापना के समय से ही KCR यहाँ से मुख्यंमंत्री हैं।

तेलंगाना में एक रैली के दौरान सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वो असम में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ अभियान चला रहे हैं और मदरसा वाली शिक्षा को बंद करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक ही दिन में 600 मदरसों को बंद करने का फैसला लिया था। साथ ही उन्होंने 300 और मदरसों को बंद करने का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने हैदराबाद के सांसद ओवैसी को भी ललकारा।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी ने जाकर कहा कि मदरसों को बंद किया गया और वो उन्हें देख लेंगे, इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वो खुद ओवैसी के घर में आ जाएँगे और वहाँ पर वो देख लें। सीएम हिमंता ने कहा, “ये नए भारत को भी देख लीजिए। ओवैसी को दर्द हो रहा है। मैं ओवैसी से कहना चाहता हूँ कि इस साल भी मैं 300 मदरसों को बंद करूँगा। हम सबको मिल कर भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है।”

बता दें कि असम की सरकार बहुविवाह को भी प्रतिबंधित करने जा रही है और इसके लिए एक कमिटी का गठन भी कर दिया गया है। गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज को इस पैनल का अध्यक्ष बनाया गया है। इसमें महिला और मुस्लिम सदस्य को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। कमिटी को 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी पड़ेगी। असम सरकार ने 2024 तक बहुविवाह को बैन करने का लक्ष्य रखा है। Polygamy के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएँ गई थीं।

छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर होगी मुंबई की कोस्टल रोड: CM एकनाथ शिंदे ने पूरा किया बाल ठाकरे का सपना, भव्य मूर्ति का भी होगा निर्माण

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐलान किया है कि मुंबई की कोस्टल रोड का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर रखा जाएगा। सीएम शिंदे ने संभाजी महाराज की जयंती पर यह ऐलान किया। साथ ही उन्होंने कहा है कि इस क्षेत्र में संभाजी महाराज की भव्य प्रतिमा का भी निर्माण होगा।

दरअसल, छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती पर गेटवे ऑफ इंडिया पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने कहा है, “यहाँ पहली बार संभाजी महाराज की जयंती मना रही है। इसलिए बहुत अधिक खुशी हो रही है। आज संभाजी महाराज की 366वीं जयंती मनाई जा रही है।” इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि कोस्टल रोड का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही यह उनकी एक भव्य मूर्ति लगाई जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ इतिहासकारों ने उनकी बहादुरी के बारे में कुछ अलग भी लिखा होगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की नींव रखी और संभाजी महाराज ने इसे आगे बढ़ाया। इसलिए हमें उनकी वीरता को याद रखने की जरूरत है। संभाजी महाराज ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अपने समय में उन्होंने 120 से अधिक युद्ध लड़े लेकिन उन्हें कभी भी हार नहीं मिली।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा है कि औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजी नगर करना बाला साहेब का सपना था। इसलिए सरकार बनने के बाद सबसे पहले यह फैसला लिया गया। औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को इसी जगह पर प्रताड़ित किया था। उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए कहा गया। लेकिन उन्होंने कभी भी समझौता नहीं किया।

बता दें कि छत्रपति संभाजी महाराज हिंदवी साम्राज्य के दूसरे राजा और छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे थे। उनका जन्म से 1657 में हुआ था। साल 1680 में शिवाजी के निधन के बाद उन्होंने सत्ता संभाली थी। अपने शासनकाल के दौरान, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसमें मुगल साम्राज्य के साथ युद्ध और प्रजा द्वारा विद्रोह शामिल है। इन सबके बाद भी संभाजी महाराज को उनकी बहादुरी और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता है। साल 1689 में मुगल आक्रांता औरंगजेब ने उनकी हत्या कर दी थी।

‘हिन्दुओं को दोस्त बनाओगी?’: कट्टरपंथियों ने 2 मुस्लिम लड़कियों से की बदसलूकी, नकाब उतरवाया, उनके हिन्दू दोस्त को भी पीटा – Video वायरल

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मुस्लिमों को अपने ही मजहब की लड़कियों के साथ बदसलूकी करते हुए देखा जा सकता है। यूपी पुलिस ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। दोनों मुस्लिम युवतियाँ एक हिन्दू युवक के साथ घूम रही थीं, जिस पर कट्टर मुस्लिम भड़क गए और उनसे बदसलूकी करने लगे। जबरन उनका चेहरा दिखाने के लिए मजबूर किया गया। वो हिन्दू युवक इन दोनों लड़कियों का दोस्त ही है।

तीनों दोस्त बाजार में घूम रहे थे। भीड़ में शामिल कट्टर मुस्लिमों ने लड़कियों से कहा, “हिन्दुओं को दोस्त बनाओगी तुम?” जबरन उन मुस्लिम युवतियों के नकाब भी उतार दिए गए। उत्तर प्रदेश पुलिस ने दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर के उनकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा कि प्रकरण के सम्बन्ध में पुलिस के द्वारा अभियोग पंजीकृत कराया गया है और साक्ष्य के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

पहले हिन्दू युवक से मारपीट की गई, उसके बाद मुस्लिम लड़कियों से उनके अब्बा का नाम पूछा जाने लगा। सोशल मीडिया पर इसके 2-3 वीडियो सामने आए हैं। हिन्दू युवक का कॉलर पकड़ कर उसे बाजार में घुमाया गया। पीड़ित के सिर में चोट भी आई है। उक्त वीडियो शनिवार (13 मई, 2023) का बताया जा रहा है। जब मुस्लिम लड़कियों ने बताया कि वो लड़का उनका दोस्त है तो बदमाशों ने कहा, “कैसा दोस्त है? हिन्दुओं को दोस्त बनाओगी?”

उक्त घटना मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र के भगत सिंह मार्केट की है। कोतवाली के सीओ अमित राय ने बताया कि दोनों मुस्लिम युवतियाँ और उनके साथ घूम रहा उनका दोस्त, तीनों ही नाबालिग नहीं हैं। तीनों बालिग़ हैं और अपनी इच्छा के हिसाब से साथ में कहीं घूम सकते हैं। फुटेज का इस्तेमाल कर आरोपितों को पहचानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने कहा कि दोनों ही आरोपित जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। उनकी तलाश जारी है।

होटल के बाहर बदमाशों ने फाड़ डाले बागेश्वर बाबा के पोस्टर, फुटेज के बावजूद बिहार पुलिस खाली हाथ: दूसरे दिन भी लाखों लोगों ने सुनी हनुमंत कथा

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार की राजधानी पटना के करीब नौबतपुर में हनुमंत कथा सुना रहे हैं। इस बीच एक बार फिर उनका पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई। धीरेंद्र शास्त्री जिस होटल में रुके हुए हैं, उसके पास में ही यह पोस्टर लगा हुआ था। इस घटना पर आयोजकों ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दरअसल, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पटना के पनाश होटल में रुके हुए हैं। इस होटल के पास लगे एक पोस्टर को अज्ञात लोगों द्वारा फाड़ दिया गया। हालाँकि इसके बाद पोस्टर की मरम्मत कर उसे सही कर दिया गया। लेकिन इस घटना से आयोजकों और बाबा बागेश्वर के भक्तों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया है। वे आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में आयोजकों ने पुलिस से शिकायत भी की है। हालाँकि अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

बता दें कि धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के पटना पहुँचने से पहले भी कई जगहों पर उनके पोस्टर फाड़े गए थे। रात के अंधेरे में पोस्टर फाड़ने वालों की हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालाँकि, फुटेज हाथ लगने के बाद भी पुलिस अब तक आरोपितों तक नहीं पहुँच पाई है।

बिहार सरकार के मंत्रियों ने किया था बाबा की कथा का विरोध

गौरतलब है कि धीरेंद्र शास्त्री की कथा की जानकारी सामने आने के बाद राजद नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। नीतीश सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री का घेराव करने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने अपने धर्म निरपेक्ष सेवक संघ (DSS) के सदस्यों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इन तस्वीरों को भी बागेश्वर सरकार के विरोध में तैयारियों के रूप में देखा जा रहा था।

यही नहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर यादव ने तो उन्हें जेल में डालने की बात कह दी थी। उन्होंने कहा था, “बाबा बागेश्वर अगर गंदे काम करने आएँगे तो बिहार इजाजत नहीं देगा, अगर नफरत फैलाने आए हो तो आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे। बागेश्वर बाबा हो या कोई बाबा हों, उनके पास कोई तिलस्म या चमत्कार नहीं है।”

ज्ञात हो कि धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। 5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी।

‘सिनेमा का टिकट ब्लैक करता था मुख़्तार अंसारी, नाना नहीं थे ब्रिगेडियर’: स्थानीय लोगों ने ही खोली माफिया की पोल, एक ने बताया – मेरे परिवार में 6 को मरवा डाला

कभी पूर्वांचल को रक्तांचल बना देने वाले माफिया मुख़्तार अंसारी के आपराधिक इतिहास की पड़ताल में हमने मई 2023 के पहले हफ्ते में मऊ, गाजीपुर, चंदौली और वाराणसी जिलों में की। इस दौरान हमने मुख़्तार समर्थक मीडिया के उन दावों को भी जमीनी तौर पर परखा, जिसमें उसे रॉबिनहुड, पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी के खानदान से, खानदानी रईस, ब्रिगेडियर उस्मान के घराने से और विरासत में सियासत वाला जैसे नामों से नवाजा जाता रहा है।

हमने न सिर्फ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बल्कि मुस्लिम वर्ग के लोगों से भी जानकारी हासिल की। आखिरकार हमने पाया कि न तो मुख़्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर थे और न ही वह खानदानी रईस था।

मीडिया ने फैलाया ये झूठ

ऑपइंडिया ने मुख़्तार के परिवारिक बैकग्राउंड पर मऊ जिले के अशोक सिंह से बात की। अशोक सिंह के भाई मुन्ना सिंह की मुख़्तार अंसारी ने हत्या करवाई थी। अशोक सिंह ने हमें बताया कि मुख़्तार अंसारी न तो ख़ानदारी अमीर है और न ही किसी फौजी परिवार से। साथ ही अशोक सिंह ने मीडिया से मऊ और गाजीपुर आकर जमीनी पड़ताल कर के रिपोर्ट पब्लिश करने की अपील की।

अफ़ज़ाल की साईकिल स्टैंड, मुख़्तार टिकट ब्लैकिया

अशोक सिंह ने हमें आगे बताया कि आपराधिक दुनिया में आने से पहले मुख़्तार का भाई अफ़ज़ाल अंसारी गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में सच्चिदानंद राय की टॉकीज पर साइकिल स्टैंड का ठेका लिया करता था। अशोक सिंह का दावा है कि इसी टॉकीज पर मुख़्तार अंसारी टिकट ब्लैक किया करता था।

पहला चुनाव पुरानी कार से

अशोक सिंह ने 1995-96 का समय याद करते हुए बताया कि तब मुख़्तार ने अपना पहला चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि पहले चुनाव में मुख़्तार अंसारी ने एक पुरानी मारुति 800 से प्रचार किया था। बकौल अशोक सिंह, मुख़्तार की न तो कोई फैक्ट्री है और न कोई व्यापार तो ऐसे में जाँच एजेंसियों को उसके पैसे की पड़ताल करनी चाहिए क्योंकि उसने अपराध से अकूत पैसे जुटाए हैं।

डिप्टी SP मऊ धनंजय मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि एक खास वर्ग का नेता होने के अलावा बाकी मुख़्तार में कोई योग्यता नहीं है।

ब्रिगेडयर उस्मान या हामिद अंसारी का रिश्तेदार नहीं

अशोक सिंह ने दावा किया कि मुख़्तार अंसारी का ब्रिगेडियर उस्मान, पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी या पूर्व कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मुख़्तार अंसारी से कोई भी रिश्ता नहीं है। उन्होंने कहा, “मुख़्तार अंसारी के दादा का नाम कासिम अंसारी था। मुख़्तार अंसारी की ननिहाल गाजीपुर में सैदपुर के पास है जबकि बिर्गेडियर उस्मान मूल रूप से घोषी में बीवीपुर के थे। पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी भी सिर्फ मुख़्तार के गाँव के हैं, जिनसे मुख़्तार का कोई भी रक्त संबंध नहीं है।”

अशोक सिंह ने दावा किया कि मुख़्तार अपनी अंसारी बिरादरी में से लोगों को खोज कर उन्हें अपना रिश्तेदार बता देता है।

मुख़्तार द्वारा जिन MLA कृष्णानंद राय की हत्या करवाई गई थी, उनके भतीजे और भाजपा नेता आनंद राय उर्फ़ मुन्ना ने भी ऑपइंडिया को बताया कि मुख़्तार न तो किसी फौजी के परिवार से है और न ही किसी स्वतंत्रता सेनानी के घर से। मुन्ना राय के मुताबिक, जिन भी नामचीन लोगों को मुख़्तार अंसारी अपना रिश्तेदार बता कर प्रचारित करता है उनका उस से कोई लेना-देना नहीं है।

अपनी बिरादरी में सभी बड़े नामों को बताता है रिश्तेदार

मुख़्तार के गृह जनपद गाजीपुर से सपा नेता हैदर अली उर्फ़ टाइगर ने ऑपइंडिया से हुई बात की। उन्होंने बताया कि मुख़्तार अंसारी ने अपनी बिरादरी में झूठी रिश्तेदारियाँ खुद से जोड़ रखी हैं, जबकि उसकी रिश्तेदारी में कोई भी फौजी नहीं है। हैदर अली के अनुसार मुस्लिमों की जिस जाति से मुख्तार अंसारी आता है उसमें आबादी कम हैं इसलिए वो तमाम बड़े नामों से अपनी दूर की रिश्तेदारी खुद से जोड़ लेते हैं। हैदर अली ने यह भी सवाल किया कि अगर मुख़्तार अंसारी खानदानी रईस होते तो उनके बड़े भाई किसी और के सिनेमा हॉल पर नौकरी क्यों करते थे ?

पुलिस से हिसाब-किताब की सोच रखने वाला देशभक्त कैसे ?

मुख़्तार अंसारी द्वारा कत्ल कराए गए वाराणसी के निवासी सतीश सिंह के बेटे अजय सिंह ने भी ऑपइंडिया को बताया कि मीडिया के कुछ लोगों ने फर्जी में मुख़्तार अंसारी को रॉबिनहुड के रूप में प्रचारित कर रखा है। अजय सिंह ने मुख़्तार अंसारी को आपराधिक ही नहीं बल्कि दंगाई सोच वाला बताया। अजय सिंह ने सवाल किया कि जिसका बेटा पुलिस वालों से हिसाब करने की धमकी दे रहा हो उसके घर से देशभक्ति की आशा कैसे की जा सकती है।

मऊ से भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव ने ऑपइंडिया को बताया कि मुख़्तार के कुल या खानदान से ब्रिगेडियर उस्मान या किसी स्वतंत्रता सेनानी का कोई वास्ता नहीं है। बकौल प्रिंस यादव मुख़्तार अंसारी के गुर्गे उसके बारे में ऐसी फर्जी बातें फैलाते रहते हैं, जिन्हें अक्सर लोग सत्य मान लेते हैं।

देशभक्त नहीं बल्कि पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों का कातिल

मुख़्तार अंसारी द्वारा अपने परिवार में 6 हत्याओं के पीड़ित विजय शंकर सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि मुख़्तार न तो किसी देशभक्त परिवार से है और न ही किसी फौजी के खानदान से। बकौल विजय शंकर सिंह, मुख़्तार अंसारी ने उनके 2 भाइयों का कत्ल करवाया जिसमें एक पुलिस में तैनात थे और दूसरे पैरामिलिट्री के पूर्व जवान थे। विजय शंकर सिंह ने सवाल किया कि क्या ये काम देशभक्त परिवार वाले करते हैं?

ननिहाल में ब्रिगेडियर नहीं बल्कि अपराधी

त्रिभुवन सिंह के बेटे शक्ति सिंह ने हमसे बात करते हुए दावा किया कि मुख़्तार अंसारी के ननिहाल में लोगों पर कई आपराधिक केस दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे आपराधिक परिवार से ब्रिगेडियर उस्मान को जोड़ना भी गलत होगा। शक्ति सिंह ने मुख़्तार को आपराधिक के साथ दंगाई सोच वाला भी बताया।

140 सालों में पहली बार जीता कोई हिन्दू, दारुल उलूम के गढ़ में लहराया भगवा: रामपुर के बाद देवबंद में BJP ने तोड़े रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भाजपा ने राजनीति के कई मिथकों को ध्वस्त किया है। ऐसी ही मिथक रामजहाँ-जहाँ जीत की कल्पना भी नहीं की जा सकता थी, वहाँ-वहाँ भाजपा ने जीत दर्ज की। रामपुर विधानसभा के बाद सहारनपुर के देवबंद नगरपालिका (Deoband Nagar Palika) में भाजपा ने 75 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

देवबंद सीट से भाजपा के प्रत्याशी विपिन गर्ग ने आजादी के बाद यानी 75 सालों में पहली बार कमल खिलाया है। वहीं, 140 सालों में पहली बार कोई हिंदू (गैर-मुस्लिम) यहाँ से चुनाव जीतने में कामयाब हुआ है। यह इलाका मुस्लिम बहुल है और यहाँ विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम स्थित है। इस सीट से अब तक मुस्लिम ही जीतते रहा है।

भाजपा के विपिन गर्ग ने 4,700 वोट से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार जहीर फातिमा को हराया है। विपिन को कुल 22,659 मत मिले हैं। वहीं, सपा की जहीर फातिमा को 17,959 वोट मिले। वहीं, बसपा प्रत्याशी जमालुद्दीन अंसारी 7,079 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नौशाद कुरैशी को सिर्फ 483 वोट मिले हैं।

देवबंद नगरपालिका का गठन अंग्रेजों ने मई 1884 में की थी। तब से इसके अध्यक्ष पद पर मुस्लिम ही चुनाव जीतते आ रहे हैं। हालाँकि, 1950 और 1991-92 में निवर्तमान अध्यक्ष की अनुपस्थिति में गैर-मुस्लिम उपाध्यक्ष ने कुछ समय के लिए अध्यक्ष की भूमिका अदा की थी, लेकिन वे चुनाव जीतकर अध्यक्ष नहीं बने थे।

साल 1950 में नगरपालिका चैयरमैन सैयद मोहतशिम की हत्या के बाद तत्कालीन उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने और 1991-92 में तत्कालीन अध्यक्ष आशिक अंसारी के हज पर चले जाने के कारण कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नरेश कंसल ने अपनी भूमिका निभाई थी। साल 2007 में हबीब सिद्दीकी ने भाजपा के वीर सिंह सैनी को सिर्फ 250 वोटों से हराया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1989 से जनता के सीधे मत से नगर निगम अध्यक्ष, नगरपालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष आदि का चुनाव होते आ रहा है। इसके पहले चुने गए पार्षद या सदस्य अध्यक्ष चुनते थे। इस सीट पर साल 2007 में पहली बार भाजपा ने अपना प्रत्याशी उतारा था।

विपिन गर्ग योगी सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) राज्यमंत्री कुँवर बृजेश सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं। वोटिंग के दौरान वे वहाँ मौजूद थे। विपिन की जीत के बाद कुँवर बृजेश सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि पसमांदा भाजपा को वोट करेगा। मुस्लिमों ने पीएम मोदी और सीएम योगी में विश्वास जताया है।

बताते चलें कि दिसंबर 2022 में रामपुर में हुए रामपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा ने इसी रिकॉर्ड को तोड़ा था। बीजेपी की टिकट पर खड़े व्यवसायी आकाश सक्सेना ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आसिम रजा को लगभग 34,000 वोटों को हरा दिया था।

आजादी के बाद आकाश सक्सेना पहले गैर-मुस्लिम हैं, जिन्होंने इस सीट से जीत हासिल की है। अगर 1996 से 2002 और 2019 के दौरान को छोड़ दें तो साल 1985 से इस सीट पर आजम खान का कब्जा रहा है। उनके पहले भी इस सीट से मुस्लिम प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं।

आकाश सक्सेना आजम खान के भ्रष्टाचार एवं गुंडई के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ते आ रहे थे। आजम खान के उन्होंने शिकायतें देनी शुरू की थी। आजम खान के खिलाफ दर्ज 43 मामलों में आकाश सक्सेना पक्षकार हैं। आजम खान को जेल की सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता गई तो रामपुर सीट पर उपचुनाव हुआ था।

‘मेरा शौहर लव जिहाद के मिशन पर है, मुझे दिया तीन तलाक’: आगरा में ‘हिंदू युवती’ की शिकायत, बोली- मिस कॉल से हुई दोस्ती, बंधक बनाकर निकाह किया

उत्तर प्रदेश के आगरा में लव जिहाद और तीन तलाक का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि राजा खान ने मिस कॉल के बाद दोस्ती करते हुए खुद को हिंदू बताया था। इसके बाद बंधक बनाकर जबरन निकाह लिया। फिर बच्चे पैदा कर तीन तलाक दे घर से निकाल दिया। पीड़िता का दावा है कि राजा कई लड़कियों को शिकार बना चुका है और वह लव जिहाद के मिशन पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला उत्तर प्रदेश के रकाबगंज थाना क्षेत्र का है। पीड़िता का आरोप है कि साल 2017 में उसे मिस कॉल आया था। पीड़िता ने जब उस नंबर पर बात की तो आरोपित ने अपना नाम राजा और खुद को हिंदू बताया था। हालाँकि पीड़िता ने उससे बात करने से मना कर दिया। लेकिन वह बार-बार फोन करने लगा। इसके बाद दोनों में दोस्ती हो गई। इस बीच आरोपित राजा खान एक दिन पीड़िता को अपने घर ले गया। जहाँ राजा के परिजनों से मिलने के बाद उसे पता चला कि राजा हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम है।

सच्चाई पता चलने के बाद पीड़िता ने उसका विरोध करते हुए संबंध खत्म करने की बात कही। लेकिन राजा इसके लिए तैयार नहीं हुआ और उसने पीड़िता को बंधक बना लिया। यही नहीं, उसने मौलवी को बुलाकर न केवल जबरन निकाह करवा लिया बल्कि निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद राजा खान अपने घर में रखकर उसका शारीरिक शोषण करता और दिनभर काम कराता था।

पीड़िता का दावा है कि घर में काम करते समय उसे कुछ ऐसे सबूत मिले थे, जिनसे उसे इस बात का पता चला कि उसका शौहर राजा खान कई लड़कियों को अपना शिकार बना चुका है और वह लव जिहाद के मिशन पर है। इस मामले को लेकर पीड़िता ने राजा खान के परिजनों से बात की तो उन लोगों ने उसके मारपीट की। यही नहीं, राजा ने उसे तीन तलाक देकर घर से भी निकाल दिया। इसके बाद पीड़िता ने स्थानीय रकाबगंज में आरोपित के खिलाफ शिकायत की थी। लेकिन वहाँ सुनवाई न होने पर पीड़िता को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। अब कोर्ट के आदेश पर आरोपित के खिलाफ रकाबगंज थाने में FIR दर्ज हुई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

इस महीने का दूसरा मामला…

इस महीने आगरा में लव जिहाद का यह दूसरा मामला है। इससे पहले एक हिंदू लड़की ने आरोप लगाया था कि उसकी दोस्ती फिरोजाबाद के अरमान से उसकी मुस्लिम सहेली ने करवाई। युवती की माँ को जब इसका पता चला तो बेटी को समझाने की कोशिश की। माँ की फटकार से नाराज युवती घर छोड़कर चली गई। अरमान ने युवती के साथ शादी कर ली और हिंदू बनकर किराए के मकान मे रहने लगा। कुछ दिन बाद अरमान के दोस्त भी उससे दुष्कर्म करने लगे। विरोध करने पर युवती के साथ मारपीट की जाती। बुधवार (10 मई 2023) को पुलिस ने मामले की शिकायत पुलिस से की।

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कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रवीण सूद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अगले निदेशक होंगे। सूद 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। CBI के वर्तमान निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल का कार्यकाल 25 मई 2023 को पूरा हो रहा है। इसके बाद सूद अपना पदभार सँभालेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवीण सूद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी और भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के पैनल ने चुना है। सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में मध्य प्रदेश के DGP सुधीर सक्सेना भी थे।

यह भी कहा जा रहा है कि सूद उन अधिकारियों लिस्ट शामिल नहीं थे, जिन्हें सीबीआई चीफ के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। उनका नाम आखिरी वक्त में शामिल किया गया। इसको लेकर चौधरी ने सूद की सिफारिश के खिलाफ एक असहमति नोट पेश किया है।

DoPT विभाग की अधिसूचना (साभार: इंडिया टुडे)

प्रवीण सूद को जनवरी 2020 में कर्नाटक के DGP के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने साल 1989 में ASP के रूप में मैसुरु से अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 1999 में वह तीन साल के लिए मॉरीशस सरकार के पुलिस सलाहकार के रूप में विदेशी प्रतिनियुक्ति पर गए थे। वहाँ उन्होंने यूरोपीय और अमेरिकी पुलिस के साथ मिलकर काम किया था।

प्रवीण सूद कर्नाटक के डीजीपी बनने से पहले गृह विभाग के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, प्रशासन का काम किया है। वे अगले साल मई में सेवानिवृत्त होने वाले थे। हालाँकि, सीबीआई चीफ बनने के बाद वे कम-से-कम मई 2025 तक इस पद पर बने रहेंगे।

प्रवीण सूद मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई इंजीनियरिंग में आईआईटी दिल्ली से की है। साल 2003 में उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलुरु और मैक्सवेल स्कूल ऑफ गवर्नेंस, न्यूयॉर्क से पब्लिक पॉलिसी और प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए स्टडी ब्रेक लिया था।

उन्हें सेवा में उत्कृष्टता के लिए साल 1996 में मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक, सराहनीय सेवा के लिए साल 2002 में पुलिस पदक और विशिष्ट सेवा के लिए 2011 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, वर्ष 2011 में ‘यातायात प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी के सबसे नवीन उपयोग’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

बेंगलुरु शहर के पुलिस कमीश्नर के रूप में उन्होंने नागरिकों के लिए ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली’ ‘नम्मा 100’ लॉन्च की थी। यह 24X7 बहुभाषी अधिकारियों द्वारा प्रबंधित 100 लाइनें प्रदान करता है, और पूरे बेंगलुरु शहर में फैले 276 आपातकालीन प्रतिक्रिया वाहनों (होयसला) को सहयोग करता है।

लगभग 22 साल की कम उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर IPS बने प्रवीण सूद ने महिला पुलिस द्वारा प्रबंधित ‘सुरक्षा’ ऐप और ‘पिंक होयसला’ लॉन्च करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह ऐप संकट में घिरे महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार वर्तमान सीबीआई निदेशक सुबोध जायसवाल के कार्यकाल को बढ़ाने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। उनका कार्यकाल अगले 10 दिनों में यानी 25 मई को खत्म हो रहा है। सुबोध जायसवाल CBI चीफ बनने से पहले महाराष्ट्र सरकार में डीजीपी थे।

DGP प्रवीण सूद इस साल मार्च में सुर्खियों में आए थे। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के प्रमुख डीके शिवकुमार ने उन पर राज्य में भाजपा सरकार की संरक्षण देने का आरोप लगाया था। शिवकुमार ने आरोप लगाया था कि डीजीपी कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज कर रहे हैं। शिवकुमार ने सूद की गिरफ्तारी की माँग की थी।