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महाराष्ट्र के अकोला में इंस्टाग्राम पोस्ट पर भड़की हिंसा, भीड़ ने थाने पहुँचकर गाड़ियों में आग लगाई: दावा- 1 की मौत, 25 गिरफ्तार

महाराष्ट्र में अकोला में शनिवार (13 मई 2023) की शाम को एक इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इसके बाद इलाके में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई। दंगाइयों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ तकने कर आग लगा दी गई। इस हिंसा में एक महिला की मौत हो गई है।

घटना अकोला के ओल्ड सिटी थाना क्षेत्र का है। इंडिया टीवी के अनुसार, किसी व्यक्ति ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक विवादित पोस्ट डाल दी। इसके चलते कई लोग इकट्ठा होकर पुलिस थाने में पहुँचे और शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।

इसी बीच पुलिस स्टेशन पहुँची भीड़ बेकाबू हो गई और गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही दूसरा गुट भी सामने आ गया। देखते ही देखते पथराव और आगजनी शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग और आँसू गैस के गोले दागकर स्थिति पर नियंत्रण किया।

हिंसा के दौरान जमकर पथराव किया गया और लगभग 10 बाइकों में आग लगा दी गई। इस दौरान एक महिला की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। हालात को देखते हुए पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगा दी है। स्थिति नियंत्रित, लेकिन तनावपूर्ण है।

घटना के बाद पुलिस ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करके 25 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में 120 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह घटना पुराने शहर के गंगाधर चौक पोला चौक हरिहर पेठ इलाके की बस्ती में हुई है।

AAP सांसद राघव चड्ढा और अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा की दिल्ली में सगाई: केजरीवाल और चिदंबरम जैसे नेता रहे मौजूद, 150 मेहमानों की मौजूदगी में रिंग सेरेमनी

फिल्म अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा और आप नेता राघव चड्ढा ने आखिरकार शनिवार (13 मई, 2023) को सगाई कर ली। सगाई की जानकारी अभिनेत्री और आप नेता ने अपने-अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से दीं। परिणीति और राघव ने अपने-अपने ट्विटर अकाउंट पर एक जैसी कई तस्वीरें शेयर कीं। इस दौरान कई राजनेता और फिल्मी हस्तियाँ मौजूद रहीं।

राघव और परिणीति ने अपने ट्विटर हैंडल से सगाई की तस्वीरें शेयर कीं और वाहेगुरु से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। दोनों की सगाई दिल्ली के 400 साल पुराने कपूरथला हाउस में हुई है। दोनों की सगाई में फिल्म और इंडस्ट्री और राजनीति जगत के दिग्गज शामिल हुए। प्रियंका चोपड़ा अपने भाई सिद्धार्थ के साथ परिणीति और राघव की सगाई में शामिल हुईं।

सगाई समारोह में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कॉन्ग्रेस नेता पी चिंदबरम, कपिल सिब्बल, शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे, प्रियंका चतुर्वेदी समेत कई नेता पहुँचे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी अपनी पत्नी के साथ रिंग सेरेमनी का हिस्सा बने। जानकारी के मुताबिक, करीबी दोस्तों और परिवार के लोगों के अलावा इंगेजमेंट सेरेमनी में तकरीबन 150 मेहमान शामिल हुए।

रिपोर्टों की मानें तो साल के आखिर तक परिणीति और राघव विवाह के बंधन में बंध जाएँगे। परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा के बीच फिल्म ‘चमकीला’ की शूटिंग के दौरान दोस्ती हुई थी। जिसके बाद दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। बता दें कि राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को मुंबई में 23 मार्च 2023 की शाम एक रेस्टोरेंट के बाहर देखा गया था। इसके बाद दिल्ली में भी दोनों साथ देखे गए थे। सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल होने लगीं।

अपने रिश्ते के बारे में दोनों में से किसी ने खुलकर तो जानकारी नहीं दी लेकिन लोगों ने यह अंदाजा लगा लिया कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की जीत से नीतीश कुमार और ममता बनर्जी को झटका? PM चेहरा बनने की आड़ में अटकेगा रोड़ा, अब तक की बैठकों का असर भी बेनतीजा

हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस जीत को लेकर पूर्व सांसद राहुल गाँधी समेत पार्टी के कई नेता खुश नजर आए। वहीं, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेता कॉन्ग्रेस की जीत में अपनी खुशी ढूँढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। निश्चित तौर पर इस जीत से कॉन्ग्रेस नेताओं ने अपना खोया हुआ आत्मविश्वास हासिल कर लिया होगा। लेकिन कॉन्ग्रेस की इस सफलता से पीएम पद का ख्वाब देख रहे नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के सपनों को गहरा धक्का लगा है।

नीतीश-ममता देख रहे पीएम बनने का ख्वाब

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पीएम बनने का ख्वाब सँजोए हुए हैं। अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए नीतीश कुमार तो पूरे विपक्ष को एकजुट करने में लगे हुए हैं। वह कॉन्ग्रेस ‘अध्यक्ष’ मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव, बंगाल सीएम ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, झारखंड सीएम हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी, उद्धव ठाकरे से लेकर ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक तक से मुलाकात करते दिखाई दिए हैं।

भले ही इस मुलाकात के बाद नवीन पटनायक ने खुद को विपक्षी दलों की तथाकथित एकता से अलग करने का ऐलान करते हुए लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की बात कही हो और तमाम नेताओं से मुलाकात का परिणाम सिफर ही रहा हो लेकिन नीतीश कुमार किसी भी नेता से मुलाकात करने में कभी भी पीछे नहीं दिखाई दिए। वहीं, ममता बनर्जी भी नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं से मुलाकात कर चुकी हैं। साथ ही खुले मंच से विपक्षी एकता की वकालत करती देखी गईं हैं। ऐसे में इस बात में कोई दो राय नहीं है कि नीतीश और ममता सीएम की कुर्सी में बैठकर पीएम बनने का रास्ता खोज रहे हैं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने से पहले तक राहुल गाँधी की विपक्ष में भूमिका प्रश्नचिन्ह के घेरे में थी। यहाँ तक कि हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद भी राहुल गाँधी पार्टी के चेहरे की तरह नहीं दिख रहे थे। हालाँकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि राहुल की सांसदी जाने के बाद विपक्ष ने एकजुटता दिखाई थी। लेकिन वह एकजुटता राहुल गाँधी के लिए कम बल्कि भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ अधिक थी। कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कॉन्ग्रेस तो राहुल गाँधी का कद बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित करेगी, ये तो तय है।

यह बढ़ोतरी विपक्ष के नजरिए से अच्छी हो सकती है। विपक्ष इस बात से संतोष कर सकता है कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ मोदी लहर का कहर नहीं झेलना पड़ेगा। बल्कि कॉन्ग्रेस भी बीजेपी का मुकाबला करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत होती दिख रही है। लेकिन ममता और नीतीश के लिए कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की जीत किसी सदमे से कम नहीं होगी। दोनों ही नेताओं को यह पता है कि कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट करने को तैयार है। वहीं, यह भी साफ है कि राहुल गाँधी के नाम पर विपक्ष को एकजुट करने में किसी के भी दाँत खट्टे हो जाएँगे। ऐसे में, नीतीश और ममता को विपक्ष को एक कर पीएम बनने का सपना टूटता हुआ दिख रहा होगा।

हालाँकि विपक्ष एकजुट होगा या नहीं और यदि एकजुट होता है तो क्या नीतीश कुमार या ममता बनर्जी के नाम पर एकजुट हो पाता है या नहीं यह सब तो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है। लेकिन एक बात साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद आम चुनाव में जिस तरह मोदी लहर चली उससे हर कोई वाकिफ है। ऐसे में यदि एक बार फिर मोदी लहर चलती है तो विपक्ष का एक होना और न होना एक बराबर ही है।

कुत्ते भौंकते हैं, हाथी मस्त होकर बढ़ता चला जाता है… बिहार में शुरू हुआ बागेश्वर बाबा का कथा आयोजन: विरोधियों के भी लगवाए जयकारे, BJP नेताओं का जमघट

बिहार के पटना में बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमंत चरित्र कथा का वाचन शुरू कर दिया है। शनिवार (13 मई 2023) को कथा का पहला दिन था। पाँच दिनों तक होने वाली कथा के पहले दिन पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हरि के नाम के साथ कथा आरंभ की। कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री बिहार की धरती का गुणगान करते रहे। उन्होंने अपने अंदाज में विरोधियों को भी जवाब दिया।

कथा स्थल पर पहुँचने से पहले पंडित धीरेंद्र शास्त्री राघवेंद्र मठ पहुँचे। यहाँ उन्होंने राम जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद बागेश्वर वाले बाबा पटना के नौबतपुर स्थित तरेत पाली मठ पहुँचे। मठ के विशाल क्षेत्र को पंडाल से सजाया गया है। बागेश्वर सरकार को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति थी। भीड़ की वजह से विशाल पंडाल भी छोटा पड़ रहा था। पंडाल में प्रवेश करते ही भक्तों ने जय श्री राम, जय हनुमान और बागेश्वर सरकार की जय के नारे लगाए। अपने चिरपरिचित अंदाज में बागेश्वर बाबा ने कथा में आने वालों, कथा में न आने वालों और विरोधियों सबके जयकारे लगवाए।

कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बिहार के लोग धन्य हैं जहाँ माँ जानकी ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि इसी धरती पर आर्यभट्ट ने शून्य का अविष्कार किया था। बागेश्वर बाबा ने बिहार के लोगों के भी जयकारे लगवाए। बागेश्वर वाले बाबा ने हनुमान कथा के दौरान लोगों को व्यवधानों से निपटने का मार्ग सुझाया। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाथी जब गाँव में निकलता है तो लोग उसे केला, पूरी और पकवान खिलाते हैं। बच्चे हाथी को गणेश जी मानकर प्रणाम करते हैं। वहीं कुत्ते हाथी को देखकर भौंकना शुरू कर देते हैं। ऐसे में हाथी यदि कुत्तों को प्रतिउत्तर देने लगे तो लोग हाथी को पागल ठहरा देंगे। इसलिए हाथी अपनी चाल में मस्त होकर आगे बढ़ता रहता है।

व्यवधानों पर बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान जी का वह प्रसंग भी सुनाया जब वे माता सीता की खोज के लिए लंका पहुँचते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमान के मार्ग में कई बाधाएँ आईं लेकिन उन्होंने सबको पार कर अपना लक्ष्य प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने कई गीत भी गुनगुनाए। बागेश्वर सरकार ने लोगों को विचार करने के बाद कर्म करने की शिक्षा दी। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद अश्विनी चौबे, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सांसद राम कृपाल यादव, मनोज तिवारी बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी और बिहार में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा खास तौर पर मौजूद रहे।

बता दें धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। 5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी।

कोहली-कोहली के नारे, LSG के डगआउट में भीड़ ने फेंकी चीजें: नो-बॉल विवाद के बाद रुका रहा IPL मैच, हैदराबाद में खेल रही थी लखनऊ की टीम

आईपीएल 2023 (IPL 2023) का 58 वाँ मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेला गया। इस रोमांचक मैच को लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने जीत लिया। हालाँकि, मैच के बीच नो बॉल को लेकर हुए विवाद हो गया। इसके बाद LSG के डगआउट में एक दर्शक ने नट बोल्ट फेक दिया। इस वजह से खेल कई मिनटों तक रुका रहा। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ियों ने दर्शकों के व्यवहार और खराब अंपायरिंग की शिकायत भी की।

मैच के पहली पारी के 19वें ओवर में गेंदबाजी कर रहे आवेश खान की तीसरी गेंद बल्लेबाज अब्दुल समद के कमर के ऊपर से गुजरी। अंपायर ने इस गेंद को नो बॉल करार नहीं दिया। इसके बाद हैदराबाद के बल्लेबाजों ने नो बॉल के लिए रिव्यू लिया। तीसरे अंपायर ने भी नो बॉल की अपील ठुकरा दी। इस बात पर दोनों बल्लेबाज नाराज हो गए। इस दौरान दर्शकदीर्घा में बैठे दर्शकों में से किसी ने लखनऊ की डगआउट की तरफ कुछ फेंका।

‘क्रिकबज’ के अनुसार, दर्शकों में से किसी ने लखनऊ की डगआउट की तरफ नट और बोल्ट फेंका था। इसके बाद डगआउट में बैठे LSG टीम मैनेजमेंट ने मैच को बीच में रोकने की अपील की।

खिलाड़ियों की शिकायत के बाद फील्ड अंपायर और सुरक्षाकर्मी लखनऊ के डगआउट में पहुँचे। इसके बाद जहाँ से डगआउट में चीज फेंकी गई थी वहाँ पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई। पाँच मिनट से ज्यादा समय तक खेल रुका रहा। हैदराबाद की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 182 रनों का स्कोर खड़ा किया। हालाँकि, लखनऊ की टीम ने 4 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। एलएसजी ने 7 विकेट से यह मुकाबला जीता।

स्टेडियम में मौजूद क्रिकेट फैन्स के अनुसार दर्शकों के एक तबके ने मैच के बीच 2 बार गौतम गंभीर को चिढ़ाने के लिए कोहली-कोहली के नारे लगाए। दरअसल, भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर का हाल ही में कोहली के साथ मैदान पर विवाद हुआ था। मैच के बीच जब नो बॉल पर विवाद की वजह से खेल रोका गया था उस समय दर्शकों की भीड़ अचानक कोहली-कोहली चिल्लाने लगी। इसके बाद जब गंभीर पवेलियन की तरफ जा रहे थे उस वक्त भी लोगों ने कोहली-कोहली चिल्ला कर उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की थी।

ओडिशा के जिस मंत्री की कर दी गई हत्या, उनकी बेटी ने तोड़ा पिता का रिकॉर्ड: उपचुनाव में BJD की जीत, 1 लाख से भी अधिक वोट मिले

ओडिशा की झारसुगुड़ा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजद (BJD) की बड़ी जीत हुई। पार्टी ने यहाँ दिवंगत विधायक नब किशोर दास की बेटी दीपाली दास (Dipali Das) को प्रत्याशी बनाया था। बड़ी बात यह रही कि दीपाली को उनके पिता से भी अधिक वोट मिले। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी प्रत्याशी टंकधर त्रिपाठी को 48000 से अधिक वोटों से हराया। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई।

ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल ने स्वास्थ्य मंत्री रहे नब किशोर दास की हत्या के बाद उनकी बेटी दीपाली दास पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया था। पार्टी के इस विश्वास पर खरा उतरते हुए दीपाली ने जीत के मामले में अपने पिता को भी पीछे छोड़ दिया। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में नब किशोर ने 45699 वोटों के अंतर से झारसुगुड़ा विधानसभा से जीत दर्ज की थी। वहीं, अब उपचुनाव में दीपाली ने 48 हजार 237 वोटों के साथ बड़ी जीत हासिल की है।

कुल वोट मिलने के मामले में भी दीपाली अपने पिता एक कदम आगे रहीं। 2019 के विधानसभा चुनाव में नब किशोर दास को कुल 98 हजार 620 वोट मिले थे। वहीं, दीपाली दास को 1 लाख 7 हजार 198 वोट मिले। दीपाली के निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के उम्मीदवार टंकधर त्रिपाठी रहे, उन्हें 58 हजार 477 वोट मिले। जबकि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी तरुण पांडेय का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, उन्हें महज 4496 वोट मिले।

उपचुनाव में बंपर जीत दर्ज करने के बाद दीपाली दास ने अपनी सफलता का श्रेय झारसुगुड़ा के मतदाताओं और अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा है,

“यह जीत झारसुगुड़ा के लोगों की है। यह जीत उन लोगों की है जो पापा से बहुत प्यार करते थे। यह जीत मुख्यमंत्री जी और मेरे पापा से जुड़े सभी लोगों और पार्टी के कार्यकर्ताओं की है। यह जीत नब दास जी की है।”

पुलिसकर्मी ने गोली मारकर की थी नब किशोर दास की हत्या

दीपाली दास के पिता नब किशोर दास झारसुगुड़ा से विधायक और ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री थे। 29 जनवरी, 2023 को नब किशोर झारसुगुड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान कार स उतरते ही उनकी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी ने ताबड़तोड़ 5 गोलियाँ नब किशोर दास के सीने में मार दीं। आनन फानन में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। जहाँ उनकी मौत हो गई। नब किशोर दास के निधन के बाद से झारसुगुड़ा विधानसभा सीट खाली थी।

दलित नाबालिग लड़की का अपहरण, फिर गैंगरेप: यूपी पुलिस ने वारिस और उसके साथी के खिलाफ दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप की खबर है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित का नाम वारिस बताया जा रहा है। मामले में एक अन्य आरोपित भी बताया जा रहा है जिसके नाम का फ़िलहाल खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। घटना बुधवार (10 मई 2023) रात की है।

पीड़िता की उम्र 14 साल बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, मामला अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव सैम्बसी में रहने वाले एक पिता ने अपनी बेटी के साथ गैंगरेप होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई है। पीड़ित पिता का आरोप है कि बुधवार की रात गाँव के ही 2 युवकों ने उनके घर के नंबर पर फोन किया। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे। फोन पीड़िता ने उठाया और घर से बाहर निकल गई। आरोप है कि इस दौरान बाइक सवार दोनों आरोपितों ने पीड़िता का अपहरण कर लिया और उसे गाँव के बाहर ले गए।

शिकायत में आगे बताया गया है कि गाँव से बाहर ले जा कर दोनों आरोपितों ने उनकी बेटी से बारी-बारी से गैंगरेप किया। कुछ समय बाद वो दोनों लड़की को छोड़ कर फरार हो गए। बताया गया है कि जाते हुए दोनों ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो उसे जान से मार दिया जाएगा। लड़की ने घर पहुँच कर अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। मिली जानकारी के मुताबिक, वारिस और एक अन्य नामजद आरोपित पर IPC की धारा 376 D (गैंगरेप), पॉक्सो और SC/ST एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO मोहनगंज धीरेन्द्र यादव ने बताया कि केस दर्ज कर के दोनों फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित ट्रक ड्राइवर हैं जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस टीमें लगी हुई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। वारिस के अब्बा का नाम राजबहादुर होने के सवाल पर थाना प्रभारी ने बताया कि उनके इलाके में ऐसे नाम वाले कई मुस्लिम रहते हैं।

‘आरोपित की सुरक्षा को खतरा हो सकता है’: आरोपित अजमत अली की माँग के बाद दिल्ली HC ने धर्मांतरण संबंधी खबरें हटाने का दिया आदेश, ‘जिहादी’ शब्द पर जताई आपत्ति

दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल, ट्विटर समेत कुछ मीडिया हाउस को जबरन धर्मांतरण की खबरों और उनके वीडियो लिंक को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। दरअसल, जबरन धर्मांतरण के आरोपित अजमत अली ने याचिका दायर कहा था कि ऐसी खबरों से उसकी प्रतिष्ठा और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने यह आदेश शुक्रवार (12 मई, 2023) को दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने अपने फैसले में कहा है कि इस तरह की खबरें और वीडियो गंभीर खतरा हैं, क्योंकि इन पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स करते हैं। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, समाचार प्रसारण और डिजिटल मानक प्राधिकरण तथा सर्च इंजन गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर व कुछ मीडिया हाउस को नोटिस जारी किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने जिन मीडिया हाउस को नोटिस भेजा है उसमें अदालत ने सुदर्शन न्यूज के अध्यक्ष सुरेश चव्हाणके, ओडिशा टेलीविजन लिमिटेड, पिट्टी मीडिया एलएलपी, द ऑर्गनाइजर और ‘वॉयस ऑफ द नेशन’ के मालिक भारत प्रकाशन का नाम शामिल है। कोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही याचिका पर जवाब देने के लिए भी कहा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि इन खबरों का लिंक ब्लॉक करने के लिए जो निर्देश दिए गए हैं वे चैनलों और सभी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए हैं। उसने जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा है, “यह याचिकाकर्ता की सुरक्षा का सवाल है। यदि चैनल लिंक को ब्लॉक नहीं करते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसे ब्लॉक कर दें। मेरा निर्देश स्पष्ट है। इसे सभी को ब्लॉक करना होगा।” साथ ही कोर्ट ने आरोपित के लिए ‘जिहादी’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई

क्या है मामला

दिल्ली में रहने वाली एक महिला ने गत 19 अप्रैल को अजमत अली खान नामक व्यक्ति के खिलाफ जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इसके बाद मामला मीडिया में आया और कुछ न्यूज चैनलों तथा वेबसाइट ने इस मुद्दे को उठाया था। इन खबरों और वीडियो को लेकर ही अजमत अली खान ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि महिला द्वारा उस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। ऐसी खबरें उसकी प्रतिष्ठा और सुरक्षा के लिए सही नहीं हैं। इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए।

स्कूल-कॉलेजों में बुर्का के समर्थन में अभियान चलाने वाली फातिमा की जीत, समान ड्रेस कोड की पैरवी करने वाले BJP प्रत्याशी हारे

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी का वोट शेयर न गिरा हो लेकिन कॉन्ग्रेस ज्यादा सीटें जीत कर सत्ता पर काबिज होने जा रही है। बीजेपी के कई मंत्री चुनाव हार गए हैं। उनमें कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश भी शामिल हैं। बीसी नागेश ने स्कूलों में एक समान यूनिफॉर्म की वकालत की थी। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार कनीज़ फातिमा चुनाव जीत चुकी हैं। कनीज़ ने स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं के लिए हिजाब की वकालत की थी।

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने तिपटूर (Tiptur) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उनका मुकाबला कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के शदाक्षरी (K Shadakshari) और जेडीएस के केटी शांताकुमार (KT shanthakumara) से था। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के शदाक्षरी ने बीसी नागेश को लगभग 17 हजार वोटों से हराया। बीसी नागेश ने स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड की वकालत की थी।

दूसरी तरफ मुस्लिम छात्राओं के लिए हिजाब की माँग करने वाली कनीज़ फातिमा को कॉन्ग्रेस ने गुलबर्गा उत्तर सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। उनका मुकाबला बीजेपी के चंद्रकांत बी पाटिल (Chandrakant B patil) से था। बीजेपी उम्मीदवार को लगभग 1200 मतों से हार का सामना करना पड़ा। गुलबर्गा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी लगभग 60 फीसदी है। कई मुस्लिम उम्मीदवारों के मैदान में होने के बावजूद हिजाब को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली कनीज़ चुनाव जीत गईं।

कनीज़ ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह मुस्लिमों को एक होकर वोट करने की अपील करती रही थी। यही कारण है कि कई मुस्लिम उम्मीदवारों के बावजूद इलाके के लोगों का वोट नहीं बँटा।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने अपने 31 मंत्रियों में से 25 पर भरोसा जताया था और उन्हें उनकी पारंपरिक सीट से ही चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 12 मंत्रियों ने अपनी सीट बचा ली जबकि 11 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई शिग्गाँव से लगभग 35 हजार वोटों से विजयी हुए।

कर्नाटक में नतीजे देख राहुल गाँधी गदगद, भूले EVM का रोना: बिहार में हार के बाद बोले थे- ये EVM नहीं, MVM- मोदी वोटिंग मशीन

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कॉन्ग्रेस गदगद है। उसके नेता इसके लिए कर्नाटक की जनता का धन्यवाद दे रहे हैं। हालाँकि, ये वही कॉन्ग्रेस है, जो हार के डर से 10 मई को हुए मतदान से पहले ईवीएम को लेकर सवाल उठाया था। उन दिनों को याद करके सोशल मीडिया कॉन्ग्रेस पर सवाल उठा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा कि कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल के लिए दक्षिण अफ्रीका से ईवीएम लाया गया है और ये सारे ईवीएम इस्तेमाल किए हुए हैं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने उनकी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए डिटेल में चिट्ठी लिखी थी।

ये पहली बार नहीं है, जब कॉन्ग्रेस ने हार के डर से EVM पर सवाल उठाए हैं। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की लहर के कारण मिलती जा रही एक के बाद एक पर कॉन्ग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था। अन्य विपक्षी दलों ने कॉन्ग्रेस के हाँ में हाँ मिलाई थी। बिहार के अररिया में राहुल गाँधी ने EVM को MVM- मोदी वोटिंग मशीन कहा था।

पिछले साल मई में हुए पाँच राज्यों में चुनाव के दौरान पिछड़ने पर कॉन्ग्रेस ने EVM का रोना रोया था। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों उतर गए थे और दिल्ली में पार्टी कार्यालय के बाहर ईवीएम का विरोध किया था। उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका जताई थी।

साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने EVM पर सवाल उठाते हुए लिखा था, “जब मंगल ग्रह और चाँद की ओर जाते उपक्रम की दिशा को धरती से नियंत्रित किया जा सकता है तो ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती? अमेरिका में अगर ईवीएम से चुनाव होता तो क्या ट्रंप हार सकते थे?”

साल 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ईवीएम को लेकर संदेह जताया था। कॉन्ग्रेस के डाटा एनालिटिक्स मुखिया प्रवीण चक्रवर्ती की एक रिपोर्ट पढ़ने के बाद से राहुल गाँधी यह मानने लगे थे कि कॉन्ग्रेस EVM में गड़बड़ी के चलते ही हारी।

संडे गार्डियन अखबार ने उस दौरान दावा किया था कि राहुल गाँधी ने बैलेट से चुनाव कराने माँग उठाने के साथ विधानसभा निर्वाचन के बहिष्कार का निर्णय लिया है। हालाँकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता सहमत नहीं दिखे थे। वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस बहिष्कार करेगी तो उसकी बची-खुची जगह भी क्षेत्रीय दलों के हाथों में चली जाएगी।

जून 2019 में कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे। सोनिया गाँधी ने कहा था कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद देश की चुनावी प्रक्रियाओं पर ‘कई तरह के संदेह’ उभरे। बीजेपी द्वारा ईवीएम में हेराफेरी के कॉन्ग्रेस के आरोप को दोहराते हुए सोनिया गाँधी ने रायबरेली ने कहा था कि बिना आग के धुआँ नहीं उठता।

इतना ही नहीं, साल 2017 में कॉन्ग्रेस के तत्कालीन नेता गुलाम नबी आजाद ने भी विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और ईवीएम पर सवाल उठाए थे। जब पार्टी के एक नेता वीरप्पा मोइली ने कहा था कि ईवीएम सही है तो आजाद ने उनके बयान को व्यक्तिगत बता दिया था।

सोशल मीडिया पर नीतू पांडेय नाम की एक यूजर ने लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस विजय हुई, इसीलिए ईवीएम का रोना नहीं रोए? अगर भाजपा जीत जाती तो evm का रोना शुरू कर देते।”

त्रिलोकीनाथ चौधरी नाम के यूजर ने लिखा, “ईवीएम पर गला फाड़ने वाले कांग्रेस वामपंथी और जाहिल जिहादियों क्या कर्नाटक इलेक्शन में कांग्रेस की जीत गलत ढंग से हुई. EVM पर अब रैली और धरना नहीं करोगे?ठ

संजीव पराशर नाम के शख्स ने लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की बंपर जीत पर बधाइयां खुशी की बात है कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल आज ईवीएम पर बिना निशाना साधे इस जीत को सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं।”