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सिर पर इस्लामी टोपी, कंधे पर हरा गमछा… तबीयत में सुधार होते ही लालू प्रसाद यादव घर से निकलकर सीधे पहुँचे मजार, दुआ पढ़ने का वीडियो वायरल

दिल्ली से पटना लौटने के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव शुक्रवार (12 मई 2023) को पहली बार घर से बाहर निकले हैं। इस दौरान उन्होंने पटना हाईकोर्ट के पास मौजूद मजार पर जियारत की। इस दौरान लालू ने वहाँ चादर भी चढ़ाई। इस दौरान लालू यादव के बेटे तेज प्रताप ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बजरंग बली भाजपा से नाराज हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लालू प्रसाद यादव ने जिस मजार पर दुआ पढ़ी है उसका नाम शहीद सफदर पीर मुराद शाह रहमतुल्ला अलैह है। बताया जा रहा है कि लालू ने यहाँ वतन की तरक्की और बिहार की बेहतरी की दुआ पढ़ी। इस दौरान लालू ने गंगा जमुनी तहजीब को मजबूत करने पर बल दिया। जियारत के दौरान लालू यादव ने बाकायदा सिर पर इस्लामी टोपी और कंधे पर हरे रंग का गमछा डाल रखा था। इस जियारत का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें लालू यादव के साथ मुस्लिम समाज के कुछ अन्य लोग दुआ पढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

बताते चलें कि सिंगापुर से किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के बाद लालू यादव लम्बे समय तक दिल्ली में रुके थे। यहाँ वो अपनी बड़ी बेटी राज्यसभा सांसद मीसा भारती के आवास पर रुके थे। 28 अप्रैल को लालू दिल्ली से बिहार में पटना स्थित अपने आवास पर पहुँचे थे। यहाँ थोड़ा तबियत ठीक होने के बाद अब लालू 12 मई को पटना स्थित मजार पर पहुँच गए। इस बीच लालू यादव के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम पर अपनी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी से बजरंग बली नाराज हैं।

तेजस्वी के भाई तेज प्रताप यादव ने भी भाजपा को रावण बताया। उन्होंने लिखा, “ये होना ही था। बजरंगबली ने रावण की लंका जला डाली। कर्नाटका में बीजेपी,आरएसएस नाम की गंदगी को साफ करने के लिए जनता को बधाई। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस मे है भाई भाई।”

सिद्धारमैया के बेटे ने CM कुर्सी पर ठोका पिता का दावा, उधर रो कर DK शिवकुमार ने भी चला इमोशनल कार्ड: कर्नाटक में जीत के बाद कॉन्ग्रेस की नई टेंशन

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं। कॉन्ग्रेस ने अपने दम पर बहुमत के आँकड़े को पार कर लिया है। इसी के साथ कॉन्ग्रेस में सीएम पद को लेकर घमसान मचता नजर आ रहा है। कॉन्ग्रेस के दो बड़े नेता सीएम पद के दावेदार माने जा रहे हैं। पहले हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया और दूसरे हैं कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिव कुमार। कॉन्ग्रेस के दोनों धड़ों के लोग अब अपने-अपने नेता के समर्थन में खुलकर आ रहे हैं।

बहुमत मिलता देख सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने पिता के लिए मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक दिया। यतींद्र ने कहा कि राज्य के हित में मेरे पिता को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल का दम भरते हुए कहा कि यह राज्य के लोगों के हित में होगा। यतींद्र ने कहा कि सिद्धारमैया के दम पर ही कॉन्ग्रेस राज्य में सत्ता के करीब पहुँची है। समर्थक भी खुलकर सीएम पद के लिए सिद्धारमैया का समर्थन कर रहे हैं। मैसूर के एक समर्थक ने तो अपनी छाती पर सिद्धारमैया सीएम टैटू गुदवा लिया।

दूसरी तरफ कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत देख प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने इमोशनल कार्ड चला। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि मैं इस जीत के लिए अपने कार्यकर्ताओं और अपनी पार्टी के नेताओं को श्रेय देता हूँ जिन्होंने बहुत मेहनत की। सिद्धारमैया ने कहा कि कॉन्ग्रेस कर्नाटक में 130 से ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोग बदलाव चाहते थे क्योंकि वे भाजपा सरकार से तंग आ चुके थे।

डीके शिवकुमार 8 बार विधायक रह चुके हैं और उनका सीएम बनने का सपना काफी पुराना है। डीके शिवकुमार ने शुक्रवार (12 मई) को एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी तीन सालों की मेहनत का वीडियो शेयर किया। कहा जा रहा है कि इस तरह उन्होंने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर दी है।

बता दें कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटों के लिए 10 मई को चुनाव कराए गए थे। जिसमें 73.19 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले थे। ताजा आँकड़ों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस 135, भाजपा 65 और जेडीएस 22 सीटों पर आगे है।

मेयर चुनाव में सभी 17 सीटों पर सूपड़ा साफ़, फिर किस बात का जश्न मना रहे अखिलेश यादव? आज़म खान के गढ़ में भी मिली हार, नगपालिका-पंचायत में भी निराशा

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में एक बार फिर भगवा लहराता दिख रहा है। अब तक सामने आए रुझान में बीजेपी सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए बड़ी जीत की कर बढ़ रही है। हालाँकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी के निकाय चुनावों की हार का गम छिपाने के लिए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का जश्न मनाते दिख रहे हैं।

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम को लेके अखिलेश यादव ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है,

“कर्नाटक का संदेश यह है कि भाजपा की नकारात्मक, सांप्रदायिक, भ्रष्टाचारी, अमीरोन्मुखी, महिला-युवा विरोधी, सामाजिक-बँटवारे, झूठे प्रचारवाली, व्यक्तिवादी राजनीति का ‘अंतकाल’ शुरू हो गया है। यह नए सकारात्मक भारत का महँगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार व वैमनस्य के खिलाफ सख्त जनादेश है।”

वास्तव में, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में बीजेपी बंपर जीत हासिल करती दिख रही है। मेयर चुनाव में तो विपक्ष का सूफड़ा साफ हो गया। मेयर के लिए हुए चुनाव में 17 में से 17 सीटें बीजेपी के पाले में जाती दिख रही है। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष के लिए 199 सीटों में हुए मतदान में से 96 सीटों में बीजेपी तो वहीं 35 में सपा, 19 में बसपा और 04 सीटों में कॉन्ग्रेस आगे चल रही है।

वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष की 544 सीटों में से 444 सीटों के रुझान सामने आए हैं। यहाँ भी भाजपा प्रचण्ड जीत की ओर जाती दिख रही है। बीजेपी 174, सपा 73, बसपा 35 और 04 सीटें कॉन्ग्रेस के खाते में जाती नजर आ रही हैं। यही हाल यूपी के उपचुनाव का भी है। सपा का गढ़ कहे जाने वाली स्वार सीट में सपा की हार हुई है। वहीं, छानबे में भी सपा उम्मीदवार पीछे चल रही हैं। दोनों ही सीटों पर ‘अपना दल’ जीतती दिख रही है।

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में करारी हार के बाद भी अखिलेश यादव कर्नाटक में बीजेपी की हार पर जश्न मना रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए ट्रोल करना शुरू कर दिया। सुधीर मिश्रा नामक यूजर ने लिखा, “बेगानी शादी में ‘अब्दुल्ला’ दीवाना। यूपी नगर निकाय में सपा का बहुत बुरा हाल हुआ है। सपा तीसरे और चौथे नंबर पर है। यहाँ तक रामपुर से अब्दुल्ला आजम वाली सीट भी सपा हार गई है। लोकतंत्र में इसी को ‘बेशर्मी’ कहते हैं।”

नरेंद्र मोदी फैन नामक यूजर ने लिखा, “उत्तर प्रदेश में 17 में से 1 मेयर बना नही सपा का और ये संदेश स्पष्ट की बात कर रहा है।”

राजेन्द्र शुक्ला नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा है, “उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव का संदेश यह है कि समाजवादी पार्टी की नकारात्मक, परिवारवादी भ्रष्टाचारी, जातिवादी, तुष्टीकरण की राजनीति, लड़के हैं गलती हो जाती है, मजहब विशेष से प्रेम करने वाली राजनीति का ‘अंतकाल’ शुरू हो गया है। अब ठीक है।”

योगेश गुप्ता नामक यूजर ने लिखा, “यूपी में समाजवादी पार्टी की हार पर एक ट्वीट तो कर दीजिए यादव जी। आप अपनी हार की कुंडली भी लिख दो।”

राणा सिंह राजपुरोहित नामक यूजर ने लिखा, “अपने प्रदेश के दोनों उपचुनाव में खुद की पार्टी हार गई। रामपुर तो एक समय सपा का गढ़ था, वहाँ भी हार गए। निकाय चुनाव में सुपड़ा साफ हो गया। लेकिन खुशी कॉन्ग्रेस के जीत में हो रही है। वाह राजनीति।”

कुंदन नामक यूजर ने लिखा, “खुद की हालत देख लो टोंटी भाई, कर्नाटक को भाजपा और कॉन्ग्रेस पर छोड़ दो।”

जितना JDS को नुकसान उतना ही कॉन्ग्रेस को फायदा, 1% भी नहीं घटा भाजपा का वोट शेयर: कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम का एक आँकड़ा यह भी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग साफ़ हो गए हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त कर के सत्ता में वापसी की है। भले ही अति-उत्साह में पार्टी के समर्थक ये दावा कर रहे हों कि 2024 के लोकसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा, लेकिन इतिहास देख कर ऐसा लगता नहीं है। 2018 विधानसभा चुनाव में भी कॉन्ग्रेस मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसने सरकार बनाई थी।

लेकिन, 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बदतर ही रहा। 2023 विधानसभा चुनाव में कर्नाटक चुनाव परिणाम की बात करें तो जहाँ कॉन्ग्रेस को 135 सीटें मिलती हुई दिख रही है, वहीं भाजपा 65 और JDS 20 सीटें प्राप्त करती हुई दिख रही है। वोट प्रतिशत की बात करें तो कॉन्ग्रेस को 43.1%, वहीं भाजपा को 35.6% वोट मिले हैं। जेडीएस का वोट शेयर 13.3% है। आइए, 2018 विधानसभा चुनाव परिणाम से इसकी तुलना कर के देखते हैं।

उस चुनाव में भाजपा 104 सीटें पा कर सबसे बड़े दल में उभरी थी, वहीं दूसरे नंबर पर आई कॉन्ग्रेस को 80 सीटें मिली थीं। वहीं जेडीएस के 37 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस तरह से देखें तो इस बार भाजपा को 39 सीटों का और JDS को 17 सीटों का नुकसान हुआ है। वोट प्रतिशत की बात करें तो 5 साल पहले हुए चुनाव में भाजपा के खाते में जहाँ 36.22% वोट आए थे, वहीं कॉन्ग्रेस को 38.04% और जेडीएस को 18.3% वोट मिले थे।

अब आइए, देखते हैं कि कर्नाटक में किसे कितना नुकसान और फायदा हुआ है, मत प्रतिशत के मामले में। कॉन्ग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग 5% बढ़ा है, वहीं जेडीएस को 5% वोटों का नुकसान झेलना पड़ा है। यानी, जेडीएस का जितना नुकसान हुआ है कॉन्ग्रेस को उतना ही फायदा मिला है। भाजपा के वोट शेयर में कोई ऐसी गिरावट नहीं दर्ज की गई है, जिससे इसे सत्ता विरोधी लहर कहा जा सके। भाजपा का वोट शेयर 1% भी नहीं घटा है।

टिकट कटने पर भाजपा छोड़ कॉन्ग्रेस में चले गए थे पूर्व CM जगदीश शेट्टार: अब चेले ने ही दोगुने वोट से दे दी मात, BJP की जीत

कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार (Jagdish Shettar) चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के प्रत्याशी महेश टेंगीनकई ने हराया है। जगदीश शेट्टार वहाँ के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं।

जगदीश शेट्टार हुबली धारवाड़ सेंट्रल सीट से चुनाव मैदान में थे। दरअसल, इस चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद वे पार्टी से बगावत करके कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। इसी सीट से वे पहले भाजपा के विधायक थे। इतना ही नहीं, भाजपा की सरकार में वे मुख्यमंत्री भी बने थे।

जगदीश शेट्टार लिंगायत समुदाय के बड़े नेताओं में इन्हें शामिल किया जाता है। भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के बाद लिंगायत समुदाय में शेट्टार का प्रभाव काफी माना जाता है। जगदीश शेट्टार को हराने वाले भाजपा के महेश टेंगीकनई चुनाव प्रचार के दौरान खुद को उनका चेला बताते रहे हैं।

यह सीट लिंगायत बहुल है और टेंगीनकई भी लिंगायत हैं। कहा जाता है कि उनकी भी यहाँ अच्छी पकड़ है। खबर लिखे जाने तक, जगदीश शेट्टार वोट के मामले में दूसरे नंबर पर थे। निर्वाचन आयोग के आँकड़ों के अनुसार, इस सीट से चुनाव जीतने वाले उनके शिष्य महेश को कुल 64,910 वोट मिले हैं, जो कुल वोट का 66.9 प्रतिशत है।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता जगदीश शेट्टार को कुल 29,340 वोट मिले हैं। यह कुल वोटों का 30.24 प्रतिशत है। इस सीट पर कुल 16 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से 6 लोगों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। शेट्टार लगातार 6 बार से विधायक रहे हैं और इस सीट से तीन बार जीत चुके हैं।

बता दें कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को कनकपुरा सीट से बड़ी जीत मिली है। उन्होंने अपने विरोधी उम्मीदवार को 1.5 लाख से अधिक वोटों से हराया है। यह उनकी लगातार 8वीं जीत है। डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भी हैं। वहीं, पूर्व सीएम सिद्धारमैया भी वरुणा सीट से चुनाव जीत गए हैं।

बागेश्वर धाम के कार्यक्रम पर आतंकी हमले का साया! बिहार पहुँचे धीरेन्द्र शास्त्री का केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत, मनोज तिवारी ने गाड़ी ड्राइव कर होटल तक पहुँचाया

बागेश्वर धाम के पुजारी और कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री बिहार के पटना पहुँच चुके हैं। पटना पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है। बिहार पुलिस ने इस कार्यक्रम को लेकर अलर्ट भी जारी किया हुआ है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पटना एयरपोर्ट पर भारी संख्या में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के समर्थक मौजूद रहे। पटना में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बीजेपी सांसद राम कृपाल यादव ने उनका स्वागत किया। भव्य स्वागत से गदगद पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भोजपुरी में उपस्थिति लोगों का हाल चाल पूछा। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी खुद गाड़ी चलाकर धीरेंद्र शास्त्री को होटल तक ले गए। पटना आने से पहले पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर बिहार के लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। बागेश्वर बाबा पटना के नौबतपुर स्थित तरेत पाली मठ पर हनुमान कथा कहेंगे।

5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी। बिहार में बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम को लेकर राजनीति भी खूब हुई। सत्ताधारी दल के लोग और अन्य नेता बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। विरोध की शुरुआत राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और बिहार सरकार में मंत्री सुरेंद्र यादव ने की थी। अपने ही मंत्रियों और नेताओं के विरोध के बावजूद बिहार सरकार ने बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी।

आयोजकों ने पटना के गाँधी मैदान में कार्यक्रम की अनुमति माँगी थी लेकिन भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर वहाँ प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद आयोजन समिति ने नौबतपुर के तरेत पाली मठ में कथा और कार्यक्रम की अनुमति माँगी। इस स्थल पर पटना जिला प्रशासन ने कथा और दिव्य दरबार की अनुमति दे दी। हालाँकि जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान आतंकी हमले का भी अलर्ट जारी किया है। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान आतंकी आईईडी धमाका करने की प्लानिंग कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की हुई है।

सचिन तेंदुलकर के नाम और फोटो-आवाज का इस्तेमाल कर दिया जा रहा झाँसा, पूर्व क्रिकेटर ने मुंबई पुलिस में दर्ज कराई FIR

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) नाम पर फर्जी विज्ञापन चलाया जा रहा है। कई व‍िज्ञापनों में उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसको देखकर ‘भारत रत्न’ पूर्व क्रिकेटर भड़क गए हैं। उन्होंने इसकी पुलिस में शिकायत की है। उनकी शिकायत पर मुंबई पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

तेंदुलकर ने मुंबई को अपनी शिकायत में बताया कि उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल कर लोगों को झाँसा देने का काम किया जा रहा है। यह सब इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 426, 465 और 500 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी अपनी आवाज आदि के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अमिताभ बच्चन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से कहा था कि बीते कुछ समय से अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस वजह से उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कोर्ट में व्हाट्सएप लकी ड्रॉ सहित अमिताभ के नाम से कई अन्य और विज्ञापनों का हवाला दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि मैसर्स स्वैग शर्ट्स, https://www.swagshirts99.com/ नामक वेबसाइट बनाकर टी-शर्ट बेच रहा है। इसमें अमिताभ बच्चन की फोटो लगी हुई है। इसी प्रकार ग्वालियर का एक पोस्टर विक्रेता अमिताभ बच्चन की फोटो वाले पोस्टर बेच रहा है।

अमिताभ बच्चन का कहना था कि कई कम्पनियाँ उनके नाम, फोटो और आवाज का दुरुपयोग कर रही हैं। इसलिए, उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बिना अनुमति के उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी का उपयोग करने पर रोक लगाने की माँग की थी।

उन्होंने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से एक लॉटरी एड भी चल रहा है, जिसमें प्रमोशनल बैनर पर उनकी फोटो और KBC का लोगो लगा हुआ है। यह बैनर लोगों को सिर्फ भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए टेलीकॉम डिपार्टमेंट और अथॉरिटी को आदेश जारी किया था। अपने आदेश में उन्होंने कहा था कि अमिताभ बच्चन का नाम, फोटो और उन पर्सनैलिटी ट्रेट्स को तुरंत हटाया जाए, जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

कोर्ट ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स से उन फोन नंबर्स के बारे में भी जानकारी देने को कहा, जो अमिताभ बच्चन के नाम और आवाज का अवैध उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से उन ऑनलाइन लिंक्स को भी हटाने को कहा है, जो अमिताभ की पर्सनैलिटी राइट्स को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

‘भाजपा को न बिकें कॉन्ग्रेस विधायक, भले जाना पड़े जेल’: TMC नेता की कर्नाटक चुनाव परिणामों पर नसीहत… नेटीजेंस ने कहा- अभी से बोली लगना शुरू

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता साकेत गोखले ने कर्नाटक में कॉन्ग्रेस विधायकों को अजीब सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में वो भाजपा को वोट देने के बजाय जेल जाना ज्यादा पसंद करें। गोखले ने कहा कि नवनिर्वाचित कॉन्ग्रेस विधायक भाजपा को अपना वोट न बेचें। शनिवार (13 मई 2023) को एक ट्वीट के माध्यम से उन्होंने कहा कि कोई कदम उठाने से पहले कॉन्ग्रेस विधायकों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिन्होंने उन्हें वोट किया है।

साकेत गोखले तृणमूल कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। शुरुआती रुझानों कर्नाटक विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु परिणाम दिखाई देने पर उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायकों को नसीहत दे डाली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जीत कर विधानसभा पहुँच रहे कॉन्ग्रेस विधायकों को किसी भी हाल में अपना वोट नहीं बेचना चाहिए भले ही इसके बदले उन्हें जेल ही क्यों न जाना पड़े। गोखले ने कॉन्ग्रेस विधायकों से कहा कि भाजपा का समर्थन करने से पहले उन्हें उन वोटरों के बारे में सोचना चाहिए जिन्होंने उन्हें विधानसभा पहुँचाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साकेत गोखले पर क्राउड फंडिंग में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। उन पर चंदे से जुटाई गई 1.07 करोड़ रुपए की राशि के दुरुपयोग की जाँच ED कर रही है। गोखले अहमदाबाद की एक विशेष अदालत से 6 मई 2023 को मिली जमानत पर हैं।

नेटीजेंस ने उड़ाया मजाक

TMC नेता साकेत गोखले द्वारा यह ट्वीट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर नेटीजेंस उनका मजाक उड़ा रहे हैं। गिरीश ने लिखा, ‘कॉन्ग्रेस MLA की अभी से बोली लग रही है।’ वहीं अंकित जायसवाल का कहना है कि 5 करोड़ मिलेगा तो वो बिक जाएँगे क्योंकि सभी साकेत गोखले की तरह जिद्दी नहीं होते।

चित्र साभार- @SaketGokhale

रुझानों में कॉन्ग्रेस बहुमत की ओर

कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में अब तक सामने आए रुझानों में कॉन्ग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत की तरफ बढ़ती दिख रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी 130 से 135 सीटें हासिल करती दिखाई दे रही है तो वहीँ भाजपा 60 से 65 सीटों में सिमटती दिख रही है। तीसरे नंबर पर JDS है जो 20 से 25 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अन्य 5 से 10 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

जालंधर की लोकसभा सीट पर आगे निकली AAP, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने ही ढहाया कॉन्ग्रेस का किला: ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में गई थी सांसद की जान

पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना में आम आदमी पार्टी लगातार बढ़त बनाए हुए है। खबर लिखते समय आप प्रत्याशी ने जालंधर में लगभग 42 हजार वोटों से बढ़त बना रखी थी। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी यहाँ दूसरे नंबर और भाजपा तीसरे स्थान पर चल रही है। यह सीट कॉन्ग्रेस सांसद संतोख सिंह चौधरी के निधन से खाली हुई थी। जनवरी 2023 में संतोख सिंह की मौत तब हुई थी जब वो राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए थे।

जानकारी के मुताबिक इस उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने जालंधर से सुशील कुमार रिंकू को मैदान में उतारा। रिंकू पूर्व में कॉन्ग्रेस के ही नेता थे। हालाँकि इन उपचुनावों से पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। उनके सामने कॉन्ग्रेस ने करमजीत कौर चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा था। करमजीत कौर दिवंगत कॉन्ग्रेस सांसद संतोख चौधरी की पत्नी हैं। वहीं भाजपा के टिकट पर इंदर इक़बाल सिंह अटवाल प्रत्याशी हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने सुखविंदर सुखी को मैदान में उतारा है। इन सभी के अलावा नेशनल जस्टिस पार्टी के डॉक्टर सुग्रीव सिंह भी चुनाव मैदान में हैं।

यहाँ कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी में सीधा मुकाबला था जिसमें आप पार्टी काफी आगे निकलती दिखाई दे रही है। अब तक जारी आँकड़ों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी को लगभग 1 लाख वोट, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को लगभग डेढ़ लाख वोट और आप पार्टी के प्रत्याशी को लगभग 1 लाख 87 हजार वोट मिल चुके हैं। वहीँ शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी को लगभग 86 हजार वोट मिले हैं। नेशनल जस्टिस पार्टी सैकड़े से आगे निकल कर हजार के आँकड़े को छूने के लिए संघर्ष कर रही है। फिलहाल उन्हें लगभग 700 वोट मिले हैं।

गौरतलब है कि जनवरी 2023 में राहुल गाँधी भारत जोड़ो लेकर जालंधर पहुँचे थे। यहाँ उसके साथ कॉन्ग्रेस सांसद संतोख सिंह चौधरी भी शामिल हुए थे। यात्रा के ही दौरान अचानक ही संतोख चौधरी की तबीयत बिगड़ी थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया। बाद में संतोख चौधरी का देहांत हो गया था। जालंधर सीट पर 2009 के बाद से कॉन्ग्रेस के ही प्रतिनिधियों ने जीत हासिल की थी। 2009 में यहाँ से मोहिंदर सिंह केपी जीते थे। इसके बाद 2014-2019 में यहाँ से संतोख सिंह चौधरी ही जीते थे।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला के कमरे में नटराज की मूर्ति देख भड़का श्रीनगर का मेयर जुनैद मट्टू: बताया गैर-इस्लामी और मुर्तद, कहा – ये मस्जिद अल-नवाबी का अपमान

श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर गैर इस्लामिक होने का आरोप लगाया है। इस बावत उन्होंने एक फोटो भी ट्वीट किया है जिसमें उनके पास भगवान नटराज की मूर्ति रखी हुई है। जुनैद ने इस बात से भी नाराजगी जताई है कि मदीना स्थित मस्जिद अल नवाबी की तस्वीर नटराज के नीचे कैसे रखी गई है। मट्टू ने यह ट्वीट फारुख अब्दुल्ला के उस बयान पर दिया है जिसमें उन्होंने कश्मीरी युवाओं से कुरान की शिक्षाओं पर अमल करने की अपील की थी।

दरअसल 12 मई (शुक्रवार) को द कश्मीर वाला नामक समाचार पोर्टल पर फ़ारूक़ अब्दुल्ला का एक बयान प्रकशित हुआ था। तब उन्होंने कश्मीर के युवाओं को पैगाम दिया था कि वो नमाज़ पढ़ें और कुरान पर अमल करें। इस दौरान अब्दुल्ला ने बताया कि हर कश्मीरी चाहता है कि उसके राज्य का पुराना दर्जा बहाल हो। अब्दुल्ला ने कश्मीर में अराजकता और बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी होने का आरोप लगाते हुए युवाओं ने इस्लामी शिक्षाओं का पालन करने को कहा। उन्होंने कहा था कि अगर क़ुरान पढ़ नहीं सकते तो कम से कम उसे सुनो।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला के इस्लामी शिक्षाओं पर चलने की सलाह के बयान पर श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम ने पटलवार किया है। जुनैद ने फारुख अब्दुल्ला की ही हरकतों को गैर इस्लामी बता दिया। उन्होंने 12 मई 2023 को किए गए अपने ट्वीट में 3 तस्वीरों को शेयर किया है। एक तस्वीर में सोफे पर बैठे फ़ारूक़ अब्दुल्ला के पीछे 2 युवा खड़े दिख रहे हैं। सोफे के बगल टेबल रखा है और उस टेबल पर भगवान नटराज की बड़ी सी मूर्ति रखी हुई है। मूर्ति के नीचे एक छोटी ही तस्वीर मदीना स्थित मस्जिद अल नवाबी की है।

अपने ट्वीट में जुनैद ने फारुख अब्दुल्ला को मुर्तद (इस्लामी उसूलों को त्याग देने वाला) और गुस्ताख़ ए रसूल बताया है। उन्होंने आगे लोगों से फ़ारूक़ अब्दुल्ला के हॉल की तस्वीरें देखने की अपील की है। मट्टू ने लोगों से कहा कि कोई एक ऐसा मुस्लिम का घर दिखाए जहाँ मस्जिद अल नवाबी का ऐसे अपमान हो रहा हो। अपने ट्वीट में जुनैद अजीम मट्टू ने फारुख अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर के युवाओं को दी जा रही इस्लामी शिक्षाओं पर अमल की बातों को नाटक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि वो अपने नाटक में कुरान या नमाज़ की बातों का जिक्र न करें।

जुनैद ने फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर आरोप लगया है कि वो खुद इस्लामी कानूनों को नहीं मानते लेकिन मज़हबी उपदेशक बनने की कुचेष्टा कर रहे हैं। जुनैद ने अपने ट्वीट के अंत में अरबी में कुछ लाइनें लिखी हैं।