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दलित नाबालिग लड़की का अपहरण, फिर गैंगरेप: यूपी पुलिस ने वारिस और उसके साथी के खिलाफ दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप की खबर है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित का नाम वारिस बताया जा रहा है। मामले में एक अन्य आरोपित भी बताया जा रहा है जिसके नाम का फ़िलहाल खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। घटना बुधवार (10 मई 2023) रात की है।

पीड़िता की उम्र 14 साल बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, मामला अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव सैम्बसी में रहने वाले एक पिता ने अपनी बेटी के साथ गैंगरेप होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई है। पीड़ित पिता का आरोप है कि बुधवार की रात गाँव के ही 2 युवकों ने उनके घर के नंबर पर फोन किया। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे। फोन पीड़िता ने उठाया और घर से बाहर निकल गई। आरोप है कि इस दौरान बाइक सवार दोनों आरोपितों ने पीड़िता का अपहरण कर लिया और उसे गाँव के बाहर ले गए।

शिकायत में आगे बताया गया है कि गाँव से बाहर ले जा कर दोनों आरोपितों ने उनकी बेटी से बारी-बारी से गैंगरेप किया। कुछ समय बाद वो दोनों लड़की को छोड़ कर फरार हो गए। बताया गया है कि जाते हुए दोनों ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो उसे जान से मार दिया जाएगा। लड़की ने घर पहुँच कर अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। मिली जानकारी के मुताबिक, वारिस और एक अन्य नामजद आरोपित पर IPC की धारा 376 D (गैंगरेप), पॉक्सो और SC/ST एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO मोहनगंज धीरेन्द्र यादव ने बताया कि केस दर्ज कर के दोनों फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित ट्रक ड्राइवर हैं जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस टीमें लगी हुई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। वारिस के अब्बा का नाम राजबहादुर होने के सवाल पर थाना प्रभारी ने बताया कि उनके इलाके में ऐसे नाम वाले कई मुस्लिम रहते हैं।

‘आरोपित की सुरक्षा को खतरा हो सकता है’: आरोपित अजमत अली की माँग के बाद दिल्ली HC ने धर्मांतरण संबंधी खबरें हटाने का दिया आदेश, ‘जिहादी’ शब्द पर जताई आपत्ति

दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल, ट्विटर समेत कुछ मीडिया हाउस को जबरन धर्मांतरण की खबरों और उनके वीडियो लिंक को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। दरअसल, जबरन धर्मांतरण के आरोपित अजमत अली ने याचिका दायर कहा था कि ऐसी खबरों से उसकी प्रतिष्ठा और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने यह आदेश शुक्रवार (12 मई, 2023) को दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने अपने फैसले में कहा है कि इस तरह की खबरें और वीडियो गंभीर खतरा हैं, क्योंकि इन पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स करते हैं। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, समाचार प्रसारण और डिजिटल मानक प्राधिकरण तथा सर्च इंजन गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर व कुछ मीडिया हाउस को नोटिस जारी किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने जिन मीडिया हाउस को नोटिस भेजा है उसमें अदालत ने सुदर्शन न्यूज के अध्यक्ष सुरेश चव्हाणके, ओडिशा टेलीविजन लिमिटेड, पिट्टी मीडिया एलएलपी, द ऑर्गनाइजर और ‘वॉयस ऑफ द नेशन’ के मालिक भारत प्रकाशन का नाम शामिल है। कोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही याचिका पर जवाब देने के लिए भी कहा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि इन खबरों का लिंक ब्लॉक करने के लिए जो निर्देश दिए गए हैं वे चैनलों और सभी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए हैं। उसने जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा है, “यह याचिकाकर्ता की सुरक्षा का सवाल है। यदि चैनल लिंक को ब्लॉक नहीं करते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसे ब्लॉक कर दें। मेरा निर्देश स्पष्ट है। इसे सभी को ब्लॉक करना होगा।” साथ ही कोर्ट ने आरोपित के लिए ‘जिहादी’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।

क्या है मामला

दिल्ली में रहने वाली एक महिला ने गत 19 अप्रैल को अजमत अली खान नामक व्यक्ति के खिलाफ जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इसके बाद मामला मीडिया में आया और कुछ न्यूज चैनलों तथा वेबसाइट ने इस मुद्दे को उठाया था। इन खबरों और वीडियो को लेकर ही अजमत अली खान ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि महिला द्वारा उस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। ऐसी खबरें उसकी प्रतिष्ठा और सुरक्षा के लिए सही नहीं हैं। इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए।

स्कूल-कॉलेजों में बुर्का के समर्थन में अभियान चलाने वाली फातिमा की जीत, समान ड्रेस कोड की पैरवी करने वाले BJP प्रत्याशी हारे

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी का वोट शेयर न गिरा हो लेकिन कॉन्ग्रेस ज्यादा सीटें जीत कर सत्ता पर काबिज होने जा रही है। बीजेपी के कई मंत्री चुनाव हार गए हैं। उनमें कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश भी शामिल हैं। बीसी नागेश ने स्कूलों में एक समान यूनिफॉर्म की वकालत की थी। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार कनीज़ फातिमा चुनाव जीत चुकी हैं। कनीज़ ने स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं के लिए हिजाब की वकालत की थी।

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने तिपटूर (Tiptur) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उनका मुकाबला कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के शदाक्षरी (K Shadakshari) और जेडीएस के केटी शांताकुमार (KT shanthakumara) से था। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के शदाक्षरी ने बीसी नागेश को लगभग 17 हजार वोटों से हराया। बीसी नागेश ने स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड की वकालत की थी।

दूसरी तरफ मुस्लिम छात्राओं के लिए हिजाब की माँग करने वाली कनीज़ फातिमा को कॉन्ग्रेस ने गुलबर्गा उत्तर सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। उनका मुकाबला बीजेपी के चंद्रकांत बी पाटिल (Chandrakant B patil) से था। बीजेपी उम्मीदवार को लगभग 1200 मतों से हार का सामना करना पड़ा। गुलबर्गा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी लगभग 60 फीसदी है। कई मुस्लिम उम्मीदवारों के मैदान में होने के बावजूद हिजाब को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली कनीज़ चुनाव जीत गईं।

कनीज़ ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह मुस्लिमों को एक होकर वोट करने की अपील करती रही थी। यही कारण है कि कई मुस्लिम उम्मीदवारों के बावजूद इलाके के लोगों का वोट नहीं बँटा।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने अपने 31 मंत्रियों में से 25 पर भरोसा जताया था और उन्हें उनकी पारंपरिक सीट से ही चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 12 मंत्रियों ने अपनी सीट बचा ली जबकि 11 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई शिग्गाँव से लगभग 35 हजार वोटों से विजयी हुए।

कर्नाटक में नतीजे देख राहुल गाँधी गदगद, भूले EVM का रोना: बिहार में हार के बाद बोले थे- ये EVM नहीं, MVM- मोदी वोटिंग मशीन

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कॉन्ग्रेस गदगद है। उसके नेता इसके लिए कर्नाटक की जनता का धन्यवाद दे रहे हैं। हालाँकि, ये वही कॉन्ग्रेस है, जो हार के डर से 10 मई को हुए मतदान से पहले ईवीएम को लेकर सवाल उठाया था। उन दिनों को याद करके सोशल मीडिया कॉन्ग्रेस पर सवाल उठा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा कि कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल के लिए दक्षिण अफ्रीका से ईवीएम लाया गया है और ये सारे ईवीएम इस्तेमाल किए हुए हैं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने उनकी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए डिटेल में चिट्ठी लिखी थी।

ये पहली बार नहीं है, जब कॉन्ग्रेस ने हार के डर से EVM पर सवाल उठाए हैं। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की लहर के कारण मिलती जा रही एक के बाद एक पर कॉन्ग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था। अन्य विपक्षी दलों ने कॉन्ग्रेस के हाँ में हाँ मिलाई थी। बिहार के अररिया में राहुल गाँधी ने EVM को MVM- मोदी वोटिंग मशीन कहा था।

पिछले साल मई में हुए पाँच राज्यों में चुनाव के दौरान पिछड़ने पर कॉन्ग्रेस ने EVM का रोना रोया था। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों उतर गए थे और दिल्ली में पार्टी कार्यालय के बाहर ईवीएम का विरोध किया था। उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका जताई थी।

साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने EVM पर सवाल उठाते हुए लिखा था, “जब मंगल ग्रह और चाँद की ओर जाते उपक्रम की दिशा को धरती से नियंत्रित किया जा सकता है तो ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती? अमेरिका में अगर ईवीएम से चुनाव होता तो क्या ट्रंप हार सकते थे?”

साल 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ईवीएम को लेकर संदेह जताया था। कॉन्ग्रेस के डाटा एनालिटिक्स मुखिया प्रवीण चक्रवर्ती की एक रिपोर्ट पढ़ने के बाद से राहुल गाँधी यह मानने लगे थे कि कॉन्ग्रेस EVM में गड़बड़ी के चलते ही हारी।

संडे गार्डियन अखबार ने उस दौरान दावा किया था कि राहुल गाँधी ने बैलेट से चुनाव कराने माँग उठाने के साथ विधानसभा निर्वाचन के बहिष्कार का निर्णय लिया है। हालाँकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता सहमत नहीं दिखे थे। वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस बहिष्कार करेगी तो उसकी बची-खुची जगह भी क्षेत्रीय दलों के हाथों में चली जाएगी।

जून 2019 में कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे। सोनिया गाँधी ने कहा था कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद देश की चुनावी प्रक्रियाओं पर ‘कई तरह के संदेह’ उभरे। बीजेपी द्वारा ईवीएम में हेराफेरी के कॉन्ग्रेस के आरोप को दोहराते हुए सोनिया गाँधी ने रायबरेली ने कहा था कि बिना आग के धुआँ नहीं उठता।

इतना ही नहीं, साल 2017 में कॉन्ग्रेस के तत्कालीन नेता गुलाम नबी आजाद ने भी विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और ईवीएम पर सवाल उठाए थे। जब पार्टी के एक नेता वीरप्पा मोइली ने कहा था कि ईवीएम सही है तो आजाद ने उनके बयान को व्यक्तिगत बता दिया था।

सोशल मीडिया पर नीतू पांडेय नाम की एक यूजर ने लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस विजय हुई, इसीलिए ईवीएम का रोना नहीं रोए? अगर भाजपा जीत जाती तो evm का रोना शुरू कर देते।”

त्रिलोकीनाथ चौधरी नाम के यूजर ने लिखा, “ईवीएम पर गला फाड़ने वाले कांग्रेस वामपंथी और जाहिल जिहादियों क्या कर्नाटक इलेक्शन में कांग्रेस की जीत गलत ढंग से हुई. EVM पर अब रैली और धरना नहीं करोगे?ठ

संजीव पराशर नाम के शख्स ने लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की बंपर जीत पर बधाइयां खुशी की बात है कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल आज ईवीएम पर बिना निशाना साधे इस जीत को सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं।”

BJP की सहयोगी पार्टी ‘अपना दल’ के प्रत्याशी ने जमाया आजम खान के गढ़ में कब्जा: अब्दुल्ला आजम की विधायकी जाने के बाद खाली हुई थी सीट

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्वार विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भजापा गठंबंधन को जीत मिली है। भाजपा के सहयोगी अपना दल सोनेलाल के शफीक अंसारी ने इस सीट पर समाजवादी पार्टी की अनुराधा चौधरी को शिकस्त दी है। कभी इस सीट पर आजम खान का खासा प्रभाव माना जाता था।

इस सीट से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम 2 बार विधायक रहे हैं। अब्दुल्ला की विधायकी निरस्त होने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था जिसे बरकरार रखने के लिए सपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। हालाँकि बाजी अपना दल के शफीक अंसारी ने मारी। वह अब यूपी में एनडीए सरकार के पहले मुस्लिम विधायक होंगे।

वहीं एक अन्य विधानसभा सीट छानबे को भी भाजपा के सहयोगी अपना दल सोनेलाल गुट की प्रत्याशी रिंकी कोल ने जीत लिया है। रिंकी ने समाजवादी पार्टी की कीर्ति को 9589 वोटों से हराया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वार विधानसभा सीट से अपना दल सोनेलाल गुट के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने विजय पाई। शफीक को कुल 68630 वोट मिले। शफीक के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने अनुराधा चौधरी को चुनाव लड़ाया था। अनुराधा को कुल 59906 मत हासिल हुए। इस सीट पर तीसरे नंबर पर पीस पार्टी की डॉ नाजिया सिद्दीकी रहीं। उन्हें 4688 वोट मिल पाए। यहाँ चौथे नंबर पर NOTA रहा। 3 अन्य प्रत्याशी हजार वोटों के आंकड़ों को नहीं छू पाए।

बतातें चले कि फरवरी 2023 में एक पुराने मामले में सजा मिलने के बाद अब्दुल्ला आजम की विधायकी चली गई थी। तब से यह सीट खाली चल रही थी जिस पर अब उपचुनाव में भाजपा के होगी अपना दल सोनेलाल ने परचम लहराया है।

छानबे विधानसभा में भी अपना दल की जीत

मिर्जापुर की छानबे विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा के सहयोगी अपना दल सोनेलाल पार्टी को जीत हासिल हुई है। यहाँ पर रिंकी कोल ने समाजवादी पार्टी की कीर्ति को 9589 वोटों से हरा दिया है। रिंकी कोल दिवंगत विधायक राहुल प्रकाश कोल की पत्नी हैं।

राहुल प्रकाश कोल के निधन से यह सीट खाली हुई थी। रिंकी को कुल 76176 वोट मिले जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी कीर्ति को 66587 वोट मिल पाए। 2538 वोट पा कर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अजय कुमार यहाँ तीसरे नंबर पर रहे। रिंकी कोल की जीत पर भाजपा समर्थकों ने जय श्री राम के नारे लगाए हैं।

कर्नाटक के पुत्तूर में BJP को बगावत का नुकसान: 36% वोट पा कर बागी संघ नेता ने बदल दिया गणित, कॉन्ग्रेस को मिल गई जीत

कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में पुत्तूर की सीट इस बार कई कारणों से चर्चा में है। इस जगह से एक ओर SDPI ने BJYM नेता की हत्या के आरोपित शफी बेल्लारे को खड़ा किया था। वहीं दूसरी ओर संघ नेता अरुण कुमार पुथिला भी निर्दलीय खड़े थे। नतीजों में जहाँ बेल्लारे को करारी हार का मुँह देखना पड़ा तो संघ नेता को अच्छा वोट शेयर हासिल हुआ।

13 मई को आए नतीजों में निर्दलीय प्रत्याशी और संघ नेता अरुण कुमार को पुत्तूर विधानसभा में 36.15 फीसदी वोट शेयर मिला। उन्हें लगभग 61628 वोट ईवीएम से वोट मिले और 830 पोस्टल बैलट से। कुल मिलाकर उनके हिस्से 62458 आए। वहीं भाजपा की आशा थिंपा को 37558 वोट मिले और उनका 21.74 फीसदी रहा जबकि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने यहाँ 66607 वोट पाकर जीत हासिल की। उनके हिस्से 38.55 फीसदी वोट आए।

आँकड़ों से अंदाजा लगा सकते हैं कि इन चुनावों में पुथिला के खड़े होने का यदि किसी को नुकसान हुआ तो वह भाजपा प्रत्याशी को हुआ। बताया जा रहा है कि अरुण कुमार पुथिला को पहले भारतीय जनता पार्टी से टिकट चाहिए था लेकिन पार्टी ने उनकी जगह आशा को चुना। ऐसे में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

दक्षिण कन्नड़ के पुत्तूर जिले पर संघ हमेशा से अच्छा प्रभाव रहा है। ऐसे में कुछ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि संघ के लोग भी दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत अध्यक्ष आशा को सीट मिलने से खुश नहीं थे। भाजपा और संघ परिवार के लोगों ने बहुत कोशिश की थी कि पुथिला से नॉमिनेशन वापस ले लें। हालाँकि ऐसा नहीं हो सका।

नतीजे आए तो यह साफ हो गया कि आखिर भाजपा के वोट कहाँ कटे जबकि कॉन्ग्रेस को जेडीएस के वोट शेयर कम होने का सीधा फायदा हुआ।

मालूम हो कि साल 2018 में गौड़ा समुदाय से आने वाले बीजेपी नेता संजीव मातनदूर को यहाँ से 90,073 वोट हासिल हुए थे और कॉन्ग्रेस की शकुंतला टी शेट्टी को 70,596 वोट मिले थे। अगर इन चुनावों में वोटों का बँटवारा नहीं होता तो बीजेपी ने प्रचंड जीत दर्ज की होती।

क्लासरूम में हिजाब, ‘बजरंग दल’ पर बैन, मुस्लिम आरक्षण की बहाली, PFI पर पहले जैसी नरमी… क्या ऐसा होगा कॉन्ग्रेस राज का कर्नाटक?

कर्नाटक की सत्ता में कॉन्ग्रेस पार्टी की वापसी हुई है। 224 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के 136 विधायक होंगे, यानी नई राज्य सरकार अपनी नीतियों के हिसाब से फैसले ले सकती है। ऐसे में क्या अब कॉन्ग्रेस पार्टी कई ऐसे मामलों में वोट बैंक के लिए राजनीतिक रुख अख्तियार करेगी, जो सीधे-सीधे इस्लामी कट्टरपंथ से जुड़े हैं? PFI पर नरमी होगी? शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर क्या रुख रहेगा? ‘बजरंग दल’ बैन लगेगा? मुस्लिम आरक्षण फिर से बहाल कर दिया जाएगा?

सबसे पहले बात करते हैं PFI की। वो कॉन्ग्रेस सरकार ही थी, जिसने 1600 दंगाइयों पर से केस वापस ले लिए थे, जो पीएफआई से जुड़े हुए थे। बिना किसी जाँच के ऐलान कर दिया गया कि इनका हिंसा में कोई हाथ नहीं। सितंबर 2022 में जब केंद्र सरकार ने PFI पर बैन लगाया, तब कर्नाटक में इसके 50 से भी अधिक आतंकी पकड़े गए थे। NIA की छापेमारी में संगठन के कई अड्डे कर्नाटक में मिले। कर्नाटक में हवाला नेटवर्क के जरिए फंडिंग हो रही थी।

कॉन्ग्रेस की जीत के बाद कर्नाटक में फिर से मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति तय लग रही है, ऐसे में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये से क्या इस प्रतिबंधित संगठन को फिर से फलने-फूलने का मौका मिलेगा? मुस्लिम आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 25 जुलाई, 2023 को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है। सर्वोच्च न्यायालय की 3 सदस्यीय पीठ इस मामले को सुन रही है। भाजपा सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को हटाने के बाद कोर्ट में इस फैसले का बचाव किया, लेकिन अब लगता नहीं कि नई राज्य सरकार का रुख यही रहेगा।

इसी तरह, हिजाब को लेकर राज्य में उपद्रव किया गया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिजाब-बुर्का के समर्थन में अभियान चलाया। इनकी माँग थी कि शैक्षिक संस्थानों में यूनिफॉर्म के नियमों को धता बता कर मुस्लिम छात्राओं को बुर्का पहनने की इजाजत मिले। इस मामले की भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। ये सुनवाई भी सुप्रीम कोर्ट में चल ही रही है। कर्नाटक सरकार ने साफ़ कर दिया था कि स्कूल-कॉलेजों में हिजाब की अनुमति नहीं है, हाईकोर्ट ने इस फैसले को सही भी ठहराया था।

एक और मुद्दा है ‘बजरंग दल’ को बैन करने का, जिसका वादा कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी घोषणापत्र में किया था। ‘बजरंग दल’ हिन्दू हित में काम करता है और हिन्दू पीड़ितों की आवाज उठाता है। इसकी तुलना कॉन्ग्रेस ने PFI से कर दी। क्या ऐसा कर के उसने ‘बजरंग दल’ के खिलाफ हिंसा के लिए नहीं भड़काया? अगर संगठन के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? हिन्दू युवा नेता प्रवीण नेट्टारू की कर्नाटक में कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पकड़े गए हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई में भी क्या कॉन्ग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के हिसाब से ही फैसला लेगी?

कर्नाटक चुनाव में खाता खोलने को भी तरस गई AAP, वामपंथी दलों के भी ऐसा ही बुरा हाल: जमानत भी नहीं बचा पाए अधिकतर प्रत्याशी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election 2023) में कॉन्ग्रेस (Congress) ने भाजपा (BJP) को सत्ता से बेदखल कर दिया है। हालाँकि, दक्षिण के द्वार कहे जाने वाले कर्नाटक में दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) भी किस्मत अजमा रही थी। वहीं, वामपंथी दल भी अपनी जमीन तलाश रहे थे।

निर्वाचन आयोग के आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस के बाद भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनी है। वहीं, जनता दल सेक्युलर (JDS) तीसरे नंबर पर है। 2 सीट जीतकर चौथे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार हैं। वहीं, 1-1 सीट के साथ कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष पाँचवें नंबर पर हैं।

कभी पूरे भारत में अपनी पकड़ रखने वाले विभिन्न वामपंथी दलों के एक भी प्रत्याशी इस चुनाव में कमाल नहीं दिखा पाए। वहीं, हाल ही में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने वाली AAP भी दक्षिण के इस चक्रव्यूह को भेदने में नाकाम रही। हालाँकि, अधिकांश अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, आम आदमी पार्टी को अब तक 0.58% वोट शेयर मिला है। अगर वोटों के लिहाज से बात करें तो उसे अब तक लगभग 45500 वोट मिले हैं। राज्य की कुल 224 सीटों में से 209 सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवारों उतारे थे। इनमें से 15 सीटों पर पार्टी ने मुकाबले में होने की उम्मीद जताई थी।

अगर साल 2018 की बात करें तो AAP ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों में 28 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतारा था। उस दौरान पार्टी को सिर्फ 0.06% वोट शेयर मिला था। हालाँकि, इस बार AAP के वोट शेयर में 0.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

वामपंथी दलों की तो और भी बुरी हालत है। कर्नाटक चुनाव में उतरे तीनों प्रमुख वामपंथी दल- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (CPI-ML) के अधिकांश उम्मीदवार भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए हैं। वामपंथी दलों का कुल वोट शेयर 0.08 प्रतिशत है। जहाँ CPI को 0.02 प्रतिशत और CPI-M को 0.08 प्रतिशत वोट शेयर मिला है।

कर्नाटक में जीत के बाद कॉन्ग्रेस नेता ने किया यूपी-बिहार का अपमान, कहा – टैक्स देने के मामले में हम तीसरे नंबर पर

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में जीत से उत्साहित कॉन्ग्रेस नेता बीजेपी पर हमलावर हैं। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के सीनियर लीडर बीके हरिप्रसाद ने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई नेताओं पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को नीचा दिखाने की भी कोशिश की।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बीके हरिप्रसाद ने कहा कि भाजपा अपने राष्ट्रीय नेताओं के भरोसे चुनावी मैदान में थी। चुनावी कैंपेनिंग में राज्य के नेताओं को प्रोजेक्ट नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अमित शाह कौन होते हैं यह कहने वाले कि यदि कर्नाटक के लोगों ने पीएम मोदी को वोट नहीं दिया तो उन्हें आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा। क्या भगवान हैं नरेंद्र मोदी? हरिप्रसाद ने जेपी नड्डा पर भी आरोप लगाए।

बीके हरिप्रसाद ने कहा कि जेपी नड्डा कह रहे थे कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार नहीं बनी तो लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं का फायदा नहीं मिलेगा। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए हम टैक्स देते हैं। टैक्स देने के मामले में कर्नाटक तीसरे स्थान पर है, हम यूपी-बिहार नहीं हैं।

बता दें कि राज्य में 10 मई को संपन्न विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। पार्टी 224 विधानसभा सीटों में से 130 से अधिक पर जीत हासिल करती नजर आ रही है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस जीत को जनता जनार्दन की जीत करार दी है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के सभी विजयी विधायकों से आज शाम तक बेंगलुरु पहुँचने के लिए कहा गया है, ताकि सरकार की गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों से सीएम के नाम पर राय माँगी जाएगी। इसके बाद विधायकों का फैसला कॉन्ग्रेस आला कमान तक पहुँचाया जाएगा। आला कमान सीएम पद पर अंतिम फैसला लेगी। बता दें कॉन्ग्रेस में सीएम पद को लेकर घमसान मचता नजर आ रहा है। कॉन्ग्रेस के दो बड़े नेता सीएम पद के दावेदार माने जा रहे हैं। पहले हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया और दूसरे हैं कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिव कुमार। कॉन्ग्रेस के दोनों धड़ों के लोग अब अपने-अपने नेता के समर्थन में खुलकर आ रहे हैं।

शिक्षिका को भारी पड़ा क्लासरूम में बच्चों के साथ डांस करना, स्कूल ने नौकरी से निकाला: TikTok पर वायरल हुआ वीडियो, इंस्टा पर हैं 12 लाख फॉलोवर

ब्राजील में एक महिला टीचर को छात्रों के साथ डांस करना भारी पड़ गया। दरअसल, सिबेली फरेरा नामक टीचर ने स्कूल के छात्रों के साथ क्लासरूम में डांस किया था। इसके बाद अपना वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद वह लोकप्रिय तो हो गईं, लेकिन अब उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिबेली फरेरा अंग्रेजी भाषा की टीचर हैं और वह एक लैंग्वेज स्कूल में पढ़ाती थीं। स्कूल में वह छात्रों से बातचीत कर रहीं थीं। इसी दौरान छात्रों ने उन्हें डांस करने के लिए कहा। इस पर उन्होंने क्लासरूम में ही छात्रों के साथ डांस किया। इसके बाद यह वीडियो टिकटॉक पर अपलोड कर दिया।

सिबेली फरेरा का कहना है, “स्कूल के एक छात्र ने उन्हें डांस करने के लिए कहा था। इसके बाद ही उन्होंने डांस किया। इस डांस पर पूरी क्लास खुश थी। छात्र काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। मुझे पता है कि सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी के इस दौर में बच्चों को क्लास में फोकस्ड रखना कितना मुश्किल है। ऐसे में मैं उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश कर रही थी।”

छात्रों के साथ डांस का वीडियो टिकटॉक से लेकर सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। हालाँकि, नेटीजेन्स ने उनकी आलोचना की है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि महिला टीचर को अपने पद की मर्यादा रखनी चाहिए थी। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि महिला टीचर के डांस का वीडियो सामने आने के बाद स्कूल ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

सिबेली फरेरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई फोटोज और वीडियो अपलोड किए हैं। जिस वीडियो के चलते उन्हें अपनी नौकरी खोनी पड़ी उस वीडियो पर अब तक 66000 से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं। वहीं, इंस्टाग्राम पर अपलोड कुछ अन्य वीडियो में वह स्विम सूट समेत अन्य ड्रेस में डांस करते नजर आ रहीं हैं।

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सिबेली फरेरा बीते कुछ समय समय से क्लास में छात्रों के साथ बातचीत के वीडियो व स्कूल की अन्य गतिविधियों के वीडियो अपलोड कर रहीं हैं। यही कारण है कि टिकटॉक पर उनके 9.7 मिलियन और इंस्टाग्राम पर 1.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं। नौकरी जाने के बाद सिबेली फरेरा के फैंस का कहना है कि अब उन्हें स्कूल में पढ़ाने की जगह पूरा टाइम सोशल मीडिया पर देना चाहिए। हालाँकि फरेरा का कहना है कि स्कूल उन्हें अधिक सुरक्षित लगता है। ये अलग बात है कि वह सोशल मीडिया के जरिए स्कूल से अधिक कमाई कर रहीं हैं।