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यूपी निकाय चुनावों में BJP निकली आगे, नगर निगम की 14 सीटों पर लीड: हार के डर से अखिलेश यादव बोले- चुनाव आयोग हर राउंड के बाद बताए आँकड़े

कर्नाटक में जहाँ भाजपा को झटका लगते हुए दिख रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में हासिल बढ़त ने उसे राहत दी है। राज्य के 17 नगर निगम, 199 नगरपालिका परिषद और 544 नगर पंचायत के अध्यक्ष पदों पर हुए चुनाव की मतगणना जारी है।

अब तक सामने आए शुरुआती रुझान में नगर निगम की सभी 14 सीटों पर भाजपा को बढ़त हासिल है। वहीं, नगरपालिका परिषद में 37 सीटों और नगर पंचायत के 54 सीटों पर भाजपा आगे है। दूसरी ओर, सपा और कॉनग्रेस बहुत पीछे हैं। इसके साथ ही राज्य की दो विधानसभा सीटों पर भी भाजपा की सहयोगी अपना दल ने बढ़त बना रखी है।

रामपुर जिले की स्वार विधानसभा के उपचुनाव में 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, मिर्जापुर जिले की छानबे सीट पर 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस उपचुनाव से दूर है। वहीं, कॉन्ग्रेस ने सिर्फ छानबे सीट पर ही अपना उम्मीदवार उतारा है।

सामने आए शुरुआती रुझान में छानबे विधानसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) की प्रत्याशी रिंकी कोल ने समाजवादी पार्टी की कीर्ति कोल से बढ़त बना रखी है। छानबे सीट से अपना दल के विधायक राहुल कोल की पत्नी हैं रिंकी कोल और वह अपना दल से प्रत्याशी हैं।

वहीं, समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान की सदस्यता रद्द होने के चलते स्वार सीट खाली हुई है। अब्दुल्ला को एक मामले में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हुई थी। यहाँ पर भाजपा की सहयोगी दल अपना दल के उम्मीदवार शफ़ीक़ अहमद अंसारी सपा के प्रत्याशी से आगे हैं।

बताते चलें कि इस बार उत्तर प्रदेश का नगर निकाय चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए थे। पहले चरण में 4 मई 2023 को मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण के लिए 11 मई को वोटिंग हुई थी। इसके साथ ही यूपी की दो विधानसभा स्वार और छानबे सीट पर भी उपचुनाव हुए हैं, जिसके लिए 10 मई 2023 को वोटिंग हुई थी।

शुरुआती रुझानों को देखते हुए सपा ने दूसरों पर आरोप मढ़ने शुरू कर दिए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूरी तरह परिणाम आने से पहले ही चुनाव आयोग पर तंज कसना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव ने ट्विटर पर कहा, “आशा है चुनाव आयोग हर एक राउंड के बाद आँकड़े बताता जाएगा, जिससे जन विश्वास बना रहे।”

‘हम छोटी पार्टी…हमें अब तक किसी ने नहीं पूछा’: कर्नाटक में रिजल्ट से पहले JDS प्रमुख कुमारस्वामी के बदले सुर, पहले कहा था- जो शर्त मानेगा, उसे समर्थन देंगे

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में हुए मतदान की गणना जारी है। वोटों की अंतिम गिनती से पहले ही जनता दल सेक्युलर (JDS) के प्रमुख एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार (13 मई 2023) को गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। कुमारस्वामी ने कहा कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सरकार बनाने को लेकर अभी तक किसी पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया है।

कुमारस्वामी ने कहा, “अगले 2-3 घंटे में सब साफ हो जाएगा। एग्जिट पोल में दिख रहा है कि दो राष्ट्रीय पार्टियों का स्कोर बड़ा रहने वाला है। एग्जिल पोल में JDS को 30-32 सीटें दी गई हैं। मैं एक छोटी पार्टी हूँ और मेरी कोई माँग नहीं है। मैं उम्मीद कर रहा हूँ कि सिर्फ अच्छा विकास हो।” 

कुमारस्वामी भले आज कह रहे हों कि उनकी कोई माँग नहीं है, लेकिन कल तक वे कुछ और कह रहे थे। कुमारस्वामी कल तक कह रहे थे कि जो भी दल उनकी शर्त मानेगा, वे उसी को समर्थन देंगे। कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी शर्त है कि उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाए।

बताते चलें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुख्य लड़ाई सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कॉन्ग्रेस के बीच है। कुमारस्वामी की जेडीएस इन दोनों के बाद है। कुमारस्वामी को उम्मीद थी कि त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में वे किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। हालाँकि, गिनती के शुरू होते ही उन्होंने अपना स्टैंड बदल लिया।

उधर, कर्नाटक चुनाव के नतीजों से पहले कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और दावा किया राज्य में भाजपा की सरकार बनी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस को उम्मीद को है कि वह भाजपा की सरकार को उखाड़ फेंकेगी।

बता दें कि राज्य के कुल 224 सीटों के लिए 2,615 उम्मीदवार मैदान में हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत के तिलिस्मी आँकड़े 113 तक पहुँचना जरूरी है। किस पार्टी के हाथ में राज्य की बागडोर जाएगी, इसका फैसला आज शाम तक हो जाएगा। कर्नाटक चुनाव में प्रमुख पार्टियाँ भाजपा, कॉन्ग्रेस और जनता दल सेक्युलर (JDS) है।

अभी तक 38 साल में कोई भी सरकार लगातार दोबारा चुनकर नहीं आई है। हालाँकि, जिस तरह से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मिथक टूटे हैं, कुछ ऐसा ही इस बार कर्नाटक में होने की उम्मीद जताई जा रही है। वोटिंग खत्म होने के साथ ही एग्जिट पोल भी सामने आ गए हैं। इनमें से अधिकांश एग्जिट पोल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर बताई गई है।

मनीष कश्यप पर NSA को तमिलनाडु के राज्यपाल ने नहीं दी है मँजूरी, मीडिया में चल रही खबरों को राजभवन ने बताया असत्य

बिहार के यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने को तमिलनाडु के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने मँजूरी नहीं दी है। मीडिया और सोशल मीडिया में राज्यपाल की मुहर लगने के दावे किए जा रहे थे। तमिलनाडु राजभवन ने एक बयान जारी कर इन दावों को असत्य बताया है। साथ ही झूठ फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

बयान में कहा गया है कि सोशल मीडिया से यह संज्ञान में आया है कि राज्यपाल ने बिहार के किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA लगाने की मँजूरी दी है। यह असत्य है। तमिलनाडु के राज्यपाल ने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एनएसए लगाने की इजाजत नहीं दी है। बयान में कहा गया है कि जनता से आग्रह है कि वे ऐसी अपुष्ट सुचनाओं को न फैलाएँ। झूठी और गुमराह करने वाली सूचना फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, मुख्यधारा की कई मीडिया संस्थानों ने भी यह खबर चलाई थी कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि की इजाजत मिलने के बाद अब मनीष कश्यप को कम से कम 11 महीने जेल में बिताने होंगे। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को मनीष पर तमिलनाडु सरकार ने NSA लगाया था।

बता दें कि मनीष कश्यप पर तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर कथित हमले का फेक वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप है। 8 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मनीष कश्यप की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा था। कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट से NSA हटाने और अपने खिलाफ दर्ज सारे एफआईआर एक साथ करने की अपील की थी।

दिल्ली की मीडिया के दावों जैसी नहीं कर्नाटक की हवा, क्या फिर पोल पंडितों का गणित निकलेगा कमजोर

रिकॉर्ड मतदान (73.19%)। जहरीला साँप से लेकर बजरंग बली की जय वाला चुनाव प्रचार। 10 एग्जिट पोल में से 4 में कॉन्ग्रेस को बहुमत। 1 में बीजेपी की सरकार। 4 में त्रिशंकु विधानसभा। 2018 के चुनाव में सबसे सटीक आकलन करने वाले का बीजेपी को बढ़त देना। सबके अपने-अपने जीत के दावे। किंगमेकर बनने की आस लिए बैठी एक पारिवारिक पार्टी (JDS)। जी, मैं बात कर रहा हूँ कर्नाटक विधानसभा चुनावों (Karnataka Assembly election, 2023) की।

13 मई 2023 की दोपहर होते-होते कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन तमाम किंतु-परंतु के बीच कोई भी आँकड़ा अब तक उस दावे को पुख्ता नहीं कर रहा है जो कई महीने पहले से ही दिल्ली की मीडिया में तैर रही थी। यह दावा है कर्नाटक में जबर्दस्त सत्ता विरोधी लहर का। बीजेपी सरकार के कथित भ्रष्टाचार से आम लोगों में भारी नाराजगी का। प्रवीण नेट्टारू जैसों की इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा की गई हत्या के बाद से कोर वोटरों में निराशा होने का।

सत्ता विरोधी लहर का मतलब होता है विपक्ष को प्रचंड बहुमत मिलना। लेकिन एग्जिट पोल काॅन्ग्रेस के लिए ऐसा कोई अनुमान नहीं लगा रहे। एक्सिस माई इंडिया और इंडिया टुडे ने भले 10 मई की शाम को काॅन्ग्रेस को 140 सीटें मिलने तक का अनुमान लगाया था। लेकिन नतीजों से ठीक पहले इंडिया टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने एक ट्वीट में कहा है कि 57 सीटें ऐसी हैं जो किसी भी तरफ झुक सकती हैं। इनमें 6 सीटें ऐसी हैं जिस पर बीजेपी की टक्कर काॅन्ग्रेस से न होकर जेडीएस से है। 4 सीटें तो ऐसी भी हैं जो निर्दलीय भी झटक सकते हैं। कंवल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 13 मई के अंतिम नतीजे इन्हीं 57 सीटों से तय होंगी। अमूमन जब सत्ता विरोधी लहर चल रही हो तो इतने बड़े पैमाने पर काँटे की टक्कर नहीं दिखती। विपक्ष को स्पष्ट तौर पर बढ़त दिखती है।

इस तथ्य को समझाने के लिए एक्सिस माई इंडिया और इंडिया टुडे के एग्जिट पोल का उदाहरण इसलिए दिया गया क्योंकि काॅन्ग्रेस के लिए सबसे बेहतर संभावना इसमें ही दिखाई गई है। दिल्ली की मीडिया में दूसरा बड़ा दावा कर्नाटक में करप्शन के सबसे बड़ा मुद्दा होने का किया जाता है। लेकिन प्रचार के दौरान कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि काॅन्ग्रेस चुनाव को इस मुद्दे के इर्द-गिर्द सीमित करने में सफल रही है। उलटे जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता गया काॅन्ग्रेस बैकफुट पर जाती दिखी। पहले उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विषधर साँप कहने पर सफाई देनी पड़ी। फिर बजरंग दल की तुलना पीएफआई से कर वह ऐसे फँसी कि उसे हर जिले में बजरंग बली का मंदिर बनाने का वादा करना पड़ा। पिछले कई चुनावों के नतीजों पर यदि गौर करेंगे तो उससे यह भी पता चलता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और साॅफ्ट हिंदुत्व से बीजेपी को पराजित करने में काॅन्ग्रेस को कहीं भी सफलता नहीं मिली है।

तीसरा दावा दिल्ली की मीडिया में प्रवीण नेट्टारू जैसों की हत्या से बीजेपी के कोर वोटरों में निराशा को लेकर किया जाता है। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान ही हमने नेट्टारू के परिजनों के लिए बने घर की तस्वीरें भी देखी हैं। हमने उनके परिजनों के वह बयान भी सुने हैं, जिनमें उन्होंने कहा है कि मुश्किल वक्त में बीजेपी ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा। कभी उनको अकेला महसूस नहीं होने दिया। ऐसे में यह समझ पाना मुश्किल है जिस नेतृत्व से पीड़ित परिवार ही निराश नहीं है, उनके साथ हुई घटना से कोर वोटरों के निराश होने की थ्योरी कहाँ से निकली होगी? या फिर किसी प्रोपेगेंडा के तहत दिल्ली की मीडिया में इसे प्लांट किया गया था?

जाहिर है कि बीजेपी रेस से बाहर नहीं है। न ही कर्नाटक में वह बेहद बुरा प्रदर्शन करने जा रही है। जब उसे इस राज्य में सबसे मजबूत स्थिति में माना गया था, तब भी वह साधारण बहुमत ही हासिल कर पाई थी। ऐसे में कर्नाटक से जुड़े कुछ तथ्यों पर गौर करना जरूरी हो जाता है। 1978 तक इस राज्य में हर विधानसभा चुनाव में काॅन्ग्रेस को जीत मिली। लेकिन, 1985 के बाद किसी भी चुनाव में सत्ताधारी दल को जीत नहीं मिली। पिछले नौ चुनावों के ट्रेंड यह भी बताते हैं कि बीजेपी यदि सत्ता में रही है तो उसका वोट प्रतिशत सुधरा है। इसके ठीक उलट काॅन्ग्रेस यदि सत्ता में रही है तो उसको औसतन चार फीसदी वोटों का नुकसान झेलना पड़ा है।

अगर इन तथ्यों को ही सच मान लें तो तीन बातें तय दिखती हैं। पहला, 38 साल का ट्रेंड बताता है कि बीजेपी सत्ता में वापसी लायक सीटें हासिल नहीं कर पाएगी। अधिकतर एग्जिट पोल इसका अनुमान लगा रहे हैं। दूसरा, काॅन्ग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उसे वोटों का नुकसान नहीं होगा। तीसरा, बीजेपी सत्ता में है तो उसके वोट बढ़ेगे। क्या 2018 के चुनावों के मुकाबले मतदान में जो एक फीसद की वृद्धि हुई है, वह बीजेपी का बढ़ा वोट है? यदि ऐसा है तो यह किसी भी पोल में नहीं दिखा है और न ही किसी पोल पंडित ने ऐसा पाया है। कर्नाटक के पिछले कुछ चुनावों के तथ्य और ट्रेंड को इस बार भी अंतिम सत्य (बीजेपी की हार) मान लें तो भी यह कहीं से नहीं दिखता कि कोई सत्ता विरोधी लहर चल रही थी। करप्शन बड़ा मुद्दा था। कोर वोटर निराश थे।

ऐसा भी नहीं है कि जिस कर्नाटक को बीजेपी के लिए ‘दक्षिण का द्वार’ कहते हैं, उसकी कठिन डगर का एहसास पार्टी को नहीं था। जनवरी 2023 के मध्य में मुझे बीजेपी के दिल्ली मुख्यालय में इसका पहली बार एहसास हुआ। बंद कमरे में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान 2023 में होने वाले राज्यों के चुनाव पर बातचीत के दौरान उन्होंने माना कि कर्नाटक की सत्ता में वापसी आसान नहीं है।

संभवतः यही कारण है कि बीजेपी ने टिकट बँटवारे के दौरान सख्त फैसले लिए। बड़े पैमाने पर नए चेहरों को मौका दिया। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार जैसे नेताओं की नाराजगी की चिंता नहीं की। कई हेविवेट के टिकट काट दिए। राज्य के अपने सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा को मोर्चे पर लगाया। एक्सिस माई इंडिया और इंडिया टुडे का एग्जिट पोल भी कहता है कि येदियुरप्पा जिस लिंगायत समुदाय से आते हैं उसका 64 फीसदी वोट बीजेपी को गया है। यानी लिंगायत समुदाय से आने वाले जगदीश शेट्टार भले बीजेपी छोड़कर काॅन्ग्रेस में चले गए हैं, पर इस समुदाय का आम वोटर बीजेपी के ही साथ है।

यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि कर्नाटक में बीजेपी के उभरने की सबसे बड़ी वजह लिंगायतों का समर्थन ही माना जाता है। हाल के समय में कर्नाटक में बीजेपी ने सबसे बुरा प्रदर्शन 2013 में तब किया जब येदियुरप्पा उससे अलग हो गए थे। जन की बात के फाउंडर प्रदीप भंडारी ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि लिंगायत के बीच बीजेपी का आधार पहले की तरह ही बना हुआ है। गौरतलब है कि 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों का सबसे सटीक आकलन जन की बात ने ही किया था। इस बार अपने एग्जिट पोल में उसने बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी होने का अनुमान लगाया है।

प्रदीप भंडारी ने इस चुनाव के दौरान भी करीब-करीब पूरे कर्नाटक की यात्रा की है। उन्होंने करीब 50 दिन इस राज्य में बिताए हैं। उनका कहना है, “बुरी से बुरी स्थिति में बीजेपी को 90 सीटें मिलनी चाहिए। यदि मैं क्लोज मार्जिन की सभी सीटों पर काॅन्ग्रेस की जीत मान लूँ तब भी वह बहुमत हासिल नहीं करने जा रही है। मेरा स्पष्ट मानना है कि नतीजों से त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर उभरेंगी।”

ऑपइंडिया से बातचीत में ऐसे ही नतीजों का दावा कर्नाटक में 20 दिन बिताकर लौटे यूट्यूबर पत्रकार अभिषेक तिवारी भी करते हैं। उन्होंने बताया, “मुझे कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं दिखी। बीजेपी का वोट शेयर 36 फीसदी से कम होने की भी कोई संभावना नहीं दिखती। काॅन्ग्रेस को बहुमत के लिए अपना वोट शेयर 42 फीसदी तक ले जाना होगा, जिसकी संभावना कम दिखती है। ऐसे में मुझे लगता है कि सरकार किसकी बनेगी, यह जेडीएस और निर्दलीय तय करेंगे।”

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पोल पंडित 2020 के बिहार और 2018 के राजस्थान चुनावों की तरह ही कर्नाटक चुनाव की नब्ज पकड़ने में असफल रहे हैं? ध्यान रहे कि इन दोनों चुनावों में भी सत्ता विरोधी लहर चलने का शोर वैसा ही था, जैसा अभी कर्नाटक को लेकर है। लेकिन जब अंतिम नतीजे आए तो बिहार में सत्ताधारी गठबंधन ही आगे रहा। राजस्थान में काॅन्ग्रेस साधारण बहुमत ही हासिल कर पाई। प्रदीप भंडारी का भी मानना है कि सीटों का अनुमान लगाने में ज्यादातर लोग बिहार जैसी ही गलती कर रहे हैं।

वैसे यह रात पोल पंडितों के साथ काॅन्ग्रेस के लिए भी भारी है। आखिर उनके ‘युवराज’ ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्नाटक में 27 दिन जो बिताए थे। इस राज्य के 7 जिलों से जो गुजरे थे।

जिस मुनव्वर फारूकी ने कॉमेडी के नाम पर बनाया हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक, उसे IPL में स्टार स्पोर्ट्स ने दिया मंच: लोग बोले – ‘Jio Cinema’ पर ही देखेंगे

हिंदू देवी देवताओं को गाली देकर पैसे कमाने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को स्टार स्पोर्ट्स पर आईपीएल मैच के दौरान शो होस्ट करने का मौका मिला। स्टार स्पोर्ट्स पर हिंदूफोबिक कॉमेडियन को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर यूजर्स ने नाराजगी का इजहार किया।

दरअसल, टाटा आईपीएल 2023 के लीग मैच खेले जा रहे हैं। शुक्रवार (12 मई) को गुजरात टाइटन्स और मुंबई इंडियन्स के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच के लिए होस्ट के रूप में स्टार स्पोर्ट्स पर अन्य क्रिकेटर और फिल्मी सितारों के साथ मुनव्वर फारूकी भी नजर आया। शो के दौरान मुनव्वर के अलावा अनिल कपूर, आदित्य रॉय कपूर, मोहम्मद कैफ और इरफान पठान भी मौजूद रहे।

स्टार स्पोर्ट्स पर उनकी मौजूदगी यूजर्स को पसंद नहीं आई एक यूजर ने शो का स्क्रीन शॉट शेयर करते हुए लिखा, वाह अब कम्युनल बाइगोट भी स्पोर्ट्स चैनल शो करने लगे।”

सिबा प्रसाद शुक्ला नाम के यूजर ने तो लिख दिया कि आज स्टार स्पोर्ट्स चैनल ने अपना एक कस्टमर खो दिया। स्टार स्पोर्ट्स हटा कर ‘जियो सिनेमा’ लगा दिया।

मनोरमा नाम की यूजर ने लिखा, “एंटी हिंदू होना लोगों को अमीर बना देता है।”

किरण कसाला नाम की यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि इन लोगों के लिए पैसा महत्वपूर्ण है। पैसा मिले तो किसी के साथ स्टेज शेयर कर लेते हैं। चाहे उसने तुम्हारे धर्म का मजाक ही क्यों न उड़ाया हो।

हिमाँशु नाम के यूजर ने लिखा कि स्टार का नियंत्रण जरूर किसी वामपंथी हिंदू हेटर के हाथ में है। स्टार स्पोर्ट्स कन्नड़ पर भी किसी हिंदू विरोधी को शो पर बुलाया गया था।

मुनव्वर फारूकी स्टैंडअप कॉमेडियन है। जो अपनी कॉमेडी के दौरान हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने के लिए कुख्यात है। उसकी माता सीता और भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी वायरल हुई थी। जिसका देश भर में विरोध हुआ था। जनवरी 2021 में मध्य प्रदेश के इंदौर में 56 दुकान के पास मोनरो कैफे में आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदू देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में बेहद अपमानजनक टिप्पणी करके विवादास्पद ‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, हिंदू रक्षक संगठन के समर्थकों ने कथित तौर पर ‘कॉमेडियन’ के साथ मारपीट की थी और फिर उसे कार्यक्रम के आयोजकों के साथ तुकोगंज पुलिस स्टेशन ले गए थे। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के कारण उसे एक महीना जेल में बिताना पड़ा था।

वेंकटेश को बना दिया अली, निहार बना अबू और शंकर को बना दिया अब्दुल्ला… महिलाओं की ही नहीं, पुरुषों की भी है ‘The Kerala Story’: ब्रेनवॉश कर ISIS में भर्ती

बॉक्स ऑफिस पर सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ ने धूम मचा रखी है। लोग फिल्म को खूब पसंद कर रहे हैं लेकिन इस्लामवादियों, हिंदू और भारत विरोधी ताकतों को फिल्म रास नहीं आ रही है। फिल्म का विरोध करने वाले उन तथ्यों पर आँख मूँद लेते हैं जो साबित करते हैं कि केरल लव जिहाद, धर्म परिवर्तन और आईएसआईएस में भर्ती कराने का केंद्र रहा है। कई लड़कियों को मुस्लिम युवकों ने सुनियोजित तरीके से बहला-फुसलाकर निकाह का झाँसा देकर इस्लाम कबूल कराया। बाद में उन्हें ISIS में शामिल होने या ‘ISIS ब्राइड्स’ बनने के लिए सीरिया भेज दिया।

हालाँकि, धर्म परिवर्तन और आईएसआईएस के लिए गुलाम तैयार करने का यह खेल केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं रहा। इस रैकेट ने हिंदू पुरुषों को भी इस्लाम में धर्मांतरित किया। धर्म परिवर्तन के बाद हिंदू पुरुषों को भी मुस्लिमों के साथ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल कराया गया। ऐसी सैकड़ों रिपोर्ट्स उपलब्ध हैं जो बताती हैं कि केरल के परिवर्तित या मूल मुस्लिम आतंकवादी संगठनों या दहशतगर्दाना गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

इस रिपोर्ट में तीन ऐसे हिंदू नौजवानों की कहानी है जिन्होंने आईएसआईएस में शामिल होने से पहले इस्लाम कबूला था। एनआईए (NIA) के दस्तावेजों में दर्ज वे नाम हैं, ‘शंकर वेंकटेश पेरुमल उर्फ ​​अली मुआविया, शैबु निहार वीके उर्फ ​​अबू मरियम, और मदेश शंकर उर्फ ​​अब्दुल्ला।

शंकर वेंकटेश पेरुमल (​अली मुआविया)

आईएसआईएस मॉड्यूल केस की जाँच कर रही एनआईए की टीम ने मार्च 2021 में केरल के 8 ज्ञात और कई अज्ञात लोगों पर UAPA और IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। जाँच के दौरान NIA को मोहम्मद अमीन उर्फ अबू याह्या के बारे में पता चला, जो राज्य में ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS)’ की विचारधारा को फैलाने और युवाओं को कट्टर बनाने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था। उनका काम नए सदस्यों की भर्ती करना भी था। NIA ने जाँच के दौरान तीन लोगों मोहम्मद अमीन, रहीस रशीद और मुशब अनवर को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार लोगों की निशानदेही पर NIA की टीम ने 4 अगस्त 2021 को जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और केरल के पाँच अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे। रेड के दौरान NIA ने कश्मीर के श्रीनगर से ओबैद हामिद, बांदीपोरा से मुज़म्मिल हसन भट, मैंगलोर के उल्लाल से अम्मार अब्दुल रहमान और बैंगलोर से शंकर वेंकटेश पेरुमल (अली मुआविया) को गिरफ्तार किया।

शंकर वेंकटेश को अली मुआविया नाम इस्लाम अपनाने के बाद दिया गया। वह टेलीग्राम, हूप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ISIS के कट्टर जिहादी विचार धारा को फैलाने वाले समूह का हिस्सा था। जहाँ लोगों का ब्रेनवॉश कर कट्टरपंथी बनाया जाता और उन्हें आतंकी संगठन में शामिल कराया जाता था। मोहम्मद अमीन के नेतृत्व में ही इन कट्टरपंथियों ने आईएसआईएस के प्रति वफादारी की कसम खाई थी। इतना ही नहीं उन्होंने केरल से लेकर कर्नाटक तक ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की थी जिनकी हत्या की जानी थी।

शैबु निहार वीके (अबू मरियम)

शैबु निहार वीके (अबू मरियम) को NIA ने 9 अप्रैल 2019 को केरल के कालीकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। वह कतर के दोहा से भारत लौटा था। गिरफ्तारी से पहले अबू मरियम बहरीन में एक विज्ञापन एजेंसी चला रहा था। यह गिरफ्तारी आईएसआईएस के वंदूर (Wandoor) मॉड्यूल मामले में की गई थी। मामले में 8 लोगों को यूएपीए के तहत आरोपित बनाया गया था। शुरुआत में केस केरल पुलिस के हाथ में थी जिसे 1 जून 2018 को NIA ने अपने हाथ में ले लिया था।

शैबु निहार वीके से अबू मरियम बने शख्स को 14 सितंबर 2022 को एर्नाकुलम की एनआईए अदालत ने दोषी ठहराया था। जाँच के दौरान पता चला था कि शैबू निहार वीके ने ISIS/Daesh के लिए काम कर रहा था। उसने संगठन के लिए फंडिंग की भी व्यवस्था की। इसके अलावा अबू मरियम ने अपने सहयोगियों को सीरिया पहुँचाने के लिए भी धन जुटाए थे।

मदेश शंकर (​​अब्दुल्ला)

मदेश शंकर, मोहम्मद अमीन (अबू याह्या) के ही साथियों में से एक था। जाँच के दौरान यह पता चला कि अमीन एक परिवर्तित मुस्लिम दीप्ति मारला के संपर्क में था। दीप्ति ने मैंगलोर के अनस अब्दुल रहमान से निकाह किया था। मारला अपनी पढ़ाई के लिए 2015 में दुबई गई थी। दुबई में उसकी मुलाकात मिज़ा सिद्दीकी से हुई। जिसके बाद दोनों ने ISIS में शामिल होने की ठानी। इसके लिए साल 2019 में दोनों खुरसान तक गईं लेकिन कामयाब नहीं हो सकीं।

भारत लौटने के बाद भी मारला की आईएसआईएस-नियंत्रित इलाके में जाने की ख्वाहिश खत्म नहीं हुई थी। उसने ओबैद हामिद मट्टा, मदेश शंकर और अन्य के साथ मिलकर अमीन से संपर्क किया। जनवरी 2020 में वह ओबैद से मिलने श्रीनगर पहुँची जहाँ वह एक हफ्ते तक ठहरी थी।

NIA के अनुसार मदेश शंकर और उसके साथी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ फैलाने का काम करते थे। उनका काम आईएसआईएस के लिए नई भर्ती और फंड का इंतजाम करना था। बता दें आईएसआईएस में शामिल होने से पहले मदेश शंकर ने भी इस्लाम कबूल कर अपना नाम अब्दुल्ला रख लिया था।

‘शंकर वेंकटेश, शैबु निहार वीके और मदेश शंकर के उदाहरणों से स्पष्ट है कि कट्टरपंथियों ने लड़कियों और महिलाओं के साथ साथ गैरमुस्लिम पुरुषों को भी जिहाद के लिए इस्लाम कबूल कराया। धर्मांतरित पुरुष और महिला दोनों को ISIS आतंकवादियों के रूप में मध्य पूर्वी देशों में भेजा गया। जैसा कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ में दिखाया गया है। कट्टरपंथी अपने टारगेट का ब्रेनवॉश करते हैं। लड़कियों को पहले प्रेमजाल में फँसाया जाता है और शादी के बहाने उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है। दूसरी ओर पुरुषों को अपने धर्म के प्रति भड़काया जाता है।

उन्हें हीन भावना का शिकार बनाया जाता है। उनके धर्म को झूठा धर्म बता कर इस्लाम का महिमामंडन किया जाता है। उन्हें काफिरों के खिलाफ जिहाद छेड़ते हुए शहीद होने पर जन्नत में हूरों और बेहतर जीवन के सपने दिखाए जाते हैं।

नोट- यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

‘₹25 करोड़ दो, शाहरुख खान के बेटे आर्यन को ड्रग केस मेें नहीं फँसाएँगे’: NCB अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ CBI ने दर्ज की FIR, 30 जगहों पर रेड

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (12 मई 2023) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े (Samir Wankhede) के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया। वानखेड़े ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) को ड्रग केस में गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने समीर वानखेड़े के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 7, 7A और 12 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 388 (धमकी देकर जबरन वसूली) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है, जिनमें दो पूर्व अधिकारी बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि आर्यन खान को ड्रग मामले में नहीं फँसाने के लिए वानखेड़े ने कॉर्डेलिया जहाज के मालिकों से 25 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगी। इसी जहाज पर पार्टी करते हुए शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई के अधिकारियों को सूचना मिली कि समीर वानखेड़े और उनके साथी ने ड्रग मामले में आर्यन खान को मामले में नहीं फँसाने के लिए कथित तौर पर 50 लाख रुपए की अग्रिम राशि ली है।

अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में जाँच एजेंसी समीर वानखेड़े के आवास पर छापेमारी भी कर रही है। इसके अलावा, इस केस जुड़े दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, लखनऊ, राँची, गुवाहटी और कानपुर के 30 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है।

सतर्कता रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जाँच की। उसके बाद भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। विजिलेंस जाँच के दौरान यह पाया गया कि समीर वानखेड़े ने भ्रष्टाचार के जरिए काफी संपत्ति अर्जित की है।

बताते चलें कि 2 अक्टूबर 2021 को समीर वानखेड़े के नेतृत्व में नारकोटिक्स विभाग की एक टीम ने मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल पर खड़े कॉर्डेलिया क्रूज पर छापा मारा था। इस दौरान इस टीम ने आर्यन खान और उनके कई दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया था।

आर्यन और उनके दोस्तों पर नशीली दवाओं के सेवन, उसे रखने और तस्करी करने के आरोप लगाए गए थे। आर्यन खान 22 दिन जेल में रहे। इसके बाद मई 2022 में पर्याप्त सबूतों की कमी के कारण NCB ने आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी थी। इसके बाद वानखेड़े पर कई आरोप लगाए गए थे।

NCB टीम और समीर वानखेड़े के खिलाफ मनमानी के आरोपों के कारण एक अलग विजिलेंस जाँच की गई थी। उसके बाद पिछले साल मई में उन्हें चेन्नई में करदाता सेवा निदेशालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।

परमबीर सिंह के खिलाफ सारे आरोप लिए गए वापस, निलंबन भी हुआ रद्द: मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर को महाराष्ट्र सरकार से बड़ी राहत

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को बड़ी राहत दी है। सरकार ने परमबीर सिंह के खिलाफ लगे सभी आरोपों को वापस लेते हुए उनका निलंबन रदद् कर दिया। साथ ही सरकार ने कहा है कि यह माना जाए कि निलंबन अवधि में परमबीर सिंह ड्यूटी पर थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त सचिव वेंकटेश भट ने आदेश जारी कर परमबीर सिंह पर लगे सभी आरोप रद्द कर दिए हैं। इस आदेश में कहा गया है, “अखिल भारतीय सेवा नियम, 1969 के नियम 8 के तहत परमबीर सिंह, सेवानिवृत्त आईपीएस के खिलाफ दिनांक 02/12/2021 के आरोपों को वापस लिया जा रहा है। साथ ही, सभी मामले बंद किए जा रहे हैं।”

बता दें कि परमबीर सिंह पर जबरन वसूली और भ्रष्टाचार समेत कई आरोप लगे थे। परमबीर सिंह के साथ 6 पुलिस अधिकारियों एवं अन्य के खिलाफ जुलाई 2021 में रंगदारी का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। आज भले ही परमबीर सिंह पर लगे सभी आरोप वापस ले लिए गए हैं और उनका निलंबन भी समाप्त हो गया है, लेकिन वह अब रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में निलंबन समाप्त होने के बाद भी वह नौकरी में वापस नहीं आ सकते।

क्यों हुए थे निलंबित

परमबीर सिंह पर सर्विस रूल के उल्लंघन का आरोप है। वह स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर 29 अगस्त, 2021 तक की छुट्टी पर गए थे। लेकिन, छुट्टियाँ खत्म होने के बाद भी उन्होंने अपनी ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। इसके अलावा परमबीर सिंह मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों की बरामदगी और ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या के बाद से मुंबई और सैटेलाइट शहरों में कई आरोपों का सामना कर रहे थे।

इस मामले में वरिष्ठ निरीक्षक प्रदीप शर्मा और सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था। एंटीलिया मामले की जाँच की आँच जब परमबीर सिंह पर पहुँची तो उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने 100 करोड़ रुपए की वसूली करने के लिए कहा था।

इस केस में तत्कालीन डीजीपी संजय पांडे ने परमबीर सिंह मामले में दर्ज FIR में शामिल सभी लोगों को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन इसे अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनुकुमार श्रीवास्तव ने वापस कर दिया था। इसके बाद परमबीर सिंह और एक डीसीपी को सस्पेंड करने का प्रस्ताव फिर से पेश किया गया। इस प्रस्ताव को राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल और सीएम उद्धव ठाकरे ने मंजूरी दे दी थी।

गौरतलब है कि परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार में गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाया था। परमबीर सिंह ने कहा था कि अनिल देशमुख ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को हर हफ्ते 100 करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट दिया था। इन आरोपों के बाद देशमुख को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यही नहीं, भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

‘मेरी चुप्पी को कमजोरी मत समझना’: तारक मेहता के प्रोड्यूसर असित मोदी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद ‘रोशन भाभी’ ने जारी किया वीडियो

सब टीवी के लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में ‘रोशन भाभी’ का किरदार निभाने वाली जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने शो के प्रोड्यूसर असित मोदी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। असित मोदी ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया है। इन सबके बीच जेनिफर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा है कि कोई भी उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझे।

दरअसल, ‘रोशन भाभी’ यानि जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने कहा है,

“चुप्पी को मेरी कमजोरी मत समझना। मैं चुप थी क्योंकि सलीका है मुझमें। खुदा गवाह है कि सच क्या है। याद रख, उसके घर में कोई फर्क नहीं है तुझमें और मुझमें।”

‘मुझे और मेरे शो को बदनाम करने की कोशिश’: असित मोदी

जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों को असित मोदी ने झूठा और बकवास बताया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि उन्हें और उनके शो को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। असित मोदी ने कहा है, “वह मुझे और मेरे शो दोनों को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमने उन्हें शो से बाहर कर दिया है तो वह हम पर झूठे आरोप लगा रही हैं।”

वहीं, ईटाइम्स से हुई बातचीत में भी असित मोदी ने आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, “उन पर लगे सभी आरोप निराधार हैं और उनमें जरा सी भी सच्चाई नहीं है। वह सिर्फ मेरी छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं। यह मेरी वास्तविक प्रतिक्रिया है। मैं बहाने बनाने या कुछ छिपाने की कोशिश नहीं कर रहा। हर कोई यह जानता है कि मैं रियल लाइफ में कैसा हूँ। हमने जेनिफर को शो और अपनी टीम से हटा दिया। मेरे डायरेक्टर और टीम ने उन्हें शो छोड़ने के लिए कहा था हमारे पास सारे सबूत हैं और मैं यूँ ही कुछ भी नहीं बोल रहा हूँ।”

‘रोशन भाभी’ के आरोप

बता दें कि ‘रोशन भाभी’ यानी जेनिफर ने असित मोदी के अलावा शो के एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जतिन बजाज और प्रोजेक्ट हेड सोहेल रमानी के खिलाफ भी आरोप लगाए हैं। जेनिफर के अनुसार सोहेल रमानी और जतिन बजाज के दुर्व्यवहार के कारण उन्हें शो छोड़ना पड़ा। यही नहीं, उन्होंने शो के प्रोड्यूसर असित मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने कई बार उनका यौन उत्पीड़न किया।

उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह साल 2019 में टीम शूटिंग के सिलसिले में सिंगापुर गई थी। उस वक्त असित बार-बार कॉल कर अपने कमरे में बुलाते थे। शादी की सालगिरह वाली रात भी असित ने फोन किया था और कहा था कि अब सालगिरह मनाया जा चुका है कोई गिल्ट भी नहीं होगी। ‘आज तक’ के अनुसार, जेनिफर से एक बार असित मोदी ने कहा था कि तुम बहुत सुंदर लगती हो। मन करता है कि तुम्हें पकड़कर किस कर लूँ।

एक्ट्रेस ने कहा, “एक बार असित मोदी ने कहा- रात को तुम्हारी रूम पार्टनर नहीं है तो आ जाओ मेरे रूम में व्हिस्की पीते हैं। जब लगा कि दाल नहीं गलने वाली, तो मुझे कम स्क्रीन स्पेस मिलने लगी। पिछले साल भी असित मोदी को जब मैंने छुट्टी के लिए फोन किया तो उन्होंने मुझे कहा रो मत, पास होती तो हग करता, फ्लर्ट करता।” बकौल जेनिफर फ्लर्ट करने के बाद असित मोदी कहते थे कि मैं मजाक कर रहा था। लेकिन बाद में अभिनेत्री के वकील ने उन्हें समझाया कि चुप रहना सही नहीं होगा और उन्हें इस मामले को उठाना चाहिए।

जेनिफर के अनुसार एक बार असित ने सेट पर ही गेट बंद कर उन्हें रोकने की कोशिश की थी। इस बारे में एक महीने पहले प्राधिकरण को शिकायत की गई है। फिलहाल प्राधिकरण की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जेनिफर को उम्मीद है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। अभिनेत्री का कहना है अब वो इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगी। पहले काम खोने के डर से वे चुप थीं।

हर हत्या पर ₹1 करोड़, ‘वारिस पंजाब दे’ के सरगना अमृतपाल सिंह के घर में पनाह: दिल्ली में पकड़े गए आतंकियों से ISI ने किया था वादा

दिल्ली के जहाँगीरपुरी से जनवरी 2023 में गिरफ्तार किए गए आंतकी नौशाद और जगजीत सिंह जस्सा उर्फ याकूब बड़े नेताओं एवं साधुओं की हत्या कर खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के यहाँ छिपने वाले थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने इन दोनों को हर टारगेट किलिंग के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपए देने की बात कही थी।

भलस्वा डेयरी इलाके में हिंदू युवक राज कुमार की गला रेतकर हत्या और उसके शरीर को 8 टुकड़ों में बाँटकर दोनों ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को डेमो भेजा था। इसके बाद दोनों को टारगेट किलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में इसका खुलासा किया है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि ISI ने दोनों को हत्या के बाद फिलहाल गिरफ्तार ‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल के घर छिपाने का वादा किया था। चार्जशीट में कहा गया है कि अमृतपाल के घर पर सख्त पहरा रहता है और पुलिस भी उसके घर नहीं घुस सकती थी।

ISI की K2 (कश्मीर-खालिस्तान) डेस्क ने पंजाब में शिवसेना, बजरंग दल सहित अन्य हिंदू संगठनों के नेता और कॉन्ग्रेस के भी एक बड़े नेता की हिट लिस्ट बनाई थी। ISI इनकी हत्या के जरिए देश में दंगे कराना चाहती थी और हिंदुओं और सिखों के बीच में अविश्वास को पैदा करना चाहती थी, ताकि खालिस्तानी आतंकवाद को नए सिरे से हवा दी जा सके।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों आतंकियों- 29 साल के जगजीत सिंह जस्सा उर्फ याकूब (29) और 56 साल के नौशाद के खिलाफ अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ऐक्ट (UAPA) के तहत बुधवार (10 मई 2023) को चार्जशीट दाखिल की।

निशाने पर थे हिंदू नेता

शिवसेना के एक नेता को मारने के लिए उन्हें एक करोड़ रुपए देने का वादा किया गया था। वहीं, कॉन्ग्रेस के एक नेता की हत्या पर उन्हें 1.5 करोड़ रुपए मिलने वाले थे। इसके अलावा बजरंग दल के एक नेता और एक खालिस्तान-विरोधी बड़े चेहरे की हत्या पर भी उन्हें डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपयए देने का वादा किया गया था।

बजरंग दल के नेता की हत्या के लिए नौशाद को हवाला के जरिए 2 लाख रुपए अडवांस में दिए गए थे। इसके अलावा, इन दोनों को हरिद्वार में दो साधुओं की भी हत्या करने का काम सौंपा गया था। लाल किले पर तैनात सुरक्षाकर्मी को गोली मारने और ग्रेनेड से हमला करने के लिए कहा गया था। ISI ने उन्हें हैंड ग्रेनेड भी मुहैया कराए थे। पुलिस ने उसे बरामद कर लिया है।

दिल्ली पुलिस के पास इन दोनों आतंकियों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के बीच हुए चैट का डीटेल है। चैट के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का के-2 (कश्मीर-खालिस्तान) डेस्क इन दोनों आतंकियों के बर्बर कारनामे से बहुत प्रभावित था और इनके माध्यम से वह देश में टारगेट किलिंग को अंजाम देना चाहता था।

लाल किले के हमलावर के संपर्क में थे दोनों

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के आरोप पत्र में कहा गया है कि नौशाद पाकिस्तान में बैठे ISI के हैंडलर और लश्कर के आतंकी सोहेल के संपर्क में था। वहीं, जगजीत विदेश में बैठे गैंगस्टर और खालिस्तान समर्थक आतंकी अर्श डल्ला के संपर्क में था।

मोहम्मद सोहेल को साल 2000 में लाल किले पर हुए हमले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे तिहाड़ जेल में बंद किया गया था। उसी जेल में नौशाद भी बंद था। वहीं पर दोनों की मुलाकात हुई थी। साल 2013 में सोहेल रिहा हुआ और पाकिस्तान भाग गया। वह वहीं रहकर कर भारत के खिलाफ काम करने लगा।

इसके अलावा, दोनों आतंकी पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन हरकत उल अंसार के नज़ीर भट, नासिर खान, नज़ीर खान और हिजबुल मुजाहिद्दीन के नदीम के संपर्क में भी थे। इन सभी को ISI के निर्देश पर काम करने को कहा जाता था। 56 वर्षीय नौशाद और 29 वर्षीय जगजीत पाकिस्तान द्वारा दिए गए टारगेट कीलिंग को अंजाम देने के करीब पहुँच गए थे।

हरकत उल अंसार का सदस्य नौशाद

नाैशाद हरकत उल अंसार का सदस्य है। वह दो हत्या के मामले में शामिल था। इसमें उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। इसके अलावा उसे बम धमाके के मामले में भी 10 वर्ष की सजा हुई है। वहीं, जगजीत सिंह बंबीहा गैंग का सदस्य है। हत्या के मामले में पैरोल जंप भी कर चुका है। 

ISI ने जब दोनों को यह सौंपा था तो नौशाद और जगजीत ने अपने हैंडलर का भरोसा जीतने के लिए एक हत्या को अंजाम दिया और उसका वीडियो पाकिस्तान भेज दिया। दोनों राजकुमार उर्फ राजा नाम के हिंदू लड़के का अपहरण करके उसे भलस्वा डेयरी ले गए। दोनों ने वहाँ पर उसका गला रेता और उसके शरीर को 8 टुकड़ों में काटा। इसका वीडियो पाकिस्तान भेजा। राजा के हाथ पर भगवान शिव का टैटू बना हुआ था। इसी के माध्यम से उन्होंने उसके हिंदू होने की पहचान की थी।

गिरफ्तारी के बाद इन दोनों के मोबाइल फोन से युवक का सिर कलम करने और उसके शरीर के टुकड़े करने वाला वीडियो मिला था। इसके अलावा, विदेश में बैठे हैंडलर को वीडियो भेजने और सिग्नल पर उससे चैट करने का डिटेल भी मिला था। पुलिस के अनुसार, हल्द्वानी जेल में बंद रहने के बाद दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। दोनों को पिछले साल अप्रैल-मई में परोल पर छोड़ा गया था। इसके बाद वे अपने काम में लग गए थे।