Home Blog Page 1819

मानव बम बनकर मुझे मारने आए थे हैदराबाद में पकड़े गए आतंकी, पुलिस ने छिपायाः MLA राजा सिंह का दावा, अमित शाह को लिखा पत्र

हैदराबाद के गोशमहल से विधायक T राजा सिंह ने दावा किया है कि मानव बम के द्वारा उनकी हत्या की साजिश रची गई है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने खुद और अपने परिवार के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की बात करते हुए लिखा है कि आतंकी मानव बम का इस्तेमाल कर के उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने इस दौरान एक खबर का लिंक भी भेजा है।

ये खबर अक्टूबर 2022 की है, जब हैदराबाद में 3 आतंकी दबोचे गए थे। अब्दुल ज़ाहिद, मोहम्मद समीउद्दीन और हसन फारूक के पास से हैण्ड ग्रेनेड्स के अलावा 5.15 लाख रुपए भी बरामद हुए थे। ये लोग पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से संपर्क में थे और ‘लोन वुल्फ अटैक’ की प्लानिंग कर रहे थे। मालकपट से इन्हें गिरफ्तार किया गया था। ये हमले कर के आम लोगों में दहशत फैलाना चाहते थे। अब्दुल ज़ाहिद 2017 के एक आतंकी हमले में साजिश था, लेकिन 12 साल बाद बरी होने में कामयाब रहा था।

टी राजा सिंह ने बताया है कि तेलंगाना के ख़ुफ़िया विभाग ने उन्हें कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि वो मात्र 2 गार्ड्स के साथ सार्वजनिक सभाओं में जाते हैं, ऐसे में उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और लोग उनके लिए खतरा हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रही। उन्होंने हैदराबाद को आतंकियों का नया अड्डा बताते हुए कहा कि अब्दुल ज़ाहिद और दो अन्य आतंकियों की गिरफ़्तारी इसी क्रम में हुई है।

विधायक टी राजा सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

टी राजा सिंह ने बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फोन नंबरों से धमकी भरे कॉल्स भी आते हैं। उन्होंने 2016-17 में गिरफ्तार आतंकियों द्वारा अपने घर पर रेकी किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने हैदराबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की भी माँग की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए टी राजा सिंह ने बताया कि जब तेलंगाना सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था, तब ये तीनों आतंकी गिरफ्तार हुए थे।

विधायक टी राजा सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “ये तीनों आतंकी गणेश चतुर्थी और नवरात्रि में सार्वजनिक स्थानों पर हमले करने वाले थे। इनसे पूछताछ के दौरान उपस्थित रहे एक अधिकारी ने उन्हें बताया कि इनका टार्गेट आप (विधायक राजा सिंह) हैं। ये पदयात्रा के दौरान मुझ पर हमला करने वाले थे। मुझे बताया गया कि पुलिस वालों ने जानबूझ कर ये बात छिपाई, ताकि मुझे पब्लिसिटी नहीं मिल सके। मुख्यमंत्री KCR के आदेश से ये सब हुआ।”

‘पाकिस्तानी फौज ने जिन्ना को स्लो प्वाइजन देकर मारा’: भारत में ‘हिंदूराज’ के समर्थक अल्ताफ हुसैन का दावा, कहा- खुद को अल्लाह से भी ताकतवर समझते है आर्मी जनरल

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तार को लेकर वहाँ के सैन्य प्रतिष्ठान पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कभी सेना के दुलारे रहे इमरान खान को उसकी शह पर पद से अपदस्थ करके शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री बनाया गया है। इसके बाद शहबाज शरीफ की सरकार ने सेना के कहने पर इमरान खान के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए।

पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि एक तरफ सेना और शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जरदारी हैं तो दूसरी तरफ इमरान खान और देश की न्यायपालिका है। दोनों गुटों के बीच रस्साकशी जारी है। इसी तहत सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2023 को इमरान खान की हुई गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उन्हें रिहा कर दिया था।

लंदन में निर्वासन का जीवन जी रहे पाकिस्तान के प्रमुख नेता एवं मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान के निर्माण के वक्त से ही मुल्क की सियासत पर सेना का कब्जा है। उन्होंने कहा कि जो एक बार फौज का मुखबिर (करीबी के अर्थ में) बन जाता है वो उस गैंग से वापस नहीं निकल पाता। बदले में फौज उसे भरपूर करप्शन करने की छूट देती है।

DW उर्दू को दिए इंटरव्यू में अल्ताफ हुसैन ने कहा, “पाकिस्तान में गद्दार मूल रूप से फौजी जनरैल हैं। पाकिस्तान में दूसरों को गद्दारी का इल्जाम लगाने वाले फौजी जनरल हैं। पाकिस्तान की जो 2 परसेंट एलीट आर्मी है, वो रूल कर रही है पाकिस्तान में पिछले 75 सालों से। वे अल्लाह से भी खुद को ताकतवर समझते हैं। इन्होंने ये हाल कर दिया है कि IMF के वेंटिलेटर पर पाकिस्तान चल रहा है।”

पाकिस्तान में फौज की करतूतों के बारे में बात करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा, “मिलिट्री स्टैबलिशमेंट ने सबसे पहले फाउंडर ऑफ पाकिस्तान कायदे आजम (मुहम्मद अली जिन्ना) को रास्ते से अलहदा किया प्वाइजन देकर, स्लो प्वाइजन… इसके बाद इन्होंने उनके राइट हैंड लियाकत अली खान को शहीद किया रावलपिंडी के भरे जलसे में…. उसके बाद मोहतरमा फातिमा जिन्ना को कत्ल किया अयूब खान के जमाने में।”

उन्होंने आगे कहा, “मिलिट्री का हमेशा से कब्जा रहा। 1947 के बाद आर्मी और उनके जेनरल ने सरकार की सारी सिस्टम पर कब्जा कर लिया। मुल्क में चाहे नवाज शरीफ की हुकूमत हो, आसिफ अली जारदारी की हुकूमत हो, बेनजीर भुट्टो की हुकूमत हो…. किसी की भी हुकूमत हो, वे सजदा जाकर ISI के हेडक्वार्टर और उससे पहले रावलपिंडी के GHQ (सेना मुख्यालय) में करेंगे। उसके बगैर वे हुकूमत नहीं कर पाएँगे।”

इंटरव्यू के दौरान अल्ताफ हुसैन ने कहा कि जब-जब MQM के खिलाफ पाकिस्तान में ऑपरेशन चलाया गया, तब-तब खुदा-ना-खास्ता नवाज शरीफ की सरकार थी। दरअसल, जून 1992 में MQM के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हुआ तो मुल्क में नवाज शरीफ की हुकूमत थी। बेनजीर के दौर में भी वो ऑपरेशन जारी रहा। 1998 में उनके खास हकीम सईद का कत्ल कर दिया गया। उसके बाद साल 2013 में MQM के खिलाफ फिर ऑपरेशन शुरू हुआ।

नवाज शरीफ से रिश्ते को लेकर अल्ताफ हुसैन ने कहा, “मैं उन्हें अपना दोस्त समझता था। उसे हर वक्त मैंने मदद की, लेकिन बार-बार नवाज शरीफ ने मुझे धोखा दिया। हो सकता है कि नवाज शरीफ दोबारा पाकिस्तान चले जाएँ और वजीरे आजम बना दिए जाएँ। जो एक बार फौज का मुखबिर बन जाए, वो वापस उस माफिया गैंग से वापस नहीं आ सकता।” उन्होंने कहा कि इमरान खान मिट्ठी छुरी हैं।

कौन हैं अल्ताफ हुसैन?

अल्ताफ हुसैन को पाकिस्तान में मुहाजिर माना है। मुहाजिर पाकिस्‍तान का वह समुदाय है, जो उर्दू जुबान बोलता है और बँटवारे के समय भारत से पाकिस्‍तान आया था। पंजाबी वर्चस्व वाले पाकिस्तान में मुहाजिरों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है और उनके साथ भेदभाव किया जाता है।

अल्ताफ हुसैन के परिवार का संबंध आगरा की नाई की मंडी इलाके से है। विभाजन से पहले अल्‍ताफ हुसैन के पिता यहीं रहा करते थे और भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। साल 1947 में विभाजन के बाद बेहतर भविष्‍य की चाह में उनका परिवार पाकिस्‍तान के कराची में जाकर बस गया। वहीं पर 17 सितंबर 1953 में अल्‍ताफ हुसैन का जन्‍म हुआ। 

1980 में अल्‍ताफ ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) की स्‍थापना की, जो मुहाजिरों की मुहाफिज पार्टी मानी जाती है। MQM का कराची के शहरी इलाके और सिंध तथा हैदराबाद इलाके में मजबूत जनाधार है। माना जाता है कि भारत से जाने वाले मुस्लिमों को उन्हें एकतरफा समर्थन मिलता है। वहीं, पाकिस्‍तान की नेशनल एसेंबली में MQM चौथी सबसे बड़ी पार्टी है।

अल्‍ताफ हुसैन ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कराची के एक अस्‍पताल में नौकरी शुरू की थी। कॉलेज के दिनों से ही अल्‍ताफ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। नौकरी करने के कुछ समय बाद अल्‍ताफ हुसैन सक्रिय राजनीति में आ गए और MQM नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया।

सेना और पाकिस्तान की राजनीति में पाकिस्तानी पंजाब के वर्चस्व के बाद उनके खिलाफ समय-समय पर कई तरफ के आरोप लगाए गए। उन पर भारत के साथ संबंध होने के अलावा पाकिस्तान में ड्रग तस्करी करने से लेकर हत्या और दंगा करने तक के आरोप लगाए गए और उनके खिलाफ ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद साल 1992 में वे लंदन चले गए और वहीं से MQM का काम देखने लगे।

भारत-पाकिस्तान के बँटवारे का विरोध

अल्ताफ हुसैन समय-समय पर भारत बँटवारे का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान को फिर से एक साथ आने की अपील की। साल 2019 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में शरण माँगी थी। उन्होंने कहा था, अगर प्रधानमंत्री मोदी मुझे मेरे साथियों के साथ भारत में शरण देते हैं तो मैं भारत आने के लिए तैयार हूँ। वहाँ मेरे दादा-दादी और हजारों रिश्तेदार दफन हैं।

उन्होंने अयोध्या में राममंदिर बनाने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर कहा था कि वर्तमान सरकार को भारत में ‘हिंदूराज’ स्थापित करने का हक है। उन्होंने इस फैसले का विरोध करने वाले हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की भी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान बना है तो आपको हिंदुस्तान में रहने की जरूरत नहीं है। जाइए और पाकिस्तान में रहिए मौलाना असदुद्दीन ओवैसी।”

साल 2016 में अल्‍ताफ हुसैन ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि पाकिस्‍तान दुनिया का कैंसर है। इसको लेकर पाकिस्तान में बवाल हो गया। उसके बाद पाकिस्तान में MQM के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई। इसको देखते हुए हालाँकि बाद में उन्होंने माफी माँग ली और दबाव में आकर कहना पड़ा कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी के फैसले अब वह खुद नहीं करेंगे, बल्कि सारे फैसले पार्टी की कोऑर्डिनेशन कमिटी करेगी।

पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले फारूक सत्तार सहित पार्टी के कई सांसदों और नेताओं को पकड़ लिया गया और महीनों तक जेल में रखा गया। सत्तार जब जेल से बाहर निकले तो उन्होंने अल्ताफ हुसैन का विरोध किया और MQM-P (मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट- पाकिस्तान) नाम से एक अलग पार्टी बना ली। सेना के शह पर बनी इस पार्टी में MQM के कई बड़े नेता शामिल हो गए।

पूरी दुनिया में सनातन धर्म की ज्योति फैलाना ‘आर्ष विद्या समाजम’ का लक्ष्य, ‘लव जिहाद’ पीड़िताओं की मदद: ‘The Kerala Story’ वाली पीड़िता का भी बना सहारा

फिल्म ‘The Kerala Story’ देश भर में सुर्खियाँ बटोर रही है। वास्तविक घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में 3 ऐसी लड़कियों की कहानी है, ‘लव जिहाद’ में फँस कर जिनका जीवन तबाह हो जाता है। इन लड़कियों का इस्लामी धर्मांतरण करा कर उनकी तस्करी की जाती है, फिर ISIS स्लेव बना दिया जाता है। हालाँकि, कुछ ऐसी भी संस्थाएँ हैं जो ऐसी पीड़ित लड़कियों की मदद करती हैं। उन्हीं में से एक ‘आर्ष विद्या समाजम’ भी है।

यहाँ हम इसी संस्था के बारे में जानेंगे, जो ‘लव जिहाद’ से पीड़ित लड़कियों को उनकी जड़ों तक लौटाने, समाज में उन्हें सम्मान दिलाने और मानसिक रूप से उन्हें मजबूत करने की दिशा में कई वर्षों से काम कर रहा है। ये एक शैक्षणिक संस्थान है, जो पंच-कर्तव्य (अध्ययन, अनुष्ठान, प्रचारण, अध्यापन और सनातन धर्म का संरक्षण) का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस संस्थान का जन्म ही ऋग्वेद के मंत्र ‘कृण्वन्तो विश्‍वमार्यम्’ की प्रेरणा से हुआ था, जिसका अर्थ है – संसार के सभी मनुष्यों को श्रेष्ठ कर्मों वाला बनाइए।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की स्थापना का उद्देश्य और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान

संस्था का मानना है कि एक ईश्वरीय प्रेरणा से उसका जन्म हुआ और पूरे विश्व को सनातन धर्म की शिक्षा देकर उन्हें अच्छा बनाने का आदेश मिला। संस्था गुरु परंपरा पर विश्वास रखती है। ‘आर्ष विद्या समाजम’ का मानना है कि दुनिया में आजकल जितनी भी बुराइयाँ फ़ैल रही हैं, उसका मुख्य कारण है युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता का अभाव। संस्था का लक्ष्य है कि दुनिया में एक व्यक्ति भी ऐसा न हो, जिसने ‘सनातन धर्म’ का नाम न सुना हो।

‘आर्ष विद्या समाजम’ मुख्य रूप से 4 मुख्य कोर्स की शिक्षा देती है – आध्यात्मिक शास्त्रम, आर्ष योग विद्या, भारतीय संस्कृति और विद्यार्थी नैपुण्य वर्ग। साथ ही ये विभिन्न धर्मों की तुलना करते हुए उनके बीच का अंतर भी लोगों को बताता है। अब जानते हैं कि इस संस्था की स्थापना किसने की थी। योगाचार्य KR मनोज ने सन् 1999 में इसकी नींव रखी थी। सद्गुरु शंकर गुरुदेव से उन्हें इसकी प्रेरणा मिली थी। वो सनातन धर्म, योग विद्या और तंत्र विद्या में दक्ष हैं।

KR मनोज आत्रेय, क्रिया योग और तंत्र – इन तीन परंपराओं में भी दक्ष हैं। मात्र 4 वर्ष की उम्र से उन्होंने इनकी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। ‘आर्ष विद्या समाजम’ से जुड़ी 5 अन्य संस्थाओं की भी उन्होंने स्थापना की है – शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम, मनीषा सांस्कारिक वेदी, विज्ञानभारती विद्या केन्द्रम, बौद्धिकम बुक्स और साधना शक्ति केन्द्रम। महावतार बाबाजी के क्रिया योग को भी उन्होंने सीखा है। महावतार बाबाजी की ही गुरु परंपरा में ‘योगदा आश्रम’ भी चलता है, जो कि एक अलग संस्था है।

केआर मनोज इन सबके अलावा नीलकेश्वरानंद परमहंस के भी भक्त हैं। परमहंस योगानंद द्वारा स्थापित राँची स्थित योगदा आश्रम से भी उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा भी कई आध्यात्मिक केंद्रों से उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में शिक्षा प्राप्त की। उनकी संस्था ‘शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम’ वैज्ञानिक आधार पर योग की शिक्षा देती है, जो ‘नाथ संप्रदाय’ पर आधारित है। वहीं ‘मनीषा सांसारिक वेदी’ ने भारत के इतिहास और संस्कृति के अलावा विरासत के बारे में शिक्षा देती है, आक्रमणों के बारे में और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भी बताती है।

संस्कृत, वास्तु शास्त्र, ज्योतिष इत्यादि के बारे में भी यहाँ पढ़ाया जाता है। वहीं ‘बौद्धिकम बुक्स एन्ड पब्लिकेशंस’ के जरिए ‘अध्ययन से क्रांति’ का लक्ष रखा गया है। इसके द्वारा सनातन धर्म से जुड़ी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। ये किताबें डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं। पॉडकास्ट्स, वीडियो ब्लॉग्स और पत्रिकाएँ भी प्रकाशित की जाती हैं। वहीं ‘साधना शक्ति केन्द्रम’ के जरिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार की साधनाओं को सिखाया जाता है।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की वेबसाइट पर बताया गया है कि संस्था किन चीजों में विश्वास रखती है और क्या करती है। इसके मुख्य कंटेंट्स अंग्रेजी और मलयालम भाषा में होते हैं। इसमें सनातन धर्म के बारे में भी अच्छे से समझाया गया है, इससे जुड़े शब्दों को परिभाषित किया गया है। आप वेबसाइट पर जाकर उन 30 सवालों और उनके जवाबों को पढ़ सकते हैं, जिससे आपको सनातन धर्म के बारे में विस्तृत रूप से जानने को मिलेगा।

‘लव जिहाद’ पीड़िता ने श्रुति ने बताया कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने की उसकी मदद

पीड़ित लड़कियों ने ‘PGurus’ के वीडियो में बताया था कि कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उसकी मदद की। वैशाली, अनघ और श्रुति ने इस दौरान अपने साथ हुई क्रूरता के बारे में भी बताया था। श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस्लाम अपनाया, तब उनके परिवार वालों के लिए ये हैरानी भरा फैसला था और वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थी, उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी। हालाँकि, अब उन्होंने घर-वापसी कर ली है, लेकिन उनके पिता को फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उन्होंने इस्लाम को मानना छोड़ा है या नहीं।

इस दौरान योगाचार्य मनोज ने उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ये भरोसा दिलाया कि श्रुति हिन्दू धर्म में वापस आ चुकी हैं। गुरु ने परिवार को बताया कि श्रुति को उसके किए का पछतावा है और वो अपनी तरह की अन्य पीड़ित लड़कियों की भी मदद कर रही है, उन्हें अँधेरे से निकालने में, उन्हें हिन्दू धर्म में वापस लाने में। योगाचार्य मनोज ने परिवार को आश्वस्त किया कि वो अब चिंता न करें, वो सिर उठा कर चलें क्योंकि उनकी बेटी अच्छा कार्य कर रही है।

इसके बाद उनके परिवार का श्रुति में भरोसा कायम हुआ। उन्होंने अपने अनुभव को लेकर पुस्तक लिखा, जूनियर लड़कियों को इस बारे में जागरूक किया और वीडियो के जरिए भी अपने अनुभव साझा किया। उनके इन प्रयासों में ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उनकी मदद की। इसके बाद उनके पिता को लोगों के फोन कॉल आने लगे, श्रुति की प्रशंसा में। योगाचार्य मनोज से मिलने से पहले तो श्रुति ने सनातन धर्म का नाम तक नहीं सुना था।

श्रुति का कहना है कि इसीलिए योगाचार्य KR मनोज ने सनातन धर्म को लेकर एक कोर्स बनाया, जिसमें बेसिक से लेकर इसके बारे में बताया जाता है। श्रुति का कहना है कि धर्मांतरण का एक बड़ा कारण है कि हमें अपने धर्म और संस्कृति के बारे में नहीं पता है, इसी दिशा में ‘आर्ष विद्या समाजम’ प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘आर्ष विद्या समाजम’ में कई ‘लव जिहाद’ पीड़िताएँ रह रही हैं। श्रुति के बारे में बता दें कि उनका ब्रेनवॉश भी उनकी मुस्लिम साथियों ने ही किया था।

वह कॉलेज पढ़ने के लिए गई थी। लेकिन वहाँ मुस्लिम साथियों ने उसका ब्रेन वॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। फिर वह रहमत के नाम से जानी जाने लगी। केरल के कासरगोड की रहने वाली श्रुति का कहना है कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के ट्रेलर में जो कुछ दिखाया गया है, वह सही है। उनके साथी हिन्दू धर्म को लेकर उनके अल्पज्ञान का फायदा उठा कर इस्लाम के बारे में अच्छी-अच्छी बातें करते थे और हिन्दू धर्म को लेकर निशाना साधने वाली बातें करते थे।

आप ‘आर्ष विद्या समाजम’ के यूट्यूब चैनल पर भी जाकर उनके वीडियोज देख सकते हैं, जिसमें इस्लाम की धारणाओं को तथ्यों के साथ काटा गया है। फिल्मों से होने वाले प्रोपेगंडा का भी इसमें जवाब दिया गया है। हिजाब को लेकर भी संस्था ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी थी। संस्था ने हलाल मांस पर भी प्रतिबंध की माँग की थी। केरल में ‘मुस्लिम लीग’ के नेता किस तरह घृणा फैलाते हैं और कुरान से प्रेरित होकर ऐसी बातें करते हैं, इस बारे में भी संस्था ने बताया था।

4 लोग, 60 दिन: असम में CM हिमंता ने बना दी एक्सपर्ट कमिटी, एक से ज्यादा निकाह (बहुविवाह) पर रोक की तैयारी

बहुविवाह पर रोक लगाने की दिशा में असम सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने 4 सदस्यीय एक्सपर्ट कमिटी का गठन कर दिया है। यह कमिटी पता लगाएगी कि बहुविवाह पर रोक के लिए विधानसभा के पास अधिकार है या नहीं।

इस एक्सपर्ट कमिटी की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रूमी फूकन होंगी। असम के एडवोकेट जनरल देबजीत सैकिया, असम के अतिरिक्त महाधिवक्ता नलिन कोहली और वकील नेकिबुर जमान कमिटी के मेंबर होंगे। इसकी जानकारी देते हुए सरमा ने गुरुवार (11 मई 2023) को ट्वीट कर कहा, “मैंने बहुविवाह को समाप्त करने के उद्देश्य से कानून बनाने के लिए विधानसभा के पास अधिकार हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का ऐलान किया था। अब राज्य सरकार ने इस समिति का गठन कर दिया है। इस समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 60 दिनों की समय सीमा दी गई है।”

यह समिति इस बात की जाँच करेगी कि विधानसभा को राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाने का अधिकार है या नहीं। इसके अंतर्गत समिति को भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 25 तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के प्रावधानों की भी जाँच करनी होगी। 9 मई को सरमा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने का ऐलान किया था। सीएम ने कहा था कि यह समिति कानूनी विशेषज्ञों सहित समाज के प्रबुद्ध वर्ग से भी बातचीत करेगी।

गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों को बहुविवाह यानी एक से अधिक निकाह करने की छूट है। मुस्लिमों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति यदि एक से अधिक विवाह करता है तो इसे IPC की धारा 494 और 495 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है। वहीं, मुस्लिम IPC की धारा 494 के तहत पहली बीवी की सहमति से 4 निकाह कर सकता है। दरअसल, मुस्लिमों को यह छूट मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत दी गई है। हालाँकि मुस्लिम महिलाओं को 4 निकाह करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी मुस्लिम महिला को दूसरी निकाह करनी होती तो उसे पहले शौहर को तलाक देना होता है।

इमरान खान की पार्टी में पाकिस्तान के चीफ जस्टिस की सास, जमानत पर बोलीं मरियम नवाज- आप भी ज्वाइन कर लो PTI: महिला मंत्री ने पूछा- जजों के घर में आग लगेगी तो…

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कल मुल्क की सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने उन्हें जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद जस्टिस बंदियाल पर पाकिस्तान की सरकार भड़की हुई है। सत्ताधारी पार्टी के नेता जजों के घर जलाने की बात कर रहे हैं। चीफ जस्टिस को पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ में शामिल होने को कहा जा रहा है।

इमरान खान और चीफ जस्टिस बंदियाल की करीबियाँ

बता दें कि पाकिस्तान सरकार के मंत्रियों का इस तरह चीफ जस्टिस पर नाराज होना पिछले कुछ वाकयों के मद्देनजर है। उमर अता बंदियाल ने 2 फरवरी 2022 को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली ती। इसके बाद ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने इमरान खान की माँगों पर सुनवाई की।

इसी वर्ष जनवरी में जब पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में विधानसभा भंग हुई तो इमरान खान जल्द चुनाव कराए जाने पर जोर देने लगे। वहीं शहबाज सरकार इसका विरोध कर रही थी। ऐसे में बंदियाल ने इस मुद्दे पर खुद स्वत: संज्ञान ले लिया और चुनाव की तारीख अक्टूबर से मई में कर दी। शहबाज सरकार को ये चीज नागवार गुजरी और उन्होंने संसद में ऐसा प्रस्ताव पारित किया जिसके बाद चीफ जस्टिस के पास किसी भी मामले पर खुद संज्ञान लेने का अधिकार छिन गया।

चीफ जस्टिस बंदियाल की सास का पीटीआई कनेक्शन

बंदियाल की करीबियों के अलावा उनकी सास भी एक वजह हैं जो सत्ताधारी पार्टी इस समय उनको निशाना बना रही हैं। कुछ दिन पहले बंदियाल की सास महजबीन नून और इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के वकील तारिक रहीम की बीवी राफिया तारिक के बीच हुई बातचीच की ऑडियो वायरल हुई थी।

दोनों महिलाओं बातचीत में कथित रूप से मुख्य न्यायधीश के स्टैंड की तारीफ कर रही थीं और जल्द चुनाव कराए जाने पर पक्ष रख रही थीं। इसमें अता बंदियाल की सास साफ बता रही थीं कि वह जल्द चुनाव कराने के सीजेपी के फैसले के पक्ष में हैं बस उन्हें अपने दामाद की थोड़ी चिंता है।

उनकी यह ऑडियो वायरल होने के बाद मरियम नवाज ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को ‘सास कोर्ट’ कहा था। उन्होंने कहा था कि कोर्ट के फैसले बीवियों और सास की पसंद-नापसंद के आधार पर लिए जा रहे हैं। ऐसे तरीके मुल्क के लिए खतरनाक है।

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने साधा जज पर निशाना

तो इस तरह पाकिस्तान के चीफ जस्टिस से सत्तारूढ़ पार्टी पहले ही नाराज थी और अब इमरान खान को रिहाई देने के बाद तो शहबाज सरकार के मंत्री उनपर अधिक हमलावर हो गए हैं। नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने भी इमरान की रिहाई को लेकर चीफ जस्टिस पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस आज देश के खजाने से 60 अरब रुपए गबन करने वाले अपराधी को रिहा करके बहुत खुश थे। देश की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थानों पर हमलों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार चीफ जस्टिस हैं, जो एक अपराधी की ढाल बनकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। उनको चीफ जस्टिस का पद छोड़कर उनकी सास की तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।

पाकिस्तान सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने इमरान खान को चीफ जस्टिस बंदियाल का ‘लाड़ला’ कहा। मरियम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को धमकी देते हुए कहा कि आज पाकिस्‍तान जल रहा है, कल को अगर जजों के घरों में घुसकर कोई आग लगाएगा तो … औरंगजेब ने कहा कि आप फैसला करें, किसी का घर नहीं बचेगा।

मरियम औरंगजेब ने कहा कि किसी का घर नहीं बचेगा। सियासतदानों के घर, गृह मंत्री राणा सनाउल्‍लाह का घर जलाया गया, एंबुलेंस जली, मस्जिद जली, स्‍कूल जले क्‍यों वे इस देश के नहीं हैं। रेडियो पाकिस्‍तान आपका नहीं है। इस मुल्‍क को जलाने वाला, सियासत के नाम पर दहशतगर्द और किस भ्रष्‍टाचार के केस में उसे 60 अरब रुपए का जवाब देना है। अगर अदालत ने सजा दी होती तो यह हालात नहीं होते, आज मुल्क जल नहीं रहा होता।

गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर में उड़ाए नोट, मोबाइल नहीं ले जा सकते फिर भी बने वीडियोः सुरक्षा चूक के बाद जाँच के आदेश

पिछले दिनों गुजरात के द्वारका स्थित जगत मंदिर में भगवान द्वारकाधीश के सामने नोट उड़ाते लोगों के वीडियो वायरल हुए थे। मंदिर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध है। ऐसे में इस बड़ी चूक से श्रद्धालुओं में नाराजगी है। वायरल वीडियो को लेकर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

दुनिया भर में विख्यात द्वारकाधीश जगत मंदिर में वीआइपी दर्शनार्थियों ने भक्ति की जगह अपने रसूख का प्रदर्शन किया। भगवान श्री कृष्ण के सामने नोट उड़ाए। कुछ लोग तो भगवान की तरफ नोटों की गड्डी फेंकते नजर आए। कृष्ण भक्तों का कहना है कि भगवान द्वारकाधीश विष्णु के अवतार हैं। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। ऐसे में द्वारकाधीश के सामने पैसे फेंक कर भगवान के सामने माता लक्ष्मी का अपमान किया गया। वीडियो के वायरल होते ही कृष्ण भक्तों में नाराजगी फैल गई।

स्थानीय कलेक्टर ने द्वारका मंदिर के इस वायरल वीडियो की जाँच के आदेश दिए हैं। फिलहाल किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है, जिसे एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। इस मंदिर में मोबाइल और कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर प्रतिबंध है। इसके अलावा वीडियो शूटिंग और फोटोग्राफी भी सख्त वर्जित है।

मंदिर परिसर में वीडियोग्राफी के लिए पुरातत्व विभाग के कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। वीडियो वायरल होने के बाद पता चला कि मंदिर के नियमों को ताक पर रख दिया गया था और कई लोगों के नोट फेंकने व उड़ाने का वीडियो बनाया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद नाराज लोगों ने वीडियो बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

घटना से संबंधित कई वीडियो वायरल हैं। एक वीडियो में पुजारी के वेश में एक शख्स नोटों की गड्डी भगवान की तरफ फेंकता नजर आ रहा है। अन्य वीडियो में कुछ लोग नाचते हुए नोट बरसाते नजर आ रहे हैं। बता दें कि जिस स्थान पर यह वीडियो बनाया गया, वहाँ फोटो लेना भी मना है। आश्चर्य की बात यह है कि मौजूद पुजारी ने भी भक्तों को नियम तोड़ने से नहीं रोका।

मंदिर में नोट उड़ाने और फेंके जाने का वीडियो सामने आने के बाद प्रभारी कलेक्टर एसडी धनानी ने जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मंदिर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि द्वारकाधीश मंदिर के वीडियो वायरल होने से सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जब धर्म नहीं बदला तो नमाज क्यों पढ़ना चाहती हो: हाई कोर्ट ने उस लड़की से पूछा जिसका ‘मुस्लिम दोस्त’, सुरक्षा के साथ चाहती थी इजाजत

इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में लाने वाली फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के बाद कई पीड़िताओं ने आगे आकर बताया है कि ‘मुस्लिम दोस्त’ ने उनका ब्रेन वाॅश किया था। अब उत्तराखंड की एक हिंदू युवती, जिसका ‘मुस्लिम दोस्त’ है चर्चा में है। इस युवती ने उत्तराखंड हाई कोर्ट से पिरान कलियर दरगाह (Piran Kaliyar Dargah) में नमाज पढ़ने और सुरक्षा की इजाजत माँगी थी। हाई कोर्ट ने इसकी इजाजत देते हुए हरिद्वार पुलिस को उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई गुरुवार (11 मई 2023) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिरान कलियर दरगाह में नमाज पढ़ने को लेकर याचिका दाखिल करने वाली लड़की 22 वर्षीय भावना मूल रूप से मध्य प्रदेश के नीमच जिले की रहने वाली है। उसका दोस्त हरिद्वार का 35 वर्षीय फरमान है। दोनों ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की बेंच ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता लड़की से पूछा कि जब उसने धर्म नहीं बदला है तो वह नमाज क्यों पढ़ना चाहती है? इस पर लड़की ने कोर्ट से कहा कि वह दरगाह से प्रभावित है, इसलिए वह यहाँ नमाज पढ़ना चाहती है। लड़की ने कोर्ट से यह भी कहा है कि दोनों ने न तो शादी की है और न ही वह धर्मांतरण करना चाहती। वह हिंदू धर्म को मानती है और बिना किसी डर या दबाव के कलियर दरगाह में इबादत करना चाहती है।  

इसके बाद उत्तराखंड हाई कोर्ट ने लड़की और उसके दोस्त को दरगाह में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी। साथ ही कोर्ट ने हरिद्वार पुलिस को सुरक्षा के निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि नमाज पढ़ने जाने से पहले लड़की को एक पत्र लिखकर संबंधित थाने के एसएचओ को जानकारी देनी होगी ताकि वह सुरक्षा उपलब्ध करा सकें। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

याचिक में भावना ने दक्षिणपंथी संगठनों से खुद को और पाने परिवार को खतरा बताते हुए हरिद्वार के कलेक्टर और एसएसपी को निर्देशित कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की माँग की थी। बता दें कि भावना और फरमान हरिद्वार की एक फार्मा कंपनी में नौकरी करते हैं।

गुजरात के 68 जजों के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, वे जज भी शामिल जिन्होंने राहुल गाँधी को माना था दोषी: कहा- नियमों का पालन नहीं हुआ

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुजरात (Gujarat) की निचली अदालत के 68 न्यायिक अधिकारियों के जिला जज के रूप में प्रमोशन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही इन जजों को उनके पहले वाले पद पर वापस भेजने का आदेश दिया है। इन 68 जजों में हरीश वर्मा भी हैं, जिन्होंने मानहानि केस में राहुल गाँधी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार वाली सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच की इस फैसले के बाद गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लग गई है। दरअसल, इन जजों को प्रमोट करने की सिफारिश गुजरात हाईकोर्ट ने की थी। इसके बाद गुजरात की भाजपा सरकार ने इन जजों के प्रमोशन की अधिसूचना भी जारी कर दी थी।

अपने फैसले में जस्टिस शाह ने कहा, “राज्य सरकार ने याचिका लंबित रहने के दौरान अधिसूचना जारी की है। हम हाईकोर्ट की सिफारिश और राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हैं और जजों को उनके मूल पद पर वापस भेजते हैं।”

जस्टिस शाह ने आगे कहा कि प्रमोशन मेरिट एवं वरिष्ठता के सिद्धांत तथा योग्यता परीक्षा पास करने के बाद की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह हाईकोर्ट की सिफारिश और राज्य सरकार की अधिसूचना अवैध है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थगन आदेश उन जजों की सूचियों पर भी लागू होगा, जिनका नाम 68 जजों के नामों के अलावा हैं।

बता दें कि जस्टिस एमआर शाह 15 मई 2023 को सेवानिवृत होने वाले हैं। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच के पास जाएगा। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ जिस बेंच को यह मामला सौंपेंगे, उसमें अब आगे इसकी सुनवाई होगी।

बता दें कि 68 जजों के प्रमोशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सीनियर सिविल जज कैडर के दो अधिकारियों ने अपनी याचिका में कहा था कि 65 प्रतिशत कोटा नियम के तहत इन जजों का प्रमोशन किया गया, जो कि अवैध है। याचिका में दलील दी गई थी कि प्रमोशन मेरिट कम सीनियरिटी के सिद्धांत पर और योग्यता टेस्ट पास करने पर की जानी चाहिए।

याचिका दाखिल करने वाले न्यायिक अधिकारी रवि कुमार मेहता और सचिन प्रजापराय मेहता ने अपनी अर्जी में कहा कि कई ऐसे जज हैं, जिन्होंने पदोन्नति के लिए हुई परीक्षा में ज्यादा अंक हासिल किए हैं। इसके बावजूद उनका सिलेक्शन नहीं किया गया और उनसे कम अंक पाने वाले जजों को प्रमोट किया गया।

बता दें कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था और पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात हाईकोर्ट और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। जिस समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया, उस समय इन जजों के प्रमोशन की फाइल राज्य सरकार के पास लंबित थी। इसके बावजूद एक हफ्ते के अंदर राज्य सरकार ने जजों के प्रमोशन की अधिसूचना जारी कर दी।

बताते चलें कि प्रमोशन वाली सूची में राहुल गाँधी को मोदी उपनाम से जुड़े मानहानि के मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरीश हसमुखभाई वर्मा और गुजरात यूनिवर्सिटी मानहानि मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन जारी करने वाले जज भी शामिल हैं। 

दरअसल, न्यायिक अधिकारी रवि और सचिन ने भी प्रमोशन से संबंधित यह परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में रवि को 200 में से 135.5 अंक मिले थे, जबकि सचिन को 148.5 अंक हासिल हुए थे। वहीं, राहुल गाँधी को सजा सुनाने वाले जज को सिर्फ 127 अंक मिले थे। इसके अलावा भी कई ऐसे जज हैं, जिन्हें रवि और सचिन से कम अंक मिले। इसके बावजूद इन्हें प्रमोट किया गया। 

‘The Kerala Story के निर्देशक की आँख निकालने वाले को ₹21 लाख का इनाम’: तमन्ना हाशमी का ऐलान, बिहार में ‘हक़-ए-हिंदुस्तान’ ने जलाए फिल्म के पोस्टर

जब से फिल्म ‘The Kerala Story’ का ट्रेलर आया है, तभी से इससे जुड़े लोगों को धमकियाँ मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। अब फिल्म रिलीज भी हो गई है। पहले हफ्ते में इसने भारत में 82 करोड़ रुपए का नेट कारोबार भी कर लिया है। वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें तो फिल्म शुक्रवार (12 मई, 2023) को 100 करोड़ रुपए के आँकड़े को भी पार कर गई। इधर बिहार के मुजफ्फरपुर में फिर से फिल्म के निर्देशक को धमकी मिली है। साथ ही फिल्म के पोस्टर भी जलाए गए।

‘हक़-ए-हिंदुस्तान’ मोर्चा ने ऐलान किया है कि जो भी ‘The Kerala Story’ के निर्देशक की आँख निकालेगा, उसे 21 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। ये ऐलान मोर्चा के अध्यक्ष तमन्ना हाशमी ने किया है। ये मोर्चा खुद को सामाजिक संस्था बताता रहा है। तमन्ना हाशमी ने ये भी कहा कि इस फिल्म के जरिए मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश की गई है। उन्होंने इसे उन्माद फैलाने वाली फिल्म बताते हुए माँग की कि बिहार में इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

बुधवार (10 मई, 2023) को शहीद खुदीराम बोस स्मारक के पास आयोजित विरोध प्रदर्शन में मोर्चा के लोगों ने ये बातें कही। बता दें कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश में फिल्म को टैक्स-फ्री किया जा चुका है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म के निर्देशक, निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और अभिनेत्री अदा शर्मा से मुलाकात की। ‘The Kerala Story’ में दिखाया गया है कि कैसे केरल में एक साजिश के तहत हिन्दू लड़कियों को ‘लव जिहाद’ के जाल में फँसा कर उनका निकाह और इस्लामी धर्मांतरण किया जाता है, फिर उनकी तस्करी कर के ISIS का सेक्स स्लेव बना दिया जाता है।

इससे पहले फिल्म के एक क्रू मेंबर को एक अनजान नंबर से मैसेज आया था। मैसेज करने वाले व्यक्ति ने धमकाते हुए लिखा था,  “अकेले घर से बाहर मत निकलना। तुमने फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया।” फिल्म के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस से की थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया करवाई। फिल्म को देखने के लिए लोगों को फ्री राइड देने का एलान करने वाले ऑटो ड्राइवर साधु मगर को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। 

सैलरी ₹30 हजार-घर में TV ₹30 लाख का, 100 से ज्यादा कुत्ते-20 लग्जरी कार… सोलर पैनल चेक करने के नाम पर घुसी टीम, ठाठ देख भौंचक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त की टीम ने असिस्टेंट इंजीनियर हेमा मीणा के घर समेत 3 ठिकानों पर छापेमारी की। हेमा मीणा का मासिक वेतन 30 हजार रुपए है, लेकिन उनके घर में 30 लाख रुपए का टीवी मिला। 100 से अधिक कुत्तों समेत करीब 7 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली है। लोकायुक्त ने यह कार्रवाई गुरुवार (11 मई 2023) को की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमा मीणा मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में संविदा पर असिस्टेंट इंजीनियर हैं। लोकायुक्त को आय से अधिक संपत्ति को लेकर शिकायत मिली थी। इसके बाद टीम ने भोपाल से करीब 19 किलोमीटर दूर बिलखरिया स्थित उनके घर, रायसेन स्थित फार्म हाउस और ऑफिस पर छापेमारी की। हेमा मीणा के जिस घर पर लोकायुक्त ने कार्रवाई की, वह उनके पिता के नाम पर है। यह घर 20 हजार वर्ग फीट में फैला हुआ है और इसमें 40 कमरे हैं। इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आँकी गई है।

वॉकी-टॉकी पर स्टाफ से बात करती थी हेमा मीणा

लोकायुक्त टीम को हेमा मीणा की करोड़ों रुपए की संपत्ति का पता चला है। सबसे अधिक चर्चा का विषय 30 लाख रुपए की कीमत वाला टीवी है। मीणा के घर पर यह टीवी बॉक्स में पैक कर रखा हुआ था। इसके अलावा, उनके फार्म हाउस में लोकायुक्त टीम को 100 से अधिक कुत्ते मिले हैं। इनमें से कई कुत्ते विदेशी नस्ल के हैं। इनकी कीमत भी लाखों में आँकी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इन कुत्तों का खाना बनाने के लिए करीब ढाई लाख रुपए की रोटी मेकर मशीन भी मिली है। मीणा के फार्म हाउस में 60 से अधिक गायें भी मिली हैं।

हेमा मीणा के घर में बने बड़े से गैराज में थार समेत 20 लग्जरी कारों का जखीरा मिला। इस घर में काम करने वाले कर्मचारियों से बात करने के लिए वह वॉकी-टॉकी का उपयोग करती थीं। यही नहीं, हेमा मीणा ने अपने पिता के नाम पर जमीन भी खरीद रखी है। लोकायुक्त ने भोपाल के अलावा रायसेन और विदिशा के कई गाँव में जमीन खरीदी से जुड़े कागजात बरामद किए हैं। इसके अलावा, खेती से जुड़े उपकरणों में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, धान बुवाई की मशीन समेत कई मशीनों की खरीदी के भी दस्तावेज मिले हैं।

13 साल से सरकारी नौकरी में हैं हेमा मीणा

हेमा मीणा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के चपना गाँव की रहने वाली हैं। उनके पिता सामान्य किसान हैं। उनका अपने पति से तलाक हो चुका है। साल 2016 से वह पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर काम कर रहीं हैं। इससे पहले वह कोच्चि में काम करती थी। वह बीते 13 सालों से सरकारी नौकरी में है। इस हिसाब से उनके पास 20-22 लाख रुपए के आसपास संपत्ति होनी चाहिए थी। लेकिन उनकी संपत्ति में 232 प्रतिशत का इजाफा हुआ और वह 7 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति की मालकिन बन गईं। लोकायुक्त की टीम ने अभी हेमा मीणा के बैंक खातों और जेवरों की कीमत का मूल्यांकन नहीं किया है। यह सब करने में लोकायुक्त टीम को 2-3 दिन का समय लग जाएगा।

पशुपालन अधिकारी बन घुसी लोकायुक्त टीम

हेमा मीणा के ठिकानों में छापेमारी करने के लिए लोकायुक्त की 50 सदस्यीय टीम उनके घर पहुँची थी। हालाँकि घर में मौजूद गार्ड्स और अन्य कर्मचारियों ने उन्हें अंदर से रोकने की कोशिश की। इस पर लोकायुक्त टीम ने खुद को पशुपालन विभाग का अधिकारी बताते हुए घर में एंट्री ली। कहा कि सोलर पैनल की जाँच करनी है। घर में प्रवेश करने के बाद टीम ने मीणा को एक कमरे में बैठा दिया और उनका फोन जब्त कर लिया।