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‘समाज को भीतर से खोखला कर रही आतंकी साजिश, इसी पर बनी The Kerala Story’: कर्नाटक में बोले PM मोदी; देखें ‘लव जिहाद’ के आँकड़े

केरल में लव जिहाद और धर्मांतरण के जरिए गैर-इस्लामी महिलाओं को आतंकवाद की आग में धकेलने पर बनी फिल्म The Kerala Story आज शुक्रवार (5 मई 2023) को रिलीज हो गई। केरल हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान इसका जिक्र किया और इसे एक समाज के प्रति गहरी साजिश बताया।

कर्नाटक के बेल्लारी में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “बीते कुछ वर्षों में आतंक का एक और भयानक स्वरूप पैदा हो गया है। बम, बंदूक और पिस्तौल की आवाज तो सुनाई देती है, लेकिन समाज को भीतर से खोखला करने की आतंकी साजिश की कोई आवाज नहीं होती। कोर्ट तक ने आतंक के इस स्वरूप पर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा, “ऐसी ही आतंकी साजिश पर बनी फिल्म ‘केरला स्टोरी’ की इन दिनों काफी चर्चा है। कहते हैं केरला स्टोरी सिर्फ एक राज्य में हुई आतंकवादियों की छद्म नीतियों पर आधारित है। देश का इतना खूबसूरत राज्य, जहाँ के लोग इतने परिश्रमी और प्रतिभाशाली होते हैं, उस केरल राज्य में चल रही आतंकी साजिश का खुलासा इस केरला स्टोरी फिल्म में की गई है।”

कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश का दुर्भाग्य देखिए कि कॉन्ग्रेस आज समाज को तहस-नहस करने वाली इस आतंकी प्रबुद्धि के साथ खड़ी नजर आ रही है। इतना ही नहीं, ऐसी आतंकी प्रबुद्धि वालों से कॉन्ग्रेस पिछले दरवाजे से राजनीतिक सौदेबाजी तक कर रही है। कर्नाटक के लोगों को इसलिए कॉन्ग्रेस से बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है।

लव जिहाद: एक घिनौनी हकीकत

लव जिहाद एक शब्द मात्र नहीं है। यह हकीकत है, बहुत घिनौनी है। कॉन्ग्रेसी-वामपंथी इसे हिंदूवादी पार्टियों द्वारा गढ़े गए जुमले कह कर खारिज करती आई है। लेकिन सच वो है, जो प्रधानमंत्री मोदी ने आज की रैली में कहा। सच वो है, जो The Kerala Story में दिखाई गई है।

लोकतंत्र में जरूरी नहीं कि आप प्रधानमंत्री मोदी की बातों से सहमत ही हों। इसलिए लव जिहाद पर केरल हाई कोर्ट को पढ़ लेते हैं। 9 दिसंबर 2009 को केरल हाई कोर्ट के न्यायाधीश केटी शंकरन (अब सेवानिवृत्त) ने एक फैसला सुनाया था। इसके दौरान उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्यार के नाम पर जबरन धर्म परिवर्तन गलत है। उन्होंने सरकार से इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए कानून बनाने को लेकर भी टिप्पणी की थी।

हिंदूवादी पार्टियों ने लव जिहाद जैसा शब्द बनाया, जबकि ऐसा कुछ नहीं – कॉन्ग्रेसी-वामपंथी जिस तुष्टिकरण की राजनीति के लिए ऐसे बयान देते हैं, उनके लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का एक पत्र आँख खोल देने वाला है। इसके अनुसार ईसाई लड़कियाँ लव जिहाद का सबसे आसान शिकार बन रही हैं। इसी पत्र में केरल बिशप कैथोलिक कॉन्फ्रेंस की एक रिपोर्ट भी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2005 से लेकर 2012 तक, कुल 7 वर्षों में 4000 ईसाई लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया गया था।

कट्टरपंथी मुस्लिमों के द्वारा काफिरों (गैर-मुस्लिम) का यौन शोषण करना सिर्फ भारत तक सीमित है, ऐसा नहीं है। यह ऐसा कोढ़ बन चुका है पूरी दुनिया के लिए कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करना पड़ गया। पता है क्यों? क्योंकि वहाँ भी कट्टर मुस्लिमों का गिरोह गैर-मुस्लिम लड़कियों को टारगेट करता है। पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ इन लोगों ने रेप किया है।

7 साल में 4000 ईसाई लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ की शिकार: अल्पसंख्यक आयोग

सितंबर 2019 में अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा था कि केरल में धर्मान्तरण के मामले काफ़ी ज्यादा बढ़ गए हैं। इस कार्य को एक सुनियोजित तरीके से और संगठनात्मक रूप से अंजाम दिया जा रहा है। कुरियन ने कहा था कि पीड़ितों को ‘लव जिहाद’ के तहत फँसाकर आतंकी गतिविधियों में उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन ख़ुद ईसाई हैं।

जॉर्ज कुरियन ने कहा था कि ईसाई लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ का सबसे आसान शिकार बन रही हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से इस ख़तरनाक चलन को रोकने और इस मामले में एनआईए से जाँच कराने की माँग की थी। बकौल अल्पसंख्यक आयोग, ईसाई लड़कियाँ इस्लामिक कट्टरवादियों के लिए एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बन गई हैं। आयोग ने कहा कि अब इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मान्तरण अभियान को रोकने के लिए क़ानून बनाने का समय आ गया है।

कुरियन ने कहा था, “कई अभिभावकों में ‘लव जिहाद’ को लेकर डर का माहौल है और उनका ये डर जायज भी है। पूर्व में कई मामले ऐसे आ चुके हैं, जहाँ ईसाई लड़कियों को ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया गया। केरल के 21 लोग खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हो गए। इनमें से 5 ऐसे थे, जो पहले ईसाई थे और बाद में उन्हें धर्मान्तरण के जरिये इस्लाम कबूलवाया गया था।”

ब्रिटेन लव जिहाद से त्रस्त

पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ एशियाई मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रेप किया है। जुलाई 2020 में रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने ‘Triggernometry’ को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था। उन्होंने कहा था ग्रूमिंग ग्रुप जातीय और धार्मिक आधार पर रेप की वारदात को अंजाम देते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि ग्रूमिंग ग्रुप मुख्य रूप से कम उम्र की लड़कियों को निशाना बनाता है, लेकिन युवा और वृद्ध महिलाओं को भी अपना शिकार बनाते हैं।

20 साल पहले की डरावनी कहानी को याद करते हुए हिल ने बताया कि उन्हें उनके पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने निशाना बनाया था। उसका रिश्ता जल्द ही एक नियंत्रित, जुनूनी और मजहबी रूप में तब्दील हो गया। पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने रॉदरहैम, शेफ़ील्ड और ब्रैडफोर्ड के आसपास अलग-अलग फ्लैटों में ले जाकर उनके साथ रेप किया और यातनाएँ दीं। उसने उन्हें इतनी गहरी चोट दी थी कि उससे उबरने में लगभग 1 साल लग गए। ब्वॉयफ्रेंड ने हिल के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से वह चुपचाप सब कुछ सहन करती रहीं।

हिल बताती है कि जब उन्होंने वहाँ से भागने की कोशिश की तो उसने उनका पीछा किया और जबरन उनके घर में घुस गया। पाकिस्तानी शख्स ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ‘ऑनर किलिंग’ को अंजाम देने की कोशिश की लेकिन हिल बच गई। मगर उन्हें काफी चोटें आईं थीं, जिसकी वजह से उन्हें एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग से उनके बचने का एकमात्र तरीका उनका नाम बदलकर कहीं और शिफ्ट हो जाना बताया। उनके पैरेंट्स ने ऐसा ही किया और इसी वजह से आज वो जीवित हैं।

ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक ने SIT गठित किया

इंग्लैंड में इस तरह की बढ़ रही घटनाओं और लोगों द्वारा जाँच की माँग करने के बाद प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इसका संज्ञान लिया। टास्क फोर्स का ऐलान करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने कहा 3 अप्रैल 2023 को कहा कि ग्रूमिंग गैंग का आतंक खत्म करने के लिए वे कुछ भी करने को तैयार हैं। बच्चों और लड़कियों के साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “पिछले साल मैंने कहा था कि अगर मैं प्रधानमंत्री बनूँगा तो ग्रूमिंग गैंग को समाप्त करने के लिए कड़े फैसले लूँगा। मैं इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का ऐलान करता हूँ इसमें विशेषज्ञ पुलिस वाले होंगे जो बच्चों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर रिपोर्ट करेंगे और आरोपितों को कड़ी सजा दिलाएँगे।”

पीएम सुनक ने कहा, “मैं तब तक चैन से नहीं बैठूँगा जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता है कि हमारे बच्चे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं जो पूरी तरह सुरक्षित हो। यही कारण है कि मैं ग्रूमिंग गैंग पर नकेल कसने के लिए सरकार द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू करने जा रहा हूँ। इसको हमेशा के लिए खत्म करने के लिए जो कुछ भी करना होगा, हम करेंगे।”

जिसे लोग समझ रहे थे पहलवानों की माँ, वो निकली प्रोफेशनल ‘आंदोलनजीवी’: PT उषा के साथ की बदसलूकी, OROP से लेकर ‘किसान आंदोलन’ तक का बनी हिस्सा

आंदोलन की बात हो और वहाँ आंदोलनजीवी न दिखाई दें यह तो हो ही नहीं सकता। दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में जारी पहलवानों के प्रदर्शन के बीच आंदोलनजीवियों का ताँता एक बार फिर लगना शुरू कर हो गया है। इन्हीं में से एक आंदोलनजीवी का नाम है सुदेश गोयात। तथाकथित किसान आंदोलन के बाद अब सुदेश ने जंतर-मंतर में पहलवानों के आंदोलन में डेरा डाल लिया है।

दरअसल, बीते जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में महिला पहलवानों के साथ अक्सर एक महिला भी दिखाई दे रही हैं। इस महिला को लोग विनेश फोगाट या साक्षी मलिक की माँ समझ रहे थे। कुछ वीडियो में तो पहलवानों से अधिक यह महिला रोती हुई दिखाई दे रही थी। हालाँकि, यह महिला न तो साक्षी मलिक और न ही विनेश फोगाट की माँ हैं और न ही इसका पहलवानों से किसी प्रकार का कोई संबंध है। वास्तव में इस महिला का संबंध सिर्फ और सिर्फ आंदोलन से है और यह ‘विशुद्ध आंदोलनजीवी’ है।

वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने आज तक के शो ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में इस महिला को प्रोफेशनल आंदोलनजीवी करार दिया है। उन्होंने इस शो में बताया है कि सुदेश गोयात नामक यह महिला मूल रूप से हरियाणा की है। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और पूर्व एथलीट पीटी ऊषा जब पहलवानों से मिलने जंतर-मंतर पहुँची थीं, तब इसी महिला यानी सुदेश गोयात ने उनके साथ बदसलूकी की थी।

सुदेश के आंदोलनजीवी बनने की शुरुआत ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लेकर हुए प्रदर्शन से हुई थी। इसके बाद से ही यह सरकार विरोधी प्रदर्शन में देखी जा रही हैं। यूट्यूब खँगालने पर, सुदेश गोयात के कई वीडियो मिले। ये सभी वीडियो बताते हैं कि वह एक सच्ची आंदोलनजीवी हैं। इससे पहले सुदेश गोयात तथाकथित किसान आंदोलन के मंच पर भी देखी गईं थीं। इस दौरान वह वह कभी टिकरी बॉर्डर पर तो कभी हिसार के हाँसी पर आंदोलनजीवियों के साथ बैठी दिखाई दे रहीं थीं।

चूँकि अब पहलवान कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और इसमें सरकार पर भी निशाना साधा जा रहा है। यही नहीं, प्रदर्शन के बीच ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगाए जाते हैं। ऐसे में इस प्रदर्शन में आंदोलनजीवियों के होने से किसी प्रकार का आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हालाँकि, अभी तो सिर्फ कुछ ही आंदोलनजीवियों का चेहरा सामने आया है। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जैसे-जैसे यह प्रदर्शन आगे बढ़ेगा कुछ अन्य आंदोलनजीवी भी जंतर-मंतर को अपना नया ठिकाना बना लेंगे।

परिवार ने लाखों खर्च कर भेजा मेडिकल पढ़ने, बेटी ‘लव जिहाद’ का शिकार हो फँस गई ISIS के चंगुल में: कहानी ‘The Kerala Story’ वाली असली ‘शालिनी’ की

बॉलीवुड निर्माता बिपुल अमृतलाल शाह और डायरेक्टर सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) शुक्रवार (5 मई, 2023) को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे केरल की मासूम हिंदू लड़कियों को सुनियोजित तरीके से ‘लव जिहाद’ के जाल में फँसाया जाता है और फिर उन्हें इस्लाम कबूल करवाकर आतंकवाद की आग में झोंक दिया जाता है।

‘द केरल स्टोरी’ में ‘शालिनी उन्नीकृष्णन’ का किरदार निमिषा उर्फ फातिमा ईसा पर आधारित है। वह केरल की उन चार महिलाओं में से एक हैं, जो 2016 और 2018 के बीच अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में अपने शौहर के साथ आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने के लिए गई थी। निमिषा उर्फ फातिमा के साथ अफगानिस्तान गई अन्य तीन महिलाओं की पहचान सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा, रफीला, मेरिन जैकब उर्फ मरियम के रूप में हुई थी।

इन्हें आईएसआईएस की दुल्हन के रूप में भी जाना जाता है। फातिमा का शौहर इस्लामिक स्टेट (आईएस) का आतंकी था। वह एक हमले में मारा गया था, जिसके बाद से फातिमा अफगानिस्तान की जेल में बंद है।

धर्मांतरण का शिकार हिंदू लड़की निमिषा संपत डॉक्टर बनना चाहती थी। इसके लिए उसके परिवार वालों ने लाखों खर्चा करके उसका एडमिशन एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में कराया था, लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि उनकी बेटी ‘लव जिहाद’ का शिकार बन जाएगी और आईएसआईएस के लिए काम करने लगेगी।

केरल में निमिषा संपत को उसी के कॉलेज में MBBS कर रहे सज्जाद नाम के एक शख्स ने अपने प्रेम जाल में फँसाया था। निमिषा की माँ बिंदू संपत ने इस बारे में बात करते हुए बताया था, “मेरी बेटी को बहकाया गया, उस पर दबाव डाला गया। ये सब उसी सज्जाद सलीम ने किया। वो भी उसी कॉलेज से MBBS कर रहा था। सज्जाद अपनी अम्मी और पूरे परिवार के साथ 2012 से मेरी बेटी से मिल रहा था। उसकी अम्मी ने कहा था कि अगर तुम इस्लाम कबूल कर लो, तो मैं तुम्हारे परिवार से बात करूँगी और अपने बेटे से निकाह करवा दूँगी।”

निमिषा से गलती यह हुई थी कि उसने इस बारे में अपने परिवार वालों को कुछ भी नहीं बताया। निकाह के बाद सज्जाद ने निमिषा का धर्म परिवर्तन करवाया और उसे फातिमा ईसा नाम दिया। जब वह गर्भवती हो गई तो उसने उसे तलाक दे दिया। फिर एक मुस्लिम संगठन ने मदद के नाम पर उसका दोबारा निकाह करवाया। बीडीएस की छात्रा निमिषा 19 अन्य लोगों के साथ कासरगोड में अपने कॉलेज से 2016 में लापता हो गई थी। वह अपने शौहर के साथ अफगानिस्तान में आईएस के कब्जे वाले इलाके में पहुँच गई थी। यहाँ फातिमा ने एक बच्चे को जन्म भी दिया था।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भी इस मामले का खुलासा किया था कि निमिषा को आतंकवादी बनाकर अफगानिस्तान भेजा गया और अब वह आईएसआईएस आतंकी होने के आरोप में वहाँ की जेल में बंद है।

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में भी यही दिखाया गया है कि कैसे शालिनी उन्नीकृष्णन को एक मुस्लिम शख्स अपने प्रेम के जाल में फाँसता है। उसे इस्लाम कबूल करवाकर शालिनी से फातिमा बनाया गया, उसका निकाह कराया और फिर उसे आतंकवाद की आग में झोंक दिया गया।

‘हिंदू संन्यासियों को तो तस्कर या बलात्कारी के रूप में दिखाया गया…’: केरल हाईकोर्ट ने The Kerala Story पर रोक लगाने से किया इनकार

लव जिहाद पर बनी फिल्म केरला स्टोरी (Kerala Story) को लेकर वामी-कट्टरपंथियों में छटपटाहट है। फिल्म के जरिए हकीकत को बाहर लाने से वे घबराए हुए हैं। इसलिए इसे रिलिज होने से रोकने के वे लिए तरह-तरह से प्रयास कर रहे हैं। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (5 मई 2023) को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

जस्टिस एन नागरेश और जस्टिस सोफी थॉमस की पीठ ने कहा कि इस फिल्म में इस्लाम या मुस्लिमों के खिलाफ कुछ भी नहीं है। यह फिल्म आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के बारे में है। पीठ ने कहा, “इस्लाम के खिलाफ क्या है? धर्म के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। आरोप आईएसआईएस के खिलाफ है।”

अदालत ने आगे कहा, “किसी भी याचिकाकर्ता ने फिल्म नहीं देखी है। फिल्म के ट्रेलर को देखकर लगता है कि इसमें किसी समुदाय विशेष के लिए कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।” पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि ऐसी कई फिल्में हैं, जिनमें हिंदू संन्यासियों को तस्कर या बलात्कारी के रूप में दिखाया गया है। हिंदी में भी हैं और मलयालम में भी। कोई विरोध नहीं करता।

इस पर अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि अगर एक गलत की अनुमति दी गई, इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे को भी दी जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा, “आप अंतिम समय पर आए हैं।” बता दें कि केरला स्टोरी शुक्रवार (5 मई 2023) को रिलीज हुई है।

एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि फिल्म में केरल को ISIS की गतिविधियों का केंद्र बताया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा, “हमें सच्चाई में जाने की आवश्यकता नहीं है। यह कल्पना है! केवल इसलिए कि कुछ धार्मिक प्रमुखों को खराब रौशनी में दिखाया गया है, फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं है।”

अदालत ने कहा, “केरल में हम इतने धर्मनिरपेक्ष हैं कि एक फिल्म थी जिसमें एक पुजारी ने मूर्ति पर थूक दिया और कोई समस्या नहीं हुई। आप कल्पना कर सकते हैं? यह एक प्रसिद्ध पुरस्कार विजेता फिल्म है। यह लंबे समय से हिंदी और मलयालम फिल्मों में हो रहा है।”

बेंच ने कहा कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने लोगों को देखने के लिए सर्टिफिकेट दिया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि फिल्म के ट्रेलर में दावा किया है कि यह केरल की सत्य घटनाओं पर आधारित है। केरल में 32,000 महिलाओं को ISIS ने भर्ती की है। इस पर फिल्म के निर्माता ने कहा कि इसे वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा लेगा।

‘हम मर जाएँ तब कार्रवाई करेगी पुलिस?’: खालिस्तानी दे रहे पत्नी-बेटी का रेप करने की धमकी, लंदन में इस परिवार पर 3 बार हो चुका है हमला

इंग्लैंड की राजधानी लंदन में रह रहे हरमन सिंह कपूर को खालिस्तानियों से लगातार धमकियाँ मिल रहीं हैं। हरमन एक रेस्टॉरेंट चलाते हैं। उन्हें धमकी देने वाले लोग उन्हें जान से मारने से लेकर उनकी पत्नी और बेटी का बलात्कार करने तक की बात कह रहे हैं। यही नहीं, हरमन और उनके परिवार पर अब तक तीन बार हमला हो चुका है। हरमन की गलती बस इतनी है कि उन्होंने खालिस्तान को लेकर एक वीडियो शेयर किया था।

दरअसल, हरमन कपूर सिंह का दावा है कि लंदन में स्थिति भारतीय उच्चायोग में हुए हमले के बाद उन्होंने टिकटॉक पर एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो शेयर करने के बाद से ही उन्हें खालिस्तानी धमकियाँ दे रहे हैं। इंडिया टुडे के साथ हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है, “यह खालिस्तान आंदोलन कुछ समय पहले शुरू हुआ था और फिर शांत हो गया। आज फिर, कनाडा, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में बसे लोगों का एक वर्ग खालिस्तान बनाना चाहता है। लेकिन भारत में रहने वाले लोग ऐसा नहीं चाहते। इसलिए मैंने वीडियो में कहा था कि जिन्हें खालिस्तान की जरूरत है, वे वापस भारत चले जाएँ और वहाँ जाकर इसकी माँग करें।”

उन्होंने अपने वीडियो को लेकर बात करते हुए कहा है, “वीडियो पोस्ट करने के बाद सिर्फ 2 दिन में ही मिलियन से अधिक लोगों ने वीडियो को देख लिया था। लेकिन, इस दौरान वीडियो डिलीट करने के लिए मुझे फोन आने लगे। फोन करने वाले लोग मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियाँ दे रहे थे। मैं सोच रहा था कि मुझे इस तरह से कौन धमकी दे सकता है क्योंकि मैं तो यूके में हूँ। लेकिन इसके बाद 5 लोगों ने मेरे रेस्टॉरेंट में हमला कर दिया।”

हरमन ने कहा है कि उनके रेस्टोरेंट में हमला करने वालों ने उन्हें वीडियो हटाने और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ व ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने के लिए कहा था। हमलवारों ने उनसे कहा था कि यदि वह भारत का झंडा नहीं जलाते हैं तो मरने के लिए तैयार रहें। हरमन ने कहा है कि उन्हें इस बात का आश्चर्य हो रहा है कि ये लोग खालसा राज या गुंडा राज की माँग कर रहे हैं।

हरमन ने कहा है कि उनके रेस्टोरेंट पर हमला होने के बाद पुलिस आई थी और उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया था। लेकिन फिर उन्हें और उनके परिवार को ऑनलाइन धमकियाँ मिलने लगीं। उनकी पत्नी और उनकी बेटी को रेप की धमकी दी गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है, “बलात्कार और जान से मारने की धमकियों के बीच मेरा पता सार्वजनिक कर दिया गया था। इंटरनेट पर पता घूम रहा था। लोग मेरी पत्नी और बेटी की तस्वीरों को चाटने के वीडियो भी पोस्ट कर रहे थे।”

बता दें कि 22 मार्च को खालिस्तानियों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन किए थे। इसके बाद उसी शाम हरमन के रेस्टोरेंट में हमला हुआ था। इसके अगले ही दिन यानि 23 मार्च की शाम भी उनके घर पर हमला किया गया। इस हमले के बाद पुलिसिया कार्रवाई को लेकर हरमन सिंह कपूर कहते हैं, “पुलिस हमारे पास आई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि वे हमारे बयान लेने और संदिग्धों को गिरफ्तार करने के लिए दो दिन बार फिर से आएँगे। लेकिन अब दो सप्ताह से अधिक समय हो गया है। परिवार लगातार डर में जी रहा है। कोई भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि हमला करने वाले लोग अब भी खुले घूम रहे हैं।”

हरमन ने आगे कहा है “पुलिस ने हमें बताया था कि हम लोग उनकी प्राथमिकता में नहीं हैं क्योंकि हमें कुछ नहीं हुआ है। जब तक कोई घायल नहीं होता या मारा नहीं जाता तब तक वे कार्रवाई नहीं कर सकते। जो लोग हमें परेशान कर रहे हैं वे जानते हैं कि जब तक वे हमें नुकसान नहीं पहुँचाएँगे तब तक पुलिस कुछ भी नहीं करेगी। इसलिए, ये लोग खुले घूम रहे हैं। हमें धमका रहे हैं और परेशान कर रहे हैं। पुलिस हमारे मरने का इंतजार कर रही है। इसके बाद ही कोई कार्रवाई होगी। क्या इसका मतलब यह है कि पुलिस की कार्रवाई के लिए हमें मरना होगा?”

पहलवानों के लिए सुप्रीम कोर्ट से ऊपर खाप पंचायत? विनेश फोगाट के वीडियो पर बवाल, सुनिए क्या-क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच विनेश फोगाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खाप पंचायत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से पहले बता रही हैं। वहीं, जाट समाज ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर गुरुवार (4 मई, 2023) को जानकारी दी कि 7 मई को सभी खाप जंतर-मंतर जाएँगी। जाट समाज ने ट्वीट किया, “सोरम मुजफ्फरनगर में सर्वखाप मुख्यालय पर आयोजित खाप चौधरियों की बैठक के निर्णयानुसार, 7 मई को सभी खाप जंतर-मंतर जाएँगी।

दिल्ली पुलिस द्वारा खिलाड़ियों से अभद्रता करने वाले तैनात पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करने के लिए 2 दिन का वक्त दिया गया है। बाकी सभी निर्णय जंतर-मंतर पहुँचकर लिए जाएँगे।”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विनेश फोगाट के वीडियो को सबसे पहले ट्विटर पर रवि भदौरिया नाम के एक इन्फ्लुएंसर ने शेयर किया था। वीडियो में भारतीय पहलवान को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “हमारे बुजुर्ग और खाप पंचायतें ही हमारे सभी बड़े फैसले लेती आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से पहले हमारा जो भी फैसला होता है, वह हमारी खाप पंचायत लेती है। इसलिए खाप पंचायत जो भी फैसला करेगी, हम उनका पालन करेंगे।”

भारतीय पहलवान द्वारा देश के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से ऊपर खाप पंचायत के फैसले को बताने से विवाद गहरा गया है। लेकिन, पूरी वीडियो में विनेश को यह कहते हुए भी सुना गया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती हैं और सभी कानूनी विकल्पों की तलाश कर रही हैं।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को महिला पहलवानों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई बंद करने का फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी। दिल्ली पुलिस ने सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है, इसलिए अब इस मामले में आगे की सुनवाई बंद की जाती है।

दरअसल, बबीता फोगाट, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट, साक्षी मलिक सहित 7 महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर खिलाड़ियों का यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। इन खिलाड़ियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि दिल्ली पुलिस उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं कर रही है।

बता दें कि 7 मई को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की तक़रीबन एक दर्जन खाप देशवाल, राठी, बुड़ियांन, दुड्डा, बेनीवाल, कुंड, निर्वाल, बालियान, घनघस, लाटीयान, अहलावत और बत्तीसा के चौधरी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे खिलाड़ियों के विरोध प्रदर्शन पर एकजुट होंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। इससे पहले खाप पंचायतों ने पहलवानों की माँगे जल्द पूरी नहीं करने पर बंद की धमकी दी थी।

उल्लेखनीय है कि खाप पंचायतें अक्सर गलत कारणों से चर्चा में रही हैं, जिसमें अंतर-जातीय विवाह को ‘अवैध’ घोषित करने का प्रयास और ऑनर किलिंग को लेकर उनके फैसले शामिल हैं।

हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव ने पहलवानों पर आरोप लगाया

वहीं, हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश कोच ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन किया है। उन्होंने महावीर फोगाट परिवार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। राकेश कोच ने बीते दिनों कहा था कि उनका परिवार कुश्ती संघ पर कब्जा करना चाहता है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को WFI का अध्यक्ष बनवाना चाह रहे हैं। इसलिए वे खिलाड़ियों को भड़का रहे हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए राकेश कोच ने यह भी कहा था कि ये खिलाड़ी किसी कार्यक्रम में आने के लिए पैसे लेते हैं। बजरंग पुनिया सरकारी अधिकारी हैं और रेलवे की अनुमति के बिना वे धरने पर बैठे हैं। विनेश फोगाट और साक्षी के साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ।

‘मियाँ आगे बढ़ो आटा नहीं मिलेगा’ : PAK के बिलावल भुट्टो से विदेश मंत्री एस जयशंकर की मुलाकात, Video देख आई मीम की बहार

गोवा में हुई शंघाई संहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भारत के विदेश मंत्री की पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी से मुलाकात इस समय सुर्खियों में है। एक वीडियो सामने आया है जिसमें केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर अतिथियों का स्वागत करने के लिए एंट्रेंस पर खड़े दिखाई दे रहे हैं कि तभी वहाँ बिलावल भुट्टो आते हैं। वीडियो में केंद्रीय मंत्री का रिएक्शन देखने के बाद अब इसे खूब शेयर किया जा रहे हैं।

देख सकते हैं कि SCO मीटिंग के लिए बिलावल भुट्टो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के पास आगे बढ़ते हैं। मगर जयशंकर अपने दोनों हाथ बाँधकर वहीं खड़े रहते हैं। वह मुस्कुराकर भुट्टो का अभिवादन करते हैं पर हाथ नहीं मिलाते। इसके बाद वह उन्हें अंदर आने का इशारा करते हैं।

वीडियो में एस जयशंकर का बुलावल भुट्टो के प्रति इतना ठंडा बर्ताव देखने के बाद भारतीय यूजर्स की हँसी नहीं रुक रही। कुछ लोग कह रहे हैं कि विदेश मंत्री ने नमस्कार करके अरनी संस्कृति दिखाई है।

वहीं कुछ लोग इस पर मीम बना रहे हैं। एक यूजर ने मीम डाला- जिसमें एस जयशंकर को ये कहते दिखाया गया कि ‘जाओ मियाँ आँटा नहीं मिलेगा।’ वहीं भुट्टो को ये कहते कि- “एक पैकेट ही दे देते वरना पाकिस्तान घुसने नहीं देगा।”

इसी तरह पहली फुरसत में निकल डायलॉग पर भी कई मीम इस मुलाकात का वीडियो देखने के बाद शेयर किए जा रहे हैं।

बता दें कि इस मुलाकात के अलावा इस बैठक में आया एस जयशंकर का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने इस बैठक में बिलावल भुट्टो के साथ चीन के विदेश मंत्री छिन कांग के सामने आतंकवाद पर जमकर लताड़ा।

जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद की समस्‍या जस की तस है। हमारा मानना है कि आतंकवाद को किसी तरह भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसे किसी भी रूप में सीमा पार से रोका जाना चाहिए। आतंकवाद से मुकाबला SCO के मूल उद्देश्यों में से एक है। अगर आतंकवाद को नजरअंदाज किया जाता है तो यह सुरक्षा हितों के लिए नुकसानदायक होगा।”

NCP का नया अध्यक्ष चुनने के लिए बनी कमिटी ने शरद पवार का इस्तीफा नामंजूर किया, पद पर बने रहने के किया आग्रह, कहा- हमें आपकी जरूरत

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) की कार्य समिति ने शुक्रवार (5 मई 2023) को मुंबई के पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) इस्तीफा को नामंजूर कर दिया। कार्यसमिति ने उनसे अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया है। दरअसल, पवार ने एक अप्रत्याशित फैसले में अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

कार्य समिति की बैठक में शरद पवार के उत्तराधिकारी पर फैसला होना था, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके इस्तीफे को नामंजूर कर दिया। पार्टी के अध्यक्ष पद पर शरद पवार बने रह सकते हैं। दरअसल, पार्टी के वरिष्ठ नेता और आम कार्यकर्ता पवार से अपना इस्तीफा वापस लेने का आग्रह कर रहे हैं। कई नेताओं ने तो इसके विरोध में इस्तीफा भी दे दिया है।

NCP के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “पवार साहब ने हमें बताए बिना यह फैसला लिया है। हमने और कई नेताओं ने उनसे मुलाकात की और अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इस समय देश और पार्टी को उनकी जरूरत है। सिर्फ NCP नेताओं ने ही नहीं, बल्कि प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी उनसे पार्टी प्रमुख बने रहने का अनुरोध किया है।”

बताते चलें कि अपने इस्तीफे के बाद पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तय करने के लिए शरद पवार ने 18 सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया था। इस समिति में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, पीसी चाको, नरहरि जिरवाल, अजीत पवार, सुप्रिया सुले, जंयत पाटिल, छगन भुजबल, दिलीप वलसे-पाटिल, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, जितेंद्र आव्हाड, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, जयदेव गायकवाड़ और पार्टी के फ्रंटल सेल के प्रमुख शामिल हैं।

जिस समय पार्टी कार्यालय में बैठक चल रही थी, उस वक्त बाहर NCP के कार्यकर्ता प्रमुख शरद पवार के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। अपने हाथों में तख्तियाँ लिए हुए कार्यकर्ता उनसे अध्यक्ष पद का इस्तीफा वापस लेने का आग्रह कर रहे थे। बैठक खत्म होने के बाद पार्टी नेताओं ने कहा कि वे एक बार फिर पवार से अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए कहेंगे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने 2 मई को NCP के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने एक कार्यक्रम में खुद इसका ऐलान किया था। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नया अध्यक्ष चुनने के लिए 18 सदस्यीय कमिटी भी बना दी थी। पार्टी नेताओं ने उनसे अपना इस्तीफा लेने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। शरद पवार ने जून 1999 में कॉन्ग्रेस तोड़ कर NCP की स्थापना की थी।

मणिपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश, अमित शाह ने रद्द की कर्नाटक में अपनी चुनावी रैलियाँ: मणिपुर में 53% मैतेई, लेकिन उनके पास सिर्फ 10% जमीन

मणिपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने का आदेश वहाँ की हाईकोर्ट ने दिया, जिसके बाद ईसाई जनजाति समुदाय के लोग उग्र हो गए और दंगे करने लगे। मैतेई समाज के लोगों के घरों को निशाना बनाया गया। आगजनी की गई, पत्थरबाजी हुई। बताया जा रहा है कि दंगों में AK-47 बंदूकों का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि, अब भारतीय सेना ने कहा है कि सभी सुरक्षा बलों ने मिल कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया है।

चूड़ाचंदपुर में खासकर के स्थिति ज़्यादा बिगड़ गई। सुरक्षा बल मिल कर रात भर लोगों को निकाल कर सुरक्षित जगहों पर पहुँचाने में लगे रहे। राज्य में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। नॉर्थ-ईस्ट राज्य में तनाव को देखते हुए मणिपुर जाने वाली सभी फ्लाइट्स और ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। कुछ फर्जी वीडियो भी शेयर हो रहे हैं, जैसे ‘असम राइफल्स’ के पोस्ट पर हमला करने वाला वीडियो। भारतीय सेना ने केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की सलाह देते हुए कहा कि अपना हित साधने के लिए लोग इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

नागा और कुकी समुदाय के पहाड़ी लोग इस हिंसा में शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर ईसाई हैं। ‘ट्राइबल चर्चेज लीडर्स फोरम’ ने ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM)’ द्वारा शुरू किए गए विरोध प्रदर्शन को समर्थन किया था, जिसके बाद ये हिंसा शुरू हुई। मैतेई समाज को आरक्षण मिलने के विरोध में आयोजित इस मार्च के बाद से ही दंगे शुरू हुए। मैतेई समाज मणिपुर की 53% जनसंख्या है, लेकिन इसके बावजूद हाईकोर्ट के खिलाफ जाकर दंगे किए जा रहे हैं।

मिजोरम की सरकार ने भी एक बयान जारी कर के मणिपुर में रहने वाली ‘जो’ ट्राइब की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। असम के कछार जिले में कई पीड़ित शरण लेने पहुँचे हैं, जिनकी हिफाजत के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है। मणिपुर की सरकार ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी कुछ बदलाव किए हैं। इंटरनेट सेवाएँ अब तक बंद रखी गई हैं। ‘रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF)’ को मामला शांत करने के लिए लगाया गया है।

दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। मजिस्ट्रेट को ये अधिकार दिया गया है कि चेतावनी के बावजूद न मानने पर देखते ही गोली मारी जा सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर और पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की है। 9000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया है। असल में मेइती समाज 53% जनसंख्या होने के बावजूद राज्य के 10% इलाके में ही सीमित है, क्योंकि उन्हें पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदने के अधिकार नहीं हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस मामले को भी राजनीति में घसीटने की कोशिश शुरू कर दी है। पत्रतय नेता जयराम रमेश ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के 15 महीनों के भीतर ये सब हो रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि इस सुंदर राज्य को बचाने की ज़रूरत है, राजनीति और चुनावों से ऊपर उठ कर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने कर्नाटक चुनावी दौरों को भी रद्द कर दिया है, ताकि इस स्थिति पर ध्यान दे सकें।

‘मोदी को आतंकी घोषित करो’: ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर को फिर बनाया निशाना, प्रधानमंत्री के खिलाफ लिखे आपत्तिजनक नारे

ऑस्ट्रेलिया (Australia) में एक बार फिर हिंदू मंदिर (Hindu Temple) में तोड़फोड़ की आई है। खालिस्तानी आतंकियों ने शुक्रवार (5 मई 2023) की सुबह सिडनी के स्वामीनारायण मंदिर (BAPS Swaminarayan Temple) में तोड़फोड़ की और पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिख दिए। मंदिर के दरवाजे पर खालिस्तानी झंडा भी लटका मिला।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वामीनारायण मंदिर सिडनी के रोजहिल इलाके में स्थित है। हर रोज की तरह श्रद्धालु जब पूजा करने के लिए मंदिर आए, तब उन्हें मंदिर की दीवार पर आपत्तिजनक नारे और दरवाजे पर खालिस्तानी झंडा लटका हुआ दिखाई दिया। खालिस्तानी ने मंदिर की दीवार पर काले रंग से ‘मोदी को आतंकी घोषित करो (BBC)’ लिखा था।

स्थानीय निवासी सेजल पटेल ने मीडिया को बताया कि सुबह जब वह मंदिर आईं तो उन्होंने देखा कि मंदिर की दीवारों पर नारे लिखे हैं। इसके बाद उन्होंने मंदिर प्रबंधन को मामले की जानकारी दी। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने इस घटना जानकारी न्यू साउथ वेल्स पुलिस को दी।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिया है। फिलहाल मामले की जाँच करने की बात कही जा रही है। बताते चलें कि इससे पहले भी कई मौकों पर ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों में इस तरह की आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया गया है।

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम से की थी बात…

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने गंभीर चिंता जाहिर की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मार्च 2023 में भारत दौरे पर आए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) से बात की थी।

इस बातचीत को लेकर पीएम मोदी ने कहा था, “मैंने ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें देखी हैं। मैंने पीएम अल्बनीज को इस बात से अवगत करा दिया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई उनकी प्राथमिकता है।”

खालिस्तानियों के निशाने पर हिंदू मंदिर…

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और नारे लिखने की घटना नई नहीं है। इससे पहले इसी साल 4 मार्च को ब्रिस्बेन के लक्ष्मी नारायण मंदिर में खालिस्तानियों ने तोड़फोड़ की थी। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास दीवारों पर हिंदू विरोधी, भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे थे।

यही नहीं, 17 फरवरी 2023 को ब्रिस्बेन के गायत्री माता मंदिर के पुजारी को महाशिवरात्रि ना मनाने की चेतावनी दी गई थी। चेतावनी देने वाले शख्स ने खुद को खालिस्तानी बताया था और कहा था कि वह पाकिस्तान के लाहौर से फोन कर रहा है।

फोन करने वाले ने कहा था, “यदि तुम महाशिवरात्रि मनाने की योजना बना रहे हो तो पुजारी से खालिस्तान का समर्थन करने के लिए कहो। तुमको अपने कार्यक्रम के दौरान पाँच बार ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाना है।”

इसी तरह 16 फरवरी 2023 को मेलबर्न के काली माता मंदिर में भजन कार्यक्रम आयोजित करने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के उत्तरी उपनगर में स्थित काली माता मंदिर की एक महिला पुजारी को भारतीय गायक कन्हैया मित्तल का भजन कार्यक्रम आयोजित करने पर धमकी दी गई थी। कहा जाता है कि ये धमकी खालिस्तानी आतंकवादियों ने दी थी।

जनवरी 2023 में 20 दिनों में खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे लिखे थे। खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर में पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।