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The Kerala Story देखने जा रहे, Free में ले जाऊँगा: ऑटो ड्राइवर ने किया ऐलान, मिल रही सर तन से जुदा और कन्हैयालाल जैसा करने की धमकी

महाराष्ट्र के पुणे में ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म देखने जाने वालों से किराया न लेने का ऐलान करने वाले ऑटो ड्राइवर को मौत की धमकियाँ मिलने लगी हैं। पीड़ित का नाम साधु मगर है, जिनका सिर तन से जुदा करने का ऐलान कट्टरपंथी करने लगे हैं। आरोप है कि मैसेज और कॉलिंग के जरिए साधु का हाल राजस्थान के कन्हैयालाल जैसा करने की भी धमकी दी जा रही है। ये धमकियाँ विदेशी नंबरों से आ रही हैं। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है और धमकियों के सबूत भी दिए हैं।

दरअसल पुणे में ऑटो चलाने वाले साधु मगर ने 2 मई 2023 को एक पोस्टर बना कर ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) देखने जाने वाले यात्रियों से पैसे न लेने का एलान किया था। इस पोस्टर के जारी होने के बाद जहाँ उनकी कई लोगों ने तारीफ की तो दूसरी तरफ उन्हें फोन पर जान से मार डालने की धमकियाँ भी दी जाने लगी हैं। आरोप है कि धमकियाँ देश के तमाम हिस्सों सहित विदेशी नम्बरों से भी आ रही हैं। जब पीड़ित ने धमकी वाले नंबरों को ब्लॉक करना शुरू किया तब नंबर बदल-बदल कर कॉल आने लगे।

आखिरकार पीड़ित साधु मगर ने थाने में इसकी शिकायत की। सबूत के तौर पर पीड़ित ने धमकियों की रिकॉर्डिंग भी पुलिस अधिकारी को सुनाई। ऑपइंडिया से बात करते हुए साधु मगर ने बताया कि धमकी देने वालों ने उन्हें उदयपुर के कन्हैयालाल की याद दिलाई और उन्हीं के जैसा हाल करने का एलान किया है।

पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में पीड़ित ने 15 अलग-अलग नम्बरों का जिक्र किया है। उन्होंने शिकायत में व्हाट्सएप के कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए हैं। साधु मगर का कहना है कि पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के बाद कुछ स्थानीय हिन्दू संगठन उनके साथ आए हैं।

पुलिस ने साधु की शिकायत पर जाँच करने और कार्रवाई का भरोसा दिया है। साधु मगर मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के रहने वाले हैं। पहले वह एक कम्पनी में काम किया करते थे। 3 साल पहले उन्होंने खुद का ऑटो खरीद कर चलाना शुरू कर दिया था। साधु मगर भारतीय सेना के जवानों से भी भाड़ा नहीं लेते हैं।

नाबालिग को गोद लिया लेकिन बेटी का प्यार देने के बजाय किया शोषण: डॉक्टर वलीउल इस्लाम गिरफ्तार, बीवी संगीता दत्ता फरार

असम पुलिस ने बाल शोषण के मामले में डॉक्टर वलीउल इस्लाम को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी शुक्रवार (5 मई 2023) को हुई है। इसी मामले में डॉक्टर की पत्नी संगीता दत्ता फरार हैं। संगीता को फरार होने में मदद के आरोप में डॉक्टर की एक नौकरानी को भी हिरासत में लिया गया है।

मनोचिकित्स्क डॉक्टर वलीउल इस्लाम और उनकी पत्नी पर गुवाहाटी में एक नाबालिग लड़की को नियमित प्रताड़ित करने का केस दर्ज था। आरोप है कि डॉक्टर दम्पति पीड़िता को अपार्टमेंट की छत पर बाँध दिया करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गुवाहाटी का है। यहाँ एक डॉक्टर दम्पति वलीउल इस्लाम और संगीता दत्ता द्वारा कथित तौर पर एक नाबालिग बच्ची को गोद लिया गया था। आरोप है कि वो बच्ची को अक्सर प्रताड़ित किया करते थे। इस प्रताड़ना में बच्ची के हाथ बाँध कर उसे धूप में छत पर खड़ा कर देना शामिल था। डॉक्टर के एक पड़ोसी द्वारा इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने शुक्रवार को डॉक्टर दम्पति के घर पर दबिश दी थी।

आरोपित दम्पति गुवाहाटी के मणिपुर बस्ती में रहता है। इस मामले को उठाते हुए बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल अधिकार संगठन, UTSAH के प्रमुख, मिगुएल दास कुआह ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें बच्ची की प्रताड़ना की जानकारी पहले भी मिली थी लेकिन आरोपितों के पड़ोसी द्वारा की गई शिकायत से इसकी पुष्टि भी हो गई। बच्ची का फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें धूप में बैठी बच्ची को लोहे की पाइप से बाँध कर रखा गया है।

साभार: pratidintime.com

बताया जा रहा है कि अपने ऊपर केस दर्ज होने के बाद फरार चल रहीं डॉक्टर संगीता ने एक वीडियो जारी करते हुए सफाई दी है। अपने वीडियो में डॉक्टर संगीता ने खुद को साजिश का शिकार बताते हुए किसी के द्वारा इसे अपने करियर को खत्म करने की साजिश करार दिया है। डॉक्टर संगीता ने खुद और अपने शौहर पर लगे तमाम आरोपों को भी बेबुनियाद बताया है। फिलहाल पुलिस डॉक्टर संगीता दत्ता की तलाश कर रही है।

एक्सिडेंट, जाति को लेकर गाली, SC-ST एक्ट… टाइम्स नाऊ पत्रकार मामले में पंजाब पुलिस, चैनल ने कहा – बेल नहीं मिले, इसलिए सारा खेल

पंजाब की लुधियाना पुलिस ने टाइम्स नाऊ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को हिरासत में लेने के कुछ समय बाद एक प्रेस नोट रिलीज किया। इस नोट में बताया गया है कि लुधियाना पुलिस ने शुक्रवार (5 अप्रैल 2023) को 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनके ऊपर तेज स्पीड में गाड़ी चलाकर एक महिला को टक्कर मारने और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप है। इन तीनों की पहचान भावना कुमारी, मृत्युंजय कुमार और ड्राइवर परमिंदर सिंह के तौर पर हुई है।

पंजाब पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता गगन ने कहा कि वो मोहल्ला क्लिनिक के उद्घाटन समारोह में जा रही थीं कि तभी एक इनोवा कार ने तेजी में आकर उन्हें टक्कर मार दी, जिसके कारण उनके हाथ में चोट लग गई और उनका सैमसंग का फोन भी नीचे गिरकर टूट गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस घटना के बाद गाड़ी से दो लोग (मृत्युंजय कुमार और भावना कुमारी) उतरे और झगड़ा करने लगे। इस दौरान अपमानजनक भाषा का प्रयोग भी किया गया।

अब इस केस को पुलिस ने आईपीसी की धारा 279, 337 और 427 के तहत दर्ज किया है। इसके अलावा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3,4 के तहत डिविजन नंबर 3 पुलिस थाने में दर्ज किया है।

भावना की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लगातार उनकी रिहाई की माँग उठ रही है। आनंद रंगनाथन ने इसकी वीडियो शेयर करके लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल ख़ड़ा किया है।

पत्रतकार सुधीर चौधरी ने भी भावना की रिहाई की माँग उठाई है और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की है।

बता दें कि टाइम्स नाऊ ने अपनी महिला पत्रकार पर हुई इस कार्रवाई को ऑपरेशन शीशमहल का बदला बताया है। टाइम्स नाऊ ने अपने शो में भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन शीशमहल के बाद उनके पत्रकारों से बदसलूकी की जा रही है। पहले उन्हें पीटा गया, उनके रास्ते रोके गए और अब एक पत्रकार को बीच रास्ते में हिरासत में ले लिया गया। चैनल ने बताया कि भावना को लुधियाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। एक एफआईआर हुई है। उनपर बेवजह SC/ST एक्ट लगा दिया गया है।

चैनल के मुताबिक भावना के खिलाफ ऐसी धाराएँ इसलिए लगाई गई हैं ताकि उनकी बेल खारिज हो जाए। चैनल ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क का कुछ नहीं कर पाई इसलिए पंजाब में कार्रवाई कर रही है। चैनल ने सवाल पूछा कि आखिर उनकी पत्रकार को एक एक्सीडेंट केस में पुलिस ने कैसे पकड़ा जबकि हकीकत में वह गाड़ी चला ही नहीं रहीं थीं। इसके बाद उनपर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया… जिस पर चैनल ने पूछा कि आखिर उनकी पत्रकार किसी अंजान शख्स की जाति पर कैसे टिप्पणी करेंगी जब वो उससे पहली बार टकराईं ही रास्ते में थीं।

मणिपुर हिंसा: 54+ लोगों की मौत के पीछे बांग्लादेशी और रोहिंग्या कनेक्शन, भाग रहे लोगों की असम सरकार कर रही मदद

उत्तर-पूर्वी भारत के राज्य मणिपुर में दो समूहों के बीच हिंसा (Manipur Violence) के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। पड़ोसी राज्य असम मणिपुर को हर संभव मदद और जरूरी सहायता पहुँचा रहा है। इस हिंसा में रोहिंग्या मुस्लिम और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए का भी कनेक्शन है।

आदिवासियों और बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के बीच हिंसा के कारण 54 से अधिक लोग मारे गए हैं। वहीं, 10,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं। रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि कुल 13,000 लोगों को बचाया गया और सुरक्षित आश्रयों में स्थानांतरित कर दिया गया।

हिंसा से डरकर लोग पड़ोसी राज्य असम की ओर भाग रहे हैं। अब तक 1200 से अधिक लोग असम में शरण ले चुके हैं। इनमें से ज्यादातर कुकी समुदाय के लोग हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जिला प्रशासन को मणिपुर से आए लोगों का ध्यान रखने के लिए आदेश दिया है।

हालाँकि, सरकार की कड़ाई के कारण अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होते जा रहे हैं। कुछ-कुछ इलाकों में दुकानें भी खुल गई हैं। राज्य में अर्धसैनिक बलों की 14 कंपनियाँ तैनात की गई हैं। इसके साथ ही केंद्र की ओर से और कुछ कंपनियाँ भेजी गई हैं। इसके अलावा, अलग-अलग इलाकों में सेना और रैपिड एक्शन फोर्स फ्लैग मार्च कर रही हैं।

बताते चलें कि हिंसा का केंद्र राजधानी इम्फाल से 63 किलोमीटर दूर चुराचंदपुर जिला है। हिंसा पर काबू पाने के लिए 1000 से अधिक जवानों CRPF के जवानों को तैनात भेजा गया है। कुछ-कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों और पुलिस थानों से हथियार भी छीन लिए हैं। सरकार ने उन्हें लौटाने के लिए 48 घंटे का समय दिया है।

वहीं, इंफाल में कर सहायक के रूप में तैनात लेमिनथांग हाओकिप को प्रदर्शनकारियों से उनके आधिकारिक आवास से घसीट कर बाहर निकाला और पीट-पीटकर मार डाला। चुराचांदपुर में छुट्टी पर अपने गाँव आए CRPF के एक कोबरा कमांडो की हथियारबंद हमलावरों ने शुक्रवार (5 मई 2023) को गोली मारकर हत्या कर दी। कोबरा बटालियन के डेल्टा कंपनी के कॉन्स्टेबल चोनखोलेन हाओकिप की दोपहर में हत्या की गई। 

इसके अलावा, भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे (Vungzagin Valte) पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मणिपुर के डीजीपी पी डोंगल ने बताया, “भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। उन्हें राज्य से बाहर एयरलिफ्ट किया गया है। उनकी हालत स्थिर है। हमें सख्त आदेश मिला है कि अगर कोई गलती करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। सेना को फ्लैग मार्च के आदेश मिले हैं।”

दरअसल, पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में तीन प्रमुख समुदाय हैं। बहुसंख्यक मैतेई और दो आदिवासी समुदाय- कुकी और नागा। मैतेई राज्य की कुल आबादी के 53 प्रतिशत हैं। ये राज्य के आर्थिक और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली समुदाय है। वहीं, कुकी और नागा राज्य की आबादी के 40 प्रतिशत हैं।

मैतेई इंफाल घाटी और राज्य के मैदानी इलाकों में रहते हैं। मणिपुर में कुल 10 प्रतिशत ही मैदानी भाग है। वहीं, कुकी और नागा जनजातियाँ इंफाल घाटी से सटे पहाड़ी इलाकों में रहती हैं। राज्य का 90 प्रतिशत भाग पर्वतीय है। जनजातियाँ राज्य में कहीं भी बस सकती हैं, लेकिन मैतेई पहाड़ी इलाकों में नहीं बस सकते। कभी पहाड़ी क्षेत्रों में 60 सशस्त्र उग्रवादी समूह सक्रिय थे।

मैतेई आर्थिक और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली हैं। राज्य में किसी भी पार्टी की सरकार हो, लेकिन दबदबा सिर्फ मैतेई का है। मौजूदा मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। कुकी और नागा समुदाय सरकार पर उनके प्रति सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हैं।

हिंसा का कारण बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का फैसला और सरकारी भूमि का सर्वेक्षण है। मैतेई को जनजाति का दर्जा देने का विरोध कुकी और नागा समुदाय कर रहे हैं। आजादी के बाद से कुकी और नागा समुदायों को आदिवासी का दर्जा मिला हुआ है।

मैतेई बहुसंख्यक हैं और पड़ोसी देशों से हो रहे लगातार घुसपैठ को लेकर वे चिंतित हैं। उनका कहना है कि म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध प्रवासी पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर बस रहे हैं। इससे उनकी सांस्कृतिक पहचान को खतरा उत्पन्न हो गया है।

दरअसल, उत्तर पूर्व भारत म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, म्यांमार के लगभग 52,000 शरणार्थी पूर्वोत्तर राज्यों में बसे हुए हैं। इनमें से 7800 मणिपुर में शरणार्थी हैं। इन्हें शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है।

इसके अलावा, म्यांमार और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी भी मणिपुर में बसे हुए हैं। इनके आँकड़े सरकार का पास नहीं हैं। मैतेई संगठनों का दावा है कि म्यांमार और बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर अवैध आप्रवास के कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

The Kerala Story: 2023 में सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म, मध्य प्रदेश में Tax-Free, साधु-संतों ने की अपील – हर हिन्दू जरूर देखें

मध्य प्रदेश शासन ने लव जिहाद पर बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे आतंकवाद की सच्चाई बयान करती फिल्म करार दिया है। वहीं ‘द केरल स्टोरी’ की बॉक्स ऑफिस पर काफी शानदार ओपनिंग रही है। यह फिल्म साल 2023 की सबसे अच्छी ओपनर मूवी बन चुकी है। इसकी पहले ही दिन की कमाई लगभग 8 करोड़ रुपए है।

MP में टैक्स फ्री The Kerala Story

शनिवार (6 मई 2023) को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा का वीडियो ट्वीट किया है। 59 सेकेण्ड के इस वीडियो में उन्होंने कहा, “‘द केरल स्टोरी’ लव जिहाद, धर्मांतरण और आतंकवाद के षड्यंत्र को उजागर करती है। उसके घिनौने चेहरे को सामने लाती है। क्षणिक भावुकता में जो बेटियाँ लव जिहाद के चंगुल में उलझ जाती हैं, उनकी जिंदगी कैसे बर्बादी होती है, यह फिल्म बताती है। आतंकवाद के डिजाइन को भी यह फिल्म उजागर करती है। यह फिल्म हमें जागरूक करती है।”

CM शिवराज सिंह ने आगे बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही धर्मान्तरण विरोधी कानून बनाया हुआ है। मुख्यमंत्री ने हर किसी से इस फिल्म को देखने की अपील करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन ने ‘द केरल स्टोरी’ को टैक्स फ्री करने का एलान किया है।

साधु संतों द्वारा फिल्म देखने की अपील

वाराणसी में साधु-संतों ने ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म देखी और अन्य लोगों से भी इस फिल्म को देखने की अपील की है। इस दौरान साधुओं ने इस फिल्म को वर्तमान समय के सच्चे हालातों पर बनी मूवी बताया। संतों ने केरल हाईकोर्ट दौरा फिल्म पर बैन लगाने की माँग करने वालों की याचिका ख़ारिज करने पर भी ख़ुशी जताई। संतों ने चर्च कॉन्ग्रेस का हिन्दू समाज से कोई लेना-देना न होना बता कर उनके द्वारा फिल्म के विरोध को गलत बताया है।

कुछ अन्य संतों ने पुरानी सरकारों में हिन्दू विरोधी फ़िल्में बनने का आरोप लगाया है। संतों ने इस दौरान ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म का भी जिक्र किया और उसे भी सच्चाई पर आधारित फिल्म बताया। कई संतों ने सामूहिक रूप से हिन्दू होने के नाते इस फिल्म को देखने की भी अपील की है।

The Kerala Story: 2023 की सबसे बड़ी ओपनिंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘द केरल स्टोरी’ भारत में साल 2023 में सबसे अच्छी ओपनिंग करने वाली फिल्म बनी है। बताया जा रहा है कि 5 मई 2023 को रिलीज हुई इस फिल्म के पहले दिन का कलेक्शन 7.50 करोड़ रुपए से 8 करोड़ रुपए के बीच रहा है। इस फिल्म ने शहजादा और सेल्फी जैसी फिल्मों की ओपिनिंग को काफी पीछे छोड़ दिया है।

‘द कश्मीर फाइल्स’ की पहले दिन की कमाई ‘द केरल स्टोरी’ से काफी कम थी। तब देश भर के 630 स्क्रीनों पर लॉन्चिंग के बाद ‘द कश्मीर फाइल्स’ की पहले दिन की कमाई 3 करोड़ 55 लाख रुपए थी, जो ‘द केरल स्टोरी’ की आधी से भी कम है।

शुरुआती आँकड़ों के आधार पर फिल्मों के कई जानकार ‘द केरल स्टोरी’ को अभी से हिट घोषित कर रहे हैं। गौरतलब है कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म के ट्रेलर में यह दावा किया गया है कि यह केरल की सत्य घटनाओं पर आधारित है।

बजरंग बली के नारे, फूलों की वर्षा और ढोल नगाड़े… कर्नाटक में PM मोदी का 26km लंबा रोड शो, कॉन्ग्रेस ने की थी रोकने की पूरी कोशिश

कर्नाटक के बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (6 मई 2023) 13 विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए 26 किलोमीटर लंबा रोड शो कर रहे हैं। इस दौरान उनके साथ भारी मात्रा में समर्थक हैं। किसी के हाथ में भाजपा का ध्वज है तो किसी के हाथ में फूल ही फूल। उनके काफिले पर लगातार पुष्प वर्षा हो रही है।

सामने आई वीडियोज में पीएम मोदी को गाड़ी से अपने समर्थकों का अभिवादन करते देखा जा सकता है। लोग पीएम मोदी का इंजतार ढोल-नगाड़े बजा-बजाकर कर रहे हैं। उन्हें देखने के लिए जनसैलाब उमड़ा हुआ है। काफिला देखते ही जय बजरंग-बली के नारे लगाए जा रहे हैं।

एक शख्स तो इस रोड शो में बजरंग बली के भेष में रोड शो में शामिल हुआ। वहीं लोग भी हनुमान जी का मुखौटा लगाकर इस रोड शो का हिस्सा बने दिखाई दिए। कई लोगों ने इस रोड शो के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए। अलग-अलग प्रस्तुति दी गईं। बताया जा रहा है कि बीच रास्ते में एक मंदिर पड़ता है जहाँ सिक्योरिटी सख्त है, संभव है कि पीएम मोदी वहाँ रुककर भगवान के दर्शन भी करें।

इसके बाद पीएम मोदी दोपहर 3 बजे बादामी में अपनी जनसभा करेंगे और शाम 5 बजे हावेरी में उनकी दूसरी जनसभा होगी। चुनाव से पहले 7 मई को भी पीएम मोदी का एक कार्यक्रम होगा। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि पीएम मोदी के रोड शो को अनुमति न दी जाए। हालाँकि आयोग ने ऐसा नहीं किया। अनुमति मिलने के बाद पीएम ने बेंगलुरु में अपना रोड शो कर रहे हैं। 26 किमी का यह शो 8 घंटे के करीब खत्म होगा।

दूसरी ओर कॉन्ग्रेस भारतीय जनता पार्टी पर नए-नए आरोप लगाकर चुनाव में उन्हें पछाड़ने की कोशिश कर रही है। हाल में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि एक भाजपा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके परिवार की हत्या की साजिश रच रहे है। इसे लेकर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक रिकॉर्डिंग भी चलाई। हालाँकि इसकी पुष्टि नहीं है कि वो आवाज किसकी है। कॉन्ग्रेस के मुताबिक वो एक बीजेपी नेता की आवाज है।

धरना देकर पहलवान खेल संघ के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करवा सकते: भारत सरकार का सीमित दायरा, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति तय करती है नीतियाँ

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan sharan Singh) के खिलाफ पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। महिला पहलवानों ने WFI चीफ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अब वे उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद POCSO ऐक्ट तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। इसलिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पहलवानों ने उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग की है। उन्होंने सरकार पर भाजपा सांसद सिंह को बचाने का आरोप लगाया है।

सरकार खेल मामलों में और उसके प्रबंधन में कितनी शामिल है, इसको लेकर हम कुछ तथ्य आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे वर्तमान स्थिति को समझने में मदद मिलेगी कि खेलों में सरकार की कितनी भूमिका है।

सरकार खेलों के प्रबंधन में शामिल नहीं है: भारत में खेलों का प्रबंधन संबंधित राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा किया जाता है, जो स्वतंत्र निकाय होते हैं। ये प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, विभिन्न स्तरों पर राज्य या देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों का चयन करते हैं और विभिन्न हिस्सों में खेलों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

सरकार देश के इन खेल संघों की मदद करती है, ताकि उनके आयोजनों और संचालन को सुगम बनाया जा सकते। इसके अलावा, खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और खेल पुरस्कार देना सरकार की भूमिका के तहत आता है। इसके अलावा, सरकार का विशेष हस्तक्षेप नहीं रहता है।

खेल संघ स्वायत्त गैर-सरकारी निकाय: संबंधित राष्ट्रीय खेल संघ स्वायत्त निकाय हैं, जो आमतौर पर BCCI की तरह ही भारत में सोसायटी के रूप में पंजीकृत होते हैं। इन संघों के प्रशासन या सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। सिर्फ संपर्क अधिकारियों को खेल मंत्रालय नियुक्त करता है, जो परामर्श से नियुक्त किए जाते हैं।

इन राष्ट्रीय संघों के बाद राज्य स्तर के खेल संघ आते हैं, जिनमें से सभी के अपने नियम, उप-कानून होते हैं। इन राज्य खेल संघों के अपने स्वयं के खेल संविधान या चार्टर होते हैं, जो उनके कामकाज और प्रबंधन में मार्गदर्शन का काम करते हैं।

कोई भी बना सकता है खेल महासंघ: यदि आप ऐसे लोगों के समूह हैं, जो किसी खेल से जुड़े हैं और आपको लगता है कि यह खेल भारत में प्रचार के लायक है तो आप एक महासंघ बना सकते हैं। हालाँकि, यह स्वचालित रूप से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं देता है। कुछ विशेषाधिकार प्राप्त करने के लिए इसे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल महासंघ से संबद्ध होना जरूरी है।

जैसे कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ फीफा (FIFA) से संबद्ध है। यदि संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ IOC (अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति) से संबद्ध है तो आपका संघ IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) का सदस्य बनने और सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल संघ के रूप में मान्यता प्राप्त करने के योग्य हो जाता है।

मान्यता प्राप्त खेल संघों को सरकार से मिलती है सहायता: सरकार खेलों के प्रचार और विकास के लिए काम करती है। खेल मंत्रालय विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के खेल संघों के आवेदन का आकलन करता है और उन्हें मान्यता देता है। इसके बाद वे वित्तीय अनुदान (विभिन्न योजनाओं के तहत) और अन्य सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इसके तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और विकास के लिए स्टेडियम उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेल उपकरण जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति शामिल है। समय-समय पर इन खेल संघों को सरकार अन्य प्रकार की सुविधाएँ भी प्रदान करती है।

गैर-ओलंपिक खेल संघों को भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो सकती है: यदि राष्ट्रीय खेल संघ IOA से संबद्ध हैं तो उसे सरकार से मान्यता प्राप्त करना आसान होता है। हालाँकि, यह अनिवार्य शर्त नहीं है। गैर-ओलंपिक खेल संघ भी मान्यता ले सकते हैं।

साल 2016 में 49 राष्ट्रीय खेल संघों को मान्यता दी गई। इनमें ‘रस्साकशी’ और ‘बॉडी बिल्डिंग’ जैसे गैर-ओलंपिक खेल भी शामिल हैं। खो-खो और कबड्डी गैर-ओलंपिक खेलों के लोकप्रिय उदाहरण हैं, जिन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और वे सरकार से सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।

BCCI ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ बनने के लिए आवेदन नहीं किया: क्रिकेट अन्य गैर-ओलंपिक खेलों से अलग है। क्रिकेट के लिए राष्ट्रीय खेल संघ के तौर पर BCCI ने कभी भी सरकार से मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। यही कारण है कि वह तर्क देता है कि उसे RTI के दायरे से बाहर रखा जाए।

BCCI का तर्क है कि वह उसे सीधे सरकारी सहायता नहीं मिलती है। इसलिए RTI में दायरे में नहीं आने चाहिए। साल 2011 में तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में पंजीकरण कराने के लिए कहा था, लेकिन BCCI ने ऐसा नहीं किया।

IOA से संबद्ध खेल महासंघों को खिलाड़ियों और अधिकारियों को आयोजनों में भेजने का अधिकार: कई लोगों के विचारो के विपरीत, सरकार खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में न तो चुनती है और न ही भेजती है। भारत में IOA खेल आयोजनों के सरकार और स्थानीय संघों के साथ मिलकर काम करता है।

IOA एक गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय है जो राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों या ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों के लिए खिलाड़ियों को चुनने के लिए सदस्य खेल महासंघ के साथ काम करता है। भारतीय ओलंपिक संघ IOC का सदस्य है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वायत्त निकाय है।

खेलों का आयोजन और प्रबंधन विभिन्न स्टेक होल्डर द्वारा किया जाता है: चाहे ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल जैसे खेल, इसमें एक आयोजन समिति होती है। इस समिति में IOA या IOC जैसे शीर्ष निकायों के सदस्य शामिल होते हैं।

इसके अलावा, स्थानीय सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए नगरपालिका जैसे स्थानीय प्राधिकरण, सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार और मंजूरी एवं बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्राधिकरण के सदस्य इसमें शामिल होते हैं। अनुदान सरकारी और गैर सरकारी स्रोतों से आता है। संबंधित खेल संघ भाग लेने वाले खिलाड़ियों और दल के मामलों का प्रबंधन करते हैं।

सरकार खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती: भले ही संघों को सरकार से सहायता प्राप्त हो, लेकिन सरकार के पास उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती है। हालाँकि, वास्तव में इसके विपरीत होता है।

उदाहरण के लिए जब IOC को पता चला कि भारत सरकार IOA के चुनाव में हस्तक्षेप कर रही है तो साल 2012 में उसने IOA को निलंबित कर दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर निलंबन वापस नहीं लिया जाता तो भारत ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाता।

खेल महासंघों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं IOA या अंतरराष्ट्रीय महासंघ: अगर कोई खेल महासंघ सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, क्योंकि वे स्वतंत्र निकाय हैं। हालाँकि, सरकार चाहे तो उन्हें सहायता और अनुदान से वंचित कर सकती है।

दूसरी तरफ, IOA या उस खेल का अंतरराष्ट्रीय महासंघ संबंधित खेल महासंघ पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था।

सरकार खेलों के लिए नियम और कानून बना सकती है: सरकार खेल संघों के कामकाज या प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। हालाँकि, वह ऐसे नियम और कानून बना सकती है, जिनका पालन करने के लिए इन संघों को कहा जा सकता है।

हालाँकि, ये संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संघों के नियमों और उप-नियमों के विपरीत नहीं होने चाहिए, अन्यथा राष्ट्रीय संघों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से निलंबित होने का जोखिम बना रहेगा। उदाहरण के लिए, फीफा ने कुवैत पर उस वक्त प्रतिबंध लगा दिया, जब उसे लगा कि इसके द्वारा पारित कानून खेल संघों की स्वायत्तता के लिए अच्छा नहीं है।

कई खेल निकाय और संघ राजनेताओं द्वारा नियंत्रित होते हैं: सरकार भले ही खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, लेकिन यह भी सच है कि हर राजनीतिक दल के नेता किसी न किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ या उससे संबद्ध निकायों के सदस्य होते हैं। कई नेता तो कई खेल संघों के सदस्य होते हैं।

1982 से पहले भारत के पास नहीं था युवा मामले एवं खेल मंत्रालय: युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय की स्थापना भारत ने साल 1982 के एशियाई खेलों की मेजबानी मिलने के बाद की थी। सरकार ने इन खेलों के लिए कुछ नए स्टेडियमों का निर्माण किया और कुछ पुराने का जीर्णोद्धार किया।

इसके बाद इन स्टेडियमों का प्रबंधन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) नामक संगठन बनाकर उसे स्थानांतरित कर दिया। खेल मंत्रालय और SAI को खेल महासंघों और ‘अखिल भारतीय खेल परिषद’ जैसे सलाहकार निकायों के परामर्श से विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढाँचे की निर्माण का काम सौंपा गया है।

रियो ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष पर रहने वाले USA में खेल मंत्रालय नहीं है: अमेरिका में कोई खेल मंत्रालय या केंद्रीय निकाय नहीं है। वहाँ खेलों के विकास की देखरेख करने का काम स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग है।

अमेरिका का यह विभाग स्थानीय निकायों और स्कूलों को खेलों पर खर्च करने की सलाह देता है। खेल भी अमेरिका में शिक्षा के साथ महत्वपूर्ण रूप से से जुड़ा हुआ है। वहाँ संगठित खेल आयोजन अधिकांश हाई स्कूलों और कॉलेजों का हिस्सा हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके परिवार की हत्या होगी? कर्नाटक चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पगलाई, चलाई अंजान रिकॉर्डिंग

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके परिवार की हत्या की साजिश रच रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा कि भाजपा इतना गिर गई कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की हत्या कराना चाहती है।

सुरजेवाला ने मीडिया में कहा, कर्नाटक की जनता कॉन्ग्रेस पर अपना प्यार लुटा रही है और भारतीय जनता पार्टी को उन्होंने नकार दिया है। यही बात पार्टी को हजम नहीं हो रही है। इसलिए वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और उनके परिवार की हत्या की साजिश रच रहे हैं।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक रिकॉर्डिंग चलाई और दावा किया कि ये चित्तापुर से भाजपा प्रत्याशी की आवाज है। सुरजेवाला ने कहा कि ये शख्स पीएम मोदी और सीएम बसवराज बोम्मई दोनों का करीबी है। उन्होंने कहा कि एक तरह की केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार में कर्नाटक के बेटे मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर एक नफरत है। भाजपा यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है कि आखिर एक दलित परिवार में पैदा हुए गरीब फैक्ट्री मजदूर मल्लिकार्जुन खड़गे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि 27 फरवरी 2023 को कर्नाटक ने देखा था कि कैसे पीएम मोदी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया। इसके बाद 2 मई को भाजपा विधायक मदन दिलावर ने मल्लिकार्जुन के निधन की कामना यह कहकर की कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष 80 साल के हैं, भगवान उन्हें कभी भी बुला सकता है। इसके बाद सुरजेवाला ने जोर देकर कहा कि भाजपा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और उनकी बीवी उनके परिवार को मारने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा की कुंठा और नफरत खतरनाक मुकाम पर पहुँच गई है।”

बता दें कि कर्नाटक चुनाव से पहले राज्य में कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच टकरार बढ़ गई है। मतदान 10 मई को होना है और नतीजे 13 मई को आएँगे। इससे पहले ओपिनियन पोल्स ने अपने अनुमान बता दिए हैं। किसी पोल में जहाँ भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनता दिखाया गया है तो किसी में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस बाजी मार सकती है। पिछले दिनों राज्य में कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र के बाद बवाल हुआ था। उसमें उन्होंने बजरंग दल पर बैन की बात कही थी। हालाँकि बाद में आकर कॉन्ग्रेस नेता ही ये कहने लगे कि राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर में एनकाउंटर जारी, 2 आतंकी ढेर और भारी संख्या में हथियार बरामद: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख मनोज पांडे जाएँगे जम्मू

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के सफाए के लिए सेना ऑपरेशन त्रिनेत्र चला रही है। इसके तहत सेना ने राजौरी और बारामुला में दो आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, एनकाउंटर में बलिदान हुए 5 जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। हालात को देखते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख मनोज पांडे आज शनिवार (6 मई 2023) को जम्मू-कश्मीर जाएँगे।

उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के करहामा कुंजर इलाके में शनिवार (6 मई 2023) की सुबह आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। इसमें सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। इलाके में और भी आतंकियों के छिपे होने की खबर है और दोनों तरफ फायरिंग जारी है।

पुलिस ने बताया कि उस इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों की एक टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी। जब सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी।

एसएसपी अमोद अशोक नागपुरे ने बारामूला एनकाउंटर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मारा गया आतंकी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले का रहने वाला था और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। मारे गए आतंकी की पहचान आबिद वानी के रूप में हुई है। उसके पास से AK-47 बरामद किया गया है।

वहीं, राजौरी में भी सुरक्षाबलों का आतंकियों के साथ मुठभेड़ जारी है। भारतीय सेना ने बताया कि गोलाबारी में एक आतंकवादी को मार गिराया गया है। वहीं, एक अन्य आतंकी के घायल होने की संभावना है। अब तक की गई बरामदगी में एक AK-56, 4 मैग, 56 राउंड मैग के साथ 1x9mm पिस्टल, 3 ग्रेनेड और 1 गोला बारूद शामिल हैं। मारे गए आतंकी की पहचान की जा रही है।

बता दें कि शुक्रवार (5 मई 2023) को जम्मू क्षेत्र के राजौरी इलाके के कांडी में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान पाँच जवान बलिदान हो गए थे। मुठभेड़ के दौरान धमाके की वजह से जवानों की जान गई। माना जा रहा है कि आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया।

दरअसल, धूरियन के तोता गली इलाके में आतंकियों ने 21 अप्रैल 2023 को आतंकियों ने सेना के जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में भी 5 जवान बलिदान हो गए थे। इसके बाद से सेना ने आतंकियों के सफाए का अभियान शुरू किया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए आज जम्मू का दौरा करेंगे। वहीं, उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आज सुबह उड़ान भरी और चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान ‘त्रिनेत्र’ की समीक्षा की।

’80 मोहल्ला क्लिनिक’ कवर करने जा रही टाइम्स नाऊ की महिला पत्रकार… पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया: चैनल ने कहा- AAP ले रही ‘ऑपरेशन शीशमहल’ का बदला

पंजाब पुलिस ने टाइम्स नाऊ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को हिरासत में लिया है। मीडिया चैनल के अनुसार, उनकी पत्रकार को एक एक्सीडेंट केस में पुलिस ने पकड़ा जबकि हकीकत में वह गाड़ी चला ही नहीं रहीं थीं। इसके बाद उनपर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया… जिस पर चैनल ने पूछा कि आखिर उनकी पत्रकार किसी अंजान शख्स की जाति पर कैसे टिप्पणी करेंगी जब वो उससे टकराईं ही रास्ते में थीं।

टाइम्स नाऊ की नाविका कुमार ने इस संबंध में देर रात ट्वीट करते हुए कहा, “मैं भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल से टाइम्स नाऊ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को तुरंत छोड़ने की माँग करती हूँ। उन्हें पंजाब पुलिस ने पिछले 7 घंटे से पकड़ कर रखा है। उनके ऊपर ऐसी (गाड़ी से) एक्सीडेंट का इल्जाम लगाया गया है जो वो चला ही नहीं रही थीं। ये मीडिया को एक धमकी है।”

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग #SheeshmahalBadla भी लिखा। जिससे साफ होता है कि टाइम्स नाऊ अपने पत्रकार पर हुई इस कार्रवाई को उनके ‘ऑपरेशन शीशमहल’ के बदले में लिया गया एक्शन मान रहा है। इस शो में चैनल ने दिखाया था कि कैसे AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास की साज-सज्जा में 45 करोड़ रुपए खर्च किए।

टाइम्स नाऊ ने अपने शो में भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन शीशमहल के बाद उनके पत्रकारों से बदसलूकी की जा रही है। पहले उन्हें पीटा गया, उनके रास्ते रोके गए और अब एक पत्रकार को बीच रास्ते में हिरासत में ले लिया गया। चैनल ने बताया कि भावना को लुधियाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। एक एफआईआर हुई है। उनपर बेवजह SC/ST एक्ट लगा दिया गया है।

चैनल के मुताबिक भावना के खिलाफ ऐसी धाराएँ इसलिए लगाई गई हैं ताकि उनकी बेल खारिज हो जाए। चैनल ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क का कुछ नहीं कर पाई इसलिए पंजाब में कार्रवाई कर रही है।

रिपोर्ट बताती है भावना किशोर को उस समय पुलिस ने पकड़ा जिस समय वह पंजाब में ’80 मोहल्ला क्लिनिकों’ की ओपनिंग की कवरेज करने जा रही थीं। जब इस संबंध में AAP से सवाल हुए तो उन्होंने जवाब दिया कि पत्रकार के बारे में कुछ जानकारी चाहिए तो कोर्ट जाओ।

आप प्रवक्ता गोविंदर मित्तल ने टाइम्स नाऊ से बातचीत में कहा कि अगर महिला पत्रकार ने ऐसा कोई काम किया है जो कानून के खिलाफ है तो फिर कानून उसके ऊपर भी लागू होगा। जब पत्रकार ने पूछा कि क्या अगर गाड़ी की टक्कर हो जाए और पीछे उसमें महिला बैठी हो तो क्या फिर उसे पुरूष पुलिस वाला लेकर जाएगा? इस पर मित्तल कहते हैं- “अगर आपको लगता है कि आपकी महिला पत्रकार के साथ कुछ गलत हुआ तो यहाँ पर अदालतें भी हैं।”

टाइम्स नाऊ के एंकर लगातार पूछते हैं कि वो लड़की (पत्रकार भावना किशोर) कहाँ है इस बारे में न चैनल को पता है न ही उसके माता-पिता को…इस पर AAP प्रवक्ता कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है। इसलिए धैर्य रखें।

इस मामले को पूर्व एजी मुकुल रोहतगी ने अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बताया और साथ ही पंजाब पुलिस की कार्रवाई को अवैध भी कहा। उन्होंने कहा कि ये मामला कोई गुंडे से जुड़ा नहीं था जो राज्य में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने आया था। उन्होंने यह भी बताया कि कानून कहता है कि महिला को सूरज ढलने के बाद पुलिस थाने में नहीं बुलाया जा सकता। इन मामलों में अनुमति कोर्ट से ली जाती है। मुकुल रोहतगी ने इस मामले में चैनल को चीफ जस्टिस के पास फौरन एक याचिका दायर करवाने की सलाह दी।

इसके बाद भाजपा सांसद महेश जेठमलानी ने भी पुलिस कार्रवाई को गलत बताया। उन्होंने पूछा जब भावना कार भी नहीं चला रही थीं तो भी उन्हें किस आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस मामले में कहा कि जो लोग दिल्ली में अलग भाषा बोलते हैं उनके सुर पंजाब में बदल जाते हैं। एक महिला पत्रकार जो अपने काम पर थी उसे ऐसे गिरफ्तार किया जाना गलत है।