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‘इतने मामले लंबित हैं, गंभीर मुद्दों की जगह काल्पनिक विषय पर समय नष्ट न करे सुप्रीम कोर्ट’: समलैंगिक विवाह पर जैन मुनि का राष्ट्रपति को पत्र, पश्चिमी प्रथाएँ थोपे जाने का विरोध

अब जैन समाज ने भी समलैंगिक विवाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जैन आचार्य शिव मुनि ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिख कर इसका विरोध जताया है। उन्होंने माँग की है कि समलैंगिक विवाह को कानून द्वारा मान्यता न दी जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारत देश कई समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे विषय पर चर्चा की आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, सभी तक शिक्षा की पहुँच, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण और जनसंख्या नियंत्रण को मुख्य समस्या करार दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने कोई तत्परता नहीं दिखाई है। उन्होंने भारत को विभिन्न धर्मों, जातियों और उप-जातियों का देश बताते हुए लिखा कि शताब्दियों से जैविक पुरुष एवं जैविक महिला के बीच विवाह की मान्यता रही है, ऐसे में विवाह की संस्था न केवल दो विषम लैंगिकों का मिलन है बल्कि मानव उन्नति से भी संबंधित है। उन्होंने प्राचीन परिभाषाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सभी धर्मों में विवाह की यही मान्यता है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि समलैंगिकों के अधिकारों को पहले ही संरक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि समलैंगिक विवाह का मामला मौलिक न होकर वैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन ये मौलिक अधिकार नहीं है और संसद द्वारा कानून बना कर ही इसे संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने इसे विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत डालने का विरोध करते हुए कहा कि ये महिला-पुरुष के लिए है, ऐसे में इसके हर एक प्रावधान को नए स्वरूपों में परिभाषित करना पड़ेगा।

उन्होंने पत्र में लिखा, “विवाह एक समाजिक/कानूनी संस्था है। अब न तो इसे नष्ट किया जा सकता है और न ही इसका नया स्वरूप बनाया जा सकता है। भारत में विवाह का सभ्यतागत महत्व है और ये एक महान संस्था है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है। स्वतंत्र भारत में इस पर पश्चिमी प्रथाएँ थोपने का काम किया जा रहा है। लंबित मामले पूरे करने की बजाए काल्पनिक विषय पर सुप्रीम कोर्ट का समय नष्ट किया जा रहा है। ये अनुचित है।”

‘अपराधी नहीं हूँ… पद से इस्तीफा नहीं दूँगा’: WFI चीफ ने मीडिया से की बात, कहा- 90 फीसदी खिलाड़ी मेरे साथ, मुझे विनेश फोगाट ने MP नहीं बनाया

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) द्वारा यौन शोषण के दो मुकदमे दर्ज करने के बाद भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) ने अपने पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे अब एक अपराधी के रूप में इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि सांसदी विनेश फोगाट या उनके परिवार की दी हुई नहीं है।

WFI के अध्यक्ष और गोंडा से भाजपा से सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों के आरोपों को लेकर शनिवार (29 अप्रैल 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पहलवानों के पीछे एक उद्योगपति है। ये पहलवान बार-बार अपना बयान बदल रहे हैं।

पहलवानों पर आरोप लगाते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा, “पहले इनकी माँग थी कि FIR की जाए। FIR हो गई। अब ये कहते हैं कि जेल के अंदर होना चाहिए। सारे पदों से इस्तीफा देना चाहिए। मुझे जो लोकसभा का पद मुझे मिला है, वो विनेश फोगाट ने नहीं जनता ने दिया है। एक बार नहीं, बल्कि 6-6 बार दिया है। मुझे ही नहीं, मेरी पत्नी को भी दिया है। कुश्ती संघ का अध्यक्ष पद भी उन्होंने नहीं दिया है, चुनाव लड़कर जीता हूँ।”

भाजपा सांसद ने कहा कि इन आरोपों के पीछे देश के कुछ उद्योगपति और कॉन्ग्रेस का हाथ है। उन्होंने आगे कहा, “मैं पूछता हूँ कि आरोपों के पीछे एक ही परिवार और एक ही अखाड़ा क्यों है? हरियाणा के अन्य खिलाड़ी क्यों नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि के खिलाड़ी क्यों नहीं हैं?”

सांसद ने आगे कहा, “12 साल से इनका यौन शोषण हो रहा है और वो यौन शोषण देश के अन्य खिलाड़ियों के साथ क्यों नहीं होता है? हरियाणा के बाकी 90 प्रतिशत खिलाड़ी मेरे साथ हैं, क्योंकि मैंने काम किया है।” बताते चलें कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उन्होंने कहा था कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “इस्तीफा देना कोई बड़ी बात नहीं है। मैं अपराधी नहीं हूँ। इसलिए अगर मैं इस्तीफा देता हूँ तो इसका मतलब होगा कि मैंने आरोपों को स्वीकार कर लिया। मेरा कार्यकाल लगभग समाप्त हो गया है। सरकार ने 3 सदस्यीय समिति बनाई है और चुनाव 45 दिनों में होंगे। चुनाव के बाद मेरा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।”

उन्होंने कहा कि वे अब अपराधी बनकर इस्तीफा नहीं देंगे। भाजपा सांसद ने कहा, “उत्तर प्रदेश की सभी राजनीतिक दल मेरे साथ खड़े हैं। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस भी मेरे साथ खड़ी है। प्रियंका गाँधी को गलत बताया जा रहा है। अगर उन्हें सच्चाई का पता चलेगा तो वे वहाँ (धरना स्थल) से हट जाएँगी।”

बताते चलें कि शनिवार की सुबह कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी भी पहलवानों के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर पहुँची थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह पर की गई एफआईआर में क्या कहा गया है, इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।

बृजभूषण सिंह ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख को लेकर कहा, “अखिलेश यादव मुझे बचपन से जानते हैं। वह जानते हैं कि मैं किस तरह का इंसान हूँ। इसलिए वे मेरे साथ खड़े हैं। मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं, जो दाग लगे हैं वह साफ करना मेरा काम है। मुझे इस आरोप से बेदाग निकलना है और मैं निकलूँगा। इसमें पार्टी (भाजपा) मेरी कोई मदद नहीं कर सकती।”

बताते चलें कि इसके पहले शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) को भाजपा सांसद ने कहा था कि इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था, “अगर पहलवान चाहते हैं कि वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा, “पहलवानों को चाहिए कि धरना खत्म करें और प्रैक्टिस में जुट जाएँ।” हालाँकि, FIR दर्ज होने के बाद उन्होंने इससे मना कर दिया।

पहलवानों की माँग- सांसदी भी छोड़ें WFI चीफ

अब जबकि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों द्वारा FIR दर्ज करने की माँग को दिल्ली पुलिस ने माँग ली तो पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि उन लोगों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है। फोगाट ने कहा, “हमारी माँग है कि उन्हें (WFI अध्यक्ष) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।”

वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक के साफ लग रहा है कि पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।”

हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव ने पहलवानों पर आरोप लगाया

वहीं, हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश कोच ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन किया है। उन्होंने महावीर फोगाट परिवार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। राकेश कोच ने कहा कि उनका परिवार कुश्ती संघ पर कब्जा करना चाहता है। राकेश कोच ने कहा कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को WFI का अध्यक्ष बनवाना चाह रहे हैं। इसलिए वे खिलाड़ियों को भड़का रहे हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए राकेश कोच ने कहा कि ये खिलाड़ी किसी कार्यक्रम में आने के लिए पैसे लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बजरंग पुनिया सरकारी अधिकारी हैं और रेलवे की अनुमति के बिना वे धरने पर बैठे हैं। राकेश ने कहा कि विनेश फोगाट और साक्षी के साथ कुछ गलत नहीं हुआ।

पीटी उषा ने पहलवानों पर उठाया सवाल

पहलवानों के धरने को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ओलंपिक संघ ने कहा कि पहलवान धरना देकर भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं। IOC ने पहलवानों को एथलीट कमीशन में आने के लिए कहा। IOC की अध्यक्ष पीटी उषा ने तो इसे अनुशासनहीनता बताया था।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया। साक्षी मलिक ने गुरुवार (27 अप्रैल 2023) को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?

ना लाइट-ना नेविगेशन सिस्टम…फिर भी IAF ने बचा ली सूडान में फँसे 121 भारतीयों की बचाई जान: अंधेरे में नाइट विजन चश्मा लगाकर लैंड करवाया विमान

हिंसाग्रस्त अफ्रीकी देश सूडान में फँसे भारतीयों को लाने का काम जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सभी भारतीयों को सुरक्षित लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। भारतीय वायुसेना ने सूडान के एक छोटी से एयर पट्टी से 121 भारतीयों को बचाया है। इनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है।

भारतीय वायु सेना (IAF) ने 27 और 28 अप्रैल की दरम्यानी रात सूडान में खार्तूम से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर में वाडी सैय्यदना की एक छोटी-सी टूटी-फूटी हवाई पट्टी से भारतीय लोगों को बचाया है। इन यात्रियों के पास पोर्ट सूडान तक पहुँचने के लिए कोई साधन नहीं था। इसलिए IAF ने इस साहसिक अभियान को अंजाम दिया।

Indian Defence Attaché (IDA) के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना का एक काफिला हवाई पट्टी पर पहुँचा। हवाई पट्टी उबड़-खाबड़ थी। वहाँ ना ही कोई नेविगेशनल एप्रोच ऐड था और ना ईंधन और लैंडिंग लाइट थे। ये लैंडिंग लाइट रात में एक विमान की लैंडिंग को निर्देशित करने के लिए बेहद आवश्यक होता है।

इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने C-130J का इस्तेमाल किया और ग्रुप कैप्टन रवि नंदा इसके कप्तान थे। रनवे पर किसी तरह की बाधा ना हो, इसको देखने के लिए C-130J विमान के चालक दल ने इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर का इस्तेमाल किया। अंधेरे से निपटने के लिए नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग किया।

इसके बाद एयरक्रू ने सामरिक दृष्टिकोण अपनाते हुए अंधेरे के लिए नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग किया और विमान की लैंडिंग कराई। इस दौरान विमान का इंजन चलता रहा। वहीं, भारतीय वायुसेना के 8 गरुड़ कमांडो ने यात्रियों और उनके सामान को विमान में रखा और इसी तकनीक की सहायता से उड़ान भरी।

वायुसेना अधिकारी ने कहा, “वाडी सैय्यदना और जेद्दा के बीच लगभग 2.5 घंटे का यह साहसिक ऑपरेशन भारतीय वायुसेना के इतिहास में दर्ज किया जाएगा। यह अभियान काबुल ऑपरेशन की तरह था।” दरअसल, अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद भारतीय वायु सेना ने काबुल से भारतीयों को निकालने के लिए इसी तरह के अभियान चलाए थे।

ग्रुप कैप्टन रवि नंदा को इससे पहले ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत अफगानिस्तान से भारतीयों को बचाने के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। फिलहाल सूडान से भारतीयों को निकालने के लिए भारत ऑपरेशन कावेरी चला रहा है। इस ऑपरेशन के तहत सूडान से अब तक 1360 लोगों को सुरक्षित भारत लाया जा चुका है।

रुस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन में फँसे भारतीय विद्यार्थियों को निकालने के लिए साल 2022 में ऑपरेशन गंगा शुरू किया गया था। इस दौरान भी भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सफल ऑपरेशन को अंजाम देकर हजारों भारतीयों को यूक्रेन से निकाला गया था।

इसके पहले ईराक-कुवैत युद्ध के समय भी इसी तरह का साहसिक ऑपरेशन चलाया गया था। दरअसल, इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने 1990 में कुवैत पर हमला कर दिया था। कुवैत में लाखों भारतीय फँस गए थे। तब विश्वनाथ प्रताप सिंह (VP Singh) की सरकार ने ‘ऑपरेशन कुवैत’ चलाकर 1.70 लाख भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था।

एयर इंडिया ने 8 अगस्त 1990 को इन भारतीयों को लाने के लिए पहली उड़ान भरी थी। 488 फ्लाइट्स के जरिए 1 लाख 70 हजार लोगों को निकालने के बाद आखिरी फ्लाइट 20 अक्टूबर 1990 को भारत आई थी। भारत का यह ऑपरेशन अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट ऑपरेशन था। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

‘हिजाब पहनाकर भी लड़कियों को अकेले मत भेजो स्कूल-कॉलेज…ये हराम है हराम’ : मौलाना सज्जाद नोमानी का Video, बोले- ‘जहन्नुम में जाओगे’

मजहब के नाम पर मौलानाओं के अजीबोगरीब बयान आना कोई नई बात नहीं है। कभी कहा जाता है कि लड़कियों को चुस्त कपड़े पहनकर सार्वजनिक स्थलों पर नहीं आना चाहिए तो कभी कहा जाता है कि उन्हें मेक अप नहीं करना चाहिए। इसी क्रम में ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना सज्जाद नोमानी का बयान वायरल है। उन्होंने मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा है कि रमजान के वक्त लड़कियों को स्कूल/कॉलेज अकेले नहीं भेजना चाहिए क्योंकि ऐसा करना हराम है।

कथिततौर पर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो इसी रमजान में हुई एक बैठक का है। इसमें वो माता-पिता को भड़काते हुए कहते हैं- अपनी बच्चियों को हिजाब पहनने के बाद भी अकेले स्कूल-कॉलेज मत भेजो। ये हराम है हराम। वह कहते हैं, “पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”

वायरल वीडियो में उन्हें मुस्लिम बच्चियों के अम्मी-अब्बू को भड़काते हुए सुना जा सकता है। वह पूछते हैं, क्या उन्हें (लड़कियों के अम्मी-अब्बू को) पता है उनकी बेटी स्कूल-कॉलेज जाकर पीरियड अटेंड करती है या नहीं। या फिर कॉलेज में आकर चुपके से कहीं चली जाती है। मौलाना कहते हैं,

“आप अगर बाप हैं। आप अगर मुसलमान है। बल्कि आप अगर शरीफ इंसान हैं और हलाल बाप के रुतबे से पैदा हुए हैं…इससे ज्यादा मैं क्या सख्त बात कह सकता हूँ… तो ये हराम है कि आप अपनी बच्चियों की तरह से बेफिक्र हों।”

उनके मुताबिक जो कोई स्कूल कॉलेजों में अपनी बेटियों को अकेले भेजता है उसे जहन्नुम नसीब होनी चाहिए। नोमानी के अनुसार, इतना काफी नहीं है कि किसी की बेटी हिजाब पहनकर स्कूल या कॉलेज जा रही है, अम्मी-अब्बू का फर्ज है कि उसे अकेले न जाने दिया जाए। मौलाना की मानें तो अगर बेटियों को कॉलेज भेजना है तो प्रिंसिपल से मिलें और अनुरोध करें कि उनको बताया जाए कि उनकी बेटी ने सारी क्लासें ली या फिर गोल कर दी।

कहा जा रहा है कि नोमानी के इस बयान के बाद उनसे इस्लामी बुद्धिजीवी ही नाराज हो गए हैं। इंडियन मुस्लिम फॉऱ सेकुलर डेमोक्रेसी के कन्वेनर जावेद आनंद का पूछना है कि क्या इस बयान में अप्रत्यक्ष रूप से ये नहीं कहा जा रहा कि मुस्लिम लड़कियों को पढ़ाई से दूर रखो।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है सज्जाद नोमानी ने इस तरह लड़कियों की आजादी पर सवाल उठाया हो। उन्होंने कॉलेज जाती लड़कियों को मोबाइल देने का भी विरोध किया था। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि आजकल हिंदू लड़के मुस्लिम लड़कियों को उर्दू भाषा सीखकर फँसाते हैं। 5000 लड़कियों ने ऐसे ही गैर-मजहब में शादी कर ली

तालिबान को भेजा था सलाम

इसके अलावा साल 2021 में तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब सज्जाद नोमानी ने भारत में इसका स्वागत किया था। मौलाना सज्जाद नोमानी ने ‘तालिबान के हौसले’ को सलाम करते हुए कहा था कि तालिबान ने दुनिया की सबसे मजबूत फौज को शिकस्त दे दी है। AIMPLB प्रवक्ता ने कहा, “एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है। एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। काबुल के महल में वे दाखिल होने में कामयाब रहे। उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। उनमें कोई गुरूर और घमंड नहीं था।”

मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान की तारीफों के पुल बाँधते हुए आगे कहा, “उनके कोई बड़े बोल नहीं थे। ये नौजवान काबुल की सरजमीं को चूम रहे हैं। मुबारक हो। आपको दूर बैठा हुआ यह हिंदी मुसलमान सलाम करता है। आपके हौसले को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है।” तालिबान के कब्जे के बाद हुई हिंसा व वहाँ से भागने के दौरान मची भगदड़ में कई लोग मारे भी गए हैं।

‘लड़ने लायक हो तो लड़ो नहीं तो मर जाओ सालों…’: मुख्तार अंसारी के डर से जब DM ने मऊ दंगों में पुलिस भेजने से किया इनकार, चश्मदीदों का खुलासा

उत्तर प्रदेश में एक समय माफियाओं का इतना बोल बाला था था कि कलेक्टर तक कार्रवाई करने से डरते थे। अगर माफिया मुख्तार अंसारी हो तो यह डर कई गुना और बढ़ जाता था। वोट और अन्य समीकरणों की वजह से उन पर सत्ताधारी पार्टी का दबाव होता था। अधिकारी लाचार और जनता भय से त्रस्त होकर चुप्पी साध लेती थी।

बता 1990 के दशक की है। गाजीपुर जनपद के युसूफपुर मुहम्मदाबाद का रहने वाला जेल में बंद गैंगस्टर मुख्तार अंसारी मऊ को अपना अड्डा बना लिया था। यहीं से वह तमाम गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देता था। इस दौरान वह मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) में शामिल हो गया और साल 1996 में विधायक भी बन गया। साल 2002 में फिर विधायक बना और उसके तीन साल बाद 2005 के कुख्यात मऊ दंगे की शुरुआत की। 

कहा जाता कि इस दंगे में लगभग एक महीने तक मऊ जलता रहा। कितने ही हिंदुओं की हत्याएँ की गईं। कितनों के घर जला दिए गए। दुकान और व्यवसाय नष्ट कर दिए गए। जमीनों और मकानों पर कब्जा कर लिए गए। प्रशासन लाचार बना रहा और शहर जलता रहा। इस दंगे की आग इतनी भीषण थी कि इतिहास में पहली बार रेलवे ने मऊ से अपना संचालन बंद कर दिया। साल 1988 में पहली अपराध की दुनिया में सामने आया मुख्तार अंसारी इस दंगे का मास्टरमाइंड बताया जाता है।

इस घटना की भयावहता के बारे में मऊ के सामाजिक कार्यकर्ता छोटेलाल गाँधी ने विस्तार से बताया। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “अक्टूबर 2005 में एक सुनियोजित तरीके से मुख्तार अंसारी ने दंगा कराया। ये मुसलमान कहते थे कि विधायक जी अगर तीन दिन का छूट मिल जाता तो हम लोग (हिंदुओं को) चटनी बना देते। शाही कटरा के मैदान में भरत मिलाप के दिन 14 अक्टूबर 2005 को तार तोड़वाया। तार तोड़वाने के बाद एक सुनियोजित तरीके से दंगा हुआ।”

दंगे में मुख्तार की भूमिका को लेकर छोटेलाल ने बताया, “उस दौरान मुख्तार अंसारी एक खुली जीप में बैठकर जा रहा था। उस समय लगभग 9:30 बज था। जब वह तलहा बाग मोड़ के पास पहुँचा तो उस समय फायरिंग और आगजनी हो रही थी। वह (मुख्तार अंसारी) पिस्टल लेकर दौड़ा और एक आदमी की वहीं पर हत्या हुई। जिस यादव की हत्या हुई, उसके भाई को पकड़ कर रात में पकड़कर मुख्तार और उसका भाई अफजाल अंसारी लखनऊ ले गए। वहाँ उस आदमी मुलायम सिंह के बगल में बैठकर कह रहा है कि विधायक मुख्तार अंसारी तो शांतिदूत बनकर सबको अपील कर रहे थे कि मऊ में शांति बनाए रखें।”

छोटेलाल कहते हैं, “मुख्तार के बिना यह दंगा ही नहीं होता। यह तो मऊ में गोधरा कांड से बड़ा कांड कराना चाहता था। मऊ के पुलिस स्टेशन का दारोगा एक खान था। जुमा के बहाने वह सारा बंदूक बंद करके चला गया था। वो तो सेना का एक जवान था, जो अपने परिवार के साथ उस समय घूम रहा था। उसने दो पुलिस वालों से कहा कि रोको तो पुलिसवाले बोले कि 5000 आदमी है, लूट लेगा सब। इसके बाद सेना का वह जवान बंदूक छीनकर मारा तो एक आदमी मरा और एक घायल हुआ तो दंगा से मऊ बचा।”

छोटेलाल ने ऑपइंडिया से कहा कि जब मुस्लिम हिंदुओं के घरों को जला रहे थे तो उन्होंने डीएम से कई बार बात की थी। तब अमर यादव डीएम थे। छोटेलाल कहते हैं, “डीएम से हम कहते थे कि साहब यहाँ दंगा हो रहा है, सब जला रहे हैं तो वे कहते थे- लड़ने लायक हो तो लड़ो नहीं तो मर जाओ सालों… हम क्या करें। कहाँ-कहाँ पुलिस लगाएँ। डीएम एकदम पंगु था मुख्तार के सामने।”

छोटेलाल के अनुसार, दंगों के दौरान मुख्तार ने मऊ बाजार में हिंदुओं की कीमतों दुकानों को जलवा दिया था। उनकी कीमत दो-दो करोड़ रुपए तक थी। वह चाहता था कि हिंदुओं से पूरी मार्केट खाली हो जाएगा और वहाँ सिर्फ मुस्लिम दुकानदार रहें। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्तार अंसारी पर तब मुलायम सिंह यादव का हाथ था। इसलिए पुलिस-प्रशासन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता था।

जिस ‘साले’ सद्दाम ने जेल में अशरफ से करवाई शूटरों की मुलाकात, उस पर UP पुलिस ने रखा ₹1 लाख का ईनाम: ‘बहन’ आयशा नूरी सरेंडर को तैयार, शाइस्ता की तलाश तेज

उत्तर प्रदेश में माफियाओं/अपराधियों पर कार्रवाई का सिलसिला अभी थमा नहीं है। अतीक-अशरफ हत्या केस की जाँच में जुटी पुलिस को अब साथ-साथ माफिया भाइयों के साले सद्दाम की तलाश है। यूपी पुलिस ने उसके ऊपर रखा इनाम बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, यूपी पुलिस ने बताया कि माफिया अतीक अहमद और अशरफ अहमद के साले सद्दाम की गिरफ्तापरी के लिए पुलिस ने ईनाम ₹50,000 से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया है।

उस पर आरोप है कि उसने बरेली जेल में शूटर्स की अशरफ से मुलाकात कराई थी। सद्दाम पर बरेली जेल प्रशासन से मिलकर जीजा अशरफ को VIP सुविधा भी दिलाने का आरोप है। पुलिस के अलावा STF भी सद्दाम की गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।

बता दें कि एक ओर जहाँ सद्दाम को पकड़ने के लिए पुलिस द्वारा ईनाम राशि बढ़ाई गई है। वहीं अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी की सरेंडर एप्लिकेशन पर भी 30 अप्रैल को सुनवाई होनी है। सीजेएम कोर्ट ने धूमगंज पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट माँगी है। आयशा पर उमेश पाल हत्याकांड के शूटरों की मदद करने का आरोप है।

इसी तरह अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन की तलाश भी तेज कर दी गई है। हाल में उसे ढूँढने के लिए दिल्ली में छापेमारी हुई थी। जाँच एजेंसियों को यह इनपुट मिला था कि शाइस्ता ने किसी वकील से संपर्क किया था। इसी आधार पर करोलबाह और जामिया नगर में छापेमारी हुई।

दिल्ली के अलावा एसटीएफ की एक टीम लखनऊ में भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। वकील के अलावा कहा जा रहा है उसने राजनीतिक दल के नेता से भी सपर्क किया है। एसटीएफ अलर्ट मोड पर रहकर उससे जुड़े हर इनपुट पर काम कर रही है।

WFI चीफ बृजभूषण सिंह के खिलाफ दिल्ली में 2 FIR, पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज: पहलवान अब भी संतुष्ट नहीं, पूछा- हमें इससे क्या मिलेगा

दिल्ली पुलिस ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष और गोंडा से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की है। ये प्राथमिकी महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज की गई हैं। महिला खिलाड़ियों से यौन शोषण से संबंधित इन FIR में एक POCSO ऐक्ट में दर्ज की गई है। हालाँकि, पहलवान सिर्फ FIR दर्ज होने से संतुष्ट नहीं हैं। वे सांसद की तुरंत गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

दक्षिण दिल्ली के पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने कहा, “पहली प्राथमिकी एक नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है। यह एक महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ POCSO अधिनियम के तहत दर्ज की गई है।”

डीसीपी ने आगे कहा, “दूसरी प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत अन्य वयस्क शिकायतकर्ताओं द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई है। यह अन्य समान धाराओं के साथ एक महिला की शील भंग करने से संबंधित है।” दोनों FIR दिल्ली की कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) को अदालत को बताया था कि उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली जाएगी। इसके बाद शाम को प्राथमिकी दर्ज की गई।

हालाँकि, अब तक FIR दर्ज करने की माँग करते आ रहे पहलवानों ने कहा है कि सांसद को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वे अपना धरना खत्म नहीं करेंगे। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह को सांसदी छोड़ने की भी माँग की है।

पहलवान सत्यव्रत कादियान का कहना है, “यह अच्छा है कि FIR दर्ज कर ली गई है। FIR से हमें क्या मिलेगा? क्या FIR से हमें न्याय मिलेगा? दिल्ली पुलिस को पहले ही दिन FIR दर्ज कर लेनी चाहिए थी। हमारी ऑन-पेपर लड़ाई अभी शुरू हुई है। देखते हैं कि हमारी कानूनी टीम और कोचों का क्या कहना है। हम माँग कर रहे हैं कि कुश्ती को राजनीति से अलग किया जाए और हमारी महिला पहलवानों का भविष्य सुरक्षित किया जाए।”

अब जबकि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों द्वारा FIR दर्ज करने की माँग को दिल्ली पुलिस ने माँग ली तो पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि उन लोगों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है। फोगाट ने कहा, “हमारी माँग है कि उन्हें (WFI अध्यक्ष) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।”

वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक के साफ लग रहा है कि पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” 

बृजभूषण शरण सिंह ने शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) को कहा था, “कोर्ट ने आज जो भी फैसला किया है, मैं उसका स्वागत करता हूँ। इस फैसले से मैं बहुत खुश हूँ। अब कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मुझे इंसाफ मिलेगा। मुझे अपने कर्म पर भरोसा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने खिलाड़ियों को लेकर कहा था, “पहलवानों की माँगें लगातार बदल रही हैं। वे सवाल उठाते रहेंगे। दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठाएँगे। मुझे आजतक किसी मामले में किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। सब कुछ राजनीति से प्रेरित है।”

पहलवानों ने सभी नेता और अपने जाट समुदाय के खापों से समर्थन माँगा था। जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर कॉन्ग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनके बेटे दिपेंद्र हुड्डा सहित हरियाणा के कुछ खिलाड़ियों ने अपना समर्थन दिया। इस दौरान ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी’ के नारे लगे।

‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी… ‘: पहलवानों के प्रदर्शन में सुनाई पड़े PM विरोधी नारे, महिला पहलवान बोलीं- हमें पुलिस पर भरोसा नहीं, बयान SC में देंगे

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। जंतर मंतर पर बैठीं महिला पहलवानों ने ने WFI चीफ को तुरंत जेल में डालने की माँग की। इतना ही नहीं, प्रदर्शन स्थल पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए।

ताजा घटनाक्रमों के बीच बृजभूषण शरण सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने आज जो भी फैसला किया है, मैं उसका स्वागत करता हूँ। इस फैसले से मैं बहुत खुश हूँ। अब कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मुझे इंसाफ मिलेगा। मुझे अपने कर्म पर भरोसा है।”

WFI के चीफ ने कहा, “सरकार की तरफ से कहा गया था कि FIR लिखने में कोई दिक्कत नहीं है। मैं इसका भी स्वागत करता हूँ। जब कमिटी बनी थी, तब भी मैंने कोई सवाल नहीं किया था। इन लोगों को इंतजार करना चाहिए था, यह लोग सुप्रीम कोर्ट गए और वहाँ से एक फैसला आया।”

उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस को जाँच मिली है। इसमें जहाँ भी मेरे सहयोग की आवश्यकता होगी, वो मैं करने के लिए तैयार हूँ। मुझे पुलिस प्रणाली और न्यायालय पर भरोसा है। इस देश में न्यायपालिका से बड़ा कोई नहीं है। अब तक तो FIR दर्ज हो गई होगी। मैं कानून का पालन करता रहा हूँ और आगे भी करूँगा।”

आजतक से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “मैं कहीं भागा नहीं हूँ, अपने आवास पर हूँ। मुझ पर आरोप लगाने वालों के पास मजबूत राजनीतिक समर्थन है। मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने निचली अदालत के फैसले का इंतजार नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट चले गए।”

उन्होंने सवाल किया, “कैंप के अन्य पहलवान बाहर क्यों नहीं आए? सब कुछ इन्हीं लोगों के साथ ही क्यों हो रहा है? प्रदेश के और भी कई पहलवान खेमे में हैं, लेकिन उनके अलावा किसी अन्य पहलवान ने कोई आरोप नहीं लगाया है। मैं गलत नहीं था और ना मैं गलत हूँ।”

गोंडा से भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह तो यहाँ तक कह दिया कि अगर पहलवान चाहते हैं कि वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा, “पहलवानों को चाहिए कि धरना खत्म करें और प्रैक्टिस में जुट जाएँ।”

बृजभूषण सिंह ने खिलाड़ियों को लेकर कहा, “पहलवानों की माँगें लगातार बदल रही हैं। वे सवाल उठाते रहेंगे। दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठाएँगे। मुझे आजतक किसी मामले में किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। सब कुछ राजनीति से प्रेरित है।”

अब पहलवानों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं

अब जबकि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों द्वारा FIR दर्ज करने की माँग को दिल्ली पुलिस ने माँग ली तो पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि उन लोगों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है। फोगाट ने कहा, “हमारी माँग है कि उन्हें (WFI अध्यक्ष) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।”

वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक के साफ लग रहा है कि पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” 

प्रदर्शन स्थल पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के लगे नारे

पहलवानों ने सभी नेता और अपने जाट समुदाय के खापों से समर्थन माँगा था। जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर कॉन्ग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनके बेटे दिपेंद्र हुड्डा पर पहुँचे। इस दौरान ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी’ के नारे लगे।

बताते चलें कि महिला पहलवानों कई राजनीतिक दलों और जाट समुदाय के खापों का भी समर्थन मिला है। पहलवानों के समर्थन में नीरज चोपड़ा और कपिल देव के अलावा और कई हस्तियाँ आई हैं। यहाँ तक कि ‘टूलकिट’ का हिस्सा रहीं स्वरा भास्कर ने भी इस पर सरकार को घेरने का प्रयास किया है।

वहीं, हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश कोच ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन किया है। उन्होंने महावीर फोगाट परिवार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। राकेश कोच ने कहा कि उनका परिवार कुश्ती संघ पर कब्जा करना चाहता है। राकेश कोच ने कहा कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को WFI का अध्यक्ष बनवाना चाह रहे हैं। इसलिए वे खिलाड़ियों को भड़का रहे हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए राकेश कोच ने कहा कि ये खिलाड़ी किसी कार्यक्रम में आने के लिए पैसे लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बजरंग पुनिया सरकारी अधिकारी हैं और रेलवे की अनुमति के बिना वे धरने पर बैठे हैं। राकेश ने कहा कि विनेश फोगाट और साक्षी के साथ कुछ गलत नहीं हुआ।

पीटी उषा ने पहलवानों पर उठाया था सवाल

पहलवानों के धरने को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ओलंपिक संघ ने कहा कि पहलवान धरना देकर भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं। IOC ने पहलवानों को एथलीट कमीशन में आने के लिए कहा। IOC की अध्यक्ष पीटी उषा ने तो इसे अनुशासनहीनता बताया था।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया। साक्षी मलिक ने गुरुवार (27 अप्रैल 2023) को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?

टॉवर लगाया पर किराया नहीं दिया, हटाने को बोला तो हुई मारपीट: जयपुर में दर्ज होगा मुकेश अंबानी समेत 4 पर केस, कोर्ट ने निर्देश दिया

राजस्थान के जयपुर में रिलायंस जियो इनफोकॉम के मालिक मुकेश अंबानी के खिलाफ केस दर्ज होगा। ये मामला मेट्रोपॉलिटियन मजिस्ट्रेट कोर्ट-5 के निर्देश पर दर्ज किया जाएगा। आरोप है कि उनकी कंपनी ने 19 दिसंबर 2013 को मोबाइल टॉवर के लिए लीज पर जगह ली थी। तब से कंपनी ने न किराया दिया, न जगह खाली की।

इस केस में अजमेर के मदनगंज, किशनगढ़ निवासी मनोज वैष्णव ने शिकायत दायर की थी। इसी पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड के मालिक मुकेश अंबानी सहित चार के खिलाफ जालूपुरा पुलिस थाने को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए।

केस में मुकेश अंबानी के अलावा राजस्थान के क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रोजेक्ट मैनेजर व रिलायंस जियो जयपुर के पंकज कुमार का नाम शामिल हैं। परिवाद में कहा गया कि मनोज के पिता का मदनगंज में मकान था। रिलायंस ने उनके मकान की छत को 19 दिसंबर 2013 को लीज पर 20 साल के लिए लिया और 7 हजार किराया देने को कहा।

परिवाद के अनुसार कंपनी ने छत की दीवारें तोड़कर वहाँ मोबाइल टॉवर तो लगाया पर किराया नहीं दिया। 24 फरवरी 2016 को परिवादी के पिता का देहांत हो गया। बेटे ने कंपनी कार्यलय जाकर उस लीज डीड को निरस्त करने को कहा और साथ ही संपत्ति से कब्जा व टावर हटाने का आग्रह किया।

परिवादी के मुताबिक उनके इस आग्रह पर कार्यालय के लोगों ने उनसे गाली-गलौच करके मारपीट की। इतना ही नहीं दोबारा संपत्ति से कब्जा हटाने की माँग पर उन्हें धमकियाँ दी गईं। इसी के बाद ये परिवाद कोर्ट में दायर किया गया। आरोप लगाया गया है कि उनकी जमीन साजिश करके हड़पी गई है। अब कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में केस दर्ज करके कार्रवाई की जाए।

हेट स्पीच का खुद संज्ञान लेकर FIR करे सभी राज्यों की पुलिस, वर्ना होगी कोर्ट की अवमानना: हिंदू पक्ष ने कहा- ‘सिर तन से जुदा’ कहने पर भी हो ऐक्शन

हेट स्पीच को लेकर शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हेट स्पीच (Hate Speech) के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर प्राथमिकी दर्ज करें और कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा कि भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने धर्म की परवाह किए बिना गलती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय यह स्पष्ट करता है कि संविधान की प्रस्तावना में जैसी कल्पना की गई है, वैसी भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को संरक्षित रखने के लिए तत्काल एक्शन लिया जाना चाहिए।”

जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसकी सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि हेट स्पीच देश के ताने-बाने को प्रभावित करने वाला एक गंभीर अपराध है। यह भारतीय गणतंत्र के दिल और लोगों की गरिमा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

बता दें कि हेट स्पीच पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने साल 2022 में सिर्फ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली को दिया था। अब इस आदेश को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए बढ़ा दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 मई 2023 को होगी।

जस्टिस जोसेफ ने कहा, “किसी को भी कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इंग्लैंड में उनके पास ‘शब्दों से लड़ने’ की अवधारणा है। क्या हम यह आदेश पारित कर सकते हैं कि यदि आप कार्रवाई नहीं करते हैं तो आपको अवमानना का सामना करना पड़ेगा? हम केवल जनता की भलाई को ध्यान में रखकर ऐसा कर रहे हैं।” पीठ ने कहा, “न्यायाधीश गैर-राजनीतिक हैं और उन्हें पार्टी A या पार्टी B से कोई मतलब नहीं है। हम सिर्फ भारत के संविधान और कानून को सोचते हैं।”

शीर्ष अदालत का यह आदेश पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला द्वारा दायर एक याचिका पर आया है। शुरू में उन्होंने हेट स्पीच के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को निर्देश देने की माँग की थी। तब सर्वोच्च अदालत ने यह आदेश दिया था। अब उन्होंने इस आदेश को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिए एक आवेदन दायर किया था।

इसके पहले सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकारों को नपुंसक तक करार दिया था। पीठ ने कहा था कि हर दिन फ्रिंज एलिमेंट टेलीविजन और मंचों से नफरती भाषण दे रहे हैं। ऐसे बयान दिए जाते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ। इज्जत सबको प्यारी होती है। पीठ ने कहा था कि इस पर राज्य सरकारों को कार्रवाई करनी चाहिए।

उधर, हेट स्पीच मामले में ही सुप्रीम कोर्ट ‘हिन्दू ट्रस्ट फॉर जस्टिस’ (HTJ) नामक एक मंच के आवेदन पर भी सुनवाई के लिए तैयार हो गई है। HTJ की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि उनकी अर्जी में हिंदुओं को धर्मांतरित करने के लिए मुस्लिम और ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत भर में आंदोलन चलाया जा रहा है। इसके कारण हिंदुओं की जनसंख्या कम हो रही है।

वकील जैन ने कोर्ट में दलील दी कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें मुस्लिम भीड़ द्वारा ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, इसके बाद सिर कलम भी किए गए हैं। कई मौकों पर मुस्लिम भीड़ ने जुलूस निकाला और उसमें सिर कलम करने के नारे लगाए गए। अर्जी में इस तरह के हेट स्पीच पर सख्त कार्रवाई करने की गुजारिश की गई है।

याचिका में 2 फरवरी 2023 को वायरल हुए एक वीडियो का भी जिक्र किया गया है। इस वीडियो में पश्चिम बंगाल के हुगली में स्थित फुरफुरा शरीफ पीरजादा ताहा सिद्दीकी को मुस्लिमों को अपने बच्चों को हिंदुओं के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों द्वारा हेट स्पीच की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएँ सामने आने के बाद भी पुलिस राजनीतिक कारणों से इन पर कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने कहा, “पुलिस राजनीतिक कारणों या मुस्लिम भीड़तंत्र के डर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, लेकिन मुस्लिमों के एक वर्ग में हिंदुओं के प्रति घृणा को रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया।”