उत्तर प्रदेश के हाथरस में बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाए जाने के बाद अभिभावकों में गुस्सा है। अभिभावकों का आरोप है कि मंगलवार (18 अप्रैल 2023) को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सभा का आयोजन किया गया था। इसी दौरान बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाई गई। अभिभावकों और हिंदूवादी संगठनों के के आक्रोश को देखते हुए स्कूल की प्रधानाचार्य सोनिया और दो शिक्षकों को निष्कासित कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में नमाज पढ़ाए जाने की जानकारी मिलते ही परिजन बुधवार (19 अप्रैल 2023) को स्कूल पहुँचे। उन्होंने नमाज पढ़ाए जाने पर आपत्ति जताते हुए प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में इलाके के हिंदूवादी नेता भी शामिल हुए। विरोध में स्कूल के गेट पर हनुमान चलीसा का पाठ भी किया गया।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा (रक्षासूत्र) भी उतरवा लिए जाते हैं। बच्चों द्वारा टीका लगाने पर या लड़कियों के मेहंदी लगाने पर रोक लगाई जाती है। अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की।
Hathras, Uttar Pradesh: Students at BLS international school allegedly forced to offer Namaz during school hours. Activists demand action against the school authorities, watch students telling truth on camera: pic.twitter.com/yjo6enG9KC
स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों ने भी घटना की पुष्टि की है। इससे संबंधित वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता और अभिभावक दोषी शिक्षकों पर एफआईआर दर्जकर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि छोटे बच्चों को छोड़कर सभी को नमाज पढ़ने के लिए बुलाया गया था। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि छोटे बच्चों से नमाज पढ़वाकर धर्मांतरण की पहली सीढ़ी चढ़वाई गई है।
हालाँकि, स्कूल प्रशासन ने नमाज पढ़वाने की बात से इनकार किया है। बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर कमल शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि कल विश्व धरोहर दिवस था। साथ ही रमजान का महीना का चल रहा था। इसलिए बच्चों से प्रार्थना कराई गई थी। उन्होंने स्कूल में कलावा उतारने की घटना से भी इनकार किया।
लोगों की नाराजगी को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने प्रधानाचार्य सोनिया मैकफर्सन, शिक्षक इरफान इलाही और कंबर रिजवान को निष्कासित कर दिया है। हंगामे को बढ़ता देख जिलाधिकारी ने जाँच के लिए कमेटी बना दी है। कमेटी को 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
बिहार की राजधानी पटना में रमजान के अंतिम जुमे (शुक्रवार – 21 अप्रैल 2023) की नमाज के बाद मारे गए गैंगस्टर अतीक अहमद के समर्थन में नारे लगे। नमाज के बाद कुछ कट्टरपंथियों ने ‘शहीद अतीक अहमद अमर रहें’ के नारे लगाए। इस दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।
घटना पटना जंक्शन के पास की है। यहाँ स्थित एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद भीड़ बाहर निकल रही थी। इसी दौरान जमकर आपत्तिजनक नारेबाजी की गई। गैंगस्टर अतीक के समर्थन में नारेबाजी करने वाले लोगों का नेतृत्व रईस अंसारी उर्फ रईस गजनवी कर रहा था। बताया जा रहा है कि गजनवी की पटना जंक्शन के पास दुकान है।
सामने आए वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि ‘गजनवी शहीद अतीक अहमद अमर रहें’ के नारे लगा रहा है और उसके साथ खड़े कट्टरपंथी इसे पीछे से दोहरा रहे हैं। इस दौरान ‘योगी-मोदी मुर्दाबाद’ के भी नारे लगाए गए।
गजनवी ने कहा, “आज हमने अल्लाह से दुआ की है कि अतीक अहमद, असद अहमद और अशरफ अहमद की शहादत को कबूल फरमाए। उनको योगी सरकार ने उनको सुनियोजित तरीके से मरवाया है। अतीक अहमद शहीद हुए हैं। रोजा के दिन में उनको अपराधियों के जरिए मरवाया गया है। पूरी दुनिया के मुसलमानों की नजर में वो शहीद हो गया।”
गनजवी ने कहा कि अतीक और उसके अपराधी भाई अशरफ को मरवाने में सरकार और पुलिस, सबका हाथ है। गजनवी से पत्रकारों ने कहा कि अतीक और उसका भाई अशरफ अपराधी था। इस पर गजनवी ने कहा कि अगर दोनों ने गलत काम किया था तो कोर्ट है। उसे सजा होती।
आपत्तिजनक नारे लगाने वाले ने आगे कहा, “उसे फाँसी पर चढ़ा दिया जाता तो हम लोग कुछ नहीं बोलते। पुलिस ने कोर्ट में लिखकर दोनों की रिमांड ली थी। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी।” जिस वक्त गजनवी माइक पर ये सब बातें कह रहा था, उस दौरान उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
बता दें कि 15 अप्रैल 2023 की शाम को अस्पताल में चेकअप कराने के ले जाते हुए तीन अपराधियों ने अतीक और उसके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी अतीक और अशरफ की पुलिस के सामने हुई हत्या को स्क्रिप्टेड बताया था। तेजस्वी ने कहा था, “अतीक जी का नहीं, कानून का जनाजा निकला।”
गजनवी का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि नीतीश जी के राज्य में एक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार को पाकिस्तान न बनने दें। देश इस तरह से खंडित हो जाएगा। वहीं, बीजेपी नेता हरी भूषण ठाकुर ने कहा कि नारे लगाने वालों के घरों पर बुलडोजर चलवाना चाहिए और उसे गोलियों से छलनी कर देना चाहिए।
ट्विटर पर अब ब्लू टिक (Twitter Blue Tick) उन्हीं लोगों का बचा है जो इसके लिए भुगतान कर रहे हैं। लीगेसी वेरिफाइड अकाउंट्स के ब्लूटिक हटा दिए गए हैं। इसके बाद मीम की बाढ़ आई हुई है। जिन लोगों का ब्लू टिक अब नहीं रहा उनमें एक बाॅलीवुड के बिग बी अमिताभ बच्चन भी हैं। उन्होंने ट्वीट कर बताया है कि पैसे देने के बावजूद उनको ब्लू टिक नहीं मिला है।
अमिताभ बच्चन ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को ट्वीट किया, “ए twitter भइया! सुन रहे हैं? अब तो पैसा भी भर दिए हैं हम… तो उ जो नील कमल होत है ना, हमार नाम के आगे, उ तो वापस लगाय दें भैया, ताकि लोग जान जाएँ कि हम ही हैं- Amitabh Bachchan… हाथ तो जोड़ लिए रहे हम। अब का, गोड़वा जोड़े पड़ी का?”
T 4623 – ए twitter भइया ! सुन रहे हैं ? अब तो पैसा भी भर दिये हैं हम … तो उ जो नील कमल ✔️ होत है ना, हमार नाम के आगे, उ तो वापस लगाय दें भैया , ताकि लोग जान जायें की हम ही हैं – Amitabh Bachchan .. हाथ तो जोड़ लिये रहे हम । अब का, गोड़वा ?जोड़े पड़ी का ??
फिल्म क्रिटिक और अभिनेता कमाल राशिद खान उर्फ केआरके ने भी सबस्क्रिप्शन लेने के बावजूद ब्लू टिक हटाए जाने का दावा किया है। उन्होंने लिखा, “मैंने 3 दिन पहले ही ब्लू टिक के लिए सब्सिक्रिप्शन फीस दे दी थी। इसके बावजूद मेरे वेरिफाइड अकाउंट से ब्लू टिक क्यों हटा दिया है?”
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्विटर के ब्लू-चेक सिस्टम के तहत लगभग 300000 वेरिफाइड यूजर्स थे। इनमें से कई पत्रकार, एथलीट और सार्वजनिक हस्तियाँ थीं। इन सबके अकाउंट से ब्लू टिक हटाने के बाद से सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है।
पुलकित नाम के यूजर ने सेलिब्रिटी और दिग्गज हस्तियों के ट्विटर अकाउंट से ब्लू टिक हटाने के बाद एलन मस्क का एडिटेड वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह कहते हैं कि क्या भिगमंगया, क्या देख रहा है, हलवा है क्या। दियाली लगा जा।”
अभिनेता प्रकाश राज लिखते हैं, “बाय बाय ब्लू टिक…. आपके होने से अच्छा लगा…मेरी जर्नी..मेरी बातचीत..मेरी शेयरिंग… मेरे लोगों के साथ जारी रहेगी…आप अपना ख्याल रखें।”
Bye bye #BlueTick …. It was nice having you….my journey ..my conversations..my sharing…will continue with my people … you take care #justasking
महाराष्ट्र के सतारा में स्थानीय हिंदू संगठन के लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को हटाने की माँग की है। संगठन के लोगों का कहना है कि न्यायालय से आदेश के बाद भी मस्जिद को नहीं हटाया गया है। उन्होंने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार से अवैध निर्माण को हटाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराने का निवेदन किया है। संगठन के तरफ से कहा गया है कि यदि अवैध तौर पर बनाई गई मस्जिद को नहीं हटाया गया तो यहाँ एक विशाल हनुमान मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।
दी गई जानकारी के मुताबिक सतारा जिले के फलटन गाँव की सरकारी जमीन पर साल 2013 में इस अवैध मस्जिद का निर्माण कराया गया था। उसके बाद कोरोना काल के समय लगाए गए लॉकडाउन के समय का फायदा उठाकर मस्जिद परिसर को और विस्तारित कर दिया गया। इलाके में रहने वाले मुस्लिमों ने मस्जिद के आगे एक दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट का बोर्ड लगाया हुआ है। मस्जिद हटाने की माँग कर रहे हिंदुओं के अनुसार इस तरह का कोई भी ट्र्स्ट या दरगाह वजूद में नहीं है। अवैध निर्माण को बचाने के लिए इसे बनाया गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 में दिया था मस्जिद हटाने का आदेश
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई जब फलटन के पास मलथान नाम के स्थान पर रहने वाले मुस्लिमों ने मस्जिद निर्माण शुरू किया था। इसके खिलाफ मंगेश खंडारे नाम के हिंदुवादी नेता ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि मस्जिद को अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाया जा रहा है। खंडारे ने अपनी याचिका के साथ जरूरी सबूत भी अटैच किए थे जिसके आधार पर मस्जिद का निर्माण रोकने की माँग की गई थी।
याचिकाकर्ता द्वारा अवैध ढाँचे का निर्माण करवा रहे लोगों व मालिकाना हक का दावा करने वालों के खिलाफ जाँच व कार्रवाई की माँग की गई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में इस जनहित याचिका का संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को 10 सप्ताह के भीतर मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई करके याचिकाकर्ता को इसकी सूचना देने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद भी आजतक मस्जिक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
एक मुस्लिम महिला ने किया था सरकारी जमीन पर दावा, कोर्ट कर दिया था खारिज
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद गाँव की रहने वाली मुमताज मुजावर नाम की मुस्लिम महिला ने जमीन पर दावा किया। महिला ने इस जमीन को अपनी संपत्ति बताते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर कराया। महिला ने दावा किया कि जमीन उसकी चाची की थी। चाची के कोई संतान न होने की वजह से मुमताज उसकी वारिस थी। मुमताज ने दावा किया कि आजादी के बाद भारत सरकार ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया।
इस पर सतारा कोर्ट ने मुमताज से उसकी चाची का नाम और वर्तमान पता पूछा। कोर्ट ने मुमताज से घटना को लेकर अखबार में भी इश्तिहार छपवाने को कहा। मुमताज अदालत के निर्देशों का पालन करने में असमर्थ रही। इसके बाद भी मामला चलता रहा और आखिरकार साल 2019 में अदालत ने मुमताज के दावों को खारिज कर दिया।
स्थानीय हिंदू संगठन के सदस्य अक्षय तवारे ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि महिला द्वारा जमीन पर किए जा रहे स्वामित्व के दावों का कोई आधार नहीं है और कोर्ट ने भी यह माना है। उन्होंने बताया कि मुमताज जिस चाची की बात कर रही हैं वह विभाजन के दौरान पाकिस्तान चली गई थीं। जिसके बाद इस संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया गया। अब यह सरकारी जमीन है और उस पर अवैध मस्जिद बना दी गई है। उन्होंने कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
अचानक बढ़ गई मुस्लिमों की संख्या
मालथान गाँव के अक्षय ने जानकारी दी कि वर्ष 2012 से पहले यहाँ कोई मस्जिद नहीं थी। मुस्लिम अपने घरों में ही इकट्ठे होकर नमाज़ अदा किया करते थे। इस मस्जिद के निर्माण के बाद इलाके में मुस्लिमों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। अक्षय ने कहा कि किसी ने खाली जमीन पर एक छोटा सा शेड बना दिया। धीरे-धीरे वहाँ एक मस्जिद बना दी गई। अब लोग यहाँ इकट्ठा होते हैं नमाज पढ़ते हैं और इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं। साल 2013 से पहले और उसके बाद के सैटेलाइट तस्वीरों में भी देखा जा सकता है कि मस्जिद का निर्माण बाद में कराया गया।
अवैध निर्माण की पुष्टि करती सैटेलाइट तस्वीरें
मंगेश और अक्षय ने ऑपइंडिया को बताया कि हाल ही में रमजान के महीने के दौरान मस्जिद के आगे एक बोर्ड लगा दिया गया था। इस बोर्ड में में लिखा गया था कि मस्जिद दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट की है। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि ट्रस्ट कब बना? इसके सदस्य कौन हैं? मस्जिद किसने बनवाई? इसकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है? संचालन के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? इन सवालों का जवाब मस्जिद का दावा करने वालों के पास नहीं है।
नहीं तो बनेगा विशाल हनुमान मंदिर
उन्होंने कहा कि मस्जिद में भारी भीड़ जमा होने के कारण हिंदुओं के लिए खासकर महिलाओं के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। अक्षय ने जानकारी दी कि 18 अप्रैल को वे ‘दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट’ के बारे में पूछताछ करने के लिए सतारा बंदोबस्ती आयुक्त के कार्यालय (Endowment Commissioner’s office) गए थे। अधिकारियों ने तवारे को जानकारी दी कि इस तरह के किसी भी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है। पूरी जानकारी के लिए वक्फ बोर्ड की वेबसाइट खंगाली जा रही है।
अदालत के फैसले के बाद कार्रवाई न होने के बाद हिंदुवादी संगठनों ने सरकारी अधिकारियों को कई चिट्ठियाँ लिखीं। बावजूद इसके आजतक इस निर्माण को नहीं हटाया जा सका है। हिंदुवादी संगठनों ने अब चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध निर्माण को नहीं हटाया गया तो वे यहीं एक विशाल हनुमान मंदिर का निर्माण करवाएँगे।
दुबई से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट के एक पायलट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अपनी महिला मित्र को एंटरटेन करने के लिए कॉकपिट में बैठने की अनुमति दी। वह महिला पायलट के साथ कॉकपिट में एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठी रही। यह मामला इस साल 27 फरवरी का है। इसको लेकर केबिन क्रू के एक सदस्य ने शिकायत की थी। आरोपित पायलट के खिलाफ DGCA ने जाँच शुरू कर दी है और विमानन कंपनी ने पायलट को जाँच तक उड़ान भरने से रोक दिया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट पर आरोप लगाया है कि उसने कॉकपिट को लिविंग रूम जैसा बनाकर रख दिया था। उसने अपनी दोस्त को बिजनेस क्लास में खाना खिलवाया था। उसने उसके स्वागत के लिए केबिन क्रू को पहले से ही निर्देश दे दिया था।
क्रू मेंबर की शिकायत के अनुसार, पायलट ने केबिन क्रू से पूछा था कि क्या बिजनेस क्लास में सीटें खाली हैं? क्योंकि उसकी दोस्त इकोनॉमी क्लास में यात्रा कर रही थी। पायलट चाहता था कि उसे अपग्रेड किया जाए। क्रू मेंबर ने उसे बताया कि कोई सीट खाली नहीं है, तब पायलट ने कॉकपिट में ही अपनी दोस्त का आरामदायक बिस्तर लगवा दिया।
इसके बाद क्रू से वहाँ स्नैक्स और शराब का इंतजाम करने को कहा। मामले से जुड़े लोगों ने HT को बताया कि फ्लाइट क्रू को 3 मार्च के बाद पहली बार डीजीसीए ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को पेश होने के लिए समन भेजा है। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
We have taken serious note of the reported incident and investigations are underway in Air India. We have also reported the matter to the DGCA and are cooperating with their investigations. We have zero tolerance in aspects related to the safety and well-being of our passengers…
वहीं, इस मामले में एयर इंडिया ने कहा, “हमने शिकायत को गंभीरता से लिया है। इस मामले में AIR India भी जाँच कर रही है। इतना ही नहीं, हमने डीजीसीए को भी मामले की सूचना दी है और उनकी जाँच में सहयोग कर रहे हैं। हम अपने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर हुए खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। जाँच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
बता दें कि इससे पहले भी एयर इंडिया का विमान कुछ यात्रियों की ऊल-जुलूल हरकतों के कारण विवादों में रह चुका है। 10 अप्रैल 2023 को दिल्ली से लंदन जा रहे विमान को एक यात्री के हंगामे के चलते वापस लौटाना पड़ा था। आरोपित पर यात्रियों के साथ क्रू मेंबर से भी मारपीट का आरोप था। मारपीट में 2 लोगों को चोट भी आई थी।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन और प्रधान संपादक नूपुर जे शर्मा को तमिलनाडु पुलिस द्वारा दर्ज मामले में किसी भी कार्रवाई से 4 सप्ताह की सुरक्षा दी। खंडपीठ ने कहा कि उन पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द नहीं करेंगे, क्योंकि यह उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का मामला है।
नूपुर जे शर्मा और राहुल रौशन का प्रतिनिधित्व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और रवि शर्मा ने किया। धारा 32 के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के उनके अनुरोध को CJI चंद्रचूड़ ने अस्वीकार कर दिया। CJI ने तब याचिकाकर्ताओं को धारा 482 के तहत मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने एफआईआर रद्द करने के मामले की सुनवाई के अनुरोध को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनन यह उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट सीधे एफआईआर को रद्द कर दे। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से याचिकाकर्ता की रक्षा करेगा।
इसके अलावा, एडवोकेट जेठमलानी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि जरूरत पड़ने पर तमिलनाडु पुलिस को वीडियो कॉन्फ्रेंस पर पूछताछ करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि राहुल रौशन कोविड से पीड़ित हैं और नूपुर जे शर्मा का एक 6 साल का बच्चा है और वह यात्रा करने में असमर्थ हैं।
इस पर CJI ने कहा कि वह पहले ही याचिकाकर्ता को बलपूर्वक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान कर चुके हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में आगे कहा कि सीईओ को COVID है। पुलिस खुद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने से डरेगी। इसलिए, याचिकाकर्ताओं को चिंता नहीं करनी चाहिए।
एडिटर-इन-चीफ नूपुर शर्मा ने ट्विटर के जरिए अपने वकीलों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऑपइंडिया कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करेगा और सुनिश्चित करेगा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा इस दुर्भावनापूर्ण अभियोजन को विफल किया जाए।
I would like to profusely thank @JethmalaniM ji and @RaviSharmaTalks for representing us in this case, pro bono. Their faith, support and counsel give us the strength and courage to carry on without fear of such malicious prosecution.
अप्रैल में तमिलनाडु पुलिस ने ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के लिए नूपुर जे शर्मा और राहुल रौशन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस रिपोर्ट में दैनिक दैनिक भास्कर द्वारा तमिलनाडु में बिहारी प्रवासी श्रमिकों पर हमले के आरोपों को कवर किया गया था। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में भास्कर के आरोप, बिहार के मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) का बयान और तमिलनाडु पुलिस का बयान शामिल है।
DMK नेता और आईटी सेल के हिस्सा सूर्य प्रकाश की शिकायत के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-A, 501 और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
साल 2022 में युद्धग्रस्त यूक्रेन से अपने पालतू पैंथरों को छोड़कर जाने से मना करने वाले तेलुगु डॉक्टर गिरी कुमार पाटिल एक बार फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उन्हें एक नया पासपोर्ट दिलाने में मदद की जाए और उन्हें व उनके पालतू जानवरों को भारत लाया जाए।
दरअसल, पाटिल कुछ समय पहले पोलैंड शिफ्ट हुए थे। लेकिन वहाँ पोलैंड की राजधानी वारसॉ में उनका पासपोर्ट खो गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, डॉ गिरी कुमार पाटिल ने उन्हें पोलैंड से फोन करके बताया कि वो पोलैंड नौकरी की तलाश में गए थे। उन्होंने अपने दो बड़े बाघ- एक पैंथर और अमूर तेंदुआ यूक्रेन में केयरटेकर के पास छोड़ दिए थे और खुद पोलैंड में जाकर हॉस्टल में रहते थे। उनका कहना है कि वहाँ जाकर उनका पासपोर्ट खो गया।
इसके बाद उन्होंने पोलैंड में भारतीय दूतावास में संपर्क किया। जहाँ अधिकारियों ने उनसे कुछ दस्तावेज माँगे जिसे डॉक्टर ने फरवरी में जमा करवा दिया। मगर अब तक पासपोर्ट बनाने का काम चल ही रहा है। डॉ गिरी जब भी पासपोर्ट का ऑनलाइन स्टेटस देखते हैं पता चलता है अभी डॉक्यूमेंट्स का रिव्यू चल रहा है।
उन्होंने दिल्ली में अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने बताया, “मैंने दिल्ली में अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वो मुझे मेरा नया पासपोर्ट दिलाने में मदद करें ताकि मैं यूक्रेन जाकर अपने विशाल तेंदुओं की देखरेख कर पाऊँ। वह बहुत समय से बंदिश में हैं। अगर मुझे नया पासपोर्ट मिलता है तो यूक्रेन में मेरे घर से 30 किलोमीटर दूर एक जगह है जहाँ से मैं अपनी बिल्लियों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचा सकता हूँ।”
कुमार कहते हैं, “यूक्रेन में स्थिति बद्तर होती जा रही है। अगर युद्ध जारी रहता है तो मेरे पालतू जानवर बड़ी मुश्किल में पड़ जाएँगे।” उन्होंने कहा, “मेरी बहुत मदद हो जाएगी अगर भारत सरकार मुझे और मेरी बिल्लियों को भारत ले आए और उन्हें चिड़ियाघर में जगह दे दे। मैं तब उनसे मिल पाऊँगा और तसल्ली से भी रह पाऊँगा कि मेरे पालतू जानवर सुरक्षित हैं।”
बता दें कि साल 2022 में युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा अभियान चलाया था। हालाँकि उस समय जगुआर रखने वाले डॉक्टर ने अपने पालतू तेंदुओं को छोड़कर भारत आने से मना कर दिया था। बताया जाता है कि जानवरों से प्रेम के कारण उन्होंने बंगाल टाइगर या एशियाई बाघ को पालने की कोशिश की थी, लेकिन वहाँ के अधिकारियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने जगुआर पालने का लाइसेंस लेकर इन जंगली जानवरों को अपना पालतू बना लिया। उनका दावा था कि उनके पास मौजूद जगुआर की यह प्रजाति दुनिया की दुर्लभतम प्रजाति है और इनकी संख्या दुनिया भर में सिर्फ 21 है, जिनमें एक उनके पास है।
यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार से सवाल किया। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने प्रदेश में आप्रवासी बिहारी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की खबरों को फर्जी बताते हुए कश्यप पर कई केस दर्ज किए थे।
इस मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनसे सवाल पूछा, “मिस्टर सिब्बल, इसके लिए NSA क्यों? इस आदमी से इतना प्रतिशोध क्यों?”
दरअसल, मनीष कश्यप पर लगाए गए NSA को हटाने की माँग करते हुए उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि रासुका क्यों लगाया गया है।
Sibal : See what is he doing. He is making fake videos saying Biharis are getting attacked in Tamil Nadu. #SupremeCourt#TamilNadu
इस सिब्बल ने कहा कि वह फर्जी वीडियो बनाकर तमिलनाडु में बिहारियों पर हमले का झूठ फैला रहा था। सिब्बल ने कहा कि सोशल मीडिया पर उसके 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वह एक राजनेता है और चुनाव लड़ चुका है। मनीष कश्यप पत्रकार नहीं है।
मनीष कश्यप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि तमिलनाडु में कार्रवाई द्वेषपूर्ण है। उन्होंने पटना वाली प्राथमिकी के साथ ही तमिलनाडु में दर्ज सभी प्राथमिकी को जोड़ने की माँग की। हालाँकि, कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया।
वहीं, बिहार सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मनीष कश्यप आदतन अपराधी है। उसकी हरकतें सिर्फ वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं हैं। उसके खिलाफ गंभीर मामले भी हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 307 भी शामिल है। उन्होंने केसों को बिहार हस्तांतरित करने का भी विरोध किया।
इसके साथ ही दवे ने यह भी अनुरोध किया कि मनीष कश्यप को प्रोडक्शन वारंट पर तमिलनाडु के अन्य स्थानों पर नहीं ले जाया जाए। इस पर खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अगली पोस्टिंग तिथि (28 अप्रैल 2023) तक मनीष कश्यप को केंद्रीय कारागार मदुरै से स्थानांतरित नहीं किया जाए।
बता दें कि कथित फर्जी वीडियो के जरिए तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की खबरें दिखाने के लिए बिहार पुलिस ने कई मुदकमें दर्ज किए हैं। वहीं, तमिलनाडु में भी कई मुकदमें दर्ज हैं। दोनों राज्यों में कुल 5 मुकदमें दर्ज किए गए हैं।
सोशल मीडिया में ओडिशा की एक बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल है। इसमें 70 साल की सूर्या हरिजन को नंगे पैर एक सड़क पर चलते देखा जा सकता है। चिलचिलाती धूप में वह एक टूटी कुर्सी को सहारा बनाकर कई किलोमीटर पैदल चलती हैं। इसके बाद बैंक पहुँचकर अपना पेंशन प्राप्त करती हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंक को फटकार लगाई है।
वीडियो 17 अप्रैल 2023 का बताया जा रहा है। बुजुर्ग महिला नबरंगपुर जिले के झरीगन ब्लॉक के बनुआगुड़ा गाँव की रहने वाली हैं। वीडियो में उन्हें टूटी कुर्सी के सहारे नंगे पाँव सड़क पर पैदल चलते हुए देखा जा सकता है। उनके शरीर पर पूरे कपड़े भी नहीं हैं। उनके चेहरे से उनकी मजबूरी साफ़ झलक रही है।
#WATCH | A senior citizen, Surya Harijan walks many kilometers barefoot with the support of a broken chair to reach a bank to collect her pension in Odisha's Jharigaon
SBI manager Jharigaon branch says, "Her fingers are broken, so she is facing trouble withdrawing money. We'll… pic.twitter.com/Hf9exSd0F0
वायरल वीडियो देखने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को जमकर फटकारा। उन्होंने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा, “एसबीआई मैनेजर इस वीडियो को देख सकते हैं? इस पर जल्द से जल्द संज्ञान लें और मानवीयता का कार्य करें। क्या वहाँ कोई बैंक मित्र नहीं हैं?”
वित्त मंत्री के ट्वीट पर पर जवाब देते हुए एसबीआई ने कहा, “मैडम, इस वीडियो को देखकर हमें भी उतना ही दुख हुआ है। सूर्या हरिजन हर महीने अपने गाँव में स्थित CSP प्वाइंट से वृद्धावस्था पेंशन निकालती थीं। लेकिन अधिक उम्र होने के कारण अब सीएसपी प्वाइंट पर उनके फिंगर प्रिंट मैच नहीं कर रहे हैं। वह अपने रिश्तेदार के साथ हमारी झरिगाँव ब्रांच आईं थी। हमारी ब्रांच के मैनेजर ने तुरंत उनके अकाउंट में राशि का भुगतान किया और कहा कि अगले महीने से पेंशन उनके घर पर पहुँचाई जाएगी।”
1/3 Madam, we are equally pained to see this video. Smt Surya Harijan in the video used to withdraw her old age pension from the CSP point situated in her village every month. Due to old age, her finger prints were not matching at the CSP point.
बता दें कि सोशल मीडिया पर यूजर्स वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस तरह से ट्विटर पर एसबीआई को फटकारने और वृद्ध महिला के पक्ष में सामने आने के लिए सराहना कर रहे हैं।
अतीक अहमद की हत्या करने के बाद गिरफ्तार हुए तीन शूटर अब पुलिस की हिरासत में कई राज उगल रहे हैं। इसी पूछताछ में उन्होंने यह भी बताया है कि उनमें से एक शूटर कभी अतीक के बेटे द्वारा बनाए गए व्हॉट्सएप ग्रुप का हिस्सा हुआ करता था। इस ग्रुप का मकसद युवाओं को अतीक का वफादार बनने की ट्रेनिंग देना, अतीक के लिए काम करने के लिए उकसाना था।
बता दें कि 15 अप्रैल की रात अतीक अहमद को प्रयागराज में तीन शूटरों ने गोली मारी थी। इन तीनों के नाम लवलेश तिवारी, अरुण मौर्या और सनी सिंह हैं। पुलिस को इनसे पूछताछ में जानकारी मिली है कि अरुण मौर्या एक समय पर शेर-ए-अतीक व्हॉट्सएप ग्रुप का हिस्सा था। ये ग्रुप माफिया अतीक के बेटे असद ने खुद बनाया था।
One of the accused in #AtiqAhmed's murder, Arun Maurya was part of a WhatsApp group (Sher-e-Atiq) managed by Asad, Atiq's son.
कथिततौर पर यह ग्रुप अतीक के महिमामंडन के लिए बनाया गया था। इस ग्रुप में अतीक के वीडियो और तस्वीरें शेयर की जाती थीं ताकि माफिया का वर्चस्व कायम रह सके और लोगों को उसकी दहशत का पता चल सके। इस ग्रुप में साझा कंटेंट के कारण ही अरुण को अतीक की दहशत का मालूम चला था। कुछ समय बाद अरुण ने यह व्हॉट्सएप ग्रुप छोड़ दिया और गैंग 90 नाम के दूसरे ग्रुप से जुड़ गया। अब उससे जुड़ी जानकारी स्पेशन इन्वेस्टिगेशन टीम को लग गई है।
उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक-अशरफ की हत्या के बाद अरुण मौर्या समेत तीनों हत्यारों ने सरेंडर कर दिया था। जाँच अधिकारी लगातार इनसे पूछताछ कर रहे हैं। अभी तक यही पता चला है कि ये हत्या किसी के कहने पर नहीं हुई है। तीनों अतीक को मारकर अपना खौफ पैदा करना चाहते थे। हालाँकि इन्हें ये भी डर था कि कहीं पुलिस इन्हें न मार दे इसलिए हत्या के तुरंत बाद ये लोग सरेंडर-सरेंडर चिल्लाने लगे थे और पकड़े जाने के बाद लगातार अतीक को देख रहे थे कि वो मरा या नहीं।