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वकील बनकर आया हमलावर, महिला को चार गोली मारकर हुआ फरार: दिल्ली के साकेत कोर्ट में गवाही देने आई थी, पति पर हमले का शक

दिल्ली के साकेत कोर्ट (Saket Court, Delhi) में वकील की पोशाक में आए हमलावर ने एक महिला को गोली मार दी। रिपोर्ट के अनुसार, शख्स ने महिला को चार गोलियाँ मारीं। गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल महिला को दिल्ली पुलिस के एक एसएचओ ने एम्स (AIIMS) पहुँचाया। पुलिस हमलावर की तलाश में जुट गई है।

दक्षिण दिल्ली के डीसीपी चंदन चौधरी ने बताया कि महिला की पहचान 40 वर्षीय एम राधा के रूप में हुई है। जिस व्यक्ति ने उसे गोली मारी है, वह बार काउंसिल से निलंबित वकील है। हमलावर ने महिला और एक वकील राजेंद्र झा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) का मामला दर्ज कराया था, जिसकी सुनवाई आज शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को अदालत में थी।

रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर ने महिला को नजदीक से गोली मारी और फरार हो गया। कई रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि पीड़ित महिला हमलावर की पत्नी है। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस हमले में एक वकील को भी गोली लगी है। यह स्पष्ट नहीं है कि गोली राजेंद्र झा को ही लगी है या किसी दूसरे वकील को।

घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला के पेट में गोली लगी हुई मालूम पड़ रहा है। महिला दर्द से रो रही है। लोग उसे सांत्वना देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में महिला कोर्ट परिसर से पैदल ही बाहर ले जाती हुई देखी जा रही हैं। जिस वक्त महिला को गोली मारी गई, उस वक्त वह एक वकील के साथ थी।

कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच हमलावर हथियार लेकर अंदर घुस आया था। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आखिर वह हथियार लेकर परिसर में कैसे दाखिल हुआ। वैसे दिल्ली में इसके पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है।

22 अप्रैल 2022 को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में इसी तरह की फायरिंग की घटना सामने आई थी। इसमें 2 वकील जख्मी हो गए थे। उसके पहले सितंबर 2021 में रोहिणी कोर्ट में ही 2 बदमाशों ने जितेंद्र मान नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालाँकि, इस घटना के दौरान दोनों हमलावरों को भी ढेर कर दिया गया था।

13 साल के लड़के ने बच्चे से किया कुकर्म तो सबने माफ कर दिया, अब 2 साल की बहन से किया रेप: ग्रामीणों ने बताया- मोबाइल पर देखता रहता था अश्लील फिल्में

लखनऊ के मोहनलालगंज में दो साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित बच्ची का 13 साल का चचेरा भाई है। रिपोर्ट के अनुसार इस लड़के पर कुछ समय पहले एक बच्चे से कुकर्म का आरोप भी लगा था। लेकिन उस समय इसे माफ कर दिया गया था। अब किशोर को पकड़कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

2 साल की बच्ची से रेप की घटना बुधवार (19 अप्रैल 2023) की है। बच्ची के घरवालों को इसका पता अगले दिन गुरुवार को चला। बच्ची पेट दर्द और ब्लीडिंग के वजह से रो रही थी। जब घरवालों ने उससे रोने का कारण पूछा तो उसने कहा- भैया ने मारा है। बच्ची के पिता ने इस संबंध में दर्ज करवाई है।

शिकायत में बताया गया है कि बुधवार को बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। उसके साथ 13 साल का चचेरा भाई भी खेलने पहँचा। बच्ची के पिता उसकी माँ अपने 8 महीने के दूसरे बच्चे को लेका खेत में काम करने गए था। इस बीच चचेरा भाई बच्ची को लेकर अपने घर चला गया। पीड़ित पिता के अनुसार उस वक्त उसके भैया और भाभी भी घर पर नहीं थे।

मौका देखकर चचेरे भाई ने अपनी बहन के साथ दुष्कर्म किया। जब बच्ची के निजी अंग से खून बहने लगा तो उसने बच्ची को घर के पास छोड़ा और भाग गया। बच्ची दर्द से रो रही थी। जब बच्ची के माता-पिता घर पहुँचे तो उसके रोने का कारण पूछा। बच्ची ने बताया कि भैया ने मारा है। उस वक्त सभी उसे दुलार-पुचकार कर चुप कराने लगे।

अगली सुबह बच्ची फिर से रोने लगी उसके पेट में दर्द हो रहा था। बच्ची की माँ ने पाया कि उसके निजी अंगों में चोट है और खून बह रहा है। पिता जब बच्ची को लेकर अपने भाई के घर पहुँचे तो भाई और भतीजे ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद बच्ची के पिता ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामला दर्ज कर बच्ची को मेडिकल के लिए अस्पताल लेकर गई।

रिपोर्टों के मुताबिक 13 साल के इस लड़के पर पहले भी एक बच्चे के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था। उस वक्त ग्रामीणों ने डाँट-डपटकर मामला रफा-दफा कर दिया था। लोगों का कहना है कि लड़का अपने मोबाइल फोन में अश्लील फिल्में देखता रहता है।

सेना की जिस गाड़ी पर हुआ आतंकी हमला, वह रोजेदारों के इफ्तार के लिए सामान लेकर लौट रहा था: रिपोर्ट में दावा, JK में बलिदान हो गए थे 5 जवान

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के एक वाहन पर 20 अप्रैल 2023 को आतंकी हमला किया गया था। पूँछ जिले के राजौरी सेक्टर में हुए इस हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के पाँच जवान बलिदान हो गए थे। अब यह जानकारी सामने आई है कि वाहन में सवार जवान इफ्तार के लिए सामान लेकर लौट रहे थे। 20 अप्रैल की शाम राष्ट्रीय राइफल्स की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इसमें पंचों और सरपंचो समेत आसपास के गाँव के रोजेदारों को बुलाया गया था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने जानबूझकर उस गाड़ी को निशाना बनाया, जिसमें जवान इफ्तार पार्टी का सामान ला रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने संगयोट इलाके में स्थानीय लोगों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग स्थानों पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों को इफ्तार पार्टी के आयोजन की बात नागवार गुजरी और उन्होंने सेना के वाहन पर हमले की साजिश रची।

दरअसल आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के लोगों का सेना के साथ घुलना-मिलना पसंद नहीं आता। आतंकियों को लगता है कि यही लोग फिर उनकी मुखबिरी करते हैं। गुरुवार दोपहर को सेना का वाहन इफ्तार का सामान लेकर कैंप की तरफ लौट रहा था। उसी समय खराब मौसम का फायदा उठाकर आतंकियों ने वाहन को निशाना बनाया। पहले गोलियाँ चलाईं और फिर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद वाहन में आग लग गई।

हमले में आरआर के पाँच जवान हवलदार मनदीप सिंह, हरकिशन सिंह, लांसनायक कुलवंत सिंह, सिपाही सेवक सिंह और लांसनायक देबाशीष बसवाल बलिदान हो गए। एक जवान गंभीर रूप से घायल हैं। उनका उपचार सेना के अस्पताल में किया जा रहा है। हमले के बाद सुरक्षा बल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले की जाँच एनआईए ने भी शुरू कर दी है।

इस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली है। पीएएफएफ पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

अब तो एलन मस्क ने भी ट्विटर का ब्लू टिक छीन लिया, लेकिन गोदी सेठ का ठप्पा खुद से कब उतारेंगे रवीश कुमार

21 अप्रैल 2023 की सुबह हम जैसे काॅमन मैन की आँख खुली तो ट्विटर का ब्लू टिक (Twitter Blue Tick) छिन चुका था। लेकिन एलन मस्क ने ब्लू टिक छीनने में आम आदमी, सेलिब्रिटी, राजनेता टाइप वाला कोई भेदभाव नहीं किया। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार जैसे बाॅलीवुड दिग्गज हों या विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी जैसे नामचीन क्रिकेटर या फिर राहुल गाँधी, योगी आदित्यनाथ, अरविंद केजरीवाल जैसे भारतीय राजनीति के नाम, सबका ब्लू टिक गायब है। कुल मिलाकर अब अखिलेश यादव जैसे उन लोगों का ब्लू टिक ही बचा है जो इसके लिए मस्क को माल दे रहे हैं। ब्लू टिक रवीश कुमार का भी गया है। लेकिन रवीश कुमार ने अब भी गोदी सेठ का ठप्पा नहीं हटाया।

वैसे ब्लू टिक की पुरानी परिपाटी बदलने का ऐलान मस्क ने ट्विटर खरीदने के बाद ही कर दिया था। यह तय था कि जो भी इसके बदले भुगतान नहीं करेंगे उनका ब्लू टिक जाएगा। भारत में ऐसे लोगों का ब्लू टिक छिन जाने की तारीख 20 अप्रैल होगी यह जानकारी भी 12 अप्रैल 2023 को ही आ गई थी। कभी फ्री में ब्लू टिक के तौर पर ट्विटर पर मिलने वाला ‘स्टेट्स सिंबल’ अब आप खरीद सकते हैं। लेकिन रवीश कुमार का थेथरपना देखिए वे अब भी फ्री में गोदी सेठ का ठप्पा लगाए हुए ट्विटर पर विचरण कर रहे हैं।

ट्विटर पर आप पाएँगे कि रवीश कुमार यूजर नेम के तौर पर @ravishndtv का इस्तेमाल करते हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं वे यूट्यूबर बनने से पहले एनडीटीवी (NDTV) से जुड़े थे। यहाँ उन्होंने चिट्ठी छाँटने से लेकर प्राइम टाइम में वैचारिक उलटी करने का सफर तय किया था। लेकिन एनडीटीवी में अडानी की एंट्री के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। ‘गोदी सेठ’ नाम का शाब्दिक आडंबर रचकर माहौल भी बनाया था।

सोशल मीडिया में अपने संस्थान के नाम का इस्तेमाल करना सामान्य बात है। लेकिन नैतिक तौर पर अपेक्षा की जाती है कि जब कोई व्यक्ति खुद को संस्थान से अलग करेगा तो सार्वजनिक मंचों पर भी खुद को उस नाम से अलग कर लेगा। वह अपने आचरण से प्रदर्शित करेगा कि एक खास संस्थान के नाम से उसे जो लाभ प्राप्त हो रहा था, उसका अब वह अधिकारी नहीं है। रवीश कुमार के इस्तीफे के बाद भी इसी तरह की अपेक्षा की गई थी। लेकिन उन्होंने ट्विटर पर अपने यूजर नेम से एनडीटीवी को अलग नहीं किया।

इसकी एक वजह यह भी बताई गई थी कि यूजर नेम बदलने पर उनका फ्री का ब्लू टिक छिन सकता है। एलन मस्क ने खुद से ब्लू टिक छीनकर रवीश कुमार को इस बेड़ी से भी आजाद कर दिया है। लेकिन रवीश कुमार ने उस एनडीटीवी को अब तक खुद से जुदा नहीं किया है, जिसमें उनके गोदी सेठ की हिस्सेदारी है।

शायद रवीश कुमार को आभास है कि उनकी जो भी दुकानदारी है, वह इसी नाम के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। उन्होंने इस दुकान से प्रोपेगेंडा बेच बेचकर खुद को यूट्यूब पर अपनी दुकान खोलने के काबिल बनाया है। इसलिए इस बात की उम्मीद कम ही है कि वे इस ठप्पे से खुद को मुक्त करेंगे। वैसे भी रवीश कुमार की पत्रकारिता, सार्वजनिक मंचों पर उनका आचरण वैसा ही है, जैसे पड़ोसी के घर चिकन मुर्ग मुसल्लम देखकर कोई अपने पिता के शाकाहार को एक खास वर्ग के प्रति नफरत बताए। ऐसे व्यक्ति से नैतिकता की उम्मीद बेमानी है।

कनपटी पर तनी बंदूक देख अतीक अहमद ने पैंट में ही कर दिया था पेशाब, किस्सा तब का जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने माफिया को किया था गिरफ्तार

माफिया अतीक अहमद ने डर से एक बार पैंट में ही पेशाब कर दिया था। यह घटना 2008 की है। गिरफ्तार करने पहुँची पुलिस की तनी बंदूक देख माफिया की पैंट में ही पेशाब निकल गई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में करनाल सिंह ने यह किस्सा सुनाया है। वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डायरेक्टर रहे हैं। जब अतीक ने अपनी पैंट गीली की थी, तब वे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में संयुक्त आयुक्त थे।

2008 में दिल्ली स्पेशल ने पीतमपुरा से अतीक को गिरफ्तार किया था। इंटरव्यू में करनाल सिंह ने बताया कि जनवरी 2008 में वे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में थे। उस समय स्पेशल सेल ने उत्तर भारत के खतरनाक अपराधियों की लिस्ट बनाई थी। इसमें अतीक अहमद का भी नाम था। उस समय अतीक पर 1 लाख रुपए का इनाम था। अतीक को पकड़ने की जिम्मेदारी स्पेशल सेल को दी गई। इसके बाद स्पेशल सेल ने अतीक और उसके गुर्गों की कुंडली खँगाली। उनके हाथ अतीक के एक शूटर का फोन नंबर लग गया।

स्पेशल सेल के ऑफिसर्स ने शूटर के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया। फोन कॉल्स को सुनने के दौरान पता चला कि अतीक दिल्ली के पीतमपुरा स्थित अपने घर जाने वाला है। करनाल सिंह ने बताया कि स्पेशल सेल के ऑफिसर्स ने अतीक के पीतमपुरा वाले घर को चारों तरफ से घेर लिया और इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद अतीक बाहर निकला और अपनी कार में बैठ गया। इतने में ऑफिसर्स ने उसे घेर लिया। स्पेशल सेल के एक ऑफिसर ने अतीक के कनपट्टी पर बंदूक तान दी और उससे बाहर आने को कहा। करनाल सिंह के अनुसार अतीक बुरी तरह डर गया था और जब बाहर निकला उसकी पैंट गीली हो चुकी थी। इसके बाद अतीक को यूपी पुलिस के हवाले कर दिया गया था।

बता दें कि प्रयागराज के काॅल्विन हाॅस्पिटल के बाहर 15 अप्रैल की रात अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या की गई थी। मीडियाकर्मी बनकर आए लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह ने माफिया ब्रदर्स को कैमरों के सामने चंद सेकेंड के भीतर ही मार गिराया था। फिलहाल तीनों शूटर पुलिस रिमांड में हैं। उनसे हत्या के मकसद के लेकर पूछताछ की जा रही है। इस मामले में पाँच पुलिसकर्मी भी सस्पेंड किए गए हैं। हत्या से पहले अतीक से पत्रकारों ने असद के जनाजे में शामिल नहीं होने का कारण पूछा था। अतीक के जवाब देने के बाद अशरफ ने कहा था कि मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम… अशरफ की यह बात कभी पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि इसके बाद ही माफिया भाइयों की हत्या हो गई थी।

उससे पहले 13 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने झाँसी में अतीक के बेटे असद और उसके शूटर मोहम्मद गुलाम को मार गिराया था। उमेश पाल की हत्या में दोनों शामिल थे। इस मामले में अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन भी वांछित है। वह फिलहाल फरार है। उसकी और अतीक गैंग से जुड़े बमबाज गुड्डू मुस्लिम की पुलिस सरगर्मी से तलाश में जुटी है।

JK में सेना के वाहन में लगी आग आतंकी हमला, 5 जवान बलिदान: जैश के सहयोगी PAFF ने ली हमले की जिम्मेदारी

जम्मू-कश्मीर में पुंछ-जम्मू नेशनल हाइवे पर सेना की गाड़ी में लगी भीषण आग कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि आतंकी हमला था। इस हमले में सेना के पाँच जवान बलिदान हो गए हैं। वहीं, एक जवान घायल है, जिसका इलाज चल रहा है। सेना ने बताया कि हमला संभवत: ग्रेनेड से किया गया था, जिसके कारण गाड़ी में आग लग गई।

दरअसल, गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को दोपहर भारतीय सेना का एक वाहन राजौरी सेक्टर में भीमबेर गली और पुंछ के बीच से गुजर रहा था। इसी दौरान अज्ञात आतंकवादियों ने गोलीबारी की। सेना ने कहा, “आतंकवादियों द्वारा ग्रेनेड के संभावित उपयोग के कारण वाहन में आग लग गई।”

जिन जवानों की मौत हुई है, वे सभी राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के थे। वे काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन के लिए तैनात किए गए थे। हमले के बाद सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। बताया जा रहा है कि हमला करने वाले आतंकियों की संख्या चार थी।

दरअसल इस इलाके में पहले भी आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आतंकी ग्रुप ने भारी बारिश का फायदा उठाकर गश्त पर निकले इस वाहन पर हमला कर दिया। इस हमले में वाहन आग की चपेट में आ गया और सेना के जवान अपनी जान गँवा बैठे।

उधर, इस हमले की ज‍िम्‍मेदारी आतंकवादी संगठन पीपुल्स एंटी-फ़ासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली है। PAFF पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) द्वारा समर्थित आतंकी संगठन है। वह पहले भी कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है।

यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे से घटना की जानकारी ली। जनरल पांडे ने आतंकवादी हमले और पाँच सैनिकों की मौत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना जमीनी स्थिति पर नजर रख रही है और उचित कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश को देखते हुए वाहन पर बिजली गिरने की आशंका जताई जा रही थी। कहा जा रहा था कि हो सकता है कि बिजली गिरने के कारण वाहन में आग लग गई हो। हालाँकि, यह आशंका अब जाकर दूर हुई है और वास्तविक स्थिति का पता चला है।

’15 साल के हाफिज मुर्तजा को मारकर हिंदुओं ने पेड़ से टाँग दिया’: महाराष्ट्र के बीड में मुस्लिम लड़के की मौत पर कट्टरपंथी फैला रहे झूठ, जानिए सच

महाराष्ट्र के बीड जिले के मजलगाँव तालुका के एक गाँव में 15 साल के मुस्लिम लड़के की फंदे से लटकती लाश मिलने के बाद इलाके में हंगामा हो गया। कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर फैलाया कि इसके पीछे हिंदू संगठनों का हाथ है। हालाँकि पुलिस ने जब मामले की जाँच की तो सच कुछ और निकला।

देख सकते हैं कि कैसे जामिया टाइम्स के अहमद खबीर ने ट्वीट किया, “15 साल के हाफिज मुर्तज़ा शेख अपनी बहन के साथ जलाने के लिए लकड़ी लाने गया था। तभी हिंदुत्व समूह ने उसे घेर लिया और उसे पीटना शुरू कर दिया। बहन मदद के लिए घर की ओर दौड़ी, जब लौटी तो देखा कि भाई का शव पेड़ पर लटका हुआ है।”

इसी तरह प्रोपेगेंडाबाज अशोक स्वैन ने भी इस घटना के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया।

हालाँकि पुलिस ने इस केस की जाँच में पाया कि घटना के पीछे कोई कम्युनल एंगल नहीं है।

खबरों के मुताबिक, मृतक गुलाम मोहम्मद हाफिज मुर्तजा शेख कुछ लकड़ियाँ लेने गया था। वह कैलाश दके के खेत में घुस रहा था कि तभी उसे कैलाश दके और महादेव दके ने पकड़ लिया। मृतक के अब्बा का आरोप है कि कैलाश और महादेव के साथ एक हनुमंत वानखेड़े नाम के युवक ने भी गुलाम को पीटा।

रिपोर्ट में गुलाम के अब्बा की शिकायत के हवाले से कहा जा रहा है कि कैसे गुलाम ने अपनी बहन को वहाँ से भागने को कहा। मगर जब वापस लौटी तो केवल उसकी लाश मिली। मुर्तजा शेख ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने इन तीनों को अपने खुद पेड़ से लटकाते देखा।

पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि कैलाश दके और गुलाम का कुछ समय पहले झगड़ा हुआ था। गुलाम हमेशा दके के खेत से होकर गुजरता था। मृतक के अब्बा के मुताबिक उनके बेटे को दके ने धमकी भी दी थी कि अगर अगली बार वो खेत के पास दिखा तो उसे मार डालेंगे।

इस संबंध में केस को मजलगाँव ग्रामीण पुलिस थाने में दर्ज करवाया गया है। मिड डे रिपोर्ट के अनुसार, ये मामला पहले आत्महत्या का लग रहा था क्योंकि शरीर पर कहीं भी कोई चोट का निशान नहीं था जिससे लगे कि गुलाम और अन्य तीन लड़कों में कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ।

एसीपी पुलिस इंस्पेक्टर अन्नाराओ खोडेवाड ने कहा, “हमने हत्या के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें 2 दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया है।”

प्रारंभिक जाँच की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले पीड़ित की गाय आरोपित के खेत में घुस जाने और फसल खाने को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था। झगड़े के बाद दोनों परिवार के बुजुर्गों ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और कोई शिकायत पुलिस में नहीं दी गई थी।”

मजलगाँव डिविजन के एएसपी बी धीरज कुमार ने भी इस मामले पर कहा कि ये लड़के की मौत पर लटकने से हुई है। अंतिम निर्णय अभी लिया गया है। ये मामला दो परिवारों और युवाओं के बीच हुए झगड़े का है। एसपी नंद कुमार ठाकुर ने कहा, “पुलिस इस मामले में अफवाह फैलाने वालों और इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।”

क्या शादी के लिए अलग-अलग लिंग का होना जरूरी है: CJI चंद्रचूड़ का सवाल, सुप्रीम कोर्ट में लगातार तीसरे दिन ‘समलैंगिक विवाह’ पर बहस

समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) की मान्यता वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को तीसरे दिन भी सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि क्या विवाह के लिए पति-पत्नी का दो अलग-अलग लिंगों से होना जरूरी है। 

CJI ने समलैंगिक विवाह के मामले की तेजी से सुनवाई को आवश्यक मानते हुए कहा कि सोमवार (24 अप्रैल 2023) से संवैधानिक पीठ बैठेगी। दरअसल, संविधान पीठ सोमवार और शुक्रवार को नहीं बैठती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि अयोध्या मामले में भी संविधान पूरे हफ्ते 5 जजों की बेंच बैठती थी।

बता दें कि इस बेंच में CJI चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एसआर भट्ट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। यह पीठ समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की माँग करने वाली 20 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “हम इन (समलैंगिक विवाह) संबंधों को एक बार का रिश्ता नहीं, बल्कि हमेशा के लिए रिश्तों के रूप में देखते हैं। यह ना सिर्फ शारीरिक, बल्कि भावनात्मक मिलन भी है। हमें विवाह की अवधारणा को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसके लिए पति-पत्नी के अलग लिंग का होना क्या जरूरी है।”

इस मामले में NCPCR ने बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास का हवाला देते हुए समलैंगिक विवाह में बंधने वाले जोड़ों द्वारा बच्चा गोद देने का विरोध किया। इस पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर कोई पिता शराब पीकर अपनी पत्नी से मारपीट करता है तो क्या बच्चों पर इसका असर नहीं पड़ता?

इस दौरान चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने ड्राइवर की बेटी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश में लोग अब ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं। CJI ने कहा, “मेरे ड्राइवर की एक बेटी है और वह उससे खुश है। वह दूसरा बच्चा नहीं चाहता है। लड़का चाहने की धारणा भी अब धीरे-धीरे दूर हो रही है, क्योंकि लोग अब शिक्षित हो गए हैं।”

सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ताओं से अपनी बहस पूरी करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इतना लंबा जिरह करने की जरूरत नहीं है। हालाँकि, याचिकाकर्ता पक्ष की जिरह खत्म न हो पाने के चलते सोमवार को भी उन्हें मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद सरकार और इसका विरोध कर रहे संगठन अगले गुरुवार तक अपनी बात पूरी करें।

इस दौरान चीफ जस्टिस ने सोशल मीडिया में जजों की आलोचना पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि समलैंगिक शादी पर जजों की टिप्पणियों को लेकर उन्हें सोशल मीडिया में ‘ट्रोल’ किया जा रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

दरअसल, सोशल मीडिया पर सबसे अधिक आलोचना मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की उनकी एक टिप्पणी को लेकर हो रही है। दरअसल, CJI ने कहा था कि पूरी तरह पुरुष या पूरी तरह स्त्री होने की कोई अवधारणा नहीं है। सिर्फ लिंग या जननांग के आधार पर इसे तय नहीं किया जा सकता। यह इससे जटिल विषय है।

इस दौरान जस्टिस भट्ट ने कहा कि समलैंगिक विवाह एक प्रवेश द्वार है। यह बहुत सारी संभावनाएँ खोलता है। इतने सारे अधिकार, जिनका आप आनंद ले सकते हैं, जिनका आप हिस्सा हो सकते हैं।

बताते चलें कि केंद्र सरकार समलैंगिक विवाह का विरोध कर रही है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए इसे ‘अर्बन एलिटिस्ट कॉन्सेप्ट’ (शहरों में रहने वाले अभिजात वर्गों की अवधारणा) बताया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दूसरे दिन यानी बुधवार (19 अप्रैल 2023) को कहा था कि इसे एलिट कॉन्सेप्ट बताने के लिए सरकार के पास कोई डेटा नहीं है।

CJI ने कहा था कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले अधिक लोग अपनी यौन पहचान को लेकर मुखर हो रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ये माँगे संभ्रांत शहरी लोगों तक ही सीमित है। इसे साबित करने के लिए सरकार के पास कोई डेटा है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की माँग की है।

समलैंगिक विवाह पर पहले दिन सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से प्रस्तुुत एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि केस पर सरकार अपनी आरंभिक आपत्तियाँ बताना चाहती है। इन आपत्तियों को पहले सुना जाना चाहिए, इसके बाद याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए।

इसके बाद CJI चंद्रचूड़ ने कहा था, “मैं कोर्ट का इंचार्ज हूँ। यह फैसला मैं करूँगा। पहले याचिकाकर्ता को सुना जाएगा। इस अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी यह बताने की अनुमति मैं किसी को नहीं दूँगा।”

अमर्त्य सेन को बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी का अल्टीमेटम, कहा- 15 दिन में कब्जाई जमीन खाली करो, नहीं तो लेंगे एक्शन

बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने नोबेल पुरस्कार विजेता और वामपंथी बुद्धिजीवी अमर्त्य सेन को 13 डेसिमल जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। यूनिवर्सिटी ने प्रस्ताव पारित करने के बाद अपने आदेश में कहा कि अगर अमर्त्य सेन ने दिए गए समय में जमीन को खाली नहीं किया तो फिर बल का प्रयोग किया जाए।

बताया जा रहा है कि अमर्त्य सेन ने यह जमीन अवैध रूप से कब्जाई हुई है। उन्हें इसे खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यानी 19 अप्रैल के ऑर्डर के मुताबिक 6 मई तक सेन को जमीन खाली करनी है। ये जमीन अनुसूचित परिसर के उत्तर-पश्चिमी कोने में 50 फुट लंबी और 111 फुट चौड़ी है।

इसे खाली कराने के लिए विश्वविद्यालय ने अमर्त्य सेन को 17 मार्च और 13 अप्रैल को नोटिस जारी किया था। लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया इसलिए अब सीधे उनकी ओर से जमीन खाली कराने का आदेश दिया गया है।

भारत सरकार की सलाह और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, एक सदी पुराने केंद्रीय संस्थान के अतिक्रमणों पर नियंत्रण पाने और मंत्रालय को रिपोर्ट जमा कराने की जरूरत है। नोटिस में कहा गया, “अमर्त्य सेन और सभी संबंधित लोगों को उक्त परिसर से यदि आवश्यक हो तो बल का प्रयोग करके बेदखल किया जाए।”

इस संबंध में अमर्त्य सेन की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वह अमेरिका में रहते हैं। 1.38 एकड़ की इस जमीन के एक हिस्से पर सेन का पैतृक आवास बना है। सेन इस जमीन को लेकर कहते आए हैं कि ये जमीन उनके पिता ने खरीदी थी और उनके पास इसके दस्तावेज भी हैं

बता दें कि यूनिवर्सिटी ने इस मामले पर कहा हुआ है कि भारत और बंगाल की सरकार की ओर से कई बार इस संबंध में आदेश जारी किए हैं कि विश्व भारती की जमीन पर अवैध कब्जे को खाली किया जाए जिस पर सेन ने केंद्र पर निशाना भी साधा था। उन्होंने जमीन खाली करने की जगह कहा था कि प्रदेश में केंद्र सरकार का नियंत्रण लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कुलपति को उन पर कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से निर्देश मिला है। 

लॉन्च होते ही दुनिया के सबसे बड़े राॅकेट में विस्फोट: मंगल ग्रह पर स्टारशिप से ही इंसान को ले जाएँगे एलन मस्क, स्पेसएक्स ने कहा- ऐसे ही हम सीखते हैं

स्पेसएक्स के स्टारशिप (Starship) रॉकेट की लाॅन्चिंग गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को असफल रही। यह दुनिया का सबसे विशाल और ताकतवर राॅकेट है। लाॅन्चिंग के कुछ मिनट बाद ही विस्फोट हो गया और राॅकेट आसमान में टुकड़ों में बँट गया। राॅकेट अपने लाॅन्चिंग प्लेटफाॅर्म से तो उड़ान भरने में कामयाब रहा। लेकिन ऊँचाई पर जाने के बाद बूस्टर से अलग नहीं हो पाया। स्पेसएक्स (SpaceX) ने कहा है कि इस तरह के अनुभवों से ही सीख मिलती है। साथ ही भविष्य की लाॅन्चिंग में इस अनुभव से मदद मिलने की बात कही है।

स्टारशिप को भारतीय समयानुसार शाम के करीब सात बजे अमेरिका के टेक्सास स्थित के बोका चिका स्टारबेस से लॉन्च किया गया। करीब 33 किलोमीटर की ऊँचाई पर जाकर मानव रहित राॅकेट में विस्फोट हो गया। इसकी वजह जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। यह स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट था। इससे पहले 17 अप्रैल को तकनीकी वजहों से इसकी लाॅन्चिंग नहीं हो पाई थी। रॉकेट स्पेशएक्स की लंबाई करीब 394 फीट और इसका व्यास 29.5 फीट है।

स्पेसएक्स ने इस लाॅन्चिंग से जुड़ी टीम को बधाई देते हुए कहा है कि ऐसे ही अनुभवों से हम सीखते हैं। यह रोमांचकारी था। आज का परीक्षण हमें भविष्य के लिए तैयार करेगा। अगले टेस्ट को लेकर टीम डाटा जमा और रिव्यू कर रही है। स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने भी ट्वीट कर कहा है कि इससे अगले कुछ महीनों में होने वाली अगली लाॅन्चिंग के लिए काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

स्टारशिप की लाॅन्चिंग इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसकी सफलता इंसानों को इंटरप्लेनेटरी बना सकती है। इसका मोटे शब्दों में अर्थ यह हुआ कि इसकी मदद से इंसान के लिए पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर कदम रखना आसान हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि मस्क की योजना साल 2029 तक इंसानों को मंगल ग्रह पर ले जाकर कॉलोनी बसाने की है।