Home Blog Page 1866

‘बदनसीब औरत, अल्लाह तुझे जहन्नुम की आग में जलाएगा, थू’: ईद पर उर्फी जावेद को पानी में एन्जॉय करते देख भड़के मुस्लिम, कहा – तौबा, ईद के दिन तो कपड़े पहन लेती

टीवी अभिनेत्री और मॉडल उर्फी जावेद ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से नई तस्वीरें शेयर की हैं। तस्वीरें को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उर्फी अपने दोस्तों के साथ गर्मियों की छुट्टियाँ मना रही हैं। ईद के दिन पोस्ट किए गए उर्फी की बोल्ड तस्वीरों को देखकर इस्लामवादी भड़क गए। उर्फी को बिकनी में देखकर उन्हें खूब कोसा जा रहा है।

इंस्टाग्राम पर उर्फी ने एक साथ कई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। जिसमें उर्फी किसी स्विमिंग पूल में दोस्तों के साथ नजर आ रही हैं। कुछ तस्वीरों में उर्फी बिकिनी पहन कर पोज देती हुई नजर आ रही हैं। उनकी ये तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं लेकिन कुछ लोग उनके पोस्ट पर कमेंट कर निशाना भी साध रहे हैं। उर्फी को ‘बदनसीब’ कहते हुए मोहम्मद इमरान नाम के यूजर ने लिखा कि तुझे तो ईद भी नसीब नहीं है बदनसीब औरत।

उर्फी जावेद ने इंस्टाग्राम पर अपलोड की तस्वीरें

असरार खान नाम के यूजर ने लिखा कि इनमें से एक भी मुस्लिम नहीं है, यदि कोई मुस्लिम होता तो आज के दिन इस तरह की तस्वीरें पोस्ट नहीं की जाती।

उर्फी पर मुस्लिम लड़कियों ने भी खूब निशाना साधा। असरा नाम की यूजर ने लिखा, “ईद वाले दिन भी ये सब…बेशरम हो? तुम जैसों को क्या खुशी ईद की जब रमजान में भी तुम न सुधर पाई।”

मेहविश कासिम नाम की यूजर ने लिखा, “इंसान होने के नाते तुम्हें शर्म आनी चाहिए। ईद वाले दिन तो कपड़े पहन लेती।” नेहा अंसारी ने लिखा, “हद कर दी तूने घटिया लड़की। छी.. तौबा…थू-थू…। आज ईद है और आज के दिन भी? तुम कितनी घटिया हो यार। अल्लाह तूझे जहन्नम के आग में जलाएँगे। थू… है।

उर्फी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इस तरह पोस्ट में यूजर्स ने कमेंट कर उन्हें ईद की याद दिलाई। बता दें उर्फी अपने अतरंगी कपड़ों और बोल्ड लूक्स की वजह से अक्सर ट्रोलर्स के निशाने पर रहती हैं। उर्फी ने कई मशहूर धारावाहिकों जैसे ये रिश्ता क्या कहलाता है, बेपनाह, भैया की दुल्हनिया, मेरी दुर्गा और बिग बॉस ओटीटी में नजर आ चुकी हैं।

‘सत्ता में लौटते ही कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण बहाल करेगी कॉन्ग्रेस’: पूर्व CM सिद्धारमैया का खुला ऐलान, BJP ने खत्म कर दिया था

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने कहा है कि यदि उनकी सरकार राज्य की सत्ता में वापसी करती है तो मुस्लिमों के लिए 4 प्रतिशत का कोटा फिर से बहाल कर दिया जाएगा। पिछले महीने ही बोम्मई सरकार ने राज्य में 4 प्रतिशत आरक्षण को खत्म कर दिया था। सिद्धारमैया ने टीपू जयंती बहाल करने को लेकर कहा है कि इस पर विधायकों और मंत्रिमंडल के साथ बैठक के बाद सलाह लिया जाएगा।

सिद्धारमैया ने इंडिया टुडे के राउंड टेबल कार्यक्रम में शिरकत करते हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में जीत का दावा किया। वे पत्रकार राजदीप सरदेसाई के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उनसे राज्य में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने को लेकर सवाल किया गया। जवाब देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि यदि राज्य में कॉन्ग्रेंस की सरकार बनती है तो बीजेपी द्वारा खत्म किए गए मुस्लिम आरक्षण को फिर से लागू कर दिया जाएगा। सिद्धारमैया ने कहा कि हम लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था करेंगे।

बता दें कि मार्च 2023 में कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को खत्म कर दिया था। सरकार ने वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में 2-2 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। बीजेपी सरकार ने मुस्लिमों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी के तहत मिलने वाले आरक्षण श्रेणी में शामिल कर दिया था। इसके तहत आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होता है। सीएम बोम्मई ने कहा था कि मुस्लिमों को 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

इसी कार्यक्रम में शिरकत करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने असंवैधानिक रूप से राज्य में चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को लागू किया था। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए कॉन्ग्रेस संविधान के खिलाफ चली गई थी। इसे भाजपा सरकार ने खत्म कर अन्य समुदायों का आरक्षण बढ़ाया।

जोरदार आवाज, फिर उठा सफेद धुँआ: बिहार के नालंदा में ग्रामीणों में बम ब्लास्ट की चर्चा, पुलिस-प्रशासन ने कहा – प्रथम दृष्टया विस्फोट नहीं, घटनास्थल पर थे खून के छींटे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जनपद नालंदा में एक बार फिर से विस्फोट की खबर है। हालाँकि यह विस्फोट किस किस्म का है इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। जाँच टीम मौके पर पहुँच कर सैम्पल जमा कर रही है। घटना में किसी के घायल या हताहत होने की कोई खबर नहीं है। घटना शनिवार (22 अप्रैल 20,23) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बिहार शरीफ के पहाड़पुरा गाँव का है। यहाँ शनिवार को अचानक ग्रामीणों ने तेज आवाज सुनने का दावा किया। आवाज एक घर से आई थी। खुद को प्रत्यक्षदर्शी बता रहे राम प्रवेश कुमार का कहना है कि उन्होंने धुँआ देखा और जोरदार आवाज सुनी। जानकारी के मुताबिक, ब्लास्ट 1 बार हुआ था। दावा किया गया है कि ब्लास्ट में एक व्यक्ति का हाथ क्षतिग्रस्त हो गया है जिसके चलते घटनास्थल पर खून के छींटे भी देखे गए हैं। बाद में आस-पास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

मामले की जानकारी होते ही नालंदा के DM और SP घटना स्थल पर पहुँचे। जिलाधिकारी शुभंकर ने बताया कि CCTV फुटेज व मौके पर मिले अन्य प्रमाणों की जाँच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला ब्लास्ट का नहीं लग रहा है। उनका कहना है कि जिस घर की घटना बताई जा रही है, वहाँ ऐसा कोई नुकसान नहीं हुआ है जो ब्लास्ट से दिखे। CCTV में धुआँ देखे जाने की बात स्वीकारते हुए DM नालंदा ने कहा कि मौके पर FSL टीम को बुलाया गया है जिसकी जाँच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं घटनास्थल पर पहुँचे SP नालंदा ने कहा कि घटना स्थल पर खून के छींटे मिले हैं और 2 लोग घायल हुए हैं जो फिलहाल अस्पताल में नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों घायलों को ट्रेस करने के बाद उनसे घटना की असल वजह सामने आएगी। SP ने CCTV फुटेज के आधार पर सफेद धुआँ निकलने की बात स्वीकारी। गौरतलब है कि साल 2023 में रामनवमी जुलूस के दौरान नालंदा में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। आरोप था कि शोभा यात्रा मस्जिद के आगे से निकलते ही हमलावरों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। इस मामले में बिहार पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की है।

खुद ही समर्थकों सहित पहुँच गए थाने, फैला दी गिरफ़्तारी की अफवाह: सत्यपाल मलिक पर AAP के संजय सिंह एन्ड गिरोह ने की झूठ की खेती

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अब सोशल मीडिया पर उनकी गिरफ्तारी की अफवाह फैलाई जा रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सत्यपाल मलिक खुद थाना आए। वह यहाँ से जाने के लिए वह स्वतंत्र हैं।

दरअसल, सत्यपाल मलिक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, उन्होंने कहा है, “आज खापों के लोग एकजुटता दिखाने के लिए आए थे। मेरे घर पर इतनी जगह नहीं है। इसलिए, एक पार्क में खाने का इंतजाम किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह गैर-कानूनी है। यहाँ यह सब नहीं हो सकता। इसके बाद मैंने कहा कि हमें ले चलो। हम थाने आ गए। हमारे कई ग्रुप हैं जिन्हें इन लोगों ने कई थानों में बंद किया है।”

यही नहीं, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने भी ट्वीट कर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि सत्यपाल मलिक ने खापों के प्रधान और जन प्रतिनिधियों का एक कार्यक्रम आयोजित किया था, लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती कर कार्यक्रम बंद करा दिया। यही नहीं, गुरुनाम सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के साथ ही सत्यपाल मलिक समेत खाप के कई नेताओं की गिरफ्तारी की बात कही थी।

सत्यपाल मलिक और गुरुनाम सिंह चढूनी के वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा सत्यपाल मलिक की गिरफ्तारी और उन्हें हिरासत में लिए जाने की बातें कही जाने लगीं। AAP नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर दावा किया, “चार राज्यों के राज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक जी को गिरफ्तार कर लिया गया। इनका जुर्म ये है की इन्होंने बताया मोदी ने इनके पास दलाल भेजा था। पूँजीपतियों के साथ मिलकर मोदी और BJP भ्रष्टाचार करती है।”

वहीं, ‘डीयू जाट स्टूडेंट्स यूनियन’ ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो के अंत में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि सत्यपाल मलिक को सीबीआई जाँच के लिए आरके पुरम थाने लाया गया। इसलिए, अब उनके समर्थक थाने के बाहर जुट रहे हैं।

एक यूजर ने ट्वीट कर दावा किया, “सत्यपाल मलिक जी को गिरफ्तार किया गया। लेकिन पुलवामा हमले की जाँच बिना देश चुप नहीं बैठेगा। मलिक से भी पूछताछ करो पर पुलवामा की जाँच भी शुरू करो राजा जी।”

हिम्मत सिंह गुर्जर नामक यूजर ने लिखा, “सारी हद पार कर दी बीजेपी ने। दिल्ली पुलिस ने पूर्व गवर्नर श्री सत्यपाल मलिक के साथ खाप नेता ईश्वर नैन सहित अन्य लोगों को हिरासत में लिया। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक व अन्य को आर के पुरम से हिरासत में लिया गया।”

क्या बोली दिल्ली पुलिस

इस पूरे मामले में दक्षिण पश्चिम पुलिस उपायुक्त मनोज सी का कहना है कि सत्यपाल मलिक अपने समर्थकों के साथ अपनी इच्छा से आरके पुरम थाने में आए थे। उन्हें कहा गया है कि वह जा सकते हैं। वहीं, हिंदुस्तान ने एक अन्य अधिकारी के हवाले से कहा है कि आरके पुरम के एक एमसीडी पार्क में एक कार्यक्रम होना था। सत्यपाल मलिक को कहा गया कि पार्क कार्यक्रम या बैठक के लिए नहीं है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से अनुमति भी नहीं ली थी।

इसके बाद सत्यपाल मलिक और उनके समर्थक वहाँ से चले गए। लेकिन, बाद में मलिक खुद थाने पहुँच गए। उन्हें किसी ने बुलाया नहीं।

दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर भी गिरफ्तारी को अफवाह करार दिया। ट्वीट में लिखा गया, “पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक को हिरासत में लिए जाने के संबंध में सोशल मीडिया हैंडल पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। वह खुद अपने समर्थकों के साथ पीएस आरके पुरम पहुँचे हैं। उन्हें कहा गया है कि वह अपनी इच्छा से जाने के लिए स्वतंत्र हैं।”

सेकुलर नहीं, अच्छा हिंदू बनिए, उनको उनकी ईद के साथ छोड़ दीजिए, क्योंकि फूलों की यही बारिश कल पत्थर बन बरसेंगे

दिवंगत सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक भाषणों में से एक जून 1996 को लोकसभा में दिया गया था। इसमें उन्होंने बताया था कि कैसे तथाकथित सेकुलरों का सेकुलरिज्म हिंदुओं को गाली देने से शुरू होता है। कैसे हिंदू और राष्ट्र हित की बात करने वालों को साम्प्रदायिक घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अच्छा हिंदू वह होता है जो अपने धर्मों का अनुसरण करते हुए दूसरों के मजहब का सम्मान करे। यही परिभाषा उन्होंने एक अच्छे मुस्लिम, सिख और ईसाई के लिए भी बताई थी। सही मायनों में यही सेकुलरिज्म है।

लेकिन, हमने सेकुलरिज्म की जो परिभाषा गढ़ रखी है या हम पर जो थोप दी गई है, वह मुस्लिम तुष्टिकरण से शुरू होकर मुस्लिम तुष्टिकरण पर ही खत्म हो जाती है। इस सेकुलरिज्म में हिंदू भावनाओं की, उनके त्योहारों की कोई जगह नहीं है। इस सेकुलरिज्म में ईद के दिन नमाजियों पर फूल बरसाना भाईचारा होता है। लेकिन ‘मुस्लिम काॅलोनी’ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकालना उन्मादी हिंदू हो जाना होता है।

आप कहेंगे कि इतने ज्ञानी तो आप भी हैं, फिर मैं क्यों ज्ञान दे रहा हूँ। इसकी वजह उत्तर प्रदेश से आया वह वीडियो है, जिसमें बाराबंकी के पीरबटावन स्थित ईदगाह से ईद की नमाज पढ़कर निकले नमाजियों पर हिंदू फूलों की बारिश करते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया के तमाम प्लेटाफाॅर्मों से लेकर व्हाट्सएप पर आए वे संदेश हैं जो ईद की बधाइयाँ बाँट रहे हैं। ऐसा करने की भारत जैसे ‘धर्मनिरपेक्ष देश’ के प्रधानमंत्री या प्रधान सेवक की मजबूरी समझी जा सकती है। सियासी मजबूरी उनकी भी समझी जा सकती जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति करते हैं। लेकिन आम हिंदुओं की वह कौन सी मजबूरी है जो उन्हें कथित भाईचारे की मिसाल बनने को इतना उद्वेलित करती है? पॉलिटिकली करेक्ट दिखने की चूल मचा देती है?

इसका कारण हम पर थोप दी गई वह ‘सोच’ लगती है, जिसको सुषमा स्वराज ने अपने उस ऐतिहासिक भाषण में बेनकाब किया था। उन्होंने बताया था कि सिखों का नरसंहार करने वाले, राम भक्तों पर गोली चलाने वाले, हिंदू शरणार्थियों को भगाने वाले, मुस्लिम घुसपैठियों को बसाने वाले इस देश में खुद को ‘सेकुलर’ कहते हैं। लेकिन, जैसे ही कोई हिंदुओं की बात करता दिखता है, उसे ‘साम्प्रदायिक’ घोषित कर दिया जाता है। इस थोपी गई सेकुलरिज्म को चुनौती देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा था, “हम साम्प्रदायिक हैं, हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हम वंदे मातरम् गाने की वकालत करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि धारा 370 को समाप्त करने की माँग करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिन्दुस्तान में गोरक्षा और उसके वंश और वर्धन की बात करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिंदुस्तान में समान नागरिक संहिता बनाने की माँग करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि कश्मीरी शरणार्थियों के दर्द को जुबान देने का काम करते हैं।”

सेकुलरिज्म की थोपी गई परिभाषा को विस्तार देने की नीयत से ही सोनिया गाँधी वह कानून ला रही थीं, जिसमें दंगा होने पर हिंदू ही जिम्मेदार माना जाता। इसी परिभाषा को आज ‘मुस्लिम काॅलोनी’ के नाम पर विस्तार दिया जा रहा है। मजहबी आतंकियों को ‘पीड़ित/भटका हुआ’ बताना इसी परिभाषा के तहत चली आ रही पुरानी परिपाटी है जो अब ‘मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी’ तक पहुँच चुकी है। यही सेकुलरिज्म माफिया-आतंकी अतीक अहमद में अखिलेश यादव, मायावती, काॅन्ग्रेस, ओवैसी जैसों को मजहब देखने की ताकत देता है। इसी सेकुलरिज्म की उपज इफ्तार के नाम पर वह जलसा है जो हिंदू त्योहारों पर हमलों के बाद भी होता है। इसी सेकुलरिज्म के कारण हिंदू पहले पत्थर खाने, फिर गुनहगार ठहराए जाने को अभिशप्त हैं। इसी सेकुलरिज्म के अनुसार हिंदू राष्ट्र की पताका लगाने, हिंदू राष्ट्र लिखा टी शर्ट पहनने पर आपकी गिरफ्तारी हो जाती है। इसके ही कारण ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाकर भीड़ आपको जेल भेज देती है। इसके कारण ही ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष हिंसक हो जाता है और नारा ए तकबीर शांति का संदेश।

मैं आपको कोई बहुत पुरानी बातें याद नहीं दिला रहा। पटना में जुमे की नमाज के बाद माफिया अतीक अहमद के समर्थन में नारेबाजी तो 22 अप्रैल 2023 को मनी ईद से एक दिन पहले की है। जिस पाक रमजान महीने के बाद यह ईद आई है, उसी दौरान काजल हिंदुस्तानी की गिरफ्तारी हमने देखी है। ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाली भीड़ देखी है। देश के कई राज्यों में रामनवमी शोभा यात्राओं पर हुए हमले देखे हैं। यह भी देखा है कि कैसे हिंदू त्योहारों पर तमाम तरह की प्रशासनिक बंदिश लगाई गई है।

मैं यह नहीं कह रहा कि आप भी उनकी तरह हो जाए। वैसे भी उनके जैसा होना हिंदुत्व नहीं है। लेकिन ईद के नमाजियों पर फूलों की बारिश करना भी हिंदुत्व नहीं है। उन्हें ससम्मान उनके त्योहारों के साथ छोड़ देना हिंदुत्व है। इसलिए उस लिजलिजेपन को त्याग दीजिए जो आपके भीतर कथित सेकुलरिज्म से पैदा होता है। इसी लिजलिजेपन के कारण सेकुलरिज्म की यह परिभाषा दशकों से ढोई जा रही है। यही सियासी दलों को उनका तुष्टिकरण/तृप्तिकरण करने देता है। यही ईद के फूल को रामनवमी पर हिंदुओं पर बरसने वाला पत्थर बना देता है।

जिस दिन आम हिंदू सेकुलर दिखने के इस रोग से मुक्त हो जाएगा, उसी दिन तुष्टिकरण/तृप्तिकरण की राजनीति के साथ-साथ हिंदुओं पर पत्थरबाजी करने वालों का भी बधिया हो जाएगा। सो, सेकुलर नहीं। अच्छा हिंदू बनिए।

‘टिकट के बदले घूस लेते हैं डीके शिवकुमार’: कर्नाटक काॅन्ग्रेस नेता के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत, उम्मीदवारों पर कार्रवाई की माँग

कर्नाटक में 10 मई 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर पार्टी उम्मीदवारों से रिश्वत लेने का आरोप लगा है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कॉन्ग्रेस नेता पर उम्मीदवारों को बी-फॉर्म जारी करने के दौरान रिश्वत माँगने का आरोप लगाया है। केंद्रीय मंत्री ने चुनाव आयोग से डीके शिवकुमार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

शोभा करंदलाजे ने मुख्य चुनाव अधिकारी (Chief electoral officer) मनोज कुमार मीणा को शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि डीके शिवकुमार ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उम्मीदवारों से टिकट के बदले पैसे लिए हैं। भाजपा नेत्री ने चुनाव आयोग से अपनी शिकायत में कहा कि यह घूसखोरी और आचार संहिता के उल्लंघन का मामला है। करंदलाजे ने शिवकुमार समेत उन उम्मीदवारों के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की है जिनपर पैसों के बदले टिकट हासिल करने का आरोप है।

इसके पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख शिवकुमार 29 मार्च 2023 को प्रजा ध्वनि यात्रा के दौरान कलाकारों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए थे। खुली बस से नोट उड़ाने को लेकर भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें शिवकुमार नोट उड़ाते नजर आ रहे थे। इसे लेकर उनकी खूब आलोचना भी हुई थी। इसके अलावा कर्नाटक के कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल की हवा भी खा चुके हैं।

विवादों के कारण डीके शिवकुमार को शक था कि उनका नामांकन रद्द किया जा सकता है। ताजा जानकारी के मुताबिक कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। 10 मई को कराए जा रहे चुनाव में इस साल कुल 3044 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबाला भाजपा, कॉन्ग्रेस और जेडीएस के बीच है। चुनाव के नतीजे 13 मई को घोषित किए जाएँगे।

‘तेरे बाप की जमीन है?’: नदी में बहा देते हैं मल-मूत्र, मना करने पर दी गालियाँ – उत्तराखंड के सैनिक क्षेत्र में बनी अवैध मुस्लिम बस्ती का वीडियो

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो सैनिक क्षेत्र में बनी एक अस्थाई बस्ती का बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति से कुछ लोगों को बहस करते देखा जा सकता है। बहस करने वाले व्यक्तियों का आरोप है कि पास से बह रही नदी में बस्ती में रह रहे लोगों द्वारा मल-मूत्र बहाया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। एक आरोपित पर 5000 रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला अल्मोड़ा के रानीखेत इलाके का है। आरोप है कि यहाँ सैनिक क्षेत्र कैंटोमेंट बोर्ड पड़ता है, जिसके पास मुस्लिम समाज के कुछ लोग अस्थाई पर तौर कच्ची बस्ती बना कर रह रहे हैं। लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड के एक वीडियो में कुछ लोग इस बस्ती में पहुँचते है और वहाँ रहे रहे लोगों पर नदी में गंदगी के साथ मल-मूत्र बहाने का आरोप लगाते हैं। वीडियो में एक नाली भी दिखाई दे रही है, जिससे पानी नीचे जाता दिख रहा है। इस बहस के दौरान बस्ती के कुछ लोग मौके पर जमा हो जाते हैं और बहस शुरू हो जाती है।

इस बहस में शिकायतकर्ता उन सभी पर अवैध तौर पर सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने का भी आरोप लगाता है। जवाब में वह मुस्लिम व्यक्ति किसी से भी न डरने और जा कर शिकायत कर देने का ताव देता है। उसने उलटे शिकायत करने गए व्यक्ति को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए कहा, “तू है कौन ? तेरे बाप की जमीन है?” वह बाकी लोगों को बुला कर लाने का भी ताव देता है। थोड़ी देर बाद बस्ती का रहने वाला वह व्यक्ति फावड़े से बह रही नाली को रोक देता है। हालाँकि, इसके बाद भी बहस जारी रहती है।

इस बहस में आरोपित शिकायतकर्ताओं को नोटिस भी भिजवाने का ताव देता है।

अल्मोड़ा पुलिस ने शुक्रवार (21 अप्रैल, 2023) को अपने एक ट्वीट में बताया कि नाली को पूरी तरह से बंद करवा दिया गया है और संबंधित आरोपित पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। हालाँकि, कुछ नेटीजेंस उत्तराखंड पुलिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इस जुर्माने को छोटी सज़ा बताई। इसके बाद अगले दिन 22 अप्रैल 2023 (शनिवार) को अल्मोड़ा पुलिस ने आरोपित पर FIR दर्ज कर के कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है।

ऑपइंडिया से स्थानीय रानीखेत के भाजपा नेता मनीष चौधरी ने बात की। उन्होंने बताया कि जिस इलाके का ये मामला है वह जगह धोबी मोहल्ला आम से जानी जाती यही और पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ है। वीडियो में बहस करते लोग कौन हैं या कहाँ से आए हैं इस बारे में मनीष ने खुद को भी अनभिज्ञ बताया। उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने हिन्दू संगठनों को 2 दिन पहले ही बुला कर मामले को तूल न देने की अपील करते हुए उचित कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया था।

‘जब राज्यपाल थे तब अंतरात्मा क्यों नहीं जगी’: सत्यपाल मलिक के आरोपों पर बोले अमित शाह, कहा- अमृतपाल पर पंजाब सरकार ने अच्छा काम किया

जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार (22 अप्रैल 2023) को कहा है कि मलिक जब सत्ता में बैठे थे, तब चुप थे। उस समय उनकी अंतरात्मा क्यों नहीं जगी? गृह मंत्री ने पंजाब में खालिस्तान की लहर की बातों को भी इनकार किया है।

दरअसल, पिछले सप्ताह एक इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले समेत कई मुद्दों को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा था। इंडिया टुडे के कार्यक्रम में बोलते हुए अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जनता और पत्रकारों को इन लोगों की विश्वसनीयता पर विचार करना चाहिए। अगर यह सब सही है तो जब वह राज्यपाल थे तब क्यों चुप रहे?

गृह मंत्री ने आगे कहा है कि वह देश की जनता को यह कहना चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे छिपाना पड़े। उन्होंने आगे कहा है कि समय-समय पर कोई रूप बदलता है तो इस पर क्या किया जा सकता है। जनता को ऐसे लोगों की पहचान कर लेनी चाहिए। सत्यपाल मलिक ने जो आरोप लगाए हैं, वह सार्वजनिक चर्चा के विषय नहीं हैं।

दुनिया भर में बढ़ रही खालिस्तानी गतिविधियों तथा ब्रिटेन में स्थित भारतीय उच्चायोग में हुए हमले को लेकर अमित शाह ने कहा, “हमने NIA को इतना सक्षम बनाया है कि वह इस बात की जाँच कर सके कि विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं हो रही। भाजपा सरकार भारतीय उच्चायोग पर किसी भी तरह के हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी। हम मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और भारतीय कानूनों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

भगोड़े अमृतपाल सिंह और पंजाब में खालिस्तानी लहर के बारे में पूछे जाने पर अमित शाह ने कहा, “पंजाब में कोई खालिस्तानी लहर नहीं है। सरकार अपना काम कर रही है। हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं। केंद्र सरकार इसका समर्थन कर रही है। कोई भी भारत की एकता और संप्रभुता पर हमला नहीं कर सकता।”

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने में पंजाब पुलिस की नाकामी को लेकर उन्होंने कहा है कि कई बार होता है, लेकिन जिस प्रकार से वह पहले खुलेआम घूमता था, अब ऐसा नहीं होगा। अब वह खालिस्तानी गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ा पाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने अच्छा काम किया है।

इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ने कर्नाटक में मुस्लिमों को मिलने वाले आरक्षण को लेकर कहा है कि वह आरक्षण संविधान के खिलाफ था। कॉन्ग्रेस ने असंवैधानिक रूप से राज्य में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को लागू किया था। इसे लागू करने के लिए कॉन्ग्रेस संविधान के खिलाफ चली गई थी। इसे भाजपा सरकार ने खत्म कर अन्य समुदायों का आरक्षण बढ़ाया है।

बता दें कि मार्च 2023 में कर्नाटक की बोम्मई सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को खत्म करते हुए कहा था कि इस फैसले से सभी लोगों को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों को जहाँ 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत का लाभ मिलेगा, वहीं वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में भी 2-2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बिना चाँद देखे सऊदी अरब ने मना ली ईद? कई इस्लामी देशों ने किया किनारा, खगोलविदों ने कहा- चाँद निकलने के सबूत दिखाओ

रमजान के बाद ईद-उल-फितर की तारीख तय करना अक्सर इस्लामी देशों में बहस का विषय रहा है। आमतौर पर यह तारीख लूनर कैलेंडर से तय की जाती है। लेकिन इसे पक्का तभी माना जाता है जब ईद से एक दिन पहले चाँद नजर आ जाए। कुछ देश इसके लिए अपने कुछ स्थानीय चाँद देखने वालों पर यकीन कर लेते हैं और कुछ सऊदी अरब पर छोड़ देते हैं कि जब वो ईद मनाएँगे तभी ईद होगी।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। लोग सऊदी अरब पर भरोसा करके बैठे थे और सऊदी ने ईद का दिन शुक्रवार बता दिया। सऊदी के ऐलान के बाद ही ये बहस गरमा गई कि क्या वाकई ईद शुक्रवार को होनी चाहिए। कुछ खगोलविद निकलकर आए जिन्होंने चुनौती दी कि ईद शुक्रवार को नहीं हो सकती क्योंकि गुरुवार को चाँद दिख ही नहीं सकता। एक कुवैती खगोलविद ने तो कहा अगर ऐसा है कि गुरुवार को चाँद दिखा तो उसकी फोटो सबूत के तौर पर पेश की जाए।

बावजूद इस चुनौती के सऊदी ने 13 में से 2 क्षेत्रों में चाँद नजर आने पर पर ईद शुक्रवार को मनाई। जबकि मोरक्को, पाकिस्तान, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, भारत और जापान में शनिवार को ईद मनाई गई। साथ ही कुवैती खगोलविद की चुनौती पर सऊदी अरब से चाँद की फोटो दिखाने को कहा गया। इस पर एक सऊदी के खगोलविद मुलहम-अल-हिंद ने धुंधली चांद की फोटो खींचकर दिखाई और कहा कि ये चार्ज कपल्ड डिवाइस इन्फ्रारेड कैमरे का प्रयोग करके खींची गई है।

उल्लेखनीय है कि इस तरह ईद की तारीखों में हेर-फेर के बाद कई इस्लामी देश और मुस्लिम लोग सऊदी अरब से नाराज हैं। उनका मत यही है कि गुरुवार को किसी कीमत पर चाँद का दिखना संभव नहीं था तो सऊदी ने ईद कैसे मनाई। ईराक के शिया मौलवी अली-अल-सिस्तानी ने भी ईद शनिवार को बताई।

इसी तरह लेबनान में भी शिया इस्लामिक काउंसिल ने ईद शनिवार की बताई। इसके अलावा ब्रिटिश सरकार ने भी माह की शुरुआत में यही अनुमान लगाया था कि गुरुवार को यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बड़े-बड़े क्षेत्र में चंद्रमा नहीं दिखाई देंगे जिसके बाद कई मुस्लिमों ने सऊदी के पल्ला झाड़ते हुए ईद शनिवार की मानी।

“जहाँ शिवलिंग मिला वहाँ वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती”, सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की दो टूक, ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी ने माँगी थी इजाजत, SC ने कहा पानी की पूरी व्यवस्था करें

वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग के पास वजू करने की मुस्लिमों की माँग को उत्तर प्रदेश की सरकार ने नकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को हुई बहस के दौरान यूपी सरकार ने साफ-साफ कह दिया कि ज्ञानवापी में जिस स्थान पर शिवलिंग मिला है, उस एरिया में वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती।

दरअसल, ज्ञानवापी मस्जिद इंतेजामिया कमेटी की तरफ से रमजान और ईद के दौरान परिसर में ही वजू की माँग की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद और मंदिर पक्ष को डीएम की मौजूदगी में बैठकर फैसला लेने के लिए कहा था। डीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में जब कोई हल नहीं निकल सका तो शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को सुप्रीम कोर्ट में ही मामले की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने वाराणसी के डीएम को नमाजियों के लिए पानी और शौचालय की व्यवस्था करने निर्देश दिया। रमजान और ईद के दौरान मस्जिद मुस्लिम पक्ष परिसर में ही वजू की माँग कर रहा था। मस्जिद कमेटी की तरफ से कोर्ट में एडवोकेट हुजैफा अहमदी पैरवी कर रहे थे।

हुजैफा अहमदी ने सर्वोच्च कोर्ट में दलील दी कि 400 सालों से मुस्लिम मस्जिद के अंदर के उस इलाके में वजू करते आए हैं। इसलिए उन्हें इजाजत मिलनी चाहिए। इस पर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार से पूछा कि क्या शुक्रवार और शनिवार (21-22 अप्रैल 2023) के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकती?

इस पर यूपी सरकार का पक्ष रख रहे सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि डीएम से बात हुई है। जहाँ शिवलिंग मिलने की बात है, वहाँ वजू की इजाजत नहीं दी जा सकती है। वजू के लिए पहले से ही पानी के ड्रम और मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की गई है। मस्जिद पक्ष के लोग परिसर में ही वजू करने की माँग कर रहे हैं।

इस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ और सुविधाएँ दी जानी चाहिए, ताकि रोजेदारों और नमाजियों को परेशानी न हो। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि वहाँ पानी के टब क्यों नहीं लगवा दिए गए। यूपी सरकार ने बताया कि मस्जिद से 70 मीटर की दूरी पर वॉशरूम और वजू के लिए व्यवस्था की गई है।

एसजी तुषार मेहता ने इस पर कोर्ट को आश्वस्त किया कि जिला अधिकारी मौके पर पर्याप्त संख्या में पानी के टब का इंतजाम करवा देंगे। कोर्ट ने एसजी के बयान को आदेश में दर्ज कर लिया। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में कराए गए सर्वे के दौरान वजूखाने से शिवलिंग निकला था। जिसे मस्जिद पक्ष फव्वारा बता रहा था।

सर्वोच्च अदालत ने नवंबर 2022 को अपने एक फैसले में ज्ञानवापी परिसर में मिले ‘शिवलिंग’ और उसके आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। वजूखाने के इलाके को सील कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।

बता दें कोर्ट ने मुख्य मामले की सुनवाई के लिए 7 अगस्त 2023 की तारीख तय की हुई है। मुख्य मामले में मस्जिद कमेटी ने ज्ञानवापी परिसर के सर्वे कराने के आदेश को चुनौती दी है।