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ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नूपुर जे शर्मा और CEO राहुल रौशन के खिलाफ कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, तमिलनाडु में FIR पर मद्रास हाईकोर्ट जाने को कहा

CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन और प्रधान संपादक नूपुर जे शर्मा को तमिलनाडु पुलिस द्वारा दर्ज मामले में किसी भी कार्रवाई से 4 सप्ताह की सुरक्षा दी। खंडपीठ ने कहा कि उन पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द नहीं करेंगे, क्योंकि यह उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का मामला है।

नूपुर जे शर्मा और राहुल रौशन का प्रतिनिधित्व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और रवि शर्मा ने किया। धारा 32 के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के उनके अनुरोध को CJI चंद्रचूड़ ने अस्वीकार कर दिया। CJI ने तब याचिकाकर्ताओं को धारा 482 के तहत मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने एफआईआर रद्द करने के मामले की सुनवाई के अनुरोध को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनन यह उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट सीधे एफआईआर को रद्द कर दे। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से याचिकाकर्ता की रक्षा करेगा।

इसके अलावा, एडवोकेट जेठमलानी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि जरूरत पड़ने पर तमिलनाडु पुलिस को वीडियो कॉन्फ्रेंस पर पूछताछ करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि राहुल रौशन कोविड से पीड़ित हैं और नूपुर जे शर्मा का एक 6 साल का बच्चा है और वह यात्रा करने में असमर्थ हैं।

इस पर CJI ने कहा कि वह पहले ही याचिकाकर्ता को बलपूर्वक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान कर चुके हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में आगे कहा कि सीईओ को COVID है। पुलिस खुद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने से डरेगी। इसलिए, याचिकाकर्ताओं को चिंता नहीं करनी चाहिए।

एडिटर-इन-चीफ नूपुर शर्मा ने ट्विटर के जरिए अपने वकीलों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऑपइंडिया कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करेगा और सुनिश्चित करेगा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा इस दुर्भावनापूर्ण अभियोजन को विफल किया जाए।

FIR में क्या है

अप्रैल में तमिलनाडु पुलिस ने ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के लिए नूपुर जे शर्मा और राहुल रौशन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस रिपोर्ट में दैनिक दैनिक भास्कर द्वारा तमिलनाडु में बिहारी प्रवासी श्रमिकों पर हमले के आरोपों को कवर किया गया था। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में भास्कर के आरोप, बिहार के मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) का बयान और तमिलनाडु पुलिस का बयान शामिल है।

DMK नेता और आईटी सेल के हिस्सा सूर्य प्रकाश की शिकायत के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-A, 501 और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

‘मुझे मेरे तेंदुओं के साथ एयरलिफ्ट करा दो’: यूक्रेन के ‘जगुआर कुमार’ ने भारत सरकार से लगाई गुहार, 2022 में लौटने से कर दिया था इनकार

साल 2022 में युद्धग्रस्त यूक्रेन से अपने पालतू पैंथरों को छोड़कर जाने से मना करने वाले तेलुगु डॉक्टर गिरी कुमार पाटिल एक बार फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उन्हें एक नया पासपोर्ट दिलाने में मदद की जाए और उन्हें व उनके पालतू जानवरों को भारत लाया जाए। 

दरअसल, पाटिल कुछ समय पहले पोलैंड शिफ्ट हुए थे। लेकिन वहाँ पोलैंड की राजधानी वारसॉ में उनका पासपोर्ट खो गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, डॉ गिरी कुमार पाटिल ने उन्हें पोलैंड से फोन करके बताया कि वो पोलैंड नौकरी की तलाश में गए थे। उन्होंने अपने दो बड़े बाघ- एक पैंथर और अमूर तेंदुआ यूक्रेन में केयरटेकर के पास छोड़ दिए थे और खुद पोलैंड में जाकर हॉस्टल में रहते थे। उनका कहना है कि वहाँ जाकर उनका पासपोर्ट खो गया।

इसके बाद उन्होंने पोलैंड में भारतीय दूतावास में संपर्क किया। जहाँ अधिकारियों ने उनसे कुछ दस्तावेज माँगे जिसे डॉक्टर ने फरवरी में जमा करवा दिया। मगर अब तक पासपोर्ट बनाने का काम चल ही रहा है। डॉ गिरी जब भी पासपोर्ट का ऑनलाइन स्टेटस देखते हैं पता चलता है अभी डॉक्यूमेंट्स का रिव्यू चल रहा है।

उन्होंने दिल्ली में अधिकारियों  से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने बताया, “मैंने दिल्ली में अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वो मुझे मेरा नया पासपोर्ट दिलाने में मदद करें ताकि मैं यूक्रेन जाकर अपने विशाल तेंदुओं की देखरेख कर पाऊँ। वह बहुत समय से बंदिश में हैं। अगर मुझे नया पासपोर्ट मिलता है तो यूक्रेन में मेरे घर से 30 किलोमीटर दूर एक जगह है जहाँ से मैं अपनी बिल्लियों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचा सकता हूँ।”

कुमार कहते हैं, “यूक्रेन में स्थिति बद्तर होती जा रही है। अगर युद्ध जारी रहता है तो मेरे पालतू जानवर बड़ी मुश्किल में पड़ जाएँगे।” उन्होंने कहा, “मेरी बहुत मदद हो जाएगी अगर भारत सरकार मुझे और मेरी बिल्लियों को भारत ले आए और उन्हें चिड़ियाघर में जगह दे दे। मैं तब उनसे मिल पाऊँगा और तसल्ली से भी रह पाऊँगा कि मेरे पालतू जानवर सुरक्षित हैं।”

बता दें कि साल 2022 में युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा अभियान चलाया था। हालाँकि उस समय जगुआर रखने वाले डॉक्टर ने अपने पालतू तेंदुओं को छोड़कर भारत आने से मना कर दिया था। बताया जाता है कि जानवरों से प्रेम के कारण उन्होंने बंगाल टाइगर या एशियाई बाघ को पालने की कोशिश की थी, लेकिन वहाँ के अधिकारियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने जगुआर पालने का लाइसेंस लेकर इन जंगली जानवरों को अपना पालतू बना लिया। उनका दावा था कि उनके पास मौजूद जगुआर की यह प्रजाति दुनिया की दुर्लभतम प्रजाति है और इनकी संख्या दुनिया भर में सिर्फ 21 है, जिनमें एक उनके पास है।

‘इस आदमी से ये कैसा बदला’: मनीष कश्यप पर NSA लगाने को लेकर CJI ने कपिल सिब्बल से पूछा सवाल, अगली सुनवाई तक सुप्रीम कोर्ट ने जगह बदलने पर लगाई रोक

यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार से सवाल किया। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने प्रदेश में आप्रवासी बिहारी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की खबरों को फर्जी बताते हुए कश्यप पर कई केस दर्ज किए थे।

इस मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनसे सवाल पूछा, “मिस्टर सिब्बल, इसके लिए NSA क्यों? इस आदमी से इतना प्रतिशोध क्यों?”

दरअसल, मनीष कश्यप पर लगाए गए NSA को हटाने की माँग करते हुए उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि रासुका क्यों लगाया गया है।

इस सिब्बल ने कहा कि वह फर्जी वीडियो बनाकर तमिलनाडु में बिहारियों पर हमले का झूठ फैला रहा था। सिब्बल ने कहा कि सोशल मीडिया पर उसके 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वह एक राजनेता है और चुनाव लड़ चुका है। मनीष कश्यप पत्रकार नहीं है।

मनीष कश्यप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि तमिलनाडु में कार्रवाई द्वेषपूर्ण है। उन्होंने पटना वाली प्राथमिकी के साथ ही तमिलनाडु में दर्ज सभी प्राथमिकी को जोड़ने की माँग की। हालाँकि, कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया।

वहीं, बिहार सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मनीष कश्यप आदतन अपराधी है। उसकी हरकतें सिर्फ वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं हैं। उसके खिलाफ गंभीर मामले भी हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 307 भी शामिल है। उन्होंने केसों को बिहार हस्तांतरित करने का भी विरोध किया।

इसके साथ ही दवे ने यह भी अनुरोध किया कि मनीष कश्यप को प्रोडक्शन वारंट पर तमिलनाडु के अन्य स्थानों पर नहीं ले जाया जाए। इस पर खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अगली पोस्टिंग तिथि (28 अप्रैल 2023) तक मनीष कश्यप को केंद्रीय कारागार मदुरै से स्थानांतरित नहीं किया जाए।

बता दें कि कथित फर्जी वीडियो के जरिए तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की खबरें दिखाने के लिए बिहार पुलिस ने कई मुदकमें दर्ज किए हैं। वहीं, तमिलनाडु में भी कई मुकदमें दर्ज हैं। दोनों राज्यों में कुल 5 मुकदमें दर्ज किए गए हैं।

टूटी कुर्सी को बनाया सहारा, 70 साल की बुजुर्ग महिला को चिलचिलाती धूप में नंगे पैर कई किमी चलना पड़ा पैदल… Video देख निर्मला सीतारमण ने बैंक को फटकारा

सोशल मीडिया में ओडिशा की एक बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल है। इसमें 70 साल की सूर्या हरिजन को नंगे पैर एक सड़क पर चलते देखा जा सकता है। चिलचिलाती धूप में वह एक टूटी कुर्सी को सहारा बनाकर कई किलोमीटर पैदल चलती हैं। इसके बाद बैंक पहुँचकर अपना पेंशन प्राप्त करती हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंक को फटकार लगाई है।

वीडियो 17 अप्रैल 2023 का बताया जा रहा है। बुजुर्ग महिला नबरंगपुर जिले के झरीगन ब्लॉक के बनुआगुड़ा गाँव की रहने वाली हैं। वीडियो में उन्हें टूटी कुर्सी के सहारे नंगे पाँव सड़क पर पैदल चलते हुए देखा जा सकता है। उनके शरीर पर पूरे कपड़े भी नहीं हैं। उनके चेहरे से उनकी मजबूरी साफ़ झलक रही है।

वायरल वीडियो देखने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को जमकर फटकारा। उन्होंने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा, “एसबीआई मैनेजर इस वीडियो को देख सकते हैं? इस पर जल्द से जल्द संज्ञान लें और मानवीयता का कार्य करें। क्या वहाँ कोई बैंक मित्र नहीं हैं?”

वित्त मंत्री के ट्वीट पर पर जवाब देते हुए एसबीआई ने कहा, “मैडम, इस वीडियो को देखकर हमें भी उतना ही दुख हुआ है। सूर्या हरिजन हर महीने अपने गाँव में स्थित CSP प्वाइंट से वृद्धावस्था पेंशन निकालती थीं। लेकिन अधिक उम्र होने के कारण अब सीएसपी प्वाइंट पर उनके फिंगर प्रिंट मैच नहीं कर रहे हैं। वह अपने रिश्तेदार के साथ हमारी झरिगाँव ब्रांच आईं थी। हमारी ब्रांच के मैनेजर ने तुरंत उनके अकाउंट में राशि का भुगतान किया और कहा कि अगले महीने से पेंशन उनके घर पर पहुँचाई जाएगी।”

इसके अलावा बैंक ने बुजुर्ग महिला सूर्या हरिजन को व्हीलचेयर देने का भी फैसला किया है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर यूजर्स वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस तरह से ट्विटर पर एसबीआई को फटकारने और वृद्ध महिला के पक्ष में सामने आने के लिए सराहना कर रहे हैं।

जिस शूटर ने मारी माफिया भाइयों को गोली, कभी था ‘शेर-ए-अतीक’ का हिस्सा: असद ने बनाया था WhatsApp ग्रुप, वीडियो डाल बनाता था अब्बा की दहशत

अतीक अहमद की हत्या करने के बाद गिरफ्तार हुए तीन शूटर अब पुलिस की हिरासत में कई राज उगल रहे हैं। इसी पूछताछ में उन्होंने यह भी बताया है कि उनमें से एक शूटर कभी अतीक के बेटे द्वारा बनाए गए व्हॉट्सएप ग्रुप का हिस्सा हुआ करता था। इस ग्रुप का मकसद युवाओं को अतीक का वफादार बनने की ट्रेनिंग देना, अतीक के लिए काम करने के लिए उकसाना था।

बता दें कि 15 अप्रैल की रात अतीक अहमद को प्रयागराज में तीन शूटरों ने गोली मारी थी। इन तीनों के नाम लवलेश तिवारी, अरुण मौर्या और सनी सिंह हैं। पुलिस को इनसे पूछताछ में जानकारी मिली है कि अरुण मौर्या एक समय पर शेर-ए-अतीक व्हॉट्सएप ग्रुप का हिस्सा था। ये ग्रुप माफिया अतीक के बेटे असद ने खुद बनाया था।

कथिततौर पर यह ग्रुप अतीक के महिमामंडन के लिए बनाया गया था। इस ग्रुप में अतीक के वीडियो और तस्वीरें शेयर की जाती थीं ताकि माफिया का वर्चस्व कायम रह सके और लोगों को उसकी दहशत का पता चल सके। इस ग्रुप में साझा कंटेंट के कारण ही अरुण को अतीक की दहशत का मालूम चला था। कुछ समय बाद अरुण ने यह व्हॉट्सएप ग्रुप छोड़ दिया और गैंग 90 नाम के दूसरे ग्रुप से जुड़ गया। अब उससे जुड़ी जानकारी स्पेशन इन्वेस्टिगेशन टीम को लग गई है।

उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक-अशरफ की हत्या के बाद अरुण मौर्या समेत तीनों हत्यारों ने सरेंडर कर दिया था। जाँच अधिकारी लगातार इनसे पूछताछ कर रहे हैं। अभी तक यही पता चला है कि ये हत्या किसी के कहने पर नहीं हुई है। तीनों अतीक को मारकर अपना खौफ पैदा करना चाहते थे। हालाँकि इन्हें ये भी डर था कि कहीं पुलिस इन्हें न मार दे इसलिए हत्या के तुरंत बाद ये लोग सरेंडर-सरेंडर चिल्लाने लगे थे और पकड़े जाने के बाद लगातार अतीक को देख रहे थे कि वो मरा या नहीं।

वकील बनकर आया हमलावर, महिला को चार गोली मारकर हुआ फरार: दिल्ली के साकेत कोर्ट में गवाही देने आई थी, पति पर हमले का शक

दिल्ली के साकेत कोर्ट (Saket Court, Delhi) में वकील की पोशाक में आए हमलावर ने एक महिला को गोली मार दी। रिपोर्ट के अनुसार, शख्स ने महिला को चार गोलियाँ मारीं। गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल महिला को दिल्ली पुलिस के एक एसएचओ ने एम्स (AIIMS) पहुँचाया। पुलिस हमलावर की तलाश में जुट गई है।

दक्षिण दिल्ली के डीसीपी चंदन चौधरी ने बताया कि महिला की पहचान 40 वर्षीय एम राधा के रूप में हुई है। जिस व्यक्ति ने उसे गोली मारी है, वह बार काउंसिल से निलंबित वकील है। हमलावर ने महिला और एक वकील राजेंद्र झा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) का मामला दर्ज कराया था, जिसकी सुनवाई आज शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को अदालत में थी।

रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर ने महिला को नजदीक से गोली मारी और फरार हो गया। कई रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि पीड़ित महिला हमलावर की पत्नी है। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस हमले में एक वकील को भी गोली लगी है। यह स्पष्ट नहीं है कि गोली राजेंद्र झा को ही लगी है या किसी दूसरे वकील को।

घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला के पेट में गोली लगी हुई मालूम पड़ रहा है। महिला दर्द से रो रही है। लोग उसे सांत्वना देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में महिला कोर्ट परिसर से पैदल ही बाहर ले जाती हुई देखी जा रही हैं। जिस वक्त महिला को गोली मारी गई, उस वक्त वह एक वकील के साथ थी।

कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच हमलावर हथियार लेकर अंदर घुस आया था। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आखिर वह हथियार लेकर परिसर में कैसे दाखिल हुआ। वैसे दिल्ली में इसके पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है।

22 अप्रैल 2022 को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में इसी तरह की फायरिंग की घटना सामने आई थी। इसमें 2 वकील जख्मी हो गए थे। उसके पहले सितंबर 2021 में रोहिणी कोर्ट में ही 2 बदमाशों ने जितेंद्र मान नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालाँकि, इस घटना के दौरान दोनों हमलावरों को भी ढेर कर दिया गया था।

13 साल के लड़के ने बच्चे से किया कुकर्म तो सबने माफ कर दिया, अब 2 साल की बहन से किया रेप: ग्रामीणों ने बताया- मोबाइल पर देखता रहता था अश्लील फिल्में

लखनऊ के मोहनलालगंज में दो साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित बच्ची का 13 साल का चचेरा भाई है। रिपोर्ट के अनुसार इस लड़के पर कुछ समय पहले एक बच्चे से कुकर्म का आरोप भी लगा था। लेकिन उस समय इसे माफ कर दिया गया था। अब किशोर को पकड़कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

2 साल की बच्ची से रेप की घटना बुधवार (19 अप्रैल 2023) की है। बच्ची के घरवालों को इसका पता अगले दिन गुरुवार को चला। बच्ची पेट दर्द और ब्लीडिंग के वजह से रो रही थी। जब घरवालों ने उससे रोने का कारण पूछा तो उसने कहा- भैया ने मारा है। बच्ची के पिता ने इस संबंध में दर्ज करवाई है।

शिकायत में बताया गया है कि बुधवार को बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। उसके साथ 13 साल का चचेरा भाई भी खेलने पहँचा। बच्ची के पिता उसकी माँ अपने 8 महीने के दूसरे बच्चे को लेका खेत में काम करने गए था। इस बीच चचेरा भाई बच्ची को लेकर अपने घर चला गया। पीड़ित पिता के अनुसार उस वक्त उसके भैया और भाभी भी घर पर नहीं थे।

मौका देखकर चचेरे भाई ने अपनी बहन के साथ दुष्कर्म किया। जब बच्ची के निजी अंग से खून बहने लगा तो उसने बच्ची को घर के पास छोड़ा और भाग गया। बच्ची दर्द से रो रही थी। जब बच्ची के माता-पिता घर पहुँचे तो उसके रोने का कारण पूछा। बच्ची ने बताया कि भैया ने मारा है। उस वक्त सभी उसे दुलार-पुचकार कर चुप कराने लगे।

अगली सुबह बच्ची फिर से रोने लगी उसके पेट में दर्द हो रहा था। बच्ची की माँ ने पाया कि उसके निजी अंगों में चोट है और खून बह रहा है। पिता जब बच्ची को लेकर अपने भाई के घर पहुँचे तो भाई और भतीजे ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद बच्ची के पिता ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामला दर्ज कर बच्ची को मेडिकल के लिए अस्पताल लेकर गई।

रिपोर्टों के मुताबिक 13 साल के इस लड़के पर पहले भी एक बच्चे के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था। उस वक्त ग्रामीणों ने डाँट-डपटकर मामला रफा-दफा कर दिया था। लोगों का कहना है कि लड़का अपने मोबाइल फोन में अश्लील फिल्में देखता रहता है।

सेना की जिस गाड़ी पर हुआ आतंकी हमला, वह रोजेदारों के इफ्तार के लिए सामान लेकर लौट रहा था: रिपोर्ट में दावा, JK में बलिदान हो गए थे 5 जवान

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के एक वाहन पर 20 अप्रैल 2023 को आतंकी हमला किया गया था। पूँछ जिले के राजौरी सेक्टर में हुए इस हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के पाँच जवान बलिदान हो गए थे। अब यह जानकारी सामने आई है कि वाहन में सवार जवान इफ्तार के लिए सामान लेकर लौट रहे थे। 20 अप्रैल की शाम राष्ट्रीय राइफल्स की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इसमें पंचों और सरपंचो समेत आसपास के गाँव के रोजेदारों को बुलाया गया था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने जानबूझकर उस गाड़ी को निशाना बनाया, जिसमें जवान इफ्तार पार्टी का सामान ला रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने संगयोट इलाके में स्थानीय लोगों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग स्थानों पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों को इफ्तार पार्टी के आयोजन की बात नागवार गुजरी और उन्होंने सेना के वाहन पर हमले की साजिश रची।

दरअसल आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के लोगों का सेना के साथ घुलना-मिलना पसंद नहीं आता। आतंकियों को लगता है कि यही लोग फिर उनकी मुखबिरी करते हैं। गुरुवार दोपहर को सेना का वाहन इफ्तार का सामान लेकर कैंप की तरफ लौट रहा था। उसी समय खराब मौसम का फायदा उठाकर आतंकियों ने वाहन को निशाना बनाया। पहले गोलियाँ चलाईं और फिर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद वाहन में आग लग गई।

हमले में आरआर के पाँच जवान हवलदार मनदीप सिंह, हरकिशन सिंह, लांसनायक कुलवंत सिंह, सिपाही सेवक सिंह और लांसनायक देबाशीष बसवाल बलिदान हो गए। एक जवान गंभीर रूप से घायल हैं। उनका उपचार सेना के अस्पताल में किया जा रहा है। हमले के बाद सुरक्षा बल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले की जाँच एनआईए ने भी शुरू कर दी है।

इस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली है। पीएएफएफ पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

अब तो एलन मस्क ने भी ट्विटर का ब्लू टिक छीन लिया, लेकिन गोदी सेठ का ठप्पा खुद से कब उतारेंगे रवीश कुमार

21 अप्रैल 2023 की सुबह हम जैसे काॅमन मैन की आँख खुली तो ट्विटर का ब्लू टिक (Twitter Blue Tick) छिन चुका था। लेकिन एलन मस्क ने ब्लू टिक छीनने में आम आदमी, सेलिब्रिटी, राजनेता टाइप वाला कोई भेदभाव नहीं किया। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार जैसे बाॅलीवुड दिग्गज हों या विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी जैसे नामचीन क्रिकेटर या फिर राहुल गाँधी, योगी आदित्यनाथ, अरविंद केजरीवाल जैसे भारतीय राजनीति के नाम, सबका ब्लू टिक गायब है। कुल मिलाकर अब अखिलेश यादव जैसे उन लोगों का ब्लू टिक ही बचा है जो इसके लिए मस्क को माल दे रहे हैं। ब्लू टिक रवीश कुमार का भी गया है। लेकिन रवीश कुमार ने अब भी गोदी सेठ का ठप्पा नहीं हटाया।

वैसे ब्लू टिक की पुरानी परिपाटी बदलने का ऐलान मस्क ने ट्विटर खरीदने के बाद ही कर दिया था। यह तय था कि जो भी इसके बदले भुगतान नहीं करेंगे उनका ब्लू टिक जाएगा। भारत में ऐसे लोगों का ब्लू टिक छिन जाने की तारीख 20 अप्रैल होगी यह जानकारी भी 12 अप्रैल 2023 को ही आ गई थी। कभी फ्री में ब्लू टिक के तौर पर ट्विटर पर मिलने वाला ‘स्टेट्स सिंबल’ अब आप खरीद सकते हैं। लेकिन रवीश कुमार का थेथरपना देखिए वे अब भी फ्री में गोदी सेठ का ठप्पा लगाए हुए ट्विटर पर विचरण कर रहे हैं।

ट्विटर पर आप पाएँगे कि रवीश कुमार यूजर नेम के तौर पर @ravishndtv का इस्तेमाल करते हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं वे यूट्यूबर बनने से पहले एनडीटीवी (NDTV) से जुड़े थे। यहाँ उन्होंने चिट्ठी छाँटने से लेकर प्राइम टाइम में वैचारिक उलटी करने का सफर तय किया था। लेकिन एनडीटीवी में अडानी की एंट्री के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। ‘गोदी सेठ’ नाम का शाब्दिक आडंबर रचकर माहौल भी बनाया था।

सोशल मीडिया में अपने संस्थान के नाम का इस्तेमाल करना सामान्य बात है। लेकिन नैतिक तौर पर अपेक्षा की जाती है कि जब कोई व्यक्ति खुद को संस्थान से अलग करेगा तो सार्वजनिक मंचों पर भी खुद को उस नाम से अलग कर लेगा। वह अपने आचरण से प्रदर्शित करेगा कि एक खास संस्थान के नाम से उसे जो लाभ प्राप्त हो रहा था, उसका अब वह अधिकारी नहीं है। रवीश कुमार के इस्तीफे के बाद भी इसी तरह की अपेक्षा की गई थी। लेकिन उन्होंने ट्विटर पर अपने यूजर नेम से एनडीटीवी को अलग नहीं किया।

इसकी एक वजह यह भी बताई गई थी कि यूजर नेम बदलने पर उनका फ्री का ब्लू टिक छिन सकता है। एलन मस्क ने खुद से ब्लू टिक छीनकर रवीश कुमार को इस बेड़ी से भी आजाद कर दिया है। लेकिन रवीश कुमार ने उस एनडीटीवी को अब तक खुद से जुदा नहीं किया है, जिसमें उनके गोदी सेठ की हिस्सेदारी है।

शायद रवीश कुमार को आभास है कि उनकी जो भी दुकानदारी है, वह इसी नाम के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। उन्होंने इस दुकान से प्रोपेगेंडा बेच बेचकर खुद को यूट्यूब पर अपनी दुकान खोलने के काबिल बनाया है। इसलिए इस बात की उम्मीद कम ही है कि वे इस ठप्पे से खुद को मुक्त करेंगे। वैसे भी रवीश कुमार की पत्रकारिता, सार्वजनिक मंचों पर उनका आचरण वैसा ही है, जैसे पड़ोसी के घर चिकन मुर्ग मुसल्लम देखकर कोई अपने पिता के शाकाहार को एक खास वर्ग के प्रति नफरत बताए। ऐसे व्यक्ति से नैतिकता की उम्मीद बेमानी है।

कनपटी पर तनी बंदूक देख अतीक अहमद ने पैंट में ही कर दिया था पेशाब, किस्सा तब का जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने माफिया को किया था गिरफ्तार

माफिया अतीक अहमद ने डर से एक बार पैंट में ही पेशाब कर दिया था। यह घटना 2008 की है। गिरफ्तार करने पहुँची पुलिस की तनी बंदूक देख माफिया की पैंट में ही पेशाब निकल गई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में करनाल सिंह ने यह किस्सा सुनाया है। वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डायरेक्टर रहे हैं। जब अतीक ने अपनी पैंट गीली की थी, तब वे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में संयुक्त आयुक्त थे।

2008 में दिल्ली स्पेशल ने पीतमपुरा से अतीक को गिरफ्तार किया था। इंटरव्यू में करनाल सिंह ने बताया कि जनवरी 2008 में वे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में थे। उस समय स्पेशल सेल ने उत्तर भारत के खतरनाक अपराधियों की लिस्ट बनाई थी। इसमें अतीक अहमद का भी नाम था। उस समय अतीक पर 1 लाख रुपए का इनाम था। अतीक को पकड़ने की जिम्मेदारी स्पेशल सेल को दी गई। इसके बाद स्पेशल सेल ने अतीक और उसके गुर्गों की कुंडली खँगाली। उनके हाथ अतीक के एक शूटर का फोन नंबर लग गया।

स्पेशल सेल के ऑफिसर्स ने शूटर के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया। फोन कॉल्स को सुनने के दौरान पता चला कि अतीक दिल्ली के पीतमपुरा स्थित अपने घर जाने वाला है। करनाल सिंह ने बताया कि स्पेशल सेल के ऑफिसर्स ने अतीक के पीतमपुरा वाले घर को चारों तरफ से घेर लिया और इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद अतीक बाहर निकला और अपनी कार में बैठ गया। इतने में ऑफिसर्स ने उसे घेर लिया। स्पेशल सेल के एक ऑफिसर ने अतीक के कनपट्टी पर बंदूक तान दी और उससे बाहर आने को कहा। करनाल सिंह के अनुसार अतीक बुरी तरह डर गया था और जब बाहर निकला उसकी पैंट गीली हो चुकी थी। इसके बाद अतीक को यूपी पुलिस के हवाले कर दिया गया था।

बता दें कि प्रयागराज के काॅल्विन हाॅस्पिटल के बाहर 15 अप्रैल की रात अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या की गई थी। मीडियाकर्मी बनकर आए लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह ने माफिया ब्रदर्स को कैमरों के सामने चंद सेकेंड के भीतर ही मार गिराया था। फिलहाल तीनों शूटर पुलिस रिमांड में हैं। उनसे हत्या के मकसद के लेकर पूछताछ की जा रही है। इस मामले में पाँच पुलिसकर्मी भी सस्पेंड किए गए हैं। हत्या से पहले अतीक से पत्रकारों ने असद के जनाजे में शामिल नहीं होने का कारण पूछा था। अतीक के जवाब देने के बाद अशरफ ने कहा था कि मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम… अशरफ की यह बात कभी पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि इसके बाद ही माफिया भाइयों की हत्या हो गई थी।

उससे पहले 13 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने झाँसी में अतीक के बेटे असद और उसके शूटर मोहम्मद गुलाम को मार गिराया था। उमेश पाल की हत्या में दोनों शामिल थे। इस मामले में अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन भी वांछित है। वह फिलहाल फरार है। उसकी और अतीक गैंग से जुड़े बमबाज गुड्डू मुस्लिम की पुलिस सरगर्मी से तलाश में जुटी है।