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जज मतलब तड़ीपार का पूर्व वकील… राहुल गाँधी की सजा पर नहीं लगी रोक तो जज-सूरत कोर्ट पर टूट पड़ी काॅन्ग्रेस और रुदाली गैंग

गुजरात के सूरत की सेशन कोर्ट ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को मानहानि मामले में काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की याचिका खारिज करते हुए उनकी दो साल की सजा बरकरार रखी। इस फैसले के बाद कॉन्ग्रेसी और वामपंथी, कोर्ट के जज और सत्र अदालत के ऊपर बिदक गए। सोशल मीडिया पर उन्हें अपशब्द कहे जाने लगे। जज को जहाँ गुजरात लॉबी का सदस्य बताया गया। वहीं गुजरात कोर्ट को भी ‘भ्रष्ट’ कहा गया।

वामपंथी पत्रकार सबा नकवी ने इस फैसले को ‘बेतुका’ बताया और कोर्ट को ‘भ्रष्ट’ कहा।

वामपंथी मीडिया गिरोह के तथाकथित पत्रकार विनोद कापड़ी ने अपने ट्विटर हैंडल पर तंज कसते हुए लिखा, “सूरत जज जिंदाबाद!”

गुजरात काॅन्ग्रेस ने जज को अमित शाह का चेला बताते हुए लिखा, “सूरत कोर्ट ने राहुल गाँधी की अर्जी को खारिज कर दिया है। ये तो होना ही था, अमित शाह के चेले ने जो फैसला सुनाया है।”

काॅन्ग्रेस समर्थक भविका कपूर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखती हैं, “जज = तड़ीपार का पूर्व वकील।”

महाराष्ट्र काॅन्ग्रेस के सोशल मीडिया इंचार्ज नितिन अग्रवाल ने लिखा, “आप क्रोनोलॉजी समझिए। जज रॉबिन मोगेरा, जिन्होंने आज राहुल गाँधी की अर्जी खारिज की है, वो कथित फेक एनकाउंटकर मामले में अमित शाह की पैरवी कर चुके है।”

इसी तरह स्वाति चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें फैसला सुनकर बिलकुल हैरानी नहीं हुई। रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा, ” जी मिलार्ड आप तो खरबूज निकले।” वहीं पत्रकार दीपक शर्मा ने कहा, “एक शब्द के फैसले में अदालत ने कहा- डिसमिस्ड। गुजरात लॉबी का गुजरात में असर गजब है।”

जज को कॉन्ग्रेसियों ने क्यों बनाया निशाना

बता दें कि राहुल गाँधी ने सूरत की सेशन कोर्ट में मानहानि मामले में 2 साल की सजा पर रोक की गुहार लगाते हुए याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया है। यह फैसला जज रॉबिन मोगेरा ने सुनाया है। वह कभी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का मुकदमा लड़ चुके हैं। उन्होंने 2006 के तुलसीराम प्रजापति फेक एनकाउंटर केस को लड़ा था। उस वक्त अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री हुआ करते थे।

मोगेरा ने 2014 तक शाह का केस लड़ा, जब इसकी सुनवाई मुंबई में सीबीआई अदालत में चल रही थी। उन्हें 2018 में बतौर जज नियुक्त किया गया था। अब वह गुजरात के सूरत सेशन कोर्ट में जज हैं। राहुल की सजा बरकरार रखने का फैसला सुनाने के बाद से काॅन्ग्रेस और उसके समर्थक जज और कोर्ट पर हमला कर रहे हैं।

क्यों हो रहा राहुल गाँधी पर केस

उल्लेखनीय है कि राहुल ने 2019 में कर्नाटक की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है।” इसके बाद बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। सूरत की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल 23 मार्च को काॅन्ग्रेस नेता को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी। ताजा फैसले में भी उनकी संसद सदस्यता बहाल नहीं हुई। अब इस मामले में राहत के लिए उन्हें हाईकोर्ट जाना होगा।

ज्ञानवापी मामले में पैरोकार जितेंद्र सिंह पर दिल्ली में हमला, दो लोगों ने पकड़कर बाँह में नीडल चुभोई: शरीर में दर्द, जलन और कंपन

वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे और माता श्रृंगार गौरी प्रकरण की पैरोकार करने वाले विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन पर हमला किया गया है। दिल्ली में उनके बाएँ कंधे में दो लोगों ने सूई की नीडल घोंप दी और फरार हो गए। इससे उनके शरीर में कंपन हो रहा है। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जितेंद्र सिंह विसेन पर यह हमला दिल्ली में हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि इंजेक्‍शन के जरिए उनके बॉडी में कोई जहर, घातक दवा या वायरस डाली गई होगी। डॉक्‍टरों ने उपचार करने के साथ ही जरूरी जाँचे करवाई है। रिपोर्ट आने पर स्थिति साफ होगी।

डॉक्टरों का कहना था कि इंजेक्शन से यदि उनके शरीर में कुछ डाला गया है तो इसका असर करीब एक सप्ताह बाद ही दिखेगा। डॉक्टरों ने जितेंद्र सिंह को एक सप्ताह बाद आकर खून की जाँच कराने की सलाह दी है। इसके बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने कहा कि (18 अप्रैल 2023) की रात को वह दिल्ली के पटेल नगर स्थित अपने घर में खाना खाने के बाद समीप के पार्क में टहलने गए थे। टहलने के बाद जब वह वापस घर आ रहे थे तो दो लोगों ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। उनमें से एक ने उनके बाएँ कंधे पर नीडल जैसी चीज घोंप दी। इसकी वजह से उनके शरीर में दर्द, जलन और कंपन होने लगा।

उन्होंने आगे बताया कि उनके शोर मचाने पर दोनों आरोपित भाग निकले। इसके बाद उन्होंने अपने घर कॉल करके घटना की जानकारी दी। इसके बाद उनके परिजन और पड़ोसी उन्हें डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ले गए। अस्पताल में रात भर उपचार कराने के बाद उन्हें राहत महसूस हुई। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, शरीर में कंपन और घबराहट बनी हुई है।

उधर, शिकायत मिलने के बाद दिल्ली की पटेल नगर थाने की पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार सेन ने बताया कि फिलहाल इस संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के बाद जो तथ्य सामने आएँगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस आसपास के के सीसीटीवी कैमरों की की जाँच कर आरोपितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में पुलिस ने जितेंद्र सिंह का बयान ले लिया है। वहीं, जितेंद्र सिंह का कहना है कि इस घटना से वे और उनका परिवार भयभीत है।

बता दें कि जितेंद्र सिंह पहले भी हमले की आशंका व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मुकदमे से हटने के लिए उन्हें बार-बार धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बार-धमकी मिलने के बावजूद उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई है। गृहमंत्रालय उनकी सुरक्षा की फाइल दबाकर बैठा है।

जितेंद्र सिंह विसेन वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले में याचिकाकर्ता राखी सिंह के वकील हैं। उनकी पत्‍नी किरण सिंह ट्रांसफर एप्‍लिकेशन मामले में प्रतिवादी हैं। इसके साथ ही वे लाटभैरव के साथ ही मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला जैसे अन्य मसलों को लेकर देश भर में 11 मुकदमों की पैरोकारी कर रहे हैं।

‘राघव चड्ढा और परिणीति का हो गया रोका’ : वायरल खबरों के बीच फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर पहुँचीं एक्ट्रेस, पैपराजी के सवाल पर शरमाईं

बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) और आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) एक साथ लंच और डिनर पर नजर आने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। हालाँकि, दोनों ने शादी के सवाल पर चुप्पी साध रखी है। हाल ही में परिणीति को रिंग फिंगर में अँगूठी पहने हुए भी देखा गया था। इसी बीच परिणीति और राघव के ‘रोके’ की खबरें सामने आ रही हैं।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर उनकी एक वीडियो भी खूब वायरल हो रही है, जिसमें उन्हें फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर के बाहर देखा गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, परिणीति और राघव का रोका हो गया है। इनकी शादी इसी साल अक्टूबर के आखिर में हो सकती है। एक वीडियो में पैपराजी उनसे पूछते हैं- “परी जी शादी कब है?” इस पर परिणीति को सवालों से बचकर निकलते देखा जा सकता है।

रिपोर्ट में परिणीति और राघव के एक करीबी के हवाले से लिखा गया है, “दोनों का रोका काफी प्राइवेट तरीके के साथ किया गया। इसमें केवल परिवार के लोग ही शामिल थे। दोनों बहुत खुश हैं। इनकी शादी इस साल अक्टूबर तक होगी। परिणीति और राघव को अभी कोई जल्दबाजी नहीं है। दोनों अपने-अपने काम में बिजी हैं। शादी से पहले वे अपने सभी कामों को पूरा करने में लगे हुए हैं।” ऐसा कहा जा रहा है कि परिणीति की चचेरी बहन प्रियंका चोपड़ा उसी समय Jio Mami Film Festival के लिए भारत आएँगी। पीसी इस फिल्म फेस्टिवल की चेयरपर्सन हैं।

मालूम हो कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजीव अरोड़ा ने 28 मार्च 2023 को राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी थी। इसके बाद से कयास लगाए जाने लगे थे कि दोनों ने सगाई कर ली है। दूसरी तरफ सिंगर और एक्टर हार्डी संधू ने भी डीएनए को दिए साक्षात्कार में दोनों के रिश्तों पर मुहर लगाई थी। उन्होंने कहा था, “आखिरकार परिणीति अपनी जिंदगी में सेटल हो रही हैं। मैं बहुत खुश हूँ कि ऐसा होने जा रहा है। मैं दोनों को बेहतर जीवन के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।”

बता दें कि दोनों को सबसे पहले मुंबई में 23 मार्च 2023 की शाम एक रेस्टोरेंट के बाहर देखा गया था। यहाँ ये दोनों व्हाइट शर्ट पहने हुए दिखाई दिए थे। दोनों के बांद्रा में भी एक साथ लंच करने की खबरें सामने आई थीं। सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद भी दोनों ने अभी तक इस पर खुल कर कोई बयान नहीं दिया है।

बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसी रोहिंग्या महिला, UP में काम-घर-शौहर-आधार… सब कुछ मिल गयाः घुसपैठियों से ये मजहबी हमदर्दी क्यों

उसका नाम फातिमा उर्फ अमीना उर्फ मोटी है। सब उसे मुरादाबाद के निसार अली की बीवी के तौर पर जानते हैं। उसके पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड सहित तमाम दस्तावेज हैं। लेकिन ये उसकी असली पहचान नहीं है। उसकी असली पहचान है, एक घुसपैठिए की। म्यांमार के एक ऐसे रोहिंग्या घुसपैठिए की जो 17 साल पहले बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसी थी। उसे उत्तर प्रदेश में एक मीट फैक्ट्री में काम मिल गया। रहने को घर मिल गया। निकाह करने को शौहर मिल गया। दुनिया को उसकी असली पहचान की भनक तक नहीं लगती यदि मुरादाबाद पुलिस को किसी मुखबिर ने इसकी जानकारी नहीं दी होती।

पुलिस ने मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 17 अप्रैल 2023 को फातिमा और उसकी उन तीन बेटियों (रिहाना, गुलशन और अर्शी), जिन्हें वह लेकर भारत आई थी को गिरफ्तार कर लिया है। उसके शौहर निसार को भी गिरफ्तार किया है। निसार ने पूछताछ में कबूला है कि उसे फातिमा के भारतीय नहीं होने की जानकारी निकाह से पहले से ही थी। यह भी पता था कि वह अवैध तरीके से भारत में घुसी है।

ये सभी लोग पिछले 6-7 महीने से मुरादाबाद के कटघर इलाके की गली नंबर 8 में किराए के एक मकान में रह रहे थे। पूछताछ में फातिमा ने बताया है कि वह 17 साल पहले बांग्लादेश के रास्ते भारत आई थी। इसके बाद वह मेरठ की एक मीट फैक्ट्री में काम करने लगी। यहीं उसकी मुलाकात निसार से हुई।

उसने बताया है कि भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए उसने उम्र में कई साल छोटे निसार से निकाह किया। इसके बाद निसार ने सभी का आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवाया। बैंक में खाते खुलवाए। कुल मिलाकर 17 साल पहले अवैध तरीके से भारत में घुसी एक रोहिंग्या महिला और उसकी बेटियों को वैध नागरिक बनाने में निसार ने पूरी मदद की।

जानकारी के अनुसार रोहिंग्या महिला का निसार से दूसरा निकाह किया था। उसके पहले शौहर की मौत हो चुकी है। उससे उसे तीन बेटियाँ हैं। उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 10 फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, ई-श्रम कार्ड आदि बरामद किए गए हैं। कटघर थाना प्रभारी राजेश कुमार सोलंकी के अनुसार आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 471, विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 सी के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश कर चारों को पुलिस ने जेल भेज दिया है।

लंदन भाग रही थी भगोड़े अमृतपाल सिंह की बीवी किरणदीप, अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोकी गई: खालिस्तानियों की फंडिंग में ब्रिटेन में हो चुकी है गिरफ्तार

‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणदीप कौर को इंग्लैंड भागने के दौरान पुलिस ने पकड़ लिया है। पुलिस कार्रवाई के बीच अमृतपाल लापता है। वहीं, उसकी पत्नी किरणदीप अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से लंदन भागने की फिराक में थी। इस बीच पंजाब पुलिस ने उसे रोक लिया है और इमीग्रेशन विभाग उससे पूछताछ कर रहा है।

पुलिस सूत्रों के हवाले पहले ANI ने पहले खबर दी कि किरणदीप को हिरासत मेें लेे लिया गया है। हालाँकि, इसमें अपेडट करते हुए बाद में ANI ने कहा कि पंजाब पुलिस के सूत्र ने स्पष्ट किया है कि किरणदीप कौर को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है, लेकिन इमीग्रेशन विभाग द्वारा पूछताछ की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने बताया कि है कि किरणदीप कौर पहले से ही पंजाब पुलिस के अधिकारियों के संपर्क में थी। उसे हिरासत में नहीं लिया गया है। इमीग्रेशन डिपार्टमेंट ने उसे रोक लिया है और उसके पति अमृतपाल की पृष्ठभूमि को देखते हुए उससे पूछताछ कर रही है।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणदीप कौर गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को लंदन (London) की फ्लाइट पकड़ने के लिए सुबह लगभग 11:30 बजे अमृतसर एयरपोर्ट पहुँची थी। उसके साथ उसके परिजन भी थे। करीब 1:30 बजे दोपहर में उसकी फ्लाइट थी।

जब इमीग्रेशन के अधिकारियों ने विदेश जाने वालों की लिस्ट में उसका नाम देखा तो उसे रोक लिया और उससे पूछताछ की। सुरक्षा एजेंसियाँ भी किरणदीप कौर से पूछताछ कर रही हैं। वहाँ पंजाब पुलिस के अधिकारी भी मौजूद है।

‘द वीक’ को हाल में दिए एक साक्षात्कार में किरणदीप कौर ने कहा था कि वह नहीं जानती है कि उसका पति अमृतपाल कहाँ है। किरणदीप ने कहा था कि अमृतपाल से उसका कोई संपर्क नहीं है और उसकी सुरक्षित घरवापसी की प्रतीक्षा कर रही है।

किरणदीप कौर ने इंटरव्यू के दौरान खालिस्तान समर्थक अमृतपाल का और उसके क्रिया-कलापों का बचाव किया था। उसने कहा था कि पंजाब पुलिस जिस तरह से अमृतपाल को पकड़ने की कोशिश कर रही है, वह गैर-कानूनी है। उसने कहा था कि वह अमृतपाल को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी।

किरणदीप कौर का इतिहास संदिग्ध है। वह ब्रिटिश नागरिक है। अमृतपाल ने 10 फरवरी 2023 को NRI किरणदीप कौर से शादी की थी। दोनों इंस्टाग्राम के जरिए शादी के एक साल पहले से दोनों संपर्क में थे। शादी के बाद किरणदीप ब्रिटेन से पंजाब चली आई और अमृतपाल के साथ रह रही थी। किरणदीप की पारिवारिक जड़ें जालंधर के कुलारां गाँव में हैं। उसके दादा 1951 में यूके जाकर बस गए थे।

दैनिक भास्कर ने ब्रिटिश खुफिया अफसर के हवाले से बताया था कि किरणदीप अलगाववादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के लिए फंड जुटाती थी। साल 2020 में उसे और 5 लोगों को ब्रिटेन पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। वह ब्रिटेन से खालिस्तान मूवमेंट के लिए फंडिंग करती थी।

‘आराध्या बच्चन को गंभीर बीमारी, दुआओं की जरूरत’: अमिताभ की 11 साल की पोती पर फेक न्यूज फैलाने वालों को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- तुरंत हटाएँ सारे वीडियो

अभिषेक बच्चन व ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी और अमिताभ बच्चन की 11 साल की पोती आराध्या बच्चन की तबीयत को लेकर भ्रामक खबरें फैलाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज (20 अप्रैल 2023) बच्चन परिवार की याचिका पर सुनवाई की। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस दौरान यूट्यूब चैनलों को आराध्या से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा इन चैनलों को समन भी जारी किया गया। इनके साथ गूगल LLC को भी समन जारी किया गया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने गूगल से कहा कि बच्चन परिवार को उन लोगों की पहचान उजागर की जाए जिन्होंने आराध्या को लेकर गलत खबरें फैलाईं। साथ ही ऐसी वीडियो के यूआरएल डिएक्टिवेट करने को भी कहा जिनमें बच्ची को लेकर झूठी खबर है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह की किसी सेलीब्रिटी को लेकर इस तरह की भ्रामक खबरें यूट्यूब पर फैलाई गई हों।

कोर्ट के मुताबिक, “हर बच्चे को आदर सम्मान मिलना चाहिए चाहे वो सेलीब्रिटी हो या फिर कोई आम बच्चा। बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत खबरें दिखाना बिलकुल अस्वीकार्य है।” इस मामले में कोर्ट ने गूगल से ऐसी वीडियोज को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने को कहा है। वहीं केंद्र सरकार से भी कहा है कि ऐसे कंटेंट, समान वीडियो या संबंधित कंटेंट के एक्सेस को ब्लॉक किया जाए।

बच्चन परिवार ने हाईकोर्ट में बताई आराध्या की स्थिति

बता दें कि आराध्या को लेकर फैलाई जा रही फेक खबरों के खिलाफ बच्चन परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसी खबरों से उनके परिवार का नाम बदनाम हो रहा है। उन लोगों की फोटो एडिट करके गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। आराध्या का स्वास्थ्य एकदम भला है। वो अस्पताल में भी भर्ती नहीं है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस शंकर बोले, “अगर आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे आप पैसा कमाएँ तो ये आपकी सामाजिक जिम्मेदारी है कि आप अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी चीजें न पोस्ट करें। ऐसी कुछ चीजें होती हैं जिन्हें बिलकुल बर्दाश्त किया ही नहीं जा सकता। ऐसी चीजें उस कैटेगरी में क्यों न आएँ।”

क्या फैलाई गई खबर

जानकारी के मुताबिक, जिन यूट्यूब चैनलों ने आराध्या बच्चन पर गलत खबर फैलाई उसमें उन्होंने दिखाया था कि कैसे आराध्या की सेहत बहुत खराब है और अब उसे दुआओं की जरूरत है। आराध्या की एक बीमार सी लगने वाली तस्वीर भी दिखाई गई थी। एक में तो ये भी कहा गया था कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहीं। बच्चन परिवार की गलती से ऐसा हुआ।

इन्हीं वीडियोज में किए गए दावों पर बच्चन परिवार ने आपत्ति जताई। याचिका में कहा गया था कि आराध्या एक नाबालिग हैं। इस तरह की खबरों का उस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसी खबरें परेशान करने वाली हैं।

कोर्ट में याचिका

इसी के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले पर 20 अप्रैल 2023 को सुनवाई की। आराध्या द्वारा दायर याचिका में 10 संस्थाओं को आराध्या से जुड़े सभी वीडियो को हटाने के लिए कहा गया। Google LLC और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (शिकायत सेल) को भी मामले में पक्षकार बनाया गया।

बच्चन परिवार की तरफ से लॉ फर्म आनंद एंड नाइक की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया कि इस तरह की झूठी खबरें फैलाने का मकसद बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा से लाभ कमाना है। इससे परिवार पर पड़ने वाले असर को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि आराध्या को सोशल मीडिया पर कई बार ट्रोल किया जा चुका है। जिसे लेकर बच्चन परिवार खासकर अभिषेक बच्चन कई मंचो पर नाराजगी भी जता चुके हैं। अभिषेक और ऐश्वया की साल 2007 में शादी हुई थी। आराध्या का जन्म 16 नवम्बर 2011 को हुआ था। आराध्या अक्सर फिल्मी इवेंट्स में अपने पिता और माँ के साथ नजर आती रहती हैं।

ईसाई बने दलितों को भी मिले SC कोटा का लाभ, तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित: कहा- केंद्र करे संविधान संशोधन, धर्म बदलने से खत्म नहीं होता आदि द्रविड़ों का विशेषाधिकार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Tamil Nadu CM MK Stalin) ने बुधवार (19 अप्रैल 2023) को विधानसभा में आरक्षण से संबंधित एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में स्टालिन ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Government) से ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ों को आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया।

प्रस्ताव में कहा गया है, “यह सम्मानित सदन भारत सरकार से आग्रह करता है कि भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जातियों के लोगों को प्रदान किए गए आरक्षण सहित वैधानिक संरक्षण, अधिकारों और रियायतों का विस्तार उन अनुसूचित जातियों के लिए भी करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन करे, जो ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए हैं, ताकि वे सभी सामाजिक न्याय के लाभों का फायदा उठा सकें।”

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के अनुसार, केवल हिंदुओं को अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालाँकि, इसे 1956 में सिखों को शामिल करने के लिए और 1990 में बौद्धों को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया था। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ भी इसी तरह के संशोधन की उम्मीद करते हैं।

उन्होंने कहा कि कि धर्मांतरित लोग ऐतिहासिक रूप से अनुसूचित जाति के थे और उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा देना उचित रहेगा। इससे उन्हें शिक्षा, रोजगार आदि में सामाजिक न्याय का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे दूसरे धर्म में परिवर्तित हो गए, इसलिए उनके अधिकारों से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता है।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के इस प्रस्ताव का मुख्य विपक्षी अन्नाद्रमुक (AIADMK) सहित अन्य दलों ने स्वागत किया। वहीं, भाजपा (BJP) विधायकों ने इसका विरोध किया सदन से वॉकआउट कर गए। इसके बाद सदन में इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।

कोयम्बटूर दक्षिण से भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने कहा कि भाजपा विधायक प्रस्ताव के विरोध में विधानसभा से बाहर चले गए, क्योंकि उनका मानना ​​था कि इसे राजनीतिक कारणों से लाया गया था। प्रस्ताव को आदि द्रविड़ की मदद करने के इरादे से नहीं लाया गया था।

श्रीनिवासन ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2022 में इस मुद्दे की जाँच करने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक आयोग का गठन किया है। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय जुलाई 2023 में याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।

भाजपा विधायक ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा उपाय किए जाने और मामला न्यायपालिका में विचाराधीन होने के बाद यह प्रस्ताव लाने की आवश्यकता क्यों है? हम मुख्यमंत्री स्टालिन से पूछते हैं कि क्या प्रस्ताव का तात्पर्य यह है कि ईसाई धर्म और इस्लाम में परिवर्तित होने वाले आदि द्रविड़ अभी भी छुआछूत का सामना कर रहे हैं।”

बता दें कि 2011 जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की कुल जनसंख्या 7.21 करोड़ है, जिसमें से लगभग 20 प्रतिशत यानी 1.44 करोड़ जनसंख्या आदि द्रविड़ हैं। अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में आयोग के गठन और मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय होने के बावजूद स्टालिन द्वारा इस तरह का प्रस्ताव पेश करना राजनीतिक प्रतीत होता है।

साल 1950 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने अनुसूचित जाति का वर्गीकरण सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों तक ही सीमित किया था। हालाँकि, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध समुदाय को भी इसमें जोड़ा गया।

संविधान में इन दोनों संशोधनों के बाद अनुसूचित जाति की परिभाषा बदल गई। अब संविधान के पैरा तीन (अनुसूचित जाति) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी और धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।

साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि जब कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनता है तो हिंदू धर्म के कारण हो रही सामाजिक और आर्थिक अक्षमता खत्म हो जाती है। इसलिए सुरक्षा देना आवश्यक नहीं रहता।

इसी तरह, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में एक बार कहा था कि भारत का संविधान कहता है कि हिंदू धर्म से ईसाई या इस्लाम धर्म में धर्मांतरण कर लेने के बाद वह व्यक्ति हिंदुओं जातियों के बनाए गए आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता है।

मानहानि मामले में राहुल गाँधी को राहत नहीं, 2 साल की सजा सूरत कोर्ट ने रखी बरकरार: ‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’ कहने पर ठहराए गए थे दोषी

काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को सूरत की सेशन कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। 20 अप्रैल 2023 को कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि मानहानि मामले में उनकी दो साल की सजा बरकरार रहेगी। साथ ही उनकी संसद सदस्यता भी बहाल नहीं होगी। अब इस मामले में राहत के लिए उन्हें हाई कोर्ट जाना होगा।

काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को सूरत की सेशन कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। 20 अप्रैल 2023 को सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। याचिका में उन्होंने मानहानि मामले में 2 साल की सजा पर रोक की गुहार लगाई थी। राहुल गाँधी ने 2019 में कर्नाटक की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है’। इसके बाद बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। सूरत की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल 23 मार्च को काॅन्ग्रेस नेता को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी।

13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। करीब 4 साल बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। हालाँकि उन्हें तुरंत जमानत देते हुए ऊपरी अदालत में अपील के लिए 30 दिनों का समय दिया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी। इसकी पहली सुनवाई पर राहुल दलबल के साथ कोर्ट पहुँचे थे। पहली सुनवाई पर सेशन कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए 10 अप्रैल तक मानहानि मामले में सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा था।

सेशन कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से दी गई दलीलों में से एक में कहा गया था कि न्यायाधीश को उनके कद को उचित श्रेय देना चाहिए था। राहुल गाँधी ने अपने सब्मिशन में कहा था, “उम्मीद की जाती है कि ट्रायल जज दो साल की सजा देने के परिणामों से अवगत होंगे, अर्थात् अनिवार्य अयोग्यता को लेकर। इस तरह की अयोग्यता एक ओर मतदाताओं के जनादेश की अस्वीकृति और दूसरी ओर राजकोष पर भारी बोझ डालती है। इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि जज सजा के आदेश में इस प्रकृति के परिणाम का उल्लेख करेंगे।”

दरअसल, राहुल गाँधी का कहना था कि न्यायाधीश ने उन्हें जो सजा सुनाई वह लोकतंत्र के खिलाफ था, क्योंकि इससे राहुल गाँधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिए। न्यायाधीश को इस परिणाम के बारे में ‘जानना’ चाहिए था। राहुल गाँधी का तर्क यह कहने जैसा था कि एक उद्योगपति को उचित सजा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे उसके व्यवसाय को नुकसान होगा।

परेशानियों से छुटकारा चाहता था सज्जाद हुसैन, मजार के मौलाना ने कहा- जुमे को महिलाओं पर करो हमला: 4 को मार दिया ब्लेड

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने महिलाओं पर ब्लेड से हमला करने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। पता चला है कि मजार के एक मौलाना के कहने पर वह युवतियों पर ब्लेड अटैक कर रहा था। आरोपित की पहचान सज्जाद हुसैन के तौर पर हुई है। वह मोहल्ला बासमंडी का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी के बाद बुधवार (19 अप्रैल 2023) को बरेली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।

बरेली के एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया कि 20 दिनों से सज्जाद युवतियों का पीछा कर उन पर ब्लेड से हमला कर रहा था। शहर के किला थाना क्षेत्र में तीन और प्रेमनगर इलाके में उसने 1 युवती को जख्मी कर दिया था। इन घटनाओं के बाद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच शुरू की और सज्जाद पकड़ा गया। सज्जाद युवतियों को निशाना बनाने के लिए बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल और सनमाइका काटने वाले ब्लेड का इस्तेमाल करता था।

पूछताछ में सज्जाद ने बताया कि वह मुकदमे और घरेलू कलह से परेशान था। इससे छुटकारा पाने के लिए एक मजार के मौलाना से मिला। मौलाना ने सज्जाद से कहा कि यदि वह जुमेरात (गुरुवार) और जुमे (शुक्रवार) के दिन कामकाजी युवतियों को ब्लेड मारकर जख्मी करेगा तो उसे परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। मौलाना की बात मानकर सज्जाद ने युवतियों को जख्मी करना शुरू किया। पुलिस ने मौलाना को भी आरोपित बनाया है। जल्दी ही मौलाना को भी गिरफ्तार करने की बात कही है।

बता दें कि आरोपित सज्जाद पेशे से बढ़ई है और उसने तीन निकाह किए हुए हैं। तीसरी निकाह के बाद दूसरी पत्नी रवीना से सज्जाद का विवाद हुआ। रवीना ने सज्जाद के खिलाफ दुराचार का मुदकमा दर्ज कराया हुआ है। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए सज्जाद किले के पास वाले मजार के मौलाना के संपर्क में आया था।

यमन में ₹1641 के लिए मर गए 85, 300 घायलः रमजान में जकात के लिए जुटे लोगों को कंट्रोल करने के लिए फायरिंग, घबराए लोगों ने एक-दूसरे को कुचला

यमन की राजधानी सना में रमजान के महीने में मची भगदड़ में 85 लोगों की मौत होने की खबर है। 300 से अधिक घायल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार 20 अप्रैल 2023 को ईद से पहले जकात लेने के लिए भारी भीड़ जुटी थी। इस पर काबू पाने के लिए हाउती विद्रोहियों ने फायरिंग की। इसके बाद घबराए लोगों ने एक-दूसरे को ही कुचल दिया।

जकात दो कारोबारी बाँट रहे थे। जकात हासिल करने के लिए पहले धक्का-मुक्की हुई जो बाद में भगदड़ में तब्दील हो गई। हादसे के बाद दोनों कारोबारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। जकात के तौर पर हरेक व्यक्ति को 5 हजार यमनी रियाल दिया जा रहा था। यह भारतीय मुद्रा में करीब 1641 रुपए होता है।

यमन की सरकार के अनुसार दोनों कारोबारी प्रशासन को जानकारी दिए बिना जकात बाँट रहे थे। इस कार्यक्रम में गरीबों को आर्थिक मदद दी जा रही थी। बड़ी संख्या में लोग जकात लेने को जुटे थे। चश्मदीदों अब्देल रहमान अहमद और याहिया मोहसिन ने स्थानीय मीडिया को जानकारी दी कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हाउती विद्रोहियों ने हवा में फायरिंग की। गोलियाँ बिजली के तार से टकराई और पास के ट्रांसफॉर्मर में धमाका हो गया।

ब्लास्ट के बाद लोग घबरा गए और एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे। हादसे में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है। बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। नजदीकी अस्पतालों में 300 से ज्यादा घायल लोगों का इलाज जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक जकात का यह कार्यक्रम एक स्कूल में आयोजित हो रहा था। सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित कई वीडियो वायरल हैं। इसमें दर्जनों शव और चीखते लोगों को देखा जा सकता है। वीडियो में लोग पीड़ितों की मदद करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। हादसे वाली जगह पर खून के धब्बे, जूते और पीड़ितों के कपड़े जमीन पर बिखरे हुए हैं।

बता दें कि जकात एक तरह का दान होता है, जो अमीर मुस्लिम रमजान के महीने में गरीबों को देते हैं। कहते हैं कि अमीर मुस्लिमों को हर साल अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा गरीबों को दान करना फर्ज होता है। हादसे के बाद जकात बाँटने वाले व्यापारियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। बता दें यमन पर साल 2014 से ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों का कब्जा है।