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तिलक लगाने पर प्रताड़ना, इस्लाम कबूलने का दबाव: ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू बच्चों से घृणा का खुलासा, टीचर भी भगवान का उड़ाते हैं मजाक

ब्रिटेन के लिसेस्टर में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के बाद अब आतंकवाद रोधी संस्थान हैनरी जैक्सन सोसायटी (HSJ) ने इस संबंध में अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे ब्रिटेन के स्कूलों में बच्चों को हिंदू विरोधी घृणा का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि ब्रिटेन के स्कूल में हिंदू छात्रों के साथ न केवल त्योहारों पर भेदभाव होता है बल्कि माथे पर तिलक होने की वजह से उन्हें प्रताड़ित किया जाता है, उनके हिंदू होने के लिए उनपर बीफ फेंका जाता है। उन्हें जाकिर नाइक जैसे कट्टरपंथी की वीडियो दिखाकर कहा जाता है कि अगर वो परेशान नहीं होना चाहते तो इस्लाम कबूल कर लें।

उनसे कहा जाता है, “अगर जन्नत जाना है तो इस्लाम कबूल लो। हिंदू तो शाकाहारी होते हैं, फूड चेन के सब नीचे में। हम तुम्हें खा जाएँगे।”

HJS की रिपोर्ट बताती है कि उनके सर्वे में 51 फीसद माता-पिता ने माना कि उनके बच्चों को स्कूल में हिंदू घृणा झेलनी पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 254 अभिभावकों से बात की गई। इस दौरान उन्होंने कई तरह के तरह के खुलासे किए।

अभिभावकों ने बताया कि स्कूल में टीचर बुत पूजन का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं कि हिंदुओं को अपने भगवानों के बारे में ही नहीं पता क्योंकि उनके तो इतने सारे भगवान हैं। एक अभिभावक ने तो ये तक बताया कि उनके बच्चे को स्कूल में माथे पर तिलक लगान के लिए प्रताड़ित किया जाता था। इसके कारण उन्हें अपने बच्चे के लिए ईस्ट लंदन में ही रहते हुए तीन स्कूल बदलने पड़े।

इसी तरह एक ने बताया कि कैसे उनकी बच्ची के ऊपर बीफ सिर्फ इसलिए फेंक गया क्योंकि वो हिंदू है। रिपोर्ट बताती हैं कि हिंदू बच्चों के ऊपर ब्रिटेन के स्कूल में इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं भारत में घटित होने वाली घटनाओं का असर भी ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू छात्रों को भुगतना पड़ता है। एक अभिभावक के मुताबिक अन्य छात्र उनकी बेटी से पूछते थे तुमने हमारा मस्जिद क्यों तोड़ा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी ब्रिटेन के स्कूल में हिंदू छात्रों को प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी।

रिपोर्ट में एक अभिभावक ने बताया, “मेरे बच्चे को कई देवताओं के नाम पर, कास्ट सिस्टम के चलते और भारत में मोदी होने के लिए प्रताड़ित किया जाता है। कुछ लोग तो मेरे बच्चे को जाकिर नाइक की वीडियो दिखाते हैं ताकि वो इस्लाम कबूल कर ले। बच्चे उससे कहते हैं कि हिंदू होने का अर्थ नहीं है।”

गौरतलब है कि पिछले वर्ष ब्रिटेन में कई जगह हिंदू विरोधी हिंसा को अंजाम दिया गया था। उनके धार्मिक चिह्नों को देखते हुए उन्हें निशाना बनाया गया था। उनके घरों और वाहनों पर हमले हुए थे।

गोधरा में ट्रेन जलाने के 8 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, 59 रामभक्त (27 महिला+22 पुरुष+10 बच्चे) जिंदा जलाकर मार डाले गए थे

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की बोगियों में आग लगाकर (Godhra Train Coach Burning Case) 59 लोगों की हत्या करने के 8 दोषियों को जमानत दे दी। ये सभी दोषी इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

इन सभी दोषियों को निचली अदालत और उसके बाद हाईकोर्ट से आजीवन कारावास की सजा मिली है। 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर दोषियों को जमानत दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से फाँसी की सजा पाए 4 दोषियों को जमानत से साफ मना कर दिया।

पीठ ने कहा कि फिलहाल वह उन लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर रही है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने पहले मौत की सजा दी थी और बाद में उनकी सजा घटाकर आजीवन कारावास में बदली गई।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने सत्र न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों पर इन 8 दोषियों को जमानत दी है। दरअसल, 12 दोषियों ने सर्वोच्च न्यायालय में जमानत की याचिका दाखिल की थी। इसको लेकर अदालत ने इस साल 20 फरवरी को दोषियों की उम्र और जेल में बिताए गए समय की जानकारी माँगी थी।

गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने पक्ष रखा और गुजरात उच्च न्यायालय के 2017 के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की फाँसी सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। दरअसल, निचली अदालत ने 20 दोषियों को उम्रकैद और 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि कुछ दोषियों की उम्र अब 60 साल से अधिक हो चुकी है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने अदालत को सूचित किया कि अभियुक्तों में से एक बिलाल इस्माइल गुजराती नहीं जानता था। उसने बयान को पढ़े जाने बिना एक दस्तावेज पर अपने अंगूठे का निशान लगाया था।

मौत की सजा वाले चार दोषियों को लेकर तुषार मेहता ने बेंच से कहा, “मुझे चार दोषियों से उनकी भूमिकाओं के कारण दिक्कत है। उनमें से एक के पास से लोहे का पाइप और दूसरे के पास से एक धरिया मिला था। एक दोषी कोच जलाने में इस्तेमाल किए गए पेट्रोल को खरीदते हुए, उसे रखते हुए और उसे ले जाते हुए पाया गया। उनकी याचिका खारिज की जाए।”

पिछले दिसंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने गोधरा ट्रेन अग्निकांड के 31 दोषियों में से एक फारूक को जमानत दे दी थी। फारूक इस आधार पर जमानत मिली थी कि वह 17 साल सजा काट चुका था और इस मामले में उसकी भूमिका ट्रेन पर पथराव की थी।  

इससे पहले 13 मई 2022 को कोर्ट ने दोषियों में से एक अब्दुल रहमान धंतिया उर्फ कांकट्टो को 6 महीने के लिए जमानत दे दी थी। अब्दुल ने कोर्ट को बताया था कि उसकी पत्नी टर्मिनल कैंसर से पीड़ित है और उसकी बेटियाँ मानसिक बीमारी से गुजर रही हैं। अब्दुल की जमानत को बाद में कोर्ट ने 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दी थी।

बताते चलें कि साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की एक बोगी को दंगाइयों ने जला दिया, जिसमें 27 महिला और 10 बच्चे सहित 59 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। इस घटना के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। माना जाता है कि इस दंगे में दोनों तरफ के लगभग 2000 लोग मारे गए थे।

‘प्रताड़ित महिला अध्यक्ष’ को असम कॉन्ग्रेस का शो काॅज नोटिस, जिस पर उत्पीड़न का आरोप वह कर्नाटक में पार्टी का स्टार प्रचारक

डॉ. अंगकिता दत्ता (Angkita Dutta) को असम काॅन्ग्रेस ने शो काॅज नोटिस भेजा है। असम प्रदेश यूथ काॅन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता ने यूथ काॅन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) पर उत्पीड़न और बदजुबानी का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया था कि उनकी शिकायतों पर राहुल गाँधी ने भी गौर नहीं किया और प्रताड़ना का सिलसिला चलता रहा। इतना ही नहीं अंगकिता के आरोपों के बाद काॅन्ग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की जो सूची जारी की थी, उसमें भी श्रीनिवास का नाम था। दूसरी ओर अंगकिता को अपने ट्विटर बाॅयो में ‘प्रताड़ित महिला अध्यक्ष’ लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

श्रीनिवास बीवी के खिलाफ गुवाहाटी के दिसपुर में अंगकिता ने शिकायत भी दी है। इसके बाद प्रदेश कॉन्ग्रेस ने अंगकिता से मामले पर स्पष्टीकरण माँगा है। मिली जानकारी के अनुसार अंगकिता के आरोपों के बाद APCC अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को उन्हें शो कॉज नोटिस दिया। अंगकिता को जवाब देने के लिए 2 दिनों का समय दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक दिसंबर 2022 में भी प्रदेश कॉन्ग्रेस की तरफ से अंगकिता को कारण बताओ नेटिस जारी किया जा चुका है। डॉ. अंगकिता दत्ता ने आरोप लगाया है कि पिछले 6 महीने से श्रीनिवास BV और यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव उनका उत्पीड़न कर रहे थे।

18 अप्रैल को अंगकिता ने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को टैग करते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे। उन्होंने ट्विटर पर अपनी योग्यता और शिक्षा के बारे में जानकारी देने के बाद श्रीनिवास BV पर उत्पीड़न और बदजुबानी के आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था, “मैंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से PhD की डिग्री प्राप्त की। हम पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए चुप्पी साधे रहते हैं। लेकिन, श्रीनिवास द्वारा प्रताड़ना कम नहीं होती।” उन्होंने बताया है कि श्रीनिवास BV ने उन्हें कई बार प्रताड़ित किया है।

डॉ. अंगकिता दत्ता ने की मानें तो उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी को भी प्रताड़ना की जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंगकिता का आरोप है कि स्त्री होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ। उनकी मानें तो पार्टी आलाकमान के सामने ही वे कई बार प्रताड़ना का शिकार हुई, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। अंगकिता ने प्रियंका गाँधी से पूछा था कि लड़की हूँ लड़ सकती हँ के नारे का क्या हुआ? बकौल अंगकिता वे महीनों से शिकायतों पर एक्शन की उम्मीद कर रही थीं। अब उन्हें ही नोटिस थमा दिया गया है।

उधर महिला उत्पीड़न के आरोपों के बावजूद कॉन्ग्रेस ने अपने नेता श्रीनिवास BV को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में जगह दी है। बता दें कि कर्नाटक में 10 मई, 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि नतीजे 13 मई को जारी किए जाएँगे।

अतीक-अशरफ को गोली मार गिराने के बाद अचानक बंद हुए 3000 मोबाइल नंबर, उमेश पाल की हत्या के बाद रडार पर थे: रिपोर्ट में दावा STF ने शुरू की जाँच

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के काॅल्विन हाॅस्पिटल के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्टों के अनुसार उसके बाद से राज्य के करीब 3000 मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गए हैं। बताया गया है कि इसी साल फरवरी में उमेश पाल की हत्या के बाद इन नंबरों की निगरानी की जा रही थी। अब अचानक इनके बंद होने की वजह पता लगाने के लिए एसटीएफ ने पड़ताल शुरू कर दी है।

बंद हुए नंबर राज्य के 22 अलग-अलग जिलों के हैं। ज्यातादर नंबर ऐसे थे जिनके अतीक से जुड़े होने का अंदेशा था। कुछ नंबर अन्य आपराधिक गिरोह से जुड़े लोगों के भी थे। कुछ रिपोर्टों में बंद हुए मोबाइल नंबरों की संख्या 800 बताई जा रही है। इन नंबरों के बंद होने के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी एसटीएफ ने इन मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल की हत्या के बाद अपराधियों की तलाश के लिए अतीक अहमद के रिश्तेदारों व साथियों के लगभग 3000 से अधिक नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गया था। इसके बाद एसटीएफ को केस से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली थीं। सर्विलांस की मदद से ही एसटीएफ असद और गुलाम तक पहुँची थी। दोनों झाँसी में हुए मुठभेड़ में मार गिराए गए थे।

इसके बाद ही 15 अप्रैल को अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज कॉल्विन हॉस्पिटल में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद तीन से चार दिनों में ही सैकड़ों की संख्या में मोबाइल स्विच ऑफ हो गए। एसटीएफ का कहना है कि कुछ नंबरों से महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही थी। सर्विलांस के जरिए ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही थी जिनके संपर्क में आरोपित आ सकते थे। अचानक इन नंबरों के बंद होने से जाँच प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार एसटीएफ ने लखनऊ, प्रयागराज, बाराबंकी, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, अजमेर, शाहजहाँपुर, झाँसी, हरदोई, बरेली, सहारनपुर सहित कई अन्य जगहों के लोगों के नंबर सर्विलांस पर लगाए थे। लेकिन ये नंबर अब स्विच ऑफ हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस के सवालों और कार्रवाई से बचने के लिए माफिया के रिश्तेदारों और जानने वालों ने अपने-अपने नंबर बंद कर लिए हैं।

याद है ऐतराज की ‘सोनिया’, असल जिंदगी में वैसा ही बनने लगी थीं प्रियंका चोपड़ाः कहा- माँ ने होश दिलाया, खुद की ही वीडियो देख हो गई थी शर्मिंदा

बॉलीवुड से हॉलीवुड का रुख करने वाली एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) ने ‘ऐतराज’ फिल्म में अपने किरदार ‘सोनिया’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है। अब्बास-मस्तान के डायरेक्टशन में बनने वाली रोमांटिक थ्रिलर फिल्म में प्रियंका ने नेगेटिव भूमिका निभाई थी।

उन्होंने फिल्म कंपैनियन को दिए इंटरव्यू में बताया, “मैं ‘सोनिया’ के कैरेक्टर में इतना घुस गई थी कि रियल लाइफ में भी उसके जैसा ही व्यवहार करने लगी थी। मैंने बुरा बर्ताव नहीं किया, लेकिन मैं धीरे-धीरे चलने लगी थी। मैं सोच-समझकर बात करने लगी थी। मैं अपनी कॉफी धीरे से उठाती थी।”

वह 59:27 मिनट के वीडियो में 54:53 से लेकर 56:00 के बीच यह बात कहती हैं। प्रियंका चोपड़ा ने खुद को सामान्य स्थिति में वापस लाने का श्रेय अपनी माँ मधु चोपड़ा को दिया।

फिल्म रिलीज होने के 19 साल बाद प्रियंका ने इस फिल्म से जुड़ा एक राज खोला है। यह फिल्म 2004 में रिलीज हुई थी। घटना के बारे में बताते हुए प्रियंका ने बताया कि उनकी माँ ने एक वीडियो भी शूट किया था, सिर्फ यह साबित करने के लिए कि वो कैसे सोनिया की तरह व्यवहार करने लगी थीं और उनकी माँ उन्हें होश में लेकर आई थीं।

प्रियंका ने आगे कहा, “मेरी माँ मुझे जल्दी ही हकीकत की दुनिया में लेकर आईं। मेरी माँ कहती थीं, हैलो, कोई कैमरा नहीं है यहाँ पर। कम बैक होम। मेरे साथ ऐसा सिर्फ एक ही बार हुआ था। यह बहुत मजेदार था।”

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जब फिल्म की शूटिंग हो रही थी, तब वह छोटी थीं। वह अक्षय और करीना के साथ काम करने से भी घबरा रही थीं। उस समय वे बड़े फिल्मी सितारे थे, इसलिए वह अपने किरदार में कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती थीं। यह उनके लिए बड़ा कदम था। पीसी ने कहा, “मैं बहुत शर्मिंदा थी। मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि मुझे अपने किरदारों को सेट पर ही छोड़ना होगा।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका जल्द ही वेब सीरीज ‘सिटाडेल’ में नजर आएँगी। मुंबई और लंदन के बाद अब वह रोम में अपनी वेब सीरीज के प्रमोशन में बिजी हैं। 28 अप्रैल को इस शो की स्ट्रीमिंग अमेजन प्राइम वीडियो पर 28 अप्रैल 2023 को होगी।

रमजान में बच्चों से नमाज पढ़वा रहा था हाथरस का BLS स्कूल: हनुमान चालीसा पढ़कर विरोध, प्रिंसिपल सोनिया और टीचर इरफान-रिजवान निष्कासित

उत्तर प्रदेश के हाथरस में बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाए जाने के बाद अभिभावकों में गुस्सा है। अभिभावकों का आरोप है कि मंगलवार (18 अप्रैल 2023) को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सभा का आयोजन किया गया था। इसी दौरान बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाई गई। अभिभावकों और हिंदूवादी संगठनों के के आक्रोश को देखते हुए स्कूल की प्रधानाचार्य सोनिया और दो शिक्षकों को निष्कासित कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में नमाज पढ़ाए जाने की जानकारी मिलते ही परिजन बुधवार (19 अप्रैल 2023) को स्कूल पहुँचे। उन्होंने नमाज पढ़ाए जाने पर आपत्ति जताते हुए प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में इलाके के हिंदूवादी नेता भी शामिल हुए। विरोध में स्कूल के गेट पर हनुमान चलीसा का पाठ भी किया गया।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा (रक्षासूत्र) भी उतरवा लिए जाते हैं। बच्चों द्वारा टीका लगाने पर या लड़कियों के मेहंदी लगाने पर रोक लगाई जाती है। अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की।

स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों ने भी घटना की पुष्टि की है। इससे संबंधित वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता और अभिभावक दोषी शिक्षकों पर एफआईआर दर्जकर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि छोटे बच्चों को छोड़कर सभी को नमाज पढ़ने के लिए बुलाया गया था। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि छोटे बच्चों से नमाज पढ़वाकर धर्मांतरण की पहली सीढ़ी चढ़वाई गई है।

हालाँकि, स्कूल प्रशासन ने नमाज पढ़वाने की बात से इनकार किया है। बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर कमल शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि कल विश्व धरोहर दिवस था। साथ ही रमजान का महीना का चल रहा था। इसलिए बच्चों से प्रार्थना कराई गई थी। उन्होंने स्कूल में कलावा उतारने की घटना से भी इनकार किया।

लोगों की नाराजगी को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने प्रधानाचार्य सोनिया मैकफर्सन, शिक्षक इरफान इलाही और कंबर रिजवान को निष्कासित कर दिया है। हंगामे को बढ़ता देख जिलाधिकारी ने जाँच के लिए कमेटी बना दी है। कमेटी को 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

पटना में जुमे की नमाज के बाद लगे ‘शहीद अतीक अमर रहें’ के नारे: गजनवी की अगुवाई में सीएम योगी और पीएम मोदी के खिलाफ हुई नारेबाजी

बिहार की राजधानी पटना में रमजान के अंतिम जुमे (शुक्रवार – 21 अप्रैल 2023) की नमाज के बाद मारे गए गैंगस्टर अतीक अहमद के समर्थन में नारे लगे। नमाज के बाद कुछ कट्टरपंथियों ने ‘शहीद अतीक अहमद अमर रहें’ के नारे लगाए। इस दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।

घटना पटना जंक्शन के पास की है। यहाँ स्थित एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद भीड़ बाहर निकल रही थी। इसी दौरान जमकर आपत्तिजनक नारेबाजी की गई। गैंगस्टर अतीक के समर्थन में नारेबाजी करने वाले लोगों का नेतृत्व रईस अंसारी उर्फ रईस गजनवी कर रहा था। बताया जा रहा है कि गजनवी की पटना जंक्शन के पास दुकान है।

सामने आए वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि ‘गजनवी शहीद अतीक अहमद अमर रहें’ के नारे लगा रहा है और उसके साथ खड़े कट्टरपंथी इसे पीछे से दोहरा रहे हैं। इस दौरान ‘योगी-मोदी मुर्दाबाद’ के भी नारे लगाए गए।

गजनवी ने कहा, “आज हमने अल्लाह से दुआ की है कि अतीक अहमद, असद अहमद और अशरफ अहमद की शहादत को कबूल फरमाए। उनको योगी सरकार ने उनको सुनियोजित तरीके से मरवाया है। अतीक अहमद शहीद हुए हैं। रोजा के दिन में उनको अपराधियों के जरिए मरवाया गया है। पूरी दुनिया के मुसलमानों की नजर में वो शहीद हो गया।”

गनजवी ने कहा कि अतीक और उसके अपराधी भाई अशरफ को मरवाने में सरकार और पुलिस, सबका हाथ है। गजनवी से पत्रकारों ने कहा कि अतीक और उसका भाई अशरफ अपराधी था। इस पर गजनवी ने कहा कि अगर दोनों ने गलत काम किया था तो कोर्ट है। उसे सजा होती।

आपत्तिजनक नारे लगाने वाले ने आगे कहा, “उसे फाँसी पर चढ़ा दिया जाता तो हम लोग कुछ नहीं बोलते। पुलिस ने कोर्ट में लिखकर दोनों की रिमांड ली थी। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी।” जिस वक्त गजनवी माइक पर ये सब बातें कह रहा था, उस दौरान उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

बता दें कि 15 अप्रैल 2023 की शाम को अस्पताल में चेकअप कराने के ले जाते हुए तीन अपराधियों ने अतीक और उसके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी अतीक और अशरफ की पुलिस के सामने हुई हत्या को स्क्रिप्टेड बताया था। तेजस्वी ने कहा था, “अतीक जी का नहीं, कानून का जनाजा निकला।”

गजनवी का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि नीतीश जी के राज्य में एक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार को पाकिस्तान न बनने दें। देश इस तरह से खंडित हो जाएगा। वहीं, बीजेपी नेता हरी भूषण ठाकुर ने कहा कि नारे लगाने वालों के घरों पर बुलडोजर चलवाना चाहिए और उसे गोलियों से छलनी कर देना चाहिए।

‘ट्विटर भैया पैसा भर दिए हैं अब तो नील कमल वापस लगा दें’: ब्लू टिक पर मीम की बाढ़ के बीच बोले अमिताभ- हाथ तो जोड़ लिए… अब गोड़वा जोड़े पड़ी का

ट्विटर पर अब ब्लू टिक (Twitter Blue Tick) उन्हीं लोगों का बचा है जो इसके लिए भुगतान कर रहे हैं। लीगेसी वेरिफाइड अकाउंट्स के ब्लूटिक हटा दिए गए हैं। इसके बाद मीम की बाढ़ आई हुई है। जिन लोगों का ब्लू टिक अब नहीं रहा उनमें एक बाॅलीवुड के बिग बी अमिताभ बच्चन भी हैं। उन्होंने ट्वीट कर बताया है कि पैसे देने के बावजूद उनको ब्लू टिक नहीं मिला है।

अमिताभ बच्चन ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को ट्वीट किया, “ए twitter भइया! सुन रहे हैं? अब तो पैसा भी भर दिए हैं हम… तो उ जो नील कमल होत है ना, हमार नाम के आगे, उ तो वापस लगाय दें भैया, ताकि लोग जान जाएँ कि हम ही हैं- Amitabh Bachchan… हाथ तो जोड़ लिए रहे हम। अब का, गोड़वा जोड़े पड़ी का?”

फिल्म क्रिटिक और अभिनेता कमाल राशिद खान उर्फ केआरके ने भी सबस्क्रिप्शन लेने के बावजूद ब्लू टिक हटाए जाने का दावा किया है। उन्होंने लिखा, “मैंने 3 दिन पहले ही ब्लू टिक के लिए सब्सिक्रिप्शन फीस दे दी थी। इसके बावजूद मेरे वेरिफाइड अकाउंट से ब्लू टिक क्यों हटा दिया है?”

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्विटर के ब्लू-चेक सिस्टम के तहत लगभग 300000 वेरिफाइड यूजर्स थे। इनमें से कई पत्रकार, एथलीट और सार्वजनिक हस्तियाँ थीं। इन सबके अकाउंट से ब्लू टिक हटाने के बाद से सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है।

पुलकित नाम के यूजर ने सेलिब्रिटी और दिग्गज हस्तियों के ट्विटर अकाउंट से ब्लू टिक हटाने के बाद एलन मस्क का एडिटेड वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह कहते हैं कि क्या भिगमंगया, क्या देख रहा है, हलवा है क्या। दियाली लगा जा।”

अभिनेता प्रकाश राज लिखते हैं, “बाय बाय ब्लू टिक…. आपके होने से अच्छा लगा…मेरी जर्नी..मेरी बातचीत..मेरी शेयरिंग… मेरे लोगों के साथ जारी रहेगी…आप अपना ख्याल रखें।”

प्रयाग ने ब्लू टिक हटने के बाद बॉलीवुड सेलेब्रिटीज का क्या हाल है, उस पर एक फनी वीडियो शेयर किया है।

राजू बाबू ने भी विराट कोहली का ब्लू टिक हटने पर फनी मीम शेयर किया है।

बता दें कि मस्क ने पहले ही अनपेड अकाउंट्स से 12 अप्रैल 203 को ब्लू टिक हटाने की जानकारी दे दी थी। पहले ब्लू टिक के लिए कोई चार्ज नहीं देना पड़ता था।

‘अवैध मस्जिद हटाओ, वरना यहीं विशाल हनुमान मंदिर बनेगा’ : महाराष्ट्र के सतारा में हिंदू संगठनों की माँग, 2013 में HC भी दे चुका है आदेश

महाराष्ट्र के सतारा में स्थानीय हिंदू संगठन के लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को हटाने की माँग की है। संगठन के लोगों का कहना है कि न्यायालय से आदेश के बाद भी मस्जिद को नहीं हटाया गया है। उन्होंने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार से अवैध निर्माण को हटाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराने का निवेदन किया है। संगठन के तरफ से कहा गया है कि यदि अवैध तौर पर बनाई गई मस्जिद को नहीं हटाया गया तो यहाँ एक विशाल हनुमान मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।

दी गई जानकारी के मुताबिक सतारा जिले के फलटन गाँव की सरकारी जमीन पर साल 2013 में इस अवैध मस्जिद का निर्माण कराया गया था। उसके बाद कोरोना काल के समय लगाए गए लॉकडाउन के समय का फायदा उठाकर मस्जिद परिसर को और विस्तारित कर दिया गया। इलाके में रहने वाले मुस्लिमों ने मस्जिद के आगे एक दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट का बोर्ड लगाया हुआ है। मस्जिद हटाने की माँग कर रहे हिंदुओं के अनुसार इस तरह का कोई भी ट्र्स्ट या दरगाह वजूद में नहीं है। अवैध निर्माण को बचाने के लिए इसे बनाया गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 में दिया था मस्जिद हटाने का आदेश

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई जब फलटन के पास मलथान नाम के स्थान पर रहने वाले मुस्लिमों ने मस्जिद निर्माण शुरू किया था। इसके खिलाफ मंगेश खंडारे नाम के हिंदुवादी नेता ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि मस्जिद को अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाया जा रहा है। खंडारे ने अपनी याचिका के साथ जरूरी सबूत भी अटैच किए थे जिसके आधार पर मस्जिद का निर्माण रोकने की माँग की गई थी।

याचिकाकर्ता द्वारा अवैध ढाँचे का निर्माण करवा रहे लोगों व मालिकाना हक का दावा करने वालों के खिलाफ जाँच व कार्रवाई की माँग की गई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में इस जनहित याचिका का संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को 10 सप्ताह के भीतर मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई करके याचिकाकर्ता को इसकी सूचना देने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद भी आजतक मस्जिक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।

एक मुस्लिम महिला ने किया था सरकारी जमीन पर दावा, कोर्ट कर दिया था खारिज

बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद गाँव की रहने वाली मुमताज मुजावर नाम की मुस्लिम महिला ने जमीन पर दावा किया। महिला ने इस जमीन को अपनी संपत्ति बताते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर कराया। महिला ने दावा किया कि जमीन उसकी चाची की थी। चाची के कोई संतान न होने की वजह से मुमताज उसकी वारिस थी। मुमताज ने दावा किया कि आजादी के बाद भारत सरकार ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया।

इस पर सतारा कोर्ट ने मुमताज से उसकी चाची का नाम और वर्तमान पता पूछा। कोर्ट ने मुमताज से घटना को लेकर अखबार में भी इश्तिहार छपवाने को कहा। मुमताज अदालत के निर्देशों का पालन करने में असमर्थ रही। इसके बाद भी मामला चलता रहा और आखिरकार साल 2019 में अदालत ने मुमताज के दावों को खारिज कर दिया।

स्थानीय हिंदू संगठन के सदस्य अक्षय तवारे ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि महिला द्वारा जमीन पर किए जा रहे स्वामित्व के दावों का कोई आधार नहीं है और कोर्ट ने भी यह माना है। उन्होंने बताया कि मुमताज जिस चाची की बात कर रही हैं वह विभाजन के दौरान पाकिस्तान चली गई थीं। जिसके बाद इस संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया गया। अब यह सरकारी जमीन है और उस पर अवैध मस्जिद बना दी गई है। उन्होंने कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।

अचानक बढ़ गई मुस्लिमों की संख्या

मालथान गाँव के अक्षय ने जानकारी दी कि वर्ष 2012 से पहले यहाँ कोई मस्जिद नहीं थी। मुस्लिम अपने घरों में ही इकट्ठे होकर नमाज़ अदा किया करते थे। इस मस्जिद के निर्माण के बाद इलाके में मुस्लिमों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। अक्षय ने कहा कि किसी ने खाली जमीन पर एक छोटा सा शेड बना दिया। धीरे-धीरे वहाँ एक मस्जिद बना दी गई। अब लोग यहाँ इकट्ठा होते हैं नमाज पढ़ते हैं और इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं। साल 2013 से पहले और उसके बाद के सैटेलाइट तस्वीरों में भी देखा जा सकता है कि मस्जिद का निर्माण बाद में कराया गया।

अवैध निर्माण की पुष्टि करती सैटेलाइट तस्वीरें

मंगेश और अक्षय ने ऑपइंडिया को बताया कि हाल ही में रमजान के महीने के दौरान मस्जिद के आगे एक बोर्ड लगा दिया गया था। इस बोर्ड में में लिखा गया था कि मस्जिद दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट की है। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि ट्रस्ट कब बना? इसके सदस्य कौन हैं? मस्जिद किसने बनवाई? इसकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है? संचालन के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? इन सवालों का जवाब मस्जिद का दावा करने वालों के पास नहीं है।

नहीं तो बनेगा विशाल हनुमान मंदिर

उन्होंने कहा कि मस्जिद में भारी भीड़ जमा होने के कारण हिंदुओं के लिए खासकर महिलाओं के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। अक्षय ने जानकारी दी कि 18 अप्रैल को वे ‘दरगाह और मस्जिद ट्रस्ट’ के बारे में पूछताछ करने के लिए सतारा बंदोबस्ती आयुक्त के कार्यालय (Endowment Commissioner’s office) गए थे। अधिकारियों ने तवारे को जानकारी दी कि इस तरह के किसी भी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है। पूरी जानकारी के लिए वक्फ बोर्ड की वेबसाइट खंगाली जा रही है।

अदालत के फैसले के बाद कार्रवाई न होने के बाद हिंदुवादी संगठनों ने सरकारी अधिकारियों को कई चिट्ठियाँ लिखीं। बावजूद इसके आजतक इस निर्माण को नहीं हटाया जा सका है। हिंदुवादी संगठनों ने अब चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध निर्माण को नहीं हटाया गया तो वे यहीं एक विशाल हनुमान मंदिर का निर्माण करवाएँगे।

एयर इंडिया पायलट ने कॉकपिट में महिला मित्र का बुलाया, बिस्तर लगवाया, क्रू से शराब-स्नैक्स मँगाए: शिकायत के बाद DGCA ने शुरू की जाँच

दुबई से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट के एक पायलट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अपनी महिला मित्र को एंटरटेन करने के लिए कॉकपिट में बैठने की अनुमति दी। वह महिला पायलट के साथ कॉकपिट में एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठी रही। यह मामला इस साल 27 फरवरी का है। इसको लेकर केबिन क्रू के एक सदस्य ने शिकायत की थी। आरोपित पायलट के खिलाफ DGCA ने जाँच शुरू कर दी है और विमानन कंपनी ने पायलट को जाँच तक उड़ान भरने से रोक दिया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट पर आरोप लगाया है कि उसने कॉकपिट को लिविंग रूम जैसा बनाकर रख दिया था। उसने अपनी दोस्त को बिजनेस क्लास में खाना खिलवाया था। उसने उसके स्वागत के लिए केबिन क्रू को पहले से ही निर्देश दे दिया था।

क्रू मेंबर की शिकायत के अनुसार, पायलट ने केबिन क्रू से पूछा था कि क्या बिजनेस क्लास में सीटें खाली हैं? क्योंकि उसकी दोस्त इकोनॉमी क्लास में यात्रा कर रही थी। पायलट चाहता था कि उसे अपग्रेड किया जाए। क्रू मेंबर ने उसे बताया कि कोई सीट खाली नहीं है, तब पायलट ने कॉकपिट में ही अपनी दोस्त का आरामदायक बिस्तर लगवा दिया।

इसके बाद क्रू से वहाँ स्नैक्स और शराब का इंतजाम करने को कहा। मामले से जुड़े लोगों ने HT को बताया कि फ्लाइट क्रू को 3 मार्च के बाद पहली बार डीजीसीए ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को पेश होने के लिए समन भेजा है। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

वहीं, इस मामले में एयर इंडिया ने कहा, “हमने शिकायत को गंभीरता से लिया है। इस मामले में AIR India भी जाँच कर रही है। इतना ही नहीं, हमने डीजीसीए को भी मामले की सूचना दी है और उनकी जाँच में सहयोग कर रहे हैं। हम अपने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर हुए खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। जाँच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि इससे पहले भी एयर इंडिया का विमान कुछ यात्रियों की ऊल-जुलूल हरकतों के कारण विवादों में रह चुका है। 10 अप्रैल 2023 को दिल्ली से लंदन जा रहे विमान को एक यात्री के हंगामे के चलते वापस लौटाना पड़ा था। आरोपित पर यात्रियों के साथ क्रू मेंबर से भी मारपीट का आरोप था। मारपीट में 2 लोगों को चोट भी आई थी।