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JK में सेना के वाहन में लगी आग आतंकी हमला, 5 जवान बलिदान: जैश के सहयोगी PAFF ने ली हमले की जिम्मेदारी

जम्मू-कश्मीर में पुंछ-जम्मू नेशनल हाइवे पर सेना की गाड़ी में लगी भीषण आग कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि आतंकी हमला था। इस हमले में सेना के पाँच जवान बलिदान हो गए हैं। वहीं, एक जवान घायल है, जिसका इलाज चल रहा है। सेना ने बताया कि हमला संभवत: ग्रेनेड से किया गया था, जिसके कारण गाड़ी में आग लग गई।

दरअसल, गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को दोपहर भारतीय सेना का एक वाहन राजौरी सेक्टर में भीमबेर गली और पुंछ के बीच से गुजर रहा था। इसी दौरान अज्ञात आतंकवादियों ने गोलीबारी की। सेना ने कहा, “आतंकवादियों द्वारा ग्रेनेड के संभावित उपयोग के कारण वाहन में आग लग गई।”

जिन जवानों की मौत हुई है, वे सभी राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के थे। वे काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन के लिए तैनात किए गए थे। हमले के बाद सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। बताया जा रहा है कि हमला करने वाले आतंकियों की संख्या चार थी।

दरअसल इस इलाके में पहले भी आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आतंकी ग्रुप ने भारी बारिश का फायदा उठाकर गश्त पर निकले इस वाहन पर हमला कर दिया। इस हमले में वाहन आग की चपेट में आ गया और सेना के जवान अपनी जान गँवा बैठे।

उधर, इस हमले की ज‍िम्‍मेदारी आतंकवादी संगठन पीपुल्स एंटी-फ़ासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली है। PAFF पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) द्वारा समर्थित आतंकी संगठन है। वह पहले भी कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है।

यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे से घटना की जानकारी ली। जनरल पांडे ने आतंकवादी हमले और पाँच सैनिकों की मौत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना जमीनी स्थिति पर नजर रख रही है और उचित कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश को देखते हुए वाहन पर बिजली गिरने की आशंका जताई जा रही थी। कहा जा रहा था कि हो सकता है कि बिजली गिरने के कारण वाहन में आग लग गई हो। हालाँकि, यह आशंका अब जाकर दूर हुई है और वास्तविक स्थिति का पता चला है।

’15 साल के हाफिज मुर्तजा को मारकर हिंदुओं ने पेड़ से टाँग दिया’: महाराष्ट्र के बीड में मुस्लिम लड़के की मौत पर कट्टरपंथी फैला रहे झूठ, जानिए सच

महाराष्ट्र के बीड जिले के मजलगाँव तालुका के एक गाँव में 15 साल के मुस्लिम लड़के की फंदे से लटकती लाश मिलने के बाद इलाके में हंगामा हो गया। कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर फैलाया कि इसके पीछे हिंदू संगठनों का हाथ है। हालाँकि पुलिस ने जब मामले की जाँच की तो सच कुछ और निकला।

देख सकते हैं कि कैसे जामिया टाइम्स के अहमद खबीर ने ट्वीट किया, “15 साल के हाफिज मुर्तज़ा शेख अपनी बहन के साथ जलाने के लिए लकड़ी लाने गया था। तभी हिंदुत्व समूह ने उसे घेर लिया और उसे पीटना शुरू कर दिया। बहन मदद के लिए घर की ओर दौड़ी, जब लौटी तो देखा कि भाई का शव पेड़ पर लटका हुआ है।”

इसी तरह प्रोपेगेंडाबाज अशोक स्वैन ने भी इस घटना के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया।

हालाँकि पुलिस ने इस केस की जाँच में पाया कि घटना के पीछे कोई कम्युनल एंगल नहीं है।

खबरों के मुताबिक, मृतक गुलाम मोहम्मद हाफिज मुर्तजा शेख कुछ लकड़ियाँ लेने गया था। वह कैलाश दके के खेत में घुस रहा था कि तभी उसे कैलाश दके और महादेव दके ने पकड़ लिया। मृतक के अब्बा का आरोप है कि कैलाश और महादेव के साथ एक हनुमंत वानखेड़े नाम के युवक ने भी गुलाम को पीटा।

रिपोर्ट में गुलाम के अब्बा की शिकायत के हवाले से कहा जा रहा है कि कैसे गुलाम ने अपनी बहन को वहाँ से भागने को कहा। मगर जब वापस लौटी तो केवल उसकी लाश मिली। मुर्तजा शेख ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने इन तीनों को अपने खुद पेड़ से लटकाते देखा।

पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि कैलाश दके और गुलाम का कुछ समय पहले झगड़ा हुआ था। गुलाम हमेशा दके के खेत से होकर गुजरता था। मृतक के अब्बा के मुताबिक उनके बेटे को दके ने धमकी भी दी थी कि अगर अगली बार वो खेत के पास दिखा तो उसे मार डालेंगे।

इस संबंध में केस को मजलगाँव ग्रामीण पुलिस थाने में दर्ज करवाया गया है। मिड डे रिपोर्ट के अनुसार, ये मामला पहले आत्महत्या का लग रहा था क्योंकि शरीर पर कहीं भी कोई चोट का निशान नहीं था जिससे लगे कि गुलाम और अन्य तीन लड़कों में कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ।

एसीपी पुलिस इंस्पेक्टर अन्नाराओ खोडेवाड ने कहा, “हमने हत्या के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें 2 दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया है।”

प्रारंभिक जाँच की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले पीड़ित की गाय आरोपित के खेत में घुस जाने और फसल खाने को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था। झगड़े के बाद दोनों परिवार के बुजुर्गों ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और कोई शिकायत पुलिस में नहीं दी गई थी।”

मजलगाँव डिविजन के एएसपी बी धीरज कुमार ने भी इस मामले पर कहा कि ये लड़के की मौत पर लटकने से हुई है। अंतिम निर्णय अभी लिया गया है। ये मामला दो परिवारों और युवाओं के बीच हुए झगड़े का है। एसपी नंद कुमार ठाकुर ने कहा, “पुलिस इस मामले में अफवाह फैलाने वालों और इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।”

क्या शादी के लिए अलग-अलग लिंग का होना जरूरी है: CJI चंद्रचूड़ का सवाल, सुप्रीम कोर्ट में लगातार तीसरे दिन ‘समलैंगिक विवाह’ पर बहस

समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) की मान्यता वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को तीसरे दिन भी सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि क्या विवाह के लिए पति-पत्नी का दो अलग-अलग लिंगों से होना जरूरी है। 

CJI ने समलैंगिक विवाह के मामले की तेजी से सुनवाई को आवश्यक मानते हुए कहा कि सोमवार (24 अप्रैल 2023) से संवैधानिक पीठ बैठेगी। दरअसल, संविधान पीठ सोमवार और शुक्रवार को नहीं बैठती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि अयोध्या मामले में भी संविधान पूरे हफ्ते 5 जजों की बेंच बैठती थी।

बता दें कि इस बेंच में CJI चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एसआर भट्ट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। यह पीठ समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की माँग करने वाली 20 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “हम इन (समलैंगिक विवाह) संबंधों को एक बार का रिश्ता नहीं, बल्कि हमेशा के लिए रिश्तों के रूप में देखते हैं। यह ना सिर्फ शारीरिक, बल्कि भावनात्मक मिलन भी है। हमें विवाह की अवधारणा को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसके लिए पति-पत्नी के अलग लिंग का होना क्या जरूरी है।”

इस मामले में NCPCR ने बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास का हवाला देते हुए समलैंगिक विवाह में बंधने वाले जोड़ों द्वारा बच्चा गोद देने का विरोध किया। इस पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर कोई पिता शराब पीकर अपनी पत्नी से मारपीट करता है तो क्या बच्चों पर इसका असर नहीं पड़ता?

इस दौरान चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने ड्राइवर की बेटी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश में लोग अब ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं। CJI ने कहा, “मेरे ड्राइवर की एक बेटी है और वह उससे खुश है। वह दूसरा बच्चा नहीं चाहता है। लड़का चाहने की धारणा भी अब धीरे-धीरे दूर हो रही है, क्योंकि लोग अब शिक्षित हो गए हैं।”

सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ताओं से अपनी बहस पूरी करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इतना लंबा जिरह करने की जरूरत नहीं है। हालाँकि, याचिकाकर्ता पक्ष की जिरह खत्म न हो पाने के चलते सोमवार को भी उन्हें मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद सरकार और इसका विरोध कर रहे संगठन अगले गुरुवार तक अपनी बात पूरी करें।

इस दौरान चीफ जस्टिस ने सोशल मीडिया में जजों की आलोचना पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि समलैंगिक शादी पर जजों की टिप्पणियों को लेकर उन्हें सोशल मीडिया में ‘ट्रोल’ किया जा रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

दरअसल, सोशल मीडिया पर सबसे अधिक आलोचना मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की उनकी एक टिप्पणी को लेकर हो रही है। दरअसल, CJI ने कहा था कि पूरी तरह पुरुष या पूरी तरह स्त्री होने की कोई अवधारणा नहीं है। सिर्फ लिंग या जननांग के आधार पर इसे तय नहीं किया जा सकता। यह इससे जटिल विषय है।

इस दौरान जस्टिस भट्ट ने कहा कि समलैंगिक विवाह एक प्रवेश द्वार है। यह बहुत सारी संभावनाएँ खोलता है। इतने सारे अधिकार, जिनका आप आनंद ले सकते हैं, जिनका आप हिस्सा हो सकते हैं।

बताते चलें कि केंद्र सरकार समलैंगिक विवाह का विरोध कर रही है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए इसे ‘अर्बन एलिटिस्ट कॉन्सेप्ट’ (शहरों में रहने वाले अभिजात वर्गों की अवधारणा) बताया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दूसरे दिन यानी बुधवार (19 अप्रैल 2023) को कहा था कि इसे एलिट कॉन्सेप्ट बताने के लिए सरकार के पास कोई डेटा नहीं है।

CJI ने कहा था कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले अधिक लोग अपनी यौन पहचान को लेकर मुखर हो रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ये माँगे संभ्रांत शहरी लोगों तक ही सीमित है। इसे साबित करने के लिए सरकार के पास कोई डेटा है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की माँग की है।

समलैंगिक विवाह पर पहले दिन सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से प्रस्तुुत एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि केस पर सरकार अपनी आरंभिक आपत्तियाँ बताना चाहती है। इन आपत्तियों को पहले सुना जाना चाहिए, इसके बाद याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए।

इसके बाद CJI चंद्रचूड़ ने कहा था, “मैं कोर्ट का इंचार्ज हूँ। यह फैसला मैं करूँगा। पहले याचिकाकर्ता को सुना जाएगा। इस अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी यह बताने की अनुमति मैं किसी को नहीं दूँगा।”

अमर्त्य सेन को बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी का अल्टीमेटम, कहा- 15 दिन में कब्जाई जमीन खाली करो, नहीं तो लेंगे एक्शन

बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने नोबेल पुरस्कार विजेता और वामपंथी बुद्धिजीवी अमर्त्य सेन को 13 डेसिमल जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। यूनिवर्सिटी ने प्रस्ताव पारित करने के बाद अपने आदेश में कहा कि अगर अमर्त्य सेन ने दिए गए समय में जमीन को खाली नहीं किया तो फिर बल का प्रयोग किया जाए।

बताया जा रहा है कि अमर्त्य सेन ने यह जमीन अवैध रूप से कब्जाई हुई है। उन्हें इसे खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यानी 19 अप्रैल के ऑर्डर के मुताबिक 6 मई तक सेन को जमीन खाली करनी है। ये जमीन अनुसूचित परिसर के उत्तर-पश्चिमी कोने में 50 फुट लंबी और 111 फुट चौड़ी है।

इसे खाली कराने के लिए विश्वविद्यालय ने अमर्त्य सेन को 17 मार्च और 13 अप्रैल को नोटिस जारी किया था। लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया इसलिए अब सीधे उनकी ओर से जमीन खाली कराने का आदेश दिया गया है।

भारत सरकार की सलाह और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, एक सदी पुराने केंद्रीय संस्थान के अतिक्रमणों पर नियंत्रण पाने और मंत्रालय को रिपोर्ट जमा कराने की जरूरत है। नोटिस में कहा गया, “अमर्त्य सेन और सभी संबंधित लोगों को उक्त परिसर से यदि आवश्यक हो तो बल का प्रयोग करके बेदखल किया जाए।”

इस संबंध में अमर्त्य सेन की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वह अमेरिका में रहते हैं। 1.38 एकड़ की इस जमीन के एक हिस्से पर सेन का पैतृक आवास बना है। सेन इस जमीन को लेकर कहते आए हैं कि ये जमीन उनके पिता ने खरीदी थी और उनके पास इसके दस्तावेज भी हैं।

बता दें कि यूनिवर्सिटी ने इस मामले पर कहा हुआ है कि भारत और बंगाल की सरकार की ओर से कई बार इस संबंध में आदेश जारी किए हैं कि विश्व भारती की जमीन पर अवैध कब्जे को खाली किया जाए जिस पर सेन ने केंद्र पर निशाना भी साधा था। उन्होंने जमीन खाली करने की जगह कहा था कि प्रदेश में केंद्र सरकार का नियंत्रण लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कुलपति को उन पर कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से निर्देश मिला है। 

लॉन्च होते ही दुनिया के सबसे बड़े राॅकेट में विस्फोट: मंगल ग्रह पर स्टारशिप से ही इंसान को ले जाएँगे एलन मस्क, स्पेसएक्स ने कहा- ऐसे ही हम सीखते हैं

स्पेसएक्स के स्टारशिप (Starship) रॉकेट की लाॅन्चिंग गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को असफल रही। यह दुनिया का सबसे विशाल और ताकतवर राॅकेट है। लाॅन्चिंग के कुछ मिनट बाद ही विस्फोट हो गया और राॅकेट आसमान में टुकड़ों में बँट गया। राॅकेट अपने लाॅन्चिंग प्लेटफाॅर्म से तो उड़ान भरने में कामयाब रहा। लेकिन ऊँचाई पर जाने के बाद बूस्टर से अलग नहीं हो पाया। स्पेसएक्स (SpaceX) ने कहा है कि इस तरह के अनुभवों से ही सीख मिलती है। साथ ही भविष्य की लाॅन्चिंग में इस अनुभव से मदद मिलने की बात कही है।

स्टारशिप को भारतीय समयानुसार शाम के करीब सात बजे अमेरिका के टेक्सास स्थित के बोका चिका स्टारबेस से लॉन्च किया गया। करीब 33 किलोमीटर की ऊँचाई पर जाकर मानव रहित राॅकेट में विस्फोट हो गया। इसकी वजह जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। यह स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट था। इससे पहले 17 अप्रैल को तकनीकी वजहों से इसकी लाॅन्चिंग नहीं हो पाई थी। रॉकेट स्पेशएक्स की लंबाई करीब 394 फीट और इसका व्यास 29.5 फीट है।

स्पेसएक्स ने इस लाॅन्चिंग से जुड़ी टीम को बधाई देते हुए कहा है कि ऐसे ही अनुभवों से हम सीखते हैं। यह रोमांचकारी था। आज का परीक्षण हमें भविष्य के लिए तैयार करेगा। अगले टेस्ट को लेकर टीम डाटा जमा और रिव्यू कर रही है। स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने भी ट्वीट कर कहा है कि इससे अगले कुछ महीनों में होने वाली अगली लाॅन्चिंग के लिए काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

स्टारशिप की लाॅन्चिंग इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसकी सफलता इंसानों को इंटरप्लेनेटरी बना सकती है। इसका मोटे शब्दों में अर्थ यह हुआ कि इसकी मदद से इंसान के लिए पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर कदम रखना आसान हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि मस्क की योजना साल 2029 तक इंसानों को मंगल ग्रह पर ले जाकर कॉलोनी बसाने की है।

गुजरात के नरोदा गाम केस में सभी 68 आरोपित बरी, अहमदाबाद की विशेष कोर्ट का फैसला: पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी थे मुख्य अभियुक्त

साल 2002 में हुए गुजरात दंगे के दौरान हुई नरोदा ग्राम हिंसा के मामले में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित सभी 68 आरोपित बरी हो गए हैं। गुजरात की स्पेशल कोर्ट ने 21 साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार (20 अप्रैल) को अपना फैसला सुनाया। इस हत्याकांड में 11 लोगों की मौत हुई थी।

नरोदा गाँव में एक समुदाय के 11 लोगों की हत्या के मामले में कुल 86 लोगों को आरोपित किया गया था। इसमें माया कोडनानी मुख्य आरोपित थीं। हालाँकि, 13 साल चले लंबे ट्रायल के दौरान 18 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, विशेष कोर्ट के प्रिसिंपल सेशंस जज एसके बक्शी ने शाम 5:40 बजे जैसे ही अपना फैसला सुनाया, कोर्ट के बाहर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगने लगे।

दरअसल, इस मामले में 16 अप्रैल 2023 को सुनवाई पूरी हो गई थी। इसके बाद राजधानी अहमदाबाद स्थित विशेष कोर्ट के प्रिसिंपल सेशंस जज एसके बक्शी ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाने की तारीख 20 अप्रैल निर्धारित की गई थी। इस दौरान कोर्ट में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सिर्फ वकील और केस से जुड़े लोग ही अंदर जा सकते थे।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से रामभक्तों को लेकर लौट रही साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई थी। इसमें बच्चे एवं महिलाओं सहित 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। ये आग एक समुदाय के लोगों ने एक साजिश के तहत लगाई थी।

इस नृशंस हत्याकांड के बाद 28 फरवरी 2002 को गुजरात बंद की घोषणा की गई। इस दौरान अहमदाबाद सहित पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इन दंगों के दौरान ही 28 फरवरी को नरोदा गाँव में मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों को कथित तौर पर जिंदा जलाकर मार दिया गया था। उन्होंने कहा था कि कोडनानी को उन्होंने विधानसभा में देखा था।

अमित शाह ने कोर्ट को कहा था कि घटना वाले दिन उन्होंने माया कोडनानी को सुबह 8:40 बजे गुजरात विधानसभा में देखा था। इसके बाद 11 बजे से 11:30 बजे तक उन्हें अमहदाबाद के सोला सिविल हॉस्पिटल में देखा था। हालांकि, अमित शाह ने अपनी गवाही में यह भी कहा था, “मैं नहीं जानता कि विधानसभा से रवाना होने और सोला सिविल हॉस्पिटल पहुँचने के पहले वह कहाँ थीं।”

इस मामले में भाजपा की तत्कालीन विधायक एवं नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत कुल 86 लोगों को आरोपित बनाया गया था। सुनवाई के दौरान 18 लोगों की मौत हो गई। वहीं, पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ माया कोडनानी के बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अमित शाह साल 2017 में अदालत में पेश हुए थे।

माया कोडनानी को नरोदा पाटिया दंगों के मामले में भी दोषी ठहराया गया था, जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उन्हें 28 साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट की ओर से राहत मिल गई। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में माया कोडनानी को बरी कर दिया। वहीं, बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी की उम्र कैद की सजा बरकरार रही।

बताते चलें कि गुजरात दंगों से जुड़े कुल 9 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 8 मामलों का ट्रायल पूरा हो चुका है। जिन मामलों का ट्रायल पूरा हो चुका है उनमें गोधरा कांड, बेस्ट बेकरी, सरदारपुरा मामला, नरोदा पाटिया, गुलबर्ग सोसाइटी, ओडे विलेज, दीपडा दरवाजा और बिलकिस बानो केस शामिल हैं। 

इससे पहले गुजरात की एक अदालत ने 2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान कलोल में अलग-अलग घटनाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के 12 से अधिक लोगों की हत्या और सामूहिक बलात्कार के सभी 26 आरोपितों को बरी कर दिया था। इस मामले के कुल 39 अभियुक्तों में से 13 की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। बाकी 13 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

शो कैंसिल होने पर भड़के रैपर हनी सिंह, इवेंट मैनेजर को किडनैप करके पीटा: मुंबई के थाने में बॉलीवुड सिंगर के खिलाफ शिकायत दर्ज

महाराष्ट्र के मुंबई में बॉलीवुड सिंगर व रैपर हनी सिंह के खिलाफ एक इवेंट आर्गनाइजर के अपहरण और उसे प्रताड़ना देने का मामला दर्ज हुआ है। विवेक रमन नाम के व्यक्ति ने ये शिकायत बीकेसी पुलिस थाने में दर्ज कराई है। शिकायत में हनी सिंह समेत अन्य लोगों को नाम है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया, “एक इवेंट कंपनी के मालिक विवेक रमन ने हनी सिंह और अन्य के खिलाफ अपहरण करने, शहर के एक होटल में उन्हें बंधक बनाकर रखने और मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई है। “

ये शिकायत 19 अप्रैल को थाने में दी गई। रमन ने बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स में हनी सिंह के लिए 15 अप्रैल को एक प्रोग्राम आयोजित करवाया था। मगर कुछ पैसों की ट्रांजैक्शन में गड़बड़ी के कारण इवेंट कैंसिल हो गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इवेंट के कैंसिल होने पर हनी सिंह और उनसे साथी इतना भड़के कि इवेंट ऑर्गनाइजर को उठा ले गए। वहाँ उन्होंने रमन को बंधक बनाया और उनका शोषण भी किया।

रमन ने माँग की है कि इस मामले में हनी सिंह और उनके अन्य साथियों की गिररफ्तारी हो। वहीं पुलिस ने कहा है कि वो इस मामले की जाँच कर रहे हैं। इन दिनों हनी सिंह किसी का भाई किसी की जान फिल्म में गाना गाने के कारण चर्चा में हैं। पिछले दिनों वो टीना थडानी से डेटिंग खत्म होने के कारण खबरों में रह चुके हैं।

मालूम हो कि हनी सिंह के खिलाफ उनकी पत्नी शालिनी तलवार ने साल 2021 में भी घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे। तलवार ने कहा था कि पिछले कुछ सालों में उनसे साथ कई बार मारपीट हुई। वह लगातार डर में जी रही थीं। उनके वकीलों ने बताया था कि मानसिक तौर पर शोषण होने के कारण शालिनी डिप्रेशन में हैं और दवाई लेती हैं।

अपनी याचिका में तलवार ने बताया था कि कैसे उनके साथ जानवरों सा बर्ताव हुआ और उनके पति ने उन्हें धोखा दिया। शालिनी तलवार का आरोप है कि उनका पति कई अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है, अपनी शादी की अंगूठी नहीं पहनता है और शादी की तस्वीरें जारी करने पर मारता है।

राजस्थान में 4 दिन से पड़ा है राम प्रसाद का शव: सुसाइड करने से पहले कहा था- अपनी ही जमीन पर नहीं बनाने दे रहे घर, काॅन्ग्रेस के मंत्री का भी लिया था नाम

राजस्थान के जयपुर में सुसाइड करने वाले राम प्रसाद मीणा का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। 17 अप्रैल 2023 को उन्होंने आत्महत्या की थी। सुसाइड से पहले एक वीडियो बनाया था। इसमें कुछ लोगों पर अपनी ही जमीन पर घर नहीं बनाने देने का आरोप लगाया था। आरोपितों पर कार्रवाई की माँग को लेकर मीणा के परिजन धरने पर बैठे हैं।

20 अप्रैल को काॅन्ग्रेस नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मीणा के घर पहुँचे और परिजनों से मुलाकात की। उससे पहले बीजेपी सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और दीया कुमारी ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। मरने से पहले मीणा ने जिन लोगों पर आरोप लगाया था उनमें राजस्थान की काॅन्ग्रेस सरकार के मंत्री महेश जोशी, होटल रॉयल शेरटन के मालिक मुंजी टांक, देवा अवस्थी, लालचंद देवनानी, गिरधारी जी मंदिर के देवेंद्र शर्मा, ललित शर्मा सहित आठ लोग शामिल हैं।

राम प्रसाद मीणा ने क्यों की आत्महत्या?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रामप्रसाद चाँदी की टकसाल इलाके में रहते थे। गिरधारी मंदिर के पास उनकी जमीन है। वे इस पर मकान बनवाना चाहते थे। लेकिन उन्हें घर बनाने से रोका जा रहा था। इससे परेशान उन्होंने आत्महत्या कर ली।

मंदिर के पास होटल

मंदिर के पास ही देवेंद्र शर्मा होटल का निर्माण करवा रहे थे। राम प्रसाद मीणा ने इस पर सवाल उठाया था। मीणा परिवार का आरोप है कि निगम ने मंदिर के पास होटल निर्माण की अनुमति तो दे दी, लेकिन कागजात होने के बाद भी उन्हें घर नहीं बनाने दिया। कहा जा रहा है कि मीणा परिवार पर जमीन छोड़ने का दबाव डाला जा रहा था। मीणा के सुसाइड के बाद इस होटल को गिरा दिया गया है।

भाजपा सांसदों ने की मीणा परिवार से मुलाकात

आरोपितों की गिरफ्तारी, मुआवजे, परिवार के लिए नौकरी समेत 8 माँगो को लेकर मीणा परिवार धरना दे रहा है। मीणा परिवार को बीजेपी सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और सांसद दीया कुमारी का साथ मिला है। डॉ. किरोड़ीलाल मीणा धरने पर भी बैठे।

सांसद दीया कुमारी ने भी बुधवार शाम को धरनास्थल पर मीणा परिवार से मुलाकात की।

मंत्री महेश जोशी का पक्ष

महेश जोशी ने कहा है कि उनपर मृतक को परेशान करने का आरोप है, लेकिन वे मृतक और उसके परिवार को जानते तक नहीं। जोशी ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्हें गिरधारी मंदिर में अवैध निर्माण की शिकायत मिली थी। मामला मंदिर का था इसलिए उन्होंने जाँच के लिए काम रुकवाने का आदेश दिया था। 2 पक्षों के बीच विवाद की स्थिति में काम रुकवाना सामान्य प्रक्रिया है। जोशी ने कहा कि मरने से पहले 3-4 वीडियो कौन बनाता है? उन्होंने उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।

गिरधारी मंदिर का पक्ष

पूरे मामले पर गिरधारी मंदिर के पुजारी ने भी मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। पुजारी ने बताया कि राम प्रसाद मीणा के पिता राम किशोर मीणा अपने परिवार के साथ 1984 से ही मंदिर परिसर में किराएदार के हैसियत से रहते थे। कुछ सालों बाद मीणा परिवार ने मंदिर को किराया देना बंद कर दिया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें परिसर खाली करने के लिए कहा। मीणा परिवार ने किराए पर मिले हिस्से को खाली करने के स्थान पर इस पर कब्जा जमा लिया।

मंदिर पक्ष इसे लेकर जयपुर किराया प्राधिकरण पहुँचा। प्राधिकरण ने मीणा परिवार को जगह खाली करने का फैसला दिया। इस फैसले को मीणा परिवार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने भी कब्जा खाली करने का फैसला सुनाया। इसके बाद मीणा परिवार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट में भी पुजारी पक्ष को सही ठहराया गया। पुजारी के अनुसार मंदिर परिसर की जमीन को अपना बताते हुए मीणा परिवार ने जाली दस्तावेजों की मदद से पट्टा तैयार करवा लिया है। उन्होंने पट्टे और दस्तावेजों की जाँच की माँग की है।

प्रयागराज में फिर वही सीन… कैमरे के सामने मारी ‘अतीक-अशरफ’ को गोली: 14 अप्रैल को सुरक्षा देख शूटरों ने बदल लिया था माफिया ब्रदर्स की हत्या का प्लान

प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 की कहानी फिर से 20 अप्रैल को दोहराई गई। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की कद-काठी वाले दो लोगों को लेकर पुलिस काॅल्विन हाॅस्पिटल आई। मीडिया ने माफिया भाइयों को घेर लिया। अचानक से तीन शूटरों ने दोनों को मार गिराया और सरेंडर कर दिया। यह सब कुछ उस ज्यूडिशियल कमीशन के सामने हुआ जो अतीक अशरफ हत्या की जाँच को लेकर बनी है। सीन रिक्रिएट करने के दौरान दिखाया गया कि गोली लगते ही पहले अतीक और फिर अशरफ ढेर होकर जमीन पर गिर जाता है।

प्रयागराज के काॅल्विन हाॅस्पिटल के बाहर ही 15 अप्रैल की रात अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या की गई थी। मीडियाकर्मी बनकर आए लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह ने माफिया ब्रदर्स को कैमरों के सामने चंद सेकेंड के भीतर ही मार गिराया था। फिलहाल तीनों शूटर पुलिस रिमांड में हैं। उनसे हत्या के मकसद के लेकर पूछताछ की जा रही है। इस मामले में पाँच पुलिसकर्मी भी सस्पेंड किए गए हैं। हत्या से पहले अतीक से पत्रकारों ने असद के जनाजे में शामिल नहीं होने का कारण पूछा था। अतीक के जवाब देने के बाद अशरफ ने कहा था कि मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम… अशरफ की यह बात कभी पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि इसके बाद ही माफिया भाइयों की हत्या हो गई थी।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शूटरों ने पूछताछ में बताया है कि वे 14 अप्रैल को ही अतीक अहमद की हत्या करना चाहते थे। उनका इरादा कोर्ट में पेशी के दौरान हत्या का था। लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण उन्हें अपना प्लान कैंसिल करना पड़ा। तीनों शूटर माफिया भाइयों के हत्या के इरादे से 13 अप्रैल को ही प्रयागराज पहुँच चुके थे। वे रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में ठहरे थे। जब उन्हें पता चला कि मेडिकल चेकअप के लिए अतीक और अशरफ को काॅल्विन हाॅस्पिटल ले जाया जाएगा तो उन्होंने नए सिरे से प्लान बनाया। माइक और कैमरा के साथ मीडियाकर्मियों के बीच घुस गए और फिर योजना के अनुसार गोलियाँ बरसाकर हत्या कर दी।

गौरतलब है कि उससे पहले 13 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने झाँसी में अतीक के बेटे असद और उसके शूटर मोहम्मद गुलाम को मार गिराया था। उमेश पाल की हत्या में दोनों शामिल थे। इस मामले में अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन भी वांछित है। वह फिलहाल फरार है। उसकी और अतीक गैंग से जुड़े बमबाज गुड्डू मुस्लिम की पुलिस सरगर्मी से तलाश में जुटी है।

दिल्ली के शाहीन बाग से हर महीने ₹15 लाख वसूलती थी शाइस्ता परवीन: अतीक की बीवी को पकड़ने के लिए प्रयागराज-कौशांबी में रेड, ड्रोन का भी इस्तेमाल

अतीक अहमद की भगोड़ी बीवी शाइस्ता परवीन और बहन आयशा नूरी की तलाशी में उत्तर प्रदेश की पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर रही है। पिछले दो दिन से यूपी पुलिस प्रयागराज के कछार क्षेत्र की खाक छान रही है। हालाँकि, शाइस्ता का अभी तक पता नहीं चला है। वहीं, पुलिस को जानकारी मिली है कि दिल्ली के शाहीन बाग से शाइस्ता रंगदारी वसूल करती थी।

उमेश पाल हत्याकांड की प्रमुख सूत्रधार बताई जा रही शाइस्ता परवीन की खोज के लिए पुलिस प्रयागराज और पड़ोसी कौशांबी जिलों के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही है। इन ठिकानों में शाइस्ता और अतीक के रिश्तेदारों के घरों सहित वो सभी संभावित ठिकाने शामिल हैं, जहाँ उसके छुपे होने की आशंका है।

बुधवार (19 अप्रैल 2023) को उत्तर प्रदेश पुलिस ने कौशांबी में कई जगहों पर छापेमारी की। यहाँ तक कि शाइस्ता की खोज के लिए पुलिस ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि गंगा की तलहटी में कुछ अपराधी छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने करीब 2 घंटे तक ऑपरेशन चलाया।

50,000 रुपए की इनामी भगोड़ी शाइस्ता का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है। यूपी एसटीएफ के डीआईजी अनंत देव तिवारी ने कहा था कि बुर्का में होने के कारण उसे खोजने में पुलिस को परिशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खबर ये भी है कि शाइस्ता के साथ अतीक की बहन नूरी और दर्जन भर बुर्के वाली महिलाएँ साथ में चल रही हैं। शूटर साबिर भी उनके साथ साए की तरह लगा रहता है। वे लोग हर समय अपना लोकेशन बदल रहे हैं। कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि शाइस्ता रोजाना अपना फोन और नंबर बदल रही है, ताकि वह पुलिस की पकड़ से बची रहे।

उधर, अतीक को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहीन बाग से हर महीने 15 लाख रुपए की वसूली की जाती थी। ये रकम अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को पहुँचती थी।

पुलिस ने शाहिद को हिरासत में लिया था। उसने ही पुलिस को यह जानकारी दी है। इतना ही नहीं, शाहिद ने अतीक के बेटे असद का नया नंबर यूपी एसटीएफ को दिया था। इसके बाद सर्विलांस के जरिए UP STF झाँसी पहुँची थी। ये भी कहा जा रहा है कि असद को पनाह देने वालों ने ही पुलिस की हिरासत में आने के बाद असद के बारे में जानकारी दी थी।

बताते चलें कि यूपी एसटीएफ ने 13 अप्रैल 2023 को अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम को झाँसी में एक एनकाउंटर में मार गिराया था। जिस दिन कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में असद को दफनाया गया, उसी दिन यानी 15 अप्रैल की रात को मेडिकल कराने के लिए ले जाते समय अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी।