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पिछड़ा वर्ग का अपमान, कोर्ट पर दबाव, अपने लिए अलग कानून… सिंधिया ने राहुल गाँधी से पूछे 3 करारे सवाल, अनिल एंटनी भी बता चुके हैं ‘ट्रॉल’

अनिल एंटनी के बाद अब केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने भी राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को ट्रोल करार दिया है। राहुल गाँधी ने वर्ड प्ले पजल के जरिए गुलाम नबी आजाद, सिंधिया समेत कई नेताओं पर निशाना साधा था। इसको लेकर अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गाँधी पर बड़ा हमला बोला है।

दरअसल, केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर के जरिए राहुल गाँधी से 3 सवाल पूछे हैं। इसमें उन्होंने पिछड़ा वर्ग के अपमान से लेकर कोर्ट पर दबाव बनाने और राहुल गाँधी के लिए अलग कानून की माँग को लेकर सवाल किया है। सिंधिया ने अपने ट्वीट में लिखा है, “स्पष्ट है कि अब आप एक ट्रोल तक सीमित हो चुके हैं। मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाने, और मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की बजाए, इन तीन प्रश्नों का जवाब क्यों नहीं देते?”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अगले ट्वीट में पहला सवाल करते हुए कहा है, “पिछड़े वर्ग को लेकर अपने अपमानजनक बयान के लिए माफी क्यों नहीं माँगते? उल्टा कहते हैं कि आप सावरकर जी नहीं हैं, माफ़ी नहीं माँगेंगे। देश सेवक का अपमान और इतना अहंकार।” राहुल से दूसरा सवाल पूछते हुए सिंधिया ने लिखा है, “जिस न्यायालय पर कॉन्ग्रेस ने सदैव उँगली उठाई, आज अपने स्वार्थ हेतु उस पर दबाव क्यों बना रहे हैं?”

वहीं एक अन्य ट्वीट में केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा है, “आपके लिए नियम अलग क्यों हों? अपने आप को क्या आप फर्स्ट क्लास नागरिक मानते हैं? आप अहंकार में इस कदर ग्रस्त हैं कि शायद इन सवालों की महत्ता भी आपकी समझ से परे है।”

बता दें कि राहुल गाँधी ने शनिवार (8 अप्रैल 2023) को वर्ड प्ले पजल ट्वीट किया था। इस ट्वीट के जरिए उन्होंने गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, एन किरण कुमार रेड्डी, हिमंता बिस्वा शर्मा और अनिल एंटनी पर निशाना साधा था। इस ट्वीट में राहुल ने लिखा था, “सच्चाई छुपाते हैं, इसलिए रोज भटकाते हैं। सवाल वही है कि अडानी की कंपनियों में 20 हजार करोड़ बेनामी पैसे किसके हैं?”

अनिल एंटनी भी बता चुके हैं ट्रोल…

इस ट्वीट को लेकर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी भी राहुल गाँधी को ट्रोल बता चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “राहुल गाँधी एक राष्ट्रीय पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के तथाकथित पीएम उम्मीदवार को देखकर दुःख होता है कि वे एक ऑनलाइन/सोशल मीडिया सेल ट्रोल की तरह बोल रहे हैं न कि एक राष्ट्रीय नेता की तरह। राष्ट्र निर्माण के काम में दशकों तक योगदान देने वाले बड़े दिग्गजों के साथ अपना नया नाम देखकर बहुत खुशी हुई, उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी थी क्योंकि वे भारत और हमारे लोगों के लिए काम करना पसंद करते थे न कि एक परिवार के लिए।” अनिल एंटनी गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे।

कोर्ट में मिलेंगे- हिमंता

यही नहीं, राहुल गाँधी के इस ट्वीट को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने भी राहुल गाँधी को जवाब दिया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “‘यह हमारी शालीनता थी कि हमने आपसे कभी नहीं पूछा कि आपने बोफोर्स और नेशनल हेराल्ड घोटालों की कमाई को कहाँ छुपाया है। आपने कैसे कई बार ओतावियो क्वात्रोची को भारतीय कानून के शिकंजे से बचने दिया। अब हम कोर्ट में ही मिलेंगे।”

‘भारत की सूई की नोक भर भी जमीन कोई नहीं ले सकता, वो जमाना गया’: LAC से 1 km दूर गाँव में रात बिताएँगे अमित शाह, अरुणाचल में चीन को चेताया

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर हैं। यहाँ पर कई योजनाओं का आरंभ करते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा कि अब भारत की सूई की नोंक के बराबर भी कोई जमीन नहीं ले सकता है। उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत की जमीन हथियाने का जमाना चला गया। अब ये नया भारत है।

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश का दौरान करते हुए चीन ने इस पर आपत्ति जताते हुए बयान दिया था। चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा बताता है और उस पर अपना दावा करता है। हाल ही में उसने अरुणाचल प्रदेश के 11 इलाकों का नामकरण करने का भी दुस्साहस किया था। उसने अरुणाचल प्रदेश का जैगनां (Zangnan) नाम दिया है।

अमित शाह अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर हैं और उन्होंने चीन सीमा से सटे एक गाँव किबितू का दौरा किया। यहाँ उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को भी लॉन्च किया। इसके बाद चीन गीदड़ भभकी देने लगा कि इस यात्रा से इलाके की शांति भंग हो सकती है। अरुणाचल को उसने अपना हिस्सा बताते हुए कहा कि यह यात्रा उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि अब वो जमाना चला गया जब भारत की जमीन पर कोई भी कब्जा कर लेता था। आज सूई की नोंक बराबर भी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ITBP और सेना के जवानों के शौर्य के कारण कोई भी भारती की सीमा की ओर आँख उठाकर नहीं देख सकता।

अमित शाह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों में भारत के प्रति कूट-कूटकर प्यार और देशभक्ति भरी हुई है उन्होंने कहा कि यहाँ के लोगों से मिलने पर वे नमस्ते नहीं करते हैं, वे जय हिंद बोलते हैं। यहाँ कोई भी अतिक्रमण नहीं कर सकता और इसकी वजह यहाँ के लोगों की देशभक्ति है।

अमित शाह ने LAC से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित किबिथू गाँव को देश का आखिरी गाँव के बजाय पहला गाँव बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की अब तक की 12 सरकारों ने जो नहीं, उसे नरेन्द्र मोदी की सरकार ने सिर्फ दो कार्यकाल में ही कर दिया। बता दें कि इस गाँव को महत्व देने के लिए अमित शाह चीन की आपत्ति को दरकिनार करते हुए रात में भी इसी गाँव में रुकने फ़ैसला किया है।

अमित शाह ने कहा कि आते हुए उन्होंने राज्य में सैंकड़ों झरने देखे। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने पेमा खांडू को कहा कि एक घर ले लीजिए, ताकि जब मैं वृद्ध हो जाऊँ तो यहाँ रहने आऊँ। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर बच्चा अरुणाचल को सूर्यदेव की पहली किरण की धरती के नाम से जानता है। अरुणाचल भारत माता के मुकुट का एक दिव्य मणि है।”

दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022 से 2026 के लिए सीमावर्ती गाँवों को सड़क के माध्यम से देश से जोड़ने के लिए 2500 करोड़ रुपए सहित 4800 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसे ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ नाम दिया गया है। इसके तहत गाँवों में विकास के जरिए उन्हें स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ युवाओं के विस्थापन भी रोकना शामिल है।

‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के 2967 सीमावर्ती गाँवों को जोड़ने के साथ-साथ स्वावलंबी बनाया जाएगा। पहले चरण में 662 गाँवों को चुना गया है, जिनमें 455 गाँव अरुणाचल प्रदेश के हैं।

गृहमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश में 9 माइक्रो पनबिजली परियोजनाओं का उद्घाटन किया। 10 मेगावाट से लेकर 100 मेगावाट तक की ये छोटी पनबिजली परियोजनाओं के जरिए सीमावर्ती गाँवों तक बिजली पहुँचाई जाएगी। इन 9 परियोजनाओं से 25 गाँवों में रहने वाले 5,000 से अधिक लोगों तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति होगी। 

ममता बनर्जी की TMC और शरद पवार की NCP अब नहीं रही राष्ट्रीय पार्टी, वामपंथी CPI से भी छिना दर्जा, AAP की एंट्री: ECI का फैसला

चुनाव आयोग ने टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीन लिया है। यही नहीं, आरएलडी (यूपी) और बीआरएस (आंध्र) से भी क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी अब राष्ट्रीय पार्टी कहलाएगी। कुछ दलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी दिया गया है।

चुनाव आयोग के अपने बयान में कहा है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया गया था। लेकिन वह इस दर्जे को बरकरार रखने लायक वोट प्रतिशत प्राप्त नहीं कर पाए। ऐसे में यह दर्जा वापस लिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इन पार्टियों को 2 संसदीय चुनावों और 21 राज्यों के विधानसभा चुनावों में पर्याप्त मौके दिए गए थे। अब नियमों के अनुसार ये पार्टियाँ राष्ट्रीय पार्टियाँ नहीं रहेंगी। लेकिन ये पार्टियाँ आगामी चुनावों में आवश्यक वोट प्रतिशत हासिल कर राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे को एक बार फिर हासिल कर सकती हैं।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में आरएलडी, आंध्र प्रदेश में बीआरएस, मणिपुर में पीडीए, पुडुचेरी में पीएमके, पश्चिम बंगाल में आरएसपी और मिजोरम में एमपीसी का क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा रद्द कर दिया गया है। हालाँकि ये पार्टियाँ अब भी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के रूप में बनी रहेगीं। इसके अलावा, नगालैंड में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), मेघालय में वॉयस ऑफ द पीपल्स पार्टी और त्रिपुरा में तिपरा मोथा को क्षेत्रीय का दर्जा दिया गया है। यही नहीं, दिल्ली, गोवा, पंजाब और गुजरात में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर अब आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्ज दिया गया है।

क्या है नियम…

राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को तीन नियमों को पूरा करना होता है। पहला यह है कि पार्टी को कम से कम चार राज्यों में 6 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हों। दूसरा नियम यह है कि लोकसभा चुनाव की सभी सीटों में कम से कम 3 राज्यों में 2 प्रतिशत सीटें हासिल हुई हों। या फिर पार्टी को कम से कम चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा मिला हो।

‘बिहारशरीफ हिंसा की दोषी ही कर रहे जाँच, हिंदुओं को बदनाम करना मकसद’: जिन्होंने रखी राम मंदिर की पहली ईंट, उन्होंने बिहार पुलिस की थ्योरी पर उठाए सवाल

बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ (Bihar Sharif Violence) में रामनवमी जुलूस पर हमला हुआ। इसके बाद भड़की हिंसा (Ram Navami Violence) के लिए अब बिहार पुलिस हिंदुवादी संगठनों को जिम्मेदार बता रही है। पुलिस का दावा है कि एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर दंगों की साजिश रची गई। बजरंग दल के स्थानीय संयोजक कुंदन कुमार को पुलिस इसका मास्टरमाइंड बता रही है। लेकिन विश्व हिंदू परिषद (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Choupal) ने हिंसा को सुनियोजित साजिश और प्रशासनिक विफलता बताया है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार के इशारे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे हिंदुवादी संगठनों को बदनाम करने की नीयत से पुलिस मनगढ़ंत थ्योरी पेश कर रही है।

चौपाल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। वे बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर 1989 को रखी थी। चौपाल ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “हमलोगों को इसकी आशंका पहले ही हो चुकी थी। आज जो पुलिस कह रही है वही बात हिंसा के बाद बिना किसी जाँच के नीतीश कुमार से लेकर राबड़ी देवी तक ने कही थी।” उन्होंने बिहार सरकार की नीयत और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की जाँच किसी केंद्रीय एजेंसी अथवा न्यायिक आयोग से करवाई जाए। सोमवार (10 अप्रैल 2023) को विहिप के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में बिहार के राज्यपाल से भी भेंट की। उनसे रोहतास, नालंदा, भागलपुर, गया सहित राज्य के अन्य जिलों में रामनवमी पर हुई हिंसा की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच का आदेश देने की माँग की गई है।

बिहार में हुई हिंसा को लेकर चौपाल जो सवाल उठा रहे हैं, वही सवाल सोशल मीडिया में भी पूछे जा रहे हैं। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि जिस हिंसा में हिंदुओं के त्योहार (रामनवमी जुलूस) को निशाना बनाया गया। हिंदू की मौत हुई। हिंदुओं की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। उसकी साजिश हिंदू ही क्यों रचेंगे? यह दिलचस्प है कि जो पुलिस-प्रशासन हिंसा को तत्काल रोकने में असफल साबित हुई, जिसकी भूमिका को लेकर पीड़ित सवाल उठा रहे हैं, उसकी जाँच के निष्कर्ष वैसे ही हैं, जिस सुर में हिंसा के बाद से सत्ता पक्ष बोलता रहा है। आइए सिलसिलेवार तरीके से बिहारशरीफ में हुए घटनाक्रम को समझते हैं;

बिहारशरीफ में रामनवमी पर हिंसा

बिहारशरीफ में 31 मार्च 2023 को रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। जब शोभा यात्रा दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव हुआ। आगजनी और फायरिंग भी हुई। 17 साल का गुलशन कुमार दंगाइयों की गोली का शिकार हो गया। 

बिहारशरीफ हिंसा के पीड़ितों के दावे

  • हिंसा में मारे गए गुलशन के भाई विकास ने एक मीडिया संस्थान को बताया था कि वे दोनों भाई राशन और दवाई लेने निकले थे। घर लौट रहे थे तो मस्जिद के पास से फायरिंग हुई। गुलशन को गोली लग गई और वह वहीं गिर गया। आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल पहुँचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बची। इसके बाद पोस्टमार्टम के नाम पर उसे बिहार पुलिस देर रात तक घुमाती रही। विकास के अनुसार बिहार पुलिस ने उसके साथ गाली-गलौज की। उसने पुलिस की करतूत कैमरे में कैद करने की कोशिश की तो मोबाइल छीन लिया। घर वालों से संपर्क नहीं करने दिया।
  • बिहारशरीफ के सोगरा कॉलेज के ठीक पीछे हुई कई हिंदुओं की दुकानों में आगजनी हुई। पीड़ितों ने एक मीडिया संस्थान को बताया कि पेट्रोल बम से लैस 50-60 लोगों की भीड़ ने इसे अंजाम दिया। दुकानों में घुसकर लूटपाट की। अधिकारियों से बार-बार मिन्नत करने के बावजूद फायर ब्रिगेड घंटों बाद पहुँचा, तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पीड़ितों का यह भी दावा है कि बिहारशरीफ में जिस वक्त यह सब हो रहा था, उस वक्त पुलिस-प्रशासन मौके से नदारद था। वे मदद माँगने थाने भी गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
  • एक मीडिया संस्थान से बातचीत में महिलाओं ने हिंदुओं के गायब होने का दावा किया था। हालाँकि बिहार पुलिस ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उसे कोई शिकायत नहीं मिली है। इन महिलाओं ने दावा किया था कि हिंसा के बाद पुलिस उनके घरों में घुसकर पुरुषों को ले गई। महिलाएँ अपनी सुरक्षा को लेकर भी सशंकित थीं। पुलिस पर हिंदुओं को प्रताड़ित करने, गंदी-गंदी गालियाँ देने और थाने से भगाने का आरोप लगाया था।

ये कुछ चुनिंदा दावे हैं। पीड़ितों के कैमरों पर ऐसे दावे करने के कई वीडियो वायरल हैं। ये तमाम दावे न केवल पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हैं, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट है कि रामनवमी शोभा यात्रा पर हमला मुस्लिम बहुल इलाके में हुआ था।

बिहारशरीफ हिंसा पर बिहार पुलिस का दावा

बिहार पुलिस के एडीजी (हेडक्वार्टर) जितेंद्र सिंह गंगवार ने रविवार (9 अप्रैल 2023) बताया है कि बिहारशरीफ की हिंसा सुनियोजित थी। रामनवमी से पहले 457 लोगों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। इसके जरिए आपत्तिजनक संदेश फैलाकर लोगों की भावनाओं को भड़काया गया। उन्होंने बजरंग दल के स्थानीय संयोजक कुंदन कुमार को इसका मास्टरमाइंड बताया है। गंगवार ने बताया कि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस संबंध में अलग से केस दर्ज किया है। इसके अलावा 140 लोगों की गिरफ्तारी होने की जानकारी दी थी।

बिहार पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस मामले में EOU ने सबूतों के आधार पर 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कहा है कि सोची-समझी साजिश के तहत एक ‘विशेष संप्रदाय’ को लेकर भ्रामक संदेश प्रसारित किए गए। मनीष कुमार, तुषार कुमार, धर्मेंद्र मेहता, भूपेंद्र सिंह राणा और निरंजन पांडे को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। साथ ही बताया है कि इनके पास से 5 मोबाइल फ़ोन जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कंटेंट अपलोड करने को लेकर किया गया।

बिहार पुलिस द्वारा प्रेस को जारी किया गया बयान

बिहार पुलिस के दावों पर सवाल क्यों?

कामेश्वर चैपाल ने ऑपइंडिया को बताया, “रामनवमी, हनुमान जनमोत्सव, दुर्गापूजा पर जुलूस निकालने की परंपरा रही है। इसके लिए विधिवत प्रशासन से अनुमति भी ली जाती है। बिहारशरीफ के मामले में भी ऐसा हुआ था। डीएम, एसपी, एसडीएम के साथ बैठकें हुई थी। थानाध्यक्षों ने भी इसको लेकर बैठक की थी। शांति समितियों की बैठक हुई थी। बैठक के दौरान यह भी बताया गया था कि रूट में कौन-कौन सी जगह संवेदनशील है। जिस जगह हमला हुआ, वह भी संवेदनशील है। बैठक के दौरान प्रशासन ने जिस तरह की तैयारियों का भरोसा दिलाया था, वह शोभा यात्रा के दिन नहीं थी। कुछ महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती थी। हमला होने के बाद उन्होंने खुद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के पीछे छिपकर अपनी जान बचाई। यदि यात्रा उस इलाके में गली से गुजर रही होती तो जिस तरीके से हमला किया गया आप कल्पना नहीं कर सकते कि कितने लोगों की उस दिन हत्या कर दी जाती।”

इन दावों पर यकीन किया जाए तो स्पष्ट है कि रामनवमी पर बिहार में हुई हिंसा पूरी तरह से पुलिस-प्रशासन की विफलता थी। लेकिन हिंसा के बाद ही सरकार की तरफ से दोष हिंदुओं पर मढ़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को हवा देने की कोशिश शुरू हो गई। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने 2 अप्रैल को ट्वीट कर इसके लिए संघ को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “बिहार में सद्भाव बिगाड़ने की संघी कोशिश पर बिहार सरकार की पैनी नजर है। जिन राज्यों में बीजेपी कमजोर है, वहाँ बौखलाई हुई है। एक-एक उपद्रवी को चिन्हित कर कठोरतम कारवाई की जा रही है। भाईचारे को तोड़ने के किसी भी भाजपाई ‘प्रयोग’ का हमने हमेशा माकूल जवाब दिया है और देते रहेंगे।” इसी तरह उनकी माँ और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी के लोग दंगा करवाते हैं। वे चाहते हैं कि दंगा हो। सरकार जाँच कराएगी, जिसके बाद सच सामने आएगा। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिंसा को ‘षड्यंत्र’ बताते हुए इसके लिए बीजेपी और असदुद्दीन ओवैसी को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी। ध्यान रहे कि प्रशासनिक नाकामी को छिपाने और दोष मढ़ने का यह सिलसिला बिना किसी जाँच के नतीजों के आने के बगैर ही शुरू हो गया था और अब बिहार पुलिस की जाँच भी उसी लाइन पर बढ़ती दिख रही है।

चौपाल जिस तुष्टिकरण की राजनीति के तहत हिंदुओं को फँसाने का आरोप लगा रहे हैं, उसकी शुरुआत फुलवारीशरीफ में लाल किले की बैकग्राउंड वाली इफ्तार पार्टी में नीतीश कुमार के शिरकत करने से हुई। हिंसा के बीच इस आयोजन को लेकर आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने इसके बाद अपने आधिकारिक आवास पर इफ्तार पार्टी रखी। इसके बाद उनके गठबंधन सहयोगी राजद की ओर से इफ्तार का आयोजन हुआ। दूसरी ओर हिंसा को लेकर विधानसभा में सवाल करने पर पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा को मार्शलों की मदद से सदन से बाहर फिंकवा दिया गया। मिश्रा ने बताया कि बिहार में दंगों, हिन्दुओं पर अत्याचार, रामनवमी जुलूस पर पत्थरबाजी को लेकर जब उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से सदन में आकर जवाब देने को कहा तो उनके साथ यह बर्ताव किया गया।

क्या हिंदुओं को फँसा रही है बिहार पुलिस

ऑपइंडिया ने जब कामेश्वर चौपाल से पूछा कि हिंसा भड़काने को लेकर पुलिस हिंदुओं के खिलाफ साक्ष्य होने की बात कह रही है तो उनका जवाब था, “पुलिस बिहार सरकार के अधीन ही है। जब बिना जाँच के सरकार ने हिंदुओं को दोषी घोषित कर दिया तो पुलिस उससे अलग बात कैसे कहेगी। पुलिस चाहे तो किसी को फँसा सकती है। खुद हथियार रखकर, आर्म्स एक्ट का केस कर सकती है।” बिहार पुलिस की क्षमता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि रामनवमी पर पूरे राज्य में हुई हिंसा की केंद्रीय एजेंसी अथवा हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में जाँच होनी चाहिए। रामनवमी शोभा यात्रा पर हमले पुलिस की नाकामी है। उसी पुलिस से जाँच करवाना तो दोषी से ही मामले की जाँच करवाने जैसा है।

चौपाल ने कहा, “देश भर में हुए आतंकी हमलों में बिहार से गिरफ्तारियाँ हुई हैं। 2013 में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से पहले पटना में धमाके हुए थे। लेकिन बिहार पुलिस को राज्य में मौजूद आतंकियों की कभी भनक नहीं लगती। पर बिहारशरीफ में उसे झटके में साजिशकर्ता और सबूत मिल गए? फुलवारशरीफ और बिहारशरीफ के नाम में भले ‘शरीफ’ हो पर सबको पता है कि ये जगह इस्लामी कट्टरपंथ के हेडक्वार्टर हैं। फुलवारीशरीफ में पीएफआई की राष्ट्रविरोधी साजिश के खुलासे के बाद भी कट्टरपंथी इन जगहों पर सक्रिय हैं। क्या यह महज संयोग है कि इस खुलासे के बाद बिहार में सरकार बदल गई और अब हिंदुओं के त्योहारों पर हमले हुए हैं।”

जैसा OIC का प्रलाप, वैसे ही पुलिस के दावे

मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC ने भी बिहारशरीफ की हिंसा का ठीकरा हिंदुओं पर फोड़ा था। उसने एक बयान में कहा था, “OIC सचिवालय रामनवमी शोभा यात्रा के दौरान भारत के कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं से चिंतित है। कट्टरपंथी हिंदुओं की भीड़ ने 31 मार्च को बिहारशरीफ में मदरसे और लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया।” इस बयान पर भारत सरकार ने OIC को लताड़ लगाते हुए उसके बयान को मजहबी सोच और भारत विरोधी एजेंडे का नमूना बताया था। अब बिहार पुलिस जो दावे कर रही है, वह भी हिंदुओं को ‘कट्टरपंथी’ और मुस्लिमों को ‘विक्टिम’ बताने जैसा ही है।

यह भी अजीब संयोग है कि पश्चिम बंगाल में भी रामनवमी पर हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदुओं पर ही दोष मढ़ा था। अब पूर्व HC जज वाली एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने हिंसा को सुनियोजित बताते हुए इसके लिए पुलिस को दोषी बताया है। साथ ही हिंसा की NIA जाँच को जरूरी बताया है। दोनों राज्यों में यह भी समानता देखने को मिलती है कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से विपक्षी नेताओं को रोका जा रहा है। चौपाल की माने तो ऐसा जानबूझकर 2024 के लोकसभा चुनावों के पहले मुस्लिम वोट बैंक का भरोसा जीतने और हिंदुओं को बाँटने की नीयत से किया जा रहा है।

‘पाखंडी साधु, अंधभक्तों का महाकाल’: कॉन्ग्रेस समर्थक ने प्रेमानंद जी महाराज की बीमारी पर झूठ फैला कर बनाया मजाक, मुस्लिमों ने फटकारते हुए कहा – वो अच्छे साधु

भारत में एक चलन है, जिसके तहत हिन्दू साधु-संतों को निशाना बनाया जाता है। कभी खुद को दलितों का ठेकेदार बताने वाले ऐसा करते हैं तो कभी कट्टर इस्लामी एजेंडा चलाने वाले इन करतूतों में आनंद लेते हैं। रही बात कॉन्ग्रेस समर्थकों की, तो वो इसमें हमेशा आगे रहते हैं। अब वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज को निशाना बनाया गया है। प्रेमानंद जी महाराज के वीडियोज सोशल मीडिया पर लोग काफी पसंद करते हैं और उनके प्रवचन व अनुभव से प्रेरणा लेते हैं।

खुद को कॉन्ग्रेस समर्थक और सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले अनिल पटेल ने प्रेमानंद जी महाराज की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो एक बिस्तर पर लेटे दिख रहे हैं और उनका इलाज हो रहा है। बता दें कि प्रेमानंद जी महाराज खुद कई बार अपनी बीमारी के बारे में बता चुके हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी दोनों किडनी फेल है और प्रतिदिन डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा था कि इतना कष्ट होता है, जो उसे भुगतने वाला ही समझ सकता है।

तस्वीर को शेयर करते हुए अनिल पटेल ने लिखा, “ये है भक्त है, अंधभक्तों का महाकाल। ये वही पाखंडी साधु संत है, जो गाय के गोबर को कोहिनूर हीरे से भी महँगा बताते हैं, और गोमूत्र को सुपर एंटीबायोटिक दवा घोषित करते हैं। आज बीमार हुए तो विज्ञान का सहारा लेकर हॉस्पिटल में भर्ती है, गोमूत्र गाय का गोबर सिर्फ OBC-SC-ST को ही सूट करता है। ये सब देख कर भी अंधभक्तों की दिमाग की बत्ती नहीं जली तो कोई क्या करेगा?”

यहाँ अनिल पटेल ने सरासर झूठ बोला कि प्रेमानंद जी महाराज अब बीमार हुए हैं तो अस्पताल में भर्ती हैं। वो अपनी बीमारी के बारे में पहले भी कई बार बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि बड़े से बड़े कष्ट में भी प्रभु का नाम लेने से आनंद आता है। उनसे एक बार एक व्यक्ति ने पूछा था कि क्या वो संकल्प कर के खुद को ठीक नहीं कर सकते? इस पर उन्होंने कहा था कि संकल्प काम नहीं करेगा, क्योंकि उनका शरीर से अपनापन नहीं रह गया है, उन्होंने अपना सब कुछ अपने आराध्य देव को सौंप दिया है।

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया था कि जिस पर हमारा अधिकार नहीं है, उसके लिए अधिकार के लिए चेष्टा क्यों करे। उन्होंने कहा था कि उनका तन स्वामिनी (राधा) जी का है, इसीलिए अब वो वही करेंगी जो सही होगा। उन्होंने कहा था कि सेवक को अपने लिए सुख नहीं माँगना चाहिए, ये व्याभिचर है। उन्होंने अपनी बीमारी की चर्चा करते हुए कहा था कि इस जगत में न कोई अपना है और न ही दूसरा, क्योंकि अब कोई ‘मैं’ ही नहीं रह गया है।

अनिल पटेल के ट्वीट पर मुस्लिमों ने ही किया प्रेमानंद जी महाराज का समर्थन

खास बात ये है कि अनिल पटेल की इस ट्वीट पर कई मुस्लिमों ने ही उसकी आलोचना की। शाहबाज अल्तमश खान ने लिखा, “ये सही इंसान हैं। इनकी बातें ठीक रहती हैं। कृपया इन्हें बदनाम न करें।” मोहम्मद यासीन सिद्दीकी ने पूछा, “देखो भाई, सभी बाबाओं की बात एक तरफ लेकिन आपने जो लिखा है ये बात इन्होंने कब कही है? दिखाओ तो मान जाऊँ।” तंसीम हैदर ने लिखा, “उनसे सुनना काफी अच्छा होता है। वो एक अच्छे संत हैं।” अबू सैयद दिलावर सिद्दीकी ने लिखा, “ये प्रेम और शांति की बातें करते हैं।” शेख मोहम्मद सलीम ने भी उन्हें अच्छा साधु बताता हुए कहा कि उनके बारे में अनाप-शनाप न बकें।

काजल हिंदुस्तानी पर FIR दर्ज करने को तैयार थी पुलिस, फिर भी हथियारों से लैस भीड़ ने की हिंसा-पत्थरबाजी: ‘सर तन से जुदा’ के नारे, 80 गिरफ्तार

हिंदू कार्यकर्ता काजल सिंघला उर्फ काजल हिंदुस्तानी की गिरफ्तारी की माँग को लेकर मुस्लिम नेताओं के एक समूह ने 31 मार्च 2023 को ऊना पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क किया था। मुस्लिम नेताओं ने आरोप लगाया था कि रामनवमी की शोभायात्रा के बाद आयोजित की एक सभा में काजल द्वारा दिया गया भाषण भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी था। इसके बाद 2 अप्रैल 2023 को काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और 9 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया।

उधर मुस्लिम नेता पुलिस से संपर्क कर रहे थे और इधर 31 मार्च को ही एक मुस्लिम भीड़ सड़कों पर उतरकर काजल पर ईशनिंदा का आरोप लगा रही थी और उनका सिर काटने की माँग करते हुए ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रही थी। काजल के भाषण को लेकर गुजरात के ऊना में हिंसा भी हुई। 1 अप्रैल 2023 को ऊना पुलिस ने मुस्लिम भीड़ के 250 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इनमें से करीब 80 की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

ऑपइंडिया को मिली एफआईआर की कॉपी में कहा गया है कि रामनवमी पर काजल हिंदुस्तानी के भाषण के बाद मुस्लिम भीड़ ने ऊना में हिंसा भड़काई थी। एफआईआर में कहा गया है, “काजल हिंदुस्तानी के भाषण की प्रतिक्रिया के रूप में जानबूझकर साजिश रची गई और लगभग 200 नामजद और गुमनाम लोगों की एक भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ बैट, लोहे की पाइप, तलवार और लोहे के अन्य तेज वस्तुओं से लैस थी।”

FIR में आगे कहा गया है, “लोग अचानक उत्तेजित हो गए और पत्थर और सोडा की खाली बोतलों सहित उनके हाथों में जो भी चीजें थीं, उसे फेंकना शुरू कर दिया। इससे आसपास के लोगों को चोट लगी और संपत्तियों को नुकसान पहुँचा। चूँकि यह गिर सोमनाथ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा घोषित हथियार विरोधी कानून का उल्लंघन था, इसलिए इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था।”

ऊना में हिंसा को लेकर मुस्लिम भीड़ के खिलाफ FIR

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ऊना पुलिस स्टेशन के SI आरआर गलचर ने कहा कि 1 अप्रैल 2023 को मुस्लिम भीड़ द्वारा नारे लगाने के बाद कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे। शाम करीब 7:30 बजे प्रवीनाबेन ने पुलिस को सूचना दी कि ऊना के कुंभारवाड़ा इलाके में भीड़ जमा हो गई है और एक-दूसरे पर पथराव कर रही है।

पुलिस जब मौके पर पहुँची तो 200 से ज्यादा लोग वहाँ जमा हो चुके थे और उनके हाथों में सोडा की बोतलें और पत्थर थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस के अधिकारी हिंसक के पास गए और हाथ के इशारों में उनसे कहा कि वे पत्थर और सोडा की बोतलें न फेंकें। हालाँकि, पुलिस की चेतावनी के बावजूद मुस्लिम भीड़ ऐसा करती रही।

प्राथमिकी में आगे कहा गया है कि वहाँ की स्थिति को देखते हुए और अधिक पुलिस बल को बुलाया गया और पुलिस कार्रवाई के बाद आखिरकार भीड़ तितर-बितर हो गई। पथराव में शामिल लोगों में से कई लोगों को पुलिसकर्मियों ने उनके चेहरे से पहचान लिया। इसके बाद उनके खिलाफ नामजद मकदमे दर्ज हुए। जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है, उनके नाम निम्नलिखित हैं:

  1. यासीनभाई अब्दुल्ला सुमरा
  2. हसमामिया हैदरजी सिराजी
  3. फारूक अजीजभाई मेमन
  4. रफीकबापू बशीरबापू सैयद
  5. मुस्ताकभाई अहमदभाई सैयद
  6. महमदजुनैद महमदशफी सैयद
  7. इस्माईलशा बापूशा फकीर
  8. मोहसिन हाजीभाई मुल्ला
  9. रजाक हयातखान पठान
  10. लियाकतहुसैन दिलावरहुसैन कादरी
  11. दानिश सलीमभाई सुमरा
  12. हसामभाई जमालभाई कुरैशी
  13. सलीम अब्दुल्ला सुमरा
  14. साबिर हाजीभाई मुंशी
  15. इरफान अब्दुल हकीम अंसारी
  16. उस्मान अब्दुल्ला शेख सुमरा
  17. महमद अनीस कादरी
  18. साहिल यासीनभाई सुमरा
  19. निजाम यासीन सुमरा
  20. महमदसफी सैय्यद महमद सैय्यद
  21. सिराज महमद इकबाल फैजलाली सैय्यद
  22. रफीकभाई सैयदमहम्मद सैय्यद
  23. महमदहनिफ सैय्यदमहम्मद सैय्यद
  24. हमद अवेश महमदहनिफ सैय्यद
  25. हनीफभाई इस्माइल शेख
  26. मजगुल साबिर अलीभाई बादशाह
  27. महमूदशाह गुलजारशाह फकीर
  28. जफर शाह हुसैन शाह फकीर
  29. अब्दुल सत्तार बादामियां सिराजी
  30. साबिर अहमद जफई अरब
  31. याकूब इस्माइल शेख
  32. मकसूद इस्माइल शेख
  33. गरीबशाह गुलजारशाह शाहमदार
  34. गुलजार शाह आरिफ शाह फकीर
  35. इम्तियाज हनीफ अब्दुल शेख
  36. भीखू अहमद कुरैशी
  37. जफाई अरबाज अलीभाई अरब
  38. अल्लारखा करीमभाई शेख
  39. मोहसिन करीमभाई शेख
  40. इस्माइल बावनभाई मालेक
  41. आसिफभाई अब्दुलभाई बेलिम
  42. मोहम्मद इरफान इकबाल भाई मेमन
  43. महमदसबीर गुलामहैदर कादरी
  44. वसीम दिलावर छोरा
  45. सिराजभाई मजीदभाई मोदन
  46. इकबाल मुरादभाई बलूच
  47. समीर इकबालभाई बलोच
  48. अबूबकर अबुतालेब मुंडन
  49. इम्तियाज तैयब शाहमदार
  50. सरवर अब्बास कुरैशी
  51. बसीर सिदीभाई सुमरा
  52. यासीन बापू परबवाड़ा
  53. इस्माइल उर्फ जंबो फरीदभाई
  54. मोइन घांची
  55. शब्बीर भूरो
  56. इमरान भूरो
  57. फरीद कुरैशी
  58. सलीम केजीएन
  59. आरिफ भूरो
  60. रईस सुमरा
  61. साहिल जाविदखान
  62. सकलैन सत्तारभाई
  63. सद्दाम मुल्ला मुंशी
  64. कोनेनबापू रजाकभाई
  65. सलीम फकीर
  66. कयूम खान
  67. नाजिम मेमन
  68. सकलैन घांची
  69. रईस खान
  70. जोंटी खटरावालो
  71. इस्माइल कुरैशी
  72. अनीस सिकंदर झाखराव
  73. साहिल कादरी
  74. मारुक कुरैशी
  75. फिरोज मूसा भिस्ती
  76. फरीद भूरो

ये सभी ऊना के रहने वाले हैं और इनके द्वारा पत्थर, सोडा की बोतलें आदि फेंके गए थे। यहाँ तक कि इनके पास लोहे की छड़ें, तलवारें और अन्य हथियार भी थे। इसके कारण वहाँ मौजूद कई लोगों को चोटें आई थीं। हिंसा के कारण वाहनों और घरों को नुकसान पहुँचा था।

ये हिंसा काजल हिंदुस्तानी के भाषण के बाद हुई थी। भाषण के जवाब में पूर्व नियोजित साजिश के तहत करीब 200 नामजद और अनाम लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। भीड़ में शामिल लोगों के खिलाफ IPC की धारा 323, 337, 427, 143, 147, 148, 149, 120 (बी) के साथ-साथ जीपी एक्ट की धारा 135 के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

रमजान के महीने में पाकिस्तान में बम ब्लास्ट, 4 की मौत: इस्लामी मुल्क में लगातार चौथे दिन हुआ हिंसक हमला, पुलिसकर्मियों को बनाया निशाना

पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में भीषण बम धमाका हुआ है। इस धमाके में 2 पुलिकर्मियों सहित 4 लोगों की मौत हो गई। वहीं 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि आतंकियों ने पुलिसवैन को निशाना बनाते हुए इस हमले को अंजाम दिया। बम धमाका सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में स्थित कंधारी बाजार में ईद को लेकर खरीदी हो रही थी। इसी दौरान वहाँ खड़े पुलिस वाहन के पास विस्फोट हो गया। बम धमाके में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 15 लोग घायल हुए हैं। घायलों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए क्वेटा सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया। घायलों में 2 लोगों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। ऐसे में मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।

इस बम धमाके को लेकर एसएसपी ऑपरेशंस कैप्टन जोहैब मोहसिन बलोच ने कहा है कि आतंकियों ने पुलिस वाहन को निशाना बनाकर बम प्लांट किया था। विस्फोटक एक मोटरसाइकिल में रखा गया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार बम धमाके में तीन से चार किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इस विस्फोट से पुलिसवैन समेत 3 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

बम धमाके के बाद के फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें देखा जा सकता है कि जिस मोटरसाइकिल पर बम प्लांट किया गया था, उसके परखच्चे उड़ गए हैं। वहीं पुलिस वैन समेत एक अन्य वाहन को भी नुकसान हुआ है। घटना स्थल पर पूरी तरह से अफरा तफरी का माहौल है। वहीं, एक वीडियो में बाइक जलती हुई भी दिखाई दे रही है।

लगातार चौथे दिन आतंकी हमला

बता दें कि पाकिस्तान में लगातार चौथे दिन आतंकी हमला हुआ है। इससे पहले बलूचिस्तान के कुचलक जिले के किल्ली स्पाइन इलाके में रविवार (9 अप्रैल, 2023) को आतंकियों ने पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई थीं। इस हमले में 2 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। वहीं एक अन्य घायल हुए था।

वहीं, शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को खैबर कबायली जिले की बारा तहसील में भी बम धमाका हुआ था। इस धमाके में 2 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। यही नहीं, शुक्रवार (7 अप्रैल, 2023) को स्वाबी जिले में आतंकियों ने हथगोले से सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया था। इस हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। वहीं 2 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।

मनीष कश्यप की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो सकी सुनवाई: वकीलों ने कहा – बिहार सरकार के इशारे पर दर्ज किए गए झूठे FIR

बिहार के YouTuber मनीष कश्यप की याचिका पर सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को सुनवाई नहीं हो सकी। उन्हें पहले बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिसके बाद तमिलनाडु पुलिस उन्हें ले गई। मनीष कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि इस प्रकरण में उनके खिलाफ दर्ज सारे मामलों को एक जगह ट्रांसफर किया जाए। तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के खिलाफ हुई हिंसा पर वीडियो बनाने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

उन पर फर्जी वीडियो बनाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में मनीष की तरफ से उनके वकील ने कोर्ट नंबर 13 में जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय करोल की पीठ के सामने याचिका लगाई थी। उन्हें केस संख्या 63 दी गई थी। लेकिन, जब लंच हुआ तब तक 43 मामलों की ही सुनवाई हो पाई। लंच ब्रेक के बाद जजों को दूसरी पीठ में बैठ कर सुनवाई करनी थी, इसीलिए ये मामला रह गया। अब मंगलवार को सुनवाई होगी।

मनीष कश्यप का आरोप है कि बिहार सरकार के इशारे पर उनके खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में झूठी FIR दर्ज कराई गई है। 9 मार्च, 1991 को पश्चिम चम्पारण के डुमरी महन्वा गाँव में जन्मे मनीष कश्यप का असली नाम त्रिपुरारी कुमार तिवारी है, जिन्होंने 2016 में पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग पूरी की। उनके पिता भारतीय सेना में रहे हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग से पहले महारानी जानकी कुँवर महाविद्यालय से पढ़ाई की थी।

इससे पहले इस मामले को मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उठाया गया था, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि उन्होंने अभी इसके बारे में जानकारी नहीं ली है। इसीलिए, मनीष कश्यप को अंतरिम राहत नहीं मिल पाई। तमिलनाडु सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और अमित आनंद तिवारी पेश हुए। मदुरै की कोर्ट ने मनीष कश्यप को न्यायिक हिरासत में भेज रखा है। मनीष कश्यप 18 मार्च को आत्मसमर्पण के बाद से ही पुलिस की गिरफ्त में हैं।

‘अब्बा पोर्न स्टार कह कर मारते थे, अश्लील साइट पर अपलोड कर दी गई थी फोटो’: उर्फी जावेद ने की थी आत्महत्या की कोशिश, प्रताड़ना के बाद छोड़ दिया घर

उर्फी जावेद (Urfi Javed) अपनी फोटोज और बयानों के लिए लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं। अब उर्फी ने कहा है कि जब वह 15 साल की थीं तब किसी ने उनकी फोटो पॉर्न साइट पर अपलोड कर दी थी। इसके बाद लोग उन्हें पॉर्न स्टार कहने लगे थे। यहाँ तक कि उर्फी के पिता भी उन्हें पॉर्न स्टार कह उनके साथ मारपीट करते थे। यही कारण है कि उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा।

उर्फी जावेद ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे (Humans of Bombay) को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा है, “मैं जब लखनऊ में थी। तब वहाँ मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर एक खास तरह के कपड़े पहनने से क्यों रोका जा रहा था। मैंने आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी। लेकिन इसके बाद मैंने अपनी लाइफ को एक और मौका देने के बारे में सोच लिया था।”

उर्फी ने आगे कहा है, “जब मैं 15 साल की थी, तब किसी ने मेरी फोटो पोर्न साइट पर अपलोड कर दी थी। यह एक सिंपल फोटो थी। इसमें मैं ट्यूब टॉप पहने हुए थी और इसे फेसबुक पर प्रोफ़ाइल फोटो अपलोड किया था। इस फोटो को बिना मॉर्फ किए डाऊनलोड कर लिया और फिर से पॉर्न साइट पर अपलोड कर दिया। फिर किसी ने वह फोटो देखी और मुझे बताया कि मेरी फोटो पॉर्न साइट पर है। हर कोई मुझ पर आरोप लगाने लगा और मुझे पॉर्न स्टार कहा जाने लगा।”

मॉडल उर्फी जावेद ने आगे कहा है, “यहाँ तक कि मेरे अपने पिता ने भी कहा था कि तुम पोर्न स्टार हो। मुझे लगता है कि मेरे पिता ने इन सबसे सहानुभूति बटोरने की कोशिश की। मेरे पिता रिश्तेदारों से कह रहे थे कि उन्होंने पॉर्न साइट के मालिकों से बात की है। पॉर्न साइट के मालिक यह फोटो डिलीट करने के लिए 50 लाख रुपए की माँग कर रहे हैं। चूँकि मेरे पिता मुझे घर में मार रहे थे, इसलिए मैं चुप रही।”

उन्होंने आगे कहा है कि वह दो साल तक यह सब झेलती रहीं। लेकिन जब वह अपने पिता और रिश्तेदारों से परेशान हो गईं तो घर छोड़ दिया और दिल्ली चली गईं। उस समय वह महज 17 साल की थीं। वहाँ उन्होंने छोटे-मोटे काम करने शुरू किए। इंटरव्यू दिए और ऑडिशन भी दिए। कुछ समय बाद उन्हें एक टीवी सीरियल में काम मिल गया। इसके बाद ‘बिग बॉस’ ओटीटी में अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन वहाँ भी सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उर्फी ने मुंबई जाने का फैसला किया। लेकिन वहाँ वह बेहद अकेली पड़ गई थीं और दोस्तों के साथ रहने का फैसला किया। इसके बाद कपड़ों को लेकर काम करना शुरू कर दिया। उर्फी ने आगे कहा है, “लोगों को यह अच्छा नहीं लगा। दुनिया ने मुझे ट्रोल किया और मेरे काम करने को बकवास बताया। लोग मेरे चरित्र को लेकर सवाल कर रहे थे। लेकिन मैं इंटरनेट पर बातें करने वाले लोगों की बात पर ध्यान दिए बिना मैं अपना काम करती रही।”

क्यों अलग हो रहे हैं कुंडा वाले राजा भैया और बस्ती की राजकुमारी भानवी सिंह, 28 साल पहले हुई थी शादी: क्या MLC अक्षय प्रताप हैं तलाक की वजह

उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और भानवी कुमारी सिंह के तलाक पर सोमवार (10 अप्रैल 2023) को जज के छुट्टी पर होने के कारण सुनवाई टल गई। राजा भैया ने दिल्ली के पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा भैया ने नवंबर 2022 में पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। करीब 28 साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद दोनों के रिश्तो में दरार पड़ गई है। लेकिन, भानवी और राजा भैया के रिश्तों के बीच काफी समय से कड़वाहट की खबरें आती रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि वे कई सालों से अलग भी रह रहे हैं। हालाँकि, यह मामला उस वक्त सुर्खिर्यों में आया, जब भानवी ने राजा भैया के बेहद करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया।

उन्होंने दिल्ली में धारा 420, 467, 468, 471,109 और 120बी के तहत अक्षय प्रताप पर केस दर्ज कराया था। इसके बाद राजा भैया ने अक्षय का समर्थन करते हुए कहा था कि वे अपने भाई के साथ खड़े हैं।

जाने कौन हैं भानवी कुमारी सिंह

भानवी कुमारी सिंह बस्ती राजघराने से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म 10 जुलाई 1974 में हुआ था। भानवी बस्ती राजा के छोटे पुत्र कुँवर रवि प्रताप सिंह की बेटी हैं। कुँवर रवि प्रताप सिंह के 4 बेटियाँ हैं, जिसमें भानवी तीसरे नंबर की हैं। उन्होंने अपनी आठवीं तक की पढ़ाई बस्ती के सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की है। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए अपनी माँ मंजूल सिंह के साथ लखनऊ में चली गईं। बताया जाता है कि वह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ी हुई हैं। राजा भैया और भानवी सिंह की शादी 1995 में हुई थी। दोनों की दो बेटियाँ और दो जुड़वाँ बेटे हैं।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट की माने तो राजा भैया ने करीब दो साल पहले कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने पत्नी भानवी के खिलाफ परिजनों को अपमानित करने और बच्चों की परवरिश में उदासीनता बरतने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे।