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‘इफ्तार पार्टी से निकली नकाबपोश भीड़ ने मंदिर को बनाया निशाना’: VHP ने बताया किसने जलाया जमशेदपुर, कहा- हिंदू ही पीड़ित और हिंदुओं पर ही कार्रवाई

झारखंड के जमशेदपुर में हिंसा के बाद धारा 144 लागू कर दी गई है। इंटरनेट बंद कर दिया गया है। सोमवार (10 अप्रैल 2023) की सुबह सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च किया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अनुसार इफ्तार पार्टी से निकली नकाबपोश भीड़ ने रविवार को एक मंदिर को निशाना बनाया। आगजनी की। इसके बाद हिंसा भड़की। इस इफ्तार पार्टी का आयोजन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से किए जाने का दावा किया गया है।

आरोप है कि हिंसक भीड़ ने एक मंदिर को निशाना बनाया। आसपास की 2 दुकानों में आगजनी और पत्थरबाजी की। एक ऑटोरिक्शा को भी आग के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। मौके पर भारी फ़ोर्स की तैनाती की गई है। हिन्दू संगठनों ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जमशेदपुर के शास्त्री नगर का है। हिंसा के दौरान मजहबी नारे लगने का दावा किया जा रहा है। विवाद की शुरुआत शनिवार को एक धार्मिक झंडे पर माँस का टुकड़ा बाँधने से हुई थी। हिंदू संगठनों ने झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे। लेकिन पुलिस ने बीच में पड़ मामले को शांत करवा दिया था।

रविवार की हुई हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे कदमा इलाके में इंटरनेट बैन कर दिया गया है। कुछ क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है। जमशेदपुर के SSP प्रभात कुमार ने कुछ लोगों के हिरासत में लेने और हालात काबू में होने की जानकारी दी है। जमशेदपुर की DC ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक और भकड़ाऊ बातें न शेयर करने की अपील की है।

JMM की इफ्तार पार्टी से निकले पत्थरबाज

ऑपइंडिया को VHP के जमशेदपुर जिला पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि 9 मार्च को हिंसा के दौरान निशाना बने मंदिर के बगल वाले मोहल्ले में JMM के पवन कुमार और बब्बन राय नाम के 2 नेताओं ने इफ्तार पार्टी रखी थी। उनका दावा कि इसी इफ्तार पार्टी से निकली भीड़ ने चेहरे पर नकाब पहन कर पहले मंदिर पर पत्थरबाजी की और बाद में आसपास की दुकानों में आग लगा दी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए संजीव कुमार ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जिला प्रशासन ने रामनवमी पर DJ आदि नहीं बजाने की चेतावनी दी थी। DJ सीज भी किए गए। शनिवार को मंदिर के झंडे पर माँस की थैली लटका दी गई थी।

संजीव कुमार ने बताया, “ईद आने की वजह से प्रशासन दूसरे पक्ष के लोगों पर कार्रवाई में संकोच कर रहा है। हिन्दू पक्ष से लगभग 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिसमें VHP प्रचार प्रमुख उत्तम दस और बजरंग दल नगर संयोजक शामिल हैं। कई अन्य हिन्दू नेताओं की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। हिन्दू ही आसान टारगेट है यहाँ।”

‘सरकारी पैसे से चलता है BBC’: ट्विटर के लेबल पर बोला मीडिया संस्थान- हम स्वतंत्र, एलन मस्क ने पूछा- आखिर बीबीसी का मतलब क्या होता

एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद सोशल मीडिया साइट पर नए-नए कारनामे होते रहते हैं। कुछ दिन पहले ट्विटर की डिस्प्ले पिक्चर से लोगो बदल दिया गया था। अब खबर है कि ट्विटर ने बीबीसी के ऊपर ‘सरकार द्वारा पोषित (गवर्नमेंट फंडेड मीडिया)’ होने का ठप्पा लगा दिया है।

ट्विटर पर देख सकते हैं कि बीबीसी के अकॉउंट के साथ नीचे में ‘गवर्नमेंट फंडेड मीडिया’ लिखा आ रहा है। बीबीसी के अलावा ट्विटर ने यह ठप्पा पीबीएस, एनपीआर और वॉयस ऑफ अमेरिका पर भी लगाया है।

दिलचस्प बात यह है कि बीबीसी के मुख्य अकॉउंट जिसपर 2.2 मिलियन (22 लाख) के करीब फॉलोवर हैं उसी पर सरकार द्वारा पोषित होने का ठप्पा लगाया गया है। ये लेबल बीबीसी के अन्य ट्विटर अकॉउंट (बीबीसी न्यूज, वर्ल्ड, बीबीसी ब्रेकिंग न्यूज) पर नहीं है।

बीबीसी पर लगा ठप्पा

बीबीसी ने कहा कि वो इस मामले में ट्विटर से बात करके मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। मीडिया हाउस के मुताबिक, “बीबीसी हमेशा से स्वतंत्र रहा है। हमें लाइसेंस फीस के जरिए सिर्फ ब्रिटेन की पब्लिक फंड देती है।” वहीं गवर्नमेंट फंडेड मीडिया का अर्थ होता है कि उस चैनल को सरकार सहयोग दे रही है और कभी भी उस चैनल की नीतियों को अपने फैसलों के अनुसार प्रभावित कर सकती है।

इस बदलाव के बाद कई जगह ट्विटर यूजर्स सफाई दे रहे हैं कि कैसे ट्विटर ने यह गलत किया है और बीबीसी अभी भी स्वतंत्र ही है। हालाँकि इस बीच कुछ लोग इस बदलाव का मजाक भी उड़ा रहे हैं जिसमें एलन मस्क ने भी बीबीसी की चुटकी ली और एक ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए कहा, “आखिर ये बीबीसी का पूरा मतलब क्या है? मैं हर बार भूल जाता हूँ।”

ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि बीबीसी पर अक्सर ब्रिटिश सरकार का प्रोपेगेंडा चलाने का आरोप लगता रहा है। इसके अलावा उसकी फुल फॉर्म भी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन है। लोग बीबीसी की तिलमिलाहट देख पूछ रहे हैं कि क्या तुम ब्रिटिश सरकार से कुछ पैसा नहीं लेते? अगर जवाब हाँ है तो फिर विरोध क्यों कर रहे हो।

बता दें कि इससे पहले बीबीसी ने अमेरिकन एनपीआर नेटवर्क पर भी राज्य पोषित मीडिया होने का ठप्पा लगाया था। इसके बाद एनपीआरल ने कहा था कि वो अपने अकॉउंट से तब तक कोई ट्वीट नहीं करेंगे जब तक कि ये ठप्पा उनके ऊपर से नहीं हटाया जाता।

‘रामनवनी पर हिंसा, रमजान में इफ्तार’ : CM नीतीश से हिंदुओं के सवाल, राबड़ी देवी के घर हुई ‘पार्टी’ की तस्वीर सामने आई

बीते दिनों हिंदुओं के पर्व पर हिंसा होने के कारण खबरों में रहा बिहार अब इफ्तार पार्टियों के कारण चर्चा में है। बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने बिहार के दिग्गज नेताओं को अपने घर पर इफ्तार पार्टी दी। इस दौरान सीएम नीतीश भी पार्टी में बैठे दिखे। वहीं तेजस्वी यादव तो भूरे पठान सूट में सिर पर हरे रंग की टोपी पहन मेजबानी करते दिखे।

इन तस्वीरों के आने के बाद यूजर्स ने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ये कैसा तुष्टिकरण है कि रामनवमी पर प्रदेश में हिंसा होती है और रमजान में इफ्तार की पार्टियाँ सीएम खुद आयोजित करते हैं।

एक यूजर ने कहा कि ये लोग जब इतनी इफ्तार पार्टियाँ करते हैं तो ये धर्मांतरण ही क्यों नहीं कर लेते।

कुहेली नाम की यूजर ने पूछा कि क्या बिहार में कोई काम भी हो रहा है या सिर्फ इफ्तार पार्टियाँ ही चल रही हैं।

संदीप नाम के यूजर पूछते हैं कि वोटों के लिए कितने तुष्टिकरण की जरूरत पड़ती है।

स्वाश ने कहा, “ये हर दिन इफ्तार में कैसे जा रहे हैं? नवरात्रि में तो एक दिन भी जगराते में नहीं जाते।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बिहार में नीतीश कुमार ने इफ्तार पार्टी दी थी और अब राबड़ी देवी के घर इसका आयोजन हुआ है। ऐसे में भाजपा ने दंगों के बीच पार्टी का पोस्टर लगाकर विरोध जताया। भाजपा के नेताओं ने नीतीश के घर रखी इफ्तार पार्टी का विरोध करते हुए कहा था कि एक तरफ बिहार हिंसा की आग में जल रहा है और दूसरी तरफ नीतीश कुमार इफ्तार पार्टियों में लगे हैं।

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में तोड़ा गया छत्रपति शिवाजी की मूर्ति का सिर, केस दर्ज: भड़के लोग प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे, लगे ‘भारत माता की जय’ के नारे

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आया है। घटना बीती रात की है। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं किस तरह शिवाजी महाराज की मूर्ति सिर से तोड़ी गई।

इस संबंध में कन्याकुमारी के पुलिस अधीक्षक हरि कृष्ण प्रसाद ने कहा, “हमें नहीं पता कि इसमें तोड़फोड़ की गई है या नहीं। मूर्ति को थोड़ा नुकसान हुआ है। हमने मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने के लिए एक टीम बनाई है कि क्या इसमें बदमाश शामिल हैं या वास्तव में कुछ और हुआ। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों को मुस्तैद कर दिया गया है। हम आगे की जाँच कर रहे हैं।”

घटना के बाद इलाके में आक्रोशित लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार कन्नियाकुमारी जिले के कुल्लितुरई के पास वट्टाविलई में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई और मूर्ति तोड़ने वाले उपद्रवियों की गिरफ्तारी की माँग की। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ के नारे भी प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए। वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस बल को तैनात हुए भी देखा जा सकता है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त मूर्ति को कपड़े से ढंक दिया है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि मूर्ति निजी स्थान पर है। वह लोगों से बात करके इलाके में कैमरे और रौशनी का प्रबंध करने को कह रहे हैं।

मुगलों को उसकी क्रूर सच्चाई के साथ पढ़ाएँ, अखंड भारत के महापराक्रमी नायकों का भी लिखें इतिहास: शत्रु और शौर्य का बोध जरूरी

तल्ख़ी-ए-ज़हर अभी शामिल-ए-जाँ रहने दे
मुझ पे जो गुज़री है कुछ उस का निशाँ रहने दे

देख उजड़े हुए मंजर अभी दिल सोज़ नहीं
और कुछ रोज़ यूँही रंग-ए-ख़िज़ाँ रहने दे

पिछले एक हफ़्ते से एक विषय जो तथाकथित बुद्धिवादियों के विमर्श का केन्द्रीय विषय बना हुआ है, वह है NCERT द्वारा पाठ्य पुस्तकों से मुग़ल इतिहास का ग़ायब किया जाना। मैं इस बात से पूरी तरह आश्वस्त तो नहीं हूँ कि यह वाक़ई हुआ है क्योंकि मेरे पास इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी नहीं है, जो भी जानकारी है उसका माध्यम मीडिया है।

इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार काफ़ी आक्रोशित हैं और तमाम ‘काम’पंथी नेता, एक्टिविस्ट और तथाकथित पत्रकारों की एक जमात मुँह फुला रही है इस घटना पर। अगर देश के पहले मुनाफिक ‘मक्कारशिक्षामंत्री की आत्मा यदि कहीं होगी तो वह भी विषाद योग से ग्रस्त ज़रूर होगी कि उनका करा-धरा सब कुछ ख़त्म होने जा रहा है।

जिस एहसास-ए-कमतरी का भाव हिन्दुओं में जगाने के लिए यह सब किया गया था, वह समाप्त होने जा रहा है अब। तथाकथित बुद्धिवादियों का तर्क है कि पुस्तकों से ग़ायब कर दोगे तो क्या इतिहास मिट जाएगा? रवीश कुमार को तो जैसे ऑक्सीजन मिल गई है इस विषय के रूप में।

कुतुबमीनार, ताजमहल, लाल क़िले के बारे में अगली पीढ़ियाँ पूछेंगी तो क्या जवाब दोगे – यह सवाल है इन सभी तथाकथित बुद्धिवादियों का।

मेरा इस विषय में अलग विचार है कि अगर इनको वाक़ई ग़ायब कर दिया गया है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। अगर इनको ग़ायब कर दिया गया तो देश की एक बड़े आबादी की अगली पीढ़ी की सन्ततियाँ यह कैसे समझ पाएँगी कि कौन आक्रान्ता थे इस देश में और क्या कुकर्म किए यहाँ आकर? हमारे महान नायकों को नेपथ्य में धकेलने के षड्यंत्र कौन रच रहा था?

उनको यह कैसे पता चलेगा कि श्रीराम की जन्मस्थली को कलंकित करने वाला कौन था? योगेश्वर की जन्मस्थली के ध्वंस का कारक कौन था? राजा भोज जैसे शिल्प विशेषज्ञ द्वारा बनवाई गई जल संरचना भोजपाल ताल, जिसे अब भोपाल ताल कहते हैं, की बांध संरचना को ध्वस्त करने वाला क्रूर और जाहिल वह दैत्य कौन था, जिसके नाम पर होसंगाबाद शहर आज भी आबाद है? भोजपुर के विश्व विख्यात शिवालय को नष्ट करने वाला कौन था? तक्षशिला और नालंदा जैसे शिक्षा केन्द्रों ने किसके मन में ईर्ष्या के बीज प्रस्फुटित कर दिए और उसने अपनी कुंठा मिटाने की ख़ातिर जला दिया इनको?

ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं, जो आज की पीढ़ी के दिल में चुभन पैदा कर शत्रु बोध जगाने का काम करते हैं। ऐसे बहुत सारे प्रश्नों के कारण ही आज की पीढ़ी दोगुने उत्साह के साथ अपनी जड़ों को खोजने में अग्रसर है।

मेरा विचार यह है कि इनको ग़ायब न कर इनमें सुधार की ज़रूरत है।

अब तक इन आक्रान्ताओं के इतिहास को जो महिमामंडित कर पढ़ाया जा रहा था, मुग़ले-आज़म जैसी फ़िल्मों में दिखाया जा रहा था, उसके उलट इन आक्रान्ताओं की सच्चाई को पढ़ाने-दिखाने की ज़रूरत है।

यह जो पढ़ाया जाता है कि औरंगजेब टोपी सिलकर ख़र्चा निकालता था, यह पढ़ाया जाना चाहिए कि फ़क़ीरों को बुलवा कर उनको भी लूट लिया था।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि सत्ता के लालच में मुग़ल किस तरह भाइयों का भी कत्ल कर देते थे, जिस्मानी हवस में रिश्ते भूल जाते थे।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि किस तरह सालार मसूद को महाराजा सोहेल देव ने तलवार से काट डाला।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि कृष्ण देव राय का इतना भय था इन आक्रान्ताओं में कि छल से जीत जाने पर भी विश्वास नहीं हुआ इनको जीत का और कई घंटों बाद प्रवेश करने की हिम्मत जुटा सके।

मुग़ल इतिहास को पढ़ाया जाना जरूरी है लेकिन उसकी सच्चाई के साथ ताकि हमें शत्रु बोध बना रहे, ऐसा मेरा मानना है। मेरा ऐसा मानना इसलिए भी है ताकि भविष्य में ऐसी सम्भावना न बन सके कि कोई और आक्रान्ताओं फिर से ऐसी हरकत को दोहराने का साहस कर सके।

मुग़ल इतिहास की क्रूर सच्चाई के साथ-साथ ही अखंड भारत के हमारे जिन महापराक्रमी और निपुण नायकों को इतिहास में सही तरह से उभार नहीं मिल सका, उनको आगे लाने की भी ज़रूरत है। शत्रु बोध के साथ-साथ हमारे अंदर शौर्य बोध का चैतन्य भी बना रहे, समय की यह भी जरूरत है। असल इतिहास को दबा कर नहीं बल्कि पढ़ा कर ही आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाया जा सकता है।

‘कटर दिखाकर कहता था तुझे बख्शेंगे नहीं’ : दर्शन सोलंकी सुसाइड केस में अरमान इकबाल गिरफ्तार, IIT छात्र ने नोट में लिखा था- अरमान ने मुझे मार डाला

आईआईटी बॉम्बे के छात्र दर्शन सोलंकी की आत्महत्या मामले में जाँच में जुटी एसआईटी ने रविवार (9 अप्रैल 2023) को बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस ने 19 साल के एक साथी छात्र को गिरफ्तार किया है। छात्र का नाम अरमान इकबाल खत्री (कुछ रिपोर्ट के मुताबिक अमन खत्री) है। आरोप है कि अरमान ने ही दर्शन को आत्महत्या के लिए उकसाया। उसका नाम सुसाइड नोट में भी लिखा था।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने इस मामले में कहा, “हमने अरमान का बयान दर्ज किया था, लेकिन वह वो बात नहीं बता रहा है, जिसके कारण उनके बीच विवाद हुआ। इसलिए हमने उसे अब गिरफ्तार किया है ताकि पूछताछ की जा सके और घटनाओं का सही क्रम मालूम हो सके।”

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया है कि दर्शन द्वारा की गई एक सांप्रदायिक टिप्पणी के बाद अरमान इकबाल ने उसे धमकी दी थी और कटर दिखाकर डराया था। दोनों एक ही फ्लोर पर रहते थे।

जनसत्ता की खबर के मुताबिक, अन्य छात्रों ने पुलिस को बताया कि ये टिप्पणी वाली घटना आत्महत्या से लगभग पाँच दिन पहले की है। दर्शन के सांप्रदायिक टिप्पणी करने पर अरमान नाराज था और उसे कटर दिखाकर धमकी देता था कि वह उसे नहीं बख्शेगा। घटना के बाद से सोलंकी खौफ में जी रहा था। उसने कई मौकों पर माफी भी माँगी और गले भी मिले। लेकिन सोलंकी का डर नहीं खत्म हुआ। सुसाइड से एक दिन पहले वो इतना घबरा रखा था कि उसे बुखार भी आ गया था।

सुसाइड के पीछे जातिगत भेदभाव बताई गई वजह

उल्लेखनीय है कि मीडिया में इस केस के पीछे वजह जातिगत भेदभाव बताया जा रहा था। हालाँकि फिलहाल ऐसी कोई भूमिका सामने नहीं आई है। ये मामला दर्शन सोलंकी और अरमान इकबाल खत्री के बीच हुए विवाद से संबंधित लग रहा है। अन्य छात्रों की मानें तो दर्शन सोलंकी अपने घर अहमदाबाद जाना चाहता था पर उसे ये भी डर था कि इकबाल खत्री उसे वहाँ भी नुकसान पहुँचा देगा।

दर्शन सोलंकी आत्महत्या

बता दें कि दर्शन सोलंकी आईआईटी बॉम्बे का छात्र था। उसने 12 फरवरी को हॉस्टल के 7वें फ्लोर से कूदकर जान दी थी। 3 मार्च को इस मामले में एसआईटी गठित हुई। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला जिस पर अरमान के लिए लिखा था- “अरमान ने मुझे मार डाला।” छानबीन में सुसाइड नोट दर्शन सोलंकी द्वारा लिखित ही पाया गया। 29 मार्च को दर्शन के पिता ने महाराष्ट्र सीएम, डिप्टी सीएम, मुंबई पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर शिकायत दी कि उन्हें इस मामले में एफआईआर करने पर पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके बाद यह मामला क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर किया गया। 35 लोगों से पूछताछ हुई। इसी दौरान दर्शन सोलंकी और अरमान के बीच हुए विवाद का खुलासा हुआ और अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

रामलला की जन्मभूमि को भव्य बनाएगा पंचदेव मंदिर: शिव-भवानी के साथ वनवास के दौरान श्रीराम के संपर्क में आई विभूतियाँ होंगी विराजमान, 3 चरणों में निर्माण

अयोध्या में बन रहे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर को और भव्य बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब मंदिर परिसर में पंचदेव मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही भगवान राम के जन्मोत्सव रामनवमी पर सूर्य की किरणें सीधे रामलला की मूर्ति पर पड़ें। इसके लिए अंतरिक्ष विभाग तथा अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में बन रहे रामलला के मंदिर परिसर में पंचदेव मंदिर का निर्माण होना है। इस मंदिर में भगवान गणेश, माँ भवानी, भगवान शंकर, भगवान हनुमान, सूर्य देवता के साथ ही भगवान राम के वनवास के दौरान उनके संपर्क में आई विभूतियाँ भी विराजमान होंगी। इसमें माता शबरी, जटायु, निषाद राज, अगस्त्य मुनि, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि वशिष्ठ, महर्षि वाल्मीकि और देवी अहिल्या जैसे नाम शामिल हैं।

इस मंदिर के निर्माण को लेकर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल का कहना है कि पंचदेव मंदिर का निर्माण तीन चरण में होना है। पहले चरण के निर्माण की नींव पड़ चुकी है। पंचदेव मंदिर के निर्माण के बाद श्रद्धालु रामलला के दर्शन और परिक्रमा कर पंचदेव मंदिर में भी पूजा अर्चना कर सकेंगे। इस मंदिर का निर्माण मंदिर के परकोटे में होना है। मंदिर का निर्माण 2025 तक पूरा होने का अनुमान है।

वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य परमानंद गिरि महाराज कहा है कि मंदिर के प्रथम चरण का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाएगा। जनवरी 2024 में भगवान सूर्य के उत्तरायण में होने के बाद गर्भगृह में रामलला की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। माना जा रहा है कि जनवरी 2024 के तीसरे या चौथे सप्ताह में रामलला मंदिर में विराजमान होंगे।

रामनवमी में सूर्य की किरणें रामलला पर पड़ें इसके लिए हो रही तैयारी

ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने यह भी कहा है कि रामनवमी पर भगवान सूर्य की किरणें रामलला की प्रतिमा पर पड़े इसके लिए तैयारियाँ की जा रहीं हैं। अंतरिक्ष विभाग तथा अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं। इसके हिसाब से रामलला की मूर्ति की ऊँचाई भी तय होगी।

खंडित कर दी मंदिर में स्थापित बजरंग बली की प्रतिमा, चेहरे पर किया वार: मध्य प्रदेश के गाँव में घटना के बाद तनाव, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के दमोह में बजरंग बली की प्रतिमा खंडित किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और तनाव फ़ैल गया है। स्थानीय निवासियों ने इस हरकत को धार्मिक भावनाएँ भड़काने की साजिश करार दिया है। मामले की शिकायत पुलिस में की गई है। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (8 अप्रैल, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला दमोह के पटेरा थाना क्षेत्र का है। यहाँ पिपरिया साहनी गाँव के रहने वाले संजय पालीवाल के खेत में एक सार्वजनिक मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर आसपास के लोगों की आस्था का केंद्र बताया जाता है। इस मंदिर में अन्य देवताओं के साथ बजरंग बली की भी मूर्ति स्थापित है। ग्रामीण रोज सुबह यहाँ पूजा-अर्चना किया करते हैं। घटना के दिन शनिवार की सुबह जब उसी गाँव के राज किशोर राजपूत मंदिर में पूजा करने गए तब उन्हें हनुमान मूर्ति टूटी हालत में मिली।

कुछ ही देर में यह खबर गाँव और आसपास फ़ैल गई। लोग मंदिर पर पहुँच कर घटना पर नाराजगी जताने लगे। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची। लोगों को समझाया-बुझाया जाने लगा लेकिन ग्रामीण आरोपित को तलाश कर उस पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसी दौरान मंदिर के पास रहने वाले एक जनजातीय व्यक्ति ने रात में मंदिर में कुछ हलचल होने की भी बात स्वीकारी। लोगों ने इस करतूत को धार्मिक भावनाएँ भड़काने की हरकत बताया है।

आरोपित द्वारा बजरंग बली की प्रतिमा के चेहरे पर वार किया गया है। फ़िलहाल मामले की शिकायत पुलिस को लिखित तौर पर दी गई है। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और आरोपित को जल्द गिरफ्तार किए जाने का भरोसा दिया है। कार्रवाई की माँग को ले कर कुछ लोग थाने भी पहुँचे थे। फिलहाल FIR अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ की गई है।

बिहार में 10 साल की बच्ची से बलात्कार, बहने लगा खून तो प्राइवेट पार्ट में डाला मिट्टी और बालू: पड़ोस में ही रहता था दिलखुश, बेसुध हालत में खेत में मिली नाबालिग

बिहार के पूर्णिया जिले में एक नाबालिग बच्ची के साथ रेप किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र 10 वर्ष है जिसके प्राइवेट पार्ट में ब्लीडिंग होने पर मिट्टी और बालू डाल दी गई। आरोपित का नाम दिलखुश जर्रा है जिसकी उम्र 26 वर्ष है। पुलिस ने दिलखुश को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का इलाज चल रहा है। घटना शुक्रवार (7 अप्रैल, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला पूर्णिया के डगरुआ थाना क्षेत्र का है। यहाँ के एक गाँव चाँदी पंचायत में दिलखुश की दरिंदगी की शिकायत बच्ची के पिता ने घटना की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि घटना के दिन उनकी बच्ची अपनी 5-6 सहेलियों के साथ घर के पास खेल रही थी। इस दौरान पीड़िता के ही पड़ोस में रहने वाला दिलखुश वहाँ आया। उसने पहले आस-पास देखा और किसी बड़े को न देख कर बच्ची को अपनी तरफ खींचने लगा। दिलखुश की हरकत देखते हुए बाकी बच्चे डर से वहाँ से भाग निकले।

मिली जानकारी के मुताबिक, बाकी बच्चों को भगाने के लिए दिलखुश ने उन पर बालू फेंक दिया। बाद में बच्ची को अकेला पा कर उसने पीड़िता का मुँह दबाया और खेतों की तरफ ले जाने लगा। आखिरकार बच्ची को गेहूँ के खेत में ले जा कर दिलखुश ने उसके साथ रेप किया। बच्ची ने दिलखुश से खुद को छुड़ाने की काफी कोशिश की लेकिन वो नाकाम रही। जब दरिंदगी की वजह से बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून निकलने लगा तब दिलखुश ने उसमें मिट्टी और बालू डाल दिया।

पीड़िता से दरिंदगी कर के दिलखुश फरार हो गया। इधर आरोपित द्वारा भगा दिए गए अन्य बच्चों ने पीड़िता के घर पहुँच कर पूरी बात बताई। लड़की के परिजन जब तलाश करते हुए खेत पर गए तब उन्हें पीड़िता कराहती हुई बेसुध हालत में मिली। मामले की सूचना पुलिस को दी गई और बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने दिलखुश को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता के परिजनों ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

‘जम्मू कश्मीर में बचे हैं सिर्फ 50 आतंकी, ये अब तक की सबसे कम संख्या’: रिपोर्ट, LOC पर घुसपैठ कर रहा आतंकवादी ढेर

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा आतंकियों के सफाए का काम जारी है। शाहपुर में सेना ने पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे एक आतंकी को मार गिराया है, जबकि दो अन्य घायल हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर में अब सिर्फ 50 आतंकी रह गए हैं, जो इनकी संख्या का अब तक का सबसे निचला स्तर है।

दरअसल, रविवार (9 अप्रैल 2023) को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LOC) पर सेना को घुसपैठ की जानकारी मिली। इसके बाद सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया। दोनों तरफ से घंटों तक मुठभेड़ होती रही। आखिर सेना ने कामयाबी हासिल करते हुए एक आतंकी को मार गिराया। इस ऑपरेशन में दो आतंकी घायल हो गए हैं।

बता दें कि रविवार की तड़के सुबह 2 बजे के आसपास पाकिस्तान की तरह से 3 आतंकियों ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी। सीमा पर हलचल होता देख सेना सतर्क हो गई और इस दौरान फायरिंग में एक आतंकी को मार गिराया। वहीं, दो आतंकी भागने भाग निकले। इसके बाद सेना ने इलाके को घेर लिया। मुठभेड़ में दोनों घुसपैठिए घायल हो गए हैं।

इस तरह जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का लगभग पूरी तरह सफाया होने वाला है। इंडिया टुडे के राज्य के एक प्रमुख पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में आतंकवाद शुरू होने के बाद पहली बार ऑपरेशन में आतंकवादियों की संख्या 70 से नीचे आई है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक आंतरिक आकलन में स्थानीय आतंकवादियों की संख्या सिर्फ 29 बताई गई है। इनमें सिर्फ तीन पुराने आतंकवादी हैं। इनके नाम हैं – फारूक अहमद भट उर्फ ​​नली जावेद अहमद मट्टू और रियाज अहमद उर्फ शेतारी। वहीं, विदेशी आतंकियों की संख्या 20 से 24 बताई गई है।

वहीं, केंद्र के हिसाब से जम्मू कश्मीर में काम कर रहे विदेशी आतंकियों की संख्या 30 से 35 है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि साल 2017 में घाटी में आतंकियों की संख्या 350 थी, जो घटकर दहाई अंक में आ गई है। इसके लिए उन्होंने सुरक्षा बलों की सतर्कता को जिम्मेदार ठहराया।

दिलबाग सिंह ने कहा, “हमने चारों तरफ से आतंकी इकोसिस्टम को घेर लिया है। चाहे वह पथराव हो या अलगाववादियों, फाइनेंसरों पर कार्रवाई हो या सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियारों को जब्त करना हो। पुलिस और सुरक्षाबलों ने काफी हद तक आतंकवाद पर काबू पाने में कामयाबी हासिल की है।”