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AAP चला रही ‘डिग्री दिखाओ अभियान’, खुद के 29 MLA के पास नहीं है डिग्री: 7 विधायक 10वीं तो 12वीं पास हैं 8, चुनाव आयोग के पास सबका रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) ने ‘डिग्री दिखाओ अभियान’ शुरू किया है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की नई-नवेली शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने मीडिया के सामने 09 अप्रैल 2023 अपनी डिग्री दिखाते हुए इस अभियान की शुरुआत की। कहा गया कि हर रोज आप का एक नेता डिग्री दिखाएगा। इस बीच ऑपइंडिया ने चुनाव आयोग को दी गई जानकारी की पड़ताल करने पर पाया कि दिल्ली विधानसभा में चुनकर पहुँचे AAP विधायकों में से 29 के पास खुद डिग्री नहीं है।

दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 62 विधायक हैं। चूँकि रोज एक AAP नेता द्वारा अपनी डिग्री दिखाने की बात कही गई है तो यह अभियान कम से कम 62 दिन चलना चाहिए। लेकिन दिल्ली के विधायकों का डिग्री दिखाओ अभियान सिर्फ 33 दिनों तक ही चल सकेगा, क्योंकि उनके 29 विधायकों के पास डिग्री नहीं है।

ऑपइंडिया ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए आप नेताओं द्वारा पेश किए गए हलफनामों की पड़ताल की ताकि विधायकों की उच्च शिक्षा का पता लगाया जा सके। चुनावी हलफनामे में उम्मीदवारों को अपनी उच्चतम शिक्षा का उल्लेख करना होता है।

2 विधायक 10वीं पास भी नहीं

हलफनामे के अनुसार आम आदमी पार्टी के 2 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने 10वीं से भी कम शिक्षा प्राप्त की है। सीलमपुर से विधायक अब्दुल रहमान ने सिर्फ 8वीं तक तालीम हासिल की है। वहीं उत्तम नगर इलाके से विधायक नरेश बालियान ने सिर्फ 9वीं तक पढ़ाई की है।

आप के 10वीं पास MLA

ऑपइंडिया की पड़ताल में पाया गया कि आप के सात विधायक 10वीं तक पढ़े हैं। इनमें राजौरी गार्डन से विधायक धनवती चंदेला, विकासपुरी से विधायक महेंद्र यादव, रिठाला से विधायक मोहिंदर गोयल, नरेला से एमएलए शरद कुमार चौहान, गोकुलपुर के सुरेंद्र कुमार, करोल बाग के एमएलए विशेष रवि और मटिया महल से विधायक शोएब इकबाल शामिल हैं।

12वीं पास विधायक

यदि AAP के 12वीं पास विधायकों की बात करें तो सूची में 08 नाम शामिल हैं। इनमें मटियाला विधायक गुलाब सिंह, बवाना विधायक जय भगवान, तिलक नगर से विधायक जरनैल सिंह, सुल्तानपुर माजरा से विधायक मुकेश अहलावत, आदर्श नगर के पवन शर्मा, आरके पुरम से विधायक प्रमिला टोकस, वजीरपुर विधायक राजेश गुप्ता और मोती नगर से विधायक शिव चरण गोयल शामिल हैं।

अन्य सर्टिफिकेट व डिप्लोमाधारी MLA

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार और चाँदनी चौक से विधायक प्रह्लाद सिंह साहनी ने बीच में ही कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी है। उनके पास भी डिग्री नहीं है। दिल्ली सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के पास पत्रकारिता का डिप्लोमा है। मुंडका से विधायक धर्मपाल लाकरा ने डीजल मैकेनिक्स में सर्टिफिकेट कोर्स किया है। गिरीश सोनी ने रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग में नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट कोर्स किया है। गिरीश मादीपुर से विधायक हैं। मुस्तफाबाद विधायक हाजी यूनुस ने उर्दू और अरबी में आलिम कोर्स किया हुआ है।

इसी तरह छतरपुर से विधायक करतार सिंह तंवर ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। किरारी एमएलए ऋतुराज गोविंद ने होटल मैनेजमेंट में एडवांस डिप्लोमा किया है। त्रिलोकपुरी विधायक रोहित कुमार ने संगीत प्रभाकर डिग्री कोर्स कर रखा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद शकूर बस्ती से विधायक सत्येंद्र जैन के पास इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स में एसोसिएट सदस्यता है जो बीआर्क (Bachelor of Architecture) के समकक्ष मानी जाती है।

बता दें कि पिछले दिनों गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री माँगने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejariwal) पर 25000 रुपए का जुर्माना लगा दिया था। उच्च न्यायालय ने 31 मार्च 2023 को अपने फैसले में कहा था कि पीएम मोदी का प्रमाण-पत्र दिखाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही गुजरात हाई कोर्ट ने मुख्य सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें PMO के साथ-साथ गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री का डिटेल देने का निर्देश दिया गया था।

ऑपइंडिया ने यह जानकारी चुनाव आयोग को जमा कराए गए सार्वजनिक हलफनामों के आधार पर जुटाई है। यह जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

निर्मला सीतारमण ने ‘मुस्लिमों पर हिंसा’ वाला प्रोपेगेंडा अमेरिका में किया चकनाचूर: कहा- भारत में उनकी आबादी बढ़ी, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक खत्म कर दिए गए

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार (10 अप्रैल 2023) को वॉशिंगटन डीसी में स्थित अमेरिकी थिंक टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) में पश्चिमी देशों को लताड़ा। उन्होंने भारत भारत में मुस्लिमों की स्थिति सहित देश को लेकर नकारात्मक ‘धारणा’ का जवाब दिया।

सीतारमण ने भारत में ‘मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा’ को लेकर किए गए सवाल पर बहुत गंभीरता से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है और यह आबादी 1947 से लगातार बढ़ रही है।”

इस दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा, “भारत को विभाजित करके पाकिस्तान का गठन किया गया। उस दौरान पाकिस्तान ने खुद को इस्लामी मुल्क घोषित किया, लेकिन यह भी घोषणा कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी जाएगी।” हालाँकि, वहाँ हर अल्पसंख्यक वर्ग को खत्म कर दिया गया। मामूली बातों पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर अल्पसंख्यकों को मारा जा रहा है।

वित्तमंत्री ने आगे कहा, “अगर कहीं अल्‍पसंख्‍यकों की संख्‍या में गिरावट आई है तो वह पाकिस्तान है। यहाँ तक कि पाकिस्तान में मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को भी खत्म कर दिया गया। वहाँ मुहाजिर, शिया, अहमदिया के खिलाफ हिंसा हो रही है। मुख्यधारा वाली सुन्नी समुदाय द्वारा जो भी वर्ग स्वीकार नहीं किए गए, उनका खात्मा कर दिया गया। भारत में हर वर्ग के मुस्लिमों को सरकार सहायता कर रही है और उनके बच्चे शिक्षा पा रहे हैं।”

PIIE के अध्यक्ष ऐडम एस पोसेन को भारत को लेकर पश्चिम की नकारात्मक धारणाओं का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “भारत में जो हो रहा है उस पर नजर डालिए, न कि उन लोगों द्वारा बनाई जा रही धारणाओं को सुनें, जो जमीन पर गए तक ही नहीं हैं और रिपोर्ट पेश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जो भी ये रिपोर्ट पेश कर रहे हैं, वे भारत आएँ और खुद देखें।

पोसेन ने सीतारमण से भारत में निवेश पर असर डालने वाली धारणाओं को लेकर भी सवाल किए। इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “इसका जवाब उन निवेशकों के पास है, जो भारत आ रहे हैं। ये वो निवेशक हैं, जो पिछले कई सालों से भारत आ रहे हैं। कोई भी निवेशक, जो निवेश करना चाहता है, उसे मैं सिर्फ यही कहूँगी कि वो ये देखे कि भारत में क्या हो रहा है न कि उन कुछ लोगों की गलत धारणाओं पर यकीन करें जो जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं और बस रिपोर्ट तैयार कर देते हैं।”

दरअसल, निर्मला सीतारमण विश्व व्यापार संगठन (WTO) की बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका में है। इस दौरान उन्होंने WTO को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि WTO को और अधिक प्रगतिशील बनना चाहिए और सभी देशों की बातों को भी सुनना चाहिए, ना कि सिर्फ अपनी बात सुनाते रहना चाहिए।

पश्चिम बंगाल में बच्चों के भोजन पर भी डाका, मिड डे मील का ₹100 करोड़ डायवर्ट: खराब उत्पादों का इस्तेमाल, केंद्र+राज्य की समीक्षा से पकड़ी गई गड़बड़ी

पश्चिम बंगाल में मिडडे मील के मामले में बड़ी गड़बड़ी की घटना सामने आई है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने संयुक्त समीक्षा का भी फैसला लिया है। ‘प्रधानमंत्री पोषण योजना’ के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जाता है। अब सामने आया है कि 2022 में अप्रैल से लेकर सितंबर तक 16 करोड़ मिडडे मील्स को लेकर गड़बड़ी हुई है, जो 100 करोड़ रुपए का बैठता है। आरोप है कि इतने करोड़ की मिडडे मील्स की अतिरिक्त रिपोर्टिंग की गई, जो फर्जी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए ‘जॉइंट रिव्यू कमीशन (JRC)’ का गठन किया है। जनवरी 2023 में इसका गठन किया गया है। ये भी आरोप है कि इस योजना के लिए जो फंड्स जारी किए गए, उन्हें कही और भेज दिया गया। इन फंड्स से अग्निकांड के पीड़ितों को मुआवजा दिया गया। साथ ही अनाज के एलोकेशन में भी गड़बड़ी हुई है। चावल दाल और सब्जी की मात्रा में भी 70% कम खरीद की गई। साथ ही नमक-मिर्च इत्यादि के एक्सपायर्ड उत्पात भी प्रयोग में लाए जाने का मामला सामने आया है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर में जानकारी दी गई है कि 24 मार्च को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपनी गंभीर चिंताओं को लेकर राज्य की TMC सरकार को अवगत करा दिया है। साथ ही कहाँ-कहाँ गड़बड़ी हुई है, इस बारे में भी बताया गया है। कितने मिडडे मील्स दिए गए, इन आँकड़ों को भी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। इसमें जो वित्तीय गड़बड़ियाँ हुई हैं, उसे केंद्र ने रेखांकित किया है। इसके जवाब में 30 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने केंद्र को बताया कि स्थानीय प्रोजेक्ट डायरेक्टरों को इन गड़बड़ियों अध्ययन करने के लिए कहा गया है।

2023 में 29 जनवरी से लेकर 7 फरवरी तक मिशन ने दौरा कर के ये समीक्षा की थी, जिसमें ये गड़बड़ियाँ सामने आई थीं। मिडडे मील्स खाने वाले बच्चों को लेकर जिला स्तर पर जो रजिस्टर था और जो आँकड़े राज्य सरकार ने केंद्र को भेजे, उनमें भी गड़बड़ी सामने आई है। उत्तराखंड स्थित जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एन्ड टेक्नोलॉजी में फ़ूड एन्ड न्यूट्रिशन विभाग की अध्यक्ष (HOD) प्रोफेसर अनुराधा दत्ता इस JRM का नेतृत्व कर रही हैं।

केंद्र सरकार की जाँच समिति ने पाया है कि उक्त अवधि के बीच जिला स्तर के आँकड़ों को देखने पर पता चलता है कि 124.22 करोड़ मिडडे मील्स दिए गए, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें ये आँकड़ा 140.25 करोड़ है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में किसी अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना ही JRM रिपोर्ट को फाइनल कर दिया गया। साथ ही केंद्र सरकार पर नियमों का पालन न करने का आरोप मढ़ा।

’30 अप्रैल को सलमान खान की हत्या करूँगा’: मुंबई पुलिस को ‘राॅकी भाई’ का काॅल, धमकियों के बीच अभिनेता ने विदेश से मँगवाई बुलेट प्रूफ कार

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। मुंबई पुलिस ने सोमवार (10 अप्रैल 2023) को इस बात की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, कंट्रोल रूम में एक शख्स ने धमकी वाला कॉल किया था। वह खुद को राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला बता रहा था। उसने अपना नाम रॉकी भाई बताया है। कॉल करने वाले ने दावा किया है कि वह 30 अप्रैल 2023 को सलमान खान को मार देगा। अभिनेता को धमकी मिलते ही मुंबई पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान ने लगातार मिल रही धमकियों के बीच नई बुलेट प्रूफ कार भी खरीदी है। यह निसान एसयूवी है, जिसे उन्होंने विदेश से इंपोर्ट कराया है। अभी तक यह गाड़ी मार्केट में लॉन्च नहीं हुई है।

बता दें कि इससे पहले भी कई बार सलमान खान को जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। मार्च 2023 में भी अभिनेता को एक धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसके बाद पुलिस ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी थी। साथ ही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और रोहित बराड़ के विरुद्ध नई FIR भी दर्ज की गई थी। बांद्रा पुलिस थाने में इन तीनों के खिलाफ IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 506 (2) (आपराधिक धमकी), 120 (B) (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 (समान इरादे से संयुक्त अपराध) के तहत मामला दर्ज किया था।

धमकी भरा ईमेल ‘मोहित गर्ग’ के नाम से भेजा गया था। इसमें लिखा था, “गोल्डी भाई को बात करनी है तेरे बॉस सलमान खान से।” इसके बाद मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए जोधपुर जिले के लूणी गाँव से राम विश्नोई (21 वर्ष) को गिरफ्तार किया था।

वर्क फ्रंट की बात करें तो 21 अप्रैल 2023 को सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में पूजा हेगड़े और शहनाज गिल भी मुख्य भूमिका में नजर आएँगी। इसके अलावा सलमान ‘टाइगर 3’ में भी दिखाई देंगे। अप्रैल 2024 से शाहरुख के साथ सलमान ‘टाइगर वर्सेज पठान’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

‘RSS तमिलनाडु में निकाल सकता है रूट मार्च’: सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार की अपील खारिज की, मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तमिलनाडु सरकार को जबरदस्त झटका देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को पथ संचालन (RSS Root March in Tamil Nadu) की इजाजत दे दी। RSS ने राज्य में 47 जगहों पर पथ संचलन निकालना चाहती थी, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें RSS को राज्य में मार्च निकालने की इजाजत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और पंकज मित्तल की पीठ ने 10 फरवरी को दिए गए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

इससे पहले, आरएसएस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा था कि अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत बिना हथियारों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होना सबका मौलिक अधिकार है। इसे बहुत मजबूत आधार के अभाव में किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता है।

जेठमलानी ने सरकार द्वारा आरएसएस पर इस आधार पर कुछ क्षेत्रों में मार्च निकालने पर लगाए गए प्रतिबंध पर सवाल उठाया कि पीएफआई पर भी हाल ही में प्रतिबंध लगाया गया था। जेठमलानी ने कहा, “जिन क्षेत्रों में ये मार्च निकाले गए, वहां से हिंसा की एक भी घटना की सूचना नहीं है।”

मामले की सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कड़ी फटकार भी लगाई थी। न्यायाधीशों ने कहा था कि सरकार किसी के लिए लोकतंत्र की भाषा बोलती है और किसी के लिए सत्ता की भाषा बोलती है।

दरअसल, पिछले साल 2 अक्टूबर को पथ संचालन निकालने के लिए संघ ने राज्य सरकार से अनुमति माँगी थी। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार सड़कों पर मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी। अनुमति दी भी तो सीमिति जगहों पर और वह बंद परिसरों में। सरकार ने तर्क दिया था कि 6 ज़िले ऐसे हैं, जहाँ प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का प्रभाव है। ऐसे में प्रदेश का माहौल बिगड़ सकता है।

संघ ने इसका विरोध किया और अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया था। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ संघ ने तमिलनाडु स्थित मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 4 नवंबर 2022 को सुनवाई करते हुए RSS को 6 जगहों को छोड़कर बाकी जगहों पर कुछ शर्तों के साथ मार्च निकालने की इजाजत दी थी। 

हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों में कहा गया था कि संघ के स्वयंसेवक बिना लाठी-डंडे या हथियारों के मार्च निकालेंगे। इसके साथ ही यह भी शर्त जोड़ी गई थी कि वे ऐसे किसी भी मुद्दे पर नहीं बोलेंगे, जिससे देश की अखंडता पर असर पड़े। हालाँकि कोर्ट के फैसले से नाखुश होकर RSS ने 6 नवंबर को होने वाले रूट मार्च को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट से इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा।

इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 10 फरवरी 2023 को को सुनवाई करकते हुए उच्च न्यायालय की एकल खंडपीठ के प्रतिबंधों को हटा दिया। डबल बेंच ने एक स्वस्थ लोकतंत्र में विरोध के महत्व पर जोर दिया था। इस दौरान तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट में मार्च की अनुमति देने का विरोध किया।

हाईकोर्ट के डबल बेंच के फैसले के विरोध में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 17 मार्च 2023 को हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई टाल दी थी। इसके बाद 27 मार्च को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

’10-15 मिनट में छत पर नहीं इकट्ठा किए जा सकते पत्थर, मामला गंभीर’: बंगाल में रामनवमी हिंसा पर हाईकोर्ट सख्त, NIA जाँच की माँग पर सुरक्षित रखा फैसला

रामनवमी शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने माना है कि 10-15 मिनट में पत्थरों को छत पर नहीं ले जाया जा सकता। इसलिए, हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। इसके अलावा कोर्ट ने इस हिंसा की जाँच एनआईए से कराने को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

दरअसल, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कोलकाता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने रामनवमी के दौरान बंगाल में हुई हिंसा की जाँच NIA से कराने की माँग की थी। इस मामले में, सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनानम और न्यायाधीश हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा है कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी। लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जाहिर है कि यह खुफिया तंत्र की विफलता के कारण हुआ।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात के संकेत दिए हैं कि बंगाल हिंसा की जाँच एनआईए को सौंपी जा सकती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि यह मामला गंभीर लग रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हिंसा के लिए पहले से तैयारियाँ की गई थीं। इसलिए केंद्रीय जाँच एजेंसी इस मामले की बेहतर तरीके से जाँच कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पेलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसको देखकर ऐसा लगता है कि मामला गंभीर था। हिंसा में तलवारें, बोतलें, टूटे शीशे और तेजाब का इस्तेमाल किया गया और इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे पता चलता है कि हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई।

कोर्ट ने यह भी कहा है, “रिपोर्टों से पता चलता है कि हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। आरोप है कि छतों से पत्थर फेंके थे। जाहिर है कि पत्थर 10-15 मिनट में छत पर नहीं ले जाया जा सकता। यह खुफिया तंत्र की विफलता है। यहाँ समस्या दो समस्याएँ हैं। पहली यह है कि हिंसा दो समूहों के बीच हुई है। दूसरी समस्या यह है कि एक तीसरा समूह इस हिंसा का लाभ उठा सकता है। ऐसी स्थिति में इसकी जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए। यदि राज्य पुलिस इस मामले की जाँच करती है तो उसके लिए यह पता लगाना मुश्किल होगा कि इस हिंसा से किसको लाभ हो रहा।”

जज ने यह भी कहा है, “बीते 4-5 महीनों ने हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 8 आदेश भेजे हैं। ये सभी मामले धार्मिक आयोजनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित हैं। क्या यह कुछ और नहीं दर्शाता है? मैं बीते 14 सालों से न्यायाधीश हूँ। लेकिन अपने पूरे करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।”

‘ब्रिटिश मीडिया ने फैलाया झूठ’: अडानी ने जारी किया 4 सालों का पूरा हिसाब-किताब, राहुल गाँधी के ‘₹20000 करोड़ कहाँ से आए’ वाले प्रोपेगंडा की खोली पोल

20 हजार करोड़ रुपए के निवेश को लेकर छिड़े विवाद के बीच अडानी समूह ने बीते 4 सालों का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया है। अडानी समूह द्वारा जारी इन आँकड़ों को राहुल गाँधी को जवाब के रूप में देखा जा रहा है। यही नहीं, अडानी समूह ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की उस रिपोर्ट को भी झूठा करार दिया है, जिसमें विदेशी निवेश (FDI) को लेकर उस पर आरोप लगाए गए थे।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अडानी समूह की आय को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इसको लेकर वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी हमलावर रहे हैं। लेकिन अब अडानी समूह ने रविवार (10 अप्रैल, 2023) को साल 2019 से लेकर अब तक का पूरा हिसाब-किताब जारी किया है। अडानी समूह की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि साल 2019 से अब तक समूह की कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी बेचकर 2.87 बिलियन डॉलर, यानी 23525 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसमें से 2.55 बिलियन डॉलर, यानी 20902 करोड़ रुपयों को फिर से बिजनेस में लगाया गया।

अडानी समूह के बयान को विस्तार से देखें तो इसमें कहा गया है कि अबु धाबी स्थित ग्लोबल स्ट्रैटेजिक इनवेस्टमेंट कंपनी और इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी जैसे निवेशकों ने अडानी समूह की कंपनियों में 2.593 बिलियन डॉलर यानी 21255 करोड़ रुपए का निवेश किया। यह निवेश अडाणी इंटरप्राइजेस लिमिटेड और अडाणी एनर्जी लिमिटेड में किया गया। कंपनी के प्रमोटर्स ने अडानी टोटल गैस लिमिटेड और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की हिस्सेदारी बेचकर 2.783 अरब डॉलर यानी करीब 22812 करोड़ रुपए जुटाए।

अडानी समूह ने आगे कहा है कि इन पैसों को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड, अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड और अडानी पावर लिमिटेड जैसी पोर्टफोलियो कंपनियों में लगाया गया है।

फाइनेंशियल टाइम्स ने फैलाया झूठ: अडानी

ब्रिटेन के मीडिया संस्थान ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने अडानी समूह को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी समूह को जो विदेश निवेश (FDI) मिला है, इसमें से अधिकांश गौतम अडानी के परिवार से जुड़ी विदेशी कंपनियों से आए हैं। विदेशी कंपनियों ने अडानी समूह की कंपनियों में साल 2017 से 2022 के दौरान कम से कम 2.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 21334 करोड़ रुपए का इन्वेस्ट किया। यह रकम अडानी समूह को मिले कुल 5.7 बिलियन डॉलर के FDI का 45.4% है।

हालाँकि अडानी समूह ने कहा है कि फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में जिस निवेशों के बारे में बताया है उनको लेकर 28 जनवरी 2021 और 23 जनवरी 2021 को जानकारी सार्वजनिक की जा चुकी है। यही नहीं अडानी समूह ने फाइनेंशियल टाइम्स को एक पत्र लिखते हुए रिपोर्ट डिलीट करने के लिए कहा है।

इस पत्र में कहा गया है, “अडानी समूह के खिलाफ नकारात्मक नैरिटव गढ़ा जा रहा है। जिस तरह की रिपोर्ट प्रकाशित की गई है उससे अडानी समूह की इमेज को काफी ठेस पहुँची है और यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया। इस रिपोर्ट को तुरंत हटाया जाए। हमें लगता है कि अडानी को बर्बाद करने का कॉम्पिटिशन अच्छा हो सकता है। लेकिन हम नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं। हम कंपनी के मालिकों व इसमें आ रहे निवेश को लेकर कोई भी बात अंधेरे में नहीं रखना चाहते।”

रहमत अली ने की घर वापसी, बने रितिक: शुद्धिकरण के बाद महादेव का किया अभिषेक, बजरंगबली से आशीर्वाद ले बोले- बचपन से ही हिंदू धर्म पसंद था

उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक मंदिर में 25 साल के रहमत अली ने घर वापसी की। अब वे रितिक नाम से जाने जाएँगे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सोमवार (10 अप्रैल 2023) को उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया। शुद्धिकरण के बाद उन्होंने महादेव का अभिषेक किया। बजरंगबली का अशीर्वाद लिया। बताया कि बचपन से ही उन्हें हिंदू धर्म पसंद था। उनके फैसले पर घर वालों को आपत्ति नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रहमत अली मूल रूप से हरदोई के पसेनी गाँव के रहने वाले हैं। काम की तलाश में वे 3 महीने पहले कानपुर आए थे। यहाँ के बाबूपुरवा में उनकी नानी रहती हैं। फिलहाल वे अपनी नानी के पास ही रह रहे हैं। रहमत के मुताबिक बचपन से ही उनका हिंदू धर्म के प्रति झुकाव था। रामलीला देखना, गणेश उत्सव में हिस्सा लेना और काँवड़ ले जाना उन्हें हमेशा से पसंद रहा है। कानपुर में भी रहने के दौरान रहमत बाकरगंज के माँ दुर्गा मंदिर में दर्शन के लिए जाया करते थे।

रहमत ने बताया है कि एक बार दुर्गा मंदिर में उन्हें बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज यादव मिले। उनसे हिन्दू बनने की इच्छा जताई। इसके बाद उनकी घर वापसी कानपुर के साउथ सिटी इलाके में मौजूद एक मंदिर में करवाई गई। इस दौरान रहमत ने वेदमंत्रों के बीच तमाम वैदिक विधि-विधान पूरे किए। रहमत ने अपनी शुद्धिकरण के लिए हुई पूजा-अर्चना के दौरान सिर मुंडवा कर तिलक लगा रखा था।

मंदिर में महादेव को जल चढ़ाने के बाद रहमत ने बताया कि उनके ज्यादातर दोस्त हिंदू ही हैं। बताया जा रहा है कि रहमत के परिवार वालों को भी उनके फैसले से कोई आपत्ति नहीं है। अब रहमत के कागजात पर नाम बदलवाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए एक वकील की मदद ले रहे हैं। कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए रहमत के परिवार वालों को भी बुलाया गया है।

मस्जिद में चल रही थी रमजान की नमाज, चाकू निकाला और इमाम को घोंप दिया: अमेरिका की घटना, तुर्की का हमलावर

अमेरिका में रमजान की नमाज पढ़ रहे एक इमाम को चाकू घोंप दिया गया। घटना न्यूजर्सी के पेटरसन स्थित उमर मस्जिद की है। हमला रविवार (9 अप्रैल 2023) की सुबह किया गया। 65 साल के इमाम पर जब हमला हुआ, उस वक्त नमाज के लिए मस्जिद में करीब 200 लोग जमा थे। हमलावर की पहचान 32 साल के सेरिफ जोरबा के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से तुर्की का रहने वाला है।

हमले में इमाम सैयद एल्नाकिब घायल हो गए। उनका इलाज चल रहा है। मस्जिद में मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पूछताछ में उसने इमाम पर इस्लाम के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप लगाया। यह बात भी सामने आई है कि हमलावर पहले भी इस मस्जिद में कई बार आ चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के उमर मस्जिद जिस इलाके में है, वह अमेरिका में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में एक है। रविवार को इमाम सैयद एल्नाकिब सुबह के करीब 5:30 बजे पर मस्जिद में 200 लोगों के साथ नमाज पढ़ रहे थे। इसी बीच सेरिफ जोरबा ने उन्हें 2 बार चाकू घोंप दिया। हमले के बाद आसपास के नमाजियों ने उसे पकड़ लिया।

इमाम को नजदीकी अस्पताल सेंट जोसेफ मेडिकल सेंटर में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। चाकू लगने से इमाम के फेफड़े में छेद हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमलावर मूल रूप से तुर्की का है। उसने पूछताछ में हमले की बात कबूली है। बताया है कि वह एक रात पहले ही इमाम को उनके घर में घुस कर मारना चाहता था। उसका कहना है कि इमाम इस्लाम का अपमान कर रहा था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सेरिफ जोरबा मस्जिद का सदस्य नहीं है। हालाँकि उसके द्वारा इस मस्जिद में पहले भी नमाज़ पढ़े जाने की बात सामने आ रही है। इस घटनाक्रम के 2 वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। पहले वीडियो में आरोपित नमाज़ के ही दौरान इमाम पर हमला करते दिखाई दे रहा है। हमले के बाद वह भागने का प्रयास करता है। दूसरे वीडियो में नमाज़ी पकड़कर उसकी पिटाई करते दिखाई दे रहे है।

रमज़ान के महीने में मस्जिद में इमाम पर हुए इस हमले पर वहाँ के स्थानीय पार्षद अल अब्देल-अजीज ने चिंता जताते हुए मुस्लिमों से एकजुटता की अपील की है। घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास के इबादतगाहों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ सचिन पायलट का अनशन, कॉन्ग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी’ कदम बता चेताया

राजस्थान में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के नेतृत्व में काॅन्ग्रेस की सरकार है। इसी सरकार के खिलाफ आज (11 अप्रैल 2023) काॅन्ग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) अनशन करने वाले हैं। उससे पहले पार्टी ने उन्हें इस कदम पर चेताया है। अनशन को पार्टी हितों के खिलाफ और पार्टी विरोधी गतिविधि बताया है। राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। गहलोत और कभी उनकी सरकार में डिप्टी सीएम रहे पायलट के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है।

पायलट का कहना है कि गहलोत सरकार ने भ्रष्टाचार के उन मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं की जिनको उठाकर काॅन्ग्रेस प्रदेश की सत्ता में आई थी। इसको लेकर वे जयपुर के शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठेंगे। इसमें शामिल होने के लिए उन्होंने औपचारिक तौर पर काॅन्ग्रेस नेताओं को न्योता नहीं भेजा है। लेकिन माना जा रहा है कि उनके समर्थक इसमें शिरकत करेंगे। लिहाजा काॅन्ग्रेस डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में लगी है।

इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने सोमवार (10 अप्रैल 2023) रात एक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने कहा है कि सचिन पायलट को इस मुद्दे पर पार्टी में बात करनी चाहिए थी। उनका इस तरह से अनशन करना पार्टी हितों के खिलाफ है।

रंधावा ने कहा है, “सचिन पायलट कल (मंगलवार) दिन भर का अनशन करने वाले हैं। उनका यह अनशन पार्टी हितों के खिलाफ है। पार्टी विरोधी गतिविधि है। अगर अपनी ही सरकार के साथ उनकी कोई समस्या है तो मीडिया और जनता के बजाय पार्टी के प्लेटफॉर्म पर चर्चा की जा सकती है। मैं 5 महीने से राजस्थान कॉन्ग्रेस का प्रभारी हूँ। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर मुझसे कभी चर्चा नहीं की। मैं उनके संपर्क में हूँ और अभी भी उनसे बातचीत की अपील करता हूँ। वह निर्विवाद रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी के एक मजबूत स्तंभ हैं।”

वहीं एक अन्य बयान में रंधावा ने कहा है कि उन्होंने पायलट से फोन पर बात की है। साथ ही इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन करने की जगह पार्टी के मंचों पर मामलों को उठाने के लिए कहा है। वसुंधरा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर सचिन पायलट जिन दो पत्रों की बात कर रहे हैं, उनके बारे में कभी जिक्र ही नहीं किया गया।

दरअसल, सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि भ्रष्टाचार के जिन मुद्दों के बल पर अशोक गहलोत सरकार बनी थी, उनके खिलाफ बीते साढ़े चार सालों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं उन्होंने वसुंधरा राजे सरकार के समय सामने आए घोटालों को लेकर भी गहलोत सरकार की नीयत पर सवाल उठाए थे। उल्लेखनीय है कि 2018 के विधानसभा चुनावों में काॅन्ग्रेस की जीत के समय पायलट प्रदेश अध्यक्ष थे। उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी माना जा रहा था, लेकिन काॅन्ग्रेस आलाकमान ने उनकी जगह गहलोत को वरीयता दी थी।