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तुम अंडे तोड़ देती थी, अंदर से कैंडी निकाल कर खाती थी… सुकेश को याद आया जैकलीन का ‘बचपना’, ईस्टर पर भेजे पत्र में लिखा – बेबी, जल्द शुरू होगा अच्छा समय

200 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडिस को पत्र लिखा है। इस पत्र में चंद्रशेखर ने लिखा है कि लक्स कोजी के नए ऐड को देखने के बाद उसे जैकलीन की याद आती है। साथ ही उसने जैकलीन को ईस्टर की बधाई दी है।

दरअसल, ठगी के मामले में सुकेश चंद्रशेखर दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इस जेल से वह अक्सर पत्र लिखता रहा है। उसके पत्र कभी मीडिया के लिए होते हैं तो कभी दिल्ली के उप-राज्यपाल तो कभी बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस के लिए। ऐसे ही एक पत्र में उसने लिखा है, “बेबी, तुम्हें ईस्टर की शुभकामनाएँ। यह तुम्हारे पसंदीदा त्योहारों में से एक है। ईस्टर के लिए तुम्हें खूब सारा प्यार।”

सुकेश ने पत्र में आगे लिखा है, “मैं उन दिनों को याद करता हूँ जब तुम मेरे साथ थी। मुझे तुम्हारे अंदर के उस बचपने की भी बहुत याद आती है जब तुम अंडे को तोड़ देती थी और उनसे कैंडी निकलती थीं। बेबी, क्या तुम्हें अंदाजा है कि तुम कितनी सुंदर हो? तुम्हारे जैसा खूबसूरत इस पूरी धरती पर नहीं है। माई बनी रैबिट, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। तुम और मैं हमेशा साथ रहने के लिए बने हैं। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”

महाठग ने आगे लिखा है, “बेबी बुरा समय जल्द ही खत्म होगा और अच्छा समय शुरू होने वाला है। सभी लोग इस समय को देखेंगे। बेबी मैं तुमसे वादा करता हूँ चाहे जो जाए, यही होगा। एक पल भी ऐसा नहीं है जब मैं तुम्हारे बारे में नहीं सोचता। मुझे पता है कि तुम भी मुझे मिस करती होगी। मैं वादा करता हूँ कि अगला ईस्टर तुम्हारा अब तक का सबसे अच्छा ईस्टर होगा। ऐसा ईस्टर तुमने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं मनाया होगा। बेबी कल जब मैंने तुम्हारा लक्स कोजी का विज्ञापन देखा, तब मैं हमारे बारे में सोच रहा था। यह विज्ञापन तो सिर्फ एक संयोग है। लेकिन बेबी तुम बहुत ब्यूटीफुल हो। यह विज्ञापन भी हमारे बारे में ही है। बेबी।”

लेटर के आखिर में सुकेश ने गाने का जिक्र करते हुए लिखा है, “तुम मिले, दिल खिले और जीने को क्या चाहिए। बेबी तुम मेरे दिल की धड़कन हो। मुझे इतना अधिक प्यार करने के लिए धन्यवाद। हैप्पी ईस्टर अगेन माई बेबी। भगवान मम्मी-पापा और परिवार को आशीर्वाद दें। लव यू माई बेबी, माई जैकी बोम्मा।”

विकलांग, आतंकवादी, गुंडा, दुष्ट, लुटेरा… स्वामी रामभद्राचार्य पर ओछी टिप्पणी कर बनाया वीडियो, राम मंदिर मामले में उनकी गवाही की खीझ या कथाओं में जुटती भीड़ से दिक्कत?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उद्भाग के साथ आम आदमी को अपने बात रखने का और एक बड़े वर्ग तक पहुँचने का मंच मिला। लेकिन, एक किस्म के ब्रीड ने इसे विष-वमन करने का मंच भी बना दिया। कभी मुस्लिमों के ठेकेदार बन कर तो कभी दलितों के ठेकेदार बन कर ये लोग भड़काऊ बातें करते हैं। हिन्दू धर्म को गाली देना इनका पसंदीदा पेशा है। कुछ इसी तरह अब ‘Dhakad TV’ के अरुण गौतम ने स्वामी रामभद्राचार्य को बदनाम करने का प्रयास किया है।

चित्रकूट के रामभद्राचार्य किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। रामभद्राचार्य से वामपंथी और इस्लामी गिरोह की खीझ समझी जा सकती है, क्योंकि उन्होंने राम मंदिर के लिए लंबी लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 15 जुलाई, 2003 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक एफिडेविट दायर कर बताया था कि गोस्वामी तुलसीदास ने ‘दोहा शतक’ में बाबर की करतूतों और उसके शागिर्द मीर बाक़ी द्वारा राम मंदिर ध्वस्त किए जाने का जिक्र किया है, इसकी निंदा की है।

रामानंदी संप्रदाय के रामभद्राचार्य एक बड़े विद्वान हैं, जिन्होंने कई ग्रंथों पर टीकाएँ लिखी हैं। वो दृष्टिहीन हैं, लेकिन कहा जाता है कि उनके आध्यात्मिक चक्षु खुले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिर से विजय की वो भविष्यवाणी कर चुके हैं। अब उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना का जिक्र क्या कर दिया, वामपंथी गिरोह को मिर्ची लग गई है। रामभद्राचार्य पर हमले का असली कारण यही है कि हिन्दू उनका सम्मान करते हैं, उनके लाखों अनुयायी हैं।

ये तो सबको पता है कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने ही कारसेवकों पर होली चलाने का आदेश दिया था, जिसके बाद कई रामभक्त मारे गए थे। इसके बाद से ही उन्हें ‘मौलाना मुलायम’ कहा जाने लगा। ये मुस्लिम तुष्टिकरण की हद थी। इसी तरह बसपा संस्थापक कांशीराम और मुलायम ने जब गठबंधन किया था, तब उनके समर्थकों ने ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ का नारा उछाल कर हिन्दू धर्म को बदनाम किया था।

अब एक बार फिर से समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस नारे को हवा दिया है, जिन्होंने रामचरितमानस पर भी ओछी टिप्पणी की थी। इसी धारा को आगे बहाते हुए अरुण गौतम ने रामभद्राचार्य की दृष्टिहीनता का मजाक बनाते हुए उन्हें ‘आँखों से और मानसिक रूप से विकलांग’ बता दिया। वीडियो में उसने रामभद्राचार्य को ‘डर के साए में जीने वाला प्राणी’ बताते हुए ‘गुंडा’ करार दिया और कहा कि मुलायम-कांशीराम के डर से ‘जय श्री राम’ नहीं बोल पा रहे थे।

उसे रामभद्राचार्य के नारे ‘मरे मुलायम-कांशीराम, प्रेम से बोलो जय श्री राम’ के नारे से दिक्कत थी। इससे संत का आशय यह था कि मुलायम सिंह यादव और कांशीराम नहीं रहे, लेकिन ‘जय श्री राम’ आज भी गूँजायमान है। इसे अरुण गौतम ने डर समझ लिया और उनके हिम्मत को चुनौती देने लगा। उसने रामभद्राचार्य को ‘सड़क छाप गुंडा’ और ‘आतंकी’ तक करार दिया। साथ ही उन पर मंच पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए उनके अनुयायियों को ‘अक्ल के अंधों’ कहा।

साथ ही उसने रामभद्राचार्य की विद्वता का भी मजाक बनाया। बता दें कि स्वामी रामभद्राचार्य को कई ग्रन्थ याद हैं। जबकि, खुद को दलितों के ठेकेदार मानने वाला अरुण गौतम ने दावा किया कि 7 से 70 की उम्र तक रामायण लगातार सुनने पर किसी को भी याद हो जाएगा। उसने संतों को ‘लुटेरा’ कह कर संबोधित किया और धार्मिक किताबों को उनका हथियार बताया। उसने संतों को शोषक भी करार दिया और पाकिस्तान के आतंकियों से भी गए-गुजरे व खतरनाक बताया।

उसने संतों के लिए ‘दुष्ट’ शब्द का प्रयोग करते हुए OBC समाज के लोगों को ही एक तरह से बेवकूफ बता दिया। उसने OBC और SC/ST वर्ग के लोगों को सबसे बड़ा मूर्ख करार देते हुए उन्हें भड़काया कि वो साधु-संतों के प्रवचन में न जाएँ और न ही उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करें। हिन्दुओं को बाँटने की कोशिश करने वाले अरुण गौतम के यूट्यूब चैनल पर कई लोगों ने उसका समर्थन किया, ये बड़े आश्चर्य की बात है।

सबसे बड़ी बात कि रामभद्राचार्य को ‘डरपोक’ बताने वाले अरुण गौतम के वीडियो पर जब लोगों ने पुलिस को टैग करना शुरू कर दिया तो वो ट्विटर से वीडियो डिलीट कर के निकल गया। हालाँकि, उसके यूट्यूब चैनल पर ये वीडियो अब भी मौजूद है। क्या भारत भूमि पर अब भारत की परंपरा और संस्कृति के वाहकों को ही गाली दी जाएगी और वो खुला घूमता फिरेंगे? रामभद्राचार्य के लिए इस तरह की भाषा की निंदा की जानी चाहिए।

तुलसी पीठ के रामभद्राचार्य 73 वर्ष के हैं, ऐसे में अरुण गौतम ने उनकी उम्र का भी लिहाज नहीं किया। दिव्यांगों के लिए वो विश्वविद्यालय चलाते हैं, ऐसे में वो समाज के उत्थान में भी एक बड़ा योगदान दे रहे हैं। प्राचीन ग्रंथों पर उन्होंने कई टीकाएँ लिखी हैं, रिसर्च पेपर लिखे हैं। रामभद्राचार्य द्वारा लिखे गए पुस्तकों की संख्या 100 से ऊपर है। वो कई भाषाओं के ज्ञाता हैं और रामकथा में पारंगत हैं। मात्र 2 महीने की उम्र में ही उनकी दृष्टि चली गई थी। इसके बावजूद उन्होंने राम मंदिर मामले में अदालत में गवाही दी।

वो समाजवादी पार्टी की ही सरकार थी, जिसने अगस्त 2013 में स्वामी रामभद्राचार्य को हाउस अरेस्ट में डाल दिया था। उन्हें अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा के लिए जाने से रोक दिया गया था। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए अखिलेश यादव की सरकार ने कानून-व्यवस्था का बहाना बनाया। हालाँकि, न्यायालयने उन्हें रिहा करने का आदेश देकर अखिलेश यादव की सपा सरकार को झटका दिया। खुद अटल बिहारी वाजपेयी भी रामभद्राचार्य की विद्वता और व्याकरण पर उनकी पकड़ के कायल थे।

दुल्हन ने हाथ में रिवाल्वर लेकर ताबड़तोड़ की गोलीबारी, सहमे दिखे बगल में बैठे ‘दूल्हे राजा’: वायरल हुआ वीडियो, यूपी पुलिस ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो एक शादी समारोह का है जिसमें दुल्हन हाथ में रिवाल्वर ले कर ताबड़तोड़ फायरिंग करती दिख रही है। दुल्हन के बगल बैठा दूल्हा इस वीडियो में काफी असहज दिखाई दे रहा है। नेटीजेंस ने इस वीडियो पर अलग-अलग तरह से मजे लिए हैं। वहीं हाथरस पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला हाथरस जंक्शन थानाक्षेत्र के गाँव नगला शेखा का है। यहाँ सालेमपुर के एक गेस्ट हाउस में शादी समारोह था। 5 सेकेण्ड के इस वायरल वीडियो में लड़की के पीछे काले रंग की शर्ट में खड़े एक व्यक्ति ने दुल्हन को रिवाल्वर पकड़ाई। मंच पर अपने पति के साथ बैठी दुल्हन ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान लगभग 4 गोलियाँ दागी गईं। फायरिंग के बाद लड़की ने हथियार फिर से पीछे खड़े व्यक्ति के दे दिया।

दरअसल उत्तर प्रदेश के कानून के मुताबिक, हर्ष फरयिंग गैर कानूनी है। हाथरस पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर देने की जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ नेटीजेंस अलग-अलग तरह के कमेंट कर रहे हैं। राहुल कुमार विश्वकर्मा ने इस वीडियो के साथ कैप्शन के तौर पर ‘पिस्टल धारी दुल्हन’ लिखा है। पत्रकार मंजीत सिंह के मुताबिक दुल्हन का रूप देख कर दूल्हा सहम गया था। दिव्यांशु मणि त्रिपाठी ने वीडियो में दिख रही लड़की को ‘ठाँय-ठाँय वाली दुल्हन’ बताया है। वरुण गोयल के मुताबिक, ‘दूल्हे में काटो तो खून नहीं’ का भाव है।

वायरल वीडियो पर ट्विटर कमेंट्स

ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

40000 से सीधा 1411… कॉन्ग्रेस राज में ऐसे घट गई बाघों की संख्या, उलटा PM मोदी को कोस रहे जयराम रमेश: अब लॉन्च हुआ ‘इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस’

देश में बाघों के सरंक्षण के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट टाइगर को 50 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (9 अप्रैल, 2023) को कर्नाटक में स्थित बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान पहुँचे। यहाँ उन्होंने कहा है कि देश में बाघों की संख्या बढ़कर 3167 हो गई है। वहीं, कॉन्ग्रेस पीएम मोदी पर ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ का श्रेय लेने का आरोप लगा रही है। हालाँकि अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में पीएम मोदी ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ का श्रेय ले रहे हैं?

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम पर आरोप लगाते हुए ट्वीट किया है, “आज बांदीपुर में प्रधानमंत्री 50 साल पहले लॉन्च किए गए प्रोजेक्ट टाइगर का पूरा श्रेय लेंगे। वह पर्यावरण, वन, वन्यजीव और वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातियों की रक्षा के लिए बनाए गए सभी कानूनों को खत्म करते हुए बहुत तमाशा करेंगे। यह सब सुर्खियों में रहेगा। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है।”

यही नहीं, कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की फोटो ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा है, “नरेंद्र मोदी 70 साल से कॉन्ग्रेस ने क्या किया है। कॉन्ग्रेस सरकार ने 1973 में बांदीपुर बाघ संरक्षण परियोजना लागू की थी। यहीं आज आप सफारी का आनंद ले रहे हैं। प्रोजेक्ट टाइगर का परिणाम है कि आज बाघों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। उनसे खास अपील- बांदीपुर अडानी को मत बेचिए।”

देश में बाघों की संख्या बढ़ाने में कॉन्ग्रेस का योगदान?

देश की आजादी के बाद पहली बार साल 1950 में बाघों की गणना की गई थी। उस समय सामने आए आँकड़ों के अनुसार देश में बाघों की संख्या 40,000 थी। इसके बाद अगले 20 सालों में बाघों की संख्या घटकर 1800 में पहुँच गई। यह वह दौर जब देश की सत्ता जवाहर लाल नेहरू और गुलजारी नंदा, लाल बहादुर शास्त्री से होते हुए इंदिरा गाँधी तक के हाथों में पहुँच गई थी। देश में कॉन्ग्रेस के शासन के दिन बढ़ते जा रहे थे। लेकिन बाघों की संख्या लगातार गिरती जा रही थी।

इसके बाद साल 1973 में इंदिरा गाँधी ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ लॉन्च किया। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश में बचे हुए बाघों का सरंक्षण करना था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को देखकर ऐसा लगा कि बाघों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है। ऐसा हुआ भी, साल 1980 तक बाघों की संख्या 3000 तक पहुँच गई। लेकिन, इसके बाद 1990 में यह संख्या गिरकर 3000 और साल 2006 में महज 1411 रह गई। इसके बाद साल 2010 में देश में बाघों की संख्या 1706 और 2014 में 2226 थी।

इन आँकड़ों से साफ है कि देश में 70 सालों तक राज करने का दंभ भरने वाली कॉन्ग्रेस सरकार के शासन में बाघों की संख्या 40 हजार से घटकर एक समय 1411 तक पहुँच गई थी।

पीएम मोदी सिर्फ क्रेडिट ले रहे हैं?

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रेडिट लेने का आरोप लगाया हो। वैसे कॉन्ग्रेस नेताओं का झूठे आरोप लगाने और फिर माफी माँगने का इतिहास पुराना है। बहरहाल, पीएम मोदी प्रोजेक्ट टाइगर का क्रेडिट ले रहे हैं या नहीं इसकी सच्चाई जानने के लिए एक बार फिर साल 2014 के आँकड़ों पर नजर डालनी होगी। दरअसल, साल 2014 में देश में बाघों की संख्या 2226 थी। वहीं, अगले 4 सालों यानि साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 2967 पहुँच गई।

अब बांदीपुर नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री द्वारा जारी किए गए ताजा आँकड़ों के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 3167 हो गई है। यानी कि बीते 9 सालों में देश भर में 941 बाघ बढ़े हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जिनके सत्ता में रहते हुए बाघों की संख्या में लगातार गिरावट हुई वह सिर्फ सियासी फायदे के लिए झूठे आरोप मढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉन्च किया IBCA

अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (IBCA)’ लॉन्च किया है। यह अलायंस बिग कैट प्रजातियों को शरण देने वाले आसपास के देशों की सदस्यता के साथ दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्लियों बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, प्यूमा, जगुआर और चीता के संरक्षण और उनकी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा।

‘अशोक गहलोत ने एक भी भ्रष्टाचारी पर नहीं की कार्रवाई’: सचिन पायलट ने किया अनशन का ऐलान, राजस्थान में चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस में कलह

कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने एक बार फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Rajasthan CM Ashok Gehlot) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पायलट ने सीएम गहलोत पर भाजपा नेताओं के साथ साठगाँठ करने और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक दिन का अनशन रखने की घोषणा की है।

सचिन पायलट ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर राजस्थान सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर वह जयपुर में 11 अप्रैल को एक दिन का अनशन रखेंगे। यह अनशन समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती पर जयपुर के शहीद स्मारक पर करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में जो भी घोटाले हुए उसे गहलोत सरकार ने दबा दिया।

पायलट ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जो कहती है, वह करके दिखाती है। उन्होंने कहा कि जब राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी थी तो भ्रष्टाचार को लेकर कई बातें कही गई थी, लेकिन उन पर अभी कार्रवाई नहीं की गई है।

राजस्थान के प्रभावशाली गुर्जर नेता पायलट ने कहा कि राज्य में जब वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी तो कई भ्रष्टाचार हुए थे। इसको लेकर अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जन-जन तक बात पहुँचाई थी। उस दौरान कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि पार्टी सत्ता में आती है तो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसका यह परिणाम हुआ कि 2018 में वसुंधरा की सरकार बदल गई।

उन्होंने कहा कि सवा साल पहले उन्होंने सीएम गहलोत को चिट्ठी लिखी थी और वादों के अनुसार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्होंने कहा था कि साढ़े तीन साल हो गए लेकिन खान माफिया, भूमाफिया, शराब माफिया, ललित मोदी सहित किसी भी भ्रष्टाचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

पायलट ने कहा कि उनकी चिट्ठी का कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह चिट्ठी उन्होंने पार्टी को भी लिखी थी, लेकिन पार्टी की तरफ से भी कोई जवाब नहीं आया। अब 6-7 महीने बचे हैं, उसके बाद जनता के बीच जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा इससे पहले कुछ कार्रवाई हो जानी चाहिए।

पायलट ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग कर रही है। कॉन्ग्रेस के लीडरशिप को टारगेट कर रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर लोगों में यह संदेश जाएगा कि 45,000 करोड़ रुपए का खान घोटाला होने के बावजूद गहलोत सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है, क्योंकि उनकी मिलीभगत है।

काजल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया: पीछे पड़ा था जुबैर गिरोह, जुमे के दिन भीड़ ने लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

गुजरात के गीर सोमनाथ जिले की पुलिस ने हिन्दू कार्यकर्ता काजल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर रामनवमी के दौरान ‘हेट स्पीच’ देने का आरोप है। ALTNews वाला मोहम्मद जुबैर और उसका पूरे गिरोह काजल हिंदुस्तानी के पीछे पड़ा हुआ था और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भड़काऊ बातें कर रहा था। कुछ इसी तरह भाजपा की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा के लिए भी किया गया था, जिसके बाद ‘सर तन से जुदा’ गिरोह ने कइयों की हत्या कर दी थी।

काजल हिंदुस्तानी का असली नाम काजल सिंगला है। उना में हुई भगवान राम की शोभायात्रा में 30 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। जुलूस के बाद त्रिकोण बाग के पास रावणवाड़ी में धार्मिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें काजल हिंदुस्तानी ने भाषण दिया। काजल हिंदुस्तानी ने अपने भाषण में लव जिहाद और लैंड जिहाद समेत कई मुद्दों पर बात की थी। इसके अगले जुमे को ‘सर तन से जुदा’ नारे के साथ उनके भाषण को उग्र बताते हुए मुस्लिम सड़कों पर उतर आए।

गुजरात की स्थानीय मीडिया ने काजल हिंदुस्तानी की गिरफ़्तारी की खबर प्रकाशित की है। उन्हें गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया गया। इसके बाद काजल हिंदुस्तानी को जेल भेज दिया गया। काजल हिंदुस्तानी पर दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक खास समुदाय को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बातें कही। इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर उतर कर जम कर प्रदर्शन किया और उनकी हत्या की बातें कही।

उना में इसी मुद्दे पर एक कारोबारी और उसके कर्मचारियों के बीच भी बहस हो गई, जिसके बाद सड़क पर उतरे कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना के विरोधस्वरूप स्थानीय ‘चैंबर ऑफ कॉमर्स’ ने उना बंद भी बुलाया। याद हो कि गुजरात में भी रामनवमी के दौरान शोभा यात्रा पर जम कर पत्थरबाजी हुई थी, जिसके बाद सख्त रुख अख्तियार करते हुए पुलिस-प्रशासन ने कइयों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद हनुमान जन्मोत्सव शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ।

क्या छुपाना चाहती हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी? फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्यों को हिंसाग्रस्त इलाकों में जाने से रोक रही है पुलिस, रामनवमी पर हुई थी हिंसा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार शायद नहीं चाहती कि रामनवमी पर हुई हिंसा की सही जानकारी सामने आए। दरअसल, हिंसा की जाँच करने पहुँची निजी फैक्ट फाइंडिंग टीम को बंगाल पुलिस ने एक बार फिर रविवार (9 अप्रैल 2023) को हावड़ा जाने से रोक दिया। इतना ही नहीं, पुलिस ने टीम के सदस्यों के साथ बदतमीजी भी की।

रामनवमी पर बंगाल में हुई हिंसा की जाँच के लिए मानवाधिकार संगठन की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम राजधानी कोलकाता पहुँची थी। टीम के सदस्यों को पुलिस ने हिंसाग्रस्त हावड़ा जाने से रविवार को रोक दिया। इससे पहले टीम को बंगाल पुलिस ने रोसड़ा जाने से रोक दिया था।

पुलिस ने तर्क दिया कि हिंसा के कारण इलाके में धारा 144 लागू है। इसलिए मानवाधिकार संगठन के टीम इन इलाकों में नहीं जा सकते। टीम रविवार को हावड़ा में संबंधित घटनास्थल पर जाना चाहता था और वहाँ के पीड़ित परिवारों से बात करके स्थिति का सही जायजा लेना चाहता था।

हालात का जायजा के लिए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुँची है। पुलिस ने टीम को हुगली जिले का दौरा करने से रोक दिया था।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी ने कहा, “वे (पुलिस अधिकारी) कह रहे हैं कि इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लगाई गई है, लेकिन यहाँ कुछ भी नहीं है। वे डरे हुए हैं, क्योंकि उनका पर्दाफाश हो जाएगा।”

टीम के एक सदस्य ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोका था उन्होंने कहा कि वे लोग घायलों से बात कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे घटना की जाँच करने नहीं जा रहे हैं। वहाँ के लोगों में विश्वास जगाने जा रहे हैं।

टीम के सदस्यों का कहना है कि इसके पहले शनिवार (8 अप्रैल 2023) को रिसड़ा जाने के दौरान रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। उन्होंने कहा, “हम पैदल जाना चाहते थे, क्योंकि बंगाल में कहीं भी कर्फ्यू नहीं है। आज दूसरे दिन हुगली पुलिस ने कार को रोक दिया।” उन्होंने कहा कि बंगाल की ममता सरकार राज्य की जनता के बारे में कुछ नहीं सोचती।

‘हिन्दुओं ने 3 मुस्लिमों को पीटा, जबरन पिलाई शराब’: अफजल गुरु समर्थक पत्रकार अहमद खबीर ने फैलाई झूठ, फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए खुद को दिखाता था महिला

तथाकथित पत्रकार अहमद खबीर ने ट्वीट ने कर दावा किया था कि तेलंगाना में हिंदुओं ने तीन मुस्लिमों को पीटा और शराब पीने के मजबूर किया। हालाँकि, खबीर का यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। दरअसल, तेलंगाना पुलिस ने इस घटना में किसी भी प्रकार से सांप्रदायिक एंगल होने की बात से इनकार किया है।

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘जामिया टाइम्स’ के संपादक के रूप में काम करने वाला खबीर हिंदुओं को लेकर गलत खबरें फैलाता रहा है। सोशल मीडिया पर कई बार आलोचना झेलने के बाद भी हिंदुओं के प्रति घृणा के चलते वह लगातार झूठी बातें करता रहता है।

प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज को लेकर लगातार ट्वीट करन वाले ट्विटर हैंडल ‘डी-इंटेंट डेटा’ ने शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को अहमद खबीर के इतिहास को लेकर ‘खुलासा’ किया। ‘डी-इंटेंट डेटा’ के अनुसार, अहमद खबीर का ट्विटर अकांउट पहले लड़की के नाम से था। इस अकाउंट में वह खुद को लड़की बताते हुए लड़कियों की फोटो ट्वीट करता था। ऐसा माना जा रहा है कि खबीर ने यह सब ट्विटर पर फ़ॉलोअर्स बढ़ाने के लिए किया होगा। सोशल मीडिया में खुद को एक महिला या किसी और व्यक्ति के रूप में दिखाने को ‘कैटफिशिंग’ कहा जाता है। मतलब यह है कि खबीर ‘कैटफिशिंग’ कर रहा था।

खबीर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र है। साल 2019 में नागरिकता संसोधन कानून (CAA) को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान वह पुलिस से भिड़ गए था। यही नहीं वह फेसबुक पर दिल्ली दंगों के आरोपित शाहरुख पठान का महिमामंडन भी कर रहा था।

‘डी-इंटेंट डेटा’ के अनुसार, अहमद खबीर कई विपक्षी नेताओं से मिलता रहा है। उसकी फोटोज भी सामने आईं हैं। उसे राहुल गाँधी की राजनीतिक यात्रा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का समर्थन करते भी देखा गया था।

यही नहीं, अहमद खबीर इससे पहले ‘TwoCircles.Net’ में भी काम कर चुका है। प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘टू सर्किल’ हाल ही में तब चर्चा में आया था जब इसके संपादक इरफान मेहराज को 20 मार्च 2023 को टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।

‘डी-इंटेंट डेटा’ ने एक ट्वीट में कहा है कि खबीर न केवल फर्जी खबरें फैलाता है बल्कि युवाओं का आतंकवादी संगठनों में शामिल होना भी उसे सही लगता है। खबीर यह भी दावा करता है कि सेना ने कश्मीर पर कब्जा कर लिया है। इसलिए कश्मीर से सभी सुरक्षा बलों की वापसी होनी चाहिए। यही नहीं, सेना की गोलियों से मारे गए आतंकियों को सामान्य नागरिक बताकर एक झूठा नरेटिव गढ़ने की कोशिश करता रहा है।

इसके अलावा अहमद खबीर आतंकवादी अफजल गुरु का भी समर्थक है। उसने दावा किया था कि भारत के हिंदुओं को खुश करने के लिए अफजल गुरु को फाँसी दी गई। खबीर ने हाल ही में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के अकाउंट से भारत की निंदा करने वाले एक ट्वीट को रीट्वीट किया था। साथ ही वह फेक न्यूज फैलाने वाले मीर फैसल और मकतूब मीडिया का भी समर्थन करता है।

अहमद खबीर लगातार यह दिखाने की कोशिश करता है कि भारत में मुस्लिम बहुत अधिक पीड़ित हैं। कश्मीर, दलित समेत अन्य मुद्दों पर भी वह फर्जी ख़बरें फैलाता रहा है। इन्हीं सब चीजों के चलते उसका ट्विटर अकाउंट भी सस्पेंड किया जा चुका है। यही नहीं वह अपने फर्जी प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिए अपने फ़ॉलोअर्स से चंदा माँगता हुआ भी देखा गया था।

चूँकि प्रोपेगेंडा पोर्टल चलाने वाला अहमद खबीर अक्सर हिंदू विरोधी फर्जी खबरें फैलाता रहा है। ऐसे में यह स्वाभाविक सी बात है कि ट्विटर पर उसे ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह, अलीशान जाफरी, लीसेस्टर हिंसा के दौरान फर्जी नरेटिव फैलाने वाली ‘द गार्डियन’ की पूर्व पत्रकार आइना खान, राजद नेता तेजस्वी यादव, टीएमसी प्रवक्ता साकेत गोखले, दिल्ली दंगों का आरोपित अतीक इकबाल तन्हा समेत उसकी जैसी विचारधारा वाले कई लोग उसे फॉलो करते हैं।

जमशेदपुर में धार्मिक झंडे के साथ लटका मिला माँस: सड़क पर उतरे हिन्दू संगठनों का विरोध प्रदर्शन, पढ़ी हनुमान चालीसा, पुलिस बल तैनात

झारखंड के जमशेदपुर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक धार्मिक झंडे पर माँस का टुकड़ा बाँध देने एक बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए। हिंदू संगठनों ने झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे। हालाँकि पुलिस ने बीच में पड़ कर मामले को शांत करवाया। घटना शनिवार (8 अप्रैल 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ममला जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर का है। यहाँ ब्लॉक 3 के चौक के पास कुछ धार्मिक झंडे लगे हुए थे। आरोप है कि उन झंडों पर किसी असामाजिक तत्व ने माँस की थैली लटका दी थी। स्थानीय लोगों के माध्यम से इस बात की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई। मौके पर पहुँचे हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग करते हुए धरना देना शुरू कर दिया। इस दौरान नारेबाजी हुई जिसके बाद दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे।

बढ़ रहे तनाव को भाँपते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हिन्दू संगठन के लोगों ने अपने धार्मिक ध्वज को अशुद्ध करने वालों पर कार्रवाई की माँग की। पुलिस अधिकारी दोनों पक्षों से बात करते हुए मामले को शांत करवाने की कोशिश करने लगे। पॉलीथीन में रखे गए माँस को भी मौके से हटा दिया गया। घंटों चली बातचीत के बाद हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पुलिस द्वारा आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के आश्वासन पर अपने धरने को समाप्त किया।

इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठन के सदस्यों ने झंडे को बदल दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क पर टायर भी जलाए गए। घटना स्थल पर सड़क पर ही बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। पाठ के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती भी की। जिस स्थान पर झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगा है उस चौक का नाम बजरंग चौक करने की भी माँग उठी। साथ ही प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV कैमरे लगवाने की अपेक्षा जताई गई। चौक पर माँस बेचने वाली दुकानों को भी हटाने के लिए प्रशासन से अपील की गई है। प्रशासन को आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

सरल, जमीन से जुड़े, मेहनती… शरद पवार की आत्मकथा में गौतम अडानी की तारीफ, ‘कायर’ बताने के बाद अब सफाई देने में जुटीं अलका लांबा

हिंडेनबर्ग रिसर्च की कथित रिपोर्ट के बाद से देश में राजनीतिक उथल-पुथल मचा हुआ है। राहुल गाँधी इसे जबरन मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, उनके गठबंधन के साथ शरद पवार ने कह दिया कि अदानी समूह को विदेशी संस्थाओं द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा माँग की जा रही JPC जाँच के औचित्य को भी नकार दिया।

इस बीच अपनी बदजुबानी क लिए पहचानी जाने वाली कॉन्ग्रेस की नेता अलका लांबा ने नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार को लालची बताते हुए उन पर निशाना साधा है। इसको लेकर लांबा ने एक ट्वीट भी किया है।

अपने ट्वीट में शरद पवार और गौतम अडानी की कथित तस्वीर शेयर करते हए अलका लांबा ने लिखा, “डरे हुए लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं। देश के लोगों की लड़ाई एक अकेला राहुल गांधी लड़ रहा है। पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी।”

शरद पवार पर इस बयान को लेकर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अलका लांबा से पूछा कि क्या यह कॉन्ग्रेस का आधिकारिक बयान है। शहजाद पूनावाला के साथ ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी अलका लांबा के बयान को भयावह बताया और कहा कि पवार भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं।

इस पर अलका लांबा ने कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक बयान नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत बयान है। अलका लांबा ने कहा कि पार्टी का आधिकारिक बयान उनकी पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी किया जाता है। वह एक स्वतंत्र कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हैं और उनके निजी हैंडल से किया जाने वाला ट्वीट उनका स्वतंत्र विचार है। दरअसल, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA का हिस्सा NCP भी है। हालाँकि, अडानी पर उन्होंने UPA से अलग विचार रखा था।

बताते चले हैं कि अलका लांबा ने जिस तस्वीर को पोस्ट का यह दोनों के बीच नजदीकी का आरोप लगाया है, वह छुपा हुआ तथ्य नहीं है। गौतम अडानी और उनकी दोस्ती लगभग दो दशक पहले की है। शरद पवार ने साल 2015 में मराठी में आई अपनी आत्मकथा ‘लोक भूलभुलैया संगति…’ में अडानी की तारीफ भी की है।

इसमें शरद पवार ने गौतम अडानी को सरल, जमीन से जुड़ा व्यक्ति और मेहनती बताया है। उन्होंने लिखा है कि अडानी ने हर चुनौती स्वीकार की और आगे बढ़े। पवार ने इसमें आगे लिखा है, “मेरे ही कहने पर ही अडानी ने थर्मल पावर सेक्टर में कदम रखा था। वह हीरा उद्योग में अच्छी कमाई कर रहे थे, लेकिन गौतम को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रवेश करने की उनकी महत्वाकांक्षा थी।”