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मुलायम सिंह पर गीत, डिंपल यादव के लिए प्रचार, अखिलेश-शिवपाल के साथ तस्वीर: भोजपुरी हिरोइन सुसाइड केस में गिरफ्तार समर सिंह यादव का सपा से क्या है कनेक्शन

वाराणसी के एक होटल से भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे का शव मिलने के मामले में मृतका के बॉयफ्रेंड समर सिंह यादव को पुलिस ने गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। समर पर आकांक्षा का अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है। अब तक यही माना जाता था कि अभिनेत्री ने आत्महत्या की है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल खड़े किए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार की रात को गाजियाबाद के नंदग्राम थाना के राजनगर एक्सटेंशन स्थित चार्म्स क्रिस्टल सोसायटी में छिपा था। वह पुलिस से बचने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार अपने ठिकाने से बदल रहा था। उत्तर पुलिस पिछले 10 दिनों से उसकी तलाश कर रही थी।

अश्लील वीडियो द्वारा ब्लैकमेल का आरोप

बता दें कि आकांक्षा की माँ मधु दुबे ने कहा था कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती है। आकांक्षा की हत्या की गई है। इसके लिए उन्होंने समर और उसके भाई संजय को आरोपित किया था। बता दें कि 26 मार्च को वाराणसी के एक होटल में आकांक्षा का शव फाँसी पर लटका हुआ मिला था।

आकांक्षा का सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी मिला है, जिसमें वह अचानक फुट-फुटकर रोने लगती हैं। आकांक्षा की माँ की ने कहा था कि समर सिंह यादव उनकी बेटी को ब्लैकमेल करता था। दूसरे ऐक्टर के साथ काम नहीं करने देता था। इतना ही नहीं, वह आकांक्षा की कमाई के पैसे भी हड़प लेता था।

मधु दुबे ने कहा था कि समर ने उनकी बेटी आकांक्षा को झाँसे में ले लिया था। इसके बाद वह शादी के नाम पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान उसने आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिए थे। इस वीडियो के आधार पर वह उनकी बेटी को ब्लैकमेल करता था। उन्होंने समर पर आकांक्षा के साथ मारपीट का भी आरोप लगाया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

अब तक यही कहा जा रहा था कि होटल में लौटने से पहले आकांक्षा में बहुत अधिक शराब पी रखी थी और कमरे में पहुँचकर आत्महत्या कर लिया था। अब जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है, उसमें कहा गया है कि आकांक्षा के शरीर में अल्कोहल की मात्रा नहीं थी। यानी उन्होंने शराब नहीं पी थी।

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि आकांक्षा के पेट से संदिग्ध भूरा पदार्थ मिला है। उनकी कलाई पर भी चोट के निशान मिले हैं। इतना ही नहीं, पेट की श्लेष्मा झिल्ली भी क्षतिग्रस्त मिली है। इससे आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं।

मधु दुबे ने यह भी आरोप लगाया था कि समर यादव का समाजवादी पार्टी के नेताओं से संबंध हैं और सपा के नेता उसे संरक्षण दे रहे हैं। बता दें कि आकांक्षा दुबे भोजपुरी गायक समर सिंह यादव के साथ वाराणसी के टकटकपुर क्षेत्र में लिव-इन रिलेशन में रहती थीं। मौत से कुछ दिन पहले ही दोनों अलग हुए थे। समर का नाम आने के बाद से वह लापता हो गया था।

अखिलेश यादव के करीबी समर सिंह यादव

आजमगढ़ के मेहनगर इलाके के रहने वाले समर सिंह भोजपुरी गायक और अभिनेता है। उसे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। अखिलेश यादव ने अगस्त 2021 में समर सिंह यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल किया था। तब समर ने कहा था कि वह 2022 के यूपी विधानसभा में सपा को बहुमत में लाने का संकल्प लिया था।

समर यादव का सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ कई तस्वीरें हैं। इतना ही नहीं अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव के साथ भी समर की कई तस्वीरें हैं। समर ने चुनावों के दौरान सपा के लिए कई गाने भी लिखे और गाए थे। इनमें एक ‘सपा आई रे…’ खूब वायरल हुआ था।

पिछले साल अक्टूबर में उसने सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ‘श्रद्धांजलि श्रद्धेय नेता जी को’ नाम से एक श्रद्धांजलि गीत भी गाया था। इसमें उसने मुलायम सिंह यादव की जमकर तारीफ की थी।

समर सिंह यादव ने साल 2022 में आजमगढ़ सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के पक्ष में जमकर प्रचार भी किया था। भाजपा ने इस सीट पर भोजपुरी फिल्मों को गायक और अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh lal yadav Nirahua) को उतारा था। डिंपल यादव को फेवर में समर ने बैनर पोस्टर भी लगवाए थे।

भिंडरवाले जैसा दिखने की सनक में 2 महीने जॉर्जिया में रहा था अमृतपाल सिंह, खालिस्तानी भगोड़े ने कराई थी कॉस्मेटिक सर्जरी

खालिस्तानी भगोड़े और ‘वारिस पंजाब दे’ का सरगना अमृतपाल सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। श्रीअकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा 7 अप्रैल 2023 को दमदमा साहिब में बुलाई गई एक सभा में उसके सरेंडर करने की अटकलें लग रही हैं। इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि भारत लौटने से पहले अमृतपाल जाॅर्जिया गया था। वहाँ दो महीने रहकर उसने सर्जरी कराई थी ताकि जरनैल सिंह भिंडरवाले की तरह दिख सके।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमृतपाल के सहयोगी पूछताछ में लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं। इसी क्रम में अब अमृतपाल के जॉर्जिया जाने और सर्जरी करवाने की बात सामने आई है। असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह के सहयोगियों ने खुफिया एजेंसियों को पूछताछ में बताया है कि भारत लौटने से पहले अमृतपाल जॉर्जिया गया था। वह अगस्त 2022 में भारत लौटा था।

जरनैल सिंह भिंडरावाले से अमृतपाल प्रभावित था। वह भिंडरवाले की तरह ही दिखना चाहता था। इसलिए कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए वह जॉर्जिया गया था। यहाँ वह 2 महीने रहा था। एजेंसियों द्वारा इस जानकारी की पुष्टि की जा रही है। अमृतपाल भिंडरवाले की ही तरह नीली पगड़ी पहना करता है। उसकी वेशभूषा भी भिंडरवाले से मिलती-जुलती है, इसलिए उसे पंजाब का दूसरा भिंडरवाले भी कहा जाता है। वह अपने भाषणों में कई बार भिंडरावाले को प्रेरणा बताते हुए उसके रास्ते पर चलने की बात कह चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार खुफिया एजेंसियाँ इस बात का पता लगा रही हैं कि दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत के बाद अमृतपाल अचानक भारत क्यों पहुँचा? उसी को वारिस पंजाब दे का प्रमुख क्यों बनाया गया? दूसरी तरफ पंजाब पुलिस द्वारा अमृतपाल की तलाश जारी है। वह 18 मार्च 2023 से ही फरार चल रहा है। कहा जा रहा है कि वह दमदमा साहिब में सरेंडर कर सकता है।

बता दें दीप सिद्धू की मौत 15 फरवरी 2022 को हुई थी। इसके बाद 29 सितंबर 2022 को मोगा जिले में जरनैल सिंह भिंडरावाले के गाँव रोडे में अमृतपाल की दस्तारबंदी (पगड़ी बाँधा जाना) हुई थी। इस समारोह में खुलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हमें क्या चाहिए-आजादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। पगड़ी पहनते ही अमृतपाल सिंह ने मंच से ‘भविष्य की जंग’ शुरू करने की घोषणा की थी। बाद में वह वह खुलेआम खालिस्तान की माँग करने लगा था।

कॉपरेट करो वरना कर देंगे नंगाः हिरोइन स्वास्तिका मुखर्जी को बंगाली फिल्म के प्रोड्यूसर ने भेजा मेल, पोर्न साइट पर न्यूड फोटो डालने की धमकी

अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी को धमकी भरे ईमेल मिले हैं। इसमें कथित तौर पर उनकी न्यूड फोटो पोर्न साइट पर अपलोड करने की धमकी दी गई है। मुखर्जी के अनुसार ये मेल बंगाली फिल्म ‘शिबपुर’ के को-प्रोड्यूसर संदीप सरकार और एसोसिएट प्रोड्यूसर रवीश शर्मा ने भेजे हैं। स्वास्तिका मुखर्जी (Swastika Mukherjee) कला, पाताल लोक, क्रिमिनस जस्टिस सीजन जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आ चुकी हैं।

स्वास्तिका ने कहा अपनी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर पोर्न साइट पर अपलोड किए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने कोलकाता के गोल्फ ग्रीन पुलिस थाने में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार एक्ट्रेस को महीनों से धमकी भरे ईमेल मिल रहे हैं। ईटाइम्स को दिए साक्षात्कार में स्वास्तिका ने बताया कि वे एक बंगाली फिल्म ‘शिबपुर’ के लिए काम कर रही थीं। धमकी देने वाले संदीप सरकार इसी फिल्म के को-प्रोड्यूसर हैं। संदीप सरकार और उनके एसोसिएट प्रोड्यूसर रवीश शर्मा पिछले एक महीने से स्वास्तिका और उनकी मैनेजर श्रीस्ती जैन को यौन उत्पीड़न करने वाले और जान से मारने की धमकी से भरे ईमेल भेज रहे हैं।

स्वास्तिका रवीश शर्मा उन्हें ‘कॉपरेट’ करने को कह रहे हैं। बकौल अभिनेत्री उनसे कहा गया कि यदि ‘कॉपरेट’ नहीं किया तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स हैक कर लिए जाएँगे। उनकी मॉर्फ्ड न्यूड तस्वीरों को पोस्ट किया जाएगा। पोर्न वेबसाइट्स पर भी इन्हें अपलोड कर दिया जाएगा। अभिनेत्री का कहना है कि को-प्रोड्यूसर संदीप सरकार उन पर पैसे वसूलकर मार्केटिंग और प्रमोशन से दूरी बनाने का इल्जाम लगा रहा है।

स्वास्तिका का कहना है, “मुझे या मेरे मैनेजर को कभी किसी मार्केटिंग प्लानिंग की जानकारी नहीं दी गई। यहाँ तक कि मुझे बिना बताए फिल्म की रिलीज डेट बदल दी गई।” अभिनेत्री का कहना है कि उन्हें कोई भी अतिरिक्त पेमेंट नहीं किया गया जैसा कि कहा जा रहा है। उन्हें फिल्म के कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से पैसे दिए गए। फिल्म एक इंडो-अमेरिकन प्रोडक्शन हाउस द्वारा बनाया जा रहा है।

अदाकारा ने ओटीटी प्ले को दिए इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान वे को-प्रोड्यूसर से नहीं मिलीं। उनका परिचय फिल्म के दूसरे को-प्रोड्यूसर्स के साथ था। शूटिंग के बाद संदीप सरकार अमेरिकी नागरिक होने का दावा करते हुए ईमेल भेजने लगे। धमकी देने लगे कि यदि ‘कॉपरेट’ नहीं किया तो वे यूएस कंस्यूलेट से बात करेंगे और अभिनेत्री का वीजा जारी नहीं होने देंगे।

क्या करना है, कैसे करना है… सब सत्येंद्र जैन के दिमाग की उपज, हाई कोर्ट ने भी माना मनी लाॅन्ड्रिग का कर्ताधर्ता: जानिए AAP नेता को क्यों नहीं मिली बेल

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन को हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले का कर्ताधर्ता बताया है। साफ शब्दों में कहा है कि क्या करना है, कैसे करना है, यह सब कुछ जैन के दिमाग की उपज थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 6 अप्रैल 2022 को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने 46 पन्नों के आदेश में कहा है कि सत्येंद्र जैन या उनका परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन कंपनियों को नियंत्रित कर रहा था, जिनका इस्तेमाल मनी लाॅन्ड्रिंग में किया गया। साथ ही कहा है कि वे बाहर निकलने पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने में कर सकते हैं। इसी आधार पर AAP नेता की जमानत याचिका खारिज की गई।

हाई कोर्ट ने कहा है, “पंकुल अग्रवाल की गवाही से जाहिर है कि मेसर्स जेजे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड पर सत्येंद्र कुमार जैन का पूर्ण नियंत्रण है। इसी तरह राजेंद्र बंसल, जीवेंद्र मिश्रा, आशीष चोखानी और जेपी मोहता की गवाही से पता चलता है कि सत्येंद्र कुमार जैन इस पूरे ऑपरेशन के बारे में सोचने वाले, फैसला करने वाले और अंजाम देने वाले थे। इसमें वैभव जैन और अंकुश जैन ने उनकी मदद की।” आदेश में जैन के लिए conceptualizer, visualizer and executor शब्द का इस्तेमाल किया गया है। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो हाई कोर्ट ने जैन को मनी मनी लॉन्ड्रिंग मामले का कर्ताधर्ता बताया है।

उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने सत्येंद्र जैन के साथ मामले के दो अन्य आरोपित वैभव जैन और अंकुश जैन को भी जमानत देने से इनकार कर दिया था। सत्येंद्र जैन ने जमानत माँगते हुए दलील दी थी कि किसी तरह की संपत्ति पर उनका नियंत्रण नहीं है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से हुई आय पर नियंत्रण वश्यक नहीं है। ऐसा आय को छिपाने या फिर काले धन को कानूनी रूप देने के लिए भी किया गया हो सकता है।

सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। ससे पहले निचली अदालत ने भी सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आय छिपाने की कोशिश की। निचली अदालत के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद भी वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उन्हें जेल में रखने की कोई जरूरत नहीं है।

दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य और जेल मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में ही बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन के मामले में हुई थी। ईडी ने अपनी जाँच में पाया है कोलकाता की कंपनियों के साथ उन्होंने अवैध रूप से 4.81 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन किया है। इस मामले में ईडी उनकी 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

बंगाल में मिला था 81000 डेटोनेटर, 27000 Kg अमोनियम नाइट्रेट… 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट से हुआ था बेरुत धमाका, 200 किमी तक सुनाई पड़ी थी आवाज

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रविवार (2 अप्रैल 2023) को आतंकी गतिविधियों के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां के रूप में हुई है। इन लोगों ने इतने अधिक विस्फोटक जमा कर लिए थे कि साल 2020 में हुए बेरूत धमाके की दहशत को ताजा कर दिया था।

दरअसल, पश्चिम बंगाल एसटीएफ (West Bengal STF) ने जून 2022 में कोलकाता से एक टाटा सूमो कार सहित कई जगहों से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया था। इनमें 81,000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 1625 किलोग्राम जिलेटिन छड़ें शामिल थीं।

आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं विस्फोटक की मात्रा बड़ा विषय…

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 81000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट का जखीरा मिलने का सीधा मतलब यह था कि देश में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी।

इस विस्फोटक से यदि धमाका होता तो कोलकाता जैसा बड़ा शहर पूरी तरह से दहल जाता। यही नहीं, यदि किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में यह धमाका होता तो कई किलोमीटर तक लाशें बिछ जातीं और तबाही का मंजर लोगों को भूलाए नहीं भूलता।

इस मामले में अब तक कुल 4 संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। पहली गिरफ्तारी जून 2022 में ही हुई थी। जिस टाटा सूमो कार में डेटोनेटर ले जाया जा रहा था, उसके ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सितंबर 2022 में मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया।

इसके बाद NIA ने इस साल की शुरुआत यानी जनवरी 2023 में रिंटू शेख नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अब मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां की गिरफ्तारी हुई है। इन दोनों ने ही रिंटू शेख को विस्फोटक सप्लाई किए थे।

बेरूत की चर्चा क्यों…?

दरअसल, 4 अगस्त 2020 की तारीख लेबनान के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज है। इस दिन राजधानी बेरूत के पोर्ट इलाके में हुए धमाके से 10 किलोमीटर के दायरे में तबाही मच गई थी। इस भीषण दुर्घटना का वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में एक वेयरहाउस से धुँआ निकलते हुए देखा गया।

इसके बाद अचानक ही भयानक विस्फोट हुआ। इस धमाके की तीव्रता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसकी गूँज करीब 200 किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी। इस दुर्घटना में 218 लोग मारे गए थे। वहीं 6,000 से अधिक घायल हुए थे।

इस धमाके को लेकर लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने कहा था कि बेरूत के पोर्ट इलाके में स्थित एक वेयरहाउस में 2750 टन (27,50,000 किलोग्राम) अमोनियम नाइट्रेट असुरक्षित रूप से रखा हुआ था। इसी अमोनियम नाइट्रेट की वजह से भीषण धमाका हुआ।

इस धमाके को लेकर अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह धमाका 3.3 तीव्रता के भूकंप की तरह था। चूँकि यह धमाका पोर्ट इलाके यानी बंदरगाह क्षेत्र में हुआ था। जहाँ आमतौर पर लोगों की संख्या अधिक नहीं होती है, लेकिन यदि यह धमाका शहर के बीच में हुआ होता तो मरने वालों और घायलों की संख्या कहीं अधिक होती।

इसी तरह अमोनियम नाइट्रेट कई बड़े औद्योगिक हादसों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में अमरीका के टेक्सस में 2000 टन रसायन ले जा रहे एक जहाज़ में धमाका हो गया था। इस धमाके के कारण 581 लोग मारे गए थे।

‘हज ड्यूटी हर मुस्लिम कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार’: दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, सुरक्षा को लेकर स्मृति ईरानी के ‘सुधारों’ का विरोध

आमिर जावेद नाम के एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में उन्होंने कहा है कि हज यात्रा के दौरान जेद्दा में तैनाती पर भेजा जाना केंद्र और राज्य सरकार के प्रत्येक मुस्लिम कर्मचारी का ‘संवैधानिक अधिकार’ है।

इस याचिका में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के 20 मार्च 2023 को दिए गए ज्ञापन को चुनौती दी गई है। इस ज्ञापन में कहा गया है कि अस्थायी प्रतिनियुक्ति पर केवल सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) कर्मचारियों को शामिल किया गया। 

वकील जावेद ने याचिका में तर्क दिया है कि यात्रा में शामिल काम प्रशासनिक है और इसलिए कोई कारण नहीं है कि केवल सीएपीएफ अधिकारियों को ही तैनात किया जाए। याचिका में दलील दी गई कि हज ड्यूटी पर तैनाती मुस्लिम कर्मचारियों का ‘संवैधानिक अधिकार’ है।

याचिका में आगे दलील दी गई है कि मंत्रालय का आदेश उन मुस्लिम कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जो हज तीर्थयात्रियों की सेवा करना चाहते हैं। बता दें कि साल 2023 मे लगभग 1.4 लाख भारतीय तीर्थयात्रियों के हज जाने उम्मीद है। इसकी पहली उड़ान 21 मई 2023 को निर्धारित की गई है।

वकील आमिर जावेद ने अपनी याचिका में कहा कि मौजूदा ज्ञापन संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन करता है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को स्मृति ईरानी के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से इस पर जवाब माँगा।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने हज डिवीजन को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपना जवाब अदालत के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 10 मई 2023 को सुनिश्चित की है।

दरअसल, सऊदी अरब ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हर देश अपने तीर्थयात्रियों की देखभाल के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। इसलिए भारत भी हज यात्रियों की देखभाल के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजता है। गैर-मुस्लिमों को मक्का में घुसने की अनुमति नहीं है। ऐसे में सरकार मुस्लिमों को ही भेजती है।

इससे पहले केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक मुस्लिम कर्मचारी थे, जिन्हें जेद्दा में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। उनके पास समस्या यह थी कि जिन लोगों भेजा गया था, उनके पास तीर्थयात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं था।

उदाहरण के लिए, यदि भगदड़ मची थी, तो 900 प्रतिनिधि ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं थे, क्योंकि इनमें से अधिकांश प्रतिनियुक्त क्लर्क, शिक्षक और इसी तरह के लिए की गई थी। इसको देखते हुए स्मृति ईरानी ने साल 2023 के लिए नियम बदला है, ताकि पेशेवरों को वहाँ भेजा जा सके।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा ने लिखी है। विस्तार से इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)

‘मुस्लिमों शासकों की बुराई मत करना, मंदिरों का विध्वंस नहीं पढ़ाना’: कम्युनिस्टों ने किताबों से साफ करवाई इस्लामी बर्बरता, आज फिर ‘मुगल प्रेम’ में हो रहे दुबले

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद बिनय विश्वम (Binoy Viswam) ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में में उन्होंने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों से मुगलों के बारे में जानकारी हटाने को लेकर चिंता व्यक्त की है।

मोदी सरकार को लिखे अपने पत्र में बिनय विश्वम ने कहा है कि एनसीईआरटी की किताबों में भारी बदलाव किए जा रहे हैं। इस तरह के बदलाव के जरिए भारतीय इतिहास के कुछ समय की जानकारी विलुप्त करने की कोशिश की जा रही है। विश्वम ने सरकार पर इतिहास, राजनीतिक व्यवस्था और समाज को बिगाड़ने तथा सांप्रदायीकरण करने का आरोप लगाया। 

उन्होंने कहा है, “दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य और उस समय के साहित्य और वास्तुकला से संबंधित सामग्री को हटाना और कम करना प्रथम दृष्टया सांप्रदायिक रूप से पक्षपाती प्रतीत होता है। सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी जानकारियाँ भी काफी हद तक हटाई गई हैं।”

नहीं हटाया गया मुगलों का इतिहास

सबसे पहली बात तो यह है कि NCERT की किताबों से मुगलों से जुड़े अध्यायों को हटाया नहीं गया है। ऑपइंडिया ने एनसीईआरटी की किताबों को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़े झूठ का भंडाफोड़ करने की कोशिश की है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि NCERT ने अपनी किताबों खासतौर से 12वीं कक्षा की इतिहास की किताब में संशोधन किया है और मुगल साम्राज्य से जुड़े कुछ अध्यायों को हटाया गया है। अफवाह बढ़ने के बाद, एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने मीडिया द्वारा किए जा रहे दावों का खंडन किया है।

एनसीईआरटी के निदेशक सकलानी ने एएनआई से हुई बातचीत में कहा है कि मुगलों पर जो अध्याय थे उन्हें हटाया नहीं गया है। जिन चीजों का किताब में बार-बार जिक्र था या फालतू थे सिर्फ उन्हें हटाया गया है। कोरोना वायरस महामारी के चलते बच्चों पर अधिक बोझ न बढ़े इसलिए यह फैसला लिया गया। उन्होंने यह भी कहा है कि जो लोग इस मुद्दे को फालतू में उठा रहे हैं उन्हें NCERT की वेबसाइट पर जाकर इसकी जाँच करनी चाहिए।

CPM सरकार ने किताबों से ‘मुगलों की सच्चाई’ हटाने का दिया था आदेश…

विडंबना यह है कि सीपीएम नेता आज कथित तौर पर मुगलों का इतिहास हटाने को लेकर हो-हल्ला कर रहे हैं। लेकिन इसी सीपीएम पार्टी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता में रहते हुए मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों की घटनाओं को किताबों से हटवा दिया था। इसके लिए सरकार ने साल 1989 में एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों की घटनाओं को ‘विवादित’ बताते हुए हटाने के लिए कहा गया था।

इस आदेश में साफ तौर पर लिखा हुआ था, “मुस्लिम शासन की कभी भी आलोचना नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम शासकों और आक्रमणकारियों द्वारा किए गए मंदिरों के विनाश का भी उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए।”

(फोटो साभार:’फंडामेंटलिज्म इन द कंटेम्परेरी वर्ल्ड: क्रिटिकल सोशल एंड पॉलिटिकल इश्यूज’ पेज नंबर-273)

लेखक संतोष सी साहा ने अपनी पुस्तक ‘फंडामेंटलिज्म इन द कंटेम्परेरी वर्ल्ड: क्रिटिकल सोशल एंड पॉलिटिकल इश्यूज’ में बताया है कि पश्चिम बंगाल की सत्ता में बैठी तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार ने साल 1989 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (28 अप्रैल 1989) को एक आदेश जारी किया था।

इस्लामवादियों ने किया हिंदुओं पर अत्याचार

इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को किताबों से हटाने के इस तरह के उपायों के जरिए कोशिश यह थी कि बड़े होकर हिंदुओं को यह पता चलेगा कि मुगलों और अंग्रेजों के आने से पहले भारत में कुछ भी ठीक नहीं था। यही नहीं, यह भी दिखाने की कोशिश की जाती है कि इस्लामिक आक्रांताओं ने इस देश में कुछ भी गलत नहीं किया है।

वास्तव में, मुस्लिमों द्वारा भारत के इतिहास को लेकर जो लिखा गया है उससे भी यह पता चलता है कि इस्लामवादी शासकों ने हिंदुओं पर जमकर अत्याचार किया और जबरन इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया। इतिहास की कई किताबों में न केवल इस्लामवादी शासकों के अत्याचार की घटनाओं को हटाया गया बल्कि इन आक्रांताओं का महिमामंडन भी किया गया।

वास्तव में मध्यकालीन इतिहास केवल मुगलकालीन इतिहास ही है। स्कूल का पाठ्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है जैसे कि यह बताने की कोशिश की गई हो कि भारत में हर बड़ा और अच्छा काम मुगलों ने ही किया है। हालाँकि सच्चाई यह है कि धर्मांतरण से लेकर, मंदिरों को तोड़ने, महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार से लेकर सभी प्रकार के व्यभिचार मुगल काल में चरम पर थे।

‘काॅन्ग्रेस ने बिना टेंडर अडानी को दिया था बंदरगाह’: निर्मला सीतारमण ने राहुल गाँधी को याद दिलाई करनी, कहा- झूठ बोलने और माफी माँगने की उन्हें आदत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अडानी का नाम लेकर भाजपा पर आरोप लगाते हैं, लेकिन सच यह है कि कॉन्ग्रेस ने बिना किसी टेंडर के विझिंगम बंदरगाह अडानी को दिया था। सीतारमण ने कहा है कि भाजपा ने अडानी को कभी अनुचित लाभ नहीं दिया। राहुल गाँधी प्रधानमंत्री पर झूठे आरोप लगाकर बार-बार अपराध कर रहे हैं।

सीतारमण ने गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा, “राहुल गाँधी को लगता है कि अडानी को सभी चीजें दे दी गई हैं। यह सच नहीं है। सच्चाई यह है कि कॉन्ग्रेस ने थाली में सजाकर विझिंगम बंदरगाह अडानी को दे दिया था। यह किसी टेंडर के आधार पर नहीं दिया गया। अब वहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि सीपीएम की सरकार है। उन्हें इस बारे में सवाल पूछने और केरल सरकार से उस आदेश को रद्द करने की माँग करने से किसने रोक रखा है?”

निर्मला सीतारमण ने आगे कहा, “मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री पर निराधार आरोप लगाकर बार-बार अपराध कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने साल 2019 में भी ऐसा ही किया था। अब फिर से वही सब कर रहे हैं।”

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है, “साल 2013 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेश में थे तब राहुल गाँधी ने एक अध्यादेश को बकवास बताते हुए फाड़ दिया था और उसे कूड़ेदान में फेंक दिया था। राजस्थान में भी अडानी को पूरा सोलर पावर प्रोजेक्ट दे दिया गया। राहुल गाँधी सोलर प्रोजेक्ट को रद्द करने से कौन रोक रहा है? वह मोदी-अडानी भाई-भाई चिल्लाते हैं, राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?”

सीतारमण ने राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए कहा, “वह छत्तीसगढ़ में भी ऐसा क्यों नहीं कह पा रहे हैं? अगर साठ-गाँठ वाला पूँजीवाद कहीं हो रहा है तो यह सिर्फ कॉन्ग्रेस की सत्ता वाले राज्यों में ही हो रहा है। इस पर राहुल गाँधी एक शब्द भी नहीं बोलेंगे। अगर वह प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं तो वे जाएँ और अपनी ही सरकारों के आदेशों को रद्द करें।”

वित्त मंत्री ने कहा है कि पहले तो वे झूठे आरोप लगाते हैं फिर उसे 100 बार दोहराते हैं। इसके बाद भगवान से प्रार्थना कर इसका लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि साल 2019 में राफेल को लेकर प्रधानमंत्री पर दिए गए अपने बयानों के लिए राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट में माफी माँगनी पड़ी थी।

निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि राफेल पर माफी माँगने से पहले राहुल गाँधी को आरएसएस के खिलाफ गलत बयानबाजी करने के लिए लिखित में माफी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा, “अब आज कह रहे हैं कि वह गाँधी हैं, सावरकर नहीं। क्या राहुल गाँधी यह भूल चुके हैं कि वो पहले दो बार माफी माँग चुके हैं।”

बोले पोप- सेक्स गॉड की दी हुई सबसे खूबसूरत चीज, LGBT का स्वागत करें कैथोलिक चर्च: हस्तमैथुन पर भी की बात, कहा- गर्भपात कबूल नहीं

ईसाइयों के गुरु पोप फ्रांसिस ने कहा है कि ईश्वर द्वारा मनुष्यों को दी गई सबसे खूबसूरत चीज सेक्स है। इसके अलावा उन्होंने हस्तमैथुन, चर्च में LGBT को अधिकार, पॉर्न इंडस्ट्री, गर्भपात और यौन शोषण समेत कई अन्य मुद्दों पर बात की है।

दरअसल, बुधवार (5 अप्रैल 2023) को डिज्नी प्लस प्रोडक्शन ने ‘द पोप आंसर्स’ (The Pope Answers) डॉक्यूमेंट्री रिलीज की है। यह डॉक्यूमेंट्री 20 साल की उम्र के 10 युवाओं के साथ हुई बातचीत पर आधारित है। इन युवाओं ने साल 2022 में पोप फ्रांसिस से कई मुद्दों पर सवाल किए थे।

इस बातचीत में पोप ने सेक्स को लेकर कहा है, “सेक्स गॉड द्वारा मनुष्य को दी गई खूबसूरत चीजों में से एक है।”

मास्टरबेशन यानि हस्तमैथुन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पोप ने कहा है कि खुद को सेक्शुअली यानी यौन रूप से व्यक्त करना एक समृद्धि है। इसलिए जो चीज आपको असल यौन अभिव्यक्ति से दूर करती है। वह इस समृद्धि को कम कर सकती है।

LGBT या थर्ड जेंडर को लेकर बात करते हुए पोप फ्रांसिस ने कहा है, “कैथोलिक चर्च को ऐसे लोगों का स्वागत करना चाहिए। सभी व्यक्ति ईश्वर की संतान हैं। ईश्वर किसी को भी अस्वीकार नहीं करता। ईश्वर एक पिता है। मेरे पास किसी को चर्च से निकालने का कोई अधिकार नहीं है।”

वहीं, गर्भपात को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा है कि चर्च के पादरियों को गर्भपात कराने वाली महिलाओं के प्रति दयालु होना चाहिए। लेकिन गर्भपात एक ऐसी प्रथा है जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

डिज्नी प्लस की डॉक्यूमेंट्री ‘द पोप आंसर’ में पोप फ्रांसिस द्वारा की गई इस बातचीत को दुनिया के सबसे बड़े चर्च ‘वैटिकन चर्च’ के आधिकारिक अखबार L’Osservatore Romano में भी प्रकाशित किया गया। अखबार ने पोप फ्रांसिस की इस बातचीत को ‘खुली और ईमानदार बातचीत’ कहा है।

पादरियों के ‘सेक्स पर प्रतिबंध’ के नियम अस्थाई: पोप फ्रांसिस

बता दें कि इससे पहले पोप फ्रांसिस ने पादरियों के लिए बनाए गए नियम ‘सेक्स पर प्रतिबंध’ को अस्थाई बताया था। उन्होंने कहा था कि पादरियों को शादी करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। पोप ने कहा था कि पादरियों को सेक्स करने से रोकने वाले चर्च के पुराने हो चले नियमों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने उन्होंने चर्चों से भी नियमों में बदलाव की चर्चा का स्वागत करने की अपील की थी।

BJP में अनिल एंटनी, मनमोहन सरकार में रक्षा मंत्री थे पिता: BBC की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री पर छोड़ी थी कॉन्ग्रेस, अब कहा- वहाँ परिवार सेवा ही धर्म

अनिल एंटनी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को दिल्ली में पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, बीजेपी के केरल प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन और वरिष्ठ नेता मुरलीधरन मौजूद थे। अनिल एंटनी ने बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को लेकर मतभेद के बाद काॅन्ग्रेस छोड़ दी थी। वे काॅन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी के बेटे हैं। एके एंटनी मनमोहन सिंह की सरकार में रक्षा मंत्री हुआ करते थे।

बीजेपी में शामिल होने के बाद अनिल एंटनी ने कहा कि कई कॉन्ग्रेस नेता एक परिवार की सेवा को अपना धर्म समझते हैं। मैं समझता हूँ कि मेरा धर्म राष्ट्र की सेवा करना है। पीएम मोदी के पास 25 वर्षों में देश को विकसित राष्ट्र बनाने का दृष्टिकोण है। एक युवा भारतीय होने के नाते मुझे ऐसा लगता है कि यह मेरी जिम्मेदारी है कि राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण में पीएम मोदी के प्रयासों में अपना योगदान दूँ।

बता दें जनवरी 2023 में ही अनिल एंटनी ने कॉन्ग्रेस से त्यागपत्र दिया था। उन्होंने बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री का विरोध करते हुए कहा था कि इससे देश की संप्रभुता कमजोर होगी। इसे लेकर उन्होंने 24 जनवरी 2023 को एक ट्वीट किया था। एंटनी के अनुसार उनपर इस ट्वीट को डिलीट करने का दबाव बनाया जा रहा था।

अनिल एंटनी ने ट्वीट कर इस्तीफा देने की जानकारी साझा की थी। उन्होंने लिखा था, “मैंने कॉन्ग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। मुझे मेरा ट्वीट हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन मैंने मना कर दिया। जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, वहीं लोग मुझ पर ट्वीट हटाने का दबाव दे रहे थे। जो लोग प्रेम का प्रचार करने वाले थे, वहीं फेसबुक पर अब मेरे खिलाफ नफरत-अपशब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे ही पाखंड कहते हैं। जिंदगी चलती रहती है।”