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दक्षिण में BJP को मिला एक और साथी, आंध्र प्रदेश के पूर्व CM किरण रेड्डी ने थामा कमल: कहा- जनता के मन की बात नहीं समझ रही काॅन्ग्रेस

दक्षिण भारत में काॅन्ग्रेस के एक और पूर्व नेता को बीजेपी अपने साथ लाने में कामयाब रही है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को बीजेपी में शामिल हो गए। इससे एक दिन पहले मनमोहन सिंह सरकार में रक्षा मंत्री रहे एके एंटनी के बेटे अनिल ने बीजेपी का दामन थामा था।

किरण रेड्डी ने दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद थे। भाजपा में शामिल होने के बाद रेड्डी ने कहा कि गलत नीतियों की वजह से कॉन्ग्रेस गर्त में जा रही है। वह जनता के मन की बात नहीं समझ पा रही ही।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस से मेरा पुराना नाता था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि कॉन्ग्रेस छोड़नी पड़ेगी। लेकिन कॉन्ग्रेस लोगों के मन की बात को नहीं समझ पा रही है। पार्टी गलत-सही पर विश्लेषण नहीं करती। पार्टी के लोग सोचते हैं कि वे सही हैं और देश की जनता समेत बाकी सब गलत हैं।”

किरण रेड्डी ने कहा कि कॉन्ग्रेस लीडरशीप के गलत फैसलों की वजह से हर राज्य में पार्टी टूट रही है। उनके लिए एक पुरानी कहावत है कि मेरा राजा बहुत बुद्धिमान है, वह न खुद सोचता है और न ही किसी का सुझाव मानता है। इसी सोच की वजह से मैंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी। बता दें कि रेड्डी ने 11 मार्च 2023 को ही कॉन्ग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस संबंध में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को खत भेजा था।

इसके पहले भी किरण रेड्डी कॉन्ग्रेस छोड़ चुके हैं। साल 2014 में जब यूपीए सरकार ने आंध्र प्रदेश से अलग कर तेलंगाना राज्य का गठन को मंजूरी दी थी, तब रेड्डी ने इस फैसले का विरोध किया था। कॉन्ग्रेस से अलग होकर उन्होंने ‘जय समैक्या आंध्र’ नाम से पार्टी बना ली थी। साल 2018 में वे फिर से कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। अब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।

इससे पहले गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को अनिल एंटनी भी बीजेपी में शामिल हुए थे। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद अनिल ने भी कॉन्ग्रेस लीडरशीप पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कई कॉन्ग्रेस नेता एक परिवार की सेवा को अपना धर्म समझते हैं। मैं समझता हूँ कि मेरा धर्म राष्ट्र की सेवा करना है।

चाचा बिहार विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, भाई जदयू का विधायक: खुद पानी प्लांट की आड़ में बेचता था दारू, पुलिस ने विदेशी शराब का जखीरा पकड़ा

बिहार में कहने को तो शराबबंदी है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी जदयू (JDU) और उससे जुड़े लोगों के लिए बिहार में बहार है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी के भतीजे और जदयू विधायक अमन भूषण हजारी के भाई प्रशांत भूषण हजारी पर शराब तस्करी का आरोप लगा है।

प्रशांत भूषण के पानी प्लांट से पुलिस ने 20 कार्टन विदेशी शराब जब्त की है। पानी प्लांट की आड़ में उन पर शराब तस्करी का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुख्य आरोपित और पानी प्लांट का मालिक प्रशांत भूषण हजारी फरार बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दरभंगा पुलिस को कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र में स्थित पानी प्लांट में शराब की खेप पहुँचने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की कार्रवाई की। कहा जा रहा कि कार्रवाई के दौरान प्रशांत भूषण प्लांट में नहीं मिला।

इस मामले में कुशेश्वरस्थान के थाना प्रभारी अमित कुमार का कहना है कि जदयू विधायक अमन हजारी के पैतृक आवास के बगल में बने वाटर प्लांट पर छापेमार कार्रवाई की गई। यह प्लांट विधायक के चचेरे भाई प्रशांत भूषण हजारी का है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि पानी प्लांट में शराब की खेप पहुँच रही है। इसके बाद जिले की टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई। गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। वहीं, प्रशांत हजारी प्लांट में नहीं मिला।

चाचा विधानसभा उपाध्यक्ष और भाई विधायक…

पानी प्लांट की आड़ में शराब तस्करी कर रहा प्रशांत भूषण हजारी बिहार विधानसभा में उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी का भतीजा है। महेश्वर हजारी बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) की टिकट पर कल्याणपुर से विधायक हैं। जदयू की टिकट पर वह सांसद भी रह चुके हैं।

वहीं, प्रशांत भूषण हजारी के चचेरे भाई अमन भूषण हजारी कुशेश्वरस्थान से ही विधायक हैं। कहा जा रहा है कि चाचा और भाई के सत्ता में होने का दुरुपयोग करते हुए प्रशांत भूषण हजारी शराब तस्करी में लिप्त था।

रामनवमी शोभायात्रा को वामपंथियों ने ‘मुजरा’ बताया, जवाब में लगे ‘जय श्रीराम’ के नारे: वर्धा यूनिवर्सिटी में बवाल, केस दर्ज

महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हिंसक झड़प होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के वामपंथी संगठन से जुड़े कुछ छात्रों ने रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद हिंसा झड़प हुई।

इस पूरे मामले की शुरुआत 26 मार्च 2023 को हुई। दरअसल, एक रजनीश कुमार अंबेडकर नामक एक दलित छात्र ने 26 मार्च से विश्वविद्यालय के खिलाफ 4 दिवसीय विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। अंबेडकर ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उसकी पीएचडी थीसिस बीते 11 महीने से जमा है। लेकिन जातिवाद के चलते विश्वविद्यालय के अधिकारी उसकी जाँच नहीं कर रहे।

कुछ दिनों बाद रजनीश कुमार अंबेडकर को विश्वविद्यालय के कुछ और छात्रों का समर्थन मिल गया। इससे थीसिस की जाँच को लेकर उसकी माँग को बल मिला। हालाँकि विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ला का इस मामले पर कहना है कि वामपंथी संगठन से जुड़े छात्र विश्वविद्यालय में अशांति और सांप्रदायिक कलह पैदा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि रजनीश कुमार अंबेडकर समेत कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के मेन गेट के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

विश्वविद्यालय की ओर से आगे कहा गया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने रामनवमी शोभा यात्रा के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यही नहीं, इन छात्रों ने रामनवमी को शाम के समय भगवान श्रीराम के लिए भी अपमानजनक भाषा का उपयोग किया। इसके बाद कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र मौके पर पहुँचे और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘जय भीम’ के नारे लगाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद ही दोनों छात्र समूहों के बीच झड़प शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी छात्रों और कथित तौर पर एबीवीपी से जुड़े छात्रों के बीच 31 मार्च 2023 को झड़प हुई थी। झड़प की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए दोनों समूहों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यही नहीं, विश्वविद्यालय ने रजनीश कुमार अंबेडकर के साथ प्रदर्शन कर रहे छात्रों विवेक मिश्रा, अंतास सर्वानंद, नीरज ओबेरॉय, राजेश कुमार यादव, चंदन सरोज, आदर्श पाठक और जतिन चौधरी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। इसके अलावा कथित तौर पर ABVP से जुड़े छात्रों को भी नोटिस जारी किया गया है।

विश्वविद्यालय के एक छात्र ने TOI से हुई बातचीत में कहा है कि वामपंथी संगठन से जुड़े छात्र रामनवमी के दिन शाम को रामनवमी शोभा यात्रा के लिए कथित तौर पर ‘मुजरा’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद हिंदुओं के साथ उनकी झड़प हो गई।

छात्र ने कहा है, “सर्वानंद वीडियो शूट कर रहा था और शोभा यात्रा के लिए लगातार ‘मुजरा’ शब्द का इस्तेमाल कर कर रहा था। रामनवमी की शोभा यात्रा हमारे लिए एक त्योहार है। इसलिए हमने उन्हें सबक सिखाने का फैसला किया।” इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हालाँकि रजनीश कुमार अंबेडकर ने अपने ऊपर लगे ‘आरोपों’ को खारिज कर दिया है। उसने कहा है कि रामनवमी की शाम को किसी भी प्रदर्शनकारी ने ‘मुजरा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। ऐसा भी हो सकता है कि किसी ने इसका इस्तेमाल किया हो, लेकिन यह किसी अन्य चीज को लेकर किया गया होगा। महाराष्ट्र में मुजरा का मतलब सलामी भी होता है।

वहीं, इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ला का कहना है कि परिसर में न तो किसी प्रकार के सांप्रदायिक नारे लगाए गए और न ही रजनीश कुमार अंबेडकर के साथ मारपीट हुई। मामले को शांत कराने के लिए मौके पर पहुँचे 15-17 सुरक्षा गार्डों को गंभीर चोटें आई हैं। राम नगर पुलिस ने दोनों पक्ष के छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले की जाँच की जा रही है।

‘दलितों की यहाँ शादी नहीं होगी’: मेरठ में मैरिज हॉल मालिक रईस अब्बासी ने बुकिंग रद्द की, पीड़ित बोले- गाँव में अकेला हिंदू परिवार, जान को खतरा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मैरिज हॉल ने एडवांस पैसे लेने के बावजूद जोड़े की शादी के लिए जगह से इनकार कर दिया। मैरिज हॉल के मालिक को जैसे ही पता चला कि जिनकी शादी हो रही है, वे दलित (वाल्मीकि) हैं तो उसने बुकिंग रद्द कर दी। इसके बाद पुलिस ने मैरिज हॉल के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित का नाम मोहम्मद रईस अब्बासी बताया जा रहा है।

इस मामले को लेकर भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री प्रजापति इंद्रपाल बजरंगी ने ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हम वाल्मीकियों मंडप नहीं देते: यासीन, मंडप मालिक 9 अप्रैल की शादी का मंडप बुक था, रसीद कटी हुई है, लेकिन जाति (वाल्मीकि) पता लगने पर मंडप मालिक यासीन ने मंडप देने से मना किया। इस मंडप और मालिक पर क्यों ना कार्यवाही हो।”

इसके बाद मेरठ पुलिस ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। मेरठ पुलिस ने लिखा, “उपरोक्त प्रकरण में मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश दिए गए है। प्रतिवादी द्वारा बताया गया है की शादी मंडप में ही कराई जाएगी।”

पीड़ित जयदीप ने इस मामले में शिकायत दी है। अपनी शिकायत में जयदीप ने लिखा है, “मैंने अपनी बहन की शादी के लिए गोल्डन फार्म हाउस को बुक किया था। इसके लिए एडवांस में 10,000 रुपए भी दिए थे। 5 अप्रैल 2023 को फार्म हाउस के मालिक रईस अब्बासी का फोन आया कि बुकिंग रद्द कर दी गई है।”

जयदीप ने अपनी शिकायत में लिखा है कि रईस अब्बासी ने कहा, “तुम्हारी जाति …. (वाल्मिकी) है, इसलिए बुकिंग कैंसिल की जाती है।” इतना ही नहीं, अब्बासी ने जयदीप के साथ जातिसूचक बातें और गाली-गलौच भी कीं और मुकदमा कराने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी भी दी।

जयदीप ने कहा कि वह मेरठ जिले के खरखौंदा थाना स्थित अलीपुर गाँव के रहने वाले हैं। वह उस गाँव में रहने वाले अकेले हिंदू परिवार हैं। उनका कहना है कि अलीपुर में सारे लोग मुस्लिम हैं। इसलिए उन्हें अपनी जान को खतरा है। उन्होंने रईस अब्बासी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की।

दरअसल, जयदीप मेरठ नगर निगम में सफाई कर्मचारी हैं। 9 अप्रैल 2023 को उनकी बहन पिंकी की शादी है। इसके लिए उन्होंने गोल्डन फार्म हाउस को बुक किया था। अब जबकि शादी में चार दिन रह गए तो उसने मना कर दिया। इसके बाद जयदीप अपने समाज के लोगों के पास गए और लोगों के कहने पर एसएसपी को शिकायत दी।

उधर भाजपा के पार्षद का कहना है कि मंडप के मैनेजर ने कहा कि अगर उसे पता होता कि ये दलित हैं तो वह अपने फार्म की बुकिंग नहीं करता। उन्होंने कहा कि शादी उसी फार्म में होगी, चाहे इसके लिए जो भी करना पड़े। अब पुलिस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिवादी ने कहा है कि शादी उसके मंडप में ही होगी। इसके साथ ही उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में फार्म के मालिक का नाम मोहम्मद यासीन और मैनेजर का नाम रईस अब्बासी बताया जा रहा है। ऑपइंडिया को मिली जयदीप की शिकायती पत्र में गोल्डन फार्म के मालिक का नाम रईस अब्बासी लिखा हुआ है।

रईस अब्बासी के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 एवं 506 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3 (2) (va) के तहत दर्ज किया है।

उदयपुर में नहीं लगा सकेंगे धार्मिक झंडे, 2 महीने के लिए प्रशासन ने लगाई रोकः बोली BJP- मंदिरों और त्योहारों के पीछे पड़ी है राजस्थान की काॅन्ग्रेस सरकार

राजस्थान के उदयपुर में धार्मिक झंडे लगाने पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने दो महीने के लिए यह रोक लगाई है। बीजेपी ने इसको लेकर प्रदेश की काॅन्ग्रेस सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने राजस्थान को तालिबान बनाने की कोशिश करने का आरोप अशोक गहलोत सरकार पर लगाया है।

उदयपुर के डीएम ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को एक आदेश जारी कर कहा है कि जिले में अगले 2 महीने तक धार्मिक झंडे और प्रतीक चिन्ह लगाने पर रोक रहेगी। किसी भी सार्वजनिक बिल्डिंग, बिजली या टेलीफोन के खंभे, चौराहे समेत किसी भी सार्वजनिक जगह पर धार्मिक झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। यदि किसी को लगाना है तो उसे इसके लिए अनुमति लेनी होगी। साथ ही कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

इस आदेश पर सवाल उठाते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा है, “मुझे लगता है कि राजस्थान सरकार जानबूझकर मंदिरों और धार्मिक त्योहारों के पीछे पड़ी है। इसके पीछे मकसद क्या है, वो किसको खुश करना चाहते हैं या किसके दबाब में ऐसा कर रहे हैं, यह पता नहीं है। लम्बे समय का कालखंड देखें तो राजस्थान में प्रेम, भाईचारा, सदभाव का वातावरण रहा है।”

उन्होंने कहा, “प्रदेश में सभी धर्म, मजहब के लोग अपना-अपना त्योहार धूमधाम से मनाते आए हैं। एक दूसरे को बधाई देते हैं, मदद करते हैं। लेकिन अब इन साढ़े चार सालों में पता नहीं क्या हुआ है। अब पताका नहीं लगा सकते। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की धरती ने जिस पताका को लेकर मुगलों को परास्त किया, वहाँ अगर भगवा नहीं लगेगा तो क्या तालिबान में लगेगा?”

सीपी जोशी ने सीएम अशोक गहलोत पर हमला बोलते हुए आगे कहा है, “मुझे लगता है कि ये राजस्थान में तालिबानी राज बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रामनवमी पर जुलूस नहीं निकलेगा। हनुमान जयंती पर डीजे नहीं बजा सकते। नववर्ष पर जुलूस नहीं निकाल सकते। भगवान श्रीराम का नारा नहीं लगा सकते। यह दुर्भाग्य है कि राजस्थान सरकार एक के बाद एक इस तरह के निर्णय कर रही है। सरकार इस तरह का निर्णय लेना बंद कर दे। वरना राजस्थान की जनता चुप बैठने वाली नहीं है।”

‘फ्लोटिंग बाबा’ को चैलेंज करने कुएँ में कूदा अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का अध्यक्ष, डेढ़ मिनट में ही धोती खुली: देखिए Video , 24 घंटे पानी के ऊपर ‘योग मुद्रा’ में रहने की थी बात

बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने अब हिंगोली के हरिभाऊ राठोड़ फ्लोटिंग बाबा पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, फ्लोटिंग बाबा हरिभाऊ राठोड़ का दावा है कि वो और उनकी पत्नी 24 घंटे पानी के ऊपर योग मुद्रा में स्थिर रह सकते हैं। बाबा के इस दावे पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने कहा कि इसमें कोई चमत्कार नहीं है। यह काम तो उनकी समिति के सदस्य भी कर सकते हैं।

इसको लेकर बाबा ने उन्हें ओपन चैलेंज देते हुए कहा था कि उनकी सिद्धि पर सवाल उठाने से पहले समिति के सदस्य उनकी तरह पानी के ऊपर चौबीस घंटे तक लेटकर दिखाएँ। सोशल मीडिया पर बाबा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा हरिभाऊ राठोड़ हिंगोली जिले के दुर्गसावंगी के रहने वाले हैं। 4 अप्रैल 2023 को अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने बाबा की चुनौती स्वीकार करते हुए अपने एक सदस्य को हिंगोली के धोतरा गाँव में फ्लोटिंग बाबा के साथ पानी में उतार दिया। लेकिन समिति के जिला अध्यक्ष प्रकाश मगरे पानी में डेढ़ मिनट से ज्यादा देर तक नहीं टिक पाए। लेकिन बाबा आराम से योग मुद्रा में पानी में रहे। इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं हुई। इस तरह वह इस चैलेंज को जीत गए।

हालाँकि, इसके बाद अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने बाबा के लंबे समय तक पानी में स्थिर रहने को चमत्कार मानने से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, बाबा अभ्यास के बल पर यह सब कर पाएँ हैं। इसलिए इसे चमत्कार कहना उचित नहीं है। ऐसा कहने पर उन (बाबा) पर जादू-टोना के खिलाफ बने कानून के तहत केस दर्ज हो सकता है।

बाबा ने उन लोगों को करारा जवाब देते हुए कहा, “मुझ पर आरोप लगाने से पहले, मेरे जैसा करके दिखाओ। मैंने चमत्कार का दावा नहीं किया है, बल्कि भगवान के आशीर्वाद से ऐसा संभव हो पाने की बात कही है।” वहीं, पुलिस भी बाबा की बातों से सहमत नजर आई और उन पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी तरह के चमत्कार का दावा नहीं किया है।

जिम कार्बेट में जिस ‘मजार जिहाद’ का ऑपइंडिया ने किया था पर्दाफाश, उस पर मेनस्ट्रीम मीडिया भी जागा: बोले CM धामी- खुद हटा लें, वरना सरकार सख्ती से हटाएगी

कुछ दिन पहले ऑपइंडिया ने रणनीतिक रूप से महत्वपर्ण जगहों पर अवैध मजार या दरगाह एवं मस्जिद-मदरसे बनाने को लेकर रिपोर्ट की एक पूरी श्रृंखला की थी। इसमें नेपाल सीमा से सटे जिलों में मजार और अवैध मस्जिद-मदरसे शामिल थे। बाद में यूपी की सरकार ने उनका संज्ञान लिया और उनका सत्यापन भी किया।

इसी तरह ऑपइंडिया ने उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में मजार बनाकर सरकारी जगहों पर अवैध कब्जे को लेकर रिपोर्ट की सीरीज की थी। जिन स्थानों पर अवैध मजार बनाकर कब्जा की गई हैं, उनमें प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क भी शामिल है। इन रिपोर्ट्स का पहले की तरह उत्तरांखड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फिर संज्ञान लिया है। बता दें कि उत्तराखंड में सिर्फ कालू सैय्यद के नाम पर 10 अवैध मजारें हैं, जबकि सैय्यद बाबा के नाम से आधा दर्जन मजारें हैं।

धामी सरकार ने कहा कि प्रदेश में जहाँ कहीं भी सरकारी जमीन को कब्जा करके अवैध रूप से मजार या अन्य ढाँचे बनाए गए हैं, उनके खिलाफ सरकार ऐक्शन लेगी। उन्होंने कहा कि बेहतर हो कि जिन लोगों ने कब्जा किया है, वे स्वयं उस कब्जे को हटा लें। अगर सरकार हटाएगी तो कठोर कार्रवाई करेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लैंड जिहाद हो या मजार जिहाद, देवभूमि उत्तराखंड में कानून और धर्म के विरुद्ध कोई काम नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हमने ऐसे 1000 जगहों का सर्वे कराया है, जहाँ अतिक्रमण किया गया है। अगर 6 महीने में इसे नहीं हटाया गया तो सरकार कार्रवाई करेगी।’

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा ऑपइंडिया की अवैध मजार वाली रिपोर्ट का संज्ञान लेेकर कार्रवाई करने की चेतावनी देने के साथ ही देश की मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी इस मामले को उठाया है। आजतक न्यूज चैनल ने बकायदा इस पर एक स्टोरी की है।

ऑपइंडिया राज्य में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, लैंड जिहाद, अवैध मजार और मदरसों को लेकर साल 2021 से समय-समय पर रिपोर्ट करता रहा है। सीएम धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी। इस बार सरकार ने चेतावनी दी है।

मई 2022 की अपनी रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि राज्य में कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ने और उनके द्वारा अतिक्रमण करने के कारण राज्य को सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर डेमोग्राफिक बदलाव भी हो गए हैं। जिन जगहों पर डेमोग्राफिक बदलाव हुआ है, वहाँ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्याओं के भी होनेे की आशंका है। परिणाम यह हुआ कि कई इलाकों में मुस्लिमों की जनसंख्या 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक हो गई है।

अवैध मजारों और नशे के खिलाफ काम कर रहे वयोवृद्ध संत स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को बताया था, “1985 तक यहाँ एक भी मस्जिद नहीं थी। हमारे यहाँ मुस्लिमों को मनिहारी कहा जाता है, जो औरतों के साज-श्रृंगार के सामान बेचने का काम करते हैं। अल्मोड़ा में एक स्थानीय स्वर्णकार ने पहली मस्जिद दया भाव से मनिहारियों को बनाने दी थी। उन्हें ये नहीं पता था कि इसके बाद यहाँ मस्जिदों की बाढ़ आ जाएगी। दया दिखाने वाले उस स्वर्णकार के परिजन आज भी देहरादून में रहते हैं, जिनका यहाँ नाम बताना उचित नहीं है।”

स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को बताया था कि उत्तराखंड में मुस्लिमों को सबसे अधिक बढ़ावा कॉन्ग्रेस की एनडी तिवारी के नेतृत्व में बनी सरकार में मिला था। उन्होंने कहा था, “एनडी तिवारी की सरकार में महापाप हुआ है। उनकी ही सरकार में नैनीताल के नैना देवी के मंदिर के ऊपर उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बना दी गई। मस्जिद पूरी तरह से अतिक्रमण करके सड़क पर बनाई गई है। मस्जिद के आगे मंदिर भी छोटा लगने लगा है।”

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, आज पूरे उत्तराखंड में लगभग 2000 अवैध मजारें हैं। ये मजारें तमाम सरकारी जमीनों को कब्जाए हुए हैं। मज़ारों को सिंचाई विभाग, वन विभाग, PWD आदि जमीनों पर बनाया गया है। देहरादून नगर निगम और जिला पंचायत की 60 से 70 प्रतिशत सरकारी जमीनों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है। 

इसी तरह अगस्त 2022 में ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड के रामनगर में पड़ने वाले जिम कार्बेट नेशनल पार्क में मजारों के जरिए अवैध कब्जे किए गए हैं। पार्क में लगभग हर एक किलोमीटर पर मजार बनाकर सरकारी जमीनों का अतिक्रमण किया गया है। ऑपइंडिया ने रानीखेत मार्ग से लेकर झिरना इलाके तक के मजारों का रिपोर्ट दी थी।

बता दें कि ‘मजार जिहाद’ की रिपोर्टिंग के बाद उत्तराखंड की सरकार ने दिसंबर 2022 में कुछ मजारों पर बुलडोजर भी चलाया था। देहरादून और पौढ़ी जिलों के जंगलों में बने 15 मजारों को ध्वस्त कर दिया गया था। वन विभाग की जमीन पर बनी 17 मजारों को चिह्नित किया गया था, लेकिन कार्रवाई के दौरान दस्तावेज दिखाए जाने के बाद दो मजारों को छोड़ दिया गया था।

इसी तरह मार्च 2023 में एक बार फिर धामी सरकार ने अवैध मजारों पर कार्रवाई शुरू की थी। राज्य सरकार ने 12 मार्च 2023 को एक ही रात में 26 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया गया था। ध्वस्त हुई मजारों में कुछ ऐसी भी थीं, जो राजधानी देहरादून के जंगली जानवरों के लिए रिजर्व क्षेत्र में बनी हुई थीं। 

बता दें कि जब इन मजारों को ध्वस्त किया गया तो इनमें से किसी तरह का मानव अवशेष नहीं मिला था। इससे इस आशंका को पुष्टि मिलती है कि अवैध मजारों के जरिए सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जाता है और फिर उसे वक्फ की संपत्ति बताकर सिर्फ मुस्लिमों की संपत्ति घोषित कर दी जाती है।

‘नंगई, गाली-गलौच, अश्लीलता…अच्छा लगेगा आपकी बेटी देखे’ : सलमान खान ने OTT कंटेंट पर उठाए सवाल, कहा- सेंसरशिप जरूरी

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) शाम को मुंबई में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट दिखाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ओटीटी पर कंटेंट स्ट्रीम करने से पहले उसे हमेशा चेक किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे सच में लगता है कि ओटीटी प्लेटफार्मों पर सेंसरशिप होनी चाहिए। वल्गैरिटी, न्यूडिटी, गाली-गलौज पर रोक लगनी चाहिए। अब सब कुछ फोन पर आ गया है। चलो 15-16 साल का बच्चा देख ले कोई बात नहीं। लेकिन क्या आपको यह अच्छा लगेगा अगर आपकी छोटी सी बेटी पढ़ाई के बहाने यह सब देखे? इसलिए मेरा मानना है कि ओटीटी पर जो भी कंटेंट स्ट्रीम होता है, उसे चेक किया जाना चाहिए। कंटेंट जितना क्लीन होगा, उतना ही बेहतर होगा।”

‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म के अभिनेता ने ओटीटी की दुनिया पर सब कुछ कर चुके एक्टर्स के लिए कहा, “आपने सब कुछ कर लिया। लवमेकिंग सीन कर लिए आपने। किसिंग सीन्स कर लिए और खूब एक्सपोज भी कर लिया। जब आप अपनी बिल्डिंग में घुसते हैं तो आपका लिफ्टमैन, आपका वॉचमैन आपका काम देख रहा होता है। मुझे नहीं लगता कि यह सब अच्छा है। यह सुरक्षा की दृष्टि से भी सही नहीं है। हमें यह सब करने की जरूरत नहीं है। हिंदुस्तान में रहते हैं। थोड़ा-बहुत ठीक है, लेकिन बीच में इतना ज्यादा हो गया था। हालाँकि, अब थोड़ा कंट्रोल में आया है।”

इस मौके पर ‘तेरे नाम’ फिल्म के अभिनेता ने कहा, “मैं यहाँ 1989 से काम करता आ रहा हूँ। मैंने कभी भी इस तरह (वल्गैरिटी, न्यूडिटी, गाली-गलौज ) की चीजें नहीं की हैं। इसलिए मुझे लगता है कि ओटीटी पर सेंसर होना चाहिए।”

बता दें कि सलमान खान इस बार 2023 में होने वाले फिल्मफेयर अवॉर्ड्स को होस्ट करेंगे। वर्क फ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही ‘किसी का भाई किसी की जान’ में नजर आएँगे। यह फिल्म 21 अप्रैल 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा वह ‘टाइगर 3’ में भी दिखाई देंगे। अप्रैल 2024 से शाहरुख के साथ सलमान ‘टाइगर वर्सेज पठान’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

‘इशरत जहाँ बिहार की बेटी और मनीष कश्यप बिहार का आतंकी’: मनीष कश्यप पर NSA लगने के बाद बीजेपी MLA ने नीतीश कुमार को घेरा

बिहार के यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप (Manish Kashyap) के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। इसका विरोध हो रहा। उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है।

मनीष कश्यप पर एनएसए के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद भाजपा विधायक ने ट्वीट कर कहा है, “लश्कर वाली इशरत जहाँ बिहार की बेटी थी और यूट्यूब से पेट पालने वाला मनीष कश्यप बिहार का आतंकी है, वाह नीतीश जी।” तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर हमले के कथित दावों की रिपोर्टिंग पर हुए विवाद के बाद मनीष कश्यप ने सरेंडर किया था। बाद में उन्हें तमिलनाडु पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर ले गई थी।

नीतीश कुमार ने क्या कहा था

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने गुजरात के चर्चित इशरात जहाँ एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कथित तौर पर इशरत को बिहार की बेटी कहा था और एनकाउंटर की जाँच की माँग की थी। हालाँकि, बाद में नीतीश कुमार अपने बयान से पलट गए थे और सफाई दी थी कि मीडिया ने उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया। रिपोर्टों की मानें तो पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर ने भी साल 2013 में इशरत को बिहार की बेटी कहा था। उस समय अली अनवर जेडीयू में थे। इतना ही नहीं तेज प्रताप ने भी नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए इशरत को बिहार की बेटी कहा था।

लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी थी इशरत

इशरत जहाँ को गुजरात पुलिस ने 2004 में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया था। इस मुठभेड़ में उसके साथियों जावेद शेख उर्फ प्रग्णेश पिल्लै, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जौहर को भी मार गिराया गया था। इस एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद कई एजेंसियों ने इसकी जाँच की थी। मार्च 2021 में कोर्ट ने इशरत जहाँ को लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी मानते हुए एनकाउंटर को सही ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुँचे मनीष कश्यप

मनीष कश्यप ने नियमित जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज सभी मामले एक साथ करने की अपील की है। अर्जी पर गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। इससे पहले मदुरै कोर्ट ने कश्यप को 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

TV पर लगेगी न्यूड पाठशालाः वयस्कों को नंगा करके दिखाएँगे ताकि इंसानी शरीर के बारे में जान सकें युवा, नेटिजन्स ने जताया एतराज

ब्रिटेन में ‘4 टीवी’ नाम के चैनल पर युवाओं को इंसानी शरीर के प्रति जागरूक करने के लिए ‘नेक्ड एजुकेशन (Naked Education)’ नाम का शो शुरू किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस शो का मकसद ये है कि वयस्कों का नग्न शरीर दिखाकर युवाओं को इंसानी शरीर के लिए सहज किया जाएगा।

सामने आए ट्रेलर में देख सकते हैं कि कैसे युवाओं को समझाया जा रहा है कि नग्न होना कोई गलत चीज नहीं है। हर तरह के शरीर को सामान्य ढंग से देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस शो की होस्ट एना रिचर्डसन (Anna Richardson) हैं। वह खुद को पढ़ा-लिखा, भावनात्मक और आनंदपूर्ण बताती हैं। उन्होंने पहले ‘नेक्ड अट्रैक्शन’ नाम के शो में भी काम किया है। यह एक डेटिंग शो था।

उन्होंने अपने नए शो का बचाव करते हुए मीडिया से कहा, “मैं ऐसे शो बनाना पसंद करती हूँ जो भ्रांतियों को तोड़ते हों और जिनसे बदलाव पड़ता हो। और जो भी शो मैंने किए हैं आप देख सकते हैं कि उन्होंने ऐसा ही किया है।” उन्होंने बताया कि ये शो उन युवाओं के लिए है जो अपने शरीर को जानने के लिए इच्छुक रहते हैं।

चैनल 4 ने इस शो को ग्राउंडब्रेकिंग सीरीज कहा। चैनल के अनुसार, “नंगा होना हमेशा बुरा नहीं होता। ये शो हर शरीर को सामान्य बनाता है।” वहीं एना के मुताबिक ये नेक्ड एजुकेशन शो एक बॉडी पॉजिटिव शो है, जो हर शरीर का और उसकी विभिन्नताओं का सामान्यीकरण करता है ताकि लोग बिन कपड़ों के भी शरीर को स्वीकार पाएँ।

सोशल मीडिया पर हो रहा शो का विरोध

बता दें इस शो की झलक देखने के बाद समाज का अधिकतर वर्ग इसका विरोध कर रहा है। कहा जा रहा है कि ये चैनल बच्चों को जागरूक करने की जगह भ्रमित करेगा। इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर्स भी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा काम उनके समय में कोई करता था तो उसे ‘फ्लैशिंग’ कहा जाता था जबकि अब तो ये सब नेशनल टीवी पर खुलकर हो रहा है।

इससे पहले नेटफ्लिक्स पर एक फ्रेंच मूवी क्यूटीज आई थी। उसमें 11 साल की लड़की से अश्लीलता करवाई गई थी। वामपंथियों ने इसे बच्चों में सेक्स एजुकेशन सामान्य करने का प्रयास बताया था। इसके अलावा कुछ लोगों ने दो कदम आगे बढ़ते हुए बाल यौन शोषण करने वालों को भी भी जायज ठहराया था। उनका कहना था कि पेडोफाइल्स केवल वो लोग होते हैं जो नाबालिगों की ओर आकर्षित होते हैं