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न सोर्स, न ट्रिप… फिर भी ChatGPT ने प्रसिद्ध लॉ प्रोफेसर को बता दिया छात्रा का यौन उत्पीड़न करने वाला, जोनाथन टर्ली ने पूछा- क्या हम AI पर भरोसा कर सकते हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट चैटजीपीटी (Chatbot ChatGPT) अपनी तमाम खूबियों को लेकर इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है। इसे बनाने वाली कंपनी का नाम OpenAI है, जो कि एक स्टार्टअप टेक कंपनी है। अब ChatGPT गलत जानकारी देने के कारण विवादों में है।

हाल ही में कैलिफोर्निया में एक शोध अध्ययन के दौरान एक वकील ने ChatGPT से उन कानूनी विद्वानों (Legal Scholars) की सूची तैयार करने के लिए कहा, जिन पर यौन उत्पीड़न का आरोप है। इसके बाद चैटजीपीटी ने एक लिस्ट बनाई। इस लिस्ट में जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में लॉ प्रोफेसर जोनाथन टर्ली (Jonathan Turley) का नाम भी शामिल था।

चैटबॉट ने द वाशिंगटन पोस्ट में मार्च 2018 के एक लेख का हवाला देता हुए कहा कि टर्ली ने अलास्का की क्लास ट्रिप के दौरान एक छात्रा का यौन उत्पीड़न किया और उस पर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। लॉ प्रोफेसर जोनाथन टर्ली को जब इस लिस्ट के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गए।

जोनाथन टर्ली अमेरिका के बेहद सम्मानित लॉ प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी लेख मौजूद नहीं है और न ही कभी अलास्का क्लास ट्रिप हुई थी। उन्होंने कहा कि उन पर कभी किसी छात्रा के यौन उत्पीड़न का आरोप नहीं लगा। यह आरोप बेबुनियाद और उनकी छवि को खराब करने वाला है।

जोनाथन टर्ली ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को यूएसए टुडे में प्रकाशित एक ओपिनियन में लिखा कि चैटजीपीटी ने उन पर झूठा आरोप लगाया है। उन्होंने आगे लिखा, “मुझे मेरे एक लॉ प्रोफेसर दोस्त से इस शोध के बारे में एक ईमेल मिला। इस ईमेल में यौन उत्पीड़न करने वाले प्रोफेसरों की लिस्ट थी, जिसे चैटजीपीटी ने चलाया था।”

जोनाथन टर्ली ने कहा उन्होंने कभी भी क्लास में किसी छात्रा का यौन शोषण नहीं किया। उन्होंने आगे कहा, “इसमें मैं भी शामिल था। मुझ पर अलास्का की ट्रिप पर लॉ के छात्रों को छेड़ने के आरोप लगाया गया। इसमें साल 2018 में वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक लेख का हवाला भी दिया गया, जिसमें मुझ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।”

उन्होंने चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट की सटीकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। क्या हम वास्तव में AI पर भरोसा कर सकते हैं?मुझे इसके बारे में पता चला तो पहले मुझे हास्यास्पद लगा, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि मुझ पर लगाया यह आरोप मेरी छवि को नुकसान पहुँचाने वाला है।”

कनाडा में हिंदू मंदिर पर हमला: दीवार पर लिखा- मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद

कनाडा (Canada) में हिंदुओं के खिलाफ घृणित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहाँ एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। ओंटारियों प्रांत के विंडसर शहर के नॉर्थवे एवेन्यू के 1700 ब्लॉक में स्थित हिंदू मंदिर (Hindu Temple) पर नकाबपोश हमलावरों ने 5 अप्रैल 2023 (स्थानीय समय) को हमला किया।

फोटो साभार: @WindsorPolice

उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे भी लिखे। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लिखे। स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी है।

विंडसर पुलिस ने दोनों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है, जिनमें नकाबपोश बदमाश मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पुलिस को इस घटना का एक वीडियो मिला है, जिसमें दो संदिग्धों को रात 12 बजे के बाद इलाके में देखा गया। वीडियो में, एक संदिग्ध मंदिर की दीवार पर तोड़फोड़ करता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरा थोड़ी दूर पर खड़ा होकर उसे देख रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के समय, एक संदिग्ध ने काले रंग का स्वेटर, बाएँ पैर पर एक छोटे से सफेद लोगो के साथ काली पैंट और काले व सफेद रंग के हाई-टॉप रनिंग शूज पहने थे। दूसरे संदिग्ध ने काली पैंट, एक स्वेटशर्ट, काले जूते और सफेद मोजे पहने थे। उन बदमाशों ने ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिखे हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा, “विंडसर पुलिस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जाँच कर रही है।”

पुलिस ने दोनों संदिग्धों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए फोन नंबर और वेबसाइट का पता जारी किया है। विंडसर पुलिस ने कहा, “जिस किसी को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, वह मोरेलिटी यूनिट को 519-255-6700 पर कॉल करे या EXT 4362 करें। वे 519-258-8477 (TIPS) पर बिना नाम बताए क्राइम स्टॉपर्स या www.catchcrooks.com पर ऑनलाइन संपर्क कर सकते हैं।”

पहले भी हो चुका है कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला

गौरतलब है कि कनाडा के हिंदू मंदिरों में पहले भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक वहाँ की सरकार द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। विंडसर में भारत विरोधी यह पाँचवीं घटना है। इससे पहले फरवरी 2023 में मिसिसॉगा (Missisauga) के राम मंदिर (Ram Mandir) तोड़फोड़ के साथ हिंदू और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। जनवरी 2023 में कनाडा के ही ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर को निशाना बनाया गया। गौरी-शंकर मंदिर कनाडा के मशहूर हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वर्षों से हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ बताया गया था। इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने कई बार महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी निशाना बनाया है और भारत विरोधी नारे लिखे हैं।

जब बिहार में भून दिए गए थे BJP की बैठक से लौट रहे लोग… 30 साल बाद इचरी नरसंहार में 9 को उम्रकैद, IPF कमांडर से जदयू महासचिव बने श्रीभगवान सिंह कुशवाहा बरी

कहा जाता है कि समय पर नहीं मिला न्याय, न्याय नहीं कहलाता है। अगर अंतराल 30 साल जितना लंबा हो तो प्रभावशाली लोगों के बचने की आशंका अधिक रहती है। इस मामले में भी गवाहों और सबूतों में उलटफेर को लेकर आशंका जताई रही थी। बात हो रही है, बिहार के पूर्व मंत्री और जदयू के वर्तमान नेता श्रीभगवान सिंह कुशवाहा की।

बिहार के भोजपुर जिले के कुख्यात इचरी नरसंहार में आरोपित रहे जदयू के वर्तमान महासचिव श्रीभगवान कुशवाहा को आरा के MP/MLA कोर्ट ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को इस नरसंहार से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कुशवाहा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।

वहीं, अन्य 9 आरोपितों को उम्र कैद की सजा सुनाने के साथ ही जुर्माना लगाया गया है। जिन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, वे हैं- राजेंद्र साह, बुद्धू साह, पुलिस महतो, गौरी महतो, बहादुर राम, बलेशर राम, भरोसा राम, सत्यनारायण और दुलारचंद यादव।

इन दोषियों के ऊपर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 149 के तहत उम्रकैद, 307 के तहत 10-10 साल की सश्रम कैद तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीन-तीन साल की सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। ये सभी सजाएँ साथ चलेंगी।

वहीं, मृतक अनंत बिहारी सिंह के पुत्र रितेश सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने कोर्ट के इस फैसले पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि आरा कोर्ट के इस फैसले को वह पटना उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि अपराधियों को इतनी सजा पर्याप्त नहीं है।

क्या है इचरी कांड

देश के जिन-जिन इलाकों में राजपूत और भूमिहारों पास जमीनें थीं, उन अधिकांश इलाकों में नक्सली के रूप में आतंक फैला हुआ था, जो आजतक देखने को मिलता है। बिहार में भी ऐसा ही आतंक था। 1990 के दशक शुरू होने के पहले ही विनोद मिश्रा के नेतृत्व में इंडियन पीपुल्स फ्रंट (IPF) द्वारा दूसरे के जमीनों पर लाल झंडा गाड़कर कब्जा करने का आतंक फैलने लगा था।

लालू यादव की बिहार की राजनीति में उभार ने इस कोढ़ में खाज का काम किया। इसी दौरान का नरसंहार है, भोजपुर जिले के आयर थाने के अंतर्गत आने वाला इचरी नरसंहार कांड। विनोद मिश्रा के IPF ने इस जातीय नरसंहार को अंजाम दिया। कभी IPF के कमांडर रहे श्रीभगवान सिंह कुशावाहा ने भोजपुर जिले के जगदीशपुर विधानसभा सीट से घटना के लगभग 2.5 साल पहले यानी 1990 में IPF के टिकट पर चुनाव जीत चुके थे।

कहा तो यहाँ तक जाता है कि इससे IPF में उनका नियंत्रण और कद और बढ़ गया था। तब स्थानीय लोग स्पष्ट रूप से मानते थे कि भोजपुर और उसके आसपास जिलों में नक्सलियों द्वारा दी जाने वाली कोई भी छोटी या बड़ी घटना बिना उनकी सहमति के नहीं होती थी।

राज्य में लालू यादव का पहला शासनकाल था। अपराधियों और नक्सलियों में जोश उफान पर था। भाजपा अपना वजूद तलाश रही थी, लेकिन कॉन्ग्रेस का तिलिस्म अभी टूटा नहीं था। यही कारण था कि 1989 के आम चुनाव में भाजपा ने बक्सर के डुमराँव राजघराने के महाराज कमल सिंह को टिकट दिया था। लेकिन, ब्राह्मण बहुल बक्सर लोकसभा से वे जीत नहीं सके।

एक अलग रास्ते पर बिहार चल रहा था। 29 मार्च 1993 की शाम का वक्त था। भाजपा की मीटिंग से ट्रैक्टर पर बैठकर लौट रहे लगभग दो दर्जन से अधिक लोग जैसे ही आटापुर गाँव के नजदीक नागा बाबा के मठिया के पास पहुँचे, वैसे ही हथियारों से लैस अपराधियों ने उन पर अंधाधुन फायरिंग कर दी।

इस फायरिंग में पाँच लोगों- राम लोचन सिंह, विनय सिंह, जालिम सिंह, हृदयानंद सिंह और अनंत बिहारी सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, जनेश्वर सिंह, सत्येंद्र सिंह, उमेश सिंह, गुप्तेश्वर सिंह, मटुकधारी सिंह, रवींद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह और भीखन साह घायल हो गए। मारे गए सभी लोग राजपूत समाज से थे।

इस हत्याकांड का आरोप IPF पर लगा। कहा गया कि विनोद मिश्रा के इशारे पर श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में इस घटना को अंजाम दिया गया। इस हमले को लेकर घटना में घायल गुप्तेश्वर सिंह ने 24 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवाई थी। इनमें श्रीभगवान कुशवाहा का नाम भी शामिल था।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए थे, जबकि बचाव पक्ष सिर्फ दो गवाह पेश कर पाया था। इस तरह 30 सालों यह केस ना सिर्फ चलता रहा, बल्कि इसके आरोपित रहे श्रीभगवान सिंह कुशवाहा बाइज्जत बरी भी हो गए। यह जानते हुए भी कि श्रीभगवान पर नरसंहार का आरोप है, नीतीश कुमार ने उन्हें खूब प्रश्रय दिया।

श्रीभगवान कुशवाहा भोजपुर क्षेत्र के एकवारी गाँव में नक्सलवाद को स्थापित करने वाले कुख्यात जगदीश महतो के दामाद हैं। इसके बाद वह विधायक भी चुन लिए गए। इसके बाद उनका प्रभाव लगातार बढ़ता रहा। IPF के बाद वे साल 2000 में नीतीश कुमार की समता पार्टी से विधायक बने और साल 2005 में जदयू से। इस दौरान वे बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रीभगवान ने एक चुनावी जनसंपर्क के दौरान कहा था कि ‘राजपूत चमरुआ जूता ह, जब पहिने के होखे त करुआ तेल लगा ल आ पहिन जा।’ यानी राजपूत चमड़े के जूता है। जब इनसे काम लेना हो तो इनमें तेल लगाओ और पहन लो। यह उनके जातीय नफरत को दर्शाता है।

नीतीश सरकार में जातीय नरसंहार

वैसे जातीय नरसंहार का आरोप सिर्फ लालू यादव की सरकार पर नहीं है। नीतीश कुमार की सरकार में भी जातीय नरसंहार के हुए हैं। नीतीश कुमार की पहला में पहला जातीय नरसंहार खगड़िया का अलौली नरसंहार हुआ था। साल 2007 में इसमें धानुक जाति के एक दर्जन लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

इसके बाद इसके साल 2021 में मधुबनी जिले बेनीपट्टी में एक राजपूत परिवार के 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस नरंसहार के बाद भी नीतीश कुमार ने एक शब्द नहीं कहा था। इसी तरह फरवरी 2023 मे सारण जिले के मुबारकपुर गाँव में राजद से जुड़े विजय यादव नाम इलाके का छटे हुए गुंडे एक ही जाति के तीन लोगों को पीट-पीटकर मार डाला। तब भी नीतीश कुमार चुप रहे।

हनुमान जयन्ती नहीं, हनुमान जन्मोत्सव कहिए: क्या सच में ‘जयन्ती’ कहना गलत है, क्या ‘मृत व्यक्ति की होती है जयन्ती’ वाले तर्क का कोई आधार है

चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हर वर्ष मनाई जाने वाली ‘हनुमान जयन्ती’ का हिंदू धर्म में खासा महत्व है। प्रभु श्रीराम के परम भक्त बनकर इस दिन भगवान शिव ने ‘हनुमान जी’ के रूप में अपना ग्याहरवाँ अवतार लिया था। हिंदू इस पावन जयन्ती को धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन मंदिरों से लेकर हिंदुओं के घर में हनुमान जी की विशेष पूजा होती है और बाहर बड़ी-बड़ी शोभा यात्राएँ निकलती हैं। सोशल मीडिया आ जाने के बाद से इस दिन का जो उत्साह बढ़ा है वो देखते ही बनता है। लेकिन इस उत्साह के अलावा इस दिन जो सोशल मीडिया पर बहस चलती है वो यह कि हमें हनुमान जी की जन्मतिथि को ‘जयन्ती’ कहना चाहिए या फिर ‘जन्मोत्सव’?

हनुमान जयन्ती या जन्मोत्सव… क्या सही?

आपने भी कुछ संदेश सोशल मीडिया पर वायरल होते देखे होंगे जिनमें अनुरोध किया जाता है कि हनुमान जी के अवतरण दिवस को ‘जयन्ती’ न कहकर ‘जन्मोत्सव’ कहा जाए…। ऐसा कहने के पीछे उनका तर्क यह होता है कि जयन्ती ‘मृत लोगों के जन्मदिन’ के लिए प्रयोग में लाई जाती है जबकि हनुमान जी तो चिरंजीवी हैं जो आज भी धरती पर मौजूद हैं और कलयुग के अंत तक रहेंगे।

इन संदेशों और इनके पीछे दिए तर्क पढ़कर कोई भी सोच में पड़ जाए कि क्या वाकई आज तक हमने जयन्ती शब्द का गलत प्रयोग किया और हमें जन्मोत्सव कहना चाहिए था…!

जयन्ती शब्द का अर्थ

आज चलिए इसी विषय पर थोड़ी जानकारी जुटाटे हैं। शुरुआत ‘जयन्ती’ शब्द का अर्थ जानने से करेंगे। आज के समय में सबसे सरल तरीका होता है इंटरनेट पर सर्च करना। जब हमने इस शब्द का अर्थ गूगल पर खोजा तो सबसे ऊपर ही इसका एक अर्थ ‘विजयिनी’ पाया और दूसरा अर्थ ‘किसी पुण्य आत्मा की जन्मतिथि वाला दिन’ पाया। इसके अलावा पताका, दुर्गा जी का नाम आदि-आदि आया। बहुत खोजने पर भी हमें कहीं इस शब्द का अर्थ ‘मृत लोगों से संबंधित’ नहीं मिला।

शास्त्रों में जयन्ती शब्द का अर्थ

इसके बाद हमने थोड़ी और खोजबीन की तो हमें लोकगाथा नाम के यूट्यूब चैनल पर दिलचस्प जानकारी मिली। ये वीडियो 11 माह पहले 2022 में चैनल पर अपलोड हुई थी। वीडियो में ‘जयन्ती’ शब्द के संस्कृत में अर्थ बताए गए। इसके बाद यहाँ शास्त्रों का हवाला देकर ‘जयन्ती’ शब्द की व्याख्या की गई है। 

बताया गया कि स्कंद पुराण में लिखा है,

“जयं पुण्य च कुरुते जयन्तीमिति तां विदु:।” अर्थात जो जय और पुण्य प्रदान करे उसे ‘जयन्ती’ कहते हैं।

इसके बाद वीडियो में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उदाहरण दिया गया।

अमूमन हम लोग इस पवित्र तिथि को जन्माष्टमी के नाम से जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि शास्त्रों में इस तिथि को ‘जयन्ती’ ही कहा जाता है।

स्कंद पुराण के एक श्लोक में कहा गया है-

जयन्त्याम उपवासश्यच महापातकनाशन:।
सर्वै कार्यो महाभक्त्या पूजनीयश्य केशव:।।

इसका अर्थ होता है श्रीकृष्ण जयन्ती का व्रत महापातक का विनाश कर देता है। अत: भक्तिपूर्वक यह व्रत करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें।

विष्णु पुराण में भी कहा गया है- रोहिणी नक्षत्र संयुक्त जन्माष्टमी जयन्ती कहलाती है।

इसके अलावा भगवदगीता में भगवान ने अपने जन्म को दिव्य बताया है। उन्होंने चौथे अध्याय के 9वें श्लोक में कहा है- जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वत:। अर्थात “अर्जुन मेरा जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य हैं।”

अब सोचने वाली बात यह है कि भगवान श्रीकृष्ण की तरह क्या हनुमान जी का जन्म दिव्य नहीं है जबकि वह तो खुद शिवजी के ग्याहरवें अवतार हैं जो प्रभु राम की सहायता करने के लिए पृथ्वी पर जन्मे और आज भी धरती के संरक्षक हैं। 

न हनुमान जयन्ती में समस्या है न हनुमान जन्मोत्सव में

तो अब स्पष्ट है कि ‘जयन्ती’ का अर्थ मरणशील व्यक्ति से नहीं जुड़ा है, इसलिए हनुमान जन्मतिथि को ‘जयन्ती’ कहने में कोई समस्या नहीं हैं। जो लोग इस दिन को हनुमान जी का जन्मोत्सव कहते हैं वो भी गलत नहीं है, क्योंकि हनुमान जी के अवतरण दिवस को उत्सव के तौर पर मनाने को ही जन्मोत्सव कहा गया है और शहर-शहर में निकलती शोभा यात्राएँ, घर-घर में लहराती हनुमान जी की पताका इस बात का सबूत है कि हिंदुओं के लिए यह मात्र तारीख नहीं बल्कि उत्सव है। इसलिए जन्मोत्सव कहना भी उचित है, मगर साथ में यह तर्क देना कि जयन्ती का अर्थ केवल मृत व्यक्ति से है…वो गलत है। 

सत्येंद्र जैन को मनी लाॅन्ड्रिंग में दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं दी जमानत, कहा- सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं: मनीष सिसोदिया की याचिका पर CBI से माँगा जवाब

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन को हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि बाहर निकलने पर वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। वहीं दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब माँगा है। यह मामला एक्साइज पाॅलिसी को लागू करने में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आम बोलचाल की भाषा में इसे दिल्ली का शराब घोटाला कहते हैं।

सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने उनकी जमानत याचिका पर गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा है कि उसे निचली अदालत के फैसले में कोई कमी नजर नहीं आती। सत्येंद्र जैन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। वह जेल से बाहर जाकर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है। इस मामले में कोर्ट ने दो अन्य आरोपित वैभव जैन और अंकुश जैन को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। जाँच चल रही है। इसलिए यह अदालत इस मामले को लेकर पेश किए सबूतों पर टिप्पणी नहीं कर सकती। जाँच में ऐसे सबूत मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग में कथित तौर पर शामिल 4 कंपनियों में सत्येंद्र जैन और उनके परिवार के जुड़ाव को दिखाते हैं। सत्येंद्र जैन ने प्रथमदृष्टया दोषी दिखाई पड़ते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने जानबूझकर अपराध को छिपाया है।

बता दें कि इससे पहले निचली अदालत ने भी सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आय छिपाने की कोशिश की। निचली अदालत के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद भी वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उन्हें जेल में रखने की कोई जरूरत नहीं है।

11 महीने से जेल में बंद हैं सत्येंद्र जैन

दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य और जेल मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में ही बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन के मामले में हुई थी। ईडी ने अपनी जाँच में पाया है कोलकाता की कंपनियों के साथ उन्होंने अवैध रूप से 4.81 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन किया है। इस मामले में ईडी उनकी 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

मनीष सिसोदिया की बेल पर 20 अप्रैल को सुनवाई

शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 20 अप्रैल को सुनवाई करेगी। गुरुवार को जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने इस पर सीबीआई से जवाब माँगा। इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 31 मार्च 2023 को सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया था। उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी ने मामले दर्ज कर रखे हैं। अभी वे न्यायिक हिरासत में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका निचली अदालत में लंबित है।

‘मैं गाय का मांस खाऊँगा, जो करना है कर लो’: साजिद खान ने खाते हुए वीडियो किया अपलोड, हिंदू संगठनों को दी गालियाँ

छत्तीसगढ़ में साजिद खान नाम का एक शख्स गोमांस दिखाकर हिंदू संगठनों और भाजपा को गाली दे रहा है। इसका उसने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है। वीडियो में साजिद खान कह रहा है कि वह गाय का मांस खाएगा और अगर किसी में हिम्मत है तो उसका कोई कुछ बिगाड़ कर दिखाए।

मामला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। बुधवार (5 अप्रैल 2023) को अपलोड किए गए वीडियो में साजिद हिंदू संगठनों को गालियाँ दे रहा है और कह रहा है, “हिम्मत है तो मेरा जो करना चाहो कर लो।”

वीडियो वायरल होते ही शहर में तनाव फैल गया हो गया। इसके बाद हिंदू संगठनों ने मामले की शिकायत सिटी कोतवाली में की। बुधवार की देर रात तक बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, गौ सेवक समेत अन्य हिंदू संगठनों के लोग थाने में बैठे रहे।

इस दौरा पुलिस अधिकारियों ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट हो गई। इसके बाद हालात को देखते हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने साजिद खान को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

बता दें कि सुकमा जिले में रामनवनी के कुछ दिन पहले से ही हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि पुलिस ने लाठी चार्ज करना पड़ा था। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ अगले दिन हिंदू संगठनों ने शहर बंद करवाया था।

बाद में मामला शांत हो गया था। इसके बाद रामनवमी के दिन किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए सैकड़ों की संख्या में फोर्स को तैनात किया गया था। हालाँकि, फोर्स तैनात होने के बावजूद तनाव को महसूस किया जा सकता है।

स्थापना दिवस पर PM मोदी ने BJP को दिया ‘बजरंगबली’ वाला मंत्र, कहा- भारत अब अपनी शक्ति जान चुका है, बुराई के खिलाफ हनुमान जी की तरह कठोर बनें

06 अप्रैल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का स्थापना दिवस है। इस मौके पर गुरुवार को बजरंगबली का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BJP कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश भर में हनुमान जी की जन्म जयंती मनाई जा रही है। हनुमान जी का जीवन भारत की विकास यात्रा के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करता है। 2014 से पहले देश को अपने सामर्थ्य का एहसास नहीं था। आज भारत बजरंगबली की तरह अपनी शक्तियों का आभास कर चुका है।

भाजपा के 44 वें स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हनुमान जी संकट के समय में लक्ष्मण जी के लिए पर्वत उठा लाए थे। भाजपा भी इसी प्रेरणा के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान करने की कोशिश कर रही है। पीएम ने बुराइयों के खिलाफ लड़ाई में हनुमान जी की तरह कठोर होने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह हनुमान जी राक्षसों का सामना करते हुए कठोर हो गए थे, उसी तरह भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और परिवारवाद की बात आने पर भाजपा संकल्पबद्ध हो जाती है। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में केवल सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि भारत के लोगों ने देश के पुनर्जागरण की नई यात्रा का शंखनाद किया था। 800 साल से ज्यादा की गुलामी से बाहर निकल कर एक राष्ट्र अपना खोया हुआ गौरव पाने के लिए फिर से उठ खड़ा हुआ है।

संबोधन के दौरान पीएम ने कहा कि 1947 में अंग्रेज भले चले गए, लेकिन लोगों को गुलाम बनाए रखने की मानसिकता छोड़ गए। आजादी के बाद कुछ लोग सत्ता को अपना जन्मजात अधिकार समझते थे। बादशाही की मानसिकता वाले लोग देश के लोगों को अपना गुलाम समझते थे। धीरे-धीरे इस तरह की बुराइयाँ कमजोर पड़ रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसकी जैसी पार्टियाँ छोटा सोचती हैं और उससे भी कम हासिल कर खुशियाँ मनाती हैं, जबकि भाजपा का पॉलिटिकल कल्चर है बड़े सपने देखना और उससे भी ज्यादा हासिल करने के लिए जी-जान से जुट जाना। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम शरीर का कण-कण और समय का पल-पल खपाने का हौसला रखते हैं।”

बता दें भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने झंडा फहराया और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। अपने संबोधन के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम एक पल भी बैठने वाले नहीं हैं और पार्टी को और आगे ले जाएँगे।

मनीष कश्यप पर अब लगाया NSA: सुप्रीम कोर्ट 10 अप्रैल को करेगा सुनवाई, बिहार-तमिलनाडु में दर्ज सभी केस एक साथ करने की अपील

बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप (Manish Kashyap) पर तमिलनाडु पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है, जब मनीष ने नियमित जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज सभी मामले एक साथ करने की अपील की है।

इस याचिका के बाद मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शाम में 4 बजकर 25 मिनट पर इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि कैसे उनके मुअक्किल के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज करवाया गया है। इस पर कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख सुनिश्चित की

मदुरै पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर हमले के फेक वीडियो सर्कुलेट करने के आरोप में मनीष कश्यप के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। मदुरै कोर्ट ने कश्यप को 14 दिनों के लिए 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

वहीं मनीष कश्यप के वकील एपी सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में मनीष कश्यप को नियमित जमानत प्रदान करने की गुहार लगाई गई है। साथ ही अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों की सुनवाई एक जगह करने का निवेदन किया गया है। एपी सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बिहार और पूर्वांचल के मजदूरों के साथ हुई ज्यादती का मुद्दा कई अन्य मीडिया संस्थानों और पत्रकारों ने भी उठाया था। लेकिन कार्रवाई सिर्फ मनीष कश्यप के विरुद्ध हो रही है।

बता दें कि 29 मार्च को तमिलनाडु पुलिस मनीष कश्यप को ट्रांजिट रिमांड पर बिहार से तमिलनाडु लेकर पहुँची थी। इसके बाद उन्हें मदुरै कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पहले उन्हें तीन दिनों की रिमांड पर भेजा। रिमांड खत्म होने के बाद एक बार फिर से मनीष कश्यप की मदुरै जिला कोर्ट में पेशी हुई। जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

उधर बिहार पुलिस ने भी यूट्यूबर के खिलाफ चौथा केस दर्ज किया है। देशद्रोह और दंगा भड़काने जैसे कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार मनीष कश्यप और उसके दो दोस्तों ने अपने वीडियो में कथित तौर पर महात्मा गाँधी की मौत पर जश्न मनाने और मुस्लिमों को मारने एवं मस्जिद जलाने की बात कही थी। इस दावे के आधार पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने मामला दर्ज किया है।

‘काॅन्ग्रेस में रहना है तो रीढ़विहीन होना होगा’: राहुल गाँधी के कारण अलग हुए गुलाम नबी आजाद, बताया- कमजोर थी मनमोहन सिंह सरकार

गुलाम नबी आजाद ने राहुल गाँधी के कारण काॅन्ग्रेस छोड़ी थी। उन्होंने यह बात बुधवार (5 अप्रैल 2023) को अपनी किताब ‘आजाद’ के विमोचन के मौके पर कही। उन्होंने यह भी कहा कि कई अन्य नेताओं ने भी काॅन्ग्रेस राहुल गाँधी के कारण ही छोड़ी है, क्योंकि वहाँ रहने के लिए रीढ़विहीन को होने की जरूरत होती है। काॅन्ग्रेस में कई वरिष्ठ पदों पर रहे गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से रिश्ते तोड़ने के बाद डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (DAP) का गठन किया है।

आजाद ने बताया कि जब 2013 में राहुल गाँधी ने सार्वजानिक तौर पर अध्यादेश फाड़ दिया था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नाराज हो गए थे। वे पीएम पद से इस्तीफा देना चाहते थे। आज यदि वह कानून होता तो राहुल गाँधी की सदस्यता भी बची रहती।

यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गाँधी के कारण ही उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ी, आजाद ने कहा, “हाँ और मैं ही नहीं कई युवा और पुराने नेताओं ने भी उन्हीं की वजह से पार्टी छोड़ी है। आज के कॉन्ग्रेस में रहने के लिए ‘रीढ़विहीन’ होने की जरूरत है।” उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस अब सोनिया गाँधी के नियंत्रण में नहीं है। उनसे पूछा गया था कि क्या सोनिया गाँधी के कहने पर वे दोबारा काॅन्ग्रेस में लौट सकते हैं। आजाद ने कहा, “यदि सोनिया गाँधी के हाथ में होता तो हम यहाँ आते ही नहीं। इन चीजों को सोनिया गाँधी तय नहीं कर सकतीं। सोनिया गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहकर भी पार्टी में उनकी वापसी नहीं करा सकते। यदि राहुल गाँधी उनसे अनुरोध करते हैं तो यह देरी से उठाया गया कदम होगा।”

आजाद ने कहा कि साल 2013 में यूपीए सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़े जाने के बाद भी राहुल गाँधी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। तात्कालिक केंद्रीय मंत्रिमंडल इतना कमजोर था कि अध्यादेश वापस ले लिया गया। राहुल राष्ट्रपति नहीं थे फिर भी उनके विरोध के कारण अध्यादेश वापस लिया गया। कैबिनेट को अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए था। हमें पता था कि इस कानून का इस्तेमाल एक दिन हमारे खिलाफ हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री की इस किताब का विमोचन पूर्व कॉन्ग्रेस नेता डॉ. कर्ण सिंह ने किया। इस दौरान केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और फारूक अब्दुल्ला, कनिमोझी समेत विपक्ष के कई नेता मौजूद थे। गुलाब नबी आजाद ने किताब में अपने 55 सालों के राजनीतिक अनुभवों को साझा किया है।

कॉन्ग्रेस की तरफ से भी गुलाम नबी आजाद पर पलटवार किया गया है। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर लिखा है कि गुलाम नबी आजाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही कॉन्ग्रेस पार्टी और सिस्टम के बड़े लाभभोगी रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ वे प्रमाण देते हैं कि वे इस योग्य नहीं थे। वे अपना असली चरित्र दिखा रहे हैं। जिसे लंबे समय तक छुपा कर रखा गया था।

‘UPA के समय उम्मीद थी तो इंतजार करता रह गया, भाजपा सरकार में उम्मीद नहीं थी फिर भी मिला पद्मश्री’: PM मोदी के कायल हुए कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार ( 5 अप्रैल 2023) को पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। पद्म श्री से नवाजे गए लोगों में एक नाम शाह रशीद अहमद कादरी का भी था। कादरी कर्नाटक के मशहूर बीदरी (एक प्रकार की शिल्प कला) कलाकार हैं। पद्म श्री पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

पुरस्कार वितरण समारोह के बाद पीएम पद्म पुरस्कार विजेताओं से मिल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने शाह रशीद अहमद को पुरस्कार जीतने पर शुभकामनाएँ दी। इस पर रशीद अहमद ने पीएम मोदी से कहा, “मैं 5 साल तक UPA सरकार से उम्मीद पाले रहा कि मुझे पद्मश्री मिलेगा लेकिन नहीं मिला। उसके बाद केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो कोई उम्मीद नहीं थी। मगर आपने पद्म श्री दे कर मेरा ख्याल गलत साबित कर दिया। मुझे चुना इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”

रशीद कादरी की बात सुनकर पीएम मोदी हँस पड़े। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीएम के साथ गृहमंत्री अमित शाह भी नजर आ रहे हैं। शाह रशीद बीदरी कला में नए पैटर्न और डिजाइन पेश करने के लिए मशहूर हैं। बता दें बीदरी कर्नाटक की लोककला है जो राज्य के बीदर शहर से शुरु हुई और धीरे-धीरे इस कला का प्रसार तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में भी हो गया।

इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव और मशहूर चिकित्सक दिलीप महालनाबिस को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। मुलायम सिंह यादव का पुरस्कार अखिलेश यादव ने प्राप्त किया।

उनके अलावा आरआरआर फिल्म के लिए नाटू नाटू गाने लिखने वाले संगीतकार एमएम कीरावनी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। नाटू नाटू गाने को ऑस्कर अवार्ड भी मिल चुका है।