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अमेरिकी चर्च में 600 बच्चों का यौन शोषण, 150 पादरी भी थे शामिल: 80 साल तक छिपाने की कोशिश, 463 पन्नों की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

चर्च में बच्चों के यौन शोषण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसके मुताबिक अमेरिकी राज्य मैरीलैंड के कैथोलिक चर्च में 600 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया गया। इसमें शामिल लोगों में करीब 150 पादरी थे। यौन शोषण की ये घटनाएँ 80 साल में अंजाम दिए गए हैं। 463 पन्नों की एक रिपोर्ट से ये खुलासे हुए हैं।

चार साल की जाँच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। मैरीलैंड अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में उन कैथोलिक पादरियों की पहचान की गई है, जो 1940 के बाद से यौन शोषण में संलिप्त थे। ब्रायन फ्रॉश के अटॉर्नी जनरल रहते इस मामले की जाँच 2019 में शुरू की थी। सैकड़ों पीड़ितों और गवाहों से बातचीत तथा एक लाख पन्नों के अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

यह रिपोर्ट पिछले साल नवंबर में ही तैयार हो गई थी। लेकिन अदालती अनुमति मिलने के बाद अब जारी की गई है। जिन बच्चों का शोषण हुआ उनमें ज्यादातर कमजोर परिवारों से थे और चर्च से जुड़े थे। इस दौरान इन्हें चुप रहने के लिए धमकी भी दी गई थी। यह बात भी सामने आई है कि 80 साल तक चले इस यौन शोषण को चर्च की तरफ से दशकों तक छुपाने की कोशिश भी की गई।

इस रिपोर्ट को लेकर बाल्टीमोर के आर्कबिशप विलियम लोरी ने जीवित बचे पीड़ितों से माफी माँगी है। उन्होंने कहा, “कैथोलिक चर्च के इतिहास में हुई यह अब तक की सबसे दुखद घटना है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता और न ही भुलाया जा सकता है। चर्च के उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुँचाया गया और हम पीड़ितों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहे। साथ ही दुर्व्यवहार करने वालों को उनके किए की सजा भी नहीं दिलवा पाए। इसका हमें खेद है।”

इससे पहले अमेरिका के इलिनोइस प्रांत में करीब 700 पादरियों पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था। इलिनोइस के अटॉर्नी जनरल ने भी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था कि चर्च इन मामलों से निपटने में अक्षम रहा थे। चर्च ने यौन शोषण के आरोपित पादरियों की संख्या 185 बताई थी, लेकिन अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ऐसे पादरियों की संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादा है।

जय श्रीराम के जयकारों से गूँजा जहाँगीरपुरी, लहराया भगवा: हनुमान जन्मोत्सव पर निकली शोभायात्रा, चप्पे-चप्पे पर थी दिल्ली पुलिस की नजर

दिल्ली के जहाँगीरपुरी (Jahangirpuri, Delhi) इलाके में गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर शोभा यात्रा निकाली गई। विश्व हिंदू परिषद की तरफ से निकाली गई रैली में हजारों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इलाके में एक दिन पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात थे। हालाँकि, देर रात्र‍ि तक जहाँगीरपुरी में शोभा यात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में कुछ शर्तों के साथ दिल्ली पुलिस ने अनुमति दे दी।

दिल्ली पुलिस की तरफ से इजाजत मिलने के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) की तरफ से भव्य रैली निकाली गई। हजारों की तादाद में भगवा झंडा हाथ में लिए लोग शोभा यात्रा में शामिल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने निश्चित रास्तों से होते हुए यात्रा की इजाजत दी है। इस दौरान रैली की सुरक्षा में पुलिस के जवान तैनात रहे। इसके पहले पुलिस ने शोभा यात्रा आयोजकों के साथ बैठक की थी, जिसमें जुलूस का रास्ता तय किया गया। साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा भी जहाँगीर पुरी में आयोजित रैली में शामिल हुए। इसकी जानकारी देते हुए कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर लिखा, “जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव की शोभा यात्रा में जा रहा हूँ। दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था शानदार है। जहाँगीर पुरी में शोभा यात्रा हो रही है और शानदार हो रही है।”

बताया जा रहा है कि जहाँगीरपुरी में निकाली गई यात्रा एक खास स्थान पर रोक दी गई। शोभा यात्रा तय रुट से भटक न जाए, इसके लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई हुई है। वहीं, कपिल मिश्रा समेत वीएचपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा निकाल रहे हैं।

बता दें इसके पहले दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए शोभा यात्रा की इजाजत नहीं दी थी। पूरे जहाँगीरपुरी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। बुधवार से ही इलाके में पुलिस का फ्लैगमार्च चल रहा था।

पिछले साल हनुमान जन्मोत्सव पर 16 अप्रैल 2022 को जहाँगीरपुरी में शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों के समूह ने पथराव कर दिया था। इसके बाद इलाके में साम्प्रदायिक तनाव फैल गया था। तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। हमले में 8 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

इस देखते हुए इस साल रामनवमी के अवसर पर भी पुलिस ने शोभा यात्रा निकालने की भी इजाजत नहीं दी थी। हालाँकि, इसके बावजूद इलाके में शांतिपूर्ण ढंग से रामनवमी पर शोभा यात्रा निकाली गई थी।

पत्रकार सोनाली मिश्रा ने लव जिहाद पर ‘नेहा की लव स्टोरी’ नाम से लिखी किताब, Pocket FM पर नोमान शाहजी के नाम से अपलोड: लेखिका ने भेजा लीगल नोटिस

‘नेहा की लव स्टोरी’ – पत्रकार सोनाली मिश्रा की लव जिहाद पर लिखी किताब है। उनकी इस किताब को बहुत से लोग लेखक नोमान शाहजी द्वारा लिखी गई मान रहे हैं। इस कंफ्यूजन की वजह है – स्टोरीटेलिंग व ऑडियो प्लेटफॉर्म पॉकेट एफएम (Pocket FM) पर अपलोड की गई एक किताब। किताब का नाम है – ‘नेहा की लव स्टोरी’ और लेखक की जगह नाम लिखा हुआ है – नोमान शाहजी। इस संबंध में पुस्तक की मूल लेखिका सोनाली मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट की वकील नुपूर शुक्ला से ऑडियो प्लेटफॉर्म पॉकेट एफएम को लीगल नोटिस भिजवाया है।

नोमान शाहजी के नाम से अपलोड किताब

नोटिस में वकील नुपूर ने बताया कि सोनाली मिश्रा की किताब गरुण प्रकाशन की रति द्वारा प्रकाशित की गई थी। इस किताब ने भारत समेत कई जगहों पर ख्याति कमाई। फिलहाल ये अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। मगर इसकी कॉपीराइट अब भी लेखिका के पास है।

वकील नुपूर शुक्ला ने जो लीगल नोटिस भेजा है, उसमें यह आरोप लगाया गया है कि ‘नेहा की लव स्टोरी’ नामक पुस्तक की मूल लेखिका से बिना पूछे अवैध ढंग से उनकी किताब को पॉकेट एफएम पोर्टल पर डाल दिया गया। इस पोर्टल से पाठक मुफ्त में इस किताब को डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

पॉकेट एफएम को वकील नुपूर शुक्ला द्वारा भेजा गया लीगल नोटिस

नोटिस के अनुसार मूल लेखक सोनाली मिश्रा से बिना पूछे पॉकेट एफएम पोर्टल पर ऐसा किया गया जो कि आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत दंडनीय अपराध है। इसके अलावा सोनाली मिश्रा की वकील ने लीगल नोटिस में कहा है कि इस कारण से उनकी क्लाइंट के काम को मुफ्त में और किसी अन्य के नाम से सार्वजनिक किए जाने से मानसिक आघात हुआ है, साथ ही आर्थिक नुकसान भी।

लीगल नोटिस में पॉकेट एफएम (Pocket FM) प्लेटफॉर्म को चेतावनी दी गई कि वो नोटिस मिलने के तीन दिन के भीतर किताब को हटाएँ। अगर ऐसा नहीं होता तो मामला कोर्ट तक जाएगा और परिणामों के लिए वह खुद जिम्मेदार होंगे।

वकील नुपूर शुक्ला ने लीगल नोटिस के जरिए स्टोरीटेलिंग व ऑडियो प्लेटफॉर्म पॉकेट एफएम को यह भी संदेश दिया है कि अपलोड हुई ‘नेहा की लव स्टोरी’ पुस्तक से लेखिका का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए 5 लाख रुपए भी सोनाली मिश्रा को दिए जाएँ। इतना ही नहीं अगर प्लेटफॉर्म तीन दिन के भीतर अपने पोर्टल से किताब नहीं हटाता है तो अगले दिन से उन्हें प्रतिदिन के 15000 रुपए तब तक देने होंगे, जब तक कि प्लेटफॉर्म किताब नहीं हटाता।

इन सबके अतिरिक्त वकील ने पॉकेट एफएम प्लेटफॉर्म से 11000 रुपए लीगल नोटिस के खर्चे के माँगे। वकील ने कहा है कि उनकी क्लाइंट से पॉकेट एफएम को माफी माँगनी होगी और ये भी बताना होगा कि किसके कहने पर या शह पाकर वो अवैध रूप से प्लेटफॉर्म पर किताब अपलोड की गई।

अपडेट: पॉकेट एफएम ने लेखक नोमान शाहजी द्वारा अपलोड की गई किताब ‘नेहा की लव स्टोरी’ को अपने प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। साथ ही कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘नेहा की लव स्टोरी’ पुस्तक के अपलोड किए जाने में उनका या उनके किसी कर्मचारी का कोई हाथ नहीं है, उनका प्लेटफॉर्म एक इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म है, जिस पर कोई भी यूजर/लेखक अपनी लिखी कृति को अपलोड कर सकता है।

2 पति रखने से सुधर गया ब्राजील की सोशल मीडिया स्टार का ‘मेंटल हेल्थ’, अब तीसरे की तलाश: कहा- डिप्रेशन से उबरी, वे बर्तन धोते हैं और प्यार भी करते हैं

ब्राजील की सोशल मीडिया स्टार लैरी इंग्रिड (Larry Ingrid) दो पतियों के साथ रहती हैं। उनका दावा है कि दो पति होने की वजह से वह डिप्रेशन से बाहर आईं। वह अब तीसरे पति की तलाश कर रही हैं। 27 वर्षीय लैरी इंग्रिड को लारिसा के नाम से भी जाना जाता है।

लैरी के एक पति इटालो सिल्वा (Italo Silva) हैं, जिनकी उम्र 25 साल है। वहीं, दूसरा पति 18 वर्षीय जोआओ विक्टर है। लैरी का सिल्वा से एक बेटा और विक्टर से एक बेटी है। सिल्वा से उनकी मुलाकात आठ साल पहले हुई थी। उस समय सिल्वा की सिर्फ उम्र 17 साल थी।

लैरी का कहना है कि उन तीनों ने हमेशा साथ रहने के लिए एग्रीमेंट किया है। लैरी का कहना है, “दो पति होने से मुझे डिप्रेस होने का समय नहीं मिलता। मेरे दोनों पति घर की सफाई करते हैं। मेरे लिए बर्तन धोते हैं और मुझे बहुत प्यार करते हैं।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्राजील में दो शादी करना कानून अवैध है। वहाँ एक शादी से इतर संबंध रखना गैरकानूनी माना जाता है। हालाँकि, लैरी को इस बात की कोई परवाह नहीं है। वह अपने दोनों पतियों के साथ बेहद खुश हैं।

लैरी इंग्रिड सोशल मीडिया स्टार होने के साथ-साथ एक सिंगर भी हैं। वह टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर अपनी लव लाइफ से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं। टिकटॉक पर उनके 19 लाख और इंस्टाग्राम पर करीब 3 लाख 75 हजार फॉलोअर्स हैं।

लैरी के पहले पति सिल्वा ने बताया कि जब कोई तीसरा व्यक्ति उनकी पत्नी लैरी के आसपास होता है, तो उन्हें और लैरी के दूसरे पति विक्टर को ईर्ष्या होने लगती है। उन्होंने बताया कि जब इस तरह की स्थिति उनके सामने आती है तो इस पर तीनों आपस में बात करते हैं।

लैरी के दूसरे पति विक्टर ने कहा कि उनके परिवार के लिए यह रिश्ता बेहद मुश्किल था, लेकिन समय के साथ उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। वहीं, लैरी का कहना कि वह किसी दूसरी महिला को अपने रिश्ते में नहीं आने देगी, लेकिन उन्हें अपने लिए किसी तीसरे पुरुष की तलाश है।

आम लोगों के हाथ में पद्म पुरस्कार, विजेताओं ने मोदी सरकार को सराहाः कहा- जमीनी स्तर पर काम करने वालों का हो रहा सम्मान, जनता को अच्छा करने की मिलेगी प्रेरणा

राष्ट्रपति भवन में 55 पद्म पुरस्कार विजेताओं ने बुधवार (05 अप्रैल 2023) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया। इनमें बौद्ध धर्मगुरु कुशोक थिकसे नवांग, सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता गजानन जगन्नाथ माने और बीदरी कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी भी शामिल थे। पद्म पुरस्कार विजेताओं का कहना है कि मोदी सरकार जमीनी लोगों को पुरस्कृत कर रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री प्राप्त करने वाले थिकसे मठ के प्रमुख कुशोक नवांग ने कहा, “मैं आने वाली पीढ़ी के लिए काम कर रहा हूँ। मैं लोगों को मिलकर रहने की प्रेरणा देता हूँ। इस क्षेत्र में कई प्रयास किए हैं। इसलिए मुझे यह सम्मान प्राप्त हुआ है।” उन्होंने कहा कि पीएम मोदी लद्दाख के लोगों के लिए बहुत काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री प्राप्त करते कुशोक नवांग (फोटो साभार- ट्विटर @rashtrapatibhvn)

सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। शिक्षा और साहित्य क्षेत्र में पद्म अवार्ड पाने वाले आनंद कुमार ने कहा कि अब जमीनी स्तर के लोगों को पुरस्कार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार की तरफ से उन्हें सम्मानित करने सूचना दी गई तो उन्हें यकीन नहीं हुआ।

आनंद कुमार ने कहा कि सरकार के इस कदम से जनता में उम्मीद जगती है कि अच्छा काम करेंगे तो पुरस्कार अवश्य मिलेगा। बता दें आनंद कुमार आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को मुफ्त में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की ट्रेनिंग देते हैं।

राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री प्राप्त करते आनंद कुमार (फोटो साभार- ट्विटर @rashtrapatibhvn)

सोशल वर्कर गजानन जगन्नाथ माने ने पद्मश्री प्राप्त करने के बाद खुशी का इजहार करते हुए कहा, “मैं 35 सालों से कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए काम कर रहा हूँ। इस काम में परिवार और दोस्तों का भी साथ मिलता है। राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होना बहुत बड़ी बात है।” उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार अब पद्म पुरस्कारों के लिए जमीनी स्तर से लोगों को चुन रही है।

राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री प्राप्त करते गजानन जगन्नाथ माने (फोटो साभार- ट्विटर @rashtrapatibhvn)

कर्नाटक के मशहूर बीदरी (एक प्रकार की शिल्पकला) कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी को भी पद्मश्री से नवाजा गया। पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का आभार व्यक्त किया और उनकी तरीफ भी की।

रशीद अहमद ने पीएम मोदी से कहा, “मैं 5 साल तक UPA सरकार से उम्मीद पाले रहा कि मुझे पद्मश्री मिलेगा, लेकिन नहीं मिला। उसके बाद केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो कोई उम्मीद नहीं थी। मगर आपने पद्मश्री देकर मेरा ख्याल गलत साबित कर दिया। मुझे चुना इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”

राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री प्राप्त करते शाह रशीद अहमद कादरी (फोटो साभार- ट्विटर @rashtrapatibhvn)

बता दें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) की शाम 3 पद्म विभूषण, 5 पद्म भूषण और 47 पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए। इसके पहले 22 मार्च को राष्ट्रपति ने पहले नागरिक अलंकरण समारोह में 54 पद्म पुरस्कार प्रदान किए थे।

CRPF में बंपर बहाली, 1.30 लाख पदों पर होगी भर्ती: गृह मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन, जानिए कैसे करें आवेदन-कितनी मिलेगी सैलरी

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में बड़ी भर्ती होने वाली है। इसको लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल के पद पर करीब 1.30 लाख पदों पर भर्ती की जाएगी। गृह मंत्रालय ने यह नोटिफिकेशन बुधवार (5 अप्रैल 2023) को जारी किया।

गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार सीआरपीएफ में 129929 पदों पर भर्तियाँ होनी हैं। इसमें 125262 पदों में पुरुषों तक 4667 महिला अभ्यर्थियों की भर्ती की जाएगी। यही नहीं, पूर्व अग्निवीरों के लिए भी 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गईं हैं। कॉन्स्टेबल पद के लिए 21700 रुपए से 69100 रुपए प्रति माह का वेतमान निर्धारित किया गया है।

CRPF में भर्ती के लिए आवेदकों को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 10 वीं पास होना आवश्यक है। ग्रुप सी की इस भर्ती के लिए सभी भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं। नेपाल और भूटान के नागरिकों को इस भर्ती में वरीयता नहीं दी जाएगी। सामान्य वर्ग के आवेदकों के लिए उम्र सीमा 18-23 निर्धारित की गई है। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग (SC/ST) के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 3 साल की छूट दी गई है। पूर्व अग्निवीरों को आयु सीमा में छूट का प्रावधान रखा गया है।

कॉन्स्टेबल पद की इस भर्ती के लिए आवेदकों को फिजिकल एफिशियेंसी टेस्ट, मेडिकल टेस्ट और लिखित परीक्षा से गुजरना होगा। तीनों चरणों में पास होने के बाद CRPF नियमानुसार भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगी। हालाँकि इस भर्ती के लिए वैकेंसी ब्रेक-अप यानी भर्ती कब से शुरू होगी इस बारे में गृह मंत्रालय की ओर से कोई जानकारी शेयर नहीं की गई है।

सीआरपीएफ कॉन्स्टेबल भर्ती 2023 के लिए अधिक जानकारी प्राप्त करने के CRPF की आधिकारिक वेबसाइट, crpf.gov.in और भर्ती पोर्टल rect.crpf.gov.in पर देखना होगा। इन दोनों वेबसाइट पर ही 129929 पदों के लिए निकली इस भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।

न सोर्स, न ट्रिप… फिर भी ChatGPT ने प्रसिद्ध लॉ प्रोफेसर को बता दिया छात्रा का यौन उत्पीड़न करने वाला, जोनाथन टर्ली ने पूछा- क्या हम AI पर भरोसा कर सकते हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट चैटजीपीटी (Chatbot ChatGPT) अपनी तमाम खूबियों को लेकर इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है। इसे बनाने वाली कंपनी का नाम OpenAI है, जो कि एक स्टार्टअप टेक कंपनी है। अब ChatGPT गलत जानकारी देने के कारण विवादों में है।

हाल ही में कैलिफोर्निया में एक शोध अध्ययन के दौरान एक वकील ने ChatGPT से उन कानूनी विद्वानों (Legal Scholars) की सूची तैयार करने के लिए कहा, जिन पर यौन उत्पीड़न का आरोप है। इसके बाद चैटजीपीटी ने एक लिस्ट बनाई। इस लिस्ट में जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में लॉ प्रोफेसर जोनाथन टर्ली (Jonathan Turley) का नाम भी शामिल था।

चैटबॉट ने द वाशिंगटन पोस्ट में मार्च 2018 के एक लेख का हवाला देता हुए कहा कि टर्ली ने अलास्का की क्लास ट्रिप के दौरान एक छात्रा का यौन उत्पीड़न किया और उस पर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। लॉ प्रोफेसर जोनाथन टर्ली को जब इस लिस्ट के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गए।

जोनाथन टर्ली अमेरिका के बेहद सम्मानित लॉ प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी लेख मौजूद नहीं है और न ही कभी अलास्का क्लास ट्रिप हुई थी। उन्होंने कहा कि उन पर कभी किसी छात्रा के यौन उत्पीड़न का आरोप नहीं लगा। यह आरोप बेबुनियाद और उनकी छवि को खराब करने वाला है।

जोनाथन टर्ली ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को यूएसए टुडे में प्रकाशित एक ओपिनियन में लिखा कि चैटजीपीटी ने उन पर झूठा आरोप लगाया है। उन्होंने आगे लिखा, “मुझे मेरे एक लॉ प्रोफेसर दोस्त से इस शोध के बारे में एक ईमेल मिला। इस ईमेल में यौन उत्पीड़न करने वाले प्रोफेसरों की लिस्ट थी, जिसे चैटजीपीटी ने चलाया था।”

जोनाथन टर्ली ने कहा उन्होंने कभी भी क्लास में किसी छात्रा का यौन शोषण नहीं किया। उन्होंने आगे कहा, “इसमें मैं भी शामिल था। मुझ पर अलास्का की ट्रिप पर लॉ के छात्रों को छेड़ने के आरोप लगाया गया। इसमें साल 2018 में वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक लेख का हवाला भी दिया गया, जिसमें मुझ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।”

उन्होंने चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट की सटीकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। क्या हम वास्तव में AI पर भरोसा कर सकते हैं?मुझे इसके बारे में पता चला तो पहले मुझे हास्यास्पद लगा, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि मुझ पर लगाया यह आरोप मेरी छवि को नुकसान पहुँचाने वाला है।”

कनाडा में हिंदू मंदिर पर हमला: दीवार पर लिखा- मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद

कनाडा (Canada) में हिंदुओं के खिलाफ घृणित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहाँ एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। ओंटारियों प्रांत के विंडसर शहर के नॉर्थवे एवेन्यू के 1700 ब्लॉक में स्थित हिंदू मंदिर (Hindu Temple) पर नकाबपोश हमलावरों ने 5 अप्रैल 2023 (स्थानीय समय) को हमला किया।

फोटो साभार: @WindsorPolice

उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे भी लिखे। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लिखे। स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी है।

विंडसर पुलिस ने दोनों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है, जिनमें नकाबपोश बदमाश मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पुलिस को इस घटना का एक वीडियो मिला है, जिसमें दो संदिग्धों को रात 12 बजे के बाद इलाके में देखा गया। वीडियो में, एक संदिग्ध मंदिर की दीवार पर तोड़फोड़ करता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरा थोड़ी दूर पर खड़ा होकर उसे देख रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के समय, एक संदिग्ध ने काले रंग का स्वेटर, बाएँ पैर पर एक छोटे से सफेद लोगो के साथ काली पैंट और काले व सफेद रंग के हाई-टॉप रनिंग शूज पहने थे। दूसरे संदिग्ध ने काली पैंट, एक स्वेटशर्ट, काले जूते और सफेद मोजे पहने थे। उन बदमाशों ने ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिखे हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा, “विंडसर पुलिस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जाँच कर रही है।”

पुलिस ने दोनों संदिग्धों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए फोन नंबर और वेबसाइट का पता जारी किया है। विंडसर पुलिस ने कहा, “जिस किसी को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, वह मोरेलिटी यूनिट को 519-255-6700 पर कॉल करे या EXT 4362 करें। वे 519-258-8477 (TIPS) पर बिना नाम बताए क्राइम स्टॉपर्स या www.catchcrooks.com पर ऑनलाइन संपर्क कर सकते हैं।”

पहले भी हो चुका है कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला

गौरतलब है कि कनाडा के हिंदू मंदिरों में पहले भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक वहाँ की सरकार द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। विंडसर में भारत विरोधी यह पाँचवीं घटना है। इससे पहले फरवरी 2023 में मिसिसॉगा (Missisauga) के राम मंदिर (Ram Mandir) तोड़फोड़ के साथ हिंदू और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। जनवरी 2023 में कनाडा के ही ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर को निशाना बनाया गया। गौरी-शंकर मंदिर कनाडा के मशहूर हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वर्षों से हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ बताया गया था। इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने कई बार महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी निशाना बनाया है और भारत विरोधी नारे लिखे हैं।

जब बिहार में भून दिए गए थे BJP की बैठक से लौट रहे लोग… 30 साल बाद इचरी नरसंहार में 9 को उम्रकैद, IPF कमांडर से जदयू महासचिव बने श्रीभगवान सिंह कुशवाहा बरी

कहा जाता है कि समय पर नहीं मिला न्याय, न्याय नहीं कहलाता है। अगर अंतराल 30 साल जितना लंबा हो तो प्रभावशाली लोगों के बचने की आशंका अधिक रहती है। इस मामले में भी गवाहों और सबूतों में उलटफेर को लेकर आशंका जताई रही थी। बात हो रही है, बिहार के पूर्व मंत्री और जदयू के वर्तमान नेता श्रीभगवान सिंह कुशवाहा की।

बिहार के भोजपुर जिले के कुख्यात इचरी नरसंहार में आरोपित रहे जदयू के वर्तमान महासचिव श्रीभगवान कुशवाहा को आरा के MP/MLA कोर्ट ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को इस नरसंहार से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कुशवाहा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।

वहीं, अन्य 9 आरोपितों को उम्र कैद की सजा सुनाने के साथ ही जुर्माना लगाया गया है। जिन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, वे हैं- राजेंद्र साह, बुद्धू साह, पुलिस महतो, गौरी महतो, बहादुर राम, बलेशर राम, भरोसा राम, सत्यनारायण और दुलारचंद यादव।

इन दोषियों के ऊपर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 149 के तहत उम्रकैद, 307 के तहत 10-10 साल की सश्रम कैद तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीन-तीन साल की सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। ये सभी सजाएँ साथ चलेंगी।

वहीं, मृतक अनंत बिहारी सिंह के पुत्र रितेश सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने कोर्ट के इस फैसले पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि आरा कोर्ट के इस फैसले को वह पटना उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि अपराधियों को इतनी सजा पर्याप्त नहीं है।

क्या है इचरी कांड

देश के जिन-जिन इलाकों में राजपूत और भूमिहारों पास जमीनें थीं, उन अधिकांश इलाकों में नक्सली के रूप में आतंक फैला हुआ था, जो आजतक देखने को मिलता है। बिहार में भी ऐसा ही आतंक था। 1990 के दशक शुरू होने के पहले ही विनोद मिश्रा के नेतृत्व में इंडियन पीपुल्स फ्रंट (IPF) द्वारा दूसरे के जमीनों पर लाल झंडा गाड़कर कब्जा करने का आतंक फैलने लगा था।

लालू यादव की बिहार की राजनीति में उभार ने इस कोढ़ में खाज का काम किया। इसी दौरान का नरसंहार है, भोजपुर जिले के आयर थाने के अंतर्गत आने वाला इचरी नरसंहार कांड। विनोद मिश्रा के IPF ने इस जातीय नरसंहार को अंजाम दिया। कभी IPF के कमांडर रहे श्रीभगवान सिंह कुशावाहा ने भोजपुर जिले के जगदीशपुर विधानसभा सीट से घटना के लगभग 2.5 साल पहले यानी 1990 में IPF के टिकट पर चुनाव जीत चुके थे।

कहा तो यहाँ तक जाता है कि इससे IPF में उनका नियंत्रण और कद और बढ़ गया था। तब स्थानीय लोग स्पष्ट रूप से मानते थे कि भोजपुर और उसके आसपास जिलों में नक्सलियों द्वारा दी जाने वाली कोई भी छोटी या बड़ी घटना बिना उनकी सहमति के नहीं होती थी।

राज्य में लालू यादव का पहला शासनकाल था। अपराधियों और नक्सलियों में जोश उफान पर था। भाजपा अपना वजूद तलाश रही थी, लेकिन कॉन्ग्रेस का तिलिस्म अभी टूटा नहीं था। यही कारण था कि 1989 के आम चुनाव में भाजपा ने बक्सर के डुमराँव राजघराने के महाराज कमल सिंह को टिकट दिया था। लेकिन, ब्राह्मण बहुल बक्सर लोकसभा से वे जीत नहीं सके।

एक अलग रास्ते पर बिहार चल रहा था। 29 मार्च 1993 की शाम का वक्त था। भाजपा की मीटिंग से ट्रैक्टर पर बैठकर लौट रहे लगभग दो दर्जन से अधिक लोग जैसे ही आटापुर गाँव के नजदीक नागा बाबा के मठिया के पास पहुँचे, वैसे ही हथियारों से लैस अपराधियों ने उन पर अंधाधुन फायरिंग कर दी।

इस फायरिंग में पाँच लोगों- राम लोचन सिंह, विनय सिंह, जालिम सिंह, हृदयानंद सिंह और अनंत बिहारी सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, जनेश्वर सिंह, सत्येंद्र सिंह, उमेश सिंह, गुप्तेश्वर सिंह, मटुकधारी सिंह, रवींद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह और भीखन साह घायल हो गए। मारे गए सभी लोग राजपूत समाज से थे।

इस हत्याकांड का आरोप IPF पर लगा। कहा गया कि विनोद मिश्रा के इशारे पर श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में इस घटना को अंजाम दिया गया। इस हमले को लेकर घटना में घायल गुप्तेश्वर सिंह ने 24 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवाई थी। इनमें श्रीभगवान कुशवाहा का नाम भी शामिल था।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए थे, जबकि बचाव पक्ष सिर्फ दो गवाह पेश कर पाया था। इस तरह 30 सालों यह केस ना सिर्फ चलता रहा, बल्कि इसके आरोपित रहे श्रीभगवान सिंह कुशवाहा बाइज्जत बरी भी हो गए। यह जानते हुए भी कि श्रीभगवान पर नरसंहार का आरोप है, नीतीश कुमार ने उन्हें खूब प्रश्रय दिया।

श्रीभगवान कुशवाहा भोजपुर क्षेत्र के एकवारी गाँव में नक्सलवाद को स्थापित करने वाले कुख्यात जगदीश महतो के दामाद हैं। इसके बाद वह विधायक भी चुन लिए गए। इसके बाद उनका प्रभाव लगातार बढ़ता रहा। IPF के बाद वे साल 2000 में नीतीश कुमार की समता पार्टी से विधायक बने और साल 2005 में जदयू से। इस दौरान वे बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रीभगवान ने एक चुनावी जनसंपर्क के दौरान कहा था कि ‘राजपूत चमरुआ जूता ह, जब पहिने के होखे त करुआ तेल लगा ल आ पहिन जा।’ यानी राजपूत चमड़े के जूता है। जब इनसे काम लेना हो तो इनमें तेल लगाओ और पहन लो। यह उनके जातीय नफरत को दर्शाता है।

नीतीश सरकार में जातीय नरसंहार

वैसे जातीय नरसंहार का आरोप सिर्फ लालू यादव की सरकार पर नहीं है। नीतीश कुमार की सरकार में भी जातीय नरसंहार के हुए हैं। नीतीश कुमार की पहला में पहला जातीय नरसंहार खगड़िया का अलौली नरसंहार हुआ था। साल 2007 में इसमें धानुक जाति के एक दर्जन लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

इसके बाद इसके साल 2021 में मधुबनी जिले बेनीपट्टी में एक राजपूत परिवार के 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस नरंसहार के बाद भी नीतीश कुमार ने एक शब्द नहीं कहा था। इसी तरह फरवरी 2023 मे सारण जिले के मुबारकपुर गाँव में राजद से जुड़े विजय यादव नाम इलाके का छटे हुए गुंडे एक ही जाति के तीन लोगों को पीट-पीटकर मार डाला। तब भी नीतीश कुमार चुप रहे।

हनुमान जयन्ती नहीं, हनुमान जन्मोत्सव कहिए: क्या सच में ‘जयन्ती’ कहना गलत है, क्या ‘मृत व्यक्ति की होती है जयन्ती’ वाले तर्क का कोई आधार है

चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हर वर्ष मनाई जाने वाली ‘हनुमान जयन्ती’ का हिंदू धर्म में खासा महत्व है। प्रभु श्रीराम के परम भक्त बनकर इस दिन भगवान शिव ने ‘हनुमान जी’ के रूप में अपना ग्याहरवाँ अवतार लिया था। हिंदू इस पावन जयन्ती को धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन मंदिरों से लेकर हिंदुओं के घर में हनुमान जी की विशेष पूजा होती है और बाहर बड़ी-बड़ी शोभा यात्राएँ निकलती हैं। सोशल मीडिया आ जाने के बाद से इस दिन का जो उत्साह बढ़ा है वो देखते ही बनता है। लेकिन इस उत्साह के अलावा इस दिन जो सोशल मीडिया पर बहस चलती है वो यह कि हमें हनुमान जी की जन्मतिथि को ‘जयन्ती’ कहना चाहिए या फिर ‘जन्मोत्सव’?

हनुमान जयन्ती या जन्मोत्सव… क्या सही?

आपने भी कुछ संदेश सोशल मीडिया पर वायरल होते देखे होंगे जिनमें अनुरोध किया जाता है कि हनुमान जी के अवतरण दिवस को ‘जयन्ती’ न कहकर ‘जन्मोत्सव’ कहा जाए…। ऐसा कहने के पीछे उनका तर्क यह होता है कि जयन्ती ‘मृत लोगों के जन्मदिन’ के लिए प्रयोग में लाई जाती है जबकि हनुमान जी तो चिरंजीवी हैं जो आज भी धरती पर मौजूद हैं और कलयुग के अंत तक रहेंगे।

इन संदेशों और इनके पीछे दिए तर्क पढ़कर कोई भी सोच में पड़ जाए कि क्या वाकई आज तक हमने जयन्ती शब्द का गलत प्रयोग किया और हमें जन्मोत्सव कहना चाहिए था…!

जयन्ती शब्द का अर्थ

आज चलिए इसी विषय पर थोड़ी जानकारी जुटाटे हैं। शुरुआत ‘जयन्ती’ शब्द का अर्थ जानने से करेंगे। आज के समय में सबसे सरल तरीका होता है इंटरनेट पर सर्च करना। जब हमने इस शब्द का अर्थ गूगल पर खोजा तो सबसे ऊपर ही इसका एक अर्थ ‘विजयिनी’ पाया और दूसरा अर्थ ‘किसी पुण्य आत्मा की जन्मतिथि वाला दिन’ पाया। इसके अलावा पताका, दुर्गा जी का नाम आदि-आदि आया। बहुत खोजने पर भी हमें कहीं इस शब्द का अर्थ ‘मृत लोगों से संबंधित’ नहीं मिला।

शास्त्रों में जयन्ती शब्द का अर्थ

इसके बाद हमने थोड़ी और खोजबीन की तो हमें लोकगाथा नाम के यूट्यूब चैनल पर दिलचस्प जानकारी मिली। ये वीडियो 11 माह पहले 2022 में चैनल पर अपलोड हुई थी। वीडियो में ‘जयन्ती’ शब्द के संस्कृत में अर्थ बताए गए। इसके बाद यहाँ शास्त्रों का हवाला देकर ‘जयन्ती’ शब्द की व्याख्या की गई है। 

बताया गया कि स्कंद पुराण में लिखा है,

“जयं पुण्य च कुरुते जयन्तीमिति तां विदु:।” अर्थात जो जय और पुण्य प्रदान करे उसे ‘जयन्ती’ कहते हैं।

इसके बाद वीडियो में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उदाहरण दिया गया।

अमूमन हम लोग इस पवित्र तिथि को जन्माष्टमी के नाम से जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि शास्त्रों में इस तिथि को ‘जयन्ती’ ही कहा जाता है।

स्कंद पुराण के एक श्लोक में कहा गया है-

जयन्त्याम उपवासश्यच महापातकनाशन:।
सर्वै कार्यो महाभक्त्या पूजनीयश्य केशव:।।

इसका अर्थ होता है श्रीकृष्ण जयन्ती का व्रत महापातक का विनाश कर देता है। अत: भक्तिपूर्वक यह व्रत करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें।

विष्णु पुराण में भी कहा गया है- रोहिणी नक्षत्र संयुक्त जन्माष्टमी जयन्ती कहलाती है।

इसके अलावा भगवदगीता में भगवान ने अपने जन्म को दिव्य बताया है। उन्होंने चौथे अध्याय के 9वें श्लोक में कहा है- जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वत:। अर्थात “अर्जुन मेरा जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य हैं।”

अब सोचने वाली बात यह है कि भगवान श्रीकृष्ण की तरह क्या हनुमान जी का जन्म दिव्य नहीं है जबकि वह तो खुद शिवजी के ग्याहरवें अवतार हैं जो प्रभु राम की सहायता करने के लिए पृथ्वी पर जन्मे और आज भी धरती के संरक्षक हैं। 

न हनुमान जयन्ती में समस्या है न हनुमान जन्मोत्सव में

तो अब स्पष्ट है कि ‘जयन्ती’ का अर्थ मरणशील व्यक्ति से नहीं जुड़ा है, इसलिए हनुमान जन्मतिथि को ‘जयन्ती’ कहने में कोई समस्या नहीं हैं। जो लोग इस दिन को हनुमान जी का जन्मोत्सव कहते हैं वो भी गलत नहीं है, क्योंकि हनुमान जी के अवतरण दिवस को उत्सव के तौर पर मनाने को ही जन्मोत्सव कहा गया है और शहर-शहर में निकलती शोभा यात्राएँ, घर-घर में लहराती हनुमान जी की पताका इस बात का सबूत है कि हिंदुओं के लिए यह मात्र तारीख नहीं बल्कि उत्सव है। इसलिए जन्मोत्सव कहना भी उचित है, मगर साथ में यह तर्क देना कि जयन्ती का अर्थ केवल मृत व्यक्ति से है…वो गलत है।