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‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में भारतीय छात्र को अयोग्य घोषित कराने के पीछे राहुल गाँधी की करीबी प्रोफेसर! व्हाट्सएप्प चैट में दिखी हिन्दू घृणा

ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में हिंदूफोबिया का शिकार हुई रश्मि सामंत के बाद अब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में करण कटारिया के साथ नस्लीय भेदभाव की घटना सामने आई है। इस भेदभाव के कारण उन्हें विश्वविद्यालय में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में डिसक्वालिफाई करा दिया गया। इसके पीछे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की करीबी मुकुलिका बनर्जी का नाम सामने आ रहा है।

फर्स्टपोस्ट की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू दक्षिणपंथी संगठन आरएसएस के साथ संबंध होने के कारण मुकुलिका बनर्जी करण कटारिया के खिलाफ घृणा अभियान चला रही थीं। इस कारण उन्हें स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के अयोग्य कर दिया गया। बनर्जी के इस हस्तक्षेप को पहले ही LSE प्रशासन के संज्ञान में लाया जा चुका है।

कौन हैं मुकुलिका बनर्जी?

मुकुलिका बनर्जी लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में मानव विज्ञान की प्रोफेसर हैं। वह यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया सेंटर की निदेशक भी हैं। मुकुलिका बनर्जी लंबे समय से पश्चिमी देशों की मीडिया में ‘मुस्लिम अंडर अटैक इन इंडिया’ करती रही है।

फर्स्टपोस्ट ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि बनर्जी लंदन में अकादमिक और नीतिगत हलकों में बहुत प्रभावशाली महिला हैं। वह वाम-उदारवादी और हिंदू-विरोधी प्रोपेगेंडा का प्रचार करती हैं। उन्हें आरएसएस, हिंदुत्व और नरेंद्र मोदी-विरोधी के रूप में जाना जाता है। जनवरी 2020 में उन्होंने ‘संडे टाइम्स’ में एक लेख लिखा, जिसका शीर्षक था, ‘मोदी मुसलमानों के प्रति अपनी नफरत खुलेआम दिखाते हैं और भारत के संविधान का मजाक बनाते हैं’।

मुकुलिका राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी शामिल हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी की लंदन में मेजबानी भी की थी। जब यात्रा समाप्त हुई तो वह राहुल गाँधी के लंदन दौरे के दौरान कई कार्यक्रमों की व्यवस्था करने में मदद की थीं। उन्होंने राहुल गाँधी की हाउस ऑफ कॉमन्स में कार्यक्रम आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यहीं पर राहुल गाँधी ने ‘भारतीय लोकतंत्र खतरे में’ भाषण दिया था, इसे ‘बचाने’ के लिए विदेशी मदद माँगी थी। इससे पहले भी कई मौकों पर मुकुलिका बनर्जी ने राहुल गाँधी को LSE साउथ एशिया सेंटर को संबोधित करने के लिए अपने कार्यालय का इस्तेमाल किया, जिसकी वह निदेशक हैं।

मुकुलिका ने कैसे फैलाई प्रोपेगेंडा

मुकुलिका का एक ह्वाट्सएप चैट भी सामने आया है, जिसके माध्यम से वह आरएसएस के साथ संबंध रखने के कारण करण कटारिया को वह बदनाम करने की हद तक आगे बढ़ जाती हैं। हालाँकि, एक प्रोफेसर के रूप में उनका काम शिक्षा देना और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना होता है।

चैट का स्क्रीनशॉट (साभार: फर्स्टपोस्ट)

इतना ही नहीं, फर्स्टपोस्ट को एक कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसमें LSE के छात्रों में से एक को यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि मुकुलिका बनर्जी ने उसे यह बताने के लिए बुलाया था कि करण के आरएसएस और हिंदू संगठनों के साथ संबंध थे।

फोन कॉल पर छात्र आश्चर्य करता है कि क्या LSE करण को अयोग्य घोषित कर देगा। छात्र यह भी कहता है कि अयोग्यता ही करण को चुनावी दौड़ से बाहर करने का एकमात्र तरीका है, क्योंकि अगर वह जीत जाता है तो LSE प्रशासन उसे बाहर करने के लिए कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि छात्र संघ स्वायत्त है।

ये वही कैंपेन थे, जो करण कटारिया को बाहर करने के लिए चलाए गए थे.

करण कटारिया के खिलाफ प्रोपेगेंडा में क्या गया था-

इसमें कहा गया था- ‼️ LSE के विद्यार्थियों ध्यान दो – फ़ासीवादी संगठनों को SU से बाहर रखें ‼️

अर्जेंट अपील: हमें पता चला है कि एक व्यक्ति, जो भारत में एक अति-दक्षिणपंथी, क्वेरोफोबिक और इस्लामोफोबिक संगठन का संभावित सदस्य है, LSESU चुनाव में खड़ा है। वोटिंग आज शाम 4 बजे बंद हो जाएगी! LSESU के महासचिव पद के उम्मीदवार करण कटारिया के संबंध फासीवादी संगठन आरएसएस से हैं। इस संगठन के समानांतर यूके में नेशनल फ्रंट और यूएसए में कू क्लक्स क्लान है। https://www.theguardian.com/world/2020/feb/20/hindu-supremacists-nationalismtearing-india-apart-modi-bjp-rss-jnu-attacks

करण की किताब ‘भारत’ इंडस स्क्रॉल प्रेस द्वारा प्रकाशित है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणित सामग्री प्रकाशित करती है। यह पुस्तक RSS नेता जे. नंदकुमार (https://indusscrolls.com/rss-is-thebiggest-open-university-in-the-world-j-nandakumar) द्वारा लॉन्च की गई थी। एलएसई के सूत्र, जो बैकलैश के डर से गुमनाम रहना चाहते हैं, ने आरएसएस के भीतर उनकी सदस्यता का उल्लेख किया है।

हमारा मानना है कि इसका खुलासा न करना LSESU के जवाबदेही और पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। आरएसएस और उसकी राजनीतिक शाखा बीजेपी ने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं और श्री कटारिया का BAME और Queer छात्रों का समर्थन करने का दावा मूवमेंट को देखते हुए संदिग्ध है।

हालाँकि, जब फर्स्ट पोस्ट ने इस संबंध में मुकुलिका बनर्जी से संपर्क किया तो उन्होंने इस अभियान में अपनी किसी भी संलिप्तता से इनकार कर दिया। उन्होंने आरएसएस सदस्यों के साथ करण कटारिया की किसी भी तस्वीर को प्रसारित करने या किसी अन्य तरह के मैसेज करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।

क्या कहा था करण ने?

LSE में हुई घटना का जिक्र करण ने किया था। करण ने कहा था, “दुर्भाग्य से कुछ लोग भारतीय-हिंदू को LSESU का नेतृत्व करता देखने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने मेरे चरित्र और मुझे बदनाम करना शुरू कर दिया। साफ दिख रहा था कि वो हमारी उस संस्कृति के खिलाफ हैं जिसके जहन में रखकर हमारा पालन हुआ।”

कटारिया कहते हैं कि छात्रों का समर्थन पाने के बावजूद उन्हें LSE स्टूडेंट यूनियन के जनरल सेक्रेट्री चुनाव से डिसक्वालिफाई कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा था, “मुझ पर होमोफोबिक, इस्लामोफोबिक, क्विरफोबिक (Queerphobic) होने का इल्जाम लगा और मुझे हिंदू राष्ट्रवादी कहा गया। मेरे खिलाफ कई शिकायतें हुईं। कई झूठे आरोप लगने के बाद मेरी छवि और मेरे चरित्र पर कीचड़ उछाला गया जबकि मैंने तो हमेशा समाज में सकारात्मक बदलाव और सामाजिक सद्भाव रखने की पैरवी की है।”

रश्मि सामंत ने राहुल-मुकुलिका की साझा की तस्वीर

रश्मि सामंत ने एक ट्वीट करके मुकुलिका और राहुल गाँधी की तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा, “मुकुलिका बनर्जी, जो राहुल गाँधी की करीबी सहयोगी रही हैं, हो सकता है कि हिंदू दक्षिणपंथी, विशेष रूप से आरएसएस के साथ संबंध होने के कारण एलएसई में करण कटारिया के खिलाफ इस नफरत अभियान को चला रही हों।”

बता दें कि मार्च 2021 में रश्मि सामंत को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए बाध्य कर दिया गया था। हिंदू पहचान और उपनिवेशवाद विरोधी विचारों को लेकर उन्हें लगातार ऑनलाइन निशाना बनाया जा रहा था। यह मामला भारतीय संसद में भी उठा था।

कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामंत को निशाना बनाते हुए उन्हें नस्ली और असंवेदनशील बताया गया। इन पोस्टों के जरिए उन्हें नस्लवादी, यहूदी विरोधी, इस्लामोफोबिक, ट्रांसफ़ोबिक बताने की कोशिश की गई। यहाँ तक कि उनके हिंदू होने को लेकर भी निशाना साधा गया। सामंत को 11 फरवरी 2021 को प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया था, लेकिन ऑनलाइन आलोचना और दुर्व्यवहार का सामना करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

दरअसल रश्मि सामंत ने 2017 में जर्मनी में बर्लिन होलोकास्ट मेमोरियल की यात्रा के दौरान एक पोस्ट में कुछ तस्‍वीरें पोस्‍ट की थीं, जिसमें वह मलेशिया के बुद्ध मंदिर के बाहर खड़ी हैं। इसके कैप्‍शन में उन्‍होंने लिखा था- चिंग चांग। ऑक्सफोर्ड द्वारा प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक स्टूडेंट अखबार ‘चेरवेल’ द्वारा इस खबर को प्रकाशित करने के बाद विवाद गहरा गया था।

‘पानी माँगी तो दी गाली, फोन छीन लिया, फायरिंग में भाई की हो गई थी मौत, पोस्टमार्टम के बहाने देर रात तक घुमाती रही बिहार पुलिस’: वीडियो में हिन्दू पीड़ितों के आरोप

बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में रामनवमी के अवसर पर निकाली गई शोभा यात्रा पर पथराव किया गया था। उसके बाद हिंसा की घटनाएँ शुरू हो गईं। 2 पक्षों के बीच गोलियाँ भी चलीं। इसी दौरान 17 साल का एक नाबालिग गुलशन कुमार दंगाइयों की गोली का शिकार हो गया। गुलशन के भाई विकास कुमार ने द लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू में जानकारी दी कि भाई की मौत के बाद पोस्टमार्टम के बहाने किस तरह बिहार पुलिस ने उसे भूखे-प्यासे देर रात तक गाड़ी में बैठाकर घुमाती रही।

मृतक के भाई विकास ने लल्लनटॉप के रिपोर्टर रणवीर सिंह से बातचीत में बताया कि दोनों भाई राशन और दवाई लेने निकले थे। दोनों जब घर की तरफ लौट रहे थे तो दरगाह के पास से फायरिंग हुई। दोनों भाई बदहवास हो कर भागने लगे। इसी बीच गुलशन को गोली लग गई और वह वहीं गिर गया। गोलियों की आवाज सुनकर आस पास के लोग घटनास्थल के पास पहुँचे। वहाँ उन्होंने गुलशन को उठाया और अस्पताल ले गए।

विकास के अनुसार, बिहार पुलिस ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। गुलशन के पोस्टमार्टम के बहाने बिहार पुलिस उसे देर रात तक भूखे-प्यासे घुमाती रही। आरोप है कि बिहारशरीफ ले जाने की जगह पुलिस दूसरे स्थानों के चक्कर लगाती रही। इस बीच जब विकास ने पुलिस वालों से पूछा कि उसे कहाँ ले जाया जा रहा है तो पुलिस वालों ने गाली गलौज की। कथित तौर पर पुलिस की करतूत को विकास ने अपने कैमरे पर कैद करने की कोशिश की तो उससे फोन छीन लिया गया।

विकास को अपने घर वालों से संपर्क नहीं करने दिया गया। देर रात पुलिस की टीम उन्हें पटना लेकर पहुँची। आरोप है कि तब तक विकास को भूखा और प्यासा रखा गया। विकास ने जब पीने के लिए पानी माँगी तो उसे गाली दी गई। मृतक के भाई ने कहा कि इस बीच उन्हें पेशाब करने भी नहीं दिया गया। उन्हें गाड़ी में बंद कर के रखा गया। यह पूरी बात चीत वीडियो में 5.00 मिनट से 10.00 मिनट के बीच सुनी जा सकती है।

परिजनों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इलाके की महिलाएँ भी सरकार और पुलिस के रवैये से खुश नहीं हैं। परिवार वालों की माँग है कि उनका एक सहारा नहीं रहा। ऐसे में घर चलाना मुश्किल होगा। बेटे को रोजगार दिया जाए। दूसरी तरफ बिहारशरीफ की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके घर के पुरुष गायब हैं।

‘अवॉर्ड विनिंग फिल्म दी जो हिट भी हुई, फिर भी 14 महीने घर बैठा रहा’: विवेक ओबेरॉय ने प्रियंका चोपड़ा का किया समर्थन, बताया क्या है बॉलीवुड की डार्क साइड

अमेरिका में बस चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में बताया था कि कैसे बॉलीवुड में उनके खिलाफ अभियान चलाया गया था। अब अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने इसी बहाने अपने 20 साल पुराने प्रेस कॉन्फ्रेंस को याद किया है। उन्होंने कहा कि वो खुशकिस्मत हैं कि अब उस चीज से उबर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड ने उनकी अग्निपरीक्षा ली जिसमें वो पास हो गए, लेकिन हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता। उन्होंने बताया कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वो कई गैर-ज़रूरी चीजों से गुजरे।

उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ जम कर लॉबिंग हुई थी और उन्हें दबाने के लिए कई कहानियाँ चलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जैसा प्रियंका चोपड़ा ने बताया, कुछ उसी तरह उनके साथ भी हुआ था। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री का हॉलमार्क ही यही है। उन्होंने इसे इसका सबसे डार्क साइड करार दिया। विवेक ओबेरॉय ने कहा कि वो इससे पीड़ित रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये इतना परेशान करने वाला है कि इससे व्यक्ति थक जाता है, कमजोर हो जाता है।

उन्होंने याद किया कि ‘शूटआउट एट लाख़ोंड़वाला’ (2007) एक अवॉर्ड विनिंग फिल्म थी जो थिएटर में भी खूब चली, लेकिन इसके बावजूद वो 14 महीने घर बैठे रहे। उन्होंने बताया कि वो उस वक्त कुछ अच्छा करना चाहते थे, जो उन्हें इस बुरी अवधि से बाहर ले जाए। विवेक ओबेरॉय ने बताया कि इसके बाद उन्होंने कारोबार और समाजसेवा को अपना समय देना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि नई जगह बनाने की दिशा में प्रियंका चोपड़ा का ताज़ा बयान प्रेरक है।

विवेक ओबेरॉय ने कहा कि प्रियंका चोपड़ा बाहर निकलीं और लीक से हट कर उन्होंने कुछ अलग करने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका परिणाम ये हुआ कि प्रियंका चोपड़ा की व्यक्तिगत और प्रोफेशनल ज़िन्दगी में चमत्कार हुए। इससे पहले फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने दावा किया था कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा ने लगातार दो हिट फिल्में की थीं, इसके बाद बॉलीवुड में उन्हें किनारे लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था।

अंबानी की पार्टी में सलमान खान बैकग्राउंड डांसर, वीडियो हुआ वायरल तो बोले लोग – पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता है

मुंबई में शुक्रवार (31 मार्च 2023) को नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सोशल मीडिया पर इस प्रोग्राम की कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं, जिनमें बॉलीवुड सितारों ने प्रस्तुति दी थी। इन सब के बीच बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का भी एक वीडियो वायरल है। इस वीडियो में सलमान उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के पीछे बैकग्राउंड डांसर की भूमिका में नजर आ रहे हैं। हालाँकि, ये वीडियो अभी का नहीं है और पुराना है, जो फिर से वायरल हो रहा।

सलमान खान के इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं, “पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता।” वायरल वीडियो मुकेश अंबानी की बेटी ईशा के संगीत उत्सव का है। पाँच साल पुराने वीडियो में सलमान खान अनंत अंबानी के बैकग्राउंड डांसर बने हुए हैं। अनंत और सलमान के अलावा राधिका मर्चेंट और अन्य डांसर भी स्टेज पर मौजूद हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अनंत आगे हैं और सलमान उनके पीछे डांसिंग स्टेप्स फॉलो कर रहे हैं। सभी शाहरुख खान की फिल्म के गाने पर थिरक रहे हैं।

सोशल मीडिया पर अचानक वायरल होने के बाद नेटिजन्स भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सलमान खान के फैन्स उन्हें बैकग्राउंड में डांस करता देख हैरान हैं।

अंकुर बरिया नाम के एक यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “पावर ऑफ मनी (पैसे की ताकत) सल्लू भाईजान बैकग्राउंड डांसर।”

डॉ.निमो यादव नाम के यूजर ने लिखा, “मैं सलमान खान का फैन नहीं हूँ फिर भी मुझे यह देखकर बुरा लग रहा है। अंबानी उनके साथ नौकरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं।” इस पर ऋषभ नाम के यूजर ने लिखा, “पैसा फेक तमाशा देख… तू पैसा देगा तो तेरे पीछे खड़ा होकर भी नाचेगा।”

इंस्टाग्राम पर भी कई लोगों ने वीडियो शेयर किया है। एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए उस पर लिखा कि इतना अमीर बनो कि सलमान भाई खुद शाहरुख भाई के गाने पर आपकी शादी में डांस करने आएँ। इस पर एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “भाई पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता।”

वायरल पोस्ट का स्क्रीन शॉट

वीडियो में सलमान और अनंत के अलावा और भी डांसर्स स्टेज पर नजर आ रहे हैं। सभी ‘कोई मिल गया’ गाने पर नाच रहे हैं। पहले अनंत गिटार के साथ नाच रहे होते हैं। उस वक्त सलमान सभी लोगों के साथ पीछे दिख रहे हैं। फिर वो घुटनो पर बैठकर डांस करने लगते हैं। वीडियो के आखिर में अनंत सलमान के पास जाते हुए नजर आ रहे हैं। फिर सभी स्टेज से चले जाते हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट की फटकार के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से तलब की रिपोर्ट: रामनवमी पर हुई थी हिंसा

रामनवमी पर पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर राजनीति तो जारी है, लेकिन कोर्ट और गृह मंत्रालय सख्त रुख अपनाए हुए हैं। एक तरफ कोर्ट बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को फटकार लगा रही है तो दूसरी तरफ गृहमंत्रालय राज्य सरकार से हिंसा पर डिटेल रिपोर्ट माँग रही है।

पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में मजूमदार ने हिंसा के बारे में विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा है कि रामनवमी पर किस तरह धार्मिक आयोजनों, रामभक्तों और हिंदुओं को निशाना बनाया गया। बता दें कि कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस से बात की थी।

गृह मंत्रालय ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से राज्य में हिंसा को लेकर रिपोर्ट माँगी है। अपने पत्र में सुकांत मजूमदार ने लिखा, “कल शाम को हुगली जिले में रेलवे स्टेशनों पर भारी पथराव हुआ, जिसके कारण ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया। इस हिंसा को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी यानी टीएमसी और उसके शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के बिना जारी नहीं रखा जा सकता था।”

उन्होंने इसमें आगे लिखा, “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण हिस्सा वर्तमान DGP मनोज मालवीय के नेतृत्व में पुलिस की भूमिका को लेकर है, जो अपनी रीढ़ और निष्पक्षता पूरी तरह खो चुकी है। सामान्य लोगों, विशेष रूप से प्रभावित हिंदुओं के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के बजाय, यह अल्पसंख्यक समुदाय के वास्तविक अपराधियों और अपराधियों को लेकर आँख मूँद रही है।”

अपनी चिट्ठी में मजूमदार ने लिखा, “असली दोषियों को लेकर सीसीटीवी फुटेज और वीडियो पहले से ही प्रसारित हो रहे हैं। उन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। हालाँकि, केवल मुख्यमंत्री को खुश किया जा रहा है, जो अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिए अपराधियों और राष्ट्र-विरोधी ताकतों का खुलेआम तुष्टीकरण कर रही हैं।”

उन्होंने लिखा है कि भाजपा के विधायक और सांसदों को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से राज्य सरकार रोक रही है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के नेता इन क्षेत्रों में खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन्हें पाँच किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।

बता दें कि राज्य में हिंसा को लेकर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले में सोमवार 3 अप्रैल 2023 को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस हिंसा को लेकर राज्य सरकार को खूब फटकार लगाई। कोर्ट ने ममता की सरकार से 5 अप्रैल 2023 तक मामले की रिपोर्ट माँगी है। 

‘PM मोदी ने कभी नहीं की बदले की राजनीति’: गुलाम नबी आज़ाद की आत्मकथा में कई खुलासे, बोले – कॉन्ग्रेस में कोई जमीनी नेता नहीं, चरम पर चाटुकारिता

कॉन्ग्रेस से अलग होकर ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ बनाने वाले गुलाम नबी आजाद ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। आजाद ने कहा कि उन्होंने कई मुद्दों पर पीएम का विरोध किया लेकिन उन्होंने कभी बदले की भावना से काम नहीं किया। उन्होंने हमेशा एक राजनेता की तरह व्यवहार किया। बता दें कि बुधवार (05 अप्रैल, 2023) को आजाद की आत्मकथा (Autobiography) आने वाली है। इसमें उन्होंने अपने पुराने साथियों जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं पर कई आरोप लगाए हैं।

डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद की आत्मकथा का विमोचन बुधवार को कॉन्ग्रेस नेता कर्ण सिंह करेंगे। इसके पहले आजाद ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए पीएम मोदी की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैंने आर्टिकल 370, सीएए और हिजाब जैसे मसलों पर पीएम को जमकर घेरा परन्तु उन्होंने कभी बदले की भावना से राजनीति नहीं की। मुझे इसके लिए उन्हें श्रेय देना चाहिए। पीएम हमेशा एक उदार राजनेता की तरह पेश आए।

उन्होंने कहा कि जब इंदिरा और राजीव वापसी नहीं कर पाए, तो अब तो कॉन्ग्रेस के पास कोई जमीनी नेता नहीं है। गुलाम नबी आजाद ने अपनी आत्मकथा में 50 सालों के अपने राजनीतिक अनुभवों और कई घटनाओं का जिक्र किया है। इसमें उन्होंने अपने पुराने साथियों पर भी आरोप लगाने से गुरेज नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार आत्मकथा के पेज नंबर 251 पर आजाद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के दौरान राज्य सभा की एक घटना का जिक्र किया है।

आत्मकथा के अनुसार, जब गृहमंत्री अमित शाह में राज्यसभा में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का ऐलान किया तो गुलाम नबी आजाद ने विपक्ष के नेताओं को सदन में धरना देने की अपील की। उनकी अपील पर सभी धरना देने को तैयार हो गए, लेकिन जयराम रमेश अपनी सीट पर बैठे रहे। बता दें कि उस वक्त गुलाम नबी राज्य सभा में विपक्ष के नेता थे।

आजाद ने जी-23 (कॉन्ग्रेस के बागी नेताओं का समुह) को भाजपा का मुखौटा होने का आरोप लगाने वालों को भी खरी-खरी सुनाई है। आत्मकथा में उन्होंने लिखा है कि अगर जी-23 भाजपा का प्रवक्ता था तो कॉन्ग्रेस ने उनमें से कईं को सांसद, महासचिव और दूसरे पदाधिकारी क्यों बनाए? उन्होंने कहा, “मैं अकेला हूँ जिसने अलग होकर पार्टी बनाई है, बाकी नेता तो कॉन्ग्रेस में ही हैं।” बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने गुलाम नबी आजाद समेत 23 कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा सोनिया गाँधी को लिखे पत्र पर सवाल उठाए थे।

गुलाम नबी आजाद ने अपनी किताब में पत्र लिखे जाने के कारणों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने लिखा है कि हमने पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से काम किया है। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि कॉन्ग्रेस पार्टी में चटुकारिया चरम पर है।

‘पेट्रोल बम लेकर आई भीड़, जला डाले हमारे दुकान’: मीडिया के सामने बिहार के हिन्दू पीड़ितों ने बयाँ किया दर्द, कहा – करते रहे मिन्नतें, नहीं आए फायर ब्रिगेड वाले

जब लोग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव मना रहे थे तब देश के कई हिस्से साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहे थे। हिंसा की इस आग ने बिहार के नालंदा जिले में भी जमकर तबाई मचाई। ा खबरों में पीड़ितों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नालंदा के बिहारशरीफ में मज़हबी भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों और उनके गोडाउन में आग लगाकर उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया है।

दरअसल, बिहारशरीफ के सोगरा कॉलेज के ठीक पीछे हुई हिंसक घटनाओं और आगजनी को लेकर टीवी9 ने रिपोर्टिग की है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हिंदुओं की दुकानें जलकर खाक हो गईं हैं। टीवी9 से बात करते हुए उमेश प्रसाद गोस्वामी नामक व्यक्ति ने बताया है कि उसकी 10 दुकानें में नुकसान हुआ है। उसकी दुकानों से सामान लूटकर आग लगाई गई है। नुकसान को लेकर पूछे जाने पर उमेश ने कहा है कि उसकी करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने भी कहा है कि पहले तो दुकान में घुसकर चोरी और लूटपाट की गई। इसके बाद गेट तोड़कर आग लगा दी गई।

उमेश कुमार की दुकान के ठीक सामने स्थित किताब की होल सेल की दुकान का भी लगभग यही हाल है। इस दुकान में भी आगजनी की गई है। पीड़ितों का कहना है कि उनकी दुकानों में आग लगने के 2-3 घण्टे बाद फायर ब्रिगेड यहाँ पर पहुँची थी। फायर ब्रिगेड के पहुँचने से पहले ही बहुत कुछ खाक में मिल चुका था। लोगों ने कहा है कि वे अधिकारियों से फायर ब्रिगेड भेजने के लिए मिन्नतें करते रहे लेकिन फायर ब्रिगेड टाइम से नहीं पहुँची।

एक पीड़ित ने कहा है कि करीब 50-60 लोगों की भीड़ ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया है। भीड़ के हाथ में पेट्रोल बम था। इसी पेट्रोल बम को जलाकर दुकानों और गोडाउन में फेंका गया। एक पाइप दुकान के मालिक ने कहा है कि दुकान के एक हिस्से में रखे पाइप तो बच गए हैं। लेकिन बाकी सब कुछ खाक हो गया। आगजनी का शिकार हुए लोगों का कहना है कि बिहारशरीफ में जिस वक्त यह सब हो रहा था उस वक्त पुलिस प्रशासन मौके से नदारद था।

उन्होंने आगे कहा है कि पुलिस के मौके पर मौजूद न होने से आरोपितों को लूटपाट करने के लिए पर्याप्त समय मिला। दुकान में स्टेशनरी का सामान था और वहीं उनका ऑफिस भी था। भीड़ ने सब कुछ आग के हवाले कर दिया। पीड़ितों ने कहा है कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद वे मदद माँगने के लिए थाने गए थे, लेकिन वहाँ उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जब तक पुलिस मौके पर पहुँची तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका था।

इस वीडियो में बड़ी बात यह रही कि जब लोगों ने टीवी9 के संवाददाता से कहा कि मंदिर में भी आग लगाई गई है तो संवाददाता ने हाथ हिलाते हुए कहा, “नहीं-नहीं इसको नहीं दिखाना है।” सवाल यह उठता है कि भीड़ ने मंदिर में आग लगाई तो उसे देश के सामने लाने और दुनिया को दिखाने में दिक्कत क्या है? हम इन दावों की पुष्टि नहीं करते, लेकिन पीड़ितों ने ऐसा कहा है तो ये जाँच का विषय तो है ही।

इस पूरी घटना में नालंदा के डीएम शशांक शुभांकर ने कहा है कि जिन स्थानों पर नुकसान हुआ है वह उसका मुआयना कर रहे हैं। सीसीटीवी और डीवीआर, ड्रोन और वीडियोग्राफी की फुटेज से आरोपितों को चिन्हित किया जा रहा है। अब तक 27 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। लगातार छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपितों पर कार्रवाई की जाएगी। हिंसा के दौरान फायरिंग हुई है। लोगों को छर्रे लगे हैं। 20-20 लोग घायल हुए हैं।

पेशवाओं का ‘सरकारवाड़ा’, जहाँ अब सैय्यद शाह वली बाबा का दरगाह: हिन्दू संगठनों ने बताया अवैध अतिक्रमण, क्या कहते हैं इतिहास और दस्तावेज – OpIndia Ground Report

‘मिनी महाराष्ट्र’ के नाम से मशहूर नासिक शहर में 18वीं शताब्दी का एक ऐतिहासिक स्मारक है, जो कभी पेशवाओं के प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में काम करता था। पुराने नासिक क्षेत्र के सराफ बाजार में शहर के मध्य में स्थित स्मारक ‘सरकारवाड़ा’ इन दिनों सबका ध्यान अपनी आकर्षित कर रहा है, क्योंकि एक स्थानीय हिंदू समूह से जुड़े कुछ सदस्यों ने परिसर में ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’ होने पर आपत्ति जताई है।

ऋषिकेश दपसे (बापू), एक स्थानीय हिंदू संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका दावा है कि सरकारवाड़ा में मौजूद दरगाह, जो कभी पेशवाओं का घर था, एक ‘अवैध अतिक्रमण’ है। इसे हटा दिया जाएगा, क्योंकि यह पेशवाओं के गलत इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। बापू ने कहा, “सरकारवाड़ा या पेशवाओं के इतिहास में सैय्यद शाह वल्ली बाबा का कोई संदर्भ नहीं है। उनका पेशवाओं से कोई संबंध नहीं था।

हमारे मराठा नेताओं ने मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्होंने अपने घर के अंदर दरगाह कैसे बनने दी होगी? यह दरगाह कभी भी सरकारवाड़ा का हिस्सा नहीं थी। बाद में इसका निर्माण किया गया था। यह अवैध अतिक्रमण है, क्योंकि सरकार के पास भी दावा किए गए धार्मिक स्थल के बारे में कोई दस्तावेज नहीं है।”

न्यू सिटी सर्वे मैप दरगाह के अलग प्रवेश द्वार को दर्शाता है

ऑपइंडिया की टीम ने इस घटना की पुष्टि करने के लिए नासिक का रुख किया और सरकारवाड़ा के पुराने ब्लूप्रिंट और वर्तमान ब्लूप्रिंट को खोज निकाला। दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि दरगाह उस सरकारवाड़ा का हिस्सा नहीं थी, जिसे 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’, जहाँ कुछ हिंदू भी प्रार्थना करने आते हैं, उसको कई वर्षों के बाद बनाया गया था। हाल के वर्षों में इसे एक अलग प्रवेश द्वार दिया गया है। हालाँकि, राज्य पुरातत्व विभाग ने कहा है कि दरगाह पुरानी है और इसे पहले शहर के सर्वेक्षण मानचित्र में नहीं दिखाया गया था, लेकिन इसे अब दिखाया गया है।

सरकारवाड़ा का वर्तमान ब्लूप्रिंट (बाएँ) और पुराना ब्लूप्रिंट (दाएँ), जिसे OpIndia द्वारा एक्सेस किया गया है

दरगाह साफ है और दिन में कुछ निर्धारित घंटों के लिए इबादत के लिए खुली रहती है। दरगाह पर किसी भी मुस्लिम ट्रस्ट या संगठन का नियंत्रण नहीं है। यह सरकारवाड़ा का हिस्सा है और वर्ष 1995 से राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।

18वीं सदी के सरकारवाड़ा का इतिहास

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, सरकारवाड़ा का निर्माण रंगनाथ ओढेकर नाम के एक पेशवा सरदार द्वारा किया गया था और बाद में राघोबदादा पेशवा ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। यह भी माना जाता है कि मराठा साम्राज्य की पेशवी गोपिकाबाई पेशवे वाडा का दौरा करती थीं और वहाँ से मराठा प्रशासन को नियंत्रित करती थीं। बाद में, 1818 में पेशवाओं की हार के बाद, सरकारवाड़ा को अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले लिया, जिन्होंने वहाँ से ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवसाय को जारी रखने के लिए महल का भी इस्तेमाल किया। यही कारण है कि इसका नाम ‘सरकारवाड़ा’ पड़ा।

आज, सरकारवाड़ा एक क्षेत्रीय प्राचीन संग्रहालय और राज्य पुरातत्व के सहायक निदेशक के कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, संपत्ति के बाईं ओर आधिकारिक तौर पर ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’ का कब्जा है, जिसकी मौजूदगी एक बड़ा सवाल है।

सरकारवाड़ा संपत्ति के बाएँ हिस्से में स्थित दरगाह

हिंदू कार्यकर्ता बापू कहते हैं, ‘दरगाह अवैध है’

बापू ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि दरगाह पर नमाज अदा करने वाले ज्यादातर नमाजी हिंदू हैं और कोई नहीं जानता कि सैय्यद शाह वल्ली बाबा कौन हैं और वह पेशवाओं से कैसे जुड़े थे। उन्होंने कहा, “हम इस शहर में (सराफ बाज़ार इलाके) में कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। मेरी चौथी पीढ़ी है। यह दरगाह पुरानी मानी जाती है। लेकिन हाल के दिनों में लोगों ने बाबा के नाम पर सैंडल प्रोसेशन (धार्मिक मेले) आयोजित करना शुरू कर दिया है। बाबा या दरगाह के बारे में कोई नहीं जानता, पुरातत्व विभाग भी नहीं। दरगाह की स्थापना कब और क्यों हुई, यह भी कोई नहीं जानता। इस बीच धार्मिक मेलों और जुलूसों का आयोजन और उस स्थान पर नमाज की अनुमति देना क्या पेशवाओं के गलत इतिहास को नहीं दर्शाता है? पेशवाओं का इन सैय्यद शाह वल्ली बाबा से कोई लेना-देना नहीं था। दरअसल, मराठों ने मुस्लिमों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। लेकिन आने वाली पीढ़ियाँ ये सोच सकती हैं कि पेशवा सैय्यद शाह वल्ली बाबा के उपासक थे, जो कि सच नहीं है।”

Dargah at Sarkarwada illegal, should be removed, demands Hindu activist Bapu Dapse from OpIndia Videos on Vimeo.

‘कोई दस्तावेज नहीं’, आरटीआई के जवाब में राज्य पुरातत्व विभाग की पुष्टि

उन्होंने यह भी कहा कि उनके संगठन के कुछ सदस्यों ने राज्य पुरातत्व विभाग से दरगाह के बारे में जानकारी लेने के लिए एक आरटीआई दायर की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक कैलाश देशमुख के नाम पर दायर आरटीआई का जवाब राज्य पुरातत्व निदेशक ने दिया था, जिसमें कहा गया था कि दरगाह के के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं हैं। सरकारवाड़ा की पूरी संपत्ति को वर्ष 1995 में पुरातात्विक स्थल के रूप में घोषित किया गया था। दरगाह भी, 1995 से पहले की संपत्ति का हिस्सा होने के नाते, कानून के तहत संरक्षित है।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त की गई आरटीआई की कॉपी

बापू दपसे ने दरगाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार और पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के निदेशक तेजस गर्ग सहित कई नेताओं को पत्र भेजा हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि पेशवेकालीन सरकारवाड़ा में अतिक्रमण से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

नेताओं को बापू दापसे द्वारा भेजे गए पत्र की कॉपी

सराफ बाजार के स्थानीय दुकानदारों को दरगाह से कोई दिक्कत नहीं

टीम ऑपइंडिया ने इस बीच कई अन्य दुकानदारों से बात की, जिनकी सराफ बाजार क्षेत्र में दुकान है। इनमें से कई दुकानदार जो हिंदू हैं और अपने माथे पर तिलक लगाते हैं, अपना काम शुरू करने से पहले वे रोजाना दरगाह पर नमाज अदा करते हैं। उनकी दिनचर्या के इस हिस्से को टीम ने देखा और नोट भी किया।

एक सुनार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरगाह करीब 150 साल पुरानी मानी जाती है और बाजार क्षेत्र में किसी को भी इसके होने से कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, “इस दरगाह में ज्यादातर हिन्दू आते हैं। पहले इस दरगाह में प्रवेश सरकारवाड़ा के भीतर से होता था, लेकिन इसके जीर्णोद्धार के बाद इसे अलग प्रवेश द्वार दिया गया और तब से यह विवादों में है। कई हिंदू संगठन इसे हटाने की माँग कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पेशवाओं का सैय्यद शाह वल्ली बाबा से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने कभी दरगाह नहीं बनाई। उनका दावा है कि गलत इतिहास बताया जा रहा है और इससे उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं, लेकिन बाजार में कोई भी ऐसा महसूस नहीं करता है। वास्तव में, सराफ बाजार में अधिकांश हिंदू रोजाना दरगाह जाते हैं और आशीर्वाद माँगते हैं।”

सरकारवाड़ा में लिखा गया नोटिस

‘दरगाह को हटाया नहीं जा सकता’

टीम ऑपइंडिया ने राज्य पुरातत्व विभाग, नासिक की प्रमुख आरती अले से भी मुलाकात की, जिन्होंने पुष्टि की कि राज्य पुरातत्व विभाग को दरगाह के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “स्थल वर्ष 1995 से पुरातात्विक मानदंडों के तहत संरक्षित है और मानदंडों के अनुसार साइट को संरक्षित किया जाना है जैसा कि यह है। साइट पर कोई निष्कासन, पृथक्करण या विस्तार की अनुमति नहीं दी जा सकती है।”

उन्होंने कहा कि विभाग ने दरगाह के इतिहास की खोज करने की कोशिश की लेकिन नहीं कर सका। अले ने पुष्टि की, “दरगाह इबादत के लिए खुली है। कई लोग, ज्यादातर हिंदू यहाँ आते हैं। हाल के वर्षों में कुछ संगठनों ने दरगाह के इतिहास और पेशवाओं के साथ इसके संबंध का मुद्दा उठाया है, लेकिन हमें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास दरगाह के संबंध में कोई दस्तावेज और कोई कागजात नहीं है।”

‘No documents about Dargah at Sarkarwada Nashik,’ State Archeology Dept from OpIndia Videos on Vimeo.

हिंदू संगठनों द्वारा रखी गई माँगों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि इस दरगाह को हटा दिया जाए। लेकिन यह किसी तरह संभव नहीं है। यह सरकारवाड़ा का हिस्सा है और पूरी संपत्ति पुरातत्व विभाग के अधीन सुरक्षित है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। इसे हटाया नहीं जा सकता है।”

‘सेक्स करो फिर मिलेगा पद’: छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने सीनियर पर लगाया शोषण का आरोप, बोलीं – पुलिस ने उलटे मुझे ही प्रताड़ित किया, आत्मदाह की चेतावनी

छत्तीसगढ़ के रायपुर में कॉन्ग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता ने अपनी ही पार्टी को सवालों के घेरे में ला कर खड़ा कर दिया है। महिला का आरोप है कि उनकी ही पार्टी का एक सीनियर नेता उन पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। इसके बदले महिला को पद और प्रतिष्ठा का लालच भी दिया गया था। अपने आरोपों के समर्थन में पीड़िता ने नेता के साथ अपनी चैट होने का भी दावा किया है। आरोपित का नाम जयंत साहू है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है। वहीं अपनी सफाई में जयंत ने महिला को ब्लैकमेलर बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला रायपुर के तेलीबाँधा थानाक्षेत्र का है। आरोपित कॉन्ग्रेस नेता जयंत इसी क्षेत्र में रहते हैं और धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन पर हमबिस्तरी के दबाव का आरोप लगाने वाली महिला कार्यकर्ता बेमेतरा की रहने वाली है। पीड़िता के मुताबिक, उनका और जयंत का परिचय फेसबुक पर हुआ था। इस परिचय से दोस्ती बढ़ी और महिला रायपुर आने-जाने लगी। धीरे-धीरे दोनों के परिवार भी एक दूसरे से घुल-मिल गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने बताया है कि थोड़े समय बाद जयंत उनसे फिजिकल रिलेशन बनाने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने जयंत की शौक के तौर पर उनके द्वारा महिलाओं को पद दिलाना बताया है। दावा इस बात का भी किया गया है कि पद दिलाने के नाम पर अन्य महिलाओं पर भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता है। अपने साथ जयंत द्वारा अश्लील बातें किए जाने की भी शिकायत पीड़िता ने पुलिस में दी है।

हालाँकि, महिला का यह भी आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है। खुद को डिप्रेशन में बताते हुए पीड़िता ने कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो थाने में खुद को आग लगा कर जान दे देंगी। महिला का यह भी दावा है कि उलटे जयंती की ही झूठी शिकायत पर उन्हें पुलिस ने काफी प्रताड़ित किया है। पीड़िता द्वारा जयंत के साथ अपनी बातचीत का दावा कर के कुछ चैंट भी वायरल किए गए हैं।

आरोपों पर कॉन्ग्रेस नेता की सफाई

दैनिक भास्कर के मुताबिक अपनी सफाई में कॉन्ग्रेस नेता जयंत ने खुद पर आरोप लगाने वाली महिला को ब्लैकमेलर बताया है। उनका कहना है कि महिला ने 2 लाख रुपए उधार लिए गए पैसे न लौटाने के लिए ये तमाम आरोप लगाए हैं। जयंत ने 14 मार्च को ही अपनी तरफ से महिला के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवा दी थी। जिस चैटिंग को पीड़िता द्वारा वायरल किया जा रहा है जयंत ने उसे फर्जी बताया है। जयंत का कहना है कि महिला ने उनकी फोटो लगा कर उन्हें फँसाने के लिए ये फर्जी चैट वायरल की है।

सिक्किम में हिमस्खलन से 7 की मौत, 150 लोगों के बर्फ में दबे होनी की आशंका: अब तक 350 लोगों को किया गया रेस्क्यू

चीन की सीमा से सटे सिक्किम (Sikkim) की राजधानी गंगटोक के नाथू ला दर्रे में भारी हिमस्खलन (Avalanche) हुआ है। इस हादसे में अब 7 लोगों की मौत हुई है और 11 अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। वहीं, करीब 150 लोगों के बर्फ में दबे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीम ने बर्फ में फँसे 22 पर्यटकों समेत 350 लोगों को सुरक्षित बचाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मंगलवार (4 अप्रैल 2023) की है। यहाँ दोपहर करीब 12:20 बजे गंगटोक को नाथू ला दर्रे से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग के 15वें मील के पास हादसा हुआ। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह पहाड़ी दर्रा है। यह समुद्र तल से करीब 14,140 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।

इस भीषण हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 4 पुरुष, 2 महिला और 1 बच्चा शामिल है। घायल हुए 11 लोगों को इलाज के लिए गंगटोक के एसटीएनएम हॉस्पिटल और सेंट्रल रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने 22 पर्यटकों समेत 350 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। घटनास्थल के पास फँसे 80 वाहनों को मौके से बाहर निकाला गया है। हालाँकि, अब भी करीब 150 लोगों के बर्फ में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

इस हादसे को लेकर चेकपोस्ट के महानिरीक्षक सोनम तेनजिंग भूटिया का कहना है कि इस पूरे इलाके में जाने के लिए पास जारी किए जाते हैं। ये पास 13वें मील तक के लिए ही जारी होते हैं। हालाँकि इसके बाद भी पर्यटक 15वें मील की ओर चले गए। इसी दौरान हिमस्खलन की घटना हो गई। फिलहाल सिक्किम पुलिस, ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन, पर्यटन विभाग, वाहन चालक और स्थानीय लोगों द्वारा बचाव कार्य किया जा रहा है।

क्या है हिमस्खलन….

हिमस्खलन (एवलांच) का सीधा मतलब हिम अर्थात बर्फ के खिसकने से है। पहाड़ी इलाकों में जहाँ बहुत अधिक बर्फबारी होती है या फिर जहाँ पहाड़ों पर बर्फ जमी हीते हैं, वहाँ हिमस्खलन की घटनाएँ सामान्य हैं। हालाँकि कई बार हिमस्खलन बड़े स्तर पर होता है, जिससे लोग दुर्घटना का भी शिकार हो जाते हैं।

यूँ तो हिमस्खलन कई कारणों से होता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण तापमान में बदलाव और एक स्थान पर बहुत अधिक बर्फबारी है। दरअसल, तापमान में बढ़ोतरी होने से बर्फ पिघलती है और इससे एक साथ कई क्विंटल बर्फ और पत्थर एक साथ पहाड़ से नीचे की ओर गिरते हैं और हादसे का कारण बन जाते हैं।