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सत्येंद्र जैन को मनी लाॅन्ड्रिंग में दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं दी जमानत, कहा- सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं: मनीष सिसोदिया की याचिका पर CBI से माँगा जवाब

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन को हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि बाहर निकलने पर वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। वहीं दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब माँगा है। यह मामला एक्साइज पाॅलिसी को लागू करने में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आम बोलचाल की भाषा में इसे दिल्ली का शराब घोटाला कहते हैं।

सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने उनकी जमानत याचिका पर गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा है कि उसे निचली अदालत के फैसले में कोई कमी नजर नहीं आती। सत्येंद्र जैन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। वह जेल से बाहर जाकर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है। इस मामले में कोर्ट ने दो अन्य आरोपित वैभव जैन और अंकुश जैन को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। जाँच चल रही है। इसलिए यह अदालत इस मामले को लेकर पेश किए सबूतों पर टिप्पणी नहीं कर सकती। जाँच में ऐसे सबूत मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग में कथित तौर पर शामिल 4 कंपनियों में सत्येंद्र जैन और उनके परिवार के जुड़ाव को दिखाते हैं। सत्येंद्र जैन ने प्रथमदृष्टया दोषी दिखाई पड़ते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने जानबूझकर अपराध को छिपाया है।

बता दें कि इससे पहले निचली अदालत ने भी सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आय छिपाने की कोशिश की। निचली अदालत के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद भी वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उन्हें जेल में रखने की कोई जरूरत नहीं है।

11 महीने से जेल में बंद हैं सत्येंद्र जैन

दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य और जेल मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में ही बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन के मामले में हुई थी। ईडी ने अपनी जाँच में पाया है कोलकाता की कंपनियों के साथ उन्होंने अवैध रूप से 4.81 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन किया है। इस मामले में ईडी उनकी 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

मनीष सिसोदिया की बेल पर 20 अप्रैल को सुनवाई

शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 20 अप्रैल को सुनवाई करेगी। गुरुवार को जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने इस पर सीबीआई से जवाब माँगा। इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 31 मार्च 2023 को सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया था। उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी ने मामले दर्ज कर रखे हैं। अभी वे न्यायिक हिरासत में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका निचली अदालत में लंबित है।

‘मैं गाय का मांस खाऊँगा, जो करना है कर लो’: साजिद खान ने खाते हुए वीडियो किया अपलोड, हिंदू संगठनों को दी गालियाँ

छत्तीसगढ़ में साजिद खान नाम का एक शख्स गोमांस दिखाकर हिंदू संगठनों और भाजपा को गाली दे रहा है। इसका उसने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है। वीडियो में साजिद खान कह रहा है कि वह गाय का मांस खाएगा और अगर किसी में हिम्मत है तो उसका कोई कुछ बिगाड़ कर दिखाए।

मामला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। बुधवार (5 अप्रैल 2023) को अपलोड किए गए वीडियो में साजिद हिंदू संगठनों को गालियाँ दे रहा है और कह रहा है, “हिम्मत है तो मेरा जो करना चाहो कर लो।”

वीडियो वायरल होते ही शहर में तनाव फैल गया हो गया। इसके बाद हिंदू संगठनों ने मामले की शिकायत सिटी कोतवाली में की। बुधवार की देर रात तक बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, गौ सेवक समेत अन्य हिंदू संगठनों के लोग थाने में बैठे रहे।

इस दौरा पुलिस अधिकारियों ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट हो गई। इसके बाद हालात को देखते हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने साजिद खान को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

बता दें कि सुकमा जिले में रामनवनी के कुछ दिन पहले से ही हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि पुलिस ने लाठी चार्ज करना पड़ा था। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ अगले दिन हिंदू संगठनों ने शहर बंद करवाया था।

बाद में मामला शांत हो गया था। इसके बाद रामनवमी के दिन किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए सैकड़ों की संख्या में फोर्स को तैनात किया गया था। हालाँकि, फोर्स तैनात होने के बावजूद तनाव को महसूस किया जा सकता है।

स्थापना दिवस पर PM मोदी ने BJP को दिया ‘बजरंगबली’ वाला मंत्र, कहा- भारत अब अपनी शक्ति जान चुका है, बुराई के खिलाफ हनुमान जी की तरह कठोर बनें

06 अप्रैल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का स्थापना दिवस है। इस मौके पर गुरुवार को बजरंगबली का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BJP कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश भर में हनुमान जी की जन्म जयंती मनाई जा रही है। हनुमान जी का जीवन भारत की विकास यात्रा के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करता है। 2014 से पहले देश को अपने सामर्थ्य का एहसास नहीं था। आज भारत बजरंगबली की तरह अपनी शक्तियों का आभास कर चुका है।

भाजपा के 44 वें स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हनुमान जी संकट के समय में लक्ष्मण जी के लिए पर्वत उठा लाए थे। भाजपा भी इसी प्रेरणा के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान करने की कोशिश कर रही है। पीएम ने बुराइयों के खिलाफ लड़ाई में हनुमान जी की तरह कठोर होने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह हनुमान जी राक्षसों का सामना करते हुए कठोर हो गए थे, उसी तरह भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और परिवारवाद की बात आने पर भाजपा संकल्पबद्ध हो जाती है। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में केवल सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि भारत के लोगों ने देश के पुनर्जागरण की नई यात्रा का शंखनाद किया था। 800 साल से ज्यादा की गुलामी से बाहर निकल कर एक राष्ट्र अपना खोया हुआ गौरव पाने के लिए फिर से उठ खड़ा हुआ है।

संबोधन के दौरान पीएम ने कहा कि 1947 में अंग्रेज भले चले गए, लेकिन लोगों को गुलाम बनाए रखने की मानसिकता छोड़ गए। आजादी के बाद कुछ लोग सत्ता को अपना जन्मजात अधिकार समझते थे। बादशाही की मानसिकता वाले लोग देश के लोगों को अपना गुलाम समझते थे। धीरे-धीरे इस तरह की बुराइयाँ कमजोर पड़ रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसकी जैसी पार्टियाँ छोटा सोचती हैं और उससे भी कम हासिल कर खुशियाँ मनाती हैं, जबकि भाजपा का पॉलिटिकल कल्चर है बड़े सपने देखना और उससे भी ज्यादा हासिल करने के लिए जी-जान से जुट जाना। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम शरीर का कण-कण और समय का पल-पल खपाने का हौसला रखते हैं।”

बता दें भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने झंडा फहराया और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। अपने संबोधन के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम एक पल भी बैठने वाले नहीं हैं और पार्टी को और आगे ले जाएँगे।

मनीष कश्यप पर अब लगाया NSA: सुप्रीम कोर्ट 10 अप्रैल को करेगा सुनवाई, बिहार-तमिलनाडु में दर्ज सभी केस एक साथ करने की अपील

बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप (Manish Kashyap) पर तमिलनाडु पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है, जब मनीष ने नियमित जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज सभी मामले एक साथ करने की अपील की है।

इस याचिका के बाद मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शाम में 4 बजकर 25 मिनट पर इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि कैसे उनके मुअक्किल के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज करवाया गया है। इस पर कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख सुनिश्चित की।

मदुरै पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर हमले के फेक वीडियो सर्कुलेट करने के आरोप में मनीष कश्यप के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। मदुरै कोर्ट ने कश्यप को 14 दिनों के लिए 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

वहीं मनीष कश्यप के वकील एपी सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में मनीष कश्यप को नियमित जमानत प्रदान करने की गुहार लगाई गई है। साथ ही अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों की सुनवाई एक जगह करने का निवेदन किया गया है। एपी सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बिहार और पूर्वांचल के मजदूरों के साथ हुई ज्यादती का मुद्दा कई अन्य मीडिया संस्थानों और पत्रकारों ने भी उठाया था। लेकिन कार्रवाई सिर्फ मनीष कश्यप के विरुद्ध हो रही है।

बता दें कि 29 मार्च को तमिलनाडु पुलिस मनीष कश्यप को ट्रांजिट रिमांड पर बिहार से तमिलनाडु लेकर पहुँची थी। इसके बाद उन्हें मदुरै कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पहले उन्हें तीन दिनों की रिमांड पर भेजा। रिमांड खत्म होने के बाद एक बार फिर से मनीष कश्यप की मदुरै जिला कोर्ट में पेशी हुई। जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

उधर बिहार पुलिस ने भी यूट्यूबर के खिलाफ चौथा केस दर्ज किया है। देशद्रोह और दंगा भड़काने जैसे कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार मनीष कश्यप और उसके दो दोस्तों ने अपने वीडियो में कथित तौर पर महात्मा गाँधी की मौत पर जश्न मनाने और मुस्लिमों को मारने एवं मस्जिद जलाने की बात कही थी। इस दावे के आधार पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने मामला दर्ज किया है।

‘काॅन्ग्रेस में रहना है तो रीढ़विहीन होना होगा’: राहुल गाँधी के कारण अलग हुए गुलाम नबी आजाद, बताया- कमजोर थी मनमोहन सिंह सरकार

गुलाम नबी आजाद ने राहुल गाँधी के कारण काॅन्ग्रेस छोड़ी थी। उन्होंने यह बात बुधवार (5 अप्रैल 2023) को अपनी किताब ‘आजाद’ के विमोचन के मौके पर कही। उन्होंने यह भी कहा कि कई अन्य नेताओं ने भी काॅन्ग्रेस राहुल गाँधी के कारण ही छोड़ी है, क्योंकि वहाँ रहने के लिए रीढ़विहीन को होने की जरूरत होती है। काॅन्ग्रेस में कई वरिष्ठ पदों पर रहे गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से रिश्ते तोड़ने के बाद डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (DAP) का गठन किया है।

आजाद ने बताया कि जब 2013 में राहुल गाँधी ने सार्वजानिक तौर पर अध्यादेश फाड़ दिया था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नाराज हो गए थे। वे पीएम पद से इस्तीफा देना चाहते थे। आज यदि वह कानून होता तो राहुल गाँधी की सदस्यता भी बची रहती।

यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गाँधी के कारण ही उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ी, आजाद ने कहा, “हाँ और मैं ही नहीं कई युवा और पुराने नेताओं ने भी उन्हीं की वजह से पार्टी छोड़ी है। आज के कॉन्ग्रेस में रहने के लिए ‘रीढ़विहीन’ होने की जरूरत है।” उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस अब सोनिया गाँधी के नियंत्रण में नहीं है। उनसे पूछा गया था कि क्या सोनिया गाँधी के कहने पर वे दोबारा काॅन्ग्रेस में लौट सकते हैं। आजाद ने कहा, “यदि सोनिया गाँधी के हाथ में होता तो हम यहाँ आते ही नहीं। इन चीजों को सोनिया गाँधी तय नहीं कर सकतीं। सोनिया गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहकर भी पार्टी में उनकी वापसी नहीं करा सकते। यदि राहुल गाँधी उनसे अनुरोध करते हैं तो यह देरी से उठाया गया कदम होगा।”

आजाद ने कहा कि साल 2013 में यूपीए सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़े जाने के बाद भी राहुल गाँधी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। तात्कालिक केंद्रीय मंत्रिमंडल इतना कमजोर था कि अध्यादेश वापस ले लिया गया। राहुल राष्ट्रपति नहीं थे फिर भी उनके विरोध के कारण अध्यादेश वापस लिया गया। कैबिनेट को अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए था। हमें पता था कि इस कानून का इस्तेमाल एक दिन हमारे खिलाफ हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री की इस किताब का विमोचन पूर्व कॉन्ग्रेस नेता डॉ. कर्ण सिंह ने किया। इस दौरान केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और फारूक अब्दुल्ला, कनिमोझी समेत विपक्ष के कई नेता मौजूद थे। गुलाब नबी आजाद ने किताब में अपने 55 सालों के राजनीतिक अनुभवों को साझा किया है।

कॉन्ग्रेस की तरफ से भी गुलाम नबी आजाद पर पलटवार किया गया है। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर लिखा है कि गुलाम नबी आजाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही कॉन्ग्रेस पार्टी और सिस्टम के बड़े लाभभोगी रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ वे प्रमाण देते हैं कि वे इस योग्य नहीं थे। वे अपना असली चरित्र दिखा रहे हैं। जिसे लंबे समय तक छुपा कर रखा गया था।

‘UPA के समय उम्मीद थी तो इंतजार करता रह गया, भाजपा सरकार में उम्मीद नहीं थी फिर भी मिला पद्मश्री’: PM मोदी के कायल हुए कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार ( 5 अप्रैल 2023) को पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। पद्म श्री से नवाजे गए लोगों में एक नाम शाह रशीद अहमद कादरी का भी था। कादरी कर्नाटक के मशहूर बीदरी (एक प्रकार की शिल्प कला) कलाकार हैं। पद्म श्री पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

पुरस्कार वितरण समारोह के बाद पीएम पद्म पुरस्कार विजेताओं से मिल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने शाह रशीद अहमद को पुरस्कार जीतने पर शुभकामनाएँ दी। इस पर रशीद अहमद ने पीएम मोदी से कहा, “मैं 5 साल तक UPA सरकार से उम्मीद पाले रहा कि मुझे पद्मश्री मिलेगा लेकिन नहीं मिला। उसके बाद केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो कोई उम्मीद नहीं थी। मगर आपने पद्म श्री दे कर मेरा ख्याल गलत साबित कर दिया। मुझे चुना इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”

रशीद कादरी की बात सुनकर पीएम मोदी हँस पड़े। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीएम के साथ गृहमंत्री अमित शाह भी नजर आ रहे हैं। शाह रशीद बीदरी कला में नए पैटर्न और डिजाइन पेश करने के लिए मशहूर हैं। बता दें बीदरी कर्नाटक की लोककला है जो राज्य के बीदर शहर से शुरु हुई और धीरे-धीरे इस कला का प्रसार तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में भी हो गया।

इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव और मशहूर चिकित्सक दिलीप महालनाबिस को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। मुलायम सिंह यादव का पुरस्कार अखिलेश यादव ने प्राप्त किया।

उनके अलावा आरआरआर फिल्म के लिए नाटू नाटू गाने लिखने वाले संगीतकार एमएम कीरावनी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। नाटू नाटू गाने को ऑस्कर अवार्ड भी मिल चुका है।

जिस पर 1000 के इस्लामी धर्मांतरण का आरोप, उसे हाईकोर्ट ने दे दी जमानत: यूपी एटीएस ने दबोचा था, विदेशी फंडिंग के भी मिले थे सबूत

उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण का रैकेट चलाने और 1 हजार से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के आरोपित मौलाना कलीम सिद्दीकी को जमानत मिल गई है। बुधवार (4 अप्रैल, 2023) को लखनऊ हाईकोर्ट के 2 सदस्यीय बेंच ने मौलाना कलीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत देने का फैसला दिया। कलीम सिद्दिकी को साल 2021 में गिरफ्तार किया गया था।

कलीम सिद्दीकी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अता-उर-रहमान मसूदी और जस्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने उन्हें जमानत दे दी। मौलाना कलीम ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष हैं साथ ही जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट भी चलाते हैं। यूपी एटीसएस ने कलीम सिद्दीकी को मोहम्मद उमर गौतम, मुफ्ती काजी जहाँगीर कासमी सहित अन्य मुस्लिम धर्म प्रचारकों के साथ एंटी लव जिहाद कानून के तहत धर्मांतरण रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

साल 2021 में यूपी एटीएस ने दावा किया था कि कलीम सिद्दीकी ने मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर के साथ मिलकर जबरन धर्मांतरण के लिए लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते थे। मौलाना पर आरोप है कि उसके ट्रस्ट को विदेशों से करोड़ों का फंड मिलता था। इन रुपयों का इस्तेमाल धर्मांतरण के कामों में किया जाता था। यूपी एटीएस के मुताबिक वह धर्मांतरण के लिए कई मदरसों को पैसे देता था।

कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार करने के बाद उत्तर प्रदेश के एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि मौलाना सिद्दीकी के अवैध धर्मांतरण रैकेट के साथ लिंक हैं। उन्होंने कहा था कि सिद्दीकी के ट्रस्ट को 1.5 करोड़ रुपये बहरीन से मिलने के साथ पूरे 3 करोड़ रुपये विदेशों से मिले हैं। मौलाना कलीम सिद्दीकी पर आरोप है कि वह शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की आड़ में देश भर में धर्मांतरण के अवैध काम में लिप्त था इसके लिए उसे विदेशों से पैसे मिलते थे।

उमेश पाल हत्याकांड में ‘सलमान खान’ और ‘साईं बाबा’ की एंट्री: अतीक की बीवी ने गुर्गों को दिए थे आईफोन-सिम, जेल में ही बना लिया था खाका

प्रयागराज के उमेश पाल हत्या कांड में हर रोज चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। बीएसपी विधायकर राजू पाल मर्डर मामले के गवाह उमेश पाल की हत्या की साजिश बहुत दिन पहले से ही रची जा रही थी। रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए कई बैठकें आयोजित की गई थीं। हत्याकांड की साजिश में गुजरात के साबरमती जेल से अतीक और यूपी के बरेली जेल से अतीक का भाई अशरफ भी जुड़ता था। साजिश में शामिल लोगों को तीन-तीन सिम कार्ड और आईफोन मिला हुआ था। सभी लोग एक दूसरे को कोड वर्ड से बुलाते थे।

रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद के पुश्तैनी घर से आईफोन, रजिस्टर, 2 आधार कार्ड बरामद किए। अतीक के मुनीम राकेश लाला की निशनदेही और गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला है कि उमेश पाल हत्याकांड में शामिल सभी साजिशकर्ता एक दूसरे को कोड नाम से पुकारते थे। कोड वर्ड वाला आइडिया अतीक अहमद के बेटे का था। अतीक का वह बेटा वारदात में सीधे शामिल नहीं था।

अतीक की बीवी शाइ्स्ता ने साजिश में शामिल लोगों को आईफोन और सिमकार्ड उपलब्ध कराए थे। साजिश रचने के दौरान सभी एक दूसरे को कोड नाम से पुकारते थे। जानकारी के अनुसार साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद को बड़े नाम दिया गया था। बरेली जेल में बंद अतीक के भाई अशरफ को छोटे कोड नेम दिया गया था। शूटर गुलाम को उल्लू, गुड्डू मुस्लिम को मुर्गी, बिहार के ससाराम के शूटर अरमान को बिहारी और शूटर विजय चौधरी को उस्मान कोड वर्ड दिया गया था।

अतीक का बेटा असद का कोड नाम राधे रखा गया था। असद अभिनेता सलमान खान का फैन है। वह सलमान के ‘तेरे नाम’ फिल्म के किरदार ‘राधे’से प्रभावित था। वैसे ही बाल भी रखा करता था। इसलिए उसे यह नाम दिया गया था। शाइस्ता को पहले गॉडमदर नाम दिया गया लेकिन बाद में इसे बदलकर साईं बाबा कर दिया गया। इसी तरह अतीक के घर पर हिसाब-किताब का काम देखने वाले आसाद कालिया को लंगड़ा और अतीक के मुँशी को मुनीम कोर्ड वर्ड दिया गया था।

कई और नाम डिकोड किए जा रहे हैं। उधर पुलिस इस हत्याकांड मामले में अतीक अहमद के परिवार के तीन अन्य सदस्यों पर भी एफआईआर करने की तैयारी में है। पता चला है कि अतीक के बहनोई डॉ. अखलाक और बहन आयशा ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को अपने मेरठ स्थित घर में पनाह दी थी। पुलिस के हाथ कुछ सीसीटीवी तस्वीरें लगी हैं। जिसके आधार पर ये आरोप लगाए जा रहे हैं।

बता दें इस केस में डॉ. अखलाक और नौकर शाहरुख गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इनके खिलाफ मेरठ में एफआईआर दर्ज की गई है। अखलाक और शाहरुख के बयानों के आधार पर आयशा के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं।

जहाँ दंगों में मरे 2 हिन्दू, वहाँ हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा को पुलिस की अनुमति नहीं: मंदिर समिति बोली – फर्जी चुनाव और नकली समिति से अटका मामला

हनुमान जन्मोत्सव गुरुवार (6 अप्रैल, 2023) को है और इसके लिए पूरे देश भर में तैयारियाँ जोरों पर हैं। हालाँकि, इस बार जिस तरह से रामनवमी पर श्रद्धालुओं के खिलाफ हिंसा हुई, उसके बाद माहौल थोड़ा गर्म है। हिन्दुओं में एक प्रकार का डर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण हनुमान जन्मोत्सव संपन्न कराने को कहा है। उधर कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की सरकार को अर्धसैनिक बलों की मदद लेने की सलाह दी है।

इधर दिल्ली के ब्रह्मपुरी से नया मामला सामने आया है। ब्रह्मपुरी राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित वो इलाका है, जो फरवरी 2020 में हिन्दू विरोधी दंगों से पीड़ित रहा था। भीड़ ने विनोद कुमार को सिर्फ इसीलिए मार डाला, क्योंकि उनकी बाइक पर भगवान का स्टीकर था। वहीं सब्जी बेचने वाले नरेश सैनी की भी हत्या कर दी गई थी। आज दोनों के परिवार बेहाल हैं और खराब आर्थिक स्थिति से गुजर रहे। अब बताते हैं कि ताज़ा मामला क्या है।

असल में सोशल मीडिया पर एक पत्र सामने आया है, जो ‘हनुमान मंदिर समिति’ की तरफ से नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी को लिखा गया है। उक्त मंदिर गली संख्या 6 में स्थित है। इस पत्र में प्रत्येक वर्ष की भाँति इस साल भी हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा के आयोजन हेतु मंजूरी माँगी गई है। चूँकि इलाका मुस्लिम बहुल और संवेदनशील है, इसीलिए पुलिस की सुरक्षा के बिना ये संभव नहीं है। उक्त शोभा यात्रा शाहदरा स्थित मंदिर रेलवे रोड से रोहताश नगर, गोरख पार्क, मौजपुर, घोंडा चौक और गली संख्या 13 स्थित मौनी बाबा मंदिर होते हुए हनुमान मंदिर तक प्रस्तावित है।

मंदिर समिति द्वारा पुलिस को लिखा गया पत्र

मंदिर समिति ने न सिर्फ शोभा यात्रा को निकालने के लिए अनुमति माँगी है, बल्कि पुलिस से सहयोग का भी निवेदन किया है। इसके तहत कलश यात्रा भी निकाली जानी है। बताया गया है कि पिछले 32 वर्षों से ये यात्रा हर साल यूँ ही निकाली जाती रही है और इस बार 45 दिनों से प्रयास किए जाने के बावजूद अनुमति नहीं मिल रही। आयोजनों ने न्यू उस्मानपुर थाना और डीसीपी के पास भी दरख्वास्त लगाई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए उक्त बालाजी मंदिर की समिति के सेक्रेटरी अमित गुप्ता से बातचीत की। वो पिछले 8 वर्षों से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल शोभा यात्रा के लिए दिल्ली पुलिस की ‘CNP (क्राइम एन्ड ट्रैफिक)’ यूनिट से अनुमति मिल जाती थी। क्या पिछले सालों में भी इस तरह की दिक्कत सामने आई थी? इस पर अमित गुप्ता ने कहा कि पहले ऐसी दिक्कत नहीं आई।

उन्होंने विवाद का कारण बताते हुए कहा कि कुछ लोगों ने फर्जी चुनाव करा कर नकली समिति बना ली है और जनवरी से ही इस मामले में कोर्ट में केस चल रहा है। अब दोनों ही पक्ष पुलिस के पास अनुमति के लिए पहुँच रहे हैं। अमित गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पुलिस को सबूत दिखाए कि नियमित रूप से ये आयोजन होता आया है। उन्होंने बताया कि पुलिस कह रही है कि निवेदन करते हुए 2 पत्र आने की वजह से वो किसी एक को अनुमति नहीं दे सकते।

बालाजी मंदिर समिति के सेक्रेटरी अमित गुप्ता का सवाल है कि बिना अनुमति के शोभा यात्रा निकालने पर अगर झगड़ा-झंझट होगा तो इसकी जिम्मेदार कौन लेगा, क्यों ये मुस्लिमों के प्रभाव वाला इलाका है? हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने मौखिक रूप से कहा है कि आपलोग कार्यक्रम का आयोजन कीजिए, हम आपके साथ हैं। लेकिन, पिछले साल जहाँगीरपुरी में हुई घटना के बाद से आयोजन समिति के लोग सहमे हुए हैं।

बता दें कि पिछले साल जहाँगीरपुरी क्षेत्र में हनुमान जमोत्सव के दौरान जम कर पत्थरबाजी हुई थी और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। एक मस्जिद के पास विवाद ने हिंसा का रूप धारण कर लिया था। अमित गुप्ता ने दावा किया कि पूरे NCR में हनुमान जन्मोत्सव का सबसे बड़ा कार्यक्रम वही लोग आयोजित करते आए हैं। फर्जी चुनाव कर नकली समिति बनाने वाले कौन लोग हैं? इसके जवाब में उन्होंने मंदिर के महंत का नाम लिया।

अमित गुप्ता की मानें तो इन सबके पीछे मुख्य रूप से महंत सतीश श्रीवास्तव का ही हाथ है। उन्होंने बताया कि पिछले साल महंत ने पैसों की गड़बड़ी की थी, जिसके बाद विवाद हो गया। दबाव बनाए जाने के बाद महंत ने पैसे वापस कर दिए। अमित गुप्ता ने बताया कि महंत ने इस दौरान लिखित में भी दिया था कि वो मंदिर के पैसे वापस देकर जा रहे हैं। वहीं पिछले 5-6 महीनों में दूसरी समिति गठित कर लिए जाने की बात कही जा रही है।

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस व अन्य विभागों से भी मिली थी अनुमति

उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस ने मौखिक रूप से उन्हें अधिकृत भी कर दिया कि वो कार्यक्रम का आयोजन करें, लेकिन लिखित अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के यात्रा निकालना संभव नहीं है। वो बताते हैं कि पिछले साल यात्रा के दौरान मुस्लिमों से झगड़े की पूरी आशंका बन गई थी, लेकिन किसी तरह पुलिस की मदद से मामला संभाल लिया गया। जबकि इस साल बिलकुल ही पसोपेश की स्थिति है।

जब हमने न्यू उस्मानपुरी पुलिस थाने में उनका पक्ष जानने के लिए फोन कॉल किया तो वहाँ से बताया गया कि वो लोग बाइट देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। जब हमने नॉर्थ ईस्ट दिल्ली की एडिशनल डीसीपी-I को कॉल किया तो उधर से ताज़ा अपडेट लेने की सलाह दी गई। हालाँकि, मंदिर समिति वालों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष उन्हें बुला कर अनुमति दी जाती थी और उनसे रिसीविंग ली जाती थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक उन्हें ऐसी कोई सूचना नहीं थी।

महिलाओं को गंदे-गंदे इशारे, मोहल्ले में ही मल-मूत्र… हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ ने थाने में की तोड़फोड़, 800 पर FIR: सोशल मीडिया पर गिरोह बता रहा ‘पीड़ित’

उत्तराखंड के हल्द्वानी में सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को सैकड़ों की संख्या में जमा एक भीड़ ने कोतवाली सिटी के आगे हंगामा किया। इस भीड़ का आरोप था कि हिन्दू संगठनों ने किसी मस्जिद के इमाम से बदतमीजी की है। भीड़ पुलिस स्टेशन के आगे नारेबाजी कर रही थी। सोशल मीडिया के वामपंथी और इस्लामी गिरोह ने इस पूरे हंगामे को हिन्दू विरोधी एंगल देते हुए शेयर किया। पिछले कुछ समय से कई भ्रामक ट्वीट कर चुके मीर फैसल ने इस वीडियो को 4 अप्रैल को शेयर किया।

इस वीडियो में थाने के आगे मुस्लिम भीड़ हंगामा करती दिख रही, लेकिन मीर फैसल ने अपने कैप्शन में खुल कर हिंदूवादियों को इमाम पर हमले का आरोपित बताया है। मीर फैसल के अलावा मिल्लत टाइम्स, सदफ अमीन, जुरनो मिरर और अहमद कबीर आदि ने हिंदूवादियों को टारगेट करते हुए कमेंट किए। इन कमेंट्स में किसी वकील के यहाँ 20 साल से नमाज़ होने और उसे रोकने का भी दावा किया गया।

हल्द्वानी प्रकरण पर हुए ट्वीट्स

नजूल की भूमि पर अनधिकृत नमाज़

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस स्थान पर नमाज़ का विरोध हुआ वो जगह नजूल की भूमि (शासकीय जमीन या जिसका मालिकाना हक़ किसी के पास न हो) है। आरोप है कि वहाँ अनधिकृत रूप से नमाज़ पढ़ी जा रही थी, जिसका महज विरोध करने पर मुस्लिम पक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया। यहाँ तक कि जिस भवन में नमाज़ होती थी, वो भी बिना नक्शा पास किए बना हुआ बताया गया। दावा है कि विवाद के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने भवन को सील कर दिया है।

वहीं जिस भीड़ को मीर फैसल व उनके जैसे कुछ अन्य प्रदर्शनकारी बता रहे, उस पर थाने में रखे गमले तोड़ने, सड़क मार्ग जाम करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप है। पुलिस ने कुल 800 उपद्रवियों के खिलाफ IPC की धारा 147, 332, 353, 341 और 427 के तहत FIR दर्ज की है। CCTV फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की तलाश की जा रही है। आरोप है कि उपद्रवी भीड़ आम लोगों को भी नुकसान पहुँचाना चाहती थी लेकिन पुलिस की सक्रियता से ये नहीं हो पाया।

‘बजरंग दल’ पर इमाम की पिटाई के आरोप निराधार

3 अप्रैल को घटना के दौरान हिन्दू संगठन के समूह का नेतृत्व करने वाले बजरंग दल जिला संयोजक जोगिंदर सिंह राणा उर्फ़ जोगी से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया कि बजरंग दल पर किसी इमाम की पिटाई के आरोप झूठे हैं। जोगिंदर राणा के मुताबिक, इस पूरे मामले की जड़ में नैनीताल हाईकोर्ट का एक वकील जफर सिद्दीकी है जो 90% से अधिक आबादी वाले हिन्दू बहुल सरना कोटि मोहल्ले में बाहरी लोगों को बुला कर नमाज़ पढ़ाता था।

राणा का आरोप है कि बाहरी नमाज़ियों के रास्ते में कई मस्जिदें पड़ती हैं, लेकिन हिन्दुओं के मोहल्ले में नमाज़ पढ़ने की जिद और वहाँ महिलाओं से अभद्रता के लिए वो वहाँ गए थे। उन्होंने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में किसी से मारपीट के आरोप निराधार हैं।

जिसे मौलाना बताया जा रहा वो है संदिग्ध बांग्लादेशी

बजरंग दल पदाधिकारी जोगिंदर सिंह के अनुसार जिसे मौलाना बता कर प्रचारित किया जा रहा वो असल में संदिग्ध तौर पर बांग्लादेशी है। जोगिंदर ने कहा, “मौलाना बताए जा रहे संदिग्ध की उम्र लगभग 23-24 साल है जिसे खुद मुस्लिम लोग ही बंगाली कह कर पुकारते हैं।” हालाँकि, पुलिस को दी गई शिकायत में यह नाम मौलाना शाहिद हुसैन बताया गया है। पुलिस द्वारा पूछे जाने पर कथित लगभग 25 साल के इमाम ने 13 साल (2010) से उसी जगह पर नमाज पढ़ाने का हैरानी भरा दावा किया।

FIR के बदले FIR का खेल

मोहल्ले में जमा नमाजियों के खिलाफ बजरंग दल ने 3 अप्रैल को ही FIR दर्ज करवा दी थी। यह केस धार्मिक भावनाओ को भड़काने की धारा IPC 153 A और 295 A के तहत दर्ज हुआ है। जोगिन्दर राणा के मुताबिक रात में थाने के आगे मुस्लिमों द्वारा किया गया हंगामा FIR के बदले FIR की साजिश का हिस्सा था जिसमें वो सफल भी रहे। जोगिंदर ने कहा, “मुस्लिमों की तरफ से दी गई तहरीर में मुकेश भट्ट नाम के व्यक्ति पर FIR दर्ज हो गई है जिसने सबसे पहले और प्रमुखता से नमाज़ का विरोध किया था।”

जिस मोहल्ले में नमाज़ को ले कर पूरा विवाद खड़ा हुआ है वहाँ की रहने वाली इस महिला ने जमा होने वाले नमाज़ियों पर अपने परिवार को डराने धमकाने का आरोप लगाया है। 3 अप्रैल को ही पुलिस में दी गई शिकायत में पीड़िता का आरोप है कि नवरात्रि में उनके घर में हो रहे भजन को भी नमाज के नाम पर जमा हुए लोगो ने बंद करवा दिया था। शिकायत में यह भी आरोप है कि जिस बेसमेंट को मस्जिद बताया जा रहा है वहाँ कई संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता है जो न सिर्फ गंदे-गंदे इशारे करते है बल्कि मोहल्ले में ही मल-मूत्र करते हैं।

पीड़िता को अपनी 9 साल की बच्ची की भी सुरक्षा की फ़िक्र है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पहले भी हुई थी शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई

‘बजरंग दल’ के जोगिंदर राणा ने ऑपइंडिया को एक पत्र भेजा है। इस पत्र पर कई लोगों के दस्तखत हैं। जोगिन्दर का कहना है कि यह साल भर से अधिक पुराना शिकायती पत्र है। सिटी मजिस्ट्रेट को सम्बोधित इस पत्र में हिन्द बहुल कॉलोनी में महज 2 घर मुस्लिमों के बताते हुए अवैध तौर पर एक मस्जिद के निर्माण का आरोप लगाया गया है। पत्र में लोगों ने प्रशासन से मस्जिद निर्माण रोकने की अपील की है। जोगिंदर जोगी का आरोप है कि तब प्रशासन ने इस शिकायत पर ध्यान नहीं दिया था। यह शिकायत सरना कोटि कालोनी के वकील जफर सिद्दीकी के ही खिलाफ ही थी।