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बिहार EOW ने मनीष कश्यप के खिलाफ दर्ज किया चौथा मामला, तमिलनाडु की कोर्ट ने बढ़ा दी न्यायिक हिरासत की अवधि: पुलिस फिर माँग रही रिमांड

तमिलनाडु में बिहारियों के साथ हिंसा की खबरों को फर्जी बताकर गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर मनीष कश्यप के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यूट्यूबर के खिलाफ बिहार पुलिस का यह चौथा केस है। यह केस मस्जिद में आग लगाने तथा मुस्लिमों को मारने से संबंधित है। उधर, तमिलनाडु की मदुरै कोर्ट ने 3 अप्रैल 2023 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

देशद्रोह और दंगा भड़काने जैसे कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार मनीष कश्यप और उसके दो दोस्तों ने अपने वीडियो में महात्मा गाँधी की मौत पर जश्न मनाने और मुस्लिमों को मारने एवं मस्जिद जलाने की बात कही थी। इस दावे के आधार पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने मामला दर्ज किया है।

दरअसल, दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता निशांत वर्मा ने पटना पुलिस को मनीष कश्यप और उसके दोस्तों के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत में वर्मा ने बेतिया के उस वीडियो का जिक्र किया था, जिसमें बेतिया में महात्मा गाँधी को लेकर इन लोगों ने वीडियो वायरल किया था।

इस वीडियो में तीनों कह रहे थे कि ‘महात्मा गाँधी की मौत पर हम लोग जश्न मनाते हैं। अब वो डर खत्म हो गया है’। इस दौरान उसका दूसरा साथी कहता है, “अब कहाँ जाओगे।” तब फिर मनीष कश्यप कहता है, “तुम एक को मारोगे तो हम 10 को मारेंगे।” इसके बाद तीसरा साथी कहता है, “तुम न्यूटन का थर्ड लॉ याद रखना। तुम जितना करोगे न उतना हिन्दू भाई जगेंगे।”

इसके बाद उस वीडियो में यह कहा गया था कि ‘हमने एक मौलवी को मारा, एक मुस्लिम को मारा, हमने मस्जिदों में आग लगाया’। इस पर पहले ही EOU ने मामला दर्ज कर लिया था। इस पर अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया था।

इसको लेकर निशांत वर्मा ने आर्थिक अपराध इकाई को लिखित आवेदन देकर मामला दर्ज करने के लिए गुहार लगाया था। वर्मा के आग्रह के 12 दिन बाद आखिरकार आर्थिक अपराध इकाई ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को इस पर एफआईआर दर्ज कर दिया है।

वर्मा के शिकायत के बाद EOU थाने में IPC की धारा 153A(2) 295, 506, 120 (B) आईटी एक्ट 67 लगाया गया है। जानकारों के अनुसार, इस मामले में जितनी भी धाराएँ लगाई गई हैं, उनमें देशद्रोह, दंगा भड़काने जैसे बेहद गंभीर आरोप हैं। इसमें 7 साल से लेकर 10 साल तक सजा हो सकती है।

उधर, तमिलनाडु पुलिस की गिरफ्त में रखे गए मनीष के लिए तमिलनाडु पुलिस ने कोर्ट से और सात दिनों की रिमांड की माँग की थी। इस माँग पर कोर्ट बुधवार 5 अप्रैल को फैसला सुनाएगी। फिलहाल मनीष कश्यप को न्यायिक हिरासत में मदुरै सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। अगर तमिलनाडु पुलिस को फिर रिमांड मिल जाती है तो उसे फिलहाल बिहार नहीं लाया जा सकेगा। 

वही महाराष्ट्र, वही पालघर, लेकिन सरकार अलग… पुलिस ने 2 साधुओं को मॉब लिंचिंग से बचाया, इस बार भी ‘बच्चा चोर’ के अफवाह के बाद जुट गई थी भीड़

महाराष्ट्र के पालघर में एक बार फिर से साधुओं की मॉब लिंचिंग होते-होते रह गई। वनगाँव इलाके में भिक्षा माँग रहे साधुओं को भीड़ बच्चा चोर समझकर घेरने लगी थी। इस बात की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने भीड़ को समझा बुझा कर हिंसा की संभावित घटना को रोक लिया और साधुओं की जान बचा ली।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, वनगाँव के चंद्रनगर गाँव में 2 साधु भिक्षा माँग रहे थे। इस बीच गाँव में साधुओं के वेश में बच्चा चोरों के आने की अफवाह फैल गई। ग्रामीणों ने दोनों साधुओं को घेर लिया। इस बीच पुलिस को इस बात की जानकारी मिली। ग्रामीण साधुओं के साथ मारपीट कर पाते, इसके पहले ही पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने गाँव वालों को समझाया और साधुओं को भीड़ से निकाल कर पुलिस स्टेशन ले गई।

बता दें कि तीन साल पहले अप्रैल 2020 में पालघर के गढ़चिनचले गाँव में मुंबई से गुजरात जा रहे बुजुर्ग साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ ने घेर कर हत्या कर दी थी। 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने बच्चा चोर होने का शक में साधुओं की बेरहमी से पिटाई की थी। जबकि साधु स्थानीय लोगों से सही रास्ता पूछने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ से बचने के लिए बुजुर्ग नागा साधु पुलिस स्टेशन में भी छिपने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने भी उस वक्त साधुओं को भीड़ के हवाले कर दिया था। उस वक्त महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) एनसीपी और कॉन्ग्रेस की महाविकास अघाड़ी सरकार थी। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे।

पालघर के एसपी बाला साहेब पाटिल ने कहा है कि पालघर में 2020 में हुई घटना से शिक्षा लेते हुए हमने जन सम्मान पहल शुरू की है। इसके तहत पुलिसकर्मी गाँवों का दौरा कर लोगों से बातचीत करते हैं। उनकी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करते हैं। ऐसा होने से ग्रामीण भी खुलकर अपनी बात पुलिस के सामने रखते हैं। इस घटना में भी यही हुआ। जैसे ही भीड़ ने साधुओं को घेरना शुरू किया। स्थानीय लोगों में से ही किसी ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इससे एक अप्रिय घटना होते-होते रह गई।

‘गोरी लड़कियों का पीछा करते हैं, ड्रग्स देकर उनका बलात्कार करते हैं पाकिस्तानी’: UK की गृह मंत्री का बड़ा बयान, कहा – कम उम्र की लड़कियाँ निशाना

ब्रिटेन में युवा लड़कियों का शोषण करने वाले गैंंग की कई रिपोर्ट सामने आने के बाद होम सेक्रेटरी सुएला ब्रेवरमैन ने बाल यौन शोषण को समाप्त करने से जुड़े नए कानून का खुलासा किया। इसके तहत बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। मंत्री ने रविवार (2 अप्रैल, 2023) को ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों में ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुष शामिल होते हैं। ये ब्रिटेन की लड़कियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ब्रिटिश पाकिस्तानियों का गैंग है, जो ड्रग्स देता है और ब्रिटेन की लड़कियों का रेप करता है।

ब्रिटिश चैनल ‘स्काई न्यूज’ से बात करते हुए सुएला ब्रेवरमैन ने कहा, “कुछ ब्रिटिश-पाकिस्तानी यूके में बाल शोषण गिरोह चला रहे हैं। हम जो देख रहे हैं, अब वो एक प्रैक्टिस बन चुका है, जिसमें कमजोर, गोरी लड़कियों का ब्रिटिश पाकिस्तानियों के गिरोहों द्वारा पीछा किया जाता है और उनका बलात्कार किया जाता है। बाल शोषण गिरोह या नेटवर्क के लिए काम करने वाले पुरुष बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं।”

ब्रिटेन की गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि वह एक कानून लेकर आई हैं, जिसमें कहा गया कि बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। क्योंकि ऐसे अपराधों में शामिल पाकिस्तानी पुरुष गिरोहों को लेकर चुप्पी की संस्कृति बन गई है। वो आधुनिक समय में ब्रिटेन में देखे गए सबसे बड़े अन्यायों में से एक को ठीक करने की कसम खाती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “हमने संस्थानों और देश की एजेंसियों को देखा है, चाहे वह सामाजिक कार्यकर्ता हों, शिक्षक हों, पुलिस हो, सब डर के कारण, नस्लवादी कहलाने के डर से, इन अपराधों पर आँखें मूँद लेते हैं। इसकी वजह से हजारों बच्चों का बचपन तबाह हो गया और अपराध करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इस कदम का स्वागत किया है और उन्हें उम्मीद है कि नया कानून लोगों को कानूनी रूप से बाल शोषण को रिपोर्ट करने के लिए मजबूर करेगा।”

बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने ग्रूमिंग गैंग के आतंक को खत्म करने के लिए टास्क फोर्स का ऐलान किया है। सुनक ने कहा है कि वह ग्रूमिंग गैंग का आतंक खत्म करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बच्चों और लड़कियों के साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। दरअसल, मुस्लिमों का यह गिरोह गैर मुस्लिम लड़कियों को टारगेट करता है। डॉ. एला हिल नाम की एक पीड़िता ने 2020 में खुलासा किया था कि यह गैंग 40 साल में कम से कम 5 लाख लड़कियों से रेप कर चुका है।

केरल में आग लगा कर 3 की जान लेने वाले की तलाश, बुलंदशहर वाले शाहरुख़ सैफी को क्लीन-चिट: नोएडा-गाजियाबाद में NIA ने ली तलाशी

अपडेट: ताज़ा जानकारी ये है कि बुलंदशहर से जिस शाहरुख़ सैफी को उठाया गया था, उसे पूछताछ के बाद क्लीन-चिट दे दी गई है। वहीं गाजियाबाद से उठाए गए शाहरुख़ सैफी से पूछताछ जारी है।

केरल में चलती ट्रेन में आग लगाकर फरार होने वाले संदिग्ध शाहरुख सैफी को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया गया है। यूपी एटीएस ने उसे बुलंदशहर से धर-दबोचा है। पुलिस पूछताछ कर घटना में उसकी संलिप्तता की जाँच कर रही है।

दरअसल, पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शियों की निशानदेही पर आरोपित का स्केच जारी किया था। स्केच से उसकी पहचान शाहरुख सैफ़ के रूप में हुई थी। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश एटीएस ने बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद से संदिग्ध को हिरासत में लिया है। कहा जा रहा है कि यूपी एटीएस ने सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को जाल बिछाते हुए उसे काम के लिए बुलाया था। इसके बाद हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए गए शाहरुख सैफ ने 9वीं तक की पढ़ाई की है और पेशे से कारपेंटर है। वह दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत अन्य जगहों पर काम करता था। शाहरुख के 4 भाई हैं 2 भाई गाजियाबाद और 2 भाई बुलंदशहर में रहते हैं। शाहरुख के परिजनों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि शाहरुख केरल क्यों और कैसे गया था।

इलाज के लिए हॉस्पिटल गया था शाहरुख

रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने जिस शाहरुख का स्केच जारी किया है वह इलाज कराने के लिए कुन्नूर के जिला चिकित्सालय गया था। यहाँ से भी पुलिस उसकी सारी आवश्यक जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई कर रही है।

नोएडा और गाजियाबाद में भी एनआईए कर रही है तलाशी

ट्रेन में आग लगाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए एनआईए भी इस मामले में पुलिस की सहायता कर रही है। दरअसल इस मामले में अब तक आतंकी एंगल होने की बात सामने नहीं आई है। लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया गया है। ऐसे में एनआईए की एक टीम संदिग्धों की तलाशी नोएडा और गाजियाबाद में तलाशी कर रही है। हालाँकि अब तक इन दोनों ही जगह से किसी को हिरासत में लेने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

लोन वुल्फ अटैक का हो सकता है मामला

‘न्यूज 18’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है, “आतंकी एंगल से देखने पर यह मामला कट्टरपंथी हमलावर द्वारा किया गया हमला लगता है। हालाँकि, इस तरह के आतंकी हमले सामने नहीं हैं। ऐसे में यह मामला ‘लोन वुल्फ’ अटैक का भी हो सकता है।” बता दें कि लोन वुल्फ अटैक को आतंक की दुनिया में दहशत फैलाने का सबसे नया तरीका माना जाता है। आमतौर पर ऐसे हमलावर या तो आत्मघाती होते हैं या फिर पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं।

इस तरह के हमलों में एक आतंकी ही पूरे ऑपरेशन को अंजाम देता है। इसमें किसी लीडर या सरगना की जरूरत नहीं होती। आतंकी आम दिखने वाली या फिर छोटी चीजों जैसे चाकू, तलवार या ग्रेनेड से हमलाकर आतंक को अंजाम देते हैं। बड़ी बात यह है कि ‘लोन वुल्फ अटैक’ में आतंकी की पहचान करना भी मुश्किल होता है।

क्या है मामला

रविवार (2 अप्रैल, 2023) की रात करीब 9 बजकर 45 मिनट पर अलप्पुझा-कन्नूर एग्जीक्यूटिव एक्सप्रेस ट्रेन कोझिकोड शहर को क्रॉस कर कोरापुझा रेलवे पुल पर पहुँची थी। इसी दौरान दो लोगों के बीच ट्रेन में चढ़ने को लेकर विवाद हो गया। तभी आरोपित ने अन्य यात्रियों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके चलते यात्रियों ने चेन पुलिंग करते हुए ट्रेन को रोका। ट्रेन के रुकते ही आरोपित मौके से फरार हो गया। बाद में यात्रियों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस घटना में एक बच्चे समेत 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं 8 लोग घायल हुए थे।

जनजातीय समाज के युवक की पीट-पीट कर हत्या, शमशुद्दीन-सिद्दीकी समेत 14 दोषी करार: मृतक की माँ ने न्याय के लिए लड़ी लड़ाई

केरल की मन्नारक्कड़ जिले की SC/ST कोर्ट ने जनजातीय युवक मधु की मौत मामले में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया है। इन सभी को बुधवार (5 अप्रैल, 2023) को सज़ा का एलान होगा। इसी मामले में सबूतों के अभाव में 2 आरोपित बरी कर दिए गए हैं। इन सभी पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप साबित हुआ है। दोषियों के नाम सैन, मराइकर, शमशुद्दीन, राधाकृष्णन, अबुबकर, सिद्दीकी, उबैद, नजीब, जैजुमोन, मुनीर सजीव, सतीश, हरीश और बीजू हैं। यह घटना 22 फरवरी, 2018 की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी केस में सबूतों के अभाव में कोर्ट ने अनीश और अब्दुल करीम को बरी कर दिया है। अनीश पर आरोप था कि उसने मधु पर दोषियों के हमले को प्रचारित किया था। कोर्ट ने लगभग 5 साल तक चले इस मामले में 14 आरोपितों को IPC 304 (2) के तहत दोषी पाया है। सजा सुनाए जाए के बाद पुलिस ने सभी 14 दोषियों को कस्टडी में ले लिया है।

क्या था पूरा मामला

दरअसल, यह मामला 22 फरवरी, 2018 का है। तब पलक्कड़ के रहने वाले मधु नाम के एक जनजातीय व्यक्ति को एक भीड़ ने दुकान में चोरी का आरोप लगाते हुए पकड़ लिया था। चोरी का आरोप सबसे पहले मराइकर ने लगाया था। थोड़ी ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई और कई लोगों ने मिल कर मधु को बुरी तरह से पीट दिया। कुछ देर में पहुँची पुलिस ने मधु को कस्टडी में लिया लेकिन तब तक पीड़ित की हालत काफी खराब हो चुकी थी। पुलिस वाले मधु को अस्पताल ले कर निकले पर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।

मधु का पोस्टमार्टम करवाया गया तो उसके पूरे शरीर पर पिटाई के निशान मिले। खास तौर पर सिर और पसलियों पर वार किया गया था। मौत की वजह आंतरिक रक्तस्राव बनी थी। जनजातीय युवक की मौत ने हंगामे का रूप ले लिया था तब प्रशासन ने जाँच के लिए SIT का गठन किया। SIT ने केस में कुल 16 लोगों को आरोपित किया। जाँच रिपोर्ट के निष्कर्ष के तौर पर 3000 पन्नों की चार्जशीट दायर हुई। गिरफ्तार आरोपितों पर SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। इन सभी की जमानत निचली कोर्ट से ख़ारिज हुई थी पर मई 2018 में इन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। हालांकि इस जमानत के लिए कोर्ट ने कड़ी शर्तें रखी थीं।

हालाँकि महज 3 माह भी भी 12 आरोपितों की जमानत एक विशेष कोर्ट ने रद्द कर दी थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाह मुकर गए थे। मृतक मधु की माँ ने इस केस की पैरवी की थी। केस की सुनवाई 28 अप्रैल 2022 को शुरू हुई। 10 मार्च 2023 को यह सुनवाई पूरी हो गई। पुलिस की तरफ से 127 गवाहों की लिस्ट दी गई थी। आखिरकार अदालत ने मधु की मौत मामले में 14 आरोपितों को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया।

7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना, आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।

इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।

पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।

ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।

जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।

पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

‘नाम बदलने से नहीं बदलेगी सच्चाई’: अरुणाचल प्रदेश पर चीन की हरकत का विदेश मंत्रालय ने दिया करारा जवाब, 6 साल में तीसरी बार ड्रैगन की कुटिल कोशिश

चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन के एक मंत्रालय की तरफ से रविवार (02 अप्रैल, 2023) को नक्शा जारी किया गया था। इस नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नाम बदले हुए दिखाए गए थे। जिसपर भारत की तरफ से कड़ा ऐतराज जताया गया है। भारत की तरफ से कहा गया है कि नाम बदल देने से सच्चाई नहीं बदल जाएगी।

मंगलवार (4 अप्रैल, 2023) को चीन की हरकत का भारत की तरफ से जवाब दिया गया। केंद्रीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। सवालों का जवाब देते हुए बागची ने कहा कि हमने इस तरह की रिपोर्ट देखी है। चीन पहले भी इस तरह की कोशिश कर चुका है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। इस तरह की कोशिशों से सच्चाई नहीं बदल जाएगी।

इसके पहले रविवार को चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने नया नक्शा जारी कर अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नए नाम जारी किए। इन इलाकों में 2 मैदानी इलाके, 2 रिहायशी इलाके, 5 पर्वत शिखर और 2 नदियों के नाम शामिल हैं। इसके पहले वर्ष 2017 में बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के अरुणाचल दौरे से चीन बौखला गया था। इसके बाद ही उसने अरुणाचल प्रदेश के 6 स्थानों के नाम बदल दिए थे।

उसके बाद साल 2021 में चीन ने अरुणाचल के 15 स्थानों के नाम जारी किए थे। भारत ने उस वक्त भी चीन की तरफ से की गई गुस्ताखी का करारा जवाब दिया था। 6 सालों में यह तीसरा मौका है जब चीन की तरफ से अपनी भाषा में अरुणाचल के हिस्सों का नाम बदला गया है। अरुणाचल प्रदेश के इस हिस्से को चीन अपना जंगनान प्रान्त (तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा) बताता है।

बुरी तरह पीटा, गला दबा कर मार डाला, कचरे में फेंक दिया शव: 14 साल की बेटी ने बॉयफ्रेंड के साथ मिल कर करवाई माँ की हत्या

रूस में एक 14 साल की नाबालिग लड़की को अपनी माँ की हत्या की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 38 वर्षीय अनास्तासिया मिलोस्काया (Anastasia Milosskaya) की पीट-पीटकर और गला दबाकर हत्या करने के बाद उसे मास्को के बालाशिखा शहर में कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। पुलिस ने उसका शव प्लास्टिक में लिपटा हुआ पाया था।

छात्रा पर आरोप है कि उसने अपने 15 वर्षीय ब्वॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपनी सिंगल मदर अनास्तासिया मिलोस्काया की हत्या की साजिश रची और इसके लिए दो हत्यारों को सुपारी दी। बताया जा रहा है कि उसका ब्वॉयफ्रेंड उसके ही फ्लैट में रह रहा था।

‘द सन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब दो दिन बाद मिलोस्काया का शव प्लास्टिक और गद्दे में लिपटा हुआ पाया गया। उसे मास्को के बालाशिखा शहर में कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। जब एक स्थानीय चौकीदार ने कूड़ेदान में शव को पड़ा देखा, तो उसने पुलिस को इसकी सूचना दी। एक चश्मदीद ने बताया, “मृत महिला की बेरहमी से हत्या करने से पहले उसको बुरी तरह से पीटा गया था और फिर उसका गला दबाया गया था, क्योंकि उसका पूरा चेहरा लाल और सूजा हुआ था।”

रूसी पुलिस के मुताबिक, माँ ने अपनी बेटी की बुरी संगत को लेकर सवाल उठाया था और उसके ब्वॉयफ्रेंड को घर से निकलने के लिए कहा था। साथ ही अपनी बेटी को उससे दूर रहने के लिए कहा था। इस बात से गुस्सा होकर लड़की ने अपनी माँ की हत्या करवाने के लिए दोनों हत्यारों को 3650 पाउंड (करीब 3 लाख 74 हजार रुपए) की सुपारी दी। इसके बाद 24 मार्च, 2023 को जब वह (मिलोस्काया) घर पहुँची, तो उन हत्यारों ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।

जाँच समिति का दावा है कि लड़की और उसके ब्वायफ्रेंड की नजर माँ की 30,000 पाउंड (करीब 30 लाख 80 हजार रुपए) की सेविंग पर थी। लड़की की एक सहेली ने पुलिस को बताया कि “उसने कई बार अपनी माँ से नफरत करने की बात कही थी, लेकिन उसकी माँ एक बहुत अच्छी इंसान थी और उसको प्यार करती थीं।” वहीं, आरोपित लड़की की दादी ने कहा कि उसकी पोती उस लड़के के बहकावे में आ गई थी, जो एक अच्छे परिवार से नहीं था। फिलहाल, आरोपित लड़कों को अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

बता दें कि हत्या में शामिल सभी आरोपितों की उम्र 14 से 17 के बीच है। इन पर हत्या व हत्या की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वे एक महीने तक किशोर सुविधा (Adolescent Facility) में रहेंगे।

‘कोयले की दलाली से UPA सरकार पर पुती कालिख’: ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ के तीसरे एपिसोड में ‘₹1.86 लाख करोड़ के कोयला घोटाले’ की पोल-खोल

कॉन्ग्रेस राज में हुए घोटालों को लेकर भाजपा ने ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ (Congress Files) का तीसरा एपिसोड जारी किया है। इस एपिसोड में मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए कोयला घोटाले को लेकर बात की गई। इस वीडियो में भाजपा ने कहा है कि कोयले की दलाली से यूपीए सरकार पर कालिख पुत गई थी।

दरअसल, कॉन्ग्रेस राज में एक के बाद कई घोटाले हुए हैं। इन घोटालों को लेकर भाजपा ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ नामक एक सीरीज जारी कर रही है। इस सीरीज के जरिए भाजपा यह बताने की कोशिश कर रही है कि ‘कॉन्ग्रेस मतलब करप्शन’ होता है। इसी कड़ी में तीसरे एपिसोड में कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर हुए घोटाले पर कॉन्ग्रेस और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है।

वीडियो में भाजपा ने ‘कोयले की दलाली में हाथ काला’ का जिक्र करते हुए कहा है कि यह कहावत ही नहीं सच्चाई भी है। साल 2012 में कोयले की दलाली में कॉन्ग्रेस का हाथ ही काला नहीं हुआ था बल्कि कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार पर कालिख पुत गई थी। अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला प्राकृतिक संसाधन जब कोयला ही कॉन्ग्रेस सरकार में घोटाले का शिकार बन गया तो सोचिए कॉन्ग्रेस ने कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे घोटाले नहीं किए होंगे?”

भाजपा ने आगे कहा है, “कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह थे। मनमोहन सिंह जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जनता से कई वादे किए थे। हालाँकि, उनके कार्यकाल में उनके वादों की कम और घोटालों की ज्यादा चर्चा हुई। साल 2004 से 2009 तक हुए घोटाले में करीब 100 कंपनियों को नियमों के विरुद्ध जाकर कोयला खदानों का आवंटन किया गया था। बेहद सस्ती कीमतों पर और बिना किसी नीलामी के खदानों से कोयला निकालने के ठेके निजी कंपनियों को दे दिए गए। इस घोटाले से देश को करीब 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।”

वीडियो में आगे कहा गया है, “इस घोटाले में CAG ने तत्कालीन सरकार पर मनमाने ढंग से सार्वजनिक और प्राइवेट कंपनियों को कोयला भंडार के गलत आवंटन की बात कही थी। कॉन्ग्रेस ने कोयला कंपनियों के साथ मिलकर जो खेल खेला था, उससे न सिर्फ देश को आर्थिक नुकसान हुआ था, बल्कि देश की छवि भी खराब हुई थी। इस घोटाले का रोचक पहलू यह है कि 2004 से 2009 के दौरान कोयला मंत्रालय शिबू सोरेन और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था। वही प्रधानमंत्री जो रिमोट से चलते थे। मनमोहन सिंह के कोयला मंत्रालय सँभालने के दौरान 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हो गया।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस फाइल्स के पहले एपिसोड में कॉन्ग्रेस सरकार के 70 सालों में हुए 48 खरब 20 अरब 69 करोड़ रुपए के घोटालों के बारे में बताया गया था। पहले एपिसोड में ही मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए 2जी स्पेक्ट्रम से लेकर मनरेगा, कॉमनवेल्थ और हेलीकॉप्टर सौदे में हुए घोटाले के बारे में बताया गया था। वहीं, दूसरे एपिसोड में राजीव गाँधी की सामान्य सी पेंटिंग को 2 करोड़ रुपए में खरीदने के लिए धमकी देने के बारे में बताया गया था।

रस्सी जल गई, ऐंठन नहीं गईः सूरत कोर्ट में राहुल गाँधी की ‘अपुन ही लोकतंत्र’ टाइप दलीलें, कानून को अपना ‘कद’ समझाया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को गुजरात स्थित सूरत को कोर्ट में अपनी सजा को लेकर अपील की। इस दौरान उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को अपने शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना लिया। राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस का पूरा तामझाम लेकर सूरत पहुँचे।

राहुल गाँधी के साथ उनकी बहन प्रियंका गाँधी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री- अशोक गहलोत, सुखविंदर सिंह सुक्खु और भूपेश बघेल के अलावा, कई सांसद मौजूद थे। सबसे बड़ी बात है कि राहुल गाँधी इस दौरान कमर्शियल फ्लाइट में उड़ान भरे। चार्टर्ड विमानों के अभ्यस्त नेता के लिए असामान्य बात है, जो इसमें राजनीति भी दिखाती है।

बस में बैठकर कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ राहुल गाँधी कोर्ट पहुँचे। सूरत के अतिरिक्त सत्र अदालत के न्यायाधीश ने राहुल गाँधी को उनकी सजा के खिलाफ उनकी अपील का निस्तारण होने तक जमानत दे दी। इसके साथ ही न्यायाधीश रॉबिन मोगेरा ने 13 अप्रैल 2023 को सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की और कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से भी छूट दी।

बार एंड बेंच के अनुसार, अपनी सब्मिशन में राहुल गाँधी के सबसे प्रमुख तर्कों में से एक में कहा गया कि न्यायाधीश को कैसे उनके कद को उचित श्रेय देना चाहिए था। राहुल गाँधी अपने सब्मिशन में कहते हैं, “उम्मीद की जाती है कि ट्रायल जज दो साल की सजा देने के परिणामों से अवगत होंगे, अर्थात् अनिवार्य अयोग्यता को लेकर। इस तरह की अयोग्यता एक ओर मतदाताओं के जनादेश की अस्वीकृति और दूसरी ओर राजकोष पर भारी बोझ डालती है। इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि जज सजा के आदेश में इस प्रकृति के परिणाम का उल्लेख करेंगे।”

दरअसल, राहुल गाँधी का कहना है कि न्यायाधीश ने उन्हें जो सजा सुनाई वह लोकतंत्र के खिलाफ था, क्योंकि इससे राहुल गाँधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिए। न्यायाधीश को इस परिणाम के बारे में ‘जानना’ चाहिए था। राहुल गाँधी का तर्क यह कहने जैसा है कि एक उद्योगपति को उचित सजा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उसके व्यवसाय को नुकसान होगा।

दरअसल, राहुल गाँधी वही बात कह रहे हैं, जो उनके पार्टी के नेता उनके परिवार को लेकर कहते रहते हैं। कॉन्ग्रेस के बाहुबली नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने राहुल गाँधी को दो साल की सजा होने पर कहा था कि गाँधी परिवार के अलग कानून होने चाहिए। तिवारी ने कहा था कि अगर कोर्ट ने राहुल गाँधी के परिवार और उनकी पृष्ठभूमि पर विचार कर फैसला सुनाया होता उनकी सदस्यता नहीं जाती। इसलिए राहुल गाँधी के परिवार के लिए अलग कानून होना चाहिए। राहुल का कुछ-कुछ यही मानना है।

राहुल गाँधी और उनके परिवार के साथ-साथ कॉन्ग्रेसियों का भी मानना है कि गाँधी परिवार कानून से ऊपर है और न्यायपालिका को ही उनके समक्ष झुकना चाहिए। अपील में आगे कहा गया है कि उचित सजा को लेकर संक्षिप्त जाँच की गई। इसमें निचली अदालत ने पक्षकारों को पर्याप्त अवसर दिए बिना अधिकतम सजा देने का काम किया।

राहुल गाँधी इस बात से बेहद नाराज़ नज़र आ रहे हैं कि अदालत ने उन्हें मौका नहीं दिया और तुरंत कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा। जाहिर राहुल गाँधी अपने कद के बारे में न्यायालय को बताना चाह रहे थे। अपील में उनके द्वारा दिए गए इन दो तर्कों से साबित होता है कि उनके अभिजात वर्ग से ताल्लुक रखने को लेकर न्यायपालिका को हमेशा अवगत रहना चाहिए।