Home Blog Page 1915

गरीब हिन्दुओं पर 6.5% टैक्स, मुस्लिम कलक्टर के सामने लाइन में खड़े होकर देना पड़ता था जज़िया: औरंगजेब ने बनाया था कानून, दोहरानी होती थी कुरान की आयतें

भारत में इस्लामी शासनकाल में हिन्दुओं पर अत्याचार किसी से छिपी बात नहीं है, भले ही वामपंथी इतिहासकारों ने इस पर कितना ही पर्दा डालने की कोशिश की हो। इसी तरह अंतिम शक्तिशाली मुग़ल बादशाह औरंगजेब के काल में न सिर्फ हिन्दुओं को मारा-काटा गया और मंदिर तोड़े गए, बल्कि उन पर जज़िया टैक्स भी लगाया गया। अमीर से लेकर गरीब हिन्दुओं तक को जज़िया कर देना होता था। इससे हिन्दू और ज्यादा गरीब होते चले गए।

इतिहासकारों की मानें तो मुग़ल काल में हिन्दुओं को जानवरों से लेकर पेड़ तक पर टैक्स देना होता था। मुग़ल बादशाह अकबर के समय शादियों पर भी टैक्स लगते थे। पेड़-पौधों पर भी टैक्स लगाए जाते थे, जो अकबर और जहाँगीर के समय हटा दिया गया लेकिन उसके बाद फिर जारी रहा। कहा जाता है कि अकबर ने जज़िया कर हटा दिया था। हालाँकि, औरंगजेब के समय इसे फिर से हिन्दुओं पर लगा दिया। मुस्लिमों को जज़िया नहीं देना होता था।

जज़िया कर लेने के लिए हिन्दुओं को 3 हिस्सों में बाँटा गया था। सबसे ऊपर अमीरों को रखा गया था, जिनकी आय साल में 2500 रुपए से ज्यादा थी। उन्हें 48 दिरहम कर के रूप में देने होते थे। रुपए में देखें तो ये कुल 13 रुपया बनता था। इसी तरह, दूसरे वर्ग में माध्यम वर्ग को रखा गया था। इस समूह में उन लोगों को रखा गया था, जिनकी वार्षिक आय 250 रुपए थी। उन्हें 24 दिरहम टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। रुपए में ये 6.5 रुपया बैठता है।

अब आते हैं गरीब वर्ग पर, जिस पर जज़िया कर की सबसे ज्यादा मार पड़ी थी। गरीबों में ऐसे लोगों को रखा गया था, जिनकी वार्षिक आय 52 रुपए या इससे कम हो। उन्हें 12 दिरहम, अर्थात 3.25 रुपए टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। इस तरह इन आँकड़ों के आधार पर गणना करें तो अमीरों को 0.52%, माध्यम वर्ग के हिन्दुओं को 2.6% और गरीब हिन्दुओं को 6.25% मुग़ल शासन को टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। नहीं देने पर उन्हें अंजाम भुगतना पड़ता था।

सोचिए, गरीब हिन्दुओं से 6.25% टैक्स लेकर औरंगजेब इन पैसों का इस्तेमाल हिन्दू राज्यों के खिलाफ ही युद्ध लड़ने के लिए करता था। इन पैसों को उस फ़ौज पर खर्च किया जाता रहा होगा, जो हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ती थी। एक तो संसाधनहीन गरीब इतनी मेहनत कर के कमाते थे, ऊपर से मुगलों का अत्याचार सहन करने के अलावा उन्हें टैक्स भी देते थे। यानी, हिन्दुओं को अपने ऊपर अत्याचार को फंड करने के लिए आपसी देने होते थे।

यही कारण था कि कई गरीब हिन्दुओं ने मजबूरी में धर्मांतरण कर लिया, ताकि वो अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने इस्लाम मजहब अपना लिया, ताकि उन्हें जज़िया कर न देना पड़े। हिन्दू और गरीब होते चले गए, जिनके कारण कभी ये देश ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था और जो इस देश को बनाने वाले थे। इतिहासकार बताते हैं कि इन सबके बावजूद औरंगजेब का समय खत्म होते-होते मुगलों के खजाने में नकदी बची ही नहीं थी।

जज़िया कर का उद्देश्य सिर्फ हिन्दुओं को परेशान करना ही नहीं था, बल्कि मुल्ले-मौलवियों को खुश करना भी था। औरंगजेब राजपूत और मराठों से परेशान था, ऐसे में उसने मुस्लिम जनसंख्या को अपने पीछे लामबंद करने के लिए ये तरीका अपनाया। जज़िया का बहाना बना कर मुल्ले-मौलवी गरीब हिन्दुओं को सताते थे। गाँवों से जज़िया वसूली में फ़ौज की मदद तक ली जाती थी। जिन्हें ये कार्य सौंपा गया था, वो हिन्दुओं पर काफी अत्याचार करते थे।

मुल्ला-मौलवी वर्ग को रोजगार का एक अतिरिक्त साधन मिल गया। हालाँकि, औरंगजेब को सन् 1704 (अपनी मौत से 3 साल पहले) में अराजकता को रोकने के लिए परेशान होकर दक्षिण भारत से जज़िया कर हटाना पड़ा। ऐसा कर के उसे लगता था कि मराठे उससे समझौता कर लेंगे। जिसने अपने ही पिता को कैद कर के सत्ता पाई हो और अपने भाई को मार कर उसे प्लेट में रख कर पिता के सामने पेश किया हो, वो व्यक्ति भला एक अच्छा शासक कैसे हो सकता था।

असल में मुगलों द्वारा जज़िया लगाने का उद्देश्य ही या धरना कायम करनी थी कि मुस्लिम ही सबसे श्रेष्ठ हैं और बाकी सब उसके नीचे आते हैं। बाद में वामपंथी इतिहासकारों ने शरीयत का रोल नकारते हुए जज़िया के ‘राजनीतिक कारण’ गिनाने शुरू कर दिए। औरंगजेब ने मराठों के खिलाफ लड़ाई को भी ‘गाजा’ दिखाया था, अर्थात इस्लाम के लिए जिहाद। असल में जज़िया का सीधा अर्थ था हिन्दुओं को नीचा दिखाना, उन्हें अपमानित महसूस कराना।

इसीलिए, एक नया नियम लागू किया गया। इसके बारे में मार्क जैसन गिल्बर्ट ने ‘South Asia in World History‘ में बताया है। इसके तहत, घर के मुखिया को व्यक्तिगत रूप से कलक्टर के सामने पेश होकर जज़िया कर अदा करना पड़ता था। इस दौरान मुस्लिम कलेक्टर बैठा रहता था और सामने हिन्दुओं को खड़े होकर लाइन लगानी पड़ती थी। इस दौरान उन्हें कुरान की वो आयत दोहरानी होती थी, जिसमें गैर-मुस्लिमों को मुस्लिमों से नीचे बताया गया है।

साथ ही औरंगजेब ये भी योजना बना रहा था कि भविष्य में हिन्दुओं को मुग़ल शासन में बड़े पदों पर न बिठाया जाए। ऐसे पदों को मुस्लिमों के लिए आरक्षित करने की तैयारी थी। वो अप्रैल 1779 का ही समय था, जब औरंगजेब ने अकबर द्वारा हटाए गए जज़िया कर को पुनः लागू किया। सन् 1564 में इसे हटा दिया गया था। औरंगजेब को न सिर्फ मराठा और मरवाद, बल्कि बुंदेलखंड में छत्रसाल से भी चुनौती मिल रही थी जिन्होंने अपना अलग साम्राज्य स्थापित किया।

इन सबके अलावा सिख भी थे, जो तमाम अत्याचारों के बावजूद मुगलों के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं थे। जाट विद्रोह से औरंगजेब परेशान था ही। औरंगजेब ने जज़िया की वसूली के लिए राजस्व विभाग में कई मुस्लिमों की नियुक्तियाँ की। सन् 1687 में उसने एक इंस्पेक्टर जनरल की नियुक्ति की, ताकि नियमों को और कड़ा बनाया जा सके। औरंगज़ेब के समय में काजियों का बोलबाला था और इसीलिए संगीत तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

औरंगजेब ने ये नियम भी बनाया कि महिलाओं को ‘चुस्त कपड़े’ पहनने का कोई अधिकार नहीं है और उनके शरीर पर कपड़े फैले हुए होने चाहिए। साथ ही उसने दाढ़ी की लंबाई भी तय कर रखी थी और मुस्लिमों को चार उँगली से ज्यादा लंबी दाढ़ी न रखने को कहा था। साथ ही मूँछ छिलने का भी कानून बनाया गया, क्योंकि उसे लगता था कि मूँछें होठों को ढँक कर रखेंगी तो इससे अल्लाह का नाम बोलने पर आवाज़ जन्नत तक नहीं पहुँचेगी।

राहुल गाँधी ने खाली किया लुटियंस दिल्ली वाला सरकारी बँगला, कॉन्ग्रेसी चला रहे ‘मेरा घर, आपका घर’ अभियान

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने दिल्ली स्थित अपना आधिकारिक बँगला खाली कर दिया है। लोकसभा की हाउसिंग कमेटी ने इस बंगले को खाली कराने का नोटिस दिया था। सदन के सचिवालय ने इस बाबत राहुल गाँधी को पहले ही नोटिस दे दिया था। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस बंगले में साल 2004 से थे। यह बंगला 12 तुगलक लेन पर स्थित है जिसे राहुल गाँधी ने रविवार (2 अप्रैल, 2023) को खाली किया है। दरअसल गुजरात की एक अदालत द्वारा राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सुनाई है जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म हो गई है।

TOI ने राहुल गाँधी द्वारा बँगला खाली कर के जाते हुए वीडियो शेयर किया है। 1 मिनट 25 सेकेण्ड के इस वीडियो में सुरक्षाकर्मी बंगले के गेट पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। कुछ ही देर बाद सफेद रंग की गाड़ियों से राहुल गाँधी का काफिला सड़क से गुजरता है। थोड़ा आगे जाने के बाद यह काफिला वीडियो में एक चौराहे पर भी कुछ देर के लिए रुकता है। सुरक्षा में दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री के भी जवान साथ दिख रहे हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी को बंगला खाली करने के लिए 22 अप्रैल 2023 तक की मोहलत दी गई थी।

महिला ने राहुल गाँधी के नाम किया बंगला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की एक महिला ने अपना खुद का बंगला राहुल गाँधी के नाम कर दिया है। दरअसल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता राहुल गाँधी के लिए ‘मेरा घर, आपका घर’ नाम का अभियान चला रहे। हैं इस अभियान से प्रभावित हो कर दिल्ली की रहने वाली राजकुमारी गुप्ता नाम की महिला ने अपना मकान राहुल गाँधी के नाम कर दिया है। यह मकान मंगोलपुर क्षेत्र में है। राजकुमारी गुप्ता ने इस बावत जमा किए गए स्टाम्प का फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। कई अन्य कॉन्ग्रेसी भी अपने घर की फोटो सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी के लिए शेयर कर रहे हैं।

राजकुमारी का यह घर 4 मंजिला बना हुआ है। राजकुमारी का कहना है कि उन्हें बंगला इंदिरा गाँधी के समय मिला था। इस दौरान राजकुमारी ने कहा कि राहुल गाँधी को भले ही बंगले से बाहर किया गया है लेकिन उन्हें कोई भी लोगों के दिलों से नहीं निकाल सकता है।

पाकिस्तान में फिर हिंदू डॉक्टर की हत्या, हमलावरों ने कार पर ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियाँ: 1 महीने में दूसरी घटना, पुलिस ने कहा- टारगेट किलिंग

पाकिस्तान के कराची में एक और हिंदू डॉक्टर की हत्या कर दी गई। बीते एक महीने में हिंदू डॉक्टर की हत्या का दूसरा मामला है। मृतक डॉक्टर की पहचान बीरबल गेनानी के रूप में हुई। घटना में उनकी सहयोगी डॉक्टर क़ुरत-उल-ऐन भी घायल हुई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डाक्टर बीरबल गेनानी कराची के मशहूर नेत्र रोग विशेषज्ञ थे। वह कराची नगर निगम में निदेशक के पद पर भी कार्य चुके हैं। गुरुवार (30 मार्च 2023) की शाम डाक्टर बीरबल गेनानी कराची के गार्डन इलाके में स्थित अपने निजी क्लीनिक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दीं। इस घटना के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हत्या को टारगेट किलिंग होने का संदेह जताया जा रहा है। वहीं, डॉक्टर क़ुरत-उल-ऐन के कंधे में गोली लगी थी। हालाँकि वह खतरे से बाहर हैं।

पाकिस्तानी पुलिस के डीआईजी इरफान अली ने कहा है कि हत्या का मामला टारगेट किलिंग की तरह प्रतीत होता है। हालाँकि अभी हत्या के मकसद का पता नहीं चल पाया है। घायल डॉक्टर से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कहा है कि अचानक से गोलीबारी शुरू हुई। इससे पहले कि महिला डॉक्टर को कुछ समझ आता हत्या हो चुकी थी। डॉक्टर बीरबल गेनानी के सिर में दो गोलियाँ लगी थी।

एक महीने के भीतर दूसरे हिंदू डॉक्टर की हत्या…

बता दें कि इससे पहले 7 मार्च 2023 को पाकिस्तान के ही सिंध प्रांत में मशहूर डॉक्टर धर्म देव राठी की उनके ड्राइवर ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। वह अपने घर में मृत पाए गए। घटना उस वक्त हुई थी, जब डॉ. धर्म देव राठी अपने क्लीनिक से घर लौट रहे थे। इस दौरान किसी बात को लेकर उनके ड्राइवर हनीफ और डॉ. राठी के बीच बहस हो गई। इस बहस के बाद घर पहुँचते ही हनीफ ने चाकू से हमलाकर राठी की हत्या कर दी और फिर फरार हो गया। इस घटना में रसोईया दिलीप ठाकुर भी घायल हुआ था। बाद में पुलिस ने आरोपित हनीफ को गिरफ्तार कर लिया था।

‘सुनो CM सरमा… तुम्हें अंजाम भुगतना होगा’: खालिस्तानी संगठन SFJ ने असम मुख्यमंत्री को दी धमकी, अमृतपाल के साथियों पर कार्रवाई से भड़का

खालिस्तानियों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी धमकी दी है। खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने धमकी देते हुए कहा कि उसकी लड़ाई भारत सरकार से है। इसलिए सीएम सरमा बीच में ना पड़ें।

पत्रकारों को फोन करके दी धमकी में पन्नू ने यह भी कहा कि भगोड़े अमृतपाल के साथियों को जेलों में प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर असम सरकार जेल में बंद अमृतपाल के 6 साथियों को प्रताड़ित करती है तो इसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

पन्नू ने सरमा को सलाह दी है कि खालिस्तानी समर्थकों की लड़ाई केंद्र सरकार के साथ है। इसलिए वह बीच में पड़कर हिंसा का शिकार ना बनें। उसने कहा कि खालिस्तानी समर्थक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पंजाब को भारत से मुक्त कराना चाहते हैं।

बता दें कि अमृतपाल के कुछ साथियों को असम की जेल में रखा गया है। वहीं, अमृतपाल की तलाश में पुलिस और NIA लगातार दबिश दे रही हैं। हालाँकि, उसका सही लोकेशन एजेंसियों को नहीं मिल रहा है और वह अभी तक बचने में सफल रहा है।

हाल ही में खबर आई थी कि अमृतपाल पंजाब में ही कहीं छिपा हुआ है। ऐसे में पुलिस ने मानसा में नाकाबंदी बढ़ा दी है। इसके अलावा, राज्य भर में जगह-जगह अमृतपाल और उसके साथी पप्पलप्रीत का पोस्टर लगा दिया है। ये पोस्टर पुलिस बैरिकेडिंग्स पर भी लगाए गए हैं।

‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल के खिलाफ 18 मार्च 2023 को पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। उसके पहले गिरफ्तार किए गए अपने कुछ समर्थकों ने छुड़ाने के लिए अमृतसर के पास अजनाला पुलिस स्टेशन पर अपने साथियों के साथ सशस्त्र धावा बोल दिया था।

उस वक्त पुलिस ने दबाव में उसके साथियों को जेल से रिहा कर दिया था। उसके कुछ सप्ताह बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसका पीछा करना शुरू किया, लेकिन वह चकमा देकर भाग निकला। तब वह अपना वेश बदलकर और अलग-अलग गाड़ियों में भाग रहा है।

भैंस धोना, झाड़ू लगाना… तय हुआ जेल में अतीक अहमद का काम, दिहाड़ी ₹25 मिलेगी: कैदी साथ रहेंगे, खाने में दाल-चावल मिलेगा

उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा पाए माफिया अतीक अहमद के लिए जेल में काम तय कर दिए गए हैं। जेल में काम के तौर पर अतीक को भैंस धोने और झाड़ू लगाने का काम दिया गया है। इन कामों के बदले अतीक को दिहाड़ी के तौर पर प्रतिदिन 25 रुपए मिलेंगें। अतीक का बिल्ला भी तय कर दिया गया है। खाने के तौर पर माफिया को जेल का ही भोजन दिया जा रहा है। सजा पाने के बाद माफिया की बैरक को भी बदल दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद का बिल्‍ला नंबर 17052 तय किया गया है। खाने में उसे रोटी, दाल और चावल दिया जा रहा है। दिहाड़ी पाने के लिए जेल में अतीक अहमद का खाता भी खोल दिया गया है। भैंस धोने के अलावा अतीक अहमद को खेती और बढ़ई का भी काम करना होगा। कैदी के तौर पर को अतीक को 2 जोड़ी कपड़े मिले हैं। इन कपड़ों में सफेद कुर्ता, पायजामा, गमछा और टोपी शामिल हैं। अतीक अहमद की बैरक को बदल कर अब उसे सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार अतीक को खाना भी लाइन में खड़े हो कर लेना पड़ेगा। काम के घंटों के लिए अतीक की उम्र को ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल अतीक को नॉन ट्रेंड कारीगर के तौर पर रखा गया है। कुशल कारीगर बन जाने के बाद अतीक की दिहाड़ी 40 रुपए प्रतिदिन होगी। अतीक अहमद को जेल में खाने के तौर पर सादा भोजन मिलेगा। यहाँ उसे दाल, चावल और रोटी मिलेगी। साबरमती जेल में अतीक को मैनुअल की भी लिस्ट सौंप दी गई है। अब अतीक को पक्का कैदी माना जाएगा।

गौरतलब है कि उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज की एक कोर्ट ने अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास की यह सजा बमशक़्क़त है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अतीक अहमद और अन्य दोषी अपनी सजा को हाईकोर्ट में चैलेन्ज दे सकते हैं। इस बावत अगले हफ्ते याचिका दाखिल की जा सकती है। याचिका दाखिल करने के लिए कुछ नामी वकीलों की भी तलाश की जा रही है। सजा पाए अन्य 2 लोगों में शौलत हनीफ और दिनेश पासी शामिल हैं।

मिट गया भोपाल के नवाब का नाम: मध्य प्रदेश का नसरुल्लागंज अब कहलाएगा भैरूंदा, शिवराज सरकार ने जारी किया आदेश

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक और शहर का नाम बदल दिया है। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सीहोर जिले के नसरुल्लागंज का नाम बदल दिया है। अब इसे भैरूंदा के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है।

बता दें कि शिवराज सरकार ने नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने शहर का नाम बदलने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2021 में अपने एक कार्यक्रम में नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने की घोषणा की थी। यह इलाका मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। यहाँ के लोग लंबे समय से नाम बदलने की माँग करते आ रहे थे।

इससे पहले राज्य सरकार ने भोपाल के इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर और होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया था। इतना ही नहीं, इसी साल हबीबगंज रेलवे स्टेशन का भी नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कर दिया गया था।

भोपाल के मिंटो हॉल का भी नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर किया गया है। अब कहा जा रहा है कि जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर रानी दुर्गावती एयरपोर्ट नाम रखने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा है।

नसरुल्लागंज के इतिहास को देखें तो इसका संबंध भोपाल के नवाब परिवार से है। नवाब सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने तीनों पुत्रों को भोपाल के पास जागीर दी थी। सबसे बड़े बेटे नसरुल्ला खाँ को दी गई जागीर के नाम पर उसका नाम नसरुल्लागंज पड़ा। इसी प्रकार अब्दुल्लागंज, अब्दुल्ला खाँ की जागीर थी।

सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने सबसे छोटे बेटे हमीदउल्ला को चिकलोद की जागीर दी थी। बाद में नसरुल्लाह भोपाल रियासत का नवाब बना। नई दुनिया के अनुसार, भोपाल के 1908 के राजपत्र घोषणा में नसरुल्लागंज का नाम भैरुंदा ही बताया गया था।

उस राजपत्र में कहा गया है कि कि भैरुंदा भोपाल रियासत के दक्षिणी संभाग के आठ परगना में से एक परगना था। उस समय भैरुंदा और आसपास के इलाकों में दरी बुनने का काम होता था। इसकी वजह से काफी संख्या में यहाँ बुनकर रहते थे।

दरअसल, यहाँ निवास करने वाले कलोता समाज के लोगों के अराध्य देव भैरव महाराज हैं। भैरव नाथ में आस्था होने के कारण इस गाँव का भैरुंदा रखा था। भोपाल और आसपास के क्षेत्र में मुगलों का राज कायम हुआ तो उन्होंने भैरुंदा का नाम बदलकर नसरुल्लागंज कर दिया गया था।

लोग मारे जा रहे, गोलियाँ चल रहीं, आग लगी है… बिहार में गरजे अमित शाह, कहा – नीतीश के लिए BJP के दरवाजे हमेशा के लिए बंद, दंगाइयों को उल्टा लटका कर सीधा करेंगे

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के सासाराम में हो रही हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि वहाँ लोग मारे जा रहे हैं, गोलियाँ चल रही हैं। अमित शाह ने यह भी कहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सभी सीटों में चुनाव जीतेगी। इसके बाद महागठबंधन सरकार गिर जाएगी। बीजेपी सरकार बनने पर दंगा करने वालों को उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम होगा।

दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार (2 अप्रैल 2023) बिहार के नवादा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस जनसभा से पहले उन्हें सासाराम में सम्राट अशोक की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मिलित होना था। लेकिन, रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के चलते उनका यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

इसको लेकर उन्होंने कहा है, “​​​मुझे सासाराम जाना था। वहाँ सम्राट अशोक की जयंती पर कार्यक्रम होना था। लेकिन दुर्भाग्य है कि वहाँ लोग मारे जा रहे हैं। गोलियाँ चलाई जा रही हैं। आँसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं। इसलिए मैं वहाँ नहीं जा सका। मैं वहाँ की जनता से यहीं से क्षमा माँगता हूँ। अगले दौरे में सासाराम में सभा जरूर करूँगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि बिहार में जल्द ही शांति हो। मैने सुबह राज्यपाल को फोन किया तो ललन सिंह जी (जदयू अध्यक्ष) बुरा मान गए कि आप बिहार की चिंता क्यों करते हैं? अरे भाई, मैं देश का गृहमंत्री हूँ और बिहार की कानून-व्यवस्था भी देश का एक हिस्सा है। आप नहीं सँभाल नहीं सकते। इसलिए हमें चिंता करनी पड़ रही है।”

अमित शाह ने आगे कहा है, “नीतीश कुमार की सत्ता की भूख ने उन्हें लालू की गोद में बैठने पर मजबूर कर दिया। हमारी कोई मजबूरी नहीं है। हम जनता के बीच जाएँगे। लोगों को बताएँगे। महागठबंधन की सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। मैंने ऐसी स्वार्थी सरकार नहीं है, जिसमें एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनना है और लालू यादव के बेटे को मुख्यमंत्री बनना है। इसमें बिहार की जनता पिस रही है। मैं लालू जी को कहना चाहता हूँ कि नीतीश बाबू प्रधानमंत्री तो बनने से रहे। वहाँ जगह खाली नहीं है। देश की जनता ने तय किया है कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। इसके बाद नीतीश बाबू तेजस्वी यादव को कभी भी मुख्यमंत्री बनने नहीं देंगे।”

गृहमंत्री ने यह भी कहा है, “बिहार की सरकार बुरी नीयत और बुरी नीति की ‘BAD’ सरकार है। भ्रष्टाचार का B, अराजकता का A और दमन का D, इन तीनों से मिलकर ये ‘BAD’ सरकार बनी है। इस बुरी सरकार को उखाड़कर फेंक देना है। सरकार के सहयोगी विधायक हर रोज नीतीश कुमार का विरोध कर रहे हैं। इनके आधे सांसद भाजपा के दरवाजे खटखटा रहे हैं। यदि किसी को इस बात का संशय है कि चुनाव के बाद भाजपा फिर से नीतीश कुमार के साथ गठबंधन कर सकती तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इन लोगों के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हो चुके हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है, “तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को साँप कहा, पलटू चाचा कहा, धोखेबाज कहा, अहंकारी कहा और तो और गिरगिट तक कह डाला। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के मोह में नीतीश कुमार आज उनके साथ सरकार में हैं। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद ये सरकार गिरने वाली है। इसके बाद भाजपा की सरकार बनने वाली है। मोदी जी जनता को भ्रष्टाचार और कालाबाजारी से मुक्ति दिलाकर कानून व्यवस्था ठीक करेंगे।”

अमित शाह ने आगे कहा है, “नीतीश कुमार ने अपने जीवन में कई पार्टियाँ बदली हैं। कई लोगों को धोखा दिया है। लेकिन जिन लोगों के साथ आज सरकार बनाई है उन लोगों ने बिहार की जनता को क्या दिया? केंद्र सरकार ने 2009 से 2014 तक सिर्फ 50 हजार करोड़ रुपए दिया था। लेकिन 2014 से 2019 तक मोदी से ने 1 लाख 9 हजार करोड़ रुपए बिहार को दिया है। केंद्र की सरकार ने बिहार को दोगुना से अधिक पैसा दिया है। आज पूरा बिहार चिंतित है। बिहार शरीफ में आग लगी है। सासाराम में आग लगी है। सबको चिंता हो रही है। 2024 में मोदी जी को 40 में 40 सीटें दीजिए और 2025 में भाजपा की सरकार बनाइये। इसके बाद भाजपा सरकार दंगा करने वालों को उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम करेंगे। भाजपा सरकार में दंगे नहीं होते।”

‘सीढ़ी लगा कर घुसी पुलिस और घर के मर्दों को लेकर गईं, रात में कोई मुस्लिम आएगा तो…’: हिन्दू महिलाओं ने बयाँ किया दर्द, बोले गिरिराज – मुस्लिमों के CM हैं नीतीश

बिहार के तमाम जिलों में रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और अनुराग ठाकर के बयान आए हैं। गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार से अपील की है कि वो खुद को केवल मुसलामानों का मुख्यमंत्री घोषित कर दें। वहीं अनुराग ठाकुर ने बिहार के वर्तमान हालातो को जंगलराज की वापसी बताया है। इसके अलावा बिहार के हिन्दुओं ने पुलिस प्रशासन पर खुद को प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार के नालंदा जिले में हिन्दुओं ने खुद को पुलिस द्वारा प्रताड़ित बताया है। कुछ महिलाओं के बयान सामने आए हैं जिसमें उन्होंने पुलिस पर अपने दरवाजो को तोड़ने का आरोप लगाया है। महिलाओं के मुताबिक पुलिस उनके घर में सीढ़ी लगा कर चढ़ी थी और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें कोई भी मुस्लिम घर में घुस कर मार सकता है। महिलाओं ने पुरुषों की गैरमौजूदगी में अपने घर में खाने-पीने की भी किल्लत भी बताया है।

नालंदा पुलिस के एडिशनल एस पी के मुताबिक जिले में अतिरिक्त फ़ोर्स की तैनाती कर दी गई है और धारा 144 लागू की गई है। इन हालातों पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। अनुराग ठाकुर के मुताबिक बिहार में कानून व्यवस्था के नाम पर जंगलराज चल रहा है। उन्होंने नीतीश के वर्तमान शासन की तुलना इतिहास में लालू राज से की है।

वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने CM नीतीश कुमार से माँग की है कि वो खुद को मुस्लिमों का ही मुख्यमंत्री घोषित कर दें। गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार से कहा कि हिन्दू भी आप को वोट देते हैं। उन्होंने बिहार के प्रशासनिक अधिकारीयों में सामंजस्य न होने का भी आरोप लगाया। बकौल गिरिराज सिंह अगर मीडिया न होती तो लोगों को बिहार के असल हालातों की जानकारी भी न हो पाती।

गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए उनके गृह जनपद को ही हिंसा से प्रभावित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार आम लोगों को सुरक्षा देने में विफल रही है।

स्वदेशी भाषा को बढ़ावा देगा इटली, अंग्रेजी बोलने पर लग सकता है जुर्माना: नई सरकार ने पेश किया बिल, ChatGPT पर भी लग चुका है प्रतिबंध

यूरोपीय देश इटली में अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करने पर जुर्माना देना पड़ेगा। इटली की नई सरकार ने इस संबंध में संसद में बिल पेश किया है। विधेयक में 1,00,000 यूरो (89.34 लाख रुपए) तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। इसके पहले वहाँ की सरकार ने ChatGPT को बैन किया था।

पीएम जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के नेतृत्व वाली ‘ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी’ की सरकार ने बिल में कहा इटालियन के बजाय अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाओं के इस्तेमाल करने पर रोक लगाने की पहल की गई है। इटली की संस्कृति और आर्थिक संकट को लेकर ये कदम उठाया जा रहा है।

सदन में इस मसौदे को फैबियो रैम्पेली ने पेश किया है, जिसका प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने समर्थन किया है। मसौदे में सभी विदेशी भाषाओं के लिए जुर्माने की बात कही गई है, लेकिन विशेष तौर पर जोर अंग्रेजी भाषा पर दिया गया है। अब संसद में इस पर चर्चा होगी। उसके बाद बहुमत के आधार पर पारित होगा।

इस मसौदे में कहा गया है कि अंग्रेजी भाषा के कारण इटालियन भाषा का उपयोग कम हो रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि अब स्वयं ब्रिटेन यूरोपीय संघ का हिस्सा भी नहीं है। ऐसे में अंग्रेजी के उपयोग का अब कोई औचित्य नहीं है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि इटली के सभी नागरिक स्वदेशी चीजों का ही इस्तेमाल करें।

इसमें यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक सेवा में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए इतालवी भाषा का लिखित और मौखिक ज्ञान के साथ-साथ उसमें महारत होना जरूरी है। इसके अलावा, देश में संचालित कंपनियों में नौकरी के नाम सहित आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण में भी अंग्रेजी भाषा का उपयोग वर्जित किया गया है।

विदेशी संस्थाओं के पास सभी आंतरिक नियमों और रोजगार अनुबंधों के इतालवी भाषा संस्करण होने चाहिए। मसौदे में कहा गया है, “यह केवल फैशन की बात नहीं है। फैशन बदलते रहता है, लेकिन एंग्लोमेनिया का समाज पर असर पड़ता है।” इसके अलावा, देश के सभी उत्पादों पर इतालवी भाषा में लिखा होना चाहिए।

प्रस्तावित कानून के तहत, संस्कृति मंत्रालय एक समिति की स्थापना करेगा, जिसके दायरे में स्कूलों, मीडिया, वाणिज्य और विज्ञापन में ‘इतालवी भाषा और उसके उच्चारण का सही उपयोग’ शामिल होगा। इसका मतलब यह होगा कि ‘ब्रू-स्केट्टा’ के बजाय ‘ब्रू-शेट्टा’ कहना एक दंडनीय अपराध हो सकता है।

इससे पहले इटली ने ChatGPT को बैन कर दिया था। इसके पहले न्यूयॉर्क में इस पर बैन लगाया गया था। ChatGPT एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर पर आधारित काम करता है। यह लैंग्वेज मॉडल पर काम करते हुए लोगों के सवालों का आसान भाषा में जवाब देता है।

इसके खतरे को देखते हुए इटली ने इसे बैन कर दिया है। इटली ने इसके पीछे यूजर्स की निजता के उल्लंघन का हवाला दिया है। इस कार्रवाई को लेकर जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की तरफ से कहा गया है कि सरकार इस बात की भी जाँच करेगी कि इसमें यूरोपीय संघ डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

खाल पहनकर गीदड़ शेर नहीं बन सकता… बोले बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री – साईं बाबा फकीर हो सकते हैं पर भगवान नहीं

बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि साईं बाबा संत या फकीर हो सकते हैं, लेकिन भगवान नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा है कि खाल पहनकर कोई गीदड़ शेर नहीं हो सकता।

दरअसल, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से विख्यात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मध्य प्रदेश के जबलपुर में कथा चल रही थी। इस कथा के दौरान आयोजित प्रश्रोत्तरी में शैलेन्द्र राजपूत नामक व्यक्ति ने उनसे साईं बाबा की पूजा को लेकर सवाल किया। इस सवाल के जवाब में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है, “हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साईं बाबा को देवता का स्थान नहीं दिया है। शंकराचार्य हिंदू धर्म के प्रधानमंत्री हैं। इसलिए, उनकी बात मानना प्रत्येक सनातनी का धर्म है। हमारे धर्म के कोई भी संत चाहे वह गोस्वामी तुलसीदास जी हों या सूरदास जी हों, संत हैं, महापुरुष हैं, युगपुरुष हैं, कल्पपुरुष हैं लेकिन भगवान नहीं हैं।”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी कहा, “लोगों की अपनी-अपनी आस्था है। किसी की निजी आस्था को हम ठेस नहीं पहुँचा सकते हैं। लेकिन, इतना कह सकते हैं, साईं बाबा संत हो सकते हैं, फ़कीर हो सकते हैं लेकिन भगवान नहीं हो सकते।” उन्होंने यह भी कहा है, “हमारे ऐसा बोलने को लेकर लोग इसे कंट्रोवर्सी कह सकते हैं। लेकिन यह बोलना बहुत जरूरी है कि खाल पहनकर कोई गीदड़ शेर नहीं बन सकता।”

उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए आगे कहा है, “यदि हम शंकराचार्य का छत्र लगा लें, सिंहासन लगा लें, चरम ले लें और हम कह दें कि हम शंकराचार्य हैं तो क्या हम बन जाएँगे? नहीं बन सकते। भगवान तो भगवान ही हैं और संत सिर्फ संत हैं। जिसकी जैसी आस्था है वैसी रखनी चाहिए। लेकिन साईं भगवान नहीं हैं, ऐसा हमारे शंकराचार्य कहते हैं।” साईं बाबा की वैदिक रीति-रिवाजों से हो रही पूजा को लेकर उन्होंने कहा है, “यदि कोई वैदिक धर्म में आ रहा है तो घर वापसी तो हमारा अभियान है, कोई दिक्कत नहीं है।”

इससे पहले उन्होंने अदालत के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा था, “कोर्ट ने कहा है कि साईं बाबा सनातनी नहीं हैं, हिंदू नहीं है और शंकराचार्य जी से माफी भी माँगी है। साईं बाबा भगवान नहीं है। इंसान कभी भगवान नहीं हो सकता। इंसान गुरु हो सकता है, संत हो सकता है, महापुरुष हो सकता है, लेकिन भगवान नहीं हो सकता है।”

यही नहीं धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने साईं बाबा की पूजा को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में यह भी कहा था कि जब सनातनियों के पास पूजा करने के लिए 33 कोटि देवी-देवता हैं तो चाँद मियाँ को पूजने की क्या जरूरत है? विश्व में सबसे ज्यादा पूज्य भगवान राम हैं। वे विश्व के पिता हैं। जो उनका नहीं, वह किसी का नहीं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के मंदिरों में साईं प्रतिमा का विरोध किया है। शंकराचार्य जी सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर हैं। इसलिए सनातनियों को उनकी आज्ञा माननी चाहिए।