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‘भागो गोलियाँ मार रहे’: जब 7 मार्च को खालिस्तानियों ने सदर बाजार में बिछा दी लाशें, फायरिंग-बमबाजी में 32 की हुई थी मौत

खालिस्तान की बढ़ती माँग और उसे मिलता समर्थन समय के साथ काफी डराने वाला है। खालिस्तानियों को शह देना किसी को कितना महंगा पड़ सकता है, इसका अंदाजा अबोहर गोलीकांड के बारे में पढ़कर लगता है। आज से ठीक 33 साल पहले पंजाब के अबोहर में वो काला दिन आया था जब 32 परिवारों के खून से खालिस्तानियों ने होली खेली थी।

अबोहर का खूनी होली

7 मार्च 1990। समय-शाम के 6:30 बजे। अचानक सड़कों पर तेज धमाके की आवाजें सुनाई दीं। दुकानदारों को लगा बच्चे पटाखे जला रहे होंगे। कुछ देर बाद लोगों की भीड़ सड़कों पर भागती नजर आई। ये भीड़ चिल्ला रही थी- “भाजो गोलियाँ मार रहे (भाग लो, वो लोगों को मार रहे हैं)”, “बंदे मार ते, बंदे मार ते (वह मार रहे हैं)”, “अपनी जान बचाओ भाजो (भागो और अपनी जान बचाओ)।”

कुछ देर में सड़कों पर खालिस्तान कमांडो फोर्स के 10 आतंकी बाजार के हर कोने पर थे। ये बिना देखे किसी भी दिशा में लोगों को मार रहे थे। इन्होंने उस भीड़ को भी नहीं छोड़ा था, जो इनसे जान बचाकर आगे भाग रही थी। देखते ही देखते लाशों के ढेर बिछ गए। कई घायल हो गए। आतंकी इसके बाद भी फाजिलका रोड (भारत-पाक बॉर्डर के पास) की ओर बढ़ रहे थे।

इतिहास के झरोखे से अबोहार किताब से लिए गए अंश

कहा जाता है कि पहले तो जब आतंकियों ने गोलियों की बौछार की, तब पुलिस कहीं नजर नहीं आई, बाद में वह घरों में छिप गए। काफी देर पुलिस ने उन्हें ढूँढा, लेकिन वह घर से नहीं निकले। पुलिस के जाने के बाद यह आतंकी वहाँ से निकल गए और न जाने कहाँ खेतों से गायब हो गए। दुखद यह था कि अबोहर के पुलिस थाने में जब सड़कों पर हुए हमले की सूचना मिली तो उन्होंने अपना दरवाजा बंद कर दिया।

सदर बाजार की घटना थी और उससे थोड़ी दूर पर थाना था। पुलिस वाले चाहते तो इतना मुश्किल नहीं था बेसहायों की मदद के लिए पहुँचना, लेकिन उन्होंने खालिस्तानियों का नाम सुन कर अपने दरवाजे बंद कर लिए और मदद की आवाज आने पर भी कोई सुनवाई नहीं की। घटना के 40 मिनट बाद पुलिस निकली और ऐसे आतंकियों की छानबीन शुरू की, जो घटनास्थल से गायब हो चुके थे।

सिविल अस्पताल की स्थिति

उधर अबोहर के सिविल अस्पताल की हालत दयनीय हो चुकी थी। प्रशासन ऐसी किसी आपातकाल स्थिति से निपटने को तैयार नहीं था। मगर, तब भी आतंकियों के जाते ही अपने दरवाजे खोल कर घायलों की किसी तरह मदद कर रहा था। उस समय कोई एंबुलेंस सर्विस नहीं थी। घायलों को हाथ से खींचने वाले ठेलों पर अस्पताल पहुँचाया गया।

सीमित प्रशासन के साथ अस्पताल जुटा था कि किसी तरह आतंकी हमले के शिकार लोगों को जीवनदान दे सकें। मगर, प्रशासन भी क्या करता? मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि कुछ देर बाद दवाइयों और सर्जिकल उपकरण कम पड़ने लगे। पट्टियाँ भी इतनी नहीं थीं कि हर घाव पर उसे बाँधा जा सके।

खालिस्तानी अपना आतंक मचा कर जा चुके थे। पीछे रह गए थे घायल और उनके रोते-बिलखते परिजन। अस्पताल एक ओर जहाँ अपने संसाधनों को खत्म होता देख रहा था, वहीं थोड़ी देर में अस्पताल का नजारा कुछ और था। बाजार के कई लोग ज्यादा से ज्यादा तादाद में घायलों को खून देने के लिए उमड़ पड़े।

इतिहास के झरोखे से अबोहार किताब से लिए गए अंश

गोलीबारी खालिस्तानियों के लिए शायद कम थी, उन्होंने दो बम ब्लास्ट कर के शहर को फिर दहला दिया। पूरी घटना में 22 लोग मौके पर खत्म हो गए, 10 ने अस्पताल में दम तोड़ा, कइयों ने पसलियाँ गँवा दीं, कुछ की अंतड़ियाँ बाहर आ गईं, किसी के पाँव अलग हो गए और कई को अन्य बुरी चोटें आईं। रिकॉर्ड कहते हैं कि इस बम ब्लास्ट में 45 घायल हुए थे।

हमले में मारे गए लोग

इस हमले के बाद पुलिस की कायरता और आपात स्थिति को लेकर स्वास्थ्य तैयारियों ने स्थानीयों के मन में गुबार भर दिया। कई जगह ऐसे मामले सामने आए, जब प्रशासन और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन हुए। 10 मार्च 1990 को बड़ी तादाद में थाने की ओर मार्च निकाला गया। गुस्साए लोगों ने पुलिस की मोटरसाइकिल फूँक दी। पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए और बाद में जाकर जिलाधिकारी राकेश सिंह ने किसी तरह भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया, तो लोगों ने उनकी गाड़ी पर भी बेकाबू होकर पत्थर फेंके।

इतिहास के झरोखे से अबोहार किताब से लिए गए अंश

इसके बाद बिना चेतावनी के जनता पर पुलिस ने ओपन फायर कर दिया। इस फायरिंग में 18 साल के नवीन और 20 साल के राजेंद्र मारे गए। नियम के अनुसार, पुलिस चेतावनी देकर फायरिंग करती है, लेकिन नियमों को दरकिनार रख कर लिए गए फैसले के कारण 2 लोगों की जान चली गई।

बदले वाला दिन- 12 मार्च 1993

घटना को देखते ही देखते दो ढाई साल बीते, लेकिन स्थानीयों में गुस्सा कम नहीं हुआ। 17 अक्टूबर 1992 में डीएसपी सुरजीत सिंह ग्रेवाल अबोहार में तैनात किए गए। अपनी तैनाती के पहले दिन ही उन्होंने आतंकी हमले में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने के लिए हमले के मास्टरमाइंड (चानन सिंह- Chanan Singh) को लाने का फैसला किया। उन्होंने गुरमुख सिंह (चानन सिंह के दामाद) की मदद की और मामले को शांत कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने गुरमुख से निजी रिश्ते बनाए और उसे पूर्ण रूप से आश्वस्त कर दिया।

कुछ दिन बाद चानन सिंह ने अपने दामाद के घर में आना-जाना शुरू कर दिया। हालाँकि शुरू में वह काफी सतर्क रहता, लेकिन ग्रेवाल के खूफिया सूत्रों ने जानकारी दे दी कि चानन गुरमुख की बेटी की शादी और बेटे की शगुन समारोह में आने वाला है। ग्रेवाल ने फौरन एक टीम बनाई। सबको मजदूरों के कपड़े पहनाए और खुद सिख स्टूडेंट फेडरेशन के मुखिया दलजीत सिंह उर्फ बिट्टू बन गए।

डीएसपी ग्रेवाल (साभार: इतिहास के झरोखे से अबोहार)

वेन्यू पर पहुँचते ही उन्होंने गुरमुख के बेटे को अपनी पहचान बिट्टू बताई। इसके बाद वह उन्हें चानन के पास ले गया। 55 साल का चानन चरपाई पर बैठा था। उसे मालूम हो गया कि ये बिट्टू नहीं है और उसने ग्रेवाल पर गोली चला दी। खुशकिस्मती बस ये थी कि ग्रेवाल पूरी तैयारी के साथ उसको पकड़ने गए थे। कुछ ही सेकेंड में चानन का शव उनके हाथ में था। 

डीएसपी के इस प्रयास ने उन पीड़ित परिवारों को थोड़ी राहत जरूर दी, जिन्होंने 1990 में अपने परिजनों को खो दिया था। लेकिन ये कहना कि घाव पूरी तरह भर गए, हमेशा असंभव होगा।

अबोहर की कहानी सामने लाने वाले मथुरा दास हितैषी

उक्त सारी कहानी और उसका अहम भाग, दिवंगत मथुरा दास हितैषी की किताब- ‘इतिहास के झरोखे से अबोहर’ से लिया गया है। उनकी किताब के कारण आज अबोहर की कहानी लोगों तक पहुँचने में सफल हुई। एक स्वतंत्रता सेनानी, हितैषी को उनका सरनेम उनके सामाजिक कार्यों के कारण मिला था। इसका अर्थ सबका भला करने वाला होता है। पीएनबी में बैंक मैनेजर रहते हुए और बाद में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद भी उन्होंने कई लोगों की मदद की।

स्वर्गीय मथुरा दास हितैषी

‘माई बेबी, माई प्रिंसेज, माई लव’: जैकलीन फर्नांडीस को महाठग सुकेश ने जेल से लिखा ‘हैप्पी होली’ वाला लेटर, कहा- जो रंग हुए फीके उन्हें वापस लाऊँगा

जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडीस के लिए लव लेटर लिखा है। ये लेटर वैसे तो मीडिया के नाम है लेकिन इसमें लिखी बातें जैकलीन के प्रति सुकेश का प्रेम जाहिर करने वाली हैं। लेटर में पहले मीडिया बंधुओं को हर तरह का सपोर्ट देने के लिए ‘धन्यवाद’ कहा गया है और फिर जैकलीन को ‘होली की शुभकामनाएँ’ दी गईं हैं।

इस लेटर में लिखा है, “मैं बहुत कमाल की इंसान, शानदार और मेरी सदाबहार जैकलीन को होली की शुभकामनाएँ देता हूँ…. रंगों के त्योहार के दिन मैं तुमसे वादा करता हूँ, जो रंग फीके या गायब हो गए हैं उन्हें 100 बार वापस लाऊँगा। मेरे अंदाज में कहूँ तो यह साल बहुत चमकदार और रौशन होगा। मैं इसे सुनिश्चित करूँगा और यह मेरी ज़िम्मेदारी भी होगी।”

आगे सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को ‘आई लव यू’ कहा। साथ ही बोले, “माई बेबी, हमेशा मुस्कुराती रहो, तुम जानती हो कि तुम मेरे लिए क्या हो, और कितनी अहम हो…लव यू माई प्रिंसेज, मिस यू, माई बी, माई बोम्मा, माई लव।”

सुकेश ने मेरे साथ खेला: जैकलीन फर्नांडीस

बता दें कि एक तरफ सुकेश चंद्रशेखर जेल में बंद रहकर जैकलीन के लिए अपनी भावनाएँ व्यक्त कर रहा है। वहीं जैकलीन फर्नांडीस अब महाठग से परेशान हो चुकीं हैं। उन्होंने दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के वक्त कहा कि सुकेश ने उनकी भावनाओं के साथ खेला और उनकी जिंदगी को नरक बना दिया। जैकलीन के अनुसार, उन्हें न सिर्फ गुमराह किया गया बल्कि करियर के साथ उनके आम जीवन को भी तबाह कर दिया गया।

जैकलीन ने बताया था कि सुकेश उनसे एक बड़ा अधिकारी बनकर मिला था और उसके बाद से वो सिर्फ उन्हें बेवकूफ बनाता था। उसने अभिनेत्री से कहा था कि वो ‘सन टीवी’ का मालिक है। उसके पास कई प्रोजेक्ट्स हैं जो लाइन में हैं। मुलाकात के दौरान सुकेश ने खुद को अभिनेत्री का फैन बताया था और साउथ में काम करने का लालच भी दिया था। वो रोज जैकलीन को 3 बार फोन करता था।

वहीं जैकलीन का कहना था कि जब सुकेश 200 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में जेल गया तब उन्हें उसकी सच्चाई पता चली। उसके बाद दोनों में कोई बात नहीं हुई।

त्रिपुरा में फिर एक बार माणिक ‘सरकार’: 8 मार्च को CM पद की शपथ लेंगे साहा, BJP विधायक दल की बैठक में लगी मुहर, लेफ्ट की दोबारा हुई है ‘सफाई’

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की थी। हालाँकि, चुनाव परिणाम आने के बाद से मुख्यमंत्री पद के लिए संशय बना हुआ था। लेकिन, अब यह संशय खत्म हो गया है। डॉक्टर माणिक साहा (Manik Saha) एक बार फिर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। सोमवार (6 मार्च, 2023) हुई विधायक दल की बैठक में यह फैसला लिया गया।

दरअसल, त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के परिणाम 1 मार्च 2023 को सामने आए थे। इसके दो दिन बाद यानी 3 मार्च को माणिक साहा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था। इसके बाद से एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री पद के लिए पूर्व सीएम बिपल्ब कुमार देब का नाम सामने आ रहा था। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हल्के में प्रतिमा भौमिक के नाम की भी चर्चा थी। लेकिन विधायक दल की बैठक बल में माणिक साहा के नाम पर मुहर लग गई।

बता दें कि त्रिपुरा में शपथ ग्रहण समारोह होली के दिन यानी बुधवार (8 मार्च, 2023) को होना है। शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज नेताओं के पहुँचने की बात कही जा रही है। इसके अलावा, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पहुँचने की भी संभावना है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के मतदान 16 फरवरी को हुआ था। परिणाम 1 मार्च को सामने आए। इसमें त्रिपुरा विधानसभा की 60 सीटों में से 32 सीटें हासिल कर भाजपा ने स्पष्ट बहुत प्राप्त किया था। यही नहीं, भाजपा के सहयोगी दल इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) के खाते में एक सीट गई थी। वहीं, वशंज प्रद्योत किशोर देबबर्मा की पार्टी टिपरा मोथा पार्टी को 13 और कम्युनिस्ट-कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 सीटें मिली थीं। कुल मिलाकर देखें तो त्रिपुरा में अब 33 सीटों के साथ भाजपा गठबंधन की सरकार बनने जा रही है।

बता दें कि त्रिपुरा के तत्कालीन सीएम बिपल्ब कुमार देब ने मई 2014 में अचानक से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के कुछ ही घण्टों बाद भाजपा ने माणिक साहा के चेहरे का ऐलान कर दिया था। मणिका साहा का नाम अचानक से सामने आने के बाद कई लोग हैरान रह गए थे। हैरानी का एक कारण यह भी था कि मुख्यमंत्री बनने से महज 6 साल पहले ही वह कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। यही नहीं, सीएम की कुर्सी सँभालने के कुछ महीने पहले ही उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया था। हालाँकि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा की कुर्सी छोड़ दी थी। अब एक बार फिर पार्टी और विधायकों ने उन पर विश्वास जताया है।

G20 के 10 देशों में प्रवास, भारतीय संस्कृति-दर्शन से कराया परिचित: विदेश से आकर माँ भारती की सेवा में लगे स्वामी विवेकानंद के कई शिष्य, आज़ादी में भी भूमिका

1 दिसंबर, 2022 से 30 नवंबर 2023 तक, वैश्विक तौर पर भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण काल है, इस काल में भारत के पास ‘ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20)’ की अध्यक्षता है। इस ‘ग्रुप ऑफ ट्वेंटी’ (G20) में विश्व के सबसे ताकतवर विकसित और विकासशील देश शामिल हैं, जो विश्व का 85% घरेलू उत्पाद, 75% व्यापार, और जनसंख्या के दो-तिहाई से अधिक आबादी को सम्मिलित करता है। इस G20 ग्रुप में 19 देश (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं।

इस वर्ष (G20) बैठक 9–10 सितम्बर को दिल्ली , भारत में आयोजित होगी जिसमें G20 ग्रुप के अतिरिक्त 9 अतिथि देश और अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठन भी आमंत्रित हैं। भले ही मुख्य बैठक दिल्ली में हो रही हो, लेकिन 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक होने वाले अनेक महत्वपूर्ण बैठकें एवं कार्यक्रम भारत के लगभग हर प्रान्त में आयोजित किया जा रहा है। पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हर प्रान्त की भागीदारी के साथ-साथ जन भागेदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।

8 नवंबर, 2022 को भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले G20 सम्मेलनों के लोगो , थीम और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया व्याख्यान पथ प्रदर्शक के तौर पर काम आएगा। पिछले कुछ वर्ष विभिन्न कारणों से मानवता के लिए अत्यंत कठिन रहे हैं, चाहे वह कोविड-19 महामारी हो या फिर आर्थिक तंगी, या कुछ देशों के बीच युद्ध की स्थिति बनना। इस दौर में भारत अपने प्राचीन संदेश ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ या ‘एक पृथ्वी – एक कुटुंब, एक भविष्य’ के नारे के साथ विश्व को शांति के साथ प्रगति का संदेश देने के लिए तैयार है।

भारत का संदेश स्पष्ट है वह कह रहा है कि, इस पृथ्वी पर रहने वाले हर जीव जंतु परस्पर एक परिवार कि तरह जुड़े हुए हैं जिनका भविष्य भी अलग नहीं बल्कि एक है। कटुता एवं अंधकार से भरे वैश्विक वातावरण में भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का दीप जलाने को तैयार है। भारत के लिए यह कार्य नया नहीं है। इस विश्व बंधुत्व एवं वेदांत के प्राचीन संदेश को लेकर ही आज से लगभग 128 वर्ष पहले (1893) स्वामी विवेकानंद पश्चिम के प्रवास पर गए थे।

स्वामी विवेकानंद का G20 सदस्य देशों में प्रवास

स्वामीजी ने अपने 39 वर्ष के जीवन काल में 2 बार पश्चिम का प्रवास किया पहला, मई 1893 से जनवरी 1897 तक और दूसरी बार जून 1899 से नवंबर/दिसंबर 1900 तक। इस बीच उन्होंने G20 ग्रुप में सम्मिलित 19 देशों में 10 का प्रवास किया है इसमें भारत, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्वामीजी यूरोपीय संघ में शामिल देशों का भी प्रवास किया था।

स्वामीजी जहाँ-जहाँ गए, उन्होंने उस देश की संस्कृति को समझने की कोशिश की और साथ ही साथ बहुत ही प्रखरता से भारतीय संस्कृति , दर्शन एवं जीवन मूल्यों से पश्चिम को परिचित करवाया। वह पश्चिम को भारत की सनातन संस्कृति से परिचय करवाने वाले पहले व्यक्ति थे। जब स्वामीजी ने भारत के विश्व बंधुत्व, वेदांत दर्शन, वसुधैव कुटुम्बकम् के मूल्यों को पश्चिम के सामने रखा तो पश्चिमी के लोगों की कल्पना में भारत के प्रति एक सकारात्मक बदलाव आया। भारत कोई साँप-सपेरों का देश नहीं बल्कि उसके पास विश्व को देने के लिए ज्ञान और आध्यात्मिकता का संदेश – यह पश्चिम को पहली बार ज्ञात हुआ।

कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, तुर्किये में स्वामीजी अधिक समय तक नहीं रुक पाए लेकिन, संक्षिप्त प्रवास में भी वह अपनी छाप सदा के लिए छोड़ आए। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वामीजी ने अधिक समय बिताया और इसके परिणाम स्वरूप स्वामीजी से प्रभावित होकर उनके अनेक अनुयायी सेवा कार्य के लिए भारत आए, जिनमें भगिनी निवेदिता, सिस्टर क्रिस्टीन मुख्य हैं। भगिनी निवेदिता ने तो स्त्री शिक्षा के कार्य के साथ-साथ भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वामीजी के अनुयायी भारत में आकर भारतीय हो गए। न कोई सेवा के नाम पर धर्मांतरण का छलावा न कोई मान-सम्मान की चाहत। उन्होंने निस्वार्थ भाव से माँ भारती की सेवा की। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वामीजी ने अनेकों व्याख्यान भी दिए एवं कक्षाएँ भी ली, जिनमें हज़ारों लोग सहभागी हुए। स्वामीजी अपनी कक्षाओं में प्राचीन भारतीय शास्त्र श्रीमद्भगवद्गीता , उपनिषद, व्यास के वेदांत सूत्र और कभी-कभी नारद के भक्ति सूत्र पर चर्चा करते थे। सिस्टर क्रिस्टीन के अनुसार “करोड़पति लोग स्वामीजी के चरणों के सम्मुख फर्श पर बैठकर खुश थे।

जिन देशों में स्वामीजी ने यात्रा की है, उनके अतिरिक्त G20 के कुछ ऐसे सदस्य भी हैं, जहां स्वामीजी प्रत्यक्ष तौर पर नहीं जा पाए लेकिन रामकृष्ण मिशन की शाखाओं के माध्यम से उनका संदेश इन स्थानों तक पहुँचा। इन देशों मे अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। स्वामीजी ने जिस ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और विश्व बंधुत्व के संदेश से पश्चिम को अवगत कराया था, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी संदेश को अग्रसर करने का कार्य कर रहे हैं। आज के वैश्विक वातावरण में यह संदेश अनेक सकारात्मक संभावनाओं को जन्म देगा और नकारात्मक गतिविधयों का खात्मा करेगा।

(लेखक निखिल यादव ‘विवेकानंद केंद्र’ के उत्तर प्रान्त के युवा प्रमुख हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शोधकर्ता है।)

‘हिन्दू विकास दर’ नहीं, ‘नेहरू विकास दर’… कई झूठी भविष्यवाणियाँ करने वाले रघुराम राजन ने चुने गलत शब्द, कॉन्ग्रेस की आर्थिक नीतियों से ऐसे हुआ नुकसान

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने भविष्यवाणी की है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ‘हिंदू विकास दर’ की ओर बढ़ रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि एनएसओ (NSO) द्वारा राष्ट्रीय आय के जो आँकड़े जारी किए गए हैं, वह चिंताजनक हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी की वृद्धि दर 13.2 प्रतिशत थी। वहीं, दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी की वृद्धि 6.3 प्रतिशत थी। यह अब अब तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में घटकर 4.4 प्रतिशत रह गई है।

इससे पहले रघुराम राजन ने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना वायरस महामारी के कारण आई मंदी से उबरने में भारत को कई साल लगेंगे। हालाँकि, भारत एक साल में ही अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में कामयाब रहा। लेकिन, रघुराम राजन ने अपनी ‘झूठी भविष्यवाणी’ के लिए कभी माफी नहीं माँगी। वह बीते 5 वर्षों से लगातार भारत में आने वाले आर्थिक संकट की भविष्यवाणी कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी ऐसी सभी भविष्यवाणी गलत साबित हो रहीं हैं।

मुद्दे पर लौटें तो रघुराम राजन ने आर्थिक विकास में मंदी का उल्लेख करते हुए ‘हिंदू विकास दर’ शब्द का उपयोग किया है। रघुराम राजन 2013 से 2016 तक आरबीआई के गवर्नर थे। इस दौरान देश स्थिर विदेशी मुद्रा भंडार समेत कई अन्य विवादों से घिरा रहा। हालाँकि, उनके पद से हटने के बाद से आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार 600 बिलियन से अधिक हो गया है। वास्तव में यह एक ऐसा आँकड़ा है जो भारतीय इतिहास में विदेशी मुद्रा भंडार का एक रिकॉर्ड है।

‘हिंदू विकास दर’ क्या है

भारत का 6000 से अधिक वर्षों का इतिहास गौरवशाली और सभ्यतागत रहा है। इस लंबी अवधि के दौरान, भारत गर्व से वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रतीक के रूप में चमकता रहा। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत के स्थान को एक अमेरिकी इतिहासकार विल डुरंट की पुस्तक ‘द केस फॉर इंडिया’ में शानदार ढंग से बताया गया है। सत्रहवीं शताब्दी तक, भारत का सकल घरेलू उत्पाद विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का एक तिहाई था। यहाँ तक कि इस्लामी आक्रांताओं द्वारा की गई 800 वर्षों की लूट के बाद भी भारत में संसाधनों की कमी नहीं हुई। इसके बाद अंग्रेजों की लूट के बाद ही भारत में धन की कमी हुई। इसके बाद भारत को साल-दर-साल लगातार अकाल का भी सामना करना पड़ा।

‘हिंदू विकास दर’ शब्द साल 1978 में तथाकथित अर्थशास्त्री राज कृष्ण द्वारा गढ़ा गया था। यह उन्होंने साल 1950 से 1980 तक जीडीपी वृद्धि दर का उल्लेख करने के लिए तैयार किया था। ‘हिंदू विकास दर’ पूरी तरह से एक गलत शब्द है, क्योंकि उस समय और बाद में भी देश की अर्थव्यवस्था में हिंदुओं का सबसे बड़ा योगदान था। निश्चित रूप से भारत में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। लेकिन, तत्कालीन आर्थिक योजनाकारों ने हिंदुओं पर विकास की जिम्मेदारी रख दी थी।

1950-80 के दशक तक देश के विकास को लेकर कई प्रयास किए जा रहे थे। हालाँकि इसके बाद भी विकास कमोबेश स्थिर रहा। वास्तव में उस दौरान विकास दर करीब 3.5% थी। इसलिए उस समय स्थिर विकास दर को ‘हिंदू विकास दर’ कहते हुए एक गलत शब्द के प्रयोग की शुरुआत की गई। चूँकि उस समय हिंदुओं को नीति निर्माण में कोई प्रत्यक्ष अधिकार नहीं था, इसलिए भी विकास दर को इस तरह का नाम देना अनुचित था।

हिंदू नहीं, नेहरू विकास दर

जवाहर लाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। वह 1964 तक पद पर बने रहे। अधिकांश आर्थिक नीतियाँ नेहरू द्वारा तय या बनाई गई थीं। इसलिए, उनके शासन के दौरान और उसके बाद के वर्षों के आर्थिक विकास के लिए ‘नेहरू विकास दर’ शब्द कहीं अधिक सही प्रतीत होता है।

नेहरू समाजवाद के प्रति इतने जुनूनी थे कि भारत सरकार होटल भी चलाती थी। उस समय बिड़ला और टाटा जैसे मेहनती व्यक्तियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने की स्वतंत्रता नहीं दी गई थी। नेहरू की इस अदूरदर्शी दृष्टि को विकास की धीमी दर के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

नेहरूवादी आर्थिक नीतियाँ इतनी अधिक गलत थीं कि देश लगभग हमेशा खाद्य संकट से घिरा हुआ था। इतना ही नहीं, उनकी अदूरदर्शी दृष्टि उन्हें नदी बांधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहने के लिए प्रेरित करती है। नेहरूवादी नीतियों को उनकी बेटी इंदिरा गाँधी ने भी आगे बढ़ाया। इंदिरा गाँधी ने बैंकिंग, कपड़ा, कोयला, इस्पात, ताँबा जैसे क्षेत्रों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इसलिए विकास की इस दर को वास्तव में ‘हिंदू विकास दर’ कहना गलत होगा, क्योंकि तत्कालीन परिस्थितियों के लिए नेहरू ही जिम्मेदार थे।

इसलिए, आर्थिक विकास की स्थिरता के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के नाम पर ‘नेहरू विकास दर’ शब्द ही बेहतर होगा।

‘अफवाह फैलाई, भय पैदा किया’: बिहार पुलिस ने Youtuber मनीष कश्यप समेत 4 लोगों के खिलाफ दर्ज की FIR, तमिलनाडु में बिहारियों को लेकर हैं मुखर

तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के खिलाफ हुई कथित हिंसा मामले में अफवाह फैलाने को लेकर बिहार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया में भ्रामक फोटो, वीडियो शेयर करने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। वहीं, तमिलनाडु पुलिस ने भी अफवाह फैलाने वाले 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

दरअसल, बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे थे कि तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के साथ हिंसा हो रही है। कुछ वीडियो में लोगों को मारपीट करते हुए भी दिखाया गया था। हालाँकि, अब इन तमाम दावों को लेकर बिहार पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा किया है। इसमें यूट्यूबर मनीष कश्यप, अमन कुमार, राकेश तिवारी तथा युवराज सिंह का नाम शामिल है।

बिहार पुलिस ने सिलसिलेवार तरीके से ट्वीट कर कहा है कि तमिलनाडु में बिहार के लोगों के साथ हो रही हिंसा को लेकर जानबूझ कर सुनियोजित तरीके से भ्रामक, अफवाह जनक तथा भड़काने वाले फोटो, वीडियो, टेक्स्ट मैसेज इत्यादि शेयर कर जनता के बीच भय का माहौल पैदा किया जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की संभावना है।

पुलिस ने कहा है कि उन्होंने 30 वीडियो एवं पोस्ट चिन्हित किये हैं। इसको लेकर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने धारा 153/153 (ए)/153 (बी)/505 (1) (बी)/505(1) (सी)/468/471/120 (बी) आईपीसी एवं आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

बिहार पुलिस ने ट्वीट में बताया है कि इसमें से एक आरोपित अमन कुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को अमन के मोबाइल में कई आपत्तिजनक पोस्ट एवं सबूत मिले हैं। मामले की लगातार जाँच की जा रही है।

वहीं, तमिलनाडु के डीजीपी सी सिलेंद्र बाबू ने कहा है कि अब यहाँ स्थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। होली के चलते कुछ लोग घर वापस लौट गए हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो वे लोग जहाँ नौकरी कर रहे थे, उनसे बात कर उन्हें रोकने की कोशिश की जाती। पुलिस अधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों से मिलकर उन्हें आश्वस्त किया है कि बिहारी या किसी अन्य राज्य के मजदूरों पर ऐसी कोई हिंसा नहीं हुई है।

डीजीपी सी सिलेंद्र बाबू ने यह भी कहा है, “हमने मीडिया में जो कुछ भी देखा है। वह सब फर्जी वीडियो हैं। इनमें से अधिकांश वीडियो का तमिलनाडु से कोई संबंध नहीं है। जिन जगहों पर उत्तर भारतीय लोग काम कर रहे हैं, वहाँ हमने पुलिस गश्त तेज कर दी है। हिंदी जानने वाले पुलिसकर्मी लगातार उनके संपर्क में हैं। हमने चैनलों से फेक कंटेंट हटाने का अनुरोध किया है। वीडियो न हटाने वाले 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।”

‘कुछ लोग चाहते हैं कि न्यायपालिका विपक्ष बन जाए’: केंद्रीय कानून मंत्री ने ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ को लताड़ा, कहा – भारत सभी लोकतंत्रों की माँ

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि भारतीय न्यायपालिका को कभी भी विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालाँकि ‘कुछ लोग’ चाहते हैं कि वह ऐसी भूमिका निभाए। टुकड़े-टुकड़े गैंग को बेहतर ढंग से समझ लेना चाहिए कि अब भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की नई यात्रा पर है।

दरअसल, शनिवार (4 मार्च 2023) को ओडिशा के भुवनेश्वर में सेंट्रल गवर्नमेंट लॉ ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा “कुछ लोग देश की न्यायपालिका को विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। भारतीय न्यायपालिका इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि भारतीय न्यायपालिका को विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए किए जा रहे इन प्रयासों का न्यायपालिका खुद ही विरोध करेगी। भारतीय न्यायपालिका विपक्ष की भूमिका को कभी स्वीकार नहीं करेगी।”

किरेन रिजिजू ने यह भी कहा, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। हमें इसे अपने देश में सरकार चलाने के सिद्धांत के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है। भारत सभी लोकतंत्रों की माँ है और सरकार ने न्यायपालिका के फैसले पर कभी सवाल नहीं उठाया है।” हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर मतभेद जरूर रहे हैं।

इसके अलावा किरेन रिजिजू ने ट्विटर के जरिए टुकड़े-टुकड़े गैंग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा है कि इन गिरोहों को भारत के खिलाफ बोलने के लिए देश विरोधी विदेशी संस्थाओं से समर्थन मिलता है। ये लोग भारतीय लोकतंत्र, भारत सरकार, न्यायपालिका और रक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। इतना ही नहीं, चुनाव आयोग, जाँच एजेंसियों जैसे सभी महत्वपूर्ण अंगों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करते हैं।

उन्होंने कहा है, “टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्यों को बेहतर ढंग से समझना चाहिए कि भारत ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की नई यात्रा की शुरुआत की है। हम भारत के लोग उन्हें करारा जवाब देंगे।”

अपने संबोधन के दौरान, किरेन रिजिजू ने अफसोस जताते हुए कहा है कि कैसे सोशल मीडिया पर भारतीय न्यायपालिका की नियमित रूप से आलोचना की जाती है। अक्सर अभद्र भाषा का उपयोग किया जाता है। जब न्यायपालिका पर किसी तरह का हमला होता है तो यह देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

भाई हिस्ट्रीशीटर, गाँव की लड़की को भगाकर ब्याह: जिसे अतीक अहमद ने विजय से बनाया उस्मान, पढ़िए उसका पूरा काला चिट्ठा; मुस्लिम हॉस्टल भी सील

उमेश पाल हत्याकांड में आज (6 मार्च 2023) यूपी पुलिस ने दो बड़ी कार्रवाई की हैं। एक तो वारदात के समय पहली गोली चलाने वाले उस्मान का एनकाउंटर करके और दूसरी उस मुस्लिम हॉस्टल को सील करके… जहाँ इस पूरे मर्डर की साजिश रची गई थी। दोनों एक्शन के बाद से इन पर चर्चा तेज है। एक ओर मीडिया में उस्मान का बैकग्राउंड सामने आया है तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे लोगों का पता चला है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज स्थित मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल को सोमवार (06 मार्च, 2023) को सील किया गया है। हॉस्टल के सभी 100 से अधिक कमरों को खाली करवा दिया गया है। जानकारी के अनुसार इसी हॉस्टल के कमरा नंबर 36 में उमेश पाल हत्याकांड की साजिश रची गई थी। कमरा नंबर 36 में अतीक अहमद का गुर्गा सदाकत खान अवैध तरीके से रह रहा था।

पुलिस के अनुसार मुस्लिम होस्टल में कई तरह की अवैध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। जिसके बाद हॉस्टल को सील कर दिया गया है। सदाकत के अलावा 65 अन्य लोगों के होस्टल में अवैध तरीके से रहने की जानकारी मिली है। अवैध तरीके से रहने वाले छात्रों को बाहर निकाला जा रहा है।

दूसरी ओर उन लोगों को ढूँढ-ढूँढकर ढेर किया जा रहा जो उमेश पाल हत्याकांड में शामिल थे। इसी क्रम में आज ही मुख्य आरोपितों में से एक उस्मान उर्फ विजय चौधरी को प्रयागराज स्थित अपने गाँव के पास एनकाउंटर किया गया। विजय चौधरी की पत्नी का आरोप है कि उसके पति को फँसाकर मारा गया। हालँकि पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वह पहले भी जेल की हवा खा चुका था। खुद विजय की पत्नी सुहानी के भाई ने उसे जेल भिजवाया था।

उस्मान (विजय चौधरी) कौंधियारा थाने के बमौखर गाँव का रहने वाला था। उसका अपने ही गाँव की रहने वाली ब्राह्मण लड़की सुहानी से अफेयर चल रहा था। साल 2019 में उस्मान सुहानी को लेकर भाग गया था। मामले में सुहानी के भाई ने उस्मान के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उस्मान को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने सुहानी को भगा कर शादी कर ली थी।

उस्मान का बड़ा भाई राकेश भी हिस्ट्रीशीटर है। फिलहाल वाहन चोरी के एक मामले में वह जेल में बंद है। बाकी के 2 भाई और हैं जो शादियो में डीजे बजाने का काम करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि विजय चौधरी के उस्मान बनने की बात उन्हें पता नहीं है। कहा जा रहा है कि अतीक अहमद और उसके बेटों ने विजय को यह नाम दिया था। पुलिस ने उस्मान उर्फ विजय के धर्म परिवर्तन की जाँच की बात भी कही है।

कलक्टर के आदेश के बाद अम्बाजी मंदिर में बदल दी गई 500 साल पुरानी परंपरा, गुजरात के अम्बाजी मंदिर के प्रसाद में बदलाव: आक्रोशित हिन्दू संगठनों का अल्टीमेटम

गुजरात के बनासकांठा स्थित अंबाजी मंदिर में वितरित किए जाने वाले प्रसाद को बदल दिया गया है। मंदिर ट्रस्ट का यह फैसला भक्तों को पसंद नहीं आ रहा है। देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल अंबाजी मंदिर में वर्षों से मोहनथाल प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। इसके स्थान पर अब चिक्की के प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है और मंदिर ट्र्स्ट को प्रसाद के रूप में मोहनथाल का वितरण करने की अपील की है।

रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 500 सालों से अंबाजी मंदिर द्वारा श्रद्धालुओं को बतौर प्रसाद मोहनथाल देने की परंपरा थी। पिछले कुछ दिनों से बनासकांठ कलेक्टर के आदेश पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा मोहनथाल प्रसाद के स्थान पर भक्तों को सूखी चिक्की दी जाने लगी। बनासकांठा के कलेक्टर आनंद पटेल ने अनुसार, विदेशी पर्यटक और दूसरे देशों में बसे माता के भक्त सूखे प्रसाद की माँग कर रहे थे। उनका मानना है कि मोहनथाल के तुलना में चिक्की जल्दी खराब नहीं होता। ट्रस्ट ने इसलिए चिक्की का प्रसाद देने का फैसला किया।

ट्रस्ट के इस फैसले से भक्त और हिंदू संगठन के लोग नाराज हैं। उन्होंने प्रशासन और ट्रस्ट से प्रसाद के रूप में मोहनथाल के वितरण की अपील की है। हिंदू हित रक्षा समिति ने प्रसाद में बदलाव का विरोध किया करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समिति की तरफ से कहा जा रहा है कि प्रसाद में बदलाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा इसके लिए जरूरत पड़ी तो मंदिर भी बंद कराई जा सकती है। कहा जा रहा है कि ट्रस्ट के इस फैसले से विधवा औरतों समेत सैकड़ों ऐसे लोग बेरोजगार हो गए हैं जो मोहनथाल बनाते थे। राज्य की बीजेपी युवा इकाई द्वारा भी अंबाजी मंदिर के प्रसाद में हुए बदलाव का विरोध किया गया है।

बता दें मोहनथाल बेसन की बनी प्रसिद्ध गुजराती बर्फी है। इसे शुद्ध देशी घी से तैयार किया जाता है। अंबाजी को भोग लगने वाले थाल में इसे चढ़ाया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर के प्रसाद के लिए बनास डेयरी और अमूल डेयरी को चिक्की बनाने का ठेका देने पर विचार किया जा रहा है।

राजस्थान में तमिलनाडु के 12 पुलिसकर्मी गिरफ्तार: महिला को पकड़कर ले जा रही थी, चोरी के केस से नाम हटाने को माँगे थे ₹25 लाख

बिहार के मजदूरों के साथ हिंसा को झुठलाने के आरोपों में घिरी तमिलनाडु पुलिस के 12 जवान राजस्थान में गिरफ्तार किए गए हैं। गोल्ड चोरी के मामले में कार्रवाई को लेकर अजमेर आई तमिलनाडु पुलिस की टीम पर केस से नाम हटाने के एवज में 25 लाख रुपए घूस माँगने का आरोप है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 4 मर्चा 2023 की देर रात इन पुलिसकर्मियों को अजमेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया। वे अपने साथ एक आरोपित महिला को भी ले जा रहे थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस 105 तोला सोना चोरी के एक मामले की जाँच कर रही थी। चोरी किए गए सोने की कीमत तकरीबन 52 लाख रुपए बताई जा रही है। तमिलनाडु पुलिस के जवान अजमेर के भिनाय थाना क्षेत्र के रहने वाले पन्नालाल सोनी और उनकी पत्नी सोनिया के घर पहुँचे। जानकारी के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस आरोपित सोनिया को अपने साथ ले गई। साथ ही केस से नाम हटाने के लिए 25 लाख रुपए की माँग की।

4 मार्च 2023 को अजमेर एसीबी को पन्नालाल सोनी ने इसकी शिकायत दी। अजमेर एसीबी ने अपने स्तर पर जाँच कराई तो आरोप सही निकले। इसके बाद दक्षिण भारतीय राज्य के पुलिसकर्मियों को एसीबी की 2 टीमों ने देर रात हिरासत में ले लिया। पकड़े गए तमिलनाडु पुलिस के जवानों से पूछताछ की जा रही है।

एसीबी के डीआईजी समीर कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि प्रारंभिक पूछताछ में तमिलनाडु में सोना चोरी को लेकर चार मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। चोरी की घटना में भिनाय के भैरूखेड़ा के रहने वाले लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इन्हीं लोगों से बरामदगी के लिए तमिलनाडु की पुलिस अजमेर पहुँची थी। इस संबंध में तमिलनाडु की पुलिस ने जरूरी दस्तावेज भी दिखाए हैं।

तमिलनाडु पुलिस द्वारा दिए गए दस्तावेजों में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी दिखाई गई है। राजस्थान पुलिस ने तमिलनाडु पुलिस से संपर्क कर मामले की जानकारी दे दी है।