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‘2 साल से हर महीने ₹10 लाख दे रहा, मेडिकल-स्कूल फीस का खर्च अलग से’: बीवी के आरोपों पर बोले नवाजुद्दीन सिद्दीकी – मेरा करियर बर्बाद करना उसकी मंशा

बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) ने सोमवार (6 मार्च 2023) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर बीवी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजना किशोर पांडे के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि वह कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं।

तीन पन्नों के नोट में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी सफाई देते हुए लिखा, “मेरी खामोशी की वजह से मुझे हर जगह बुरा आदमी कहा जाता है। मैं अपने बच्चों के कारण चुप हूँ, क्योंकि यह सारा तमाशा कहीं न कहीं मेरे छोटे-छोटे बच्चे पढ़ लेंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, प्रेस और लोगों का एक समूह एकतरफा और हेरफेर करके बनाए गए वीडियो के आधार पर मेरे चरित्र हनन का आनंद ले रहे हैं।” उन्होंने कहा कि वह कुछ प्वॉइंट्स को साफ करना चाहते हैं।

अभिनेता ने लिखा, “सबसे पहले मैं और आलिया कई सालों से एक साथ नहीं रह रहे हैं। हम पहले से तलाकशुदा हैं, लेकिन हमारे बीच अंडरस्टेंडिंग सिर्फ हमारे बच्चों के लिए थी। दूसरा क्या कोई जानता है, मेरे बच्चे भारत में क्यों हैं और स्कूल क्यों नहीं जा रहे हैं, 45 दिन से। स्कूल वाले मुझे हर दिन लेटर भेज रहे हैं कि यह बहुत लंबी अनुपस्थिति है। मेरे बच्चों को पिछले 45 दिनों से बंधक बना लिया गया है और दुबई में उनकी स्कूली शिक्षा प्रभावित हो रही है।”

‘पिछले 2 सालों से हर महीने 10 लाख रुपए दिए जा रहे’

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया आलिया को पिछले 2 सालों से हर महीने 10 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं, बच्चों के साथ दुबई शिफ्ट होने से पहले आलिया को 5 से 7 लाख रुपए महीने के दिए जा रहे थे। बच्चों के स्कूल की फीस, मेडिकल और ट्रैवल का खर्चा अलग से दिया जाता है। नवाजुद्दीन ने आगे दावा किया, “पैसे माँगने के बहाने आलिया ने मेरे बच्चों शोरा और यानी को मुंबई बुलाने से पहले पिछले 4 महीनों के लिए दुबई में छोड़ दिया। मैंने उनकी 3 फिल्मों को भी फाइनेंस किया है, जिसमें मुझे करोड़ों रुपए का खर्चा आया। यह सब सिर्फ इसलिए किया, ताकि उनकी आय का स्रोत बन सके, क्योंकि वह मेरे बच्चों की अम्मी है। उसे मेरे बच्चों के लिए शानदार कारें दी गई थीं, लेकिन उसने उन्हें बेच दिया और वो पैसे खुद पर खर्च कर दिए। मैंने अपने बच्चों के लिए मुंबई के वर्सोवा में सी फेसिंग एक अपार्टमेंट भी खरीदा है। आलिया को उस अपार्टमेंट का मालिक बनाया गया, क्योंकि अभी मेरे बच्चे छोटे हैं। मैंने अपने बच्चों के लिए दुबई में एक अपार्टमेंट खरीदा है, जहां वो भी लग्जरी लाइफ जीती है।”

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ फिल्म के अभिनेता ने आलिया पर आरोप लगाया कि वह यह सब केवल पैसों के लिए कर रही है। वह और पैसे चाहती है और इसलिए उसने उन पर और उनकी अम्मी पर कई मुकदमे दायर किए हैं। यह उसकी दिनचर्या है, उसने पहले भी ऐसा ही किया है और अपनी माँग के अनुसार भुगतान किए जाने पर केस वापस ले लेती है।

‘मेरा करियर बर्बाद करने के लिए ये सब कर रही’

बीवी के घर से निकालने वाले आरोप पर एक्टर ने कहा, “मेरे बच्चे जब भी छुट्टियों में भारत आते हैं, तो वो अपनी दादी के पास ही रहते हैं। कोई उन्हें घर से कैसे निकाल सकता है। मैं खुद उस वक्त घर में नहीं था। वह घर से निकालने वाला वीडियो क्यों नहीं बनाती, जबकि वह हर चीज का वीडियो बना लेती है। उसने इस नाटक में बच्चों को घसीटा है और वह यह सब सिर्फ मुझे ब्लैकमेल करने, मेरी छवि को खराब करने, मेरा करियर बर्बाद करने और अपनी नाजायज माँगों को पूरा करने के लिए कर रही है।”

नवाज यहीं नहीं रुके उन्होंने अंत में एक और बात लिखी है। उन्होंने कहा, “अंतिम लेकिन जरूरी बात। कोई भी माता-पिता कभी भी ये नहीं चाहेंगे कि उनके बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ दें या अपने भविष्य को खराब करें। वे हमेशा उनके लिए बेस्ट चाहते हैं। आज मैं जो कुछ भी कमा रहा हूँ, वह मेरे दोनों बच्चों के लिए है और इसे कोई नहीं बदल सकता। मुझे शोरा और यानी से प्यार है और मैं उनकी भलाई और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ। मैंने अब तक सभी केस जीते हैं और न्यायपालिका में मेरा विश्वास बना रहेगा।”

बता दें कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बीवी आलिया ने बीते दिनों एक वीडियो शेयर कर बच्चों और उन्हें घर में ना घुसने देने का आरोप लगाया था। आलिया ने कहा था कि नवाज ने उन्हें सड़क पर छोड़ दिया है। वीडियो में वह अपने बच्चों के साथ रोते हुए नजर आई थीं।

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तखारुद्दीन… सरकारी मशीनरी में मध्ययुगीन विध्वंसक कलपुर्जे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों को दिव्यांग कहने का नया चलन एक नई दृष्टि विकसित करने के लिए किया। उन्हीं की पहल पर मानसिक रोगियों के पुनर्वास के लिए देश के पहले राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) की कल्पना की गई। तीन साल पहले 25 एकड़ भूमि पर 181 करोड़ की लागत से इसे बनाने के लिए मध्य प्रदेश में भोपाल से सटे सीहोर जिले को चुना गया। चार साल बाद यह संस्थान एक विचित्र कारण से विवाद में है, जिसकी शिकायत स्वयं प्रधानमंत्री तक गई और जाँच शुरू हुई।

विवाद के मूल में है प्रोबेशन पर यहाँ नियुक्त हुए डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक, जिनके कारनामे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में चर्चा में हैं। दिल्ली से दूर केंद्र सरकार का यह संस्थान एक प्रकार से लावारिस पाकर अशफाक ने अपने ढंग से चलाना शुरू किया। उसका काम केवल कार्यालयीन प्रबंधन का था, लेकिन वह तीन कोर्स की क्लासों में नियमित पढ़ाने लगा। उसकी दिव्य दृष्टि में ‘महाभारत’ विकलांगों की महागाथा है, जिसमें धृतराष्ट्र अंधा है और रानी ने अंधत्व ओढ़ लिया है। शकुनी तो विकलांग है ही। द्रौपदी ने चीरहरण के समय प्रतिकार न करके यह बताया कि वह मंदबुद्धि है। जब अति हुई तो विद्यार्थियों ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र खटीक को एक पत्र के माध्यम से इस महाज्ञान के विषय में अवगत कराया। अशफाक की कार्यशैली पर कई प्रश्न खड़े किए और बताया कि वह एक मदरसे की तरह इस महत्वपूर्ण संस्थान को चला रहा है। उसका हुलिया तबलीगी है और कार्यालय में ही नमाज चल रही है। पीएफआई या किसी जमात से उसके संबंधों की जाँच की माँग की गई।

जाँच हुई तो उसकी बहादुरी के कई और कारनामे उजागर हुए। वह निजी सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करता हुआ मिला। मनमाने भुगतान खुद को ही करता रहा। विद्यार्थियों ने बताया कि उसके आने के बाद विशेष प्रकार के समुदाय के लोगों की आवक आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई। ऐसा क्या हुआ कि अचानक समुदाय विशेष में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी? मध्य प्रदेश के मुख्य धारा के मीडिया में यह विषय लगभग गायब है। अशफाक को हटाया नहीं गया है। NIMHR केंद्र का निदेशक एक आईएएस अफसर होता है, जिसने कभी आकर देखा तक नहीं कि यहाँ चल क्या रहा है? अपनी नाकामी को छिपाने के लिए अब जाँच के नाम पर लीपापोती जारी है।

दो सीएम राइज स्कूल के ऐसे ही प्रकरण इन्हीं दिनों विवादों में आए। विदिशा जिले के एक स्कूल में प्राचार्य शाहीन फिरदौस ने स्कूल प्रांगण में मजार बनवा दी, जबकि वहाँ कोई दफन नहीं है। जाँच में पता चला कि स्कूल की दो बीघा जमीन पर बगल के कब्रिस्तान का कब्जा होने दिया और नपती होने पर भी फेंसिंग नहीं कराई। उसे केवल निलंबित करके बचा लिया गया। शिक्षा विभाग कब्रिस्तान के माईबापों से वक्फ बोर्ड में उलझा हुआ है। राजधानी भोपाल के ही एक सीएम राइज स्कूल के बारे में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अनूप दुबोलिया की फ्रंट पेज खबर है कि वर्ग विशेष के आचार्य क्लास रूम में ही नमाज फरमा रहे हैं और किसी विवाद में उलझने की बजाए ‘नेत्रहीन’ प्राचार्य का कथन है कि उसने तो कभी देखा ही नहीं! कुछ ही महीनों पहले भोपाल के सेंट्रल स्कूल में कब्र बनाकर नाजायज कब्जे का विवाद सामने चुका है।

पुरातत्व विभाग ने एक ऐतिहासिक संकुल के कुछ केयरटेकर्स को पिछले साल हटाया है। पता यह चला कि इनमें से एक पुरानी मस्जिद पर नियुक्त केयरटेकर कोई और नहीं, देवबंद से निकला एक मौलवी है जो बिला नागा पाँचों वक्त की नमाज के इंतजाम करता है। वह समझता है कि उसे इसी काम का वेतन मिलता है। इस संकुल में सवा करोड़ रुपए शासन ने कुछ वर्षों में स्वीकृत किए थे। इसमें से आधी से ज्यादा राशि केवल इसी मस्जिद परिसर को चमकाने में फूँक दी गई, जबकि वहाँ पर्यटकों की चहलपहल न के बराबर थी। यह शुभ कार्य भी ऐसे ही किसी मोहम्मद अशफाक या शाहीन फिरदौस जैसे एक सज्जन की कृपा से चलता रहा।

इंदौर के शासकीय नवीन विधि कॉलेज में फरहत खान की किताब को लेकर प्राचार्य इनामुर्रहमान, प्रो. मोजिज बेग और प्रकाशक पर केस दर्ज हुआ था। फरहत फरारी में कहीं इलाज कराते हुए पुणे में पाई गई थीं। ऐसा लगता है कि किसी ने बिना पढ़े-देखे ही किताब कॉलेज में लगा दी थी।

उत्तर प्रदेश में कमिश्नर के पद पर पहुँचे एक आईएएस अफसर का वीडियो पूरे देश ने देखा था कि वह किस तरह सरकारी बंगले पर जमाती मुखिया की तरह मीटिंग ले रहा है। मीडिया में उसका नाम इफ्तिखारुद्दीन बताया गया था। वह बड़े उत्साह से अपने गुर्गों को प्रेरित कर रहा था कि दीन के काम में किस तेजी से लगना चाहिए और किस तरह लोगों को नए रंग में रंगना चाहिए? वह धर्मांतरण के लिए प्रेरक तैयार कर रहा था। एक वीडियाे ने उसके मिशन का लोकार्पण कर दिया था। हम नहीं जानते कि लोकसेवा में आने के बाद से अपनी 25 साल की सेवाओं के दौरान वह किस-किस प्रकार से दीन की खिदमत करता रहा होगा!

निश्चित ही ऐसे मामले अन्य राज्यों में भी होंगे। जम्मू-कश्मीर में तो सरकारी परिसरों में ही पाँच वक्त की नमाजों के लिए इंतजाम कर लिए गए थे। पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारी राडार पर आए, जो दीन की ‘धमाकेदार खिदमत’ करने वालों के साथ मिले हुए थे।

जब मीडिया में विवाद प्रकाशित होते हैं, तब संभवत: इन पर समग्र दृष्टि नहीं जाती। वह हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं जैसी सामान्य कवरेज लगती है। लेकिन दुर्घटनाएँ यह तो बताती ही हैं कि देश की सड़कें चरमराई हुई हैं। यातायात प्रबंधन कबाड़ हो चुका है। क्या सरकारी पदों पर बैठे ‘विशेष प्रकार के वर्ग’ का यह आचरण किसी ट्रेंड विशेष को स्पष्ट नहीं करता? क्या यह भारत के इस्लामीकरण के अनेक स्तरों पर जारी प्रयासों की ही एक सामान्य झलक है, जिसमें सारी कड़ियाँ आपस में जुड़ी हुई रही हैं और राजनीति, प्रशासन, खेल, सिनेमा, साहित्य, मीडिया तक ये विस्तृत हैं। क्या जैश और लश्कर समेत सारी जमातें, हुर्रियतें और लीगें मिलकर बचे-खुचे भारत को खरोंचने-खींचने-खसोटने में लगे हैं? क्या ऐसे लोककसेवक सेवा के योग्य हैं?

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तिखारुद्दीन या इनामुर्रहमान को यह भान भी नहीं होगा कि वे अपने आचरण से स्वयं को विध्वंसक विचार की मध्ययुगीन मेगा मशीन के गंदे कलपुर्जे बनाए हुए हैं!

जेल में गीता पढ़ेंगे मनीष सिसोदिया, कोठरी में लगाएँगे ध्यान: कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, 10 मार्च को बेल पर सुनवाई

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की होली तिहाड़ जेल में मनेगी। कोर्ट ने 7 दिन की सीबीआई हिरासत के बाद सिसोदिया को 20 मार्च 2023 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है। सीबीआई के वकील ने सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं की थी। हालाँकि यह कहा था कि जरूरत पड़ने पर 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते है।

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए मनीष सिसोदिया शनिवार (4 मार्च 2023) को 2 दिनों की रिमांड पर भेजे गए थे। उनकी यह रिमांड सोमवार (6 मार्च 2023) को खत्म हो रही थी। ऐसे में सीबीआई ने उन्हें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि वह मनीष सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं कर रहे हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर अगले 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते हैं।

सीबीआई के वकील की इस बात को सुनने के बाद कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब उन्हें आगामी 20 मार्च तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा मनीष सिसोदिया के आवेदन पर कोर्ट ने उन्हें जेल के अंदर चश्मा, भगवद गीता, डायरी, पेन तथा एमएलसी द्वारा निर्धारित दवाएँ रखने की अनुमति दी है। साथ ही, जेल अधीक्षक को मनीष सिसोदिया की मेडिटेशन सेल में रखने की अपील पर विचार करने का निर्देश दिया है। उनकी जमानत याचिका पर 10 मार्च को सुनवाई की जाएगी

मनीष सिसोदिया गिरफ्तारी

बता दें कि सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया से करीब 8 घण्टे पूछताछ की थी। पूछताछ में सहयोग न करने के कारण सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 27 फरवरी 2023 को उन्हें कोर्ट में पेश किया था। जहाँ से कोर्ट ने सिसोदिया को 5 दिनों की रिमांड में भेजा था। इसके बाद 28 फरवरी को कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने फौरन सुनवाई की माँग करते हुए सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट ने सिंघवी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सिसोदिया को फटकार लगाते हुए पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

फिर शुक्रवार (03 मार्च 2023) को पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने CBI की पूछताछ में सहयोग का हवाला देकर जमानत माँगी। सिसोदिया की तरफ से कहा गया कि पूछताछ के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाएगा वे हाजिर हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कस्टडी में रखने की कोई वजह नहीं है। इस जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च 2023 को फैसला सुनाएगा।

उमेश पाल पर गोली चलाते CCTV में दिखा उस्मान, एनकाउंटर के बाद पत्नी कह रही- नाम विजय चौधरी तो मुसलमान कैसे हुए, अतीक अहमद को नहीं जानते

उमेश पाल मर्डर केस के बाद यूपी पुलिस के एनकाउंटर में मरने वाला उस्मान चौधरी उर्फ विजय चौधरी अतीक का खास शूटर था। वारदात के दिन उसी ने दुकान से निकलकर सबसे पहली गोली उमेश को मारी थी। उसकी फोटो-वीडियो सब सीसीटीवी में कैद हुई थी। हालाँकि इन सबके बावजूद उस्मान की पत्नी मीडिया में आकर कह रही है कि ये एनकाउंटर गलत हुआ है। उनके पति का हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।

सामने आए बयान में उस्मान की पत्नी को कहते सुना जा सकता है, “मेरे पति को कहीं अलग से नहीं पकड़ा। पुलिस चू&^%$ बना रही है। वो लोग- वाले सारी रात यहीं थे, सुबह 7 बजे गए हैं। हमसे पुलिस ने कहा कि तुम अपने पति को आवाज दो, बुलाओ। हम जानते थे कि हमारे पति को ये लोग (एनकाउंटर) कर देंगे। हमें सब पता था लेकिन हमारे पति ऐसे नहीं थे। हमारे पति घोरपुर में गाड़ी चलाते थे। 24 तारीख को हमारे पति घर आए थे। इसका (उमेश पाल के मर्डर का) हमें नहीं पता है। लेकिन वो घर आए थे।”

पत्रकार ने जब कहा कि क्या वो दिन भर घर पर था? इस पर उस्मान की बीवी ने कहा, “हाँ वो पूरा दिन घर पर थे। हमारे भैया भी जेल में है। उनका केस सतना भेजा गया है। हमारे पति वहीं गए थे। 26 फरवरी से 2 मार्च तक वो वहीं थे।” मीडिया ने जब इनसे पूछा कि क्या पुलिस झूठ बोल रही है, तो पीछे से आवाज हाँ में आवाज आई।

उस्मान चौधरी की पत्नी ने मीडिया में कहा, “हम लोग हिंदू हैं पर हमें मुसलमान बताया जा रहा है। हम लोग अतीक अहमद को जानते तक नहीं हैं। पुलिस मुझे भी एनकाउंटर में मार डाले क्‍योंकि मेरे आगे पीछे कोई नहीं है, मैं किसके सहारे अपनी जिंदगी जिऊँगी। मेरे पति का नाम सिर्फ विजय चौधरी है पर उसे उस्‍मान चौधरी के नाम से बताया जा रहा है।”

बता दें कि उस्मान चौधरी का बड़ा भाई राकेश चौधरी भी एक हिस्ट्रीशीटर है। उसका केस ही सतना में चल रहा था जिसकी पैरवी के लिए उस्मान भी वहाँ गया था। इसके अलावा उस्मान खुद अतीक का शार्प शूटर था जिसका धर्मांतरण खुद अतीक अहमद ने कराया था। अब पुलिस इस मामले में भी आगे जाँच कर रही है।

₹3000 बोला था, दिए बस ₹1000… कॉन्ग्रेस मुखपत्र के लिए काम करने वाली संजुक्ता बसु ने बयाँ किया दर्द, राहुल गाँधी के लिए आर्टिकल लिखने का बताया भाव

कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड (National Herald) ने अपनी पूर्व संपादकीय सलाहकार संजुक्ता बसु (Sanjukta Basu) को कथित तौर पर राहुल गाँधी के पक्ष में लेख लिखने के लिए 3000 रुपए का भुगतान करने का वादा किया था। लेकिन उन्हें केवल 1000 रुपए प्रति लेख का ही भुगतान किया गया।

संजुक्ता बसु ​के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

संजुक्ता बसु ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पब्लिक इमेज से भले से लोगों को ऐसा लगता है कि वह लाखों रुपए कमा रही हैं। लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि वह नेशनल हेराल्ड में एक संपादकीय सलाहकार थी। लेकिन राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए उन्हें कभी लाखों रुपए नहीं दिए गए। बल्कि उन्हें 3000 रुपए देने का वादा करके केवल 1000 रुपए थमा दिए गए। पूरे पैसे भी कभी नहीं दिए गए।

उन्होंने सोमवार (6 मार्च 2023) को ट्वीट किया, “यह बेहद चौंकाने वाला है कि मैंने कभी भी पैसे न दिए जाने के बारे में खुलकर नहीं बोला है। मेरी पब्लिक इमेज से भले ही ट्रोल्स को ऐसा लगता हो कि मैं लाखों कमा रही हूँ। नेशनल हेराल्ड ने मुझे राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए लाखों रुपए दिए हो। लेकिन उन्होंने तो मुझे पूरे पैसे भी नहीं दिए। 3000 रुपए का वादा करके केवल 1000 रुपए का ही भुगतान किया।”

इसके बाद उन्होंने लिखा, “लेकिन जो चीज मुझे जीवंत महसूस कराती है, जो मुझे मेरा MOJO देती है। वह मेरी पब्लिक इमेज है। मुझे इससे बहुत प्यार है। मैं इसके लिए ही पैदा हुई थी। मैं देखने और सुनने के लिए पैदा हुई थी। लेकिन जो चीजें मैं करती हूँ, लिखती हूँ, कहती हूँ, जरूरी नहीं कि उसके लिए पैसा ही मिले।” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यूजर्स के सवालों का जवाब देने के लिए भी कई ट्वीट किए।

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इसका स्वामित्व राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के स्वामित्व वाली कंपनी यंग इंडियंन के पास है। ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा।

1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया।

मंदिर में मौलवी ने कराया निकाह: गुस्साए लोगों ने कहा- मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ, कल को इफ्तार होगा और बीफ पकेगा?

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर में स्थित सत्य नारायण मंदिर में निकाह करने की खबर सामने आई है। मंदिर के अंदर रविवार (5 मार्च, 2023) को मौलवी ने निकाह करवाया। इस दौरान यहाँ मौलवी और गवाहों के अलावा एक वकील भी मौजूद रहा।

दुल्हन के पिता महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि बेटी की शादी रामपुर के सत्यनारायण मंदिर परिसर में हुई है। शहर के लोगों ने चाहे विश्व हिंदू परिषद हो या मंदिर ट्रस्ट, सकारात्मक और सक्रिय रूप से हमारा सहयोग किया है।

ठाकुर सत्य नारायण मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का जिला कार्यालय है। सत्यनारायण मंदिर ट्रस्ट रामपुर के महासचिव विनय शर्मा ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस पर अक्सर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है। हमारी मौजूदगी में यहाँ निकाह संपन्न हुआ। सनातन धर्म हमेशा सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

वहीं, सोशल मीडिया पर निकाह की तस्वीर वायरल होने के बाद यूजर्स काफी आक्रोशित हैं। जहाँ कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इस निकाह को इस्लाम में हराम बता रहे हैं। एक यूजर लिखता है कि विशुद्ध चू#यापा है ये। मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ। कल को इफ्तार पार्टी देना और फिर वहीं बीफ पकाने लगना। शिमला के लोग इस मंदिर के पुजारी को पूछें कि धर्म में कहाँ ऐसे प्रावधान हैं? हाँ, ये लोग हिन्दू बनकर, हिन्दू रीति से विवाह करें तो समस्या नहीं। दुर्भाग्य।

विवेक मिश्र ने लिखा, “जैसे ही कॉन्ग्रेस की सरकार किसी राज्य में बनती है, ऐसी घटनाएँ प्रारंभ हो जाती हैं। क्या यह कोई साजिश है, सनातनियों के खिलाफ?”

एक और ने लिखा कि शादी हुई है तो खाना भी हुआ होगा और खाने में नाॅनवेज भी रहा होगा? धन्य है उस मंदिर के कर्ताधर्ता।

रोहन ने लिखा, “कभी मस्जिद में भी सात फेरे लेने का मौका दो।”

सरगना नाम की यूजर ने हिंदू मंदिर में निकाह करने पर कहा, “ये इस्लाम में हराम है।”

राहुल लिखते हैं, “हिंदू रीति रिवाज से होना चाहिए था….हिंदू मंदिर में कुरान पढ़ाकर निकाह शर्मनाक।”

साकेत ने लिखा कि दिखावटी भाईचारे के सारे चु#@#यापे हिंदुओ के मंदिरों में ही क्यों होते हैं? कभी इस भाईचारे को निभाने के लिए मस्जिदों का उपयोग क्यों नहीं होता है? 10 जगह पत्थर फेंककर एक जगह ऐसा ड्रामा क्यों? पहले सर तन जुदा करो फिर ह्यूमन चेन बनाकर चु-*#@#या बनाओ? बहुत धूल झोंक दी बस अब नहीं।

रेप के बाद गर्भवती हुई 15 साल की लड़की, यूट्यूब वीडियो देख घर में ही बच्ची को दिया जन्म, फिर मारकर डिब्बे में कर दिया पैक

महाराष्ट्र के नागपुर में 15 साल की एक लड़की ने यूट्यूब वीडियो देखकर डिलिवरी करना सीखा। फिर अपने घर में ही एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के बाद उस बच्ची की हत्या कर दी। शव को एक डिब्बे में पैक कर छिपा दिया। रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए एक युवक के रेप करने से लड़की गर्भवती थी। उसने गर्भवती होने से लेकर बच्ची की डिलिवरी तक की बात अपनी माँ से छिपा रखी थी।

लड़की की माँ एक मॉल में काम करती है। गुरुवार की रात (2 मार्च 2023) जब वह काम से घर लौटी तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। घर में खून के धब्बे देख माँ ने बेटी से पूछा तो उसने पहले पीरियड की बात कहकर गुमराह करने की कोशिश। लेकिन बाद में उसने पूरा घटनाक्रम माँ को बता दिया।

पुलिस ने रविवार (5 मार्च 2023) को मामले की जानकारी दी। पुलिस का कहना है कि नागपुर के अंबाझरी इलाके में रहने वाली इस लड़की की सोशल मीडिया के जरिए एक युवक से दोस्ती हुई थी। इसी युवक ने उसका यौन शोषण किया था। इससे वह गर्भवती हो गई। लेकिन लड़की ने इसकी सच्चाई अपनी माँ से छिपाते हुए कहा कि वह बीमार है, इसलिए उसके पेट में समस्या हो गई है।

गर्भवती होने के बाद उसने इस मामले को पूरी तरह से छिपाने की कोशिश की। इसी दौरान उसे घर में ही बच्ची को जन्म देने का विचार आया। इसके लिए उसने यूट्यूब वीडियो देखने शुरू किए। वीडियो देखते हुए उसने बच्चे को जन्म देने का तरीका समझा। गुरुवार को माँ के काम पर जाने के बाद उसने घर में ही बच्ची को जन्म दिया।

बच्ची के जन्म के बाद भी वह इसे छिपाना चाहती थी। इसलिए उसने नवजात बच्ची को गला दबाकर मार डाला। इसके बाद उसने उसे एक डिब्बे में छिपाकर रख दिया। जब लड़की की माँ वापस घर आई तो उसकी हालत और घर में खून के धब्बे देख उसकी तबीयत के बारे में पूछा। शुरुआत में गुमराह करने के बाद लड़की ने अपनी माँ को पूरी घटना की जानकारी दी। फिर माँ उसे लेकर हॉस्पिटल गई, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। फिलहाल, लड़की की हालत नाजुक बताई जा रही है।

वहीं, पुलिस ने नवजात के शव को कब्जे में लेते हुए पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने यौन शोषण के आरोपित युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि नवजात की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर लड़की के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

‘हमारे बाप-दादाओं की जेब में रहते थे राम’: राकेश टिकैत के साथी नेता ने ‘जाट महाकुंभ’ में उगला ज़हर, बोले – ‘मैंने पुजारी से कहा – तेरा बाप मरा तो…’

राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार (05 मार्च, 2023) को आयोजित जाट महाकुंभ में ‘अखिल भारतीय जाट महासभा’ के महासचिव युद्धवीर सिंह ने विवादास्पद बयान दिया। भारतीय किसान युनियन नेता राकेश टिकैत के साथी युद्धवीर सिंह ने कहा कि जाट समुदाय के लोग कभी किसी मंदिर में पानी चढ़ाने नहीं जाते। उन्होंने कहा कि राम हमारे बाप-दादाओं की जेब में रहते थे। युद्धवीर ने मंदिर के पुजारियों पर भी विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले तक जाट के गाँव में मंदिर नहीं हुआ करते थे।

जयपुर के विद्याधर नगर में भैरोंसिंह शेखावत स्टेडियम में आयोजित जाट महाकुंभ में को संबोधित करते हुए युद्धवीर सिंह ने मंदिरों में पूजा को पंडितों और पुजारियों का पाखंड करार दिया। उन्होंने कहा कि राम पर किसी का विशेषाधिकार नहीं है। किसान उठते-सोते सैकड़ों बार राम का नाम लेता है। लेकिन वह किसी मंदिर में पानी चढ़ाने नहीं जाता। भीड़ में उपस्थित जाटों से सवाल करते हुए युद्धवीर कहते हैं क्या आपने अपने बाप दादाओं को मंदिर जाते देखा है?

युद्धवीर कहते हैं हमारे बाप-दादाओं का राम उनके साथ रहता था, उनकी जेब में रहता था। निकाल कर अपने से मिल लेते थे। आज हम राम को ढूँढने के लिए मंदिर जाते हैं। इसके बाद युद्धवीर मंदिर के पुजारियों पर टिप्पणी करते हैं। युद्धवीर पुजारी के साथ हुआ अपना संवाद सुनाते हैं। युद्धवीर के अनुसार मंदिर के एक पुजारी ने उनसे मंदिर में जल चढ़ाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने जवाब दिया यह तो पत्थर की मूर्ति, है बगल के कारीगर ने बनाई थी। तो पुजारी ने इसमें प्राण प्रतिष्ठा किए जाने की बात कही। इसपर युद्धवीर ने पुजारी से कहा, “जब तेरा बापू मरा उसमें प्राण प्रतिष्ठा क्यों नहीं की? अपनी माँ की क्यों नहीं करी? अपने रिश्तेदारों की क्यों नहीं की?

युद्धवीर आगे कहते हैं कि हमें बेवकूफ बनाया गया। आज से 50 साल पहले किसी भी जाट के गाँव में मंदिर नहीं हुआ करते थे। शिवालय होते थे जिसमें कोई पंडित नहीं होता था। महिलाएँ जल व दूध चढ़ा आया करती थीं। कोई पाखंड नहीं हुआ करता था। आज की युवा पीढ़ी को पता ही नहीं है। बता दें कि जिस समय युद्धवीर यह बातें कर रहे थे उस वक्त मंच पर बीजेपी-कॉन्ग्रेस के अलावा कई पार्टियों के नेता मंच पर मौजूद थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

तमिलनाडु BJP प्रदेश अध्यक्ष पर भी FIR: बिहार के लौटे मजदूरों ने सुनाई मारपीट और धमकी की दास्तान, हिंसा पर राज्यपाल से मिलेंगे चिराग पासवान

तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों पर हमले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अब तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई के खिलाफ कथित तौर पर हिंसा भड़काने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं, सांसद चिराग पासवान तमिलनाडु के राज्यपाल से मिलने जा रहे हैं। एक ओर जहाँ राज्य सरकार हिंसा की बातों को फर्जी बता रही है। वहीं, तमिलनाडु से लौटे मजदूर हिंसक घटनाओं की दास्ताँ बयान कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के अन्नामलाई ने एक बयान जारी कर कहा था कि डीएमके द्वारा उत्तर भारतीयों द्वारा किए गए कामों का ‘मजाक’ उड़ाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि फेक खबरें तेजी से फैल रहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि डीएमके के गठन के बाद से पार्टी द्वारा एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत उगली जा रही है। जब से डीएमके सत्ता में आई है, पार्टी के मंत्रियों और सांसदों ने कई बार बार अपने भाषणों में (उत्तर भारतीयों) का मजाक उड़ाया है। यही नहीं, अन्नामलाई ने झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी माँग की थी।

अन्नामलाई के इस बयान के बाद चेन्नई की साइबर क्राइम यूनिट ने उनके खिलाफ धारा 153, 153 ए(1) (ए), 505(1)(बी) और 505 (1) (सी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अन्नामलाई ने उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “आप (डीएमके सरकार) सोचते हैं कि झूठे मुकदमे दर्ज कर लोकतंत्र की आवाज दबा सकते हैं। एक आम आदमी के रूप में मैं आपको 24 घंटे देता हूँ। यदि संभव हो तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाओ।”

राज्यपाल से मिलेंगे चिराग पासवान

लोक जनशक्ति पार्टी नेता और सांसद चिराग पासवान सोमवार (6 मार्च 2023) को तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह वहाँ रह रहे बिहारी मजदूरों तथा कामगारों से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद इन मुलाकातों को लेकर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। इससे पहले चिराग पासवान ने तमिलनाडु में हो रही घटनाओं के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया था।

तमिलनाडु से लौटे मजदूरों ने सुनाई दास्ताँ

तमिलनाडु सरकार वहाँ हो रही किसी भी प्रकार की हिंसक घटनाओं से इनकार कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटोज और वीडियो को ‘फर्जी और भ्रामक’ बताया जा रहा है। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदी भाषी मजदूरों को मिलने वाली धमकियों और हिंसा को लेकर सवाल उठाया है रहा है।

‘हिंदुस्तान’ ने अपनी रिपोर्ट में तमिलनाडु के एलेप्पी से झारखंड के दुमका लौटे राजू हेम्ब्रम के हवाले से कहा है कि वह तिरुपुर में स्थित एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। जहाँ बीते कुछ दिनों से उसे लगातार धमकियाँ मिल रहीं थीं। हालाँकि फैक्ट्री मालिक उसे घर जाने की छुट्टी नहीं दे रहा था। लेकिन डर की वजह से वह घर लौट आया। इसी तरह तमिलनाडु के परमपुर में मजदूरी कर रहे पीरपैंती प्रखंड के सलेमपुर निवासी एक व्यक्ति ने कहा है कि स्थानीय लोगों द्वारा बिहारियों को निशाना बनाया जा रहा है। तमिलनाडु के कई शहरों में मारपीट हो रही है।

वहीं, ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट में बिहार के जमुई अंतर्गत सिकंदरा थाना क्षेत्र निवासी दो युवकों की मौत तथा दो के घायल होने की बात कही गई है। तमिलनाडु के त्रिपुर में 21 फरवरी को जमुई के धधौर निवासी पवन यादव पर नारियल काटने वाले धारदार हथियार हमला कर हत्या कर दी है। इस दौरान उसे बचाने गए उसके भाई नीरज के सिर पर भी धारदार हथियार से हमला हुआ था। मृतक पवन के एक अन्य रिश्तेदार के साथ मारपीट की खबर है।

जमुई के पोहे गाँव में रहने वाले संजू मांझी, धर्मेंद्र कुमार समेत अन्य लोग तमिलनाडु में रहकर काम करते थे। इन लोगों का कहना है कि वो लोग जैसे-तैसे भागकर घर वापस आए हैं। वहाँ की स्थिति ठीक नहीं है। मजदूरी को लेकर सवाल करने पर बिहारियों को मारा-काटा जा रहा है।

विजय चौधरी को अतीक अहमद ने बनाया उस्मान, UP पुलिस ने मार गिराया: उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाले के ‘धर्म परिवर्तन’ की भी होगी जाँच

उमेश पाल हत्याकांड में पहली गोली चलाने वाले उस्मान के एनकाउंटर के बाद अब धर्मांतरण का एंगल सामने आया है। इस संबंध में लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि इस बात की जाँच हो रही है कि शूटर विजय चौधरी, उस्मान कैसे बना।

अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, अतीक अहमद के बेटों ने विजय चौधरी की वफादारी देखते हुए उसे उस्मान नाम दिया था। उस्मान बेहद शातिर अपराधी था। जब वह अहमद गैंग आईएएस 227 में शामिल हुआ था तभी उसे उस्मान नाम दिया गया था। कथिततौर पर चौधरी का उस्मान नाम रखने के वक्त अतीक अहमद ने ही उसका धर्म परिवर्तन भी कराया था। अब पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है।

लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि शूटर के विजय से उस्मान बनने का मामला हमारे संज्ञान में है। कोई सामान्य व्यक्ति खुद का नाम उस्मान क्यों रखेगा?

उस्मान का एनकाउंटर

बता दें कि प्रयागराज की कौंधियारा पुलिस ने आज सुबह 4 बजे उस्मान को लालापुर में एनकाउंटर में मारा। वो अतीक गैंग का वो शार्प शूटर था जिसने उमेश पाल पर सामने से पहली गोली चलाई थी। पूरी वारदात एक सीसीटीवी में कैद हुई थी। उसे पकड़ने के लिए उसपर 50 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के लालापुर में जब एसओजी की टीम ने उस्मान को पकड़ने के लिए घेराबंदी की, तो शार्प शूटर ने पहले टीम पर गोली चलानी शुरू की, जिसके बाद पुलिस ने भी उसपर जवाबी फायरिंग की और उस्मान को ढेर किया।

इस मुठभेड़ को लेकर शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “कहा था ना कि मिट्टी में मिला देंगे !! उमेश पाल और संदीप निषाद पर पहली गोली चलाने वाला खूंखार हत्यारा उस्मान भी आज पुलिस मुठभेड़ में ढेर।” 

उस्मान से पहले पुलिस ने 27 फरवरी को एक और बदमाश अरबाज का एनकाउंटर हुआ था। अरबाज़ पर आरोप था कि वो हमले के दौरान उस क्रेटा गाड़ी को चला रहा था, जिससे शूटर आए थे। 1 दिन पहले यह क्रेटा गाड़ी अतीक अहमद के घर से बरामद हुई थी।