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बॉलीवुड माफिया गैंग्स में अमिताभ बच्चन भी? 2 फिल्मों का नाम ले कंगना रनौत ने क्यों साधा निशाना?

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (Bollywood Actress Kangna Ranaut) ने अब अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) पर निशाना साधा है। उन्होंने अमिताभ बच्चन को माफिया गैंग्स कहकर सम्बोधित किया है। अमिताभ के अलावा कंगना ने टाइगर श्रॉफ को ही आड़े हाथों लिया है। इस नाराजगी की वजह कंगना की फिल्म इमरजेंसी के साथ अमिताभ बच्चन की फिल्म गणपत का रिलीज होना बताया जा रहा है। बुधवार (22 फरवरी 2023) को इसी बात से नाराज होकर कंगना ने अमिताभ को सेल्फ डिस्ट्रिक्टिव और दुर्बुद्धि भी कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी और अमिताभ बच्चन की फिल्म गणपत की रिलीज डेट टकराने की पूरी संभावना है। गणपत 20 अक्टूबर 2023 को रिलीज हो रही है जिसमें अमिताभ बच्चन के अलावा टाइगर श्रॉफ और कृति सेनन भी प्रमुख भूमिका में हैं। कंगना का कहना है कि उनकी फिल्म इमरजेंसी के निर्माताओं ने भी 20 अक्टूबर को ही रिलीज का प्लान बनाया था। इसी बात पर कंगना भड़क गईं हैं।

कंगना का मानना है कि गणपत को सितंबर, नवम्बर और दिसंबर में भी रिलीज किया जा सकता था। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जब मैं अपने फिल्म की रिलीज की तारीख देख रही थी तो पाया कि यह साल काफी हद तक खाली है। इसकी वजह हिंदी फिल्मों को मिल रहे झटके भी हो सकते हैं। इस वजह से मैंने अपने फिल्म की रिलीज तारीख 20 अक्टूबर फाइनल कर दी। टी सीरीज के मालिक भूषण कुमार ने तो इसकी घोषणा भी कर दी थी।”

अपने एक अन्य ट्वीट में कंगना ने आगे लिखा, “सितम्बर, नवम्बर और दिसंबर पूरी तरह से फ्री है लेकिन मिस्टर बच्चन और टाइगर श्रॉफ ने अपने प्रोजेक्ट की घोषणा 20 अक्टूबर को कर दी।” हँसते हुए कंगना रनौत ने आगे लिखा, “लगता है पैनिक मीटिंग हो रही है बॉलीवुड माफिया गैंग्स में।” कंगना ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि अब वो अपनी फिल्म इमरजेंसी की रिलीज की घोषणा एक महीने पहले ही ट्रेलर के साथ करेंगी। उनका मानना है कि जब पूरा साल फ्री पड़ा है तो टकराव की जरूरत नहीं।

फिल्म इंडस्ट्री की बुरी हालत का जिक्र करते हुए कंगना ने आगे लिखा, “इतनी दुर्बुद्धि, क्या खाते हो यार तुम सब, इतने सेल्फ डिस्ट्रक्टिव कैसे हो?’ कंगना के इस ट्वीट पर नेटीजेंस ने अलग-अलग तरह के रिएक्शन दिए हैं। कुछ ने कंगना का सपोर्ट किया है तो कुछ ने उनके विरोध में लिखा है।

ग्लास कांड: ससुराल वालों ने दामाद के पिछवाड़े में डाल दिया ग्लास – बिहार का वो केस, जो है सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर बिहार का ग्लास कांड नाम से एक घटना वायरल हो रही है। इस घटना के पीड़ित का आरोप है कि उसके ससुराल वालों ने उसके मलद्वार में ग्लास घुसेड़ दिया था। पीड़ित अपनी पत्नी को वापस ले जाने के लिए ससुराल गया था, जहाँ हुई कहासुनी के बाद उसके साले ने यह हरकत की। घटना 1 जनवरी 2023 की है। फ़िलहाल पीड़ित की हालत गंभीर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का है। पीड़ित का नाम पवन दास है, जो साहेबगंज क्षेत्र के गाँव रामपुर का रहने वाला है। वह हैदराबाद की एक कम्पनी में काम करता था। दिसंबर 2022 में वह छुट्टी पर अपने घर आया था। उसकी पत्नी काफी समय से मायके गई थी, जिसे अपने घर ले जाने के लिए पवन दास 1 जनवरी 2023 को अपनी ससुराल गया था। अगले दिन 2 जनवरी को वह अकेले ही वापस लौटा। आरोप है कि इसी दौरान उसके साले ने किसी बात पर हुए विवाद में पवन दास के मलद्वार में ग्लास घुसेड़ दिया था।

पीड़ित के भाई का आरोप है कि 2 जनवरी को ससुराल से लौट कर पवन दास ने अपने पेट में दर्द की शिकायत की। पूछने पर पवन ने ठीक से शौच न कर पाने की तकलीफ बताई। पवन को उनके परिवार द्वारा दवाएँ दीं गई लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में पवन को मुजफ्फरपुर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे टीबी की बीमारी बताते हुए मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। जब मेडिकल कॉलेज में पवन दास का एक्सरे हुआ, तब पता चला कि उसके मलद्वार में ग्लास फँसा है।

पवन ने अपने परिवार से बताया कि उसकी ससुराल में सास, ससुर और साले ने मार कर पहले उसे बेहोश कर दिया, फिर पीछे से ग्लास घुसेड़ दिया। जो ग्लास अंदर पाया गया, वह स्टील का छोटा सा ग्लास है जो चाय पीने के लिए प्रयोग होता है। दावा ये भी है कि ससुराल में जो कुछ भी हुआ, उसके बाद भी पवन घर तक साईकिल से बैठ कर चलाने के बजाए खड़ा हो कर आया था।

20 जनवरी 2023 को पवन दास का ऑपरेशन किया गया। पीड़ित के भाई के मुताबिक इस बीच लगभग 20 दिन पवन दास को खाना नहीं दिया गया और शौच के तौर पर काफी मुश्किल से थोड़ा-बहुत जोर लगा के कर पाते थे।

खुद पीड़ित पवन का आरोप है कि उनके मलद्वार में ग्लास डालने से पहले ससुराल वालों ने उन्हें इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया था। उन्होंने कहा कि शोर मचाने पर कोई सुन नहीं पाया क्योकि आस-पास के लोग किसी के अंतिम संस्कार में गए थे। पवन के मुताबिक जब उन्हें इंजेक्शन लगाया गया, तब उनका शरीर ठंडा होने लगा था। पवन ने अपने साथ हुई हरकत में अपने साढ़ू डुगडुगी दास और ससुर शम्भू दास को आरोपित किया है। हालाँकि पवन ने खुद को नौटंकीबाज होना भी स्वीकार किया।

आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताया

इस पूरे मामले में आरोपित परिवार ने खुद को बेगुनाह बतया है। आरोपितों का कहना है कि उनका दामाद पवन झूठ बोल रहा है। आरोपित रीना का कहना है कि अगर पवन के साथ ऐसा हुआ होता तो वो ससुराल वाले गाँव से अपने गाँव गया कैसे? आस-पास के लोगों ने पवन को बहुरुपिया बताते हुए ये सारी हरकत आरोपितों के ही परिवार द्वारा किया जाना बताया।

इस पूरे मामले में अभी तक बिहार पुलिस द्वारा किसी की भी गिरफ़्तारी नहीं की गई है।

जूठे सेब से मारा-मारी, लात-घूँसों से बचने के लिए टेबल का सहारा: मेयर से ज्यादा ‘पावर’ वाली कुर्सी के लिए दिल्ली MCD में लड़ाई

दिल्ली MCD की मेयर शैली ओबेरॉय की जीत के बाद नगर निगम का सदन जंग के अखाड़े में तब्दील हो गया। आधी रात को MCD सदन में आम आदमी पार्टी और भाजपा पार्षदों द्वारा एक दूसरे पर पानी की बोलतें फेंकी गईं। इस दौरान दोनों पार्टियों के पार्षदों ने एक दूसरे पर लात-घूँसे भी बरसाए। स्टैंडिंग कमेटी के लिए हो रहे चुनाव के दौरान 22-23 फरवरी की रात में यह हंगामा शुरू हुआ। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे पर हमले का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेयर और डिप्टी मेयर 22 फरवरी रात तक चुन लिए गए थे। इसके बाद स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव था, जो हिंसक हो उठा। भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने आम आदमी पार्टी पर स्थाई समिति के चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाया है। इसके बाद भाजपा ने फिर से चुनाव करवाने की माँग रखी।

भाजपा की माँग के बाद आधी रात को शुरू हुई तकरार ने MCD सदन में हंगामे का रूप ले लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच झड़प हुई। हंगामे को रोकने के लिए सदन को बीच-बीच में थोड़े-थोड़े समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा। इसी आपाधापी में सुबह हो गई। सुबह फिर कार्रवाई शुरू होते ही चुनाव के लिए रखा गया बैलेट बॉक्स भी सदन के वेल में फेंक दिया गया।

इस हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी से नवनिर्वाचित मेयर शैली ओबेरॉय ने भाजपा पार्षदों पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया है। मेयर शैली का दावा है कि विवाद के बीच उन पर हमले की कोशिश की गई। झगड़े की शुरुआत एक दूसरे पर बोतल फेंक कर हुई। बाद में पार्षदों ने अपने साथ खाने के लिए लाए गए फलों को दूसरे पक्ष पर फेंक कर मारना शुरू किया।

उत्तरी दिल्ली के पूर्व मेयर राजा इकबाल सिंह ने भी खुद पर बोतल फेंके जाने और सेब फेंक कर हमला करने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद पिटाई से बचने के लिए टेबल के नीचे छिप गए थे। MCD सदन में हुए इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बैलेट वोटिंग के दौरान फोन का प्रयोग मना है जबकि भाजपा पार्षद अर्जुन पाल सिंह का दावा है कि यह खुलेआम किया गया। उनके अनुसार आम आदमी पार्टी के पार्षदों द्वारा फोन का प्रयोग करने पर भाजपा पार्षदों ने विरोध किया। तब तक लगभग 50 पार्षद वोट देकर फोटो खींच चुके थे। दावा है कि इस विरोध को मेयर ने स्वीकार भी किया। अर्जुन पाल के मुताबिक इस हरकत का विरोध करने पर आप पार्षदों ने न सिर्फ भाजपा पार्षदों पर हमला किया बल्कि उन्हें धमकियाँ भी दी गईं।

वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार ने भाजपा पर स्टैंडिंग कमेटी चुनावों को टालने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि एक दिन पहले 22 फरवरी को आप पार्षद शैली ओबेरॉय ने भाजपा की रेखा गुप्ता को हरा कर मेयर पद पर जीत हासिल की थी।

स्टैंडिंग कमेटी/स्थाई समिति के चुनाव पर बवाल क्यों?

दिल्ली MCD का जब मेयर और उप-मेयर का चुनाव हो गया तो फिर स्थायी समिति या स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में इतना बवाल क्यों? यह सवाल लाजिमी है। इस सवाल के पीछे सत्ता की शक्ति का मामला है। दरअसल दिल्ली MCD के मेयर के पास बहुत सीमित शक्तियाँ होती हैं। लगभग सारा खेल ही स्थायी समिति या स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य द्वारा खेला जाता है।

दिल्ली MCD में स्टैंडिंग कमेटी ही कॉर्पोरेशन का कामकाज और प्रबंधन करती है। किसी प्रोजेक्ट को वित्तीय मंजूरी भी यही प्रदान करती है। नीतियों पर चर्चा करना, उसे अंतिम रूप देने आदि में भी स्टैंडिंग कमेटी का ही रोल होता है। एक तरह से आप इसे दिल्ली MCD की सबसे ताकतवर कमेटी कह सकते हैं। यही कारण है कि मेयर के चुनाव के बाद भी दिल्ली MCD का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा।

‘उनकी टिप्पणी महत्वपूर्ण नहीं’: कंगना रनौत ने की तारीफ़ तो बोले जावेद अख्तर, पाकिस्तानी कलाकार कह रहे हैं भला-बुरा

पाकिस्तान के लाहौर में आयोजित फैज फेस्टिवल में हिस्सा लेने के बाद गीतकार जावेद अख्तर हिंदुस्तान लौट आए हैं। कार्यक्रम के दौरान जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर आईना दिखाया था। जिसे लेकर देश भर में उनकी तारीफ हुई। यहाँ तक कि अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी उनकी तारीफ की। हिंदुस्तान लौटने के बाद एनडीटीवी ने उनका साक्षात्कार किया। इस दौरान एंकर ने उनसे कंगना रनौत के तारीफ के बारे में सवाल किया जिसे पहले तो जावेद अख्तर टाल गए लेकिन एंकर के दोबारा पूछने पर उन्होंने कहा कि कंगना को जरूरी नहीं समझता।

लाहौर में फैज फेस्टिवल के दौरान जावेद अख्तर द्वारा दिए गए बयान का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। एनडीटीवी ने इसी को लेकर जावेद अख्तर का इंटरव्यू किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किए गए साक्षात्कार के दौरान उनसे पाकिस्तान से जुड़े कई सवाल किए गए। इसी दौरान एंकर ने उनसे कंगना द्वारा किए गए उस ट्वीट के बारे में पूछा जिसमें कंगना जावेद अख्तर की तारीख कर रही थीं। इस पर गीतकार ने जवाब दिया, “सोचें मत। मैं कंगना को महत्वपूर्ण नहीं मानता तो उनकी टिप्पणी महत्वपूर्ण कैसे हो सकती है। उसके बारे में भूल जाइये। चलिए आगे बढ़िए।”

लाहौर में क्या हुआ था?

लाहौर में आयोजित फैज फेस्टिवल में एक सवाल का जवाब देते हुए जावेद ने कहा था कि हिन्दुस्तान में नुसरत फतह अली खान और मेहंदी हसन के बड़े-बड़े प्रोग्राम हुए। आपके मुल्क में लता मंगेशकर का एक भी फंक्शन नहीं हुआ। अहम बात यह है कि फिजा इतनी गरम है वो कम होनी चाहिए। जावेद अख्तर ने आगे कहा था कि हम बंबई के लोग हैं। हमने देखा हमारे शहर पर कैसे हमला हुआ था। हमलावर नॉर्वे या इजिप्ट से नहीं आए थे। हमलावर आपके मुल्क में अभी भी घूम रहे हैं। यह शिकायत अगर हिंदुस्तानी के दिल में है तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए।

कंगना ने क्या कहा था?

अभिनेत्री कंगना ने जावेद अख्तर के इस बयान पर उनकी तारीफ की थी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि जब मैं जावेद साहब की कविताएँ सुनती हूँ तो लगता है माँ सरस्वती की इन पर कैसी कृपा है लेकिन देखो कुछ तो सच्चाई होती है इंसान में, तभी तो खुदाई होती है उनके साथ में। जय हिंद जावेद साहब घर में घुसकर मारा।

बता दें कि कंगना रनौत और जावेद अख्तर के बीच मनमुटाव की स्थिति रहती है। जावेद अख्तर ने कंगना के खिलाफ मानहानि का केस भी किया हुआ है। कंगना भी कई मौकों पर जावेद अख्तर के खिलाफ बोलती सुनी गई हैं।

न कोर्ट में जीत पाई केस, न ब्रिटेन देगा नागरिकता: ISIS वाली ‘जिहादी बेगम’ के काम नहीं आई BBC की डॉक्यूमेंट्री

‘जेहादी बेगम’ नाम से दुनिया भर में कुख्यात शमीमा बेगम को ब्रिटेन की नागरिकता नहीं मिलेगी। आतंकी शमीमा कोर्ट में यह केस हार गई है। ईराक-सीरिया में अत्याचारों के दौरान विश्व के सबसे क्रूर आतंकवादी संगठन IS (ISIS) के साथ जुड़ने के कारण ब्रिटेन की उसकी नागरिकता छिनी थी। शमीमा के पक्ष में BBC का प्रोपगेंडा डॉक्यूमेंट्री भी काम नहीं आया।

ISIS की तरफ से लड़ने के लिए ब्रिटेन छोड़कर भागने वाली शमीमा अब कभी ब्रिटेन नहीं लौट पाएगी। शमीमा की अपील पर सुनवाई करने वाली ब्रिटेन की कोर्ट ने कहा कि वह ब्रिटेन में वापस आने के काबिल नहीं है। ऐसे में उसे ब्रिटेन में नहीं आने दिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान विशेष आव्रजन अपील आयोग (सियाक) ने इस बार पर संदेह जताया कि शमीमा बेगम की यौन शोषण के लिए तस्करी की गई थी। सियाक पैनल की ओर से बुधवार (22 फरवरी 2023) को प्रकाशित फैसले को लिखने वाले जस्टिस रॉबर्ट जय ने लिखा। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति को देखते हुए ही गृह सचिव ने उनकी नागरिकता छिनी होगी।

बता दें कि शमीमा बेगम साल 2015 में अपने दो स्कूली दोस्तों के साथ पूर्वी लंदन स्थित अपने घर निकलकर सीरिया चली गई थी। उस समय उसकी उम्र 15 साल थी। सीरिया में रहते हुए बेगम ने एक ISIS आतंकी से निकाह किया और कई साल तक रक्का में बिताए। इस दौरान वह गर्भवती हुई। उसके दो बच्चे कुपोषण और बीमारी से मर गए।

इसके बाद बेगम 2019 में 39,000 लोगों के सीरियाई शरणार्थी शिविर अल-हवल में प्रकट हुई। यहाँ उसने ब्रिटेन से अपील की कि उसे वापस आने दिया जाए, ताकि वह अपने बच्चे को जन्म दे सके और उसका पालन पोषण कर सके। उसी साल फरवरी में उसने अपने बेटे जर्राह को जन्म दिया। बाद में उसकी भी मौत हो गई

शमीमा बेगम अभी 23 साल की है और वह सीरिया की एक शरणार्थी कैंप में रह रही है। उत्तर-पूर्वी सीरिया के शरणार्थी शिविर अल-हवल में मिलने और ब्रिटेन आने की अपील के बाद ब्रिटेन ने उस पर कार्रवाई की। ब्रिटेन के तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद ने 19 फरवरी 2019 में उसकी ब्रिटिश नागरिकता छीन ली थी।

रेप्रीव की निदेशक माया फोआ ने कहा, “अदालत ने स्वीकार किया कि यह मानने का अच्छा कारण है कि शमीमा बेगम तस्करी की शिकार थीं। उसे एक बच्चे के रूप में ऑनलाइन तैयार किया गया था और ब्रिटेन को उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि यह किसी भी ब्रिटिश किशोरी की तस्करी है।

बता दें कि पिछले महीने स्पेन सीरियाई शरणार्थी शिविरों से IS लड़ाकों के परिवारों को वापस लाया था। जिन्हें वापस लाया गया, उनमें दो स्पेनिश महिलाएँ और 13 स्पेनिश बच्चे हैं। इन्हें मैड्रिड के पास टोरेजोन सैन्य हवाई अड्डे पर लाया गया था।

अभी कुछ दिन पहले लोगों में सहानुभूति पैदा करने के लिए बीबीसी ने ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से शमीमा बेगम पर 90 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री जारी की थी। इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए बीबीसी ने शमीमा बेगम का ‘चरित्र चित्रण’ की कोशिश की गई। डॉक्यूमेंट्री के पॉडकास्ट ‘आई एम नॉट ए मॉन्स्टर’ के 10 एपिसोड में शमीमा बेगम की ब्रिटेन से सीरिया तक की यात्रा के बारे में बताया गया है। साथ ही उसके प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश गई है।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में शमीमा बेगम ने कहा है कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया पहुँची थी, तब वहाँ ISIS का एक आतंकी बस लेकर उसका इंतजार कर रहा था। उसने दावा किया कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई तो उसे आईएसआईएस के आतंक के बारे में नहीं पता था, लेकिन,बाद में उसने ISIS की भयानक करतूतों के वीडियो देखे थे। इसके बाद भी उसने पीछे न हटने का फैसला किया।

‘जिहादी बेगम’ ने यह भी कहा है कि वह उत्तरी सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में रह रही है। वहाँ रहना जेल में रहने से भी बदतर है। उसने यह भी कहा है कि कम से कम जेल की सजा के बारे में यह पता होता है कि सजा कब खत्म होगी, लेकिन शरणार्थी शिविर में जो हो रहा है यह सब कब खत्म होगा पता नहीं।

बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन में जमकर विरोध हो हुुआ। बीबीसी द्वारा बार-बार प्रोपेगैंडा डॉक्यूमेंट्री बनाने को लेकर लोगों ने कहा कि वे अब बीबीसी को पैसे नहीं देंगे। लोग बीबीसी के सब्सक्रिप्शन को रिन्यू न कराने की भी बात कही। ट्विटर पर बीबीसी के खिलाफ #DeFundTheBBC का हैशटैग भी चला।

एक यूजर ने लिखा था, “बीबीसी ने बकवास डॉक्यूमेंट्री बनाई। बीबीसी ने उसे अपने फैसलों को सही और उचित बताने के लिए एक मंच दिया। बीबीसी, ब्रिटेन में रहने वाले लोगों का हितैषी नहीं है। वह हम पर हँसी उड़ाते हुए हमारा अपमान कर रहा है। अब समय आ गया है हम बीबीसी को पैसे नहीं देंगे।”

दोस्तों संग आया रउफ, हिन्दू लड़की को उठा ले गया: पुलिस के पास गए पिता तो थमा दिया सर्टिफिकेट – ‘मर्जी से कबूला इस्लाम’

पाकिस्तान के सिंध में एक हिंदू लड़की का अपहरण कर उसका इस्लामी धर्म-परिवर्तन करा दिया गया। लड़की के छोटे भाई रामबन और दूसरे चश्मदीदों के अनुसार, बाजार में सब्जी खरीदने गए करिश्मा भील को मुस्लिम युवक जबरन अपने साथ ले गए। घटना 15 फरवरी, 2023 की बताई जा रही है। पीड़िता के पिता का आरोप है कि पाकिस्तान की पुलिस अपहरणकर्ताओं के खिलाफ शिकायत तक दर्ज नहीं कर रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सिंध के मीरपुर खास के नउकोट की रहने वाली करिश्मा अपने भाई के साथ बाजार गई थी। तभी उमरकोट के रहने वाले रऊफ और उसके दोस्त करिश्मा के साथ छेड़खानी करने लगे। करिश्मा ने जब विरोध किया तो रऊफ ने अपने दोस्तों की मदद से उसका अपहरण कर लिया। करिश्मा के पिता रमेश भील ने नउकोट पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

रमेश के अनुसार, नउकोट पुलिस ने सिर्फ करिश्मा के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। चश्मदीदों के बयान के बावजूद आरोपित रऊफ और उसके दोस्तों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। उल्टे पुलिस ने बिना छान-बीन के ही लड़की के अपने मर्जी से चले जाने की बात कह दी। पुलिस ने कहा कि एक हफ्ते के इंतजार के बाद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

करिश्मा के पिता ने जानकारी दी कि उन्हें 19 फरवरी को पुलिस स्टेशन बुलाया गया। पुलिस वालों ने उन्हें एक कागज सौंपा जिसमें करिश्मा के धर्म-परिवर्तन के बारे में लिखा हुआ था। 18 फरवरी की तारीख वाले सर्टिफिकेट के मुताबिक करिश्मा ने अपनी मर्जी से अपना धर्म बदल कर इस्लाम कबूल कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, अब करिश्मा का नाम कंवल बी रखा गया है। पुलिस द्वारा कहा जा रहा है कि करिश्मा अब उमरकोट के रऊफ के परिवार के साथ रहना चाहती है।

बता दें कि रऊफ वही मुस्लिम लड़का है जिसपर करिश्मा के अपहरण का आरोप है। करिश्मा के पिता को डर है कि बालिग होते ही उनकी बेटी जबरन रऊफ के साथ व्याह दी जाएगी। पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को अगवा करने और जबरन शादी करने जैसी घटनाएँ आम हैं। खासकर सिंध में हिंदू लड़कियों को मुस्लिमों द्वारा निशाना बनाया जाता है।

अपने घर के अंदर थीं आलिया भट्ट, बगल की इमारत से खींच ली गुपचुप तस्वीरें और कर दिया वायरल: मुंबई पुलिस ने कहा – शिकायत दर्ज कराएँ

आलिया भट्ट (Alia Bhatt) ने घर में गुपचुप तरीके से खींची गई तस्वीरों को मीडिया पोर्टल पर पब्लिश करने को लेकर नाराजगी जताई है। इस मामले को लेकर मुंबई पुलिस ने उनसे शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है। हालाँकि, आलिया ने अभी तक इस कोई फैसला नहीं लिया है। आलिया की पीआर टीम पोर्टल के संपर्क में है। घटना के बाद आलिया भट्ट को बॉलीवुड के कई अभिनेता-अभिनेत्रियों का सपोर्ट मिल रहा है।

आलिया भट्ट ने उनके घर के ड्राइंग रूम में खींची गई तस्वीरों को लेकर मीडिया ग्रुप को फटकार लगाई। उन्होंने पोर्टल के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, “यह क्या मजाक है? मैं अपने घर के लिविंग रूम में आराम से बैठी हुई थी, तब मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। मैंने पड़ोस की बिल्डिंग पर कैमरे के साथ दो लोगों को देखा। कौन-सी दुनिया है, जहाँ इस तरह की हरकत को सही ठहराया जा सकता है। क्या इसकी इजाजत है? यह किसी की निजता पर हमला है। एक सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन आपने आज सारी हदें पार कर दी हैं।”

आलिया ने अपने इस पोस्ट को पब्लिश करने से पहले मुंबई पुलिस को भी टैग किया। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आलिया भट्ट द्वारा स्टोरी शेयर किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने उनसे संपर्क कर तस्वीरें खींचने वाले फोटोग्राफर और इसे पोस्ट करने वाले मीडिया पोर्टल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा। पुलिस ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जाँच की जाएगी। एक्ट्रेस ने पुलिस को बताया है कि उनकी पीआर टीम संबंधित पोर्टल से संपर्क में है।

आलिया भट्ट के पोस्ट के बाद बॉलीवुड के कई अभिनेत्रियों-अभिनेताओं ने आलिया का समर्थन किया। जाह्नवी कपूर ने पोस्ट करके कहा है कि मना करने के बाद भी कई बार लोग जिम में उनकी तस्वीरें और वीडियो लेने की कोशिश करते हैं। जिम जैसा स्थान जिसे आप प्राइवेट स्थान समझते हैं, वहाँ भी लोग चोरी-छुपे फोटो खींचने की कोशिश करते हैं। जाह्नवी के अलावा अनुष्का शर्मा, अर्जुन कपूर, करण जौहर जैसी कई हस्तियों ने भी अपने सोशल मीडिया पर निजता के हनन के बारे में अपना तजुर्बा शेयर किया।

स्वामी अय्यप्पा के भक्त अब भी 41 दिन की दीक्षा रखते हैं, एक्टिविस्ट्स कहाँ हैं? वामपंथी नैरेटिव को ध्वस्त करती है Malikappuram, कहानी श्रद्धा और आस्था की

दक्षिण भारत में मलयालम इंडस्ट्री की फिल्मों के बारे में बात करने पर आपको मोहनलाल की ‘दृश्यम’ (2013) और ‘पुलिमुरुगन’ याद आएगी। जहाँ पहली फिल्म की कई भाषाओं में रीमेक बने, वहीं दूसरी फिल्म ने 150 करोड़ का आँकड़ा मलयालम इंडस्ट्री में पहली बार छुआ। केरल में मम्मूटी, जयराम, सुरेश गोपी और अब फहाद फासिल व दिलकीर सलमान खासे लोकप्रिय हैं। लेकिन, हाल में आई फिल्म ‘मलिकाप्पुरम (Malikappuram)’ ने वो कमाल किया है जो इनमें से कोई भी नहीं कर पाया।

‘मलिकाप्पुरम’ में उन्नी मुकुंदन मुख्य किरदार में हैं, जिन्हें आपने मोहनलाल-जूनियर NTR की तेलुगु फिल्म ‘जनता गैराज’ (2016) में देखा होगा। हालाँकि, इस फिल्म तक वो उससे काफी आगे निकल आए हैं। लेकिन, इस फिल्म की कहानी एक बच्ची के इर्दगिर्द घूमती है। एक बच्ची और उसका एक दोस्त। उसका एक परिवार। सबरीमाला मंदिर में जाकर भगवान अय्यप्पा की पूजा करने की उसकी जिद और भगवान अय्यप्पा में उसकी आस्था।

फिल्म के बारे में बताने या उसकी समीक्षा के नाम पर इतनी अच्छी फिल्म की कहानी बता देना धोखे के समान होगा, इसीलिए इसकी कहानी पर हम उतनी चर्चा नहीं करेंगे। ‘मलिकाप्पुरम’ बताती है कि केरल के लोगों ने भगवान अय्यप्पा के प्रति कितनी श्रद्धा है। उनकी दीक्षा लेने और फिर सबरीमाला मंदिर तक का सफर तय करना लोगों के लिए क्या मायने रखता है। साथ ही ये फिल्म इसके इर्दगिर्द चल रहे प्रोपेगंडा को भी ध्वस्त करता है।

आपको तृप्ति देसाई याद होगी, जिसे मीडिया ने एक्टिविस्ट बता कर प्रचारित किया था और वो भगवान अय्यप्पा की भक्त न होने के बावजूद कैसे सबरीमाला मंदिर में न सिर्फ घुसने की चेष्टा कर रही थी, बल्कि बिना किसी साक्ष्य के मंदिर के खिलाफ दुष्प्रचार कर वहाँ के नियमों को महिला विरोधी साबित करने में तुली थी। इन नास्तिकों को न तो हिन्दू धर्म में रुचि थी, न ही मंदिर में दर्शन से इन्हें कोई लेना-देना था और न इनका उद्देश्य महिला हित का था।

आखिरकार सबरीमाला मंदिर के मामले को घसीट कर सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया और सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 से फैसला दिया कि यहाँ महिलाओं को अनुमति दी जाए। बात महिला-पुरुष की थी ही नहीं। इसके बाद कुछ एक्टिविस्ट्स को यहाँ वामपंथी राज्य सरकार की पुलिस की मदद से घुसाया भी गया। क्या इन एक्टिविस्ट्स ने 41 दिनों का व्रत रखा, दीक्षा ली और अन्य नियमों का पालन किया? या फिर इसे भी सुप्रीम कोर्ट अवैध घोषित कर देगा?

आजकल तृप्ति देसाई कहाँ हैं? क्या उन्हें भगवान अय्यप्पा याद आते हैं? क्या उनके घर में स्वामी अय्यप्पा की तस्वीर है? असल में ‘मलिकाप्पुरम’ इसी तरह के प्रोपेगंडा को ध्वस्त करती है। इस फिल्म की केंद्रीय किरदार एक छोटी सी बच्ची है। उसे सपने में भी भगवान अय्यप्पा नजर आते हैं, घर में भी सभी उनके भक्त हैं। वो अपनी दादी से अय्यप्पा की कथाएँ सुनती हैं। उसे सबरीमाला मंदिर जाने के सारे रूट और जिन नियमों का पालन करना पड़ता है वो सब पता हैं।

एक बच्ची, भगवान अय्यप्पा की सबसे बड़ी भक्त। एक बच्ची, जो पूरी श्रद्धा के साथ सबरीमाला मंदिर जाती है। फिर इस मंदिर को महिला विरोधी कैसे बता दिया गया? ‘मलिकाप्पुरम’ न सिर्फ केरल के लोगों में भगवान अय्यप्पा के प्रति आस्था को दिखाती है, बल्कि ‘God’s Own Country’ की सुंदरता को भी प्रदर्शित करती है। वहाँ के हिन्दू रीति-रिवाजों को बताती है। ये दिखाती है कि ‘मुस्लिम लीग’ या सत्ता में वामपंथी प्रभुत्व भगवान परशुराम की इस भूमि की पहचान नहीं है।

फिल्म के अभिनेता उन्नी मुकुंदन का ये सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक है। जो बच्ची मुख्य किरदार में है, उसने काफी अच्छा अभिनय किया है। हाल ही में हम सबने ऋषभ शेट्टी की कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ को खासा प्यार दिया था। ‘कांतारा’ ने कर्नाटक की वनवासी हिन्दू संस्कृति को दिखाया था। इसी तरह ये फिल्म केरल की हिन्दू संस्कृति को दिखाती है। जैसे ये नैरेटिव फैलाया जाता है कि जनजातीय समाज हिन्दू नहीं है, कल को वामपंथी ये भी कह सकते हैं कि अय्यप्पा के भक्त हिन्दुओं से अलग हैं।

ये कोशिश तो दशकों से होती आ रही हैं। दलितों को हिन्दुओं से अलग बताया जाता है। तभी तो कॉन्ग्रेस की सरकार ने भगवान शिव की पूजा करने वाले लिंगायत समाज को अलग धर्म का दर्जा देने के नाम पर हिन्दुओं को बाँटने की साजिश रची थी। आपको समुद्र मंथन की कथा याद है? देवताओं-दानवों ने मिल कर समुद्र मथा और अंत में जब अमृत निकला तो असुरों को इस तक पहुँचने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया।

अय्यप्पा को इन्हीं मोहिनी और शिव का पुत्र माना जाता है। सबरीमाला के भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं, फिर विष्णु-शिव की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएँ दिखाती देती हैं। उनकी स्तुति होती है। इस फिल्म में इन चीजों को बारीकी से दिखाया गया है। एक सीधी-सादी कहानी, जिसमें भर के इमोशन हैं। ‘मलिकाप्पुरम’ हर एक भारतीय को देखना चाहिए। असम का कोई व्यक्ति सबरीमाला की दीक्षा ले और केरल से एक जत्था कामाख्या मंदिर आए, यही तो भारत है।

कामाख्या मंदिर से याद आया। नीलांचल पर्वत पर स्थित इस शक्तिपीठ के बारे में कहा जाता है कि यहाँ माँ सती की योनि गिरी थी। माँ के माहवारी के दिनों में जो उत्सव होता है, उस दौरान यहाँ पुरुषों की एंट्री नहीं होती। उस अवधि में मंदिर की मुख्य पुजारी भी एक महिला होती है। इससे क्या ये मंदिर पुरुष विरोधी हो गया? सबरीमाला मंदिर में भी बच्चियाँ और बुजुर्ग महिलाएँ दर्शन करती आई हैं। हर स्थल के एक नियम-कानून होते हैं, उसका पालन किया जाना चाहिए।

जब हम विद्यालयों से लेकर शौचालयों तक में इसका पालन कर सकते हैं और हजारों वर्षों से जो मंदिरों में चला आ रहा है, उसे आधुनिकता के नाम पर भंग कर के करोड़ों लोगों की आस्था से खिलवाड़ क्यों करना होता है? Hotstar पर ‘मलिकाप्पुरम’ हिंदी में भी उपलब्ध है। इसे ज़रूर देखिए, खासकर जंगल में उस दृश्य के लिए जब स्वयं भगवान अय्यप्पा बच्चों की रक्षा करते हुए दिखते हैं। स्थानीय थानाध्यक्ष हनीफ भी भक्त है और उसे भी ‘स्वामी’ कह कर बुलाया जाता है।

बिहार-झारखंड के लोगों को ये अच्छे से पता है कि जब गाँवों से जत्था बैद्यनाथ धाम (बाबा धाम) के दर्शन के लिए देवघर को निकलता है तो एक समान भगवा वस्त्र में काँवर लिए होते हैं और एक-दूसरे को ‘बम’ बुलाते हैं। इस दौरान पशु-पक्षी भी ‘बम’ होते हैं। वैसे ही, फिल्म में सबरीमाला के यात्री एक-दूसरे को ‘स्वामी’ कहते हैं। ये जातिगत या किसी प्रकार के भेदभाव को खत्म करता है। ईश्वर का हर भक्त देवघर में ‘बम’ और सबरीमाला में ‘स्वामी’ होता है।

छोटे और नहीं दिखने वाले गुप्तांग से लेकर लड़कियों तक का खतना… 5 देशों के मुस्लिम एक मंच पर करेंगे 12 घंटों तक चर्चा

मलेशियन इंटरनेशनल सर्कुमसीजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन 25 और 26 फरवरी 2023 को आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चों एवं बच्चियों के खतना को लेकर चर्चा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देशों के लोग हिस्सा लेंगे। इसमें छोटे और नहीं दिखने वाले शिश्न के हिस्से की चर्चा प्रमुखता से की जाएगी।

मलेशिया के पुत्राजय शहर के एक होटल में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देश हिस्सा लेंगे। कॉन्फ्रेंस की बेवसाइट के अनुसार, सर्कुमसीजन यानी मुस्लिमों में प्रचलित खतना से संबंधित इस कॉन्फ्रेंस में म्यांमार, मलेशिया, जापान, कनाडा, इंडोनेशिया के लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

बेवसाइट के अनुसार, यह कॉनफ्रेंस खतना को लेकर हुई खोज के बारे में चर्चा करना मुख्य मुद्दा है। इस पर महिला खतना पर चर्चा की जाएगी। इस पर चर्चा के लिए डॉक्टर हफातीन फैरोस बिंती तमादुन मलेशिया में महिला खतना को लेकर चर्चा करेंगी।

बता दें कि पुरूषों की अपेक्षा महिला खतना बेहद क्रूर माना जाता है। इसमें योनि के अगले हिस्से के चमड़े को काटकर निकाल दिया जाता है, ताकि मुस्लिम महिलाओं को यौन आनंद की अनुभूति ना हो। भारत में बोहरा समुदाय सहित इस्लामी देशों में यह प्रथा आज भी जारी है, जिसको लेकर दुनिया भर में इसकी आलोचना होती रहती है।

खतना की शिकार मुस्लिम महिलाओं को जीवन भर भयानक और दर्दनाक यातना से गुजरना पड़ता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर कहा था, ”यौन अंगों को काटना महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।” बता दें कि भारत सहित कई देशों में महिला खतना प्रतिबंधित है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें खतना के महत्व पर चर्चा की जाएगी। छोटे और नहीं दिखने वाले पुरुष गुप्तांगों को खतना के जरिए उभारने पर चर्चा की जाएगी। Buried Penis एक प्रकार का डिस्फंक्शन है, जिसके कारण यौन आकांक्षा में कमी या असमर्थता हो जाती है।

250 लोगों ने की घर वापसी, प्रबल प्रताप जूदेव ने गंगाजल से पखारे चरण: कहा- ईसाई मिशनरियों की करतूतों को अनदेखा कर रही कॉन्ग्रेस सरकार

कई हिन्दुओं को अपने मूल धर्म में ला चुके ‘अखिल भारतीय घर वापसी’ प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने एक बार फिर से धर्मांतरित हुए 250 लोगों की घर वापसी करवाई है। ईसाई बन चुके ये सभी लोग 36 अलग-अलग परिवारों से थे। मंगलवार (21 फरवरी, 2023) को आयोजित घर वापसी का यह कार्यक्रम बुढ़ीमाई धाम, चिकनीपाली के इमलीपारा (बागबहार, जशपुर) छत्तीसगढ़ में हुआ। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ का भी आयोजन किया गया।

जानकारी के मुताबिक, प्रबल प्रताप ने घर वापसी करने वाले सभी लोगों के पैरों को गंगाजल से धुला। इस अवसर पर मौजूद धर्म जागरण समन्वय विभाग एवं आर्य समाज से जुड़े लोग भी मौजूद थे। बाद में वैदिक मंत्रो के साथ हुए हवन में घर वापसी करने वाले सभी सदस्यों ने हिस्सा लिया। बाद में सभी ने एक स्वर में हिन्दू देवी देवताओं में आस्था जताते हुए भविष्य में हिन्दू धर्म में ही रहने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रबल प्रताप ने धर्मांतरण की साजिश को राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि मिशनरी हमारी सनातन संस्कृति को खत्म करना चाह रहे हैं। प्रबल प्रताप ने छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार और वहाँ के प्रशासन पर भी मिशनरियों की करतूतों को अनदेखा करने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद अन्य संगठनों ने भी हिन्दू समाज की एकता पर जोर दिया और आपस में मिल-जुल कर रहने का आह्वान किया।

घर-वापसी का यह आयोजन बस्तर संभाग में संत पदयात्रा के दौरान आयोजित हुआ था। यह यात्रा जशपुर से निकल कर रायपुर तक जा रही है। यात्रा के बीच में मिशनरियों से प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में लोगों से संवाद किया जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रबल प्रताप जूदेव इस से पहले भी घर वापसी के कई कार्यक्रम आयोजित करवा चुके हैं। इसी साल जनवरी 2023 में जूदेव ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान करीब 1100 ईसाई बने हिन्दुओं की समूहिक घर वापसी करवाई थी। अक्टूबर 2022 में प्रबल प्रताप जूदेव की मौजूदगी में उड़ीसा सुंदरगढ़ जिले में ईसाई बने 173 परिवारों के लगभग 500 लोगों ने हिन्दू धर्म में घर वापसी की थी। प्रबल प्रताप जूदेव ने मार्च 2022 में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक अन्य घर वापसी का कार्यक्रम करवाया था। तब उन्होंने ईसाई बने 1250 लोगों की घर वापसी करवाई थी।