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जनता से चंदा लें, दूसरे दलों से भी मदद: खस्ताहाल पंजाब के CM को अर्थशास्त्रियों की सलाह, AAP की रेवड़ी वाली राजनीति ने और बढ़ाई मुश्किल

पंजाब गंभीर आर्थिक संकट (Punjab Economic Crisis) से जूझ रहा है। अर्थशास्त्री लखविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह और केसर सिंह भंगू ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर एक ऋण राहत कोष (DRF) बनाने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सीएम भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) को कर्ज के जाल से बाहर निकालने के लिए सार्वजनिक चंदा माँगने की सलाह भी दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री लखविंदर सिंह नई दिल्ली में मानव विकास संस्थान (IHD) में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। सुखविंदर सिंह चंडीगढ़ में पंजाब वित्त आयोग के पूर्व प्रोफेसर और सलाहकार हैं। वहीं, केसर सिंह भंगू पंजाब यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर हैं।

तीन अर्थशास्त्रियों ने 11 फरवरी 2023 को ‘Fiscal Policy Under Siege: Strategy for Making Punjab Debt Free’ शीर्षक से एक अध्ययन में पंजाब सरकार को सलाह दी। रिपोर्ट में पंजाब सरकार को राज्य के राजनीतिक दलों से मदद लेने और केंद्र से राहत पैकेज के लिए जोर देने के लिए कहा।

उन्होंने पत्र में लिखा, “हम सरकार को सुझाव देते हैं कि कई उपलब्ध विकल्पों में से एक ऋण राहत कोष स्थापित करना और पंजाब से जुड़े लोगों से इसमें पैसा देने की अपील करना है। इस कोष का उपयोग केवल पंजाब के कर्ज के बोझ को कम करने के लिए किया जाएगा। दुनिया भर में पंजाबी स्वभाव से मददगार होते हैं और दान करने के लिए जाने जाते हैं। पंजाबियों की यह सांस्कृतिक विशेषता कर्ज से निपटने में काफी मददगार साबित होगी।”

विश्लेषकों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने हर साल करीब 35,201.87 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। इस​के लिए वह 18,209.8 करोड़ रुपए का ब्याज चुकाती है। इसके अलावा, मूल राशि को कवर करने के लिए 14,257.98 करोड़ रुपए सहित कुल 32,467.78 करोड़ रुपए सरकार चुकाती है।

अध्ययन के अनुसार, राज्य सरकार की राजकोषीय रणनीति धराशायी हो गई है। राज्य में नए पूँजी निवेश करने की क्षमता का अभाव है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आँकड़ों के अनुसार, पंजाब द्वारा विभिन्न स्रोतों से उधार ली गई राशि इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 53.3% है।

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 में 22.85% और वित्त वर्ष 2016-17 में 40.80% की दर से कर्ज बढ़ना शुरू हुआ। यह चिंताजनक था। यह तब से लगातार बढ़ रहा है और औसतन प्रति वर्ष 9% से अधिक दर से बढ़ रहा है। मौजूदा सरकार भी पिछली सरकारों की तरह ही कर्ज ले रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा दायित्वों, सरकारी क्षेत्र में नौकरियों का वादा, हस्तांतरण भुगतान और सब्सिडी के वादों के कारण राजस्व के आवश्यक स्तर को बढ़ाए बिना खर्च बढ़ाएगी। अर्थशास्त्रियों ने दोहराया कि सरकार को निकट भविष्य में कर्ज के भार को आधा करने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए एक पैनल का गठन करना चाहिए और इसके मध्यम से राज्य को कर्ज से मुक्त करने पर जोर देना चाहिए।

अर्थशास्त्रियों ने यह भी सुझाव दिया कि बढ़ते कर्ज के बोझ को तुरंत दूर करने के लिए सरकार बॉण्ड जारी कर सकती है। पंजाब के जाने-माने बुद्धिजीवियों, अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और राहत पैकेज के लिए इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने ला सकती है। उन्होंने वर्ष 2022-2023 के लिए 12,553.80 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे के अनुमान की तुलना में वर्तमान सरकार के अपने पहले नौ महीनों के कार्यकाल में ही राजस्व घाटे को 15,348.55 करोड़ रुपए तक पहुँचा दिया।

बता दें कि सत्ता में आने के बाद पहले 11 महीनों में मान सरकार 35,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज ले चुकी है। बिजली पर सब्सिडी देने के कारण इस वित्त वर्ष में राज्य के खजाने से 22,000 करोड़ रुपए खर्च होने की उम्मीद है। इसलिए पंजाब को अपने कर्मचारियों के पिछले महीने के वेतन का भुगतान करने के लिए 500 करोड़ रुपए उधार लेने पड़े।

पंजाब सरकार द्वारा राज्य के लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के बाद से स्थिति और खराब हो गई है। राज्य सरकार महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा पर भी फैसला नहीं ले पाई है। दूसरी ओर, आर्थिक तंगी के बीच पंजाब की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. बलजीत कौर महिलाओं को 1,000 रुपए प्रति माह देने का वादा कर रही हैं। यह वादा आम आदमी पार्टी ने चुनावों के दौरान किया था।

हाल ही में राज्य सरकार ने तीन टोल प्लाजा को भी बंद कर दिया। राज्य के सीएम ने आरोप लगाया कि जनता को लूटने के लिए अकाली-भाजपा गठबंधन और कॉन्ग्रेस ने इसकी अनुमति दी थी। सीएम के मुताबिक, टोल प्लाजा को बंद करने से जनता को रोजाना 10.52 लाख रुपए की बचत होगी।

वहीं, राज्य में स्थापित कई उद्योगों के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित आसपास के राज्यों में चले जाने से भी पंजाब की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कथित तौर पर सीएम भगवंत मान ने कहा है कि राज्य में अतिक्रमण करने वालों से बरामद की गई 9,000 एकड़ सार्वजनिक भूमि को किराए पर देकर राजस्व बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि रेत से राज्य को राजस्व प्राप्त होगा।

…डाकिन्यां भीमशंकरम: वो विज्ञापन जिससे भीमाशंकर पर शुरू हुआ विवाद, जानिए ज्योतिर्लिंग को लेकर महाराष्ट्र और असम क्यों हैं आमने-सामने

भगवान सदाशिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भीमाशंकर को लेकर असम सरकार और महाराष्ट्र सरकार में विवाद छिड़ गया है। असम की भाजपा सरकार ने एक विज्ञापन जारी करके कहा है कि ‘भीमाशंकर ज्‍योतिर्लिंग’ असम में है। हालाँकि, अब तक यही माना जाता है कि छठा ज्‍योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे स्थित भीमाशंकर में है।

असम सरकार के पर्यटन विभाग ने एक विज्ञापन जारी करके दावा किया है कि भीमाशंकर मंदिर असम के कामरूप में डाकिनी पहाड़ी पर स्थित है। 18 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर असम सरकार ने 14 फरवरी को विभिन्न अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन में लिखा, “भारत के छठे ज्योतिर्लिंग स्थल डाकिनी पर्वत, कामरूप में आपका स्वागत है।”

असम सरकार के इस दावे पर महाराष्ट्र के विपक्षी दल भाजपा सरकार पर हमलावर हो गए हैं। उन्होंने भाजपा पर महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को छीनने का आरोप लगाया। बता दें कि असम में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना के एक गुट के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में भाजपा की गठबंधन सरकार है।

महाराष्ट्र के विपक्षी दलों का हमला

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग विवाद को लेकर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद सुप्रिया सुले ने ट्विटर पर असम सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “क्या बीजेपी ने महाराष्ट्र के हिस्से में कुछ भी नहीं रखने का फैसला किया है? पहले महाराष्ट्र के हिस्से के उद्योग और रोजगार चोरी हुए और अब हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की चोरी होने वाली है।”

उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विनम्र अनुरोध है कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए इस पर तत्काल ध्यान दें।” सुले ने कहा कि असम की बीजेपी सरकार जो कर रही है वो बिल्कुल अस्वीकार्य है और उसका कोई आधार नहीं है।

सुले ने आगे कहा कि शंकराचार्य ने अपने बृहद रत्नाकार स्त्रोत में भीमाशंकर का जिक्र किया है और उसमें साफ-साफ लिखा है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भीमा नदी और डाकिनी के जंगलों का उद्गम स्थल है। इसलिए पुणे का भीमाशंकर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उन्होंने पूछा कि अब क्या साबित करने की जरूरत है?

वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा, “कई लोगों ने इसको लेकर चिंता जताई है। जिस तरह से महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को छीन लिया गया है, उसी तरह से मंदिरों को भी दूसरे राज्यों में ले जाया जा रहा है। हम हर राज्य के अलग-अलग मंदिरों में जाते हैं और हम सभी के मन में पूजा स्थलों को लेकर सम्मान एवं आस्था है।”  

परियोजनाओं के बहाने भाजपा पर निशाना

दरअसल, NCP और शिवसेना जिन परियोजनाओं की बात कर रही हैं, वह टाटा-एयरबस और वेदांता फॉक्सकॉन प्रोजेक्ट है। लगभग 22,000 करोड़ रुपए के टाटा-एयरबस C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट और 1.63 लाख करोड़ रुपए के वेदांता फॉक्सकॉन प्रोजेक्ट को पिछले साल महाराष्ट्र से गुजरात शिफ्ट दिया गया था। इसी परियोजना को लेकर विपक्षी पार्टियाँ भाजपा पर हमलावर हैं।

शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने भी असम सरकार पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की तरह कभी कोई महाराष्ट्र पर भी अपना दावा कर सकता है। वहीं, मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप ने कहा कि अब राम मंदिर का मुद्दा खत्म हो गया है तो भाजपा ने ज्योतिर्लिंग का नया मुद्दा सामने लाया है। 

भाजपा नेता और महाराष्ट्र के वन और पर्यटन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि भारत सरकार के पर्यटन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुणे के भीमाशंकर ही छठे ज्योतिर्लिंग हैं। इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। वहीं, पुणे के भीमाशंकर मंदिर के पुजारियों ने भी असम सरकार का विरोध किया है।

भगवान के स्थान को लेकर विवाद

द्वादश ज्योतिर्लिंग में छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर असम लंबे समय दावा करता रहा है कि असली भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग उसके यहां है। वहीं, महाराष्ट्र लगातार इसका विरोध करता रहा है। हालाँकि, महाराष्ट्र के लिए यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच विवाद हो चुका है।

महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर स्थित अंजनेरी पहाड़ी पर हनुमान जी का जन्म स्थान माना जाता है। कर्नाटक के किष्किंधा क्षेत्र से नासिक आए महंत गोविंद दास ने दावा किया था कि हनुमान जी का जन्मस्थान कर्नाटक के किष्किंधा में है। उन्होंने नासिक के संतों को चुनौती दी थी कि वे शास्त्रों के आधार पर सिद्ध करें कि भगवान हनुमान का जन्मस्थान त्र्यंबकेश्वर स्थित अंजनेरी पर्वत ही है। 

ज्योतिर्लिंग को लेकर विवाद

बैद्यानाथ धाम को लेकर विवाद: झारखंड के देवघर में 5वाँ ज्योतिर्लिंग है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्रोत्र के मुताबिक, यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के बीड जिले के पारली में स्थित है। वहीं, कुछ लोगों का दावा है कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में असली बैद्यनाथ बाबा मौजूद हैं।

ओंकारेश्वर मंदिर: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में दो ज्योतिर्लिंग है- एक ममलेश्वर और एक ओंकारेश्वर। इन दोनों में असली ज्योतिर्लिंग कौन सा है, इसको लेकर विद्वानों में विवाद है। हालाँकि, पुजारी दोनों को ही ज्योतिर्लिंग मानते हैं।

घृष्णेश्वर मंदिर: घृष्णेश्वर स्त्रोत के मुताबिक यह ज्योतिर्लिंग एक शिवालय में स्थित है। हालाँकि, यह शिवालय कहाँ है, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। कुछ लोगों का मत है कि यह शिवालय एलोरा की गुफाओं में है। वहीं, कुछ लोगों का मत है कि असली घृष्णेश्वर महादेव महाराष्ट्र में ना होकर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के शिवाड गाँव में स्थित हैं।

बाबा का धाम और शिवरात्रि पर 144 का पहरा: देवघर में शिव बारात रूट पर विवाद; हाई कोर्ट पहुँचे बीजेपी MP, कहा- एंटी हिंदू है हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड का देवघर हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र है। लेकिन इस बार 18 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि के​ दिन शहर के कुछ इलाकों में धारा 144 लागू करने का आदेश प्रशासन ने जारी किया है। साथ ही इस मौके पर निकलने वाली शिव बारात के रूट में भी मनमाने तरीके से बदलाव का आरोप प्रशासन पर है।

इसको लेकर बीजेपी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए उस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने धारा 144 और शिव बारात के रूट में बदलाव के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को सुनवाई होगी। देवघर गोड्डा संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है।

दुबे ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि शिवरात्रि के अवसर पर शिव की बारात निकालने के लिए वर्ष 1994 एक समिति बनाई गई थी। समिति की तरफ से ही बारात के लिए रूट निर्धारित किया जाता रहा है। इस साल समिति ने जो मार्ग निर्धारित किया था, उसमें प्रशासन ने मनमाने ढंग से बदलाव कर दिया है। प्रशासन जिस मार्ग से बारात निकालने की इजाजत दे रहा है, वह रास्ता संकरा है।

निशिकांत दुबे ने याचिका में शहर में लगाए गए धारा 144 पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि शहर में धारा 144 लगाए जाने का कारण अस्पष्ट है। टाइम्स नाउ नवभारत से बात करते हुए दुबे ने कहा कि शिवरात्रि के दिन भक्त जमा होंगे। बारात देखने के लिए भीड़ जमा होगी। ऐसे में धारा 144 लगाया जाना प्रशासन का तानाशाही पूर्ण रवैया है। दुबे ने कहा कि शिव की नगरी में शिव बारात नहीं निकलेगी तो कहाँ निकलेगी। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार एंटी हिंदू सरकार है।

भाजपा नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी देवघर और पलामू की घटना को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन सरकार एक बार फिर हिंदू आस्था को निशाना बना सस्ती राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का प्रयास हो रहा है। देवघर में राजनैतिक दुर्भावना से प्रेरित फरमान के बाद इसका साइड इफेक्ट्स पलामू के पांकी में देखने को मिल रहा है।

मरांडी ने लिखा है, “पलामू में शिवरात्रि का तोरण द्वार लगाने से रोका गया। हिंदुओं और पुलिसवालों को निशाना बनाकर हमला किया गया। कई पुलिसवाले घायल हैं। पूरा क्षेत्र अशांत है। अब क्या हिंदुओं को त्योहार मनाने और अपनी परंपराओं को निभाने के लिए भी अदालत की शरण में जाना पड़ेगा? मुख्यमंत्री जी जहर की खेती करने वालों को पोषण देना बंद करिए।”

बता दें कि झारखंड के पलामू में महाशिवरात्रि की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं पर मस्जिद से पत्थरबाजी की गई। इसी के साथ कुछ वाहनों में आगजनी भी की गई। इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती है और धारा 144 लागू की गई है।

BBC के दफ्तरों में तीसरे दिन भी आयकर सर्वे जारी, कर्मचारियों को WFH: पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल को अमेरिका ने नहीं दिया भाव

बीबीसी (BBC) के दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों में इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) का सर्वे तीसरे दिन गुरुवार (16 फरवरी 2023) भी जारी रहा। मुंबई के सांताक्रूज में स्थित बीबीसी के दफ्तर में आयकर विभाग के अधिकारी खातों की जाँच कर रहे हैं। BBC ने अगले नोटिस तक कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने के लिए कहा है।

इंडिया टुडे के मुताबिक, सर्वे करने वाले अधिकारी वित्तीय लेन-देन, कंपनी की संरचना और समाचार कंपनी से जुड़े अन्य विवरणों पर सवाल पूछ रहे हैं और साक्ष्य एकत्रित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा कॉपी कर रहे हैं। वहीं, इस मामले को पाकिस्तान के एक पत्रकार ने अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उठाया, लेकिन अमेरिकी सरकार ने उसके सवाल को नजरअंदाज कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशी मीडिया हाउस में आयकर सर्वे अर्जित किए गए लाभ को विदेश भेजने और ट्रांसफर प्राइसिंग रूल्स के उल्लंघन को लेकर किया जा रहा है। इसको लेकर वॉशिंगटन में पाकिस्तान के मीडिया संस्थान ARY के रिपोर्टर जहाँजेब अली ने यूएस स्टेट डिपार्टमेंट (US State Department Spokesperson) के प्रवक्ता नेड प्राइस से पूछा कि अमेरिकी सरकार क्या इस मुद्दे को लेकर चिंतित है या फिर इस पर कुछ प्रतिक्रिया देना चाहती है?

इसके जवाब में नेड प्राइस ने कहा कि हमें दिल्ली में बीबीसी के कार्यालयों में भारतीय आयकर विभाग द्वारा किए जा रहे सर्वे की जानकारी है, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर आगे कुछ टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तानी पत्रकार ने दावा किया कि 2002 के गुजरात दंगे पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर उठे विवाद के बाद यह कार्रवाई हुई है। उन्होंने अफसोस जताया कि किसी भी अमेरिकी अधिकारी ने इसकी आलोचना नहीं की। इस बात पर नेड प्राइस ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर अच्छे संबंध हैं। साथ ही दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्य भी साझा करते हैं।

नेड प्राइस ने प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका लगातार दुनियाभर में प्रेस की आजादी, धार्मिक आजादी और मानवाधिकारों का समर्थक रहा है। इनसे लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग की तलाशी के बारे में भारतीय अथॉरिटीज ही विस्तृत जवाब दे सकती है।

गौरतलब है कि मंगलवार (14 फरवरी 2023) को दोपहर 12 बजे से आयकर विभाग ने बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालयों पर सर्वे शुरू किया था। आयकर विभाग ने वित्तीय गड़बड़ी के शक में यह सर्वे शुरू किया है। बताया जाता है कि सर्वे के दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों के मोबाइल और लैपटॉप रखवा लिया था। इसके साथ ही वहाँ के कर्मचारियों को सहयोग करने के लिए कहा था। लेकिन बीबीसी ने अपने कर्मचारियों के वेतन से संबंधित जानकारी देने के लिए मना कर दिया है।

इस सर्वे को लेकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार और भारत विरोधी तत्वों का कहना है कि बीबीसी ने हाल में एक ही डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी, जिसमें गुजरात दंगों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया था। हालाँकि, जो लोग इस बात को समझ रहे हैं, वे इससे सहमत नहीं है।

हिंदुओं के त्योहार में अड़ंगा, पहली लाठी भी हिंदू को, पत्थरबाजी मस्जिद से… फिर भी हिंदू ही हो गया दंगाई: पलामू पर ‘मुस्लिम विक्टिम’ रोना शुरू

झारखंड के पलामू में महाशिवरात्रि को लेकर हिंदुओं द्वारा तोरणद्वार लगाए जाने पर बवाल हो गया है। तोरणद्वार का मुस्लिमों ने विरोध किया और कहा कि मस्जिद के सामने इसे नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद हिंसक भड़क उठी। मस्जिदों से ना सिर्फ पथराव किया गया, बल्कि आगजनी भी की गई। अब इस हिंसा को लेकर मुस्लिमों द्वारा ‘विक्टिम कार्ड’ खेला जा रहा है।

हैदराबाद से सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरी घटना में मुस्लिमों को ही पीड़ित बता दिया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद पर पत्थर फेंके गए और दो घर तथा कुछ गाड़ियाँ जला दी गईं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट सबसे पहले एक हिंदू का सिर फोड़ने की बात कह रहा है और उसके बाद मस्जिद से पत्थरबाजी हुई।

ओवैसी यहीं नहीं रूकते हैं। उनका कहना है कि मस्जिद के सामने तोरणद्वार नहीं बनाना चाहिए था। उन्होंने इसका दोष भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर मढ़ दिया और कहा कि इसमें दंगाई और संघ परिवार जीत गए।

वहीं, सोशल मीडिया पर मुस्लिमों को पीड़ित साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीर फैसल नाम के एक कथित पत्रकार ने एक वीडियो शेयर किया और। कहा कि हिंदुत्ववादी गुंडों ने मुस्लिमों की घर एवं दुकानें जला दीं और उनकी गाड़ियों में आग लगा दी।

पलामू हिंसा को लेकर जिस तरह की नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, उसमें मुस्लिमों को पीड़ित और पीड़ित हिंदुओं को गुंडा साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट कहा जा रहा है कि महाशिवरात्रि को लेकर पलामू के पांकी के हिंदू तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चौक पर तोरणद्वार बनाया था। चौक के पास ही मस्जिद स्थित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जामा मस्जिद के नाम से पहचाने जाने वाली यह मस्जिद हिंदुओं के सहयोग से ही बनाई गई है। लोगों का कहना है कि यह मस्जिद ज्यादा पुरानी भी नहीं है और ना ही आसपास के इलाके में मुस्लिमों की इतनी जनसंख्या है। जहाँ मस्जिद बनाई गई है, वह इलाका हिंदू बहुल है।

तोरणद्वार बनाने के बाद मस्जिद से कुछ मुस्लिम निकल कर आए और इस द्वार को हटाने के लिए कहने लगे। उनका कहना था कि पास में मस्जिद है और मस्जिद के पास तोरणद्वार नहीं बना सकते। इसके लिए हिंदू पक्ष राजी नहीं हुआ और कहा कि वे तोरणद्वार सड़क पर बना रहे हैं, जो कि सरकारी संपत्ति है।

इसके बाद मुस्लिम पक्ष उनके भीड़ गए। बुधवार (14 फरवरी 2023) को एक मुस्लिम ने निरंजन सिंह नाम के एक हिंदू के सिर पर डंडा मार दिया। इस हमले में निरंजन सिंह का सिर फट गया। जिस समय हमला किया गया, उस वक्त वहाँ पुलिस मौजूद थी। कहा जाता कि इसके बाद मस्जिद से हिंदुओं पर पत्थरबाजी की जाने लगी।

इस दौरान दंगाइयों ने 4 घरों, 3 गुमटीनुमा दुकान, 1 कार और 2 बाइक में आग लगा दी। इसके अलावा, 4 गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। इस हमले में लेस्लीगंज के एसडीपीओ आलोक कुमार टूटी और पांकी थाना के इंस्पेक्टर अरुण महथा समेत 8 लोगों को गंभीर रूप से चोट आई है।

पांकी की भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे ने बताया कि मस्जिद से आए दिन हिन्दुओं के कार्यक्रम में खलल डाला जाता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद कमिटी से जुड़े लोगों द्वारा अक्सर बाजार और आस-पास विवाद पैदा किया जाता है और उसके बाद मारपीट की जाती है।

पांकी के सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह ने कहा कि हिन्दुओं पर पेट्रोल बम और पत्थर मस्जिद की छत से फेंके जा रहे थे। कमलेश सिंह ने हमें बताया, “न तो आज जुमा था और न ही उस क्षेत्र में मुस्लिमों की इतनी आबादी। न ही घटना का समय किसी नमाज या कार्यक्रम का था, फिर हमलावरों की इतनी भीड़ आई कहाँ से।” उन्होंने इस घटना को सुनियोजित बताया।

पांकी बाजार में घटी घटना को कमलेश सिंह ने गज़वा-ए-हिन्द का ट्रायल बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी पूरे देश में अपनी ताकत को तौल रहे हैं और जहाँ कमी-अधिकता है, उसकी तैयारी कर रहे हैं। वहीं, मंजूलता ने मंजूलता ने ऑपइंडिया को बताया कि एक बार 14 अगस्त को उन्हें पुलिस ने हिरासत में महज इसलिए लिया था, क्योंकि वो तिरंगा लगाने के लिए उस चौक पर जगह चिन्हित कर रहीं थीं। हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों के कारण प्रदेश अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की शरणस्थली बनती जा रही है। यहाँ लव जिहाद और लैंड जिहाद की घटनाओं के साथ हिंदुओं की हत्या आम बात हो गई है। कई जगहों पर आदिवासियों और दलितों को मुस्लिमों की प्रताड़ना के कारण भागना तक पड़ रहा है। हिंदुओं को अपना त्योहार मनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

हिंदू त्योहारों पर मुस्लिमों के हमले झारखंड में आम हो गए हैं। हेमंत सोरेन की तुष्टिकरण की नीति के कारण देवघर में महाशिवरात्रि के दिन पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है। इतना ही नहीं, महाशिवरात्रि कमिटी ने शिव बारात के लिए जो रूट तय किया था, उस पर प्रशासन ने रोक लगा दिया है। जिला प्रशासन ने पुराने रूट से ही शिव बारात के आयोजन की इजाजत दी है।

पिछले साल अगस्त में पांडू थाना क्षेत्र के मुरुमातू गाँव में महादलित मुसहर जाति के लोगों पर मुस्लिमों की एक भीड़ ने हमला कर उनके घरों को तोड़ दिया था। टोंगरी पहाड़ी के निकट बसे इन मुसहरों के डेढ़ दर्जन से अधिक कच्चे घर और झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया। मारपीट की गई। इतना ही नहीं, इन जगहों पर कब्जा करने के लिए मुस्लिमों ने घर ध्वस्त करने के बाद उनके सामानों को दो वाहनों पर लादकर छतरपुर के लोटो गाँव के पास जंगल में छोड़ दिया था। 

इसी तरह 6 फरवरी 2022 को हजारीबाग में सरस्वती पूजा के दौरान एक हिंदू बच्चे की मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। दरअसल, बच्चे सरस्वती पूजा के बाद प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जा रहे थे। बरही थाना के नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास मुस्लिम युवकों ने विसर्जन करने जा रहे लड़कों को रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। मुस्लिम युवक रूपेश कुमार को तब तक पीटते रहे, जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

 

मुस्लिम बनने को तैयार नहीं हुई चंदा, पहले बुरी तरह पीटा फिर गला दबाकर मार डाला: पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मोहम्मद आरिफ को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में धर्मांतरण से इनकार किए जाने पर एक हिंदू महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान चंदा सिंह के तौर पर हुई है। आरोपित मोहम्मद आरिफ को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

आरोप है कि आरिफ ने धर्म परिवर्तन से इनकार किए जाने पर महिला को बुरी तरह पीटा। फिर इलाज के बहाने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। महिला की लाश घर में छोड़कर आरिफ फरार हो गया। गुरुवार (16 फरवरी, 2023) की सुबह उसे मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया।

रिपोर्ट के अनुसार आफिर नदी के रास्ते आरिफ चित्रकूट भागने की फिराक में था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। आरिफ ने पुलिस पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैर में गोली लगी।

रिपोर्टों के मुताबिक चंदा सिंह के पति दुर्गेश सिंह की मौत हो चुकी है। वह मऊ के हलधरपुर में रहती थी। पार्लर चलाकर बच्चों का भरण-पोषण करने लगी। इसी दौरान उसके संपर्क में गुड्डू राजपूत बनकर आरिफ आया। गुड्डू ने चंदा को मऊ की सारी संपत्ति बेचकर कौशांबी शिफ्ट होने की सलाह दी। करीब 2 साल पहले अपनी संपत्ति बेच चंदा दोनों बेटियों के साथ कौशांबी आ गई। यहाँ उसे पता चला कि जिसे वह गुड्डू समझ रही, वह मोहम्मद आरिफ है।

इसके बाद आरिफ और चंदा के बीच झगड़े होने लगे। आरिफ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। बच्चों को भी नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। आए दिन पिटाई की वजह से चंदा बीमार हो गई। चंदा की बेटी और भतीजे ने मीडिया को जानकारी दी कि आरिफ मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को इलाज के बहाने चंदा को अपने साथ ले गया। मौका पाकर उसने चंदा की हत्या की और लाश को घर पर छोड़कर फरार हो गया। बेटी के मुताबिक चंदा फोन पर चिल्ला रही थी, जिसके बाद आरिफ ने फोन छिन लिया और उसकी तबीयत खराब होने की बात कही। उसी रात वह चंदा की लाश घर पर छोड़ गया।

चंदा की बेटी की मानें तो आरिफ की नजर उसकी संपत्ति पर थी। वह आए दिन चंदा से पैसे माँगा करता था। साथ ही आरिफ चाहता था कि चंदा कौशांबी में खरीदी गई प्रॉपर्टी आरिफ के नाम कर दें। बता दें कि चंदा ने मऊ की संपत्ति बेचकर कौशांबी में जमीन खरीदी थी और घर बनवाया था।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार बलिया की रहने वाली चंदा सिंह की माँ को उनकी बेटी ने हफ्ते भर पहले फोन किया था। इस दौरान उन्होंने अपनी माँ को गुड्डू राजपूत के आरिफ होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरिफ चंदा को अपने गाँव मिरदहन का पुरवा ले गया था। यहाँ उस पर मुस्लिम समुदाय के 100 लोगों ने मतांतरण के लिए दबाव बनाया। इस्लाम कबूल न करने पर उसकी पिटाई की गई।

मामले में मृतका की माँ ने शिकायत दी है। जिसके आधार पर 12 नामजद व 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या व धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला दर्ज किया गया है। चंदा के शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

छुट्टी पर गाँव आए थे भारतीय सेना के जवान प्रभु, DMK पार्षद और उसके साथियों ने पीट-पीटकर मार डाला: तमिलनाडु की घटना

तमिलनाडु के कृष्णागिरि में भारतीय सेना के जवान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक छुट्टी पर घर आए सैनिक प्रभु और उनके बड़े भाई प्रभाकरण का डीएमके (DMK) के पार्षद आर. चिन्नासामी के साथ विवाद हुआ था। इसके बाद चिन्नासामी और उसके 8 साथियों ने प्रभु पर हमला कर उन्हें बुरी तरह पीटा। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु में इस समय कॉन्ग्रेस के सहयोगी डीएमके की ही सरकार है। इस घटना पर मुख्यमंत्री स्टालिन की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कृष्णागिरि पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 8 फरवरी, 2023 की दोपहर प्रभु और प्रभाकरण का स्थानीय पार्षद चिन्नासामी के साथ विवाद हुआ था। पानी टंकी के पास कपड़ा धोने को लेकर हुए झगड़े को स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर सुलझा दिया था। उसी दिन शाम को चिन्नासामी 8 साथियों के साथ प्रभु और प्रभाकरन के घर आ धमका। उनलोगों ने दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। इस हमले में प्रभु के सर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद प्रभु को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ मंगलवार (14 फरवरी, 2023) की रात उनकी मौत हो गई।

सैनिक की मौत के बाद भाजपा और एआईएडीएमके की तरफ से राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एआईएडीएमके प्रवक्ता कोवई साथ्यन ने कहा कि जब भी डीएमके सत्ता में होती है राज्य की कानून-व्यवस्था चरमरा जाती है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेना के जवान तक की हत्या की जा रही है।

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के.अन्नामलाई ने भी घटना को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि DMK पार्षद द्वारा सैनिक की हत्या की खबर सुनकर वे हैरान हैं। DMK शासन में सैनिक अपने गाँव में भी सुरक्षित नहीं हैं। डीएमके देश की सरहदों की रक्षा करने वाले सैनिकों के परिवार को धमकाने, हमला करने और हत्या करने की हद तक जा चुकी है।

प्रभु की मौत के बाद से ही पार्षद चिन्नासामी फरार है। पुलिस के मुताबिक हमला करने वालों में उसका बेटा राजापांडी और गुरु सूर्यमूर्ति भी शामिल थे। उनके अलावा अन्य आरोपित भी चिन्नासामी के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर चिन्नासामी के बेटे राजापंडी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। चिन्नासामी की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं।

हिंदू राष्ट्र का संकल्प, बागेश्वर धाम में चल रहा महायज्ञ: बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री- बने सनातन बोर्ड, लोग जुड़ेंगे तो संविधान भी बदलेगा

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में इन दिनों महायज्ञ चल रहा है। सात दिनों का यह आयोजन भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ हो रहा है। इसका हिस्सा बनने के लिए संतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में भक्त बागेश्वर धाम पहुँच रहे हैं। धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र का अपना संकल्प दोहराते हुए कहा है कि यदि एक तिहाई लोग भी इसकी माँग करते हैं तो संविधान में बदलाव संभव है।

एबीपी न्यूज की रुबिका लियाकत को दिए इंटरव्यू में उन्होंने लोगों से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए आवाज उठाने और इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि एक तिहाई लोग हिंदू राष्ट्र की माँग करेंगे तो भारत हिंदू राष्ट्र हो जाएगा। साथ ही कहा कि एक प्रतिशत लोग हिंदू राष्ट्र का विरोध भी करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। नीचे लगे वीडियो में आप 40वें सेकेंड से यह बात सुन सकते हैं।

यह पूछे जाने पर कि हिंदू राष्ट्र की माँग पाकिस्तान जैसी कट्टरता नहीं है, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पाकिस्तान वाले भी हिंदू ही हैं। जैन और बौद्धों को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जैन और बुद्ध भी हमारी आत्मा हैं। जिन लोगों को यह लगता है कि हमारी जिद (हिंदू राष्ट्र) गलत है उन्हें अपना इलाज कराना चाहिए। इसी तरह जी न्यूज के पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए भी उन्होंने कहा कि जब एक तिहाई लोग तिलक लगाकर हिंदू राष्ट्र की माँग करेंगे तो संविधान में भी सुधार कर दिया जाएगा।

स्वामी प्रसाद मौर्य के चीन को भस्म कर देने वाले बयान का जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम भस्म नहीं करते। हम विश्व कल्याण का काम करते हैं। हमारा सनातन दंड नहीं, बल्कि शिक्षा देने का कार्य करता है। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने देश में सनातन बोर्ड बनाने की माँग की है। हिंदू राष्ट्र की माँग को लेकर अडिग बागेश्वर महाराज ने कहा कि जिनके खून में दिक्कत होगी वही हिंदू राष्ट्र की बात नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि हिंदू राष्ट्र को लेकर देश में क्रांति आने वाली है, जिसके बाद संसद में कुछ होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होगा।

रेलवे अधिकारी की बेटी के खो गए जूते: GRP, RPF और IRCTC की टीमों ने महीने भर छानी खाक, दिल्ली के डॉक्टर के पास से बरामद किए

ओडिशा के डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) की बेटी के जूते रेल यात्रा के दौरान खो गए थे। इस जूते को खोजने में गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की टीम लगी रही। आखिरकार अपने अधिकारी की बेटी की खोए जूते को टीम ने बरामद कर लिया।

जूते को खोजने वाली टीम ने चोरी की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि DRM की बेटी का जूता चोरी नहीं हुआ था, बल्कि एक यात्री गलती से पहन कर चली गई थीं। लगभग एक महीने की मशक्कत के बाद टीम ने जूते को एक महिला यात्री के पास से बरामद कर लिया है। अब इसे अधिकारी की बेटी को वापस लौटा दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, DRM विनीत सिंह की बेटी मानवी 3 जनवरी 2023 को लखनऊ मेल से दिल्ली से लखनऊ जा रही थीं। इस बीच उनका जूता गायब हो गया। मानवी को बगल की सीट पर सफर कर रही महिला यात्री पर शक हुआ। इसके बाद उन्होंने घटना की जानकारी अपने पिता को दी।

मानवी ने बताया कि साथ यात्रा कर रही एक महिला 4 जनवरी की सुबह बरेली उतर गई थी और वह उनके जूते लेकर चली गई। DRM विनीत सिंह ने GRP पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद रेलवे पुलिस, जीआरपी और आईआरसीटीसी की टीम ने जूते की तलाश शुरू कर दी। उधर

बरेली के डिप्टी एसपी देवी दयाल ने बताया, “हमने बरेली स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार के 4 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की, लेकिन महिला का कोई पता नहीं चला। फिर हमने आईआरसीटीसी अधिकारियों से एसी प्रथम श्रेणी के यात्रियों के आरक्षण डिटेल हासिल करने में मदद माँगी। यह काम कर गया और हमने संदिग्ध पर ध्यान केंद्रित किया।”

महीने भर की खोजबीन के बाद आखिरकार उस महिला का पता लगाया गया, जिस पर मानवी को शक था। मानवी के साथ सफर करने वाली सह-यात्री दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाली 34 वर्षीय महिला डॉक्टर हैं। महिला डॉक्टर ने जूते ले जाने की बात स्वीकार की। गायब हुए जूते की कीमत 10,000 रुपए बताई जा रही है।

केस से जुड़े जाँच अधिकारी मनोज त्यागी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पूछताछ के दौरान महिला डॉक्टर ने कहा कि जब ट्रेन 4 जनवरी को सुबह बरेली स्टेशन पहुँची तो जल्दबाजी में उन्होंने गलत जूते पहन लिए और चली गईं। एक ही आकार के जूतों के होने के कारण यह गलती हुई।

अधिकारी ने बताया कि महिला ने मानवी के जूतों को वापस लौटा दिया है और अब इस जूते को इसके मालिक तक पहुँचा दिया जाएगा। जूतों को चोरी किए जाने का कोई सबूत नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

‘हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों के अपराधों में वृद्धि’: Hate Speech मामले में हिंदू संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में दिया आवेदन, कहा- बहुसंख्यकों के खिलाफ चल रही मुहिम

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हेटस्पीच (Hate Speech) को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस बीच हिंदू संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ (HFJ) की तरफ से शीर्ष अदालत में हस्तक्षेप आवेदन (Intervention application) दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि देश में मुस्लिम और ईसाई मिशनरियों द्वारा हिंदुओं को धर्मांतरित करने के लिए मुहिम चलाई जा रही है।

बता दें पत्रकार कुर्बान अली द्वारा 17 दिसंबर 2021 को हरिद्वार में नरसिंहानंद द्वारा आयोजित धर्म संसद में और 19 दिसंबर 2021 को दिल्ली में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यक्रमों में दिए गए भाषणों के खिलाफ कार्रवाई माँग को लेकर दायर याचिका की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अब इस मामले में हिंदू संगठन ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के द्वारा दी गई याचिका में कहा गया है कि कई मौकों पर मुस्लिम भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए। एक तरह से सरेआम सिर काटने की बात कही जा रही थी। उसके बाद देश के कई हिस्सों में सिर काटने व सिर काटने की कोशिश जैसी घटनाएँ सामने आईं।

आवेदन में कुछ ऐसे उदाहरण भी दिए गए हैं, जिनमें स्टैंडअप कॉमेडियन हिंदू धर्म व देवी-देवताओं पर भद्दे और अपमानजनक चुटकुले बनाते नजर आए। इसमें मुनव्वर फारूकी का जिक्र है, जिसने कुछ दिन पहले भगवान राम और माता सीता के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। अर्जी में कई उदाहरण दिए गए हैं, जहाँ हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच के बाद अपराधिक घटनाएँ घटित हुईं।

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों के अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है। मुस्लिमों में हिंदुओं के प्रति घृणा की भावना तेजी के साथ बढ़ी है, लेकिन पुलिस राजनीतिक कारणों और मुस्लिम भीड़तंत्र के डर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचाती है।

याचिका में आगे कहा गया है कि बेहद खास और मजबूर करने वाली परिस्थितियों में ही पुलिस द्वारा FIR दर्ज की गई, लेकिन हिंदुओं के खिलाफ घृणा को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।। मुस्लिमों के एक वर्ग में बढ़ रहे हिंदू घृणा को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।

आवेदन में आगे कहा गया है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में ईसाई मिशनरी सक्रिय हैं। ये गरीबों को प्रलोभन देकर उनका धर्म बदलने के काम में लगे हुए हैं। इनमें ज्यादातर एससी/एसटी हिंदुओं को अनैतिक रूप से ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा है। आवेदन में मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और भारत के अन्य स्थानों में ईसाई मिशनरियों द्वारा लोगों की आर्थिक स्थिति का लाभ उठाकर उनके धर्मांतरण की कोशिश का जिक्र है।

बता दें कि तत्कालीन चीफ जस्टीस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुर्बान अली द्वारा दायर जनहित याचिका में नोटिस जारी किया था। इसमें हरिद्वार और दिल्ली में दिए गए कथित घृणास्पद भाषणों में न्यायालय के हस्तक्षेप की माँग की गई थी।