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अब आप कोर्ट की तरह खटखटा सकते हैं संसद का भी दरवाजा, आम लोगों को मिलेगा याचिका दायर करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से माँगा जवाब

संसद में आम लोगों द्वारा याचिका दायर कर की व्यवस्था बनाने की माँग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) सुनवाई करेगा। इस याचिका में कहा गया है कि संसद में आम लोगों द्वारा सुझाए गए मुद्दों पर भी बहस की व्यवस्था होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार से जवाब माँगा है।

याचिका पर जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ ने शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की माँग की। इस पर पीठ ने मामले को चार हफ्ते बाद लिस्ट करने का आदेश देते हुए सरकार को इस बीच हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।

इसके पहले 27 जनवरी 2023 को करण गर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार का पक्ष जानना चाहा था। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और 21 के हवाले से कहा गया है कि भारतीय नागरिकों को संसद में याचिका दायर करने और सुझाए गए मुद्दों पर चर्चा कराने की माँग करने का अधिकार है।

क्या है लोगों द्वारा संसद में याचिका दायर करने की व्यवस्था ?

संसद में याचिका दायर करने की व्यवस्था कैसी होगी इस पर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। अंदाजा लगाया जा सकता है कि संसद में याचिका दायर करने की व्यवस्था जनहित याचिका से मिलती-जुलती व्यवस्था हो सकती है।

जिस तरह कोर्ट में निजी यानि पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन या जनहित याचिका दायर की जाती है, उसी तरह संसद के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की व्यवस्था हो सकती है। इसके तहत संसद में याचिका दाखिल कर अपनी पसंद के मुद्दों पर चर्चा की माँग करके कानून बनाने की प्रक्रिया में भागीदार बन सकते हैं।

क्या होगा फायदा?

संसद में याचिका दायर करने का अधिकार मिलने के बाद नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से और ज्यादा जुड़ पाएँगे। वोट देने के बाद प्रायः नागरिक अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से दूर हो जाते हैं। नागरिक चुनाव के बाद की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से कट जाते हैं। संसद में याचिका दायर कर पाने की व्यवस्था से नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच की दूरी कम हो सकती है। आम लोग भी कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।

ऐसे मसले जो जनप्रतिनिधियों के पास नहीं पहुँच पाते, उन्हें सीधे संसद तक पहुँचाए जा सकेंगे। नागरिकों की आवाज संसद में बिना किसी बाधा के पहुँच सकेगी। नागरिक खुद को ज्यादा सशक्त महसूस कर सकेंगे और जनप्रतिनिधियों की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।

कहा जा रहा है कि इस व्यवस्था के बनने से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर बोझ कम होगा। यह बात याचिका में भी कही गई है। बता दें संसद में याचिका दाखिल करने की व्यवस्था ब्रिटेन में सालों से मौजूद है।

HAL के लड़ाकू विमान पर लौटी बजरंग बली की तस्वीर, विवाद के बाद हटा दिया गया था: एयरो शो के अंतिम दिन फिर से दिखा ‘तूफान’

बेंगलुरु में आयोजित हुए एशिया के सबसे बड़े एयर शो के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सुपरसोनिक ट्रेनर विमान HLFT-42 पर एक बार फिर भगवान हनुमान जी की तस्वीर नजर आई। इससे पहले इस फोटो को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद फोटो हटा दी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के दौरान, एयरो इंडिया शो के अंतिम दिन यानी शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को HLFT-42 पर एक बार फिर भगवान हनुमान जी की फोटो देखी गई। दरअसल, एयरो इंडिया शो के पहले दिन सोमवार (13 फरवरी 2023) को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सुपरसोनिक ट्रेनर विमान HLFT-42 के पिछले हिस्से पर भगवान हनुमान जी की फोटो लगाई गई थी। यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद शुरू हो गया था। इसके बाद यह फोटो हटा ली गई थी।

फोटो को लेकर HAL के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर ने अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था, “हमने भगवान हनुमान जी की तस्वीर सिर्फ विमान की शक्ति को दर्शाने के लिए लगाई थी। लेकिन इस पर चर्चा करने के बाद हमने इसे हटाने का फैसला किया। यह एक साधारण सी बात थी और पिछले ट्रेनर एयरक्राफ्ट ‘मारुत’ पर आधारित थी। लेकिन हमने इस पर विवाद होते हुए देखा। परियोजना अभी भी प्रारंभिक चरण में है। हम केवल इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।”

वहीं, HAL के चेयरमैन सीबी अनंतकृष्ण ने कहा था, “विमान पर हनुमान जी की फोटो किसी इरादे से नहीं लगाया गई। न ही किसी इरादे से हटा गई।”

तूफान आ रहा है

बता दें कि सुपरसोनिक ट्रेनर विमान (HLFT-42) पर लगी फोटो में भगवान हनुमान जी गदा लेकर उड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। इस फोटो के साथ लिखा हुआ था -The Storm Is Coming यानि तूफान आ रहा है।

बता दें कि सोमवार (13 फरवरी 2023) से शुरू हुआ यह शो शुक्रवार (17 फरवरी 2023) तक चला। इस एयर शो, हवाई क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन हुआ। साथ ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर नए भारत के उदय को भी दर्शाया गया। एयरो शो 2023 का मुख्य उद्देश्य मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाते हुए घरेलू हवाई उद्योग को बढ़ावा देना है। बेंगलुरु एयर शो में 731 कंपनियों ने अपने हथियारों के प्रदर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें 633 भारतीय और 98 विदेशी कंपनियाँ शामिल हैं।

‘बाँदा में मरम्मत के नाम पर 4 मंजिला बनाई जा रही मस्जिद’: विरोध में उतरी VHP, विदेशी फंडिंग और लैंड जिहाद से हिन्दुओं को आतंकित करने की साजिश

उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले (Banda, Uttar Pradesh) में एक मस्जिद को लेकर हिन्दू संगठनों और मुस्लिम वर्ग में तनाव की खबर है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि मस्जिद के जीर्णोद्धार के नाम पर नई मंजिल बनवाई जा रही। मस्जिद में दूसरे देशों द्वारा पैसा लगाए जाने की आशंका भी जताई गई है।

वहीं, मुस्लिम समूह ने अपने काम को कानूनी रूप से जायज बताते हुए हिन्दू संगठनों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर हालात को सँभाला और दोनों पक्षों के दावों और आरोपों की जाँच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार (16 फरवरी 2023) की है।

मामला कोतवाली नगर थानाक्षेत्र के बलखंडी नाका मोहल्ले का है। यहाँ हजरत बिलाल नाम की एक मस्जिद मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ समय से मुस्लिम पक्ष यहाँ पर निर्माण कार्य करवा रहा था। गुरुवार को यहाँ हिन्दू संगठन के पदाधिकारी पहुँचे। उन्होंने मस्जिद के जीर्णोद्धार के नाम पर नए निर्माण का आरोप लगाया और विरोध शुरू कर दिया।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन बेदी का आरोप है कि मस्जिद को नजूल भूमि पर बनी हुई और जीर्णोद्धार के नाम पर चार मंजिल बनवाई जा रही है। उन्होंने मस्जिद में विदेशी फंडिंग की आशंका जताई है। अपनी पत्र में बेदी ने मस्जिद को ध्वस्त करने की भी माँग की है।

अपने पत्र मं चंद्रमोहन बेदी ने मस्जिद को लैंड जिहाद का उदाहरण बताया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से इस मामले में हस्तक्षेप कर जाँच कराने की माँग कही है। हिंदू बाहुल्य क्षेत्र में मस्जिद बनाकर हिंदुओं को आतंकित करने की साजिश की जा रही है।

इस घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो वो मौके पर पहुँची और दोनों पक्षों को शांत करवाया। वहीं दूसरे पक्ष से मस्जिद के मौलवी जहीरुद्दीन ने मस्जिद को 50- 60 साल पुरानी बताते हुए हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं पर तोड़फोड़ के साथ निर्माण सामग्री को खराब करने का आरोप लगाया।

वहीं बाँदा जिले के पुलिस अधीक्षक IPS अभिनंदन के मुताबिक दोनों पक्षों के दावों पर जाँच चल रही है। SP बाँदा के अनुसार दोषी पाए गए लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बाप-बेटे को गोली मारने वाला आरिफ अब भी फरार, तनाव के बाद भारी पुलिस बल तैनात: दिल्ली में पार्किंग विवाद में हुई थी फायरिंग

देश की राजधानी दिल्ली के भजनपुरा (Bhajanpura, Delhi) इलाके में एक आरिफ हसन ने एक हिन्दू पिता-पुत्र को गोली मार दी। आरिफ ने 10-15 लोगों को इकट्ठा कर लिया था और 10-15 राउंड फायरिंग की थी। लोगों ने इनमें से एक इबले हसन को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है, जबकि आरिफ और अन्य लोग भागने में कामयाब हो गए।

घायल पिता-पुत्र का इलाज चल रहा है। घटना से नाराज लोगों ने वाहनों में तोड़फोड़ की है। हालात संभालने के लिए इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ-साथ पैरामिलिट्री फ़ोर्स को भी तैनात कर दिया गया है। गोली मारने की घटना गुरुवार (16 फरवरी 2023) की रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विवाद की शुरुआत पार्किंग को लेकर कहासुनी से हुई। जिन पिता-पुत्र को गोली लगी है, उनके नाम वीरेंद्र अग्रवाल और सचिन अग्रवाल हैं। पीड़ित के परिजनों ने बताया कि वो यमुना विहार इलाके में रहते हैं। अग्रवाल परिवार की ब्रह्मपुरी क्षेत्र में बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान है। इस परिवार के पड़ोस में फुरकान का मकान है। फुरकान के मकान में आसिफ नाम का व्यक्ति 4 माह से किराए पर रह रहा था।

बताया जा रहा है कि घटना के दिन 55 वर्षीय वीरेंद्र अपने 27 साल के बेटे सचिन के साथ दिल्ली के मायापुरी इलाके में एक विवाह समारोह में शामिल के बाद लौट रहे थे। रात लगभग 12:30 बजे उन्होंने रास्ते में पड़ोसी आरिफ की गाड़ी खड़ी देखी। जब उन्होंने आरिफ से गाड़ी हटाने के लिए कहा तो वो झगड़ने लगा और गालियाँ देने लगा।

परिजनों ने बताया कि वीरेंद्र और सचिन झगड़े के बाद घर चले गए थे। कुछ ही देर में आरिफ ने फोन करके अपने साथियों को झगड़े के लिए बुलाना शुरू कर दिया। इनमें से एक इबले हसन भी शामिल था। इबले हसन अपने एक अन्य साथी के साथ आया और बाद में तीनों अग्रवाल के घर गए। यहाँ पहुँच कर तीनों ने पिस्टल से सचिन और वीरेंद्र पर गोलियाँ बरसा दीं। ये गोलियाँ पीड़ित पिता-पुत्र के हाथों पर लगीं।

हमले में शोरगुल सुन कर आसपास के लोग जमा हुए तो हमलावर भागने की कोशिश करने लगे। मौके पर जमा लोगों ने इबले हसन को पकड़ लिया और पिटाई करके पुलिस को सौंप दिया। हालाँकि, आरिफ और उसका साथी भागने में सफल रहा। नाराज लोगों ने आरिफ की ब्रीजा गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस बीच हमले में घायल पिता-पुत्र वीरेंद्र और सचिन को पटपड़गंज के मैक्स अस्पताल ले जाया गया, यहाँ दोनों का इलाज चल रहा है। पुलिस फरार आरोपित आरिफ और उसके साथी की तलाश कर रही है। दिल्ली पुलिस ने IPC की धारा 307 और 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत मामला दर्ज किया है।

दिल्ली पुलिस ने इसमें किसी तरह के सांप्रदायिक तनाव से इनकार कर दिया है। अतिरिक्त डीसीपी, नॉर्थ ईस्ट संध्या स्वामी ने कहा कि इस घटना में कोई सांप्रदायिक कोण नहीं है। फिर भी, किसी भी तरह की अफवाहें या किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए क्षेत्र में पुलिस की उपस्थिति बढ़ा दी गई है। 

‘अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग’: अमेरिकी सीनेट में बिल पेश, चीन को बताया खतरा

अरुणाचल प्रदेश को अमेरिका ने भारत का अभिन्न अंग माना है। अमेरिका के दो सांसदों जेफ मर्कले (Senator Jeff Merkley) और बिल हॉगेर्टी (Senator Bill Hagerty) ने अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताते हुए अमेरिकी संसद में द्विदलीय विधेयक (Bipartisan Senate resolution) पेश किया है।

विगत कुछ सालों में चीन ने एलएसी (LAC) पर ज्यादा आक्रामकता दिखाई है। कई बार भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं थी। इन घटनाओं के बीच अमेरिकी सांसदों का यह विधेयक चीन को रास नहीं आ रहा है। हालाँकि, चीन की तरफ से इस पर अभी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अमेरिकी सीनेटर जेफ मर्कले ने विधेयक पर कहा है कि इस प्रस्ताव से यह स्पष्ट हो जाता है कि अमेरिका अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग मानता है, ना कि चीन का। विधेयक में चीन की आक्रमकता की आलोचना करते हुए अमेरिकी सरकार से सहयोगी देशों के साथ संबंध और मजबूत करने के लिए कहा गया है।

सीनेटर बिल हागेर्टी ने चीन को हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए खतरा बताया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका को अपने रणनीतिक साझेदारों खासतौर पर भारते के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना चाहिए। बिल होगेर्टी ने अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए जाने की वकालत की। दोनों अमेरिकी सांसद भारत के साथ रक्षा, तकनीक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के पक्षधर हैं।

पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार अमेरिका मैकमोहन लाइन को भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। चीन की सेना कई वर्षों से सीमा पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, सीमा क्षेत्र में चीन रणनीति के तहत गाँवों को बसा रहा है। हाल ही में चीन ने एक नक्शा जारी किया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाया गया है।

‘गोली मारी गई, झूठे केस में फँसाने की हुई कोशिश’: कौन है मोनू मानेसर, जिसका पुलिस से भी तगड़ा है नेटवर्क, भिवानी मामले में आया नाम

हरियाणा के भिवानी में जुनैद और नासिर की जलकर हुई मौत के मामले में मोनू मानेसर नाम के गौरक्षक को आरोपित बनाया गया है। हालाँकि, मोनू ने खुद को बेगुनाह बताया और हा कि घटना के समय वह कहीं और था। मोनू मानेसर पर इस प्रकार के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। कुछ ही समय पूर्व ऑपइंडिया से बात करते हुए मोनू ने खुद को गौतस्करों की साजिश के निशाने पर बताया था।

इस मामले में पुलिस ने रिंकू सैनी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रिंकू को मोनू मानेसर का करीबी बताया है। मोनू को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। उधर, मोनू मानेसर ने आरोपों पर कहा कि जिस दिन वारदात को अंजाम दिया गया, उस दिन वह गुरुग्राम में एक होटल में था। होटल के सीसीटीवी में इसका प्रूव उपलब्ध है। मोनू ने कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि इस मामले में अनावश्क रूप से बजरंग दल का नाम घसीटा जा रहा है। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार को माफी माँगनी चाहिए। बता दें कि मामला राजस्थान में दर्ज किया गया है।

कौन है मोनू मानेसर

मोनू मानेसर गोतस्करी और गोहत्या के लिए कुख्यात क्षेत्र मेवात के आसपास गोरक्षा में सक्रिय एक युवक है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनू मानेसर का असली नाम मोहित यादव है। शादीशुदा मोनू 2 बच्चों का पिता है। मेवात और आसपास जहाँ एक तरफ कुछ नई उम्र के लड़कों को गोहत्या और गोतस्करी की तरफ धकेल दिया जाता है। वहीं कई युवा ऐसे हैं जो मोनू के साथ मिल कर गोसेवा और गोरक्षा का काम कर रहे हैं।

झूठे केस में फँसाने और हत्या की कोशिश

मोनू मानेसर ने पिछले माह ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि गोतस्करों के खिलाफ हमेशा सक्रिय रहने के चलते वो कई असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं। तब उन्होंने हमें बताया था कि उनके चलते कई बड़े गोहत्यारे जेलों में हैं। इसलिए उन्हें फँसाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

बात जनवरी 2023 की है, जब एक अन्य मुस्लिम की ही गाड़ी से एक्सीडेंट में मरे वारिस नाम के कथित गौतस्कर की मौत का जिम्मेदार मोनू मानेसर को बताया गया था। उस दौरान ना सिर्फ शिकायत दर्ज करवाई गई थी, बल्कि हंगामा भी किया गया था। हालाँकि, पुलिस जाँच में ये आरोप बेबुनियाद निकले थे।

वहीं, इसी माह 7 फरवरी को मुस्लिम आबादी से घिरे एक दलित परिवार की मदद करने गुरुग्राम के पटौदी पहुँचे मोनू मानेसर और उनके साथियों को घेर लिया गया था। इस दौरान न सिर्फ पत्थर चले गए, बल्कि फायरिंग की भी शिकायत की गई थी। इस घटना में मोनू और उनकी टीम ने दलित परिवार को मुस्लिम भीड़ के हमले से बचाया था। बाद में दोनों तरफ से पुलिस में शिकायत दी गई थी।

साल 2019 में गोतस्करों का पीछा करते समय तस्करों ने मोनू को गोली मार दी थी। गोली लगने से मोनू गंभीर रूप से घायल हो गया था। ठीक होने के बाद मोनू ने गोरक्षा के अपने अभियान को और तेज किया और अपने नेटवर्क को राजस्थान तक फैलाया।

गोतस्करों के विरुद्ध बेहद तगड़ा नेटवर्क

हरियाणा और राजस्थान में गोतस्करों के खिलाफ मोनू मानेसर का बेहद तगड़ा नेटवर्क माना जाता है। कहा जाता है कि कहाँ से गोवंश उठाकर कहाँ ले जाया जा रहा है, इसकी जानकारी मोनू और उनकी टीम को पुलिस से पहले मिल जाती है।

गोतस्करों को पुलिस से पकड़वाने के बाद यह टीम गायों को देखभाल के लिए गोशाला भेज देती थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दर्जन से ज्यादा गोतस्करी के केस में खुद मोनू वादी बने हुए हैं। मोनू मानेसर सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं और अपने गोरक्षा के कामों को अक्सर शेयर किया करते हैं।

पेशेवर गोतस्करों के होते हैं कई दुश्मन

ऑपइंडिया ने इस मामले पर गुरुग्राम निवासी और शिवसेना युवा प्रदेश अध्यक्ष रितुराज से बात की। रितुराज के मुताबिक जलकर मरे दोनों व्यक्ति पेशेवर गोतस्कर थे, जिनके कई दुश्मन रहे होंगे। हमें बताया गया कि मोनू को लगातार फँसाने की साजिश में एक दाँव ये भी लग रहा, जिसकी SIT जाँच करवा कर ही कोई कदम उठाया जाना चाहिए।

अलग-अलग काम करने वालों को एक साथ लपेटा

शिवसेना पदाधिकारी रितुराज ने हमें बताया कि जिन मोनू मानेसर या श्रीकांत आदि का नाम FIR में डाला गया है वो अलग-अलग टीमें बना कर काम करते हैं। उनका यह भी कहना था कि इन टीमों में आपस में कम्पटीशन जैसा माहौल रहता था फिर भी इन सभी को सामूहिक तौर पर दिखाकर गुरुग्राम और आस-पास के सभी गोरक्षकों को एक साथ फँसाने की साजिश चल रही है।

गोतस्करों को तो मुआवजा, लेकिन गोरक्षक मरे तो उनका क्या

शिवसेना नेता रितुराज ने राजस्थान सरकार द्वारा मृत गोतस्करों के परिजनों को लाखों रुपए मुआवजा देने पर अशोक गहलोत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र में कई गोरक्षकों को गोतस्करों के हाथों जान गँवानी पड़ी थी, लेकिन उनके घर वालों को कुछ नहीं दिया गया। रितुराज ने सवाल उठाया कि क्या कोई उन परिवारों की भी सुध लेगा, जिनके परिजन गाय बचाते हुए अब दुनिया में नहीं हैं।

लगातार साजिशों के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन

ऑपइंडिया ने गुरुग्राम के बजरंग दल पदाधिकारी प्रवीण हिंदुस्तानी से बात की। उन्होंने कहा कि आए दिन बेवजह नए-नए मामलों में मोनू को फँसाने की साजिश चल रही है इसके खिलाफ अब यहाँ का हिन्दू समाज एकजुट है। प्रवीण के अनुसार इन साजिशों के खिलाफ आज 18 फरवरी को गुरुग्राम के DC के माध्यम से राष्ट्रपति को सारे हिन्दू संगठन मिल कर ज्ञापन प्रेषित करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भिवानी के लोहारू में जली हुई कार और दो जले हुए कंकाल मिले थे। जुनैद के चचेरे भाई इस्माइल ने गुरुवार (16 फरवरी 2023) को गोपालगढ़ थाने में दोनों की अपहरण और मारपीट की FIR दर्ज कराई। एफआईआर में इस्माइल ने कहा है कि बुधवार (15 फरवरी 2023) की सुबह करीब 5 बजे जुनैद और नासिर बोलेरो से बाहर गए थे। लेकिन वे लौट कर घर नहीं आए।

बाद में पुलिस को एक बोलेरो गाड़ी में दो जली हुई लाश मिली। कहा जा रहा है कि ये दोनों लाशें जुनैद और नासिर की है। स्थानीय लोग दोनों को गोतस्कर के रूप में जानते हैं। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मोनू मानेसर, रिंकू सैनी सहित कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान के बाद इसमें राजनीति होने लगी है।

अमेरिका में फिर मास शूटिंग: सौतेले पिता और पूर्व पत्नी सहित 6 लोगों की गोली मारकर हत्या, पुलिस ने हमलावर को किया गिरफ्तार

अमेरिका में एक बार फिर से मास शूटिंग की घटना सामने आई है। टेनेसी राज्य के मिसिसिपी के ग्रामीण इलाके अर्काबुतला काउंटी में शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को एक शख्स ने लोगों पर अंधाधुन फायरिंग कर दी। फायरिंग में 6 लोगों के मारे जाने की खबर है। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावर की पहचान रिचर्ड डेल क्रुम (52) के तौर पर हुई है। हमलावर ने शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 11 बजे एक स्टोर के पास एक व्यक्ति को गोली मार दी। इसके बाद वह अपनी पूर्व पत्नी के घर पहुँचा और उसकी हत्या कर दी। उसने पूर्व पत्नी के घर पर मौजूद शख्स पर बंदूक से हमला किया, लेकिन गोली नहीं मारी।

पूर्व पत्नी की हत्या के बाद रिचर्ड ने अपने सौतेले पिता और उनके घर पर मौजूद एक महिला की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि सौतेले पिता समेत 2 लोगों की हत्या के बाद रिचर्ड एक चर्च के पास पहुँचा, जहाँ उसने 2 और लोगों की हत्या की। इस तरह उसने कुल 6 लोगों की हत्या कर दी। वहीं, फायरिंग में एक शख्स के जख्मी होने की खबर है, जिसे अस्पताल में दाखिल कराया गया है। रिचर्ड से पूछताछ की जा रही है और हत्या की वजहों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपित के पास से कई हैंडगन और शॉटगन बरामद हुए हैं।

बता दें कि अमेरिका के अलग-अलग शहरों में मास शूटिंग की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में 21-22 जनवरी 2023 की रात मास शूटिंग की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी। मोंटेरी पार्क इलाके में चीनी नववर्ष को लेकर जश्न मनाया जा रहा था, तभी एक हमलावर ने आंधाधुन गोलियाँ चला दीं। नवंबर 2022 में वर्जीनिया के वालमार्ट के एक स्टोर में हुई फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

इसके पहले टेक्सास में 18 साल एक युवक ने AK-47 से अपनी दादी को गोली मारी। फिर स्कूल पहुँचकर अंधाधुंध फायरिंग की। अमेरिका को हिला देने वाली यह घटना 24 मई 2022 को हुई थी। जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में मास शूटिंग जैसी घटनाओं के पिछे यहाँ के गन कल्चर को दोषी ठहराया जाता रहा है। जिसे बदलने के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

पलामू के पांकी में महाशिवरात्रि पर हिंदुओं को शिव बारात निकालने की इजाजत नहीं: तोरणद्वार बनाने को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने की थी हिंसा

झारखंड के पलामू स्थित पांकी के हिंदू अब महाशिवरात्रि नहीं मना सकेंगे। तोरणद्वार बनाने पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा के बाद इलाके में धारा 144 लागू कर दिया गया है। धारा 144 का हवाला देकर प्रशासन ने हिंदुओं को शिव बारात निकालने की इजाजत नहीं दी है।

बता दें कि महाशिवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इस दिन पूरे भक्तिभाव से हिंदू भगवान शिव की आराधना करते हैं और उनकी बारात निकालते हैं। पांकी को लेकर भी अपनी आस्था के साथ इस बारात को धूमधाम से मनाते आ रहे थे, लेकिन इस बार वे ऐसा नहीं कर सकेंगे।

पलामू के जिलाधिकारी ए दोड्डे, एसपी चंदन सिन्हा और राँची से आए एक आईपीएस अधिकारी ने मस्जिद के इलाके वाले शहीद भगत सिंह चौक का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने शिव बारात निकालने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने हिंदुओं से कहा कि शिवरात्रि को लेकर भावुक होने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि हिंसा को लेकर पूरे इलाके में जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही ड्रोन से इलाके के निगरानी की जा रही है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी पांकी में कैंप कर रहे हैं। इसके साथ ही शुक्रवार को जिलाधिकारी ने दोनों समुदायों के साथ बैठक की थी।

बता दें कि महाशिवरात्रि को लेकर बनाए जा रहे तोरणद्वार को लेकर मुस्लिमों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने हिंदुओं को मस्जिद के सामने गेट बनाने से रोका था। इसके बाद हुए विवाद में हिंदुओं पर पथराव किया गया था और उन पर पेट्रोल ब फेेंके गए थे। इस हमले में कई हिंदू घायल हो गए थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की तैयारी बहुत पहले से की जा रही थी और महाशिवरात्री को लेकर बनाया जा रहा तोरणद्वार के रूप में एक बहाना मिल गया। लोगों का कहना है कि मस्जिद, जिसे स्थानीय मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक प्राचीन हनुमान मंदिर है। यहाँ हर मंगलवार को आरती होती थी। इसकी महिमा को सुनकर लोगों की भीड़ बढ़ती गई।

एक समय ऐसा भी आया कि मंगलवार को मंदिर में 200 लोग तक जुटने लगे। आरती के दौरान लोगों तक आरती आवाज पहुँचाने के लिए मंदिर पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई। इसके बाद से मस्जिद कमिटी के लोग इस पर आपत्ति उठाने लगे। उनका कहना था कि इससे उन्हें नमाज पढ़ने में दिक्कत होती है।

वहीं लोगों का कहना था कि उनकी सामूहिक आरती सप्ताह में एक बार होती है और नमाज दिन में पाँच बार। उन्होंने नमाज पर कभी आपत्ति नहीं उठाई तो आरती पर आपत्ति उठाने के कोई औचित्य नहीं है। हिंदुओं का कहना था कि मस्जिद पर 36 मस्जिद हैं, फिर भी नमाज में दिक्कत कैसे हो सकती है।

हालाँकि, हिंदुओं के आग्रह को मस्जिद कमिटी के लोग नहीं माने और एनामुल, महबूब आदि थाने में लगातार शिकायत देते रहे। इतना ही नहीं, नमाज के वक्त लाउडस्पीकर का वॉल्युम भी फुल कर दिया जाता था। इससे लोगों को कई तरह की परेशानी होने लगी। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि नमाज की आवाज के कारण दुकान में कस्टमर से बात करना मुश्किल हो जाता था। इधर शिकायत और दबाव के बाद पुलिस हिंदुओं को थाने बुलाने लगी।

इसी बात पर आगे चलकर मस्जिद कमिटी के लोगों द्वारा हिंसा को अंजाम दिया गया। हिंसा के लिए हारुन नाम के व्यक्ति के टैक्टर से हिंसा से एक दिन पहले ईंट-पत्थर जुटाए गए थे और उन्हें घरों और मस्जिद की छतों पर रखा गया था। हिंसा के दिन इन्हीं छतों से पथराव किया था।

स्थानीय भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे का कहना है कि हिंदुओं के त्योहारों में मुस्लिमों द्वारा अक्सर खलल डाली जाती है। वे शादी-ब्याह तक में किसी ना किसी बहाने से उपद्रव करने की कोशिश करते हैं। लोगों का कहना है कि इस कारण से वहाँ के हिंदुओं को अपना पर्व-त्योहार मानना मुश्किल हो गया है।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह का दावा है कि प्री प्लानिंग के तहत हिन्दुओं पर हमला करने वालों ने अपनी दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया है। ऐसा करने के पीछे कमलेश सिंह ने हमलावरों द्वारा लोगों की हमदर्दी बटोरने के साथ हिन्दुओं को फँसाने की साजिश बताया।

कैसे हुई हिंसा की शुरुआत

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि 14 फरवरी की रात को तोरणद्वार बनाने के लिए कुछ मजदूर सड़क पर गड्ढे खोद रहे थे। कुछ छह गड्ढे खोदने थे। इनमें से एक गड्ढा एक मुस्कान मोबाइल नाम के दुकान के सामने पड़ रहा था। इस दुकान का मालिक कलीम आलम है। उसने गड्ढा खोदने से रोक दिया।

इसके बाद टेंट वाले ने तोरणद्वार लगवाने को बुलाया। स्थानीय हिंदुओं ने पूछा कि द्वार क्यों नहीं लगाने दे रहे हैं तो कलीम बोला कि वह उसके दुकान के सामने पड़ रहा है। इस पर स्थानीय हिंदुओं ने बोला कि जब मुस्लिम कोई कार्यक्रम करते हैं और टेंट लगाते हैं तब दुकान के सामने नहीं पड़ता है? चार का मामला है, उसके बाद द्वार को हटा लिया जाएगा। इस पर कलीम बोला कि यहाँ खुंटा वह नहीं गड़ने देगा। जिसको जो करना है कर ले।

स्थानीय हिंदुओं ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पर हिंदुओं ने कहा कि यह सरकारी जमीन है और यहाँ आप नहीं रोक सकते। इसके बाद कलीम वहीं के महबूब को लेकर मस्जिद के पास चला गया। इसके बाद वे लोग आपस में बातचीत करने लगे और धीरे-धीरे वहाँ 50-60 लोग जमा हो गए।

इसके बाद हिंदुओं ने थाने को सूचित किया। थानेदार यहाँ आए तो उन्होंने पूछा कि क्या हो रहा है। थानेदार ने कहा कि अगर यहाँ पहले नहीं द्वार नहीं लगाया गया है तो अब क्यों लगा रहे हो। इस पर स्थानीय लोगों ने उनसे पूछा कि सर आप ही बताइए कि यहाँ नहीं गाड़ें तो कहाँ खूँटा गाड़ें?’ आप जहाँ कहेंगे वहाँ गाड़ेंगे। इस पर थानेदार ने कहा कि यहाँ छोड़कर दूसरी जगह जाओ। इसके बाद थानेदार चले गए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी दौरान मुस्लिम आए और खूँटा उखाड़ने लगे और एक हिंदू के सिर पर डंडा मारा। इस हमले में पीड़ित को 8 टाँके लगे। लोगों का कहना है कि मुस्लिम वहाँ से अपने-अपने घर में जाकर छतों से पथराव करने लगे। मस्जिद से भी पथराव करने लगे। लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर से लाकर पत्थर को छतों पर रखा गया था। इसे हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।

तीर्थ यात्रा की, चर्च गया और बाइबिल भी पढ़ा… फिर महसूस हुआ कि धर्म एक प्रकार का शोषण है: एसएस राजामौली

फिल्म आरआरआर (RRR) ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर एसएस राजामौली (SS Rajamouli) को दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई है। इंटरनेशनल मीडिया ‘द न्यू यॉर्कर’ को दिए अपने इंटरव्यू में राजामौली ने धर्म और अपनी फिल्मों पर रामायण और महाभारत जैसे धर्मग्रन्थों के प्रभाव पर चर्चा की।

इंटरव्यू के दौरान राजामौली ने बताया कि उन्होंने कई धर्मग्रन्थों का अध्ययन किया है। तीर्थयात्रा की है। भगवा वस्त्र धारण किया है। चर्च में भी गए हैं और बाइबिल भी पढ़ा है। उन्होंने कहा, “इन सभी चीजों ने मुझे किसी तरह यह महसूस कराया कि धर्म एक प्रकार का शोषण है।” हालाँकि, एसएस राजामौली ने यह भी कहा कि उनकी फिल्में किसी न किसी तरह हिंदू धर्मग्रन्थ रामायण और महाभारत से प्रभावित होती हैं। उन्होंने खुद को नास्तिक बताया और कहा,

“रामायण और महाभारत से मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा। दोनों ग्रन्थ महासागर की तरह हैं। जब भी मैं इन्हें पढ़ता हूँ तो कुछ न कुछ नया सीखता हूँ।”

राजामौली ने कहा, “मैंने इन कहानियों को तब से पढ़ा है, जब मैं एक बच्चा था। शुरुआत में वे सिर्फ अच्छी और आकर्षक कहानियाँ लगती थीं। जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने पाठ के विभिन्न संस्करणों को पढ़ा और कहानी मेरे लिए कुछ बहुत बड़ी बनने लगी। मैं पात्रों, पात्रों के भीतर के संघर्षों और उनकी प्रेरक भावनाओं को देख सकता था। मुझसे जो कुछ भी निकलता है, वह किसी न किसी तरह से इन ग्रंथों से प्रभावित होता है। वे ग्रंथ महासागरों की तरह हैं।”

द न्यू यॉर्कर के साथ साक्षात्कार के दौरान राजामौली से यह भी पूछा गया था कि क्या उन पर आरएसएस या बीजेपी समर्थक मुस्लिम विरोधी या राष्ट्रवादी फिल्में बनाने के लिए दबाव बनाते हैं। इस पर निर्देशक ने जवाब दिया कि ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि किसी तरह का एजेंडा फिल्म बनाने के लिए उनसे कभी संपर्क नहीं किया गया।

बता दें कि एसएस राजामौली की फिल्म आरआरआर देश के साथ-साथ विदेशों में भी खूब सराही गई थी। आरआरआर के अलावा राजामौली की फिल्म बाहुबली और बाहुबली 2 को भी लोगों ने खूब पसंद किया था और उनकी एक अलग पहचान बनी थी।

जनवरी 2023 में राजामौली ने न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता था। उनकी फिल्म का गीत ‘नातु नातु’ को अंतर्राष्ट्रीय वायरल हिट के लिए उनकी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मूल गीत की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया है। इस गाने को 2023 का गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स में स्वर्ण पदक मिला था।

‘BBC की डॉक्यूमेंट्री प्रॉपगेंडा… गलत समय पर गलत सूचना देने वाला’ – ब्रिटिश सांसद रामी रेंजर ने लताड़ा

गुजरात दंगों पर बनाए गए बीबीसी की प्रॉपगेंडा डॉक्यूमेंट्री की आलोचना ब्रिटेन में भी हो रही है। ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने बीबीसी की आलोचना करते हुए डॉक्यूमेंट्री को दुर्भाग्यपूर्ण, गलत समय पर और गलत सूचना देने वाला बताया है। रामी रेंजर ने कहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री मुट्ठी भर मोदी विरोधी लोगों के बयानों पर आधारित है।

ब्रिटिश सांसद रामी रेंजर ने कहा कि पीएम मोदी और भारत की सफलता कुछ लोगों से देखी नहीं जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार भारत बदला हुआ है, इसलिए प्रॉपगेंडा की कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। उन्होंने बीबीसी पर 2 महान देशों के बीच संबंध खराब करने की कोशिश का आरोप लगाया।

रमी रेंजर ने कहा कि भारत और ब्रिटेन कई मामलों में दूसरे देशों के मुकाबले एक दूसरे के ज्यादा करीब हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2 बार चुनावों में भारी बहुमत से जीतकर आए हैं और विरोधियों को गलत साबित किया है।

इसके पहले ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने भी बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की आलोचना की थी। ब्लैकमैन ने मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को न्यूज 18 से कहा था, “बीबीसी ब्रिटिश सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। पीएम मोदी को लेकर ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री स्तरहीन पत्रकारिता का परिणाम है। डॉक्यूमेंट्री के लिए उचित शोध नहीं किया गया है।” ब्लैकमैन ने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में तथ्यों को पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

उल्लेखनीय है कि बीबीसी ने ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर आरोप लगाया है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाने का आदेश जारी किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया था। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में शामिल रहे कट्टर इस्लामी लोगों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। आपको बता दें कि गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे। यही नहीं, BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) में काफी बवाल भी हुआ था।