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‘एक बार नाम गया तो कभी वापस नहीं आएगा’: उद्धव से शिवसेना छीन जाने के बाद राज ठाकरे ने बाला साहब का वीडियो किया शेयर

शिवसेना का नाम और निशान एकनाथ शिंदे गुट को सौंपने के चुनाव आयोग के निर्णय के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के निर्णय आने के बाद उद्धव ठाकरे से अलग हुए उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने पार्टी के संस्थापक बाला साहब ठाकरे का एक वीडियो साझा किया है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक राज ठाकरे ने वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा, “बालासाहेब द्वारा दिया गया ‘शिवसेना’ का विचार कितना सही था, आज हम एक बार फिर जानते हैं…” दरअसल इस वीडियो में बाला साहब के भाषण का एक अंश है।

बाला साहब अपने भाषण में कह रहे हैं, “पैसा आता है, जाता है। अगर पैसा चला गया तो कमा लिया जाएगा, लेकिन एक बार नाम गया तो कभी वापस नहीं आएगा। इसलिए नाम बड़ा करो। नाम ही सब कुछ है।”

राज ठाकरे को बाला साहब का असली उत्तराधिकारी माना जाता था। वे युवा अवस्था में ही शिवसेना की रैलियों में बाला साहेब के साथ जाया करते हैं। उन्होंने बाला साहेब के साथ रहकर राजनीति के दाँव-पेंच को बहुत गहराई से सीख लिया था। हालाँकि, पुत्रमोह या जो भी कारण रहा हो, बाला साहब ने उद्धव ठाकरे को शिवसेना का उत्तराधिकारी बना दिया। कुछ समय के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रास्ते अलग हो गए।

राज ठाकरे ने बाला साहब के बयान के माध्यम से शिवसेना के उस दौर को याद किया है। शिवसेना अब महाराष्ट्र के कद्दावर ठाकरे परिवार के पास नहीं है। जिस ठाकरे परिवार ने इस पार्टी की स्थापना करके इसे राजनीति की ऊँचाई पर पहुँचाया था, उसे राजनीतिक समझ की कमी के कारण कोई दूसरा छीन ले गया।

चुनाव आयोग के इस फैसले का शिंदे गुट ने स्वागत किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। वहीं, शिवसेना ने इसे लोकतंत्र की हत्या कहा है। पार्टी का नाम और निशान मिलने के बाद एकनाथ शिंदे गुट जश्न मना रहा है।

वहीं, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे के विचारों पर चलने वाली शिवसेना का मतलब एकनाथ शिंदे। उन्होंने कहा कि अब असली शिवसेना एकनाथ शिंदे जी की शिवसेना बनी है। उन्होंने इसके लिए एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगियों को बधाई दी।

उद्धव ठाकरे की नहीं रही शिवसेना, एकनाथ शिंदे ग्रुप को मिला पार्टी का नाम-निशान: चुनाव आयोग का फैसला

महाराष्ट्र (Maharashtra) में एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट को शिवसेना (Shiv Sena) का नाम और चुनाव चिह्न मिल गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को यह फैसला देते हुए कहा कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। उद्धव ठाकरे गुट ने बिना चुनाव कराए अपने लोगों को अलोकतांत्रिक ढँग से पदाधिकारी नियुक्त किया।

चुनाव आयोग ने पाया कि 2018 में पार्टी के संविधान को गुपचुप रूप से संशोधित कर दिया गया और इसे चुनाव आयोग को नहीं दिया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि इसके कारण यह पार्टी निजी जागीर जैसी हो गई।

आयोग ने कहा कि इन तरीकों को चुनाव आयोग 1999 में ही नामंजूर कर चुका था। इसके बाद बाला साहेब ठाकरे ने इसमें लोकतांत्रिक नॉर्म्स को जोड़ा था। पार्टी की ऐसी संरचना अलोकतांत्रिक होती है और भरोसा जगाने में नाकाम रहती है।

अब शिंदे गुट को शिवसेना के नाम से जाना जाएगा। इसके पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के बागी हो जाने के कारण शिवसेना दो गुट- शिंदे और ठाकरे गुटों में विभाजित हो गई थी। शिंदे के साथ कुल 55 में से 40 विधायकों के आए गए थे। इसके साथ ही शिंदे गुट को 18 में से 13 सांसदों का भी समर्थन मिल गया। आयोग ने अपने फैसले में इसे भी आधार बनाया।

इसके बाद उद्धव ठाकरे की सरकार अल्पमत में आ गई थी और उन्हें महाराष्ट्र सीएम का पद छोड़ना पड़ा था। बाद में शिंदे गुट ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई और एकनाथ शिंदे खुद मुख्यमंत्री बने। शिवसेना पार्टी पर दोनों गुटों ने अपना-अपना दावा ठोका था।

फैसला आने के पहले तक शिवसेना शिंदे गुट और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नाम से जानी जाती थी। चुनाव आयोग ने अपने फैसले में अब शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और निशान तीर-कमान इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है।

चुनाव आयोग के इस फैसले पर उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने सवाल उठाया है। संजय राउत ने कहा है कि फिक्र की कोई बात नहीं है। जनता उद्धव ठाकरे के साथ है। उन्होंने कहा कि वह नए नाम और प्रतीक के साथ जनता के बीच जाएँगे और नई शिवसेना खड़ी करके दिखाएँगे।

अडानी मामले की खुद जाँच कराएगी सुप्रीम कोर्ट: सीलबंद लिफाफे में नाम का केंद्र का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- पारदर्शिता का है मामला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को उद्योगपति गौतम अदानी (Gautam Adani) और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Research) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विशेषज्ञों की कमेटी खुद बनाएगी, ताकि पारदर्शिता रहे।

अडानी-हिंडनबर्ग विवाद पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा सीलबंद लिफाफे में सुझाए गए नामों की सूची को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने समिति की नियुक्ति से संबंधित मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने सरकार के सुझाव पर टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि वह मामले में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना चाहती है। इसलिए सीलबंद कवर में दिए गए सुझाव को स्वीकार नहीं किया सकता। कोर्ट का कहना है कि यदि इन सुझावों को स्वीकार किया गया तो लोग यह समझेंगे कि समिति कोर्ट द्वारा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा गठित की गई है। इसलिए समिति कोर्ट द्वारा गठित की जाएगी।

इसके पहले कोर्ट में सेबी (SEBI) की तरफ से कहा गया था, “हम चाहते हैं कि मामले में सच बाहर आए और बाजार पर इसका असर भी न हो।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की निगरानी किसी वर्तमान जज को नहीं दिया सकता। सकते। इस मामले में वकील मनोहरलाल शर्मा, विशाल तिवारी, कॉन्ग्रेस नेता जया ठाकुर और अनामिका जायसवाल ने अलग-अलग चार जनहित याचिकाएँ दायर की हैं।

मनोहरलाल शर्मा ने अपनी याचिका में हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नाथन एंडरसन और भारत में उनके सहयोगियों के खिलाफ जाँच और प्राथमिकी दर्ज कराने की माँग की है। एडवोकेट विशाल तिवारी ने शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जाँच की माँग की है। वहीं, जया ठाकुर ने अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने, एलआईसी व एसबीआई के निवेश की जाँच कराने की माँग की है।

गौरतलब है कि अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिपोर्ट की अदानी ग्रुप के खिलाफ कई आरोप लगाए जाने के बाद ग्रुप के शेयरों में काफी गिरावट आई है। अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है।

पलामू के पांकी में जहाँ हुई पत्थरबाजी वहाँ की मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर, शहीद भगत सिंह चौक को ‘मस्जिद चौक’ बताकर करते हैं प्रचारित

झारखंड के पलामू स्थित पांकी बाजार में तोरणद्वार लगाने को लेकर हुई हिंसा के मामले में ऑपइंडिया को ग्राउंड रिपोर्टिंग में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की तैयारी बहुत पहले से की जा रही थी और महाशिवरात्री को लेकर बनाया जा रहा तोरणद्वार के रूप में एक बहाना मिल गया।

लोगों का कहना है कि मस्जिद, जिसे स्थानीय मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक प्राचीन हनुमान मंदिर है। यहाँ हर मंगलवार को आरती होती थी। इसकी महिमा को सुनकर लोगों की भीड़ बढ़ती गई। एक समय ऐसा भी आया कि मंगलवार को मंदिर में 200 लोग तक जुटने लगे।

आरती के दौरान लोगों तक आरती आवाज पहुँचाने के लिए मंदिर पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई। आसपास के लोग भी भक्तिभाव से भजन आदि बजाने लगे। इसके बाद से मस्जिद कमिटी के लोग इस पर आपत्ति उठाने लगे। उनका कहना था कि इससे उन्हें नमाज पढ़ने में दिक्कत होती है।

वहीं लोगों का कहना था कि उनकी सामूहिक आरती सप्ताह में एक बार होती है और नमाज दिन में पाँच बार। उन्होंने नमाज पर कभी आपत्ति नहीं उठाई तो आरती पर आपत्ति उठाने के कोई औचित्य नहीं है। हिंदुओं का कहना था कि मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर हैं, फिर भी नमाज में दिक्कत कैसे हो सकती है।

हालाँकि, हिंदुओं के आग्रह को मस्जिद कमिटी के लोग नहीं माने और एनामुल, महबूब आदि थाने में लगातार शिकायत देते रहे। इतना ही नहीं, नमाज के वक्त लाउडस्पीकर का वॉल्युम भी फुल कर दिया जाता था। इससे लोगों को कई तरह की परेशानी होने लगी। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि नमाज की आवाज के कारण दुकान में कस्टमर से बात करना मुश्किल हो जाता था। इधर शिकायत और दबाव के बाद पुलिस हिंदुओं को थाने बुलाने लगी।

इसी बात पर आगे चलकर मस्जिद कमिटी के लोगों द्वारा हिंसा को अंजाम दिया गया। हिंसा के लिए हारुन नाम के व्यक्ति के टैक्टर से हिंसा से एक दिन पहले ईंट-पत्थर जुटाए गए थे और उन्हें घरों और मस्जिद की छतों पर रखा गया था। हिंसा के दिन इन्हीं छतों से पथराव किया था।

लोगों का कहना है कि आसपास का सवर्णों का इलाका नहीं है, इसलिए मुस्लिम लगातार वहाँ के हिंदुओं को प्रताड़ित और परेशान करते रहते हैं। हिंदुओं के त्योहारों से लेकर उनकी शादी-ब्याहों में खलल डालते रहते हैं। इस कारण वहाँ के हिंदुओं को डर के साए में जीना पड़ता है।

लोगों का यहाँ तक कहना है कि जिस चौराहे पर मस्जिद बनी है, उसे कट्टरपंथी जबरन मस्जिद चौक करना चाहते हैं। इस नाम को वे लगातार प्रसारित करते हैं। लोगों का कहना है कि इस चौक का नाम शहीद भगत सिंह चौक है और यहाँ भगत सिंह प्रतिमा भी लगी है। इसके बावजूद मस्जिद से जुड़े मुस्लिम इसका नाम बदलने में लगे हैं।

पांकी के हिंदुओं का हालात ये है कि वे अपना नाम तक डर से सार्वजनिक करना नहीं चाहते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस मस्जिद में संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता है। मस्जिद में मदरसा भी है और यहाँ मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं। यहाँ आने वाले संदिग्ध लोगों स्थानीय मुस्लिमों को कट्टरपंथी बना रहे हैं।

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि लगभग एक साल पहले केरल से एक मुस्लिम यहाँ मस्जिद के मदरसे में आकर रहता था। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध थी। इसकी सूचना लोगों ने पुलिस को दी और पुलिस उस मौलवी को गिरफ्तार करके ले गई। लोगों का कहना है कि वह कट्टरपंथी बनने की ट्रेनिंग दे रहा था।

बता दें कि पांकी हिंसा में एक और बाहरी मुस्लिम को गिरफ्तार किया गया है। दंगों में शामिल रजीउल्लाह को पुलिस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर का रहना वाला है। स्थानीय हिंदुओं को शक है कि रजीउल्लाह भी कट्टरपंथी हो सकता है, जो मदरसा के छात्रों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा होगा।

पांकी बाजार में घटी घटना को कमलेश सिंह ने गज़वा-ए-हिन्द का ट्रायल बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी पूरे देश में अपनी ताकत को तौल रहे हैं और जहाँ कमी-अधिकता है, उसकी तैयारी कर रहे हैं। भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे ने बताया कि मस्जिद से आए दिन हिन्दुओं के कार्यक्रम में खलल डाला जाता रहा है। 

एलन मस्क ने बंद किया ट्विटर का दिल्ली-मुंबई ऑफिस: रिपोर्ट में बताया- भारतीय टीम में बचे अब केवल 3 कर्मचारी, घर से काम करेंगे

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने के बाद से एलन मस्क (Elon Musk) ने कई चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। इसी कड़ी में अब भारत में ट्विटर के दो ऑफिस बंद कर दिए गए हैं। कर्मचारियों को घर से काम (Work from Home) करने को कहा गया है। भारत में ट्विटर के दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में तीन ऑफिस हैं। इनमें दिल्ली और मुंबई के ऑफिस बंद किए गए हैं।

बेंगलुरु का ऑफिस पहले की तरह काम करता रहेगा। ध्यान रखने वाली बात यह है कि बेंगलुरु ऑफिस से जुड़े कर्मचारी सीधे अमेरिकी दफ्तर को रिपोर्ट करते हैं और वे कंपनी के इंडियन टीम के हिस्सा नहीं हैं। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ट्विटर की इंडियन टीम में अब केवल तीन कर्मचारी ही बचे रह गए हैं।

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एलन मस्क ट्विटर के खर्चों को कम करने के लिए लगातार कंपनी में बदलाव कर रहे हैं। साल 2023 के अंत तक वह ट्विटर को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने पर फोकस कर रहे हैं। इसके तहत उन्होंने ना केवल बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की है, बल्कि ट्विटर के ऑफिस सर्विसेज में भी कटौती की है। इसलिए अब उन्होंने दिल्ली और मुंबई के दफ्तर को बंद करने का फैसला किया है।

CNBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत की टीम में अब केवल तीन कर्मचारी बचे हैं। इनमें एक कंट्री हेड हैं। एक के पास उत्तर और पूर्व तथा दूसरे के पास दक्षिण और पश्चिम की जिम्मेदारी है। ये सभी अब वर्क फ्रॉम होम पर रहेंगे। बताया जा रहा है कि भारत में तीन में से दो ऑफिस को बंद करने का फैसला 2022 के अंत में ट्विटर इंडिया में बड़े पैमाने पर की गई छंटनी का ही हिस्सा है। पिछले साल ट्विटर ने भारत में अपने 90 फीसदी यानी करीब 200 कर्मचारियों को निकाल दिया था।

गौरतलब है कि टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने ट्विटर को 27 अक्टूबर 2022 को करीब 44 बिलियन डॉलर में खरीदा था। ट्विटर का माई-बाप बनते ही मस्क ने सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) सहित कई अधिकारियों की छुट्टी कर दी थी। साथ ही ट्वीट कर कहा था- द बर्ड इज फ्रीड (the bird is freed) यानी आजाद हुई चिड़िया। मस्क ने जिन अधिकारियों की छुट्टी की थी, उनमें अग्रवाल के अलावा CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे शामिल थीं। इन्हें कंपनी हेडक्वार्टर से भी बाहर निकलवा दिया गया था। इसके बाद से वह बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं।

आरिफ ने रास्ते पर खड़ी की थी कार, पिता-पुत्र ने हटाने को कहा तो पहले दी गालियाँ फिर मारी गोली: दिल्ली की घटना, वीरेंद्र-सचिन की हालत नाजुक

दिल्ली के यमुना विहार में कार पार्किंग को लेकर हुए विवाद में पिता-पुत्र को गोली मारने की घटना सामने आई है। वीरेंद्र अग्रवाल और उनके बेटे सचिन को पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। दोनों की हालत नाजुक बताई जा रही है। वीरेंद्र और उनके बेटे सचिन का आरिफ नाम के शख्स से विवाद हुआ था।

घटना गुरुवार (16 फरवरी 2023) की रात की बताई जा रही है। वीरेंद्र के बेटे सौरभ ने बताया कि उनके पिता और भाई एक शादी समारोह से लौटे थे। एक कार रास्ते में खड़ी थी। उनके पिता ने कार मालिक से उसे रास्ते से हटाने को कहा। आरोप है कि इसके बाद आरिफ उन्हें गाली देते हुए धमकाने लगा।

सौरभ ने बताया कि आरिफ 10-15 लोगों को लेकर उनके घर के पास आया और उसके पिता तथा भाई पर पिस्टल से फायरिंग कर दी। घायल हालत में पिता-पुत्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरिफ पड़ोस में ही किराए के मकान में रहता है। पुलिस ने हत्या की कोशिश और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। उत्तर पूर्व दिल्ली की एडीसीपी संध्या स्वामी ने कहा है कि मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक पार्किंग को लेकर हुए विवाद को सुलझा लिया गया था। लेकिन इसके बाद आरिफ अपने 2 सहयोगियों के साथ वीरेंद्र अग्रवाल के घर जा पहुँचा। आरिफ ने अपने सहयोगियों के साथ वीरेंद्र और उनके बेटों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान आरिफ ने वीरेंद्र और सचिन पर फायरिंग की। गोली की आवाज सुनकर जमा हुए लोगों ने आरिफ के एक सहयोगी को पकड़ लिया। उसकी पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। मुख्य आरोपित आरिफ फरार है।

जॉर्ज सोरोस पर बरसीं स्मृति ईरानी: कहा- PM मोदी को टारगेट करने के लिए विदेशी फंडिंग, भारत पर हमले का दें मुँहतोड़ जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा देने समेत कई आरोप लगाने वाले अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस (George Soros) को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे पर हमला करने वाले विदेशी ताकतों को मुँहतोड़ जवाब देने की अपील लोगों कीं।

स्मृति ईरानी ने कहा कि अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिया गया बयान भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली में घुसपैठ की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सोरोस प्रधानमंत्री मोदी और अन्य भारतीय नेताओं को टारगेट करने के लिए अरबों रुपए खर्च कर रहे हैं।

स्मृति ईरानी ने कहा कि जॉर्ज सोरोस वही व्यक्ति हैं, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को तोड़ दिया। उन्हें आर्थिक युद्ध अपराधी करार दिया गया था। वही जॉर्ज अब भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला करने का ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वो प्रधानमंत्री मोदी को भी निशाना बनाएँगे। जॉर्ज सोरोस ने हिंदुस्तान में ऐसी व्यवस्था बनाने का ऐलान किया है, जो हिंदुस्तान की नहीं, बल्कि विदेशी हितों की रक्षा के लिए काम करेगा।

स्मृति ईरानी ने कहा कि जॉर्ज का यह ऐलान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुका देंगे और हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकार को गिरा देंगे, यह भारत पर हमला है। उन्होंने कहा कि इसका मुँहतोड़ जवाब हर हिंदुस्तानी को एक होकर देना चाहिए। स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना काल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जब विश्व भारत की चिंता कर रहा था, तब भारत तेजी के साथ वैक्सिनेशन मुहिम चला रहा था। उन्होंने कहा कि अपने लोगों के साथ भारत ने 160 देशों को वैक्सीन भेजी। सरकार ने हर गरीब तक मुफ्त अनाज पहुँचाया।

स्मृति ईरानी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गलत इरादों के सामने सिर नहीं झुकाने वाले हैं। जब-जब हिंदुस्तान को चुनौती दी गई, भारत ने उसका डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी विदेशी ताकतों को हराया है और आगे भी विदेशी ताकतों को हराएगा।

जॉर्ज सोरोस ने क्या कहा था?

बता दें कि गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को जर्मनी में टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपटलिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री के बीच मधुर संबंध हैं। सोरोस ने अडानी समूह के कथित हेरफेर में प्रधानमंत्री के भी शामिल होने का आरोप लगाया था।

सोरोस ने कहा था कि मोदी अडानी के मामले पर चुप हैं, लेकिन उन्हें विदेशी निवेशकों और संसद में सवालों का जवाब देना होगा, जिससे सरकार में उनकी पकड़ कमजोर होगी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने और CAA-NRC प्रदर्शन के समय भी जॉर्ज सोरोस ने भारत के खिलाफ बयान दिए थे।

हिंदू राष्ट्र पर सुलगे नीतीश और शफीकुर्रहमान बर्क: बिहार के CM कहा- वे देश को बर्बाद करना चाहते हैं, सपा MP बोले- इस्लाम कभी खत्म न होगा

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की चर्चाओं के बीच इस मसले पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का बयान सामने आया है। नीतीश का कहना है कि इस तरह की बातें करने वाले देश को बर्बाद करना चाहते हैं। वहीं बर्क ने कहा है कि भारत न तो कभी हिंदू राष्ट्र था और न कभी होगा। उन्होंने इस्लाम को दुनिया की इकलौती असली मजहब बताया है।

उत्तर प्रदेश के संभल से सांसद बर्क ने कहा, “हिंदुस्तान न कभी हिंदू राष्ट्र था, न है और न ही कभी हिंदू राष्ट्र बनेगा।” सोशल मीडिया पर उनका ये बयान तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, नीतीश कुमार ने शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को मीडियाकर्मियों से कहा, “यहाँ भारत में हर धर्म, संप्रदाय के लोग रहते हैं। अगर कोई भारत को हिंदू-राष्ट्र बनाना चाहता है, तो वह देश को नष्ट करना चाहता है। हमें केवल राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की कही गई बातों का पालन करना चाहिए। हम लोग गाँधी जी के बताए रास्ते पर चल रहे हैं।”

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री हिंदू राष्ट्र की बातों के जवाब में बर्क ने कहा कि केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान में रहने वाले बाकी लोग भी कभी हिंदू राष्ट्र स्वीकार नहीं करेंगे। मुस्लिम का जो महजब है, वह अल्लाह का है और कुरान आसमानी किताब है, वो दुनिया की किताब नहीं है। इस किताब में सभी चीजें मौजूद हैं। ये राम राष्ट्र न पहले था, न अब है और न आगे कभी होगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ को अपना दोस्त बताने वाले शफीकुर्रहमान बर्क ने आगे कहा कि साधु संतों को इस्लाम पर टिप्पणी करने और फतवे देने का कोई हक नहीं है। उन्होंने जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्र नंद गिरी के भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने के बयान पर कहा कि भारत न कभी हिंदू राष्ट्र था, न हिंदू राष्ट्र है और न ही कभी हिंदू राष्ट्र बन सकेगा। इस बयान पर यतीन्द्र नंद गिरी ने कहा कि बर्क जैसे लोग सिर्फ विवादित बयान ही दे सकते हैं, वे और कुछ नहीं कर सकते। इन लोगों में कोई ताकत नहीं है। इनके सामने ही अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद-370 भी हटाया गया है। अब आगे देश भी हिंदू राष्ट्र बनेगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने हाल ही में भारत को हिंदू राष्ट्र बताया था। उन्होंने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) था, है और रहेगा। एक ना एक दिन अखंड भारत बनना ही है और पाकिस्तान का भारत में विलय होगा। योगी आदित्यनाथ ने हिंदू शब्द का अर्थ समझाते हुए कहा था कि इसका किसी मत, मजहब या संप्रदाय से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक सांस्कृतिक शब्द है, जो भारत के हर नागरिक पर फिट बैठता है।

वित्तीय गड़बड़ी को लेकर BBC दफ्तरों में आयकर विभाग का सर्वे तीसरे दिन पूरा हुआ, मीडिया हाउस बोला- हम सहयोग करेंगे, उम्मीद है मामला जल्दी सुलझ जाएगा

बीबीसी (BBC) के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में तीन दिन तक चला आयकर विभाग का सर्वे गुरुवार (16 फरवरी 2023) रात को खत्म हो गया। आयकर विभाग ने वित्तीय गड़बड़ी के शक में मंगलवार (14 फरवरी 2023) को विदेशी मीडिया हाउस के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालयों पर सर्वे शुरू किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारी सर्वे के दौरान बीबीसी के ऑफिस से इकट्ठा किए गए कई दस्तावेज और डेटा को भी अपने साथ लेकर गए हैं। हालाँकि, उन्होंने जुटाए गए दस्तावेजों को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है।

बीबीसी ने एक बयान जारी कर कहा, “आयकर की टीमें हमारे दिल्ली और मुंबई दफ्तरों से लौट गई हैं। हम अधिकारियों के साथ जाँच में सहयोग करना जारी रखेंगे और बिना किसी डर के रिपोर्ट देते रहेंगे। हमें उम्मीद है कि इस मामले को जल्द सुलझ जाएगा।”

विदेशी मीडिया संस्थान ने अपने बयान में यह भी कहा, “बीबीसी एक विश्वसनीय और स्वतंत्र मीडिया संगठन है। हम अपने सहकर्मियों और पत्रकारों के साथ खड़े हैं। कुछ कर्मचारियों से घंटों तक पूछताछ की गई और कुछ को पूछताछ के लिए रात भर ऑफिस में रुकना पड़ा। उनकी देखरेख करना हमारी प्राथमिकता है। हमारा कामकाज अब सामान्य हो गया है। हम भारत और इससे इतर हमारे दर्शकों और पाठकों को रिपोर्ट देते रहेंगे।”

केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू ने गुरुवार (16 फरवरी 2023) को बीबीसी के कार्यालयों में आयकर सर्वेक्षण की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग विदेशी मीडिया हाउस पर भरोसा करते हैं, लेकिन भारतीय जाँच एजेंसियों पर नहीं।

वहीं, इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार ने 14 फरवरी को कहा था कि वह दिल्ली में बीबीसी के दफ्तर में भारतीय आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए जा रहे सर्वे से अवगत है। हालाँकि, उसने इस पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

दरअसल, वॉशिंगटन में पाकिस्तान के मीडिया संस्थान ARY के रिपोर्टर जहाँजेब अली ने यूएस स्टेट डिपार्टमेंट (US State Department Spokesperson) के प्रवक्ता नेड प्राइस से पूछा था कि अमेरिकी सरकार क्या इस मुद्दे को लेकर चिंतित है या फिर इस पर कुछ प्रतिक्रिया देना चाहती है?

इसके जवाब में नेड प्राइस ने कहा था कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर अच्छे संबंध हैं। साथ ही दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्य भी साझा करते हैं। उन्होंने भारत में बीबीसी के दफ्तरों में सर्वे को लेकर कुछ भी नहीं कहा।

पलामू में प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप: दावा- हिंदू पुरुषों की तलाश में महिलाओं से मारपीट, हिंसा से एक दिन पहले लाए गए थे दो ट्रैक्टर ईंट-पत्थर

झारखंड के पलामू स्थित पांकी बाजार में हिंदुओं द्वारा लगाए जा रहे तोरणद्वार को लेकर हुई हिंसा के मामले में पुलिस और प्रशासन पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय हिंदुओं ने ऑपइंडिया को बताया कि जिन लोगों ने हिंसा की शुरुआत की, उन्हें प्रशासन सुरक्षा दे रहा, जबकि हिंदुओं के घरों में जबरन घुसकर मारपीट कर रहा है।

पलामू में पुलिस प्रशासन के एकतरफा कार्रवाई से हिंदू इस तरह भयभीत हैं कि अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते हैं। नाम उजागर न करने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि ना सिर्फ हिंदू पुरुषों के साथ मारपीट की जा रही है, बल्कि पुरूष पुलिसकर्मी घरों में जबरन घुसकर महिलाओं के साथ बदतमीजी, मारपीट और गाली-गलौच कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि पुलिस उन हिंदुओं के घरों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुस रही है, जो डर से दरवाजा नहीं खोल रहे हैं। इतना ही नहीं, लोगों का यहाँ तक कहना है कि जिन हिंदुओं को पुलिस जबरन उठाकर ले जा रही है, उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा भी जा रहा है। इन लोगों में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें इस हिंसा से कोई मतलब नहीं है और नहा ही वे घटना के वक्त मौजूद थे।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रशासन द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। इलाके के ज्यादातर हिंदू लड़के अपने घरों से फरार है। ज्यादातर हिंदुओं के घरों के पुरुष पुलिस के डर से घर छोड़कर भाग गए हैं और अपना मोबाइल आदि बंद करके इधर-उधर छिपने के लिए बाध्य हैं।

एक टीवी पत्रकार को भी पुलिस ने पीटा है। कहा जा रहा है कि उसकी इतनी पिटाई की गई है, अब उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही है। वहीं, एक शिक्षक के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट करने का पुलिस पर आरोप लगा है। लोगों का कहना है कि पुलिस हिंदुओं को प्रताड़ित कर रही है, जबकि मुस्लिमों को सुरक्षा दे रही है। हालाँकि, जिला प्रशासन ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा फैलने के बाद भी पुलिस प्रशासन ने हिंदुओं पर ही लाठी चार्ज कर दिया था। इसमें भी कई हिंदुओं को चोट लगी है। लोगों का कहना है कि हिंसा की शुरुआत मस्जिद से हुई थी और मुस्लिमों के घरों से हुए पथराव में पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। इसके बावजूद अपराधियों को पकड़ने के बाद पुलिस उन्हें सुरक्षा दे रही है।

लोगों का कहना है कि दिखाने के लिए पुलिस ने पाँच छह मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। उनका आरोप है कि स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक भी मुस्लिमों का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा, पांकी के मुस्लिमों को बाहर से भी समर्थन मिल रहा है। इस कारण पुलिस प्रशासन उन पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, मुस्लिम खुद को ही पीड़ित साबित कर रहे हैं।

बता दें कि इस घटना के बाद हैदराबाद से सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिंसा फैलाने वाले मुस्लिमों को ही पीड़ित बता दिया था। उन्होंने कहा था कि मस्जिद पर पत्थर फेंके गए। ओवैसी ने यहाँ तक कहा था कि मस्जिद के सामने तोरणद्वार नहीं बनाना चाहिए था। उन्होंने इसका दोष भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर मढ़ दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पिछड़ा और दलित वर्ग ही हैं। इसलिए मुस्लिम उन्हें अक्सर प्रताड़ित करते हैं। लोगों का कहना है कि सवर्ण लोगों का इलाका 5-6 किलोमीटर दूर है। इसलिए उनकी सुरक्षा नहीं हो पाती है। अगर फॉरवर्ड लोग यहाँ रहते तो मुस्लिम उन पर इतना हावी नहीं होते।

मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर, मंदिर पर आपत्ति

लोगों का कहना है कि प्राचीन मंदिर में मंगलवार को आरती होती थी। इसमें आसपास के लोग भी जुटते थे। इस कारण मंदिर में लाउडस्पीकर लगवाई गई थी। लाउडस्पीकर के कारण मस्जिद के लोगों ने आपत्ति जाहिर की। इन लोगों का कहना है कि एनामुल, महबूब आदिल लोगों ने कई बार थाने में इसकी शिकायत की थी। लोगों ने शिकायत में कहा था कि मंदिर में लगे लाउडस्पीकर के कारण नमाज में दिक्कत होती है।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि उस मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर लगाए गए हैं और फुल वॉल्युम में पाँच बार नमाज पढ़ी जाती है। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक व्यक्ति ने कहा कि नमाज के दौरान लाउडस्पीकर की शोर के कारण दुकान में ग्राहकों से बात करना भी मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि उन लाउडस्पीकरों का मुँह हिंदू आबादी की ओर करके रखा गया है।

भगत सिंह चौक को मस्जिद चौक प्रचारित करते हैं मुस्लिम

लोगों का कहना है कि जिस चौक पर तोरणद्वार को लेकर हिंसा हुई, उसका नाम भगत सिंह चौक है। वहाँ भगत सिंह की प्रतिमा भी लगी है। हालाँकि, मुस्लिम उसे मस्जिद चौक कहने लगे और लिखने लगे। वे इसे मस्जिद चौक के नाम से प्रचारित करते हैं।

दंगे के लिए दो ट्रैक्टर ईंट-पत्थर मंगाकर छतों पर रखवाए गए थे

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक व्यक्ति ने कहा कि नेहाल अंसारी मुखिया ने दंगा से एक दिन पहले दो ट्रैक्टर ईंट-पत्थर मँगवाया था और इसे आफताब मियाँ और महबूब ने मुस्लिमों और मस्जिद की छत पर चढ़वाया था। हारून मियाँ की ट्रैक्टर से ही इस ईंट-पत्थर को मँगवाया गया था।

मस्जिद से केरल का कट्टरपंथी हो चुका है गिरफ्तार

बता दें कि पुलिस ने इस दंगे के संबंध में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के रहने वाले रजीउल्लाह को भी गिरफ्तार किया गया है। एक स्थानीय व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि लगभग एक साल पहले केरल से एक मुस्लिम यहाँ मस्जिद के मदरसे में आया था। वह लोगों को कट्टरपंथी बनने की ट्रेनिंग दे रहा था। हिंदुओं की शिकायत पर प्रशासन ने उसे गिरफ्तार किया था। रजील्लाह के भी कट्टरपंथी होने की आशंका जताई जा रही है।

कैसे हुई हिंसा की शुरुआत

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि 14 फरवरी की रात को तोरणद्वार बनाने के लिए कुछ मजदूर सड़क पर गड्ढे खोद रहे थे। कुछ छह गड्ढे खोदने थे। इनमें से एक गड्ढा एक मुस्कान मोबाइल नाम के दुकान के सामने पड़ रहा था। इस दुकान का मालिक कलीम आलम है। उसने गड्ढा खोदने से रोक दिया।

इसके बाद टेंट वाले ने तोरणद्वार लगवाने को बुलाया। स्थानीय हिंदुओं ने पूछा कि द्वार क्यों नहीं लगाने दे रहे हैं तो कलीम बोला कि वह उसके दुकान के सामने पड़ रहा है। इस पर स्थानीय हिंदुओं ने बोला कि जब मुस्लिम कोई कार्यक्रम करते हैं और टेंट लगाते हैं तब दुकान के सामने नहीं पड़ता है? चार का मामला है, उसके बाद द्वार को हटा लिया जाएगा। इस पर कलीम बोला कि यहाँ खुंटा वह नहीं गड़ने देगा। जिसको जो करना है कर ले।

स्थानीय हिंदुओं ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पर हिंदुओं ने कहा कि यह सरकारी जमीन है और यहाँ आप नहीं रोक सकते। इसके बाद कलीम वहीं के महबूब को लेकर मस्जिद के पास चला गया। इसके बाद वे लोग आपस में बातचीत करने लगे और धीरे-धीरे वहाँ 50-60 लोग जमा हो गए।

इसके बाद हिंदुओं ने थाने को सूचित किया। थानेदार यहाँ आए तो उन्होंने पूछा कि क्या हो रहा है। थानेदार ने कहा कि अगर यहाँ पहले नहीं द्वार नहीं लगाया गया है तो अब क्यों लगा रहे हो। इस पर स्थानीय लोगों ने उनसे पूछा कि सर आप ही बताइए कि यहाँ नहीं गाड़ें तो कहाँ खूँटा गाड़ें?’ आप जहाँ कहेंगे वहाँ गाड़ेंगे। इस पर थानेदार ने कहा कि यहाँ छोड़कर दूसरी जगह जाओ। इसके बाद थानेदार चले गए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी दौरान मुस्लिम आए और खूँटा उखाड़ने लगे और एक हिंदू के सिर पर डंडा मारा। इस हमले में पीड़ित को 8 टाँके लगे। लोगों का कहना है कि मुस्लिम वहाँ से अपने-अपने घर में जाकर छतों से पथराव करने लगे। मस्जिद से भी पथराव करने लगे। लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर से लाकर पत्थर को छतों पर रखा गया था। इसे हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।