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‘…तो 100 सीटों से भी नीचे चली जाएगी BJP’: ‘इलू-इलू’ वाली सियासत से मोदी को हटाने का ख्वाब देख रही जदयू-कॉन्ग्रेस, खुर्शीद के सामने गिड़गिड़ाए CM नीतीश

लोकसभा चुनाव में मोदी लहर को रोकने के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कवायद फिर से शुरू हो गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉन्ग्रेस से अपील करते हुए कहा है कि यदि सब एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो भाजपा 100 सीटों में सिमट जाएगी। नीतीश कुमार के इस बयान का कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने समर्थन किया है। वहीं, भाजपा ने कहा है कि जो बिहार में अकेले सरकार नहीं बना सकते वो लोकसभा में भाजपा को हराने की बात कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (18 फरवरी, 2023) को बिहार की राजधानी पटना में भाकपा माले के अधिवेशन में बोलते हुए नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता की वकालत की है। उन्होंने मंच पर मौजूद कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से कहा है, “हम तो चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग (पार्टियाँ) एकजुट हो जाएँ। आज आप (सलमान खुर्शीद) आए हुए हैं तो आप के माध्यम से आपकी पार्टी के नेतृत्व को हम अनुरोध करेंगे कि जल्दी से जल्दी फैसला करें और हम लोगों को बुलाकर के बात करें।”

उन्होंने आगे कहा है, “कॉन्ग्रेस नेतृत्व को फैसला करना चाहिए कि कहाँ-कहाँ और किसके-किसके साथ एकजुट होकर अगला चुनाव लड़ना है। ये फैसला जिस दिन हो जाएगा, उसी दिन हम सब लोग एकजुट हो जाएँगे और मिल के लड़ेंगे। हम इंतजार कर रहे हैं। अगर मेरे सुझाव को मानेगें तो भाजपा 100 सीट के नीचे आ जाएगी। मेरी बात नहीं मानेंगे तो आप जानिए क्या होगा। इसलिए हम कह रहे हैं कि जल्दी से जल्दी फैसला कीजिए। अगर आप लोग इस बार ये सोच लेंगे तो पूरे देश के हित में अच्छा होगा और आपको भी फायदा होगा।”

नीतीश कुमार के इस बयान का कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा है, “नीतीश कुमार ने इशारों में और स्पष्ट रूप से जो बातें कहीं हैं इस पर मैं इतना ही कहूँगा कि जो आप चाह रहे हैं वह कॉन्ग्रेस भी चाह रही है। लेकिन प्यार में एक समस्या होती है कि पहले आई लव यू कौन बोलेगा।”

नीतीश कुमार के इस बयान के बाद भाजपा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है, “जो बिहार में उधार के तेल से ख़ुद के दीये को रोशन कर रहे है, वो क्या भारत को नया दिन दिखाएँगे। 17 साल बिहार का विकास नहीं हुआ और नीतीश जी एक महीने से समाधान ढूँढ रहे हैं। इनके शासन से राज्य उबर नहीं पाया है और प्रधानमंत्री के लिए एकजुटता की तलाश कर रहे है।”

बिहार की भाजपा की प्रदेश मंत्री डॉ. अमृता राठौड़ ने ट्वीट कर कहा है, “जिसके पास बिहार में अकेले सरकार बनाने की ताकत नहीं है। वो नीतीश कुमार कह रहे हैं हम लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हरा देंगे।”

पैड से पहले बैट से लग चुकी थी गेंद? ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध विराट कोहली को आउट दिए जाने पर विवाद, नियमों की अनदेखी का भी आरोप

दिल्ली (Delhi) में खेले जा रहे बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Boarder-Gavaskar Trophy) दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) को आउट करार दिए जाने को लेकर विवाद हो गया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में विराट कोहली को अंपायर ने एलबीडब्ल्यू करार दिया था। विराट कोहली और भारतीय टीम के खिलाड़ी अंपायर के निर्णय से खुश नहीं हैं। कहा जा रहा है कि बॉल पैड से पहले बैट से लगी थी।

टेस्ट मैच के दूसरे दिन 44 के निजी स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे विराट कोहली को ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर मैथ्यू कुहनमैन की एक गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया गया। कोहली ने तुरंत रिव्यू ले लिया। रिप्ले में यह साफ नहीं हो पाया कि गेंद पहले बैट से लगी थी या पैड पर। ऐसा लग रहा था कि गेंद एक साथ बैट और पैड पर लगी है। ऐसे में विराट कोहली को आउट नहीं दिया जाना चाहिए था, लेकिन थर्ड अंपायर ने फिल्ड अंपायर के निर्णय को जारी रखा।

फैसले से टीम इंडिया के खिलाड़ी खुश नहीं हैं। विराट कोहली मैदान में ही निराश लग रहे थे। कोहली के अलावा टीम के बैटिंग कोच विक्रम राठौर और हेड कोच राहुल द्रविड़ भी अंपायर के फैसले से आश्चर्यचकित थे। क्रिकेट के नियम के अनुसार, एक साथ बैट और पैड पर बॉल का लगना बैट पर बॉल का लगना माना जाता है।

हालाँकि, कोहली के मामले में ऐसा नहीं हुआ। दूसरी तरफ नियम यह भी कहता है कि यदि बल्लेबाज के विकेट को लेकर संशय की स्थिति में संदेह का लाभ (Benefit of doubt) बल्लेबाज के पक्ष में जाता है। कोहली को संदेह का लाभ भी प्राप्त नहीं हो सका।

मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 263 रन बनाए, जिसके जवाब में भारतीय टीम 262 रन ही बना सकी। भारत की तरफ से अक्षर पटेल ने 74 और विराट कोहली ने 44 रनों की पारी खेली। कप्तान रोहित शर्मा 32 के निजी स्कोर पर आउट हो गए। आज के दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी में एक विकेट खोकर 61 रन जोड़ लिए हैं।

नाराज ईरानी महिला ने मंच पर हिजाब निकाल घूमाकर फेंका, समर्थन में बजने लगी तालियाँ: वीडियो वायरल, हिम्मत की लोग दे रहे हैं दाद

ईरान में हिजाब पर जारी विवाद (Iran Hijab Controversy) के बीच एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। महिला एक कार्यक्रम के दौरान गले से हिजाब उतारकर फेंकती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि गलत तरीके से हिजाब पहनने के कारण उस महिला को तेहरान नेशनल काउंसिल फॉर कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग (Tehran National Council For Construction Engineering) की वार्षिक सभा से निकाल दिया गया था। घटना शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) की है।

बताया जा रहा है कि ज़ेनब काज़ेमपुर (Zeynab Kazempour) नाम की महिला को तेहरान कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन की वार्षिक सभा के दौरान इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि निदेशक मंडल को उसके हिजाब पहनने का तरीका पसंद नहीं आया। निदेशक मंडल ने ज़ेनब को बोर्ड के सदस्य के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर ज़ेनब ने बीच सभा में हिजाब उतार कर फेंक दिया।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हिजाब उतारने से पहले नाराज ज़ेनब लोगों के सामने छोटा-सा स्पीच दे रही हैं। ज़ेनब ने कहा, “मैं उस असेंबली को मान्यता नहीं देती, जहाँ उम्मीदवारों को हिजाब न पहनने के कारण बर्खास्त कर दिया जाता है।” उनकी बात खत्म होने से पहले ही उनका माइक बंद कर दिया गया।

मंच छोड़ने से पहले जिस तरह ज़ेनब ने हिजाब निकाल फेंका, उससे उपस्थित लोग ज़ेनब के समर्थन में तालियाँ बजा रहे थे। बता दें कि ईरान में लंबे समय से महिलाएँ हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब को लेकर गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद हुई थी।

देशभर में जारी विरोध के बाद ईरान की इस्लामी सरकार ने क्रूरता के लिए कुख्यात मोरालिटी पुलिस (Morality Police) को खत्म करने का फैसला लिया है। वहीं, हिजाब पहनने की अनिवार्यता को खत्म करने पर वहाँ की सरकार विचार कर रही है।

‘जमीन कब्ज़ा की साजिश’: काली मंदिर के सामने शिहाबुद्दीन ने लगा दिया ट्यूबवेल, विरोध करने पर पुजारी और श्रद्धालुओं पर डंडे से हमला और तोड़फोड़

असम के करीमगंज जिले के नीलमबाजार इलाके में मुस्लिमों द्वारा हिंदू मंदिर पर हमला करने की घटना सामने आई। आरोप है कि शिहाबुद्दीन नामक व्यक्ति ने मंदिर के सामने की जमीन पर कब्जा करते हुए उस पर ट्यूबवेल लगा रखा है। जब स्थानीय लोगों ने उसका विरोध किया तो उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर मंदिर के पुजारी व भक्तों पर हमला कर दिया। आरोपितों ने यज्ञ स्थल में भी तोड़फोड़ की है। घटना शुक्रवार (17 फरवरी 2023) की बताई जा रही है।

इस मामले में करीमगंज भाजपा के जिलाध्यक्ष बिस्वरूप भट्टाचार्य ने कहा है, “आज का दिन करीमगंज के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दक्षिण करीमगंज विधानसभा क्षेत्र के नीलम बाजार में स्थित काली मंदिर को एक मुस्लिम ने अपवित्र कर दिया। उसने यह सब जमीन में कब्जा करने के लिए किया।”

उन्होंने आगे कहा, “शिहाबुद्दीन ने मंदिर के अंदर जाने वाले रास्ते में ट्यूबवेल लगवाया है। मंदिर समिति ने उससे ट्यूबवेल हटाने का आग्रह किया था। लेकिन, ट्यूबवेल हटाने के बजाय वह हिंसक हो गया। फिर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर मंदिर आने वाले भक्तों और पुजारी समेत मंदिर समिति के सदस्यों पर हमला कर दिया। अच्छी बात यह रही कि करीमगंज पुलिस समय रहते मौके पर पहुँच गई और हथियार छीन लिए। आरोपितों द्वारा मंदिर पर हमला कर यज्ञ स्थल में तोड़फोड़ करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

बिस्वरूप भट्टाचार्य ने यह भी कहा है, “लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि असम में हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में है। इसलिए, इन लोगों आग से खेलना बंद कर देना चाहिए। नहीं तो, परिणाम विनाशकारी होंगे। यहाँ सभी धर्म के लोगों को मिलजुलकर रहना चाहिए। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मंदिर में हुई इस घटना को लेकर पहले ही 1-2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मंदिर में प्रवेश करने वाले और भक्तों को पीटने वाले बदमाशों के वीडियो फुटेज बरामद कर लिए हैं।”

इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में मुस्लिम युवक डंडा लेकर हिंदुओं पर हमला करते हुए देखे जा सकते हैं।

इस मामले में करीमगंज के पुलिस अधीक्षक पद्मनाभ बरुआ ने कहा है, “ट्यूबवेल लगाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। हालाँकि पुलिस ने समय रहते इसमें काबू पा लिया। ट्यूबवेल लगाने में शामिल व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हालाँकि अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। फिलहाल स्थितियाँ नियंत्रण में हैं।”

कई देशों-संस्थानों में तबाही के लिए फंडिंग, बुश को हटाने को बना लिया था ज़िंदगी-मौत का सवाल: माँ को आत्महत्या करवाने वाले जॉर्ज सोरोस अवैध तरीकों से कमाई अकूत संपत्ति

अमेरिका के विवादास्पद अरबपति जॉर्ज सोरोस (George Soros) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को लेकर आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे को प्रभावित करने की कई बार कोशिश की है। उन्होंने पीएम को हालिया अडानी-हिंडेनबर्ग विवाद से जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश की थी। उनके बयान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयशंकर ने कहा कि सोरोस ने पिछले दिनों पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वे भारत जैसे लोकतंत्रिक देश के नेता हैं, लेकिन वे खुद लोकतांत्रिक नहीं हैं। वो मुस्लिमों साथ हिंसा और अन्याय कर तेजी से बड़े नेता बने हैं। उन्होंने कहा सोरोस के पसंद के व्यक्ति जीते तो लोकतंत्र बढ़िया है, वर्ना खराब है।

जयशंकर ने कहा कि सोरोस पुराने विचारों वाले व्यक्ति हैं और न्यूयॉर्क में बैठकर वे अभी भी सोचते हैं कि उनके विचारों के अनुसार ही दुनिया चले। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने नैरेटिव के लिए अपने संसाधनों का निवेश करते हैं। ऐसे लोग खतरनाक होते हैं। उन्होंने सोरोस को बुजुर्ग, अमीर, मतलबी और कहानियाँ बनाने में माहिर बताया।

सोरोस ने 16 फरवरी 2023) को जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपटलिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री के बीच मधुर संबंध हैं। सोरोस ने अडानी समूह के कथित हेरफेर में प्रधानमंत्री के भी शामिल होने का आरोप लगाया था। इसको लेकर स्मृति ईरानी ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस?

जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।

जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।

साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।

सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।

इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।

सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और पीएम मोदी को तानाशाह कहा था। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।

यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।

साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।

इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।

अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।

भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।

CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।

कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।

दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नरफत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

पहला डंडा चलाने वाले मोबाइल दुकानदार महबूब खान की तलाश, पीड़ित हिन्दू बोले – उस तरफ से कॉन्ग्रेस की पैरवी, हमारी तरफ से कोई नहीं: झारखंड पुलिस पर टॉर्चर के आरोप

झारखंड के पलामू में इसी माह 14 फरवरी को हुई हिंसा में पुलिस को महबूब खान नाम के आरोपित की तलाश है। बताया जा रहा है कि हमले की शुरुआत में तोरण लगा रहे हिन्दुओं पर हमले की शुरुआत उसी ने की थी। वहीं पलामू में जिस महाशिवरात्रि को हिन्दू समुदाय धूमधाम से मनाना चाहता था, वो अब बंदूकों के साये में धारा-144 के अंतर्गत चल रही है। हालात तनावपूर्ण, लेकिन सूनसान और प्रशासन के नियंत्रण में हैं। अब तक 13 गिरफ्तारियों की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

एक दिन पहले ऑपइंडिया से बात करते हुए घटना के चश्मदीद होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने पहला हमला तोरण द्वार का विरोध कर रहे मुस्लिमों की तरफ से होने की जानकारी दी थी। तब नाम न उजागर करने की शर्त पर उन्होंने कहा था कि तोरण द्वारा का विरोध करने वाले मोबाइल दुकानदार कलीम अपने साथी महबूब के साथ 50-60 लोगों को बुला कर अचानक ही हमला कर दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव हुआ था। अब पुलिस उसी महबूब खान की तलाश में है।

‘उनकी तरफ से कॉन्ग्रेस की पैरवी, हमारी तरफ से कोई नहीं’

ऑपइंडिया ने घटनास्थल पांकी बाजार के एक युवक से बात की। युवक ने प्रशासन के डर से अपना नाम न छापने की शर्त पर हमें बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व MLA देवेंद्र सिंह उर्फ़ बिट्टू खुल कर मुस्लिम पक्ष की मदद कर रहे जबकि हिन्दुओं का पक्ष रखने वाला कोई भी नहीं है। हमें बताया गया कि शुरू में जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों पर बराबर एक्शन लिया था, लेकिन कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक बिट्टू सिंह ने खुद थाने जा कर हिन्दू लड़कों के खिलाफ पैरवी की जिसके बाद पांकी बाजार से 5 किलोमीटर रेंज में हिन्दू लड़कों को घर से उठाया जा रहा।

मंसूबों में सफल रहे वो

महाशिवरात्रि ठीक से न मना पाने से खुद को बेहद दुःखी बताते हुए पांकी बाजार के स्थानीय युवक ने बताया कि हमलावर अपने मंसूबों में सफल रहे। हमें बताया गया कि जहाँ हिन्दू समाज लम्बे समय से धूमधाम से महाशिवरात्रि का इंतज़ार कर रहा था वहाँ अब कई लोग प्रशासन के डर से घर छोड़ कर भागे हुए हैं। स्थानीय युवक के मुताबिक, हमलावरों का मकसद हिन्दू त्यौहार में विघ्न डालना था और ऐसा उन्होंने कर भी लिया।

बर्बाद किया जा रहा नौजवानों का कैरियर

ऑपइंडिया से बात करते हुए पांकी के युवक ने बताया कि जिन युवकों को हिरासत में लिया जा रहा है उनकी उम्र 25 से 30 के बीच है। हमें बताया गया कि ये युवक पांकी बाजार से 5 किलोमीटर रेंज में रहते हैं जिनका आगे का करियर बर्बाद किया जा रहा है। इसमें से कई ऐसे युवक भी बताए गए जो खुद के घटनास्थल पर न होने का दावा भी कर रहे। युवक ने खुद को भी फँसाए जाने की आशंका जताते हुए कहा कि मुस्लिम आरोपित बिना किसी हिचक के जेल जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि बाहर उनकी पैरवी हो रही है।

पांकी की ही भाजपा नेत्री मंजूलता ने बताया कि प्रशासन के डर से कई हिन्दुओं के घरों में सिर्फ महिलाएँ बची हैं, जिन्हें परेशान किया जा रहा है। मंजूलता ने पुलिस पर पकड़े गए हिन्दू युवकों के टॉर्चर का भी आरोप लगाया।

अब तक 13 गिरफ्तारियों की ही पुष्टि

तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच पलामू के पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार ने अब तक 13 गिरफ्तारियों की ही पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि धारा-144 के नियमों का पालन करते हुए लोगों को दर्शन की इजाजत दी जा रही है।

‘अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब ये नहीं कि किसी की आस्था को ठेस पहुँचाओ’: रामचरितमानस जलाने वालों पर बरसे रजा मुराद, CM योगी के हुए मुरीद

फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है। प्रयागराज पहुँचे बॉलीवुड अभिनेता ने रामचरितमानस विवाद पर भी अपना पक्ष रखा और कहा कि किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाया जाना चाहिए। रजा मुराद ने आजम खान को भारत की न्याय व्यवस्था में भरोसा रखने की सलाह दी।

शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को प्रयागराज पहुँचे एक्टर रजा मुराद ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश में अच्छा काम कर रही है। सीएम योगी के काम की बदौलत ही जनता ने उन्हें दोबारा चुना है। रजा मुराद ने नोएडा में बनाए जा रहे फिल्म सिटी को लेकर सीएम योगी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्मों के निर्माण को लेकर प्रदेश में अब बेहतर माहौल मिल रहा है।

फिल्म अभिनेता ने रामचरितमानस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि हमारे देश में लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी मिली हुई है, इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाई जाए। किसी भी धर्म ग्रन्थ को लेकर विवाद उत्पन्न करना उचित नहीं है। बता दें कि सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है।

रजा मुराद यूपी के रामपुर के रहने वाले हैं। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने ने प्राइमरी की शिक्षा रामपुर में ही ग्रहण की है। इस पर स्थानीय पत्रकारों ने उनसे सपा नेता आजम खान को लेकर सवाल किया। रजा मुराद ने कहा कि हमारी न्याय व्यवस्था काफी मजबूत है। आजम खान को इसपर विश्वास करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार आतंकी कसाब का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस आतंकी को पूरी दुनिया ने गोली चलाते हुए देखा था लेकिन उसे भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।

‘महाशिवरात्रि मनानी है तो 5 बार खालिस्तान ज़िंदाबाद कहना होगा’: ऑस्ट्रेलिया में मंदिर को धमकी, हिन्दुओं के खिलाफ लगातार हिंसा

ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ के बाद अब खालिस्तानी आतंकी हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं। दरअसल, ब्रिस्बेन में स्थित एक हिंदू मंदिर को धमकी दी गई है। धमकी में कहा गया है कि यदि वह महा शिवरात्रि मनाना चाहते हैं तो उन्हें खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करनी होगी। धमकी देने वाले व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तानी बताया है।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को ब्रिस्बेन के प्रसिद्ध गायत्री मंदिर के अध्यक्ष डॉ. जयराम और उपाध्यक्ष धर्मेश प्रसाद को एक धमकी भरा फोन आया था। इस फोन में खालिस्तानी आतंकी ने खुद को गुरु अवधेश सिंह बताते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान के ननकाना साहिब से बोल रहा है।

मंदिर के अध्यक्ष जय राम को फोन कर धमकी देने वाले व्यक्ति ने कहा है, “मैं पाकिस्तान के लाहौर में ननकाना साहिब से बोल रहा हूँ। मेरा नाम गुरु अवधेश सिंह है। मेरे। मेरे पास खालिस्तान के संबंध में एक संदेश है। यदि तुम 19 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाने की योजना बना रहे हो तो पुजारी से खालिस्तान का समर्थन करने के लिए कहो। तुमको अपने कार्यक्रम के दौरान पाँच बार ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाना है।” उसने यह भी कहा है, “19 मार्च को होने वाले खालिस्तान जनमत संग्रह होना है। तुम अपनी मंडली से कहो कि वो इसका समर्थन करें।”

बता दें कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में स्थित काली माता मंदिर की पुजारन को भी ऐसा ही धमकी भरा कॉल आया था। धमकी देने वाले व्यक्ति ने 4 मार्च को आयोजित होने वाले भजन कार्यक्रम को रद्द करने के लिए कहा था।

इस धमकी को लेकर मंदिर की पुजारन भावना का कहना है कि उनके फोन पर नो कॉलर आईडी से एक फोन आया था। फोन करने वाला व्यक्ति अमृतसर-जालंधर जैसे पंजाबी लहजे में बोल रहा था। उसने उन्हें कहा है कि मंदिर में 4 मार्च को आयोजित होने वाले भजन कार्यक्रम को रद्द कर दें। नहीं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

हिंदुओं ने की कार्रवाई की माँग

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हिंदुओं ने वहाँ के मंदिरों में हो रही तोड़फोड़ की निंदा की है। साथ ही, अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की। बता दें कि बीते कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलिया के कई हिंदू मंदिरों में खालिस्तानी आतंकियों ने तोड़फोड़ कर खालिस्तान के समर्थन व भारत के विरोध में नारे लिखे हैं।

सिडनी में एक भारतीय ने एएनआई से बात करते हुए कहा है, “मुझे उम्मीद है कि सरकार इसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी। हम हिंदू हैं और हमारी संस्कृति में हिंदू धर्म का अर्थ जीवन का एक तरीका है और हम हर धर्म का सम्मान करते हैं।”

सिडनी में रहने वाले एक अन्य हिंदू ने कहा है, “हर बार जब हम ऐसा कुछ सुनते हैं, तो हम चिंतित हो जाते हैं। एक हिंदू या एक ईसाई या एक मुस्लिम के रूप में, हम सब एक हैं और हम एक दूसरे का समर्थन करते हैं। सरकार को इसका ध्यान रखना होगा और एक विशेष समुदाय के लिए समस्या पैदा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।”

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हमले

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में हिंदू लगातार खालिस्तानियों के निशाने पर रहा है। जनवरी में 20 दिनों के भीतर ही खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश विरोधी और खलिस्तान के समर्थन में नारे लिख दिए थे।

खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर में पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के BAPS स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

बता दें कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले एक खूँखार खालिस्तानी आतंकी था। वह 20,000 से अधिक हिंदू और सिखों की हत्या के लिए जिम्मेदार था। हालाँकि, अलगाववादी खालिस्तानी भिंडरांवाले को संत बताकर उसका महिमामंडन करते रहते हैं।

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताते हुए भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ फैरेल ने भी इन घटनाओं पर दुख जताया था। उन्होंने कहा था, “भारत की तरह ही ऑस्ट्रेलिया भी एक गौरवशाली और बहुसांस्कृतिक देश है। मेलबर्न में दो हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ से हम स्तब्ध हैं। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी जाँच कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए हमारा मजबूत समर्थन है। लेकिन, इसमें घृणित भाषा और हिंसा को जगह नहीं है।”

यही नहीं, ऑस्ट्रेलिया के सहायक विदेश मंत्री टिम वाट्स ने भी कहा था, “बीते कुछ हफ्तों में हमने पूजा स्थलों की जो तोड़-फोड़ देखी है, वह हमारे बहुसांस्कृतिक और बहु-विश्वास वाले देश में पूरी तरह से अस्वीकार्य है। हम इन घृणित कार्यों को लेकर विक्टोरियन पुलिस द्वारा की जा रही जाँच का पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

हार्दिक-नताशा की शादी में दिनेश कार्तिक ने किया कन्यादान, मंत्रों को अंग्रेजी में समझाने के लिए ट्रांसलेटर भी रखा गया: क्रुणाल-पंखुरी ने किया हवन

भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और सर्बिया की मॉडल नताशा स्तांकोविक ने राजस्थान के उदयपुर में शादी रचाई। बुधवार (15 फरवरी, 2023) को दोनों ने हिन्दू रीति-रिवाज से राजस्थान के ऐतिहासिक शहर में शादी रचाई। अब तक वहाँ इस कार्यक्रम के चर्चे हो रहे हैं। इस दौरान ये भी सामने आया है कि विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने इस शादी में कन्यादान की रस्म निभाई। पंडित बनवारी चरण शास्त्री ने दोनों के फेरे करवाए।

‘दैनिक भास्कर’ ने चांदपोल के निवासी पंडित बनवारी चरण शास्त्री से बातचीत के आधार पर बताया कि शाम के पौने 8 बजे हार्दिक-नताशा ने फेरे लिए। इससे एक दिन पहले वैलेंटाइन्स डे के दिन ईसाई रीति-रिवाज से दोनों ने शादी की थी। पंडित ने बताया कि नताशा के माता-पिता ठीक से हिंदी नहीं समझते हैं। इसीलिए, वहाँ एक ट्रांसलेटर भी रखा गया था जो सातों वचनों को अंग्रेजी में अनुवाद कर के बता रहा था। हालाँकि, इस दौरान कुछ कठिन हिंदी शब्दों को लेकर हार्दिक पंड्या ने भी पंडित से पूछा और उनका अर्थ समझा।

असल में फेरे के दौरान जब कन्यादान के रस्म की बारी आई तो कुछ सेकेंड्स तक कोई नहीं पहुँचा। पंडित ने कन्यादान करने वाले को मंडप में उपस्थित होने के लिए आवाज़ लगाई थी। इस दौरान पास में खड़े दिनेश कार्तिक सामने आए और कन्यादान करने की इच्छा ज़ाहिर की। फिर उन्होंने नताशा स्तांकोविक की तरफ से कन्यादान की रस्म अदायगी की। वहीं हार्दिक के बड़े भाई क्रुणाल पंड्या की पत्नी पंखुड़ी शर्मा ने तोरण रस्म निभाया।

इस दौरान उन्होंने हार्दिक पंड्या का पूजन किया। रस्म के हिसाब से हार्दिक पंड्या का साला उनकी गोद में भी बैठा। नताशा के माता-पिता को इन सबकी समझ नहीं थी, इसीलिए क्रुणाल-पंखुरी ने हवन किया। इस दौरान पंडित ने उन्हें वैदिक नियम से हवन वाला चम्मच पकड़ने की विधि बताई। मजाक में उन्होंने ये भी कहा कि आपने अब तक बल्ला-गेंद ही पकड़ा है, इसीलिए ये चम्मच पकड़ने में दिक्कत आ रही। इस दौरान पंडित शास्त्री ने अंग्रेजी में पंड्या भाइयों और उनकी पत्नियों को कहा कि लाइफ ‘वन टाइम ऑफर’ है, इसका अच्छा प्रयोग कीजिए। इस पर खूब तालियाँ बजीं।

तालिबान ने गर्भ निरोधक दवाओं पर लगाया बैन, कहा – ये मुस्लिमों की आबादी रोकने की पश्चिमी साजिश: बंदूक लेकर मेडिकल दुकानों पर गश्त

अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया नियम लागू करते हुए गर्भ निरोधक दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। तालिबान ने इसे मुस्लिमों की आबादी रोकने की साजिश करार दिया है। गर्भ निरोधक दवाओं को बेचने वाले दुकानदारों ने खुद को बंदूकें दिखा कर धमकाने का भी आरोप लगाया है। इन सभी के अलावा दाईयों को भी किसी भी प्रकार के गर्भनिरोधक दवाओं की सलाह न देने की सख्त हिदायत मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स में तालिबान लड़ाकों द्वारा धमकाए गए कुछ लोगों के बयानों का जिक्र हुआ है। काबुल के एक मेडिकल स्टोर मालिक के मुताबिक उनकी दुकान में कुछ बंदूकधारी पहुँच कर गर्भनिरोधक दवाओं को न बेचने की धमकी दे कर वापस लौट गए। दुकानदार का कहना है कि तालिबानी लड़ाके काबुल की हर दुकान को चेक भी कर रहे है। वहीं एक बुजुर्ग दाई ने खुद को तालिबान कमांडर द्वारा धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए बताया कि उन पर पश्चिमी सभ्यता के प्रचार का आरोप लगाते हुए कहीं बाहर आने और जाने पर पाबन्दी लगा दी गई है।

फ़िलहाल तालिबान का यह फरमान सिर्फ काबुल ही नहीं बल्कि मजार-ए-शरीफ जैसे अन्य शहरों में भी लागू है। बताया जा रहा है कि पश्चिम देशों की नकल न करने की चेतावनी देते हुए तालिबानी लड़ाके सड़कों पर गश्त भी कर रहे हैं। 17 साल की एक शादीशुदा व 18 माह के बच्चे की माँ ज़ैनब का जिक्र करते हुए बताया गया है कि वह चुपके से गर्भ निरोधक दवाएँ ले रही थी लेकिन अब उसकी दाई ने उसे ऐसा करने से रोक दिया है। ज़ैनब का कहना है कि वो इस फरमान से अपने भविष्य को ले कर बेहद फिक्रमंद है।

तालिबान के इस फैसले का अफगानी लोगों द्वारा ही विरोध किया जा रहा है। अफगानिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ती और वर्तमान में ब्रिटेन में मौजूद शबनम नसीमी ने तालिबान के इस फैसले को कुरान से जोड़ा है। उनका कहना है कि कुरान में कहीं भी गर्भ निरोधन पर रोक नहीं है इसलिए तालिबान का ये फैसला सही नहीं हैं।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद महिलाओं पर तमाम तरह की पाबंदियाँ लगा दी गईं हैं। इन पाबंदियों में उनके कपड़े से ले कर पढ़ाई तक प्रभावित हुई है। इन फैसलों का विरोध करने वालों को तालिबान कड़ी सजा दे रहा है।