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स्वरा भास्कर और फहद अहमद के निकाह के बाद सोशल मीडिया में ‘फ्रिज’ और ‘बक्से’ के चर्चे, नेटिजन्स बोले- ‘भाई’ से सीधे ‘जान’

स्वरा भास्कर ने 16 फरवरी 2023 को सोशल मीडिया के जरिए निकाह की खबर दी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता फहद अहमद के साथ कोर्ट मैरिज की है। बताया जाता है कि दोनों ने इस संबंध में कोर्ट में दस्तावेज 6 जनवरी को ही जमा कर दिए थे, लेकिन निकाह की खबर अब सार्वजनिक की है।

2019 में एंटी सीएए प्रोटेस्ट के दौरान स्वरा और फहद की मुलाकात हुई थी। लेकिन दोनों के निकाह से ज्यादा सोशल मीडिया में चर्चे स्वरा भास्कर के उस पोस्ट की है ​जो उन्होंने 2 फरवरी 2023 को किया था। इसमें स्वरा ने फहद को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा था, “जन्मदिन मुबारक फ़हद मियाँ! भाई का कॉन्फ़िडेंस बरकरार रहे। फहद ज़िरार अहमद खुश रहो, आबाद रहो। उम्र हो रही है अब शादी कर लो!हैव ए ग्रेट बर्थ डे एंड ए फैंटास्टिक ईयर दोस्त।”

इसके जवाब में फहद ने लिखा था, “शुक्रिया ज़र्रानवाज़ी का दोस्त। भाई के कॉन्फिडेंस ने तो झंडे गाड़े है वो तो बरकरार रहना ज़रूरी है। और हाँ, तुमने वादा किया था तुम मेरी शादी में आओगे तो वक़्त निकालो। लड़की मैंने ढूँढ ली है।” हैरान करने वाली बात यह है कि 6 जनवरी को ही निकाह के लिए कोर्ट में दस्तावेज दाखिल करने के बावजूद दोनों इस तरह के पोस्ट कर रहे थे।

इस पोस्ट को लेकर स्वरा नेटिजन्स के निशाने पर आ गई हैं। मीनाक्षी श्रीयन नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “स्वरा भास्कर ने 2 फरवरी को फहाद को भाई बोलकर जन्मदिन की बधाई दी थी। स्वरा भास्कर ने 16 फरवरी को फहाद को अपना शौहर बना लिया। जिसे भाई बोलती थीं, उससे स्वरा भास्कर ने शादी की है। शादी की बधाई स्वरा भास्कर।”

रजत मिश्रा नामक यूजर ने ट्वीट करते हुए कहा है, “यही तो इस्लाम की खूबसूरती है। जो कल तक भइया था वो आज सैंया है। ‘स्वरा भास्कर’ ने अपने भाई ‘फहाद अहमद’ से शादी कर ली। कल तक भैया-भैया अब सैंया-सैंया। ‘भाई’ से सीधे ‘जान’ तक। मैगी बनने में भी इससे ज्यादा टाइम लगता है।”

मुन्ना यादव नामक यूजर ने लिखा है, “स्वरा भास्कर को मेरी तरफ से बक्सा। फ्रिज बहुत महँगा है। यही ठीक रहेगा।”

अशोका गुर्जर नामक यूजर ने लिखा है, “जैसे ही फहाद अहमद ने दहेज में फ्रिज माँगा फफक-फफक कर रो पड़ी स्वरा भास्कर।”

बंटी वर्मा ने लिखा है, “स्वरा भास्कर ने अपने भाईजान फहद अहमद से किया निकाह। होने वाला बच्चा अपने पापा को मामा भी कह सकता है।”

राम रघुवंशी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “फहाद टू स्वरा। कल तक भाई थे आज शौहर हो गए। भाई बना जान।”

सोशल तमाशा नामक यूजर ने एक फोटो ट्वीट की है। इस फोटो में स्वरा और फहाद की शादी वाली फोटो और फहाद को भाई कहने वाले ट्वीट के स्क्रीनशॉट के साथ लिखा है, “2 हफ्ते पहले जो भाई था, आज शादी के बाद वो जान बन गया।”

जीनत राणा नामक यूजर ने लिखा है, “जो कभी ‘भाई’ थे वो अब स्वरा की ‘जान’ हो गए। यही तो खूबसूरती है इस्लाम की। दोनों को निकाह की मुबारकबाद। कागज तो फिर भी दिखाने पड़ेंगे।”

सपा ने उन दो महिला नेताओं को निकाला, जिन्होंने रामचरितमानस जलाने और स्वामी प्रसाद मौर्य की अनर्गल टिप्पणियों का किया था विरोध

समाजवादी पार्टी ने दो महिला नेताओं को पार्टी से निकाल दिया है। इनके नाम हैं- रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह। इन दोनों ने रामचरितमानस पर पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की अनर्गल टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। साथ ही मानस को जलाए जाने का विरोध किया था।

सपा ने गुरुवार (16 फरवरी 2023) को ट्वीट कर रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह को पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी दी। निष्कासन के बाद दोनों महिला नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा को महिला विरोधी बताते हुए रामद्रोहियों के खिलाफ आवाज उठाते रहने की बात कही है।

रोली तिवारी मिश्रा ने रामचरितमानस के पन्नों को जलाने और स्वामी प्रसाद मौर्य की विवादित टिप्पणियों का विरोध किया था। इस मामले में पार्टी की तरफ से कोई एक्शन न लेने पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने मौर्य के बयान वाले वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा था, “स्वामी प्रसाद का कहना है कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों को प्रतिबंधित करवाएँगे। 2012 में रोटी कपड़ा सस्ती हो दवा पढ़ाई मुफ्त हो, इस नारे के साथ अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने थे। क्या ‘मानस का मुद्दा’ लेकर सपा पुनः सरकार बना पाएगी?”

यही नहीं उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा था, “श्रीरामचरितमानस के सम्मान स्वाभिमान की लड़ाई धर्मद्रोहियों से लड़ती रहूँगी। मैं छल, कपट, धूर्त्तता, धोखेबाजी, कूटयोजना से मेरा अपमान करने वालों को खुली चुनौती देती हूँ। मर्द हो तो सामने से लड़ो।”

वहीं ऋचा सिंह ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “छद्म समाजवादी स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी की नींव डॉ. राम मनोहर लोहिया से बड़े हो गए हैं? डॉ. लोहिया ने 1961 में रामायण मेले कि परिकल्पना की थी। स्वामी प्रसाद रामचरित मानस का निरंतर अपमान कर रहे हैं। क्या समाजवादी पार्टी अब राम मनोहर लोहिया के बदले स्वामी प्रसाद मौर्य के सिद्धान्तों पर चलेगी??”

पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋचा सिंह ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर समाजवादी पार्टी को महिला विरोधी बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “महिलाओं का अपमान करने वाले लंपटों के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी डीजीपी ऑफिस पहुँच जाते हैं और महिलाओं के-जन अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाली महिलाओं को बिना कारण बताए निष्कासित कर दिया जाता है। समाजवादी पार्टी का महिला विरोधी चेहरा।”

उन्होंने यह भी कहा है, “संविधान के भाग 3, फंडामेंटल राइट पृष्ठ की शुरुआत भगवान राम लक्ष्मण और भगवती सीता के चित्र से होती है। राम भारत की आत्मा हैं। यहाँ तक कि अल्लामा इक़बाल ने उनको इमामे हिंद माना है। ऐसे में भारत की आध्यात्मिक एवं संवैधानिक आत्मा के साथ मैं खड़ी थी और खड़ी रहूँगी।”

वहीं रोली तिवारी मिश्रा ने कहा है, “16 वर्षों की निष्ठा के इस पुरस्कार के लिए आभार आदरणीय अखिलेश यादव जी। राष्ट्रद्रोहियों, सनातन धर्मद्रोहियों, रामद्रोहियों के खिलाफ आवाज उठाती थी, उठाती रहूँगी। सनातन धर्म के स्वाभिमान प्रभु श्रीराम, श्रीरामचरितमानस के सम्मान के लिए ऐसे हजारों निष्कासन स्वीकार। धर्मो रक्षति रक्षितः।”

हनुमान मंदिर में भजन-आरती से थी कट्टर मुस्लिमों को दिक्कत, कई महीनों से हिंसा की रच रहे थे साजिश: स्थानीय हिंदू बोले- त्योहार मनाना मुश्किल

झारखंड के पलामू में शिवरात्रि को लेकर बनाई जा रही तोरणद्वार के कारण हुई हिंसा के बाद इलाके में धारा 144 लगा दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में दो एफआईआर दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, पलामू जोनल आईजी राजकुमार लकड़ा के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया। इसमें डीसी ए दोड्डे, एसपी चंदन सिन्हा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

एसपी चंदन सिन्हा ने कहा कि पांकी में हुई हिंसा मामले में अब तक कुल 2 प्राथमिकी दर्ज की गई है। उपद्रव में शामिल 13 लोगों को चिह्नित जेल भेजा गया है, जबकि 100 नामजद समेत 1000 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। एसपी ने कहा कि इलाके में फिलहाल इंटरनेट सेवा बाधित रहेगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ हमेशा हिन्दुओं पर हमला किया जाता है। उनके त्योहारी में बाधा डाली जाती है। इतना ही नहीं, यहाँ हिंदू शादी या कोई कार्यक्रम करते हैं तो मुस्लिम पक्ष द्वारा किसी ना किसी बहाने उत्पात मचाया जाता है। तोरणद्वार बनाने पर भी मस्जिद के नजदीक बनाने का हवाला देकर मुस्लिमों ने उसे तोड़ दिया और शिव भक्तों की पिटाई कर दी।

पलामू एसपी चंदन सिन्हा ने कहा कि शिवरात्रि के लिए शिवरात्रि समिति के सदस्य मस्जिद के सामने तोरणद्वार बनाने गए थे। हर साल दूसरी जगह तोरणद्वार बनाया जाता था। एसपी ने कहा कि थाना में आवेदन दिए बिना और प्रशासन के अनुमति के बिना ही मस्जिद के सामने तोरणद्वार बनाया गया। इसका विरोध मुस्लिमों ने किया था। इसके बाद टकराव हुआ। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, इस हिंसा की साजिश पिछले कुछ महीनों से की जा रही है। इसके पीछे मस्जिद से लगभग 150-200 मीटर की दूरी स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हनुमान मंदिर में मंगलवार को भजन और आरती का आयोजन किया जाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब प्रशासन द्वारा मंदिर में पूजा भी रूकवा दिया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग एक महीना पहले मंदिर पर भजन के लिए लाउडस्पीकर लगवाया गया था। इसका मस्जिद से जुड़े लोगों ने विरोध किया था। मस्जिद कमिटी के लोगों ने इस संबंध में थाने में शिकायत करते थे। उसके बाद मंदिर से लाउडस्पीकर को उतरवा दिया गया। वहीं, मस्जिद से फुल साउंड में नमाज पढ़ी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद कमिटी के अध्यक्ष अबू हसन और मुखिया नेहाल अंसारी के इशारे पर हिंदुओं को परेशान किया जाता रहा है। अबू हसन मुखिया रह चुका है। इन लोगों द्वारा थाने में शिकायत करके कहा जाता है कि लाउडस्पीकर के कारण उन्हें नमाज पढ़ने में दिक्कत हो रही है। शिकायत पर हिंदू पक्ष को थाने में बुलाकर परेशान किया जाता था।

पांकी में हिंसा से पहले मुस्लिम पक्ष द्वारा शुक्रवार को जुमा पर इकट्ठा होने के लिए मैसेज सर्कुलेट किया जा रहा था। इसके बाद हिंदू पक्ष के लोग सतर्क रहने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वहाँ अक्सर डर के माहौल में रहते हैं। मैसेज सर्कुलेट होने की बात का पता चलते ही वे सतर्क रहने लगे।

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि तोरणद्वार को लेकर उन लोगों पर मस्जिद से पत्थरबाजी की गई थी। इतना ही नहीं, पेट्रोल बम फेंके गए। मुस्लिम पक्ष ने ही आगजनी की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्लिम पक्ष ने हिंदुओं की संपत्ति समझकर आग लगाई थी। इन लोगों का कहना है कि इस हिंसा में 20 के करीब हिंदू घायल हो गए हैं।

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि इन लोगों को राज्य सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। इसलिए इस घटना में एकपक्षीय कार्रवाई की जा रही है। हिंदुओं को टारगेट करके FIR में नाम डाला जा रहा है। इन लोगों का कि FIR में उन हिंदुओं का नाम भी डाला जा रहा है, जो घटना के वक्त शहर में थे भी नहीं।

इस घटना में मुखिया नेहाल अंसारी, मोबिन अंसारी, महबूब आलम, शहजाद आलम, जाहिद अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के रहने वाले रजीउल्लाह को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, हिंदू पक्ष के करण कुमार सिंह, रितेश कुमार सिंह, सुमित सिंह, रौशन कुमार, दीपक कुमार, धनंजय कुमार भुइंया और मदन राम को गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि पहले एक हिंदू का सिर फोड़ने और फिर मस्जिद से पथराव करने के बाद हुई हिंसा में मुस्लिमों को विक्टिम दिखाने की कोशिश की जा रही है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरी घटना में मुस्लिमों को ही पीड़ित बता दिया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद पर पत्थर फेंके गए और दो घर तथा कुछ गाड़ियाँ जला दी गईं। 

ओवैसी यहीं नहीं रूकते हैं। उनका कहना है कि मस्जिद के सामने तोरणद्वार नहीं बनाना चाहिए था। उन्होंने इसका दोष भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर मढ़ दिया और कहा कि इसमें दंगाई और संघ परिवार जीत गए।

पलामू हिंसा को लेकर जिस तरह की नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, उसमें मुस्लिमों को पीड़ित और पीड़ित हिंदुओं को गुंडा साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट कहा जा रहा है कि महाशिवरात्रि को लेकर पलामू के पांकी के हिंदू तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चौक पर तोरणद्वार बनाया था। चौक के पास ही मस्जिद स्थित है।

जिस जामा मस्जिद को सहयोग से बनाया गया, उसी से उन पर हमले किए गए। लोगों का कहना है कि यह मस्जिद ज्यादा पुरानी भी नहीं है और ना ही आसपास के इलाके में मुस्लिमों की इतनी जनसंख्या है। जहाँ मस्जिद बनाई गई है, वह इलाका हिंदू बहुल है।

‘आतंक के द्वार’ में पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी, तब्लीगी जमात के इज्तेमा में चाय पीता फोटो वायरल

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने पिछले हफ्ते 10 फरवरी 2023 (शुक्रवार) को कराची में इज्तेमा नामक तब्लीगी जमात की एक विशाल सभा में भाग लिया। इस सालाना इज्तेमा में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के अंतरिम मुख्य चयनकर्ता को चाय का आनंद लेते और बाद में ऊँघते हुए देखा जा सकता है।

बता दें कि 2021 में इस्लामी मुल्क सऊदी अरब ने तब्लीगी जमात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सऊदी अरब ने इस इस्लामिक संगठन को ‘आतंक का द्वार’ बताया था। भारत सहित अन्य देशों में भी इसकी कार्य-प्रणाली को लेकर सवाल उठते रहते हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कराची में शुक्रवार को तब्लीगी जमात का एक वार्षिक इज्तेमा आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में हजारों मुस्लिमों ने भाग लिया। कथित तौर पर, उस इज्तेमा में भाग लेते हुए अफरीदी की तस्वीरें और वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

सिर्फ अफरीदी ही नहीं, इस दीनी इज्तेमा में सिंध के गवर्नर कामरान टेसरी और MQM के नेता खालिद मकबूल सिद्दीकी भी मौजूद थे। तब्लीगी जमात की इस सभा में लोगों ने विशेष प्रार्थना की और इस्लाम का संदेश दिया।

इज्तेमा मुस्लिमों के शक्ति प्रदर्शन का एक कार्यक्रम है, जो इस्लाम के मानने वालों के ‘नैतिक’ सुधार के बारे में है। इसे अक्सर इसे ‘मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनाने’ के रूप में वर्णित किया जाता है। इसे एक धार्मिक कार्यक्रम कहा जाता है, जिसमें कई इस्लामी विद्वान लोगों को मार्गदर्शन देने के लिए आते हैं। यह मुस्लिमों के लिए इस्लामी संगठनों द्वारा आयोजित एक इस्लामी सभा है। यह पूरी दुनिया में तब्लीगी जमात का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जाता है, क्योंकि यह मुस्लिमों के जीवन पर बड़ा प्रभाव डालने का दावा करता है।

तब्लीगी जमात एक वैश्विक इस्लामी मूवमेंट है, जो मुस्लिमों से आग्रह करता है कि वे पैगंबर मुहम्मद के समय में इस्लाम के तौर-तरीकों की ओर वापस लौटें। यह संगठन पहनावे और व्यक्तिगत व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करता है। इसे 20वीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली इस्लामी धार्मिक आंदोलनों में से एक माना जाता है।

हज की इस्लामी तीर्थयात्रा के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम जमात बन गई है। एक यूरोपीय जर्नल के अनुसार, इज्तेमा में भागीदारी, धार्मिक अधिकार, प्रतिष्ठा और अधिकारिता को बढ़ावा देती है और उम्माह की अवधारणा के माध्यम से मुस्लिम पहचान को जोड़ती है।

इस तरह की एक मण्डली दिल्ली में वर्ष 2020 में आयोजित की गई थी। उस वक्त कोरोना महामारी का दौर था। इसके बाद इज्तेमा में भीड़ को देखते हुए इसे कोरोना फैलाने वाला बताया गया था। यह आयोजन मार्च 2020 की पहली छमाही में निजामुद्दीन मरकज में हुआ था। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले मुस्लिम, उनके परिवार के सदस्य और उनके संपर्क में आने वाले अन्य लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके कारण देश में कोरोनो वायरस के मामलों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई थी।

देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कुल 14,378 कोरोना वायरस मामलों (अप्रैल 2020 तक) में से लगभग 30% यानी 4291 मामले तब्लीगी जमात द्वारा दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज के आयोजित किए गए कार्यक्रम के कारण हुए थे।

स्वरा भास्कर ने 14 दिन पहले जिस मुस्लिम लड़के को बोला भाई, उसी से शादी कर सोशल मीडिया पर डाला वीडियो

अपनी एक्टिंग से ज्यादा विवादों की वजह से सुर्खियों में रहने वाली अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सपा नेता फहद अहमद से शादी कर ली है। स्वरा भास्कर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर इस बात की जानकारी दी। वीडियो में तस्वीरों और चैट्स के अलावा शादी के कागजात भी दिखाए गए हैं।

स्वरा भास्कर द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत से लेकर विवाह तक की घटनाएँ दिखाई गई हैं। वीडियो के अनुसार साल 2019 में एंटी सीएए प्रोटेस्ट के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। वीडियो पोस्ट करते हुए स्वरा ने लिखा:

“कई बार आप उन चीजों को दूर तलाशते रहते हैं, जो आपके बिल्कुल नजदीक होती है। इसके बारे में आपको अंदाजा भी नहीं होता। हम प्यार की तलाश में थे लेकिन पहले हमें दोस्ती मिली। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से मिले। फहद ज़िरार अहमद मेरे दिल में तुम्हारा स्वागत है। दिल में उथल-पुथल सा है लेकिन जो भी है अब तुम्हारा है।”

फहद अहमद ने स्वरा भास्कर के पोस्ट को शेयर करते हुए इसका जवाब दिया है। फहद ने लिखा है, “मैं नहीं जानता था कि तुम्हारे दिल की उथल-पुथल इतनी खूबसूरत हो सकती है। मेरा हाथ थामने के लिए तुम्हारा शुक्रिया लव, स्वरा भास्कर।”

इन रोमांटिक पोस्ट के बीच एक बात स्वरा ने अपने प्रशंसकों से छिपा ली। स्वरा ने जिस फहद से शादी की है, उसी मुस्लिम लड़के को उन्होंने आज से 14 दिन पहले भाई कह कर संबोधित किया था। 2 फरवरी, 2023 को किए गए इस ट्वीट में स्वरा फहद को यौमे पैदाइश (जन्मदिन) की मुबारकबाद दे रही हैं। स्वरा ने लिखा है,

“जन्मदिन मुबारक फ़हद मियाँ! भाई का कॉन्फ़िडेंस बरकरार रहे। फहद ज़िरार अहमद खुश रहो, आबाद रहो। उम्र हो रही है अब शादी कर लो!हैव ए ग्रेट बर्थ डे एंड ए फैंटास्टिक ईयर दोस्त।”

बता दें कि फहद अहमद समाजवादी पार्टी की युवा इकाई के महाराष्ट्र और मुंबई के अध्यक्ष हैं। फहद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक स्वरा और फहद ने 6 जनवरी 2023 को ही शादी कर ली थी। इस शादी की जानकारी स्वरा ने गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को दी।

BJP ने AAP से छीन ली दिल्ली हज कमेटी अध्यक्ष की कुर्सी, कौसर जहाँ ने जीता चुनाव: केजरीवाल की पार्टी ने LG को बताया हार का जिम्मेदार

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हज कमेटी के अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा हो गया है। दिल्ली सचिवालय में हुई वोटिंग में 5 में से 3 वोट प्राप्त कर कौसर जहाँ दिल्ली हज कमेटी की नई अध्यक्ष बन गई हैं। उनके निर्वाचन पर एक तरफ भाजपा में खुशी है तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं।

6 जनवरी, 2023 को ही दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने हज कमेटी का गठन किया था। कमेटी में भाजपा के सांसद गौतम गंभीर, आम आदमी पार्टी के 2 विधायकों हाजी युनूस और अब्दुल रहमान के साथ कॉन्ग्रेस पार्षद नाजिया दानिश को शामिल किया गया था। उनके अलावा मुस्लिम धर्मगुरु मोहम्मद साद भी कमेटी के मेंबर हैं। वोटिंग में इन्हीं लोगों ने हिस्सा लिया था। रिपोर्टों के अनुसार कौसर को खुद के अलावा सासंद गौतम गंभीर और मोहम्मद साद ने वोट किया। इस तरह वोटिंग में शामिल 5 में से 3 सदस्यों का वोट पाकर वह विजयी रहीं। कॉन्ग्रेस पार्षद नाजिया दानिश वोटिंग से दूर रहीं।

स्टेट हज कमेटी का चेयरमैन बनने के बाद कौसर जहाँ ने खुशी जताते हुए कहा कि एलजी वीके सक्सेना की ओर से अध्यक्ष पद और समिति के गठन के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया कराई गई। चुनाव के दौरान सभी नियमों का पूरा ख्याल रखा गया। कमेटी की नव निर्वाचित अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। कौसर ने कहा कि मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। तीन तलाक पर प्रतिबंध के बाद महिलाएँ सुरक्षित महसूस कर रही हैं। कौसर ने कहा है कि उनकी जिम्मेदारी हज के सफर पर जाने वालों की परेशानी कम करना है।

हज कमेटी अध्यक्ष पद खोने के बाद आम आदमी पार्टी ने एलजी पर निशाना साधा है। आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने एलजी पर बेईमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हज कमेटी के सदस्यों के नाम दिल्ली सरकार की ओर से भेजे जाते हैं, जो आम सहमति से अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। लेकिन इस बार एलजी ने चालाकी से नाम बदलकर अपनी तरफ से छह सदस्य बना डाले।

बीजेपी दिल्ली के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ट्विटर पर कौसर जहाँ को हज कमेटी का अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। बता दें दिल्ली के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब इस पद के लिए कोई महिला अध्यक्ष चुनी गई हैं। कौसर से पहले कॉन्ग्रेस की ताजदार बाबर पहली महिला थीं, जिन्होंने दिल्ली हज कमेटी अध्यक्ष का पद सँभाला था।

24 लाख रुद्राक्ष, 2 दिन में ही जुट गए 10 लाख लोग, कई किमी लंबी लाइन: जानिए कौन हैं ‘चायवाला’ से कथावाचक बने पंडित प्रदीप मिश्रा

मध्य प्रदेश के सीहोर का कुबेरेश्वर धाम और कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सुर्खियों में है। रुद्राक्ष महोत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। 52 एकड़ में फैले कुबेरेश्वर धाम में जगह नहीं बची है। बाहर कई किलोमीटर लंबा जाम लगे होने की खबर है।

महोत्सव की शुरुआत 16 फरवरी 2023 से हुई। 16 से 23 तारीख तक यहाँ कथा का भी आयोजन है। महोत्सव में 24 लाख से ज्यादा रुद्राक्ष बाँटे जाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन गुरुवार (16 फरवरी 2023) दोपहर तक ही करीब 10 लाख लोग जुट गए थे। करीब दो लाख लोग तो 15 फरवरी को ही पहुँच गए थे। इसे देखते हुए रुद्राक्ष बाँटने की शुरुआत एक दिन पहले ही कर दी गई थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार धाम की तरफ से रुद्राक्ष बाँटने के लिए 30 काउंटर बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 18-18 हजार वर्गफीट के 5 डोम बनाए गए हैं।

चमत्कारी रुद्राक्ष के लिए भीड़

दावा है कि महोत्सव में मिलने वाले रुद्राक्ष को पानी में डालने के बाद उस पानी को पीने से हर समस्या दूर हो जाती है। भले ही नक्षत्र खराब हो, बीमारी हो, बाधाएँ हो सब संकट का निवारण हो जाएगा। यही कारण है कि इस रुद्राक्ष लेने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटी है।

पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार, कुबेरेश्वर धाम में जो रुद्राक्ष आता है, वह गंडकी नदी का होता है। भोपाल और इंदौर के विज्ञान विभाग ने रुद्राक्ष की जाँच की है। जाँच रिपोर्ट में पता चला है कि रुद्राक्ष के अंदर गंडकी नदी का पानी है। अगर इस रुद्राक्ष को पानी में डालकर रखें और फिर इस पानी को पी लिया जाए, जो कई सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

कौन हैं पंडित प्रदीप मिश्रा

पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्म 1980 में मध्य प्रदेश के सीहोर में हुआ था। उनके पिता का निधन हो चुका है। गरीबी के कारण उनके पिता रामेश्वर मिश्रा पढ़ नहीं पाए थे। जीवनयापन के लिए वह चने का ठेला लगाते थे। बाद में उन्होंने चाय की दुकान भी चलाई। प्रदीप मिश्रा भी अपने पिता के साथ दुकान पर लोगों को चाय दिया करते थे। यही नहीं वह दूसरों के कपड़े पहनकर स्कूल जाया करते थे और दूसरों की किताबों से पढ़ते थे। भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है। वे आज जिस मुकाम पर पहुँचे हैं, उसके लिए महादेव का पल-पल शुक्रिया करते हैं।

ब्राह्मण परिवार की महिला ने किया प्रेरित

पंडित प्रदीप मिश्रा ने मीडिया में अपने जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प बातें बताई हैं। प्रदीप मिश्रा के अनुसार, सीहोर में ही एक ब्राह्मण परिवार की गीता बाई पराशर नाम की महिला ने उन्हें कथा वाचक बनने के लिए प्रेरित किया था। वह दूसरों के घरों में खाना बनाने का काम करती थी। वो उनके घर पर गए थे, उन्होंने उन्हें गुरुदीक्षा के लिए इंदौर भेजा था। गुरु श्री विठलेश राय काका ने मिश्रा को दीक्षा दी और पुराणों का ज्ञान दिया।

भगवान शिव को सुनाई पहली कथा

पंडित प्रदीप मिश्रा शुरुआत में शिव मंदिर में भगवान शिव को ही कथा सुनाया करते थे। वह मंदिर की सफाई करते थे। इसके बाद सीहोर में ही पहली बार मंच पर कथा वाचक के रूप में उन्होंने शुरुआत की। इसके बाद से उन्होंने मंच से कथा सुनाने का काम जारी रखा। आज लाखों लोग उन्हें सुनने के लिए दूरदराज इलाकों से उनके दरबार में पहुँचते हैं।

‘आग लगा दो कोई बच न पाए’: कानपुर में माँ-बेटी के जिंदा जलने में SDM पर सीधा आरोप, रातभर DM ऑफिस में बैठा रहा परिवार पर नहीं सुनी फरियाद

कानपुर में जलकर माँ-बेटी की हुई मौत के मामले में प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। इसमें कानपुर देहात की जिलाधिकारी की कार्य-प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवार का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो 14 जनवरी 2023 का बताया जा रहा है। इसमें पीड़ित परिवार के मुखिया कृष्ण गोपाल दीक्षित अपने परिवार और बकरी के साथ DM ऑफिस पहुँचकर गुहार लगाई थी।

जिस दिन दीक्षित परिवार जिलाधिकारी कार्यालय अपनी शिकायत लेकर पहुँचा था, उसके ठीक एक दिन पहले यानी 13 जनवरी 2023 को उनके मकान पर पहली बार बुलडोजर चलाकर गिराया गया था। अपनी पत्नी, बेटी, दो बेटों और एक बकरी के साथ जिलाधिकारी ऑफिस पहुँचे कृष्ण गोपाल ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई थी।

हालाँकि, पीड़ित परिवार से जिलाधिकारी नेहा जैन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात नहीं की थी। इसके बाद पीड़ित परिवार डीएम ऑफिस के बाहर ही रात भर बैठा रहा था। इसके बाद मौके पर एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद पहुँचे और पुलिसकर्मियों को बुलाकर सबको थाने ले जाने लगे।

पीड़ित परिवार पर प्रशासन से उलझने का आरोप, DM नहीं की मुलाकात

इस दौरान मृतक प्रमिला ने उनसे आग्रह किया था कि उनका घर गिरा दिया गया है और अब उनके पास रहने के लिए कोई आवास नहीं है। उन्होंने SDM से भी न्याय की गुहार लगाई। हालाँकि, पीड़ित परिवार को न्याय तो नहीं मिला, लेकिन पीड़ित परिवार पर हंगामा का मुकदमा अलग से दर्ज कर दिया गया। इससे पहले उन पर एक मुकदमा दर्ज कराया गया था।

13 जनवरी को जब मड़ौली गाँव में पीड़ित परिवार का घर गिराने की कार्रवाई की जा रही थी, तब भी लेखपाल अशोक सिंह ने पीड़ित परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अशोक सिंह ने एसडीएम से शिकायत करते हुए कृष्ण गोपाल दीक्षित और उनके बेटे शिवम के खिलाफ केस दर्ज करवाया था।

अशोक सिंह ने SDM को लिखे अपने कहा था, “13 जनवरी को प्रशासन अवैध कब्जे को खाली करवाने पहुँचा था, तब कृष्ण गोपाल और उनके बेटे शिवम एवं अंश ने प्रशासन से गाली-गलौज की थी और मारपीट पर उतारू हो गए थे। गाँव के लोगों को सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने के लिए उकसाने लगे। वह कहते, यहाँ से भाग जाओ, वरना बिकरू वाला कांड अपनाएँगे।”

पीड़ित परिवार ने दी शिकायत

माँ-बहन के जल कर मौत के मामले में शिवम ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी है। शिकायत में शिवम ने SDM ज्ञानेश्वर प्रसाद, कानूनगो, मड़ौली के लेखपाल अशोक सिंह, तीन अन्य लेखपाल और रूरा के SHO दिनेश गौतम के साथ-साथ 12-15 महिला-पुरुष बल द्वारा उनकी माँ और बहन को जलाकर मारने का आरोप लगाया गया है।

शिवम ने अपने पत्र में कहा है कि उस जगह पर उनका पूर्वज पिछले 100 वर्षों से रहते आ रहे हैं। 14 जनवरी को एसडीएम बिना नोटिस दिए उनका घर गिराने के लिए पहुँच गए। जब उन्होंने इसके बारे में पूछा तो एसडीएम ने कहा कि उनके गाँव के अशोक दीक्षित ने शिकायत दी है कि उनका मकान ग्राम सभा की जमीन पर बनी है।

शिवम ने कहा कि उनके मकान को उस दिन गिरा दिया गया और घास-भूस की झोपड़ी को छोड़ दिया गया। एसडीएम ने इसे भी अगले 10-15 में खाली करने का आदेश दिया। शिवम ने कहा कि इसके बाद वे जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे अपनी शिकायत लेकर, लेकिन वहाँ उनकी बात नहीं सुनी गई और उन पर मुकदमा दायर कर दिया गया।

शिवम ने आगे लिखा कि अगले दिन एसडीएम ज्ञानेश्वर और कानूनगो, लेखपाल और पुलिस पहुँची। उस समय झोपड़ी में उनकी माता-पिता और बहन आराम कर रहे थे। जेसीबी चालक दीपक ने बिना आगाह किए झोपड़ी को गिरा दी। इसके बाद एसडीएम ने कहा कि आग लगा दो, कोई बचने ना पाए। इसके बाद अशोक सिंह ने झोपड़ी में आग लगा दी।

शिवम ने आरोप लगाया कि प्रार्थी किसी तरह आग से बचते हुए बाहर निकला, लेकिन रूरा के थानेदार दिनेश गौतम ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ उन्हें पीटा और आग में झोंकने की कोशिश की। इसमें उनके पिता झुलस गए और माँ-बहन की जलकर मौत हो गई।

मामले की जाँच के लिए SIT गठित

माँ-बेटी की मौत के बाद दर्ज हुए मुकदमे की विवेचना के लिए DGP ने SIT गठित की है। इस मुकदमे में मौके पर मौजूद एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद, थानाध्यक्ष रुरा दिनेश गौतम, लेखपाल अशोक सिंह, विरोधी पक्ष अशोक दीक्षित, गौरव दीक्षित समेत 12 लोग नामजद किए गए हैं। इसमें कुछ अज्ञात पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। 

DGP ने हरदोई के SP राजेश द्विवेदी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें सीओ विकास जायसवाल को विवेचक बनाया गया है। इसके साथ ही शहर कोतवाल संजय पांडेय, क्राइम ब्रांच के रमेश चन्द्र और महिला थाना प्रभारी रामसुखारी को सदस्य बनाया गया है।

विवादों में जिलाधिकारी नेहा जैन

कानपुर के मड़ौली की घटना को लेकर विवादों में आईं DM नेहा जैन पर पहले भी सवाल उठे हैं। 12 दिसंबर 2022 को पुलिस हिरासत में मौत का शिकार हुए व्यापारी बलवंत सिंह के मामले में भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कलेक्टर नेहा जैन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सांसद ने कहा था कि नेहा जैन का प्रशासनिक व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं है।

इसके बाद कानपुर देहात महोत्सव के लिए जगह-जगह होर्डिंग लगाई गई थी। इस होर्डिंग में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फोटो नहीं लगा था। पीएम और सीएम का फोटो नहीं लगाने को लेकर नेहा जैन पर सवाल उठाए गए थे। उस समय राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने नेहा जैन पर सवाल खड़ा किया था।

दो परिवारों के बीच की लड़ाई में आखिरकार माँ-बेटी की हुई मौत

कहा जा रहा है कि यह पूरा मामला दो परिवारों की जमीन से जुड़ा हुआ है। गाँव में पीड़ित परिवार का एक साथ दो प्लॉट है। पीड़ित परिवार दशकों से इस पर खेती कर रहा था। दो दशक पहले प्रमिला और उनके पति कृष्ण गोपाल दीक्षित ने यहाँ घर बनाया और यहीं रहने लगे।

इसके बाद इस जमीन को लेकर पीड़ित कृष्ण गोपाल दीक्षित और इस केस में आरोपित विशाल दीक्षित, गौरव दीक्षित और अशोक दीक्षित के परिवार से विवाद शुरू हो गया। 10 साल पहले अशोक दीक्षित ने सरकारी अधिकारियों से साँठ-गाँठ करके इस जमीन का सरकारी पट्टा अपनी बहन के नाम पर ले लिया।

जब अशोक दीक्षित ने इस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू किया तो विवाद हो गया। गोपाल कृष्ण दीक्षित के परिवार का सरकारी जमीन पर लंबे समय से कब्जा था। अब अशोक दीक्षित इस पर कब्जा करना चाह रहा था। उसने कृष्ण गोपाल के परिवार को हटाने के लिए प्रशासन में शिकायत दी।

नियमों के मुताबिक, जिन लोगों के पास पक्का घर है, वे ग्राम पंचायत की जमीन पर नहीं रह सकते। इसी को आधार बनाकर अशोक दीक्षित ने गोपाल कृष्ण के परिवार के खिलाफ शिकायत की। अशोक दीक्षित के परिवार ने प्रशासन से माँग की कि गोपाल कृष्ण का कब्जा हटवाया जाए, ताकि वह पट्टे में मिली जमीन का इस्तेमाल कर सकें। इसी शिकायत पर प्रशासन ने कार्रवाई की।

हनुमानगढ़ी के महंत ने स्वामी प्रसाद मौर्य को दी खुली चुनौती, कहा- माफी नहीं माँगी तो घुसने न देंगे: सपा नेता ने CP को पत्र लिख कहा- तलवार से किया हमला

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास के बीच तकरार जारी है। महंत ने मौर्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। साथ ही कहा है कि सपा नेता ने यदि माफी नहीं माँगी तो उन्हें किसी भी जिले में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वहीं मौर्य ने महंत समर्थकों पर तलवार और फरसा से हमले का आरोप लगाया है।

ताजा विवाद की शुरुआत लखनऊ में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बुधवार (15 फरवरी, 2023) को कथित हाथापाई से हुई है। दोनों एक दूसरे पर मारपीट का आरोप लगा रहे हैं। महंत राजू दास का कहना है कि जब वे टीवी चैनल के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे, उसी समय स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके समर्थक बाहर निकल रहे थे। महंत को देखते हुए उनलोगों ने अनर्गल टिप्पणी शुरू कर दी। राजू दास के अनुसार सपा नेता ने उन्हें भगवा आतंकी कहा। उन्होंने सपा नेता के समर्थकों पर हमले का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

बता दें कि कथित हाथापाई का का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें महंत राजू दास को पीछे से पकड़ कर घसीटते और धक्का देते हुए एक शख्स को देखा जा सकता है। महंत राजू दास ने आरोप लगाया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य गला दबाकर उनकी हत्या करना चाहते थे। उनके गुंडे कभी भी उनकी हत्या करवा सकते हैं।

वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया गया है कि राजू दास और उनके समर्थकों ने कार्यक्रम स्थल के बाहर उनपर तलवार, फरसा, भाले और लाठी से हमला किया। मौर्य ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर राजू दास और उनके समर्थकों पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। स्वामी प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए महंत राजू दास द्वारा पूर्व में दी गई धमकियों का जिक्र भी किया है। उल्लेखनीय है कि रामचरितमानस पर अनर्गल टिप्पणी किए जाने के बाद महंत राजू दास ने मौर्य का सिर कलम करने पर इनाम की घोषणा की थी।

स्वामी प्रसाद मौर्या ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि साधु वेश में आतंकियों की पहचान कर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार उनकी हत्या की साजिश करने वालों के साथ खड़ी है।

‘नेशनल दस्तक वाले शम्भू सिंह ने जान से मारने की धमकी दी, हमला किया’: दलित महिला पत्रकार ने कहा – चुप हैं ‘दलित इन्फ्लुएंसर्स’, सवर्ण कर रहे मदद

YouTube पर ‘National Dastak’ (नेशनल दस्तक) नाम का एक चैनल है, जो ‘बहुजनों’ के हित में काम करने का दावा करता है इस चैनल को चलाने वाले पत्रकार का नाम है शम्भू कुमार सिंह, जिन पर पूजा माथुर नाम की एक महिला पत्रकार ने धमकी देने और हमला करवाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। पूजा माथुर फ़िलहाल ‘जनहित आवाज़’ नामक यूट्यूब चैनल में सक्रिय हैं। शम्भू सिंह के यूट्यूब चैनल पर 70.7 लाख सब्सक्राइबर्स हैं।

अनुराग ओझा ने ‘नेशनल दस्तक’ चैनल पर पूजा माथुर को लेकर क्या कहा

दरअसल, पूजा माथुर का आरोप है कि ‘नेशनल दस्तक’ यूट्यूब चैनल पर अनुराग नाम के एक व्यक्ति को बुलाया गया था, जिसने उनके चरित्र को लेकर गलत टिप्पणी की। पूजा माथुर ने उक्त वीडियो का एक क्लिप भी ट्विटर पर शेयर किया, जिसमें अनुराग ओझा कहता दिख रहा है, “जबसे हमने पूछना शुरू किया न सवाल, तब से वही पत्रकार, दो-तीन ऐसे जाहिल पत्रकार वो आजकल हमारी शख्सियत बिगाड़ने खुद निकले हैं।”

आगे अनुराग ओझा इस वीडियो में कहता दिख रहा है, “निकले हैं कुछ जाहिल पत्रकार मेरी शख्सियत बिगाड़ने को, जिनके खुद के चेहरे मरम्मत माँग रहे हैं। एक का तो पूजा माथुर नाम है। ये दो-तीन चैनल इतना उपद्रव मचा रहे हैं…”। पूजा माथुर ने इस बयान को लेकर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई। आरोप है कि इसी के बाद शम्भू कुमार सिंह ने उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली। पूजा माथुर ने पूछा कि क्या यही उनकी पत्रकारिता है?

उन्होंने अपनी शिकायत में शम्भू कुमार सिंह के अलावा उनकी सहयोगी निधि रत्न का भी नाम लिया है। बता दें कि अनुराग ओझा का जो इंटरव्यू ‘नेशनल दस्तक’ पर आया था, उसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भला-बुरा कहने के साथ-साथ हिन्दू संगठनों की भी आलोचना की है। उसने कहा कि मुस्लिम सबसे बड़े देशभक्त हैं। अनुराग ओझा ने ये भी दावा किया कि रवीश कुमार के अलावा सारे पत्रकार ‘अम्बानी-अडानी’ के बच्चे हैं।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में भी पूजा माथुर ने लिखा है कि उन्हें शम्भू कुमार सिंह और निधि रत्न द्वारा जान से मारने व मरवाने की धमकी दी गई है। जिस इंटरव्यू को लेकर उन्हें शिकायत है, वो 16 जनवरी, 2023 को YouTube पर अपलोड किया गया था। इस वीडियो को अब तक 55 लाख से भी अधिक लोग देख चुके हैं। पूजा माथुर ने लिखा है कि अनुराग ओझा ने उनका नाम लेते हुए उनकी छवि पर सार्वजनिक टिप्पणी की है।

बकौल पूजा माथुर, बिना सत्यता जाँचे उन्हें बदनाम करने और उस वीडियो को यूट्यूब पर डालने के लिए अनुराग ओझा और ‘नेशनल दस्तक’ के खिलाफ वो सख्त कार्रवाई की माँग करती हैं। उन्होंने शिकायत की कॉपी ट्विटर पर डालते हुए ‘दिल्ली महिला आयोग’ और इसकी अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के अलावा दिल्ली पुलिस को भी टैग किया। उनका कहना है कि इसी शिकायत को दर्ज कराने के बाद उन्हें हत्या की धमकियाँ मिलीं।

पीड़िता ने पुलिस पर भी लगाया टालमटोल का आरोप, कहा – ब्राह्मण-दलित करता रहता है शम्भू सिंह

‘नेशनल दस्तक’ और शम्भू सिंह के बारे में बता दें कि ये यूट्यूब पर मोदी विरोधी प्रोपेगंडा चलाने में व्यस्त रहते हैं। गौतम अडानी के खिलाफ भी इस चैनल पर जम कर कंटेंट्स चलाए गए। ‘रुबिका लियाकत जाएँगी जेल’, ‘यादवों ने हिला दी मोदी की कुर्सी’, ‘अपने ही जाल में फँसी BJP’, ‘मनु मीडिया को बुलडोजर मुबारक’, ‘क्या रुबिका अपनाएँगी हिन्दू धर्म’, ‘ब्राह्मण ने जब संघ से किया विद्रोह’ – ये वीडियो ताज़ा कंटेंट्स हैं इस चैनल के।

इस यूट्यूब चैनल पर अक्सर बच्चों से बात करते हुए भी मोदी विरोधी चीजें बुलवाई जाती हैं। पूजा माथुर ने कहा है कि शम्भू कुमार सिंह ने उन्हें धमकाते हुए कहा था कि तेरी इतनी हिम्मत तू पुलिस को बुलाएगी, तेरी शकल बिगाड़ दूँगा, तेरी औकात क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों-पिछड़ों की बात करने के नाम पर वो जातिवाद करता है। पूजा माथुर ने कहा कि उन पर हमला भी किया गया। ये लोग ब्राह्मण-दलित का एजेंडा चलाते हैं।

पूजा माथुर खुद दलित समाज से आती हैं। अनुराग ओझा के बारे में ये भी बता दें कि वो चोटी रखता है और रामनामी कपड़े पहनता है। इसी वेशभूषा में वो हिन्दू विरोधी बातें करता है। पूजा माथुर ने 26 जनवरी, 2023 को दरियागंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि शम्भू कुमार सिंह ने उन्हें धमकाते हुए कहा, “तेरा हुलिया बिगाड़ता हूँ, तुझे बड़ी शिकायत करने की पड़ी है।” उन्होंने कहा कि शम्भू को पता है कि वो दलित समुदाय से आती हैं, इसके बावजूद वो और उनके कर्मचारी उन्हें पीटने के लिए चढ़ गए और उनके कैमरामैन ने उन्हें बचाया।

पूजा माथुर का कहना है कि निधि रत्न ने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ भी दी हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत की कॉपी DCP को भी भेजी है, लेकिन अब तक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज नहीं की गई है और CCTV फुटेज चेक करने के आधार पर FIR दर्ज करने की बात की जा रही है, टाल-मटोल कर के बरगलाया जा रहा है। पूजा माथुर ने कहा कि ब्राह्मण-दलित कर के पत्रकारों को गालियाँ दिलवाने वाला शम्भू सिंह यही सब कर के फंडिंग उठाता है और इससे दलितों की बात करने वाले अन्य चैनलों का भी नाम खराब होता है।

पूजा माथुर ने यहाँ तक कहा कि अगर उस दिन उनके कैमरामैन धर्मेंद्र उनके साथ न होते, तो वो इस तरह सबके सामने मौजूद नहीं होतीं। पूजा ने कहा कि उन्होंने शम्भू कुमार सिंह का जाति प्रमाण पत्र तो नहीं देखा है, लेकिन वो खुद को दलित-OBC समाज का बताते हैं। हालाँकि, उन्होंने पत्रकारों के पूछने पर ये भी कहा कि उन्होंने ये भी सुना है लोगों से कि शम्भू भूमिहार-ब्राह्मण समाज से आते हैं। पूजा ने DWC को भी सूचना दे दी है कि उनकी शिकायत पर अब तक FIR नहीं हुई है।

पूजा माथुर ने बताया कि उनके चैनल ‘जनहित आवाज़’ का संचालन भी शम्भू कुमार सिंह के ‘नेशनल दस्तक’ के दफ्तर से ही होता है, ऐसे में शम्भू को पता था कि पूजा माथुर कौन हैं लेकिन उन्होंने अनुराग ओझा को टोका तक नहीं। उन्होंने कहा कि ये रिकॉर्ड किया हुआ इंटरव्यू था, जिसमें उनका नाम एडिट भी किया जा सकता था। पूजा का आरोप है कि पुलिस जब इन्क्वायरी कर के चली गई, उसके बाद शम्भू ने उन्हें धमकाते हुए कहा, “तेरी दो कौड़ी की औकात है, तू मेरा क्या बिगाड़ लेगी? मेरे पीछे बहुत नेता लोग हैं।”

उन्होंने कहा कि जहाँ अनुराग ओझा ने कहा कि ‘चेहरा मरम्मत माँगता है’, वहीं शम्भू कुमार सिंह ने ‘मार-मार कर चेहरा बिगाड़ने’ की बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कैमरामैन पर जातिसूचक गाली देने का मामला बिठाते हुए SC-ST एक्ट लगा दिया गया है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि दरियागंज थाने में उन्हें हमेशा शाम को बुलाया जाता है और रात के समय उन्हें घर लौटना होता है, कोई उन्हें ड्रॉप तक नहीं करता है।

ऑपइंडिया ने पीड़िता पूजा माथुर से की बातचीत, ‘दलित इन्फ्लुएंसर्स’ की चुप्पी पर उठाए सवाल

ऑपइंडिया ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पीड़िता पूजा माथुर से गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को बातचीत की, जिन्होंने बताया कि अब तक FIR नहीं दर्ज की गई है। पूजा आज DCW के पास भी जाने वाली थीं, लेकिन 2 दिनों से तबीयत खराब होने के कारण वो न तो महिला आयोग के पास जा पाई हैं और न ही थाना। उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

उन्होंने हमें बताया कि उनकी शिकायत पर तो पुलिस वाले बैठे रहे, लेकिन जैसे ही शम्भू और निधि ने शिकायत दी, पुलिस एक्टिव हो गई और कहने लगी कि अब दोनों तरफ की बातें सुन कर आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही उन्हें ये भी कहा गया कि अगर वो शिकायत वापस ले लेती हैं तो उधर से भी शिकायत वापस ले ली जाएगी। थाने में निधि ने माफ़ी की भी बात की, लेकिन पूजा का कहना है कि अति होने पर ही उन्होंने शिकायत दी थी और माफ़ी देने का अर्थ इसकी गारंटी नहीं है कि वो आगे भी ऐसी हरकत नहीं करेंगे।

क्या सोशल मीडिया पर दलितों के हित की बात करने का दावा करने वाले मीडिया संस्थान या इन्फ्लुएंसर्स में से किसी ने अब तक उनका साथ दिया है? इस सवाल के जवाब में पूजा माथुर ने बताया – एक भी नहीं। दलित होने के बावजूद दलित चिंतक और संस्थान उनका साथ नहीं दे रहे और प्रभावशाली होने के कारण शम्भू सिंह के विरुद्ध कुछ नहीं बोल रहे। उनका कहना है कि शम्भू सिंह ने उन्हें पहले ही धमकी दी थी कि वीडियो हटवा कर दिखा दे।

हालाँकि, इस दौरान शुभम शर्मा सहित कई ऐसे पत्रकारों ने पीड़िता पूजा माथुर के पक्ष को उठाया और ट्वीट किया, जो सवर्ण समाज से आते हैं। पूजा माथुर ने इसकी स्वीकृति में कहा कि जिन्हें हम अपने खिलाफ समझते थे और जिनके विरुद्ध बातें करते थे, आज वही हमारा साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन ‘दलित इन्फ्लुएंसर्स’ से अच्छे तो वो सवर्ण लोग हैं, जो आज उनकी मदद कर रहे हैं। ‘नेशनल दस्तक’ या शम्भू कुमार सिंह की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।