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बीवी को तीन तलाक देकर किया घर से बाहर, अब्बू ने 15 साल की बेटी को महीनों तक बनाया हवस का शिकार: बच्ची के गर्भवती होने पर हुआ खुलासा, यूपी के मुरादाबाद का मामला

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक 50 वर्षीय शख्स द्वारा अपनी 15 वर्षीय बेटी के साथ कई महीनों तक रेप किए जाने का शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। आरोपित ने इससे पहले अपनी बीवी को तीन तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया था।

बेटी का 3 महीने तक रेप करता रहा आरोपित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने बीते रविवार (21 सितंबर 2025) को अपनी माँ के साथ थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया है कि उसका अब्बू करीब 3 महीने से बार-बार उसके साथ रेप कर रहा था और शनिवार देर रात भी उसके साथ रेप किया था।

बीते शनिवार को अपने अब्बू के सोने के बाद पीड़िता ने अपनी अम्मी को फोन लगाया और उसके साथ हो रहे अमानवीय बर्ताव की सारी जानकारी दी। पीड़िता ने अपनी अम्मी को बताया कि वह प्रेग्नेंट भी हो गई थी। इसके बाद रविवार को पीड़िता ने अम्मी के साथ थाने जाकर इस मामले की शिकायत दी है।

बीवी को दो बार दिया तीन तलाक

आरोपित ने बेटी के साथ दरिंदगी करने से पहले अपने बीवी को तीन तलाक देकर घर से बाहर कर दिया था। पीड़िता की माँ ने पुलिस को बताया कि उसका शौहर आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। शौहर ने कुछ समय पहले उसे पहली बार तीन तलाक दिया था लेकिन कुछ समय बाद रिश्तेदारों ने हलाला कराकर दोनों का निकाह करा दिया था।

करीब 3 महीने पहले शख्स ने एक बार फिर अपनी बीवी को तीन तलाक दिया था और घर से बाहर निकाल दिया था। आरोपित के 6 बच्चे हैं और उसने बच्चों अपने पास रख लिए। आरोपित की सबसे बड़ी बेटी की उम्र करीब 15 साल है।

जब पीड़िता की अम्मी घर से चली गई तो एक दिन उसका अब्बू नशे में धुत होकर आया और खाना खाने के बाद बेटी के साथ रेप किया। जब पीड़िता रोई-चिल्लाई तो आरोपित ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया।

बेटी को दी जान से मारने की धमकी

पीड़िता ने बताया कि उसका अब्बू आए दिन उसके साथ रेप करता था और धमकी भी देता था। पीड़िता ने बताया कि अब्बू ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को इस बारे में कुछ भी बताया तो वह उसके छोटे भाई की गर्दन चाकू से काट देगा। आरोपित ने 8वीं कक्षा में पढ़ रही पीड़िता का स्कूल जाना भी बंद करा दिया था।

आरोपित ने बच्ची की अम्मी को भी धमकी दी थी। आरोपित ने उससे कहा था कि अगर वह पुलिस में शिकायत देगी तो उसके बच्चे की गर्दन काट देगा। वहीं, पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है और मामले की जाँच की जा रही है।

रिकॉर्ड ₹1.14 लाख पर पहुँची 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत, 5 साल में आया 112% का उछाल: जानें क्यों आसमान छू रहे हैं भाव?

23 सितंबर 2025 को सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गईं है। 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,14,480 प्रति 10 ग्राम बिक रहा है जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,04,950 प्रति 10 ग्राम है। 18 कैरेट सोने की कीमत ₹85,900 प्रति 10 ग्राम हो गई है।

भारत में सोने की कीमतों में 2024 की शुरुआत से ही उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये विश्व में चल रहे तमाम युद्धों, आर्थिक अनिश्चितताओं, ट्रम्प के टैरिफ और अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन सहित कई वजहों से बढ़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद विश्वस्तर पर सोने की कीमतों में भारी उछाल देखा गया।

5 साल पहले की तुलना करे, तो 2020 से सोने की कीमतों में 112% की वृद्धि दर्ज की गई। 19 सितंबर, 2020 में, मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के मुताबिक सोने (24 कैरेट) की कीमत 51,619 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। यह कीमत अब ₹1,09,388 तक पहुँच गई है। एक साल पहले यानी 2024 में यह कीमत ₹72,874 थी। पिछले पाँच वर्षों में, COVID-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के लगाए गए टैरिफ और दूसरी राजनीतिक-आर्थिक अनिश्चितताओं जैसे कारकों ने वैश्विक स्तर पर और भारत में सोने की कीमतों को प्रभावित किया है। बढ़ती कीमतों के बावजूद इसकी माँग में कोई कमी नहीं आई है।

पिछले 20 वर्षों की बात करें, तो सोने की कीमतें 1200% बढ़ी हैं। 2005 में ₹7,638 से बढ़कर 2025 (जून तक) में ₹1,00,000 से अधिक हो गई हैं, जिससे यह पीली धातु 2025 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली संपत्ति और एक विश्वसनीय धरोहर बन गई है।

निवेशकों को फायदा, खुदरा विक्रेताओं को नुकसान

सोने की कीमत में 2020 से विश्वस्तर पर 17% और भारत में 20% की वृद्धि दर्ज की गई है। इन 5 सालों में निवेशकों को सोने की बढ़ती कीमतों से लाभ हुआ है। लेकिन खुदरा विक्रेताओं का कारोबार धीमा चल रहा है, क्योंकि गैर-जरूरी खरीदारी और आभूषणों की बिक्री में गिरावट आई है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव खुदरा विक्रेताओं के लिए इन्वेंट्री प्लानिंग को मुश्किल बना देता है। कई निवेशक यह सोच रहे हैं कि उन्हें अपना सोना रखना चाहिए या बेच देना चाहिए।

भारत में सोने से भावनात्मक रिश्ता

हमारे देश में सोने को एक निवेश की तरह नहीं लिया जाता, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व भी है। यह कीमती धातु प्राचीन काल से ही महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का स्रोत रही है। यह शादियों और दूसरे शुभअवसर का एक अनिवार्य हिस्सा है। विश्व स्वर्ण परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल सोने की माँग में भारतीय परिवारों की हिस्सेदारी एक-चौथाई है।

भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है। हालाँकि, पिछले साल भारत में सोने की खपत 802.8 टन तक पहुँच गई, जो चीन के 511.4 टन की खपत से अधिक थी। दोनों देशों में आभूषण के रूप में सोने की सबसे अधिक खपत होती है। भारतीय परिवारों के पास लगभग 24,000 टन सोना होने का अनुमान है, जो वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कुल सोने के भंडार से भी अधिक बताया जाता है। भारत में सोने की लगभग एक-तिहाई बिक्री शादियों और दशहरा व दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान होती है।

हालाँकि, सोने की बढ़ती कीमतों ने घरेलू स्तर पर इसकी माँग को प्रभावित किया है। 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की माँग 395 टन दर्ज की गई, और 2025 की दूसरी तिमाही में यह घटकर 341 टन रह गई। हालाँकि, आगामी त्योहारों और शादियों के मौसम के साथ, सोने की माँग बढ़ने की संभावना है। सोने की बढ़ी हुई कीमतों को ध्यान में रखते हुए ग्राहक बहुमूल्य और अर्ध-कीमती पत्थरों से जड़े 18 कैरेट और 14 कैरेट के सोने के आभूषण खरीदने पर विचार कर रहे हैं।

स्टालिन सरकारी धन से बनवाना चाहते थे करुणानिधि की मूर्ति, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार: कहा- ‘अपने नेता की महिमा के लिए पब्लिक के पैसे का उपयोग क्यों?’

तमिलनाडु सरकार की ओर से दिवंगत मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की प्रतिमा को स्थापित करने के लिए सार्वजनिक धन के उपयोग की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया।

यह प्रतिमा तिरुनेलवेली जिले के वलियूर डेली वेजिटेबल मार्केट के मुख्य द्वार के पास लगाई जानी थी। सरकार ने इसके लिए एक ब्रॉन्ज की मूर्ति और नाम पट्टिका लगाने की अनुमति माँगी थी।

सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ जस्टिस विक्रम नाथ और प्रशांत कुमार मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा, “यह अनुमति योग्य नहीं है। आप अपने पूर्व नेताओं की महिमा के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग क्यों कर रहे हैं?”

अदालत ने तमिलनाडु सरकार को अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने और जरूरत पड़ने पर मद्रास हाईकोर्ट से राहत प्राप्त करने की सलाह दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमा लगाने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।

क्या था हाईकोर्ट का पहले का फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही यह निर्णय दिया था कि सरकार सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमा लगाने की अनुमति नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रतिमाएँ अक्सर यातायात जाम और नागरिकों को असुविधा का कारण बनती हैं।

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा, “सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमा लगाने की अनुमति देने से भारी ट्रैफिक और अन्य समस्याएँ होती हैं, जिससे आम जनता को कठिनाई होती है। संविधान के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा राज्य का कर्तव्य है।”

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया था कि सरकार को राज्य भर में ‘लीडर्स पार्क’ की स्थापना करनी चाहिए, जहाँ नेताओं की प्रतिमाएँ लगाई जा सकें और युवाओं को उनके विचारों के बारे में बताया जा सके।

हालाँकि तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ से यह अनुरोध किया कि क्या वलियूर सब्जी मंडी के प्रवेश द्वार पर प्रस्तावित आर्च (तोरणद्वार) को अनुमति दी जा सकती है क्योंकि इसे लेकर याचिका में विशेष रूप से चुनौती नहीं दी गई थी।

करुणानिधि की राजनीतिक विरासत

एम करुणानिधि द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्हें ‘कलाईनार’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में पाँच बार सेवा दी। 1969- 71, 1971- 76, के बाद 1989- 91, 1996- 2001 और 2006- 2011 के कार्यकाल में उन्होंने अपनी सेवा दी। 7 अगस्त 2018 में 94 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ।

यूपी में ‘ऑपरेशन कलावा’ शुरू, लव जिहाद की पीड़िताओं की ‘घर वापसी’ कराएगी ‘नवदुर्गा टास्क फोर्स’: VHRP ने 9 महिलाओं को दी ट्रेनिंग, जानें क्या है 5 सूत्री एजेंडा

उत्तर प्रदेश में बढ़ते लव जिहाद और धर्मांतरण के मामलों पर लगाम लगाने के लिए, विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने नवरात्रि के मौके पर ‘ऑपरेशन कलावा‘ नाम की एक नई मुहिम शुरू की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य धर्मांतरण और लव जिहाद का शिकार हुई बहनों को बचाना और उनकी ‘घर वापसी’ कराना है।

इसके लिए, संगठन ने ‘नवदुर्गा टास्क फोर्स‘ का गठन किया है और एक धर्मांतरण काउंसलिंग सेंटर भी खोला है। यह पहल उन बहनों को सशक्त बनाएगी, जो धोखे का शिकार हुई हैं और उन्हें वापस सनातन धर्म से जोड़ेगी।

लव जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ ‘नवदुर्गा टास्क फोर्स’

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि ‘ऑपरेशन कलावा’ के तहत 9 महिलाओं की एक टीम बनाई गई है, जिसे ‘नवदुर्गा टास्क फोर्स’ नाम दिया गया है। इन महिलाओं को विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे पूरे राज्य में काम कर सकें।

यह टीम लव जिहाद और धर्मांतरण की शिकार पीड़िताओं की पहचान करके उन्हें जागरूक करेगी। इस मुहिम का लक्ष्य हजारों सनातनी बहनों को जोड़ना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विश्व हिंदू परिषद की प्रदेश अध्यक्ष रिंकी गुप्ता ने कहा कि यह उनकी बहनों को बचाने की लड़ाई है और वे धर्मांतरण के नाम पर बर्बाद हुए जीवन को वापस लाएँगी।

जागरूकता और मदद के लिए पाँच बिंदु

इस अभियान में टास्क फोर्स 5 मुख्य बिंदुओं पर काम करेगी ताकि लोगों को लव जिहाद से बचाया जा सके। यह टीम लोगों को नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल या फेक आईडी से सतर्क रहने की सलाह देगी। यह टीम अनजान लोगों के साथ निजी जानकारी शेयर करने से बचने के लिए जागरूकता फैलाएगी।

यह टीम धर्म से जुड़े अजीब सवालों पर सतर्क रहने की सलाह देगी। यदि कोई व्यक्ति आपके धर्म और संस्कृति के बारे में अजीब सवाल पूछता है, तो सावधान रहने की सलाह दी जाएगी। इसके अलावा, अगर कोई धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालता है, तो डरने के बजाय परिवार के बड़ों से सलाह लेने का सुझाव दिया जाएगा। लव जिहाद या धर्मांतरण का शिकार होने पर तुरंत विश्व हिंदू रक्षा परिषद से संपर्क करने का आग्रह किया जाएगा।

इस अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि उन बहनों की मदद करना भी है जो इन साजिशों में फँस गई हैं। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के हेल्पलाइन नंबर पर अब तक 5 हजार से ज़्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं, जिनमें से 1 हजार का समाधान हो चुका है। इससे यह साफ होता है कि यह पहल समाज में एक बड़ी जरूरत को पूरा कर रही है।

ज्ञानवापी से लेकर हल्द्वानी तक जिस तौकीर रजा के बयान से भड़की हिंसा, अब उसने ‘I love Muhammad’ पर भी उकसाया: जानिए कौन है ये मौलाना, योगी सरकार को 1 हफ्ते की दे रहा धमकी

देशभर में ‘I Love Muhammad’ विवाद को लेकर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस विवाद ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी कर दी है। इन प्रदर्शनों को हवा देने में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा जैसे मुस्लिम नेताओं की भूमिका सामने आई है। ये नेता कथित तौर पर शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर सड़कों पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ उतारते हैं, जिसके बाद हिंसा, पथराव और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाए जाते हैं।

कौन हैं तौकीर रजा?

तौकीर रजा खान उत्तर प्रदेश के बरेली का एक मुस्लिम नेता और मौलाना हैं। वह अहमद रजा खान के परपोता हैं, जो बरेलवी आंदोलन का संस्थापक था। तौकीर रजा खुद को मुस्लिमों का एक बड़ा पैरोकार मानता है।

तौकीर रजा इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) का अध्यक्ष है, जो एक राजनीतिक और मजहबी संगठन है। तौकीर रजा ज्यादातर अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहता हैं, जो अक्सर विवादों का कारण बनता हैं। ‘I Love Muhammad’ मामले में तौकीर रजा ने कहा है कि सरकार के पास एक हफ्ते का समय है, एक हफ्ते के बाद हम सड़कों पर प्रदर्शन के लिए उतर आएँगे। इसके अलावा, तौकीर रजा ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की कुल आबाद मिला लें, तो भी भारत में मुस्लिमों की आबादी की तुलना नहीं कर पाएँगे। अगर मुसलमान सड़कों पर आ गया तो सरकार मानने को मजबूर हो जाएगी।

पहले के विवाद: ‘जेल भरो’ आंदोलन से ‘हिंदू राष्ट्र’ की चुनौती तक

तौकीर रजा का विवादों से पुराना नाता है। इससे पहले भी तौकीर रजा ने कई बार अपने समर्थकों को भड़काकर देश में विरोध प्रदर्शन करवाए हैं। ज्ञानवापी ढाँचे में पूजा शुरू होने के बाद तौकीर रजा ने ‘जेल भरो’ आंदोलन की घोषणा की थी। बरेली में तौकीर रजा के आह्वान पर जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों की भारी भीड़ सड़कों पर आई और हिंसा हुई। इस दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पुलिस पर पथराव किया और कुछ लोगों के साथ मारपीट भी हुई।

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने को लेकर हुई हिंसा के बाद भी तौकीर रजा ने भड़काऊ बयान दिए थे। तौकीर रजा ने कहा था, “अगर कोर्ट संज्ञान नहीं ले रहा है, तो हम अपनी हिफाजत खुद करेंगे। हमें कानूनी अधिकार है कि अगर हमारे ऊपर हमला होता है तो हम उसको जान से मार दें।” तौकीर रजा ने हिंदू राष्ट्र की माँग को लेकर भी विवादित बयान दिया था। तौकीर रजा ने कहा था कि अगर हिंदू राष्ट्र की माँग करने वालों पर सख्ती नहीं की गई, तो कहीं मुस्लिम इस्लामिक मुल्क की माँग न करने लगें।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर कट्टरपंथ को बढ़ावा

तौकीर रजा जैसा नेता अक्सर अपने विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बताता हैं, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग होते हैं। ‘I Love Muhammad’ के मामले में भी यही हुआ। तौकीर रजा के भड़काऊ बयानों के बाद कानपुर, काशीपुर और उन्नाव में मुस्लिमों की भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किए। पुलिस पर हमला हुआ, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नफरत भरे नारे लगाए गए।

यह दिखाता है कि इस तरह के आह्वान का मकसद केवल विरोध जताना नहीं, बल्कि अराजकता फैलाना और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है। इस तरह की राजनीति देश की एकता और भाईचारे के लिए खतरा है।

ईसाई राष्ट्र में क्यों लगाई फर्जी हिंदू भगवान की मूर्ति: ट्रंप के नेता की US में हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर टिप्पणी पर बवाल, हिंदू संगठनों ने रिपब्लिकन पार्टी से की कार्रवाई की माँग

अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा पर रिपब्लिकन पार्टी के नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी कहे जाने वाले अलेक्जेंडर डंकन की टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

यह प्रतिमा शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित की जा रही है, जिसकी ऊँचाई 90 फीट है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ नाम दिया गया है। डंकन ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘फर्जी हिंदू भगवान’ की मूर्ति बताया है।

डंकन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हम टेक्सास में इस मूर्ति को क्यों बनने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं।” उन्होंने बाइबिल का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर के अलावा किसी और देवता की पूजा करना और मूर्तियाँ बनाना गलत है। डंकन के इस बयान ने अमेरिकी हिंदू समुदाय के गुस्से को बढ़ा दिया है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की और इसे हिंदू-विरोधी तथा भड़काऊ करार दिया। संगठन ने रिपब्लिकन पार्टी से माँग की है कि वे डंकन के खिलाफ कार्रवाई करें, क्योंकि उनके बयान से न केवल धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, बल्कि यह अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के भी खिलाफ है, जो हर धर्म को समान स्वतंत्रता देता है।

सोशल मीडिया पर भी डंकन को कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। एक यूजर ने लिखा कि किसी और की आस्था को झूठा कहना आजादी नहीं है।

डॉक्टर ट्रेसी नाम की यूजर ने कहा, “हिंदू धर्म हिंसा नहीं सिखाता, बल्कि ईश्वर के अलग-अलग स्वरूपों के जरिए सद्गुणों को बढ़ावा देता है।” वहीं, जॉर्डन क्राउडर नाम के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने डंकन को याद दिलाया, “वेद ईसा मसीह के जन्म से लगभग 2000 साल पहले लिखे गए थे और ईसाई धर्म पर उनका असर साफ दिखाई देता है।”

डंकन के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा हो रहा है और लोगों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग भी की है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर निशाना भी साधा है।

GST 2.0 की धमाकेदार शुरुआत, नवरात्रि के पहले ही दिन मारुति-हुंडई-टाटा ने कार बिक्री में तोड़े रिकॉर्ड: छोटी कारों की माँग 50% तक बढ़ी

देश में 22 सितंबर 2025 से GST 2.0 लागू होने के साथ ही ऑटो सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। नवरात्रि के पहले दिन कार खरीदारों ने शोरूमों का रुख किया, जिससे मारुति सुजुकी, हुंडई और टाटा मोटर्स ने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। बीते कई सालों में ये कार बाजार का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है।

मारुति सुजुकी ने नवरात्रि के पहले दिन 80,000 कस्टमर इन्क्वायरी और 30,000 कार डिलीवरी के साथ 35 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मार्केटिंग और सेल्स) पार्थो बनर्जी ने कहा, “पिछले साल की तुलना में इस साल की प्रतिक्रिया बेहद मजबूत रही है। खासकर स्मॉल कारों की माँग में लगभग 50% की वृद्धि देखी गई है। कुछ मॉडल जल्दी ही स्टॉक से बाहर हो सकते हैं।”

मारुति रोजाना 15,000 बुकिंग्स दर्ज कर रही है, जो सामान्य से 50% ज्यादा है। 18 सितंबर से कीमत कटौती के बाद अब तक 75,000 बुकिंग्स हो चुकी हैं।

हुंडई मोटर्स ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी ने एक ही दिन में 11,000 डीलर बिलिंग्स दर्ज कीं, जो पिछले पाँच सालों में उनका सबसे बड़ा एक दिन का रिकॉर्ड है।

हुंडई के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तरुण गर्ग ने कहा, “यह मजबूत त्योहार के माहौल और ग्राहकों के भरोसे का स्पष्ट प्रमाण है। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी माँग लगातार बनी रहेगी।”

टाटा मोटर्स ने भी नवरात्रि के पहले दिन 10,000 कारों की डिलीवरी और 25,000 से ज्यादा इन्क्वायरी दर्ज की। कंपनी ने GST छूट के साथ अतिरिक्त ऑफर्स भी दिए, जिससे ग्राहक 2 लाख रुपये तक बचा सकते हैं। टाटा की सबसे सस्ती कार टिएगो की कीमत में 75,000 रुपए की कटौती हुई, जिसकी शुरुआती कीमत अब 4.57 लाख रुपए है।

सेकंड हैंड कारों को खरीदने-बेचने का काम करने वाली कार्स24 कंपनी के फाउंडर और सीईओ विक्रम चोपड़ा ने भी आँकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि हमने 4 साल में सबसे ज्यादा व्यापार किया। 5000 से ज्यादा कारें हमने चेक (खरीदने के लिए) की। दोपहर 2 बजे तक ही हमनें 400% ज्यादा कारें डिलीवर भी कर दी और पूरे दिन का काम बाकी है। अभी ये तो नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत है। आगे के दिन बेहद उत्साहजनक रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि सरकार ने GST 2.0 के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर 5% और 18% कर दिया है, जिससे छोटी कारों (4 मीटर से कम लंबाई, 1,200 सीसी पेट्रोल या 1,500 सीसी डीज़ल इंजन) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो गया। बड़े मॉडल्स पर 40% टैक्स लागू हुआ, जो पुराने 28%+कंपन्सेशन सेस से कम है। इस बदलाव ने कारों की कीमतें कम कीं और ग्राहकों का उत्साह बढ़ाया।

GST 2.0 और नवरात्रि के त्योहारी माहौल ने ऑटो सेक्टर को बड़ा बूस्ट दिया। छोटी कारों की कम कीमतों ने ग्राहकों को आकर्षित किया और मारुति, हुंडई, टाटा जैसे भरोसेमंद ब्रांड्स की डिमांड बढ़ी। डीलरशिप पर भीड़ और इन्क्वायरी में उछाल से साफ है कि यह फेस्टिव सीजन ऑटो कंपनियों के लिए शानदार रहा। आने वाले दिनों में भी यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

‘भगाओ इस बिहारन को, मैडम बीड़ी-दारू पीती है, मिथिला से है…’: DUSU की संयुक्त सचिव दीपिका झा को गाली देने वाले कौन, ABVP नेता ने कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI को बताया जिम्मेदार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली बिहार की दीपिका झा को इंस्टाग्राम पर ट्रोल किया जा रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ दिल्ली साइबर पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। साथ ही दीपिका झा ने इसके पीछे NSUI का हाथ बताते हुए करारा जवाब दिया है।

इसकी जानकारी खुद दीपिका झा ने एक वीडियो जारी कर दी। वीडियो में दीपिका झा ने कहा, “इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर बदतमीजी की जा रही है। बिहार से जुड़ा ‘बिहारन’ शब्द को गाली की तरह उपयोग किया जा रहा है। तमाम कमेंटबाजों के खिलाफ FIR हो चुकी है। जो-जो लिंक है इस FIR से सबके पास समय से सूचना पहुँच जाएगी।”

दीपिका झा ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) पर निशाना साधते हुए कहा, “पूरे NSUI को कह देना चाहती हूँ कि अब करो तुम कमेंट। अब मैं FIR-FIR खेलुँगी। एक लड़की को नीचा दिखाने के लिए तुम इस हद तक गए। तुम चाहते हो कि लड़की शांत होकर घर बैठ जाए। लेकिन नहीं, मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूँ। मैं आप सभी की टाइम-टाइम पर औकात याद दिलाती रहूँगी कि मैं क्या हूँ।”

उन्होंने राज्य के नाम पर बदतमीजी झेलने वालों के साथ खड़े रहने की भी बात कही, “किसी के भी चमचे हो अगर इस तरह का कमेंट दोबारा करा जाएगा तो मैं सदैव खड़ी रहूँगी अपने समाज के साथ, अपने राज्य के साथ और सिर्फ अपने राज्य के साथ ही नहीं अगर किसी को भी उसके राज्य के नाम को गाली की तरह इस्तेमाल किया जाएगा तो मैं सदैव उन लोगों के साथ खड़ी रहूँगी।”

दीपिका झा बताती हैं कि उन्होंने इंस्टाग्राम में पर बदतमीजी के खिलाफ दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत कर दी है। वह कहती हैं कि इस शिकायत में कुछ लोगों का नाम शामिल किया गया है, जिनके पास जल्द ही पुलिस का नोटिस पहुँच जाएगा।

इंस्टाग्राम पर लगातार किया जा रहा ट्रोल

दीपिका झा को DUSU चुनाव में संयुक्त सचिव पद पर खड़े होने के साथ उस पद पर जीत हासिल करने तक भी इंस्टाग्राम पर लगातार ट्रोल किया गया। चुनाव अभियान में दीपिका ने कई वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए, जिस पर ट्रोलर्स ने भद्दे-भद्दे कमेंट्स किए हैं। यहाँ तक की उनके राज्य और उनकी पहचान मिथिला को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट में एक ट्रोलर ने लिखा, “भगाओ इस बिहारन को।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “मिथिला से है या पूर्वांचल से है। मतलब वोट के लिए कुछ भी।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

दीपिका झा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की तो एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा, “मैडम की पार्टी की सरकार और मैडम उनसे ही लड़ रही।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

यहाँ तक की दीपिका झा के चरित्र को मैला करने की भी कोशिश की गई। ट्रोलर्स ने लिखा, “यह दीपिका झा सिगरेट बीड़ी दारू सब पीती है। स्टूडेंट होने के बाद भी और फिर छात्र अध्यक्ष का इलेक्शन लड़ती है और शरीफ होने का ड्रामा करती है।”

NSUI की भद्दी राजनीति

इंस्टाग्राम ट्रोल्स के पीछे दीपिका झा ने NSUI का हाथ बताया है। दीपिका झा ने NSUI को चेतावनी भी दी कि अगर इस बार वो FIR-FIR खेलेंगी। साथ ही दीपिका झा ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि इंस्टाग्राम पर भद्दे कमेंट्स करने वाले NSUI के ही ‘चमचे’ हैं।

यह पहली बार नहीं है जब NSUI ने ABVP को नीचा दिखाने के लिए किसी महिला का अपमान किया हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में भी NSUI ने भद्दी राजनीति खेली। लगातार ABVP के उम्मीदवारों को निशाना बनाकर बदनाम करने की कोशिश की।

चुनाव प्रचार के दौरान दीपिका झा का एक वीडियो भी वायरल करवाया और दावा किया कि वो सिगरेट पीती हैं। NSUI ने कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते हुए दिल्ली चुनाव में ‘वोट चोरी’ के भी आरोप लगाए थे। अब ‘बिहारन’ नाम से गाली दी जा रही है।

लेकिन फिर भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP तीन पदों पर परचम लहराया। DUSU के अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर ABVP ने जीत हासिल की। DUSU के नए अध्यक्ष बने आर्यन मान के खिलाफ भी NSUI ने नैगेटिव कैंपने चलाया था।

काशीपुर में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर मारा: ‘I Love Muhammad’ को लेकर उत्तराखंड में 400-500 की भीड़ ने किया बवाल, साजिशकर्ता समेत 7 गिरफ्तार

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के काशीपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ जुलूस के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साजिशकर्ता नदीम अख्तर समेत 7 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मणिकांत मिश्रा ने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हालात की जानकारी दी गई है।

काशीपुर में हिंसा कैसे शुरू हुई

21 सितंबर की रात काशीपुर के अलीखान इलाके में हिंसा की शुरुआत हुई। खबरों के मुताबिक, नदीम अख्तर ने करीब 400-500 इस्लामी कट्टरपंथियों के साथ मिलकर एक सभा आयोजित की थी। सभा के बाद, भीड़ ने अचानक बैनर और पोस्टरों के साथ बगैर पूर्व अनुमति के जुलूस निकाला। उन्होंने ‘आई लव मुहम्मद’ के नारे लगाए और वाल्मीकि बस्ती से होते हुए शहर की ओर बढ़ने लगे।

जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो भीड़ हिंसा पर उतारू हो गई। इनलोगों ने पुलिसकर्मियों पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया। डायल-112 लिखी गाड़ी के शीशे और एक दूसरी पुलिस वाहन के बोनट को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी।

एसएसपी मिश्रा की निगरानी में आरोपितों की तलाश में छापेमारी और घर-घर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। इलाके में पीएसी तैनात की गई है और आरोपितों को पकड़ने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।

स्रोत-उत्तराखड पुलिस

पुलिस के अनुसार, एसएसआई अनिल जोशी की शिकायत पर कोतवाली काशीपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। ऑपइंडिया को एफआईआर की एक प्रति मिली है। एसएसआई जोशी ने अपनी शिकायत में नदीम अख्तर को मुख्य आरोपी बनाया है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 190, 191(2), 191(3), 232, 121(1), 132, 221, 324(3), 351(2) और 352 के तहत दर्ज की गई है।

एसएसआई ने अपनी शिकायत में बताया है कि कैसे भीड़ ने लाठी-डंडे लेकर पुलिसकर्मियों को घेर लिया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाला। शिकायत में सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का भी जिक्र किया गया है।

एसएसआई ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें बसफोड़ान पुलिस चौकी के प्रभारी एसआई मनोज धोनी का फोन आया। उन्हें बिना अनुमति के निकाले जा रहे ‘आई लव मुहम्मद’ जुलूस की सूचना दी गई। नदीम अख्तर, हनीफ गाँधी और दानिश चौधरी जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें अलीखान चौराहे पर रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने और वाल्मीकि मोहल्ले की ओर बढ़ते रहे।

एसएसआई ने एसआई कपिल कंबोज और अन्य पुलिसकर्मियों को तहसील रोड होते हुए अपने साथ आने के लिए बुलाया। जब वे मोहल्ले में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि अलीखां की तरफ से 400-500 लोगों की एक भीड़ जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ रही थी। उनके हाथ में लाठियाँ और डंडे थे। भीड़ एसआई मनोज धोनी, सब-इंस्पेक्टर अजीत सिंह, हेड कांस्टेबल जगत सिंह, कांस्टेबल देवनाथ और कांस्टेबल अमरदीप के साथ धक्का-मुक्की और झड़प कर रही थी।

एसएसआई ने भीड़ को समझाने की कोशिश की। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति के जुलूस नहीं निकाला जा सकता। लेकिन भीड़ ने एसआई धोनी और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों को घेर लिया। उन्होंने उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया। भीड़ ने एसएसआई पर भी हमला किया।

मुख्य आरोपित नदीम अख्तर समेत 7 गिरफ्तार

इस मामले में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मास्टरमाइंड 47 वर्षीय नदीम अख्तर भी शामिल है। दस अन्य लोगों को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 18 वर्षीय मोहम्मद अशद, कामरान (19 साल), मोइन रज़ा (26 साल) और दानिश (28 साल) शामिल हैं।

पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज के जरिए हिंसा में शामिल इस्लामी चरमपंथियों की पहचान कर रही है। जल्द और गिरफ्तारियाँ हो सकती है।

हिंसा के बाद काशीपुर में डेरा डाले एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कहा कि कानून-व्यवस्था को भंग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस पर हमला करने और सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से शांत रहने, अफवाहों से बचने और अधिकारियों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।

अयोध्या में बाबरी के बदले मस्जिद बनाने के मंसूबों पर NOC भारी: सुप्रीम कोर्ट की कृपा से ‘खैरात’ में मिली जमीन तो चंदा खूब वसूला, पर लेआउट प्लान नहीं हुआ पास

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जमीन दे दी लेकिन 5 साल बाद भी उस पर काम ठप पड़ा है। मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट ने चंदा तो जुटाया लेकिन सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं ले सका। अब NOC ना होने के चलते इसके लेआउट प्लान को भी अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने खारिज कर दिया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह द्वारा दाखिल RTI में सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों का अनिवार्य NOC ना होने के चलते ADA ने यह प्लान खारिज किया है।

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को ADA में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन दायर किया था।

RTI के जवाब में ADA ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने 4 लाख रुपए आवेदन और जाँच शुल्क के रूप में जमा किए। ADA के मुताबिक, मस्जिद निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग की NOC माँगी गई थी।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने क्या कहा?

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि उन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से आपत्तियाँ आई थीं। अग्निशमन विभाग की साइट जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊँचाई को देखते हुए अप्रोच रोड की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। जबकि मौके पर दोनों मार्ग छह मीटर से ज्यादा चौड़े नहीं पाए गए और मुख्य सड़क महज चार मीटर चौड़ी निकली थी।

हुसैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन देने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें जमीन दी। इसके बाद भी आवश्यक NOC क्यों नहीं मिलीं और ADA ने प्लान को क्यों खारिज किया, यह समझ से बाहर है।”

उन्होंने आगे कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बारे में उन्हें जानकारी है लेकिन बाकी किसी भी विभाग की आपत्ति को लेकर उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। बकौल हुसैन, RTI के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

इस बीच अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और यह पूरे होने के चरण में है। तो दूसरी और मस्जिद परियोजना लापरवाहियों के चलते अभी तक अधर में ही अटकी हुई है। जो लोग शताब्दियों तक कथित ढांचे को मस्जिद बताते हुए लड़ रहे थे, उनके लिए मस्जिद की प्राथमिकता कितनी है, यह 5 जमीन आवंटन के 5 वर्ष बाद स्पष्ट हो जाता है।