Tuesday, April 14, 2026
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‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने के लिए जिस बबीता को लेकर आए राहुल गाँधी, ऑपइंडिया की पड़ताल में उससे जुड़े दावे निकले झूठे: 2 जगह वोटर, काटने के लिए खुद दिया आवेदन

BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर ने OpIndia को फोन पर बताया कि बबीता का नाम दो जगह दर्ज है - एक गुलबर्ग में और दूसरी आलंद में।

राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग के खिलाफ ‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने की बात कही थी। राहुल ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट से लोगों नाम कटने के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला वोटर बबीता का नाम लिया और दावा किया कि उसका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया। लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खंडन किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले की तहकीकात की, जिसमें राहुल गाँधी के दावों की हवा निकलती दिख रही है।

राहुल गाँधी ने बबीता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दावा किया था लेकिन उस बबीता का नाम वोटर लिस्ट में अभी भी मौजूद है। आलंद विधानसभा सीट के सरसंबा बूथ पर बबीता चौधरी का नाम हमें वोटर लिस्ट में मिला।

BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर ने OpIndia को फोन पर बताया कि बबीता का नाम दो जगह दर्ज है – एक कर्नाटक के गुलबर्ग में और दूसरी आलंद में। गुलबर्ग वाले पते पर जाँच की गई तो पता चला कि बबीता ने खुद ही नाम कटवाने का फॉर्म भरा था।

चुनाव आयोग ने साफ कहा कि ऑनलाइन किसी का वोट हटाना नामुमकिन है। हर वोटर को नाम हटाने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाता है। 2023 में आलंद में वोट कटाने की कुछ कोशिशें हुईं थीं, लेकिन वो असफल रहीं। आयोग ने खुद ही इस पर FIR दर्ज कराई और जाँच चल रही है।

आयोग ने करीब 5700 नंबर्स का डेटा कर्नाटक CID को दे दिया था। इनमें से 9 नंबर्स ट्रेस हो चुके हैं, जो महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं।

राहुल गाँधी ने 2022 में 6000 वोट कटने का दावा किया, लेकिन हकीकत ये है कि 2018 में उसी सीट पर BJP सिर्फ 700 वोटों से जीती थी। 2023 में कॉन्ग्रेस 9000 वोटों से धमाकेदार जीत हासिल की। अगर राहुल का दावा सही होता तो कॉन्ग्रेस को 6700 वोटों से हारना पड़ता, लेकिन 30 साल बाद वो सीट जीत ली। ये आँकड़े ही राहुल के दावों की हवा निकाल देते हैं।

वोट लिस्ट से कैसे कटता है नाम?

फॉर्म 7 के माध्यम से किसी का नाम हटाने की अपील की जाती है। बाकायदा फॉर्म में जानकारी भरी होती है। उसकी जाँच आखिर में बीएलओ के पास जाती है। जिसमें बीएलओ इसकी जाँच करता है। इसके बाद एसडीओ के पास मामला जाएगा। इसकी सुनवाई होगी। दस्तावेज जमा किए जाएँगे, इसकी जाँच की जाएगी। व्यक्ति से कारण पूछा जाएगा, इसके बाद नाम काटा जाएगा।

राहुल गाँधी ने जो फॉर्म दिखाए, उसमें बीएलओ का हिस्सा ही नहीं है। बीएलओ की जाँच के बाद ही मामला एसडीओ के पास जाता है, ऐसे में राहुल गाँधी ने सिर्फ फॉर्म भरे हुए ही दिखाए, एक्शन क्या हुआ, ये बताया ही नहीं।

चूँकि चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि 2023 में आलंद में 6,018 फॉर्म-7 आवेदनों में से सिर्फ 24 वैध थे, बाकी 5,994 फर्जी थे। इनकी जाँच के बाद फरवरी 2023 में ही FIR दर्ज हुई और 6 सितंबर 2023 को कलबुर्गी पुलिस को ऑब्जेक्टर का नाम, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और फॉर्म डिटेल्स सौंप दी गईं।

इस मामले को वीडियो के इस जरिए समझ सकते हैं।

आयोग ने ये भी कहा कि चुनाव नतीजों पर आपत्ति हो तो 45 दिनों में हाईकोर्ट में याचिका डाल सकते हैं, लेकिन किसी विपक्षी नेता ने ऐसा नहीं किया। कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में औपचारिक शिकायत तक नहीं की। ये सब राजनीतिक रणनीति लगती है, जिसका मकसद लोगों को भड़काना और आयोग पर दबाव डालना है।

राहुल ऐसे लोगों को आगे ला रहे हैं जिनके नाम कटाने की कोशिश हुई, लेकिन नाम नहीं कटा। इससे साफ है कि ये अर्धसत्य हैं, पूरी सच्चाई नहीं। आयोग हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ जवाब दे रहा है। 18 पत्र लिखे गए, 18 महीने बीत चुके, लेकिन कॉन्ग्रेस चुप। कुल मिलाकर राहुल का ‘हाइड्रोजन बॉम्ब’ दावा फुस्स साबित हो गया।

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