Home Blog Page 2065

‘इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं धीरेन्द्र शास्त्री’: मुस्लिमों की घर वापसी कराने से नाराज मौलाना शहाबुद्दीन बोले- भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बन सकता

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उन पर इस्लाम के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगा है। यह आरोप ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने लगाया है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम के मंच पर एक मुस्लिम महिला ने घर वापसी की थी। शहाबुद्दीन ने मुस्लिम महिला के धर्मान्तरण का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से कार्रवाई की माँग की है। शहाबुद्दीन ने धीरेन्द्र शास्त्री पर नफरत फैलाने का भी आरोप लगाया है। मौलाना ने यह बयान गुरुवार (26 जनवरी 2023) को दिया है।

मौलाना शाहबुद्दीन ने अपना बयान वीडियो के माध्यम से दिया है। अपने बयान की शुरुआत ‘बिस्मिल्लाह-ए-रहमान-ए-रहीम’ से करने के बाद मौलाना ने कहा, “बागेश्वर धाम के संचालक बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ने जो तौर-तरीका इख़्तियार किया है, उससे पूरे भारत में नफरत फैल रही है।”

मौलाना ने कहा, “उन्होंने अब तक 328 लोगों का मजहब तब्दील करवाया और वो इस्लाम के खिलाफ नफरत प्रचारित कर रहे हैं। उन्होंने खुद कहा कि हम टोपी वालों को भी सनातनधर्मी बना देंगे। मीडिया चैनलों के सामने इस तरीके की बात कर के प्रसारित करना इस्लाम की तौहीन है। मुसलमानों को इससे सख्त तकलीफ है।”

मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा, “मेरी भारत सरकार से गुजारिश है कि वो धर्मान्तरण के खिलाफ क़ानून लाई है तो इस्लाम को बदनाम करने वाले ऐसे बाबाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और इन्हें रोका जाए।”

हिंदू राष्ट्र को लेकर मौलाना ने कहा, “कुछ लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात कह रहे हैं। मैं दावे से कहता हूँ कि हिंदुस्तान एक जम्हूरी मुल्क है। यह आईन (कानून) और संविधान से चलता है। यहाँ के रहने वाले संविधान के हिसाब से रहते हैं। इसलिए ये देश कभी भी न तो हिन्दू राष्ट्र बन सकता है और न ही मुस्लिम राष्ट्र। इसलिए जो ऐसा ख्वाब देख रहे वो सपने देखना बंद कर दें।”

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी आला हजरत बरेली से जुड़े हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अगर कोई मुस्लिम धर्मगुरु धर्मान्तरण करवा रहा होता तो उसे 24 घंटे के अंदर जेल भेज दिया गया होता।

मौलाना शहाबुद्दीन ने यह भी कहा कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार धीरेन्द्र शास्त्री पर एक्शन नहीं लेगी तो वो अदालत का रुख करेंगे। मौलाना ने धीरेन्द्र शास्त्री की मंच से कही कई बातों को इस्लाम को कमजोर करने की साजिश करार दिया है।

चोट्टा कश्मीरी… पत्थरबाजों, आतंकियों, अलगाववादियों को ‘ठोकने’ का पाठ पढ़ाया खान सर ने… वीडियो देख भड़के इस्लामवादी

बिहार के पटना वाले खान सर एक बार फिर से चर्चा में हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे कश्मीर में अलगाववाद पर बात करते सुने जा सकते हैं। इस वीडियो को देखकर इस्लामवादी भड़क गए हैं। खान सर फैन्स 100c (khansirfans100c) द्वारा यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को इस्लामवादी ट्विटर पर शेयर कर उनके चैनल को बैन करने की माँग कर रहे हैं।

यूट्यूब की दुनिया के चर्चित शिक्षकों में से एक खान सर को इस्लामवादी निशाना बना रहे हैं। दरअसल खान सर फैन्स 100c यूट्यूब चैनल द्वारा 5 जनवरी को एक शॉर्ट अपलोड किया गया। इस वीडियो को खान सर लाइव क्लास तिब्बत बनाम कश्मीर (khan sir live class Tibet vs Kashmir) नाम से अपलोड किया गया है। जैसा कि वीडियो के टाइटल से ही प्रतीत होता है, इस वीडियो में खान सर तिब्बत पर चीनी कब्जे के साथ कश्मीर में अलगाववाद पर चर्चा कर रहे हैं। वीडियो में खान सर कह रहे हैं कि चीन ने तिब्बत पर 1959 में कब्जा कर लिया और वहाँ के लोगों की पिटाई की। फिर भी वहाँ कोई नहीं कहता कि हमें आजादी चाहिए।

वीडियो में खान सर आगे कह रहे हैं कि चीन ने तिब्बत के परिवार के सदस्यों को अलग-अलग इलाकों में भेज दिया। परिवार के सदस्य आज तक एक दूसरे की तलाश कर रहे और तिब्बत के आजादी की माँग नहीं उठ सकी। खान सर ने कश्मीर में भी यही प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा:

“चोट्टा कश्मीर वाला यहीं रह गया है। भारत सरकार को चाहिए कि एक को गुजरात भेज दे, दूसरे को कन्याकुमारी भेज दो… एक को बिहार लेकर आओ, लिट्ठी चोखा खाना सिखाएँगे लोग और जो ज्यादा पत्थरबाजी कर रहे हैं उन्हें अंडमान निकोबार भेज दो कश्मीर पूरी तरह शान्त हो जाएगा।”

उनके इस वीडियो को ट्विटर पर मीर फैसल और आरजे सायेमा जैसे इस्लामवादियों ने ट्वीट किया है। मीर फैसल ने ट्विटर पर थ्रेड के जरिए न सिर्फ इस फैन क्लब वाले वीडियो को शेयर किया बल्कि खान सर के ऑफिसियल चैनल का लिंक शेयर करते हुए यूट्यूब से इस पर कार्रवाई की माँग भी की।

आरजे सायेमा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इस ट्वीट को शेयर किया और खान सर को खतरनाक जीव करार दिया। बता दें कि खान सर और उनका चैनल खान जीएस रिसर्च सेंटर (Khan GS Research Centre) देशभर में लोकप्रिय है। इसके 20 मिलियन (2 करोड़) सब्सक्राइबर हैं। वे करेंट अफेयर्स और जीएस के टॉपिक्स को सरलता और खास अंदाज में समझाते हैं, जिससे लोग खासकर स्टूडेंट्स उनके दीवाने हैं।

हमारा सनातन धर्म भारत का राष्ट्रीय धर्म: बोले CM योगी, ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर में की पूजा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के भीनमाल स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सभा को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म भारत का राष्ट्रीय धर्म है।

जालौर के भीनमाल में स्थित सातवीं शताब्दी के नीलकंठ महादेव मंदिर को भव्य बनाया गया है। इसे लेकर मंदिर परिसर में 11 दिनों से प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है। इसी महोत्सव के अंतिम दिन उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ नीलकंठ महादेव के दर्शन और समारोह में हिस्सा लेने भीनमाल पहुँचे। आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उनके लिए बहुत सौभाग्य का विषय है कि उन्हें अति प्राचीन मंदिर का दर्शन करने का लाभ मिला है। उन्होंने इस आयोजन को अपने और देश के लिए गौरव का क्षण करार दिया।

सीएम योगी आयोजन के सफल संचालन से काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन में जिस प्रकार लोग जाति और मत के भेद से ऊपर उठकर एकता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वैसा ही सब को दैनिक जीवन में भी इसी तरह के एकता के भाव को अंगीकार करना होगा। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हमारा सनातन धर्म भारत का राष्ट्रीय धर्म है।”

उन्होंने देश की सुरक्षा और समृद्ध विरासत की रक्षा के लिए देश के लोगों से व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर अपने राष्ट्रीय धर्म के साथ जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने इस दौरान अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर का जिक्र भी किया। सीएम योगी ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश मे भव्य राम मंदिर भी बन रहा है। उन्होंने राममंदिर निर्माण में योगदान के लिए लोगों की प्रशंसा की। आपको बता दें सीए योगी शाम 4 बजे भीनमाल पहुँचे। जहाँ उन्होंने लगभग 15 मिनट तक भगवान शिव की पूजा की। योगी आदित्यनाथ को देखने के लिए भारी संख्या में मंदिर के बाहर जन सैलाब उमड़ पड़ा।

शेयर गिराओ, उससे अरबों कमाओ: अडानी पर आरोप लगाने वाला Hindenburg रिसर्च का काला चिट्ठा, अमेरिका में चल रही जाँच

अमेरिकी फर्म हिंडेनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में दूसरे ट्रेडिंग डे शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को भारी गिरावट दर्ज की गई। कुछ शेयर तो शुक्रवार को ही 20 प्रतिशत तक गिर गए। कुछ में लोअर सर्किट भी लगा। वहीं, अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी की निजी संपत्ति में भी लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई औऱ वे दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में दूसरे नंबर से फिसलकर 10वें नंबर पर चले आए।

शुक्रवार के कारोबारी सेशन की शुरुआत में ही अडानी ग्रुप के बाजार पूँजीकरण में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई। इससे पहले बुधवार (25 जनवरी 2023) को समूह के मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब 97,000 करोड़ रुपए गिरावट आई थी। यानी रिपोर्ट के आने के बाद दो दिन में ही समूह को लगभग 3 लाख करोड़ रुपए की चपत लग गई। इसके साथ ही दोनों दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल रही और निवेशकों के कई लाख करोड़ रुपए डूब गए।

Hindenburg की रिपोर्ट में क्या था?

हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप हैं, जो किसी कंपनी के लिए घातक हो सकता है। इस तरह की रिपोर्ट बाजार में आते ही निवेशकों के बीच आफरा-तफरी मच जाती है और कंपनी के स्टॉक धाराशायी होने लगते हैं।

हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी समूह ने मॉरीशस और कैरेबियन द्वीप समूह जैसे टैक्स हेवन में संस्थाओं का उपयोग किया और अपनी कंपनियों की सूचीबद्ध शेयरों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। यानी रिसर्च फर्म ने अडानी ग्रुप पर टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए।

फर्म ने अडानी ग्रुप की कंपनियों के वैल्युएशन में भी हेरफेर का आरोप लगाया है। उसने कहा कि अडानी ग्रुप की प्रमुख सात कंपनियों के शेयर 85 प्रतिशत तक ओवर वैल्यूड हैं। यानी इन कंपनियों के शेयर की वैल्यू जितनी होनी चाहिए, उससे 85 प्रतिशत है।

इतना ही नहीं, रिसर्च फर्म ने अडानी समूह की कंपनियों पर लोन को लेकर भी आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों ने लोन ले रखा है और इन शेयरों को गिरवी रखकर समूह की वित्तीय स्थिति को जोखिम में डाल दिया है।

रिसर्च फर्म का कहना है कि 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अडानी समूह का कुल सकल ऋण 40% बढ़कर 2.2 ट्रिलियन रुपए (2.2 लाख करोड़ रुपए) हो गया।Refinitiv डेटा से पता चलता है कि अदानी समूह की सात प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में ऋण इक्विटी से अधिक है। अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड पर ऋण उसकी इक्विटी से 2,000% अधिक है।

अडानी ग्रुप के FPO पर रिपोर्ट का दिख रहा है असर

हिंडेनबर्ग का रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अडानी समूह अपनी मूल कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) की FPO (Follow on Public Offer) बाजार में लेकर आई है। FPO स्टॉक एक्सचेंज में पहले से ही सूचीबद्ध कंपनी के नए शेयरों का ऑफर होता है, जिसके माध्यम से कंपनी बाजार से पैसे जुटाती है। अडानी ग्रुप भी FPO के माध्यम से बाजार से 20,000 करोड़ रुपए जुटाने में लगा हुआ है। यह देश का सबसे बड़ा FPO है।

अडानी का यह FPO सब्सक्रिप्शन के लिए 27 जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2023 तक डिस्काउंट पर उपलब्ध है। लेकिन अडानी के शेयरों को लेकर जिस तरह से लोगों में क्रेज था, उसके हिसाब से यह FPO सब्सक्राइब नहीं हुआ है। पहले दिन सिर्फ 0.01 प्रतिशत ही सब्सक्रिप्शन हुआ है। जाहिर सी बात है कि हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट का असर अडानी समूह के सिर्फ मार्केट कैपिटलाइजेशन पर ही नहीं, बल्कि उसके FPO सब्सक्रिप्शन पर भी हुआ है।

समय को लेकर सवाल और हिंडेनबर्ग की शॉर्ट सेलिंग का इतिहास

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट ऐसे समय में जारी की जब अडानी ग्रुप अगले 2 दिनों बाद ही देश का सबसे बड़ा FPO लॉन्च करने वाला था। रिपोर्ट जारी करने के समय को लेकर विश्लेषकों ने हिंडेनबर्ग के इरादों पर सवाल उठाए हैं। हिंडेबर्ग पर सवाल एक नजर में इसलिए भी जायज दिख रहा है, क्योंकि यह कंपनी शॉर्ट सेलिंग का कारोबार करती है।

हिंडेनबर्ग पर आरोप लगते हैं कि रिसर्च फर्म के नाम पर कंपनियों की रिपोर्ट जारी करती है। इसमें वह कंपनियों की वित्तीय स्थिति का विवरण देती है। इसके कारण जब कंपनी के शेयर लुढ़कने लगते हैं को वह मुनाफे कमाती है। शॉर्ट सेलिंग की बात खुद हिंडेनबर्ग ने कही है। हिंडेनबर्ग ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को कहा था कि वह यूएस ट्रेडेड बॉन्ड और नन-इंडियन ट्रेडेड डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए अडानी ग्रुप की कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन रखेगी।

क्या है शॉर्ट सेलिंग?

अगर साधारण भाषा में समझने का प्रयास करें तो शेयर बाजार में दो तरह के निवेशक होते हैं- तेजड़िया (Bull) और मंदड़िया (Bear)। जिन निवेशकों को लगता है कि शेयर बाजार ऊपर जाएगा, वे शेयरों को खरीदते हैं। ये निवेशक तेजड़िया कहलाते हैं। वहीं, जिन निवेशकों को लगता है कि बाजार नीचे जाएगा, वे शॉर्ट सेलिंग और बेचेने का काम करते हैं। ये मंदड़िया अर्थात Bear कहलाते हैं।

शॉर्ट सेलिंग ऐसी रणनीति होती है, जब मंदड़ियों को लगता है कि बाजार या कोई स्टॉक नीचे जाएगा तो वे उसे बेच देते हैं और जब उस स्टॉक की कीमत गिर जाती है तो वह खरीद लेता है। इस तरह वह कम पर खरीद कर अधिक पर आम रणनीति अपनाता है। हालाँकि, इस रणनीति की खास बात यह होती है कि जिस स्टॉक को आप शॉर्ट सेलिंग करना चाहते हैं, अगर वह आपके पास नहीं है तब उसे बेच सकते हैं। शेयर बाजार बंद होने से पहले उसे खरीदना होता है। यह मंदड़ियों का खेल है।

हिंडेनबर्ग यही मदड़िया है। वह बाजार की गिरावट का फायदा उठाता है। यानी वह बेच पहले देता है और जब स्टॉक की प्राइस गिर जाती है तो वह बाद में खरीद लेता है। यही उसका इतिहास इस रिपोर्ट पर सवाल उठाने के लिए जायज है। यहाँ सवाल अडानी ग्रुप की वित्तीय अनियमितता से नहीं, बल्कि समय के चुनाव से जुड़ी है। यह पहली बार नहीं है कि हिंडेनबर्ग ने ऐसा किया है। हिंडेनबर्ग का यही काम है, यही पेशा है, यही व्यवसाय है।

अमेरिका में आपराधिक जाँच के घेरे में है Hindenburg

कुछ समय पहले अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कंपनी को टारगेट करने के आरोप में अमेरिका के न्याय विभाग ने 30 इन्वेस्टमेंट एवं रिसर्च कंपनियों एवं उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ जाँच शुरू की थी। जिन कंपनियों के खिलाफ जाँच शुरू हुई थी, उनमें हिंडेनबर्ग रिसर्च भी शामिल है। ये कंपनियाँ किसी को टारगेट करके उसकी वित्तीय रिपोर्ट जारी करते थे और उसके स्टॉक पर अपना शॉर्ट पोजीशन बनाते थे। जब उस कंपनी का स्टॉक जितना ही, गिरता उतना ही ये लाभ कमाते थे।

हिंडनबर्ग की शॉर्ट-सेलिंग और हेज फंड के साथ मिलीभगत के लिए अमेरिकी सरकार के न्याय विभाग द्वारा जाँच की जा रही है। फर्म के संस्थापक नैट एंडरसन कथित तौर पर कॉर्पोरेट आपदाओं की पहचान करने और उनसे मुनाफा कमाने में माहिर हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च कॉर्पोरेट आपदाओं की पहचान करने (और उनसे लाभ उठाने) में माहिर है।

मार्क कोहोड्स नाम के एक अन्य शॉर्ट सेलर ने आरोप लगाया था कि अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित हिंडनबर्ग बड़े फंड से जानकारी प्राप्त करता है और इस प्रकार उन्हें अपने ‘शॉर्ट’ ट्रेडों में मदद करता है।

Hindenburg ने इलेक्ट्रिक वेहिकल कंपनी Nikola को बनाया था निशाना

अडानी ग्रुप की तरह ही हिंडेनबर्ग ने इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी निकोला (Nikola) को भी अपना निशाना बनाया था। हिंडेनबर्ग पर आरोप लगा कि उसने दर्जनों झूठ को इस जटिलता के साथ पेश किया कि कंपनी के शेयर 80 प्रतिशत तक टूट गए। कंपनी ने हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट पर सवाल उठाया था। हिंडेनबर्ग ने निकोला के साथ जर्मनी में उसके पार्टनर बोस (Bosch) पर भी सवाल उठाया था।

हिंडेनबर्ग ने अमेरिका की स्टार्टअप कंपनी निकोला पर आरोप लगाया था कि कंपनी ने तकनीकी विकास के बारे में झूठ बोलकर अपने निवेशकों को धोखा दिया। हिंडेनबर्ग के फाउंडर नाथन एंडरसन ने कंपनी के एक वीडियो को चुनौती दी थी, जिसमें निकोला ने अपने इलेक्ट्रिक ट्रक को तेज गति से दौड़ते हुए दिखाया था। वास्तव में वाहन एक पहाड़ी की ढ़लान पर था

रिपोर्ट के आधार पर निकोला के खिलाफ सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (Securities and Exchange Commission- SEC) ने कार्रवाई की थी। SEC के साथ फ्रॉड जाँच के सेटलमेंट के रूप में निकोला ने 12.50 करोड़ अमेरिकी डॉलर दिए। इतना ही नहीं, निकोला के फाउंडर Trevor Milton पर आपराधिक मुकदमा चलाया गया। वे पिछले साल दोषी भी सिद्ध हुए।

भारत की मीडिया कंपनी सहित कइयों को बनाया निशाना

कुछ साल पहले, हिंडनबर्ग रिसर्च ने बॉलीवुड की मीडिया प्रोडक्शन कंपनी इरोस इंटरनेशनल (Eros International) पर भी वित्तीय स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। इसके बाद कंपनी के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद इरोस इस रिपोर्ट को लेकर हिंडेनबर्ग पर मानहानि का आरोप लगाया गया था।

हिंडेनबर्ग के अनुसार, साल 2017 में अपनी स्थापना के बाद से कम-से-कम 16 कंपनियों में संभावित गड़बड़ी को पकड़ा है। पिछले साल ट्विटर (Twitter) डील के दौरान भी हिंडेनबर्ग ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि उसने शॉर्ट पोजीशन रखी है। उसने कहा था कि यदि इस डील से दुनिया के सबसे धनी आदमी एलन मस्क (Elon Musk) अलग हो जाते हैं तो कंपनी की वैल्यू गिर सकती है। इसके पहले 2018 में एलन मस्क शॉर्ट सेलिंग का मुखालफत कर चुके हैं।

क्या है Hindenburg और कौन है इसका संस्थापक

नाथन एंडरसन उर्फ नैट एंडरसन ने साल 2017 में फोरेंसिक वित्तीय शोध फर्म के रूप में हिंडनबर्ग रिसर्च की स्थापना की थी। यह इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव का विश्लेषण करती है।हिंडनबर्ग का कहना है कि वह वित्तीय अनियमितता, कुप्रबंधन, हेरफेर, अघोषित लेनदेन आदि जैसे ‘मानव निर्मित आपदाओं’ की तलाश करती है। इसको देखकर कंपनी अपनी पूँजी लगाती है।

कंपनी का नाम 1937 में हिंडनबर्ग एयरशिप की हाई प्रोफाइल आपदा (Hindenburg Disaster) के नाम पर रखा गया है। सारी सुख सुविधा से लैश उस समय का सबसे बड़ा यह एयरशिप अमेरिका के न्यूजर्सी में जलकर खाक हो गया था। इसमें 100 लोग सवार थे। संभावित गलत कामों को खोजने के बाद हिंडनबर्ग आमतौर पर रिपोर्ट प्रकाशित करता है। इसमें मामले की जानकारी होती है। इसके बाद कंपनी लाभ कमान के लिए शॉर्ट सेलिंग करती है।

इसके संस्थापक नाथन एंडरसन ने इंटरनेशनल बिजनेस में अमेरिका के कनेक्टिकट विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उन्होंने डेटा कंपनी फैक्टसेट रिसर्च सिस्टम्स इंक (FactSet Research Systems Inc) में फिनांस में अपना करियर शुरू किया। वहाँ एंडरसन ने इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ काम किया। उन्होंने इजरायल में एंबुलेस ड्राइवर के तौर पर भी काम किया है।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर तोड़ डाली माता सरस्वती की प्रतिमा: फारूक, मुन्ना खान, अपू मियाँ सहित बांग्लादेश में 6 गिरफ्तार

बांग्लादेश के नेतरकोना जिले के मोहनगंज में 26 जनवरी, 2023 की रात इस्लामी कट्टरपंथियों ने सरस्वती पूजा पंडाल पर हमला कर माता की प्रतिमा को खंडित कर दिया। बताया जा रहा है कि फोटो और वीडियो बनाने को लेकर हुई बहस के बाद 9-10 लोगों ने पंडाल पर हमला कर दिया। मामले में पुलिस ने अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक घटना मोहनगंज के नाराइच गाँव की बताई जा रही है। नाराइच विलेज यूथ एसोसिएशन के अंतर सरकार के मुताबिक बसंत पंचमी की रात करीब 9.30 बजे कुछ इस्लामी कट्टरपंथी पूजा पंडाल में आ धमके। उस वक्त माता सरस्वती की आरती की जा रही थी। कट्टरपंथी पूजा में व्यवधान उत्पन्न करने लगे। आरती के बीच फोटो और वीडियो बनाने लगे। पूजा कमिटी के लोगों ने जब ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने तोड़-फोड़ शुरू कर दी। माता सरस्वती की प्रतिमा पर भी हमला कर उसे खंडित कर दिया गया।

इस हमले में हृदय विश्वास और शयन सरकार नाम के दो अल्पसंख्यक हिंदू गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए मोहनगंज स्थित उपजिला अस्पताल ले जाया गया। रूबेल सरकार नाम के हिंदू ने मोहनगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है। हमले और मूर्तियों को तोड़ने के मामले में पुलिस ने अब तक अनन मियाँ, निशाद, फारूक मियाँ, सबीकुल मियाँ, एसएम मुन्ना खान और अपू मियाँ समेत 6 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया है। सभी पास के हटनैया गाँव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस बाकी के हमलावरों की तलाश कर रही है।

बता दें कि बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा खंडित करने या अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले की खबरें आए दिन आती रहती हैं। इसी साल 23 जनवरी को अकरम नाम के शख्स ने नेतरकोना जिले के पूरबधाला बाजार इलाके में देवी सरस्वती की कई मूर्तियों को तोड़ दिया था। सीसीटीवी कैमरे से उसकी पहचान हो सकी थी। महीने की शुरुआत में बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस ने जानकारी दी थी कि जनवरी 2022 से दिसंबर 2022 के बीच देश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों में हिंदुओं समेत 154 अल्पसंख्यक मारे गए थे।

पिस्तौल वाले साधु, जिन्होंने चीनी सेना की जानकारी भारत को दी: 15 साल अकेले हिमालय में भटके, पाकिस्तानियों पर भी रखी नजर

आप फिल्मों या वेब सीरीज में जासूसों के किरदार देख बहुत रोमांचित होते होंगे! कारण भी बड़ा सिंपल है – जासूसों को काफी स्टाइलिश और तेज तर्रार दिखाया जाता है। दूरदर्शन पर हालाँकि ब्योमकेश बख्शी जैसे सीधे-साधे जासूस के किरदार ने भी काफी शोहरत हासिल की थी। आज की कहानी लेकिन फिल्मी या टीवी सीरियल से एकदम अलग है। हम आपको आज जिस जासूस के बारे मेंं बताने जा रहे हैं, वो इन फेमस किरदारों से काफी अलग थे। नाम है – स्वामी प्रणवानंद (Swami Pranavananda)

स्वामी प्रणवानंद ने अपने कौशल से देश को हिमालयी सीमा के पास चीन और पाकिस्तान से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही हिमालय क्षेत्र की कई अबूझ पहेलियों को सुलझाया और वहाँ किए गए उनके प्रमाणिक शोध को भारतीय पुरातात्विक विभाग ने भी स्वीकार किया, उसे मान्यता दी।

महानायक स्वामी प्रणवानंद को भारतीय इतिहास में वो जगह नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। स्वामी प्रणवानंद का जन्म 1896 में आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम कनकदंडी वेंकट सोमयाजुलु (Kanakadandi Venkata Somayajulu) था। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने लाहौर में दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज में दाखिला लिया। अब इसे सरकारी इस्लामिया कॉलेज के रूप में जाना जाता है। कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह लाहौर में ही रेलवे के अकाउंटेंट ऑफिस में काम करने लगे।

कनकदंडी वेंकट सोमयाजुलु बाद में 1920 में महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। वह 1926 तक आंध्र प्रदेश के अपने जिले पश्चिम गोदावरी में कॉन्ग्रेस पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता बने रहे। उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया, जब वह स्वामी ज्ञानानंद से मिले। स्वामी ज्ञानानंद उस दौर में भारत के प्रमुख परमाणु भौतिक शास्त्रियों में से एक थे। स्वामी ज्ञानानंद से ही उन्हें हिमालय के बारे में जानकारी मिली और उनका रुझान उस क्षेत्र को जानने को हुआ। ऋषिकेश में उन्हें नया नाम मिला और वह स्वामी प्रणवानंद कहलाए।

प्रणवानंद ने अपनी पहली हिमालय यात्रा 1928 में की। इस दौरान वह कश्मीर और कैलाश मानसरोवर क्षेत्र गए। इसके बाद वह 1935 से 1950 तक हर साल वहाँ जाते रहे। अपनी यात्राओं के दौरान उन्होंने खनिज विज्ञान, भूविज्ञान, जलवायु, पक्षीविज्ञान जैसी विविध विषयों के बारे में जानकारी इकट्ठी की। उन्होंने इस क्षेत्र की हाइड्रोग्राफी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रणवानंद ने ही बताया था कि सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सतलुज और करनाल नदियों के अलग-अलग उद्गम स्थल हैं। इससे पहले लोगों का मानना था कि ये सभी कैलाश पर्वत के पास मानसरोवर झील से उत्पन्न होती हैं। उनके निष्कर्षों को 1941 के बाद से सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने सभी मानचित्रों में शामिल किया।

स्वामी प्रणवानंद द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं (फोटो साभार-द पेपर क्लिप)

असहयोग आंदोलन के दौरान प्रणवानंद की सक्रियता और ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में उनके मौलिक शोध को भारत सरकार ने मान्यता दी और भारत की आजादी के बाद उन्हें स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलने लगा। स्वामी प्रणवानंद ने 1950 और 1954 के बीच कैलाश मानसरोवर क्षेत्र का दौरा जारी रखा, जबकि यह क्षेत्र माओ के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट चीन की सेना के कब्जे में आ गया था। माना जाता है कि वह एक गुप्त एजेंट के रूप में भारत के लिए काम कर रहे थे। इस दूरस्थ क्षेत्र में चीनी सैन्य उपस्थिति के बारे में मूल्यवान डेटा प्रदान करने के अलावा स्वामी प्रणवानंद ने पाकिस्तान की जासूसी गतिविधियों और पश्चिमी देशों से संबद्ध ईसाई मिशनरी एजेंटों के बारे में लगभग 4000 पृष्ठों की जानकारी भी एकत्र की थी।

कैलाश पर्वत के आसपास का क्षेत्र लुटेरों के लिए कुख्यात था। उन्हें डराने के लिए स्वामी प्रणवानंद हमेशा अपने पास 0.25 बोर की रिवॉल्वर रखते थे। बाद में उन्होंने 0.30 माउजर पिस्तौल रखना शुरू कर दिया था। इसे हालाँकि उन्होंने चीन के साथ 1962 के युद्ध के दौरान रक्षा कोष में दान कर दिया था। माना जाता है कि चीनी ख़ुफ़िया एजेंटों को उनके बारे में पता चल गया था, जिसके बाद वह 1955 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिला आ गए थे।

स्वामी प्रणवानंद (Swami Pranavananda) को 1976 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 1980 में वे अपने राज्य आंध्र प्रदेश वापस चले गए और अपने गाँव में एक छोटा सा मंदिर बनाया। 1989 में हैदराबाद में 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

मंदिर के लाउडस्पीकर की आवाज कम कराने आए मुस्लिम, मना करने पर पुजारी को घर में घुसकर पीटा: रतलाम की घटना, 9 पर FIR

मध्य प्रदेश के रतलाम के सैलाना इलाके में मुस्लिमों ने मंदिर में घुसकर पुजारी के साथ मारपीट की। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के लोग मंदिर के पास जमा होने लगे। विवाद बढ़ता देख रतलाम के कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और एसपी अभिषेक तिवारी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया है। फिलहाल इलाके में तनाव है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रतलाम के सैलाना थाना इलाके के दिवेल गाँव में 26 जनवरी 2023 की शाम लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को लेकर इलाके के मुस्लिमों ने हनुमान मंदिर के वृद्ध पुजारी रामचंद्र शर्मा के साथ विवाद किया। मुस्लिम पक्ष के लोग मंदिर के पुजारी पर लाउडस्पीकर का आवाज कम करने का दबाव बना रहे थे। पुजारी ने मुस्लिम पक्ष से मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज भी कम करने के लिए कहा। पुजारी का कहना था कि आवाज दोनों तरफ से कम होना चाहिए।

इसके बाद कई मुस्लिम युवक पुजारी के घर में दाखिल हो गए। इस दौरान पुजारी के साथ मारपीट व घर में तोड़फोड़ की गई। मिली जानकारी के मुताबिक पुजारी के परिवार के सदस्यों को भी चोट लगी है। घटना से संबंधित एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें तेजी के साथ कई लोगों को पुजारी के घर के अंदर दाखिल होते देखा जा सकता है।

आसपास के इलाके में यह खबर फैलने के बाद मंदिर के पास हिंदू संगठन के लोग जमा होने लगे। लोगों ने नजदीकी पुलिस चौकी पहुँचकर आरोपितों को गिरफ्तार करने की माँग की। मंदिर के पुजारी रामचंद्र शर्मा ने धामनोद पुलिस चौकी में 9 मुस्लिम युवकों पर मारपीट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक दिवेल गाँव में पहले भी इस तरह की घटना सामने आ चुकी है। दरसअल मंदिर और मस्जिद के सटे होने के कारण यहाँ अक्सर विवाद होता रहता है। लाउडस्पीकर को लेकर ही पहले भी कई बार विवाद हुए हैं।

सुरक्षा में सेंधमारी का दावा कर राहुल गाँधी ने यात्रा रोकी, J&K पुलिस ने बताया- पूरी थी तैयारी, 1 किमी चलकर बिना बताए बंद कर दी

राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के बनिहाल में रोक दी गई। कॉन्ग्रेस का आरोप है कि यात्रा के दौरान राहुल गाँधी को सुरक्षा नहीं मिली, इस कारण यात्रा रोकनी पड़ी। वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि यात्रा रोकने से पहले पुलिस से बातचीत नहीं की गई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने राहुल गाँधी की सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक से इनकार किया है। पुलिस ने कहा है कि इस यात्रा में शामिल होने वाली भीड़ के बारे में उसे सूचना नहीं दी गई थी। यात्रा के शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग आ गए थे। इसलिए उन्हें सँभालना पड़ा।

पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “यात्रा के रूट पर सिर्फ आयोजकों द्वारा अधिकृत व्यक्तियों और तलाशी लेने के बाद ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी गई थी। भारत जोड़ो यात्रा के आयोजकों और प्रबंधकों ने बनिहाल से यात्रा में शामिल होने वाली भीड़ के बारे में सूचित नहीं किया था। शुरुआती पॉइंट के पास ही बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी।”

पुलिस ने इस यात्रा में तैनात सुरक्षाकर्मियों की जानकारी देते हुए कहा, “सीएपीएफ की 15 कंपनियों और पुलिस की 10 कंपनियों समेत ROP और QRT को ड्यूटी में लगाया गया था। साथ ही, रूट डोमिनेशन, लेटरल डिप्लॉयमेंट और SF को हाई-रिज और अन्य स्थानों पर तैनात किया गया था।”

एक अन्य ट्वीट में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा, “आयोजकों ने एक किलोमीटर चलने के बाद यात्रा बंद की दी। यह निर्णय लेने से पहले पुलिस से किसी प्रकार की चर्चा नहीं की गई। शेष यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से जारी रही। सुरक्षा में जरा भी चूक नहीं हुई। हम फुलप्रूफ सुरक्षा मुहैया कराए।”

बता दें कि इससे पहले राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है, “पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और भीड़ को सँभालने वाली पुलिस चली गई या दिखी नहीं। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने मुझसे कहा कि अब आगे नहीं चलना चाहिए। इसलिए यात्रा रोकनी पड़ी। प्रशासन का काम है कि सुरक्षा उपलब्ध कराए। मुझे मालूम नहीं क्यों हुआ, पर कल और परसों ऐसा नहीं होना चाहिए।”

वहीं, कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि भारत जोड़ो यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई है। सुरक्षा नहीं मिल रही है। ऐसे में राहुल गाँधी यह यात्रा जारी नहीं रख सकते। अगर राहुल गाँधी यात्रा में आगे जाना भी चाहते हैं, तब भी वे उन्हें आगे नहीं जाने देंगे। सीनियर सुरक्षा अफसरों को यहाँ आना चाहिए।

बता दें कि दिसंबर 2022 में जब भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली में थी, तब भी कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी की सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया था। कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर कहा था कि राहुल की सुरक्षा में चूक हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस भीड़ को नियंत्रित नियंत्रित नहीं कर सकी। इस दौरान कॉन्ग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की सुरक्षा में कई बार सेंध लगी। उन्होंने कहा था कि स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा।

हालाँकि, केसी वेणुगोपाल के आरोप के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कहा था कि राहुल की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। साल 2020 के बाद से उन्होंने खुद 113 बार नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही CRPF ने कहा था कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिल्ली में भी सभी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने भी कहा था कि सुरक्षाकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी। CRPF ने कहा था कि राहुल गाँधी की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कई मौकों पर देखा गया है। इस तथ्य से उन्हें समय-समय पर अवगत भी कराया गया है। केन्द्रीय बल ने यह भी बताया है कि उन्होंने दिल्ली में भी इसका उल्लंघन किया था।

कोरोना वायरस को और खतरनाक बना रही Pfizer, ताकि बेच सके ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन: स्टिंग से खुलासा, संक्रमण को दुधारू गाय मान रही अमेरिकी दवा कंपनी

रूढ़िवादी मीडिया संगठन प्रोजेक्ट वेरिटास के एक स्टिंग ऑपरेशन के प्रकाशित होने के बाद अमेरिकी सीनेटर (फ्लोरिडा) मार्को रुबियो ने फाइजर (Pfizer) के सीईओ अल्बर्ट बोरला (Pfizer CEO Albert Bourla) को एक पत्र लिखा। इस स्टिंग ऑपरेशन में फाइजर के निदेशक जॉर्डन वॉकर ने दावा किया है कि दवा कंपनी कोविड-19 वायरस के प्रकोप को और बढ़ाने पर काम कर रही है।

गुरुवार (26 जनवरी 2023) को लिखे पत्र में रुबियो ने कहा, “एक इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट बताती है कि फाइजर गेन ऑफ फंक्शन रिसर्च कर रहा है। वह SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट कर भविष्य में नए वैरिएंट को खत्म करने के लिए उससे अधिक शक्तिशाली वैरिएंट व टीके बनाने वाला एक शोध बताता है।” उन्होंने कहा, “इस प्रकार का शोध, गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च के समान है। यह लंबे समय से विवादास्पद रहा है और इसके कारण ही COVID-19 महामारी होने का संदेह है।”

सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा, “चाहे यह कार्य किसी शोध का हिस्सा हो या फिर वायरस के खतरे को कम करने के लिए कोई नई खोज। जैसा कि वॉकर ने दावा किया वायरस को अधिक प्रभावशाली और बेजोड़ बनाने का कोई भी प्रयास लापरवाह और खतरनाक है।”

उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “वॉकर ने कहा है कि फाइजर इस खतरनाक शोध में शामिल होने के लिए तैयार है, क्योंकि कोविड-19 और इसके वैरिएंट कंपनी के लिए दूध देने वाली एक गाय की तरह है। सरकारी अधिकारियों का एक समूह भी फाइजर के लिए काम करना चाहता है।”

अमेरिकी सीनेटर ने फाइजर के सीईओ से की पूछताछ

फाइजर को अपने कार्यों के प्रति जवाबदेही समझाने और इसकी पारदर्शिता की बढ़ावा के लिए रुबियो ने दवा कंपनी से 6 अहम सवाल पूछे हैं। ये सवाल इस प्रकार हैं-

1. SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट करने के लिए फाइजर वर्तमान में क्या प्रयास कर रहा है या फिर आगे क्या करने की योजना बना रहा है?

2. क्या फाइजर का इरादा गेन-ऑफ-फंक्शन या निर्देशित विकास अनुसंधान के माध्यम से SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट करना जारी रखना है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक आबादी में वैरिएंट के फैलने से पहले नए टीके बना लेना है?

3. क्या फाइजर ने इस शोध की देखरेख करने की अपनी योजनाओं के संबंध में संघीय अधिकारियों के साथ बातचीत की है? कृपया उन व्यक्तियों के नाम और एजेंसियों की जानकारी दें।

4. फाइजर ने यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं कि म्यूटेट वायरस प्रयोगशाला से लीक न हो और बड़ी आबादी को संक्रमित न करे?

5. क्या फाइजर ने इस शोध में सहयोग करने के लिए अन्य बायोफार्मास्यूटिकल कंपनियों के साथ काम किया है? कृपया उन संस्थाओं को सूचीबद्ध करें, जिनके साथ आप संपर्क में रहे हैं।

6. क्या आप भविष्य में SARS-CoV-2 वैक्सीन को म्यूटेट करने वाले किसी भी शोध को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि पर्याप्त साक्ष्य ने संकेत दिया है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में इसी तरह के खतरनाक शोध से वायरस के शुरुआत में बढ़ने और दुनिया भर में फैलने की आशंका है?

जॉर्डन वॉकर और ‘प्रोजेक्ट वेरिटास’ स्टिंग ऑपरेशन

स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए जाने जाने वाले रूढ़िवादी मीडिया संगठन समूह ‘प्रोजेक्ट वेरिटास’ ने फाइजर के निदेशक जॉर्डन वॉकर के साथ एक मुलाकात तय की थी। इस दौरान उनसे दवा कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन के बारे में पूछताछ की। इसका वीडियो 26 जनवरी 2023 को जारी किया गया था।

इस दौरान वॉकर ने फाइजर द्वारा किए जा रहे कार्यों और कंपनी के भीतर चल रही शोध एवं संतुलन की कमी के बारे में खुलासे किए। उन्होंने बिना कोई परवाह किए कहा कि फाइजर टीकों का एक नया वैरिएंट विकसित करने के लिए कोविड-19 वायरस को शक्तिशाली बनाने पर विचार कर रही है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महामारी फाइजर के लिए दूध देने वाली गाय की तरह रही है और आने वाले दिनों में भी ऐसे ही बनी रहेगी। वॉकर ने फार्मा कंपनी के नए कोविड-19 टीकों से पैसा बनाने के विचार पर कहा, “हाँ, यह एकदम सही होगा।”

जॉर्डन वॉकर ने यह भी कहा कि फाइजर सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बेहद फायदेमंद रहा है। उन्होंने इसे पिछला दरवाजा कहा और बताया कि जो अधिकारी आज दवाओं की जाँच एवं समीक्षा करते हैं, वे बाद में उसी फार्मा कंपनी में शामिल हो जाते हैं। इसलिए वे कंपनी के प्रति कठोर नहीं होते।

कोरोना वायरस कैसे फैला

गौरलतब है कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) से कोरोना वायरस लीक हुआ था। यह दावा यहाँ काम कर चुके एक वैज्ञानिक ने किया था। वैज्ञानिक एंड्रयू हफ का दावा था कि कोविड-19 एक मानव निर्मित वायरस है, जो WIV से लीक हो गया था।

हफ वायरस का अध्ययन करने वाले न्यूयॉर्क स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था के लिए भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि कोविड को ढाई साल से पहले चीन में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से लीक किया गया। हफ ने इसे 9/11 के बाद की सबसे बड़ी अमेरिकी खुफिया विफलता बताया और इसके लिए अधिकारियों को दोषी ठहराया था।

जुबैर एंड गैंग ने ‘सर तन से जुदा’ दस्ते को दिए नए शिकार: विरोध हो रहा था ‘पठान’ का, ईशनिंदा बता हिंदुओं की तस्वीरें बढ़ा रहे इस्लामवादी

शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathan) को लेकर विवाद अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में इस्लामवादियों ने कई जगहों पर ‘सर तन से जुदा‘ के नारे लगाए। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर ऐसे दो वीडियो साझा किए हैं जिनमें इस जानलेवा नारे को सुना जा सकता है।

दोनों वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर के हैं। पहला वीडियो बड़वाली चौकी का और दूसरा खजराना पुलिस स्टेशन के बाहर का। दोनों वीडियो में मुस्लिम पुरुषों, छोटे बच्चों को ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ और ‘अल्लाह हो अकबर’ का मजहबी नारा लगाते हुए सुना जा सकता है।

आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ

‘पठान’ के विरोध में बुधवार (25 जनवरी 2023) सुबह हिंदू कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। ऐसे ही एक विरोध के तहत हिंदू कार्यकर्ता इंदौर के सपना संगीता रोड स्थित आईनॉक्स थिएटर पहुँचे और लोगों से फिल्म न देखने का आग्रह किया। उन्होंने कथित तौर पर विरोध करते हुए थिएटर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। कुछ कार्यकर्ता छत्रीपुरा थाना अंतर्गत कस्तूर थियेटर के बाहर भी जमा हुए थे।

हिंदू कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ नारे लगाए। इससे नाराज मुस्लिम समुदाय ने पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा से मुलाकात की और कथित रूप से ये नारे लगाने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर मुस्लिम समुदाय ने इंदौर के कई हिस्सों में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। कथित तौर पर, मुस्लिम चंदन नगर पुलिस स्टेशन पहुँचे और थाने के सामने जानलेवा नारे लगाए। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था। विनोद बंसल द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में मुसलमानों को खजराना पुलिस स्टेशन के सामने नारे लगाते देखा जा सकता है।

छत्रीपुरा थाना प्रभारी पवन सिंघल ने कहा, “पठान के खिलाफ कस्तूरी टॉकीज परिसर में एक संगठन द्वारा प्रदर्शन किया गया था। विरोध के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने एक आपत्तिजनक नारा लगाया। इसके बाद एक समुदाय के कुछ सदस्यों ने पुलिस से संपर्क किया।” दर्ज शिकायत के आधार पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 505 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मुहम्मद के खिलाफ कथित नारे लगाए जाने के बाद मुस्लिम समुदाय ने चंदन नगर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद, पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत किया और उन्हें सूचित किया कि चूँकि घटना छत्रीपुरा थाने में हुई थी, इसलिए प्राथमिकी भी वहीं दर्ज की जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर छत्रीपुरा पुलिस स्टेशन में जाकर विरोध किया, जहाँ एक प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बुधवार (25 जनवरी 2023) की देर रात 4 हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिन्होंने कथित तौर पर मुस्लिमों को नाराज करने वाले नारे लगाए थे।

‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाने वालों की अब तक गिरफ्तारी नहीं, विहिप ने जारी किया बयान

ऑपइंडिया की जानकारी के अनुसार, इंदौर पुलिस ने ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाने के लिए अभी तक किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया है। इस नारे के कारण अतीत में हिन्दुओं की हत्या और हिंसा हुई है। नारेबाजी के बाद VHP ने इस घटना के बारे में एक बयान जारी किया, जिसमें और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

VHP के अनुसार, जब नारे लगाए जा रहे थे मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों से हिंदुओं की पहचान कर उन पर हमला कर रहे थे। विहिप के अनुसार कुछ के साथ मुस्लिमों ने धक्का-मुक्की भी की, जबकि अन्य पर चाकुओं से भी हमला किया गया। कई को जान से मारने की धमकियाँ सोशल मीडिया पर दी जारी की जा रही है। VHP को आशंका है कि इस्लामवादी इस मामले को हिंसक रूप से बढ़ा सकते हैं।

विहिप ने अपनी प्रेस नोट में कहा है कि 25 जनवरी 2023 को एजाज नाम का शख्स और उसका दोस्त एक हिंदू कार्यकर्ता प्रकाश के पिता के घर में जबरदस्ती घुस गया और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। प्रकाश ने चंदन नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है और इंदौर पुलिस ने मामले के संबंध में कोई गिरफ्तारी नहीं की है।

VHP के बयान में आगे कहा गया है कि जिन 4 हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, वे पहले से ही मुस्लिमों के निशाने पर थे और उन्हें साजिश के तहत गिरफ्तार करवाया गया है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से एक तनु शर्मा के बारे में VHP का कहना है कि वह पिछले कुछ महीनों से लव जिहाद के खिलाफ काम कर रहा है। इसके अलावा कुछ महीने पहले तनु शर्मा ने चंदन नगर हवाई अड्डे के बगल में जमीन पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान शुरू किया था।

उन्होंने मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उसे अपने अभियानों में सफल होते देख भू-माफियाओं और जिहादियों ने उसके खिलाफ साजिश रची है। VHP ने माँग की है कि तनु शर्मा को इंदौर पुलिस सुरक्षा दे और मामले में गिरफ्तार अन्य लोगों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करे।

4 ऑडियो क्लिप जिसमें हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या की बात कही गई है

विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस को 4 ऑडियो क्लिप भी सौंपे हैं जो अब व्हाट्सएप पर प्रसारित हो रहे हैं। इन ऑडियो क्लिप में एक कथित मुस्लिम व्यक्ति को हिंदुओं को गाली देते हुए और तनु शर्मा का सिर कलम करने की बात करते हुए सुना जा सकता है। ऑडियो में मुस्लिम व्यक्ति को अन्य मुस्लिमों से तनु शर्मा को खोजने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है ताकि उसकी हत्या की जा सके। एक ऑडियो में मुस्लिम व्यक्ति का कहना है कि अगर इस्लाम का सवाल नहीं होता तो वह हत्या का आह्वान नहीं करता, लेकिन अब जब पैगंबर मुहम्मद का नाम लिया गया है तो इन हिंदू कार्यकर्ताओं को खोज कर मार दिया जाना चाहिए।

एक अन्य ऑडियो में, मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किए गए हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ का आह्वान करते हुए सुना जा सकता है।

सोशल मीडिया पर भी तन्नू शर्मा के खिलाफ एक हैशटैग ट्रेंड करता देखा गया है, जहाँ मुसलमानों ने उनकी गिरफ्तारी और उनका सिर कलम करने का आह्वान किया है। हिंदू कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कॉन्ग्रेस के नेता, एआईएमआईएम के नेता और तथाकथित मुस्लिम ‘पत्रकार’ और पोर्टल एक साथ आ गए। मिल्लत टाइम्स और उसके ‘पत्रकार’ मामले को भड़काने में सबसे आगे थे।

एआईएमआईएम और कॉन्ग्रेस नेता भी यही राग अलाप रहे।

तथाकथित ‘पत्रकारों’ और मीडिया ने हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरें लीक कीं

मुस्लिम केंद्रित मीडिया पोर्टल, सियासत टाइम्स ने सबसे पहले अपनी समाचार रिपोर्ट पर गिरफ्तार किए गए 4 हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को प्रकाशित किया था। 4 की तस्वीर को पोर्टल द्वारा फीचर इमेज के रूप में उपयोग किया गया था।

सियासत डॉट कॉम का फीचर इमेज

जमानत पर छूटे AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक स्वयंभू मुस्लिम पत्रकार के ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसने हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को ट्वीट किया था। उल्लेखनीय है कि जुबैर ने नूपुर शर्मा के जीवन को भी खतरे में डाला दिया था।

मुहम्मद जुबैर द्वारा ने एक मुस्लिम पत्रकार का के ट्वीट को रीट्वीट किया

उल्लेखनीय है कि इस्लामवादियों द्वारा कथित ईशनिंदा के आरोप में हिन्दुओं की हत्याएँ की जाती रही है। यह लिस्ट काफी लंबी है। हाल ही में नूपुर शर्मा का समर्थन करने के आरोप में दो हिंदुओं कन्हैया लाल औए उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। नूपुर शर्मा मामले में मुहम्मद जुबैर ने एक टीवी डिबेट की उनकी एक एडिटेड क्लिप ट्वीट की थी। इस वजह से दुनिया भर के इस्लामवादियों ने उनका सिर कलम करने और बलात्कार की धमकी दी थी।