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बिना अनुमति लिए DU में BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान: विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा- पुलिस तैनात, लेंगे कठोर ऐक्शन

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) का विवाद बढ़ता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में बवाल होने के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान हुआ है। डीयू की प्रॉक्टर रजनी अब्बी का कहना है कि इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन से अनुमति नहीं ली गई है। स्क्रीनिंग की सूचना पुलिस को दे दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस (Congress) के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन (BASF) ने स्क्रीनिंग का ऐलान किया है। यह स्क्रीनिंग शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को शाम 5 बजे विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में बने आर्ट्स डिपार्टमेंट के बाहर होनी है।

विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने कहा, “स्क्रीनिंग होने की जानकारी मिलने के बाद हमने दिल्ली पुलिस को सूचना दे दी है। पुलिस कार्रवाई करेगी। सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की जाएगी। हम इस तरह की स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दे सकते।”

उन्होंने यह भी कहा, “हमें जानकारी मिली है कि एनएसयूआई आर्ट्स डिपार्टमेंट में इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की प्लानिंग कर रहा है। इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। हम इस तरह के व्यवहार की अनुमति नहीं देंगे।”

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में बुधवार (25 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की तैयारी की गई थी। हालाँकि, जामिया में स्क्रीनिंग से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया था।

वहीं, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में गुरुवार (26 दिसंबर 2023) को SFI ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति के डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) की स्क्रीनिंग की। स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय ने कहा कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। वहीं, ABVP के छात्रों ने विश्वविद्यालय के गार्ड्स पर मारपीट का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी गुरुवार (26 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई। पुदुच्चेरी विश्वविद्यालय में स्क्रीनिंग के दौरान SFI और ABVP के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में 5 छात्रों के घायल होने की खबर है। 

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम (PSF) ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट और सोशल साइंसेज (TISS) में भी डॉक्यूमेंट्री दिखाने का ऐलान किया है। PSF ने कहा है कि वह शनिवार (28 जनवरी 2023) को इसकी स्क्रीनिंग करेगा। हालाँकि, TISS मैनेजमेंट ने अब तक इसके लिए अनुमति नहीं दी है।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है।

बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए हैं। BBC की इस पक्षपातपूर्ण डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं।

मुस्लिम महिला को दी BJP कार्यकर्ता होने की सजा, घर से निकाल शौहर कर रहा दूसरा निकाह: PM-CM से मदद की गुहार

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) की भाजपा नेत्री और अल्पसंख्यक आयोग की पूर्व सदस्य सोफिया अहमद ने अपने शौहर शारिक अराफात पर दूसरा निकाह करने का आरोप लगाया है। सोफिया ने यूपी पुलिस से शौहर का दूसरा निकाह रोकने की अपील की।

शारिक आराफात समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से 4 बार की विधायक रहीं गजाला लारी के भाई हैं। मूल रूप से चेन्नई निवासी सोफिया अहमद ने शारिक और उनकी बहन गजाला से अपनी जान को बताते हुए मदद माँगी है। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा से जुड़ा होना ससुराल वालों को पसंद नहीं आ रहा है।

सोफिया का कहना है कि भाजपा कार्यकर्ता होने की वजह से शौहर शारिक ने पहले तो उन्हें बिना तलाक दिए घर से निकाल दिया और अब दूसरा निकाह करने की तैयारी में है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, सोफिया और शारिक की शादी साल जून 2015 में हुई थी। वर्ष 2016 में उनके बीच के रिश्ते खराब हो गए।

आरोप है कि अगस्त 2016 में शौहर शारिक ने एक तलाक देकर सोफिया को एक साल के बच्चे के साथ घर से निकाल दिया। इसके बाद सोफिया स्वरूप नगर की एक फ्लैट में रहने लगी। ससुराल वालों से प्रताड़ित सोफिया ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया था। हालाँकि, समय बीतने के साथ सुलह समझौता हो गया और वह वर्ष 2019-2021 के बीच ससुराल आने-जाने लगी।

सोफिया का आरोप है कि उन पर ससुराल पक्ष की तरफ से भाजपा छोड़ने का लगातार दबाव बनाया जाता रहा है। सोफिया ने ऐसा नहीं किया और अब उन्हें पता चला है कि शौहर दूसरा निकाह करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद सोफिया ने पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड से निकाह रोकने की अपील की है। पुलिस कमिश्नर जोगदंड ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

इसके पहले 24 जनवरी 2023 को सोफिया ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में सोफिया ने सपा विधायक गजाला लारी और उनके परिवार से जान का खतरा बताया था। वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं पूर्व अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रही हूँ। मैं भाजपा से जुड़ी हूँ और यह मेरे पति को पसंद नहीं है। मुझ पर पार्टी छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है।”

सोफिया ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ (CM Yogi Adityanath) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मदद की गुहार लगाई थी। इस दौरान उन्होंने अपने शौहर की दूसरे निकाह का भी जिक्र किया था।

‘गूँजेगा तो यहाँ सिर्फ जय श्री राम’: शाहरुख की फिल्म पर कंगना का पैगाम, कहा- इसका नाम ‘इंडियन पठान’ होना चाहिए था

अपनी अदाकारी और बेबाक अंदाज के लिए मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर दमदार वापसी की है। वापसी के साथ ही उन्होंने शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

एक्ट्रेस ने शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को इस विवादित फिल्म को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा कि जो लोग ‘पठान’ को नफरत पर प्यार की जीत बता रहे हैं, वह सही है, लेकिन किसके प्यार के ऊपर किसकी नफरत? आइए इस पर बात करें कि कौन टिकट खरीद रहा है और इसे सफल बना रहा है?”

एक्ट्रेस ने कहा, “हाँ, ये भारत का प्यार है, जहाँ 80 प्रतिशत हिंदू रहते हैं और फिर भी एक फिल्म जिसका नाम पठान है, उसमें हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी ISI को अच्छा दिखाया गया है, वो फिल्म सक्सेसफुली चल रही है। ये भारत की महानता है। बिना किसी नफरत और जजमेंट से परे, जो देश को महान बनाती है।”

कंगना ने आगे लिखा, “ये भारत का प्यार है, जिसने नफरत और दुश्मनों की ओछी राजनीति पर जीत हासिल की है।” कंगना यहीं नहीं रुकतीं हैं। वह आगे लिखती हैं, “लेकिन उन सभी लोगों के लिए जिनकी उम्मीदें हाई हैं… ‘पठान’ सिर्फ एक फिल्म हो सकती है… गूँजेगा तो यहाँ सिर्फ जय श्री राम… जय श्री राम।”

‘मणिकर्णिका: झाँसी की रानी’ फिल्म की एक्ट्रेस ने आगे कहा, “मुझे यकीन है भारत के मुस्लिम देशभक्त हैं और अफगान पठानों से बिल्कुल अलग हैं। भारत कभी अफगानिस्तान नहीं हो सकता। हम सभी को पता है अफगानिस्तान में क्या हो रहा है। वह नर्क से भी बदतर है। इसलिए ‘पठान’ फिल्म की स्टोरीलाइन के मुताबिक उसका सही नाम ‘इंडियन पठान’ होता।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘इमरजेंसी’ की शूटिंग पूरी कर ली है। हाल ही में उन्होंने इस फिल्म के सेट से कुछ फोटोज भी शेयर की। एक्ट्रेस इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का किरदार निभाती नजर आएँगी। कंगना रनौत ने ‘इमरजेंसी’ फिल्म को खुद डायरेक्ट किया है। इस फिल्म में कंगना के अलावा अनुपम खेर, मिलिंद सोमण, सतीश कौशिक और श्रेयस तलपड़े भी हैं।

भगवा बिकनी, बेशरम रंग पर हुआ विवाद

बता दें कि यशराज फिल्म्स की बैनर तले बनी शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर स्पाई-एक्शन फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी 2023 को रिलीज हुई। फिल्म कई कारणों से विवादों में रही है। फिल्म के ‘बेशरम रंग’ गाने से धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। इसमें दीपिका भगवा बिकनी पहनकर शाहरुख के साथ रोमांस करते हुए नजर आई थीं।

इसके बाद फिल्म के दूसरे गाने ‘झूमे जो पठान’ ने विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि यह म्यूजिक डायरेक्टर विशाल-शेखर के पुराने गाने का कॉपी था। इसके अलावा, नेटिज़न्स ने भी आरोप लगाया था कि फिल्म के कई दृश्य हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों से कॉपी किए गए हैं।

वो अंधविश्वास बता खारिज करेंगे… आप भौतिक विज्ञान से आगे आध्यात्मिक विज्ञान की डोर थामे सनातन परम्परा पर गर्व कीजिए

धीरेन्द्र शास्त्री को लेकर पिछले कई दिनों से एक बहस चल रही है पूरे देश में कि चमत्कार कुछ नहीं होता, सब ट्रिक है। अब कौन समझाए इनको कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो भौतिक विज्ञान की पकड़ से बाहर की बात है और अल्बर्ट आइन्स्टाइन जैसे वैज्ञानिक ने भी यह माना था। उन्होंने अपने आखिरी समय में यह माना कि प्रकृति के कुछ रहस्यों को उजागर कर पाना भौतिक विज्ञान की पकड़ से बाहर की बात है।

मेरे कहने का तात्पर्य धीरेन्द्र शास्त्री को सही या गलत साबित करना बिल्कुल भी नहीं है, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि चमत्कारों से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सनातन परम्परा में इसके रहस्यदर्शी मनीषियों ने अनेक ऐसी विधियाँ खोजी थीं, जिनसे ऐसे सारे चमत्कार सम्भव हैं। चमत्कार से इनकार नहीं किया जा सकता है, बस जरूरत होती है संकल्प की सुपात्र बनने की और तप की। और इसमें पूर्व जन्म के तप के अंकुरण भी उदित होकर उत्तरदायी बनते हैं, ऐसा सनातन परम्परा में माना जाता है।

शंकराचार्य का बत्तीस वर्ष जैसी अल्पायु में इतने विराट काम कर पाना वरना संभव न होता। शंकराचार्य मंडन मिश्र प्रसंग में शंकराचार्य द्वारा परकाया प्रवेश के माध्यम से स्त्री रहस्य जानने का वर्णन भी आता है। कोई पूछे इन तर्क के महारथियों से कि यह चमत्कार ही था तप का या कोई ट्रिक थी।

ओशो रजनीश ने भी ऐसे तमाम प्रसंग बताए हैं।

एक अमेरिकी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा है कि एक व्यक्ति के साथ दुर्घटना होती है और वह कोमा में पहुँच जाता है। अस्पताल में पड़ा है और डॉक्टर को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है, तभी अचानक उसकी चेतना जागती है और वह अपनी पूरी समस्या और इलाज बताता है। साथ ही यह भी बताता है कि अगर इतने घंटे तक दवा उपलब्ध न हुई तो उसका शरीर मर जाएगा।

दुर्घटनाग्रस्त उस आदमी के बताए अनुसार वह दवाई उपलब्ध करवा कर उपचार किया जाता है। और वह सही हो जाता है। बाद में उसने न जाने कितने लोगों की बीमारियों का उपचार इसी तरह से बताकर किया, लोगों को ठीक किया उसने।

इस रहस्य के बारे में पूछने पर उसने बताया कि यह वो हमेशा नहीं कर पाता है। उसने कहा:

“मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि जब मेरी आँखों के मध्य खिंचाव होता है और उसके बाद जब मैं नहीं होता हूँ, तब ही यह चमत्कार घटते हैं।”

तिब्बत के लामाओं में भी तो ऐसे प्रयोगों की परम्परा रही है पूरी।

रहस्यों के साथ रामकृष्ण परमहंस का नाम हमेशा से जुड़ा रहा है। उनका एक किस्सा बड़ा ही रोचक है। जब उन्होंने सखी सम्प्रदाय की साधना की तो उनके स्तन उभर आए थे और मासिक धर्म भी शुरु हो गया था, यानि वो पूरी तरह से स्त्री बन चुके थे। कई भौतिक विज्ञानी चिकित्सक हैरत में थे इस चमत्कार को देखकर। लेकिन होता है, साधना और संकल्प से कोई भी चमत्कार सम्भव है।

एक और उदाहरण देना चाहूँगा ओशो के उद्धरण के साथ, जिसके ऐसे भी लोग हुए हैं इस देश में जिन्होंने योग साधना से अपने प्राणों पर काबू करने का कई बार परीक्षण किया और चिकित्सकीय परीक्षणों में वैज्ञानिक मानक के अनुसार पश्चिम के वैज्ञानिकों ने डेथ सर्टिफिकेट बना दिया उनका। लेकिन उन्होंने अपने प्राण वापस लौटा लिए।

कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि यदि कोई चीज आपकी पकड़ से बाहर की है तो आप उसे महज अंधविश्वास बताकर खारिज नहीं कर सकते हैं।

सनातन परम्परा के मनीषियों के कई अविष्कार हैं ऐसे, जिन पर पश्चिम का विज्ञान आज तक पता नहीं कर सका, बस अपने अहंपोषण की खातिर उनको अंधविश्वास बताकर खारिज करने के प्रयास जरूर करता रहा है।

मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि विधर्मियों के विलासी विमर्श का हिस्सा बनने के बजाय गर्व करना सीखिए अपनी सनातन परम्परा पर।

ज्यादा सुरक्षित-ज्यादा कंट्रोल, क्या एंड्रॉयड को रिप्लेस कर देगा BharOS: देसी ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानिए सब कुछ

भारत ने अपना स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम भार ओएस (BharOS) लॉन्च किया है। फिलहाल यह आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। लेकिन आने वाले दिनों में इससे Android और iOS को कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। मंगलवार (25 जनवरी, 2023) को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अश्विनी वैष्णव की उपस्थिती में आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम ‘BharOS’ की टेस्टिंग की गई।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम मार्केट में फिलहाल गूगल का एंड्रॉयड (Android) और एप्पल का आईओएस (iOS) छाया हुआ है। भारतीय भार ओएस का मुकाबला एंड्रॉयड और आईओएस से है। डेवलपर्स का कहना है कि एंड्रॉयड के मुकाबले यह सुरक्षित और कम स्पेस लेने वाला ओएस है।

क्या है देसी ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS ?

भार ओएस (BharOS) को आईआईटी मद्रास के एक स्टार्टअप जेएंडके ऑपरेशन प्राइवेट लिमिटेड (Jandk Operations Private Limited) ने विकसित किया है। प्रोजेक्ट को विकसित करने में भारत सरकार ने भी वित्तीय सहायता दी है। भार ओएस भी एंड्रॉयड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट (AOSP) का इस्तेमाल करता है। इसलिए एंड्रॉयड और भार ओएस में काफी समानता है। वहीं iOS एप्पल का प्रोपराइटरी ऑपरेटिंग सिस्टम है। BharOS और ios में ज्यादा समानता नहीं है।

BharOS की विशेषताएँ

बताया जा रहा है कि BharOS में कोई डिफॉल्ट ऐप या सर्विस उपलब्ध नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि यूजर जो ऐप चाहें अपने से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप कई तरह की परमिशन माँगते हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि BharOS अपने यूजर के पास ज्यादा कंट्रोल देगा। वह अपनी पसंद का ऐप डाउनलोड कर सकेगा, जिसके फीचर्स पर उसे ज्यादा भरोसा होगा। यानी BharOS को प्राइवेसी के लिहाज से अधिक सुरक्षित माना जा सकता है। इसके लिए BharOS को अपना प्ले स्टोर डिवेलप करना होगा जहाँ से यूजर को पसंद के ऐप मिल सकें।

प्री एप्लीकेशन स्टोर न होने से यूजर्स को ज्यादा स्टोरेज स्पेस मिलेगा। बताया गया है कि इस ऑपरेटिंग सिस्टम में कोई डिफॉल्ट ऐप भी नहीं होगा। यूजर्स को अनचाहे ऐप का इस्तेमाल करने के लिए भी मजबूर नहीं किया जाएगा। BharOS एंड्रॉयड की तरह नेटिव ओवर द एयर (NOTA) अपडेट प्रदान करेगा। इसका मतलब होता है सॉफ्टवेयर का अपडेट संस्करण (version) डिवाइस पर अपने आप डाउनलोड इंस्टॉल हो जाएगा।

देसी ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइवेट ऐप स्टोर सेवाओं (PASS) के द्वारा भी पसंद के ऐप डाउनलोड करने की अनुमति देगा। इसके लिए विश्वसनीय प्राइवेट ऐप्स को ही अनुमति दी जाएगी।

BharOS से जुड़े इन सवालों का जवाब मिलना बाकी

भार ओएस बनाने वाली कंपनी ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि वह स्मार्टफोन कंपनियों से किस तरह कनेक्ट करेगी। अभी यह भी साफ नहीं है कि BharOS आम लोगों के लिए कब तक उपलब्ध होगा। ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले फोन सस्ते होंगे या महँगे? BharOS का अपना ऐप स्टोर होगा या नहीं?

यदि भार ओएस यूजर्स को अफना ऐप स्टोर देता है तो इससे गूगल ऐप स्टोर की जरूरत खत्म हो जाएगी। हो सकता है अपने ऐप स्टोर में ओएस ऐसे ऐप्स को प्राथमिकता दे जो भारतीय यूजर्स के लिए ज्यादा यूजर फ्रेंडली हों।

कई बड़ी चुनौतियाँ

मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि BharOS की राह बहुत आसान नहीं होने वाली है। उदाहरण के लिए ज्यादातर भारतीय एंड्रॉयड यूजर जीमेल का इस्तेमाल करते हैं जो स्मार्टफोन की डिफॉल्ट ईमेल सर्विस है। अगर BharOS के ऐप स्टोर पर गूगल के ऐप नहीं होंगे तो कितने लोग BharOS वाला स्मार्टफोन चुनेंगे इस पर संशय होगा। गूगल और मेटा जैसी कंपनियाँ द्वारा उनके फर्स्ट पार्टी ऐप्स को BharOS के पर पोर्ट करवाना आसान नहीं होगा।

स्मार्टफोन कंपनियाँ भी इस ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ फोन लॉन्च करने के लिए एकदम से शायद ही तैयार हों। दरअसल ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग ने अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किए थे। लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज फोन बिल्कुल ही अलग ऑपरेटिंग सिस्टम पर था और काफी एडवांस्ड माना गया था, लेकिन नाकामयाब हो गया। इससे समझा जा सकता है कि BharOS के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं।

एक दिक्कत यह भी है कि भारत में अधिकतर एंड्रॉयड फोन अब चीन की कंपनियाँ बेच रही हैं। ये चीनी कंपनियाँ आसानी से भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम पर शिफ्ट हो जाएँगी कहना मुश्किल है।

पाकिस्तान का पानी भी बंद करेगा भारत? सिंधु जल संधि के उल्लंघन पर नोटिस, जवाब के लिए 90 दिन की मोहलत

साल 1960 में हुई सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) में संशोधन के लिए भारत ने पाकिस्तान (Pakistan) को नोटिस जारी किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने संधि के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन का उल्लंघन किया है। इसलिए उसे नोटिस जारी करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार ने पाकिस्तान को यह नोटिस बुधवार (25 जनवरी 2023) को भेजा है। इस नोटिस को लेकर भारत सरकार का कहना है कि भारत पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि को लागू करने का समर्थक और जिम्मेदार सहयोगी रहा है। लेकिन, पाकिस्तान की गतिविधियों ने भारत को यह नोटिस भेजने के लिए मजबूर किया है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि साल 2015 में पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं (HEPs) पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जाँच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति का अनुरोध किया था। हालाँकि, अगले ही साल यानी साल 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए इस अनुरोध को वापस ले लिया। साथ ही, कहा कि एक मध्यस्थ अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए।

पाकिस्तान के लगातार कहने पर विश्व बैंक ने हाल ही में तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थ न्यायालय दोनों पर ही कार्रवाई शुरू की है। हालाँकि, एक ही मुद्दे पर इस तरह की दो प्रक्रियाएँ सिंधु जल संधि के किसी भी प्रावधान में नहीं है। इसके विरोधाभासी परिणाम सामने आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत चाहता है कि आपस में बातचीत से मामले का हल निकाला जाए। वहीं, पाकिस्तान इससे बचता रहा है। साल 2017 से 2022 तक स्थायी सिंधु आयोग की 5 बैठकें हुई हैं। सभी बैठकों में पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार किया।

भारत ने पाकिस्तान को यह नोटिस सिंधु जल संधि के भौतिक उल्लंघन को सुधारने के लिए 90 दिनों के अंदर अंतर-सरकारी वार्ता में शामिल होने के लिए मौका देने के लिए किया है। इस प्रक्रिया के जरिए भारत बीते 62 सालों में पाकिस्तान की हरकतों से मिली सीख के साथ सिंधु जल संधि में कुछ अपडेट कराना चाहता है।

सिंधु जल संधि…

बता दें कि भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के अनुसार सतलज, व्यास और रावी का पानी भारत को दिया गया था। वहीं सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया था। बड़ी बात यह है कि इस संधि में भारत और पाकिस्तान के अलावा विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता था।

14 साल की बच्ची से रोज रेप करता था 48 साल का मुकर्रम अली, बना रखे थे Video: पीड़िता ने बच्चे को दिया जन्म, दरिंदे को पुलिस ने दबोचा

दिल्ली की एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया है। मुकर्रम अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद अली की दरिंगदी सामने आई थी। मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी का है।

मुकर्रम अली ने मोबाइल चोरी का आरोप लगाकर पीड़िता को पहली बार हवस का शिकार बनाया। उसका वीडियो बनाकर फिर ब्लैकमेल करने लगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग को एक जगह पर ले जाकर वह रोज रेप करता था।

रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने बताया है कि वह अक्सर मुकर्रम अली की दुकान पर कोल्ड ड्रिंक लेने जाती थी। एक दिन जब वह मुकर्रम के दुकान पर गई तो उसने उस पर फोन चोरी का आरोप लगा दिया। पीड़िता इससे डर गई। इसके बाद वह उसे नंद नगरी ले गया। यहाँ चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे पिलाया। बेहोश होने के बाद रेप कर वीडियो बना लिया। इसके बाद वह ब्लैकमेल कर लगातार नाबालिग का यौन शोषण कर रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार 18 दिसंबर 2023 को लड़की के पेट में दर्द हुआ तो उसके आठ महीने की गर्भवती होने का खुलासा हुआ। शुरुआत में उसने अपने कथित दोस्त सलमान पर वीडियो बनाकर रेप का आरोप लगाया। लेकिन जाँच में सलमान नाम का ऐसा कोई व्यक्ति मिला ही नहीं। इसके बाद पीड़िता ने मुकर्रम अली की दरिंगदगी का खुलासा किया। यह भी बताया कि पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठ बोलने का दबाव भी उसने ही डाला था। मुकर्रम को 25 जनवरी को गिरफ्तार कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया गया।

ससे पहले दिल्ली में ही एक नाबालिग लड़की से रेप और इस्लामी धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया था। पीड़िता डीयू (Delhi University) की छात्रा है। नाबालिग का आरोप है कि जहाँगीरपुर का रहने वाला शाकिब उसे निकाह के लिए ब्लैकमेल कर रहा था। शाकिब पर पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो बनाने का भी आरोप है। शाकिब पर रविवार (22 जनवरी 2023) को लड़की के घर पर पत्थरबाजी करने का भी आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपित पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। FIR होने के बाद शाकिब फरार हो गया है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

इस्लाम ने ‘पठान’ के खरीदे 120 टिकट, गले में माला जैसे लटका हिंदू संगठनों पर उगला जहर: Video से आया असम पुलिस की रडार पर

असम पुलिस (Assam Police) ने दारंग जिले में 25 जनवरी 2023 को मोफिदुल इस्लाम को भड़काऊ बयान देने के आरोप में हिरासत में ले लिया। उसने हिंदू संगठनों को चुनौती देते हुए शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) फिल्म के 120 टिकट खरीदे थे। हालाँकि, बाद में पुलिस ने उसे छोड़ दिया, लेकिन उस नजर रख रही है।

इस्लाम दरांग के धुला इलाके का रहने वाला है। वह नॉर्थ-ईस्ट माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (NEMSU) का नेता है। धुला थाना की पुलिस ने बताया कि इस्लाम ने बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों को चुनौती दी थी। इन संगठनों ने ‘पठान’ की रिलीज को लेकर विरोध किया था। उन्होंने इसके विवादित गाने बेशरम रंग और दीपिका पादुकोण द्वारा भगवा बिकिनी पहनने पर आपत्ति जताई थी।

दरांग जिले के पुलिस अधीक्षक प्रशांत सैकिया ने आईएएनएस को बताया, “इस्लाम ने ‘पठान’ फिल्म के करीब 120 टिकट खरीदे थे। इसके बाद वह आपत्तिजनक टिप्पणी करने लगा और लोगों को चुनौती देने लगा। इससे इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ सकता है। इसलिए हमने उसे हिरासत में ले लिया गया।”

एसपी सैकिया के मुताबिक, NEMSU नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 107 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने आगे कहा, “इस्लाम को बाद में छोड़ दिया गया, क्योंकि उसके खिलाफ कोई गंभीर आरोप नहीं थे। हालाँकि, हम उस पर अभी भी कड़ी नजर रख रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर इस्लाम का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वह टिकट की माला बनाकर उसे अपने गले में पहने हुए दिखाई दे रहा है। यही नहीं, वह अलग-अलग एंगल से पोज देकर अपनी फोटो भी क्लिक करवा रहा है। इसी तरह एक और व्यक्ति ने कथित तौर पर फिल्म ‘पठान’ की 192 टिकट खरीदे थे। शख्स की पहचान रंगिया के केंदुकोना इलाके के रहने वाले फारूक खान के रूप में हुई है।

फिल्म की रिलीज से पहले अभिनेता शाहरुख खान ने हाल ही में असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) को फोन किया था। उन्होंने पठान फिल्म को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद सीएम सरमा ने उन्हें भरोसा दिलाया था।

क्यों हो रहा ‘पठान’ का विरोध

यशराज फिल्म्स की बैनर तले बनी शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर स्पाई-एक्शन फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी 2023 को रिलीज हुई। फिल्म कई कारणों से विवादों में रही है। फिल्म के ‘बेशरम रंग’ गाने से धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। इसमें दीपिका भगवा बिकनी पहनकर शाहरुख के साथ रोमांस करते हुए नजर आई थीं।

इसके बाद फिल्म के दूसरे गाने ‘झूमे जो पठान’ ने विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि यह म्यूजिक डायरेक्टर विशाल-शेखर के पुराने गाने का कॉपी था। इसके अलावा, नेटिज़न्स ने भी आरोप लगाया था कि फिल्म के कई दृश्य हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों से कॉपी किए गए हैं।

छठी बार ‘परीक्षा पे चर्चा’: PM मोदी ने बच्चों संग लगाई क्लास, पढ़ाया दबाव और टाइम मैनेजमेंट का पाठ, कहा- काम संतोष देता है

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम का 6वाँ संस्करण आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने छात्रों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा है कि जिस तरह क्रिकेटर सिर्फ खेलने पर ध्यान देता है, लोगों के चिल्लाने पर नहीं, उसी तरह छात्रों को भी दवाब में नहीं आना चाहिए।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “शायद इतनी ठंड में पहली बार परीक्षा पे चर्चा हो रही है। आमतौर पर फरवरी में करते हैं, लेकिन विचार आया कि आप सबको 26 जनवरी का भी लाभ मिले। परीक्षा पे चर्चा मेरी भी परीक्षा है। देश के कोटि-कोटि विद्यार्थी मेरी परीक्षा ले रहे हैं। मुझे ये परीक्षा देने में आनंद आता है।”

पीएम ने कहा, “मुझे लाखों की तादाद में सवाल पूछते हैं, व्यक्तिगत समस्याएँ बताते हैं, परेशानियाँ बताते हैं। सौभाग्य है कि देश का युवा मन क्या सोचता है, किन उलझनों से गुजरता है, देश से उसकी अपेक्षाएँ क्या हैं, सरकारों से अपेक्षा क्या है, सपने क्या हैं, संकल्प क्या हैं… मेरे लिए ये बहुत बड़ा खजाना है। मैंने अपने सहयोगी को कहा है कि सारे सवालों को इकट्ठा करके रखिए। 10-15 साल बाद मौका मिलेगा तो सोशल साइंटिस्ट इसका एनालिसिस करेंगे। पीढ़ी और स्थिति बदलने के साथ सपने-संकल्पों-सोच के बदलने का भी आकलन करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार के लोगों को बहुत अपेक्षाएँ होना स्वाभाविक है। इसमें कोई गलत भी नहीं है, लेकिन अगर परिवार के लोग अपेक्षाएँ सोशल स्टेटस के कारण कर रहे हैं तो यह चिंता की बात है। सोशल स्टेटस का लोगों पर बहुत दवाब होता है। लोग बाहर जाकर अपने बच्चों की क्षमता को जानते हुए भी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। इसके बाद वे घर आते हैं तो बच्चों से ऐसी ही अपेक्षा करते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “कोई अच्छा करता है तब भी उससे अच्छा करने की उम्मीद की जाती है। हम तो राजनीति में हैं। कितने भी चुनाव जीत लें, लेकिन ऐसा दबाव बनाया जाता है कि हमें हारना ही नहीं है। 200 सीट लाए हैं तो ढाई सौ क्यों नहीं लाए, 250 लाए तो 300 क्यों नहीं लाए। चारों तरफ से दबाव बनाया जाता है। हमें इन दबावों में नहीं आना चाहिए।”

पीएम ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए आगे कहा, “कभी आप क्रिकेट देखने गए होंगे तो कुछ बैट्समैन आते हैं और पूरा स्टेडियम चिल्लाना शुरू कर देता है। चौका-चौका, छक्का-छक्का। क्या वो ऑडियंस की डिमांड के ऊपर चौके-छक्के लगाता है? लोग चिल्लाते रहें, बैट्समैन का ध्यान गेंद पर ही होता है। बॉलर के माइंड को स्टडी करने की कोशिश करता है। जैसी बॉल है वैसे ही खेलता है। फोकस रहता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से कहा, “यदि आप फोकस रहेंगे तो दबाव को झेल लेंगे। संकट से बाहर आ जाएँगे। दबावों के दबाव में ना रहें, दबाव को एनालिसिस करिए। यह जानिए ये कि आप स्वयं को अंडरइस्टीमेट तो नहीं कर रहे हैं। बच्चों को अपनी क्षमता से खुद को कम नहीं आँकना चाहिए। पक्का विश्वास है कि ऐसी समस्याओं को आप आराम से सुलझा लेंगे।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपके भीतर की जो ताकत है, वही ताकत आपको आगे ले जाएगी। परीक्षाएँ तो आती-जाती हैं, लेकिन हमें जिंदगी जी भर के लिए जीना है। इसलिए, शॉर्टकट की ओर नहीं जाना चाहिए। सामान्य लोग जब असामान्य काम करते हैं तो ऊँचाई पर चले जाते हैं। ऐसे लोग एवरेज के मानदंड को तोड़ देते हैं।”

टाइम मैनेजमेंट की वकालत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “समृद्ध लोकतंत्र के लिए आलोचना एक शुद्धि यज्ञ होता है। आलोचना एक समृद्ध लोकतंत्र की पूर्ण शर्त है। आलोचना करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, एनालिसिस करना पड़ता है। ज्यादातर लोग आरोप लगाते हैं, आलोचना नहीं करते हैं। आलोचना और आरोप में बड़ी खाई है।”

स्टेडियम में आजादी के अमृत महोत्सव के अलावा, विभिन्न तरह की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान जी-20 का लोगो भी लगाया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री हजारों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों से मिले और उनसे चर्चा कीं।

आधे से अधिक भारतीयों की आज भी नरेंद्र मोदी ही पसंद, सरकार के कामकाज के भी बढ़े मुरीद: आज हुए चुनाव तो NDA की सत्ता में होगी वापसी

आम चुनाव 2024 में हैं। लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी (PM Modi) की वापसी के आसार जताए जा रहे हैं। इंडिया टुडे ने देश का मिजाज जाने की जो हालिया कोशिश की है, उसके आँकड़े भी इस पर मुहर लगाते हैं।

‘मूड ऑफ द नेशन (Mood of the Nation poll)’ नामक यह रायशुमारी इंडिया टुडे और सीवोटर ने मिलकर की है। इससे पता चला है कि यदि आज लोकसभा के चुनाव हो तो एनडीए फिर से सत्ता में आसानी से वापसी करेगी। बीजेपी अपने दम पर बहुमत का नंबर पार करने में कामयाब रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आठ साल बाद भी बनी हुई है। कोई दूसरा उनके आसपास भी नहीं दिखता। 67 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उनकी अगुवाई में एनडीए की सरकार ने अच्छा काम किया है।

‘मूड ऑफ द नेशन’ के ताजा नंबर बताते हैं कि मोदी सरकार के काम के प्रशंसकों की संख्या पिछली बार के मुकाबले 11 फीसदी बढ़ी है। अगस्त 2022 में 56 प्रतिशत लोगों ने माना था कि एनडीए सरकार का कामकाज बेहतरीन है। एनडीए सरकार के प्रदर्शन से असंतुष्ट लोगों की संख्या में गिरावट आई है। अगस्त 2022 के 32 प्रतिशत के मुकाबले इस बार ऐसे लोगों की संख्या 18 प्रतिशत रह गई है। जाहिर है कि कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है और सरकार की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

सरकार के कोविड को सँभालने के तरीके, कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और राम मंदिर के निर्माण कार्य की वजह से एनडीए सरकार से लोग खुश दिख रहे हैं। कोविड के दौरान सरकार ने जिस तरह से स्थिति सँभाली, उसे 20 प्रतिशत लोगों ने सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया है। वहीं 14 प्रतिशत लोगों ने कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। 12 प्रतिशत लोग भव्य राम मंदिर के निर्माण को बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं। वहीं 25 प्रतिशत लोग महँगाई को सरकार की बड़ी विफलता मानते हैं।

प्रधानमंत्री की पसंद के सवाल पर 52 प्रतिशत लोगों ने नरेंद्र मोदी को वोट दिया है। इसमें अगस्त 2022 के मुकाबले एक प्रतिशत की कमी आई है। राहुल गाँधी प्रधानमंत्री के तौर पर 14 प्रतिशत लोगों की ही पसंद हैं।

सर्वे के अनुसार,अगर आज चुनाव होते हैं तो लोकसभा की कुल 543 सीटोंं मेंं एनडीए को 292, यूपीए को 153 और अन्य के खाते में 92 सीट जाएँगी। वहीं वोट प्रतिशत की बात करें तो एनडीए को 43, यूपीए 30 और अन्य को 27 प्रतिशत वोट हासिल होंगे। दूसरी ओर पार्टी वाइज वोट प्रतिशत की बात करें तो अभी चुनाव होने की स्थिति में भाजपा को 39 प्रतिशत, कॉंन्ग्रेस को 19 प्रतिशत और अन्य के खाते में 39 प्रतिशत वोट जाएँगे। एनडीए को असम, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सीटों का फायदा होने का अनुमान लगाया गया है।