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‘बाप को बाप कहना घातक तो यह रहना चाहिए’: बाबा बागेश्वर ने ‘कट्टरता’ पर लल्लनटॉप की बाँधी ‘ठठरी’, जानिए जया किशोरी से शादी पर क्या बोले

इंडिया टुडे ग्रुप के पोर्टल दी लल्लनटॉप (The Lallantop) ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक इंटरव्यू किया है। लल्लनटॉप उन संस्थानों में है जो श्याम मानव के आरोपों के बाद ‘बागेश्वर सरकार’ के मीडिया ट्रायल में आगे था। वैसे श्याम मानव के आरोपों को खारिज करते हुए नागपुर पुलिस पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को क्लीनचिट दे चुकी है।

करीब 44 मिनट के इस इंटरव्यू में लल्लनटॉप के पत्रकारों ने बागेश्वर पीठाधीश्वर को अपनी मंशा के साथ घेरने की पूरी कोशिश की है। लेकिन उन्होंने अपने चिर परिचित मुस्कुराने के अंदाज में इन सवालों की ठठरी बाँधकर लल्लनटॉप पत्रकारों की बोलती बंद कर दी।

कट्टरता फैलाने के आरोपों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “हम मानते हैं कि पूरी दुनिया में सबसे प्राचीन धर्म सनातन है। इसलिए सब सनातनी हैं। बाकी को हम धर्म नहीं पंथ मानते हैं। हम चादर या फादर के विरोधी नहीं हैं। हम अपने धर्म के कट्टर हैं।” इस पर लल्लनटॉप के पत्रकार ने पूछा यदि आप अपने धर्म के कट्टर हैं तो उनके विरोधी नहीं हुए? इस सवाल के जवाब में धीरेंद्र कृष्ण ने कहा, “यदि वे विरोध मान रहे हैं तो यह उनका दृष्टिकोण है। उनको अपने धर्म का कट्टर होना चाहिए। हम अपने धर्म को मान रहे हैं ये हमारी कट्टरता है। हम किसी के विरोधी नहीं हैं।”

इसके बाद पत्रकार कहता है कि कट्टरता तो घातक हो सकती है। इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “यदि दावे के साथ बाप को बाप मानना घातक है तो अच्छी बात है।” उन्होंने आगे कहा है, “यदि कट्टरता के साथ बाप को बाप कहना घातक है तो फिर इस दुनिया का प्रत्येक वह व्यक्ति घातक है, जो अपने बाप को बाप कहता है। भगवान राम इस दुनिया के प्रत्येक हिंदू व्यक्ति के पिता हैं, परमपिता हैं, जगदीश्वर हैं, जगन्नाथ हैं तो वो बाप हैं। इसलिए, ललकार कर बाप को बाप कहना यदि लल्लनटॉप की नजर में घातक है तो ये घातकपन रहना चाहिए। ऐसे में तो प्रत्येक व्यक्ति घातक है।”

नीचे आप 16 मिनट के बाद इस बातचीत को सुन सकते हैं।

इंटरव्यू के आखिरी हिस्से में जिसे आप 39 मिनट के बाद सुन सकते हैं बागेश्वर धाम में होने वाले सामूहिक विवाह आयोजन और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खुद के विवाह को लेकर भी सवाल किया गया।

जब पत्रकार पूछता है कि आपको विवाह का आदेश मिल गया है तो उसके जवाब में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वे विवाह करेंगे। गृहस्थ परंपरा में जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई मिशनरी उनको टारगेट करते रहेंगे। वे कुछ भी साजिश कर सकते हैं। वे कहते हैं कि साधु को गिराने के दो तरीके हैं। पैसा और स्त्री। पैसा हम लेते नहीं और गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने उनके दूसरे ट्रिक को भी खत्म कर देंगे।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी से नाम नहीं जोड़ने को कहते हैं, बावजूद लल्लनटॉप का पत्रकार जया किशोरी का जिक्र करता है। इसके जवाब में बागेश्वर सरकार ने कहा कि उनकी देखने की दृष्टि बहन की है। साथी ही बताया कि जया किशोरी से उन्होंने आज तक न कभी बात की है। न कभी उनसे मिले हैं।

BBC की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री पर दिल्ली से पुदुच्चेरी तक बवाल काट रहे वामपंथी, ABVP ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दिखाई कश्मीर फाइल्स

प्रतिबंध के बावजूद बीबीसी की प्रोपेंगेंडा डॉक्यूेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर देश के कई हिस्सों में वामपंथियों का बवाल देखने को मिला है। पुदुच्चेरी, जादवपुर और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसकी स्क्रीनिंग हुई है। TISS ने भी स्क्रीनिंग का ऐलान किया है। कई जगहों पर झड़प की भी खबर है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एबीवीपी की ओर से ‘द कश्मीर फाइल्स’ दिखाई गई है।

डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय लगातार चर्चा में रहा है। गुरुवार (26 दिसंबर 2023) को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्विद्यालय परिसर में बिना अनुमति डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। इसका विरोध करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग की। इस स्क्रीनिंग को लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा कहा गया है कि कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। वहीं, ABVP के छात्रों ने विश्वविद्यालय के गार्ड्स पर मारपीट का आरोप लगाया है।

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट और सोशल साइंसेज (TISS) में भी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखाने का ऐलान किया है। प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने कहा है कि वह शनिवार (28 जनवरी 2023) को इसकी स्क्रीनिंग करेगा। हालाँकि टीआईएसएस मैनेजमेंट ने अब तक इसके लिए अनुमति नहीं दी है।

वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने अंबेडकर विश्विद्यालय में जामिया मिल्लिया इस्लामिया व जेएनयू के छात्रों समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया। यह प्रदर्शन जामिया मिल्लिया इस्लामिया में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को होना है।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी गुरुवार (26 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई। पुदुच्चेरी विश्वविद्यालय में स्क्रीनिंग के दौरान SFI और ABVP के बीच हिंसक झड़प में 5 छात्रों के घायल होने की खबर है। इससे पहले जेएनयू और जामिया में भी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद देखने को मिला था।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं।

प्राइमरी स्कूल में 26 जनवरी, मुस्लिम टीचर का भारत माता को पुष्प अर्पित करने से इनकार: मजहब का दे रहा था हवाला, देखिए Video

अलीगढ़ के एक प्राइमरी स्कूल के मुस्लिम टीचर ने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2023) के मौके पर भारत माता पर पुष्प चढ़ाने से इनकार कर दिया। इसका वीडियो वायरल है। शरुआत में बीमारी और मजहब का हवाला देकर इनकार कर रहा शिक्षक बाद में दबाव पड़ने पर मान गया। शिक्षक की पहचान हसमुद्दीन के तौर पर हुई है।

यह स्कूल अलीगढ़ के इगलास थाना क्षेत्र के लखटोई गाँव में है। वीडियो में देखा जा सकता है कि हसमुद्दीन बैठा हुआ है और कुछ लोग उसे पुष्प चढ़ाने को कह रहे हैं। शुरुआत में हसमुद्दीन बीमारी का बहाना बनाता है और बाद में अपने मजहब का हवाला देते हुए कहता है कि हम सिर्फ ऊपर वाले के सामने मत्था टेकते हैं।

वीडियो में साथी अध्यापक उसे समझाते हुए कह कह रहे हैं कि यह बात ठीक नहीं है। हम लोग भी मुस्लिमों के कार्यक्रम में जाते हैं। हम भी वहाँ मत्था टेकते हैं। इस पर हसमुद्दीन कहता है कि हमारे मजहब में यह नहीं सिखाते। हम किसी के सामने मत्था नहीं टेकते। हम सिर्फ ऊपर वाले के सामने मत्था टेकते हैं। फिर वहाँ मौजूद लोग हसमुद्दीन से कहते हैं कि यह तो संविधान के अनुसार है। जब आप यहाँ आए हो तो भारत माता पर पुष्प चढ़ा दो। फिर हसमुद्दीन फूल चढ़ाने जाता है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार ने बताया है कि ध्वजारोहण के समय भी हसमुद्दीन एक तरफ बैठा हुआ था। कुछ लोगों ने उससे फूल चढ़ाने को कहा तो उसने पेट में दर्द होने की बात कह इनकार कर दिया। बाद में काफी समझाने पर उसने फूल चढ़ाए। वीडियो वायरल होने पर पुलिस और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले में जाँच की बात कह रहे हैं। वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेन्द्र कुमार का कहना है, “वायरल वीडियो के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी को सूचित किया गया है। जानकारी मिली है कि हसमुद्दीन नाम के शिक्षक ने राष्ट्रगान गान गाने, सरस्वती प्रतिमा और भारत की प्रतिमा पर फूल चढ़ाने करने से मना किया है। इसकी जाँच की जा रही है। अगर मामले में सच्चाई मिलती है तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

इस पूरे प्रकरण पर सफाई देते हुए हसमुद्दीन ने कहा है, “मेरी तबियत खराब थी। मैं तीन दिन से बीमार था और मेरे नाक से खून आ रहा था। इसलिए मैं दवाई खाकर वहाँ बैठा था। मेरे पेट में दर्द हो रहा था। इसलिए जब मास्टर साहब वहाँ आए तो मैंने कहा कि मेरे पेट में दर्द है। वहीं मजहब वाले सवाल पर हसमुद्दीन ने कहा कि जब कुछ लोग घेर लेते हैं तो दबाव आ जाता है और कुछ ऐसा कहना पड़ जाता है।” उसने कहा कि मुझे माँ सरस्वती की प्रतिमा में फूल चढ़ाने में कोई हर्ज नहीं है और मैं बाद में भी ऐसा कर सकता हूँ।

नाक से दिया जाने वाला दुनिया का पहला कोरोना वैक्सीन भारत ने किया लॉन्च: बाजार में 800 रुपए है कीमत, सरकार को आधी से भी कम कीमत में मिलेगी

भारत ने विश्व का पहला स्वदेशी नेजल कोविड वैक्सीन (Nasal Covid Vaccine) लॉन्च किया है। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार (26 जनवरी 2023) को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक (Bharat Biotech) द्वारा विकसित iNCOVACC को लॉन्च किया।

नेजल वैक्सीन यानी नाक के जरिए दी जाने वाली इस वैक्सीन- BBV154 को पिछले साल नवंबर में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से वयस्कों के लिए आपातकालीन उपयोग के लिए बूस्टर डोज के रूप मंजूरी मिली थी।

भारत बायोटेक द्वारा ने कुछ दिन पहले अपने बयान में कहा था कि iNCOVACC वैक्सीन की कीमत बाजारों के लिए 800 रुपए होगी, जबकि भारत सरकार और राज्य सरकारों को यह 325 रुपए में दी जाएगी। iNCOVACC को वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सेंट लुइस के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।

कंपनी ने कहा था कि इस टीके का तीन चरणों में क्लिनिकल परीक्षण हुआ है और इससे प्राप्त सफल परिणामों के साथ मूल्यांकन किया गया। वहीं, देश के वैक्सीन टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि नाक का यह टीका उन लोगों को नहीं दिया जा सकता है, जिन्होंने बूस्टर खुराक ली है।

कंपनी ने फेज-1 के ट्रायल में 175 को शामिल किया गया था, जबकि दूसरे फेज के ट्रायल में 200 लोगों को शामिल किया था। तीसरे फेज का दो तरह से ट्रायल किया गया था। पहला ट्रायल 3,100 लोगों पर किया गया था, जिन्हें वैक्सीन की दो डोज दी गई थी। वहीं, दूसरा ट्रायल 875 लोगों पर हुआ था और उन्हें ये वैक्सीन बूस्टर डोज के तौर पर दी गई थी।

भारत बायोटेक के इस टीके को दिसंबर 2022 में प्राथमिक 2-खुराक और हीट्रोलोगस बूस्टर के रूप में मंजूरी मिली थी। इससे पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को आपातकालीन स्थिति में इंट्रानेजल वैक्सीन के प्रतिबंधित उपयोग को मंजूरी दी थी।

डॉ. अरोड़ा के अनुसार, “यह बहुत आसान है। प्रत्येक नाक में चार बूंदें, कुल 0.5 मिलीलीटर डालना है। बस इतना ही… और इसमें थोड़ी देर के लिए कुछ नाक की रूकावट को छोड़कर बहुत कम प्रतिकूल घटनाएँ होती हैं। यह एक अत्यंत सुरक्षित वैक्सीन है।” उन्होंने आगे बताया, “इस टीके के लिए भी किसी भी दूसरे टीके की तरह हमें 15 से 30 मिनट तक इंतजार करने की जरूरत होती है। अगर कोई प्रतिक्रिया होती है तो इसे तुरंत ठीक किया जा सकता है।”

iNCOVACC एक ऐसा कोविड वैक्सीन है जिसमें सीरींज, सुई, अल्कोहल वाइप्स, बैंडेज आदि की आवश्यकता नहीं होती है। इसे नाक के जरिए शरीर में पहुँचाया जाता है। वैक्सीन की दो खुराक 28 दिन के अंतराल पर देनी होती है। इसका खुराक लेने के लिए CoWIN वेबसाइट पर जाकर इंट्रानेजल वैक्सीन की खुराक के लिए अपॉइंटमेंट बुक किया जा सकता है। हालाँकि, इसे चौथे खुराक के रूप में बुक नहीं किया जा सकता।

इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वैक्सीन को लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि इसे सीधे नाक से दिया जाता है। इसका दूसरा बड़ा फायदा ये होगा कि इसके स्टोरेज की समस्या भी कम होगी। फिलहाल जिन वैक्सीन को लगाया जा रहा है, उनके लिए स्टोरेज एक बड़ी समस्या होती है।

इंट्रानेजल वैक्सीन को ‘ग्लोबल गेम चेंजर’ करार देते हुए भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ कृष्णा एल्ला ने कहा था, “हमें इंट्रानेजल वैक्सीन तकनीक और डिलीवरी सिस्टम में ग्लोबल गेम चेंजर iNCOVACC की मंजूरी की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है।” बता दें कि इसे विकसित करने के लिए भारत सरकार द्वारा कोविड सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से आंशिक रूप से फंड किया गया था।

‘शाहरुख खान सज्जन और सबसे ज्यादा सेक्युलर व्यक्ति’: गीतकार जावेद अख्तर ने बॉयकॉट को बताया बकवास, कहा- बॉलीवुड कल्चर का बहिष्कार नहीं हो सकता

हमेशा विवादों रहने वाले लेखक एवं गीतकार जावेद अख्तर ने पठान फिल्म रिलीज होने के साथ ही इसके ऐक्टर शाहरुख खान की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान से ज्यादा सेक्युलर कोई नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने बॉयकॉट को बकवास बताया।

शाहरुख की तारीफ करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, “उनके बारे में जो कुछ भी कहा जा रहा है, वह सब बकवास है। वह एक सज्जन और सेक्युलर व्यक्ति हैं। उनसे ज्यादा सेक्युलर और कोई नहीं हो सकता। मैं ये सब बातें इतने दावे से इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि मैंने उनके घर का माहौल देखा है।”

पठान के बॉयकॉट को लेकर अख्तर ने कहा कि बॉयकॉट ट्रेंड तवज्जो लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड कल्चर का बहिष्कार नहीं हो सकता। जावेद अख्तर ने खुद को नास्तिक बताया और कोलकाता के पुस्तक मेले को अपना एकमात्र तीरथ बताया।

जावेद अख्तर ने कहा कि वे हर साल बोई मेला के लिए आते हैं। किसी भी समय वहाँ मेले में कम-से-कम 20,000 लोग मौजूद होते हैं। यह खुद को साफ करने जैसा होता है। बता दें कि जावेद अख्तर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित एक साहित्यिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुँचे थे।

गौरतलब है कि शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म पठान 25 जनवरी 2023 को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसके रिलीज होने से पहले ही फिल्म के कई सीन और एक गाने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद से इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर लोग बॉयकॉट का मुहिम चला रहे हैं।

पठान फिल्म में ‘बेशरम रंग’ बोल से एक गाना है। इसमें दीपिका पादुकोण भगवा बिकनी पहनकर नाचती हैं। गाना जारी होते ही बवाल हो गया। लोगों ने इसे भगवा रंग का अपमान बताया और गाने को अश्लील बताया। इसके बाद फिल्म का बॉयकॉट शुरू हो गया।

NRIs और महानगरों का हीरो, जिसे हम पर थोप दिया गया: SRK नहीं मिथुन-देओल-गोविंदा ही रहे गाँवों के फेवरिट, मुट्ठी भर लोगों के इलीट समूह ने ऐसे किया खेला

ट्रेड विश्लेषकों की मानें तो शाहरुख़ खान की फिल्म ‘पठान’ ने पहले ही दिन वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए का ग्राउस बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया है और ओपनिंग डे पर भारत में 57 करोड़ रुपए का नेट कारोबार करने वाली ये पहली ऐसी फिल्म है जो नॉन-हॉलिडे पर रिलीज हुई है। गणतंत्र दिवस के लंबे वीकेंड का इसे फायदा मिलता दिख रहा है, साथ ही बॉयकॉट विरोधी गोलबंदी भी है। हालाँकि, फिल्म का कंटेंट बेकार बताया जा रहा है दर्शकों द्वारा और वीकेंड के बाद ये क्रैश भी हो सकती है।

90 के दशक से पहले तक भारत में जो फ़िल्में बनती थीं, उनमें अधिकतर गाँवों का सेटअप होता था। खासकर जब अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ वाला जमाना था, तब उन्हें अक्सर ऐसे ही किरदारों में देखा गया जो गरीब होते थे, फिर अमीरी का सफर तय करते थे। 786 की महिमा दिखाना, मंदिरों में भगवान को गाली देना और मस्जिदों के सामने सिर झुका लेना और ‘जान दे देने वाला ईमानदार मुस्लिम दोस्त’ वाली चीजें तभी शुरू हो गई थीं। लेकिन, गरीब लोगों से लेकर दूर-दराज गाँवों के लोग भी सिनेमा से जुड़े हुए थे और अधिकतर फ़िल्में परिवार के साथ बैठ कर देखने लायक कम से कम होती थीं।

फिर आता है नब्बे का दशक और शाहरुख़ खान। ये तो सभी को पता है कि ‘अंजाम’, ‘डर’ और ‘बाजीगर’ जैसी फिल्मों में विलेन का किरदार अदा कर के उन्होंने खुद को इंडस्ट्री में स्थापित किया। विलेन, जो फिल्म का हीरो भी होता था। ये फ़िल्में बॉलीवुड में ‘सनकी आशिक’ वाला ट्रेंड लेकर आईं। लेकिन, असली सफलता उसे DDLJ से मिली – ये भी सभी को पता है। लेकिन, क्या आपने गौर किया कि DDLJ के साथ ही बॉलीवुड में एक और नया ट्रेंड आ गया – NRI हीरो का। आप DDLJ के अलावा ‘परदेस’, ‘स्वदेश’, ‘K3G’ या ‘माय नेम इज खान’ को ही देख लीजिए, NRI नायकों वाला ट्रेंड SRK ने कभी नहीं छोड़ा।

उस ज़माने के हिसाब से देखें तो इस तरह के नायक का होना एक बड़ी बात थी। महानगरों की चकाचौंध ने गाँवों और छोटे शहरों की लड़के-लड़कियों को लुभाना शुरू कर दिया था। सब उसी की तरह बनने की ख्वाहिश रखने लगे थे। लेकिन, बड़ी बात ये है कि इसका सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ा लड़कियों पर। हर लड़के में शाहरुख़ खान खोजा जाने लगा और कनाडा-अमेरिका रिटर्न लड़कों की तरह दिखना और इस तरह की उम्मीदों पर खरा उतरना छोटे शहरों के युवकों के बस का नहीं था। एक तरह से इस तरह की फिल्मों ने उन्हें कमतर महसूस कराया।

कुल मिला कर सार ये है कि शाहरुख़ खान कभी Masses का हीरो नहीं रहे। वो महानगरों के हीरो रहे, NRIs के हीरो रहे। आप आज भी गाँवों में जाकर ढूँढ़िए, आपको शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो कहेगा कि वो शाहरुख़ खान का फैन है। ऐसे समय में जब मल्टीप्लेक्स सिनेमा मिथुन चक्रवर्ती, सनी देओल और गोविंदा जैसे हीरोज को ढलान पर भेजने में लगे थे, महानगरों के युवक-युवतियों ने शाहरुख़ खान के रूप में अपना हीरो खोज लिया।

हीरो वही जो ज़्यादा पैसा कमा कर दे। बॉलीवुड में अगर फुटफॉल्स से स्टारडम गिना जाता तो ‘ग़दर’ के आसपास भी शाहरुख़ खान की कोई फिल्म नहीं टिकती। लेकिन, उसे सुपरस्टार का स्टेटस और ‘बॉलीवुड का किंग’ इसीलिए कह दिया गया, क्योंकि महानगरों और विदेश में बसे भारतीयों को वो पसंद था। पैसे इन्हीं दो जगहों से आते थे, और ज़्यादा आने लगे थे। ऐसे में बॉलीवुड में गाँव-समाज या छोटे शहरों के सेटअप में फ़िल्में बननी बंद हो गईं। हीरो अब ‘कुली’ और मजदूर का रोल नहीं कर सकता था। रोमांटिक फिल्मों का नया दौर शुरू हो रहा था और लड़कियों में वेस्टर्न ड्रेसेज का चलन भी इसी दौरान ऐसी फिल्मों के गानों के वीडियोज देख कर आया।

आजकल OTT के हिट होने का सबसे बड़ा कारण ये है कि अधिकतर वेब सीरीज गाँवों या छोटे शहरों की ही कहानी कहते हैं। शाहरुख़ खान के करियर के ढलान के साथ ही और OTT के उभार के साथ ही महानगरों की कहानियों का दौर सिर्फ बॉलीवुड में ही रह गया और पब्लिक OTT की तरफ शिफ्ट हो गई। ‘मिर्जापुर’ से लेकर ‘पंचायत’ तक, ये सारे के सारे वेब सीरीज ऐसी ही सेटअप में थे। गाँवों ने वापसी की है वीडियो कंटेंट की दुनिया में, लेकिन अतिरिक्त गाली-गलौज और अश्लीलता की छौंक के साथ।

आज भी अगर आप ऐसे इलाकों में लोगों से उनके फेवरिट हीरो के बारे में पूछेंगे तो आपको सनी देओल, मिथुन चक्रवर्ती, गोविंदा या सुनील शेट्टी के नाम ही सुनाई देंगे। सलमान खान की फैन फॉलोविंग मिलेगी, लेकिन शाहरुख़ खान की नहीं। लेकिन, फिर भी ‘बादशाह’ से लेकर तमाम टैग्स उन्हें ही दिए हैं। असल में किसी को बनाना और बिगाड़ना ऐसी इंडस्ट्रीज में चंद लोगों की मुट्ठी में ही रहता है और उन्होंने ऐसा ही किया। चोपड़ा-जौहर गिरोह ने उसे अपना फेवरिट बनाया और फिल्मफेयर-स्टारडस्ट ने युवाओं में उसकी इमेज। SRK आज भी ‘पैन नॉर्थ इंडिया’ हीरो नहीं हैं और उन्हें देखने वाले अधिकतर महानगरों के ही लोग हैं।

अब उम्र भी उनके साथ नहीं है, ऐसे में 57 साल की आयु में एक्शन फिल्म कर के और खुद से आधी उम्र की हीरोइन के साथ नाच कर ही इसका सबूत दिया जा सकता है कि वो अब भी यंग है। वो यही कर भी रहा है। रही बात कंट्रोवर्सी की, तो वो फिल्मों की रिलीज से पहले जानबूझ कर क्रिएट कर दिए जाते हैं। फिल्मों को हिट कराने के लिए लीड अभिनेता-अभिनेत्री की आपस में ‘रियल लाइफ रोमांस’ की खबरें उड़वा देना एक पुराना ट्रेंड रहा है।

अब ‘पठान’ को लेकर अलग लेवल की हाइप क्रिएट की गई। एक फेक सोशल मीडिया हैंडल ट्वीट करता है कि पहले दिन की टिकट ही नहीं मिल रही और आश्चर्य की बात है कि उसे SRK की रिप्लाई भी मिलती है कि वो दूसरे दिन का टिकट ले ले। उसके फैन क्लब्स सैकड़ों की संख्या में टिकटें खरीद रहे हैं। उसके अपने मजहब के लोग तो हैं ही फिल्म देखने के लिए, क्योंकि असहिष्णुता जैसे बयान देने और इजरायल के प्रधानमंत्री से न मिलने जाने जैसी करतूतों के साथ उसने मुस्लिमों को खुश रखा है। दुबई-सऊदी वाले तो उससे खुश ही रहते हैं।

कुल मिला कर देखें तो SRK एक थोपा हुआ एक्टर है बॉलीवुड में, जिसे मुट्ठी भर इलीट लोगों ने हिट बनाया और आदमी हल्का-फुल्का दिमाग वाला भी होगा तो उस स्तर पर पहुँच कर खुद को बनाए ही रखेगा। चालाक शाहरुख़ खान ने इससे एक कदम आगे का तरीके अपनाया और खुद को कारोबारी बना लिया। यही राज़ भी है उसके सबसे अमीर अभिनेता होने का। मीडिया से हमेशा उसने दोस्ताना संबध बनाए रखना, अवॉर्ड्स खरीदता गया और फिल्म समीक्षकों को समय-समय पर पैसे देता था। देखिए, कैसे ये फिल्म समीक्षक ‘पठान’ (जिसका ट्रेलर ही बेकार है) की रिलीज के बाद उसके काम आ रहे हैं।

गणतंत्र दिवस पर अशफाक के घर लहराया इस्लामी झंडा, बिहार पुलिस ने उतरवाया तो बीवी बोली – हमें नहीं पता कहाँ का है

गणतंत्र दिवस के मौके पर जहाँ देश भर में राष्ट्रध्वज तिरंगे की धूम रहती है, वहीं बिहार के पूर्णिया में गुरुवार (26 जनवरी, 2023) को एक मकान पर इस्लामी झंडा लगा दिया गया। जैसे ही लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, पुलिस ने मौके पर पहुँच कर झंडे को उतरवाया। ये घटना मधुबनी थाना क्षेत्र में स्थित सिपाही टोला की है। पुलिस ने कहा है कि झंडे को उतार कर मामले की जाँच की जा रही है। हालाँकि, अब तक किसी की भी गिरफ़्तारी नहीं हुई है।

कुछ मीडिया संस्थानों ने इस झंडे को पाकिस्तान से मिलता-जुलता झंडा बता कर रिपोर्ट लिखी। जिस घर पर ये झंडा लगाया गया, वो मोहम्मद अशफाक और उसकी पत्नी रेहाना परवीन का है। महिला का कहना है कि उनके भतीजे मुबारक हुसैन ने ये झंडा लगाया था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये किसका झंडा है। लोगों की शिकायत पर थानाध्यक्ष पवन कुमार चौधरी खुद मौके पर पहुँचे और पुलिस को झंडा उतारते हुए भी वीडियो में देखा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि SDO (अनुमंडल विकास पदाधिकारी) और अन्य वरीय पदाधिकारियों से राय-विमर्श करके आगे की कार्रवाई की जाएगी। रेहाना परवीन ने बताया कि उनके शौहर के भाई शिक्षक हैं, जिनके बेटे ने ये झंडा लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि ये किसका झंडा है। हालाँकि महिला ने इसकी पुष्टि की है कि इस झंडे को गणतंत्र दिवस के दिन ही लगाया गया है। बता दें कि पूर्णिया बिहार राज्य के सीमांचल का हिस्सा है, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या अच्छी-खासी है।

रेहाना का भैंसुर (पति का बड़ा भाई) मुबारुकदीन एक निजी विद्यालय चलाता है। दोनों भाई एक ही घर में रहते हैं। मुस्लिमों की आबादी पूर्णिया में 38.46 प्रतिशत हो चुकी है।  दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक मदरसे से इस्लामी झंडा फहराने की रिपोर्ट सामने आई है। मामला सुबेहा थाना के रामपुर मजरे जमीन हुसैनाबाद का है। इस्लामी झंडा फहराया देख गाँव वालों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने आनन-फानन में आकर मदरसे से झंडा उतरवाया। 

‘इस्लाम में नहीं फहराया जाता है तिरंगा’: यूपी के मदरसे में गणतंत्र दिवस पर फहराया इस्लामी झंडा, हाफिज-तबरेज हिरासत में

देश गुरुवार (26 जनवरी, 2023) को अपना 74वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक मदरसे से इस्लामी झंडा फहराने की रिपोर्ट सामने आई है। मामला सुबेहा थाना के रामपुर मजरे जमीन हुसैनाबाद का है। इस्लामी झंडा फहराया देख गाँव वालों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने आनन-फानन में आकर मदरसे से झंडा उतरवाया। पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया है।

TV 9 उत्तर प्रदेश ने इस मदरसे के वीडियो को ट्वीट किया है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि मदरसे को बैलून से सजाया गया है और वहाँ कुछ बच्चे जमा हैं। साथ ही मदरसे के ऊपर इस्लामी झंडा फहर रहा है। इस बीच वहाँ दो किशोर मिठाई लेकर आते हैं और बच्चों को बाँटने लगते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक मदरसे का नाम ‘अशरफुल उलूम इमा इमदादिया साकिन‘ है। पूरे देश में जहाँ गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में तिरंगा झंडा फहराया जा रहा था, वहीं गाँव के लोग तिरंगा की जगह इस्लामी झंडा फहराया देख सकते में आ गए। घटना की सूचना पाने के बाद सुबेहा पुलिस और हैदरगढ़ तहसील के अधिकारी मौके पर पहुँचे और इस्लामी झंडे को नीचे उतरवाया।  

रिपोर्ट के मुताबिक, झंडे को फहराने वाले की पहचान आसिफ के तौर पर हुई है। दूसरी ओर मदरसे के मौलवी का कहना है कि उनके मजहब में तिरंगा झंडा नहीं फहराया जाता है। पुलिस ने मामले में हाफिज मोहम्मद सोहराब और मोहम्मद तबरेज निजामुददीन रिजवान को हिरासत में लिया है। हैदरगढ़ के सीओ जेएन अस्थाना ने बताया कि इस्लामी झंडा फहराने की बात सामने आई है। लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

क्या दुबई की अल्पेन कैपिटल की अधिकारी समीना अहमद ही ALT News की तीसरी को-फाउंडर हैं? जानें सच्चाई

ट्विटर पर samjawed65 के हैंडल वाले सैम जावेद ने कई बार दावा किया है कि वह ऑल्ट न्यूज़ (ALT News) के सह-संस्थापक हैं। हालाँकि, यह पदनाम सभी संभावित जगहों एवं संसाधनों से हटा दिया गया है। हालाँकि, समय-समय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस शख्स की पहचान को लेकर चर्चाएँ होती रही हैं।

SamSays के नाम से पहचाने जाने वाले सैम जावेद ने ऑल्ट न्यूज़ के लिए आखिरी लेख जनवरी 2021 में लिखा था।

ऑल्ट न्यूज के लिए लिखा गया सैम जावेद का आखिरी लेख

आखिरी बार सैम ने 29 दिसंबर 2022 को मोहम्मद जुबैर के जन्मदिन पर ट्विटर पर ऑल्ट न्यूज़ के लोगों से बातचीत की थी। ज़ुबैर ने उसे बताया कि उसके ट्विटर थ्रेड वह याद कर रहा है। इस पर उसने जवाब दिया था, “धन्यवाद! लेकिन और भी गम हैं जमाने में, ट्विटर के सिवा।”

जुबैर के साथ सैम जावेद का अंतिम बातचीत

एक तरफ जुबैर और प्रतीक के बारे में प्रशंसा लिखी गई है, वहीं सैम जावेद का शायद ही कहीं कोई उल्लेख हो। ऐसा तब है, जबकि उसकी पहचान पहले सह-संस्थापकों में से एक के रूप में की जा चुकी हो। जब डॉक्यूमेंट्री बनाई जाती है या जब ‘नोबेल’ नामांकन की घोषणा की जाती है तो सैम जावेद उस समय अनुपस्थित रहती हैं।

जब हमने सैम जावेद की पहचान को लेकर जाँच शुरू की तो हमें दुबई की अल्पेन कैपिटल में कॉरपोरेट अफेयर्स की प्रबंध निदेशक समीना अहमद की प्रोफाइल मिली। सैम जावेद अपने लिए जिस तस्वीर का उपयोग करती हैं, उस तस्वीर और समीना अहमद की तस्वीर में आश्चर्यजनक समानताएँ हैं।

यह सैम जावेद द्वारा ट्विटर पर इस्तेमाल की गई तस्वीर है और साथ में समीना अहमद की तस्वीर है। आप खुद उनके के बीच की समानता देख सकते हैं।

अल्पेन कैपिटल में समीना अहमद की तस्वीर (बाएँ) और ट्विटर पर सैम जावेद की तस्वीर (दाएँ)

अल्पेन पर समीना की प्रोफाइल में लिखा है, “समीना कॉर्पोरेट मामलों के कार्य की प्रमुख हैं, जो मध्य-पूर्व और भारत में अल्पेन कैपिटल ग्रुप में मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस और एडमिनिस्ट्रेशन के लिए जिम्मेदार है। वह उद्योग अनुसंधान कार्य के लिए भी जिम्मेदार हैं, जो GCC में विभिन्न क्षेत्रों पर अल्पेन कैपिटल की अत्यधिक प्रशंसित उद्योग अनुसंधान रिपोर्ट प्रकाशित करती है। समीना 12 वर्षों से अल्पेन कैपिटल के साथ हैं और संयुक्त अरब अमीरात और भारत में वित्तीय उद्योग में मानव संसाधन/विपणन का कुल 34 वर्षों का अनुभव है। अपनी पिछली नियुक्ति में वह मशरेकबैंक में मानव संसाधन की SVP थीं। वह भारत में जेवियर्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर में फैकल्टी मेेंबर थीं।”

इसके अलावा, जब हमने समीना अहमद के बारे में जानकारी खोजने के लिए विभिन्न स्रोतों की जाँच की तो हमें समीना की एक रॉकेट रीच (Rocket Reach) प्रोफ़ाइल मिली, जिसमें दो ईमेल आईडी का उल्लेख किया गया था। एक था [email protected] और दूसरा था [email protected]। इससे यह विश्वास होता है कि अल्पेन कैपिटल की प्रबंध निदेशक समीना अहमद इस्लामवादी प्रचार वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ की तीसरी को-फ़ाउंडर हैं।

रॉकेट रीच प्रोफाइल में समीना का पर्सनल ईमेल आईडी सैम जावेद से जुड़ा हुआ है।

हमें समीना अहमद नाम की एक शख्स का फोन नंबर भी मिला। जब हमने TrueCaller के जरिए नंबर चलाया तो उसमें ईमेल आईडी [email protected] बताई गई।

समीना नाम के एक मोबाइल नंबर को ट्रूकॉलर पर देखने पर उससे सैम जावेद की ईमेल आईडी जुड़ी मिली

सोशल मीडिया पर सैम जावेद का मामला

नेटिज़न्स वर्षों से पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सैम जावेद कौन है। 14 जुलाई 2022 को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर की ज़मानत की सुनवाई के दौरान ऑल्ट न्यूज़ से जुड़े सऊदी अरब में रहने वाले किसी व्यक्ति का ज़िक्र हुआ था। नेटिज़ेंस ने उत्सुकता से पूछा कि क्या यह सैम जावेद था।

ट्विटर उपयोगकर्ता BefittingFacts ने पूछा, “ऑल्ट न्यूज़ के शोधकर्ता @samjawed65 इन दिनों कहाँ हैं? उन्होंने 1 जुलाई से कुछ भी ट्वीट नहीं किया है। @free_thinker सब अच्छा है? क्या वह वही हैं, जिसका जिक्र आज अदालत में ‘सऊदी अरब में रह रही हैं’ के रूप में ज़िक्र हुआ है? आपके शोधकर्ता के बारे में कोई पारदर्शिता क्यों नहीं है? छिपाने के लिए क्या है?”

20 मई 2021 को एक्टिविस्ट और खोजी पत्रकार विजय पटेल ने सैम जावेद पर एक विस्तृत थ्रेड लिखा था।

उन्होंने कहा कि सैम जावेद ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक होने का दावा किया है, लेकिन उनका नाम किसी भी दस्तावेज़ में नहीं आया है। ऑल्ट न्यूज़ की मूल कंपनी प्रावदा मीडिया फाउंडेशन के निदेशकों की सूची में सैम जावेद का नाम नहीं था।

पटेल ने कहा कि कंपनी के निदेशकों में से एक द्वारा आईडी का उपयोग प्रॉक्सी के रूप में किया गया हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कैसे सैम जावेद ने कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड, द क्विंट, द वायर, स्क्रॉल, न्यूज़लॉन्ड्री, न्यूज़क्लिक सहित अन्य प्रकाशनों के लिए कई रिपोर्ट लिखीं।

विजय पटेल को जवाब देते हुए OSINT द हॉक आई ने लिखा, “यह काफी दिलचस्प है। सैम को छोड़कर हर दूसरे लेखक/संपादक/सह-संस्थापक का संक्षिप्त परिचय और पृष्ठभूमि है।”

इससे पहले 2017 में एक ट्विटर यूजर ने प्रतीक सिन्हा को जवाब देते हुए आरोप लगाया था कि सैम जावेद तीस्ता की दुबई की दोस्त है। उन्होंने लिखा, “आप दुबई में रहने वाली हिटवुमन सैम जावेद (तीस्ता पाल) से कैसे पूछ सकती हैं, जिनकी बुद्धिमत्ता डैम अचयन पर निर्भर करती है, राडिया टेप में वीनस की भूमिका का पर्दाफाश करने के लिए?”

क्या सैम जावेद ऑल्ट न्यूज की को-फाउंडर हैं

द प्रिंट और स्कूपव्हूप सहित कई पोर्टल्स ने सैम जावेद को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक के रूप में उल्लेख किया था। हालाँकि, नेटिज़न्स ने ऑल्ट न्यूज़ से सैम जावेद के लिंक पर संदेह व्यक्त किया है, लेकिन हमें जुलाई 2017 की द हिंदू की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें उनका उल्लेख किया गया था। उस खास रिपोर्ट में मोहम्मद जुबैर की पहचान भी छिपाई गई थी।

रिपोर्ट में ‘अनऑफिशियल सुब्रमण्यम स्वामी’ फेसबुक पेज के गुमनाम एडमिनिस्ट्रेटर प्रतीक सिन्हा और ‘सैम जावेद’ नाम के एक व्यक्ति का इलेक्ट्रिक तिकड़ी के रूप में उल्लेख किया गया है। जब हमने सैम जावेद का ट्विटर प्रोफाइल चेक किया तो पाया कि उसने 14 फरवरी, 2017 को ऑल्ट न्यूज़ के बारे में बात करना शुरू किया था। ऑल्ट न्यूज़ की स्थापना 8 फरवरी 2017 को हुई थी।

18 अप्रैल 2017 को उन्होंने ऑल्ट न्यूज़ पर अपना पहला लेख साझा किया।

सैम जावेद ब्लॉगस्पॉट पर “क्रिटिकल आई” नाम से एक ब्लॉग चलाती थीं। ये सभी पोस्ट हटा दी गई हैं, लेकिन आर्काइव को यहाँ से एक्सेस किया जा सकता है। ऑपइंडिया ने समीना अहमद से इस बात की पुष्टि करने के लिए संपर्क किया कि क्या वह ऑल्ट न्यूज़ की वही तीसरी ‘को-फ़ाउंडर’ हैं। यदि हम उससे वापस सुनते हैं तो हम लेख को अपडेट करेंगे।

मौक़ा गणतंत्र दिवस का, नारे इस्लामी: AMU में झंडा फहराने के दौरान गूँजा ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’, चिल्लाने वालों में NCC कैडेट्स भी

उत्तर प्रदेश स्थित ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा फहराने के दौरान गुरुवार (26 जनवरी, 2023) को कट्टर मजहबी नारे लगाने के अमला सामने आया है। ख़ास बात ये है कि AMU कैम्पस में ये नारेबाजी ‘NCC (राष्ट्रीय कैडेट कोर)’ के सदस्यों ने लगाया। छात्रों ने इस दौरान ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ चिल्लाया। सोशल मीडिया में इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

ट्विटर पर विश्वविद्यालय के के पूर्व छात्र और भाजपा नेता डॉ निशित शर्मा ने अलीगढ़ पुलिस और एसएसपी कलानिधि नैथानी को टैग करते हुए शिकायत की है। उन्होंने पूछा कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जंग के नारे लगाने का क्या तुक है? उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में पुलिस से भी बातचीत चल रही है। वीडियो पर अब यूनिवर्सिटी प्रशासन का भी बयान आया है।

AMU के प्रॉक्टर वसीम अली ने जानकारी दी है कि वीडियो के आधार पर छात्रों की पहचान की जा रही है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अलीगढ़ पुलिस ने भी बताया है कि इस घटना के संबंध में उसने विश्वविद्यालय से संपर्क किया है। बता दें कि वायरल वीडियो में इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि दर्जनों छात्रों को मजहबी नारेबाजी करते हुए देखा जा सकता है। यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) तारिक मंसूर भी घटना के वक्त उससे कुछ ही दूरी पर मौजूद थे।

डॉ निशित वर्मा ने इस बारे में काह है, “यह मजहबी नारा उनकी सोच को दर्शाता है। इस तरीके के नारे लगवा कर क्या संदेश देना चाह रहे हैं? एक और पूरा देश भारत के संविधान को नमन कर रहा है, ऐसे में इस तरीके के नारे लगाकर भारत में विभिन्न पैदा करना चाह रहे हैं। ये नारे किस प्रकार से लगाए गए हैं और इसके पीछे कौन सी सोच काम कर रही है – इसकी जाँच होनी चाहिए।” उन्होंने इसे देश-विरोधी नारा करार दिया।