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जिस हल्द्वानी जेल में दोस्त बने दोनों आतंकी, वहाँ के कई कैदी पुलिस की रडार पर: शतरंज में चैंपियन था दरभंगा का रहने वाला नौशाद, जगजीत का दूसरा नाम ‘याकूब’

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार आतंकियों नौशाद और जगजीत के बारे में नए खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल में दोनों की मुलाकात हुई थी जहाँ ये 1 साल 4 माह तक रहे थे। अब ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियाँ उस समय जेल में बंद रहे अन्य बंदियों से नौशाद और जगजीत के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आतंकी नौशाद के शतरंज में माहिर खिलाड़ी होने की भी जानकारी सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जगजीत ने अपने कई नाम रख रखे थे। वो याकूब और कप्तान नाम से भी जाना जाता था। जगजीत प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स से जुड़ा हुआ था। वहीं जेल में शतरंज के खेल में चैम्पियन नौशाद के पाकिस्तानी आतंकी समूह हरकत उल अंसार से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। लगभग 56 साल उम्र का नौशाद मूल रूप से बिहार के दरभंगा का रहने वाला बताया जा रहा है। रामनगर के एक व्यापारी से रंगदारी माँगने के मामले में नौशाद 1 जनवरी, 2021 में हल्द्वानी जेल में बंद हुआ था।

वहीं जगजीत भी हल्द्वानी जेल में 29 नवम्बर, 2018 से बंद था। दोनों की जेल में पहले तो मुलाकात हुई और बाद में दोस्ती हो गई। इस जेल में नौशाद और जगजीत ने छूटने के बाद देशविरोधी काम करने का फैसला किया था। 2 अप्रैल 2022 को जगजीत पैरोल पर छूटा था। उसके कुछ ही समय बाद 5 मई, 2022 को नौशाद भी जेल से बाहर आया था। बाद में जगजीत पैरोल के ही दौरान फरार हो गया था। तब से दोनों दिल्ली के भलस्वा इलाके में रह रहे थे।

यहीं पर दोनों पाकिस्तान से कनेक्टेड हुए और एक हिन्दू व्यक्ति की हत्या कर के भारत के खिलाफ अपनी नफरत और आतंकी काबिलियत पाकिस्तान को वीडियो के माध्यम से भेजी थी।

इसी क्रम में STF पंजाब के एक अन्य व्यक्ति रविंदर से पूछताछ की तैयारी में है। जगजीत के परिजनों से भी पुलिस ने 4 घंटे तक पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि जगजीत और नौशाद के साथ उस बैरक में 60 अन्य बंदी भी बंद थे। वो सभी 60 बंदी पुलिस के रडार पर बताए जा रहे हैं। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं उन सभी बंदियों में से कोई अन्य नौशाद और जगजीत के नेटवर्क से तो नहीं जुड़ा है। पुलिस नौशाद और जगजीत द्वारा प्रयोग किए गए सिग्नल एप प्रयोग करने वाले अन्य अपराधियों और आतंकियों से दोनों के संबंधों की खोजबीन कर रही है।

‘पठान’ पोस्टर जलाए जाने से चिंता में शाहरुख़ खान, रात 2 बजे फोन कर के CM सरमा से लगाई गुहार: मुख्यमंत्री ने पूछा था – SRK कौन?

‘कौन शाहरुख खान?’ पूछने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने रविवार (22 जनवरी 2023) को कहा कि शाहरुख खान ने उन्हें तड़के फोन किया। सीएम सरमा ने बताया कि गुवाहाटी में शाहरुख खान की कुछ ही दिनों में रिलीज होने वाली फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) की स्क्रीनिंग को लेकर हुए विवाद पर चर्चा की।

सीएम सरमा ने ट्वीट के जरिए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बॉलीवुड अभिनेता श्री शाहरुख खान ने मुझे फोन किया और हमने आज सुबह 2 बजे बात की। उन्होंने अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान गुवाहाटी में हुई एक घटना पर चिंता जताई। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का कर्तव्य है। हम पूछताछ करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी कोई अप्रिय घटना न हो।”

कहा जा रहा है कि हाल ही में बजरंग दल के सदस्यों ने कथित तौर पर असम की राजधानी गुवाहाटी के नारेंगी इलाके की एक थियेटर में घुसकर फिल्म पठान के पोस्टर फाड़ दिए थे। उन्होंने फिल्म के खिलाफ नारेबाजी भी की थी। बता दें कि पठान फिल्म को लेकर देश भर में कई जगह विरोध प्रदर्शन की घटनाएँ देखी गईं।

इस घटना के बाद जब सीएम सरमा से पूछा गया कि क्या उन्होंने सुरक्षा उपायों के बारे में शाहरुख खान के साथ बात की है। इस पर उन्होंने कहा था, “शाहरुख खान कौन है? मैं उनके या फिल्म पठान के बारे में कुछ नहीं जानता।” पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने आगे कहा, “खान ने मुझे फोन नहीं किया है। हालाँकि, बॉलीवुड से कई लोग इस समस्या को लेकर ऐसा करते हैं। अगर वह मुझे फोन करते हैं तो मैं मामले को देखूँगा।”

सीएम सरमा ने साफ तौर पर कहा था कि अगर राज्य में कानून व्यवस्था का उल्लंघन किया गया है और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है तो कार्रवाई की जाएगी। अब सीएम सरमा ने स्पष्ट कर दिया कि शाहरुख खान ने उन्हें फोन किया था और इस मामले में कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

बता दें कि पठान फिल्म लंबे समय से विवादों में है। इस फिल्म के गाने बेशरम रंग और झूमे तो पठान को लेकर विवाद हो गया है। इतना ही नहीं शाहरुख खान के पहले के बयानों को लेकर भी हिंदूवादी उनसे नाराज हैं। उनकी फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर बॉयकॉट किया जा रहा है।

पठान फिल्म में शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 25 दिसंबर 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाने वाली है। इस फिल्म को यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनाया गया है और फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध निर्देशक एवं अभिनेता टीनू आनंद के बेटे सिद्धार्थ आनंद ने किया है।

जिन अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर BJP ने की कार्रवाई, भूपेश बघेल ने CM बन उनको बचाया: नान घोटाले पर कॉन्ग्रेस ने कभी की थी राजनीति, अब उसमें खुद फँसी छत्तीसगढ़ सरकार

साल 2015 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। कॉन्ग्रेस ने सरकार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खराब क्वालिटी वाले अनाज का वितरण करने का आरोप लगाया था। कॉन्ग्रेस का आरोप था कि इसके लिए अधिकारियों ने राइस मिलर्स से मोटी रिश्वत ली है। छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खाद्यान्न खरीदकर लोगों को राशन बाँटने का काम करती रही है। कॉन्ग्रेस की तरफ से लगाए गए आरोपों के बाद तात्कालिक भाजपा सरकार ने NAN घोटाले की जाँच शुरू की थी। कुल 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया जिसमें अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित बनाए गए। बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच भी शुरू की और 2015 में चार्जशीट दायर की गई। तब तक छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सत्ता में आ गई।

छत्तीसगढ़ की सत्ता में आने के बाद भूपेश बघेल सरकार ने भष्टाचार के आरोपितों को बचाने और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को फँसाने के लिए एक अभियान सा छेड़ दिया। NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को बचाने के लिए उन्होंने राज्य के आईपीएस अधिकारियों, न्यायपालिका और सरकार के उच्च पदों पर बैठे लोगों समेत अन्य साधनों का इस्तेमाल किया। उद्देश्य पूर्ति के लिए सबूतों के साथ छेड़-छाड़ की कोशिश हुई, गवाहों पर दबाव बनाया गया।

फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान आईपीएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। इसके बाद विभाग के अधिकारियों को व्हाट्सएप पर अनिल टुटेजा और यश टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ बातचीत की जानकारी मिली थी। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। व्हाट्सएप चैट से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा ने कैसे आईपीएस अधिकारियों को अपने इशारों पर नचाया और किस तरह राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। ऑपइंडिया द्वारा इस पर विस्तृत लेख प्रकाशित किया गया था। जिसे आप हिंदीअंग्रेजी में पढ़ सकते हैं।

व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के अधिकारी, आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे। ऑपइंडिया को प्राप्त व्हाट्सएप चैट के अध्ययन से यह भी साबित हो रहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की शह पर अनिल टुटेजा जो खुद मामले का मुख्य आरोपित है किस तरह आईपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण और पदोन्नति का काम देख रहे थे। जो अधिकारी इनकी बात नहीं सुनते उन्हें दंडात्मक पोस्टिंग दी जाती। कुछ पर तो झूठे मुकदमे तक लाद दिए गए। शासन तंत्र का इस्तेमाल कर गवाहों को धमकाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उनकी पत्नी वीणा सिंह और उनके परिजनों को फँसाने के लिए सबूत गढ़े गए।

गौरतलब है कि अप्रैल 2017 में भूपेश बघेल और उस वक्त छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे टीएस सिंहदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NAN घोटाले के मुख्य आरोपित आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। लिखे गए पत्र में आरोप लगाया गया था कि मोदी सरकार जानबूझकर अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के खिलाफ मुकदमा नहीं चला रही है क्योंकि यदि मुकदमा चलाया गया तो वे घोटाले में डॉ रमन सिंह की संलिप्तता उजागर कर सकते हैं।

NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को लेकर भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी गई चिट्ठी

भूपेश बघेल और सिंहदेव के पत्र का विषय इस प्रकार था, “भ्रष्टाचार में लिप्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों के खिलाफ उचित जाँच न कराए जाने के संबंध में।” खत में प्रधानमंत्री के ‘ना खाऊँगा ना खाने दूँगा’ के नारे की ओर इशारा करते हुए लिखा गया कि प्रधानमंत्री से उम्मीद है कि वे अपने नारे पर कायम रहेंगे और भ्रष्ट आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

नान (NAN) घोटाला मामले से जुड़े एफआईआर में नाम दर्ज होने के बाद भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2 अधिकारियों को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही उनके आवास पर कोई छापेमारी ही की गई है। घोटाले में दोनों आईएएस अधिकारियों की मुख्य भूमिका नजर आ रही है। आश्चर्य की बात है कि डीओपीटी (DOPT) द्वारा जुलाई 2016 में दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी जा चुकी है। इन सब के बावजूद उनकी गिरफ्तारी और उनके आवासों पर छापेमारी छोड़िए, अदालत में उनके खिलाफ आरोप पत्र तक दायर नहीं किया गया है। पत्र में जिन दो आईएएस अधिकारियों का जिक्र किया गया था, वे आईएएस अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला हैं। दोनों मामले के मुख्य आरोपित हैं। गौरतलब है कि घोटाले के समय 2003 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा (NAN) के प्रबंध निदेशक (MD) थे।

बघेल द्वारा लिखे पत्र में कहा गया था कि टुटेजा और शुक्ला पर मुकदमा न चलाकर सरकार अपने मुख्यमंत्री (डॉ. रमन सिंह) और घोटाले में शामिल नेताओं को बचाने की कोशिश कर रही है। कहा गया कि सरकार को डर है कि दोनों वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जाँच में भाजपा के मुख्यमंत्री/मंत्री का नाम ले सकते हैं। इसलिए, उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि जाँच भले ही सीबीआई/ईडी को सौंपी गई है लेकिन आम धारणा यह है कि इन एजेंसियों द्वारा जाँच किए जाने के बाद अक्सर भाजपा नेता बच जाते हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा लिखे पत्र में आगे पीएम मोदी से निवेदन किया गया है कि वे सीबीआई और ईडी को आरोपित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर चार्जशीट फाइल करने की हिदायत दें। जरूरत पड़े तो आईएएस अधिकारियों के परिसरों में छापेमारी करे। दोषी अधिकारियों और भाजपा के बड़े नेताओं पर कार्रवाई करें।

नान घोटाले की विस्तृत समयरेखा

फरवरी 2015 में NAN कार्यालयों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की छापेमारी के बाद खाद्यान्न वितरण में धाँधली (Food distribution fraud) सामने आई थी। उस समय राज्य में भाजपा के डॉ. रमन सिंह की सरकार थी। अनिल टुटेजा नान के एमडी थे और आलोक शुक्ला नान के विभाग सचिव (Department secretary) छापे के दौरान 3.65 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। रमन सिंह सरकार द्वारा अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला समेत 27 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को निलंबित कर दिया गया।

साल 2015 में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक नान के प्रबंधक शिव शंकर भट्ट जो एमडी अनिल टुटेजा के करीबी थे और गिरीश शर्मा, जो एमडी के पीए के रूप में कार्यरत थे, के द्वारा काले धन का वितरण हुआ। आपको बता दें गिरीश शर्मा ने साल 1987 में नागरिक आपूर्ति निगम कार्यालय भोपाल में बतौर स्टेनो टायपिस्ट पद ग्रहण किया था। इसके बाद उनकी पदोन्नति होती गई और वे पीए टू एमडी के पद तक पहुँचे। एफआईआर में गलत तरीके से कमाए गए पैसों के लेन-देन संबंधी पूरी जानकारी दी गई है। दर्ज की गई प्रारंभिक प्राथमिकी में अनिल टुटेजा का नाम विशेष रूप से शामिल था।

18 फरवरी, 2015 को गिरीश शर्मा का बयान लिया गया। उन्होंने कहा कि राइस मिलर्स को नियमित रूप से परेशान किया जाता था और इसलिए मिल मालिक अवैध रूप से रुपए देने के लिए तैयार हो गए। वसूली गई राशि अधिकारियों के बीच निश्चित अनुपात में बाँटी जाती थी। उन्होंने कहा कि अनिल टुटेजा के निर्देशानुसार आलोक शुक्ला को अध्यक्ष का हिस्सा मिलता था।

6 मई, 2015 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा चार्जशीट दायर की गई जिसमें अनिल टुटेजा के खिलाफ भूमिका बनाई गई थी हालाँकि तब तक उन्हें आरोपित नहीं बनाया गया था क्योंकि उन्हें सरकार से मुकदमा चलाने की मंजूरी लेनी थी। पहले (2015) में राज्य सरकार और फिर वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।

नवंबर 2018 में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई थी जिसमें अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को NAN घोटाले में मुख्य आरोपित के रूप में नामित किया गया था। ध्यान रहे जब अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित बनाए गए उस वक्त केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार थी।

दिसंबर 2018 में कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तभी से, मामले को कमजोर कर नया मोड़ देने की कोशिश शुरू हो गई। मुख्य आरोपितों के बचाए जाने और रमन सिंह, उनकी पत्नी, मुकेश गुप्ता समेत कई लोगों को मामले में घसीटने की कोशिश होने लगी।

वर्ष 2019 में, ईडी ने एक एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दायर की जिसमें अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रथम दृष्टया उत्तरदायी बताया गया। दिलचस्प बात यह है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद 3 जनवरी 2019 को, भूपेश बघेल ने नान घोटाले की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया। तब तक EOW-ACB ने मामले में चार्जशीट दायर कर दी थी। उनकी चार्जशीट में और टुटेजा और शुक्ला का नाम मुख्य अभियुक्त थे। एसआईटी के गठन के बाद, EOW के जाँच अधिकारी संजय देवस्थले को निलंबित कर दिया गया। हालाँकि बाद में भूपेश बघेल की हाँ में हाँ मिलाने के लिए मजबूर किए जाने के बाद उन्हें दोबारा बहाल कर दिया गया। इसकी विस्तृत चर्चा हम बाद की रिपोर्टों में करेंगे।

अप्रैल 2019 में अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली। साल 2020 में अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला दोनों को ईडी (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद भूपेश बघेल सरकार ने दोनों मुख्य आरोपितों को फिर से बहाल कर दिया। टुटेजा को वाणिज्य और उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव (Joint Secretary for Commerce and Industries) और आलोक शुक्ला को शिक्षा और अन्य विभागों का प्रभारी प्रधान सचिव (Principal Secretary in charge of Education and other departments) बना दिया गया।

निलंबित आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह ने 22 दिसंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जानकारी दी कि किस तरह उनपर टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को को फँसाने के लिए दबाव बनाया गया। ऑपइंडिया के पास उपलब्ध याचिका में जानकारी मिलती है कि जीपी सिंह को भूपेश बघेल ने 2 बार मिलने के लिए बुलाया था। 14 सितंबर, 2019 को उन्हें रात के अंधेरे में मुख्यमंत्री (भूपेश बघेल) के आवास पर बुलाया गया था। इस दौरान उन्हें रमन सिंह को फँसाने के निर्देश दिए गए।

इतना ही नहीं, जीपी सिंह और सीएम बघेल के बीच आधी रात को हुई बैठक के खत्म होने से पहले जीपी सिंह से NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को जाँच में हुई प्रगति के बारे में सूचित करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी टुटेजा ने जाँच के अपडेट्स और दूसरे कार्यों के लिए उनसे संपर्क किया। टुटेजा ने भी इस बात पर जोर दिया कि तात्कालीन सीएम रमन सिंह और भाजपा सरकार के पदाधिकारियों को NAN घोटाले में फँसाया जाना चाहिए।

जीपी सिंह की याचिका के मुताबिक 10 मई, 2020 को उन्हें सीएम भूपेश बघेल के साथ एक निजी बैठक के लिए फिर से बुलाया गया। इस बैठक के दौरान उन्हें एक बार फिर भाजपा नेता रमन सिंह और उनकी पत्नी को NAN घोटाले में फँसाने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान कई चैट और खुलासे हुए जो कोर्ट के सामने लाए गए। 18 नवंबर, 2021 की टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईटी विभाग द्वारा जब्त व्हाट्सएप संदेशों और बातचीत से चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इस दौरान पता चला कि घोटाले के दोनों मुख्य आरोपित (टुटेजा और शुक्ला) अभियोजन एजेंसी EOW, ACB, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वरिष्ठ कानून अधिकारी मिलीभगत कर रहे थे। एसआईटी के सदस्यों और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप द्वारा एसआईटी से अनुकूल रिपोर्ट प्राप्त की गई। इधर गवाहों को धमका कर भ्रष्टाचार के केस को कमजोर कर दिया गया। केस को प्रभावित करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग हुआ। सबूतों के साथ छेड़-छाड़ किया गया और गवाहों को प्रभावित करने के लिए साजिश रची गई जिसमें संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी भी शामिल हैं।

इसके अलावा, 19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के नान घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक सनसनीखेज दावा किया गया। सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी। इस दौरान कोर्ट को जानकारी दी गई कि अनिल टुटेजा को जमानत मिलने से पहले, भूपेश बघेल ने खुद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से मुलाकात की थी और मुख्य आरोपित को जमानत देने के फैसले को प्रभावित किया गया।

ऑपइंडिया को प्राप्त व्हाट्सएप चैट के अध्ययन के बाद इनमें से अधिकांश आरोप प्रथम दृष्टया सही साबित हो रहे हैं। वर्ष 2019-2020 के दौरान छत्तीसगढ़ के बड़े पुलिस अधिकारियों जैसे एसआरपी कल्लूरी, कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख नियमित रूप से मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के संपर्क में पाए गए। इस दौरान न सिर्फ टुटेजा को बचाने की साजिश रची गई बल्कि रमन सिंह उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रधान सचिव अमन सिंह, उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को केस में जबरन फँसाने का षड्यंत्र भी रचा गया।

नान घोटाले से जुड़े कुछ सवाल जिनके जवाब भूपेश बघेल को देने चाहिए

उपरोक्त तथ्यों, ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त चैट और जारी किए गए दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए, कॉन्ग्रेस के नेताओं खासकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से साल 2017 में प्रधानमंत्री मोदी को लिखे उनके खत के लिए कुछ सवालों के जवाब तो देने ही चाहिए।

  1. साल 2015 में जब घोटाला सामने आया और भाजपा सरकार द्वारा कार्रवाई की गई उस दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने रमन सिंह सरकार के खिलाफ यह दावा करते हुए कड़ा प्रहार किया कि वह सीधे तौर पर NAN घोटाले में शामिल हैं। क्या उस वक्त कॉन्ग्रेस आलाकमान को भूपेश बघेल की अनिल टुटेजा, यश टुटेजा और आलोक शुक्ला से नजदीकी की जानकारी थी?
  2. वर्ष 2017 में भूपेश बघेल ने प्रधान मंत्री मोदी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री को उनके भ्रष्टाचार विरोधी नारे के प्रति ईमानदार होने और मामले में मुख्य आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। इसका अर्थ तो यही हुआ कि भूपेश बघेल जानते हैं कि टुटेजा और शुक्ला घोटाले में शामिल हैं। अगर ऐसा है तो भूपेश बघेल ने कोर्ट से जमानत मिलते ही टुटेजा और शुक्ला को दोबारा बहाल क्यों किया?
  3. यह देखते हुए कि मुख्य आरोपितों को अब खुद बघेल संरक्षण दे रहे हैं, क्या यह मान लेना उचित होगा कि भूपेश आरोपितों के भ्रष्टाचार को माफ कर रहे हैं या यह माना जाए कि बघेल खुद किसी न किसी रूप में घोटाले में शामिल थे?
  4. 2017 में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में भूपेश बघेल ने आरोप लगाया था कि बीजेपी सरकार टुटेजा और शुक्ला को बचाने की कोशिश कर रही है क्योंकि अगर उन पर मुकदमा चला तो घोटाले में बीजेपी के बड़े नेताओं के नाम सामने आएँगे। लेकिन जब बघेल की सरकार राज्य में बनी तो उन्होंने न सिर्फ मुख्य आरोपितों को बहाल कर दिया बल्कि उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं तो क्या यह माना जाए कि बघेल घोटाले में शामिल कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के नाम बाहर आने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं?
  5. इतिहास गवाह है ज्यादातर मामलों में 2 ही कारण होते हैं जब राजनेता नौकरशाहों को बचाने की कोशिश करते हैं। या तो नेता खुद भ्रष्टाचारी हों या नौकरशाहों के पास नेताओं के काले कारनामों का कोई राज हो। यदि ऐसा है तो भूपेश बघेल स्पष्ट करें कि कौन सा परिदृश्य उनके मामले में सही है?
  6. अगर भूपेश बघेल आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को सजा दिलाना चाहते थे तो सरकार बनते ही उन्होंने मामले में एसआईटी का गठन क्यों किया जबकि मामले की जाँच EOW और ACB जैसी संस्थाएँ कर रही थीं? EOW और ACB दोनों आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट तक फाइल कर चुकी थी। क्या एसआईटी गठन करने का उद्देश्य EOW और ACB की जाँच को प्रभावित कर दोनों आरोपितों को बचाना था?
  7. भूपेश बघेल ने जीपी सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जीपी सिंह ने दिसंबर 2022 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि भूपेश बघेल ने उन्हें दो बार व्यक्तिगत रूप से बुलाया था। पहली मुलाकात में ही उन्हें उन लोगों की हिटलिस्ट दी गई थी, जिन्हें नान घोटाले में फँसाया जाना था। हिटलिस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके परिवार के सदस्यों, पूर्व प्रधान सचिव अमन सिंह और उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर के नाम थे। उनका कहना है कि उन्हें धमकी भी दी गई थी कि अगर उन्होंने इन लोगों को नहीं फँसाया तो वह मुश्किल में पड़ जाएँगे। भूपेश बघेल को इन दो कथित मुलाकातों और व्यक्तिगत रूप से जीपी सिंह को दी गई हिटलिस्ट के बारे में अपनी चुप्पी तोड़ने की जरूरत है।
  8. भूपेश बघेल द्वारा एसआईटी गठित करने के बाद अगले ही दिन संजय देवस्थले को अनौपचारिक रूप से निलंबित कर दिया गया था। संजय EOW के जाँच अधिकारी थे। क्या बघेल द्वारा संरक्षण प्रप्त आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के उनके दुस्साहस के लिए उन्हें निलंबित कर दिया गया था? बाद में उन्हें बिना किसी कारण के बहाल कर दिया गया। उन्हें क्या करने के लिए मजबूर किया गया ? क्या हुआ कोई समझौता हुआ? क्या उन्हें रमन सिंह और अन्य लोगों को फँसाने के लिए कहा गया ? क्या उन्हें टुटेजा और शुक्ला को बचाने के लिए कहा गया ?
  9. भूपेश बघेल ने जीपी सिंह को अनिल टुटेजा को रिपोर्ट करने और व्यक्तिगत रूप से नान घोटाले की जाँच के संबंध में अपडेट्स देने के लिए क्यों कहा गया?
  10. क्या भूपेश बघेल यह जानते थे कि जीपी सिंह, अनिल टुटेजा के लिए हवाला ऑपरेटर का काम कर रहे थे? क्या भूपेश बघेल के कहने पर जीपी सिंह ऐसा कर रहे थे? क्या बघेल ने उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया था ठीक उसी तरह जिस तरह उन्हें नान जाँच से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा गया था?
  11. कैसे और क्यों अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के पास छत्तीसगढ़ राज्य में इतनी अतिरिक्त संवैधानिक शक्तियाँ मिल गईं कि वे तबादलों, पोस्टिंग, निलंबन को प्रभावित कर रहे थे। कैसे एक मामले का मुख्य आरोपित होते हुए वे खुद अपना स्टेटस रिपोर्ट भी लिखवा रहे थे ?
  12. भूपेश बघेल किस उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से मिले थे, जिसके बाद अनिल टुटेजा और शुक्ला को जमानत मिली थी?

नान घोटाला बहुत बड़ा घोटाला है। उससे भी बड़ी बात यह है कि बघेल सरकार न केवल मुख्य अभियुक्तों को बचाने की कोशिश कर रही है बल्कि रमन सिंह और अन्य को घोटाले में फँसाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। भूपेश बघेल से फिलहाल जो प्रश्न किए गए हैं, वे सिर्फ प्रारंभिक प्रश्न हैं। जैसा कि ऑपइंडिया पहले भी कह चुका है कि नान घोटाला एक ऐसा मामला है जिसने एक व्यवस्था को बहुत नुकसान पहुँचाया है। इस मामले में हमने देखा किस तरह पुलिस अधिकारियों, आईएएस अधिकारियों, न्यायाधीशों और राजनेताओं के मिली भगत से भ्रष्टाचार के मामले को कमजोर करने और आरोपितों को बचाने की कोशिश हुई। आरोपितों को बचाने और अपने राजनीतिक विरोधियों को फँसाने के लिए सबूतों को प्रभावित करने, गवाहों को धमकी दे कर स्टेटमेंट बदलने के लिए मजबूर करने, अधिकारियों को दंडात्मक पोस्टिंग के नाम पर डराने की कोशिश हुई। मिली भगत से हवाला लेन-देन को जारी रखे जाने समेत और भी बहुत कुछ अंजाम दिया गया। जैसे-जैसे हम इस घोटाले की परतें उधेड़ते जाएँगे और ऑपइंडिया को प्राप्त व्हाट्सएप चैट का और गहन अध्ययन करेंगे वैसे-वैसे हम अपनी ‘द छत्तीसगढ़ फाइल्स’ सीरीज में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से फॉलो-अप प्रश्न पूछते रहेंगे।

नोट: नुपूर शर्मा की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। इसका अनुवाद राजन झा ने किया है।

छूट जाती ट्रेन इसलिए फैला दी बम की अफवाह: नशे में धुत IAF अधिकारी की करतूत, पुलिस ने पकड़ा

राजधानी एक्सप्रेस में बम की फर्जी सूचना देने के आरोप में पुलिस ने भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। आरोपित ने शनिवार (21 जनवरी 2023 को दिल्ली से मुंबई जा रही राजधानी एक्सप्रेस में बम की सूचना फोन पर पुलिस को दी थी। पुलिस ने फ़ौरन ही ट्रेन की जाँच की थी जिसके बाद सूचना अफवाह पाई गई थी। बाद में नंबर को ट्रेस कर के पुलिस आरोपित तक पहुँच गई। आरोपित 35 वर्षीय सुनील सांगवान है जो गिरफ्तारी के दौरान शराब के नशे में बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को पुलिस कमांड रूम में शाम 4:48 पर एक कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने 10 मिनट बाद 4:55 पर मुंबई के लिए रवाना होने जा रही राजधानी एक्सप्रेस में बम होने की जानकारी दी। पुलिस ने फ़ौरन ही सूचना आगे भेजी। आनन-फानन में रेलवे और जिला पुलिस के बम डिस्पोजल दस्ते प्लेटफॉर्म पर खड़ी गाडी के पास पहुँच गए। इन दस्तों ने ट्रेन की सघन तलाशी ली लेकिन कोई भी आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। तलाशी की वजह से ट्रेन छूटने में थोड़ा विलम्ब भी हुआ था।

रेलवे पुलिस उप आयुक्त हरीश एच पी ने बताया कि पुलिस ने कॉलर के नंबर को ट्रेस किया। वह नंबर सुनील सांगवान का पाया गया जो भारतीय वायुसेना में सार्जेंट के तौर पर नियुक्त है। सुनील को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की पूछताछ में सुनील ने बताया कि वह मुंबई के सांताक्रूज में वायु सेना के अड्डे पर तैनात है। शनिवार को उसे मुंबई के लिए राजधानी ट्रेन पकड़नी थी लेकिन वह लेट हो रहा था। ट्रेन छूट न जाए इसके लिए उसने बम होने वाली कॉल की थी। सुनील का मकसद था कि तलाशी के दौरान होने वाली देरी में वह ट्रेन पकड़ लेगा।

सुनील ने साल 2006 में एयरमैन के पद पर वायुसेना ज्वाइन की थी। वह मूल रूप से हरियाणा के भिवानी का रहने वाला है। जिस नंबर का प्रयोग उसने बम वाली कॉल के लिए किया था वह उसके भाई आनंद कुमार के नाम पर था। आनंद के एक अन्य नंबर पर कॉल की गई तो उसने सिम के सुनील द्वारा प्रयोग किए जाने की जानकारी दी। पुलिस ने सुनील नाम से रेलवे का चार्ट निकाला। वह पुलिस को ट्रेन के कोच नंबर बी-9 की सीट नंबर 1 पर बैठा मिला। बताया जा रहा है कि उस समय सुनील नशे में था। उसे रेलवे अधिनियम की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का मोबाईल फोन भी जब्त कर लिया गया है।

श्रद्धा वालकर हत्या केस में 3000+ पेज की चार्जशीट तैयार, 100 गवाहों के बयान दर्ज: दिल्ली पुलिस स्पीडी ट्रायल के लिए कोर्ट से करेगी आग्रह

अपनी लिव पार्टनर श्रद्धा की हत्या करने वाले आफताब पूनावाले के मामले में पुलिस ने 3000 पेज से अधिक की चार्जशीट तैयार की है। इसमें घटना का क्रमवार विवरण से लेकर सबूत, नार्को टेस्ट, पॉलिग्राफी और डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही चार्जशीट में 100 से अधिक गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस इसमें दर्ज विवरण का दोबारा सत्यापन कर रही है। उम्मीद है कि मंगलवार-बुधवार (24-25 जनवरी) तक पुलिस इस चार्जशीट को कोर्ट में पेश कर सकती है। इसके साथ ही पुलिस कोर्ट से मामले की फास्ट ट्रॉयल का आग्रह करेगी।

ड्राफ्ट चार्जशीट में 100 गवाहों के अलावा फोरेंसिक और इलेक्ट्रोनिक सबूतों को आधार बनाया गया है। हालाँकि, आफताब पूनावाला का कबूलनामा और नार्को टेस्ट की रिपोर्ट का कोर्ट बहुत ज्यादा अहमियत नहीं है। इसके बावजूद भी इसे चार्जशीट में शामिल किया गया है।

बता दें कि 18 मई 2022 को आफताब पूनावाला ने दिल्ली के छतरपुर इलाके में श्रद्धा वालकर की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद श्रद्धा की लाश को 35 टुकड़ों में काटकर जंगल में फेंक दिए थे। इसको लेकर देश भर में बवाल हो गया था।

पुलिस ने दिल्ली के छत्तरपुर इलाके के जंगलों से कुछ मानव हड्डियाँ बरामद की थीं। इन हड्डियों का DNA टेस्ट कराया गया था। ये हड्डियाँ श्रद्धा की ही थीं। हालाँकि, श्रद्धा का कटा हुआ सिर पुलिस आजतक बरामद नहीं कर पाई है। आफताब भी इसको लेकर पुलिस को लगातार भ्रमित करता रहा है।

2020 की मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आफताब अक्सर श्रद्धा को बुरी तरह पीटा करता था। इसके अलावा ये दावा भी किया जा रहा है कि श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के अम्मी-अब्बू इस केस के बारे में सब कुछ जानते हैं।

श्रद्धा की 2020 की मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा हुआ था कि आफताब अक्सर श्रद्धा को बुरी तरह पीटा करता था। इसके अलावा ये दावा भी किया गया था कि श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के अम्मी-अब्बू इस केस के बारे में सब कुछ जानते हैं।

‘द लीला’ होटल को ₹23 लाख का चूना लगाने वाला मोहम्मद शरीफ गिरफ्तार: फर्जी कार्ड दिखाकर किया था स्टे, चाँदी के बर्तन भी चुराए थे

दिल्ली पुलिस ने आख़िरकार लीला होटल में 3 माह तक रह कर बिना बिल चुकाए भाग जाने वाले मोहम्मद शरीफ को गिरफ्तार कर लिया। शरीफ पर लगभग 23 लाख रुपए का बिल बकाया था। उसकी गिरफ्तारी 19 जनवरी 2023 (गुरुवार) को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले से हुई। शरीफ खुद को आबू धाबी की रॉयल फैमिली के ऑफिस से बता कर लीला होटल में अगस्त 2022 से 20 नवम्बर 2022 तक रुका था। बाद में वह अचानक ही बिना होटल का बिल चुकाए भाग निकला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहम्मद शरीफ ने होटल में कमरा लेने के लिए फर्जी बिजनेस कार्ड का भी उपयोग किया था। तीन माह के दौरान फ्री में रहने के साथ 20 नवंबर 2022 को वह होटल की चाँदी की बर्तन और कई कीमती सामान ले कर चम्पत हो गया। 17 जनवरी 2023 को दिल्ली पुलिस ने बताया था कि मोहम्मद शरीफ फिलहाल फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। आख़िरकार 19 जनवरी को उसे कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले से पकड़ लिया गया।

हालाँकि शरीफ से कितने पैसे की बरामदगी हुई है इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। होटल में वह कमरा नंबर 427 में रुका था। उसने खुद को अबू धाबी के शाही परिवार के सदस्य शेख फलाह बिन जायद अल नाहयान के कार्यालय में काम करने वाले व्यक्ति के तौर पर बताया था। उसने अपनी भारत यात्रा को आधिकारिक विजिट बताया था। पुलिस को दी गई शिकायत में लीला होटल प्रबंधन ने यह भी बताया था कि मोहम्मद शरीफ ने 11.5 लाख रुपए का पेमेंट भी किया था।

चीन की 80% आबादी कोरोना संक्रमित, छिपाए जा रहे मौत के आँकड़े: प्रदर्शनकारियों ने एंटीजन बॉक्स पर लात मारी, सैंपल सड़कों पर फैले

कोविड (Covid-19) की मार झेल रहा चीन परेशान है। चीन ने कहा है कि उसकी 80 प्रतिशत जनसंख्या कोरोना (Corona) से संक्रमित हो चुकी है। अब नई लहर की आशंका कम है। वहीं, चीनी कोविड कार्यकर्ताओं ने एंटीजेन टेस्ट के बॉक्स को सडकों पर फेंक कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

चीन के एक सरकारी वैज्ञानिक ने शनिवार (21 जनवरी 2023) को कहा कि अगले तीन महीनों में चीन में दोबारा कोविड बढ़ने की संभावना कम है। वैज्ञानिक ने कहा कि इसके पीछे वजह यह है कि यहाँ के 80% लोग संक्रमित हो चुके हैं।

चाईना सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुख्य महामारी वैज्ञानिक ने कहा कि ल्यूनर नव वर्ष की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सफर किया। इसके कारण महामारी फैल सकती है और कुछ क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ सकता है। हालाँकि, कोविड की नई लहर की आशंका से उन्होंने इनकार किया।

बता में जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर वहाँ के लोगों ने भारी विरोध किया था। इसके कारण चीन ने कोविड प्रतिबंधों में ढील थी और बाद में लगभग सारे प्रतिबंध हटा लिए थे। सीमा को एक बार फिर खोल दिया गया। इसके बाद भारी संख्या में लोग मिले।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक अधिकारी ने था कि चीन ने क्लीनिक, आपातकालीन कक्ष और गंभीर स्थिति में कोविड मरीजों की संख्या की चरम सीमा को पार कर लिया है। लगातार यहाँ पर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

उधर, एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कोविड कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे है। मामला दक्षिण-पश्चिमी चीन के चोंगकिंग शहर का है। यहाँ कार्यकर्ताओं ने रैपिड एंटीजन टेस्ट के बॉक्स को लात मारकर जमीन पर फेंक दिया, जिससे हजारों टेस्ट फैल गए।

चीन ने कहा था कि इस लहर में 60 हजार लोगों की मौत हुई है। हालाँकि, विशेषज्ञ इन सरकारी आँकड़ों को सही नहीं मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह आँकड़ा केवल अस्पताल में मरने वालों का है। लोग लोग कोविड से संक्रमित होकर घर में मर जाते हैं, उनकी गिनती नहीं की जाती है।

पत्थरबाजी, मारपीट, भगदड़…बंगाल में तृणमूल और ISF के उपद्रवियों ने खुली सड़क पर काटा बवाल, पुलिस को पत्थर फेंके; 19 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबर है। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर हमले का आरोप लगा कर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। ISF की तरफ से तृणमूल नेता अरबुल इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया गया है। हालात सँभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया है। घटना शनिवार (21 जनवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 21 जनवरी को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) का स्थापना दिवस था। इसका गठन पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया था। ISF के सैकड़ों कार्यकर्ता अपना स्थापना दिवस मनाने के लिए ही कोलकाता के एस्प्लेनेड मैदान में जमा हुए थे। आरोप है कि इसी कार्यक्रम के दौरान TMC कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। जब उनका विरोध किया गया तब उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बताया जा रहा है कि पुलिस पर भी पत्थरबाजी हुई है।

इस बवाल का वीडियो भी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक बड़े से मैदान में भगदड़ मची दिखाई दे रही है। साथ ही दोनों पक्ष पुलिस की मौजूदगी में ही एक दूसरे पर हमलावर दिख रहे हैं। बीच में धुँआ भी दिखाई दे रहा।

आख़िरकार पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान उप्रदवियों पर आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए। अब तक कुल 19 उपद्रवियों की गिरफ्तारी की खबर है। इसी के साथ ISF के विधायक नौशाद सिद्दीकी को हिरासत में ले लिया गया है। ISF कार्यकर्ताओं ने अपने ऊपर हुए हमले का विरोध करते हुए TMC नेता अरबुल इस्लाम की गिरफ्तारी की माँग की है। इस दौरान ISF कार्यकर्ताओं ने सड़क भी जाम करने का प्रयास किया।

गौरतलब है कि इस से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस और ISF के कार्यकर्ताओं में शनिवार को बंगाल के ही 24 परगना जिले में भिड़ चुके हैं। बताया जा रहा है कि तब ISF के सदस्यों में तृणमूल के एक ऑफिस में आगजनी की थी।

‘हम मदरसों की संख्या कम करना चाहते हैं’: असम CM का स्पष्ट बयान, बोले- सामान्य शिक्षा देना है उद्देश्य

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) एक्शन में हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि राज्य में मदरसों की संख्या को कम किया जाएगा। सीएम सरमा ने कहा कि वे मदरसों (Madarsa) सामान्य शिक्षा देना चाहते हैं। इसलिए इनका पंजीकरण कराया जाएगा।

सीएम सरमा ने कहा, “हम पहले फेज में राज्य में मदरसों की संख्या कम करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि मदरसों में सामान्य शिक्षा दी जाए। इसके लिए हम समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और वे (मुस्लिम) भी सरकार की मदद कर रहे हैं।”

राज्य के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा 17 जनवरी 2023 को कहा था कि राज्य में मदरसों में सुधार लाने के लिए चर्चा जारी है। उन्होंने कहा, “मदरसों में और सुधार लाने, नियम तय करने और बोर्ड बनाने पर भी चर्चा हुई। हमने छोटे मदरसों को बड़े मदरसों में मिलाने पर भी बात की।” उन्होंने कहा कि करीब 100 छोटे मदरसों को बड़े मदरसों में मिला दिया गया है।

इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कुछ दिन पहले कहा था कि राज्य के मदरसों में पढ़ाने के लिए राज्य के बाहर से आए मौलानाओं को समय-समय पर नजदीकी पुलिस स्टेशन में हाजिर होने के लिए कहा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि असम में लगभग 3000 पंजीकृत और अपंजीकृत मदरसे हैं।

बता दें कि असम सरकार राज्य में अवैध मदरसों और मौलानाओं को लेकर सख्त है और उन पर लगातार कार्रवाई कर रही है। सीएम सरमा के कई फैसलों पर मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई थी। पिछले दिनों कई मदरसों को गिरा दिया गया।

AIUDF के चीफ बदरुद्दीन अजमल और AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इसको लेकर असम की सरमा सरकार पर निशाना साधा था। उस वक्त सीएम सरमा ने कहा था कि अगर मदरसों में देश विरोधी गतिविधियाँ हुईं तो उनको ढहा दिया जाएगा।

‘कौन हैं शाहरुख़ खान?’: ‘पठान’ पर माँगी प्रतिक्रिया तो CM शर्मा ने दागा सवाल, असम में जलाए गए फिल्म के पोस्टर्स

शाहरुख़ खान की विवादित फिल्म ‘पठान’ बुधवार (25 जनवरी, 2023) को रिलीज होने वाली है। फिल्म का गाने ‘बेशर्म रंग’ रिलीज होने के बाद से ही इसका विरोध हो रहा है। हालाँकि रिलीज की तारीख नजदीक आते हीं इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है। असम के गुवाहाटी में शनिवार (21 जनवरी, 2023) को बजरंग दल के कार्यकर्ता ने एक सिनेमा हॉल में फिल्म का पोस्टर फाड़ कर इसे आग के हवाले कर दिया। वहीं इस बारे में जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने पूछ डाला कि कौन शाहरुख खान?  

उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी के नरेंगी इलाके में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने सिनेमा हॉल में पठान फिल्म के लगे पोस्टर को फाड़ दिया और इसे आग के हवाले कर दिया। वहीं घटना के बारे में जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने पहले कहा, “कौन शाहरुख़ खान? मैं उनके या उनकी फिल्म ‘पठान’ के बारे में कुछ नहीं जानता। असमिया फिल्म डॉ. बेजबरुआ-पार्ट 2 भी रिलीज होगी और असम के लोगों को इसे देखना चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने कहा, “खान ने मुझे इस समस्या को लेकर कुछ नहीं बताया है। मुझसे बॉलीवुड के लोग बात करते रहते हैं। जब वे भी बात करेंगे तो हम इसको देखेंगे। अगर कानून का उल्लंघन हुआ है तो हम इसपर कार्रवाई करेंगे।”

उल्लेखनीय है कि फिल्म के गाने ‘बेशरम रंग’ के रिलीज होने के बाद से ही फिल्म का विरोध हो रहा था। गाने में दीपिका पादुकोण ने केसरिया रंग की बिकनी पहनी थी, जिसे लेकर हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई थी। देशभर में इस गाने के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। हालाँकि बाद में सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई सीन को हटा दिया था।

इससे पहले अहमदाबाद के एक शख्स सनी शाह उर्फ़ ताउजी को फिल्म के विरोध के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उसपर आरोप था की उसने एक थियेटर मालिक को फिल्म न रिलीज करने की धमकी दी थी।