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गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू में दोहरा बम ब्लास्ट: कई टुकड़ों में बँट गई गाड़ी, 6 घायल

जम्मू के नरवाल इलाके में 2 ब्लास्ट होने की खबर है। धमाके में अब तक 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं जिनका इलाज चल रहा है। घटनास्थल पर खड़े कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुँचा है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुँच कर जाँच शुरू कर दी है। आने वाली 26 जनवरी से पहले यह हरकत आतंकियों की करतूत बताई जा रही है। घटना शनिवार (21 जनवरी, 2023) के सुबह की है। अब तक किसी आतंकी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जम्मू के ट्रांसपोर्ट नगर के वार्ड नंबर 7 की है। यहाँ अक्सर ट्रकों और अन्य वाहनों की अच्छी-खासी मौजूदगी बनी रहती है। शनिवार की सुबह 10:47 पर इस जगह पहला ब्लास्ट हुआ था। इसी के 10 मिनट बाद दूसरा ब्लास्ट हुआ। दोनों ब्लास्ट की जगह अगल-बगल ही रही। मौके पर पुलिस, पैरामिलिट्री और सेना के जवान पहुँच चुके हैं। इलाके में कोई और विस्फोटक न हो इसके लिए पुलिस ने सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आस-पास के CCTV फुटेज भी खँगाल कर आरोपितों की तलाश शुरू की जा चुकी है। फुटेज में ब्लास्ट होना भी दिखाई दिया है। मौके पर NIA की टीम भी जाँच के लिए पहुँच रही है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक ब्लास्ट में 2 वाहनों का प्रयोग हुआ है। घटना के चश्मदीदों का कहना है कि पहले ब्लास्ट में उन्हें लगा कि किसी गाड़ी का टायर फटा है लेकिन धुआँ देख कर उन्हें एहसास हुआ कि यह बम ब्लास्ट है। वहीं दूसरे चश्मदीद के मुताबिक जिस गाड़ी में ब्लास्ट हुआ है वो कई टुकड़ों में बँट गई।

इस घटना में घायल होने वाले लोगों के नाम 26 वर्षीय सुशील कुमार, 25 वर्षीय बिशप प्रताप, 52 वर्षीय विनोद कुमार, 40 वर्षीय अमित कुमार, 35 वर्षीय राजेश कुमार और 35 वर्षीय सोहैल इकबाल बताए जा रहे हैं।

‘ये यादव की बच्ची है, नहीं पीना इसके हाथ का पानी’: मेवात के शाहरुख़ से शादी करने वाली ट्विंकल की संदिग्ध स्थिति में मौत: परिजन बोले – इस्लाम न कबूलने पर हत्या

हरियाणा के फरीदाबाद में मुस्लिम युवक से शादी करने वाली एक हिन्दू महिला की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई है। 24 वर्षीया मृतका का नाम ट्विंकल यादव है जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी की थीं। ट्विंकल से घर वालों की मर्जी के खिलाफ मेवात के रहने वाले शाहरुख़ से 3 साल पहले शादी कर ली थी। पीड़िता के घर वालों ने शाहरुख़ और उसके परिवार पर प्रताड़ना व धर्मान्तरण के दबाव का आरोप लगाया है। पुलिस को दी गई शिकायत में मृतका के परिजनों ने मौत की वजह शुक्रवार (20 जनवरी, 2023) को शाहरुख़ द्वारा की गई पिटाई को बताया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मामला सेक्टर 58 थानाक्षेत्र का है। यहाँ शिकायतकर्ता सुमित यादव अपने 5 भाई-बहनों के साथ राजीव कॉलोनी में रह कर मेहनत-मजदूरी करता है। शिकायत में सुमित ने आरोप लगाया है कि लगभग 3 साल पहले मेवात के रहने वाले शाहरुख़ ने उसकी बहन ट्विंकल को बहला-फुसला कर शादी कर लिया था। लड़की के परिजन इस शादी के खिलाफ थे। इस शादी से ट्विंकल को 2 बच्चे हुए जिसमें एक बेटी और दूसरा बेटा है। सुमित के मुताबिक शादी के बाद उसकी बहन शाहरुख़ के घर वालों द्वारा लगातार प्रताड़ित की जा रही थी।

थाने में दी गई तहरीर के अनुसार, ट्विंकल पर न सिर्फ दहेज़ न लाने का ताना मारा जाता था बल्कि उसे बिना मर्जी के माँस खाने और इस्लाम कबूलने का भी दबाव बनाया जाता था। सुमित ने बताया है कि जब ट्विंकल यादव इसके लिए मना करती थी तब उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। आरोप है कि 20 जनवरी को शाहरुख़ के पड़ोसियों ने सुमित को बताया कि उसकी बहन की बेरहमी से पिटाई की गई है जिसके बाद ट्विंकल स्थानीय पवन अस्पताल में भर्ती की गई है। जब लड़की के परिजन अस्पताल पहुँचे तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

सुमित के परिजनों ने अस्पताल पर भी ट्विंकल की मौत की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया और शिकायत में कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। वहीं फरीदाबाद न्यूज़ नाम के एक फेसबुक पेज पर वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें ट्विंकल के घर वाले अस्पताल के खिलाफ हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। इसी वीडियो में पुलिस वाले हंगामे को काबू करने के लिए बल प्रयोग करते भी दिखाई दे रहे हैं।

एक अन्य वीडियो में मृतका के घर वाले शाहरुख़ के परिजनों को ट्विंकल की मौत का दोषी बता रहे हैं। पीड़ितों के मुताबिक शाहरुख़ की माँ ट्विंकल को हिन्दू बताते हुए उनके हाथ से पानी भी नहीं पीती थी और इस्लाम कबूल करने के लिए कहती थी। पीड़ित के घर वालों का कहना है कि ट्विंकल आत्महत्या नहीं कर सकती और उनकी हत्या इस्लाम न कबूल करने के चलते हुई है। फिलहाल शाहरुख़ फरार बताया जा रहा है।

PM मोदी खत्म करवा सकते हैं यूक्रेन-रूस का विवाद, उनकी छवि बहुत अच्छी है: फ्रांसीसी पत्रकार ने की भारत की तारीफ

यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच दुनिया को अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से उम्मीदें हैं। इस बार एक फ्रेंच पत्रकार ने यह उम्मीद जताई है। पत्रकार का कहना है कि अगर पीएम मोदी चाहें तो इस युद्ध को रोक सकते हैं।

फ्रांस की जानी-मानी पत्रकार लॉरा हाइम का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से नजदीकी है। इसके साथ ही रूस में भी उनकी छवि अच्छी है। अगर भारतीय प्रधानमंत्री ऐसे व्यक्ति हैं जो इस युद्ध को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पत्रकार लॉरा ने कहा, “इस समय यह बेहद मुश्किल लग रहा है, क्योंकि यूक्रेन चर्चा नहीं करना चाहता है और चाहता है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का न्याय करे। आश्चर्य की बात है कि अमेरिका में लोग रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।”

यह पहला मौका नहीं है, जब पश्चिमी देशों ने इस युद्ध को रुकवाने के लिए भारत की देखा हो। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने 6 जनवरी 2023 को कहा था कि भारत जैसा देश अपने संबंधों के माध्यम से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करा सकता है।

दिसंबर 2022 में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्‍की ने भी इस युद्ध को खत्म करने में भारत की भूमिका के बारे में कहा था। उन्होंने कहा कि इस विषय में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी। मानवीय मदद के लिए उन्होंने भारत को धन्यवाद भी दिया था।

इससे भी पहले अमेरिका के विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत ने कहा था कि इस युद्ध को खत्म करने के लिए पीएम मोदी का जो भी फॉर्मूला होगा, उसे अमेरिका मानेगा। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि पीएम मोदी इसमें अपनी भूमिका निभाएँगे।

बिहार के कटिहार में वंदे भारत एक्सप्रेस पर हुआ पथराव, शीशे चटके: 21 दिन पहले शुरू हुई थी ट्रेन, पत्थरबाजी की अब तक चौथी घटना

बिहार के कटिहार जिले में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की खबर है। पत्थरबाजी के चलते एक बोगी के शीशे को नुकसान पहुँचा है। यह ट्रेन न्यूजलपाईगुड़ी से हावड़ा जा रही थी। शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को हुई इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि इस घटना के चलते ट्रेन यातायात थोड़ी देर के लिए प्रभावित हुआ। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जाँच कर के कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन नंबर 22302 डाउन वंदे भारत एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से हावड़ा की तरफ आगे बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन बलरामपुर थानाक्षेत्र के पास से डालखोला-तेलता रेलवे स्टेशन को पार कर रही थी इस पर पत्थर फेंका गया। पत्थर ट्रेन की बोगी सँख्या C-6 के दाहिनी तरफ लगा। इस पत्थर से ट्रेन की खिड़की का शीशा चटक गया। हालाँकि पत्थरबाजी से किसी यात्री का कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के बाद ट्रेन को स्टेशन पर थोड़ी देर के लिए रोका गया और नुकसान की जाँच व मरम्मत की गई। आस-पास के CCTV फुटेज की भी जाँच करवाई जा रही है।

बताया ये भी जा रहा है कि जिस जगह यह पथराव हुआ है वहाँ पहले भी ट्रेन को निशाना बनाया जा चुका है। इस मामले में RPF ने एक जाँच दल भी भेजा है। ट्रेन को अगले स्टेशन पर रोक कर मरम्मत के बाद रवाना कर दिया गया।

गौरतलब है कि अब तक वंदे भारत एक्सप्रेस पर इस से पहले भी पथराव हो चुके हैं। इस रुट पर ट्रेन को शुरू हुए महज 21 दिन ही हुए हैं और यह पत्थरबाजी की चौथी घटना सामने आई है। कटिहार से पहले बिहार के किशनगंज और बंगाल के मालदा में इस ट्रेन पर पत्थरबाजी की जा चुकी है।

बंगाल में एक और TMC नेता गिरफ्तार, ED ने लंबी पूछताछ के बाद कुंतल घोष पर लिया एक्शन: SSC घोटाले में ₹19 करोड़ ऐंठने का आरोप

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में हुए शिक्षक घोटाले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के युवा नेता कुंतल घोष को गिरफ्तार किया गया है। घोष पर आरोप है कि उसने नौकरी दिलाने के नाम पर 325 लोगों से 19 करोड़ रुपए हड़प लिए। बता दें कि इस घोटाले में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

शिक्षक घोटाले में कार्रवाई कर रही केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को कुंतल घोष के अलावा शांतनु बनर्जी के खिलाफ छापेमारी की थी। इनके कोलकाता और हुगली स्थित ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। वहीं, घोष के न्यूटाउन स्थित आवास पर भी छापेमारी की खबर है।

ED ने कुंतल घोष को गिरफ्तार करने से पहले 24 घंटों तक पूछताछ की थी। कोलकाता स्थित कुंतल घोष के घर से कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं। बता दें कि कुंतल घोष से केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) भी पूछताछ कर चुकी है। कुंतल घोष को शांतनु बनर्जी का करीबी बताया जा रहा है। वह बिचौलिए का काम करता था। शांतनु बनर्जी पहले से ही जेल में है।

दरअसल, कुंतल घोष के नाम का बता सीबीआई की पूछताछ में चला था। घोटाले को लेकर गिरफ्तार TMC विधायक और शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य के करीबी व्यापारी तापस मंडल से इस बारे में पूछताछ की थी। तापस मंडल ने सीबीआई को कुंतल घोष और शांतनु बनर्जी का नाम लिया था। घोष ने हर व्यक्ति को लेन-देन की रसीद भी दी थी, जिसमें उनके साइन भी थे.

इस घोटाले को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी सहित दर्जन भर नेता और अधिकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सीबीआई (CBI) के अनुसार, 2014 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए TMC के नेताओं द्वारा 100 करोड़ रुपए से अधिक हड़पे गए।

राजेश बनकर हड़पा हिन्दू महिला का फ्लैट, बुलंदशहर ले जाकर गोली मारी: 10 महीने बाद दिल्ली पुलिस ने शाकिर और फैज को पकड़ा, दोनों चोरी की स्कूटी पर घूम रहे थे

दिल्ली पुलिस ने नाम बदल कर हिन्दू महिला से नजदीकी बढ़ाने और बाद में उसकी हत्या करने के आरोप में शाकिर अली नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। मृतका का नाम सुशीलावती था जिनकी हत्या मार्च 2022 में हुई थी। शव को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में फेंक दिया गया था। इस हत्या में फैज़ नाम का एक अन्य आरोपित भी शामिल बताया जा रहा है। कत्ल की वजह आरोपित द्वारा सुशीलावती का फ़्लैट कब्ज़ा करना था। शाकिर ने खुद को नेपाल के ‘चार्ल्स शोभराज’ से प्रभावित बताया है। पूछताछ में शाकिर ने पुलिस को हिन्दू नाम राजेश रख कर कई अन्य फर्जीवाड़े करने की भी जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पूर्वी दिल्ली के जीटीबी एन्क्लेव का है। यहाँ सुशीलवाती का फ़्लैट है। वह अपने पति विनोद कुमार से अलग दिल्ली के दयालपुर में रहती थीं। सुशीला का जहाँगीरपुरी और भलस्वा इलाके में भी मकान है। शाकिर ने खुद को राजेश बता कर इस फ़्लैट को किराए पर लिया था। दिव्यांग शाकिर यहाँ अपनी माँ, 2 बेटियों और 1 बेटे के साथ रह रहा था। कुछ ही दिनों में राजेश बने शाकिर ने सुशीलवती को विश्वास में ले लिया। शाकिर सुशीला की सारी सम्पत्ति हड़पना चाहता था।

बातचीत के ही दौरान शाकिर ने सुशीलवती को उनका फ़्लैट 25 लाख रुपए में खरीदने का ऑफर दिया। बाद में शाकिर ने सुशीलावती को महज डेढ़ लाख रुपए दे कर उनके फ़्लैट पर कब्ज़ा कर लिया। शाकिर के इस धोखे से सुशीलवती मकान मालकिन होने के बावजूद किराए पर रहने के लिए मजबूर हो गईं। हालाँकि उन्होंने अपना घर वापस पाने की कोशिशें जारी रखीं। इसी के चलते शाकिर ने सुशीलवती की हत्या करने का मन बना लिया। इसी साजिश को अंजाम देने के लिए शाकिर फ़्लैट का बकाया पैसा देने के बहाने 3 मार्च 2022 को सुशीलावती को बुलंदशहर ले गया। रास्ते में शाकिर ने साजिश में शामिल अपने साथी फैज़ को भी बिठा लिया। दोनों ने सुशीला को रास्ते में नशीला पदार्थ दे दिया।

बताया जा रहा है कि सुशीला को नशा देकर दोनों आरोपित बुलंदशहर के चोला क्षेत्र में गए। यहाँ एक खेत के पास शाकिर ने महिला को गोली मार दी और शव खेत में छोड़ कर चले गए। बाद में 12 मार्च 2022 को लावारिस शव के आधार पर चोला थानाक्षेत्र में हत्या की FIR दर्ज हुई थी। वहीं शव की शिनाख्त न होने पर पुलिस द्वारा लाश का अंतिम संस्कार लावारिस में करवा दिया गया। इधर सुशीलवती के भाई चेतन ने अपनी बहन के न मिलने पर 12 मार्च 2022 को दयालपुर थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही थी।

इस बीच उत्तरी दिल्ली की पुलिस स्कूटी चोरी के एक अन्य मामले की जाँच कर रही थी। जाँच के दौरान पुलिस शाकिर तक पहुँच गई। शाकिर जिस स्कूटी से चलता था वह चोरी की थी। 16 जनवरी 2023 को दिल्ली पुलिस ने यमुना नगर के खजूरी इलाके से चोरी की स्कूटी से घूम रहे शाकिर और फैज़ को गिरफ्तार कर लिया। जब दोनों से पूछताछ की गई तब उन्होंने सुशीलवती की हत्या का भी राज खोल दिया।

मूल रूप से गाजियाबाद के DLF कॉलोनी का रहने वाला शाकिर पहले से दिल्ली के लक्ष्मी नगर थाने में हुए एक अपराध में शामिल बताया जा रहा है। शाकिर के पास एक कार भी बताई जा रही है जो फर्जी कागजातों से खरीदी गई है। वहीं दूसरा आरोपित फैज़ उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला बताया जा रहा है।

पुलिस पूछताछ में शाकिर ने खुद को चार्ल्स शोभराज से प्रभावित बताया। वह अन्य कई हिन्दू महिलाओं से भी सम्पर्क में भी बताया जा रहा है। इसके लिए उसने फर्जी पहचान पत्र बनवा रखे हैं। शाकिर की एक वकील से भी मिलीभगत बताई जा रही है जिसने उसके फर्जी कागजात बनवाने में मदद की थी। शाकिर एक वेश्या के भी सम्पर्क में बताया जा रहा है। आरोपितों के पास पिस्टल और कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं शाकिर ने कुछ अन्य महिलाओं को भी इसी तरह से अपना शिकार नहीं बनाया है।

सरस्वती पूजा पर DJ बजा तो होगी FIR… कॉलेजों में पूजा करने पर भी रोक: बिहार के समस्तीपुर और मधेपुरा का हाल, छात्र भड़के

अगले कुछ दिनों में होने वाली सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) को लेकर प्रशासन द्वारा जारी किए निर्देश को लेकर बिहार में बवाल हो गया है। मधेपुरा के बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में सरस्वती पूजा पर रोक लगा दिया गया है। इस फैसले से छात्र भड़क गए हैं। वहीं, समस्तीपुर में जिलाधिकारी ने DJ बजाने पर FIR की धमकी दी है।

समस्तीपुर के जिलाधिकारी योगेश सिंह और एसपी विनय तिवारी ने कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद निर्णय लिया है। एसपी ने कहा कि पूजा के दौरान डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। डीजे बजाने वाले आयोजकों के साथ-साथ साउंड सिस्टम मालिक पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।

जिला प्रशासन ने सभी थानाध्यक्षों को पूजा पंडालों सभी संवेदनशील स्थानों और मूर्ति विसर्जन वाले स्थानों को चिन्हित कर निगरानी करने का निर्देश दिया हैं। वहीं, पूजा के दौरान उपद्रव करने वाले संभावित तत्वों पर धारा 107 की कार्रवाई करने एवं बॉण्ड भराने कराने का भी आदेश दिया है।

उधर मधेपुरा के बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में सरस्वती पूजा पर रोक लगाने से छात्र नाराज हैं। सरस्वती पूजा 26 जनवरी 2023 को है। कॉलेज के प्रिंसिपल को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने लिखित आदेश निकालकर इस पर तत्काल रोक लगा दी।

प्रिंसिपल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अगर कोई ऐसा बिना अनुमति के सरस्वती पूजा का आयोजन करता है तो उस पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छात्रों कहना है कि प्रिंसिपल अरविंद कुमार अमर को आवेदन देकर सरस्वती पूजा आयोजित करने की माँग की गई थी, लेकिन प्रिंसिपल ने प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति नहीं दी।

वहीं, प्रिंसिपल का कहना है कि छात्रों ने कई बार कॉलेज में सरस्वती पूजा करने की अनुमति माँगी थी, लेकिन सभी को तीनों हॉस्टल में बड़ा फोटो लगाकर पूजा करने के लिए कहा गया। छात्रों ने फोटो लगाने से इनकार कर दिया और हंगामा शुरू कर दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का साफ कहना है कि जिस किसी को भी सरस्वती पूजा करनी है वो अपने-अपने कमरे में करें। सार्वजनिक रूप से पूजा करने पर आसपास के लोगों से विवाद बढ़ने की आशंका है। इसको देखते हुए परिसर में अनुमति नहीं दी जा रही है।

4 लोगों को मारने के लिए PFI ने बनाई कट्टरपंथियों की ‘सर्विस टीम’, हत्यारों को दी ट्रेनिंग: कर्नाटक में BJP नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या केस में 20 के खिलाफ चार्जशीट दायर

कर्नाटक में प्रतिबंधित PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के आतंकियों द्वारा मारे गए भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू (Praveen Nettaru) हत्याकांड में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट में PFI के 20 सदस्यों के खिलाफ दाखिल हुई है। इस चार्जशीट के मुताबिक आरोपितों ने चिन्हित किए गए लोगों की हत्या करने के लिए बाकायदा एक टीम बनाई थी। चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि सभी आरोपित देश में इस्लामी कानून लागू करने की साजिश रच रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NIA द्वारा दायर चार्जशीट में बताया गया है कि जाँच के दौरान उन्हें आरोपितों के देश में साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा फैलाने की साजिश का पता चला। बताया गया है कि आरोपित अपनी करतूतों से समाज को अस्थिर करना चाह रहे थे। NIA के मुताबिक बिहार के फुलवारी शरीफ में पकड़े गए आरोपितों की तरह प्रवीण नेट्टारू के हत्यारोपित भी साल 2047 तक भारत में इस्लामी कानून लागू करने का टारगेट ले कर चल रहे थे। चिन्हित किए गए लोगों की हत्या के लिए बनाए गए अलग से दल का नाम ‘सर्विस टीम’ रखा गया था।

NIA के अनुसार PFI की ‘सर्विस टीम’ न सिर्फ कत्ल के लिए टारगेट चुन रही थी बल्कि उसे अंजाम देने वालों को ट्रेनिंग भी दे रही थी। प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाबत चार्जशीट में बताया गया है कि सर्विस टीम द्वारा कुल 4 लोगों को चिन्हित किया गया था। इसके बाद नेट्टारू की 26 जुलाई 2022 को हत्या कर दी गई। हत्या से पहले सभी आरोपितों की मीटिंग बेंगलुरु के सुल्लिया टाउन में हुई थी। इस मीटिंग में सर्विस टीम के जिला प्रमुख मुस्तफा को किसी ख़ास व्यक्ति को चिन्हित कर के मारने के निर्देश मिले थे।

NIA ने इस केस में अभी तक जिन आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट लगाई है उनके नाम मोहम्मद शियाब, मुस्तफा पैचार, ए बशीर, रियाज़, मसूद, मोहम्मद शरीफ, अबू बकर सिद्दीक, नौफाल, इस्माइल, इकबाल, शहीद, मोहम्मद शफीक, उमर फारूक, अब्दुल कबीर, मोहम्मद ईशा, आबिद, शेख हुसैन, ज़ाकिर, अब्दुल हरिस और तुफैल हैं। फिलहाल मुस्तफा पैचार, मसूद, मोहम्मद शरीफ, अबू बकर सिद्दीक, उमर फारूक और तुफैल फरार चल रहे हैं। इन आरोपितों को गिरफ्तार करवाने वाले पर NIA ने इनाम भी घोषित किया है।

जानकारी के मुताबिक मोहम्म्द शरीफ और मसूद की गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 5-5 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। सूचना देने का नाम भी गुप्त रखा जाएगा। दोनों आरोपित दक्षिण कन्नड़ जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। NIA ने दोनों की तस्वीरें भी जारी की हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में आरोपित एक व्यक्ति शफीक के अब्बा प्रवीण की ही दुकान पर लम्बे समय से काम कर रहे थे। शफीक का प्रवीण के घर भी आना-जाना बताया जा रहा है।

गैर-मुस्लिमों को इस्लामी शिक्षा देना संविधान का उल्लंघन: NCPCR ने यूपी मदरसा बोर्ड को फटकारा, निर्देश के बावजूद एडमिशन देने की कर रहे थे बात

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मदरसों में गैर-मुस्लिम (Non-Muslim Students) बच्चों को पढ़ाने को लेकर बवाल हो गया है। इस विवाद पर यूपी मदरसा बोर्ड (UP Madrasa Boar) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) आमने-सामने आ गए हैं।

NCPR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा है, “यूपी मदरसा बोर्ड ने एक आपत्तिजनक और मूर्खतापूर्ण बयान दिया कि वह मदरसों में गैर-मुस्लिम छात्रों को प्रवेश देना जारी रखेगा। हमने विशेष सचिव, अल्पसंख्यक विभाग को लिखा है कि गैर-मुस्लिम छात्रों को इस्लामी शिक्षा देना अनुच्छेद 28 (3) का उल्लंघन है और उनसे 3 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।”

NCPCR ने कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम बच्चों का सर्वे करके उनका प्रवेश अन्य स्कूलों में कराया जाए। हालाँकि, बाल आयोग की इस सिफारिश को मदरसा बोर्ड ने खारिज कर दिया।

इसके बाद NCPCR ने उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के विशेष सचिव को नोटिस भेजा है। नोटिस में बाल आयोग ने इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा है। NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने नोटिस में कहा है कि 8 दिसंबर 2022 को भेजे पत्र पर अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

उधर, यूपी राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने मदरसों में अन्य धर्मों के बच्चों के पढ़ने की वकालत की है। जावेद ने कहा था कि NCPCR का पत्र मिलने के बाद उस पर निर्णय लिया गया है कि गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकाल कर दूसरी जगह प्रवेश दिलाने की व्यवस्था नहीं की जाएगी। यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड ऐसी कोई कार्यवाही नहीं करेगा।

जावेद के बयान पर NCPCR ने कहा कि वह मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के बयान से पूरी तरह असहमत है। मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों को पढ़ाना न केवल बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि आयोग के शासनादेश का भी अनादर करता है।

मुस्लिमों को दोष दे दिया… कट्टरपंथी तो मोदी और हिंदू थे: गुजरात दंगों पर BBC की ‘प्रोपेगेंडा’ डॉक्यूमेंट्री, गोधरा कांड का सच छिपाया

बीबीसी ने एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की है। इसमें गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है। दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जारी इस विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे।

इस डॉक्यूमेंट्री में 9:12 मिनट पर, यह दावा किया गया है कि इसमें आग का कारण विवादित था। लेकिन इसके बाद भी इस घटना के लिए मुस्लिमों को दोषी ठहराया गया था।

बीबीसी की पूर्व रिपोर्टर जिल मैकगिवरिंग ने इस डॉक्यूमेंट्री में कहा है, “गोधरा कांड एक ऐसे राज्य में हुआ था जहाँ हिंदू बहुसंख्यकों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। यहाँ सांप्रदायिक हिंसा और घृणित हिंसा का भी इतिहास रहा है।’

मैकगिवरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंगों का बदला लेने वाले कट्टरपंथी हिंदू के रूप में दिखाने की कोशिश है। जिसने कथित तौर पर चीजों को ऐसे पेश किया जिससे लगे गोधरा कांड के कारण हिंदुओं के बीच में गुस्सा था। इस गुस्से के कारण ही यह सब हुआ।

इस तरह से बीबीसी ने साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने वाले कट्टरपंथियों की भूमिका पर पर्दा डालने का असफल प्रयास किया है।

2002 के गोधरा ट्रेन कांड का सच

दरअसल, 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस को गोधरा स्टेशन पर लगभग सुबह 3:30 बजे पहुँचना था। उस दिन ट्रेन चार घंटे देरी से चल रही थी। इसलिए ट्रेन सुबह 7:40 बजे मिनट पर गोधरा पहुँची।

करीब 8 मिनट बाद, 2000 इस्लामवादियों की भीड़ ने गोधरा के मुस्लिम बहुल क्षेत्र – सिग्नल फलिया में ट्रेन के कोच एस 6 में आग लगा दी। इस कोच में 25 महिलाओं और 15 बच्चों सहित 59 हिंदू बैठे थे। इस्लामवादियों द्वारा लगाई गई आग में झुलस कर ये सभी मौत के मुँह में समा गए।

22 फरवरी, 2011 को निचली अदालत ने 31 इस्लामवादियों को गोधरा नरसंहार का दोषी करार दिया था। इसके बाद कोर्ट ने 11 लोगों को मृत्युदंड और 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालाँकि, अक्टूबर 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने सभी को आजीवन कारावास की सजा दे दी थी। इस केस में गोधरा कांड के प्रत्यक्षदर्शियों और जीवित बचे गवाहों के बयानों के आधार पर, कोर्ट में यह सिद्ध हो गया था कि इस्लामवादियों ने ही ट्रेन में आग लगाई थी।

एक आरोपित ने फरवरी 2003 में, कोर्ट में इस बात को स्वीकार किया था कि गोधरा कांड प्लानिंग के तहत किया गया हमला था। उसने यह भी कहा था कि वह इस हमले में शामिल था। इस तरह के बयान सबसे बड़े सबूत होते हैं। इनसे यह साबित होता है कि गोधरा कांड निर्दोष कारसेवकों पर सुनियोजित हमला था।

मार्च 2006 में आउटलुक में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में गोधरा कांड को लेकर दो पैराग्राफ में महत्वपूर्ण बातें कहीं गईं थीं;

अहमदाबाद की रहने वाली गायत्री पाँचाल, 27 फरवरी, 2002 को हुई इस घटना में बच गईं थी। लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। गायत्री ने कहा है, “बनर्जी आयोग की रिपोर्ट बिल्कुल गलत है। मैंने सब कुछ अपनी आँखों से देखा है और मुश्किल से खुद से बचा पाई। लेकिन, अपने माता-पिता दोनों को खो दिया।”

गायत्री पाँचाल ने यह भी कहा कि बनर्जी आयोग की रिपोर्ट सही नहीं है क्योंकि आग दुर्घटनावश नहीं लगी, एस-6 कोच में कोई खाना नहीं बना रहा था और यह यात्रियों से भरा हुआ था। उन्होंने कहा है, “भीड़ ने काफी देर तक कोच पर पथराव किया और फिर जलते हुए चीथड़े फेंके और कुछ ज्वलनशील पदार्थ भी डाला ताकि कोच में आग लग जाए। मुझे इस बारे में जहाँ भी बयान देने के लिए बुलाया जाएगा, मैं वहाँ जाऊँगी।”

ये स्पष्ट है कि चश्मदीदों के मुताबिक, कोच एस -6 में आग तब लगी जब मुस्लिमों ने गैसोलीन डालकर आग लगाई। साथ ही, कार सेवक भाग न पाएँ इसलिए ट्रेन को चारों ओर से घेर लिया।

यहाँ यह जानना जरूरी है कि ट्रेन में आग लगने के कारणों लेकर मुस्लिमों और लिबरलों ने जितने भी दावे किए थे, उन सभी को नानावती-मेहता आयोग ने खारिज कर दिया था। इन दावों को खारिज करने के लिए आयोग ने फोरेंसिक साईंस लेबोरेट्री की रिपोर्ट का हवाला दिया था।

यही नहीं, आयोग ने कारसेवकों और स्थानीय मुस्लिमों के बीच हुई किसी प्रकार की हिंसा और हिंदुओं द्वारा मुस्लिम लड़की के साथ छेड़छाड़ जैसी किसी भी घटना की बात को झूठ करार दिया गया था।

आयोग ने कहा था, सभी गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों से यह स्पष्ट है कि ट्रेन में क्षमता से अधिक भीड़ थी। ट्रेन के अंदर तथा बीच के स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर कभी-कभार नारेबाजी करने के अलावा रामसेवकों ने कुछ भी नहीं किया था। साथ ही, पहले ऐसी कोई घटना भी नहीं हुई थी जो गोधरा में हुई घटना का कारण बन सकती थी। रास्ते में किसी भी तरह की घटना होने का सबूत नहीं मिला है।

ऐसे में, आयोग बिना किसी हिचकिचाहट के इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा यह कहा जाना कि उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रामसेवकों और दुकानदारों के बीच झगड़ा हुआ था, पूरी तरह से आधारहीन है। अयोध्या से गोधरा तक की उसकी यात्रा में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई थी।

आग लगने के बारे में डीवी तलाटी ने नानावटी-मेहता आयोग को बताया था;

डीवी तलाटी ने कहा था, “उस कोच को जलाने में करीब 60 लीटर ज्वलनशी पदार्थ का इस्तेमाल किया गया होगा। कुछ जगहों पर कोच का फर्श पूरी तरह से जल गया था। खुली जगह में आग और सीमित स्थान पर आग लगने के बीच अंतर को समझाने के बाद, उन्होंने कहा कि आग फैलने की घटना एक ऐसी जगह पर हो सकती है जो छोटी और पूरी तरह से बंद है।”

उन्होंने कहा था, “साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच का आकार काफी बड़ा था। इसका कुल क्षेत्रफल 5000 स्क्वेयर फिट था। इसलिए, उस कोच में आग फैलने की कोई संभावना नहीं थी। आग कोच के नीचे से शुरू नहीं हुई थी। कोच को जलाने के लिए जितने ज्वलनशील पदार्थ की आवश्यकता थी, उसे बाहर से नहीं फेंका जा सकता था। ना ही बाहर से फेंके गए जलते हुए कपड़ों के टुकडों के आग लग सकती थी। चूँकि कोच के पूर्वी हिस्से में अधिक नुकसान हुआ था, इसलिए यह कहा गया था कि आग उस कोच के पूर्वी हिस्से में लगाई गई थी।”

निष्कर्ष

गोधरा नरसंहार इस्लामवादियों की निर्ममता और क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण है। हालाँकि, इसके बाद भी इस्लामवादी क्रूर अपराधियों को लेकर अपनी सहानुभूति पेश करते हैं।

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