नेपाल विमान हादसे में तकरीबन सभी यात्रियों और क्रू मेंबर की मौत हो चुकी है। अब तक 68 यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं हादसे में 5 भारतीयों की भी दर्दनाक मौत हुई है। इनमें से 4 मृतक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले थे और बचपन के दोस्त थे। एक मृतक बिहार का रहने वाला था। गाजीपुर के जिन चार लोगों की मौत हुई है, उनमें से एक सोनू जायसवाल दो बेटी के बाद बेटा होने की ख़ुशी में पशुपति नाथ दर्शन करने गए थे।
गाजीपुर जिले के चक जैनब गाँव में रहने वाले सोनू जायसवाल ने मन्नत माँगी थी कि अगर उन्हें बेटा होगा तो वह नेपाल में स्थित विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर का दर्शन करने जाएँगे। दो बेटियों के पिता सोनू की मुराद तो पूरी हो गई लेकिन भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था। वह पत्नी समेत अपनी दो बेटियों और छह माह के बेटे को छोड़ दुनिया से चले गए हैं।
सोनू के एक रिश्तेदार विजय जयसवाल ने बताया, “सोनू अपने तीन दोस्तों के साथ 10 जनवरी 2023 को नेपाल गया था। एक बेटा होने की उसकी इच्छा पूरी हो गई थी, इसलिए वह भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने गया था। लेकिन किस्मत को उसके लिए कुछ और ही मंजूर था” विमान हादसे में सोनू के बचपन के दोस्त अभिषेक कुशवाहा, विशाल शर्मा और अनिल कुमार राजभर की भी मौत हो गई।
सोनू जायसवाल जिले में बीयर की दुकान चलाते थे। उल्लेखनीय है कि सोनू ने ही घटना के वक्त फेसबुक लाइव किया था। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि सोनू को होनेवाले दुर्घटना का जरा सा भी आभास नहीं था। वह लाइव के दौरान पहले अपना फेस दिखाते हैं और फिर बाहर की ओर दिखाते हैं।
सोनू जब बाहर का वीडियो दिखाते हैं, उस समय ही प्लेन एक तरफ झुकने लगती है। हालाँकि तब भी सोनू को अंदाजा नहीं होता कि अगले चंद सेकण्ड्स में क्या होने वाला है। फिर प्लेन एक तरफ़ा झुकती चली जाती है और चीख-पुकार मचने लगती है। कुछ ही सेकेंड में प्लेन नीचे गिर जाती है और वहाँ भयानक आग लग जाती है और अब सब शांत हो चुका था और सिर्फ आग की लपटें ही दिखाई देती है।
वहीं, विमान हादसे में एक और दर्दनाक कहानी इस विमान की को-पायलट अंजू खतिवडा की है जो प्लेन को सकुशल लैंडिंग कराने के बाद मेन पायलट बनने वाली थीं। लेकिन, इससे पहले ही वह हादसे का शिकार हो गईं। वह कुछ साल पहले विमान हादसे में ही अपने पति को खो चुकी थीं। दरअसल, यात्री विमान नेपाल के पोखरा हवाई अड्डे पर उतर रहा था। इसी दौरान, सेती नदी के तट पर पहाड़ी से टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भव्य रोडशो और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के साथ ही पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान का शानदार आगाज कर दिया है। BJP की ‘नेशनल एग्जीक्यूटिव’ की मीटिंग 2 दिनों तक चलेगी। इसी दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जगत प्रकाश (JP) नड्डा के कार्यकाल को बढ़ाए जाने का भी प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। बता दें कि जून 2024 तक 13 राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।
इनमें मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम शामिल हैं। अर्थात, जून 2024 तक इन सभी राज्यों में चुनाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (16 जनवरी, 2023) को पटेल चौक से लेकर सेन्ट्रल दिल्ली स्थित NDMC मुख्यालय तक रोडशो किया। इस दौरान वो कार से बाहर निकल कर कार्यकर्ताओ का अभिवादन करते रहे।
सड़क के दोनों तरफ हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस रोडशो में फूलों की वर्षा की। कई राज्यों के लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं और रास्ते में केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में बताते हुए पोस्टर्स भी लगाए गए थे। G20 की अध्यक्षता भारत को दिए जाने संबंधी कई पोस्टर भी इस दौरान दिखे। कार्यक्रम से पहले जेपी नड्डा ने सभी राज्यों के प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों के साथ एक बैठक कर चुनावी स्थिति की समीक्षा की।
NDMC कन्वेंशन सेंटर में उन्हें एक भव्य प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा लगभग सभी केंद्रीय मंत्री 12 मुख्यमंत्री और 37 प्रदेशों के अध्यक्ष इस बैठक में शामिल होंगे। कुल मिला कर 350 बड़े नेता इस बैठक का हिस्सा बनेंगे, जिसमें लोकसभा चुनाव 2024 के लिए तैयारियाँ की जाएँगी। एक्सहिबिशन में ‘सेवा, संगठन और समर्पण’, G20 अध्यक्षता पर आधारित ‘विश्व गुरु भारत’ और जन-कल्याणकारी योजनाओं को बताते हुए ‘गुड गवर्नेंस फर्स्ट’ थीम पर आधारित प्रदर्शनियाँ होंगी।
बता दें कि इसी महीने जेपी नड्डा का राष्ट्रीय अध्यक्ष का 3 वर्षों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिसे अब बढ़ाया जा सकता है। पीएम मोदी के पहुँचते ही भाजपा की बैठक शुरू हुई, जहाँ जेपी नड्डा ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी के रोडशो से दिल्ली का विधानसभा और नगरपालिका चुनाव हार चुकी भाजपा कैडर में भी नया जोश पैदा होगा। 160 मुश्किल सीटों के लिए पार्टी विशेष रणनीति बना रही है। कई विस्तारकों को क्षेत्रों में भेज कर रिपोर्ट माँगी गई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया, “2023 हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हमें 9 प्रदेशों में चुनाव लड़ना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने पूरी कार्यकारिणी से आह्वान किया कि चुनाव के लिए कमर कस लें, हमें सभी 9 राज्यों में जीत दर्ज करनी है। बॉर्डर रोड 3600 किलोमीटर तक बने हैं जबकि कांग्रेस के रक्षामंत्री ऐसा करना ही नहीं चाहते थे। गुलामी के दुर्भायपूर्ण अतीत को समाप्त करते हुए 75 साल तक चले ‘राजपथ’ को बदल कर हमने ‘कर्तव्य पथ’ किया, अपनी परंपराओं पर गर्व करते हुए हुए काशी कॉरिडोर बना, महाकाल लोक बना, केदारनाथ का वैभव पुनर्स्थापित हुआ और अब राम मंदिर बन रहा है।”
इस साल 14 जनवरी को अमेरिका की आर’बोनी गेब्रियल को मिस यूनिवर्स का ताज पहनाया गया। 71वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के दौरान अलग-अलग देशों की कंटेस्टेंट ने अपने देश की संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
कॉस्ट्यूम राउंड के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व कर्नाटक की मॉडल दिविता राय ने सोने की चिड़िया के अवतार में किया। वहीं, नेपाल की कंटेस्टेंट सोफिया भुजेल अपने देश की संस्कृति को दर्शाने के लिए काली माता के अवतार में नजर आईं।
इस दौरान सभी लोग सोफिया भुजेल का लुक देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने तालियाँ बजाकर उनका प्रोत्साहन किया। यही नहीं दुनियाभर में नेपाल की कंटेस्टेंट के लुक की काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर भी सोफिया का लुक खूब वायरल हो रहा है।
Good to see Miss Nepal Sophia Bhujel taking pride in Hindu culture! She has presented herself as Mahakali… The Goddess of Ultimate Power.??? #MissUniversepic.twitter.com/XCsIOdXdr9
वायरल वीडियो में वह मंच पर एक देवी के रूप में आत्मविश्वास से चलते हुए दिखाई दे रही हैं। अलग-अलग देशों के लोग अपने देश की संस्कृति से दुनिया को वाकिफ करवाने के लिए नेपाल की मिस यूनिवर्स की तारीफ कर रहे हैं। वह उनकी वीडियो को शेयर भी कर रहे हैं। वायरल वीडियो और तस्वीरों में नेपाल की सोफिया सोने के आभूषणों से सजी नजर आ रही हैं। उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई है। अपने हाथों में त्रिशूल लिया हुआ है और माथे पर तीसरी आँख भी बनाई हुई है।
सोफिया ने अपने इंस्टाग्राम पर भी इस तस्वीर को शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने कैप्शन भी लिखा है। इसका शीर्षक उन्होंने ‘शक्ति, द डिवाइन फेमिनिन’ दिया है। इसके बाद वह लिखती हैं, “नेपाल, प्राचीन इतिहास और परंपराओं से समृद्ध देश है। यह प्राकृतिक और सांस्कृतिक सुंदरता का देश है। नेपाल एक ऐसा देश है, जहाँ सदियों से देवी की पूजा की जाती रही है। इस वर्ष अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए, अपनी राष्ट्रीय पोशाक के लिए हम महाशक्ति से प्रेरणा लेते हैं, जो सृष्टि का स्रोत है। सबका स्रोत है। लाल रंग रक्त को दर्शाता है और सृजन की शक्ति का प्रतीक है।”
सोफिया आगे लिखती हैं, “त्रिशूल जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। यह पोशाक हमें अपनी शक्ति का अहसास कराती है। यह इस तथ्य को दोहराता है कि हर महिला में असीमित शक्ति के स्रोत हैं। यह पोशाक आपको, आपकी शक्ति याद दिलाने के लिए है। आपको अपने भीतर देखने और आपके भीतर रहने वाली शक्ति को फिर से जगाने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह वास्तव में जीवन का एक उत्सव है।”
बता दें कि 25 अगस्त, 2022 को सोफिया भुजेल को मिस यूनिवर्स नेपाल 2022 का ताज पहनाया गया था। सोफिया भुजेल ने काठमांडू से बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातक तक की पढ़ाई की है। 71वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में नेपाल का प्रतिनिधित्व करने से पहले उन्होंने 17 मार्च, 2022 को मिस इको इंटरनेशनल 2022 में नेपाल को प्रेजेंट किया था।
एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) विवादित बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि इस्लाम ने भारत को लोकतंत्र का तोहफा दिया।
इस वीडियो को न्यूज 24 ने ट्वीट किया था, जिसे असदुद्दीन ओवैसी ने भी रीट्वीट किया है। वीडियो में वह इस्लाम पर भाषण देते दिखाई दे रहे हैं। इस भाषण में ओवैसी ने कुछ किताबों का हवाला देते हुए कहा है, “इस देश में आए आखिरी तीन काफिले इस्लाम से थे। जो यहाँ आकर बस गए। जिस प्रकार गंगा और यमुना का उद्गम अलग-अलग स्थानों से होता है, लेकिन प्रकृति के नियम के कारण जब वे मिलती हैं, तो उसे संगम कहा जाता है। हम अपना खजाना लेकर यहाँ आए। हमने अपने बंद दरवाजे खोल दिए और हमने सब कुछ दे दिया, और इस देश को इस्लाम ने जो सबसे अनुपम उपहार दिया, वह लोकतंत्र का उपहार था।”
इससे पहले भी कई इस्लामिक लोग खाने-पीने की चीजों से लेकर कपड़ों तक को लेकर इसी तरह के दावे करते रहे हैं। लेकिन यह पहली बार हुआ है जब लोकतंत्र को लेकर इस तरह का दावा किया गया हो।
ओवैसी के इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिकिया देखने को मिल रहीं हैं। लोग यह पूछ रहे हैं कि यदि इस्लाम ने हिंदुस्तान को लोकतंत्र दिया तो फिर इस्लामिक देशों में लोकतंत्र क्यों नहीं है।
महेंद्र कुमार सिंह नामक यूजर ने लिखा है, “इस्लाम ने इस्लामी देशों में लोकतंत्र का तोहफा क्यों नहीं दिया? सभी मुस्लिम देश जैसे लेबनान, इराक, ईरान, सऊदी अरब, ओमान, कतर और तमाम देश आज भी तानाशाही और अधिनायकतंत्र (तानाशाही) की जंजीरों में जकड़े हुए हैं और वे कभी आजाद नहीं होंगे। इस्लाम ने कंजूसी क्यों की?”
इस्लाम ने इस्लामी देशों में जम्हूरियत का तोहफा क्यों नहीं दिया ?? सभी मुस्लिम देश मसलन लेबनान ,इराक ,ईरान , सऊदी अरेबिया , ओमान , कतर और तमाम देश आज भी तानाशाही और अधिनायकतंत्र ( DICTATORSHIP ) की जंजीरों में जकड़े हुए हैं और वे कभी आजाद नहीं होंगे ! इस्लाम ने कंजूशी क्यों की ?? https://t.co/nEzsoFSd38
एक अन्य यूजर ने लिखा, “मुगल बादशाह को जो औरत पसंद आती थी उसके पति को उसे तलाक देना पडता था और वो औरत बादशाह के हरम में भेज दी जाती। वाह रे लोकतंत्र। जोक मत किया करो।”
मुगल बादशाह को जो औरत पसंत आती थी उसके पती उसको तलाक देना पडता था और वो औरत बादशाह के हरम भेज दि जाती। वाह रे लोकतंत्र।जोक मत किया करो।
— Sharma #Hindu #NotBJPHindu #Telugu #BrahminByBirth (@bramhasmiiii) January 16, 2023
बता दें कि इससे पहले शनिवार (14 जनवरी 2023) को ओवैसी ने एक खबर शेयर की थी। इसमें दावा किया गया था कि ‘जय श्री राम’ का नारा नहीं लगाने पर कुछ लोगों ने ट्रेन में एक मुस्लिम युवक की पिटाई की है। हालाँकि, बाद में यह खबर झूठी पाई गई थी। यहाँ तक कि रेलवे पुलिस ने भी इसका खण्डन किया था।
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में मुगल आक्रांता औरंगजेब और टीपू सुल्तान की फोटो लेकर नाचने वाले 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद हिंदू संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद, यह कार्रवाई हुई है।
दरअसल, वासिम जिले के मंगरुलपिर कस्बे में शनिवार (14 जनवरी 2023) की रात दादा हयात कलंदर साहब का संदल जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान, जुलूस में नाचने वाले लोग औरंगजेब और टीपू सुल्तान की फोटो लहरा रहे थे।
Images of cruel “Aurangzeb” was displayed in Mangrulnath, Washim in a rally Strict action needed?
महाराष्ट्राच्या पावन भुमीवर मंदीरे तोडणारा, धर्मवीर संभाजीराजेंची हत्या करणारा, हिंदूची कत्तली करणारा, आयाबहिणी बाटवणारा क्रुरकर्मा औरंग्याचे फोटो झळकवले जात आहे कडक कारवाई व्हावी pic.twitter.com/Qvo1n5InaN
इस घटना का वीडियो रविवार (15 जनवरी 2023) से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठन के लोग जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन करने लगे। कई जगह पर औरंगजेब का पुतला फूँकने की भी खबर आई थी। हिंदू संगठनों के बढ़ते विरोध के बीच पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इसके बाद अब, मंगरुलपिर पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जाँच कर कार्रवाई करने की बात कर रही है। एबीपी कीरिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
Maha | Case registered against 8 people in Washim in connection with a viral video of people dancing with Mughal emperor Aurangzeb’s photos
Mangrulpir Insp says, “Some youths carried Aurangzeb’s photos during Dada Hayat Qalandar’s urs on Jan 1 & raised slogans. Case registered.” pic.twitter.com/iGv1DnpcQH
वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात किए जा रहे हैं। प्रशासन जनता से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहा है।
औरंगजेब को लेकर छिड़ा था सियासी विवाद
दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने कहा था कि छत्रपति संभाजी महाराज धर्मवीर नहीं थे, बल्कि स्वराज्य रक्षक थे। इसके बाद एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने एक कदम आगे बढ़ते हुए औरंगजेब को लेकर दावा कर दिया कि वह क्रूर और हिंदू विरोधी नहीं था।
जितेंद्र आव्हाड ने कहा था “छत्रपति संभाजी महाराज को बहादुरगढ़ लाया गया, जहाँ उनकी आँखें निकाल दी गईं। बहादुरगढ़ किले के पास एक विष्णु मंदिर था। अगर औरंगजेब क्रूर या हिंदू विरोधी होता तो वह उस मंदिर को भी तोड़ देता।”
इस बयान के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पटलवार करते हुए कहा था कि एनसीपी छत्रपति संभाजी महाराज का अपमान कर रही है और औरंगजेब की तारीफ कर रही है। औरंगजेब ने महाराष्ट्र में कई मंदिरों को तोड़ा और महिलाओं पर अत्याचार किया था।
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव अब कुछ ही महीने दूर हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा (Manik Saha) के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत सुनिश्चित करने की है। साहा पेशे से डेंटल सर्जन है और लोगों से जुड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। भाजपा आलाकमान ने उन्हें राज्य में पार्टी को संकट के भंवर से निकालने के लिए रातोंरात राज्यसभा से बुला लिया था और मुख्यमंत्री बनाया था।
साहा राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच बढ़ती सत्ता विरोधी लहर और शिकायत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। राज्य में कार्यभार सँभालने के बाद, साहा लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वह राज्य की जनता की भलाई के लिए नई नीतियाँ ला रहे हैं और कई योजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं। आगामी चुनावों से पहले ऑपइंडिया ने रविवार (15 जनवरी 2023 ) रात मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों से उनके संवाद कार्यक्रम के दौरान उनसे बातचीत की ।
प्रश्न : डॉ. साहा हमें समय देने के लिए शुक्रिया। आपने हाल ही में डीए/डीआर में 12% बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसका सीधा असर राज्य के 1.8 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। यह सराहनीय कदम है। यह एक तरह से राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। भले ही भाजपा मजबूत स्थिति में है, लेकिन हमने पार्टी के कुछ नेताओं को विपक्षी खेमे में जाते देखा है। क्या भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा इस तरह के अंतिम समय के विद्रोह से 2023 के चुनाव में पार्टी के राजनीतिक परिणाम पर असर पड़ेगा?
उत्तर : “यह एक ‘मेंढक की तरह का जीवन चक्र (toad cycle)’ है। पहले वे भाजपा में शामिल हुए, फिर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में, फिर कॉन्ग्रेस (Congress) में और फिर सीपीआईएम (CPIM) में शामिल हुए। राजनीति में कुछ सिद्धांत होना चाहिए। जब अमित शाह जी धर्मनगर (उत्तर त्रिपुरा जिला) आए थे, तब आपने लोगों की भीड़ देखी थी। आपने ‘जन विश्वास रथ’ यात्रा के दौरान पश्चिम त्रिपुरा जिले में जेपी नड्डा जी को मिले भारी समर्थन को भी देखा था।”
Tripura | BJP national president JP Nadda along with CM Manik Saha holds a roadshow in West Tripura district. pic.twitter.com/9vv65GgoM3
उन्होंने आगे कहा, ”हमारे आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से लोग हमसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। हमने अपनी योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को छुआ है। लोग आ सकते हैं और जा सकते हैं लेकिन हम अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। हमें विश्वास है कि कुछ नेताओं के दल-बदल का चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आपने उपचुनाव के नतीजे देखे हैं, जहाँ हमें 4 में से 3 सीटें मिली हैं। हमारे पास लोगों का समर्थन है।”
प्रश्न: हाल के दिनों में प्रमुख चिंताओं में से एक त्रिपुरा में बढ़ती बंगाली विरोधी भावना है, जो तिपराहा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन (TIPRA) की वजह से बढ़ी है। स्थानीय लोग यहाँ अपने लिए एक अलग मातृभूमि की माँग कर रहे है। त्रिपुरा ने अतीत में बंगालियों और जनजातीय समुदायों के बीच घातक जातीय संघर्ष को देखा है। हम उन दिनों से आगे निकल चुके हैं और राज्य में जातीय सद्भाव बनाए रखने में सक्षम हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में आप स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने, बढ़ते तनाव को कम करने और राज्य में सद्भाव बनाए रखने की योजना कैसे बनाते हैं?
उत्तर : त्रिपुरा में पिछले सत्तारूढ़ शासन, चाहे वह कॉन्ग्रेस हो या वामपंथी, ने जनजातीय समुदाय का शोषण किया था और उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया था। हाँ, मैं कुछ स्थानीय लोगों के बीच बढ़ती बंगाली विरोधी भावना से अवगत हूँ, जिसे निहित स्वार्थ की वजह से कुछ लोगों ने बढ़ावा दिया है। मैंने हाल ही में स्वायत्त जिला परिषद (ADC) के तहत आने वाले खुमुलुंग में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। एक महिला मेरे पास आई और मुझसे कहा कि यह पहली बार था जब उसने समावेशिता की भावना महसूस की। हाँ, इस खाई को पाटने के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। हमें संचार के बेहतर माध्यमों की आवश्यकता है और कुछ दिनों में इस संबंध में कुछ ठोस किया जाएगा। यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है ताकि स्थानीय लोग उपेक्षित महसूस न करें।”
The present state government is committed to ensure various Agri facilities across Tripura.
Took part in the inauguration of newly-built Primary Rural Market at Belbari in Khumulwng today.
I am happy to see the spirit among the Janajati mothers & sisters towards self-reliance. pic.twitter.com/ADPZG4F9cr
सत्र के दौरान, डॉ माणिक साहा ने यह भी बताया कि भाजपा द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने के लिए बुलाए जाने से पहले वह केवल तीन दिन ही राज्यसभा के सदस्य रहे थे। उन्होंने कहा कि फैसले से 30 मिनट पहले भी उन्हें नहीं पता था कि वह मुख्यमंत्री बनने जा रहा हैं। बकौल साहा, उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में पार्टी की सेवा की है और जो भी काम उन्हें सौंपा गया, उसे पूरी ईमानदारी के साथ किया है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कैसे उन्हें वामपंथी शासन ने परेशान किया था और उन्हें अदालत में लड़ने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा, “मैं प्रतिशोध की राजनीति से घृणा करता हूँ। अगर विपक्ष में से कोई भी कोई अनुरोध करता है या कोई समस्या उठाता है, तो मैं इसे पूरी गंभीरता से लेता हूँ।”
हमारे पूछे जाने पर कि विरोधी पार्टियाँ ऐसा बर्ताव नहीं करतीं, इस पर डॉ साहा ने कहा- “कोई बात नहीं। जब तक मैं सत्ता में हूँ। मैं बताऊँगा कि राजनैतिक मतभेद होने के बाद भी किस तरह ढंग से बर्ताव किया जा सकता है।”
उन्होंने उन हाइवे, इंटरनेट, रेलवे और एयरपोर्ट के मुद्दों पर भी बात की, जिनका वादा पीएम मोदी ने त्रिपुरा की जनता से 2018 में किया। आज त्रिपुरा कनेक्टिविटी, हाई स्पीड नेट, रेलवे नेटवर्क को लेकर एक बहुत अच्छी स्थिति में है।
नया एयरपोर्ट टर्मिनल (तस्वीर साभार: दिबाकर दत्ता/OpIndia)
उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑपइंडिया ने यह भी बताया था कि कैसे डीए/डीआर में 12% की बढ़ोतरी त्रिपुरा बीजेपी के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है जबकि लेफ्ट, टीएमसी या कॉन्ग्रेस बेहतर विकल्प का वादा करने में विफल रही है।
अपनी बात खत्म करते हुए डॉ मणिक ने कहा कि उनकी सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट पर लगे कर्मचारियों और पार्ट टाइम वर्करों की दिहाड़ी दोगुनी कर दी है। ऐसी शुरुआत की जिससे युवाओं को खेल के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने बताया कि कैसे उनका सपना था कि एक डेंटल कॉलेज शुरू हो, जो कि भाजपा की डबल इंजन सरकार में संभव हुआ।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह ही वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर का कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पाँच एकड़ में यह कॉरिडोर फैला होगा। इसमें श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएँ मुहैया कराई जाएँगी।
मीडिया रिपोर्टों में इस कॉरिडोर का जो प्लान बताया गया है उसके मुताबिक यह दो मंजिला होगा। कॉरिडोर में प्रवेश के तीन रास्ते होंगे। पहला रास्ता जुगलघाट से सीधा मंदिर तक जाएगा। दूसरा रास्ता विद्यापीठ चौराहे से आएगा। वहीं, तीसरा रास्ता जादौन पार्किंग से होगा। इसे VIP मार्ग कहा जाता है। इन रास्तों की चौड़ाई करीब 20 से 25 मीटर तक होगी।
कॉरिडोर बनने के बाद पाँच हजार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकेंगे। अभी केवल 800 श्रद्धालु ही एक साथ दर्शन कर पाते हैं। कॉरिडोर के माध्यम से मंदिर और यमुना नदी को जोड़ दिया जाएगा। इससे श्रद्धालु यमुना नदी में डुबकी लगाने के बाद कॉरिडोर के जरिए सीधा मंदिर पहुँचकर बांके बिहारी के दर्शन कर सकेंगे।
वाराणसी के काशी विश्नवनाथ कॉरिडोर की तरह ही मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में भी कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. कॉरिडोर को लेकर सर्वे का काम पूरा हो चुका है. ये पूरा कॉरिडोर पांच एकड़ में बनाया जाएगा.
बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए सामान रखने की जगह, जूता घर, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था होगी। चिकित्सा और बच्चों की देखभाल समेत कई सुविधाएँ मुहैया कराई जाएँगी। इस कॉरिडोर का ऊपरी हिस्सा 11 हजार 600 वर्ग मीटर का होगा और निचला हिस्सा 11 हजार 300 वर्ग मीटर का।
कॉरिडोर में श्रद्धालु बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के साथ चार और प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी कर सकेंगे। इसमें दो प्राचीन मंदिर मदन मोहन मंदिर और राधा वल्लभ मंदिर हैं। कहा जा रहा है कि कॉरिडोर को बनाने के दौरान इसके रास्ते में आने वाले 321 भवन और संपत्तियों का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए प्रभावितों को 200 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।
इस कॉरिडोर से मंदिर का मूल स्वरूप खत्म होने का दावा भी कुछ लोग कर रहे हैं। लेकिन मथुरा से बीजेपी सांसद (BJP MP) हेमा मालिनी (Hema Malini) ने इसे खारिज किया है। उन्होंने कहा है, “जो भी बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर को लेकर ऐसा कह रहे हैं, ये उनका व्यक्तिगत विचार है। हम भी यही चाहते हैं कि वृंदावन का प्राचीनकाल का स्वरूप वैसा का वैसा ही रहे। यह हमारी जिम्मेदारी है।”
साथ ही उन्होंने कहा कि कॉरिडोर का निर्माण वृंदावन की सबसे बड़ी जरूरत है। इस कॉरिडोर के निर्माण से पर्यटन व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसी को कोई तकलीफ नहीं होगी। सबको समान जगह मिलेगी। व्यापारियों को भी सुविधा होगी। यहाँ आने-जाने वाले लोगों और दर्शन करने वालों को बहुत ही सेफ जगह मिलेगी।
मथुरा
➡बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर पर सांसद हेमा मालिनी का बयान
➡कॉरिडोर के निर्माण से पर्यटनस व्यापार को बढ़ावा मिलेगा-हेमा
➡कॉरिडोर निर्माण वृंदावन की सबसे बड़ी जरूरत है -हेमा मालिनी
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन धाम में रमण रेती पर स्थित है बांके बिहारी मंदिर। यह देश के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप दिखाया गया है। 1864 में भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त स्वामी हरिदास ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। माना जाता है कि इस मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्वयंभू है।
झारखंड के रामगढ़ जिले में एक शादीशुदा हिंदू महिला की अरमान खान उर्फ रॉकी ने पीट पीटकर हत्या कर दी। मृतक महिला की पहचान ममता के तौर पर हुई है। घटना के बाद से अरमान फरार है।
बताया जा रहा है कि ममता पर अरमान अपने पति को छोड़ने का दबाव डाल रहा था। इससे इनकार किए जाने पर उसने उसकी हत्या कर दी। जब उसने इस घटना को अंजाम दिया ममता की तीन साल की बेटी भी घर में ही थी। घटना शनिवार (14 जनवरी 2023) देर शाम की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र अंतर्गत भादवाटांड़ में जया देवी अपने पति के साथ किराए के मकान में मकान में रहती हैं। हाल में ही उनकी बहन ममता भी यहाँ आई थी। उससे मिलने अरमान भी पहुँच गया जो कथित तौर पर उसका प्रेमी था।
जया देवी के अनुसार अरमान धमकी देकर अक्सर ममता को मिलने के लिए बुलाता था। ममता दिल्ली में अपने पति के साथ रह रही थी। शनिवार (14 जनवरी 2023) को ममता अपनी बेटी के साथ घर पर अकेली थी। इसी दौरान, अरमान से उसका झगड़ा हो गया। झगड़े के दौरान ही अरमान ने ममता को लाठी-डंडों से पीट पीटकर लहूलुहान कर दिया।
जया देवी ने बताया कि जब वह घर लौटीं तो उन्होंने देखा कि ममता की बेटी घर के बाहर बैठकर रो रही है। उन्होंने घर के अंदर जाकर देखा तो ममता खून से सनी हुई थी। आनन-फानन में वह ममता को रामगढ़ के सदर हॉस्पिटल लेकर गईं, जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हत्या की सूचना मिलने पर स्थानीय बरकाकाना थाना प्रभारी शशि प्रकाश ने मौके पर पहुँचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थाना प्रभारी का कहना है कि हत्या का यह मामला लव ट्रायंगल का है। मृतक ममता की बहन जया देवी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। हत्या के बाद से ही आरोपित अरमान फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।
अरमान ने 3 साल की मासूम बेटी के सामने ही ममता की हत्या की थी। घटना की एकमात्र चश्मदीद इस बच्ची ने पुलिस कि अरमान ने उसकी माँ को पीटा और फिर खेत के रास्ते भाग गया।
केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में केंद्र के प्रतिनिधियों को शामिल करने की सलाह दी है। कहा है कि इससे जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। जनता की ओर जवाबदेही भी तय होगी।
केंद्रीय मंत्री के इस पत्र पर दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “ये बेहद खतरनाक है। न्यायपालिका में नियुक्ति में सरकार का कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।” उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए किरण रिजिजू ने कहा,
आशा करता हूँ कि आप अदालत के निर्देश का सम्मान करेंगे! यह राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम (National Judicial Appointment Commission Act) को रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्देश की फॉलो-अप कार्रवाई है। SC की संविधान पीठ ने कॉलेजियम प्रणाली के MoP (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) को पुनर्गठित करने का निर्देश दिया था।
I hope you honour Court’s direction! This is precise follow-up action of the direction of Supreme Court Constitution Bench while striking down the National Judicial Appointment Commission Act. The SC Constitution Bench had directed to restructure the MoP of the collegium system. https://t.co/b1l0jVdCkJ
इससे पहले इस संबंध में उप राष्ट्रपति और लोकसभा स्पीकर भी अपनी राय दे चुके है। उनके अलावा सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व जज रूमा पाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए 2011 में कह दिया था कि कॉलेजियम प्रक्रिया ने ऐसी धारणा बनाई है- “आप मुझको बचाओ, मैं आपको बचाऊँ।”
कॉलेजियम सिसस्टम में सुधार का मुद्दा केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने इस प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जजों की नियुक्ति में सरकार की बहुत सीमित भूमिका है जबकि जजों की नियुक्ति करना सरकार का अधिकार है। देश में 5 करोड़ से अधिक केस लंबित हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जजों की नियुक्ति है।
2015 में NJAC असंवैधानिक करार
बता दें कि साल 2015 में नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन एक्ट (NJAC) लाया गया था। इसमें जजों की नियुक्ति को लेकर कई बदलावों की बात थी। इसके मुताबिक NJAC की अगुआई सीजेआई को करनी थी। इनके अलावा 2 सबसे वरिष्ठ जजों को रखा जाना था और साथ में कानून मंत्री और प्रतिष्ठित लोगों को इसमें शामिल करने का सिस्टम इस एक्ट में दिया गया था।
ऐसे ही NJAC में प्रतिष्ठित लोगों का चयन प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और CJI के पैनल को करने की व्यवस्था थी। मगर अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया। अब सीजेआई को लिखे गए पत्र को नए NJAC के तौर पर देखा जा रहा है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में 5 सदस्य होते हैं। मुख्य न्यायाधीश इसमें प्रमुख होते हैं। इनके अलावा 5 सबसे वरिष्ठ जज होते हैं। इस समय कॉलेजियम में जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस केएम जोसेफ शामिल हैं।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि मजहबी कारणों से ‘फतवों’ का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘फतवों’ को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।खान ने कहा कि कुरान में इस तरह की 200 आयतें हैं, जिसमें बताया गया है कि कोई भी इंसान यह तय नहीं कर सकता कि कौन सही है और कौन गलत।
Delhi| ‘Fatwas’ are never used because of religious reasons. There are 200 instances in Quran & no human being can decide who is right and who is wrong. ‘Fatwas’ are being used as a political weapon: Kerala Governor Arif Mohammed Khan (15/01) pic.twitter.com/xZWmZPd3QD
आरिफ मोहम्मद खान ‘पाञ्चजन्य’ पत्रिका के 75 वर्ष पूरे होने पर 15 जनवरी, 2023 को आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उनसे जब ‘मुस्लिम श्रेष्ठता’ और मौलाना वर्ग द्वारा इसे बढ़ावा देने के मामले पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो पहला कुफ्र का फ़तवा किसी गैर-मुस्लिम के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम के खिलाफ ही जारी किया गया था। सबसे पहला फ़तवा हजरत अली पर लगाया गया, जिनकी परवरिश पैगंबर साहब ने की थी। फतवे की वजह से उनका कत्ल कर दिया गया था।
उन्होंने आगे कहा, “फ़तवा कभी भी मजहबी कारणों से नहीं हो सकता है। कुरान में ऐसी 200 आयतें हैं, जिनमें कहा गया है कि दुनिया में तुम्हारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन जब मरने के बाद हमारे पास आओगे तो हम फैसला करेंगे कि कौन अच्छा है और कौन बुरा है। कुरान सही या गलत के बारे में फैसला करने का अधिकार पैगंबर को भी नहीं देता है।”
केरल के राज्यपाल ने कहा कि 1980 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कहने पर उन्होंने कानपुर से चुनाव लड़ा था। बकौल खान, इंदिरा गाँधी ने उनसे कहा था कि उनकी हिंदी अच्छी है और 1952 से कॉन्ग्रेस ने उस सीट से चुनाव नहीं जीता है, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस दौरान हिंदी के शब्द बोलने पर भी कुफ्र का फतवा जारी हो जाता था।
उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ यह बोलकर फतवा जारी किया गया था कि मैं हिंदी बोलता हूँ, तिलक लगाता हूँ, आरती करवाता हूँ। उन्हें तो मेरे नाम में भी समस्या नज़र आई थी। दारा शिकोह के खिलाफ भी कुफ्र का फ़तवा जारी किया गया था। फतवों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जाता है।”
उल्लेखनीय है कि इससे पहले ‘पाञ्चजन्य‘ और ‘द ऑर्गेनाइजर’ को दिए साक्षात्कार में संघ प्रमुख मोहन भगवत ने कहा था कि मुस्लिमों को भारत में कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्हें श्रेष्ठता का भाव छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा था, “भारत में इस्लाम को कोई खतरा नहीं है। लेकिन, ‘हम बड़े’ हैं, हम पहले राजा थे, फिर से राजा बनेंगे’ – यह भाव छोड़ना पड़ेगा। ‘हम सही हैं, बाकी सब गलत हैं’ – इसे छोड़ना पड़ेगा। ‘हम अकेले रहते हैं और आगे भी अकेले रहेंगे’ – इस भाव को छोड़ना पड़ेगा।”