Home Blog Page 2098

किसी ने जान से मारने की धमकी दी तो किसी ने बिहारियों को बता दिया ‘पानी-पूरी बेचने वाला’: राज्यपाल पर DMK नेताओं के बिगड़े बोल

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी डीएमके और राज्यपाल के बीच शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। डीएमके नेतागण राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ लगातार विवादित बयान दे रहे हैं। एक ओर जहाँ पार्टी प्रवक्ता शिवाजी कृष्णमूर्ति ने राज्यपाल को जान से मारने की धमकी दी है वहीं दूसरी तरफ संगठन सचिव आरएस भारती ने उन्हें पानीपूरी बेचने वालों जैसा करार दिया है।

डीएमके प्रवक्ता शिवाजी कृष्णमूर्ति ने विवादित बयान देते हुए कहा है, “अगर राज्यपाल अपने विधानसभा भाषण में अंबेडकर का नाम लेने से इनकार करते हैं, तो क्या मुझे उन पर हमला करने का अधिकार नहीं है? यदि आप (राज्यपाल) तमिलनाडु सरकार द्वारा दिए गए भाषण को नहीं पढ़ते हैं, तो कश्मीर जाएँ और हम आतंकवादी भेजेंगे ताकि वे आपको मार गिराएँ।”

वहीं, डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती ने राज्यपाल आरएन रवि की तुलना पानीपूरी बेंचने वालों से कर दी है। उन्होंने कहा है, “मैंने पहले ही कहा था कि जो लोग सोन पापड़ी और पानीपुरी बेचते हैं, वे तमिलनाडु के गौरव को नहीं जानते हैं। मैंने यह बात एक बैठक में कही थी। मुझे पता चला कि कई लोग बिहार से आए हैं और मुझे लगता है कि राज्यपाल भी इसी तरह ट्रेन से आए हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है कि एक राज्यपाल का काम उस व्यक्ति की तरह है जो दावत के बाद पत्तल उठाता है। आरएस भारती ने कहा, “गाँव में एक पुरानी कहावत है, अगर आपको पत्ते उठाने के लिए कहा जाए तो पत्ते (केले के पत्तों को दावत के लिए प्लेटों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है) की गिनती न करें, राज्यपाल का काम पत्ते उठाने वाले व्यक्ति की तरह है।”

डीएमके नेता ने राज्यपाल के भाषण को लेकर कहा है, “वह भाषण पत्ते (केले के पत्ते पर खाना परोसा जाता है) पर रखे खाने की तरह था, आप (राज्यपाल) रसोइया हैं। आपको खाना पकाकर वहीं छोड़ देना चाहिए था। यदि कुछ रखने का इरादा है तो क्या खाने वाला चुप होगा रहेगा? मैं शेखी नहीं बघार रहा, लेकिन यदि जयललिता का शासन होता तो उन पर (राज्यपाल) हमला होता और पार्टी के लोग भी चुप नहीं बैठते।”

बता दें कि सोमवार (9 जनवरी, 2023) को तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल भाषण दे रहे थे। इस भाषण के दौरान उन्होंने सरकार द्वारा लिखकर दिए गए भाषण के कुछ हिस्से को नहीं पढ़ा था। यही नहीं, उन्होंने अपनी ओर से भी कुछ टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के बाद राज्यपाल और डीएमके बीच विवादित बयानबाजी जारी है।

वहीं, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लिखित भाषण के अलावा की गई टिप्पणियों के खिलाफ मंगलवार (10 जनवरी, 2023) को प्रस्ताव पेश कर दिया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था, “संविधान के अनुसार, परंपरा है कि राज्यपाल (राज्य) सरकार द्वारा तैयार भाषण पढ़ते हैं। इस अभिभाषण में राज्यपाल के निजी विचारों और आपत्तियों के लिए कोई स्थान नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत वक्तव्य नहीं है, बल्कि सरकार का भाषण है।”

बंगाल में मंत्री के सामने युवक की पिटाई, गुनाह -समस्या लेकर आया था: उधर कार्यकर्ता के घर पहुँची TMC सांसद, फोटो खिंचवा कर बिना खाए उठ गई

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल (West Bengal) की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं की नजरों में कार्यकर्ताओं का कितना महत्व है, इसे एक घटना से समझा जा सकता है। टीएमसी नेता शताब्दी रॉय एक कार्यकर्ता के घर गईं और फोटो खिंचवाने के बाद बिना उठ गईं। वहीं, खाद्य मंत्री रथिन घोष के सामने एक युवक की पिटाई कर दी गई।

फिल्म अभिनेत्री से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद बनीं शताब्दी रॉय ने बीरभूम में जाकर जो किया, उससे वह विवादों में घिर गईं हैं। भाजपा ने इस घटना के बाद तृणमूल और शताब्दी रॉय को घेरना शुरू किया तो वह बहाने बनाने लगीं। उन्होंने कहा कि दरअसल वह खाना खा चुकी थीं और उनका पेट भरा हुआ था।

दरअसल तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पंचायत चुनावों को देखते हुए अपने नेताओं से लोगों से जनसंपर्क बढ़ाने के लिए कहा है और इसके लिए ‘दीदी का दूत’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें पार्टी के नेता गाँव-गाँव जाकर लोगों की बात सुन रहे हैं। इसी कार्यक्रम के तहत शुक्रवार (13 जनवरी 2023) को सांसद शताब्दी रॉय भी अपने लोकसभा क्षेत्र बीरभूम पहुँची थीं।

इस दौरान बीरभूम के विष्णुपुर के तेंतुलिया के TMC कार्यकर्ता सुजीत सरकार के घर में सांसद के लिए खाने-पीने का इंतजाम किया गया था। जब शताब्दी यहाँ पहुँची तो उनके साथ जिला स्तर के भी कई नेता भी मौजूद थे। इन सबके लिए वहाँ खाने का प्रबंध किया गया था।

इस दौरान अन्य नेताओं की तरह शताब्दी रॉय भी जमीन पर खाने के लिए बैठ गईं। उनके सामने खाना भी परोसा गया। हालाँकि, खाना खाने के बजाय शताब्दी रॉय ने अपना चश्मा उतारा और फोटो खिंचवाया। उसके बाद खाना तो दूर, उसे छुए बिना ही उठ गईं। इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने टाल-मटोल किया। बाद में TMC ने कहा कि वह कार्यकर्ता के घर के अंदर जाकर खाना खाई थीं।

इस घटना के बाद भाजपा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया। भाजपा के बीरभूम जिलाध्यक्ष ध्रुव साहा ने कहा कि शताब्दी रॉय को कार्यकर्ता के घर खाने का सिर्फ फोटो खिंचवाना था और यह उन्होंने किया। भाजपा के इस कटाक्ष के बाद शताब्दी ने जवाब दिया।

शताब्दी ने कहा कि इससे पहले वह दोपहर का खाना एक कार्यकर्ता के घर खा चुकी थीं। इसलिए वह दो बार खाना कैसे खा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बारे में वह कार्यकर्ता को बता चुकी थीं। फोटो वाले मामले पर बताया कि फोटोग्राफर खाना खाते उनका फोटो खिंचना चाहते थे, इसलिए वह बैठ गई थीं।

उधर, ‘दीदी का दूत’ कार्यक्रम के तहत उत्तर 24 परगना जिला के इच्छापुर नीलगंज पंचायत के साइबना इलाके में खाद्य मंत्री रथीन घोष के सामने पीट दिया गया। दरअसल, जब मंत्री यहाँ पहुँचे तो सागर विश्वास नाम का एक युवक अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुँचा।

इस दौरान मंत्री के पास मौजूद TMC कार्यकर्ता ने सागर को कई थप्पड़ जड़ दिए। इतना ही नहीं, इसके बाद वह युवक को धक्के मारते हुए दूर ले गया और वहाँ छोड़ आया। इस दौरान ना ही मंत्री ने रोका और ना ही किसी और ने।

हॉर्न बजाने पर हुआ विवाद, कार चालक ने युवक को आधा किलोमीटर घसीटा: कंझावला के बाद दिल्ली के रजौरी गार्डन की घटना, Video वायरल

दिल्ली के कंझावला में हुए भीषण कार एक्सीडेंट को लोग भूल नहीं पाए हैं। इससे पहले ही, दिल्ली में एक और घटना सामने आई है। जहाँ, हॉर्न बजाने के कारण शुरू हुए विवाद के बाद आरोपित कार ड्राइवर ने युवक को कार के बोनट के सहारे आधा किलोमीटर तक घसीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजौरी गार्डन क्षेत्र में हॉर्न बजाने को लेकर दो लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। झगड़े के बीच बात बिगड़ गई। गुस्साए कार ड्राइवर ने वहाँ खड़े युवक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद युवक कार के बोनट में फँस गया। हालाँकि, इसके बाद कार सवार ने गाड़ी रोकने की बजाय युवक को आधा किलोमीटर तक घसीटा है।

इस घटना का वीडियो (सीसीटीवी फुटेज) सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पीड़ित युवक कार के बोनट में है। वहीं, कार ड्राइवर तेजी से कार चलाता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 323, 341 और 308 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपित से पूछताछ चल रही है।

दिल्ली का कंझावला केस

बता दें कि इस साल की शुरुआत में यानि 1 जनवरी, 2023 की रात को दिल्ली के कंझावला इलाके में भयानक कार एक्सीडेंट हुआ था। इसमें, अंजलि नामक लड़की की मौत हो गई थी। मृतक लड़की पार्टी के लिए होटल गई थी। जब वह होटल से अपने घर लौट रही थी तब एक कार ने उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद, वह कार में ही फँस गई थी।

इसके बाद, आरोपित उसे कार से निकालने के बजाए 12 किलोमीटर तक लगातार घसीटते रहे। इससे उसके पूरे कपड़े फट गई थे। यही नहीं, लगातार घसीटे जाने के कारण षक पैर तक कट गए थे। बाद में, उसकी बॉडी नग्नावस्था में बरामद हुई थी। अजंलि अपने घर में कमाने वाली इकलौती थी। इस मामले में, पुलिस ने दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन, मनोज मित्तल, आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपित बनाया है। इनमें से एक आरोपित अंकुश खन्ना को जमानत मिल गई है।

‘CBI मेरे दफ्तर फिर से आ गई…’: दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने जाँच एजेंसी पर लगाया आरोप, रिपोर्ट्स में दावा- ये कोई रेड नहीं

आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के दफ्तर पर सीबीआई की रेड चल रही है। इसे लेकर मनीष सिसोदिया ने ट्वीट भी किया है। उधर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सीबीआई कोई छापेमारी नहीं कर रही है। कहा जा रहा है कि कुछ दस्तावेज प्राप्त करने के लिए सीबीबआई की टीम सिसोदिया के दफ्तर पहुँची हुई थी।

अपने दफ्तर में छापेमारी का दावा करते हुए मनीष सिसोदिया ने ट्विटर पर लिखा, “आज फिर CBI मेरे दफ्तर पहुँची है, उनका स्वागत है। इन्होंने मेरे घर पर रेड कराई, दफ्तर में छापा मारा, लॉकर तलाशे, मेरे गाँव तक में छानबीन करा ली। मेरे खिलाफ न कुछ मिला हैं न मिलेगा, क्योंकि मैंने कुछ गलत किया ही नहीं है। ईमानदारी से दिल्ली के बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया है।”

न्यूज़ एजेंसी एएनआई की तरफ से दिल्ली सचिवालय के बाहर की तस्वीरें ट्वीट की गई हैं। पोस्ट में दावा किया गया कि मनीष सिसोदिया के कार्यालय में सीबीआई की रेड चल रही है। दरअसल दिल्ली शराब घोटाले को लेकर सीबीआई की जाँच जारी है। इस मामले में सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को आरोपित नंबर एक बनाया है। प्राथमिकी में 14 अन्य नाम भी हैं, जिनमें दो कंपनियों के नाम शामिल हैं।

हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सीबीआई छापेमारी की बात से इनकार भी किया जा रहा है। आजतक की रिपोर्ट में सीबीआई सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सिसोदिया के कार्यालय में कोई छापेमारी नहीं की गई है। बल्कि सीबीआई की टीम कुछ कागजात हासिल करने सिसोदिया के दफ्तर पहुँची हुई थी।

गौरतलब है कि दारू घोटाले में घिरने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई (CBI) ने अक्टूबर 2022 में पूछताछ के लिए बुलाया था। सीबीआई ने उनसे करीब 9 घंटे तक पूछताछ की थी, जिसके बाद सिसोदिया ने दावा किया था कि CBI ने उन पर AAP छोड़ने का दबाव डाला। जाँच एजेंसी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पूछताछ वैधानिक और पेशेवर तरीके से हुई है।

नीतीश को बताया राम -कृष्ण, PM मोदी की तुलना रावण-कंस से: RJD कार्यालय पर JDU नेता का पोस्टर, लिखा- 2024 में इनको हराएँगे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मन में प्रधानमंत्री बनने की तीव्र लालसा है, ये बात किसी छिपी नहीं है। लेकिन, नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने की जल्दी उनकी पार्टी JDU से ज्यादा बिहार में उनकी सहयोगी लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल – राजद (RJD) मे है। शायद राजद को पता है कि जब तक नीतीश दिल्ली की तरफ मुँह नहीं करेंगे, तब तेजस्वी यादव बिहार के सिंहासन को देखते रह जाएँगे।

राजद के साथ बिहार में दूसरी बार गठबंधन कर मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार का पोस्टर पहली बार राजद के प्रदेश कार्यालय में लगा है। इस पोस्टर में नीतीश कुमार की तुलना भगवान राम और कृष्ण से की गई है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रावण और कंस से की गई है।

ऐसे पोस्टर के जरिए राजद यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह नीतीश कुमार पीएम मोदी की कुर्सी पर जल्द से जल्द देखना चाहता है। हालाँकि, इस राजनीतिक खेल में राजद ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को धूमिल करने की कोशिश की है।

अलग-अलग पंक्तियों में बँटे इस पोस्टर के पहले दो हिस्सों में बताया गया है कि रामायण में भगवान राम ने रावण को कैसे हराया और महाभारत में भगवान कृष्ण ने कंस को कैसे हराया। पोस्टर के आखिरी हिस्से में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 2024 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी को हराते हुए दिखाया गया है।

पोस्टर पर छपरा की प्रदेश महासचिव पूनम राय की तस्वीर लगी है। इसके साथ ही उस पर ‘के साथ ‘महागठबंधन जिंदाबाद’ के नारे भी लिखे हैं। पोस्टर में संदेश के रूप में महिला कहती है, “जब भी किसी खास अक्षर या राशि से शुरू होने वाले नाम वाला व्यक्ति अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है और दंभी, अहंकारी, तानाशाह होकर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो हर तरफ त्राहिमाम मच जाता है। ऐसे में उसी राशि या अक्षर वाले नाम के व्यक्ति से पराजित होना पड़ता है।”

पोस्टर में कहा गया है कि जिस तरह रामायम में राम ने रावण को हराया, महाभारत में कृष्ण ने कंस को हराया, उसी तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘न’ अक्षर से नाम वाले नीतीश कुमार पीएम नरेंद्र मोदी को हराएँगे।

पोस्टर सामने आने पर भाजपा प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने कहा, “नीतीश कुमार सभी विपक्षी नेताओं में नए हैं, चाहे वह मायावती हों, अखिलेश यादव हों, ममता बनर्जी और नवीन पटनायक हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2034 तक सत्ता में रहेंगे। उन्हें कोई नहीं हरा सकता।”

मुंबई पुलिस ने उर्फी जावेद से की पूछताछ, समन के बाद हुईं पेश: BJP की महिला नेता ने दर्ज कराई है FIR, नग्नता फैलाने का लगाया था आरोप

अजीबोगरीब कपड़ों और अतरंगी फैशन के लिए सुर्खियों में रहने वाली उर्फी जावेद (Urfi Javed) की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रहीं हैं। महाराष्ट्र भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने उर्फी के खिलाफ समन जारी करते हुए पूछताछ के लिए बुलाया था। समन के बाद, उर्फी ने थाने पहुँचकर अपने बयान दर्ज कराए हैं।

दरअसल, बीजेपी नेता चित्रा बाघ (Chitra Wagh) ने उर्फी जावेद के खिलाफ अश्लीलता और नग्नता फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने इस मामले में पुलिस से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया था। इस शिकायत के बाद, मुंबई पुलिस ने समन जारी कर शनिवार (14 जनवरी, 2023) को उन्हें हाजिर होने के लिए कहा था। समन के बाद उर्फी जावेद अंबोली पुलिस स्टेशन पहुँची। जहाँ, पुलिस ने उनसे पूछताछ की है।,

चित्रा बाघ ने अपनी शिकायत में कहा था, “कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संविधान द्वारा दिया गया आचरण का अधिकार, विचार की स्वतंत्रता इस तरह के खराब रवैये के रूप में सामने आएगा। यदि वह अपने शरीर का प्रदर्शन करना चाहती है, तो वह उसे चहारदीवारी (बंद कमरे) के पीछे करना चाहिए, लेकिन उर्फी को शायद पता नहीं है कि वह समाज के विकृत रवैये को हवा दे रही है।”

चित्रा वाघ की शिकायत के बाद उर्फी जावेद ने भी पलटवार किया था। उर्फी ने कहा था, “मुझे ट्रायल या बकवास नहीं चाहिए। अगर आप अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की संपत्ति का खुलासा करतीं हैं तो मैं अभी जेल जाने के लिए तैयार हूँ। दुनिया को बताएँ कि एक नेता कितना और कहाँ से कमाता है। साथ ही, समय-समय पर आपकी पार्टी के कई पुरुषों पर उत्पीड़न आदि के आरोप नहीं लगे हैं। मेरे नए साल की शुरुआत एक और नेता की पुलिस शिकायत के साथ हुई।”

यही नहीं, उर्फी जावेद ने चित्रा बाघ के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी जानकारी देते हुए उर्फी के वकील नितिन सातपुते ने कहा था, “मैंने मॉडल/अभिनेत्री उर्फी जावेद को सार्वजनिक रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता चित्रा किशोर वाघ के खिलाफ IPC की धारा 153(ए)(बी), 504, 506, 506 (ii) के तहत शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही आपराधिक धमकी देने के लिए CrPC की धारा 149 और 107 के तहत निवारक कार्रवाई के लिए अनुरोध किया किया है।”

नितिन गडकरी को जान से मार डालने की धमकी, माँगे ₹100 करोड़: ‘दाऊद गैंग’ के नाम से 3 बार फोन कॉल, बढ़ाई गई सुरक्षा

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित ऑफिस पर धमकी भरे कॉल आए। दावा किया जा रहा है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। खबरों के मुताबिक कॉलर ने दाउद के नाम पर 100 करोड़ रुपए की माँग की है। कार्यालय को बम से उड़ाने की भी धमकी दी गई। धमकी देने वाले शख्स ने तीन बार लैंडलाइन पर फोन किया है। नागपुर पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। इस बीच नितिन गडकरी के कार्यालय की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

नागपुर के डीसीपी राहुल मदाने ने जानकारी दी है कि नितिन गडकरी के स्थानीय जनसंपर्क कार्यालय में तीन धमकी भरे फोन कॉल आए थे। फोन कॉल BSNL नंबर से कार्यालय के लैंडलाइन पर किए गए थे। पहला फोन सुबह 11.25 बजे किया गया इसके बाद 11.32 मिनट पर दोबारा धमकी भरा फोन आया तब तक पुलिस को इसकी जानकारी दे दी गई। दोपहर 12.32 बजे तीसरी कॉल आईं। नागपुर के डीसीपी मदाने का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इस केस पर क्राइम ब्रांच कॉल डाटा रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में नागपुर पुलिस के हवाले से बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री के जनसंपर्क ऑफिस के लैंडलाइन नंबर पर ‘दाऊद गैंग’ के नाम से कॉल आया। धमकी देने वाले कॉलर ने 100 करोड़ रुपए न दिए जाने पर जान से मारने की धमकी दी। ‘नेटवर्क 18‘ का दावा है कि पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस कर लिया है, जिससे धमकी भरा कॉल किया गया था। बताया जा रहा है कि कॉल कर्नाटक के किसी स्थान से किया गया है।

पुलिस धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री के नागपुर स्थित कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस की टीम आसपास के हर एक मूवमेंट पर नजर बनाई हुई है। मामले की जाँच स्थानीय पुलिस के साथ-साथ महाराष्ट्र एटीएस की टीम भी कर रही है। 

ईरान ने अपने ही पूर्व उप रक्षा मंत्री को ब्रिटेन का जासूस बता कर फाँसी पर लटकाया, भड़के ऋषि सुनक ने कहा- ये बर्बर सरकार की कायराना हरकत

ईरान )Iran) ने जासूसी के आरोप में अपने पूर्व उप रक्षामंत्री अली रजा अकबरी (Ali Reza Akbari) को फाँसी दे दी है। अकबरी के पास ईरान के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता थी। जब अकबरी को फाँसी की सजा सुनाई गई थी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका काफी विरोध हुआ था और देश भर में प्रदर्शन हुए थे।

ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी मीजान न्यूज एजेंसी ने शनिवार (14 जनवरी 2023) को अकबरी को फाँसी देने की जानकारी दी। हालाँकि, एजेंसी ने यह नहीं बताया कि फाँसी कब दी गई है, लेकिन माना जाता है कि कुछ दिन पहले ही इसे अंजाम दे दिया गया था।

मिजान न्यूज एजेंसी के अनुसार, अकबरी को ‘भ्रष्टाचार और देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने’ के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में ब्रिटिश जासूसी सेवा की कार्रवाइयों ने दोषी के मूल्य, उसकी महत्व और उस पर दुश्मन के भरोसे का प्रदर्शन किया है।

गुरुवार को सरकारी मीडिया ने खबर दी थी कि 61 वर्षीय अकबरी देश के रक्षा प्रतिष्ठान में उच्च पदों पर रहे थे। वह ईरान के उप रक्षामंत्री रह चुके थे। इसके साथ ही वे ईरानी नौसेना के कमांडर के सलाहकार, रक्षा मंत्रालय के अनुसंधान केंद्र में एक विभाग के प्रमुख और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय में शीर्ष पद पर तैनात थे।

ब्रिटिश नागरिक को फाँसी देने पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने अकबरी के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। प्रधानमंत्री सुनक ने ट्विटर पर कहा, “ईरान में ब्रिटिश-ईरानी नागरिक अली रजा अकबरी को फाँसी दिए जाने से मैं स्तब्ध हूँ। यह एक क्रूर और कायरतापूर्ण कृत्य है, जो एक बर्बर शासन द्वारा अंजाम दिया गया। इस शासन में अपने ही लोगों के मानवाधिकारों का कोई सम्मान नहीं है।”

ब्रिटेन के विदेश विभाग के उप-प्रवक्ता वेदांत पटेल ने शुक्रवार (13 जनवरी 2023) को अकबरी की फाँसी की सजा सुनाने की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “अली रजा अकबरी के खिलाफ आरोप और फाँसी की सजा राजनीति से प्रेरित है। हम इन खबरों से बहुत परेशान हैं कि अकबरी को नशीला पदार्थ दिया गया, हिरासत में प्रताड़ित किया गया और हजारों घंटों तक पूछताछ के बाद झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया गया।”

पटेल से पहले ब्रिटेन के विदेश विभाग सचिव जेम्स क्लेवरली ने ईरान से अकबरी की फाँसी रोकने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था, ईरानी शासन को इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि हम अली रजा अकबरी के मामले पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।”

दरअसल, ईरानी मीडिया ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें अकबरी ब्रिटेन के साथ अपने संपर्कों के बारे में बताते दिखाई दे रहे थे। इसमें नवंबर 2020 में मारे गए ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह के बारे में अंग्रेजों द्वारा पूछताछ की बात कहते हुए सुना गया।

हालाँकि, इस वीडियो के आधार पर ईरान ने अकबरी को मोहसीन फखरीजादेह की हत्या के लिए दोषी माना, लेकिन वीडियो में वे कहीं भी ये कहते हुए नहीं दिखे कि इस हत्या में उनकी कोई भूमिका थी। उन्होंने यही कहा था कि वैज्ञानिक के संबंध में ब्रिटेन ने उनसे पूछताछ की थी। इस हत्या के लिए ईरान ने अपने कट्टर दुश्मन इजरायल पर आरोप लगाया था।

कहा जा रहा है कि ईरान ने अकबरी पर बिना किसी सबूत के ब्रिटेन की एमआई-6 ख़ुफ़िया एजेंसी का जासूस होने का आरोप लगाया था। यह भी कहा जा रहा है कि ईरान ने अकबरी का जो वीडियो प्रसारित किया था, वह मॉर्फ्ड था। इसे ही अकबरी की स्वीकृति के रूप में बताया गया था। इसके आधार पर उन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई थी। दिसंबर के शुरुआत में ईरान ने इजरायल के साथ मिलकर काम करने के आरोप में 4 लोगों को फाँसी दी थी।

ईरान में जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अपराधों के अभियुक्तों पर बेहद कठोर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर बंद दरवाजों के पीछे मुकदमा चलाया जाता है। वहाँ अभियुक्त अपने लिए वकीलों का चयन भी नहीं करते हैं और उन्हें अपने खिलाफ सबूत देखने की अनुमति भी नहीं है। सजा भी फाँसी दी जाती है।

साल 2019 के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया था। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका जताई जाने लगी। वह ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली शामखानी के भी करीबी थे। प्रमुख विश्लेषकों का मानना था कि अकबरी की मौत की सजा देश में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सुरक्षा तंत्र के भीतर सत्ता संघर्ष से जुड़ी थी।

अली रजा अकबरी एक निजी थिंक टैंक चलाते थे। उन्होंने ईरान और इराक के बीच 8 सालों तक चले विनाशकारी युद्ध को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अकबरी संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों के साथ मिलकर 1988 में ईरान-इराक के बीच संघर्ष विराम के क्रियान्वयन का नेतृत्व किया था।

बता दें कि ईरान दुनिया में सबसे अधिक फाँसी की सजा देने वाले देशों में एक है। महसा अमिनी की हत्या की बाद के हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अब तक 18 लोगों को फाँसी दी जा चुकी है। ईरान की न्यायपालिका ने इतने लोगों को फाँसी देने की पुष्टि की है, जबकि पुलिस फायरिंग में भी दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं।

पाकिस्तान में थम नहीं रहा आटे के लिए हाहाकार: कहीं गुस्साए आदमी ने लाइन में खड़े लोगों को नाले में फेंका, कहीं मारपीट कर छीनी बोरी; Videos

पाकिस्तान में आटे के लिए चल रही हाहाकार के बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आई हैं। इनमें से एक वीडियो में एक आदमी को दूसरे लोगों को खुले सीवर में ढकेलते देखा जा सकता है।

वीडियो देखकर पता चल रहा है कि लोगों के बीच हुई ये घटना उस दौरान की है जब सरकार की ओर से आटे का थैला बाँटा जा रहा था। उसी समय ये आदमी लोगों से आटे के लिए भिड़ गया और दूसरों को धक्का मारने लगा।

इसी तरह एक अन्य वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे आटे के लिए मारामारी हो रही है। इस बीच एक व्यक्ति आता है और आटे की बोरी के लिए दूसरे को गुदगुदी करने लगता है।

बता दें कि पाकिस्तान में इस समय आटे के भाव आसमान छू रहे हैं। कराची में आटा 140-160 किलोग्राम है जबकि इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो का आटे का बैग 1500 किलो बिक रहा है। वहीं 20 किलो आटे का बैग 2800 का मिल रहा है।

खैबर पख्तूख्वा में भी आटे के लिए रोना मचा हुआ है। वहाँ 20 किलो आटे का बोरी 3100 में बिक रही है। सरकार बिगड़ते हालातों को स्थिर करने में असमर्थ है।

बता दें कि पाकिस्तान आम लोगों के सामने खाने का संकट मंडरा रहा है। सरकार गेहूँ की कमी के संकट से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रही है क्योंकि इस साल उत्पादन लक्ष्य से करीब 30 लाख टन कम रहने का अनुमान है। इसके अलावा शाहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी अधिकारियों को गेहूँ की चोरी और भंडारण को रोकने के लिए साइलो के निर्माण की रणनीति तैयार करने का भी निर्देश दिया है।

‘नफरत फैलाने वाले एंकरों को हटाओ’: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, फ्लाइट पेशाब कांड पर कहा – कैसे-कैसे शब्दों के प्रयोग किए गए, किसी को बदनाम न करें

सुप्रीम कोर्ट ने टीवी चैनलों के कामकाज के तरीके पर चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टीआरपी के कारण मीडिया चैनल चीजों को सनसनीखेज बनाते हैं। साथ ही कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा है कि नफरत फैलाने वाले एंकरों को (ऑफ एयर किया जाए) प्रसारण से हटाया जाना चाहिए। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में हेट स्पीच के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए कुछ याचिकाएँ दायर की गईं हैं। इन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा है कि नफरत फैलाने वाली बातें देश के लिए बड़ा खतरा हैं।

उन्होंने कहा है, “सब कुछ टीआरपी से चलता है। चैनल एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। वे चीजों को सनसनीखेज बनाते हैं, एक एजेंडा परोसते हैं। विजुअल के कारण आप समाज में विभाजन पैदा करते हैं। न्यूजपेपर की तुलना में विजुअल मीडियम ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है। क्या हमारे दर्शक ऐसे कंटेंट देखने के लिए पूरी तरह मैच्योर हैं?”

जस्टिस जोसेफ ने ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल एसोसिएशन (NBSA)’ के वकील से पूछा कि अगर टीवी कार्यक्रम का एंकर ही समस्या का हिस्सा है तो क्या किया जा सकता है? एनबीएसए को पक्षपात नहीं करना चाहिए। उन्होंने सवाल दागा कि आपने कितनी बार एंकर्स को हटाया है? सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा है कि लाइव कार्यक्रम में निष्पक्षता की जवाबदेही (चाबी) एंकर के पास ही होती है। यदि एंकर निष्पक्ष नहीं है और वह किसी एक पक्ष को प्रोजेक्ट करना चाहेगा, तो वह दूसरे पक्ष को म्यूट कर देगा, किसी एक पक्ष पर सवाल नहीं उठाएगा। एक तरह से यह पक्षपात होगा।

जस्टिस केएम जोसेफ ने यह भी कहा है कि मीडिया के लोगों को सीखना चाहिए। उन्हें यह देखना होगा कि वे बड़ी ताकत की तरह हैं। वे लोग टीवी पर जो कुछ भी कह रहे हैं उसे पूरा देश देखता है, लोग उससे प्रभावित होते हैं। मीडिया के लोगों को यह समझना चाहिए कि उन्हें अपने मन की बात कहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि जो एंकर प्रोग्राम कोड का उल्लंघन कर रहे हैं उन्हें हटाकर उन पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

कोर्ट ने मीडिया की भाषा पर चिंता जताते हुए यह भी कहा है, “जब कोई टीवी चैनल लोगों को बुलाता है, तो लोगों को गालियाँ दी जातीं हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में एक व्यक्ति को हवाई जहाज में पेशाब करते हुए पकड़े जाने घटना के बाद मीडिया ने किस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया। वह एक अंडरट्रायल है। कृपया किसी को बदनाम न करें। सभी की अपनी गरिमा है।”

इस सुनवाई के दौरान, NBSA की ओर से कहा गया है कि वह मामलों का निपटारा कर रहे हैं। विवादित वीडियो हटा देते हैं। लेकिन, सुदर्शन, रिपब्लिक टीवी जैसे कुछ चैनल उनकी सदस्यता का हिस्सा नहीं हैं।

सरकार का स्टैंड

इस सुनवाई में कोर्ट के सवालों का जवाब देते हुए उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि उनके द्वारा हेट स्पीच के कुल 118 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 23 स्वत: संज्ञान के मामले हैं। वहीं, 95 एफआईआर शिकायत के आधार पर दर्ज की गईं हैं।

यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि उनके द्वारा कुल 581 मामले दर्ज किए गए। इनमें से, 160 मुकदमे स्वत: संज्ञान के बाद दर्ज किए गए हैं। वहीं, इस पूरे मसले में, केन्द्र सरकार ने कहा है कि जब तक कोई भी गंभीर समस्या नहीं होती या फिर देश की सुरक्षा को खतरा पैदा नहीं होता, तब तक केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी।