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9 ठिकानों पर NIA की छापेमारी, राजस्थान में सक्रिय थे प्रतिबंधित PFI-SDPI से जुड़े इस्लामी आतंकी: कई संदिग्ध सामग्रियाँ, डिजिटल उपकरण और हथियार बरामद

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने राजस्थान में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में जाँच एजेंसी ने एसडीपीआई से जुड़े मुबारक के बेटे नौशाद को हिरासत में लिया है। एनआईए ने यह कार्रवाई गुरुवार (12 जनवरी 2022) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनआईए ने कोटा के सुभाष नगर में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े मुबारक के घर पर छापेमारी की। वहाँ से एनआईए ने मुबारक के बेटे नौशाद को हिरासत में लिया है। नौशाद सैलून में काम करता है।

वहीं, एनआईए को जानकारी मिली थी कि मुबारक कैथून इलाके में रहता है। एजेंसी ने वहाँ भी छापेमारी की। लेकिन, मुबारक हाथ नहीं लगा। मुबारक के घर हुई छापेमारी को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि उसके घर से खुदाई की आवाज आ रही थी। इसके अलावा, एनआईए ने विज्ञान नगर में रह रहे पीएफआई के पूर्व जिलाध्यक्ष साजिद खा के घर पर भी छापेमारी की है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस छापेमारी में एनआईए को कई संदिग्ध सामग्री मिली है। इस सामग्री के आधार पर यह कहा जा रहा है कि आरोपितों के पीएफआई व एसडीपीआई से संबंध हैं। साथ ही, पीएफआई से फंडिंग मिलने की बात भी कही जा रही है।

इस छापेमारी को लेकर एनआईए ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है, “राजस्थान के जयपुर और कोटा में चार-चार जगहों पर और सवाई माधोपुर जिले में एक जगह तलाशी ली गई। इसमें, डिजिटल उपकरण (मोबाइल फोन, सिम कार्ड), तेज धार वाले चाकू और आपत्तिजनक सामग्री, साहित्य और पोस्टर जब्त किए गए।”

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है, “एनआईए को जानकारी मिली थी कि पीएफआई के सदस्य सादिक सर्राफ और मोहम्मद आसिफ अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हैं। इनके भड़काऊ बयान भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचा रहे थे।” यही नहीं, यह भी सामने आया है कि आरोपित सादिक सर्राफ और मोहम्मद आसिफ व अन्य अज्ञात लोग साजिश के तहत राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे मुस्लिमों को गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने के लिए कट्टरपंथी बना रहे थे। एनआईए ने यह कार्रवाई साल 2022 में दर्ज हुए एक केस को लेकर की है।

‘हिंदू धर्म मुझे बहुत पसंद, इसमें तीन तलाक जैसा कुछ नहीं’: UP की इलमा खान सोमेश से शादी के लिए बनीं सौम्या, कहा- परिजनों से उनकी जान को खतरा

उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम युवती अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई और धर्मांतरण के बाद उसने हिंदू रीति-रिवाजों से शादी कर ली। शादी के बाद युवती ने अपनी और अपने पति की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है।

मामला यूपी के बदायूँ का है। यहाँ की रहने वाली मुस्लिम युवती इलमा खान हिंदू सोमेश से प्यार करती थी और उससे शादी करना चाहती थी। हालाँकि, इलमा के परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। इसके बाद इलमा ने सोमेश संग भागने का निर्णय लिया।

सोमेश संग घर छोड़ने के बाद इलमा ने बरेली के अगस्त मुनी आश्रम में इस्लाम महजब का त्याग कर दिया। मंदिर के पुजारियों ने इलमा का शुद्धिकरण किया, इसके बाद उसने हिंदू धर्म स्वीकार किया। हिंदू बनने के बाद उसने अपना नाम सौम्या रख लिया। इसके बाद सौम्या ने सोमेश शर्मा के साथ मंदिर में शादी रचा ली।

सौम्या के पति सोमेश शर्मा का कहना है कि उसका युवती के घर आना-जाना था। इसके बाद दोनों के बीच जान-पहचान और फिर दोस्ती हो गई। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया।

हिंदू धर्म अपनाने को लेकर सोमेश ने बताया कि सौम्या की एक बहन भी है, जिसका निकाह हो चुका है, लेकिन उसका शौहर और परिजन उसे बहुत सताते रहते हैं। इससे वह बहुत दुखी रहती थी। धीर-धीरे उसका झुकाव हिंदू धर्म की ओर हो गया और वह इलमा खान से सौम्या बन गई।

सोमेश ने बताया कि इलमा खान से धर्मांतरण के बाद शादी करने के बाद दोनों के साथ उसके परिवार के लोगों की जान का खतरा है। सोमेश ने बताया कि सौम्या के घर के बगल में ही गाँव के प्रधान का घर है। वे लोग दोनों को छोड़ेंगे नहीं। सौम्या ने कहा कि प्रधान ने कहा कि जहाँ दोनों मिल गए, वहीं वह मार देने की धमकी दी है।

उधर इलमा से सौम्या बनी युवती ने कहा, “सोमेश बचपन से ही हमारे घर आते रहते थे। पहले दोस्ती हुई, उसके बाद प्यार हो गया और अब हमने शादी भी कर ली।” सौम्या ने बताया कि उसने किसी भी दबाव या लालच में धर्मांतरण नहीं किया है, बल्कि अपनी स्वेच्छा से उसने ऐसा किया है।

सौम्या ने बताया कि इस्लाम में तीन तलाक होता है, जो उसे पसंद नहीं है। हिंदू लड़के से शादी करके वह खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। उसने बताया कि निकाह के बाद उसकी बहन के साथ बहुत मारपीट होती है। बात-बात पर उसे तलाक की धमकी दी जाती है, जबकि हिंदू धर्म में तलाक जैसी चीज नहीं होती है।

सौम्या ने बताया कि गाँव में उसके अब्बू टेलर हैं और वह छह बहनें है। इस रिश्ते के बारे में जब परिवार वालों को पता चला तो उसके साथ मारपीट की जाने लगी। इसके बाद वह सोमेश के साथ चली गई। सोमेश शर्मा दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। इलमा ने अपने परिजनों से सोमेश और उसके परिजनों को जान का खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की माँग की है।

’24 घंटे में सबूत मिटाओ, वरना सुसाइड के लिए मजबूर हो जाओगे’: ठग सुकेश ने AAP नेता पर लगाया धमकी देने का आरोप, LG को लिखा पत्र

दिल्ली की जेल में बंद 200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपित सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) और मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) पर धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (LG VK Saxena) को लिखे पत्र में सुकेश ने आरोप लगाया है कि जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन ने उन्हें फोन किया। फोन करके सत्येंद्र जैन ने दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और सबूत नष्ट करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है।

सुकेश चंद्रशेखर ने कहा कि सत्येंद्र जैन ने उसके पास मौजूद सभी स्क्रीनशॉट, चैट और वॉयस रिकॉर्डिंग को सौंपने के लिए कहा। इसके साथ ही उन्होंने धमकाते हुए मीडिया और उच्चस्तरीय समिति के समाने दिए गए अपने बयानों को वापस लेने के लिए कहा।

अपने पत्र में आरोप लगाते हुए सुकेश चंद्रशेखर ने कहा कि 31 दिसंबर 2022 को सत्येंद्र जैन ने उसे जेल अधीक्षक राजकुमार के माध्यम से कर्नाटक चुनाव में एक सीट और पंजाब में एक माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट देने की पेशकश की। उसने यह भी लिखा कि जेल के अधिकारी और कर्मचारी उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं।

महाठग ने AAP नेता पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि जैन ने उसे दूसरी जेल में स्थानांतरित करने की धमकी दी। इसके साथ ही उन्होंने देते हुए कहा कि उसे इतना प्रताड़ित किया जाएगा कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की तरह आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगा।

बता दें कि आम आदमी पार्टी और सत्येंद्र जैन पर लगाया गया सुकेश चंद्रशेखर का यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले सुकेश ने दावा किया था कि उसने आप को 60 करोड़ रुपए दिए थे। इसके बाद दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने सुकेश का बयान लिया।

सुकेश के अनुसार, 60 करोड़ रुपए में से 10 करोड़ रुपए उसने ‘प्रोटेक्शन मनी’ के रूप में दिया था। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी को उसने 50 करोड़ रुपए का भुगतान करने की बात कही थी, क्योंकि कथित तौर पर सत्येंद्र जैन ने उसे दक्षिण भारत में पार्टी का बड़ा नेता बनाने का वादा किया था। उसने यह भी आरोप लगाया था कि गोवा और पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने उससे पैसे माँगे थे।

गौरतलब है कि सुकेश चंद्रशेखर हाई प्रोफाइल और मशहूर हस्तियों से कथित रूप से पैसे ऐंठने के आरोप में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इससे पहले, उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया था, लेकिन बाद में मौत की धमकी का हवाला देते हुए बार-बार जेल बदलने के अनुरोध के बाद उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया था।

‘रमजान का महीना है, और आप जैसे नीच’…: सामने आई Pak उच्चायोग के अधिकारी और महिला प्रोफेसर की व्हाट्सएप्प चैट, लिखा था – एक रात के लिए आ जाओ

पंजाब के एक यूनिवर्सिटी की सीनियर प्रोफेसर ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि वीजा के सिलसिले में जब वे पाकिस्तान उच्चायोग पहुँची थीं, तो उन्हें जानबूझ कर देर तक रोका गया और अश्लील बातें की गईं। महिला ने उच्चायोग के 2 कर्मचारियों पर संगीन आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने बाद में उन्हें मैसेज करना शुरू कर दिया।

शिकायतकर्ता प्रोफेसर और पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी के बीच व्हाट्सएप्प चैट सामने आया है। वह उन्हें एक रात के लिए बुला रहे थे और अगले दिन वीजा देने जैसी बातें कर रहे थे। परेशान होकर प्रोफेसर ने मैसेज के स्क्रीनशॉट लिए और इसके खिलाफ आवाज उठाने का मन बनाया।

‘टाइम्स नाउ’ का दावा है कि महिला प्रोफेसर ने उनके साथ व्हाट्सएप्प चैट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। यही स्क्रीनशॉट विदेश मंत्री एस जयशंकर को दिए अपनी शिकायत में भी साझा किया गया है।

दावे के अनुसार, 22 अप्रैल, 2022 को शाम 3 बजकर 38 मिनट पर पाकिस्तानी अधिकारी ताहिर अब्बास महिला को मैसेज करता है, “क्योंकि आप मेरे शहर में होंगी, आपको डिनर के लिए निमंत्रित करना मेरा सौभाग्य होगा। आपको वीज़ा उपलब्ध कराने की कोशिश करता हूँ।” इसके जवाब में महिला प्रोफेसर ने लिखा, “आपके निमंत्रण के लिए धन्यवाद, दुर्भाग्य से मैं वहाँ रात भर नहीं ठहर रही।” ताहिर ने जवाब दिया, “क्या फैकल्टी के साथ लौटना जरूरी है? आप रुक सकती हैं। फिर आप वीजा के लिए कैसे आएँगीं?

इसके बाद महिला प्रोफेसर ने 24 अप्रैल, 2022 की सुबह 5 बजकर 40 मिनट पर ताहिर को जवाब दिया, “सेक्स संबंधी प्रस्ताव को डिनर कहा जा रहा था। आपकी सच्चाई पता चल गई। अगले दिन वीजा देने जैसी बातें वगैरह मुझे अच्छी नहीं लगी। मैं 15 मार्च से विनम्रता दिखा रही थी। शायद आपको लगा कि मैं कोई कमजोर, हताश अकेली महिला हूँ जो आपके देश के वीजा के लिए ऐसी हरकतों के लिए हाँ कर देगी। दुर्भाग्य से आप न तो मुझे खरीद सकते हैं और न ही मेरे साथ गलत हरकत कर सकते हैं। यह आपलोगों के रमज़ान का महीना है न सबसे पवित्र? पर शायद आपके और आपके सहयोगी जैसे नीच लोगों के लिए नहीं होगा।”

बता दें कि एक महिला प्रोफेसर ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के कर्मचारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों ने वीजा के बदले सेक्स की माँग की। आरोप है कि 45 मिनट तक उच्चायोग के कर्मचारी आसिफ ने उनके साथ अश्लील बातें की। उसने उनके साथ संबंध बनाने पर जोर डाला। इतना ही नहीं, शारीरिक संबंधों के लिए कुछ घंटों के लिए शादी करने का भी ‘प्रस्ताव’ भी दे दिया।

महिला का आरोप है कि एक दूसरे पाकिस्तानी अधिकारी ने उन्हें भारत सरकार के खिलाफ लिखने के लिए कहा था और इसके एवज में अच्छा मेहनताना देने की बात कही गई थी। हालाँकि, उन्होंने इससे इनकार कर दिया। बकौल महिला वह लाहौर में गुरुद्वारा में मत्था टेकने और एक विश्वविद्यालय में लेक्चर देने के लिए पाकिस्तान जाना चाहती थीं।

कार पर फेंकी ईंट, गर्दन-छाती पर बोतल मारी: दिल्ली में Uber महिला ड्राइवर पर जानलेवा हमला, लोग मदद देने की जगह खींचते रहे फोटो

नई दिल्ली में लगातार महिला की सुरक्षा से खिलवाड़ के मामले सामने आ रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही कार से घिसट कर अंजलि की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया था। वहीं सोमवार (9 जनवरी 2023) की रात भी एक घटना सामने आई। ISBT इलाके में एक महिला उबर ड्राइवर प्रियंका पर सोमवार (9 जनवरी 2023) की रात दो बदमाशों ने हमला कर दिया। बदमाशों ने प्रियंका के गले पर काँच की बोतल से वार किया, जिसके कारण वह लहूलुहान हो गई। लोगों ने आधे घंटे तक उसकी कोई मदद नहीं की। उलटे प्रियंका की फोटो ली और चलते बना।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बदमाशों ने पहले  प्रियंका की कार पर ईंटों से हमला किया और उसके बाद शीशे तोड़ दिए। जब वह कार से बाहर निकली तो बदमाशों ने उसके पर्स और पैसे छीन लिए। बदमाश प्रियंका का मोबाइल भी छीन कर भागना चाहते थे लेकिन प्रियंका ने हिम्मत दिखाई और बदमाशों से अपना मोबाइल फोन वापस ले लिया। इस दौरान बदमाशों ने काँच की बोतल से पीड़िता की गर्दन और छाती पर वार किए। बकौल प्रियंका, उसे 10 टाँके लगे हैं। जब बदमाशों ने उसपर हमला किया तो उसने उबर पैनिक बटन दबाया लेकिन उससे कोई मदद नहीं मिली।

प्रियंका ने आजतक को बताया, ”घटना 9 जनवरी की रात 3 बजे की है। मैं अपने ग्राहक को पिक करने जा रही थी। तभी अचानक वहाँ आए कुछ बदमाशों ने मेरी गाड़ी पर ईंटों से हमला कर दिया और शीशे तोड़ दिए। 5 मिनट की बहस के दौरान उन्होंने मेरे साथ छीना झपटी की, मेरे गले पर काँच की बोतल से हमला कर दिया। फिर मेरी आधे घंटे तक किसी ने मदद नहीं की। लोग पास आए, फोटो खींच कर चले गए। आधे घंटे बाद उत्तराखंड की बस में सवार एक अंकल ने मेरी मदद की, फिर पीसीआर को फोन किया। पीसीआर कॉल करने के आधे घंटे बाद आई। वहीं एम्बुलेंस को भी कॉल किया, लेकिन सुबह छह बजे एम्बुलेंस वाले का फोन आया। इस दौरान मैंने खुद से अपना गला पकड़ा हुआ था, ताकि अधिक खून न निकले।”

प्रियंका ने आरोप लगाया कि फोन करने के आधे घंटे बाद आई पुलिस पहले गाड़ी और घटना को लेकर पूछताछ करने लगी, जबकि वह उनसे बार-बार कह रही थी कि उसे बहुत चोट लगी है और पहले उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाए। प्रियंका का कहना है कि घटना के वक्त वह होश में नहीं थी और इसलिए उस वक़्त कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि प्रियंका ने रिपोर्ट लिखवाने से मना कर दिया था और पुलिस ने खुद ही मामले में IPC की धारा 393 के तहत मामला दर्ज कर लिया और आगे की जाँच की जा रही है।

अमेजन में 1 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा: ईमेल भेज दी जा रही छँटनी की जानकारी, 5 महीने की सैलरी देने का वादा

दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच कई दिग्गज कम्पनियाँ अपने कर्मचारियों की छँटनी कर रही है। इसी क्रम में कुछ समय पहले अमेजन ने भी दुनियाभर से करीब 18,000 कर्मचारियों की छँटनी की घोषणा की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेजन ने अब भारत में अपने कर्मचारियों की छँटनी शुरू कर दी है। कंपनी नौकरी से निकाले जाने वाले कर्मचारियों को इमेल से इसकी सूचना दे रही है। हालाँकि कंपनी ने निकाले जाने वाले कर्मचारियों को कई बेनिफिट्स के साथ 5 महीने की सैलेरी देने का भी वादा किया है।  

उल्लेखनीय है कि अमेजन के सीईओ एंडी जेसी ने हाल ही में एक ब्लॉग लिखकर बताया था कि कंपनी दुनियाभर में 18,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 1 लाख कर्मचारी अमेजन में काम करते हैं और इस घोषणा के बाद यहाँ के 1 प्रतिशत यानी 1000 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। उन्होंने ब्लॉग में बताया था कि कंपनी ने कोरोना महामारी के दौरान अधिक कर्मचारियों की भर्ती कर ली थी और अब इनकी छंटनी की जा रही है। सीईओ ने कहा था कि अर्थव्यवस्था की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए यह फैसला किया जा रहा है।

उन्होंने अपने ब्लॉग में यह भी कहा था कि कंपनी इस बात को जानती है कि इस फैसले से लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसलिए कंपनी ने फैसला किया है कि निकाले जाने वाले कर्मचारियों को कुछ महीने की सैलेरी, हेल्थ सुविधाएँ और अन्य मदद मुहैया कराई जाएगी। हालाँकि ऐसे ही मदद की घोषणा ट्वीटर ने अपने कर्मचारियों की छंटनी के वक्त की थी लेकिन कई खबरों के अनुसार अभी तक निकाले गए कर्मचारी को कोई पैसे या सुविधा नहीं मिली है।

वहीं जेसी ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि कंपनी निकाले गए कर्मचारियों से 18 जनवरी के बाद बातचीत करेगी। एक खबर के अनुसार अब कंपनी के कई कर्मचारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कंपनी से निकाले जाने की सूचना दे रहे हैं। कंपनी के कर्मचारी ट्वीटर और लिंकइंड पर इसकी सूचना दे रहे हैं कि उन्हें अमेजन से निकाल दिया गया है और वह कहीं और काम करने के लिए तैयार हैं। खबर बताती है कि गुरुग्राम, बेंगलुरु समेत अन्य जगहों के कर्मचारियों की छंटनी हुई है। सबसे ज्यादा छंटनी उन विभागों में की गई है जो घाटे में चल रहे हैं।

‘संजो कर रखूँगा हमारी बातचीत’ : पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के निधन पर PM मोदी ने जताया शोक, CM नीतीश बोले- ‘मेरा उनसे बहुत गहरा संबंध था’

पूर्व केंद्रीय मंत्री व जनता दल के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का निधन हो गया है। शरद यादव के निधन की जानकारी उनकी बेटी सुभाषिनी यादव ने सोशल मीडिया पर दी। उनका अंतिम संस्कार मध्य प्रदेश के होशंगाबाद स्थित उनके पैतृक गाँव में किया जाएगा। आज (13 जनवरी, 2023) को शरद यादव के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली के छतरपुर स्थित आवास में रखा गया है। शरद यादव के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी समेत देश भर के नेताओं ने दुख जताया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शरद यादव कुछ वक्त से बीमार चल रहे थे। गुरुवार को अचेत अवस्था में उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है। बेटी सुभाषिनी यादव ने शरद यादव के निधन की जानकारी फेसबुक व ट्विटर पर दी। सुभाषिनी ने फेसबुक पर जानकारी दी है कि अंतिम दर्शन के लिए आज उनके पार्थिव शरीर को दिल्ली के छतरपुर स्थित आवास में रखा गया है। शरद यादव का अंतिम संस्कार मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में होगा। दरअसल होशंगाबाद के बंदाई गाँव में ही साल 1947 में शरद यादव का जन्म हुआ था।

शरद यादव के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “शरद यादव के निधन से दुखी हूँ। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने खुद को सांसद और मंत्री के रूप में प्रतिष्ठित किया। शरद यादव डॉक्टर लोहिया के आदर्शों से प्रभावित थे। मैं हमेशा हमारी बातचीत को संजो कर रखूँगा। उनके परिवार के लोगों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। ॐ शांति।”

वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी शरद यादव के निधन पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया, “समाजवादी धारा के वरिष्ठ नेता, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष, श्री शरद यादव जी के निधन से दुःखी हूँ। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री व दशकों तक एक उत्कृष्ट सांसद के तौर पर देश सेवा का कार्य कर उन्होंने समानता की राजनीति को मजबूत किया। उनके परिवार एवं समर्थकों को मेरी गहरी संवेदनाएँ।”

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने भी पूर्व जदयू अध्यक्ष के निधन पर शोक जताया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “समाजवाद के पुरोधा होने के साथ-साथ शरद यादव एक विनम्र इंसान थे। मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है। शोकाकुल परिजनों को गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। देश के लिए उनका योगदान याद रखा जाएगा।”

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव ने भी शरद यादव के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि आपसी मतभेद कभी कड़वाहट में नहीं बदले। लालू यादव ने सिंगापुर के अस्पताल से ही वीडियो जारी किया था।

तेजस्वी यादव ने भी एक वीडियो संदेश के जरिए शरद यादव को श्रद्धांजलि दी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के निधन पर दुख का इजहार किया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव जी का निधन दुःखद। शरद यादव जी से मेरा बहुत गहरा संबंध था। मैं उनके निधन की खबर से स्तब्ध एवं मर्माहत हूँ। वे एक प्रखर समाजवादी नेता थे। उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”

शरद यादव ने मध्य प्रदेश से राजनीति का सफर शुरू किया और उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार में आकर बस गए। शरद यादव अपने पीछे पत्नी रेखा यादव, बेटी सुभाषिनी और बेटे शांतनु को छोड़ गए।

शरद यादव के राजनीतिक करियर की बात करें तो 1974 में पहली बार उन्होंने जबलपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा था। 1977 में वे इसी सीट पर सांसद चुने गए। 1986 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके बाद वह 1989-90 तक केंद्रीय मंत्री रहे। 1991 में वे बिहार के मधेपुरा लोकसभा सीट से सांसद बने। 1995 में जनता दल का कार्यकारी अध्यक्ष चुने गए। 1997 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 1999 में उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। 2001 में वह केंद्रीय श्रम मंत्री बने। 2004 में दोबारा राज्यसभा सांसद बनने का मौका मिला। 2009 में वह 7वीं बार सांसद बने।

किसी को ट्रक ने मारी टक्कर, किसी को कार ने रौंदा: भारत जोड़ो यात्रा में अब तक 4 लोगों की मौत, वरिष्ठ नेता से लेकर कार्यकर्ता शामिल

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)’ 30 जनवरी 2023 तक खत्म होने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि कश्मीर में एक बड़े इवेंट के बाद इसे बंद किया जाएगा। सितंबर 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक चली ये यात्रा ने जहाँ राहुल गाँधी के छविनिर्माण का काम किया, वहीं इसमें शामिल होने के दौरान 4 लोगों की मौत भी हुई।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार पांडे का निधन

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कॉन्ग्रेस सेवा दल के महासचिव कृष्ण कुमार पांडे का 8 नवंबर, 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, वह महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में चल रहे थे, लेकिन तभी वह सड़क पर गिर पड़े।

यात्रा के दौरान उनके हाथों में तिरंगा था जिसे उन्होंने 15 मिनट पहले एक दूसरे व्यक्ति को थमा दिया था। इसके बाद वह जमीन पर गिरे। पांडे को अस्पताल भी ले जाया गया लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। बाद में उनका शव उनके बेटे शीलाज पांडे को सौंप दिया गया।

कार्यकर्ताओं को ट्रक ने मारी टक्कर

पांडे के देहांत के 4 दिन बाद 12 नवंबर 2022 एक और व्यक्ति निधन हुआ। ये व्यक्ति 62 साल के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता गणेश पोन्नरमन थे। उन्हें महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक ट्रक ने टक्कर मारी थी। कथिततौर पर जब यह घटना हुई वह रात्रि शिविर के लिए अर्धपुर तहसील के पिंपलगाँव महादेव गाँव वापस जा रहे थे। रात 8:20 बजे उन्हें एक ट्रक ने टक्कर मार दी। उस समय ‘भारत जोड़ो के 2 यात्री’ को टक्कर लगी थी। लेकिन, गणेश के साथ 30 वर्षीय सयायुल बच गए जबकि गणेश ने चोटिल होने के बाद दम तोड़ दिया।

पुलिसकर्मी को कार ने रौंदा

इसी तरह 25 नवंबर को सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह, भारत जोड़ो यात्रा के लिए अहर मालवा में रिहर्सल कर रहे थे, तभी उन्हें कार ने टक्कर मारी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कार ड्राइवर ने पुलिस काफिले की तरफ कार को चढ़ाया जिसकी वजह से भूपेंद्र सिंह चोटिल हुए और जीवित नहीं बच पाए। घटना सोयाटकला पुलिस थाने के बिलकुल सामने हुई। बाद में पुलिस ने घटना में शामिल वाहन जब्त कर लिया था।

दिल का दौरा पड़ने से कार्यकर्ता का निधन

इसके बाद 3 दिसंबर 2022 को मध्य प्रदेश के जिला राजगढ़ के जीरापुर के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता 55 वर्षीय मांगीलाल शाह का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वह भारत जोड़ो यात्रा में शामिल सुसनेर होने जा रहे थे। रास्ते में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर पोस्टमार्टम करना चाहते थे। हालाँकि, शाह के समर्थक अंतिम संस्कार के लिए शव ले गए।

‘PCR में तैनात पुलिसकर्मी हों सस्पेंड, चार्जशीट जल्द दाखिल हो’ : कंझावला केस पर दिल्ली पुलिस ने MHA को सौंपी रिपोर्ट, DCP को भी नोटिस भेजने का मिला निर्देश

दिल्ली के कंझावला केस में गृह मंत्रालय को दिल्ली पुलिस ने आज विस्तृत रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्रालय ने पुलिस से कहा है कि वह इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दायर करें और  आरोपितों को सजा दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएँ। 

इसके अलावा मंत्रालय की ओर से पुलिस को तीन निर्देश भी दिए गए हैं। इनमें लापरवाही दिखाने वाले व उस रात पीसीआर वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की बात है।

गृह मंत्रालय ने पड़ताल में कमी को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को जाँच अधिकारी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी सुझाव दिया है। इसी तरह जहाँ वारदात हुआ वहाँ के इलाकों में पर्याप्त रौशनी की व्यवस्था करने को भी  कहा गया है।

कंझावला केस

बता दें कि 1 जनवरी 2023 को दिल्ली के सुल्तानपुरी में युवती स्कूटी से अपने घर लौट रही थी। तभी, एक कार से उसका एक्सीडेंट हुआ। एक्सीडेंट में युवती कार के निचले हिस्से में फँस गई, लेकिन आरोपितों ने कार नहीं रोकी। इस कारण युवती 10-12 किलोमीटर तक लगातार घिसटती चली गई। 

इस हादसे में, युवती के पैर भी कट चुके थे। सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने दिल्ली के कंझावला थाना क्षेत्र से लड़की का शव नग्नावस्था में बरामद किया था। वहीं पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। घटना के बाद पुलिस पर काफी सवाल उठे थे। दिल्ली महिला आयोग ने जहाँ उन्हें घटना को लेकर नोटिस भेजा था। वहीं गृह मंत्रालय ने भी पुलिस को घटना के संबंध में जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा था।

‘जहाँ गुरुग्रंथ साहिब हैं, वहाँ से अन्य मूर्तियाँ हटाओ’: निहंग सिखों की माँग के बाद इंदौर के सिंधी समुदाय ने गुरुद्वारे में जमा कराए ग्रंथ, मंदिरों में रख करते आए हैं पूजा

मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) सिंधी समुदाय (Sindhi Community) के सदस्यों ने 11 जनवरी 2023 को गुरुद्वारा इमली साहिब में 80 से अधिक श्री गुरुग्रंथ साहिब जमा किए। ये पवित्र धर्मग्रंथ दशकों से सिंधी मंदिरों में रखे गए थे। यह फैसला इंदौर के एक सिंधी गुरुद्वारे में निहंग सिखों और सिंधी समुदाय के सदस्यों के बीच हुए विवाद के बाद आया।

सिंधी समुदाय ने यह फैसला निहंग सिखों (Nihang Sikhs) के एक समूह द्वारा उन मंदिरों से मूर्तियों को हटाने की माँग के बाद लिया, जहांँ गुरुग्रंथ साहिब (Shri Guru Granth Sahib) रखे गए थे। सिंधी समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने ग्रंथ को जवाहर मार्ग स्थित गुरुद्वारा इमली साहिब में लाकर सम्मान के साथ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंप दिया।

मामला तब शुरू हुआ, जब अमृतसर के निहंग सिखों के एक समूह ने इंदौर के अन्नपूर्णा रोड स्थित सिंधी समाज मंदिर का दौरा किया। इस मंदिर में सिंधी समाज के लोग गुरुग्रंथ साहिब की भी पूजा करते थे। निहंग समूह ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उनके पवित्र ग्रंथ को ऐसे स्थान पर रखा गया है, जहाँ मूर्तियों की पूजा की जाती है। उन्होंने इसे पवित्र ग्रंथ का अपमान बताया।

सिंधी मंदिर में गुरुग्रंथ साहिब का अपमान करने का आरोप लगाते हुए निहंग सिखों का जत्था थाने तक पहुँच गया। उन्होंने दावा किया कि जब किसी स्थान पर गुरुग्रंथ साहिब की पूजा की जाती है तो वह गुरुद्वारा बन जाता है। इसलिए उस स्थान को गुरुद्वारों पर लागू नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने माँग की कि जिन सिंधी मंदिरों में सिख पवित्र पुस्तक रखी गई है, उन्हें गुरुद्वारा घोषित किया जाना चाहिए।

निहंग सिखों ने कहा कि जहाँ गुरुग्रंथ साहिब की पूजा होती है, वहाँ पूरी गरिमा के साथ पूजा की जानी चाहिए और मंदिरों से मूर्तियों को हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके ग्रंथी सिंधी मंदिरों में ग्रंथ की पूजा करने आएँगे। निहंगों ने आगे कहा कि अगर यह माँग नहीं मानी जाती है तो मंदिरों में ग्रंथ नहीं रखा जाना चाहिए।

इसके बाद एक निहंग सिख जत्था राजमहल कॉलोनी स्थित एक सिंधी गुरुद्वारे में गया और वहाँ से ग्रंथ उठा ले गया। उन्होंने फिर एक अल्टीमेटम जारी किया, जिसमें सिंधी समुदाय को 12 जनवरी 2023 तक पवित्र पुस्तक को जमा करने के लिए कहा गया। निहंग समूह के साथ हिंदू जागरण मंच के सदस्यों की बहस भी हुई और उन्होंने निहंगों पर समाज को तोड़ने का आरोप लगाया।

इसके बाद सिंधी समाज के संतों ने एक बैठक की और मामले को तय करने के लिए पाँच सदस्यों का एक पैनल चुना। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद उन्होंने निहंगों की माँगों के अनुसार, सिंधी मंदिरों से गुरुग्रंथ साहिब को हटाने और उन्हें गुरुद्वारे में जमा करने का फैसला किया। सिंधी कमेटी ने कहा कि वे निहंग कमेटी के फैसले को मान रहे हैं और 12 जनवरी तक श्री गुरुग्रंथ साहिब को गुरुद्वारे में जमा करवा देंगे।

सिंधी कमिटी के सदस्यों ने कहा कि निहंग सिखों से इस मामले पर विवाद करने की जरूरत नहीं है। इससे बेहतर है कि दी गई समय सीमा तक सिंधी मंदिरों से धार्मिक ग्रंथ को हटा दिया जाए। इसके बाद उन्होंने समय सीमा से एक दिन पहले 11 जनवरी 2023 को गुरुद्वारे में ग्रंथ को जमा करा दिया।

उल्लेखनीय है कि सिंधी समुदाय लंबे समय से गुरुग्रंथ साहिब को अपने मंदिरों में रखता रहा है। गुरुग्रंथ साहिब की पूजा करना उनके कर्मकांड का हिस्सा बन गया है। इसका कारण कई सैकड़ों वर्ष पुराना है, जब अधिकांश सिंध समुदाय वर्तमान पाकिस्तान में रहा करते थे।

सिंधी हिंदू गुरु नानक की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित थे, क्योंकि उन्होंने सिंध क्षेत्र का दौरा किया था और क्षेत्र में अपने दर्शन का प्रसार किया था। उस समय से सिंधी लोग अपने मंदिरों में गुरु नानक और गुरुग्रंथ साहिब का पालन कर रहे हैं। वे अन्य हिंदू ग्रंथों के साथ अपने मंदिरों में इसे रखते हैं।

ऐसे मंदिरों में मंदिर के एक तरफ गुरु ग्रंथ साहिब रखा जाता है और दूसरी तरफ सभी देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखी जाती हैं। हालाँकि, वे गीता जैसे अन्य पाठों के साथ-साथ अपने स्वयं के अनुष्ठानों के अनुसार ग्रंथ की पूजा करते हैं, न कि सिख रीति-रिवाजों के अनुसार।

सिंधी मंदिर में प्रवेश करने वाले निहंग सिखों का वीडियो आया सामने

शिरोमणि पंथ अकाली बुढ़ा दल पंजवा तख्त 96 करोड़ी चक्रवर्ती के निहंग सिखों के एक समूह ने 18 दिसंबर 2022 को इंदौर के पार्श्वनाथ कॉलोनी में स्थित एक सिंधी मंदिर का दौरा किया। उस दिन का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में एक महिला उन निहंग सिखों से बहस करती दिख रही है और कह रही कि वे सिंधी मंदिर में बिना अनुमति के घुस आए हैं। इसलिए वे बाहर चले जाएँ। दूसरी ओर निहंग सिखों ने माँग की कि श्री गुरुग्रंथ साहिब के प्रकाश को स्थापित करने के लिए सिख धर्म में निर्धारित नियमों का पालन किया जाए।

जब निहंग सिखों ने दावा किया कि उन्हें किसी भी गुरुद्वारे में प्रवेश करने का अधिकार है तो महिला ने सवाल किया कि कहाँ लिखा है कि यह एक सिख गुरुद्वारा है। निहंगों ने उसे विनम्रता से बात करने के लिए कहा, जिस पर महिला ने कहा कि वह तेज बोल रही है, क्योंकि निहंग वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।

उनमें से एक निहंग ने कहा, “मेरे महाराज (श्री गुरुग्रंथ साहिब) ने मुझे यहाँ लाया है। जहाँ भी गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना होती है, वह स्वतः ही गुरुद्वारा बन जाता है। हर घर, मंदिर और अन्य परिसर जहाँ गुरुग्रंथ साहिब हैं, हमारा घर है।”

जब महिला ने उस निहंग का नाम पूछा तो उसने कहा, “हम निहंग फौज हैं। हमारे पास व्यक्तिगत नाम नहीं हैं”। तब उन्होंने खुद की पहचान शिरोमणि पंथ अकाली बुढ़ा दल पंजवा तख्त 96 करोड़ी चक्रवर्ती के निहंग सिंह फौज (निहंग सेना) के रूप में बताई। वहीं, महिला उनका व्यक्तिगत नाम पूछना जारी रखा। उधर, निहंग यही दोहराते रहे कि श्री गुरुग्रंथ साहिब की ‘मर्यादा’ नहीं बनाए रखी गई। यहीं से मामला और गरमा गया।

एक निहंग ने महिला का मोबाइल परिसर में स्थापित ग्रंथ साहिब की ओर मोड़ने का प्रयास किया। महिला ने उसे छूने पर चेतावनी दी। महिला ने फिर सवाल किया कि वे मंदिर में कैसे घुसे। निहंग ने बताया कि वहाँ रखे गए श्री गुरुग्रंथ साहिब बिना चंदोआ साहिब और निशान साहिब के रखे हुए हैं। चंदोआ साहिब सजाए गए कपड़े से बनी छतरी होती है, जो श्री गुरुग्रंथ साहिब को ऊपर से ढँकती है। वहीं, निशान साहिब सिख धर्म का पवित्र चिह्न है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि वीडियो क्लिप यहीं खत्म हो जाता है। आगे जो वह सोशल मीडिया पर आए वीडियो में नहीं है।

इसके बाद मंदिर के पुजारी ने हस्तक्षेप किया और महिला और निहंग को शांत करने की कोशिश की। निहंग सिंह ने कहा, “हम यहाँ [इंदौर में] अपना बेस स्थापित कर चुके हैं। हमें पता चला कि यहाँ गुरुग्रंथ साहिब की मर्यादा का पालन नहीं हो रहा है, इसलिए हम आए।”

जब पुजारी ने उन्हें एक-दूसरे से बात करने से रोकने की कोशिश की तो निहंग ने कहा कि वे तभी आए जब उन्हें बताया गया कि मर्यादा का पालन नहीं किया जा रहा है। जब निहंग मंदिर पहुँचे तो पुजारी ने उस दिन का अनुष्ठान पहले ही पूरा कर लिया था। महिला ने बताया कि एक बार अनुष्ठान पूरा हो जाने के बाद, वे (अगले दिन तक) पवित्र पुस्तकों को नहीं खोलते हैं। हालाँकि, निहंग ग्रंथ साहिब को देखने पर जोर देते रहे।

एक निहंग ने तब उन्हें गुरुग्रंथ साहिब के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए पालन की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में बताया। आगे यह तय किया गया कि पुजारी उन्हें अगले दिन बुलाएँगे और निहंग फिर आएँगे और श्री गुरुग्रंथ साहिब को मंदिर में रखने के बारे में सब कुछ लिखित रूप से समझाएँगे। निहंग चाहते थे कि मंदिर में उस तख्त की ऊँचाई बढ़ाई जाए, जिस पर ग्रंथ साहिब हैं।

रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, निहंग सिखों का जत्था आए दिन सिंधी मंदिरों में जाता रहता है। 19 दिसंबर 2022 को वे 62 एक्सटेंशन, राजमहल कॉलोनी, इंदौर स्थित पूनम दीदी का गुरुद्वारा गए। सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक छोटी क्लिप से पता चलता है कि वे श्री गुरुग्रंथ साहिब को उस मंदिर से निकाल कर ले गए।

वीडियो में एक वरिष्ठ निहंग सिख ने कथित तौर पर हिंदू सिंधी को ‘हिंदू रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने’ और केवल एक भगवान का अनुसरण करने के लिए कहा।

सिंधी समुदाय ने इसे ‘दिल दहलाने वाला’ बताया

इस संबंध में ऑपइंडिया ने सिंधी समुदाय के लोगों से संपर्क किया। सिंधी समुदाय की 5 सदस्यीय समिति के सदस्य प्रकाश राजदेव ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस मामले को समझाया। उन्होंने कहा, “हम, सिंधी समुदाय के सदस्य, श्री गुरुग्रंथ साहिब में आस्था रखते हैं और सिख गुरुओं की पूजा करते हैं। हमारे पास सिंधी ठिकाना (ठिकाना सिंधी मंदिर है) में हिंदू देवताओं की मूर्तियों के साथ गुरुग्रंथ साहिब हैं। 1947 में जब विभाजन हुआ तो सिंधी समुदाय के सदस्य अपने गुरुग्रंथ साहिब को सुरक्षित अपने साथ ले आए। लगभग 30-35 प्रतिशत सिंधी ठिकाना जाते हैं और उत्सवों और मौतों पर पथ रखते हैं। यह सदियों से चला आ रहा है।”

इसके बाद उन्होंने 18 दिसंबर 2022 को सिंधी समुदाय के सदस्यों और निहंग सिखों के बीच हुए विवाद के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हमें इस मामले के बारे में सोशल मीडिया से पता चला। आगे क्या करना है, यह तय करने के लिए हमारी एक सामुदायिक बैठक हुई। हमने इस पर चर्चा करने के लिए सिख धार्मिक नेताओं से भी संपर्क किया। उन्होंने हमें अपने मंदिरों में श्री गुरुग्रंथ साहिब को रखने के लिए नियमों के अनुसार प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा। उन्होंने हमें मूर्तियों को हटाने, निशान साहिब की स्थापना करने और प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा।”

असली समस्या यहीं से समस्या शुरू हुई। सिंधी समुदाय के पुजारियों ने मंदिरों से मूर्तियों को हटाने की माँग पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “हमने उनसे कहा कि हम गरिमा बनाए रखेंगे, लेकिन मूर्तियों को नहीं हटाएँगे। इससे हमारे बीच अनबन हो गई। तब हमारे धार्मिक नेताओं ने फैसला किया कि हम सभी गुरुग्रंथ साहिब को इमली साहिब गुरुद्वारे में जमा करेंगे।”

उन्होंने कहा कि वे सिखों के साथ कोई संघर्ष नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हम एक साधारण कारोबारी समुदाय हैं। हम सिख समुदाय के साथ कोई टकराव नहीं चाहते हैं। हम भाई हैं और साथ में बिजनेस करते हैं। आप समझ सकते हैं कि हमारे लिए कितनी कठिन स्थिति थी, जब सशस्त्र निहंग हमसे भिड़ गए। चूँकि कोई बीच का रास्ता नहीं था, इसलिए हमने गुरुग्रंथ साहिब को गुरुद्वारों में जमा करने का फैसला किया।”

राजदेव ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो क्लिप में स्थिति का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर जो प्रसारित किया जा रहा है और जो हुआ वह अलग है। जब हमने पूरी क्लिप देखी तो विवाद की कोई वजह नहीं थी। यह स्पष्ट था कि वे चाहते थे कि हम नियमों का पालन करें और हमें ऐसा करने में बहुत खुशी हुई। विवाद तब हुआ जब हमें मूर्तियों को हटाने के लिए कहा गया। यह हमारे समुदाय का दिल तोड़ने वाली स्थिति है।”

भारतीय सिंधु सभा के इंदौर प्रमुख रवि भाटिया ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “जब निहंग सिख आए तो उन्होंने कहा कि ‘इन पत्थरों को हटाओ’। सिंधी समुदाय के सदस्यों ने विरोध किया कि कैसे उन्होंने ‘पत्थर हटाओ’ कहा, क्योंकि वे भगवान राम और भगवान कृष्ण की मूर्तियाँ थीं। यह एक विवाद का कारण बना।”

उन्होंने कहा कि जब वे गुरु सिंह सभा के सदस्यों से मिले तो उन्हें बताया गया कि नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें कहा कि हो सकता है कि हम गुरुग्रंथ साहिब की गरिमा बनाए नहीं रख रहे हैं। हमें बताइए कि इसके लिए क्या करना होगा और वह हम करेंगे।

भाटिया ने आगे कहा, “बातचीत चल रही थी, लेकिन निहंगों ने आगे बढ़कर स्थानीय पुलिस को एक ज्ञापन सौंपा कि वे 12 जनवरी 2023 को हमारे मंदिरों से गुरुग्रंथ साहिब को हटा देंगे। हमने सोचा कि जैसा उन्होंने हमें अनुरोध किया है, यह बेहतर होगा कि हम खुद ही गुरुग्रंथ साहिब को जमा करा दें। इसके बाद उनमें से अधिकांश को हमने 11 जनवरी 2023 को जमा करा दिया।”

मंदिर गए निहंग जत्थे ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो पोस्ट किए। 9 जनवरी 2023 को डाले गए एक वीडियो में गुरुग्रंथ साहिब को पहले मंदिर से इंदौर के गुरुद्वारा इमली साहिब ले जाया गया। आगे के सोशल मीडिया पोस्ट और रिपोर्टों से पता चलता है कि बाकी बचे गुरुग्रंथ साहिब को 11 जनवरी 2023 को जमा किया और लगभग 12 बचे ग्रंथ साहिब को 12 जनवरी 2023 को दे दिया गया।

वे गुरुग्रंथ साहिब वापस ले सकते हैं

ऑपइंडिया से बात करते हुए श्री गुरु सिंह सभा के मुख्य सचिव जसबीर सिंह गाँधी ने कहा, “सिंधी समुदाय के साथ हमारा कोई विवाद नहीं है। गुरबानी सभी के लिए है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। केवल एक चीज यह है कि उन्हें गुरुग्रंथ साहिब रखने के लिए नियमों का पालन करना चाहिए। एक बार जब वे निर्देशों का पालन करते हैं और सिख समुदाय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार व्यवस्था करते हैं तो वे गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब को वापस लेने के लिए स्वतंत्र होते हैं।”

निहंग सिखों ने सोशल मीडिया नाराजगी पर प्रतिक्रिया दी

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी के बाद निहंग सिखों ने एक वीडियो बयान जारी किया है। लुधियाना स्थित बूढ़ा दल के जत्थेदार परमजीत सिंह ने कहा, “हमें इंदौर से जानकारी मिली कि एक सिंधी परिवार ने श्री गुरुग्रंथ साहिब को अपने घर के एक मंदिर में रखा है, लेकिन वे मर्यादा का पालन नहीं कर रहे हैं। हमने बुढ़ा दल के सदस्यों को जाँच के लिए इंदौर भेजा। उन्होंने मंदिर में कई विसंगतियाँ पाईं।”

परमजीत सिंह ने आगे बताया, “मुख्य मुद्दा यह था कि घर के मुखिया का आसन गुरुग्रंथ साहिब से ऊपर था, जिससे हमें दुख हुआ। जब हमने सिंधी समुदाय के नेताओं से बात की तो उन्होंने भी इस बात पर सहमति जताई कि गुरु साहिब की सबसे ऊँची सीट होनी चाहिए। सिंधी समुदाय की गुरु बानी में बहुत आस्था है और हम उनकी भावनाओं को समझते हैं। अब गुरुग्रंथ साहिब गुरुद्वारा पहुँच गए हैं और मामले को बढ़ाने का कोई कारण नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई गुरुग्रंथ साहिब को घर पर रखना चाहता है तो उसे ऐसा तब करना चाहिए, जब वे उनकी मर्यादा बनाए रख सकें अन्यथा इससे बचना चाहिए। सिंधी समुदाय को लेकर परमजीत सिंह ने कहा, “अगर वे श्री गुरुग्रंथ साहिब की गरिमा बनाए रख सकते हैं तो वे उन्हें वापस ले सकते हैं।”

हालाँकि, उन्होंने कहा कि बुढ़ा दल और श्री गुरु सिंह सभा के सदस्य गुरुग्रंथ साहिब को वापस लेने से पहले यह सुनिश्चित करेंगे कि सब कुछ नियमानुसार हो। उन्होंने कहा, “इसे हिंदू-सिख का मामला न बनाएँ। सभी धर्म समान हैं। गुरु साहिब ने सभी के लिए अपना बलिदान दिया।ठ इसके बाद उन्होंने सिख समुदाय के सदस्यों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया।