Home Blog Page 2107

भाभी ने किया बलात्कार का विरोध तो ड्राइवर अल्ताफ अहमद ने गला दबा कर मार डाला: पुलिस से कहा – वो घर में अकेली थी, मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था

जम्मू-कश्मीर के कादलबल पंपोर से रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक शख्स अल्ताफ अहमद गनी अपनी भाभी पर गंदी नज़र रखता था। आरोपित गनी ने अपनी 40 वर्षीय भाभी को घर में अकेला देख उसके साथ रेप करने की कोशिश की। पीड़िता ने गनी का जोरदार विरोध किया, जिसके बाद गनी ने अपनी भाभी की गला दबाकर हत्या कर दी।

घटना के बाद पीड़िता की बेटी रविवार (8 जनवरी, 2023) शाम पाँच बजे अपने घर वापस आई। वहाँ उसने अपनी माँ को अचेत अवस्था में देखा और लोगों को इस बारे में सूचना दी। इसके बाद पीड़िता को पंपोर के एसडीएच अस्पताल (SDH Hospital) में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

वहीं पुलिस ने अपने बयान में कहा कि पंपोर पुलिस को मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ और चिकित्सा-कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मौत के कारण का पता लगाने के लिए सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जाँच की कार्रवाई शुरू की।

पुलिस के बयान के अनुसार, “मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, एसएसपी अवंतीपोरा द्वारा एसडीपीओ पंपोर की देखरेख में एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया। जाँच के दौरान मृतका के पति सहित परिवार के कई सदस्यों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ के दौरान, मृतका के परिवारजनों ने उसके देवर पर शक जताया। जब पुलिस ने मृतका के देवर अल्ताफ अहमद गनी से पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

पूछताछ के दौरान आरोपित ने बताया कि उसकी भाभी घर पर अकेली थी और वह मौका का फायदा उठाना चाहता था। इसी कोशिश में वह अपनी भाभी के कमरे में गया और उसके साथ जोर-जबर्दस्ती करने लगा। महिला ने हालाँकि उसका काफी विरोध किया। आरोपित गनी ने बताया कि उसने शुरुआत में महिला को शांत कराने की कोशिश की लेकिन वह लगातार मदद के लिए चिल्ला रही थी। इससे घबराकर उसने अपनी भाभी की गला दबाकर हत्या कर दी।

44 वर्षीय आरोपित गनी पेशे से ड्राइवर है और अविवाहित है। वह अपनी भाभी व् परिवार के अन्य सदस्यों के साथ एक ही छत के नीचे अलग कमरे में रहता है। आरोपित लोगों को चकमा अपनी भाभी के शव के साथ अस्पताल भी गया था ताकि कोई उसपर शक न करे। वहीं रविवार देर रात स्थानीय निवासियों ने घटना को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया था और आरोपित को जल्द पकड़ने की माँग की थी।

‘आपके पार्सल में अवैध चीजें मिली हैं’: खुद को साइबर सेल या पुलिस थाने से बताने वालों को भी न भेजें रुपए, देखें महिला पत्रकार के साथ क्या हुआ

देश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि लोगों में स्कैम्स को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन शातिर साइबर अपराधी भी लोगों को ठगने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं। ठगी के लिए अब फोन कॉल और व्हाट्सएप्प (WhatsApp) का इस्तेमाल हो रहा है। ठगी करने वाले फर्जी कागजात, आईडी और दूसरे डॉक्यूमेंट्स का ऐसा इस्तेमाल करते हैं कि पढ़ा-लिखा इंसान भी चक्कर खा जाए। यदि समझ में आ गया तो बच गए, नहीं तो चुटकियों में खाता खाली।

ऐसा ही एक वाकया पेश आया पत्रकार गीतिका रस्तोगी के साथ। उन्होंने ट्विटर पर थ्रेड के जरिए अपने साथ हुए फ्रॉड के कोशिश की पूरी कहानी साझा की। बकौल गीतिका, उन्हें सबसे पहले फेडएक्स कंपनी के नाम से एक फोन कॉल आया। उन्हें बताया गया कि उनका एक पार्सल बताए पते पर नहीं पहुँच सका है, क्योंकि इसमें अवैध समान रखे हुए थे। कॉलर के अनुसार, गीतिका ने मुंबई से ताइवान एक पार्सल भेजा था जिसमें नशे का सामान पाया गया।

गीतिका आगे बताती हैं कि कॉलर ने उन्हें पार्सल की डिटेल बताई और कहा कि मामले में पुलिस जाँच कर रही है। कॉलर ने फिर मुंबई पुलिस साइबर सेल का बताते हुए एक व्यक्ति को फोन पर जोड़ा। गीतिका को यहीं संदेह हुआ। इसके बाद व्हाट्सएप्प पर उन्हें एक पुलिस ऑफिसर का आईकार्ड भेजा गया। व्हाट्सएप्प पर ही फर्जी ‘एसआई नरेश गुप्ता बनर्जी’ ने गीतिका का बयान दर्ज किया। एसआई बनर्जी ने गीतिका से कई सवाल पूछे। इस दौरान बैकग्राउंड का भी पूरा ख्याल रखा गया था। फोन पर किसी व्यस्त पुलिस स्टेशन सी आवाजें भी सुनाई दे रही थीं।

इतने में गीतिका को सबूत के साथ बताया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कई गैरकानूनी बैंक खाते खोलने व गैरकानूनी लेन देन के लिए किया गया है। इसका इस्तेमाल हवाला ट्रांजैक्शन के लिए किया गया है। व्हाट्सएप्प पर तस्वीरें और खबरों का स्क्रीनशॉट भेजा गया। बताया गया कि आपकी आईडी का इस्तेमाल जेरोल्ड नामक किसी व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, जिसे मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले की जाँच की जा रही है। यदि आपको इस केस से निकलना है तो हमारा सहयोग करना होगा।

कॉल पर फर्जी पुलिस वालों ने यह भी कहा कि घटना का जिक्र किसी से न करें, क्योंकि मामला संवेदनशील है। उन्होंने इससे जुड़ा एक फर्जी डॉक्यूमेंट और भेजा। इस दौरान आश्वासन दिया गया कि आप फिक्र मत कीजिए, 20-30 मिनट में आप केस से बाहर हो सकती हैं। इस केस में लगभग 150 लोगों से पूछताछ चल रही है। आपके बैंक खातों की जाँच के लिए आप कुछ रुपए हमें ट्रांसफर करें। नकली पुलिस वालों ने गीतिका से वेरिफिकेशन के नाम पर 95 हजार 499 रुपए माँगे। उन्होंने कहा कि या तो आप पैसे भेजें अन्यथा मुंबई आ कर थाने में हाजिरी लगाएँ।

क्राइम ब्राँच के नकली पुलिस वालों ने गीतिका को आश्वासन दिया कि जाँच के बाद उनके रुपए भेज दिए जाएँगे। इस पर गीतिका ने कहा कि मैं पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकती। इस पर फॉड कॉलर्स ने धमकी दी कि पैसे न भेजने पर खाता 2-3 सालों के लिए फ्रीज कर दिया जाएगा। या तो रुपए भेजो, अन्यथा मुंबई पहुँचो। इस पर गीतिका ने मुंबई आने के लिए तैयार होने की बात कही। इसके बाद फोन काट दिया गया।

गीतिका को डर है कि स्कैमर्स के पास अब भी उनकी आधार डिटेल है। इस तरह के मामले हर रोज सामने आते हैं। कई लोग तो अपनी मेहनत की कमाई पलक झपकते खो देते हैं। फोन से फ्रॉड का ये मॉडल, पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पहले इसका केन्द्र झारखंड का जामतारा माना जाता था, लेकिन जानकार बताते हैं कि इसी तर्ज पर देश के कई इलाकों से ऑनलाइन फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है।

‘जेल से छूट कर आने दे, फिर देख तेरा क्या हश्र करता हूँ’: हिन्दू छात्रा को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देने वाला मोहम्मद अनस, कॉलेज में घुस कर की थी अश्लील हरकत

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हिन्दू लड़की को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देने वाले मोहम्मद अनस को पुलिस का भी खौफ नहीं है। पॉक्सो और यौन उत्पीड़न का आरोपित अनस पीड़िता पर जबरन निकाह करने और पहले के सभी मामलों को वापस लेने का दबाव बना रहा था। मामले में रविवार (8 जनवरी, 2022) को अनस की गिरफ्तारी हुई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे मामले में उसे अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। अनस का कहना है कि पीड़िता ने मुकदमा वापस नहीं लेकर एक बड़ी गलती की है। उसने कहा कि जेल से छूट कर आऊँगा तब देखना पीड़िता का क्या हश्र करता हूँ।

इसके साथ ही अनस ने कहा कि पीड़िता ने उसकी जिंदगी खराब कर दी है। वहीं सच्चाई यह है कि अनस बीते ढाई साल से पीड़िता को तरह-तरह से परेशान कर रहा था। यहाँ तक की अनस ने पीड़िता को इतना सताया कि उसे अपना घर भी बदलना पड़ा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अनस 2 दिसंबर 2022 को नौबस्ता में बीबीए की पढ़ाई करने वाली पीड़िता के कॉलेज चला गया था और उसे अपने साथियों की मदद से खींचकर अश्लील हरकत करने लगा। मना करने पर उसने पीड़िता को तेजाब से नहलाने और उसका सिर तन से जुदा करने की धमकी दी।

वहीं पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर की पुलिस उपायुक्त ने जानकारी दी थी कि एक स्कूल में छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया था, जिसमें अनस नाम का व्यक्ति स्कूल में घुसकर छात्रा को परेशान कर रहा था। मामले की गहनता से जाँच करने क बाद पता चला कि अनस पर रेल बाजार में ही इस तरह के तीन मामले इसी प्रकरण में कायम हैं। वो इस छात्रा को काफी दिनों से परेशान कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो साल पहले भी लड़की के पिता ने अनस पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाया था। लेकिन, जेल से छूटने के बाद भी वह नहीं माना और उसने फिर लड़की के साथ छेड़छाड़ की और उसे अपना केस वापस लेने की धमकी दी। ऐसा न करने पर उसने उसे ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अनस ने उसका जीना दुश्वार कर दिया है।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था, ”उसने क्लास रूम में सबके सामने उसने मेरा हाथ पकड़कर खींचा और मुझे बेइज्जत किया है। उसने मुझे धमकी दी कि अपना मुकदमा वापस ले, वरना चेहरे पर तेजाब डाल दूँगा। तेरा सिर तन से जुदा कर दूँगा। इसके साथ ही उसने मुझे निकाह करने की धमकी दी, कहा- तुम मेरी हो जाओ और निकाह कर लो। मैं तुम्हें मुस्लिम बनाकर अपनी बेगम बनाऊँगा। इस वजह से मैंने कॉलेज जाना छोड़ दिया है।”

सोने की माला पहनेंगे रामलला, चाँदी का होगा द्वार: राम मंदिर के लिए मठ-व्यापारी खुल कर दे रहे दान, लोगों ने अब तक समर्पित की 500 Kg चाँदी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य जारी है। जनवरी 2024 तक निर्माण कार्य पूर्ण होने का अनुमान है। मंदिर निर्माण के लिए देश भर से लोगों ने अपनी क्षमता अनुसार दान दिया। रुपए के अतिरिक्त भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए सोने और चाँदी भी दान के रूप में दिए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार गर्भगृह के दरवाजों और खिड़की के साथ-साथ राम मंद‍िर का सिंह द्वार भी चाँदी से ही तैयार होगा। इसके लिए काशी मठ के हरिद्वार पीठ की तरफ से 167 किलो चाँदी भेंट किया गया।

सोमवार (09 जनवरी, 2023) को हरिद्वार काशी मठ के उत्तराधिकारी स्वामी संयमेंद्र तीर्थ महाराज ने रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की और मंदिर निर्माण कार्य को भी देखा। स्वामी संयमेंद्र तीर्थ महाराज ने भगवान राम के बाल स्वरूप के लिए 48 ग्राम सोने की माला और 167 किलोग्राम चाँदी समर्पित की। इस चाँदी का इस्तेमाल रामलला के गर्भगृह और सिंह द्वार बनाने में किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर के गर्भ गृह से लेकर शिखर तक सोने की सजावट होगी। मंदिर में स्थापित की जाने वाली स्थायी रामलला की मूर्ति के लिए 108 सोने के सिक्के का हार पहनाए जाने की भी तैयारी चल रही है। इसके लिए हरिद्वार मठ काशी पीठाधीश्वर के तरफ से राम मंदिर ट्रस्ट के पास निवेदन कर स्थायी मूर्ति की माप माँगी गई है। आपको बता दें देश भर से राम भक्तों ने अब तक 500 किलो से ज्यादा चाँदी दान के रुप में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को दे दी है। दान दिए जाने का सिलसिला जारी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के एक व्यापारी ने रामलला के सिंहासन पर सोने का पत्तर लगवाने की इजाजत माँगी है।

जानकारी के अनुसार, राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद बिहार के पटना महावीर मंदिर न्यास की तरफ से मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए दान स्वरूप देने की बात कही गई थी। जिसके बाद हर वर्ष 2 करोड़ रुपए का किस्त राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को सौंपा जा रहा है। महावीर मंदिर न्यास की तरफ से अब तक 6 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। रामकथा कहने वाले मोरारी बापू ने मंदिर निर्माण के लिए 18 करोड़ 60 लाख रुपए जुटा लिए।

दरअसल, मोरारी बापू ने मंदिर निर्माण के लिए दुनिया भर के रामभक्तों से अपील की थी। उन्होंने इसके लिए 5 करोड़ रुपए जुटाने का आह्वान किया था लेकिन उनके समर्थकों और प्रशंसकों ने 18.61 करोड़ रुपये जुटा लिए। आपको बता दें कि मंदिर निर्माण में अब 1 साल से भी कम समय बचा हुआ है। पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि 1 जनवरी 2024 तक मंदिर तैयार हो जाएगा।

शम्भू दयाल को चाकू मार रहा था अनीस तो तमाशबीन बने थे लोग, मौत के बाद पुष्प वर्षा: 30 साल दिल्ली पुलिस में दी सेवा, कमिश्नर ने दिया कंधा

अपराधी अनीस राज के हमले में वीरगति पाए दिल्ली पुलिस के जाँबाज़ ASI शम्भू दयाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ हुआ। इस दौरान खुद दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने उनके शव को कंधा दिया। शम्भू दयाल के सम्मान में लोगों ने फूलों की बारिश भी की। इस बीच उन पर अनीस द्वारा किए गए हमले का वीडियो भी सामने आया है। वायरल वीडियो में चाकुओं के घाव खाने के बाद भी ASI शम्भू दयाल अपराधी से जूझते नजर आए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DCP मुख्यालय में बलिदानी शम्भू दयाल की अंतिम विदाई में दिल्ली पुलिस का पूरा अमला उमड़ पड़ा था। खुद कमिश्नर संजय अरोड़ा इस यात्रा में मौजूद थे। उन्होंने अपने अधीनस्थ रहे ASI के शव को कंधा भी दिया। इस दौरान माहौल काफी गमगीन रहा। जब शम्भू दयाल का पार्थिव शरीर उनके गाँव राजस्थान के सीकर जिले में गवली बिहारीपुर पहुँचा, तब लोगों ने पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए। इस दौरान देशभक्ति के नारे भी लगे।

गाँव में हुए अंतिम संस्कार के दौरान हजारों लोगों की भीड़ रही। दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर भी दिया गया। बलिदानी शम्भू दयाल के शव को बाकायदा एक जुलूस की शक्ल में ले जाया गया था, जिस दौरान सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों ने उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

इस बीच ASI शम्भू दयाल पर हुए हमले का वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में झपटमार अनीस भीड़ में कई लोगों के बीच उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार करता दिखाई दे रहा है। कई घाव लगने के बाद भी शम्भू दयाल ने अनीस को जमीन पर पटक दिया था। हमले के दौरान भीड़ में से किसी ने भी ASI की मदद नहीं की। वीडियो में हमले से मची अफरातफरी का फायदा उठा कर अनीस भागने का प्रयास करता दिखाई देता है।

हालाँकि, बाद में उसे पकड़ लिया जाता है। दिल्ली पुलिस की कस्टडी में पकड़े गए अनीस का फोटो भी सार्वजनिक हुआ है।

गौरतलब है कि बलिदानी ASI शम्भू दयाल दिल्ली पुलिस में 1993 बैच के कांस्टेबल थे जो बाद में अपनी काबिलियत से सहायक उप निरीक्षक के पद पर प्रमोट हुए थे। 5 जनवरी, 2022 को एक महिला के फोन छिन जाने की शिकायत पर वो आरोपित अनीस को पकड़ कर ला रहे थे। इस दौरान अनीस ने उन पर चाकुओं से वार कर दिया जिस से लम्बे इलाज के बाद शम्भू दयाल वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

(नोट: हमला करने वाले का नाम अनीस राज है। कई मीडिया रिपोर्टों में नाम मोहम्मद अनीस बताया गया था। गलत नाम प्रकाशित होने का हमें खेद है।)

जिस घर को मेहनत से बनाया, वो आज वीरान पड़ा है… जोशीमठ से पलायन करने वालों को भगवान का आसरा, कह रहे – बगीचे-खेत सब पीछे छूट गए, पता न कहाँ जाएँगे

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धँसती जा रही है। प्रशासन असुरक्षित घरों को गिराने के साथ ही लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुँचा रहा है। हालाँकि, लोग अपने घरों को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हैं। जो लोग घर छोड़कर जा भी रहे हैं वह बेहद दुःखी हैं। वास्तव में, जोशीमठ की चिंता केवल उन लोगों को नहीं है, जो वहाँ रह रहे हैं। बल्कि पूरा देश पवित्र नगरी जोशीमठ के हालातों पर नजर जमाए हुए है। हालाँकि, जिनका घर उनसे छूट रहा है वह अपने घर की हालत देखकर भावुक हो रहे हैं।

ऐसे ही, जोशीमठ में रहने वाली बिंदु ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “यह मेरा मायका है। 19 साल की उम्र में मेरी शादी हुई थी। मेरी माँ 80 साल की हैं और मेरा एक बड़ा भाई है। हमने मेहनत करके और कमाई करके यह घर बनाया है। हम यहाँ 60 साल रहे लेकिन यह सब अब खत्म हो रहा है।”

दरअसल, कुछ दिनों पहले तक जिन घरों में रौनक नजर आती थी। उन घरों में अब सिर्फ दरारें नजर आ रहीं हैं। प्रशासन ने सैकड़ों असुरक्षित घरों पर मार्किंग कर दी है। यानी अब, ऐसे घर रहने लायक नहीं हैं। इसी तरह, मनोहर बाग वार्ड में रहने वाली उत्तरा देवी के मकान को भी प्रशासन ने असुरक्षित घोषित कर लाल निशान लगा दिया है। जोशीमठ के सिंहधार वार्ड में रहने वाली मंदोदरी देवी, गोदांबरी देवी, हेमलता देवी अब प्रशासन द्वारा बनाए गए शिविर में रह रहीं हैं। लेकिन, अपने घरों को याद कर उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। लोगों का कहना है कि जिन घरों को उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बनाया। वह घर अब वीरान पड़ा हुआ है।

‘आज तक’ से बात करते हुए एक महिला ने कहा है कि जून तक सब ठीक था। छोटी-मोटी दरारें आ रहीं थीं। लेकिन, पहाड़ में यह सब सामान्य है। अब अचानक से दरारें बढ़ गईं हैं। रात में वह प्रशासन द्वारा बनाए गए शिविर में रहती हैं और दिन में वापस अपने घर आ जातीं हैं।

महिला का कहना है कि वह अपने घर को छोड़ने की तैयारी कर रहीं हैं। इससे पहले उन्हें सामान भी शिफ्ट करना है। पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि आप अब कहाँ जाएँगीं? तो उन्होंने कहा, भगवान है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार उन्हें शिफ्ट कर देगी। लेकिन, यहाँ उनके खेत हैं, बगीचा है और यहीं उनके बच्चों का जन्म हुआ है।

इसी तरह एक अन्य महिला गीता देवी अपने घर को देखते हुए भावुक हो जाती हैं। वो कहतीं हैं उनका घर टूटने वाला है। आसपास के कई घरों में दरारें आ गईं हैं। प्रशासन ने मदद का आश्वासन दिया है। पहले यहाँ सब अच्छा था। इस घर में वह 2003 से 2021 तक खुशी से रह रहीं थीं। लेकिन, 2021 में हुई बारिश के बाद सब बदल गया। वह दुःखी होकर कहतीं हैं कि बारिश में कई रात सो नहीं पाए। किसी से कुछ बोल नहीं पाए। लेकिन, सोचते थे घर टूटेगा तो क्या होगा।

बाहर श्रद्धा के टुकड़े-टुकड़े किए, जेल में आफताब माँग रहा कानून की किताबें: कोर्ट ने कहा- गर्म कपड़े दो, कस्टडी 14 दिन बढ़ाई

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने श्रद्धा हत्याकांड (shrddha Murder Case) के आरोपित आफताब पूनावाला (Aftab Poonawala) की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी है। उसे गर्म कपड़े मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। उसने जेल में पढ़ने के लिए कानून की किताबें भी माँगी है। इससे पहले उसने अपने वकील के जरिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने की इजाजत माँगी थी।

इससे पहले आफ़ताब की हिरासत अवधि 6 जनवरी 2023 को 4 दिनों के लिए बढ़ाई गई थी। इसी दौरान आफ़ताब ने अपने वकील एमएस खान के माध्यम से अपने डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की इजाजत माँगी थी। आफ़ताब के वकील ने तर्क दिया था कि इसके माध्यम से वह जेल में गर्म कपड़े और अपनी जरूरत की चीजों को खरीद सकता है। हाई कोर्ट ने हालाँकि इसकी इजाजत तो नहीं दी। लेकिन मंगलवार (10 जनवरी 2023) को गर्म कपड़े मुहैया कराने के निर्देश अधिकारीयों को दिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आफताब ने इससे पहले भी जेल के अधिकारियों से किताबें माँगी थी। उसे द ग्रेट रेलवे बाजार (The Great Railway Bazaar) नाम की किताब पढ़ने को भी दी गई थी। उल्लेखनीय है कि आफ़ताब ने लिव इन पार्टनर श्रद्धा वॉकर की 18 मई 2022 की गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसके शव के 35 टुकड़े कर दिल्ली के महरौली व अलग-अलग इलाकों में फेंक दिए थे। जब इस केस का खुलासा हुआ तो पूरा देश स्तब्ध रह गया।

पुलिस की पूछताछ में यह सामने आया था कि श्रद्धा हत्याकांड का आरोपित आफताब किसी शातिर हत्यारे की तरह सोच रहा था। आफताब जानता था कि हत्या के बाद जाँच होने पर पुलिस उसके मोबाइल के जीपीएस की जाँच कर सकती है। इसलिए वह जब श्रद्धा के शरीर के टुकड़ों को फेंकने जाता था तो फोन का जीपीएस बंद कर देता था। कई बार वह अपना फोन घर में भी छोड़कर चला जाता था।

इतना ही नहीं, श्रद्धा की हत्या के बाद किसी को उस पर शक न हो इसलिए वह लगातार ऑफिस जाता रहा। हत्या के बाद श्रद्धा के परिवार वालों और फ्रेंड्स की नजरों में श्रद्धा को जिंदा दिखाने के लिए उसके इंस्टाग्राम अकाउंट को यूज करता रहा। यहाँ तक कि उसने उसके इंस्टाग्राम से कुछ पोस्ट्स भी किए थे।

मिट्टी खोदो सोना निकलेगा… कहकर ले गए, बना दिया मजदूर: झेलते रहे जुल्म पर नहीं बदला धर्म, आज मॉरीशस में बजता है भारतीयों का डंका

मध्य प्रदेश के इंदौर में 8 जनवरी से 10 जनवरी, 2023 तक ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार 9 जनवरी, 2023 को प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया और प्रवासी भारतीयों को संबोधित भी किया। मंगलवार (10 जनवरी, 2023) को प्रवासी भारतीय दिवस सम्मान समारोह के बाद समापन सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की। सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि सम्मेलन के लिए लगभग 70 देशों के 3500 से ज्यादा प्रवासी सदस्यों ने पंजीकरण कराया है। इनमें सबसे ज्यादा 800 प्रवासी भारतीय मॉरीशस से आए हैं।

मॉरीशस हिंद महासागर के तट पर अफ्रीका महाद्वीप में स्थित एक खूबसूरत द्वीपीय देश है। मॉरीशस में 52 प्रतिशत लोग हिंदू हैं। ऐसे तो मॉरीशस में हिंदुस्तान के लगभग हर हिस्से के लोग हैं लेकिन सबसे ज्यादा भोजपुरी बेल्ट के लोग रहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉरीशस में भारतीय मजदूरों को झूठ बोलकर यहाँ बसाया गया था। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में हिस्सा लेने इंदौर पहुँचे मॉरीशस के लोगों ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत करते हुए एक बार फिर से उन कहानियों को याद किया।

गूगल मैप

मॉरीशस के लोगों ने बताया कि उनके पूर्वजों से कहा गया कि आपको ऐसी जगह ले जा रहे हैं, जहाँ मिट्टी खोदने पर सोना निकलता है। लेकिन जब वे इस द्वीप पर पहुँचे तो उन्हें खेती समेत छोटे-मोटे कामों में लगा दिया गया। मॉरीशस में रहने वाले प्रवासी भारतीय और आर्य सभा के प्रचारक पंडित गुरुदेव चतुरी का कहना है कि झूठ बोलकर मजदूरी के लिए लाए गए उनके पूर्वज अंग्रेजों के अत्याचार सहने के बाद भी अपना धर्म नहीं बदले बल्कि उन्होंने अपनी भाषा और संस्कृति बचा कर रखी। उसी का परिणाम है कि आज हम बेहतर स्थिति में हैं।

मॉरीशस की महिला पुरोहित (पंडिताई) करने वाली पुनिता प्रिया के पूर्वज भी बिहार से मॉरीशस ले जाए गए थे। वे बताती हैं कि उनके पूर्वज यहाँ मजदूरी करते थे। पूर्वजों की मेहनत का फल हमें सूद समेत मिल रहा है। मॉरीशस से प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शिरकत करने पहुँची वकील प्रिना चियातिलक द्वीप में बसी छठी पीढ़ी हैं। उनके भी पूर्वज को मिट्टी खोद कर सोना निकालने वाला झाँसा दिया गया था। मॉरीशस की समाजसेवी गायत्री रामचरण शम्भू के पूर्वज भी बिहार से मॉरीशस ले जाए गए थे।

मॉरीशस में बसी अपने खानदान की वो चौथी पीढ़ी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उनके पूर्वज मॉरीशस में खेतों में मजदूरी करते थे। उनके पूर्वजों से भी पत्थर खोदकर सोना निकालने का प्रलोभन दिया गया था? मॉरीशस में इंश्योरेंस कंपनी चलाने वाली कविता रामफल के परदादा बिहार से मॉरिशस गए थे। उन्हें भी अंग्रेजों की यातना सहनी पड़ी लेकिन उसी मॉरीशस में आज कविता बेहतर जिंदगी गुजार रही हैं। मॉरीशस से इंदौर आए 21 वर्षीय नेवरियन परियाचिपा के पूर्वज दक्षिण भारत से थे। नेवरियन तबला बजाते हैं। दिल्ली और चेन्नई में वे अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।

मॉरीशस के डॉ.उदयनारायण गंगू का कहना है कि भारत से मजदूर बनकर मॉरीशस पहुँचे लोगों के बच्चों को जब पढ़ाई का अधिकार मिला तो इसका फायदा उठाकर वे लोग देश के बड़े पदों पर नियुक्त हुए। जज, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर यहाँ तक की मंत्री पद तक हासिल किया। उन्होंने बताया कि 1968 में मॉरीशस को आजादी मिलने के बाद से 2003 और 2005 को छोड़ दें तो स्वतंत्रता के बाद से अभी तक हिन्दू ही प्रधानमंत्री रहे हैं। डॉ. गंगू का कहना है कि मॉरीशस में हिंदुओं का ही वर्चस्व है।

कन्हैया लाल की जान गई, गला रेतने वालों को जिन्होंने पकड़वाया उनका सुख-चैन गया: बताया- जान पर खतरा, सरकार ने बिसराया, गाँव वाले हँसते हैं

राजस्थान के उदयपुर में जून 2022 में कन्हैया लाल का गला रेत दिया गया था। गला रेतने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद को पकड़वाने में जिन दो युवकों ने भूमिका निभाई, अब वे खौफ में जी रहे हैं। इन युवकों के अनुसार उनकी जान को खतरा है। कोई उनको नौकरी देने को तैयार नहीं है। उस समय राजस्थान सरकार ने जो वादा किया था, वह भूल गई। अब इनका हाल देखकर गाँव वाले इन पर हँसते हैं।

इन युवकों के नाम हैं- शक्ति सिंह और प्रह्लाद। 28 जून 2022 को जब कन्हैया लाल के हत्यारे रियाज और गौस मोहम्मद भाग निकले थे तो राजसमंद में इनको पकड़वाने में शक्ति सिंह और प्रह्लाद ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन, अब उनका घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

शक्ति और प्रह्लाद की सहायता से जब पुलिस ने आरोपितों को पकड़ा था, तब प्रशासन ने उनकी जमकर वाहवाही की थी। राजस्थान सरकार ने भी दोनों की सुरक्षा के लिए गार्ड, बंदूक का लाइसेंस और नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन, गहलोत सरकार द्वारा किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ है।

नहीं मिल रही नौकरी, जान का खतरा

शक्ति सिंह का कहना है कि वह सूरत में एक किराना दुकान में काम करते थे। घटना से कुछ दिन पहले ही गाँव आए थे। कन्हैया लाल की हत्या के आरोपितों को पकड़वाने के बाद उनका चेहरा सबके सामने आ गया था। इसके करना दुकान मालिक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अब कहीं नौकरी नहीं मिल रही। वहीं, होटल में काम करने वाले प्रह्लाद का कहना है कि हर समय जान का खतरा मंडराता रहता है।

शक्ति सिंह और प्रह्लाद के अनुसार रियाज और गौस जब भाग रहे थे तो चौराहे पर उनके अलावा कई और लोग भी बैठे थे। लेकिन, उन्होंने करीब 25 किलोमीटर पीछाकर आरोपितों को पकड़वाया था। हत्या के बाद दोनों आरोपित अजमेर भागने की फिराक में थे। स्थानीय भीम थाने के एक परिचित ने उनसे आरोपितों पर नजर रखने के लिए कहा था।

इसी दौरान, उनकी नजर रियाज और गौस पर पड़ी। दोनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी और फिर आरोपितों का पीछा करना शुरू कर दिया। दोनों आरोपित पुलिस चेकपोस्ट से होकर ही गुजरे थे। लेकिन, किसी पुलिसकर्मी ने उन पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद भी उन्होंने पीछा करना नहीं छोड़ा। साथ ही, पुलिस को भी लोकेशन बताते रहे। इस तरह पुलिस ने उसकी सहायता से दोनों को दबोच लिया था।

शक्ति सिंह और प्रह्लाद आज अपनी स्थिति से बेहद दुःखी हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने पुलिस की मदद कर आरोपितों को पकड़वाया था। इसके बाद से ही उनकी स्थिति खराब हो गई। आज डर के साए में जी रहे हैं। सरकार मुड़कर देखने को तैयार नहीं है। दोनों का कहना है कि उनकी हालत देखकर गाँव वाले हँसते हैं। यदि हालत ऐसी ही रही तो कोई कभी किसी की मदद के लिए आगे नहीं आएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कन्हैया लाल के बेटे यश ने उन्हें 25-25 हजार रुपए की सहायता दी है।

एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर पर दिखे जावेद अख्तर तो लोगों ने दी सलाह – डॉ ऑर्थो का तेल लगाइए: पैपराजी को देख कर बोले – रुक जाओ, पहले उतर जाने दो

मशहूर गीतकार व लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इसमें जावेद अख्तर व्हीलचेयर पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर एयरपोर्ट की बताई जा रही है। एयरपोर्ट पर पैपराजी को देखते ही व्हीलचेयर पर चल रहे गीतकार ने उनसे कहा, “रुक जाओ, मुझे पहले उतर जाने दो।” इसके बाद वह व्हीलचेयर से उतरकर पैदल चलने लगते हैं।

वह कहते हैं, “इतनी दूर तक पैदल कौन चले, इसलिए व्हीलचेयर पर बैठा हूँ। लेकिन उस पर बैठे हुए जब मेरी तस्वीर आएगी, तो सब कहेंगे बड़ा बीमार है।” यह कहकर वह आगे बढ़ जाते हैं।

जावेद अख्तर की व्हीलचेयर पर बैठे हुए तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनका जमकर मजाक उड़ाया। डॉ. अनिल पाण्डेय लिखते हैं, “ये तो वही उर्फी के अब्बू जावेद अख्तर हैं ना, जो डॉ. ऑर्थो तेल का विज्ञापन करते हैं। इनसे तो खुद ही खड़ा नहीं हुआ जाता।”

जर्नादन मिश्रा लिखते हैं, “विडंबना देखिए। यही जावेद अख्तर टीवी पर डॉ. ऑर्थो तेल का विज्ञापन करते हैं, जो दावा करता है कि इस तेल को लगाने के बाद यदि आपके घुटने घिस गए हो, आप खड़े नहीं हो पा रहे हो तो दौड़ने लगेंगे।”

एक यूजर ने लिखा, “डॉ. ऑर्थो तेल का विज्ञापन करने वाले जावेद अख्तर जी खुद घुटने टेक कर चल रहे हैं। यह कैसी विडंबना है विज्ञापनों की।”

अनुज त्रिपाठी ने लॉफिंग इमोजी के साथ लिखा, “Knee Joint Pain के लिए डॉ. ऑर्थो तेल का विज्ञापन करने वाले जावेद अख्तर व्हीलचेयर पर।”

अश्विनी ने तंज कसते हुए लिखा, “अरे जावेद अख्तर जी! क्या आपने डॉ. ऑर्थो तेल के बारे में नहीं सुना? सुना है उसकी मालिश करने से कमजोर से कमजोर जोड़ एकदम चुस्त हो जाते हैं। एक बार ट्राइ करिए सर।”

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं जब जावेद अख्तर का सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया गया हो। हाल ही में जावेद अख्तर ने एक ट्वीट किया था, “तालिबानियों ने इस्लाम के नाम पर सभी महिलाओं और लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारतीय मुस्लिम पर्सनल बोर्ड और अन्य इस्लामिक विद्वानों ने इसकी निंदा क्यों नहीं की। क्यों। क्या वे तालिबानियों से सहमत हैं?” इसको लेकर अल हिंद नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा था, “श्याम बिहारी की चौथी पीड़ी तू ज़्यादा दख़ल ना दे शरीयत में।”

इसके बाद आदिल साइन नाम के यूजर ने लिखा था, “जावेद भाई, अपने मुल्क की चुनौतियों को पहले समझ लें, फिर पड़ोसी मुल्क की बातों पर सोचा जाए। पर नहीं आप तो आप हैं… ऐसी उम्र में लोग थोड़े चिंतित हो ही जाते हैं, उम्र का कसूर है आप तो मासूम हैं।”