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भारत से डबल हुआ Apple प्रोडक्ट का निर्यात, 9 महीने में ही ₹20441 करोड़ से ज्यादा का iPhone एक्सपोर्ट: चीन से अब भाग रहीं टेक कंपनियाँ

भारत से एप्पल उत्पादों के निर्यात में जबर्दस्त वृद्धि दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान अप्रैल से दिसंबर के बीच 2.5 अरब डॉलर (करीब 20441 करोड़ रुपए) से ज्यादा का आईफोन निर्यात किया गया है। यह बीते वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में आईफोन के निर्यात में वृद्धि ऐसे समय हुई है, जब भूराजनैतिक उठापटक और अमेरिका-चीन संबंध में तनाव के बीच एप्पल समेत कई टेक कम्पनियाँ चीन से शिफ्ट हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप (Foxconn Technology Group) और विस्ट्रॉन कॉर्प (Wistron Corp) ने मार्च 2023 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में विदेशों में 1-1 अरब डॉलर से ज्यादा के फोन व उसके उत्पादों का निर्यात किया है। वहीं एप्पल के लिए उत्पादन करने वाला एक और कंपनी पेगाट्रॉन कॉर्प (Pegatron Corp.) जनवरी के अंत तक लगभग 500 मिलियन डॉलर के गैजेट्स को विदेशों में भेजने के लिए तेजी से काम कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone निर्माता कंपनी एप्पल चीन के बाहर अपने परिचालन में तेजी ला रही है। हाल ही में चीन के झेंग्झाउ (Zhengzhou) प्रांत में स्थित फॉक्सकॉन की मुख्य फैक्टरी में अराजकता के हालात पैदा हो गए हैं। इस अराजकता की वजह से कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इसी वजह से कंपनी ने अपने उत्पादन पूर्वानुमान को भी कम कर दिया है। उत्पादन में हो रहे व्यवधान की वजह से Apple ने इस सप्ताह प्रीमियम iPhone 14 मॉडल के शिपमेंट के लिए भी अपने पूर्वानुमान को कम कर दिया है।

दुनिया की सबसे मूल्यवान कम्पनियों में से एक एप्पल ने वर्ष 2022 से ही भारत में अपने लेटेस्ट आईफोन मॉडल्स की असेंबलिंग शुरू कर दी थी। ऐसे में निर्यात का इस कदर बढ़ना भारत के लिए एक शुभ संकेत है। साथ ही यह इस बात का भी संकेत है कि हम बहुत जल्द आईफोन उत्पादन के मामले में चीन से आगे निकल जाएँगे।

2024 से पहले राम मंदिर पर हमला आतंकी संगठनों का मेन टारगेट, नेपाल से घुसने की आशंका: रिपोर्ट में दावा- हो सकता है आत्मघाती हमला

अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की आतंकी संगठन योजना बना रहे हैं। 2024 से पहले राम मंदिर को निशाना बनाना उनका मेन टारगेट है। ​बताया जा रहा है कि इस साजिश पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद मिल कर काम कर रहे हैं। आतंकी नेपाल के रास्ते भारत में घुस सकते हैं। आत्मघाती हमला होने की आशंका भी जताई गई है।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने रामजन्मभूमि को अपने सबसे बड़े टारगेट के तौर पर रखा हुआ है। इस हमले के जरिए वे भारत में सांप्रदायिक हिंसा फैलाना चाहते हैं। अस्थिरता पैदा कर दुनिया भर में भारत की छवि को खराब करने की प्लानिंग की जा रही है। बताया गया है कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI खुद इस प्लानिंग की मॉनीटरिंग कर रहा है। साजिश को अंजाम देने के लिए नेपाल के रास्ते गोला-बारूद और आतंकी भेजे जा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से भारत में कोई बड़ी आतंकी घटना को अंजाम नहीं दे पाने के कारण पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी पर भारी दबाव है। भारतीय सुरक्षा बलों ने न सिर्फ सीमा पार आतंकवाद बल्कि ड्रग्स और नकली नोट की तस्करी पर भी काफी लगाम लगाई है। ऐसे में उसके सामने अस्तित्व का संकट है। खुद को बचाए रखने के लिए ISI भारत की किसी प्रतिष्ठित जगह को निशाना बनाना चाहती है। यही कारण है कि राम मंदिर पर हमला उसके टारगेट में सबसे ऊपर है।

गौरतलब है कि पहले भी अयोध्या में आतंकी हमले हो चुके हैं। 5 जुलाई 2005 को भक्त बनकर आए आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान आतंकियों ने डेढ़ घंटे तक सुरक्षा बलों पर गोलियाँ चलाई। अंत में एक लम्बी मुठभेड़ के बाद सभी 5 आतंकी मार गिराए गए थे। नवम्बर 2019 में अयोध्या में हमले के लिए 7 पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ का अलर्ट जारी हुआ था। इस दौरान भी आतंकियों ने नेपाल के रास्ते का प्रयोग किया था। अगस्त 2021 में जम्मू पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये आतंकी भी अयोध्या में हमले की साजिश रच रहे थे।

‘ये क्या बकवास है, ‘वॉर’ की रीमेक बना दी’: लोगों को पसंद नहीं आया ‘पठान’ का ट्रेलर, कहा – इसे धूल चटाने आ रहा है ‘अखण्डा’

दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की भगवा बिकिनी और ‘बेशरम रंग’ गाने को लेकर विवादों में रही शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ का ट्रेलर मंगलवार (10 जनवरी, 2023) सुबह रिलीज किया गया। ट्रेलर में शाहरुख खान को एक सोल्जर के रूप में दिखाया गया है। वह देश को आतंकी संगठन के हमले से बचाएगा। इस लड़ाई में दीपिका पादुकोण को उसके साथ दिखाया गया है।

जॉन अब्राहम विलेन के रोल में नजर आएँगे, जो भारत पर हमला करने की योजना बनाते हुए दिखाई देंगे। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोगों को ‘पठान’ का ट्रेलर पसंद आया है। वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे बकवास बताते हुए, इसकी तुलना सलमान खान की ‘टाइगर जिंदा है’ और ऋतिक रोशन की ‘वॉर’ फिल्म से की है।

एक यूजर ने इसे कुछ ब्लॉकबस्टर हॉलीवुड फिल्मों का मिक्स्चर बताया है।

‘पठान’ का ट्रेलर देखने के बाद एक अन्य यूजर ने लिखा कि यह फिल्म उसे टाइगर श्रॉफ और ऋतिक रोशन की फिल्म ‘वॉर’ की रीमेक लग रही है।

विक्की लिखते हैं कि ‘पठान’ को धूल चटाने के लिए ‘अखंडा’ आ रहा है।

निबली नाम के यूजर ने ट्रेलर का मजाक उड़ाते हुए कहा, “सलमान के लिए देखा, वही ट्रेलर में नहीं है।”

मालूम हो कि ‘पठान’ फिल्म से पहले 20 जनवरी, 2023 को सिनेमाघरों में साउथ एक्टर नंदमुरी बालकृष्ण की फिल्म ‘अखंडा’ दस्तक देगी। हाल ही में इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था, जिसे हिंदी बेल्ट के दर्शकों ने खासा पसंद किया। दरअसल, तेलुगु भाषा में ‘अखंडा’ 2021 में रिलीज हो चुकी है। एक साल बाद इस फिल्म को हिंदी वर्जन में फिर से सिनेमाघरों में दिखाया जाएगा। फिल्म में तेलुगु एक्टर नंदमुरी बालकृष्ण डबल रोल में नजर आएँगे। इसमें एक किरदार अखंडा का है, दूसरा मुरली कृष्ण का।

‘अखंडा’ को तेलुगु दर्शकों ने अपना भरपूर प्यार दिया था। इस फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर 120 करोड़ से अधिक की कमाई की थी। ऐसे में यह देखना खास होगा कि यह फिल्म हिंदी में कमाई कितना रिकॉर्ड बनाती है।

बता दें कि शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम की फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यशराज फिल्म्स के बैनर के तले बनी इस फिल्म को सिद्धार्थ आनंद ने डायरेक्ट किया है। यशराज फिल्म्स इससे पहले ‘एक था टाइगर’, ‘टाइगर जिंदा है’ और वॉर जैसी स्पाई थ्रिलर मूवी बना चुकी है। दिसंबर 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ के निर्माताओं को फिल्म में गाने सहित कई बदलाव करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद इस फिल्म में ‘रॉ’ शब्द को बदलकर ‘हमारे’ और ‘लंगड़े लूले’ की जगह ‘टूटे फूटे’, ‘PM’ की जगह ‘राष्ट्रपति या मंत्री’, ‘PMO’ शब्द को 13 जगह से हटाया गया है।

ईरान में 3 और हिजाब विरोधी प्रदर्शकारियों को सज़ा-ए-मौत, ‘अल्लाह के खिलाफ जंग’ का मुकदमा: इससे पहले फाँसी पर चढ़ने वाले ने कहा था – मत पढ़ना कुरान

ईरान की इस्लामवादी सरकार हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार कर रही है। सोमवार (9 जनवरी, 2023) को ईरानी सरकार ने कथित तौर पर तीन सुरक्षा बलों की हत्या में शामिल होने के कारण, ‘अल्लाह के विरुद्ध युद्ध’ (War Against God) छेड़ने के आरोप में 3 लोगों को मौत की सजा सुनाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अदालत ने सुरक्षा बलों की हत्या के आरोप में सालेह मीर-हाशमी, माजिद काज़ेमी और सईद यघौबी को ‘मोहरेबेह’ यानी “अल्लाह के खिलाफ युद्ध” का दोषी ठहराया है।

बताया जा रहा है कि दोषी ठहराए गए तीनों लोगों को अपनी सजा के खिलाफ सुनवाई का मौका दिया जाएगा। ईरान की इस्लामवादी सरकार अब तक हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल 17 लोगों को फाँसी की सज़ा सुना चुकी है। इसमें, 6 लोगों की दोबारा सुनवाई का मौका दिया गया है।

बता दें कि इससे पहले शनिवार (7 जनवरी, 2023) को भी ईरान में 2 लोगों को फाँसी पर लटका दिया था। इन दोनों युवकों पर आरोप था कि ये महसा अमिनी के साथ हुए अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान इनके कारण एक सुरक्षाकर्मी की जान चली गई। ऐसे मामलों में 3 अन्य लोगों को सजा-ए-मौत दी गई है जबकि 11 को जेल की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि इससे पहले 12 दिसंबर 2022 को हिजाब विरोधी प्रदर्शन के दौरान 23 साल के एक युवक को फाँसी पर लटकाया गया था। युवक का नाम माजीदरेगा रेहनवर्द था। उसे शहर में सरेआम फाँसी दी गई थी। अंतिम वीडियो में रेहन ने कहा था कि उसकी मौत का मातम नहीं मनाया जाना चाहिए। उसकी मौत के बाद कोई कुरान न पढ़े। वीडियो को ईरानी ह्यूमन राइट एनजीओ के डायरेक्टर महमूद अमीरी ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया था। वीडियो में रेहनवर्द की आँखों पर पट्टी बँधी थी। दो नकाबपोश गार्डों ने उसे घेर रखा था।

उल्लेखनीय है कि ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन 16 सितंबर को 22 साल की एक लड़की महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए थे। पुलिस ने महसा को हिजाब नहीं पहनने के लिए गिरफ्तार किया था। कस्टडी में उसकी जान चली गई थी। जब ईरान में इस घटना का विरोध शुरू हुआ तो लोगों में डर पैदा करने के लिए नौजवानों को सरेआम फाँसी दी जाने लगी। सबसे पहले मोहसिन शेखरी नाम के प्रदर्शनकारी को सूली पर चढ़ाया गया था। उन्हें रेहनवर्द से भी पहले 8 दिसंबर 2022 को फाँसी दी गई थी।

शिव मंदिर तोड़ा, होली मनाना मुश्किल, बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं, स्कूलों में इस्लामी प्रेयर: हल्द्वानी के इन हिन्दुओं की पीड़ा क्यों नहीं दिखाता मीडिया

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा के मामले में मीडिया के वामपंथी वर्ग ने महज एक ही पक्ष को पीड़ित दिखा कर रिपोर्टिंग की। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी, 2023 को होनी है, जिससे पहले सोच-समझ कर ये नैरेटिव गढ़ा गया कि इस मामले में राजनीतिक सोच काम कर रही है, जिसके निशाने पर मुस्लिम समाज के लोग हैं। लेकिन, जब हमने ग्राउंड जीरो पर जा कर वनभूलपुरा में बचे-खुचे हिन्दुओं के हालात जाने तब सच्चाई कुछ और ही निकली। पेश है उस बातचीत के कुछ मुख्य अंश।

अन्य मीडिया संस्थानों की तरह हमने सड़को के किनारे जमा लोगों का पक्ष जानने की बजाए गलियों के अंदर जाने का फैसला किया। इसी तलाश में हम इंदिरा नगर बस्ती में गए जहाँ अभी भी कुछ हिन्दू बचे हुए हैं। हमने उनसे बात करनी चाही तो पहले वो तैयार नहीं हुए। हमें लगा कि इनके अंदर हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश को ले कर गुस्सा है लेकिन असलियत कुछ और निकली। वहाँ के हिन्दू अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को ले कर बेहद डरे हुए थे।

हमें लगा कि यह डर कुछ ही लोगों में होगा लेकिन हमने एक-एक कर के बुजुर्गों, युवा, बच्चों, महिलाओ और पुरुषों से बात की तो सामने एक भयावह तस्वीर निकल कर आई।

चरसी और शराबी घरों पर मारते हैं लात

लगभग 72 वर्षीय एक वृद्ध व्यक्ति ने हमें बताया कि उनके लिए इलाका मुसीबतों से भरा हुआ है। उनका कहना था कि उनके घरों पर चरस और शराब के नशे में लात मारी जाती है जिसका विरोध करने पर एक-दूसरे पर आरोप लगा कर मामले को शांत कर दिया जाता है। वृद्ध के अनुसार, लगभग 10 साल में वनभूलपुरा इलाके में हिन्दुओं के लिए बदतर हालात हुए क्योंकि मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी। वृद्ध के आसपास मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि उनके पानी के सबमर्सिबल (पंप) खोल लिए गए और चोर का पता भी नहीं चला।

वहीं के एक अन्य हिन्दू ने कहा कि एकतरफा आबादी कैसे बढ़ रही और लोग कहाँ से आ रहे, ये किसी को नहीं पता। ‘बजरंग दल’ के जिला संयोजक जोगिंदर सिंह जोगी ने भी वनभूलपुरा में चरस-गाँजा आदि मादक द्रव्यों की बिक्री की जानकारी दी।

‘हमें यहाँ से निकाले सरकार’

वनभूलपुरा के एक दिव्यांग हिन्दू ने हमें बताया कि वो चाहते हैं कि भारत सरकार उन्हें परिवार सहित वहाँ से निकाल ले क्योंकि वहाँ अब हिन्दुओं के रहने लायक हालात नहीं बचे हैं। दूसरे व्यक्ति ने कहा कि पहले भी वनभूलपुरा में हिन्दू मुस्लिम विवाद हो चुका है और ऐसे मौकों पर विरोध में भीड़ जमा हो जाती है। हिन्दू समाज के एक अन्य व्यक्ति का कहना था कि अगर उनके पास पैसे या रहने का कोई और ठिकाना होता तो वो कब के इलाका छोड़ कर चले गए होते।

सोशल मीडिया पर पोस्ट से घेर लिया था घर

एक हिन्दू महिला ने हमें बताया कि उनके बेटे द्वारा सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट शेयर हो गई थी, जिसके चलते उनके घर को घेर लिया गया था। महिला के मुताबिक, अगर पुलिस एक्टिव न हुई होती तो उस समय उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी हो जाती क्योंकि भीड़ थाने तक पहुँच गई थी।

कभी था हिन्दू बहुल, अब लगभग हिन्दू विहीन

वनभूलपुरा के इंदिरा नगर की बात करते हुए एक बुजुर्ग ने बताया कि 1960 के दशक में वनभूलपुरा हिन्दू बहुल हुआ करता था। उनके मुताबिक, कुछ समय बाद वहाँ आग लग गई थी। हमें दी गई जानकारी के अनुसार धीरे-धीरे हिन्दू इंदिरा नगर से कहीं और शिफ्ट होते चले गए और अब पूरा वनभूलपुरा मुस्लिम बाहुल्य हो चुका है। हमें बताया गया कि उस क्षेत्र से हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है।

हुई हैं ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण की घटनाएँ

इंदिरा नगर के एक युवक ने हमें बताया कि वनभूलपुरा क्षेत्र में लव जिहाद की घटनाएँ होती रहती हैं। एक लड़की का उदाहरण देते हुए हमें बताया गया कि रातों रात उसको ले कर हैदराबाद पहुँचा दिया गया था जो बाद में प्रेग्नेंट वापस आई थी। हमें बताया गया कि लड़की के परिजन भी अपनी बेटी की वापसी की उम्मीदों को खो चुके थे। वहीं एक अन्य दिव्यांग व्यक्ति ने हमें बताया कि उनका भाई कभी हिन्दू हुआ करता था जो अब इस्लाम कबूल कर चुका है।

इसके लिए उसने अपने भाई के साथियों को जिम्मेदार बताया और खुद को हमेशा के लिए अपने धर्मांतरित भाई से अलग हो जाने की जानकारी दी। बजरंग दल जिला संयोजक जोगिंदर सिंह जोगी ने भी वनभूलपुरा में लव जिहाद जैसी घटनाएँ होना स्वीकार किया।

इंदिरा नगर के हिन्दुओ ने हमें बताया कि पहले की सरकारों में वो होली भी ठीक से नहीं खेल पाते थे। उन्होंने बताया कि होलिका दहन से पहले भारी पुलिस फ़ोर्स लगती थी। हालाँकि, इलाके के हिन्दुओं ने कहा कि भाजपा सरकार में उनकी सुनवाई पुलिस में होती है और किसी घटना पर कार्रवाई भी की जाती है।

शिव मंदिर को तोड़ कर बना लिया गया घर

लगभग 65 वर्षीय एक बुजुर्ग ने हमें बताया कि कभी सत्यनारायण तिवारी नाम के व्यक्ति का वनभूलपुरा क्षेत्र में घर हुआ करता था। घर के बगल उन्होने मंदिर भी बनवा लिया था। कुछ दिनों बाद वो घर छोड़ कर चले गए और उनके घर के साथ मंदिर को भी तोड़ कर मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर लिया और अब वो वहाँ रह रहे हैं।

धरने में शामिल नहीं हुए तो दिखाई नाराजगी

वनभूलपुरा के इंदिरा नगर के हिन्दुओं ने हमें बताया कि उन्हें भी धरने में शामिल होने के लिए कहा गया था, लेकिन वो नहीं गए। उनका कहना था कि इस बात से मुस्लिम नेता काफी नाराज हुए थे और उन्हें उल्टा-सीधा सुनाया गया। एक महिला ने हमें बताया कि उन्हें दुआ पढ़ने के लिए बुलाया गया जिस पर उन्होंने बुलाने वालों को भगवान की प्रार्थना करने के लिए कहा। इस बात से धरने के आयोजक नाराज हो गए और लौट गए।

स्कूल में हिन्दू बच्चो को पढ़ाई जाती है उर्दू और इस्लामी प्रार्थना

वनभूलपुरा के 2 नाबालिग हिन्दू बच्चों ने हमें बताया कि स्कूल में उन्हें उर्दू पढ़ाई जाती थी। जब हमने उनसे स्कूल में पढ़ाई जाने वाली प्रार्थना सुनाने को कहा तो उन्होंने हमें इस्लामी प्रार्थना सुनाई। हमें स्कूल का नाम एस एन पब्लिक स्कूल बताया गया। इस बीच बच्चों के अभिभावकों ने हमें बताया कि जब उन्हें अपने बेटों को स्कूल में उर्दू और इस्लामी प्रार्थना पढ़ाने की जानकारी हुई थी तो उन्होंने वहाँ से नाम कटवा कर दूसरे स्कूल में लिखवा दिया था।

वनभूलपुरा की कुछ हिन्दू महिलाओं ने हमें बताया कि जब वो कहीं आती-जाती है तो उन्हें सड़क पर रोका जाता है। उनके मुताबिक हिन्दू बहन बेटियों के साथ अभद्रता की जाती है और विरोध पर उनके घरों में माँस तक फेंक दिया जाता है। बजरंग दल जिला संयोजक ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में कहा था कि वनभूलपुरा में बचे-खुचे हिन्दुओं की बहन बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं।

अपनी सुरक्षा की माँग के साथ हमसे बात करने वाले हिन्दुओं ने अपना नाम प्रकाशित न करने की अपील की।

खेल रहे कुत्तों के बच्चों पर सलमान ने चढ़ा दी कार, पीछे भागती रही माँ: 2 की मौत और 1 की टूट गई टाँग, CCTV वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कर रही तलाश

भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में एक कार चालक ने सड़क पर खेल रहे कुत्ते के बच्चों को कुचल दिया। इस घटना में कुत्ते को दो बच्चों की मौत हो गई जबकि एक की टाँग टूट गई। घटना के बारे में जानकारी मिलते ही पशु प्रेमियों ने थाने पहुँच कर एफआईआर (FIR) दर्ज कराई। पुलिस को घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्राप्त हो चुका है इसी आधार पर कार चालक की तलाश की जा रही है। उसका नाम सलमान बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीना श्रीवास्तव नाम की महिला को किसी ने कुत्तों के बच्चों पर कार चढ़ाने की खबर दी। हर्षवर्धन नगर की रहने वाली बीना पशु प्रेमी हैं। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अशोका गार्डन पुलिस थाने में शिकायत दी कि रविवार (8 जनवरी, 2023) की शाम को उन्हें कुत्तों के बच्चों के कुचले जाने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पास के ही ग्रीन पार्क सिटी में रहने वाले एक शख्स ने सड़क पर खेल रहे कुत्तों के बच्चों पर अपनी कार चढ़ा दी है। जब वह मौके पर पहुँची तो उन्होंने देखा कि बुरी तरह से कुचले हुए 2 बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि एक बच्चे का पैर टूट चुका है।

जानकारी के मुताबिक, बीना ने ही आसपास के लोगों से सीसीटीवी फुटेज जमा किए और थाने पहुँच गईं। बीना की शिकायत पर पुलिस ने पशु क्रूरता का मामला दर्ज कर लिया। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपित जानबूझकर पिल्लों पर कार चढ़ाता नजर आ रहा है। फुटेज में घटना के बाद बच्चों की माँ कार के पीछे भागती भी देखी जा सकती है। बीना ने बताया कि ऐसे ही घटनाओं के कारण कुत्ते अक्सर बाइक और कार के पीछे भागते हैं।

श्रीवास्तव के मुताबिक लोगों ने उन्हें यह भी जानकारी दी है कि आरोपित कार चालक पहले भी इस तरह की क्रूरता कर चुका है। पुलिस फिलहाल आरोपित की तलाश कर रही है। आपको बता दें कि भोपाल में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। एक महीने पहले भी दिसंबर के महीने में चिनार पार्क के पास कुत्ते को जहर देने के बाद उसके तीन बच्चों को जलाने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाँगीराबाद इलाके में जेल रोड के पास पशु चिकित्सालय में चाहरदीवारी के पास कुत्ते के दो बच्चों के अधजले शव मिले थे। इस मामले में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला।

दिल्ली में SC-ST और OBC छात्रों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ: लंबित हैं 91% मामले, आवेदनों की संख्या में भी आ रही कमी

दिल्ली में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 में यहाँ एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लाभ के लिए बनाई गई छह योजनाओं के लिए कुल 13,797 आवेदन किए गए। आश्चर्यजनक है कि इनमें से कुल 12,573 आवेदन लंबित है। मतलब कुल आवेदन में से 91.12 प्रतिशत आवेदनों पर कोई काम नहीं हुआ।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह SC/ST/OBC वर्ग के कल्याण विभाग ने छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता योजनाओं से संबंधित मुद्दों पर एक बैठक की। सभी छह योजनाओं के तहत प्राप्त 13,797 आवेदनों में से 11,176 स्कूल स्तर पर और 1,397 अंचल स्तर पर लंबित हैं।

इन 6 योजनाओं में मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना, ओबीसी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, अनुसूचित जाति के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, ओबीसी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना और SC/ST/OBC छात्रों के लिए ट्यूशन फीस को वापस लौटाने की योजनाएँ शामिल हैं।

वहीं शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अब तक प्राप्त आवेदनों की संख्या में कमी पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। हालाँकि बड़ा सवाल यह है की अब तक जितने आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनमें से अधिकांश आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। इस वजह से योजनाओं के लिए आवेदन करने के बावजूद छात्रों को लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के मंत्री राज कुमार आनंद ने अख़बार को बताया, “बैठक का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करने और उन्हें इन योजनाओं में अधिक आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना था।” आनंद ने कहा, “दिल्ली सरकार स्कूल की फीस नहीं लेती है और सरकारी स्कूल छात्रों को मुफ्त बैग और किताबें मुहैया कराते हैं, जिससे छात्रों को शायद लगता है कि उन्हें इन योजनाओं में आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।”

आनंद के अनुसार, जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों में स्कूलों और समाचार पत्रों में योजनाओं का विज्ञापन करना और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की मदद से इन योजनाओं को प्रचारित करने के लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है। मंत्री ने कहा, “हम एक पत्रिका प्रकाशित करने की भी योजना बना रहे हैं, जिसे हम सभी स्कूलों में प्रसारित करेंगे।”

पाकिस्तान में एक-एक रोटी के लिए तरस रहे लोग, आटे की सुरक्षा के लिए AK-47 से गोलीबारी कर रहे सुरक्षा गार्ड: लोग बोले – ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में तो…

पाकिस्तान (Pakistan) के आर्थिक हालात बद से बदतर हो गए हैं। खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के कई क्षेत्रों में गेहूँ की किल्लत (Wheat Crisis) होने से आटे की कीमतें आसमान छू रही हैं। लोग रोटी के लिए तरस रहे हैं। सब्सिडी वाले आटे के लिए मची भगदड़ में लोगों की जानें जा रही हैं। वे एक आटे बोरी पाने के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान में सुरक्षा गार्ड AK-47 लेकर ट्रक से लोगों को आटा बाँटने के लिए जाते हैं, ताकि वे आटे की बोरियों की रक्षा कर सकें। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

यहाँ सब्सिडी वाले आटे को बाँटने के दौरान अराजकता का माहौल देखा जाता है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं किस तरह लोग एक आटे की बोरी को पाने के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। एक व्यक्ति जिसके हाथों में आटे की बोरी है, उसे दो लोग छीन रहे हैं। इस दौरान वह जोर-जोर से चिल्ला रहा है, लेकिन बोरी को नहीं छोड़ रहा है। यहाँ आए दिन आटे के लिए झड़प की खबरें आम बात हो गई है।

दलीप पंचोली ने पाकिस्तान में आटे की बोरियों के ​लिए लड़ते हुए लोगों का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भले ही लोग आटे के लिए आपस में लड़ रहे हो, लेकिन लिबरल सेक्युलर इस्लामी गैंग और पिद्दी मीडिया का चहेता मुल्क पाकिस्तान ‘हंगर इंडेक्स’ में भारत से बेहतर स्थिति में तो है ही… और लड़ने के मनोरंजन की वजह से ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में भी।”

वहीं, दूसरे वीडियो में मिनी ट्रक और वैन में आटा बाँटने के दौरान सुरक्षा गार्ड हाथों में AK-47 लिए हुए हैं। आटे की बोरियाँ देखते ही ट्रक के चारों ओर लोग इकट्ठा हो गए हैं। इस दौरान आपस में लड़ रहे लोगों को शांत करने के लिए सुरक्षा गार्ड हवा में गोलीबारी कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कराची में आटा 140-160 रुपए किलो तक बिक रहा है। इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो आटा 1500 रुपए प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है, जबकि 20 किलो आटे की बोरी 2800 रुपए में बेची जा रही है। पंजाब प्रांत में मिल मालिकों ने आटे की कीमत 160 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी है। इसी तरह, खैबर पख्तूनख्वा में लोग रोटी के लिए तरस रहे हैं। यहाँ 20 किलो आटा 3100 रुपए में बेचा जा रहा है, क्योंकि सरकार स्टेबल की कीमत को नियंत्रित करने में विफल रही है।

बलूचिस्तान के खाद्य मंत्री जमारक अचकजई के मुताबिक, प्रांत में गेहूँ का स्टॉक पूरी तरह से समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान को तुरंत 400000 बोरी गेहूँ की जरूरत है, नहीं तो यह संकट और गहरा सकता है।

जमरक अचकजई ने आगे कहा कि उन्हें 2 लाख बैग की बजाए केवल 10000 बैग गेहूँ ही प्राप्त हुआ है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चौधरी परवेज इलाही से 6 लाख बैग देने के लिए आग्रह किया था। इलाही ने भी उन्हें गेहूँ उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन उसने अपना वादा पूरा नहीं किया।

पाकिस्ताान में संकट का कारण

गेहूँ के आयात अनुमानों का पता लगाने में सरकार की विफलता को इस संकट के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में चल रहे गेहूँ संकट के लिए संघीय और पंजाब सरकारों के बीच टकराव भी उतना ही जिम्मेदार है।

इसके अलावा पंजाब खाद्य विभाग ठीक से अनुमान लगाने और आयात किए जाने वाले गेहूँ की आवश्यकता का नोट बनाने में असमर्थ रहा। बताया जाता है कि बलूचिस्तान गेहूँ के लिए 85 प्रतिशत पंजाब और सिंध पर निर्भर है और दोनों प्रांतों ने इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

गौरतलब है कि बीते दिनों पाकिस्तान में आटे के लिए मची भगदड़ में 7 बच्चों के अब्बा की मौत हो गई थी। भगदड़ के बाद हुई मौत को लेकर भील समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर सरकार विरोधी प्रदर्शन किया। इस दौरान, कई राजनीतिक दल के नेता भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

बजरंग दल के नाबालिग कार्यकर्ता की हत्या, असम के करीमगंज में तनाव: धारदार हथियारों से हमला कर ले ले ली जान, आक्रोशित लोग बोले – दोषियों को गिरफ़्तार करो

असम के करीमगंज जिले में नाबालिग ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ता की हत्या के बाद से तनाव है। जिले के लोवैरपुआ इलाके में सोमवार (9 जनवरी, 2023) से धारा-144 लागू कर दी गई है। इसके बाद भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में एक शख़्स को गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, 16 साल का शम्भू कोइरी रविवार (8 जनवरी, 2023) को ‘बजरंग दल’ के एक ट्रेनिंग कैंप से लौट रहा था। उसी वक्त उस पर धारदार हथियारों से हमला कर उसकी जान ले ली गई।

शम्भू लोवैरपुआ का ही रहने वाला था। इस हत्या के बाद से करीमगंज के लोवैरपुआ में लोगों का गुस्सा भड़क उठा। गुस्साए लोगों ने थाने का घेराव किया। लोगों ने शम्भू के हत्यारों को गिरफ्तारी की माँग करते हुए प्रदर्शन किया। हत्या के एक दिन बाद यानी सोमवार (09 जनवरी, 2023) को लोवैरपुआ बाजार इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हत्या के संबंध में अमीनुल हक नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार शम्भू कोइरी रविवार शाम को बजरंग दल के प्रशिक्षण शिविर से लौट रहे थे। इसी दौरान लोवैरपुआ इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसपर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। बुरी तरह जख्मी कोइरी को स्थानीय लोगों ने नजदीकी अस्पताल पहुँचाया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और अपराधियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर जिले के बाजारीछेरा पुलिस थाने का घेराव किया गया। लोगों का आक्रोश देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

धारा 144 लगाए जाने के बाद भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे लेकर एक आधिकारिक आदेश और जारी किया गया है। जिसके अनुसार करीमगंज जिले में किसी भी बैनर, पर्चे, पोस्टर के वितरण पर रोक लगा दी गई है। रोक अगले आदेश तक लागू रहेंगे। पुलिस ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

शेहला रशीद पर चलेगा मुकदमा, दिल्ली LG ने दी मंजूरी: भारतीय सेना पर लगाए थे झूठे आरोप, की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। शेहला पर भारतीय सेना के खिलाफ दो आपत्तिजनक ट्वीट करने का आरोप है।

दरअसल, शेहला रशीद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अगस्त 2019 में भारतीय सेना के खिलाफ दो ट्वीट किए थे। इस ट्वीट को लेकर सितंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने FIR दर्ज कराई थी। इस मामले में केस चलाने के लिए उप-राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

दिल्ली के उप-राज्यपाल कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि एलजी वीके सक्सेना ने भारतीय सेना के बारे में आपत्तिजनक ट्वीट करने के लिए मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। ये ट्वीट्स विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से किए गए थे।

गौरतलब है कि शेहला ने 18 अगस्त 2019 को ट्वीट कर सेना पर अत्याचार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने ट्वीट किया था, “आर्म्ड फोर्सेज रात के समय घरों में घुसती है और लड़कों को उठा लेती है। जानबूझकर राशन जमीन पर फेंक दिया जाता है, चावल में तेल मिला दिया जाता है।”

शेहला ने अपने अगले ट्वीट में भी भारतीय सेना पर ऐसे ही आरोप लगाए थे। शेहला ने ट्वीट किया था, “शोपियाँ में 4 लोगों को सेना के कैंप में बुलाया गया और पूछताछ के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। एक माइक को उनके करीब रखा गया जिससे पूरे इलाके के लोगों को उनकी चीखें सुनाई दें और वे दहशत में रहें। इसकी वजह से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।”

इन ट्वीट्स को लेकर गृह मंत्रालय ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सेना के खिलाफ झूठे आरोप लगाना एक गंभीर मुद्दा है। हालाँकि, आपराधिक कानून के तहत हर ट्वीट पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। लेकिन इस तरह के ट्वीट के मामले में शेहला के खिलाफ कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153A के तहत मुकदमा चलाने का मामला बनता है।