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‘नफरत की जमीन पर बन रहा राम मंदिर’: RJD के बिहार चीफ जगदानंद सिंह का विवादित बयान, कहा- अयोध्या में उन्मादियों के राम

बिहार की सत्ता में साझेदार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) ने अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। उन्होंने कहा कि नफरत की जमीन पर राम मंदिर बन रहा है और राम को भव्य महल में कैद नहीं किया जा सकता।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाले RJD विधायक सुधाकर सिंह (Sudhakar Singh) के पिता जगदानंद सिंह कहा, “हम ‘हे राम’ में विश्वास करने वाले लोग हैं, ‘जय श्री राम’ में नहीं।” इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

वीडियो में जगदानंद सिंह कह रहे हैं, “अब कण-कण से सिमट करके केवल पत्थरों की उस चहरदीवारी में राम चले गए। नफरत की जमीन पर राम के मंदिर का निर्माण हो रहा है। इंसानियत से बड़ा इस भारत में उन्मादियों के अब राम बचे हुए हैं। अब लोगों के, गरीबों के, झोपड़ी वालों के राम, तुलसी के, अयोध्या के राम, शबरी के जूठन खाने वाले राम अब भारत में नहीं हैं।”

भाजपा और RSS पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “अब केवल पत्थरों के बीच कैद राम रहेंगे, बाकी सब जगह के राम खत्म हो गए। मानी जाती थी कि भारत की भूमि राममय है, कृष्णमय है। अब ये सब खत्म हो गया। भारत का राम कण-कण में रहेंगे और RSS वालों के कारण वहाँ रहेंगे, जहाँ जा बैठे हैं।”

जगदानंद सिंह ने आगे कहा, “भारत राम का नहीं रहेगा और केवल एक मंदिर राम का रहेगा, पत्थरों के बीच में वे रहेंगे? अब वे लोगों के हृदय के बीच में नहीं रहेंगे? ना अयोध्या में राम कैद हुए और ना ना रावण को हराने के बाद लंका में रहे। राम का तो असली वास शबरी के झोपड़ी में हुआ और वे वहीं पर हैं। हम लोग ‘हे राम’ वाले हैं, ‘जय श्रीराम’ वाले नहीं।”

भाजपा ने इसे राजद की वोट बैंक की राजनीति बताया है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि PFI बैन के दौरान भी राजद ने ऐसा ही बयान दिया था। इसके पहले SIMI को बैन करने के दौरान भी लालू यादव ने उसका बचाव किया था। हिंदू आस्था पर चोट वोट बैंक की पॉलिटिक्स के कारण की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये कोई संयोग नहीं है, बल्कि वोट बैंक का प्रयोग है।

PFI बैन के समय जगदानंद सिंह ने कहा था, “RSS की तरह ही उनका भी संगठन (PFI) है। वे भी RSS की तरह अपने समुदाय की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन आप उन्हें देशद्रोही क्यों कहते हैं?… जब भी सुरक्षा बलों द्वारा पाकिस्तानी एजेंटों को गिरफ्तार किया जाता है तो वे सभी RSS से संबंधित पाए जाते हैं।”

राजद नेता का ये उस बयान उस वक्त आया है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा था कि 1 जनवरी 2024 से भक्त अयोध्या के राममंदिर में भगवान राम का दर्शन कर सकेंगे। बता दें कि साल 2024 में ही लोकसभा का चुनाव होने वाला है। वहीं, इस साल (2023 में) 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

फ्लाइट में महिला पर पेशाब करने वाले शख्स को अमेरिकी कंपनी ने नौकरी से निकाला, घटना के बाद बीवी-बच्चों का वास्ता देकर रोते हुए माँगी थी माफी, फिलहाल फरार

एयर इंडिया की उड़ान में अपनी महिला सहयात्री पर पेशाब (Air India Flight Peeing Case) करने वाले आरोपित शंकर मिश्रा (Shankar Mishra) को उसकी कंपनी वेल्स फ़ार्गो ने नौकरी से निकाल दिया है। अमेरिका की इस बहुराष्ट्रीय कंपनी में 34 वर्षीय मिश्रा भारत का उपाध्यक्ष था। घटना में उसका नाम सामने आने के बाद कंपनी ने यह निर्णय लिया है।

बता दें कि 26 नवंबर 2022 को न्यूयॉर्क से नई दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट के बिजनेस क्लास में मिश्रा ने 72 साल की महिला पर पेशाब कर दिया गया है। इसको लेकर बवाल मचा गया है। घटना को लेकर नागरिक उड्डयन निदेशालय (DGCA) ने एडवायजरी भी जारी की है।

अपने निर्णय से संबंधित बयान जारी करते हुए कंपनी ने कहा, “वेल्स फार्गो कर्मचारियों को पेशेवर और व्यक्तिगत व्यवहार के उच्चतम मानकों के अनुरूप रखता है। हम इन आरोपों को बेहद परेशान करने वाला पाए हैं। इस व्यक्ति को वेल्स फार्गो से निकाल दिया गया है। हम कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग कर रहे हैं।”

उधर घटना के बाद से ही मिश्रा फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मिश्रा मुंबई का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस ने अधिकारियों को मिश्रा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने के लिए लिखा है।

दिल्ली पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ IPC की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत), 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक इरादा), 509 (शब्द, हावभाव या कृत्य से महिला के अपमान का इरादा), 510 (शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक तौर पर दुराचार) के साथ-साथ विमानन नियमों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस घटना के DGCA ने टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही एयर इंडिया को ‘गैर-पेशेवर’ बताते हुए उसे लिखे पत्र में DGCA ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि एक अनियंत्रित यात्री को ऑनबोर्ड सँभालने से संबंधित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है।’

एयर इंडिया ने उस घटना की पुष्टि की है, जिसमें शंकर मिश्रा नशे की हालत में महिला यात्री पर पेशाब कर दिया। मिश्रा महिला की सीट के सामने खड़ा होकर अपनी पतलून की जिप खोली और अपने शिश्न को निकाल कर उस पर पेशाब करने लगा। इतना ही नहीं, पेशाब करने के बाद भी उसी अवस्था में महिला की सीट के पास खड़ा रहा। इसके बाद दूसरे यात्री ने उसे जाने के लिए कहा।

बुजुर्ग महिला ने इस घटना को लेकर टाटा समूह को पत्र भी लिखा है। उसने पत्र में कहा है कि पेशाब से भीगे उसके कपड़े को बदलने के लिए एयर इंडिया के चालक दल के सदस्यों ने उसे एक जोड़ी पजामा और चप्पल दी। इतना ही नहीं, चालक दल के सदस्यों ने मिश्रा को सामने लाकर उस महिला से बातचीत करने के लिए मजबूर भी किया। महिला का कहना है कि यह उसके लिए सदमे जैसी स्थिति थी।

पेशाब करने के बाद मिश्रा की जैसे ही कुछ होश आया, उसने अपने बगल में बैठे यात्री से कहा, ‘भाई लगता है कि में कुछ समस्या में फँस गया हूँ’। मिश्रा के सीट के बगल में बैठे अमेरिका में डॉक्टर सुगत भट्टाचार्य ने TOI को बताया कि खाना खाने के दौरान ही वह चार ग्लास सिंगल माल्ट ह्विस्की पी गया। भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि वह पियक्कड़ लग रहा था और वह इससे पहले भी उसने जरूर पी रखी होगी।

जिस महिला के ऊपर मिश्रा ने पेशाब किया था, वह उससे पीछे वाली सीट पर बैठी थी। होश में आने पर उसने चालक दल के सदस्यों से बात की और चालक दल के सदस्य उसे लेकर बुजुर्ग महिला के पास गए। मिश्रा महिला से माफी माँगने लगा। इस दौरान वह अपनी बीवी-बच्चों का वास्ता देकर रोने भी लगा। वो नहीं चाहता था कि उसकी हरकत के बारे में सबको पता चले।

उधर, शंकर मिश्रा के वकील ईशानी शर्मा और अक्षत बाजपेयी ने 6 जनवरी को एक बयान जारी कर कहा कि उनके मुवक्किल ने 28 नवंबर को महिला यात्री के कपड़े और बैग साफ करवाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला ने मिश्रा के इस हरकत की निंदा की थी, लेकिन उसने साफ तौर पर कहा था कि वह शिकायत नहीं करेगी।

वकीलों ने यह दावा किया कि महिला यात्री ने 20 दिसंबर 2022 को एयरलाइन से मुआवजा के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद शंकर मिश्रा ने महिला को 15,000 रुपए भेजे थे। वह आरोपी शंकर मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती थीं। हालाँकि, महिला की बेटी ने अगले दिन उस पैसे को वापस कर दिया।

वहीं, शंकर मिश्रा के वकील पिता श्याम नवल मिश्रा उसके बचाव में उतर आए हैं। श्याम का कहना है कि उनके बेटे को नहीं पता कि फ्लाइट में क्या हुआ था। वह पिछले 72 घंटों से सोया नहीं था। इसलिए थोड़ी सी शराब पीकर सो गया था। इस घटना जानकारी चालक दल के सदस्यों ने उसे जगाकर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका बेटा कहाँ है।

2 अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में ओवैसी का नाम रजिस्टर: तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने EC से की शिकायत, कार्रवाई की माँग

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असद्दुदीन ओवैसी तेलंगाना की दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हैं। इस बारे में, कॉन्ग्रेस नेता जी. निरंजन ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जी. निरंजन ने मुख्य चुनाव आयोग राजीव कुमार को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम तेलंगाना के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड है। आरोप में कहा गया है कि ओवैसी का नाम तेलंगाना के राजेंद्र नगर और खैराताबाद की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में है।

इस मामले में, जी निरंजन ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि एक सांसद का मतदाता सूची स्थानों पर नाम होना और उसे खामोशी से देखते रहना ठीक नहीं है। इसलिए तेलंगाना कॉन्ग्रेस कमेटी के द्वारा चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया है।

हालाँकि, इस आरोप को लेकर अब तक न तो असदुद्दीन ओवैसी की ओर से कोई बयान आया है और न ही जी निरजंन के पत्र को लेकर चुनाव आयोग ने किसी प्रकार की टिप्पणी की है।

‘प्लेन से उतरते ही करवाएँ FIR, सारी सूचना हमको दें’: फ्लाइट में महिला सहयात्रियों पर पेशाब की घटनाओं पर DGCA सख्त, एडवाइजरी जारी की

हाल ही में एयर इंडिया की फ्लाइट में एक यात्री द्वारा अपनी महिला सहयात्री पर पेशाब करने के 2 मामले सामने आए। इसके बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने ऐसी हरकत करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एयरलाइंस कंपनियों को एडवाइजरी जारी की है।

एयरलाइंस के हेड ऑफ ऑपरेशंस को भेजे गए दिशा-निर्देशों में डीजीसीए ने कहा, “हाल के दिनों में फ्लाइट के दौरान विमान में कुछ यात्रियों के बुरे-व्यवहार और अनुचित आचरण की घटनाओं पर DGCA ने ध्यान दिया है। इसमें यह देखा गया है कि पोस्ट होल्डर्स, पायलट और केबिन क्रू मेंबर ने उचित कार्रवाई नहीं की है।”

डीजीसीए (DGCA) ने यह भी कहा है कि किसी भी फ्लाइट का पायलट उड़ान के दौरान क्रू मेंबर, यात्रियों और कार्गो की सुरक्षा के साथ-साथ फ्लाइट में अनुशासन के लिए जिम्मेदार होता है। खासतौर से एक अनियंत्रित यात्री को सँभालने के लिए एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाती है। इसके लिए एयरक्राफ्ट रूल 1937, डीजीसीए के नियमों, एयरलाइन के सर्कुलर और मैनुअल में भी बताया गया है।

डीजीसीए ने आगे कहा है कि किसी भी स्थिति को शांत करने की जिम्मेदारी क्रू मेंबर की होती है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि निरोधक उपकरणों का उपयोग तभी किया जाना चाहिए, जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो गए हों। फ्लाइट के कर्मचारियों को ऐसी सभी घटनाओं के बारे में डीजीसीए को सूचित करना चाहिए।

डीजीसीए ने यह भी कहा कि है विमान के उतरने पर एयरलाइन कर्मचारी हवाई अड्डे पर संबंधित सुरक्षा एजेंसी के पास FIR दर्ज कराएँगे। इसके बाद, अनियंत्रित यात्री को उन्हें सौंप दिया जाएगा।

इससे पहले, DGCA ने एयर इंडिया की फ्लाइट में हुई पेशाब वाली घटनाओं को लेकर एयर इंडिया के मैनेजमेंट और क्रू मेंबर को नोटिस जारी किया था। अपने नोटिस में DGCA ने पूछा था कि इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

दो घटनाओं के बाद DGCA को जारी करनी पड़ी एडवाइजरी

बीते दिनों एयर इंडिया की दो अलग-अलग फ्लाइट में यात्रियों द्वारा अन्य यात्री पर पेशाब करने का मामला सामने आया था। पहला मामला, 26 नवंबर 2022 का है। न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में एक शख्स ने शराब के नशे में धुत होकर 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पेशाब कर दी थी। घटना की शिकायत के बाद क्रू मेंबर्स ने खानापूर्ति करते हुए मामले को रफा-दफा कर दिया था।

वहीं, दूसरी घटना 6 दिसंबर 2022 की है। पेरिस से दिल्ली आने वाली फ्लाइट संख्या 142 में नशे में धुत होकर एक व्यक्ति ने महिला के कंबल में पेशाब कर दिया था। इस मामले में भी उस व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिलहाल, इन दोनों मामलों को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ( DGCA) काफी सख्त है।

जोशीमठ के प्रभावित परिवारों को किराए के लिए हर महीने ₹4000 देगी धामी सरकार, अस्थायी घर बनाने का आदेश: जमीन धँसने से मंदिर गिरा, सारे निर्माण कार्य बंद

‘हिमालय का द्वार’ (Gateway of Himalaya) कहलाने वाला उत्तराखंड का जोशीमठ दरक रहा है। हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ बद्रीनाथ धाम से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर स्थित इस शहर में जमीन फट रही है और पानी की धार निकल रही है। लोगों के दिवारों में दरार आ गए हैं। लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। हालाँकि, इनके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

इसको देखते हुए राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार (Pushkar Singh Dhami Government) ने कई फैसले लिए हैं। सरकार ने खतरा वाले क्षेत्र के लोगों के किराए के मकानों में शिफ्ट करने के लिए कहा। इसका किराया सरकार देगी। पुष्कर सरकार ने कहा कि ऐसे हर परिवार को अगले 6 महीने तक सरकार 4,000 रुपए महीना देगी। यह सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से दी जाएगी।

जोशीमठ में भू-धंसाव से प्रभावित भवन, होटल एवं अन्य संरचनाओं का मूल्यांकन एवं तकनीकी जाँच के लिए अधिकारियों और कार्मिकों की 9 टीमें गठित की है, जो प्रत्येक वार्ड में घर-घर जाकर सर्वे कर रही है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को सरकार राहत सामग्री भी पहुँचा रही है। अब तक लगभग 80 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। वहीं, वॉर्ड 16 का एक मंदिर ध्वस्त हो गया।

सीएम धामी ने कहा कि प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि जान-माल की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। विभिन्न संस्थानों की मदद ली जा रही है और अध्ययन किया जा रहा है कि पानी का रिसाव किन वजहों से और कहाँ से हो रहा है। उन्होंने प्रभावित लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में अस्थायी आवास स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

धामी सरकार ने NTPC और HCC को अस्थायी भवन निर्माण के लिए कहा है। चमोली जिला के कलेक्टर ने ट्वीट कर कहा, “जोशीमठ में भू-धंसाव की समस्या के दृष्टिगत प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने हेतु जिला प्रशासन ने NTPC और HCC कंपनियों को अग्रिम रुप से 2-2 हजार प्री-फेब्रिकेटेड भवन तैयार कराने के आदेश भी जारी किए हैं।”

वहाँ के वर्तमान हालात को देखते हुए NTPC पावर प्रोजेक्ट के सुरंग का कार्य रोक दिया गया है। इसके अलावा, NTPC के तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना के सहित तमाम निर्माण कार्यों को रोक दिया गया है। BRO के अन्तर्गत निर्मित हेलंग बाईपास निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया है। इसके साथ ही जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन भी रोक दिया गया है।

बता दें कि जोशीमठ का इलाका बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। यह सिस्मिक जोन 5 के अंतर्गत आता है। इतना ही नहीं, जोशीमठ मोरेन पर बसा है। मोरेन वह जगह होती है, जहाँ ग्लेशियर होता है और उसके ऊपर जमी मिट्टी आदि जमकर पत्थर बन जाता है। ग्लेशियर जब सरकता है तो भूमि धँसती है। यहाँ की वर्तमान स्थिति को लेकर बहुत पहले से आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों ने समय-समय पर इस क्षेत्र का अध्ययन किया और यहाँ की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार को आगाह भी किया।

जोशीमठ सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक एवं रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहाँ से भारत-तिब्बत सीमा महज 100 किलोमीटर दूर है। इसके साथ ही बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली, फूलों की घाटी जैसे धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन वाले स्थानों पर जाने के लिए लोगों को जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है।

जोशीमठ को लेकर जाहिर की गई चिंता

जून 2022 में गढ़वाल विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद कहा था कि अगर शहरीकरण, चारधाम ऑल वेदर रोड और जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों को विशेषज्ञता के साथ न किया गया तो आने वाले समय में जोशीमठ धँस जाएगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि रैणी आपदा के बाद यहाँ पहले से काफी भूगर्भीय हलचल है। अगर चारधाम यात्रा मार्ग का निर्माण कार्य तेजी से चला तो यह खतरनाक होगा।

फरवरी 2021 में तपोवन जल विद्युत परियोजना में बाढ़ से काफी नुकसान हुआ था। सुरंग में मलबा घुस गया था। अब यह सुरंग बंद है। प्रोजेक्ट की 16 किलोमीटर लंबी सुरंग जोशीमठ के नीचे से गुजर रही है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि संभवत: सुरंग में गैस बन रही है, जो ऊपर की तरफ दबाव बना रही है। इसी कारण जमीन धँस रही है। यह भी कहा जा रहा है कि सुरंग में संभवत: पानी भर गया है और रास्ता नहीं मिलने से ये ऊपर आ रहा है।

पहले से ही वैज्ञानिक देते रहे हैं चेतावनी

साल 2006 में वरिष्ठ भूस्खलन वैज्ञानिक डॉक्टर स्वप्नमिता चौधरी ने जोशीमठ का अध्ययन किया था। चौधरी का कहना है कि पिछले दो दशकों में जोशीमठ का अनियंत्रित विकास हुआ है। बारिश और घरों से निकलने वाला पानी नदियों तक नहीं पहुँच पाता है और जमीन के भीतर समा रहा है। इस कारण भू-धंसाव की घटनाएँ हो रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी बताते हैं कि साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा, साल 2021 की रैणी आपदा, बदरीनाथ क्षेत्र के पांडुकेश्वर में बादल फटने की घटनाएँ भी भू-धंसाव के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भू-धँसाव के लिए बेतरतीब निर्माण, पानी का रिसाव, मिट्टी का कटाव और मानव निर्मित जल धाराओं के प्रवाह में रुकावट को प्रमुख कारण बताया गया है। 

दरअसल, पहाड़ों के सदियों पुराने मलबे पर बसा होने के कारण जोशीमठ का क्षेत्र शुरू से ही दरक रहा है। साल 1976 में पहली बार गढ़वाल के आयुक्त रहे एससी मिश्रा की अध्यक्षता में एक 18 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि जोशीमठ धीरे-धीरे धँस रहा है। 

भू-धँसाव को रोकने के लिए कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में निर्माण पर प्रतिबंध लगाने और भू-धंसाव वाले क्षेत्रों में पौधे लगाने की सलाह दी थी। इसके साथ ही ढलानों सहित के खनन पर रोक लगाने के लिए कहा गया है। यह कहा गया था कि खुदाई या विस्फोट करके किसी बोल्डर को ना हटाया जाए। नदियों के किनारे पड़े चट्टानों को सहारा दिया जाए, ताकि नदियों के धारा अवरुद्ध ना हो।

‘पूरे इलाके में इकट्ठा हो चुके हैं हथियार…’ : हल्द्वानी के हिंदू ने बताए मुस्लिम अतिक्रमणकारियों के इरादे, कहा- सब लाशों पर रोटी सेंकने वाले

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर हजारों लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसमें से कई अवैध घुसपैठिए भी बताए जाते हैं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बस्ती को सात दिन के अंदर हटाने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हल्द्वानी में जो कुछ भी हो रहा है ऑपइंडिया वह सब आप तक ग्राउंड जीरो से पहुँचाने में जुटा हुआ है।

इसी कड़ी में, ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान, हमने स्थानीय लोगों से बातचीत की। इस बातचीत में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं। हमने एक व्यक्ति से पूछा कि क्या आपको रेलवे लाइन वाली घटना का पता है, वहाँ से लोग हटाए जा रहे हैं? इस पर उस व्यक्ति ने कहा, “हाँ, मैं उधर ही रहता हूँ, रेलवे बाजार में।”

हमने उससे आगे पूछा, जो लोग वहाँ पर भीड़-भाड़ में दिखाई दे रहे थे और हंगामा कर रहे थे वे लोग लोकल थे या बाहरी? इस पर उसने कहा, “लोग यहाँ के भी हैं और बाहरी लोग भी आ जाते हैं। हालाँकि, मैं अपना अंदाजा बता रहा हूँ कि जब 10 तारीख से जब से ये काम शुरू होगा (अवैध बस्ती हटाने का काम) तो बिना कर्फ्यू के ये लोग काबू में नहीं आएँगे।”

हम जिस स्थानीय व्यक्ति से बात कर रहे थे वह बिना कुछ पूछे ही लगातार हल्द्वानी के हालात बताता जा रहा था, उसने आगे कहा, “कल मैं मुस्लिम भाई की एक दुकान पर बैठा था। दुकान में मैनें बच्चों से बात करते हुए कहा कि आपके बाप-दादाओं ने जमीन पर कब्जा किया और इतने सालों तक लगातार रहे। समझ लो किराए पर गुजारा कर लिया। लेकिन वहाँ बैठे लोगों ने कहा ऐसा है चाहे जान चली जाए लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे।”

उसने कहा, “मैंने उन लोगों से पूछा कि ऐसा करने से आपको मिलेगा क्या? मान लिया कि आपका ये जा रहा है लेकिन रोजी-रोटी तो बची हुई है। उससे आप सब कुछ खरीद सकते हैं। हालाँकि, प्रशासन सतर्क है। लेकिन, राजनेता जो भी हैं, मतीन सिद्दकी हो या कोई भी नेता, कार्यकर्ता या मुस्लिम सब लाशों पर रोटी सेंकने वाले हैं।”

हमारे किसी भी सवाल का इंतजार किए बिना उसने कहा, “सब एक से बढ़कर एक दमदार हैं, समा वाले हों या ये लोग हों सबके पास हथियार हैं। हमारे हिंदू के पास एक चाकू नहीं होगा। इन सब के यहाँ इतना हथियार निकलेगा जिसकी हद नहीं। लाइन नंबर 17 से लेकर पूरे इलाके में इतना हथियार इकट्ठा हो चुका है, जिसकी कोई हद नहीं।”

हमसे बात करते हुए वह थोड़ा रुका। हम उससे कुछ पूछने वाले थे। लेकिन, तभी वह फिर बोल पड़ा। उसने कहा, एक छोटा बच्चा भी बड़ा हो चुका है। इसलिए, अगर प्रशासन इसमें लापरवाही कर गया तो खतरा भी हो सकता है।”

हमने उससे आगे पूछा, आप यहाँ कब से हैं? उसने कहा, मैं यहाँ 80 के दशक से रह रहा हूँ। हमारा अगला सवाल था कि क्या पहले यहाँ इतने ही मुस्लिम थे। उसने कहा, “नहीं-नहीं, भाईसाहब ये मुसलमान तो टोटल बाहर के हैं। ये लोग रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर के हैं। मेरे सामने ये लोग मजदूरी करते थे। अब इन्होंने उजाला नगर से लेकर न जाने कहाँ-कहाँ 3-3 मकान बना डाले। इनकी पूरी फैमिली, पूरे रिश्तेदार यहाँ शिफ्ट हो गए।”

हमारी बातचीत सुन रहे एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इतने मुसलमान यहाँ पहले थोड़ी थे। पहले हिंदू ही ज्यादा थे। मेरी पैदाइश इंदिरा नगर की ही है।” हमने आगे पूछा, “इंदिरा नगर अवैध कॉलोनी है या नहीं” तब, जवाब मिला, “नहीं, ये सब वही अवैध बस्ती है।” हमने पूछा कि क्या इंदिरा नगर, इंदिरा गाँधी के नाम पर बसाया गया, तो उसने जवाब दिया, हाँ, हो सकता है, उन्हीं के नाम पर हो।”

‘या अल्लाह… काफिरों का कर दो सफाया’ : कनाडा के इमाम शेख यूनुस ने दिया भड़काऊ बयान, बोला- बच्चे गैर-मुस्लिमों को समझें अपना दुश्मन

कनाडा के इमाम शेख यूनुस कथराडा ने गैर-मुस्लिमों के लिए आग उगला है। इससे जुड़ा उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमाम यूनुस मुस्लिमों को गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़का रहा है। शेख यूनुस कह रहा है, “हमारे बच्चों को यह समझना चाहिए कि गैर-मुस्लिम अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए वे हमारे दुश्मन हैं।”

अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के ट्विटर हैंडल MEMRI से एक वीडियो पोस्ट किया गया। सबटाइटल में वीडियो में कही गई बातों का अंग्रेजी अनुवाद भी था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कनाडाई इमाम शेख यूनुस कनाडा के विक्टोरिया में मुस्लिमों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में खिताब कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गैर-मुस्लिमों को लेकर काफी भड़काने वाली बातें कहीं। उनके निशाने पर सबसे ज्यादा ईसाई थे। अपने खिताब में इमाम ने कहा कि अल्लाह की तौहीन करने वाले अल्लाह के दुश्मन हैं। अल्लाह ने कुरान में कहा है कि उन्हें किसी ने पैदा नहीं किया, न वो किसी के बच्चे हैं न उनकी कोई औलाद है। लेकिन ईसाई कहते हैं कि अल्लाह का एक बेटा है। क्या यह अल्लाह का अपमान नहीं है?

2 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में इमाम ने कहा, “गैर मुस्लिम, जिनमें ईसाई, यहूदी और दूसरे नास्तिक शामिल हैं वो अल्लाह के दुश्मन हैं। क्या आपको लगता है कि वे आपके दोस्त हैं? नहीं, अगर वे अल्लाह के दुश्मन हैं तो आपके दोस्त कैसे हो सकते हैं? मैं चाहता हूँ कि हमारे बच्चे इस बात को अच्छी तरह समझ लें। वे अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए आपके भी दुश्मन हैं। उनमें से कुछ लोग तो अल्लाह के अस्तित्व पर ही विश्वास नहीं करते। क्या आप ऐसे किसी शख्स को अपना दोस्त बनाना चाहते हैं?”

वीडियो के अंत में शेख यूनुस ने अरबी में दुआ पढ़ते हुए कहा, “या अल्लाह, इस्लाम और मुस्लिमों को ताकत दो, काफिरों और अनेक देवी देवताओं की पूजा करने वाले को अपमानित करो, इस्लाम के दुश्मनों और काफिरों का सफाया करो!”

इमाम शेख यूनुस के सोशल मीडिया अकाउंट्स इस तरह के नफरती वीडियो से भरे पड़े हैं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि कनाडा में रहने वाला शेख यूनुस लगातार जहरीले बयान देता रहता है। लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है जबकि कनाडा एक ईसाई बहुल देश है।

‘पार्टी छोड़ो वरना परिवार सहित मार देंगे’: UP से लेकर मुंबई में BJP नेताओं को लश्कर-ए-खालसा की धमकी, लिखा- RSS और सेना को भी निशाना बनाएँगे

भाजपा (BJP) नेता को लश्कर-ए-खालसा (LeK) नामक आतंकी संगठन द्वारा पार्टी छोड़ने के लिए कहा जा रहा है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें तथा उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई भाजपा नेताओं को ऐसी धमकी दी गई है।

यूपी के रामपुर से भाजपा सांसद घनश्याम लोधी को व्हाट्सएप नंबर पर गुरुवार (05 जनवरी 2023) को लश्कर-ए-खालसा के संदीप सिंह खालिस्तानी ने जान से मारने की धमकी दी। सांसद के मुताबिक, उनके नंबर पर भेजे गए मैसेज में कहा गया है कि ‘बीजेपी छोड़ दो, वरना तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मार दिया जाएगा।’

इतना ही नहीं, मैसेज में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं के साथ-साथ भारतीय सेना को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस सतर्क हो गई है और मैसेज करने वाले की पहचान कर रही है।

मुंबई भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख तजिंदर सिंह तिवाना को गुरुवार (5 जनवरी 2023) को यह धमकी मोबाइल के जरिए दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को ‘लश्कर-ए-खालसा’ का संदीप सिंह बताया और कहा कि वह संगठन का प्रवक्ता है। उसने तजिंदर सिंह को भाजपा नहीं छोड़ने पर उन्हें और उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी है।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी एक भाजपा कार्यकर्ता को जान से मारने की धमकी दी गई है। बुधवार (4 जनवरी 2023) को दोपहर करीब 11:30 बजे छजलैट निवासी वीर सिंह सैनी के ह्वाट्सएप पर एक मैसेज मिला। इसमें उन्हें भाजपा छोड़ने के लिए कहा गया है। सैनी भाजपा की इकाई किसान मोर्चा में पदाधिकारी हैं।

ऐसे नहीं करने पर वीर सिंह जान से मारने की धमकी दी गई है। मैसेज में लिखा है कि ‘जल्दी भाजपा छोड़ दो, वरना पूरे तुम्हें और तुम्हारे परिवार को बुरी मौत मारेंगे। भाजपा, आरएसएस और इंडियन आर्मी को निशाना बनाएँगे’। इसके बाद भारत के खिलाफ अभद्र नारेबाजी लिखने के साथ ही खालिस्तान जिंदाबाद लिखा गया है।

मैसेज मिलने के बाद उन्होंने थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506B (आपराधिक धमकी) सहित अन्य आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही जिस नंबर से मैसेज मिला है, उसे ट्रैस करने के लिए भेज दिया गया है।

कहा जा रहा है कि लश्कर-ए-खालिस्तान नाम के इस संगठन ने पिछले कुछ दिनों महाराष्ट्र, यूपी, पंजाब, हरियाणा आदि के कई भाजपा नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवारों की हत्या करने की धमकी दी गई है।

पंजाब भाजपा से जुड़े कई नेताओं को भी खालिस्तानियों द्वारा धमकी दी गई है। पंजाबी भाषा में लिखा गया है, ‘सुना है सीएम के घर से बम निकला है। अभी तो एक और बम रखा है मिलिट्री बाड़े के नजदीक।’ इस तरह की धमकी मिलने के बाद पंजाब के आर्मी बेस पर भी सुरक्षा इंतजाम को कड़ा कर दिया गया है।

इसी तरह 29 दिसंबर 2022 को पंजाब में जालंधर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष विवेक खन्ना और पार्षद शैली खन्ना के बेटे अभिलक्ष्य खन्ना को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी देने वाले ने खुद को लश्कर-ए-खालसा का प्रवक्ता बताया था।

उसने फोन और मैसेज करके भाजपा नेता और पार्षद के पुत्र अभिलक्ष्य खन्ना को कहा कि ‘भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हो जाओ और कॉन्ग्रेस पार्टी को ही वोट दो’। ऐसा नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मार देने की धमकी दी गई थी।

पाकिस्तान की कुख्यात ISI ने बनाया है संगठन

पिछले साल इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau) ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने एक नया आंतकी गुट बनाया है और उसका नाम लश्कर-ए-खालसा (Lashkar-e-Khalsa) रखा। IB की रिपोर्ट में बताया गया था कि लश्कर-ए-खलसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है और युवाओं को बरगलाकर भर्ती कर रहा है।

लश्कर-ए-खालसा भारत में अशांति पैदा करना चाहता है। इसके लिए युवाओं को लगातार भर्ती कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह संगठन आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए नई-नई फेसबुक आईडी के माध्यम से लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान खुफिया अधिकारी अमर खालिस्तानी ‘आजाद खालिस्तान’ नाम से कई फेसबुक पेज मैनेज कर रहा है।

अफगान आतंकी दे रहे हैं ट्रेनिंग

लश्कर-ए-खालसा नामक आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भारी संख्या में अफगान नागरिकों की भर्ती की है। यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठन में हाल ही में भर्ती किए गए लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

जो अफगान आतंकी ट्रेनिंग दे रहे हैं उन्हें रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) समेत सभी आधुनिक हथियार चलाने का अनुभव होता है। यह भी कहा जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा के स्थानीय गैंगस्टरों को इसमें शामिल करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए उन्हें ड्रग्स के जरिए कमाई का लालच दिया जा रहा है।

धँसती जमीन, दरकती दीवार…शंकराचार्य की तपोभूमि जोशीमठ का हुआ ये क्या हाल: 22 हजार लोगों की जान खतरे में, 1976 में मिल गई थी चेतावनी

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित शहर जोशीमठ इन दिनों काफी चर्चा में हैं। समुद्रतल से 6000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह धार्मिक शहर आज दरकते जमीन, भूस्खलन और घरों में हो रहे दरारों की वजह से चर्चा में है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह गौरवशाली शहर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। क्या शंकराचार्य की तपोभूमि रहा यह ऐतिहासिक शहर अपने समाप्त होने की बाट जोह रहा है? इस रिपोर्ट में हम ऐसे सभी सवालों का जवाब लेकर आए हैं।

जोशीमठ न सिर्फ अपने धार्मिक महत्व के लिए बल्कि प्राकृतिक सुन्दरता के लिए भी प्रसिद्ध है। पहले हम इस शहर के धार्मिक महत्व के बारे में बात करते हैं। जोशीमठ की भूमि आदि शंकराचार्य के तप से पवित्र है। मान्यता है कि शंकराचार्य को यहीं शहतूत के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। माना जाता है कि देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की, इसलिए पहले इसका नाम ज्योतिर्मठ पड़ा था। फिर लोग आम बोलचाल की भाषा में इसे जोशीमठ के नाम से पुकारने लगे। जोशीमठ नरसिंह मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। जोशीमठ कर्णप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर बद्रीनाथ से 30 किमी पहले और कर्णप्रयाग से 72 किमी की दूरी पर मौजूद है।

ज्योतिर्मठ की फोटो (क्रेडिट-अमृत विचार)

यह शहर चर्चा में क्यों आ गया 

जोशीमठ में लोग इन दिनों डर के साए में जी रहे हैं। करीबन 22 हजार लोगों की जान खतरे में। वजह है यहाँ हो रहा भूस्खलन और घरों में पड़ने वाले दरार। सोशल मीडिया पर ऐसे कई फोटोज देखे जा सकते हैं जहाँ साफ़ दिख रहा है कि कई घरों में दरार आ गई है। वहीं सड़क बीच में से फट गई है। इन घटनाओं को लेकर लोग काफी डर गए हैं और उन्हें अपना भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है। ऐसा नहीं है कि यहाँ भूस्खलन और जमीन धँसने की घटना पहली बार हुई है लेकिन 500 से ज्यादा घरों में दरार आने के बाद स्थिति चिंताजनक हो गई है। लोग इस कड़ाके की ठंड में अपना घर छोड़ कहीं और पनाह लेने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने भी लोगों के लिए अस्थायी आवासों का इंतजाम किया है।

जोशीमठ में दरकती जमीन की वजह से सडकों व् अन्य जगहों पर दरार (फोटो क्रेडिट-aajtak)

आखिर क्यों हो रही हैं इस तरह की घटनाएँ

ऐसा नहीं है कि जोशीमठ में इस तरह के खतरों के बारे में पहले आगाह नहीं किया गया था। वर्ष 1976 में गढ़वाल के तत्कालीन कमिश्नर एससी मिश्रा की अध्यक्षता में मिश्रा समिति ने जोशीमठ की स्तिथि को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी। उन्होंने उस समय यहाँ की भौगोलिक स्थिति के चलते इस तरह के खतरों के बारे में बताया था। रिपोर्ट में सलाह दी गई थी कि कि यहाँ अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएँ, पत्थरों को ब्लास्ट करके न हटाया जाए इत्यादि। इसके साथ आज जिस पक्के ड्रेनेज सिस्टम की माँग की जा रही है, उसकी भी सलाह मिश्रा समिति दे चुका था। इन हालातों के बाद तो अब यही समझ आता है कि सरकारों ने इसपर कभी ध्यान ही नहीं दिया।

हालाँकि सिर्फ एक कारण को ही आज जोशीमठ की स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई चीजें स्वभाविक भी होतीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर एसपी सती ने कहा कि जोशीमठ का पूरा इलाका मोरेन के ऊपर बसा है। मोरेन वो जगह होता है जो ग्लेशियर और ऊपर हजारों टन मिट्टी से मिलकर बना होता है। इस भौगोलिक घटना में कालांतर में मिट्टी पत्थर बन जाता है लेकिन नीचे का ग्लेशियर एक खास समय बाद पिघलने लगता है। क्योंकि जोशीमठ मोरेन पर स्थित है तो ग्लेशियर धीरे-धीरे पिघलेगा ही। हालाँकि उन्होंने कहा कि यहाँ होने वाले विकास कार्यों ने इन घटनाओं की रफ्तार और बढ़ा दी है।

वहीं कई वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं के लिए अलकनंदा और धौलीगंगा नदी को भी जिम्मेदार ठहराया है। इस थ्योरी में विश्वास रखने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि जोशीमठ पहले से ही हिमालय के बेहद कमजोर क्षेत्र में बसा है और ऐसे में अलकनंदा और धौलीगंगा का पानी यहाँ की मिट्टी को काट रहा है। दूसरी और छोटे-छोटे भूकंप भी यहाँ की स्थिति और भयावह कर रहे हैं। वहीं कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘तपोवन जलविद्युत परियोजना’ से भी काफी नुकसान हो रहा है। 2021 में आई बाढ़ से इस परियोजना को खासा नुकसान पहुँचा और जोशीमठ में जमीन के नीचे इसके 16 किलोमीटर सुरंग में भरा पानी अब ऊपर की ओर आ रहा है। इससे जमीन कमजोर हो रही है और इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं।

तो क्या समाप्त हो जाएगा जोशीमठ का अस्तित्व

ऐसा नहीं है कि जोशीमठ एकदम से समाप्त हो जाएगा। लेकिन इस बात में पूरी सच्चाई है कि यह पवित्र शहर खतरे के मुहाने पर खड़ा है। जोशीमठ की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि यह जगह अब लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सकता। लेकिन जैसा कि वैज्ञानिकों का मानना है कि भगौलिक स्थिति के अलावा यहाँ के विकास कार्यों की वजह से भी इस क्षेत्र की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोगों को अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ रहा है। जरूरत है सरकार, भूगर्व वैज्ञानिक और एक्सपर्ट इस क्षेत्र की समस्या को गंभीरता से लें, हो सकता है सबके सामूहिक प्रयास से कुछ सकारात्मक रिजल्ट मिले और यहाँ के निवासी राहत की साँस लें सकें।

केरल का बीड़ी मजदूर, अमेरिका में जज बना: पत्नी के आने से बदली सुरेंद्रन के पटेल की किस्मत, हाउसकीपिंग से लेकर किराने की दुकान पर कर चुके हैं काम

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक सुरेंद्रन के पटेल अमेरिका के टेक्सास प्रांत में जिला न्यायाधीश बन गए हैं। एक गरीब मजदूर परिवार में जन्मे सुरेंद्रन की सक्सेस स्टोरी किसी फिल्म की तरह लगती है। सुरेंद्रन ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और बीड़ी मजदूर बन गए थे। इसके बाद, किस्मत पलटी और वह अमेरिका चले गए।

द वीक की रिपोर्ट के अनुसार, सुरेंद्रन के पटेल का जन्म केरल के कासरगोड में एक दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था। सुरेंद्रन का बचपन बेहद गरीबी से गुजरा। वह अपनी बहन के साथ बीड़ी बनाने का काम करते थे। घर की हालत खराब होने के कारण उन्होंने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और फुल टाइम बीड़ी मजदूर बन गए।

हालाँकि, पढ़ाई में एक साल का ब्रेक होने के बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की। उनका एडमिशन इके नायनार मेमोरियल गवर्नमेंट कॉलेज में हुआ। चूँकि, वह अब भी बीड़ी बनाने का काम करते थे इसलिए कॉलेज में उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं हुई। इस कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन, इसके बाद उन्होंने कॉलेज के टीचर्स से परीक्षा में बैठने की अनुमति माँगी।

पटेल कहते हैं, “यदि मैं टीचर्स को बताता कि वह बीड़ी बनाने वाले मजदूर हैं। तो, टीचर्स के मन में उनके लिए सहानुभूति होती। लेकिन, मैंने इस बारे में बात न करते हुए टीचर्स से कहा कि यदि परीक्षा में मेरे अच्छे नंबर नहीं आए तो मैं पढ़ाई छोड़ दूँगा।” हालाँकि, जब रिजल्ट आया तो वह टॉपर थे। इसके बाद, टीचर्स ने उनका बहुत सपोर्ट किया। इस कारण उन्होंने ग्रेजुएशन में भी टॉप किया।

चूँकि, वह वकील बनने का सपना देख रहे थे। इसलिए, कालीकट गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी करना चाहते थे। लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें यहाँ भी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कॉलेज के पहले साल तो उन्हें कुछ दोस्तों से मदद मिल गई। लेकिन, इसके अगले साल उन्होंने एक होटल में हाउस-कीपिंग का काम करना शुरू कर दिया।

साल 1995 में कानून की डिग्री लेने के बाद उन्होंने केरल के होसडर्ग में प्रैक्टिस शुरू की और लगातार सफलता प्राप्त करते चले गए। इसके बाद, साल 2004 में उन्होंने सुधा नामक एक जूनियर वकील से शादी कर ली। बाद में, सुधा की नौकरी स्टाफ नर्स के रूप में लग गई और वह दिल्ली शिफ्ट हो गए। दिल्ली में ही वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। इसके बाद उनकी पत्नी सुधा की नौकरी अमेरिका के ह्यूस्टन में लग गई।

पत्नी की नौकरी ह्यूस्टन में लगने के कारण दोनों अमेरिका चले गए। जहाँ, सुधा अपनी नौकरी करतीं लेकिन सुरेंद्रन पटेल एक किराना दुकान में काम करते थे। इसके बाद, उन्होंने अमेरिका में भी बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की। जहाँ उन्हें सफलता मिलने लगी। तब उन्हें ऐसा लगा कि वह जज बन सकते हैं। चूँकि, उनकी पत्नी वहाँ नौकरी में थीं, इसलिए उन्होंने अमेरिका की नागरिकता के लिए प्रयास किया। सौभाग्य से साल 2017 में उन्हें नागरिकता मिल गई।

साल 2020 में उन्होंने जज बनने के लिए पहली बार प्रयास किया। हालाँकि, तब उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन, सुरेंद्रन पटेल ने हार नहीं मानी। साल 2022 में उन्होंने एक बार फिर दावेदारी पेश की। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें जज बनने का सपना छोड़ने के लिए कहा। लेकिन, वह नहीं माने। तमाम प्रयासों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जहाँ चुनाव में उन्होंने विपक्षी रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराते हुए जीत दर्ज की।

कुल मिलाकर देखें तो, एक गरीब मजदूर परिवार में जन्म लेने और समस्याओं से घिरे होने के बाद भी सुरेंद्रन ने हार नहीं मानी। वह लगातार कठिन परिश्रम करते हुए सफलता के नए आयाम स्थापित करते जा रहे थे। समय ने भी उनका साथ दिया और अब वह अमेरिकी राज्य टेक्सास के 240वें जिला न्यायाधीश बन गए।