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‘तुम्हें मुस्लिम बना कर अपनी बेगम बनाऊँगा’: अनस ने हिन्दू छात्रा को दी ‘सर तन से जुदा’ और एसिड अटैक की धमकी, जेल से छूटा तो कॉलेज में घुस किया प्रताड़ित

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिंदू युवती से जबरन निकाह करने और मुकदमा वापस लेने की धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोपित अनस ने छात्रा के कॉलेज में घुसकर सबसे सामने उसे बेइज्जत किया। विरोध करने पर उसने छात्रा को तेजाब से नहलाने और उसका सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर के थाना नौबस्ता की अपर पुलिस उपायुक्त ने जानकारी दी कि एक स्कूल में छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया था, जिसमें अनस नाम का व्यक्ति स्कूल में घुसकर छात्रा को परेशान कर रहा था। मामले की गहनता से जाँच करने क बाद पता चला कि अनस पर रेल बाजार में ही इस तरह के तीन मामले इसी प्रकरण में कायम हैं। वो इस छात्रा को काफी दिनों से परेशान कर रहा है। थाना नौबस्ता में मामला दर्ज कर अनस को गिरफ्तार करने के लिए कई टीमें लगा दी गईं।

रविवार (8 जनवरी, 2023) को अनस को ​गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अनस के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें गुंडा एक्ट के हिसाब से कार्रवाई कर उसे कानपुर पुलिस के द्वारा जिलाबदर भी किया जाएगा।

वहीं, पीड़िता ने 8 जनवरी, 2023 को नौबस्ता पुलिस में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। 18 वर्षीय बीबीए छात्रा रेल बाजार क्षेत्र की निवासी है। इलाके में रहने वाले पॉक्सो और यौन उत्पीड़न के आरोपित ने जमानत पर बाहर आने के बाद उसे धमकी दी और इतना परेशान किया कि दहशत में आकर पीड़ित परिवार को सस्ते में अपना घर बेचकर दूसरी जगह रहने को मजबूर होना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो साल पहले भी लड़की के पिता ने अनस पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाया था। लेकिन जेल से छूटने के बाद भी वह नहीं माना और उसने फिर लड़की के साथ फिर छेड़छाड़ की और उसे अपना केस वापस लेने की धमकी दी। ऐसा न करने पर उसने उसे ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अनस ने उसका जीना दुश्वार कर दिया है। वह 2 साल से उसके पीछे पड़ा है।

पीड़िता ने उसके खिलाफ शिकायत भी की थी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था, लेकिन वहाँ से जमानत पर छूटने के बाद वह 2 जनवरी 2023 को उसके कालेज में घुस आया। लड़की ने आगे बताया, “क्लास रूम में सबके सामने उसने मेरा हाथ पकड़कर खींचा और मुझे बेइज्जत किया है। उसने मुझे धमकी दी कि अपना मुकदमा वापस ले, वरना चेहरे पर तेजाब डाल दूँगा। तेरा सिर तन से जुदा कर दूँगा। इसके साथ ही उसने मुझे निकाह करने की धमकी दी, कहा- तुम मेरी हो जाओ और निकाह कर लो। मैं तुम्हें मुस्लिम बनाकर अपनी बेगम बनाऊँगा। इस वजह से मैंने क्लास में जाना छोड़ दिया है।”

पुलिस ने लड़की का कांशीराम अस्पताल में मेडिकल भी कराया है। बता दें कि कुछ रिपोर्ट में छात्रा के कॉलेज की जगह स्कूल लिखा जा रहा है।

‘गाड़ी जाने दो वरना तौहीन-ए-रिसालत (ईशनिंदा) लगवा दूँगा’ : पाकिस्तान में ईसाई महिला सिक्योरिटी इंचार्ज को सलीम ने दी धमकी, बोला- तुम्हें काटकर फेंक दूँगा

पाकिस्तान में ‘ईशनिंदा का इल्जाम लगाना’ अल्पसंख्यकों को डराने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। हाल में एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है जिसमें ईसाई सिक्योरिटी गार्ड को एक मुस्लिम व्यक्ति धमका रहा है कि अगर उसने गाड़ी रोकी तो वह मौलाना को बुलाकर तौहीन-ए-रिसालत का इल्जाम लगा देगा। घटना वीडियो में कैद है इसलिए साफ पता चल रहा है कि महिला की कोई गलती नहीं थीं।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पूरा मामला जिन्ना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का है। जहाँ तैनात एक महिला सुरक्षा इंचार्ज ने बिन वैध पास और नंबर प्लेट के एक एजेंट के घुसने पर आपत्ति जताई और गाड़ी बाहर निकालने को कहा। महिला की इतनी बात सुन वो व्यक्ति और अन्य  सुरक्षाकर्मी भड़क गए जिन्होंने गाड़ी को अंदर जाने के लिए छोड़ा था। इसके बाद उन्हें धमकी दी जाने लगी।

वीडियो में साफ सुन सकते हैं कि एक व्यक्ति उनसे कहता है, “मैं पागल हूँ। मैं तो तुमको काटकर फेंक दूँगा अभी।” इसके अलावा इस आदमी को बार-बार मौलानाओं की धमकी देते सुना जा सकता है। ये कहता है- “मैं जा रहा हूँ मौलाना को बुलाने, तुम पर तौहीन-ए-रिसालत लगाऊँगा।”

ईसाई महिला और पुरुष के बीच हुई बातचीत में महिला बार-बार पूछती है कि आखिर तौहीन-ए-रिसालत कैसे हो गई। वह बोलती है- “तुम लोगों को ये बात बर्दाश्त नहीं होता कि एक ईसाई महिला काम कर रही है।” वीडियो से ही पता चलता है कि महिला को धमकाने वाले का नाम सलीम है।

सिविल एविएशन अथॉरिटी ने इस घटना की वीडियो देखने के बाद मामले की जाँच की और पाया कि गलती सलीम की ही थी। उसे नौकरी से फिलहाल डिसमिस कर दिया गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आगे का एक्शन पूरी जाँच होने के बाद लिया जाएगा।

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध कई बार इस्तेमाल किया गया है। 2021 में एक ईसाई मैनेजर को ईशनिंदा के इल्जाम में जलाकर मार डाला गया था। 2019 में एक हिंदू स्कूल प्रिंसिपल पर छात्र ने ईशनिंद का आरोप लगाया था जिसके बाद उन्हें जेल हुई थी।

जम्मू-कश्मीर: अब पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी, नए साल पर राजौरी में आधार कार्ड देखकर मारी थी गोलियाँ

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इसके बाद से स्थानीय हिंदू डरे हुए हैं और सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। इसके पहले नए साल पर राजौरी में आधार कार्ड देखकर हिंदुओं को गोली मारी गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुंछ के बैछ गाँव में हिंदू घरों पर पत्थरबाजी की घटना रविवार (8 जनवरी 2023) देर रात हुई। पत्थरबाजी से लोगों के घरों की खिड़कियों में लगे काँच टूट गए हैं। दीवारों पर भी पत्थर के निशान देखे गए हैं। हालाँकि, पत्थरबाजी किसने की है, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

जिन हिंदुओं के घरों में पत्थरबाजी हुई है, वे बेहद डरे हुए हैं। पीड़ित हिंदू अपनी सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुंछ थाने के एसएचओ रंजीत सिंह राव पुलिस दल के साथ मौके पर पहुँचे और पीड़ित परिवारों से बात की। एसएचओ ने उचित कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है।

साथ ही, अल्पसंख्यक संगठन के लोगों ने भी पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया है। कहा जा रहा है कि बैछ गाँव मुस्लिम बहुल है। यहाँ हिंदुओं के महज 35 घर हैं। ऐसे में, हिंदू डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं राजौरी जैसी घटना उनके साथ भी न हो जाए।

दरअसल, 1 जनवरी 2023 को राजौरी के डाँगरी गाँव में, हिंदुओं को टारगेट करते हुए आतंकियों ने तीन घरों में फायरिंग की थी। ये घर, 50 मीटर के दायरे में बने थे। आतंकियों द्वारा की गई इस फायरिंग में 5 लोगों की मौत हो गई थी। बाद में, यह सामने आया था कि आतंकियों ने आधार कार्ड देखकर हिंदुओं को गोली मारी थी। वहीं, 2 जनवरी को डाँगरी में ही फायरिंग वाली जगह के पास बम धमाका हुआ था। इसमें, एक बच्चे समेत 2 लोगों की मौत हो गई थी।

सुरक्षा बलों ने मार गिराए दो आतंकी

शनिवार (7 जनवरी 2023) की रात पुंछ के बालाकोट सेक्टर में आतंकी घुसपैठ कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 2 आतंकवादी मार गिराए थे। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के पास से एक AK 47 राइफल, AK 56 राइफल, एक चीनी पिस्टल, दो चीनी हथगोले और दो IED बरामद किए थे।

OpIndia का असर: भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकवादी कहने वाला पोस्टर गुरुद्वारे ने हटाया, आतंकी जरनैल सिंह भिंडरांवाले को अब भी रखा है चिपका कर

झारखंड के प्रसिद्ध जमशेदपुर शहर के मानगो में स्थित एक गुरुद्वारे में भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकवादी कहने वाला पोस्टर लगाया गया था। इसके साथ ही उसमें खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीर भी तस्वीर के बारे में ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था।

ऑपइंडिया द्वारा इस खबर को प्रमुखता से उठाने के बाद गुरुद्वारे भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकवादी कहने वाले पोस्टर को हटा लिया गया है। हालाँकि, गुरुद्वारे में अभी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरांवालेकी तस्वीर लगी हुई है। इसे अभी तक नहीं हटाया गया है।

भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकी बताने वाले पोस्टर में लिखा था, “सिखों के पवित्र धर्मस्थल और सबसे बड़ी अथॉरिटी श्री अकाल तख्त साहिब को हिंदुत्व आतंकी भारतीय सेना ने अपने टैंकों से बर्बाद कर दिया। ज्यादा से ज्यादा बर्बादी और हजारों सिखों की हत्या के लिए वायुसेना और नौसेना का भी प्रयोग किया गया। रसायनिक हथियार भी इस्तेमाल किए गए। सिखों के पवित्र धर्मस्थल को मौत का मैदान बना दिया गया।”

जमशेदपुर के मानगो स्थित जिस गुरुद्वारा में भारतीय सेना के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं, उस पोस्टर में खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह को बगल में खड़ा कर हीरो और किसी संत-ज्ञानी की तरह दिखाया गया है। इस आतंकी की फोटो के नीचे इसे ‘महान शहीद’ भी बताया गया है।

इसी गुरुद्वारे के दूसरे पोस्टरों में कई खालिस्तानी आतंकियों का महिमामंडन किया गया है। इनमें से कुछ नाम हैं – जनरल शाबेग सिंह, भाई केहर सिंह, भाई सतवंत सिंह, जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआना, दविंदर पाल सिंह भुल्लर, दिलावर सिंह बब्बर… आदि। गुरुवार में भिंडरांवाले का पोस्टर अभी भी मौजूद है।

इन पोस्टरों से संबंधित जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने जमशेदपुर के स्थानीय लोगों से बात की थी। एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन पोस्टरों को देख कर वह आश्चर्य में पड़ गए थे। उन्होंने कहा, “एक दोस्त की नानी के निधन पर श्राद्ध-भोज में गया था। पोस्टर देख कर दिमाग घूम गया था। बैंक के ही अपने एक सहकर्मी से इसकी चर्चा भी की। आश्चर्य यह है कि अभी तक इस तरह के देशद्रोही हरकत के विरुद्ध न तो मीडिया-कवरेज मिला, न ही प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई हुई।”

विश्व हिंदू परिषद (झारखंड यूनिट) के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजय कुमार से भी इस मामले पर हमने बात की थी। उन्होंने बताया था कि इन पोस्टरों के लगाए जाने के बाद जमशेदपुर में इसका विरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मानगो गुरुद्वारा के प्रबंधन ने विश्व हिंदू परिषद के जमशेदपुर स्थित पदाधिकारियों के विरोध दर्ज कराए जाने के बावजूद इन पोस्टरों को हटाने से इनकार कर दिया था।

संजय कुमार ने इन पोस्टरों को लेकर कहा कि यह देश-विरोधी गतिविधि है। उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी है, लेकिन इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। संजुय कुमार के अनुसार, जमशेदपुर के मानगो पुलिस थाने ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गुरुद्वारे के इस हरकत को लेकर कभी कार्रवाई नहीं की।

ऑपइंडिया ने जब इस बाबत मानगो गुरुद्वारे के सदस्य सरदार भगवान सिंह से बात की तो उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि किसने ऐसा किया। हिन्दू संगठनों के विरोध पर भी पोस्टर न हटाने और भारतीय सेना से क्या दुश्मनी के सवाल पर भगवान सिंह ने ‘मैं दिखवाता हूँ’ कह कर फोन काट दिया था।

‘झारखंड गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी’ के अध्यक्ष सरदार शैलेन्द्र सिंह ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था, “भिंडरांवाले की फोटो लगी है, जिसे सिख समुदाय शहीद मानता है। शायद वो आप लोगों के लिए आतंकी होगा, लेकिन सिखों के लिए नहीं। आजकल उसकी फोटो बाजारों में मिलती है। उसकी तस्वीर को सिखों के सैकड़ों शहीदों के बीच जगह दी गई है। रही बात आर्मी के अपमान की तो आप हमें फोटो भेजें। हम अपमान करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करवाएँगे।”

ऐसे ही नहीं पेंडिंग पड़े हैं 4.5 करोड़ केस: जिस केस में अधिकतम सजा 7 साल, वह आज के सुप्रीम कोर्ट जजों के जन्म से पहले से चल रहा

देश की वर्तमान न्यायिक व्यवस्था को लेकर तमाम तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं और इसमें बदलाव की माँग भी उठती है। इस व्यवस्था के कारण देश की न्यायपालिका केसों के बोझ तले दबकर अंतिम साँसें गिन रही है। आश्चर्य कि बात यह है कि अदालतों में आज भी इतने पुराने केस पेेंडिंग हैं कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान 27 न्यायाधीशों का उस समय जन्म नहीं हुआ था।

ये मुकदमें आज भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। ये मामले देश को सन 1950 में गणतंत्र घोषित करने के तीन के साल के भीतर पुलिस और आम जनता द्वारा दायर किए गए थे। इस वक्त में देश में लगभग 4.50 करोड़ से अधिक मामले पेंडिंग हैं और महाराष्ट्र के रायगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज किया गया सबसे पुराना मामला है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों में दिनेश माहेश्वरी सबसे उम्रदराज हैं। उनका जन्म 15 मई 1958 को हुआ था। उन्हें साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वे जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में हुए। जस्टिस माहेश्वरी इस साल 14 मई को रिटायर हो जाएँगे।

सबसे पुराना आपराधिक मामला

सबसे पुराना क्रिमिनल केस महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस ने महाराष्ट्र निषेध अधिनियम की धारा 65E के तहत 18 मई 1953 को दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे उम्रदराज न्यायाधीश के जन्म से भी यह मामला 5 साल पुराना है।

केस दर्ज के होने के बाद रायगढ़ जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उरण ने आरोपित के खिलाफ उसी साल गैर-जमानती वारंट भी जारी कर दिया। तब से यह मामला चल रहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 9 फरवरी 2023 को तारीख दी गई है। अब आरोपित अभी जीवित है या उसका निधन हो गया है, स्पष्ट नहीं है।

इस केस में आरोपित पर 1949 के अधिनियम की धारा 65E (अफीम के अलावा किसी भी भी नशीले पदार्थ को बेचने, खरीदने या रखने) के तहत आरोप लगाया गया था। केस में दोषी साबित होने पर कम-से-कम से 3 साल जेल और 25,000 रुपए जुर्माना और अधिकतम 5 साल जेल और 50,000 रुपए जुर्माना का प्रावधान है।

रायगढ़ में ही 25 मई 1956 को धारा 381 (क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक की संपत्ति चोरी) के तहत एक और आपराधिक मामला दायर किया गया था। इसमें शंकर सोनू मालगुंडे को आरोपित बनाया गया था। यह मामला भी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उरण के समक्ष सुनवाई के लिए लिस्ट हुआ है। इस केस में दोषी पाए जाने पर 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।

सबसे पुराना दीवानी मामला

अगर वर्तमान के सबसे पुराने सिविल (दीवानी) केस की बात करें तो यह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में दर्ज किया गया था। पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे से जुड़ा ये मामला 3 अप्रैल 1952 को मालदा की दीवानी अदालत में दायर किया गया था। इसमें सबसे हैरानी की बात यह है कि इसकी सुध 66 साल बाद ली गई।

साल 2018 मालदा दीवानी जज (सीनियर डिवीज़न) को सूचित किया गया कि प्रतिवादी नंबर 4 की मौत हो गई है। वह अपने पीछे अपनी विधवा और तीन बच्चों- दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गया है। इसके बाद जज ने कानूनी उत्तराधिकारी को पार्टी बनाने का आदेश दिया। इसके बाद से मामला वहीं लटका हुआ है।

इसी तरह दूसरा सबसे पुराना दीवानी मामला भी मालदा के इसी कोर्ट से जुड़ा हुआ है। यह केस पिछले 70 सालों से भी अधिक समय से लंबित है। इस मामले में पार्वती रॉय नाम की महिला ने बिप्रचरण सरकार नाम के व्यक्ति के खिलाफ 18 जुलाई 1952 को मुकदमा दर्ज कराया था।

इस मामले में साल 2018 में मध्यस्थता की एक पहल की गई थी। इस मध्यस्था को लेकर क्या हुआ, किसी को नहीं पता। तब से सिविल जज इसके परिणामों पर रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के सबसे पुराना मामला

देश के सभी उच्च न्यायालयों में लंबित केसों में सबसे पुराने केस की बात की जाए तो यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के हिस्से में जाता है। कोर्ट के रिकॉर्ड में सबसे पुराना दीवानी मामला दर्ज है। यह साल 1951 से लंबित है। वहीं, इस हाईकोर्ट का सबसे पुराना आपराधिक मामला 1969 से लंबित है।

बता दें कि देश के कुल 25 उच्च न्यायालयों में कुल लगभग 60 लाख लंबित मामले हैं, जिनमें दीवानी और आपराधिक दोनों शामिल हैं। इनमें से 51,846 दीवानी मुकदमे और 21,682 आपराधिक मुकदमे 30 साल से अधिक पुराने हैं।

वहीं, ट्रायल कोर्ट में दर्ज 79,587 आपराधिक मुकदमे 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। वे मुकदमे जो 1975 या उससे पहले दर्ज किए गए थे और आज भी पेंडिंग हैं, ऐसे मुकदमों की संख्या 216 है। ट्रायल कोर्ट में दर्ज 3.23 करोड़ आपराधिक मामलों में 71 प्रतिशत पाँच साल या उससे कम पुराने हैं।

अगर दीवानी मुकदमों के लेकर बात करें तो ट्रायल कोर्ट में ऐसे 36,223 मुकदमे लंबित हैं, जो 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसे मुकदमें जो साल 1965 या उससे पहले दायर किए गए थे और अभी भी लंबित हैं, ऐसे मुकदमों की संख्या 31 है। ट्रायल कोर्ट में पेंडिंग कुल 1.09 करोड़ दीवानी मामलों में 73 प्रतिशत केस पाँच से भी कम पुराने हैं।

भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित हुआ जोशीमठ, 68 परिवार राहत शिविरों में शिफ्ट: 600 घरों में दरार आने के बाद बोले CM धामी – सब मिल कर क्षेत्र को बचाएँ

उत्तराखंड के जोशीमठ में दरार और धँसाव को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है। फिलहाल, इस क्षेत्र को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है। राहत और बचाव के बीच प्रशासन ने 68 परिवारों को शिफ्ट किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यह समय मिल जुलकर जोशीमठ को बचाने का है।

आदि शंकराचार्य की तपोभूमि जोशीमठ में स्थितियाँ हर घण्टे बदलती जा रहीं हैं। स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य व केंद्र सरकार की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने जोशीमठ के 68 परिवारों को अस्थायी राहत केन्द्रों में शिफ्ट किया है। साथ ही, कमसे कम 90 से अधिक परिवारों को शिफ्ट करने की बात कही जा रही है।

जोशीमठ में करीब 4500 मकान हैं। इनमें से 600 से अधिक मकान ऐसे हैं जिनमें दरारें पड़ गईं हैं। ऐसे में, इन मकानों में रहना खतरे से खाली नहीं है। यही कारण है कि लोग अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। हालाँकि, प्रशासन जोशीमठ में रह रहे लोगों की हरसंभव सहायता में जुटा हुआ है।

जोशीमठ में भू-धँसाव से उपजे हालात को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमने सभी लोगों से अनुरोध किया है कि ये समय मिलकर जोशीमठ को बचाने का है। सब लोग मिलकर काम करें। हमारी पहली प्राथमिकता है जोशीमठ शहर बचना चाहिए और लोगों की जानमाल की भी सुरक्षा होनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा है, “खतरे में आने वाले 68 परिवारों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया है। 600 से अधिक मकानों का जो एक जोन बना है, वहाँ से भी लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। पीएम मोदी भी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं और हमें हर प्रकार से सहायता देने का आश्वासन दिया है।”

वहीं, इस मामले में जोशीमठ के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना का कहना है, “जोशीमठ क्षेत्र को आपदा ग्रस्त घोषित किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय की एक टीम सहित केंद्र सरकार की 2 टीमें जोशीमठ पहुँच रही हैं। जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रभावित लोगों को सूखा राशन किट वितरित किया जा रहा है।”

क्या है भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र

बता दें कि इससे पहले रविवार (8 जनवरी, 2023) को पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) की बैठक के बाद अधिकारियों ने जोशीमठ को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया था।

देश भर के पहाड़ी इलाकों में भू-स्खलन की घटना सामान्य है। खासतौर से उत्तराखंड जैसे राज्य में भारी बारिश या चट्टानों के खिसकने से भूस्खलन होता रहा है। हालाँकि, भू-धँसाव की घटनाएँ काफी कम सामने आतीं हैं। इसमें, जमीन अपनी स्थिति से नीचे की ओर धँसने लगती है।

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भू-धँसाव की घटना पृथ्वी की ऊपरी सतह के हटने के कारण सामने आती है। यह अक्सर पानी, तेल, प्राकृतिक गैस या खनिज संसाधनों को पंपिंग, फ्रैकिंग या खनन गतिविधियों द्वारा जमीन से बाहर निकालने के कारण होता है। हालाँकि, भूकंप, मिट्टी के कटाव या या जमीन के भूस्खलन के बाद भी भू-धँसाव की घटनाएँ होती हैं।

उत्तराखंड के जोशीमठ, कर्णप्रयाग और उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में फिलहाल जो सामने आ रहा है वह भूस्खलन और धँसाव दोनों है। यानी पृथ्वी की ऊपरी सतह धँस भी रही है और खिसक भी रही है।

‘जो सोचते हैं ये लागू नहीं होगा…लागू होगा’: CAA के नियम बनाने के लिए MHA को 6 महीने का एक्सटेंशन, अमित शाह ने ‘कोविड’ को बताया था देरी की वजह

नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को तैयार और लागू करने के लिए गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार मिल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय की ओर से इस संबंध में संसदीय समितियों को संपर्क किया गया था। इसी क्रम में राज्यसभा ने नियम बनाने और उसे लागू करवाने के लिए 6 महीने का और समय मिला। लेकिन लोकसभा से मंजूरी मिलना फिलहाल बाकी है।

बता दें कि 11 दिसंबर 2019 को नागरिक संशोधन विधेयक संसद में पास हुआ था। इसके अगले दिन राष्ट्रपति से इसे सहमति मिली और बाद में गृह मंत्रालय के जरिए अधिसूचित किया गया। इस एक्ट के तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने की बात करता है।

फिलहाल यह कानून लागू नहीं हुआ है। साल 2019 में जब ये संसद में पास हुआ तब एक निश्चित समुदाय द्वारा इसका जगह-जगह विरोध हुआ। इसके नाम पर सामान्य लोगों को भड़काया और समझाया गया कि कैसे ये मुसलमानों के खिलाफ है। नतीजतन, लोग सड़कों पर आ गए, प्रदर्शन होने लगा। धीरे-धीरे प्रदर्शन इतना हिंसक हुआ कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में दंगे तक हुए। बाद में कोरोना आया और सरकार उसमें जुट गई।

पिछले साल नवबर 2022 में एक कार्यक्रम के वक्त गृहमंत्री अमित शाह ने बताया भी था कि नियम बनाने में केवल कोविड के कारण देरी हुई है, जो लोग सोचते है कि ये लागू नहीं होगा, वो गलत सोचते हैं।

यहाँ मालूम हो कि किसी भी कानून को राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद उसके नियम 6 महीने के भीतर बनाए जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तब संसदीय समितियों से विस्तार की माँग की जाती है। चूँकि हालातों के कारण ऐसा नहीं हुआ। इसलिए गृह मंत्रालय को विस्तार मिला। सबसे पहला विस्तार जून 2020 में दिया गया था। अब इस मामले में गृह मंत्रालय को फिर से समय मिला है। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा में अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों ने  गृह मंत्रालय को 31 दिसंबर 2022 और 9 जनवरी 2023 तक विस्तार दिया था।

जिस अंजलि को कार से घसीट कर मार डाला, उसके घर ताला तोड़ कर चोरी: टीवी-बर्तन समेत कई चीजें गायब, परिजनों ने बताया सहेली निधि की साजिश

दिल्ली के कंझावला केस में एक और नया मोड़ आया है। बताया जा रहा है कि मृतका अंजलि के रोहिणी के करन विहार वाले घर से एलईडी टीवी सहित कई चीजें चोरी हो गई हैं। अंजलि के परिवार वालों ने निधि पर साजिश रचने और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इसके अलावा परिजनों ने घर से टीवी और बर्तन चोरी होने का भी आरोप लगाया है। फिलहाल कितने की चोरी हुई है, अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा 20 वर्षीय अंजलि की मौत की उचित जाँच कराने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी। पुलिसकर्मियों द्वारा घर और पूरे इलाके की बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन सोमवार (9 जनवरी, 2023) सुबह इलाके से सुरक्षा हटा दी गई थी।

कहा जा रहा है कि अंजलि और उसका परिवार इस घर में उसकी माँ का इलाज करवाने के ​लिए रह रहा था। वे सोमवार सुबह अस्पताल में थे, तब उन्हें घर में चोरी होने की सूचना मिली। अंजली के परिवार की सदस्य अनु ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “पड़ोसियों ने हमें चोरी के बारे में बताया था। यह निधि की साजिश है। वह पकड़े जाने के डर से अपना सामान हमारे घर में रखवाना चाह रही है। पुलिस 8 दिन से हर जगह थी, लेकिन कल ही क्यों नहीं थी?”

परिवार वालों का यह भी कहना है कि घर का सारा सामना उथल-पुथल कर रखा है। बेड के गद्दे भी नीचे फेंक रखे हैं। टीवी के अलावा बेड में रखा आधे से ज्यादा सामान हमारा गायब हो चुका है। पुलिस ने उन्हें किसी भी चीज ​को हाथ लगाने से मना किया हुआ है। इस घर में अंजलि, उसकी मम्मी के अलावा उनकी मेरी पूरी फैमिली रहती थी। परिवार की एक अन्य सदस्य ने बताया, “हमने अभी दो महीने पहले ही टीवी लिया था। उसकी किश्ते भर रहे थे।

बच्चों के नए-नए कपड़े, बर्तन-भांडे भी गायब हैं। यही नहीं चोरी करने वाले ने पड़ोसियों की कुंडी भी बाहर से लगा दी। बल्ब भी सारे उतार दिए और ए टू जेड सभी लाइटें बंद कर दी थीं। ये सब मिलकर ही करवाया जा रहा है। हमें यह निधि की ही साजिश लग रही है।”

अंजलि की नानी के मुताबिक, “मृतका की माँ चार दिनों से अस्पताल में है। यहाँ पुलिस नहीं थीं, जिस दिन से हमारी लड़की नहीं रही हम यहाँ नहीं आए।”

अंजलि के मामा प्रेम सिंह का कहना है, “उसकी (अंजलि) माँ को किडनी की समस्या है और वह अस्पताल में है। हम सब वहीं थे, जब पड़ोसियों ने हमें बताया कि किसी ने हमारे घर में चोरी की है। हमारा एलईडी टीवी गायब है और घर में तोड़फोड़ की गई है। कपड़े इधर-उधर हैं। हमें संदेह है कि आरोपित या उनके परिवार वाले मामले से संबंधित कुछ चोरी करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस पर से हमारा विश्वास उठ गया है। वे हमारी रक्षा नहीं कर सकते।”

गौरतलब है कि 1 जनवरी, 2023 की रात भयानक कार एक्सीडेंट में अंजलि की मौत हो गई थी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब वह होटल से अपने घर लौट रही थी। उस दौरान वह स्कूटी पर थी, जिसे कार टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद, वह कार में ही फँस गई थी। आरोपित उसे कार से निकालने की बजाए 12 किलोमीटर तक लगातार घसीटते रहे। इससे उसके पैर तक कट गए थे। बाद में, उसकी बॉडी नग्नावस्था में बरामद हुई थी। अजंलि अपने घर में कमाने वाली इकलौती थी।

इस मामले में, पुलिस ने दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन, मनोज मित्तल, आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपित बनाया है। इनमें से एक आरोपित अंकुश खन्ना को जमानत मिल गई है।

जोशीमठ को बचाने के लिए पहुँच रहे धर्मशास्त्री, शंकराचार्य कराएँगे अनुष्ठान: क्या जय और विजय मिलकर बंद करने जा रहे बद्रीनाथ धाम का रास्ता

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धँसाव को लेकर स्थानीय लोग काफी चिंतित हैं। 600 से ज्यादा घरों में दरारें आ चुकी हैं। वहाँ के लोगों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। इसी बीच खबर है कि जोशीमठ को बचाने के लिए कई तरह के विशेष अनुष्ठान किए जाएँगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, “प्रभावित लोग इस समय अपना धैर्य और मनोबल मजबूत बनाएँ रखें। हमने कई ज्योतिषियों और धर्मशास्त्रियों को बुलाया है।”

शंकराचार्य ने कहा, “उन्होंने हमें जोशीमठ को बचाने के लिए अनुष्ठानों के बारे में बताया है। हम आज से ये अनुष्ठान शुरू करेंगे।”

बद्रीनाथ और जोशीमठ को लेकर भविष्यवाणी

दूसरी ओर देश के चार धामों में से एक बद्रीनाथ और जोशीमठ को लेकर कई तरह की भविष्यवाणी की जा रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि कलियुग में श्रद्धालु बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएँगे। लोक मान्यताओं के मुताबिक, हिंदू पुराणों में बद्रीनाथ धाम को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है। स्कंदपुराण में युगों पहले महर्षि वेदव्यास ने लिखा था कि कलियुग में बद्रीनाथ धाम अपनी जगह से अचानक गायब हो जाएगा।

ठीक उसी समय हिमालय की गोद में एक नया धाम प्रकट होगा, जिसे पुराणों में ‘भविष्य बद्री’ का नाम दिया गया है। यहाँ बद्रीनाथ की तरह साक्षात भगवान विष्णु का वास होगा।

भविष्य बद्री के बनने की प्रक्रिया

कहा जा रहा है कि भविष्य बद्री के बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, एक चट्टान जमीन से खुद ब खुद निकल रही है। ऋषि वेदव्यास ने जिस जगह पर ‘भविष्य बद्री’ की भविष्यवाणी की थी, ठीक उसी जगह पर यह धाम उभर रहा है। इस समय कुछ ऐसी ही घटनाएँ हो रही हैं, जो बद्रीनाथ धाम के समय पर हुई थीं। दावा किया जा रहा है कि उस शिला में भगवान विष्णु का अक्स उभर रहा है। जब त​क भगवान नृसिंह का वजूद जो​शीमठ में है, तभी तक बद्रीनाथ सुरक्षित है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बद्रीनाथ की तरह भविष्य बद्री की स्थापना भी आदि शंकराचार्य ने की थी और बद्री विशाल के दर्शन करने से पहले जोशीमठ के नृसिंह मंदिर जाना जरूरी होता है।

जोशीमठ का नृसिंह मंदिर

नृसिंह मंदिर जोशीमठ में स्थित है। मंदिर में भगवान नृसिंह की बहुत पुरानी प्रतिमा है। भगवान की प्रतिमा को लेकर कई तरह की मान्यताएँ हैं। बताया जाता है कि नृसिंह भगवान की एक भुजा सामान्य है, जबकि दूसरी काफी पतली है। यह भुजा साल दर साल और पतली होती जा रही है। मान्यता के मुताबिक, जिस दिन नृसिंह भगवान की पतली हो रही भुजा टूट कर गिर जाएगी, उस दिन बद्रीनाथ धाम का मार्ग बंद हो जाएगा। नर-नारायण पर्वत एक हो जाएँगे।

यह वही नर-नारायण पर्वत है, जिसका उल्लेख स्कंदपुराण में भी किया गया है। यदि यह भविष्यवाणी सच हो जाती है, तो कलियुग में भक्त भगवान बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएँगे, जहाँ वह वर्तमान में विराजमान हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि नर-नारायण पर्वत के एक हो जाने से बद्रीनाथ धाम लुप्त हो जाएगा। इसके बाद से भक्तों को भगवान बद्रीनाथ का दर्शन ‘भविष्य बद्री’ में ही मिल सकेगा।

रामायण, महाभारत काल से जोशीमठ का संबंध

जोशीमठ को लेकर एक कथा बताई जाती है। कहा जाता है कि रामायण काल में लक्ष्मणजी के मूर्छित होने पर उनके लिए संजीवनी बूटी की खोज में निकले हनुमानजी के लिए रावण ने कालनेमि नामक असुर को भेजा था। जोशीमठ ही वह जगह है, जहाँ हनुमानजी ने कालनेमि असुर का वध किया था। इसके ​अलावा ऐसी भी मान्यता है कि अज्ञातवास काल में स्वर्ग यात्रा के समय पांडव जोशीमठ होकर ही गए थे। आज भी स्थानीय लोग इस घटना की याद में फसल की कटाई के बाद पांडव नृत्य करते हैं।

बता दें कि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने सभी लोगों से जोशीमठ को बचाने की अपील की है। उन्होंने सभी सामाजिक, राजनीतिक संगठनों से एक टीम के रूप में कार्य करने का अनुरोध किया। सीएम ने कहा, “हम सभी की पहली प्राथमिकता जोशीमठ को बचाना और लोगों की जान माल की रक्षा करना है। 68 घर जो खतरे में थे, उन लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। पीएम भी इसकी निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया है।”

गौरतलब है कि इस आपदा की चपेट में जोशीमठ शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा चपेट में आ चुका है। राज्य सरकार ने टेक्निकल कमेटी का गठन किया है, जो भू-धँसाव से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (8 जनवरी 2022) को उत्तराखंड में भूमि धँसने और भूस्खलन की घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की। इस दौरान पीएम मोदी ने उत्तराखंड को हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।

‘स्वदेशो भुवनत्रयम्’: PM मोदी ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भारतीयों की भूमिका प्रशंसा की, कहा- बुजुर्ग प्रवासियों को अपने संघर्ष-उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सोमवार (9 जनवरी 2023) को मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) में आयोजित 17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन 2023 (17th Pravasi Bharatiya Sammelan 2023) को संबोधित किया।

इस सम्मेलन में सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशिष्ट अतिथि और गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह कार्यक्रम 8 जनवरी से 10 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 70 देशों के करीब 3800 सदस्य शामिल हो रहे हैं।

समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं। दुनिया के किसी एक देश में जब भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग मिलते हैं तो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सुखद अहसास होता है।”

पीएम मोदी ने कहा कि समारोह में आए प्रत्येक प्रवासी भारतीय ने अपने-अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा, “भारत का हृदय कहलाने वाले मध्य प्रदेश में प्रवासी भारतीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में माँ नर्मदा का जल, यहाँ के जंगल, आदिवासी परंपरा और यहाँ का अध्यात्म आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बनाएगी।”

हर प्रवासी भारतीय को ब्रांड एंबेसडर बताते हुए पीएम ने कहा, “मैं सभी भारतीय प्रवासियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर कहता हूँ। भारत के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आपकी भूमिका विविध है। आप मेक इन इंडिया, योग, हस्तशिल्प उद्योग के साथ ही भारतीय मिलेट्स के ब्रांड एंबेसडर हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “हमने कुछ महीने पहले भारत की आजादी के 75 साल मनाए थे! हमारे स्वतंत्रता संग्राम को प्रदर्शित करने वाली डिजिटल प्रदर्शनी यहाँ आयोजित की गई है, जो गौरवशाली युग को फिर से आप सबके सामने लाती है। ‘स्वदेशो भुवनत्रयम्’ अर्थात हमारे लिए पूरा संसार ही हमारा स्वदेश है। मनुष्य मात्र ही हमारा बंधु-बांधव है। इसी वैचारिक बुनियाद पर हमारे पूर्वजों ने भारत के सांस्कृतिक विस्तार को आकार दिया था।”

भारत की प्राचीन परंपरा को याद करते हुए पीएम ने कहा, “हमारे प्रवासी भारतीयों को वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को और ऊपर उठाने में भूमिका निभानी है। हमने सदियों पहले वैश्विक व्यापार की असाधारण परंपरा शुरू की थी। हम असीम लगने वाले समंदरों के पार गए। अलग-अलग देशों, अलग-अलग सभ्यताओं के बीच व्यावसायिक संबंध कैसे साझी समृद्धि के रास्ते खोल सकती है, भारत ने करके दिखाया है।”

उन्होंने कहा कि भारत में न केवल एक ज्ञान केंद्र बनने की क्षमता है बल्कि हुनरमंदों की राजधानी भी है। पीएम मोदी ने कहा, “भारत से बाहर रहने वाले बुजुर्ग प्रवासियों को अपने जीवन, संघर्ष, उलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना चाहिए। बुजुर्गों के पास उस जमाने की यादें होंगी। विश्वविद्यालयों के माध्यम से हमारे डायस्पोरा की हिस्ट्री के दस्तावेजीकरण के प्रयास किए जाएँ।”

डायस्पोरा के महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा, “कोई भी राष्ट्र उस पर निष्ठा रखने वाले लोगों की दिलों में जीवित रहता है। जब कोई भारतीय विदेश जाता है और वहाँ कोई भारतीय मिल जाता है तो उसे लगता है कि पूरा भारत मिल गया। आप जहाँ कहीं भी रहते हैं, भारत को अपने साथ रखते हैं। अपने दिल में रखते हैं।”