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ज्योतिर्मठ के शिवलिंग में भी दरार, माँ भगवती का पौराणिक मंदिर गिरा: जोशीमठ पहुँच CM धामी पीड़ितों से मिले, कहा- जान बचाना प्राथमिकता

उत्तराखंड में भूमि धँसने (Uttarakhand Landslide) की घटनाओं के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) शनिवार (7 जनवरी 2023) को जोशीमठ पहुँचे। शहर में जाकर लोगों से मिलने से पहले उन्होंने इलाके का हवाई सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाना प्राथमिकता है। इसी बीच ज्योतिर्मठ के शिवलिंग में दरार और एक पौराणिक मंदिर के गिरने की भी खबर है।

जोशीमठ में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NDRF की टीम को तैनात किया गया है। वहीं, वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की टीम घर-घर जाकर सर्वे का काम कर रही है। यहाँ के 700 से अधिक घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। वहीं, खतरनाक हालत में हालत में पहुँच गए घरों के परिवारों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।

राज्य सरकार 600 परिवारों को तत्काल वहाँ से हटाने का आदेश दिया है। इसके लिए सरकार ने NTPC और HCC में प्रत्येक को 2000 घर अस्थायी घर बनाने के लिए कहा है, ताकि लोगों को उसमें अस्थायी तौर पर रखा जा सके। वहीं, जो लोग किराए पर अन्य जगह रहना चाह रहे हैं, उन्हें 4,000 रुपए प्रतिमाह देने की घोषणा की गई है। यह किराया अगले 6 महीने तक दिया जाएगा। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जोशीमठ पहुँचकर प्रभावित हिस्सों के लोगों से मुलाकात की। यहाँ पहुँचने से पहले उन्होंने शुक्रवार (6 जनवरी 2023) को वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से लेकर विशेषज्ञों से राय-मशविरा किया, ताकि समस्या का जल्द से जल्द हल निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए एक दीर्घकालीन योजना बना रही है।

उन्होंने कहा, “जोशीमठ हमारा पौराणिक शहर है। उत्तराखंड सरकार इस मामले को लेकर अलर्ट पर है। हमारा मकसद सबको बचाना है। प्रभावितों के विस्‍थापन के लिए वैकल्पिक जगह की तलाश जारी है।” इस बीच जमीन धँसने के कारण माँ भगवती का एक पौराणिक मंदिर भरभरा कर एक मकान के ऊपर गिर गया, जिससे मकान की छत पर दरारें आ गई।

भू-धंसाव की चपेट में ज्योतिर्मठ परिसर के बाद शंकराचार्य माधव आश्रम मंदिर के शिवलिंग में दरार आ गई है। परिसर के लक्ष्मी नारायण मंदिर के आसपास बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने बताया कि मठ के प्रवेश द्वार, लक्ष्मी नारायण मंदिर और सभागार में दरारें आई हैं। इसी परिसर में टोटकाचार्य गुफा, त्रिपुरसुंदरी राजराजेश्वरी मंदिर और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का गद्दीस्थल है। 

कहा जा रहा है कि वैज्ञानिकों की समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जोशीमठ में भू-धँसाव और घरों में दरारें पड़ने की क्रिया तेज हुई है। इसको देखते हुए पूरे शहर को विस्थापित करने के बाद ही उपचारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। वैज्ञानिकों की समिति ने पिछले वर्ष अगस्त में जोशीमठ का दौरा किया था। इस समिति ने सितंबर 2022 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

जोशीमठ की तरह ही कर्णप्रयाग और उत्तरकाशी में भी घरों में दरार आने की घटनाएँ सामने आई हैं। इन घटनाओं ने सरकारी की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए पूरे चमोली जिले में सभी निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हेलंग बाईपास निर्माण कार्य, एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के के तहत जारी निर्माण कार्य तथा नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण कार्यों रोक दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन भी रोक दिया है।

उधर, केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार (6 जनवकी 2023) को जोशीमठ में भू-धंसाव का तेजी से अध्ययन करने के लिए एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में पर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के प्रतिनिधि शामिल हैं।

कड़ाके की ठंड में बच्चे को नंगे बदन घुमाया, जनेऊ भी पहनाया तो उल्टा: राहुल गाँधी की ‘हिंदुत्व वाली राजनीति’, लताड़ के बाद कॉन्ग्रेस ने डिलीट की तस्वीर

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरुआत से ही विवादों में रही है। इस यात्रा को लेकर नया विवाद एक बच्चे को जनेऊ पहनाकर घुमाने में हुआ है। इस विवाद का कारण एक तो यह है कि भयंकर ठंड के बाद भी बच्चे ने कपड़ा नहीं पहना हुआ है। वहीं, दूसरा यह कि बच्चे ने उल्टा जनेऊ पहना हुआ है। इस कारण लोग राहुल गाँधी को ट्रोल कर रहे हैं।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स से राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान की तस्वीरें लगातार शेयर की जाती रहीं हैं। पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से हाल ही में एक फोटो ट्वीट की गई थी। इस फोटो में जहाँ सभी ने ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहन रखे हैं, यहाँ तक कि राहुल गाँधी ने भी टीशर्ट पहन रखी है। वहीं, करीब 7-8 साल की उम्र का नजर आ रहा बच्चा सिर्फ एक पायजामे में दिखाई दे रहा है।

वहीं दूसरी ओर, उक्त बच्चे को उल्टा जनेऊ पहनाया गया है। सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को जनेऊ बाएँ कंधे से जनेऊ पहनाया जाता है जो दाईं कमर पर होता है। साथ ही, किसी परिजन के अंतिम संस्कार के समय ही उल्टा जनेऊ पहनाया जाता है।

कॉन्ग्रेस के ट्विटर अकाउंट द्वारा शेयर की इस फोटो को लेकर राहुल गाँधी को लगातार ट्रोल किया जा रहा था। इस कारण, ट्वीट करने के कुछ घंटे बाद ही, इसे डिलीट कर दिया गया। हालाँकि, अब भी कई कॉन्ग्रेस नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट पर यह फोटो देखी जा सकती है।

बहरहाल, इस फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर रिएक्शन्स की बाढ़ आई हुई है। लोग इसे राजनीतिक हथकंडा बताते हुए लगातार ट्रोल कर रहे हैं। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा है, “4 डिग्री तापमान में राजनीति के लिए एक बच्चे को कपड़े उतार के घुमाना एक बेशर्म ही कर सकता है।”

प्रवीण सिंह नामक यूजर ने लिखा, “भाई नकल करके हिन्दू नही बन सकते। जनेऊ उल्टी दिशा से पहना है, जो कि अंतिम संस्कार के समय करते है। वाह रे ढोंगी पोंगा पंडित।”

सचिन मोरे नामक यूजर ने लिखा, “ठंड में बच्चे के नाम पर राजनीति और उस में भी जनेऊ उल्टा।”

गोलू श्रीवास्तव नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “ये लड़के के साथ सोशल अत्याचार है। इसके साथ ही राहुल गाँधी हिन्दुत्व को दिखा रहे हैं, लेकिन क्या करें आप 70 साल पहले ही हिन्दुत्व छोड़ चुके हैं। कम से कम जनेऊ तो ठीक से पहना देते।”

सुधीर कुमार नामक यूजर ने लिखा, “राहुल बाबा, आप कितने बड़े मूर्ख हो। उल्टा जनेऊ व्यक्ति अंतिम संस्कार के समय पहनते हैं। क्या तुम कॉन्ग्रेस की अंत्येष्टि करने जा रहे हो? कॉन्ग्रेसी कितने पागल हैं जो तुमको नेता मानते हैं। ठंड में एक बच्चे को नंग-धरंग केवल जनेऊ दिखाने के लिए लेकर निकले हो? इससे तुम हिन्दू नहीं हो जाओगे।”

तैमूर का जीजा नामक यूजर ने लिखा, “जेनेऊ उल्टा पहना दिया ठीक है। इन्हें क्या ही पता हिंदू संस्कारों का। लेकिन, अपनी राजनीति चमकाने की खातिर इस कड़ाके की ठंड में एक मासूम बच्चे को बिना कपड़ों के नहीं घुमाना था। जुल्म है ये।”

प्रभा उपाध्याय नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “मूर्ख पप्पू राहुल गाँधी अपनी भारत तोड़ो यात्रा के लिए छोटे बच्चे का उपयोग कर रहा है। दिल्ली के इस सर्द मौसम में उस बच्चे को कपड़े के बिना घुमा रहा है बच्चे ने गलत दिशा में जनेऊ पहना है। उल्टा जनेऊ श्राद्ध, तर्पण हो या अंतिम संस्कार करने के दौरान पहना जाता है।”

गौतम तिवारी नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “कॉन्ग्रेस का श्राद्ध कार्यक्रम ही तो चल रहा है, तभी तो उल्टा जनेऊ पहना रखें हैं बच्चे को।

कार में फँसी अंजलि को छोड़ भागी जो सहेली, वह गाँजा सप्लाई में जा चुकी है जेल: दोस्त ने कहा – एक्सीडेंट से पहले होटल में पैसे के लिए लड़ी थी

दिल्ली कंझावला केस में अंजलि के दोस्त ने अहम खुलासा किया है। अंजलि का दोस्त भी उस पार्टी वाली रात होटल में बाकी लोगों के साथ मौजूद था। अंजलि के दोस्त नवीन का कहना है कि अंजलि और निधि के बीच पैसों को लेकर झगड़ा हुआ था। दोस्त के मुताबिक, दोनों के बीच हाथापाई भी हुई थी। इसके बाद दोनों होटल से बाहर निकल गए थे।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अंजलि के दोस्त नवीन ने घटना वाली रात की कहानी बताई है। नवीन ने बताया कि वहाँ 2 कमरे बुक किए गए थे। एक में नवीन और कुछ दोस्त व दूसरे में निधि और अंजलि थे। सभी बीयर पी रहे थे। फिर निधि और अंजली के बीच पैसों को लेकर बहस शुरू हो गई। दोस्त की मानें तो निधि ने अंजलि से पैसे माँगे और अंजलि ने निधि से अपनी चाबी माँगी। इसके बाद उनमें हाथापाई होने लगी। दोस्तों ने मिलकर दोनों को रोका। इसके बाद निधि नीचे जाकर हंगामा करने लगी।

दोस्त का कहना है कि निधि को शांत करने के लिए अंजलि भी नीचे गई, जहाँ दोबारा दोनों के बीच बहस हुई। नवीन ने जानकारी दी कि जब तक बाकी के लोग नीचे पहुँच पाते, तब तक निधि और अंजलि जा चुके थे। नवीन ने बताया कि मुझे अंजलि की मौत की जानकारी मीडिया के जरिए मिली।

निधि गाँजा तस्करी में जा चुकी है जेल

पुलिस अंजलि के एक्सीडेंट को लेकर निधि से लगातार पूछताछ कर रही है। इन सब के बीच निधि को लेकर एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निधि दो साल पहले (2020 में) आगरा में 10 किलोग्राम गाँजे के साथ पकड़ी जा चुकी है। जीआरपी ने उसके साथ रेलवे स्टेशन से दो लड़कों को भी पकड़ा था। लड़कों के पास से भी 10-10 किलोग्राम गाँजा मिला था। तीनों को तस्करी के मामले में जेल भेजा गया था।

जेल जाने से पहले उन्होंने जिसके लिए तस्करी करने की बात कबूली थी, उसे अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। आपको बता दें कि दिल्ली के कंझावला में अंजलि को बलेनो कार से कई किलोमीटर तक घसीटा गया था। जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस की जाँच में यह सामने आया था कि हादसे के वक्त अंजलि स्कूटी पर अकेली नहीं थी बल्कि उसकी दोस्त निधि भी उसके साथ मौजूद थी। जिसके बाद निधि की तलाश की गई।

पुलिस ने निधि को इस केस में चश्मदीद बनाया हुआ है। हादसे के बाद निधि अपनी दोस्त को छोड़कर फरार हो गई थी। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने निधि को भी आरोपित बनाने की माँग की थी। उन्होंने केस की जाँच सीबीआई से कराए जाने की भी माँग की है।

6 साल के छात्र ने शिक्षिका को मार दी गोली: अमेरिका के स्कूल की घटना, ‘गन कल्चर’ वहाँ पहले ही बन चुका है गले की फाँस

अमेरिका के वर्जीनिया शहर के एक स्कूल में 6 साल के बच्चे ने क्लास रूम में टीचर पर गोली चला दी। घायल टीचर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गोली चलाने वाले छात्र को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। घटना में किसी छात्र के घायल होने की खबर नहीं है।

घटना वर्जीनिया के न्यूपोर्ट न्यूज़ इलाके में स्थित रिचनेक एलीमेंट्री स्कूल की बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्स्ट ग्रेड में पढ़ने वाले एक 6 साल के बच्चे ने शुक्रवार (6 जनवरी, 2023) दोपहर एक टीचर पर गोली चला दी। पुलिस ने गोली चलाने वाले बच्चे को हिरासत में ले लिया है। गोली चलने के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई।

न्यूपोर्ट न्यूज़ पुलिस डिपार्टमेंट के चीफ स्टीव ड्रू ने जानकारी दी है कि 30 साल की शिक्षिका और आरोपित छात्र के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। कहासुनी के बीच बच्चे ने शिक्षिका पर फायरिंग कर दी। उसने टीचर पर एक राउंड फायर किया। ड्रू ने कहा कि घटना की जाँच की जा रही है शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में कोई दूसरा छात्र शामिल नहीं है। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि 6 साल के बच्चे के पास बंदूक कहाँ से आई और किन हालात में छात्र ने गोली चलाई।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद स्कूल प्रशासन के तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेस कर इसके बारे में सूचना दी गई। स्कूल के सुपरिटेंडेंट डॉ. जॉर्ज पार्कर ने जानकारी दी कि स्कूल सोमवार को बंद रहेगा। स्कूल के स्टाफ सदमें में हैं। हम स्कूल स्टाफ और बच्चों के मानसिक स्थिति को सामान्य होने के लिए कुछ वक्त देना चाहते हैं। पार्कर ने कहा कि हमें अपने युवाओं के हाथों से बंदूकें दूर रखने की जरूरत है। पार्कर ने कहा कि हमें बच्चों को शिक्षित करने और उन्हें सुरक्षित रखने की जरूरत है। हमें अमेरिका के गन कल्चर को बदलने की जरूरत है।

न्यूपोर्ट न्यूज के मेयर फिलिप जॉन्स ने पत्रकारों से कहा कि आगे इस तरह की घटना न हो हम इस दिशा में कदम उठाने जा रहे हैं। आपको बता दें कि अमेरिकी में हथियार खरीदने को लेकर कोई सख्त कानून या नियम नहीं है। वहाँ हथियार खरीदना दुकान से सामान खरीदकर घर लाने जैसा है। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में आए दिन मास शूटिंग या गोलीबारी की ऐसी घटनाओं के लिए यहाँ के गन कल्चर को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

मायावती सरकार में मंत्री रहा इनामी याकूब कुरैशी बेटा समेत गिरफ्तार, ₹100 करोड़ की संपत्ति हो चुकी है कुर्क: अवैध मांस के कारोबार में था पूरा परिवार

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के करीबी और बसपा सरकार में मंत्री रहे याकूब कुरैशी और उसके बेटे को गिरफ्तार किया गया है। दोनों बीते 9 महीने से फरार थे। अवैध मांस का व्यापार करने के आरोप में याकूब और उसके बेटे पर 50-50 हजार का इनाम घोषित था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेरठ की खरखौदा पुलिस ने दिल्ली के चाँदनी महल थाना क्षेत्र से दोनों को गिरफ्तार किया है। याकूब कुरैशी अपने बेटे के साथ एक फ्लैट में किराए पर रह रहा था। पुलिस ने शनिवार (7 जनवरी, 2022) को रात करीब 2 बजे छापेमार कार्रवाई करते हुए यह गिरफ्तारी की है।

अवैध मांस व्यापार मामले में परिवार सहित आरोपित है याकूब..

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अन्य विभागों के साथ मिलकर 31 मार्च, 2022 को याकूब की अवैध मांस फैक्ट्री में छापा मारा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने पाँच करोड़ रुपए की कीमत का अवैध मांस पकड़ा था। यही नहीं, पुलिस ने अवैध मांस की पैकेजिंग करते हुए 10 लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

इस मामले में पुलिस ने याकूब कुरैशी, उसकी पत्नी संजीदा बेगम, दोनों बेटे इमरान और फिरोज समेत 17 लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। इसके बाद, कोर्ट में पेश न होने के कारण पुलिस ने याकूब और उसके परिवार पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। साथ ही उसके घर पर कुर्की वॉरंट चस्पा कर अदालत में पेश होने का आदेश जारी किया गया था।

इसके बाद भी, ये कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इस दौरान, कोर्ट के आदेश के बाद 100 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति भी कुर्क की गई थी। बता दें कि याकूब कुरैशी का एक बेटा फिरोज पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। वहीं, फरार आरोपितों पर 50 हजार रुपए का इनाम रखने के साथ ही, गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में, अब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए याकूब और उसके बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, उसकी पत्नी संजीदा बेगम की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने रोक लगा रखी है।

हैदराबाद का वह 6 साल का बच्चा, मोदी के मंत्री कौशल किशोर और पत्रकार रवि प्रकाश…

एक पिता का सबसे बड़ा दुख क्या होता होगा? शायद, अपने ही जवान बेटे को कंधा देना। एक 6 साल का बच्चा क्या चाहता होगा? शायद माँ-बाप का लाड़ या फिर पसंदीदा खिलौना। एक हँसते-खेलते आदमी को क्या तोड़ देता होगा? शायद, यह पता चलना कि उसके शरीर में कैंसर ने घर कर लिया है।

पर हैदराबाद के उस 6 साल के बच्चे को जब पता चला कि उसकी जिंदगी 6 महीने की ही बची है तो भी वह आत्मविश्वास से भरा था। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। मोदी के मंत्री कौशल किशोर ने सार्वजनिक तौर पर भूल का पाश्चाताप किया और यह सुनिश्चित करने की यात्रा पर निकल पड़े कि कोई उनके बेटे की मौत न मरे। कोई बेटी उनकी बहू की तरह विधवा न हो। खबरों की खोज में जमीन नापने वाले पत्रकार रवि प्रकाश (हम जैसों के रवि भैया) कैंसर के अंतिम स्टेज में प्रकाश बिखेर रहे हैं, मानों जीजिविषा कोई शब्द है तो रवि प्रकाश उसका पर्यायवाची।

हैदराबाद के उस अनाम बच्चे की कहानी ट्विटर पर डॉक्टर सुधीर कुमार ने साझा की है, क्योंकि वह बच्चा अब जीवित नहीं है। हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. कुमार ने बताया है कि चेहरे पर मुस्कान लिए वह बच्चा नहीं चाहता था कि उसके कैंसर की खबर उसके माता-पिता को भी हो। यह दूसरी बात है कि रोग की संवेदनशीलता को देख डॉक्टर ने इसे उसके माता-पिता से नहीं छिपाया। सब कुछ बताया यह कहते हुए कि उसके पास जो भी समय बचा है, उसके साथ बिताइए। उसे खूब खुशियाँ दीजिए।

डॉ. सुधीर ने दुनिया को यह कहानी बताने के लिए उस बच्चे को काल्पिनक नाम मनु दिया है। उन्होंने बताया कि जिस दिन वे उस बच्चे से मिले वह ओपीडी में काफी व्यस्त दिन था। जब मनु अंदर आया तो आत्मविश्वास से भरा था। अपने माता-पिता से कहा कि वह डॉक्टर से अकेले बात करना चाहता है। फिर डॉक्टर से कहा, “मैंने आईपैड पर सब कुछ पढ़ा है। मुझे पता है कि मैं छह महीने ही जीवित रहूँगा। मैंने इसे अपने माता-पिता को नहीं बताया है, क्योंकि वे परेशान होंगे। वे मुझे बहुत प्यार करते हैं। कृपया इसके बारे उन्हें न बताएँ।”

लकवाग्रस्त मनु आठ महीने बाद कैंसर से मर गया। जैसा कि डॉक्टर सुधीर ने बताया है उसकी बात सुन वह अंदर तक हिल गए थे। आज उसी तरह उसकी कहानी ने उस समाज को भीतर तक हिला दिया है, जिसने इसी नए साल पर देखा कि एक लड़की कार में फँसकर दिल्ली की सड़कों पर कई किलोमीटर तक घिसटती रही और उसकी दोस्त उसे छोड़ भाग खड़ी हुई। किसी को बताया तक नहीं।

कौशल किशोर उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज से बीजेपी के सांसद हैं। भारत सरकार में राज्यमंत्री हैं। उनका बेटा नशाबाज था। इस देश के उन लाखों माँ-बाप की तरह (जो सोचते हैं कि बिगड़ैल बेटा ब्याह से सही हो जाएगा) कौशल किशोर ने भी बेटे की शादी करवा दी। 2020 में बेटे की मौत हो गई। लेकिन कौशल किशोर इससे टूटे नहीं। नशा मुक्त भारत के संकल्प पर निकल पड़े हैं।

उन्होंने 31 दिसंबर 2022 को एक ट्वीट कर अपनी गलती पर पाश्चाताप तक ​किया। उन्होंने लिखा, “मैंने एक गलती करके अपने नशा करने वाले लड़के की शादी कर दी, जिसकी वजह से आज मेरी बहू विधवा हो गई। अब कोई और लड़की विधवा ना हो इसलिए अपनी लड़कियों की शादी किसी भी नशा करने वाले व्यक्ति से न करें चाहे वह कितने बड़े पद, पोस्ट पर हो और चाहे कितना ही वह अमीर हो।”

जो देश दुनिया की करीब आधी व्हिस्की पी जाता हो, जिस देश की राजधानी में नए साल पर लोग 45 करोड़ रुपए से अधिक की शराब गटक जाते हों, जिस देश में सेलिब्रिटी के लिए नशा उत्पादों का प्रचार नैतिकता का मसला न हो, जिस देश में नेताओं पर नशा माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगता हो, मुझे नहीं पता नशामुक्ति का कौशल किशोर का अभियान कितना कामयाब होगा। लेकिन जिस दौर में राजनीतिक संकीर्णता सामान्य हो चली है, जिस समयकाल में एक मुख्यमंत्री अपने राज में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का दाग धोने को कहता है कि ‘जो पिएगा वो मरेगा’, उस दौर में एक मंत्री की यह स्वीकारोक्ति एक सुखद जिद तो है ही।

यही जिद रवि प्रकाश की पहचान है। पत्रकार रहे तो खबर की तह तक पहुँचने की जिद। जब अंतिम स्टेज में कैंसर का पता चला तो उससे हार न मानने की जिद। जिद भी ऐसी कि 21 कीमोथेरेपी के बाद कैंसर के नाम पत्र लिख दिया। लेकिन कैंसर से कोई शिकायत नहीं की। कैंसर को भी प्रिय कहकर संबोधित किया, गोया कैंसर न होकर ठग्गू के लड्डू हो। लिखा, “तुम्हारे साथ रहते हुए करीब सवा साल गुजर गए। कुछ दिनों के असहनीय कष्टों को भूल जाएँ, तो बाकी के महीने शानदार रहे… तुम कितने अच्छे हो। तुम्हारा शुक्रिया। तुमने मेरी जिंदगी बदल दी है।”

अब 33वीं कीमोथेरेपी के बाद ट्वीट कर कहा है, “मुंबई से राँची वापसी में हम जिंदगी की लीज कम-से कम तीन महीने और बढ़ाने वाली ख़ुशी के साथ झोला भर दवाइयाँ भी अपने साथ लाते हैं। ताकि, जिंदगी की गाड़ी इत्मीनान से चलती रही। जिंदाबाद जिंदगी। जिंदाबाद मेरे डॉक्टर्स।”

मनु हो, कौशल किशोर या रवि प्रकाश ये द्योतक हैं जिंदगी की पवित्रता के। यह पवित्रता ही इस समाज का संबल है। हमारे भीतर के मानवता का बोध है।

कौन जात हो… बिहार ने शुरू की गिनती: ₹500 करोड़ करेगा खर्च, दो चरणों में होगा पूरा; जानें सब कुछ

बिहार में राजद (RJD) और जदयू (JDU) का गठबंधन सरकार बनते ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) जातीय गणना कराने पर सहमति व्यक्ति कर दी थी। इसका काम बिहार में आज शनिवार (7 जनवरी 2023) से शुरू हो गया है। जातीय गणना की माँग RJD विपक्ष में रहते हुए लंबे समय से करती आ रही थी।

500 करोड़ रुपए खर्च कर दो चरणों में गिनती

नीतीश कुमार की विवादास्पद जाति आधारित जनगणना पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकार दो चरणों में इस जनगणना को पूरा करेगी। पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक किया जाएगा। इस दौरान राज्य के सभी घरों की संख्या की गणना की जाएगी।

इसका दूसरा चरण मार्च में शुरू किया जाएगा। इस दौरान सभी जातियों, उप-जातियों और धर्मों के लोगों से संबंधित आँकड़ें एकत्र किए जाएँगे। इस दौरान गणना करने वाले लोग उन सभी लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी दर्ज करेंगे।

पंचायत से जिला स्तर तक के इस आठ स्तरीय सर्वेक्षण में एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा। इस ऐप में स्थान, जाति, परिवार में लोगों की संख्या, उनके पेशे और वार्षिक आय के बारे में प्रश्न होंगे।

जनगणना करने वाले लोगों में शिक्षक, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, मनरेगा (MNREGA) या जीविका कार्यकर्ता शामिल हैं। इन लोगों को जनगणना से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने 15 दिसंबर 2022 से प्रशिक्षण देने के लिए व्यवस्था की थी।

OBC के आँकड़े जुटाने के लिए भारी-भरकम राशि खर्च

बिहार सरकार भाजपा की अगुवाई वाली NDA गठबंधन से अलग होने के बाद अलग राह पर है। इसके पहले केंद्र की भाजपा सरकार ने जातीय जनगणना कराने से इनकार कर दिया था। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने साल 2021 में संसद में कहा था कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को छोड़कर कोई भी जाति आधारित जनगणना नहीं होगी।

बता दें कि आजादी के बाद से भारत में अब तक सात बार जनगणना हो चुकी है। इन सबमें केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आँकड़े प्रकाशित किए हैं। हालाँकि, हर दस साल पर होने वाली इस जनगणना में आँकड़े हर जाति और धर्म के इकट्ठे किए जाते रहे हैं।

सन 1931 की जनगणना में ओबीसी की आबादी 52 फीसदी आँकी गई थी। केंद्र में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने साल 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना कराई थी, लेकिन जाति के आँकड़े जारी नहीं किए गए थे।

उधर, बिहार विधानसभा ने जातिगत जनगणना के पक्ष में साल 2018 और 2019 में सर्वसम्मति से दो प्रस्ताव पारित किए। जून 2022 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार में एक सर्वदलीय बैठक हुई थी, जिसमें भाजपा सहित सभी दलों ने जातिगत जनगणना कराने पर सहमति दी।

अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं

हालाँकि, सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस जातीय गणना में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों और घुसपैठिए रोहिंग्या मुस्लिमों को बाहर रखना होगा। इसका लाभ उन्हें किसी भी तरह नहीं मिलना चाहिए। इसके अलावा, उच्च जाति वाले मुस्लिम खुद को निम्न जाति का बताकर इसका लाभ ना ले सकें, यह भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा।

हालाँकि, बिहार की नीतीश सरकार के पास इन अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं है। यहाँ तक कि केंद्र सरकार ने जब राष्ट्रीय पंजीयन रजिस्टर (NRC) को देश भर में लागू करने की बात कही, तब वोट बैंक को देखते हुए नीतीश कुमार ने इसे लागू करने से साफ मना कर दिया था।

सीएम नीतीश कुमार ने कहा दरभंगा में हायाघाट ब्लॉक के चंदनपट्टी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि बिहार में NRC लागू नहीं किया जाएगा। बता दें कि मिथिलांचल और सीमांचल, बिहार में सबसे अधिक अवैध घुसपैठियों के निवास वाला क्षेत्र है।

जातीय जनगणना के जरिए 2024 लोकसभा की तैयारी

दरअसल, जातिगत जनगणना की माँग करने वालों का तर्क है कि ST, SC को उनकी आबादी के आधार पर आरक्षण दिया गया था, लेकिन OBC के मामले में ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि कोटा को संशोधित करने की जरूरत है और इसके लिए जाति आधारित जनगणना की जरूरत है।

बिहार सरकार का तर्क है कि इन आँकड़ों का इस्तेमाल वह जनोपयोगी नीतियों को बनाने में करेगी। हालाँकि, बिहार सरकार का यह आँकड़ा पूरी तरह राजनीतिक साबित होता है। बिहार सरकार ने यह भी कहा था कि जातिगत आँकड़ों के अभाव में गैर-एसटी/एसटी से अलग अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सही जनसंख्या का पता नहीं चल पा रहा है।

बता दें कि बिहार में कभी चिर प्रतिद्वंद्वी रहे राजद के लालू प्रसाद यादव और जदयू के नीतीश कुमार की राजनीति ही अन्य पिछड़ा वर्ग पर टिकी हुई है। जहाँ राजद के लिए अहीर प्रमुख वोट बैंक हैं, वहीं जदयू के लिए कुर्मी। अगर OBC के सही आँकड़े सामने आते हैं तो इन दोनों दलों को अपनी राजनीतिक गोटियाँ सेट करने में मदद मिल जाएगी।

दरअसल, नीतीश कुमार केंद्र में खुद को देखने के लिए लालायित हैं। ऐसे में बिहार में जातिगत जनगणना कराकर वे 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे राजनीतिक एजेेंडे के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। इससे भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान भी हो सकता है।

1990 के दशक में लागू हुआ था मंडल कमीशन

बता दें कि साल 1990 के दशक में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल की सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करते हुए OBC आरक्षण को लागू किया था। इस समय भाजपा जनता दल सरकार के साथ गठबंधन में थी। चुनाव से पहले ही उन्होंने इसे लागू करने का वादा किया था और सरकार बनते ही इस पर काम शुरू कर दिया था।

उस दौरान वीपी सिंह ने तर्क दिया था कि सरकारी नौकरियों में एक ही जाति के वर्चस्व को तोड़ने और सबको समान अवसर देने के लिए मंडल कमीशन लागू किया गया है। हालाँकि, कमीशन की सिफारिशें लागू होते ही भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया था और देश भर में राम मंदिर के लिए रथयात्रा की शुरुआत की थी।

18 साल की उम्र में फाँसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी: सावरकर भाइयों से प्रेरित हुए तो धधकी आज़ादी वाली आग, छद्म ‘वैदिक’ अंग्रेज कलक्टर को उतारा था मौत के घाट

यह उन दिनों की बात है जब भारत की राजनीति में दो मुख्य विचारधाराएँ उभर रही थीं। जहाँ कॉन्ग्रेस अपने प्रस्तावों के द्वारा भारतवासियों के लिए अधिक से अधिक अधिकारों की माँग कर रही थी, और वहीं क्रांति की मशाल जलाए कुछ जाँबाज क्रांतिदूत अलग ही मन बनाए बैठे थे। इन दीवाने युवकों का मानना था कि सशस्त्र विद्रोह के ज़रिये ही अंग्रेज़ों की सत्ता उखाड़ी जा सकती है। आगे चलकर जब अंग्रेज़ सरकार हिन्दू और मुस्लिमों में मतभेद पैदा करने के लिए 1905 में ‘बंगाल का विभाजन’ करती है तो सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन को इससे और भी बल मिलता है।

महाराष्ट्र में ‘अभिनव भारत’ नाम का युवकों का संगठन बनता है और वे अखाड़ों के माध्यम से वे क्रांति की भावना फैलाने में जुट जाते हैं। ‘वीर’ विनायक दामोदर सावरकर और उनके भाई गणेश सावरकर इस संगठन के प्रमुख व्यक्ति थे। आंदोलन से प्रभावित हो एक युवक अनंत लक्ष्मण कन्हेरे भी इस मंडली में सम्मिलित हो जाता है। आंदोलन के चलते अब सावरकर पर कड़ी नज़र रखी जाने लगी थी। सावरकर के लंदन प्रवास के अंतिम दिनों में भारत में उनके परिवार पर अंग्रेजों ने कहर ढा रखा था।

परिवार विपत्तियों का पहाड़ टूटा पड़ रहा था। एक अंग्रेज़ अधिकारी जैक्सन क्रांतिकारियों के ऊपर नज़र रखता था। वह लोगों से मराठी में बात करने के अलावा उनसे संस्कृत के बारे में भी अक्सर चर्चा करता था। वह लोगों को यह कहकर फुसलाता था कि वो पूर्व जन्म में वैदिक-साक्षर ब्राह्मण था। इसी जैक्सन की वजह से बाबासाहब को नवम्बर माह में गिरफ़्तार किया गया था। दोष उनका सिर्फ इतना ही था कि उन्होंने कवि गोविंद की कविताओं की एक पुस्तक का प्रकाशन करवाया था।

किसी न किसी के सीने में तो आग लगनी ही थी। चिंगारी तो कई सीनों में भड़क रही थी लेकिन इस बार शोले भड़के थे अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के सीने के अंदर। कृष्णजी कर्वे के नेतृत्व में एक क्रांतिकारी गुट जैक्सन को सज़ा देने का मन बना लेता है। तभी जैक्सन को मुंबई के आयुक्त के पद पर पदोन्नत किए जाने की ख़बर आती है। कृष्णाजी कर्वे, विनायक देशपांडे और अनंत कन्हेरे जैक्सन के स्थानांतरण से पहले ही उसे उसे ख़त्म करने का फ़ैसला लेते हैं।

पता लगता है कि नासिक निवासीगण, विजयानंद थिएटर में जैक्सन के लिए विदाई समारोह का आयोजन करने वाले हैं। अनंत ख़ुद जैक्सन को मारने की ज़िम्मेदारी लेते हैं। अपने अन्य सहयोगियों को पकड़े जाने से बचाने के लिए आत्महत्या करने का फ़ैसला करते हुए अनंत ने अपने पास ज़हर भी रख लिया था। योजना यह थी कि अनंत का प्रयास विफल होने पर विनायक जैक्सन को गोली मारेगा। अगर ये दोनों विफल रहे तो कर्वे के पास हथियार भी था।

21 दिसंबर, 1909 को, जब जैक्सन नाटक देखने पहुँचा तो अनंत ने सामने से आकर पिस्तौल से उन पर चार गोलियाँ चला दीं। भारतीय अधिकारियों में से एक, पलशीकर और मारुतराव ने वहाँ मौजूद अन्य लोगों की सहायता से अनंत को पकड़ लिया। अनंत ना तो खुद को गोली मार पाए और ना ज़हर खा पाए। मात्र अठारह वर्ष के थे अनंत उस समय, मात्र अठारह वर्ष! केस चला तो अनंत ने हत्या में अपनी भूमिका ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर ली।

19 अप्रैल, 1910 को ठाणे जेल में अनंत के साथ कृष्णाजी कर्वे और विनायक देशपांडे को भी फाँसी पर चढ़ा दिया गया। मामले के अन्य आरोपियों शंकर रामचंद्र सोमन, नारायण जोशी और गणेश बालाजी वैद्य को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी। दत्तात्रेय पांडुरंग जोशी को दो साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गयी थी। हैवानियत की हद यह है अंग्रेज़ों की कि इन बलिदानियों की अस्थियों को भी उनके रिश्तेदारों को नहीं सौंपा गया था, बल्कि ठाणे के पास समुद्र में फेंक दिया गया था।

(भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला में पढ़ सकते हैं, जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई हैं।)

कर्णप्रयाग के घरों में भी जोशीमठ की तरह दरारें, उत्तरकाशी के एक गाँव में खेत-खलिहान भी धँस रहे: मोदी सरकार ने अध्ययन के लिए भेजा दल

उत्तराखंड (Uttarakhand) प्राकृतिक आपदा के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। जोशीमठ (Joshimath) के बाद अब कर्णप्रयाग (Karnaprayag) में भी लोगों के घरों में दरारें पड़ने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। भूमि धँसने और भूस्खलन के कारण इस पहाड़ी राज्य के कई क्षेत्रों में पड़ रही दरारों से लोग भय की स्थिति में जी रहे हैं। वे किसी प्राकृतिक आपदा को लेकर भयभीत हैं।

कर्णप्रयाग के बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड और सब्जी मंडी के ऊपरी भाग में रहने वाले 50 से अधिक परिवारों के घरों में दरारें आ गई हैं। यहाँ बरसात के मौसम में भू-धंसाव देखने को मिला था। अब जोशीमठ की तरह यहाँ के घरों में भी दरारें पड़ने लगी हैं।

बदरीनाथ हाईवे के किनारे बसे इस क्षेत्र के लगभग 25 मकानों में 2 फीट तक दरारें पड़ी हैं। ऐसे घरों में रहने वाले कई परिवारों ने खतरे को देखते हुए इसे छोड़ दिया है। वहीं, अभी भी कुछ परिवार इन घरों में रहने को विवश हैं, लेकिन हर पल इन्हें डर का अहसास होते रहता है।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एमएस बुटोला के अनुसार, इस क्षेत्र का दो बार प्रशासन के अलावा रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। कर्णप्रयाग के प्रभावित इलाके के आसपास के लिए ट्रीटमेंट का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। भूगर्भीय सर्वे भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि पैसा स्वीकृत होते ही जल्दी काम शुरू करवाया जाएगा। 

इसी तरह उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गाँव भी 31 वर्षों से भू-धंसाव की मार झेल रहा है। यहाँ के घर ही नहीं, रास्ते और खेत-खलिहान भी धँस रहे हैं। साल 1991 में आए भूकंप के बाद से यह स्थिति शुरू हुई थी। भूकंप में गाँव के लगभग सभी मकान ध्वस्त हो गए थे। इसके बाद साल 1997 में प्रशासन ने यहाँ का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया था।

रिपोर्ट में कहा था कि भू-धंसाव वाले क्षेत्र में सर्वेक्षण कराकर चेकडैम, सुरक्षा दीवार का निर्माण और पौधा रोपण कराया जाए। मकानों के चारों ओर पक्की नालियों का निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। हालाँकि, इस तरह का कोई उपाय नहीं किए गए।

इसको देखते हुए वहाँ के ग्रामीण विस्थापन के लिए लंबे समय से माँग कर रहे हैं, जो अब तक लटका हुआ है। हालाँकि, जोशीमठ की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने कहा है कि विस्थापन के लिए भूमि का चुनाव कर लिया गया है और भूगर्भीय सर्वे के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि जोशीमठ में भूमि धँसने की घटना के बाद प्रशासन एक-घर का सर्वे करा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह विस्थापित भी किया जा रहा है। इन लोगों को दूसरी जगह किराए पर मकान लेने के लिए राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 4,000 रुपए महीने अगले 6 महीने तक देने का ऐलान भी किया है।

उधर, केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार (6 जनवकी 2023) को जोशीमठ में भू-धंसाव का तेजी से अध्ययन करने के लिए एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में पर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के प्रतिनिधि शामिल हैं।

एयर इंडिया की फ्लाइट में महिला यात्री पर पेशाब करने वाला शंकर मिश्रा गिरफ्तार, पिता ने किया बेटे को ब्लैकमेल किए जाने का दावा

शंकर मिश्रा गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर एयर इंडिया की फ्लाइट में महिला सहयात्री पर पेशाब करने का आरोप है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से उसे बंगलुरु से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। एयर इंडिया की अमेरिका से दिल्ली आ रही उड़ान में 26 नवंबर 2022 को यह घटना हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि उसे शुक्रवार (6 जनवरी 2023) की रात गिरफ्तार किया गया। उसे आज कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद से मिश्रा फरार था। अपने वकीलों के जरिए बयान जारी कर उसने मुआवजा देकर मामला सुलझाने का दावा किया था।

वहीं उसके पिता श्याम मिश्रा ने अपने बेटे को ब्लैकमेल किए जाने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पीड़ित महिला ने भुगतान की डिमांड की थी, जो पूरी कर दी गई थी। उसके बाद अचानक से उसने शिकायत की है। ऐसा लगता है कि कुछ और माँग भी रही होगी जो पूरी नहीं हुई और वह ब्लैकमेलिंग पर उतर गई होगी।

इस घटना की वजह से 34 वर्षीय मिश्रा को वेल्स फार्गो ने नौकरी से भी निकाल दिया है। अमेरिका की इस बहुराष्ट्रीय कंपनी में वह भारत का उपाध्यक्ष था। कंपनी ने कहा है, “वेल्स फार्गो कर्मचारियों को पेशेवर और व्यक्तिगत व्यवहार के उच्चतम मानकों के अनुरूप रखता है। ये आरोप बेहद परेशान करने वाला हैं। इस व्यक्ति को वेल्स फार्गो से निकाल दिया गया है। हम कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग कर रहे हैं।”

दिल्ली पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ IPC की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत), 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक इरादा), 509 (शब्द, हावभाव या कृत्य से महिला के अपमान का इरादा), 510 (शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक तौर पर दुराचार) के साथ-साथ विमानन नियमों के तहत मुकदमा दर्ज कर रखा है।

शंकर मिश्रा पर न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में शराब के नशे में धुत होकर बुजुर्ग महिला सहयात्री के सामने जिप खोलने और उनके ऊपर पेशाब करने का आरोप है। महिला ने बताया था कि भोजन परोसे जाने और फ्लाइट के अंदर की रोशनी कम किए जाने के बाद यह घटना हुई। इस मामले में एयर इंडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक क्रू मेंबर्स ने पीड़ित महिला की इच्छा के विरुद्ध उसे मिश्रा से बात कर मामले को सुलझाने को मजबूर किया था। इस दौरान महिला को देख मिश्रा रोने लगा और बाल बच्चों की दुहाई दे गिड़गिड़ाते हुए माफी माँगी।