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‘कॉन्ग्रेस के समय चीन ने हड़पी हजारों हेक्टेयर जमीन, नेहरू ने भेंट कर दी UN सुरक्षा परिषद की सीट’: तवांग संघर्ष पर बोले अमित शाह – एक इंच जमीन नहीं देंगे

अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने संसद में जमकर हंगामा किया। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के शासन में चीन ने हजारों किलोमीटर जमीन हड़प ली थी। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को चीन से मिलने वाले फंड को लेकर भी निशाना साधा है।

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के हंगामा की निंदा की। उन्होंने कहा, “विपक्ष ने अरुणाचल में घटी घटनाओं का हवाला देते हुए बहुमूल्य प्रश्नकाल को स्थगित करवा दिया। यह निंदनीय है। इसका कोई औचित्य नहीं था। जब रक्षा मंत्री ने इस विषय पर अपना बयान रखने की बात कर ही दी, तो इसका कोई औचित्य ही नहीं था। मुझे आश्चर्य लगा, लेकिन जब प्रश्नकाल की सूची देखा तो 5 नंबर का प्रश्न देखकर मैं इनकी चिंता समझ गया था।”

उन्होंने यह भी कहा, “पाँचवा प्रश्न राजीव गाँधी फाउंडेशन के FCRA रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के बारे में था। राजीव गाँधी फाउंडेशन को 2005-6 और 2006-7 के वित्तीय वर्ष में चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ था, जो FCRA कानून और उसकी मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। इस पर नोटिस देकर पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए गृह मंत्रालय ने इसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया।”

उन्होंने आगे कहा कि ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ ने अपना रजिस्ट्रेशन सामाजिक कार्यों के लिए करवाया था और उसे जो फंड चीनी दूतावास से मिला, बताया गया कि वह भारत-चीन संबंधों के विकास पर शोध करने के लिए मिला है। अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी बताए कि इन्होंने शोध तो जरूर किया होगा।

गृह मंत्री ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे कहा, “क्या उनके शोध में 1962 में भारत की हजारों हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली, वो शामिल था क्या? यदि शोध किया तो रिपोर्ट क्या आई है? नेहरू जी के प्रेम के कारण सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता बलि चढ़ गई। इस विषय को उन्होंने शोध का विषय बनाया था क्या? अगर बनाया था तो इसका नतीजा क्या हुआ?”

अमित शाह ने यह भी कहा, “जिस समय गलवान घाटी में हमारे सेना के वीर जवान चीनियों से भीड़ रहे थे, उस समय चीनी दूतावास के अधिकारियों को कौन रात्रि भोज दे रहा था? वो उनकी शोध का विषय था क्या? अगर था तो उसका नतीजा क्या हुआ?”

उन्होंने यह भी कहा कि वह कॉन्ग्रेस को बताना चाहते हैं, दोहरा और दोगला चरित्र जनता के सामने नहीं चलता है, जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा, “आपके परिवार (गाँधी परिवार) द्वारा चलाया गया फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन चीनी दूतावास द्वारा लिए गए फंड के कारण कैसिंल किया गया। कॉन्ग्रेस के समय में ही, देश की हजारों हेक्टेयर जमीन हड़प ली गई। कॉन्ग्रेस की सरकार के समय में ही निजी संबंधों को बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता चीन को भेंट कर दी गई।”

अमित शाह ने यह भी कहा है कि ये बीजेपी की सरकार है मोदी इसके पीएम हैं जब तक बीजेपी की मोदी सरकार चल रही है एक इंच जमीन पर भी कोई कब्जा नहीं कर सकता। चीनी सेना के विरुद्ध भारतीय सेना के जवानों ने जो वीरता दिखाई है और घुसपैठ कर रहे सैनिकों को कुछ ही घण्टों में भगा दिया, वह उसकी प्रशंसा करते हैं। इसके अलावा उन्होंने, कहा है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने भगोड़े जाकिर नाइक की संस्था से भी 50 लाख रुपए लिए थे, इसलिए भी रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया।

राहुल गाँधी गो बैक… राजस्थान में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का कुछ यूँ स्वागत कर रहे ग्रामीण: कहीं कॉन्ग्रेस MLA का हो विरोध तो कहीं दीवारों पर लिखे नारे

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का मंगलवार (13 दिसंबर, 2022) राजस्थान में 9वाँ दिन है। राज्य में सवाई माधोपुर जिले में खंडार के जीनापुर से शुरू हुई यह यात्रा आज 22.4 किलोमीटर का सफर तय ​करेगी। इस बीच दौसा पहुँचने से पहले राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का विरोध करने की खबर सामने आई है। दौसा जिला मुख्यालय पर सड़कों के किनारे और पुलिया के नीचे कई जगहों ‘राहुल गाँधी गो बैक’ के नारे लिखे गए हैं।

वहीं, दौसा के बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जयपुर के लिए निकल रहे हाईवे पर श्यामसिंह पुरा और द्वारापुरा के मध्य कट की माँग की है। उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक जी आर खटाणा को चेतावनी दी है कि अगर उनकी माँगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो वे मिलकर राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का विरोध करेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की यात्रा के बीच में आने वाली दीवारों पर काली स्याही से लिखा है, “राहुल गाँधी GO BACK, जितेंद्र मेघवाल को न्याय दो। कार्तिक भील को न्याय दो। इंद्र कुमार मेघवाल को न्याय दो। ओमप्रकाश रैगर को न्याय दो।” बताया जा रहा है कि ‘भीम आर्मी’ ने राहुल के खिलाफ ये नारे लिखवाए हैं।

उधर दौसा के बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने सभा का आयोजन किया है। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र में एक भी कट नहीं दिया गया, जबकि विश्व प्रसिद्ध आभानेरी की चाँद बावड़ी बाँदीकुई क्षेत्र में स्थित है। वहीं दिल्ली से मेहँदीपुर बालाजी आने-जाने वाले लोग भी बड़ी तादाद में यहाँ से होकर आते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में हाईवे पर कट नहीं होने से उन्हें परेशानी होगी और उनको घूमकर आना पड़ेगा। ऐसे में यहाँ कट देना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों की सभा में पहुँचे कॉन्ग्रेस विधायक जी आर खटाणा को भी उनके विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने फोन पर दौसा से भाजपा सांसद जसकौर मीणा से बात की और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। जसकौर मीणा ने लोगों को फोन पर भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को वह लोकसभा में उठाएँगी और उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान भी होगा।

बता दें कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और उनकी बेटी मिराया वाड्रा भी नजर आईं।

तवांग में चीन के 300 फौजी, कीलों वाला डंडा-मंकी फिस्ट-टेजर गन लेकर आए थे; 17000 फीट की ऊँचाई पर भारत के 50 सैनिकों ने ही रोक दिया रास्ता

चीन के फौजियों ने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में एलएसी को पार करने की कोशिश की थी। लेकिन 17000 फीट की ऊँचाई पर भारतीय सैनिकों ने ही उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चीन की फौज को वापस होने के लिए मजबूर कर दिया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार चीन के 300 से अधिक फौजी इसमें शामिल थे। लेकिन भारत के 50 सैनिकों ने ही उनका रास्ता रोक दिया। करीब आधे घंटे के भीतर ही भारतीय सेना की बैकअप टीम भी मौके पर पहुँच गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच झड़प हुई और चीनी फौजियों को लौटना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार तवांग सेक्टर में जो कुछ हुआ वह चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सोची-समझी साजिश थी। चीनी फौजी कीलों वाले डंडे, मंकी फिस्ट और टेजर गन जैसे घातक हथियारों से लैस थे। इन हथियारों से भले किसी की जान न जाए लेकिन ये इतने घातक होते हैं कि इनकी चपेट में आने के बाद गहरी चोट आ सकती है। मंकी फिस्ट लोहे या पत्थर का बना होता है। इसे कलाई पर पहना जाता है। वहीं टेजर गन के झटके से सामने वाले को कुछ देर के लिए सुन्न किया जा सकता है। इस दौरान झटका खाना वाला व्यक्ति कुछ भी करने में सक्षम नहीं होता।

भारतीय सेना ने 12 दिसंबर को जारी बयान में कहा था, “शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को, चीनी सेना के सैनिकों ने तवांग सेक्टर में एलएसी को पार करने की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने दृढ़ता और मजबूती के साथ इसका मुकाबला किया। आमने-सामने की इस लड़ाई में दोनों पक्षों के कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आईं हैं। हालाँकि, अब दोनों पक्ष पीछे हट गए हैं। घटना के बाद कार्रवाई के रूप में, क्षेत्र में भारतीय कमांडर ने शांति बहाल करने के लिए चीनी कमांडर के साथ फ्लैग मीटिंग की है।”

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार (13 दिसंबर 2022) को चीन की इस हरकत पर संसद में बयान दिया है। उन्होंने बताया कि चीन की फ़ौज ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में सीमा (Line Of Actual Control) पर अतिक्रमण कर के यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने का प्रयास किया। इस दौरान हुए संघर्ष में भारतीय सेना ने चीनी फौजियों को वापस अपने पोस्ट्स पर जाने को मजबूर कर दिया। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि दोनों तरफ से कुछ सैनिकों को चोटें भी आई हैं। भारत सरकार की तरफ से उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष में न तो हमारे किसी सैनिक की मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है।

उन्होंने बताया, “भारतीय सैन्य कमांडरों के त्वरित हस्तक्षेप के कारण PLA के सैनिक वापस अपनी जगह पर चले गए। घटना के बाद क्षेत्र के एरिया कमांडर ने 11 दिसंबर, 2022 को अपनी चीनी समकक्षों के साथ स्थापित व्यवस्था के तहत एक फ्लैग मीटिंग की, जिसमें इस घटना पर चर्चा हुई। चीनी पक्ष को मना किया गया कि वो इस तरह की हरकतें न करें। उन्हें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए भी कहा गया। चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है।”

गौरतलब है कि चीन ने ऐसा ही हमला साल 2020 में भी किया था। तब भी चीनी फौजी ऐसे ही हथियारों के साथ आए थे। उस समय भी भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया था। साल 2020 में चीन ने दो बार घुसपैठ की कोशिश की थी। पहली बार 21 मई 2020 और फिर 15 जून 2020। गलवान में 15 जून को हुई हाथापाई हिंसक झड़प में बदल गई थी। इसमें कर्नल संतोष बाबू समेत भारत के 20 जवान बलिदान हो गए थे।

ग़ालिब की शायरी से भगवान गणेश की ‘पूजा’, नायक को ‘कूल’ बनाने के लिए नास्तिक दिखाया: SonyLiv की वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में हिन्दू घृणा

बॉलीवुड की फिल्मों की ही तरह वेब सीरीज भी हिंदुओं की मान्यताओं और उनके आराध्यों का मजाक उड़ाने वाली परंपरा को आगे बढ़ा रही है। हाल ही में SonyLIV पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में भी भगवान गणेश की पूजा का मजाक उड़ाया जा रहा है। भगवान गणेश की पूजा मंत्रों से नहीं बल्कि, गालिब के शेरों से की जा रही है।

इस दृश्य का कहानी के मूल भाव से कोई संबंध नहीं है। यह दृश्य हास्य के लिए ही डाला गया है। हास्य के लिए यदि कुछ न सूझ रहा हो तो सबसे आसान है हिंदू देवी-देवताओं का मजाक बना दीजिए। बॉलीवुड की फिल्म पीके समेत कई फिल्मों में यह प्रयोग हो चुका है। प्रयोग इतना सफल रहा है कि हम जिन आराध्यों के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते ,हैं उन्हीं का मजाक उड़ाए जाने पर ताली पीटते हैं और ठहाके लगाकर घर लौट आते हैं।

अब ‘फाड़ू’ वेब सीरीज पर आते हैं। इसे ‘सोनी लिव’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है। इस वेब सीरीज के निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी हैं और लेखक सौम्य जोशी हैं। वेब सीरीज का टाइटल ‘फाड़ू – अ लव स्टोरी’ के नाम पर न जाएँ। शुरुआत के 2 एपिसोड के बाद कहानी अपने नाम से भटक जाती है और किसी कॉर्पोरेट ड्रामा की तरह आगे चलती है। वेब सीरीज में ऐसी प्रेम कहनी दिखाई गई है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल होगा। क्योंकि, ऐसा कम ही होता है कि एक जमीन-जायदाद-खेतीबाड़ी वाला पिता अपनी बेटी को झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लड़के से प्यार करने और घर बसाने से नहीं रोकता।

एक दृश्य में नायिका के पिता बेटी के परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि रिजल्ट अच्छा हो, इस दृश्य में नायिका के पिता भगवान को गालिब के शेर सुना रहे हैं। संभवतः, हास्य के लिए इस तरह का दृश्य फिल्माया गया होगा। जो शेर भगवान को सुनाया जा रहा है उसको देखिए-

ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे

इस शेर को भी बहुत शोध के बाद चुना गया है। इसमें काबा और कलीसा जैसे शब्द हैं। काबा मक्का की प्रसिद्ध मस्जिद है जहाँ मुस्लिम हज करने जाते हैं। कलीसा ईसाइयों और यहूदियों का गिरजाघर (चर्च) है। यही प्रयोग किसी मस्जिद में हनुमान चलीसा का दृश्य फिल्माकर या गणेश स्तुती के साथ क्यों नहीं किया जाता?

इसी दृश्य में एक संवाद भी है। पास खड़ा व्यक्ति जब उन्हें टोकता है कि आज तो शास्त्रीय पूजा कर लीजिए, इस पर नायिका के पिता जवाब देते हैं, “अरे… बप्पा (भगवान गणेश) को गालिब सुना रहा हूँ, यह भी तो एक प्रकार की पूजा ही है न?” बप्पा को गालिब सुनाना कौन से प्रकार की पूजा है? कहाँ इसके प्रमाण हैं? यह दृश्य शुद्ध रूप से एक पूजा पद्धति को दूषित करने का प्रयास है। कई दृश्यों में नायक के पिता जब भगवान का आशीर्वाद लेने को कहते हैं तो नायक औपचारिकता भर कर लेता है। इसे उभारा गया है। नायक के ईश्वर के प्रति अविश्वास को दिखाया गया है।

आगे भी पूरे वेब सीरीज में ऐसा लगता है कि कहानी को जबरन थोपा जा रहा है। कोंकण के एक गाँव में रहने वाली नायिका मंजरी (संयमी खेर) का पोस्टमास्टर पिता बेटी को कविता और साहित्य पढ़ने के लिए मुंबई के कॉलेज में भेजता है। वहीं, मुंबई की झुग्गियों में ऑटोरिक्शा चलाने वाले पिता का बेटा अभय दुबे (पावेल गुलाटी) मंजरी की क्लास में है। मंजरी को अभय से प्यार होता है और चिट्ठियों में मंजरी सब कुछ पिता को बताती जाती है।

दोनों का विवाह हो जाता है। यहाँ तक ‘फाड़ू’ में लव स्टोरी नजर आती है। इसके बाद कहानी में आखिर तक स्टोरी का ट्रैक बदल जाता है और उसमें से लव गायब हो जाता है। अभय को करोड़पति बनना है। यहाँ यह भी समझ से परे है कि व्यापार करने में माहिर लड़का साहित्य के क्लास में दाखिला क्यों लेता है?

सीरीज के सारे पात्र और घटनाएँ इसी बात के इर्द-गिर्द घूमने लगती हैं कि कैसे अभय मुंबई की झुग्गी से निकाल कर परिवार को एक भव्य सोसाइटी में ले जाएगा। लिटरेचर पढ़ते हुए वह अचानक बिजनेस-मार्केटिंग में अपने जबर्दस्त काबलियत से पैसे वालों को चमकाने लगता है। कहानी अभय के पैसा कमाने और रईस बनने पर फोकस हो जाती है।

11 एपिसोड वाली लंबी वेब सीरीज देखने के बाद आपको लग सकता है कि कुछ घटनाएँ और किरदार बेवजह थे। सीरीज में एक लंबा ट्रेक बी ग्रेड फिल्मों के प्रोड्यूसर का है। उसका आना और जाना मूल कहानी में कुछ नहीं जोड़ता। जैसे गणपति के सामने गालिब के शेर पढ़ा लेने से कुछ नहीं बदलता। ऐसा लगा वेब सीरीज के निर्माता इसे खींचने में लगे रहे। वेब सीरीज में नायक को नास्तिक की भाँति दिखाने की कोशिश हुई है।

हमारे देश में शुरू से ही फिल्मों का इस्तेमाल परसेप्शन (Perception) बनाने के लिए किया जाता रहा है। यह बॉलीवुड की ही देन है कि हमारे पहनावे, श्रृंगार का तरीका और परंपराओं को लेकर नौजवानों के मन में विकृति पैदा कर दी गई। फिल्मों में मान्यताओं का जिस तरह से कुतर्क के आधार पर एकतरफा मजाक बनाया गया, वह खेल आज भी जारी है। ठाकुरों और गाँव के ब्राह्मणों को खलनायक की भूमिका में दिखाने वाला बॉलीवुड महादेव के दुग्धाभिषेक पर सवाल खड़े कर देता है लेकिन अन्य धर्म की विकृतियों को भी सकारात्मक रुप से परोसने की कोशिश करता है। भगवान गणेश के सामने गालिब के शेर पढ़े जा सकते हैं लेकिन इनकी हिम्मत नहीं कि किसी मस्जिद के सामने गणेश वंदना फिल्मा सकें।

साल भर में 7 करोड़ श्रद्धालु, 500% बढ़ा चढ़ावा: 13 दिसंबर को ही राष्ट्र को PM मोदी ने समर्पित किया था श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 के 13 दिसंबर को श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (Shri Kashi Vishwanath Corridor) राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके साल भर पूरे होने पर मंदिर प्रशासन की ओर से बाबा का दरबार सजाया गया है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। बताया जा रहा है कि लोकार्पण के बाद से अब तक मंदिर में 7.35 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुँचे हैं।

यही नहीं साल भर में शिव भक्तों ने रिकॉर्ड तोड़ 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का चढ़ावा भी चढ़ाया है। इसमें 60 किलो सोना, 10 किलो चाँदी और 1500 किलो तांबा और अन्य धातुओं का चढ़ावा भी है। यह मंदिर के इतिहास में सबसे अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 500 प्रतिशत से अधिक है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा के अनुसार, बाबा के दरबार में लोकार्पण से अब तक श्रद्धालुओं ने करीब 50 करोड़ से अधिक की नकदी का चढ़ावा चढ़ाया है। इसमें से 40 प्रतिशत धनराशि ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुई है।

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का नया और भव्य स्वरूप होने के कारण बनारस में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। इसके चलते परिवहन, होटल, गेस्टहाउस, नाविकों, श्रमिकों, वस्त्र उद्योग, हेंडीक्राफ्ट व अन्य व्यवसाय से अर्थव्यवस्था भी रफ्तार पकड़ रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि पहले एक साल में काशी में 1 करोड़ पर्यटक आते थे, लेकिन अब एक महीने में ही इतने पर्यटक आ रहे हैं।

4 से 5 साल में निकल जाएगा खर्च

ऐसा माना जा रहा है कि 4 से 5 साल में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण का खर्च निकल जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया, “श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और मुआवजे में तकरीबन 900 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। आने वाले समय में धाम में सुविधाओं के विस्तार से भक्तों की संख्या बढ़ना निश्चित है, जिससे शिवभक्तों की ओर से चढ़ावा भी बढ़ेगा। चढ़ावे के अलावा कॉरिडोर में बने भवनों से भी अतिरिक्त आय होगी।” उनके मुताबिक कॉरिडोर की लागत अगले 4 से 5 साल में भक्तों के चढ़ावे और परिसर में नवनिर्मित भवनों से होने वाली आय से पूरी कर ली जाएगी। मालूम हो कि धाम परिसर के चारों द्वार पर लगे हेड स्कैनिंग मशीन के जरिए नियमित अंतराल पर श्रद्धालुओं की गिनती की जाती है।

5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है कॉरिडोर

बता दें कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर 2021 को देश को समर्पित किया था। प्रधानमंत्री ने 8 मार्च 2019 को इस कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी। यह कॉरिडोर 5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है। इसमें 33,075 वर्ग फीट में काशी विश्वनाथ मंदिर का परिसर है। इस कॉरिडोर में एक साथ 02 लाख लोग जमा हो सकते हैं। निर्माण में मकराना, चुनार के लाल बलुआ पत्थर समेत 7 विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। विश्राम गृह, संग्रहालय, सुरक्षा कक्ष और पुस्तकालय भी कॉरिडोर का हिस्सा हैं।

‘भारतीय सेना हिंदुत्व आतंकवादी, नेवी-एयरफोर्स ने हजारों सिखों को मारा-हमारे धर्मस्थल बर्बाद किए’: झारखंड के गुरुद्वारा में पोस्टर

“सिखों के पवित्र धर्मस्थल और सबसे बड़ी अथॉरिटी श्री अकाल तख्त साहिब को हिंदुत्व आतंकी भारतीय सेना ने अपने टैंको से बर्बाद कर दिया। ज्यादा से ज्यादा बर्बादी और हजारों सिखों की हत्या के लिए वायुसेना और नौसेना का भी प्रयोग किया गया। रसायनिक हथियार भी इस्तेमाल किए गए। सिखों के पवित्र धर्मस्थल को मौत का मैदान बना दिया गया।”

झारखंड के गुरुद्वारे में लगे खालिस्तानी पोस्टर पर यही लिखा हुआ है

झारखंड में एक शहर है – जमशेदपुर। इस शहर का एक इलाका है – मानगो। यहाँ एक गुरुद्वारा है। गुरुद्वारे में कई पोस्टर लगे हैं। एक पोस्टर में भारतीय सेना को ‘हिंदुत्व आतंकवादी’ बताया गया है। भारतीय वायुसेना और नौसेना को भी हत्यारा बताया गया है। सबसे ऊपर जो लाइनें लिखी गई हैं, वो उसी पोस्टर की हैं।

जमशेदपुर के मानगो गुरुद्वारा के लिए भारतीय सेना आतंकी और जरनैल सिंह शहीद

जमशेदपुर स्थित जिस मानगो गुरुद्वारा में भारतीय सेना के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, उस पोस्टर में खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह को बगल में खड़ा कर हीरो और किसी संत-ज्ञानी की तरह दिखाया गया है। इस आतंकी की फोटो के नीचे इसे ‘महान शहीद’ भी बताया गया है।

इसी गुरुद्वारे के दूसरे पोस्टरों में कई खालिस्तानी आतंकियों का महिमामंडन किया गया है। इनमें से कुछ नाम हैं – जनरल शाबेग सिंह, भाई केहर सिंह, भाई सतवंत सिंह, जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआना, दविंदर पाल सिंह भुल्लर, दिलावर सिंह बब्बर… आदि।

हर एक खालिस्तानी आतंकी जमशेदपुर के मानगो गुरुद्वारे की ‘शान’

इन पोस्टरों से संबंधित जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने जमशेदपुर के स्थानीय लोगों से बात की। प्राइवेट सेक्टर के एक बैंक में काम करने वाले मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन पोस्टरों को देख कर वह आश्चर्य में पड़ गए थे। उन्होंने कहा, “एक दोस्त की नानी के निधन पर श्राद्ध-भोज में गया था। पोस्टर देख कर दिमाग घूम गया था। बैंक के ही अपने एक सहकर्मी से इसकी चर्चा भी की। आश्चर्य यह है कि अभी तक इस तरह के देशद्रोही हरकत के विरुद्ध न तो मीडिया-कवरेज मिला, न ही प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई हुई।”

विश्व हिंदू परिषद (झारखंड यूनिट) के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजय कुमार से भी इस मामले पर हमने बात की। उन्होंने बताया कि इन पोस्टरों के लगाए जाने के बाद जमशेदपुर में इसका विरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मानगो गुरुद्वारा के प्रबंधन ने विश्व हिंदू परिषद के जमशेदपुर स्थित जिला पदाधिकारियों के विरोध दर्ज कराए जाने के बावजूद इन पोस्टरों को हटाने से इनकार कर दिया।

संजय कुमार ने इन पोस्टरों को लेकर कहा कि यह देश-विरोधी गतिविधि है। उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी है लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उनके अनुसार, जमशेदुपर के मानगो पुलिस थाने ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गुरुद्वारे के इस हरकत को लेकर कभी कार्रवाई नहीं की।

ऑपइंडिया ने जब इस बाबत मानगो गुरुद्वारे के सदस्य सरदार भगवान सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि किसने ऐसा किया। हिन्दू संगठनों के विरोध पर भी पोस्टर न हटाने और भारतीय सेना से क्या दुश्मनी के सवाल पर भगवान सिंह ने ‘मैं दिखवाता हूँ’ कह कर फोन काट दिया।

‘झारखंड गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी’ के अध्यक्ष सरदार शैलेन्द्र सिंह ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “भिंडरवाला की फोटो लगी है, जिसे सिख समुदाय शहीद मानता है। शायद वो आप लोगों के लिए आतंकी होगा, लेकिन सिखों के लिए नहीं। आजकल उसकी फोटो बाजारों में मिलती है। उसकी तस्वीर को सिखों के सैकड़ों शहीदों के बीच जगह दी गई है। रही बात आर्मी के अपमान की तो आप हमें फोटो भेजें। हम अपमान करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करवाएँगे।”

जब सम्बन्ध में हमने SHO मानगो से बात की तो उन्होंने अपने थाना क्षेत्र में ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने से इनकार कर दिया। थाना प्रभारी मानगो हमसे ही जगह आदि की जानकारी लेने का प्रयास करने लगे।

तवांग सेक्टर में अतिक्रमण कर रहा था चीन, हमारे सैनिकों ने बहादुरी से वापस जाने को किया मजबूर: संसद में राजनाथ सिंह

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए संघर्ष को लेकर संसद में बयान दिया है। उन्होंने बताया कि ये घटना शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को हुई। उन्होंने बताया कि उस दिन चीन की फ़ौज (People’s Liberation Army) ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में सीमा (Line Of Actual Control) पर अतिक्रमण कर के यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने का प्रयास किया। भारत की सेना ने चीन की इस करतूत का दृढ़ता से सामना किया

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने आगे जानकारी दी कि भारत-चीन की सेनाओं के बीच हुए इस संघर्ष के दौरान हाथापाई हुई और भारतीय सेना ने पूरी बहादुरी से PLA को हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण करने से रोक दिया। भारतीय सेना ने PLA को मजबूर कर दिया कि वो वापस अपने पोस्ट्स पर लौट जाएँ। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि दोनों तरफ से कुछ सैनिकों को चोटें भी आई हैं। भारत सरकार की तरफ से उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष में न तो हमारे किसी सैनिक की मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है।

उन्होंने बताया, “भारतीय सैन्य कमांडरों के त्वरित हस्तक्षेप के कारण PLA के सैनिक वापस अपनी जगह पर चले गए। घटना के बाद क्षेत्र के एरिया कमांडर ने 11 दिसंबर, 2022 को अपनी चीनी समकक्षों के साथ स्थापित व्यवस्था के तहत एक फ्लैग मीटिंग की, जिसमें इस घटना पर चर्चा हुई। चीनी पक्ष को मना किया गया कि वो इस तरह की हरकतें न करें। उन्हें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए भी कहा गया। चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है।”

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत-चीन सेनाओं के संघर्ष पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसद में बयान

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को आश्वस्त किया कि हमारी सेनाएँ हमारी भौमिक अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, और इसके खिलाफ किसी भी प्रयास को रोकने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने विश्वास जताया कि सदन हमारी सेनाओं की वीरता और साहस को एक स्वर से समर्थन देगा। उनके बयान का सार ये है कि दोनों तरफ के सैनिक चोटिल हुए, कोई भी भारतीय सैनिक गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ और चीनी वापस लौट गए हैं।

नाम हिंदुओं का, मिड डे मील खा गया मदरसा: माँ-बाप को पता नहीं-बच्चे कभी आए नहीं, फिर भी एडमिशन दिखा सरकारी पैसा उठाया

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक मदरसे से फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोपों के घेरे में विदिशा शहर के बैस दरवाजा स्थित बरकतुल्लाह मदरसा है। आरोप है कि मदरसे में हिंदू बच्चों का एडमिशन दिखाकर सरकारी लाभ उठाया गया है। प्रशासन ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

इस मदरसे में कुल 41 छात्र हैं। इनमें 27 हिंदू बताए जा रहे। जनजातीय समाज के करीब 11 बच्चे ऐसे मिले हैं जो इस मदरसे में कभी पढ़ने भी नहीं आए, लेकिन उनका नाम यहाँ दर्ज है। इन बच्चों के माता-पिता को भी एडमिशन की जानकारी नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मदरसा रजिस्टर में अजय नाम के एक छात्र को कक्षा 8 में दर्ज दिखाया गया है, जबकि वो सरकारी स्कूल में क्लास 7 का छात्र है। अजय के पिता शंकर ने आरोप लगाया है कि मदरसे में उनके बेटे के नाम से वजीफा मँगा कर खुद रख लिया गया। उन्हें एक भी पैसा कभी नहीं मिला। अजय की माँ भी कैमरे के सामने आईं। उन्होंने कहा कि उन्हें तो बरकतुल्लाह मदरसे का पता ही नहीं है।

कृष्णा का भी कहना है कि वो कभी इस मदरसे में नहीं गई। लेकिन उसका भी एडमिशन है। उसकी बहन का नाम भी दर्ज है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत करने वाले मनोज कौशल ने सिर्फ छात्रवृत्ति ही नहीं, बल्कि मिड डे मील और स्कूल ड्रेस में भी गोलमाल का आरोप लगाया है। मनोज का कहना है कि साल 2016 से 2022 तक इस मदरसे में 11 बच्चों का फर्जी एडमिशन हुआ है। उन्होंने बताया कि इन बच्चों ने न तो कभी यहाँ क्लास ली और न ही कोई परीक्षा दी।

मदरसा संचालक मंजीत कपूर के मुताबिक उन्होंने 2017 से 2021 के बीच मदरसे चलाने का जिम्मा सुरेश आर्य नाम के टीचर को दिया था। 21 साल से मदरसा चला रहे कपूर ने गड़बड़ी का आरोप आर्य पर लगाया है। उनका कहना है कि एडमिशन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद 2022 में उन्होंने फिर से संचालन की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी जी पी राठी ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच करवाने के आदेश दिए हैं।

मैनपुरी में महिला के पैर में मारी गोली, पति का दावा- डिंपल यादव को वोट नहीं देने पर हुआ हमला: पुलिस ने बताया शराब का झगड़ा

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में सपा की डिंपल यादव जीती हैं। अब एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि सपा को वोट नहीं देने के कारण उस पर हमला किया गया। इस व्यक्ति की पत्नी के पैर में गोली भी लगी है। हालाँकि पुलिस ने इस दावे को खारिज किया है। पुलिस ने इस शराब का झगड़ा बताते हुए मतदान से इसका संबंध होने से इनकार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला किशनी थाना क्षेत्र के गाँव भिटारा का है। सोमवार (12 दिसंबर 2022) की सुबह लगभग 10 बजे बालकराम पाल के घर पर एक वाहन में 3 लोग आए। इसमें एक का नाम रिंकू यादव बताया जा रहा है। आरोप है कि तीनों ने आते ही पाल को गालियाँ देनी शुरू कर दी। उनसे कहा, “तुझे पता था कि वोट किसे देना है। लेकिन तूने भाजपा को वोट दिया। इसके बाद तू सबको बता भी रहा है। हम तुझे जड़ से खत्म कर देंगे।” ऐसा कह कर रिंकू ने पहले हवाई फायरिंग की और फिर कथित तौर पर पाल पर भी गोली चलाई।

बताया जा रहा है कि गाली-गलौज सुन कर बालकराम पाल की पत्नी भी मौके पर आ गई थी। रिंकू के गोली चलाने के दौरान वो बीच-बचाव के लिए दौड़ीं। इसी दौरान उनके पैर में गोली लग गई। इसके बाद कथित तौर पर रिंकू और उसके साथी बालकराम पाल को जबरन गाड़ी में बिठाकर साथ ले जाने लगे। लेकिन शोरगुल सुन कर गाँव के लोग मौके पर जमा हो गए और हमलावरों ने पाल को चलती कार से धक्का दे नीचे गिरा दिया। ग्रामीणों के सहयोग से पल अपनी पत्नी को अस्पताल लेकर गए।

विवाद तो हुआ, पर वोट के चलते नहीं

इस मामले में पुलिस का कहना है बालकराम पाल के घर के बगल में रिंकू यादव अपने साथियों संग शराब पी रहा था। इस दौरान शोरगुल हो रहा था, जिसका पाल ने विरोध किया। इसी बात पर दोनों पक्षों में गाली-गलौज हुई और रिंकू ने गोली चला दी। रिंकू को शराबी बताते हुए कहा है कि इसके कारण उसका अपने पिता से भी विवाद हो चुका है। वह पहले भी जेल जा चुका है। पुलिस ने विवाद का वोट डालने की किसी घटना से संबंध होने का खंडन किया है। इस मामले में इस मामले में IPC की धारा 307, 342,504 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है।

PM मोदी की हत्या का आह्वान करने वाले कॉन्ग्रेस नेता राजा पटेरिया गिरफ्तार, वीडियो वायरल होने के बाद खुद को ‘गाँधीवादी’ बता दी थी सफाई

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को​ गिरफ्तार कर लिया गया है। एक वायरल वीडियो में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का आह्वान कर रहे थे। हालाँकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि वे गाँधीवादी हैं। हत्या से उनका मतलब हराने से था। साथ ही वीडियो को गलत तरीके से प्रचारित करने का भी आरोप लगाया था।

पटेरिया को पन्ना पुलिस ने दमोह के हट्टा से गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी मंगलवार (12 दिसंबर 2022) सुबह करीब 5.30 बजे हुई। मध्य प्रदेश की गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा वे वीडियो सामने आने के बाद केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पन्ना पुलिस ने पटेरिया के खिलाफ शांतिभंग और वैमनस्य फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।

वायरल वीडियो में पटेरिया ने कहा था कि ‘पीएम मोदी की हत्या के लिए तत्पर रहो’। उन्होंने कहा, “मोदी चुनाव खत्म कर देगा, वो धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बाँट देगा। दलितों का, वनवासियों का और अल्पसंख्यकों का भावी जीवन खतरे में है। संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने पर तत्पर रहो।” वीडियो में साफ सुन जा सकता है कि पहले पटेरिया ने हत्या की बात कही और उसके बाद उसे संभालते हुए बोले, “मोदी की हत्या का मतलब मोदी को हराने के लिए तैयार रहो। कार्यकर्ता की उपेक्षा नेता की उपेक्षा होती है।’

पटेरिया ने मध्यप्रदेश के पन्ना में यह बयान दिया था। हालाँकि बाद में वह अपने बयान से पलट गए थे। उन्होंने कहा था कि उनके कहने का मतलब था कि चुनाव में मोदी को हराओ। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्होंने जो कहा वह फ्लो में कहा। नवभारत टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, ”मैं गाँधी को मानने वाला शख्स हूँ। मैं हत्या की बातें नहीं कर सकता। बयान तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।”

अनर्गल बयान देने के मामले में पटेरिया का इतिहास काफी समृद्ध है। इससे पहले उन्होंने पुलिस को धमकाया था। उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा था अगर आदिवासियों की बात नहीं मानोगे तो आदिवासियों को नक्सली बना देंगे। नक्सली बनाने के अपने बयान पर भी पटेरिया ने सफाई दी थी। उन्होंने अपना बयान ये कहकर जायज ठहराया था कि आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है। उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, महिलाओं के साथ मारपीट चल रही है, इसलिए उन्होंने बोल दिया आदिवासियों के साथ इस तरह का अन्याय ही नक्सलवाद को जन्म देता है।

इसके अलावा उन्होंने राहुल गाँधी की शादी के सवाल पर भी विवादित बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर राहुल गाँधी ने शादी नहीं की तो भाजपा वालों के पेट में क्यों दर्द हो रहा है। वह बोलते दिखे थे, “मोदी जी आपके परिवार में कोई अच्छी बच्ची हो तो प्रपोज करो, शायद उसको ठीक लगे। हमारा राष्ट्रीय अध्यक्ष कहता है कि पहले राष्ट्र है… इसमें क्या दिक्कत है। तुम्हारे पेट में क्यों दर्द है, तुम्हारी बहू-बेटी हो तो ले आओ।”