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मंदसौर में अफसर मंसूरी बने कृष्णा सनातनी: मंदिर जाने और व्रत रखने पर अब्बू ने घर से निकाला, चैतन्य राजपूत ने कराई घर वापसी

मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक मुस्लिम युवक ने घर वापसी की है। अफसर मंसूरी ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर अपना नाम कृष्णा सनातनी रखा है। घर वापसी के दौरान मंसूरी ने भगवा वस्त्र पहने थे। उन्होंने विधि विधान से वैदिक मंत्रौच्चार के बीच हिन्दू धर्म अपनाया। लगभग 7 माह पूर्व मुस्लिम से हिन्दू बने चैतन्य राजपूत ने अफसर के कृष्णा बनने की जानकारी सार्वजानिक की है। यह घर वापसी सोमवार (12 नवम्बर 2022) को हुई।

चैतन्य सिंह राजपूत के मुताबिक मदंसौर जिले में पिछले 7 माह में यह 6वीं घर वापसी हुई है। कृष्णा बनने वाला अफसर मूल रूप से मंदसौर के गाँव कचनारा का निवासी है। फिलहाल वो कयामपुर में रह रहा है। बताया गया कि मुस्लिम होने के बावजूद अफसर हिन्दू धर्म में पूर्ण आस्था रखता था। वो आए दिन मंदिर जाता था और वहाँ पर विधि विधान से देवी-देवताओं की आराधना किया करता था।

चैतन्य राजपूत की घर वापसी की खबर मिलने के बाद मंसूरी ने उनसे संपर्क किया। हिन्दू बनने की इच्छा जताई। अफसर ने चैतन्य को यह भी बताया कि वो काफी पहले से हिन्दू बनना चाह रहा था, लेकिन उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं था। चैतन्य राजपूत ने अफसर की घर वापसी के वैदिक विधान के साथ कानूनी प्रक्रिया को भी पूरा किया।

हिन्दू धर्म में वापसी के दौरान अफसर ने पंचगव्य स्नान भी किया। इस मौके पर चैतन्य के साथ कई अन्य लोग भी मौजूद रहे। घर वापसी के बाद अफसर ने चैतन्य को गुरु मानते हुए आशीर्वाद लिया। चैतन्य ने अफसर की घर वापसी को प्रभु की इच्छा बताया है। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपने फेसबुक पर शेयर भी किया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए चैतन्य राजपूत ने बताया कि अफसर का बचपन से ही हिंदू धर्म से लगाव था। वह व्रत रखता था। मंदिर जाता था। इससे नाराज हो कर उसके अब्बू ने उसे घर से निकाल दिया था। बाद में वह एक हिन्दू के साथ रहने लगा। अपनी गुजर-बसर करने के लिए अफसर एक बस चलाने लगा। इसी दौरान उसने बाल्मीकि समाज की एक लड़की से शादी भी कर ली। शादी के बाद वो हिन्दू धर्म स्वीकार करना चाहता था। लेकिन उसे कोई उचित माध्यम नहीं मिल रहा था। चैतन्य के मुताबिक अफसर ने उन्हें सम्पर्क किया और उन्होंने विधि-विधान से उसकी घर वापसी करवाई।

मोदी-मोदी के नारों से गूँजा गुजरात का नया सचिवालय, नतमस्तक हुए PM: भूपेंद्र पटेल बने गुजरात के 18वें CM, 16 मंत्रियों ने भी ली शपथ

भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने सोमवार (12 दिसंबर 2022) को गुजरात के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गाँधीनगर में बने नए सचिवालय परिसर के अंदर हेलीपैड मैदान में शपथ दिलाई। भूपेंद्र पटेल ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ली है। इस दौरान पीएम मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने झुककर गुजरात की जनता का अभिवादन किया। वहीं भीड़ ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाती रही।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के नेतृत्व वाले राज्यों के मुख्यमंत्री व अन्य दिग्गज नेता शामिल हुए। भूपेंद्र पटेल के साथ 16 मंत्रियों (कैबिनेट व राज्य) ने भी शपथ ली। मंत्री मण्डल में कुछ नए चेहरे भी शामिल किए गए हैं।

शपथ लेने वाले 16 मंत्रियों में कनुभाई देसाई, ऋषिकेश पटेल, राघवजी पटेल, बलवंत सिंह राजपूत, कुंवरजी बावलिया, मुलूभाई बेरा, कुबेर डिंडोर, भानुबेन बाबरिया, हर्ष संघवी, जगदीश पांचाल, परसोतम भाई सोलंकी, बच्चूभाई खाबड़, मुकेश पटेल, प्रफुल्ल पंसेरिया, भीखू सिंह परमार, कुंवरजी हलपति का नाम शामिल है।

शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच में हाथ जोड़कर झुकते हुए गुजरात की जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। इसके बाद पीएम पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात करते हुए नजर आए।

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को भूपेंद्र पटेल ने नई सरकार के गठन के लिए मंत्रिमंडल समेत इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, शनिवार (10 दिसंबर 2022) को हुई बैठक में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। सीएम भूपेंद्र पटेल ने घाटलोडिया सीट पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस प्रत्याशी डॉ. अमी याज्ञनिक के खिलाफ 1.92 लाख मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज करते हुए 156 सीटें हासिल कीं थीं। बीते 27 सालों से गुजरात की सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा की इस बड़ी जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया जा रहा है। इस चुनाव में, जहाँ भाजपा ने सत्ता हासिल की है। वहीं कॉन्ग्रेस 17 सीटों और आम आदमी पार्टी मात्र 5 सीटों में सिमट गई थी।

‘बहस को इतना नीचे ले जाओगे तो परिणाम भुगतने होंगे’: मानहानि के मामले को खत्म कराने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे मनीष सिसोदिया, याचिका हो गई ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि के केस रद्द करने की माँग की थी।

इस सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने मनीष सिसोदिया की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि यदि आप सार्वजनिक बहस को इस स्तर तक नीचे लाते हैं, तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। आपको इसके लिए पहले बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए।

इस पर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सिसोदिया की ओर से कहा, “आप सत्ता का इस्तेमाल धमकाने के लिए नहीं कर सकते। हमने कभी आरोप नहीं लगाया। हमने जो कहा है, वह तथ्य हैं। हमने कभी ये आरोप नहीं लगाया है कि उन्हें पैसे मिले हैं।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा, “असम के मुख्यमंत्री की बीवी के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा से आपका क्या मतलब है?”

जस्टिस कौल कि ये घटना कब की है, जिसके जवाब में अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि मार्च 2020 में। जस्टिस कौल ने कहा, “बीच कोरोना काल में! सरकार का समर्थन करने की बजाए आप आरोप लगाने में व्यस्त थे? ऐसे कठिन समय में किसी ने कुछ ऐसा किया जिससे कुछ अच्छा हो।”

दरअसल, मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिसोदिया ने असम के सीएम पर और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। सिसोदिया ने दावा किया था कि सरमा ने अपनी पत्नी की कंपनी को ठेका दिलवाया था और पीपीई किट्स के लिए ज्यादा रुपए का भुगतान भी कराया था।

इसके साथ ही मनीष सिसोदिया ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा था कि असम के वर्तमान सीएम हिमंत बिस्वा सरमा जो 2020 में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, उन्होंने उस वक्त कोरोना म​हामारी की आड़ में जमकर भ्रष्टाचार किया। इस मामले को लेकर पहले असम के मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने दिल्ली के डिप्टी सीएम के सभी आरोपों से इनकार किया। फिर इसके बाद उन्होंने मनीष सिसोदिया के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शराब घोटाले के आरोपित मनीष सिसोदिया की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने सरमा के मानहानि केस को रद्द करने की माँग की थी।

‘सेकुलरिज्म बचाने वाले अब तक जेल में’: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के आरोपितों के लिए विदेशी लिबरलों का छलका दर्द, कहा- केवल मुस्लिमों को नहीं मिल रही बेल

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के कट्टरपंथी आरोपितों की काली करतूतें धो-पोछने के लिए ‘द वर्ल्ड इज वॉचिंग इंडिया’ नाम के संगठन ने एक वीडियो डाली। ये वीडियो 6 दिसंबर को हुए वेबिनार की है, जिसका शीर्षक- ‘सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की यूएपीए के तहत गिरफ्तारी पर ग्लोबल एक्टर्स’ है। इसमें तमाम लिबरलों के साथ एक हिंदूविरोधी इतिहासकार ऑद्रे ट्रुश्के की ‘विशेष टिप्पणियाँ’ भी जोड़ी गई हैं, जो उन्होंने भारत विरोधी व आतंकी संगठनों से संबंध रखने वाले IAMC द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही थीं।

नए वेबिनार की वीडियो में बताया गया है कि कैसे 2 साल बीत चुके हैं जब भारत ने उन 18 ‘छात्र और कार्यकर्ताओं’ को आतंकवाद के आरोप में जेल में डाल दिया था। इन 18 छात्रों में शरजील इमाम, इशरत जहाँ, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम, मीरान हैरान, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान, गुलफिशा फातिमा, अतहर खान, सफूरा जरगर, उमर खालिद, नताशा नरवाल, आसिफ इकबाल तन्हा, फैजान खान और देवांगना कलिता का नाम था।

दंगों के आरोपित- छात्र और कार्यकर्ता: लिबरलों की चर्चा

वीडियो में बुद्धिजीवियों ने चर्चा की है कि कैसे 2020 में गिरफ्तार हुए 12 लोग अब भी कैद में हैं। 

मैरी लॉलर (यूएन स्पेशल रैपोर्टेयर, ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स) ने पकड़े गए आरोपितों के लिए दुख जताया। वह बोलीं दिल्ली हाईकोर्ट लगातार केवल मुस्लिम आरोपितों की बेल ही मना कर रही है। 

डेलफाइन रेकूल्यू (वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर) ने इन गिरफ्तारियों पर कहा कि आजकल तो देखा जा रहा है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को शांत कराने के लिए आतंक-विरोधी कानून का हथियार की तरह इस्तेमाल होता है।

बांग्लादेश के फोटो जर्नलिस्ट शाहिदुल आलम ने कहा, “ऐसे समय में जब साउथ एशिया में इतना दमन जारी है, मानवाधिकारों का अनादर हो रहा है उस समय में जिन लोगों ने निकलकर प्रदर्शन किया, उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई।”

प्रोफेसर लाइला मेहता बोलीं- “ये तो साफ है कि इस तरह छात्रों और मानवाधिकार का बचाव करने वाले जो देश के सेकुलरिज्म को बचाए रखना चाहते हैं वो अब भी जेल में हैं।”

आतंकी संगठन से कनेक्शन रखने वाले इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का भी कोट लिया गया जिसका कहना था कि अगर गाँधी जिंदा होते तो वो इन हिरासत में लिए प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते या फिर नरेंद्र मोदी सरकार का।

एक अन्य बुद्धिजीवी आनिया लूंबा ने दंगों के 18 आरोपितोंं को बहादुर बताया। साथ ही उस प्रदर्शन को शांतिपूर्ण कहा जिसकी वजह से दिल्ली में दंगे हुए। उन्होंने यहाँ तक बोला कि अच्छा हुआ वो लोग फिली में प्रदर्शन कर रहे थे अगर दिल्ली में करते तो शायद जेल चले जाते।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगे फरवरी 2020 में हुए थे। तब यहाँ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप आए थे। 23 फरवरी 2022 को इस्लामी भीड़ ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए थे जिसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे। आज उन दंगों के आरोपितों पर ऐसी चर्चा केवल, उनके कृत्यों को छिपाना का प्रयास है।

नोट: मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

अनिल देशमुख को बॉम्बे HC से जमानत तो मिली, लेकिन फैसले पर लग गई 10 दिन की रोक: ₹100 करोड़ की वसूली मामले में 1 साल से जेल में हैं बंद

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) को जमानत मिल गई है। राष्ट्रवादी कॉन्‍ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता देशमुख ‘100 करोड़ की वसूली’ मामले में जेल में बंद हैं। उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की माँग की थी। हालाँकि देशमुख जेल से तुरंत बाहर नहीं निकल पाएँगे। अदालत ने जमानत के तुरंत बाद इसपर 10 दिनों की रोक लगा दी।

दरअसल मामले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में इस फैसले का विरोध किया और शीर्ष न्यायालय में इसे चुनौती देने के लिए समय की माँग की । बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई की माँग को स्वीकार कर लिया और आदेश को दस दिन तक स्थगित कर दिया।

अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप है। इसी मामले में उन्हें 2 नवंबर, 2021 को गिरफ्तारी किया गया था और तब से वह जेल में ही हैं। सीबीआई (CBI) मामले की जाँच कर रही है। इससे पहले, सीबीआई की विशेष अदालत ने पिछले महीने 72 वर्षीय अनिल देशमुख की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसके बाद न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की एकल पीठ ने गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को देशमुख की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

अनिल देशमुख 100 करोड़ की वसूली मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों के निशाने पर हैं। सीबीआई जहाँ इस मामले में भ्रष्टाचार के अपराध की जाँच कर रही है तो ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 अक्टूबर, 2022 को उन्हें जमानत दे दी थी।

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च 2021 को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया था कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने का आदेश दिया था। परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा था कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था।

इन्हीं आरोपों के बाद सीबीआई ने अनिल देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हालाँकि बाद में जाँच एजेंसी ने बरख़ास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को माफी दे दी थी और उसे सरकारी गवाह बना लिया था।

सुशासन बाबू! सीवान के इस पिता का गुनाह क्या है: नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर ले गया सलमान, बिहार पुलिस कह रही- मुस्कान खातून बन भेज रही मैसेज

भले ही बिहार पुलिस का क्राइम डाटा राज्य की कानून-व्यवस्था पर पर गंभीर सवाल खड़े करता हो, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके समर्थक ‘सुशासन बाबू’ कहते हैं। पर त्रासदी यहीं खत्म नहीं होती। सुशासन में करीब तीन महीने पहले सीवान से एक नाबालिग हिंदू लड़की अगवा कर ली गई। आरोप सलमान अंसारी पर है। पीड़ित पिता बेटी की बरामदगी की गुहार लगा रहा है। आरोपित के परिवार पर धमकी देने का आरोप है। इन सबके बावजूद बिहार पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

बिहार पुलिस एक तरफ यह भी मान रही है कि लड़की नाबालिग है। दूसरी तरफ यह भी बता रही है कि वह मुस्कान खातून बन गई है। मैसेज भेजकर गुजारिश कर रही है कि उसे फ्री छोड़ दिया जाए। साथ ही यह भी बता रही है कि बार-बार सिम बदलने की वजह से लड़की की बरामदगी में दिक्कत आ रही है।

नाबालिग हिंदू को 17 अक्टूबर 2022 को अगवा किया गया था। उसके पिता ने इसको लेकर महराजगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में सलमान अंसारी, शहाबुद्दीन अंसारी, हजरत अंसारी, इश्हाक मियाँ, सदीना और लाडली को नामजद किया है। पीड़ित पिता का कहना है कि पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने पुलिस पर उलटे खुद को ही परेशान करने का आरोप लगाया है। पीड़ित पिता के अनुसार मामले में नामजद कुछ आरोपितों को पुलिस ने पहले दिन पकड़ा। लेकिन 3 दिनों के अंदर ही छोड़ दिया।

पीड़ित पिता ने ऑपइंडिया को बताया कि उनकी बेटी की लोकेशन अभी मुंबई में बता रही है। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी पुलिस प्रशासन उनकी बेटी की बरामदगी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। पीड़ित पिता का कहना है कि उन्होंने खुद ही पता कर पुलिस को मुंबई में लोकेशन की जानकारी दी। पुलिस ने जाने का भरोसा भी दिया पर गई नहीं। उनका आरोप है कि पुलिस ने आने-जाने का भाड़ा माँगा था। वे इसके लिए भी तैयार थे।

पीड़ित पिता का कहना है कि बेटी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए वे अपने स्तर पर करीब 90 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। उन्होंने सलमान के बड़े भाई हजरत पर धमकी देने और हिंदुओं को गाली दने का भी आरोप लगाया है। यह भी बताया कि सलमान का परिवार भरी पंचायत में 3 बार लड़की को वापस करने की जुबान देकर मुकर चुका है। उन्होंने लड़की को मुंबई से पुणे शिफ्ट किए जाने की आशंका जताई गई है। पीड़ित पिता के अनुसार 11 दिसंबर 2022 को बजरंग दल के लोग उनके घर आए थे। ये लोग जब उनके घर से लौट गए तो महराजगंज थाने से एक पुलिसकर्मी ने फोन कर उन्हें धमकी दी।

पुलिस ने कहा- नाराजगी में लगा रहे आरोप

ऑपइंडिया ने पीड़ित पिता के आरोपों को लेकर महराजगंज थाना प्रभारी से बात की। उनका कहना है कि लड़की की बरामदगी न होने की नाराजगी में वे ऐसा कह रहे। थाना प्रभारी ने बताया कि लड़की खुद को मुस्कान खातून बता कर पुलिस को मैसेज भेज रही है। मैसेज में खुद को स्वतंत्र छोड़ देने की गुजारिश कर रही है। लड़की को नाबालिग बताते हुए थानाध्यक्ष ने बताया कि लगातार सिम बदलने की वजह से आरोपित और लड़की को रिकवर करने में दिक्कत आ रही है। लेकिंन हम जल्द ही सफल होंगे।

पीड़ित पिता को थाने से कॉल कर धमकी दिए जाने के आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारी जिम्मेदार हैं। कोई भी ऐसी हरकत नहीं करेगा। ऑपइंडिया ने जब उस नंबर पर कॉल किया जिससे पीड़ित पिता को धमकी दी गई थी तो कॉल किसी ने नहीं उठाया।

गौरतलब है कि जिस सलमान पर परिजनों के साथ मिलकर लड़की को अगवा करने का आरोप है वह मुंबई में बेल्ट बनाने का काम करता है। उसके भाई व परिवार के अन्य सदस्य गाँव में ही रहते हैं। सलमान और लड़की का घर आसपास ही है। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363, 366 (A) और 34 के तहत केस दर्ज कर रखा है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

बंगाल में अब रथ यात्रा पर हमला, गीता जयंती महोत्सव को बनाया निशाना: BJP का दावा – TMC के गुंडों की करतूत, तलवार-डंडे-छड़ों से भक्तों को पीटा

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हिंदुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। वहाँ, हिंदुओं पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं’ पर रथ यात्रा में हमला करने का आरोप लगाया है। अधिकारी ने हमले में घायल हुए लोगों की फोटो भी शेयर की है। साथ ही, पुलिस पर एफआईआर न दर्ज करने का भी आरोप लगाया है।

कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बेटबेरिया में हर वर्ष की भाँति गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा था। इस दौरान, रविवार (11 दिसंबर, 2022) को कुछ लोगों ने रथ परिक्रमा में शामिल हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस हमले में कई हिंदू भक्त घायल हुए हैं।

सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर कहा है, “दक्षिण 24 परगना जिले के बुरईपुर में स्थित बेटबेरिया के राधा मोहन मंदिर में बीते 20 सालों से गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। 10 दिवसीय महोत्सव का समापन कल रथ यात्रा के साथ होना था। रथ परिक्रमा के दौरान गुंडों ने सनातनी भक्तों पर हमला कर दिया।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में आरोप लगाते हुए कहा है, “गुंडों ने पहले सड़क को जाम करते हुए रथ को बाधित कर दिया। जबरदस्ती हाथापाई की और फिर लोहे की छड़ों, तलवारों और डंडों से श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। योजनाबद्ध तरीके से किए गए इस हमले के बारे में भक्तों को कोई जानकारी नहीं थी। हमले में कई सनातनियों को गंभीर चोटें आईं हैं। अंदाजा लगाइये, प्रशासन ने क्या किया होगा?”

अधिकारी ने अगले ट्वीट में कहा है, “पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। TMC विधायक ने ‘गुंडों’ से मुलाकात की, लेकिन भक्तों से मिलने की जहमत नहीं उठाई। ममता बनर्जी की पुलिस ने विरोध करने के लिए एकजुट हुए भक्तों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। क्या पश्चिम बंगाल की कानून और व्यवस्था इतनी खराब है कि भक्त रथयात्रा भी नहीं निकाल सकते?”

बता दें, इससे पहले पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाते हुए कहा था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के समर्थकों ने उनके काफिले पर हमला किया था। उन्होंने कहा था कि हमला करने वालों के हाथों में TMC का झंडा था।

सजदा खालिक को, इब्लीस से याराना भी… हज के बाद वैष्णो देवी के दरबार में SRK को देख भड़के मुस्लिम कट्टरपंथी, कहा – फ्लॉप होगी ‘पठान’ फिल्म

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) 25 जनवरी, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म की रिलीज से पहले अभिनेता मक्का में उमराह करने के बाद (Mata Vaishno Devi) माता वैष्णो देवी के दरबार पहुँचे। यहाँ एक्टर ने माता के आगे माथा टेका।

सोशल मीडिया पर उनके मंदिर पहुँचने के कई वीडियो सामने आए हैं, जहाँ कुछ लोग उनके ‘उमराह’ के बाद वैष्णो मंदिर पहुँचने की तारीफ कर रहे हैं। वहीं कुछ कट्टरपंथी उनके हिंदू मंदिर जाने से आक्रोशित हैं। अली बिन मुहम्मद लिखता है, “मजाक बना के रख दिया है मजहब को।”

शनामन लिखती है, “कुछ भी कर लो तुम्हारी हर फिल्म का विरोध होगा।”

ट्विटर पर ‘@Real_Immu’ नाम के अकाउंट ने अभिनेता के लिए लिखा कि सजदा खालिक को, इब्लीस से याराना भी। हश्र में किससे मोहब्बत का सिला माँगेगा? खान साहेब ने शाहरुख खान की वीडियो पर कमेन्ट किया, “बेगैरत।”

अब्बास कहता है, “पठान भी फ्लॉप होगी।”

ट्विटर पर ‘@seek_er__’ नाम के अकाउंट ने लिखा, “आगे क्या है, चर्च या गुरुद्वारा।”

दरअसल, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब शाहरुख को मुस्लिम कट्टरपंथियों ने निशाने पर लिया हो। इससे पहले 1 दिसंबर, 2022 को शाहरुख खान की मक्का में उमराह (Umrah) करते हुए कई तस्वीरें सामने आई थीं। जैसे ही मक्का में उमराह करते शाहरुख खान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तो मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बॉलीवुड अभिनेता को गाली देना और उन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

अमाल ने कहा था, “शाहरुख मूर्तियों की पूजा करता है। वह अपने घर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखता है। इस्लाम में यह सबसे बड़ा पाप माना जाता है।” वहीं रिज नाम के ट्विटर अकाउंट ने कहा था कि शाहरुख खान की बॉलीवुड से कमाई इस्लाम के अनुसार हराम है, ऐसे में उसका उमराह कैसे कबूल किया जाएगा।

गौरतलब है कि अगस्त 2022 में शाहरुख खान द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान की मूर्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने पर उनके मजहब के कुछ लोग भड़क उठे और उन्हें खरी-खोटी सुनाई थी। तैमूर उल हसन नामक ने लिखा था, “मुस्लिमों के लिए कितनी शर्म की बात है सर। आपको मुस्लिम या हिंदू होने के लिए किसी एक मजहब को चुनना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि मुस्लिम केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और पैगंबर मुहम्मद मानवता के जीवन को बदलने के लिए आए थे। पैगंबर ने हमें सुंदर मजहब दिया।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान कई वर्षों के बाद ‘पठान’ के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी मुख्य भूमिका में हैं। इसके अलावा वह नयनतारा के साथ ‘जवान’ और तापसी पन्नू के साथ राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘डंकी’ में भी लीड रोल में हैं।

जिसकी ‘हत्या’ में पति को UP में हुई जेल, वह 6 साल बाद ‘दूसरे पति’ के साथ राजस्थान में मिली: पीड़ित ने कहा- थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर पुलिस ने ‘जुर्म’ कबूल करवाया

2015 में मथुरा की एक महिला की हत्या के आरोप में उसके पति को 18 महीने जेल में रहना पड़ा। पति का दोस्त भी नौ महीने जेल में रहा। अब वह महिला दूसरे पति के साथ राजस्थान के दौसा में मिली है।

महिला 2015 में गायब हो गई थी। उसके पिता ने हत्या का केस दर्ज करवाया था। महिला के पति और उसके दोस्त की गिरफ्तारी हुई थी। जमानत मिलने के बाद से पति और उसके दोस्त ने महिला की खोजबीन शुरू की। करीब सात साल बाद महिला के राजस्थान में होने की बात सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2015 में वृंदावन में रहने वाली आरती नामक महिला ने घर से भागकर राजस्थान के दौसा में रहने वाले सोनू सैनी से शादी की थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही वह गायब हो गई। इसके बाद, आरती के पिता ने वृंदावन कोतवाली थाने में अपनी बेटी के गुम होने की एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में, सोनू सैनी, गोपाल सैनी और अरविंद पाठक पर आरोप लगाए गए थे।

इसके बाद, पुलिस ने जाँच शुरू करते हुए, सोनू सैनी और गोपाल सैनी को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, अरविंद पाठक पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसी दौरान वृंदावन कोतवाली पुलिस को मथुरा जिले के नहरी क्षेत्र में एक महिला का शव मिला। आरती के पिता ने शव की पहचान अपनी बेटी के रूप में ही। इसके बाद, करीब 6 महीने बाद आरती के पिता ने सोनू सैनी सहित अन्य लोगों पर आरती की हत्या करने और शव को छिपाने के लिए फेंकने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई।

एफआईआर दर्ज होने के बाद, वृंदावन कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के दौसा जाकर सोनू सैनी और गोपाल सैनी को गिरफ्तार किया। साथ ही, हत्या का आरोपित बताते हुए धारा 302 (हत्या) के मामले में कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी। इसके बाद, सोनू और गोपाल जेल में बंद थे।

हालाँकि, इसके बाद उन लोगों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत पर बाहर आने के बाद, दोनों ने मिलकर आरती की तलाश शुरू की। तलाशी के दौरान सोनू और गोपाल, दौसा के बालाजी थाना क्षेत्र के विशाला गाँव पहुँचे, जहाँ उन्होंने पाया कि आरती अपने परिवार (दूसरे पति) के साथ रह रही है।

इसके बाद, उन लोगों ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मथुरा पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया। फिर, मथुरा पुलिस ने विशाला गाँव पहुँचकर आरती को हिरासत में लिया और कोर्ट में पेश किया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले कि जाँच करते हुए आरती से पूछताछ करने के साथ ही उसके पिता की तलाश कर रही है। साथ ही, यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरती के पिता ने किस आधार पर हत्या का आरोप लगाया था।

वहीं, इस मामले में जेल में बंद रहे सोनू सैनी ने कहा है कि शादी के कुछ दिन बाद ही आरती ने उससे संपत्ति अपने नाम करने और 50 हजार रुपए व कार की माँग की थी। उसने मना कर दिया था। इसके बाद, घर छोड़कर भाग गई थी। उसने अपनी ओर से उसकी तलाश की थी। चूँकि, आरती ने कहा था कि वह घर से भागकर आई है। इसलिए, उसने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

यही नहीं, पीड़ित सोनू ने कहा है कि उसने खुद को बेगुनाह बताया था। लेकिन पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर कर गुनाह कबूल करने के लिए कहा था। इसलिए, उसने गुनाह कबूल कर लिया था। सोनू ने अपने साथ हुए अन्याय को लेकर सीबीआई जाँच की भी माँग की है।

अलीगढ़ से भी आया था ऐसा ही मामला

इसी तरह का एक मामला हाल में अलीगढ़ से सामने आया था। 2015 में अलीगढ़ से गायब हुई एक नाबालिग लड़की की हत्या के आरोप में उसके गाँव के विष्णु गौतम को जेल जाना पड़ा था। सात साल बाद वह लड़की आगरा में जिंदा मिली है। इतना ही नहीं उसकी शादी हो चुकी थी और दो बच्चे भी हैं।

इस्लामी कट्टरपंथ के बाद सेक्स से भी सकते में फ्रांस: एड्स-STI रोकने के लिए युवाओं को FREE कंडोम, नाबालिगों के लिए भी आएगी स्कीम

इस्लामी कट्टरपंथ के उभार से चिंतित फ्रांस ने हाल ही में इस पर अंकुश के लिए कई कठोर फैसले लिए हैं। इसी तरह असुरक्षित सेक्स भी उसकी चिंता का नया सबब बनकर उभरा है। यौन रोगों से बचाव के लिए सरकार ने युवाओं को अब फ्री में कंडोम मुहैया कराने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में इस सुविधा का लाभ नाबालिगों को भी मिल सकता है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने युवाओं को मुफ्त में कंडोम बाँटने का फैसला किया है। फ्रांस सरकार का कहना है कि देश में बढ़ते यौन रोगों से बचाव के लिए उसने ये कदम उठाया है। इसकी शुरुआत नए साल, यानी 1 जनवरी, 2023 से होगी। मैक्रों के मुताबिक, 18-25 साल के युवाओं को फ्री में कंडोम बाँटा जाएगा। बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथ से जूझ रहे फ़्रांस ने कई मस्जिदों को बंद करने समेत कई कड़े फैसले लिए हैं।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने युवाओं के साथ एक एक स्वास्थ्य चर्चा में गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि गर्भ-निरोधन की दिशा में यह एक छोटी सी क्रांति है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि सरकार 18-25 साल के युवाओं के लिए मेडिकल की दुकानों पर पर मुफ्त कंडोम मुहैया कराएगी। उनका कहना है कि इस फैसले की वजह फ्रांस में एड्स और दूसरे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) को फैलने से रोकना है। साथ ही इस फैसले का उद्देश्य अनचाही प्रेग्नेंसी पर भी लगाम लगाना भी है।

फ्रांसीसी सरकार ने इस साल 25 साल तक की सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए गर्भ-निरोधक फ्री कर दिए थे। इसका उद्देश्य यह था कि कोई भी महिला पैसे की कमी की वजह से गर्भ-निरोधक से वंचित ना रहे। इसका फायदा करीब 30 लाख लड़कियों और महिलाओं को मिल रहा है। इससे पहले 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को ही गर्भ-निरोधक फ्री में मिलते थे।

ऐसा नहीं है कि सरकार ने एसटीआई को रोकने के लिए अभी कदम उठाया है। फ़्रांस की सरकार ने साल 2018 से ही लोगों को कंडोम के पैसे वापस करना शुरू किया था। हालाँकि, इसके लिए डॉक्टर की मंजूरी ज़रूरी होती थी और इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली (NHS) द्वारा कंडोम लेने वाले शख्स को पैसा वापस लौटाया जाता था।

मैक्रों की इस संबंध में घोषणा के बाद एक फ्रांसीसी टीवी एंकर ने राष्ट्रपति से शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को सोशल मीडिया पर सवाल किया कि मुफ्त कंडोम नाबालिगों के लिए क्यों नहीं उपलब्ध है, जिसके बाद राष्ट्रपति ने भी इस बाबत कार्यक्रम को विस्तार देने पर सहमती जताई। मैक्रों ने एक सेल्फी वीडियो में कहा, “चलिए इसे भी करते हैं।” उन्होंने कहा कि कई नाबालिगों भी यौन संबंध बनाते हैं। उन्हें भी खुद को बचाने की जरूरत है।”

उल्लेखनीय है कि 2020 और 2021 में फ्रांस में एसटीआई दर में 30 फीसदी का इजाफा हुआ था। मैक्रों ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। मैक्रों ने कहा था कि सेक्सुअल एजुकेशन को लेकर फ्रांस के सामने चुनौतियाँ हैं। उन्होंने स्वीकार किया था कि इस विषय में फ़्रांस का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता थ्योरी से अलग होती है।