आपने रिश्वत लेने वाले कई देखे होंगे। पर शायद ही किसी को मुँह से घूस का पैसा उगलते देखा हो। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। हरियाणा के फरीदाबाद में विजिलेंस की टीम ने एक सब इंस्पेक्टर के मुँह से रिश्वत का पैसा निकालकर उसे गिरफ्तार किया।
आरोपित सब इंस्पेक्टर महेंद्र पाल सेक्टर-3 की पुलिस चौकी में तैनात है। वीडियो में देखा जा सकता है कि विजिलेंस की टीम को देखते हीं सब इंस्पेक्टर ने रुपए मुँह में ठूँस लिए। उसके बाद उससे उगलवाने की कोशिश हो रही है। इस बीच आरोपित पुलिसकर्मी खुद को विजिलेंस टीम से छुड़ाने की कोशिश करता हुआ भी दिख रहा है।
विजिलेंस टीम सब इंस्पेक्टर का मुँह जबरन खुलवाने की कोशिश करती है। उसे पीछे से एक सदस्य पकड़ता है। दूसरा उसके मुँह में ऊँगली डालता है। जब सब इंस्पेक्टर के मुँह से कुछ रुपए निकलते हैं, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है।
दरअसल भैंस चोरी के मामले में कार्रवाई करने की एवज में शिकायतकर्ता से सब इंस्पेक्टर ने रिश्वत माँगी थी। शिकायतकर्ता उसे 6 हजार रुपए पहले ही दे चुका था। सुब इंस्पेक्टर 4 हजार रुपए और माँग रहा था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस से उसकी शिकायत की।
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर 3 निवासी शंभूनाथ यादव ने करीब एक साल पहले किसी को गाय 30 हजार रुपए में बेची थी। लेने वाले ने 10 हजार रुपए ही दिए थे। बाकी 20 हजार रुपए बकाया था। पैसे न देने पर शंभूनाथ अपनी गाय वापस ले आया। बताया जाता है कि शंभूनाथ ने जिसको गाय बेची थी, वह उसकी भैंस खोल ले गया और उल्टे शिकायतकर्ता के पोते के खिलाफ केस दर्ज करा दिया।
सोमवार (12 दिसंबर 2022) को आरोपित सब इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता को सेक्टर-3 कम्युनिटी सेंटर में बुलाया था। सब इंस्पेक्टर वहाँ किसी शादी समारोह में शामिल था। विजिलेंस ने पहले से ही जाल बिछा रखा था। शिकायतकर्ता ने जैसे ही 4 हजार रुपए की रिश्वत दी, विजिलेंस टीम ने सब इंस्पेक्टर को पकड़ लिया।
मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को जमानत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है। उनका एक वीडियो सामने आया था जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की बात कर रहे थे। पटेरिया को मंगलवार (13 दिसंबर 2022) सुबह गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने जमानत से इनकार करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, उनकी पार्टी ने भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने को कहा है।
हालाँकि, दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री रह चुके पटेरिया को इस बात का कोई अफसोस नहीं है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते हुए कॉन्ग्रेस नेता पटेरिया ने मीडियाकर्मियों को विक्ट्री साइन दिखाया और इसे विचारधारा की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा, “यह विचारधारा की लड़ाई है। मैंने ये शब्द नहीं कहे हैं। मैं महात्मा गाँधी का अनुयायी हूँ।”
MP | Congress leader Raja Pateriya shows victory sign after a court rejected his bail plea
“It’s a fight of ideology.I haven’t said those words. I’m a follower of Mahatma Gandhi,” he says
He was arrested by Panna Police today, in connection with his alleged ‘kill Modi’ remarks pic.twitter.com/56QdV5uwNz
दरअसल, कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री राजा पटेरिया का वायरल वीडियो सामने आने के बाद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। उनके खिलाफ पन्ना के पवई पुलिस थाने में IPC की धारा 451, 504, 505 (1-B), 505 (1-C), 506, 153-B (1)(C) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
वायरल वीडियो में पटेरिया ने कहा था कि ‘पीएम मोदी की हत्या के लिए तत्पर रहो’। उन्होंने कहा, “मोदी चुनाव खत्म कर देगा, वो धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बाँट देगा। दलितों का, वनवासियों का और अल्पसंख्यकों का भावी जीवन खतरे में है। संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने पर तत्पर रहो।” वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पहले पटेरिया ने हत्या की बात कही और उसके बाद उसे संभालते हुए बोले, “मोदी की हत्या का मतलब मोदी को हराने के लिए तैयार रहो। कार्यकर्ता की उपेक्षा नेता की उपेक्षा होती है।”
संविधान बचाना है तो मोदी की हत्या करने के लिए तत्पर रहो – एमपी कांग्रेस नेता राजा पटेरिया।
The Congress is increasingly getting desperate and planning to assassinate PM Modi. We have seen how Channi’s administration, in the run up to Punjab elections, almost executed the plan… pic.twitter.com/wtsQpgVRWo
बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद राजा ने अपनी सफाई देते हुए कहा था कि उनके कहने का मतलब था कि चुनाव में मोदी को हराओ। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार के क्षेत्र बारामती में प्रार्थना सभा के नाम पर ‘यीशु का दरबार’ लगाया गया। कार्यक्रम में ईसाई प्रचारक वहाँ मौजूद लोगों से ईसाई धर्म से जुड़ने का आह्वान करते हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम का आयोजन तीसरे दिन नहीं हो सका।
कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय पादरी सुनील जाधव ने किया था और ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। जाधव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “ईसाई धर्म में विश्वास करो। यीशु के अस्तित्व में विश्वास करो। अगर आप अभी बदलते हैं तो ही आप देश भर में कई लोगों को बदल पाएँगे। आप नहीं जानते लेकिन ऐसा हो सकता है कि हम ‘भारत जोड़ो’ जैसी यात्रा में शामिल हो जाएँ और देश भर में रहने वाले लोगों को ईसाई धर्म के बारे में विश्वास दिला सकें।”
कार्यक्रम को संबोधित करते पादरी जाधव
तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन का आयोजन शहर के मिशन हाई स्कूल में गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को किया गया था। कार्यक्रम में ज्यादा लोग उपस्थित नहीं थे और 30-35 लोगों के मैदान में आने के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। हालाँकि वहाँ 300 लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई थी।
वहीं कार्यक्रम में मौजूद सिस्टर मर्सी ने कहा कि वे सभी लोग जो इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभु द्वारा चुना गया है और जो नहीं आए, वह प्रभु की इच्छा से नहीं आए हैं। कई गरीब हिन्दू महिलाओं (साड़ी, बिंदी और सिंदूर पहने हुए) को इस कार्यक्रम में देखा जा सकता था। ऑपइंडिया ने इस कार्यक्रम का वीडियो भी बना लिया था।
इस बीच, इस कार्यक्रम में मौजूद ईसाई महिलाओं ने अन्य महिलाओं को ईसाई मजहब अपनाने का प्रलोभन दिया। वहाँ मौजूद एक महिला ने कहा, “ईश्वर अदृश्य है। हमें उसे महसूस करना चाहिए। पत्थरों (मूर्तियों) की पूजा नहीं करना चाहिए, जैसे हिंदू करते हैं। वह पत्थर क्या समझेगा? हम मनुष्य पापों से घिरे हुए हैं। अपनी आने वाली पीढ़ियों को पापों से मुक्त करने के लिए, हमें यीशु की पूजा करनी चाहिए।”
ईसाई महिला हिंदू महिलाओं से कह रही है कि ‘मूर्ति पूजा’ की कोई अहमियत नहीं है
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत ने दावा किया कि वह सिर्फ एक ‘प्रोफेट’ नहीं बल्कि एक बिशप हैं और 300 से अधिक प्रचारक उनके पुणे स्थित एनजीओ ‘ग्लोरियस इवेंजेलिकल प्रोफेटिक’ में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने से पहले वह एक ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकारी’ और ‘भ्रष्टाचार-विरोधी अधिकारी’ थे। हालाँकि, उनके सोशल मीडिया पेज के अनुसार, वह दो गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य हैं, जिनका नाम ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया और एंटी करप्शन एंड मीडिया इन्वेस्टिगेशन है।
वहीं कार्यक्रम के दौरान सिस्टर मर्सी को लोगों से डोनेशन माँगते देखा गया।
सिस्टर मर्सी उपस्थित लोगों से चंदा एकत्र कर रही हैं
सुरक्षा कारणों से नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देने पर सहमत हुए स्थानीय ईसाइयों में से एक ने कहा कि पादरी सुनील जाधव एक स्वयंभू पादरी हैं और उन्होंने अपने घर की छत पर अपना चर्च बनाया है। यह कार्यक्रम क्रिसमस से पहले तीन दिन आयोजित किया जाना था, जिसमें से एक दिन इसका आयोजन मिशन हाई स्कूल में किया जाना प्रस्तावित था और। वहीं कार्यक्रम को दो दिन ‘ज्येष्ठ नागरीक संघ’ नामक एक प्रसिद्ध सार्वजनिक सामुदायिक हॉल में किया जाना निर्धारित था।
‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के प्रशासक एम डब्ल्यू जोशी से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि ईसाइयों ने यह कहकर कार्यक्रम के लिए हॉल लिया था कि वे प्रार्थना सभा आयोजित करना चाहते हैं और उनके पास इसके लिए कोई जगह नहीं है।
10 दिसंबर की सुबह ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर लगा ताला
धर्मांतरण के प्रयासों और पोस्टर पर पादरी द्वारा किए गए झूठे दावों के बारे में पूछने पर जोशी ने कहा कि वे लोग सिर्फ एक साथ प्रार्थना करने के लिए जगह चाहते थे। हालाँकि, ऐसा लग रहा था कि संघ के पदाधिकारी को आयोजकों के उद्देश्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आयोजन के तीसरे दिन शनिवार (10 दिसंबर, 2022) को ऑपइंडिया द्वारा जोशी से बात करने के बाद, सभा को रद्द कर दिया गया और कार्यक्रम स्थल ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर ताले लगे देखे जा सकते हैं।
वहीं आरएसएस के एक स्थानीय सदस्य मुकुंद कुलकर्णी ने महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सब दिखावा है। वे (ईसाई) गरीब और जरूरतमंद लोगों को लुभाते हैं और उन्हें पैसे या बुनियादी सुविधाएँ देते हैं। वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हिंदू धर्म जैसे अन्य धर्मों के गरीब लोग हिंदू धार्मिक देवी-देवताओं से घृणा करें और ईसाई मजहब में विश्वास करना शुरू कर दें। जीसस क्राइस्ट या ईसाई मजहब बुरा नहीं है, वास्तव में, कोई धर्म बुरा नहीं है। लेकिन लोगों को बहला-फुसलाकर, फर्जी दावे करके और धर्म-परिवर्तन के लिए मजबूर करना गलत है।”
(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)
गुजरात के मोरबी में हुए केबल पुल हादसे पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान गुजरात सरकार ने हलफनामा पेश किया। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने की बात कही है। साथ ही सरकार ने मोरबी नगर निगम को भंग करने का भी फैसला किया है।
गुजरात सरकार ने सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय को जानकारी दी कि मोरबी नगर निगम भंग कर दिया जाएगा। गुजरात नगरपालिका अधिनियम की धारा 263 के तहत कार्यवाही होगी। साथ ही मोरबी के तत्कालीन मुख्य अधिकारी एसवी जाला के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। आपको बता दें हादसे के तीन दिन के भीतर ही नगरपालिका के चीफ ऑफिसर एसवी जाला को सस्पेंड कर दिया गया था।
#MorbiBridgeCollapse | Morbi Nagar Palika and #Gujarat Govt on Monday filed an affidavit before the Gujarat High Court.
The kin of each deceased will receive a total compensation of Rs 10 lakhs.
गुजरात सरकार ने यह भी जानकारी दी कि हाई कोर्ट के सुझाव के अनुसार राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मिलने वाली मुआवजे की राशि बढ़ा दी है। महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल) कमल त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को चार लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा देने का फैसला किया है। इसके बाद कुल मुआवजा राशि 10 लाख रुपए हो जाएगी। सरकार घायलों को एक लाख रुपए का मुआवजा देगी। इस मामले में अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2022 को होगी।
आपको बता दें कि गुजरात के मोरबी में 30 अक्टूबर, 2022 की शाम मच्छु नदी में बने केबल पुल टूटने से हादसा हुआ था। इसमें 134 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा पुल की एक निजी कंपनी द्वारा मरम्मत करने के पश्वात जनता के लिए खोलने के चार दिन बाद हुआ था। हादसे के बाद विपक्ष ने इस पर राजनीति शुरू कर दी थी।
हालाँकि चुनाव परिणामों में मोरबी समेत पूरे गुजरात की जनता ने विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को नकार दिया था। मोरबी की जनता ने भाजपा प्रत्याशी कांतिलाल अमृतिया पर अपना भरोसा जताया था। कच्छ जिले की इस सीट पर कांतिलाल ने 62 हजार वोटों से जीत हासिल की। उन्हें 1 लाख 14 हजार से भी ज्यादा वोट मिले थे।
अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने संसद में जमकर हंगामा किया। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के शासन में चीन ने हजारों किलोमीटर जमीन हड़प ली थी। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को चीन से मिलने वाले फंड को लेकर भी निशाना साधा है।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के हंगामा की निंदा की। उन्होंने कहा, “विपक्ष ने अरुणाचल में घटी घटनाओं का हवाला देते हुए बहुमूल्य प्रश्नकाल को स्थगित करवा दिया। यह निंदनीय है। इसका कोई औचित्य नहीं था। जब रक्षा मंत्री ने इस विषय पर अपना बयान रखने की बात कर ही दी, तो इसका कोई औचित्य ही नहीं था। मुझे आश्चर्य लगा, लेकिन जब प्रश्नकाल की सूची देखा तो 5 नंबर का प्रश्न देखकर मैं इनकी चिंता समझ गया था।”
कांग्रेस जवाब दे कि वर्ष 2005-07 के बीच राजीव गाँधी फाउंडेशन ने चीनी दूतावास से जो 1 करोड़ 35 लाख रुपये प्राप्त किये उनसे क्या किया?
कांग्रेस देश को बताये कि राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने जाकिर नाइक की संस्था से बिना अनुमति के FCRA खाते में जुलाई 2011 को 50 लाख रुपये क्यों लिए? pic.twitter.com/HulVovrdij
उन्होंने यह भी कहा, “पाँचवा प्रश्न राजीव गाँधी फाउंडेशन के FCRA रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के बारे में था। राजीव गाँधी फाउंडेशन को 2005-6 और 2006-7 के वित्तीय वर्ष में चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ था, जो FCRA कानून और उसकी मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। इस पर नोटिस देकर पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए गृह मंत्रालय ने इसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया।”
उन्होंने आगे कहा कि ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ ने अपना रजिस्ट्रेशन सामाजिक कार्यों के लिए करवाया था और उसे जो फंड चीनी दूतावास से मिला, बताया गया कि वह भारत-चीन संबंधों के विकास पर शोध करने के लिए मिला है। अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी बताए कि इन्होंने शोध तो जरूर किया होगा।
गृह मंत्री ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे कहा, “क्या उनके शोध में 1962 में भारत की हजारों हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली, वो शामिल था क्या? यदि शोध किया तो रिपोर्ट क्या आई है? नेहरू जी के प्रेम के कारण सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता बलि चढ़ गई। इस विषय को उन्होंने शोध का विषय बनाया था क्या? अगर बनाया था तो इसका नतीजा क्या हुआ?”
अमित शाह ने यह भी कहा, “जिस समय गलवान घाटी में हमारे सेना के वीर जवान चीनियों से भीड़ रहे थे, उस समय चीनी दूतावास के अधिकारियों को कौन रात्रि भोज दे रहा था? वो उनकी शोध का विषय था क्या? अगर था तो उसका नतीजा क्या हुआ?”
उन्होंने यह भी कहा कि वह कॉन्ग्रेस को बताना चाहते हैं, दोहरा और दोगला चरित्र जनता के सामने नहीं चलता है, जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा, “आपके परिवार (गाँधी परिवार) द्वारा चलाया गया फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन चीनी दूतावास द्वारा लिए गए फंड के कारण कैसिंल किया गया। कॉन्ग्रेस के समय में ही, देश की हजारों हेक्टेयर जमीन हड़प ली गई। कॉन्ग्रेस की सरकार के समय में ही निजी संबंधों को बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता चीन को भेंट कर दी गई।”
अमित शाह ने यह भी कहा है कि ये बीजेपी की सरकार है मोदी इसके पीएम हैं जब तक बीजेपी की मोदी सरकार चल रही है एक इंच जमीन पर भी कोई कब्जा नहीं कर सकता। चीनी सेना के विरुद्ध भारतीय सेना के जवानों ने जो वीरता दिखाई है और घुसपैठ कर रहे सैनिकों को कुछ ही घण्टों में भगा दिया, वह उसकी प्रशंसा करते हैं। इसके अलावा उन्होंने, कहा है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने भगोड़े जाकिर नाइक की संस्था से भी 50 लाख रुपए लिए थे, इसलिए भी रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का मंगलवार (13 दिसंबर, 2022) राजस्थान में 9वाँ दिन है। राज्य में सवाई माधोपुर जिले में खंडार के जीनापुर से शुरू हुई यह यात्रा आज 22.4 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस बीच दौसा पहुँचने से पहले राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का विरोध करने की खबर सामने आई है। दौसा जिला मुख्यालय पर सड़कों के किनारे और पुलिया के नीचे कई जगहों ‘राहुल गाँधी गो बैक’ के नारे लिखे गए हैं।
वहीं, दौसा के बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जयपुर के लिए निकल रहे हाईवे पर श्यामसिंह पुरा और द्वारापुरा के मध्य कट की माँग की है। उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक जी आर खटाणा को चेतावनी दी है कि अगर उनकी माँगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो वे मिलकर राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का विरोध करेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की यात्रा के बीच में आने वाली दीवारों पर काली स्याही से लिखा है, “राहुल गाँधी GO BACK, जितेंद्र मेघवाल को न्याय दो। कार्तिक भील को न्याय दो। इंद्र कुमार मेघवाल को न्याय दो। ओमप्रकाश रैगर को न्याय दो।” बताया जा रहा है कि ‘भीम आर्मी’ ने राहुल के खिलाफ ये नारे लिखवाए हैं।
उधर दौसा के बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने सभा का आयोजन किया है। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से बाँदीकुई विधानसभा क्षेत्र में एक भी कट नहीं दिया गया, जबकि विश्व प्रसिद्ध आभानेरी की चाँद बावड़ी बाँदीकुई क्षेत्र में स्थित है। वहीं दिल्ली से मेहँदीपुर बालाजी आने-जाने वाले लोग भी बड़ी तादाद में यहाँ से होकर आते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में हाईवे पर कट नहीं होने से उन्हें परेशानी होगी और उनको घूमकर आना पड़ेगा। ऐसे में यहाँ कट देना बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों की सभा में पहुँचे कॉन्ग्रेस विधायक जी आर खटाणा को भी उनके विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने फोन पर दौसा से भाजपा सांसद जसकौर मीणा से बात की और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। जसकौर मीणा ने लोगों को फोन पर भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को वह लोकसभा में उठाएँगी और उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान भी होगा।
Congress MP Rahul Gandhi, party’s general secretary Priyanka Gandhi Vadra, along with her husband Robert Vadra and their daughter Miraya Vadra participated in the Bharat Jodo Yatra, in Rajasthan.
बता दें कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और उनकी बेटी मिराया वाड्रा भी नजर आईं।
चीन के फौजियों ने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में एलएसी को पार करने की कोशिश की थी। लेकिन 17000 फीट की ऊँचाई पर भारतीय सैनिकों ने ही उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चीन की फौज को वापस होने के लिए मजबूर कर दिया।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार चीन के 300 से अधिक फौजी इसमें शामिल थे। लेकिन भारत के 50 सैनिकों ने ही उनका रास्ता रोक दिया। करीब आधे घंटे के भीतर ही भारतीय सेना की बैकअप टीम भी मौके पर पहुँच गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच झड़प हुई और चीनी फौजियों को लौटना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार तवांग सेक्टर में जो कुछ हुआ वह चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सोची-समझी साजिश थी। चीनी फौजी कीलों वाले डंडे, मंकी फिस्ट और टेजर गन जैसे घातक हथियारों से लैस थे। इन हथियारों से भले किसी की जान न जाए लेकिन ये इतने घातक होते हैं कि इनकी चपेट में आने के बाद गहरी चोट आ सकती है। मंकी फिस्ट लोहे या पत्थर का बना होता है। इसे कलाई पर पहना जाता है। वहीं टेजर गन के झटके से सामने वाले को कुछ देर के लिए सुन्न किया जा सकता है। इस दौरान झटका खाना वाला व्यक्ति कुछ भी करने में सक्षम नहीं होता।
भारतीय सेना ने 12 दिसंबर को जारी बयान में कहा था, “शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को, चीनी सेना के सैनिकों ने तवांग सेक्टर में एलएसी को पार करने की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने दृढ़ता और मजबूती के साथ इसका मुकाबला किया। आमने-सामने की इस लड़ाई में दोनों पक्षों के कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आईं हैं। हालाँकि, अब दोनों पक्ष पीछे हट गए हैं। घटना के बाद कार्रवाई के रूप में, क्षेत्र में भारतीय कमांडर ने शांति बहाल करने के लिए चीनी कमांडर के साथ फ्लैग मीटिंग की है।”
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार (13 दिसंबर 2022) को चीन की इस हरकत पर संसद में बयान दिया है। उन्होंने बताया कि चीन की फ़ौज ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में सीमा (Line Of Actual Control) पर अतिक्रमण कर के यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने का प्रयास किया। इस दौरान हुए संघर्ष में भारतीय सेना ने चीनी फौजियों को वापस अपने पोस्ट्स पर जाने को मजबूर कर दिया। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि दोनों तरफ से कुछ सैनिकों को चोटें भी आई हैं। भारत सरकार की तरफ से उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष में न तो हमारे किसी सैनिक की मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है।
उन्होंने बताया, “भारतीय सैन्य कमांडरों के त्वरित हस्तक्षेप के कारण PLA के सैनिक वापस अपनी जगह पर चले गए। घटना के बाद क्षेत्र के एरिया कमांडर ने 11 दिसंबर, 2022 को अपनी चीनी समकक्षों के साथ स्थापित व्यवस्था के तहत एक फ्लैग मीटिंग की, जिसमें इस घटना पर चर्चा हुई। चीनी पक्ष को मना किया गया कि वो इस तरह की हरकतें न करें। उन्हें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए भी कहा गया। चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है।”
गौरतलब है कि चीन ने ऐसा ही हमला साल 2020 में भी किया था। तब भी चीनी फौजी ऐसे ही हथियारों के साथ आए थे। उस समय भी भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया था। साल 2020 में चीन ने दो बार घुसपैठ की कोशिश की थी। पहली बार 21 मई 2020 और फिर 15 जून 2020। गलवान में 15 जून को हुई हाथापाई हिंसक झड़प में बदल गई थी। इसमें कर्नल संतोष बाबू समेत भारत के 20 जवान बलिदान हो गए थे।
बॉलीवुड की फिल्मों की ही तरह वेब सीरीज भी हिंदुओं की मान्यताओं और उनके आराध्यों का मजाक उड़ाने वाली परंपरा को आगे बढ़ा रही है। हाल ही में SonyLIV पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में भी भगवान गणेश की पूजा का मजाक उड़ाया जा रहा है। भगवान गणेश की पूजा मंत्रों से नहीं बल्कि, गालिब के शेरों से की जा रही है।
इस दृश्य का कहानी के मूल भाव से कोई संबंध नहीं है। यह दृश्य हास्य के लिए ही डाला गया है। हास्य के लिए यदि कुछ न सूझ रहा हो तो सबसे आसान है हिंदू देवी-देवताओं का मजाक बना दीजिए। बॉलीवुड की फिल्म पीके समेत कई फिल्मों में यह प्रयोग हो चुका है। प्रयोग इतना सफल रहा है कि हम जिन आराध्यों के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते ,हैं उन्हीं का मजाक उड़ाए जाने पर ताली पीटते हैं और ठहाके लगाकर घर लौट आते हैं।
अब ‘फाड़ू’ वेब सीरीज पर आते हैं। इसे ‘सोनी लिव’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है। इस वेब सीरीज के निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी हैं और लेखक सौम्य जोशी हैं। वेब सीरीज का टाइटल ‘फाड़ू – अ लव स्टोरी’ के नाम पर न जाएँ। शुरुआत के 2 एपिसोड के बाद कहानी अपने नाम से भटक जाती है और किसी कॉर्पोरेट ड्रामा की तरह आगे चलती है। वेब सीरीज में ऐसी प्रेम कहनी दिखाई गई है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल होगा। क्योंकि, ऐसा कम ही होता है कि एक जमीन-जायदाद-खेतीबाड़ी वाला पिता अपनी बेटी को झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लड़के से प्यार करने और घर बसाने से नहीं रोकता।
एक दृश्य में नायिका के पिता बेटी के परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि रिजल्ट अच्छा हो, इस दृश्य में नायिका के पिता भगवान को गालिब के शेर सुना रहे हैं। संभवतः, हास्य के लिए इस तरह का दृश्य फिल्माया गया होगा। जो शेर भगवान को सुनाया जा रहा है उसको देखिए-
ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे
इस शेर को भी बहुत शोध के बाद चुना गया है। इसमें काबा और कलीसा जैसे शब्द हैं। काबा मक्का की प्रसिद्ध मस्जिद है जहाँ मुस्लिम हज करने जाते हैं। कलीसा ईसाइयों और यहूदियों का गिरजाघर (चर्च) है। यही प्रयोग किसी मस्जिद में हनुमान चलीसा का दृश्य फिल्माकर या गणेश स्तुती के साथ क्यों नहीं किया जाता?
इसी दृश्य में एक संवाद भी है। पास खड़ा व्यक्ति जब उन्हें टोकता है कि आज तो शास्त्रीय पूजा कर लीजिए, इस पर नायिका के पिता जवाब देते हैं, “अरे… बप्पा (भगवान गणेश) को गालिब सुना रहा हूँ, यह भी तो एक प्रकार की पूजा ही है न?” बप्पा को गालिब सुनाना कौन से प्रकार की पूजा है? कहाँ इसके प्रमाण हैं? यह दृश्य शुद्ध रूप से एक पूजा पद्धति को दूषित करने का प्रयास है। कई दृश्यों में नायक के पिता जब भगवान का आशीर्वाद लेने को कहते हैं तो नायक औपचारिकता भर कर लेता है। इसे उभारा गया है। नायक के ईश्वर के प्रति अविश्वास को दिखाया गया है।
आगे भी पूरे वेब सीरीज में ऐसा लगता है कि कहानी को जबरन थोपा जा रहा है। कोंकण के एक गाँव में रहने वाली नायिका मंजरी (संयमी खेर) का पोस्टमास्टर पिता बेटी को कविता और साहित्य पढ़ने के लिए मुंबई के कॉलेज में भेजता है। वहीं, मुंबई की झुग्गियों में ऑटोरिक्शा चलाने वाले पिता का बेटा अभय दुबे (पावेल गुलाटी) मंजरी की क्लास में है। मंजरी को अभय से प्यार होता है और चिट्ठियों में मंजरी सब कुछ पिता को बताती जाती है।
दोनों का विवाह हो जाता है। यहाँ तक ‘फाड़ू’ में लव स्टोरी नजर आती है। इसके बाद कहानी में आखिर तक स्टोरी का ट्रैक बदल जाता है और उसमें से लव गायब हो जाता है। अभय को करोड़पति बनना है। यहाँ यह भी समझ से परे है कि व्यापार करने में माहिर लड़का साहित्य के क्लास में दाखिला क्यों लेता है?
सीरीज के सारे पात्र और घटनाएँ इसी बात के इर्द-गिर्द घूमने लगती हैं कि कैसे अभय मुंबई की झुग्गी से निकाल कर परिवार को एक भव्य सोसाइटी में ले जाएगा। लिटरेचर पढ़ते हुए वह अचानक बिजनेस-मार्केटिंग में अपने जबर्दस्त काबलियत से पैसे वालों को चमकाने लगता है। कहानी अभय के पैसा कमाने और रईस बनने पर फोकस हो जाती है।
11 एपिसोड वाली लंबी वेब सीरीज देखने के बाद आपको लग सकता है कि कुछ घटनाएँ और किरदार बेवजह थे। सीरीज में एक लंबा ट्रेक बी ग्रेड फिल्मों के प्रोड्यूसर का है। उसका आना और जाना मूल कहानी में कुछ नहीं जोड़ता। जैसे गणपति के सामने गालिब के शेर पढ़ा लेने से कुछ नहीं बदलता। ऐसा लगा वेब सीरीज के निर्माता इसे खींचने में लगे रहे। वेब सीरीज में नायक को नास्तिक की भाँति दिखाने की कोशिश हुई है।
हमारे देश में शुरू से ही फिल्मों का इस्तेमाल परसेप्शन (Perception) बनाने के लिए किया जाता रहा है। यह बॉलीवुड की ही देन है कि हमारे पहनावे, श्रृंगार का तरीका और परंपराओं को लेकर नौजवानों के मन में विकृति पैदा कर दी गई। फिल्मों में मान्यताओं का जिस तरह से कुतर्क के आधार पर एकतरफा मजाक बनाया गया, वह खेल आज भी जारी है। ठाकुरों और गाँव के ब्राह्मणों को खलनायक की भूमिका में दिखाने वाला बॉलीवुड महादेव के दुग्धाभिषेक पर सवाल खड़े कर देता है लेकिन अन्य धर्म की विकृतियों को भी सकारात्मक रुप से परोसने की कोशिश करता है। भगवान गणेश के सामने गालिब के शेर पढ़े जा सकते हैं लेकिन इनकी हिम्मत नहीं कि किसी मस्जिद के सामने गणेश वंदना फिल्मा सकें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 के 13 दिसंबर को श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (Shri Kashi Vishwanath Corridor) राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके साल भर पूरे होने पर मंदिर प्रशासन की ओर से बाबा का दरबार सजाया गया है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। बताया जा रहा है कि लोकार्पण के बाद से अब तक मंदिर में 7.35 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुँचे हैं।
यही नहीं साल भर में शिव भक्तों ने रिकॉर्ड तोड़ 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का चढ़ावा भी चढ़ाया है। इसमें 60 किलो सोना, 10 किलो चाँदी और 1500 किलो तांबा और अन्य धातुओं का चढ़ावा भी है। यह मंदिर के इतिहास में सबसे अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 500 प्रतिशत से अधिक है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा के अनुसार, बाबा के दरबार में लोकार्पण से अब तक श्रद्धालुओं ने करीब 50 करोड़ से अधिक की नकदी का चढ़ावा चढ़ाया है। इसमें से 40 प्रतिशत धनराशि ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुई है।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण का वार्षिकोत्सव : सजा बाबा का दरबार, सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हवन पूजन और विद्धत गोष्ठी pic.twitter.com/63hmObkuWe
रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का नया और भव्य स्वरूप होने के कारण बनारस में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। इसके चलते परिवहन, होटल, गेस्टहाउस, नाविकों, श्रमिकों, वस्त्र उद्योग, हेंडीक्राफ्ट व अन्य व्यवसाय से अर्थव्यवस्था भी रफ्तार पकड़ रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि पहले एक साल में काशी में 1 करोड़ पर्यटक आते थे, लेकिन अब एक महीने में ही इतने पर्यटक आ रहे हैं।
4 से 5 साल में निकल जाएगा खर्च
ऐसा माना जा रहा है कि 4 से 5 साल में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण का खर्च निकल जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया, “श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और मुआवजे में तकरीबन 900 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। आने वाले समय में धाम में सुविधाओं के विस्तार से भक्तों की संख्या बढ़ना निश्चित है, जिससे शिवभक्तों की ओर से चढ़ावा भी बढ़ेगा। चढ़ावे के अलावा कॉरिडोर में बने भवनों से भी अतिरिक्त आय होगी।” उनके मुताबिक कॉरिडोर की लागत अगले 4 से 5 साल में भक्तों के चढ़ावे और परिसर में नवनिर्मित भवनों से होने वाली आय से पूरी कर ली जाएगी। मालूम हो कि धाम परिसर के चारों द्वार पर लगे हेड स्कैनिंग मशीन के जरिए नियमित अंतराल पर श्रद्धालुओं की गिनती की जाती है।
5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है कॉरिडोर
बता दें कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर 2021 को देश को समर्पित किया था। प्रधानमंत्री ने 8 मार्च 2019 को इस कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी। यह कॉरिडोर 5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है। इसमें 33,075 वर्ग फीट में काशी विश्वनाथ मंदिर का परिसर है। इस कॉरिडोर में एक साथ 02 लाख लोग जमा हो सकते हैं। निर्माण में मकराना, चुनार के लाल बलुआ पत्थर समेत 7 विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। विश्राम गृह, संग्रहालय, सुरक्षा कक्ष और पुस्तकालय भी कॉरिडोर का हिस्सा हैं।
“सिखों के पवित्र धर्मस्थल और सबसे बड़ी अथॉरिटी श्री अकाल तख्त साहिब को हिंदुत्व आतंकी भारतीय सेना ने अपने टैंको से बर्बाद कर दिया। ज्यादा से ज्यादा बर्बादी और हजारों सिखों की हत्या के लिए वायुसेना और नौसेना का भी प्रयोग किया गया। रसायनिक हथियार भी इस्तेमाल किए गए। सिखों के पवित्र धर्मस्थल को मौत का मैदान बना दिया गया।”
झारखंड के गुरुद्वारे में लगे खालिस्तानी पोस्टर पर यही लिखा हुआ है
झारखंड में एक शहर है – जमशेदपुर। इस शहर का एक इलाका है – मानगो। यहाँ एक गुरुद्वारा है। गुरुद्वारे में कई पोस्टर लगे हैं। एक पोस्टर में भारतीय सेना को ‘हिंदुत्व आतंकवादी’ बताया गया है। भारतीय वायुसेना और नौसेना को भी हत्यारा बताया गया है। सबसे ऊपर जो लाइनें लिखी गई हैं, वो उसी पोस्टर की हैं।
जमशेदपुर के मानगो गुरुद्वारा के लिए भारतीय सेना आतंकी और जरनैल सिंह शहीद
जमशेदपुर स्थित जिस मानगो गुरुद्वारा में भारतीय सेना के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, उस पोस्टर में खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह को बगल में खड़ा कर हीरो और किसी संत-ज्ञानी की तरह दिखाया गया है। इस आतंकी की फोटो के नीचे इसे ‘महान शहीद’ भी बताया गया है।
इसी गुरुद्वारे के दूसरे पोस्टरों में कई खालिस्तानी आतंकियों का महिमामंडन किया गया है। इनमें से कुछ नाम हैं – जनरल शाबेग सिंह, भाई केहर सिंह, भाई सतवंत सिंह, जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआना, दविंदर पाल सिंह भुल्लर, दिलावर सिंह बब्बर… आदि।
हर एक खालिस्तानी आतंकी जमशेदपुर के मानगो गुरुद्वारे की ‘शान’
इन पोस्टरों से संबंधित जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने जमशेदपुर के स्थानीय लोगों से बात की। प्राइवेट सेक्टर के एक बैंक में काम करने वाले मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन पोस्टरों को देख कर वह आश्चर्य में पड़ गए थे। उन्होंने कहा, “एक दोस्त की नानी के निधन पर श्राद्ध-भोज में गया था। पोस्टर देख कर दिमाग घूम गया था। बैंक के ही अपने एक सहकर्मी से इसकी चर्चा भी की। आश्चर्य यह है कि अभी तक इस तरह के देशद्रोही हरकत के विरुद्ध न तो मीडिया-कवरेज मिला, न ही प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई हुई।”
विश्व हिंदू परिषद (झारखंड यूनिट) के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजय कुमार से भी इस मामले पर हमने बात की। उन्होंने बताया कि इन पोस्टरों के लगाए जाने के बाद जमशेदपुर में इसका विरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मानगो गुरुद्वारा के प्रबंधन ने विश्व हिंदू परिषद के जमशेदपुर स्थित जिला पदाधिकारियों के विरोध दर्ज कराए जाने के बावजूद इन पोस्टरों को हटाने से इनकार कर दिया।
संजय कुमार ने इन पोस्टरों को लेकर कहा कि यह देश-विरोधी गतिविधि है। उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी है लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उनके अनुसार, जमशेदुपर के मानगो पुलिस थाने ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गुरुद्वारे के इस हरकत को लेकर कभी कार्रवाई नहीं की।
ऑपइंडिया ने जब इस बाबत मानगो गुरुद्वारे के सदस्य सरदार भगवान सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि किसने ऐसा किया। हिन्दू संगठनों के विरोध पर भी पोस्टर न हटाने और भारतीय सेना से क्या दुश्मनी के सवाल पर भगवान सिंह ने ‘मैं दिखवाता हूँ’ कह कर फोन काट दिया।
‘झारखंड गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी’ के अध्यक्ष सरदार शैलेन्द्र सिंह ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “भिंडरवाला की फोटो लगी है, जिसे सिख समुदाय शहीद मानता है। शायद वो आप लोगों के लिए आतंकी होगा, लेकिन सिखों के लिए नहीं। आजकल उसकी फोटो बाजारों में मिलती है। उसकी तस्वीर को सिखों के सैकड़ों शहीदों के बीच जगह दी गई है। रही बात आर्मी के अपमान की तो आप हमें फोटो भेजें। हम अपमान करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करवाएँगे।”
जब सम्बन्ध में हमने SHO मानगो से बात की तो उन्होंने अपने थाना क्षेत्र में ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने से इनकार कर दिया। थाना प्रभारी मानगो हमसे ही जगह आदि की जानकारी लेने का प्रयास करने लगे।