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भारत जोड़ो यात्रा इफेक्ट: जिसके घर में राहुल गाँधी ने किया जलपान, वह बुजुर्ग महिला खुद 40 मिनट बाहर खड़ी रहने को हुईं मजबूर

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ इन दिनों राजस्थान में है। इसी दौरान वे कोटा के लाडपुरा पहुँचे थे। यहाँ उपप्रधान अशोक मीणा के घर में उनके जलपान की व्यवस्था की गई थी। लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा कारणों से अशोक मीणा की माँ उर्मिला को अपने ही घर में प्रवेश करने के लिए 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में यात्रा के तीसरे दिन कोटा के गोपालपुरा में पौने 3 घंटे का टी ब्रेक हुआ। राहुल और उनके साथ चलने वाले कुछ सीनियर लीडर्स के लिए स्नैक्स की व्यवस्था लाडपुरा के उप प्रधान अशोक मीणा के निवास पर थी। करीब 40 मिनट मकान में नेताओं का जमावड़ा रहा। इस दौरान अशोक मीणा की माँ उर्मिला बाहर ही रहीं।

उर्मिला ने बताया कि वह अपने गाँव वाले मकान पर थीं। वहाँ से आईं तब तक सुरक्षा जाँच प्रक्रिया हो चुकी थी। उनके पास ‘पास’ नहीं था, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इसलिए वह बाहर ही इंतजार करती रहीं। वहीं उपप्रधान अशोक मीणा ने बताया कि उन्होंने राहुल गाँधी से सिंचाई को लेकर बात की।

एक ट्विटर यूजर ने इस मामले को लेकर राहुल गाँधी से माफ़ी की माँग की और महिला को हुई तकलीफ के बारे में बताया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “राहुल गाँधी जी इस लाडपुरा उप प्रधान की माँ महिला उर्मिला जी से माफी माँगेंगे जो खुद महिला के घर अल्पाहार ले रहे थे और वो सिक्योरिटी चेक की वजह से बाहर खड़ी परेशान हो रही थी!”

राहुल गाँधी भले हीं ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर रहे हैं, लेकिन इस रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाता है कि वह लोगों से कितना जुड़े हुए हैं। वह मजे से ब्रेकफास्ट करते रहे और घर की मालकिन अपने ही घर जाने का इंतजार करती रहीं। वहीं बुधवार को ही केबलनगर में नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान राहुल गाँधी ने संसद में बोलने नहीं दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद टीवी को ओम बिरला का चेहरा पसंद है। इसीलिए टीवी पर उन्हें ही 24 घंटे दिखाया जाता है।

‘यह जमीन अल्लाह की… यहाँ से सभी बुत (मूर्तियाँ) उठवा दी जाएँगी’: अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में लगे नारे-पोस्टर… चुनावी नतीजों के बीच भुला दी गई खबर

उत्तर प्रदेश में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU, Aligarh) में मुस्लिम छात्रों ने 6 दिसंबर बाबरी ढाँचे के गिराने की बरसी को काला दिवस के रूप में मनाया और आपत्तिजनक नारे लगाए। इस दौरान छात्रों ने ‘जब अरजे खुदा के काब से, सब बुत उतरवाए जाएँगे’ की तख्तियाँ लेकर ‘मस्जिद वहीं थी, वहीं है और आगे भी वहीं रहेगी’ नारे लगाए।

विश्वविद्यालय के छात्र नेता मोहम्मद फरीद के नेतृत्व में मंगलवार (6 दिसंबर 2022) को बड़ी संख्या में मुस्लिम छात्र कैंटीन में एकजुट हुए और वहाँ से डक प्वाइंट पहुँचे। इस दौरान छात्रों ने कहा, “बाबरी मस्जिद अभी जिंदा है। मस्जिद वहीं थी, वहीं है और इंशाअल्लाह आगे भी वहीं रहेगी।”

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर ले रखे थे, जिसमें लिखा था, “जब अरजे खुदा के काब से, सब बुत उतरवाए जाएँगे।” उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद कभी खत्म नहीं हो सकती है और हमेशा वहीं रहेगी। वे अपनी आने वाली नस्लों को बताकर जाएँगे कि बाबरी मस्जिद वहीं है।

इस छात्रों ने नारे लगाए, ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इलल्लाह’। ये वही नारे हैं, जो कश्मीर में कभी आतंकी लगाया करते थे। बता दें कि ‘जब अरजे खुदा के काबे से, सब बुत उतरवाए जाएँगे’ एक विवादित नारा है, जिसका अर्थ है कि ‘एक दिन अल्लाह की इस ज़मीन से सभी बुत यानी मूर्तियाँ उठवा दी जाएँगी और सिर्फ अल्लाह का ही नाम रहेगा।

हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा का विशेष स्थान है, जबकि इस्लाम में मूर्ति पूजा यानी बुतपरस्ती को गुनाह माना गया है। इसलिए जब भी इस नारे की चर्चा होती होती है तो इसे हिंदू विरोध के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। इस शायरी को पाकिस्तान के शायर फैज अहमद फैज ने लिखा था। फैज ने इन नज्म को पाकिस्तान के कट्टरपंथी तानाशाह जिया उल हक के जमाने में लिखी थी।

भारत में जब भी देशविरोधी गतिविधियाँ अंजाम दी जाती है, उस समय इस नारे को खूब लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय बाद बाबरी ढाँचे की जगह राममंदिर निर्माण के बाद भी कट्टरपंथियों का यह कहना है कि ‘वहाँ मस्जिद थी, है और आगे भी रहेगी’ इसी सोच का परिचायक है।

AMU के छात्रों के इस प्रदर्शन को लेकर अलीगढ़ के भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गौरव शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को काला दिवस मनाने पर रोक लगाई है। इसके बाद भी AMU में इसे काला दिवस के रूप में मनाया गया। उन्होंने इस मामले की जाँच की माँग की।

बता दें कि इसी नारे को लेकर दिसंबर 2019 में IIT कानपुर में विवाद हुआ था। एक प्रदर्शन के दौरान इस नारे को लगाया गया था। उस दौरान IIT निदेशक को दी गई शिक़ायत में कहा गया था कि ये पंक्तियाँ “सभी मूर्तियों को नष्ट करने का आह्वान करती हैं” (जैसा कि मूर्ति पूजा इस्लाम में निषिद्ध है) और इस बात पर ज़ोर दिया गया है, “केवल अल्लाह की पूजा होनी चाहिए।“

बाद में लिबरल गैंग ने इस पर लीपापोती करने की कोशिश की थी और फैज को नास्तिक और वामपंथी बताकर उनका बचाव किया था। इसको लेकर लोगों ने सवाल उठाए थे कि अगर फैज नास्तिक थे तो मजहब के आधार पर बने पाकिस्तान में वे क्यों चले गए थे। फैज का बचाव करने वालों में बॉलीवुड के स्वघोषित बुद्धिजीवी जावेद अख्तर भी शामिल थे।

छठी बार विधायक बने CM जयराम ठाकुर: क्या हिमाचल प्रदेश में BJP बदल देगी 32 सालों वाला पैटर्न या फिर 5 साल बाद लौटकर ही दम लेगी कॉन्ग्रेस

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों का एक पैटर्न रहा है। पिछले 32 वर्षों से ये पैटर्न यूँ ही चला आ रहा है और इसे न तो भाजपा बदल पाई है और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी। वो पैटर्न ये है कि 1990 से अब तक यहाँ कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार बहुमत प्राप्त करने में कामयाब नहीं हो पाई है। अंतिम बार यहाँ किसी पार्टी ने दोबारा बहुमत प्राप्त किया था, वो कॉन्ग्रेस ही थी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में 1982 और 1985 में ये कारनामा किया था।

लेकिन, 1990 से ये पैटर्न चालू हो गया और उस साल हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के साथ ही दिग्गज नेता शांता कुमार मुख्यमंत्री बने। वो पहले भी लगभग ढाई वर्षों तक राज्य की कमान सँभाल चुके थे। हालाँकि, 1993 में भाजपा सत्ता में रहते हुए हार गई और लगभग एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के बाद 1993 में भाजपा की हार हुई थी और कॉन्ग्रेस ने वीरभद्र सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया था। 1998 में फिर से भाजपा की जीत हुई।

इस साल कॉन्ग्रेस पार्टी की हार के साथ ही प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने। पिछले 3 दशक से राज्य में वीरभद्र और धूमल व उनके परिवारों का दबदबा रहा है। धूमल के बेटे अनुराग सिंह ठाकुर फ़िलहाल केंद्र की मोदी सरकार में खेल एवं युवा मामलों के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी सँभाल रहे हैं। वो BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही वो चौथी बार सांसद भी बने हैं। इसी तरह 6 बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद हैं और उनके बेटे विधायक हैं।

2003 के चुनाव में भी उससे पहले विपक्ष में रही कॉन्ग्रेस की जीत हुई थी और उसने वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था। 2007 के दिसंबर में हुए चुनावों में कॉन्ग्रेस हार गई और प्रेम कुमार धूमल के पास फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पहुँच गई। 2017 में कॉन्ग्रेस पार्टी फिर जीत गई और वीरभद्र सिंह अंतिम व छठी बार मुख्यमंत्री बने। 2017 के चुनावों में भाजपा जीती और जयराम ठाकुर पर भरोसा जताया गया। अब 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा हारती हुई दिख रही है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर चल रहे आधिकारिक आँकड़ों की मानें तो कॉन्ग्रेस पार्टी फ़िलहाल 38 सीटों पर आगे चलती दिख रही है और ये बहुमत से 3 ज्यादा का आँकड़ा है। वहीं भाजपा 27 सीटों पर आगे चल रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सराज विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के चेतराम ठाकुर को 20,000 से भी अधिक वोटों से पटखनी दे दी है और छठी बार विधायक बने हैं। शिमला ग्रामीण से वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह भी जीत गए हैं। ऐसे में फिर वही पैटर्न राज्य में दिख रहा है।

‘तुम्हारा रंग काला… शादी के बाद भाग जाऊँगी’: टूट गई शादी, दूल्हे के पक्ष का दावा- दुल्हन के परिजनों ने सारा सामान छीना, लाठी-डंडे से मारा भी

उत्तर प्रदेश के बरेली में शादी टूटने का एक मामला अदालत में पहुँच गया है। आरोप है कि लड़की ने लड़के के रंग और शिक्षा पर सवाल उठाते हुए शादी से इनकार कर दिया। लड़के के परिजनों ने लड़की पक्ष पर मारपीट करने और सामान छीनने का भी आरोप लगाया है।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार मामला करीब छह महीने पुराना है। दिल्ली के निहाल विहार इलाके के रहने वाले दुर्गा प्रसाद की शादी बरेली की युवती से तय हुई थी। तिलक और गोद भराई के लिए लड़का पक्ष के लोग लड़की के घर पहुँचे। गोद भराई की रस्म के बाद लड़की ने दुर्गा से कहा, “तुम दिखने में सुंदर नहीं हो, ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हो और तुम्हारा रंग भी काला है। मेरी सहेलियाँ शादी के बाद मेरा मजाक उड़ाएँगी।” लड़की ने होने वाले दूल्हे को धमकी दी, “यदि तुमने शादी से इनकार नहीं किया तो शादी के बाद मैं भाग जाऊँगी। फिर तुम्हारी और तुम्हारे घर वालों की बदनामी होगी। इससे अच्छा होगा तुम खुद ही शादी से मना कर दो।”

लड़की की बात सुनकर लड़के के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपने और परिवार की इज्जत का ख्याल करते हुए शादी से मना कर दिया। दूल्हे के शादी से इनकार करते ही लड़की पक्ष के लोग नाराज हो उठे। आरोप है कि लड़की पक्ष के लोगों ने दूल्हा पक्ष के लोगों के साथ बदसलूकी की। उनका सामान छीन लिया।

इतना ही नहीं युवती के बहनोई पर भी दूल्हा पक्ष के लोगों को धमकी देने और गाली-गलौज का इल्ज़ाम है। कहा जा रहा है कि इस बीच दोनों पक्ष के लोगों ने विवाद सुलझाने की भी कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। दुल्हन के परिजनों पर दूल्हा पक्ष से 2 लाख रुपए माँगने का भी इल्जाम लगाया गया है। आरोप है कि रुपए न देने पर दुल्हन पक्ष के लोगों ने उनपर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

जब रिश्तेदारों के बीच बातचीत से मामला नहीं सुलझा तो दूल्हे के पक्ष ने कोर्ट का रुख किया। दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

‘ब्राह्मणों पंजाब-हरियाणा छोड़ो’: JNU के बाद सिरसा के कॉलेज में लिखा, सिख दंगों के लिए बताया दोषी; खालिस्तानी आतंकी पन्नू पर FIR

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के बाद अब हरियाणा में जातिसूचक नारे लिखे गए हैं। इन नारों के साथ खालिस्तान का भी समर्थन किया गया है। अराजक तत्वों ने देश विरोधी नारों के साथ ब्राह्मण विरोधी नारे लिखे हैं। इस मामले में सिख फॉर जस्टिस (SJF) के आतंकी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, हरियाणा के सिरसा जिले के डबवाली उपमंडल में डॉ बीआर अंबेडकर कॉलेज है। इस कॉलेज की बाहरी दीवारों पर 6 जगह ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिखे मिले। इसके साथ ही लिखा था, ‘ब्राह्मणों पंजाब-हरियाणा छोड़ो’। सन 1984 के सिख दंगों के लिए ब्राह्मणों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

इस तरह के नारे लिखे होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और इन्हें मिटवाया। स्थानीय पुलिस ने सिख फॉर जस्टिस के आतंकी और खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) और अज्ञात के खिलाफ देशद्रोह एवं साजिश रचने का मामला दर्ज किया है।

पुलिस का मानना है कि इस घटना को 6 या 7 दिसंबर 2022 की रात को अंजाम दिया गया है। दरअसल, गुरपतवंत ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिवार पर लिखे इन नारों को दिखाया गया है। वीडियो में पन्नू ने हरियाणा को पंजाब का हिस्सा बताकर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को चुनौती दी और मेलबर्न में 29 जनवरी 2023 को वोटिंग की बात भी कही।

पुलिस का कहना है कि कई संदिग्ध लोगों के फोन नंबर ट्रैस किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कॉलेज के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जाँच की जा रही है। बता दें कि इससे पहले खालिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन आतंकी द्वारा जातिसूचक नारे की यह अपने आप में संभवत: पहली घटना है।

बता दें कि इससे पहले JNU परिसर में कई जगह जातिसूचक नारे लिखे गए थे। विश्वविद्यालय परिसर के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II भवन की दीवारों पर ब्राह्मण और वैश्य समुदायों के खिलाफ नारे लिखे गए थे।

एक जगह लिखा था ‘ब्राह्मण-बनिया, हम आ रहे हैं बदला लेने’। एक जगह लिखा था ‘ब्राह्मण परिसर छोड़ो, ब्राह्मण भारत छोड़ो’। वहीं, एक जगह ‘अब खून बहेगा’ लिखा हुआ था। इसके साथ ही तीन प्रोफसरों के चैंबर के गेट पर ‘शाखा में जाओ’ लिखा गया था।

गुजरात में अब तक के सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने की ओर BJP, रुझानों में टूट रहा कॉन्ग्रेस का ‘KHAM’ वाला 149 का आँकड़ा

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। गुजरात में भाजपा प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है। यहाँ भाजपा ने 150 के आँकड़े को पार कर लिया है और 158 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 15 सीटों पर ही जीतती हुई दिख रही है। अरविंद केजरीवाल की AAP ने हाइप तो खूब बनाया था, लेकिन पार्टी पार्टी मात्र 5 सीटों पर ही आगे है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को भी 1 सीट मिलती हुई दिख रही है। भाजपा गुजरात में सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर सकती है।

जहाँ तक बात हिमाचल प्रदेश की है, वहाँ एग्जिट पोल्स सटीक साबित हो रहे हैं और काँटे की टक्कर चल रही है। सत्ताधारी भाजपा जहाँ 34 सीटों के साथ बहुमत के आँकड़े से मात्र 1 सीट पीछे है, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी 30 सीटों के साथ उसे कड़ी टक्कर दे रही है। हालाँकि, अन्य के होते में 3 सीटें गई हैं और उनमें अधिकतर भाजपा के बागी ह बताए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम परिणामों में भाजपा एक-दो सीट पीछे भी रही तो उसे सरकार बनाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

गुजरात के जामनगर विधानसभा क्षेत्र में क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा आगे चल रही हैं। मुख्यमत्री भूपेंद्र पटेल घाटलोडिया से लड़ रहे हैं, जहाँ से वो आसान जीत हासिल करने वाले हैं। अगर भाजपा 150 सीटों से आगे का आँकड़ा पार कर लेती है तो ये राज्य में अब तक किसी भी पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा। कॉन्ग्रेस के ‘KHAM’ मॉडल का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश में खंडित जनादेश की आशंका भी जताई जा रही है। माधव सिंह सोलंकी ने ‘क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम’ का गठबंधन बना कर 80 के दशक में 149 का आँकड़ा छुआ था।

जहाँ तक उत्तर प्रदेश की बात है, यहाँ मुलायम सिंह यादव परिवार का गढ़ रहे मैनपुरी को सपा ने फिर से बचा लिया है। डिम्पल यादव यहाँ से सहज रूप से जीत दर्ज करती हुई दिख रही हैं। आज़म खान के रामपुर और बिहार के कुढ़नी में काँटे की टक्कर है और पाला किसी भी तरफ जा सकता है। मनीष सिसोदिया ने दावा किया है कि गुजरात में इस प्रदर्शन के साथ अब AAP राष्ट्रीय पार्टी भी बनने जा रही है, क्योंकि दिल्ली और पंजाब में पहले से ही उसकी सरकार है।

हिरोइन के पैर चाट राम गोपाल वर्मा ने कहा – शादी मत करना, पति को तुम्हारा पूरा शरीर मिल जाएगा

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्म देने वाले वाले राम गोपाल वर्मा इन दिनों अपने अजीबोगरीब हरकत की वजह से चर्चा में हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और साउथ की एक्ट्रेस आशु रेड्डी के कदमों में बैठे हैं और उनकी उँगलियाँ चाटते नजर आते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी यह हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और उनकी जमकर क्लास लगा दी।

समलैंगिक संबंधों पर आधारित राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘डेंजरस (Dangerous)’ जल्द ही सिनेमा घरों में दस्तक देने वाली है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म में भी काफी बोल्ड सीन हैं। ऐसे में वह अपनी फिल्म के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में वह एक्ट्रेस आशु रेड्डी (Ashu Reddy) के साथ अपना एक वीडियो शेयर करते हैं।

वीडियो (Ram Gopal Varma interview Ashu Reddy) में दिख रहा है कि एक्ट्रेस जहाँ काउच पर बैठी है, राम गोपाल वर्मा उनके क़दमों के पास नीचे जमीन पर बैठे हैं। वीडियो में दोनों काफी लंबी बातचीत करते हैं। वीडियो के अंत में राम गोपाल वर्मा एक्ट्रेस के पैरों में मसाज करते हैं और कुछ देर बाद किसी पोर्न स्टार की तरह उनके पैरों की उँगलियाँ चाटने लगते हैं।

राम गोपाल वर्मा के इस व्यवहार से आशु भी भौचक्की नजर आती हैं। हालाँकि थोड़ी ही देर बाद आशु रेड्डी ने राम गोपाल वर्मा को उनके गाल पर किस किया। वीडियो में 1:21:00 के बाद राम गोपाल वर्मा को सामने बैठी हिरोइन को यह सलाह देते सुन सकते हैं कि कभी शादी मत करना क्योंकि इससे उसके पति को पूरे शरीर पर अधिकार मिल जाएगा। एक्ट्रेस आशु रेड्डी ने भी राम गोपाल वर्मा के साथ अपनी फोटो इन्स्टाग्राम पर शेयर की है।

सोशल मीडिया यूजर्स को रामू-आशू का यह अंदाज पसंद नहीं आया। ट्विटर पर भी रामू ने एक्ट्रेस के साथ अपना वीडियो शेयर किया था, जहाँ कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, ”आपको हो क्या गया है सर? बहुत ही अजीब है यह।”

वहीं एक यूजर ने इमोजी शेयर किया, जिसमें लिखा हुआ है, ”ठरकी है ठरकी”

वहीं एक यूजर ने लिखा, ”इसमें डेंजर क्या है, आप तो सिर्फ पब्लिसिटी पाने की कोशिश कर रहे हैं… आप अपने आप को एक बड़ी फिल्मी हस्ती कहते हैं, जिस तरह से आपने खुद को पेश किया है, शर्म करो !! और यह देश आपको पद्मश्री भी देगा।”

AAP नहीं, AAAP कहिए जनाब: गुजरात और हिमाचल प्रदेश में गायब नहीं हुए हैं आम आदमी पार्टी के नंबर, जानिए क्या है A का लोचा

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए वोटों की गिनती चल रही है। रूझान आने शुरू हो गए हैं। टीवी चैनल के पल पल बदलते नंबर के बीच लोग आधिकारिक नंबर जानने के लिए बीच बीच में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी हो आते हैं। आपने पाया होगा कि वहॉं बीजेपी, कॉन्ग्रेस सब है। लेकिन AAP नहीं दिखती, जबकि AAAP मौजूद है।

आप सोच रहे होंगे कि चुनाव के दौरान दिखी आम आदमी पार्टी यानी AAP के नंबर्स कहां गायब हो गए। तो इसका जवाब है कि AAP के नंबर कहीं गायब नहीं हुए हैं। दरअसल AAAP का नंबर ही आम आदमी पार्टी का नंबर है। वही पार्टी जिसका निशान झाड़ू है। जिसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल हैं। जिसकी दिल्ली और पंजाब में सरकार है। जिसने 7 दिसंबर 2022 को दिल्ली नगर निगम के चुनावों में भी जीत हासिल की है।

AAP नहीं, AAAP कहिए जनाब

दरअसल नाम में अतिरिक्त A को लेकर कंफ्यूजन उस समय भी हुआ था, जब पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। यही 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान भी देखने को मिला था। चुनाव आयोग ने उस समय इस कंफ्यूजन को दूर करने का काम किया था, क्योंकि निर्वाचन आयोग की साइट पर हमेशा से आम आदमी पार्टी के लिए AAP नहीं, AAAP प्रयोग होता आया है।

भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता ने बताया था, “शॉर्ट फॉर्म में ट्रिपल A कोई चूक नहीं है। इसी शब्द का प्रयोग साल 2015 के चुनावों के वक्त किया गया था।” उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि आम आदमी पार्टी से पहले ही एक पार्टी ने इस नाम को अपने लिए पंजीकृत करवाया था, जबकि आम आदमी पार्टी का पंजीकरण 2013 में हुआ था। उस पार्टी का नाम बता दें आवामी आमजन पार्टी थी जो भारतीय निर्वाचन आयोग में 3 जनवरी 2011 को पंजीकृत हुई थी।

गौरतलब है कि सिर्फ मीडिया, सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी खुद भी दल की शॉर्ट फॉर्म aap ही लिखता आया है। चाहे उनके कार्यालय हों, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, मेनिफेस्टो हो। हर जगह आपको उनके चुनाव चिह्न झाड़ू के साथ aap लिखा दिखाई देगा। ये पार्टी साल 2012 में गठित हुई थी और 2013 में इसे निर्वाचन आयोग ने पंजीकृत किया था। पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल हैं जो दिल्ली में सरकार बनाने के बाद अपनी पार्टी को पंजाब तक पहुँचा चुके हैं।

गुजरात का गठन, BJP का अजेय रथ और ब्रांड मोदी… राज्य में 27 वर्षों से भाजपा की सरकार, 5 और सालों के लिए उत्साहित पार्टी

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे (Gujarat Assembly Election Results) आने में अब कुछ ही घंटों का इंतजार है। विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की साँसें अभी से थमने लगी हैं। हालाँकि, गुजरात की जमीनी हकीकत को जानने वाले राजनीतिक एवं चुनावी विश्लेषक और एक्जिट पोल साफ कर चुके हैं कि एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

गुजरात में पिछले 27 सालों से भाजपा की सरकार है और हिंदुत्व के इस प्रयोगशाला और विकास के गुजरात मॉडल के गढ़ से भाजपा को बाहर करना इतना आसान नहीं है। उधर आम आदमी पार्टी (AAP) चाहे कितने भी दावे करे कि वह गुजरात चुनाव जीतने जा रही है, लेकिन यह सीएम अरविंद केजरीवाल के लिखित दावे जैसा ही फुस्स हो जाएगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक शो के दौरान कागज पर लिखकर दिया था कि दिल्ली के MCD चुनाव में भाजपा 250 में से 20 से भी कम सीटें जीतने जा रही है। MCD में AAP की जीत जरूर हुई है, लेकिन उनके झूठे दावों की कलई भी खुली है।

हालाँकि, गुजरात की कहानी दिल्ली जैसी नहीं है। यह भाजपा का गढ़ है। कुछ हिस्सों को छोड़कर जब पूरे देश में कॉन्ग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों का बोलबाला था, जब भाजपा ने कॉन्ग्रेस को हटाकर गुजरात में सत्ता स्थापित की थी और शासन का ऐसा मॉडल विकसित किया कि गुजरातियों का भाजपा पर पिछले 27 सालों से विश्वास जमा बैठा है। अगर गुजरात में इस बार भाजपा जीतती है तो यह उसकी लगातार 7वीं बार सरकार बनेगी।

राज्य के रूप में गुजरात का गठन

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1953 में पहला राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया, जिसके तहत 14 राज्य तथा 9 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। हालाँकि, तब गुजरात नहीं बना था और वह मुंबई का ही हिस्सा था। इसके बाद गुजरातियों का आंदोलन तेज हुआ और 1960 में बंबई राज्य को दो भागों में बाँट दिया गया। एक महाराष्ट्र बना और दूसरा गुजरात।

साल 1960 में विधानसभा चुनाव हुए और इसमें 132 सीटों में से 112 सीटों पर कॉन्ग्रेस जीती। सन 1960 से लेकर सन 1975 तक राज्य की सत्ता पर कॉन्ग्रेस का शासन रहा। इसके बाद कुछ समय के जन मोर्चा की संयुक्त सरकार बनी लेकिन वह ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई।

सन 1977 में पहली बार जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी, जिसमें जनसंघ, भारतीय लोकदल, समता पार्टी और कॉन्ग्रेस से अलग हुई कॉन्ग्रेस (ओ) की सरकार बनी और बाबू पटेल मुख्यमंत्री बने। यह सरकार सिर्फ 211 दिनों की चली। इसके बाद 1990 तक फिर से कॉन्ग्रेस से बनी। इस दौरान माधव सिंह सोलंकी राज्य के ताकतवर नेता के रूप में उभरे थे।

गुजरात में भाजपा का सत्ता में प्रदार्पण

इसके बाद 1990 के चुनाव में जनता दल और भाजपा एक साथ आकर चुनाव लड़े। जनता दल के नेता चिमनभाई पटेल थे और भाजपा ने केशुभाई पटेल। उस दौरान दलित-मुस्लिम और क्षत्रिय (राजपूत) मतदाताओं के बल पर सत्ता में दबदबा बरकरार रखने वाली कॉन्ग्रेस को मात देने के लिए भाजपा ने पटेल कार्ड खेला और यह सफल भी रहा।

साल 1990 के चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार हुई जनता दल और भाजपा की मिली-जुली सरकार बनी। इस सरकार का नेतृत्व जनता दल के चिमनभाई पटेल को मिला। हालाँकि, राममंदिर आंदोलन को लेकर जनता दल भाजपा से अलग हो गई और इस बीच एक साल के लिए कॉन्ग्रेस की फिर सरकार बनी।

साल 1995 में हुए चुनावों में भाजपा को जबरदस्त फायदा मिला और राज्य की कुल 182 सीटों में से 121 सीटें भाजपा ने जीती। इस तरह भाजपा की जीत के बाद केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री बने, लेकिन एक साल बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा और उनकी जगह सुरेश मेहता मुख्यमंत्री बने। उनकी जगह फिर शंकर सिंह वाघेला आए।

सन 1998 के चुनावों में भाजपा फिर केशुभाई सीएम बने। 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 44.81 फीसदी था, जबकि कॉन्ग्रेस का वोट शेयर 35.88 फीसदी था। इस चुनाव में बीजेपी ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 117 उम्मीदवार जीते थे।

राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी

इसी बीच साल 2001 में विनाशकारी भूकंप आया। केशुभाई पटेल की उदासीनता और राज्य में राजनीतिक उठा-पटक को लेकर नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी गई। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद राज्य में विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने बहुमत हासिल किया।

इसके बाद से नरेंद्र मोदी की अगुवाई में गुजरात में भाजपा की सरकार रही है। साल 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनकर दिल्ली आ गए। इस तरह 1995 से लेकर 2022 तक राज्य में भाजपा की सरकार बरकरार है और इसमें फिलहाल बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

‘घायल शेर की साँसें, दहाड़ से ज्यादा खतरनाक होती हैं’: खून टपक रहा था, लेकिन 9 नंबर पर उतर कर रोहित शर्मा ने अटका दी बांग्लादेश की साँसें

भारत और बांग्लादेश (India vs Bangladesh) के बीच दूसरे वनडे मैच में भारत की हार हो गई है। हालाँकि, कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) रहा है। इस मैच के दौरान टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा चोटिल हो गए, लेकिन हार माने बिना वे दोबारा फील्ड में उतरे। उनके इस जुझारूपन को देखकर लोग शर्मा की खूब तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, मैच की पहली पारी में बांग्लादेश बैटिंग कर रही थी, एक बॉल से रोहित शर्मा चोटिल हो गए हैं। स्लिप एरिया में फील्डिंग के दौरान उनके बाएँ अंगूठे में चोट लगी। इसके बाद उन्हें एक्स-रे के लिए ढाका के एक अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल से लौटकर शर्मा स्टेडियम लौटे और क्रीज पर बल्लेबाजी करते नजर आए। इस दौरान उनकी अँगुली में पट्टी बँधी हुई भी नजर आई। घायल होने के बावजूद उन्होंने तूफानी पारी खेली। शर्मा ने 28 गेंदों में 51 रनों की बौछार कर दी। इस दौरान रोहित शर्मा ने ने 5 खतरनाक छक्के और 2 चौके जड़े।

हालाँकि, इस मैच में वे भारत को जीत नहीं दिला पाए और भारत 5 रनों से हार गया। अंतिम गेंद पर भारत को जीत के लिए 6 रनों की जरूरत थी, लेकिन बांग्लादेश के मुश्ताफिजुर रहमान ने अंतिम गेंद डॉट निकाल दी। इस तरह भारत को सिर्फ एक रन पर संतोष करना पड़ा।

इस दौरान रोहित शर्मा ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। रोहित शर्मा पहले ऐसे भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच में 500 छक्के लगाया है। शर्मा की इस पारी का सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।

रोहित शर्मा की तारीफ करते हुए अविनाश आर्यन नाम के एक यूजर ने लिखा, “घायल शेर की साँसें, उसकी दहाड़ से भी ज्यादा खतरनाक होती है।”

आनंद सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “भारत भले ही मैच हार गया है, लेकिन रोहित शर्मा ने भारतीयों और क्रिकेट की दुनिया का दिल जीत लिया है।”

रतनीश नाम के यूजर ने लिखा, “परिणाम चाहे जो भी हो, रोहित शर्मा की यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। सचमुच चैंपियन।”