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कैश फॉर टिकट: MLA त्रिपाठी के सीट पर AAP साफ, आदेश गुप्ता वाले ऑडियो को एजेंसी ने पाया था फेक

दिल्ली में MCD चुनाव के नतीजे आ गए हैं और ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ 134 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। वहीं 15 वर्षों से महानगरपालिका की सत्ता पर काबिज भाजपा एंटी-इंकम्बेंसी के बावजूद 104 सीटें लाने में कामयाब रही है और 2017 के MCD चुनाव के मुकाबले उसका वोट प्रतिशत भी सुधरा है। खास बात ये है कि AAP के दागी मंत्री सत्येंद्र जैन और घोटाले के आरोपों में गिरे उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के वार्डों में भाजपा की जीत हुई है।

इस दौरान सभी की नज़रें मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र पर भी थी, जहाँ से अखिलेश पति त्रिपाठी AAP के विधायक हैं। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र की तीनों की वार्डों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने भी इस जीत पर ख़ुशी जताई है, जिन्होंने अंतिम दिनों में यहाँ धुआँधार चुनाव प्रचार किया था। ज्ञात हो कि ‘पेड़ों के बदले टिकट’ मामले में अखिलेश पति त्रिपाठी आरोपित हैं।

अखिलेश पति त्रिपाठी के साले को ‘एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)’ ने गिरफ्तार भी किया था। आरोप है कि वार्ड संख्या 69 से AAP का पार्षद टिकट दिलाने के लिए उसने 90 लाख रुपए की माँग की थी। आरोप है कि शोभा ने अखिलेश पति त्रिपाठी को 35 लाख रुपए दे भी दिए थे। हालाँकि, मनीष सिसोदिया ने दावा किया था कि AAP में टिकट बेचा नहीं जाता। अखिलेश पति त्रिपाठी को ACB ने समन भी भेजा था। अब उनके विधानसभा क्षेत्र में पार्षद के चुनाव में भाजपा ने AAP का सूपड़ा साफ़ कर दिया है।

दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता का नाम भी इस तरह के स्कैंडल में घिसटने का प्रयास हुआ था। उनका ऑडियो वायरल कर के ये दावा किया गया था कि वो टिकट की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। हालाँकि, मीडिया ने जानकारी दी थी कि ‘डिजिटल मॉर्फ चेकिंग एजेंसी’ ने जाँच के बाद उनका ऑडियो फेक पाया है। एजेंसी ने दावा किया था कि अलग-अलग ऑडियो को मिला कर इसे तैयार किया गया था। आदेश गुप्ता ने भी इसे विपक्ष की ‘गंदी राजनीति’ करार दिया था।

आदेश गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कन्नौज में स्थित गुरसहायगंज से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक किया है। 1994 में जब वो दिल्ली आए थे, तब उन्होंने ट्यूशन पढ़ा कर अपना गुजरा चलाया था। PWD में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने कारोबार और राजनीति में सफलता प्राप्त की। वो अप्रैल 2018 में NDMC के मेयर बने और जून 2020 में उन्हें दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

‘राहुल गाँधी FIFA मैच देख रहे हैं और चुनावों में पार्टी फुटबॉल बन गई’: MCD चुनावों में कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़, अपने नेता भी सुना रहे खरी-खोटी

दिल्ली के MCD चुनावों में कॉन्ग्रेस की दुर्गति हो गई है। उसे सिर्फ 09 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। उधर पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के तहत देश भर में घूम रहे हैं। वे ना तो गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान दिखे और ना ही दिल्ली के MCD चुनावों को उन्होंने महत्व दिया।

भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गाँधी का मंगलवार (6 दिसंबर 2022) को एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं के साथ एक ग्राउंड में फुटबॉल मैच का आनंद लेते नजर आए। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने राहुल गाँधी पर तंज कसा।

आचार्य प्रमोद ने लिखा, “MCD का ‘रिजल्ट’ भी देखना चाहिए।” दरअसल, बुधवार (7 दिसंबर 2022) को दिल्ली MCD चुनावों की मतगणना थी। इसमें कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन को लेकर प्रमोद ने यह कटाक्ष किया।

टीवी9 के एक शो के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं एंकर अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा, “राहुल जी आराम के क्षणों में FIFA का मैच देख रहे थे। हमने कहा MCD का भी चुनाव देख लेते। यहाँ पूरी पार्टी फुटबॉल हो गई और वे FIFA देख रहे हैं।”

राहुल गाँधी के नेतृत्व में जिस तरह से कॉन्ग्रेस की दुर्गति हुई, उसके बाद उन्होंने लगता है कि चुनावों को महत्व देना ही छोड़ दिया है। उनके लिए चुनाव सिर्फ मोह-माया जैसा अब रह गया है। वे निर्विकार एवं साक्षी भाव से सिर्फ कर्म किए जा रहे हैं और राजनीति एवं चुनाव के आडंबर में फँसना ही नहीं चाहते। इसलिए चुनावों के मौसम में भी राजनीति से विमुख होकर सिर्फ आनंद में लिप्त हैं।

वे गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान भी ना नजर आए और ना ही एक शब्द बोले। इसलिए MCD जैसे सबसे सबसे निचले निकाय पर उनसे बयान या प्रचार का उम्मीद करना बेमानी-सा है। यह उनके समभाव के परालौकिक ज्ञान पर सवाल उठाने जैसा है। वे सिर्फ साक्षी भाव से इस परिवर्तनशील संसार को सिर्फ देख रहे हैं।

हालाँकि, आचार्य प्रमोद जैसे धर्मगुरु भी उनके इस नए अवतार को शायद समझ नहीं पा रहे हैं। इसके लिए उन पर कटाक्ष कर रहे हैं। यही नहीं, मीडिया और राजनीति में भी चुनाव नतीजों के दिन फुटबॉल मैच देखने को लेकर लोग उनकी राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। बता दें कि आचार्य प्रमोद साल 2019 में लखनऊ सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। अब वे कॉन्ग्रेस से भी कड़वे सवाल करते हैं।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी राजस्थान में हैं। वे कोटा में मोरक्को बनाम स्पेन के बीच खेले जा रहे फुटबॉल मैच का एक बड़े स्क्रीन पर आनंद लेते नजर आए। इस दौरान उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे।

दिल्ली के सीलमपुर में बुर्का वाली पार्षद, जीत के बाद भी कोई नहीं देख सका चेहरा: लोगों ने कसा तंज – महिला सशक्तिकरण की बड़ी जीत

दिल्ली एमसीडी चुनाव में जीत हासिल करने वाली एक बुर्के वाली पार्षद का वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, दिल्ली एमसीडी चुनाव में तीन वार्डों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इन्हीं में से एक सीलमपुर वार्ड नंबर 225 सीट से शकीला बेगम नाम की उम्मीदवार को कामयाबी मिली। जीत मिलने के बाद वह पत्रकारों के सामने आईं तो सिर से पाँव तक बुर्के में ढँकी हुई थी। यहाँ तक कि उनका चेहरा भी नहीं दिख है था। उन्होंने रिपोर्टरों को बाइट भी बुर्के में ही दी।

शकीला बेगम के बगल में बैठे शख्स उनकी मदद कर रहे थे। वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि जीत के बाद जब ‘नवभारत टाइम्स’ के पत्रकार ने शकीला बेगम से प्रतिक्रिया माँगी तो पहले वह कुछ समझ नहीं सकीं, फिर उन्होंने कहा, “सीलमपुर की जनता को मैं बहुत मुबारकबाद देती हूँ और दुआ करती हूँ कि हमारा ऐसा ही साथ हमेशा बना रहे। ऐसे ही हमें उनका प्यार मिलता रहे। लोगों के कर्ज तो उतर जाते हैं लेकिन हमारे इलाके की जनता ने जो अहसान किया है, वह कभी नहीं उतरेगा।”

शकीला ने लोगों के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। शकीला बेगम जिस सीट से जीत कर आई हैं वह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए आरक्षित की गई थी। जीत हासिल करने के बाद जिस तरह शकीला बेगम मीडिया के सामने पेश हुईं वह ट्विटर पर कौतूहल का विषय बन गया। पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सीलमपुर से विजयी उम्मीदवार शकीला बेगम, महिला सशक्तिकरण और हिजाब की बड़ी जीत”

महेश विक्रम हेगड़े नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “शकीला बेगम से मिलें जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दिल्ली के सीलमपुर वार्ड से जीती हैं। कोई टिप्पणी नहीं।”

वीडियो पर संजय नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि क्या आपको यकीन है कि वह शकीला बेगम हैं या उनकी जगह कोई और? उन्होंने लिखा कि लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला राजनीतिक व्यक्ति जिसे लोगों ने चुना है वह लोगों को अपना चेहरा भी नहीं दिखा सकती। यूजर ने पूछा कि जब जनता के सामने अपना चेहरा दिखाने से भी डरते हैं तो सार्वजनिक जीवन में क्यों आते हैं?

वहीं कुछ यूजर्स तो मजाक उड़ाते भी नजर आए।

आपको बता दें कि शकीला बेगम तीसरी बार एमसीडी में पार्षद बनी हैं। 2017 के चुनाव में भी शकीला बेगम ने सीलमपुर से जीत हासिल की थी। इस साल उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा की सीमा शर्मा को 4262 वोटों के अंतर से हराया।

गॉड ने 6 दिन दुनिया बनाई, 7वें दिन आराम किया… केरल में ईसाइयों के हिंसक प्रदर्शन के बाद 35 चर्च बंद: ‘Holy Mass’ में पादरी का चेहरा किधर होगा, इसी पर बवाल

केरल के कोच्चि में सेंट मैरी कैथेड्रल बेसिलिका में रविवार (27 नवंबर, 2022) को ‘होली मास’ की प्रक्रिया को लेकर दो समूहों के बीच हिंसक टकराव देखा गया था। बाद में टकराव इतना बढ़ गया कि 35 चर्चों को बंद करना पड़ा।

आर्कबिशप एंड्रयूज ताज़थ को ‘होली मास’ प्रक्रिया का विरोध कर रहे ईसाइयों ने बेसिलिका में प्रवेश करने से रोक दिया था। वहीं अनुयायियों के एक अन्य समूह ने चर्च का ताला तोड़ने का प्रयास किया, जिससे तनाव और बढ़ गया। कथित तौर पर, हिंसक प्रदर्शनकारियों ने चर्च की संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया। बढ़ते तनाव के मद्देनजर, पुलिस ने हस्तक्षेप किया और विरोध करने वाले समूहों को चर्च खाली करने के लिए कहा। इसके बाद स्थिति सामान्य होने तक चर्च पर ताला लगा दिया गया।

हालाँकि, हिंसक विरोध खत्म नहीं हुआ। ‘दैनिक भास्कर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न ईसाई संगठनों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद 35 चर्चों को बंद कर दिया गया है। दरअसल, ईसाई समुदाय की मान्यता है कि गॉड ने 6 दिन में दुनिया को बनाया था और 7वें दिन आराम किया था। इसी वजह से ईसाई भी रविवार को ईसा मसीह की पूजा करते हैं। इसी पूजा को ‘होली मास’ कहा जाता है।

रोमन कैथोलिक चर्च की स्थानीय विंग सिरो मालाबार ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि इसकी प्रैक्टिस के दौरान पादरी और भक्तों का मुँह पूर्व दिशा की ओर होगा, लेकिन केरल के मॉडर्न कैथोलिक ईसाइयों का दावा है कि ये बात कहीं नहीं लिखी है। इससे अनुयायी पादरी को न तो देख पाते हैं और न ही उससे संवाद कर पाते हैं। इनका दावा है कि हम पादरी को भगवान के रूप में देखते हैं। भगवान हमारी तरफ नहीं देखे, ये बात ठीक नहीं है।

अल्माया मुन्नेट्टम संगठन का कहना है कि हमने पोप फ्रांसिस से अनुमति ली थी कि हमारे चर्च में लोगों की ओर देखकर ही प्रार्थना होगी, लेकिन अब हम पर नया आदेश मानने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ये आदेश वापस नहीं लिया गया तो रोमन कैथोलिक चर्च को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगस्त 2021 में, सिरो मालाबार कैथोलिक चर्च के धर्मसभा ने अपने चर्चों में ‘होली मास’ आयोजित करने की एक समान विधि लागू करने का निर्णय लिया था। यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि ईसाइयों के बीच ‘होली मास’ पूजा की सबसे अच्छी प्रक्रिया मानी जाती है।

ईसाई समुदाय के विशेषज्ञों के मुताबिक, नियम ये कहता है कि प्रार्थना के दौरान पादरी को आधे समय अनुयायियों की ओर देखना चाहिए। बाकी समय पूर्व दिशा की ओर देखना चाहिए। हालांकि, मॉडर्न ईसाइयों ने इसे मानने से भी इनकार कर दिया। उनका कहना है कि 50 साल से जो प्रथा चली आ रही है, वही चलेगी।

आ रहे हैं भगवाधारी… जिस सीट पर था दंगाई ताहिर हुसैन का कब्ज़ा, उसे BJP ने किया अपने नाम: दंगा प्रभावित इलाकों की जनता ने भाजपा पर जताया भरोसा

दिल्ली MCD चुनावों में अधिकतर लोगों की नजर साल 2020 में हिन्दू विरोधी दंगों से प्रभावित रहे उत्तर पूर्वी क्षेत्र पर थी। इस बार यहाँ की सीटें सभी पार्टियों के लिए अहम थीं। घोंडा विधानसभा सीट में 4 वार्ड आते थे। इनके नाम भजनपुरा, यमुना विहार, ब्रह्मपुरी और घोंडा वार्ड हैं। इन 4 में से 2 वार्डों में भाजपा और 2 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की है।

जानकारी के मुताबिक, भजनपुरा वार्ड में आप पार्टी की प्रत्याशी रेखा रानी ने नजदीकी भाजपा उम्मीदावर से 3100 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। वहीं यमुना विहार वार्ड में भाजपा के प्रमोद गुप्ता ने 9000 से ज्यादा वोटों से नजदीकी आप पार्टी के कैंडिडेट को हराया है। तीसरे वार्ड घोंडा से भाजपा की प्रीति गुप्ता ने आप पार्टी प्रत्याशी को 3000 से अधिक वोटों से हराया है। ब्रह्मपुरी वार्ड में आम आदमी पार्टी की छाया शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी को 2900 से ज्यादा वोटों से हराया है।

दिल्ली का सभापुर वार्ड भाजपा के बृजेश सिंह की झोली में गया। सोनिया विहार वार्ड से वार्ड से भाजपा की सोनी पांडेय ने जीत दर्ज की है। इन दोनों प्रत्याशियों की जीत पर ‘जय श्री राम’ और ‘आ रहे हैं भगवाधारी’ जैसे नारे लगे हैं।

हिंसा प्रभावित रहे जफाराबद के चौहान बांगर से कॉन्ग्रेस के चौधरी जुबेर अहमद की बेगम शगुफ्ता ने जीत हासिल की है। मौजपुर के वार्ड संख्या 228 से भी भाजपा के अनिल कुमार शर्मा ने जीत हासिल की। करावल नगर के दयालपुर वार्ड से भी भाजपा के पुनीत शर्मा ने जीत दर्ज की।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंड के तौर पर आरोपित किए गए आप पार्षद ताहिर हुसैन की विधानसभा नेहरू विहार में भाजपा ने जीत दर्ज कर ली है। यहाँ भाजपा के अरुण भाटी ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अलीम अंसारी को एक बेहद नजदीकी मुकाबले में 309 वोटों से हरा दिया है। 2020 में हिंसा प्रभावित करवाल नगर पश्चिम में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। यहाँ बीजेपी के सत्यपाल सिंह बैंसला ने बाजी मारी। पिछले कुछ समय पहले सुंदर नगरी हिन्दू युवक की हत्या के लिए काफी चर्चा में रहा।

यहाँ पर आम आदमी पार्टी की महिला प्रत्याशी मोहिनी ने लगभग 10 हजार वोटों से भाजपा प्रत्याशी रेनू को हराया है। मुस्तफाबाद और बृजपुरी वार्डों में कॉन्ग्रेस कैंडिडेट जीते।

आमदनी से 3 गुना ज़्यादा है MCD का खर्च, कैसे चलेगी AAP की रेवड़ी वाली राजनीति? केंद्र सरकार से भी मिलता है पैसा, टैक्स वसूल कर कमाई

दिल्ली नगर निकाय (MCD) चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत हुई है। AAP को 250 में से 134 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को 104 और कॉन्ग्रेस को 09 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। राजधानी दिल्ली का 97 फीसदी इलाका एमसीडी के अंडर ही आता है। बाकी का तीन प्रतिशत इलाका नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और दिल्ली कंटेन्मेंट बोर्ड (DCB) के पास है।

एमसीडी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम के दायरे में लगभग 2 करोड़ लोग आते हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नगर निगम बनाती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से दिल्ली नगर निगम विश्व में सबसे बड़ा निगम है और जनसंख्या की दृष्टि से दिल्ली नगर निगम की गिनती टोक्यो के बाद होती है। दिल्ली नगर निगम में लगभग 1.50 लाख कर्मचारी काम करते हैं।

इसी साल केंद्र सरकार ने दिल्ली के तीन निगमों को मिलाकर एक कर दिया था। तीनों नगर निगम एक करने के बाद एमसीडी का बजट बढ़कर 15,000 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुँच गया है। इस बार भी 15,276 करोड़ रुपए बजट का प्रा वलवधान किया गया है। वर्ष 2022-23 के लिए अनुमानित इस बजट का ऐलान होना बाकी है।

भले ही आम आदमी पार्टी एमसीडी चुनाव जीत चुकी है, लेकिन आगे उसकी राह आसान नहीं होने वाली है। एमसीडी की आर्थिक स्थिति बता रही है कि यह आम आदमी पार्टी के लिए काँटों भरा ताज है। दरअसल, दिल्ली नगर निगम की जितनी आमदनी है, उससे कई गुना ज्यादा खर्च है। एमसीडी के खर्च से पहले उसकी आमदनी के बारे में जान लेते हैं। एमसीडी की सालाना आमदनी लगभग 4800 करोड़ रुपए है।

टैक्स आय का प्रमुख साधन

किसी भी नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत वसूले जाने वाला टैक्स होता है। दिल्ली एमसीडी को संपत्ति टैक्स से अधिक आमदनी होती है। उन्हें प्लॉट, दुकानों, कमर्शियल इमारतों और जगह-जगह लगने वाले एडवरटाइजिंग का टैक्स मिलता है। इसके अलावा बॉर्डर पर वसूले जाने वाले टोल टैक्स, पार्किंग आदि से निगम अपनी कमाई करता है। दिल्ली सरकार जो स्टांप ड्यूटी वसूल करती है, उसमें भी नगर निगम का हिस्सा होता है।

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से मिलता है फंड

पाँचवे वित्त आयोग में व्यवस्था की गई थी कि विकास कार्यों के लिए एमसीडी को दिल्ली सरकार अपने बजट का 12.5% हिस्सा देगा। यह फंड राज्य सरकार तीन किस्तों में एमसीडी को देती है। इसके अलावा केंद्र सरकार का शहरी विकास मंत्रालय भी एमसीडी के लिए फंड जारी करता है।

नक्शों की मंजूरी से फंड की प्राप्ति

दिल्ली में नक्शे मंजूर करने का काम एमसीडी के पास ही है। यदि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में केंद्र सरकार भी कोई इमारत बनाती है तो उसे एमसीडी से ही नक्शा मंजूर कराना होता है। इसके लिए एमसीडी शुल्क वसूलता है।

आय के अन्य स्रोत

इनके अतिरिक्त एमसीडी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, ट्रेड लाइसेंस जारी करने, रेस्टोरेंट लाइसेंस देने, पार्किंग के ठेके जारी करने से भी आमदनी करता है।

आमदनी से अधिक खर्च

हम एमसीडी को आम आदमी पार्टी के लिए काँटो भरा ताज इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आमदनी के तुलना में यहाँ खर्च बहुत अधिक है। खर्च अधिक और आमदनी कम होने के कारण विकास कार्यों के लिए अक्सर फंड की कमी हो जाती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एमसीडी के लिए काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन पर सालाना 9300 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। एमसीडी को लाखों स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भरना पड़ता है। इस पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपए खर्च आता है।

सफाई व्यवस्था पर सालाना करीब 300 करोड़ रुपए खर्च होता है। बिजली बिल और सफाई पर सालना खर्च 400 करोड़ का खर्च होता है, लेकिन आमदनी नहीं होती। इसके अतिरिक्त सैनिटेशन, कूड़ा ढुलाई और दफ्तरों के मेंटनेंस पर भी खर्च होता है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि एमसीडी की जितनी आमदनी है, उससे करीब तीन गुना खर्च है। आय और व्यय के बीच का जो अंतर है उसे पाटना आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

दिल्ली की चुनावी पिच पर एक्जिट पोल फेल, MCD चुनावों में AAP का बता रहे थे क्लीन स्वीप: गुजरात-हिमाचल पर भी होंगे फुस्स या फिर पास

दिल्ली नगर निगम चुनाव (Delhi MCD Election Result) की सभी 250 सीटों के नतीजे आ गए हैं। आम आदमी पार्टी को 134, बीजेपी को 104, कॉन्ग्रेस को 9 और निर्दलीय को 3 सीटें मिली हैं। वहीं वोट शेयर की बात करें तो आप को 42.05 प्रतिशत, बीजेपी को 39.09 फीसदी और कॉन्ग्रेस को महज 11.68 प्रतिशत वोट मिले हैं।

दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजे इंडिया टुडे, टाईम्स नाउ, न्यूज 24, इंडिया न्यूज और टीवी 9 न्यूज के एग्जिट पोल्स में बताए गए आँकड़ों से बेहद अलग हैं। हालाँकि, इन सभी ने आम आदमी पार्टी को क्लीन स्वीप मिलने का दावा किया था, लेकिन उनके दावे नतीजों से कोसों दूर हैं।

इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल (India Today Axis My India Exit poll) में दावा किया गया था कि एमसीडी की कुल 250 सीटों में से आम आदमी पार्टी को 149 से 171 सीटे मिलेंगी। वहीं, भाजपा को 69 से 91, कॉन्ग्रेस को 3 से 7 और अन्य के खाते में 5 से 9 सीटें मिलते हुए दिखाया गया था।

इसी तरह दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022 की मतगणना से पहले जारी किए गए टाइम्स नाउ ईटीजी एग्जिट पोल (Times Now ETG Exit poll) में आम आदमी पार्टी को 146 से 156 सीटें, बीजेपी को 84 से 94, कॉन्ग्रेस को 6 से 10 और अन्य को 0 से 4 सीटें मिलने का दावा किया गया था।

फोटो साभार: @nvkrishna26

इंडिया न्यूज जन की बात एक्जिट पोल में ‘आप’ को 150 से 175 सीटें, बीजेपी को 70 से 92 सीटें, कॉन्ग्रेस को 4 से 7 और अन्य को 1 सीट मिली। वहीं, टीवी 9 के एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी को 140 से 150, बीजेपी को 92 से 96, कॉन्ग्रेस को 6 से 10 और अन्य को 2 से 4 सीटें मिलने का दावा किया था।

ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जब दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजों को लेकर इन सभी न्यूज चैनल का आँकड़ा असली रिजल्ट्स से काफी दूर रहा। ऐसे में गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के चुनावों को लेकर एक्जिट पोल में किए गए दावे कितने सच साबित होते हैं, यह 8 दिसंबर 2022 को पता चल जाएगा।

बात करें हिमाचल विधानसभा चुनाव को लेकर तो इंडिया टीवी मैट्रिज के एक्जिट पोल में बीजेपी को 35 से 40, कॉन्ग्रेस को 26 से 31 सीटें मिल रही हैं। वहीं न्यूज एक्स जन की बात के एक्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी को 32 से 40, कॉन्ग्रेस को 27 से 34 सीटें मिली हैं। इसी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर सामने आए सभी एक्जिट पोल में बीजेपी सबसे अधिक सीटें जीतकर सरकार बना रही है।

इंडिया टुडे के एक्सिस माय इंडिया के एक्जिट पोल में गुजरात में बीजेपी को 129 से 151, कॉन्ग्रेस को 16 से 30 और आम आदमी पार्टी को 09 से 21 सीटें दी हैं। वहीं, इंडिया न्यूज जन की बात एग्जिट पोल में बीजेपी को 117 से 140, कॉन्ग्रेस को 51 से 34 और आप को 13 सीटें दी गई हैं।

बता दें कि दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजों की तरह 8 दिसंबर 2022 को हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि एक्जिट पोल के आँकड़े नतीजों से कितने सटीक बैठते हैं या फिर काफी अलग होते हैं।

काशी तमिल संगमम: जीवंत परंपराओं को आत्मसात करने की विशेषता ही भारतीय सांस्कृतिक संपूर्णता का आधार

साहित्य समाज का दर्पण होता है। साहित्य में इस बात का प्रमाण है कि सदियों से तमिलों का काशी और बाबा विश्वनाथ के प्रति अगाध श्रद्धा रही है। आम जनमानस के साथ ही तमिल राजा और प्रबुद्ध वर्ग काशी की यात्रा करते रहे हैं। प्रमाण मिलते हैं कि 2300 साल पहले भी तमिलनाडु के नगर-ग्रामों की गलियाँ काशी की महिमा बखानने वाले गीतों से गूँजती थीं। ऐतिहासिक तथ्यों का साक्ष्य लें तो कोई 2000 वर्ष पहले से ही तमिलजनों की काशी यात्रा का क्रम प्रारंभ हो चुका था।

तमिल भाषा तो इतनी समृद्ध है कि इस भाषा में ‘अगटिटयम अगस्त्यम’ नामक एक व्याकरण ग्रन्थ का उल्लेख मिलता है, जिसका रचना काल ईसा पूर्व का है। पाणिनि के ‘अष्टाध्यायी’ की तरह इसकी उत्पत्ति भी शंकर के डमरू की ध्वनियों से निकली बताई जाती है। एक तरफ से पाणिनि का संस्कृत व्याकरण और दूसरी तरफ से तमिल का व्याकरण। इन दोनों ही भाषाओं का परस्पर संबंध संगम के दौरान हो गया होगा।

कहा जाता है कि प्रथम तमिल संगम मदुरै में हुआ था जो पाण्ड्य राजाओं की राजधानी थी और उस समय अगस्त्य, शिव, मुरुगवेल आदि विद्वानों ने इसमें हिस्सा लिया था। इसके बाद जो द्वितीय संगम हुआ उसका केंद्र कपातपुरम में था। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भारतीय प्राच्य इतिहास के प्रोफेसर रह चुके डॉक्टर विशुद्घानंद पाठक के मुताबिक, कपातपुरम का संगम ही इतिहास का सबसे बड़ा संगम था और उसमें उत्तर और दक्षिण के विद्वानों ने संगति की थी।

इन प्रथम दोनों संगम के बारे में विद्वानों में मतभेद जरूर हों पर उस समय का ग्रन्थ ‘तोल्लकाप्पियम’ आज भी उपलब्ध है। इसके रचनाकार तोल्लिकाप्पियार थे और उन्होंने दूसरा व्याकरण ग्रन्थ लिखा था। तमिल परंपरा में हर साहित्य तमिल अस्मिता वाले क्षेत्र का अदभुत वर्णन करते हैं।

कालांतर में भाषाई विवाद भी बढ़े। विद्वानों का मत है कि तमिल क्षेत्र के पांड्य राजाओं का संगम साहित्य में बहुत योगदान है और मूल रूप से सारा तमिल साहित्य इन्हीं पाण्ड्य राजाओं के संरक्षण में ही पनपा। पल्लव और पाण्ड्य राजाओं के बीच हुए परस्पर युद्धों ने तमिल भाषा को उत्तर की संस्कृत भाषा से दूर किया। दरअसल पल्लव राजा संस्कृत को बढ़ावा देते थे तथा वैदिक धर्म के संरक्षक थे, जबकि पाण्ड्य राजाओं के काल में शैव और वैष्णव परंपरा पनपी व तमिल भाषा पर जोर दिया गया। हालाँकि, पाण्ड्य राजा कोई संस्कृत के विरोधी नहीं थे पर वे तमिल का भी बराबर का प्रचार-प्रसार चाहते थे।

16वीं सदी में मुगल आक्रांताओं के भय से तमिल समाज की काशी यात्रा का मार्ग अबाध नहीं रह गया। काशी विश्वनाथ मंदिर का ध्वंस हो चुका था। काशी के तीर्थ पुरोहितों के कर्मकांडीय अनुष्ठानों पर रोक लगी हुई थी। ऐसे में काशीय वैभव के क्षरण से दुखी तमिलनाडु के पांड्य वंश के राजा जटिल वर्मन पराक्रमम ने ताम्रवर्णीय नदी (इस नदी की चर्चा रामायण में भी है) के तट पर एक नई काशी का निर्माण किया, जो आज भी तेनकाशी के नाम से विख्यात है।

17वीं शताब्दी में तिरु नेलवेली में पैदा हुए संत कुमारगुरु पारा ने काशी पर कविताओं की व्याकरणिक रचना ‘काशी कलमबकम’ लिखी और कुमारस्वामी मठ की स्थापना की।

जहाँ काशी ने पंडित परंपरा को स्थापित किया, वहीं तमिलनाडु ने तमिल इलक्कियापरंबराई (तमिल साहित्यिक परंपरा) का उदय देखा। बनारस हिंदू विविद्यालय के शिलान्यास समारोह में महान वैज्ञानिक सीवी रमन जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित थे और भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन इसके कुलपति थे।

श्रीकांची शंकराचार्य मठ के प्रबंधक व तीर्थ पुरोहित सुब्रमण्यम मणि के अनुसार, सातवीं सदी के तमिल लोक साहित्य काशी के महिमागान वाली रचनाओं से भरे पड़े हैं। तमिल लोकसाहित्य में यह भी वर्णन मिलता है कि सातवीं सदी के तत्कालीन शैव परंपरा में उस समय 63 शैवपंथ शाखाएँ सक्रिय थीं। इन सभी पंथों के 63 धर्माचार्य भी हुआ करते थे। इनमें से एक प्रमुख धर्माचार्य अप्परस्वामी कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दौरान कई मास तक काशी प्रवास पर रहे।

संगमम में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारतीय भाषा संस्थान तथा केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के स्टॉल लगाए गए हैं। ये पुस्तकें प्राचीन संगम व शास्त्रीय साहित्य से लेकर आधुनिक काल तक के बारे में हैं। इन ग्रंथों में तिरुवल्लूवर की तिरुकुरल, शिल्पादिकारम, चितलाई चतनार का मणिमेकलई, कपिलर का पट्टू पट्टू आदि शामिल हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “यदि ईश्वर की इच्छा होती, तो सभी भारतीय एक ही भाषा बोलते… भारत की शक्ति अनेकता में एकता रही है और हमेशा रहेगी।” देश में आज 19500 से अधिक भाषा -बोलियाँ बोली जाती हैं, जिनमें काशी और तमिलनाडु दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं-संस्कृत और तमिल के केंद्र रहे हैं। सुब्रमण्यम भारती जैसे दिग्गज काशी में रहे, उन्होंने संस्कृत और हिंदी सीखी और स्थानीय संस्कृति को समृद्ध किया और तमिल में व्याख्यान दिए। विभिन्न जीवंत परंपराओं को इस तरह से आत्मसात करने के कारण से ही भारत सांस्कृतिक लोकाचार की विशेषता वाले समकालिक संपूर्णता को बनाए रखने में सक्षम रहा है।

(लेखक सुभाष चंद्रा स्वतंत्र पत्रकार हैं)

जीत AAP की, धूम ‘रिंकिया के पापा’ की: MCD चुनाव नतीजों के बाद मनोज तिवारी के गाने पर कमरतोड़ डांस, Video वायरल

आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अति उत्साह में उल-जलुल हरकत कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जबर्दस्त टक्कर के बावजूद आप का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश AAP ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें उसके कार्यकर्ता भाजपा सांसद मनोज तिवारी के गाने ‘रिंकिया के पापा..’ पर मदहोश होकर डांस करते नजर आ रहे हैं।

AAP ने भाजपा को चिढ़ाते हुए लिखा, ”हम जीत गए।” साथ ही आप ने गाने के बोल ‘चट दिहली मार दिहली खींच के तमाचा.. हीही हीही हँस दिहली रिंकिया के पापा..’ भी साझा किया है। दूसरी ओर MCD के 250 वार्डों के लिए मतगणना पूरी हो गई है। आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है। AAP के 134 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। वहीं, 104 सीटों पर भाजपा जीती है। कॉन्‍ग्रेस ने भी 9 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि 3 सीट पर निर्दलीय जीते हैं।

मनोज तिवारी उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा के सांसद हैं। भाजपा सांसद एमसीडी के वार्ड नंबर 231 घोंडा में रहते हैं। भाजपा के कपिल मिश्रा भी इसी वार्ड के मतदाता हैं। घोंडा सीट पर भाजपा से प्रीति गुप्ता, आम आदमी पार्टी से विद्यावती और कॉन्ग्रेस की रीता मैदान में थीं। यहाँ भाजपा की प्रीति गुप्ता ने जीत दर्ज की है।

मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र में एमसीडी के कुल 41 वार्ड हैं। इनमें से भाजपा के खाते में 17 और आम आदमी पार्टी की झोली में 18 सीटें आई हैं। यहाँ भाजपा ने AAP को कड़ी टक्कर दी है। कॉन्‍ग्रेस ने एमसीडी चुनाव में जिन 9 सीटों पर जीत हासिल की हैं, उनमें से 4 अकेले मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र में हैं। 2 सीटों पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की है।

AAP की जीत पर मनोज तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है। उनसे पूछा गया कि बीजेपी तो निकाय चुनाव में 150 से अधिक सीटों पर दावा कर रही थी, लेकिन अब तो ग्राफ नीचे नजर आ रहा है। इस पर तिवारी ने AAP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने 150 से अधिक सीटों पर जीत का दावा किया था, लेकिन AAP ने तो 200 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया था। उनका वह दावा अब कहाँ है?

तबलीगी जमात के ‘इज्तेमा’ के लिए स्कूलों में 2 दिन की छुट्टियाँ,महाराष्ट्र के लातूर में शरद पवार की पार्टी के MLC के सामने झुका शिक्षा विभाग, प्राइवेट स्कूलों को भी मजबूर किया

महाराष्ट्र में लातूर प्रशासन द्वारा शहर के स्कूलों को एक इस्लामी कार्यक्रम के लिए दो दिन बंद करने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने नोटिस जारी कर तबलीगी जमात द्वारा आयोजित इस्लामी कार्यक्रम ‘इज्तेमा’ का हवाला देते हुए दो दिन की छुट्टी घोषित करने का निर्देश दिया था। नोटिस में कहा गया था कि स्कूल सभी मुस्लिम शिक्षकों और छात्रों को को इस आयोजन में भाग लेने की अनुमति देते हुए दो दिन की छुट्टी की घोषणा करें।

ऑपइंडिया के पास उपलब्ध पत्र के अनुसार, ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP)’ के नेता विक्रम वसंतराव काले द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर लातूर जिला प्रशासन के शिक्षा विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए थे। काले महाराष्ट्र विधान परिषद के वर्तमान सदस्य भी हैं। काले ने अपने ज्ञापन में कहा था कि लातूर जिले के औसा शहर में ‘इज्तेमा’ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिम छात्रों और शिक्षकों के लिए उनके ‘बौद्धिक और सामाजिक विकास’ के लिए कार्यक्रम में भाग लेना महत्वपूर्ण है।

लातूर प्रशासन द्वारा जारी नोटिस

उन्होंने कहा कि 5 और 6 दिसंबर, 2022 को आयोजित कार्यक्रम में कई इस्लामी विद्वानों को शामिल होना है और यह बेहतर होगा कि प्रशासन जिले के सभी स्कूलों में दो दिन की छुट्टी घोषित करे। उन्होंने इस्लामी कार्यक्रम को ‘सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम’ भी करार दिया और कहा कि सभी मुस्लिम छात्रों और शिक्षकों को इस कार्यक्रम में उपस्थित होना चाहिए।

इसके बाद, लातूर के प्रशासनिक अधिकारियों ने शनिवार (3 दिसंबर, 2022) को जिले भर के स्कूलों के लिए दो दिन की छुट्टी की घोषणा करते हुए एक नोटिस जारी किया। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी वंदना फुताने व नागेश मपारी सहित पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि स्कूल एक महीने के लिए शनिवार (साप्ताहिक अवकाश) पर छात्रों को बुलाकर छुट्टियों की भरपाई करेंगे। इसके अलावा, अधिकारियों ने तबलीगी जमात द्वारा आयोजित ‘इज्तेमा’ के अवसर पर निजी स्कूल के प्रधानाचार्यों को दो दिन की छुट्टी घोषित करने के लिए भी मजबूर किया।

‘इज्तेमा’ मुसलमानों के लिए शक्ति प्रदर्शन करने का एक कार्यक्रम है जो लोगों के नैतिक सुधार के बारे में है और अक्सर इसे ‘मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनाने’ के रूप में वर्णित किया जाता है। यह एक धार्मिक कार्यक्रम भी है जिसमें कई इस्लामी विद्वानों को मार्गदर्शन देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इसे पूरी दुनिया में तब्लीगी जमात का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है क्योंकि यह मुसलमानों के जीवन पर बड़ा प्रभाव डालने का दावा करता है।