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‘बॉडी पॉजिटिविटी’ पर वीडियो बनाती थी 21 साल की TikTok स्टार, अचानक से हो गई मौत: ‘तनाव और एंग्जायटी’ के कारण आया था हार्ट अटैक

‘बॉडी पॉजिटिविटी’ पर वीडियो बनाने वाली TikTok और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर मेघा ठाकुर की अचानक से मौत हो गई है। उन्हें 4 महीने पहले हार्ट अटैक आया था। हालाँकि, उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। TikTok और इंस्टाग्राम पर वो अपनी बोल एवं सेक्सी तस्वीरें व वीडियोज अपलोड करने के लिए भी जानी जाती थीं। वो कनाडा की राजधानी टोरंटो में परिवार सहित रह रही थीं। उनके माता-पिता ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी मौत की सूचना दी। मेघा ठाकुर और उनका परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर का रहने वाला है।

इस पोस्ट में कहा गया है, “मेघा ठाकुर की प्यारी याद में! अंतिम क्रियाकर्म 29 नवंबर, 2022 को सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच होगा। काफी भारी मन के साथ हम बता रहे हैं कि हमारे जीवन की प्रकाश हमारी दयालु, ख्याल रखने वाली और सुंदर बेटी मेघा ठाकुर की अचानक से और अकस्मात ही गुरुवार (24 नवंबर, 2022) को तड़के सुबह मौत हो गई है। वो एक आत्मविश्वासी और स्वतंत्र युवती थीं। हम उन्हें हमेशा याद रखेंगे।” मेघा जब 1 साल की थीं, तभी उनका परिवार कनाडा शिफ्ट हो गया था।

मेघा ठाकुर के माता-पिता ने लिखा है कि वो अपने फैंस से काफी प्यार करती थीं और वो जरूर चाहती होंगी कि उनके निधन की सूचना आप सबको मिले। उन्होंने फैंस से मेघा के लिए प्रार्थना करने के लिए भी कहा। TikTok पर मेघा ठाकुर के 9.30 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स थे, वहीं इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोवर्स की संख्या 1.04 लाख से अधिक थी। वो और उनका परिवार फ़िलहाल ओंटारियो स्थित ब्राम्पटन में रह रही थीं।

मेघा ठाकुर अक्सर अलग-अलग तरह के शरीर के आकार-प्रकार की वकालत करती थीं और कहती थीं कि सभी प्रकार के शरीर की महत्ता को स्वीकार करना चाहिए। अक्सर वो डांस करते हुए भी वीडियो बनाती थीं। उन्होंने मेफील्ड सेकेंडरी स्कूल से स्नातक करने के बाद 2019 में वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था। इसी दौरान वो TikTok पर सक्रिय हुईं। जुलाई 2022 में उन्हें आए हार्ट अटैक का कारण ‘तनाव और एंग्जाइटी’ बताया गया था।

‘पाकिस्तानी PM ने महिला से हाथ मिलाया, अल्लाह देगा गुनाह की सज़ा’: देवबंदी मौलाना ने हिना रब्बानी खार को भी हिजाब न पहनने पर बताया ‘अय्याश’

अपनी विदेश यात्रा के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का एक महिला से हाथ मिलाना उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया है। पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने इसे हराम बताते हुए उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई है। पाकिस्तान के देवबंदी मौलाना अब्दुल अजीज गाजी ने शाहबाज़ शरीफ को अल्लाह का डर दिखाया है। तालिबानियों को बेशर्म इंसान कहने के साथ मौलाना ने हिना रब्बानी खार को भी अय्याश शब्द से सम्बोधित किया है।

जानकारी के मुताबिक पिछले माह नवम्बर में शाहबाज़ शरीफ तुर्की के दौरे पर गए थे। शाहबाज़ तुर्की को चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में शामिल होने का न्योता देने गए थे। इस दौरान इस्ताम्बुल शहर में उन्होंने एक महिला से हाथ मिला लिया था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की इस हरकत पर आग बबूला हुए देवबंदी मौलाना ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताते हुए शाहबाज़ को अल्लाह से डरने की नसीहत दी है। मौलाना के मुताबिक, शरीफ को खुदा महिला से हाथ मिलाने के गुनाह की सज़ा जरूर देगा। मौलाना का यह बयान वीडियो के साथ वायरल भी हो रहा है।

अभी तक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने वाली उस महिला की पहचान नहीं हो पाई है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना अब्दुल अजीज गाजी ने लोकतंत्र को भी एक बुरा तंत्र बताया। उन्होंने इसे नास्तिकों का तंत्र कहते हुए गलत लोगों द्वारा चलाया जाने वाला सिस्टम बताया। मौलाना ने शाहबाज़ सरकार में विदेश मंत्रालय संभाल रहीं राज्यमंत्री मंत्री हिना रब्बानी खार को भी उल्टा-सीधा कहा। मौलाना के मुताबिक, तालिबान के दौरे पर गई हिना रब्बानी ने हिजाब नहीं पहना था।

हिना के हिजाब न पहनने को देवबंदी मौलाना ने ‘अय्याशी’ बताया। इसी के साथ मौलाना अजीज गाजी ने तालिबान को भी बिना हिजाब पहने महिला की आवभगत करने के लिए ‘बेशर्म’ शब्द से सम्बोधित किया। मौलाना ने तालिबान और उसके समर्थकों से बिना हिजाब वाली हिना के स्वागत के लिए माफ़ी माँगने को भी कहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने कुछ समय पहले ही मौलाना अब्दुल अजीज से इस्लामाबाद की लाल मस्जिद को खाली करवाया था। तब से वो शाहबाज़ सरकार के खिलाफ खुल कर बयानबाजी कर रहे हैं।

‘मर्द नहीं बचे हैं क्या?’: जामा मस्जिद के शाही इमाम ने मुस्लिम महिलाओं को टिकट दिए जाने पर उठाया सवाल, कहा- इससे इस्लाम होता है कमजोर

गुजरात विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Elections) में मतदान दौरान मुस्लिमों (Muslims) से एकजुट रहने की अपील करने वाले अहमदाबाद स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने एक और बयान दिया है। सिद्दीकी ने कहा कि चुनावों में मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने वाले इस्लाम के खिलाफ हैं और वे इसे कमजोर कर रहे हैं।

इमाम सिद्दीकी ने कहा, “अभी आपने देखा नमाज पढ़ना। एक भी औरत नजर आई? इस्लाम में सबसे ज्यादा अहमियत नमाज को है। अगर औरतों को इस तरह से लोगों के सामने आना इस्लाम में जायज होता तो उन्हें मस्जिद में नहीं रोका जाता। मस्जिद से रोक दिया गया, क्योंकि औरत का इस्लाम में एक मुकाम है।”

सिद्दीकी मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने वालों पर भी भड़के। उन्होंने कहा, “जो मुस्लिम औरतों को टिकट देते हैं, वे इस्लाम के खिलाफ बगावत करते हैं। इस्लाम के खिलाफ उनका ये अमल है। आपको मर्द नहीं मिला कि आप औरतों को ला रहे हैं? इससे हमारा मजहब कमजोर होगा। कमजोर इसलिए होगा, क्योंकि कल कर्नाटक में हिजाब का मसला चला तो काफी हंगामा हुआ।”

महिलाओं को टिकट देने से इस्लाम कैसे कमजोर होगा, इसको लेकर सिद्दीकी तर्क देते हैं, “अब कल अपनी औरतों को काउंसलर या विधायक बनाएँगे तो हम हिजाब को महफूज नहीं रख पाएँगे। इस मसले को हम फिर नहीं उठा सकेंगे, क्योंकि इसे उठाने के लिए हम सरकार से बात करेंगे तो वे कहेंगे कि आपकी औरतें तो अब एसेंबली हॉल में आ रही हैं, पार्लियामेंट में जा रही हैं, म्युनिसिपालिटी के बोर्ड में बैठ रही हैं। स्टेज पर वो लोगों से अपील कर रही है। इलेक्शन लड़ने के लिए घर-घर जाना पड़ेगा। इस्लाम में औरत की आवाज भी औरत है। इसलिए मैं इसका सख्त मुखालिफ हूँ।”

मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने के पीछे के ‘साजिश’ को समझाते हुए सिद्दीकी ने कहा, “आप मर्द को टिकट दीजिए। अगर कहीं हमारे देश का है कि उस सीट से औरतें ही लड़ सकती हैं तो वहाँ आप कह सकते थे कि भाई वहाँ तो मजबूरी है। मेरा मानना है कि ये औरतों या लड़कियों को इसलिए टिकट दे रहे हैं ताकि पूरे कब्जे में किया जा सके। आजकल तो औरतों की चलती है तो वो आगे आ जाएगी तो पूरा परिवार कब्जे में आ जाएगा। इसके सिवाय तो और कोई मकसद मुझे नहीं लगता।”

मुस्लिमों से एकजुट होकर वोट करने की अपील

इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मुस्लिमों से एकजुट होकर गुजरात चुनाव में वोट डालने की अपील की है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के वोटों के बँटवारे के चलते साल 2012 में अहमदाबाद की जमालपुरा सीट पर भी भाजपा ने कब्ज़ा जमा लिया था। सिद्दीकी ने कहा है कि मुस्लिम उसी को जिताएँ जो उनका प्रतिनिधित्व करता हो। खुद शब्बीर भी दूसरे, यानी कि अंतिम चरण के चुनाव में 5 दिसंबर, 2022 को अपना वोट अहमदाबाद में डालेंगे।

साल 2012 में जमालपुरा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था। उनके विरोध में एक स्थानीय नेता साबिर काबलीवाला भी चुनाव लड़े थे। काबलीवाला को लगभग 30 हजार वोट मिले थे। इस खींचतान में भाजपा प्रत्याशी ने 6000 वोटों से जीत दर्ज कर ली थी। एक बार फिर से काबलीवाला उसी जमालपुरा से चुनावी मैदान में हैं। इस बार वो ओवैसी की पार्टी AIMIM से प्रत्याशी हैं।

ओवैसी की पार्टी की गुजरात चुनावों में एंट्री पर सवाल खड़े करते हुए इमाम शब्बीर ने पूछा कि वो विधानसभा में क्या करने जा रहे हैं? बकौल शाही इमाम, मुस्लिमों की भाजपा से दुश्मनी है तो ऐसे समय पर उन्हें कॉन्ग्रेस से भी शत्रुता नहीं करनी चाहिए। इमाम ने खुले तौर पर मुस्लिमों से एकजुट हो कर कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की।

राजद MLC ने दारू को बताया भगवान, ज़हरीली शराब से हुई मौतों पर बोले – जीना-मरना चलता रहता है

बिहार में शराब बंदी के बाद आए दिन शराब की तस्करी से लेकर जहरीली शराब के कारण लोगों की मौत की खबरें आती रहतीं हैं। राज्य में शराबबंदी को लेकर लंबे समय से विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा है। हालाँकि, अब महागठबंधन में शामिल राजद (RJD) नेता और एमएलसी रामबली चन्द्रवंशी (MLC Rambali Chandravanshi) ने शराब की तुलना भगवान से करते हुए कहा है कि बिहार में हर जगह शराब मिलती है, दिखती कहीं नहीं। उनके इस बयान से बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामबली चंद्रवंशी बिहार के कुढ़नी में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए जनसंपर्क कर पटना लौट रहे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे वैशाली जिले महनार में जहरीली शराब से हुई मौत पर सवाल पूछा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मरना-जीना चलता रहता है, बिहार के लोग शराबबंदी के लिए अभी तैयार नहीं हैं।”

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा है कि बिहार में शराब भगवान की तरह है, दिखती कहीं नहीं है, लेकिन मिलती सब जगह है। उन्होंने दावा किया कि लोग शराब के अलावा अन्य कारणों से भी मरते हैं। यही नहीं कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में राजद प्रत्याशी की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा है कि शराब से मौत चुनाव का मुद्दा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, महँगाई जैसे कई अन्य मुद्दे भी होते हैं।

गौरतलब है कि बिहार सरकार में सहयोगी दलों (महागठबंधन) के कई नेता बिहार में शराबबंदी पर सवाल उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में आने से पहले उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी शराबबंदी पर सवालिया निशान लगाए थे। तेजस्वी ने कहा था, “बिहार में सरकार नहीं सर्कस चल रहा है। ड्रोन, हेलिकॉप्टर एवं स्पेशल प्लान और प्लेन से भी शराब खोजने की नौटंकी हो रही है लेकिन यहाँ शराबी आसानी से मुख्यमंत्री जी की सभाओं में जश्न मनाते है।”

वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि अगर बिहार में शराब की बिक्री बंद हो जाती है तो इसकी खपत भी बंद हो जाएगी। शराबबंदी कभी भी इसलिए सफल नहीं हो सकती क्योंकि सरकार चाहती है। बिहार में शराबबंदी सफल नहीं हुई, लेकिन इससे समाज को लाभ जरूर हुआ है।

‘साहित्य से जुड़ा रहना चाहता हूँ, और किताब दो’: तिहाड़ में आफताब को पढ़ने को मिली ‘द ग्रेट रेलवे बाजार’, जेल में अकेले बैठकर खाना खाया, कटे सिर के बारे में नहीं दी जानकारी

दिल्ली के महरौली में श्रद्धा मर्डर केस में तिहाड़ जेल में बंद आफ़ताब को पढ़ने के लिए द ग्रेट रेलवे बाजार (The Great Railway Bazaar) नाम की किताब दी गई है। बताया यह भी जा रहा है कि नार्को टेस्ट के दौरान आफ़ताब ने पुलिस के कई सवालों के जवाब सहजता से दिए। माना जा रहा है कि आफ़ताब ने श्रद्धा की हत्या से जुड़े तमाम सबूत बड़ी चालाकी से ठिकाने लगाए हैं जिस से केस की जाँच कर रही पुलिस की राह मुश्किल हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आफताब ने जेल के अधिकारियों से अपने लिए और अधिक किताबें माँगी हैं। आफ़ताब का कहना है कि वो साहित्य से जुड़ा रहने का इच्छुक है। अभी आफ़ताब को जो किताब पढ़ने के लिए दी गई है वो लेखक पॉल थेरॉक्स द्वारा लिखी गई है। यह किताब जेल की लाइब्रेरी में थी। उसकी अन्य माँगों पर जेल स्टाफ प्रोटोकाल और मैनुअल के हिसाब से फैसला लेगा।

वहीं एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक नार्को टेस्ट में पुलिस आफ़ताब से बहुत कुछ उगलवा नहीं पाई। आफ़ताब नार्को में भी इस बात पर कायम रहा कि उसने श्रद्धा का फोन समुद्र में फेंक दिया है। इसी के साथ उसने कत्ल में प्रयोग हुए मेन हथियार के बारे में भी पुलिस को ज्यादा जानकारी नहीं दी। कत्ल के दौरान आफ़ताब ने जो कपड़े पहने थे उसे उसने MCD की कूड़ा ढोने वाले ट्रक में भर के फिंकवा देने की जानकारी दी जिसे कूड़े के ढेर से बरामद नहीं किया जा सका। इसी के साथ उसने श्रद्धा के कटे सिर के बारे में भी पुलिस को ज्यादा कुछ नहीं बताया।

तिहाड़ के अधिकारियों के अनुसार जेल में शिफ्ट होने के बाद आफ़ताब ने अन्य कैदियों से लगभग 3 घंटे तक कोई बात नहीं की। बाद में उसने खाना भी अकेले ही खाया। उसे जेल नंबर 4 की कोठरी नंबर 15 में रखा गया है। कोठरी में 2 अन्य आरोपित बंद हैं। अन्य दोनों आरोपित पहली बार जेल आए हैं। चोरी के इन अन्य दोनों आरोपितों को कोर्ट ने 13 दिनों की न्यायिक रिमांड पर भेजा है।

तिहाड़ के अधिकारियों के अनुसार जेल में शिफ्ट होने के बाद आफ़ताब ने अन्य कैदियों से लगभग 3 घंटे तक कोई बात नहीं की। बाद में उसने खाना भी अकेले ही खाया। काफी देर बाद उसने जेल स्टाफ से अंदर मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछा। उसे जेल नंबर 4 की कोठरी नंबर 15 में रखा गया है। कोठरी में 2 अन्य आरोपित बंद हैं। अन्य दोनों आरोपित पहली बार जेल आए हैं। चोरी के इन अन्य दोनों आरोपितों को कोर्ट ने 13 दिनों की न्यायिक रिमांड पर भेजा है। बताया जा रहा है कि आफ़ताब के खिलाफ चार्जशीट लगाने से पहले पुलिस ज्यादा से ज्यादा सबूतों की तलाश करेगी।

ऑनलाइन गेम की दुनिया पर अब सरकार की नजर: बन सकता है नया कानून, जुआ या स्किल… सबकी कसेगी नकेल

ऑनलाइन गेम्स के जरिए होने वाली कमाई पर अब सख्ती होने के आसार हैं। खबर है कि मोदी सरकार जल्द उन सभी ऑनलाइन खेलों को रेगुलेट करेगी जिनमें पैसा शामिल होता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस प्रपोजल को नकार दिया जिसमें केवल स्किल आधारित खेलों को नियंत्रित करने की बात थी। अब चाहे स्किल खेल हों या फिर कोई जुआ संबंधी खेल… सरकार द्वारा सब पर नजर रखा जा सकता है। रॉयटर्स की खबर में सरकारी दस्तावेज व तीन सूत्रों के आधार पर इस जानकारी का उल्लेख किया गया है।

बता दें कि ऑनलाइन गेमिंग को भारत में पिछले दिनों बहुत रफ्तार मिली है। ड्रीम 11 या मोबाइल प्रीमियर लीग को टाइगर ग्लोबल और सिकोइया कैपिटल का समर्थन मिला है। यही वजह है कि रिसर्च फर्म रेडसियर का अनुमान कहता है भारत में साल 2026 तक गेमिंग सेक्टर 56995 करोड़ (7 बिलियन डॉलर) का होने वाला है। 

कथिततौर पर भारत में एक पेनल को अगस्त में इस पर नियमन का मसौदा तैयार करने को कहा गया था। एक समिति बनाने को कहा गया था जो तय करे स्किल खेलों के लिए रजिस्ट्रेशन हो जबकि जुआ आधारित खेलों (जो भारत में प्रतिबंधित हैं) को राज्य सरकार की निगरानी में अलग से नियंत्रित किए जाने का उल्लेख था।

हालाँकि रॉयटर्स कहता है कि अक्टूबर में इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की एक और मीटिंग में इस तरह के वर्गीकरण पर आपत्ति जताई गई और कहा गया कि वह हर तरह के गेमों पर नजर रखेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, नियम बनाने की कड़ी में 3 लोग मुख्य रूप से शामिल है। इनमें नई दिल्ली के दो सरकारी अधिकारी हैं जिन्होंने रॉयटर्स को बताया कि नियम संघीय प्रशासन को सभी प्रकार के खेलों के व्यापर निगरानी रखने की आजादी होगी जबकि राज्य सरकार को जुए वाले खेलों पर प्रतिबंध लगाने के अधिकार होंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत में ऑनलाइन खेलों को लेकर सरकार की चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब आज का युवा इनका आदी होता जा रहा है। न केवल इसके चलते वह अपना समय गवाते हैं बल्कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी होता है। कई जगह तो ऐसे खेलों के कारण सुसाइड के मामले भी आ चुके हैं।

24 जून 2021 को प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्वीट में भी इसका जिक्र हुआ था। पीएमओ के ट्वीट में लिखा था, जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स आज मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है। आप भी जानते हैं कि इसमें अनेक गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो हिंसा को प्रमोट करते हैं या फिर मानसिक तनाव का कारण बनते हैं

ईरान ने ‘Morality Police’ को ख़त्म किया, हट सकता है हिजाब-बुर्का वाला कानून भी: महिलाओं के आंदोलन के सामने झुकने को मजबूर हुआ इस्लामी मुल्क

ईरान में महसा अमिनी (Mehsa Amini) की हत्या के बाद उठे हिजाब विरोधी तूफान में अंतत: इस्लामी सरकार को झुकना पड़ा है। अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात मोरालिटी पुलिस (Morality Police) को खत्म कर दिया है। वहीं, हिजाब पहनने की अनिवार्य को खत्म करने पर वहाँ की सरकार विचार कर रही है।

मोरालिटी पुलिस को खत्म करने को लेकर अटॉर्नी जनरल मोहम्मद जफर मोंटाज़ेरी ने कहा, “नैतिकता पुलिस का न्यायपालिका से कोई लेना-देना नहीं है।” अटॉर्नी जनरल यह जवाब तब दिया, जब उनसे इस विभाग को बंद करने को लेकर उनसे सवाल किया गया।

बता दें कि साल 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने हिजाब कल्चर को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना की थी। इसे गश्त-ए-इरशाद के नाम से जाना जाता था। यह पुलिस उन महिलाओं पर कड़ी निगाह रखती थी, जो हिजाब या इस्लामी कपड़े नहीं पहनती थी।

मोरल पुलिस की ईरान में क्रूरता की कई कहानियाँ हैं। महसा अमिनी की हत्या भी मोरल पुलिस की हिरासत में हुई थी। मोरल पुलिस ने महसा पर आरोप लगाया गया था उन्होंने सार्वजनिक जगह पर हिजाब को सही से नहीं पहना है। इसके बाद उन्हें सुधार के नाम पर हिरासत में ले लिया गया, जहाँ अत्यधिक पिटाई के कारण मौत हो गई।

हालाँकि, सिर्फ मोरालिटी पुलिस को ही खत्म कर देने से ईरान की महिलाएँ मानने को तैयार नहीं हैं। वे हिजाब और बुर्के की कठोरता से भी आजादी चाहती हैं। इसको लेकर उनका प्रदर्शन लगातार जारी है। ईरान की मुस्लिम महिलाओं को दुनिया भर से मिल रहे समर्थन के दबाव के बाद ईरान सरकार हिजाब की अनिवार्यता पर विचार कर रही है।

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद जफ़र मोंटेज़ेरी ने कहा कि हिजाब और बुर्के की अनिवार्यता को खत्म करने के लिए कानून में किसी बदलाव की ज़रूरत है या नहीं, इसको ध्यान में रखते हुए संसद और न्यायपालिका काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक-दो सप्ताह बाद इसके परिणाम देखने को मिलेंगे।

बता दें कि सन 1979 में मौलना खुमेनाई के नेतृत्व में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई थी और राजशाही को उखाड़ फेंका गया था। इसके चार साल बाद यानी 1983 में महिलाओं के लिए बुर्का और हिजाब अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद कट्टर इस्लामी कानून लगातार थोपे जा रहे हैं।

पूर्व सुधारवादी राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के रिश्तेदारों द्वारा गठित यूनियन ऑफ इस्लामिक ईरान पीपल पार्टी ने माँग की है कि अनिवार्य हिजाब कानून को रद्द किया जाए और इसके लिए जरूरी हुआ तो कानूनी बदलाव की जाए। वहीं, मुल्क के रूढ़ीवादी अभी भी इस्लामी रीतियों पर अड़े रहने की बात कर रहे हैं।

एक तरफ ईरान की सरकार कानून में बदलावों की बात करही है तो दूसरी तरफ हिजाब विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए हर तरह का प्रयास कर रही है। बता दें कि महसा अमिनी की हत्या के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों में अब तक 450 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, प्रदर्शन करने के आरोप में ईरान इस्लामी सरकार कुछ नाबालिगों को फाँसी की सजा दे सकती है।

विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए तीन नाबालिगों को दोषी ठहराया गया है। इन तीनों को राजधानी तेहरान में कई लोगों के साथ मिलकर एक पुलिस अधिकारी को जान से मारने का भी आरोप लगाया गया था। आरोप है कि ईरानी पैरामिलिट्री फोर्स के सदस्य को मारने के लिए चाकू, पत्थरों और बॉक्सिंग गलव्ज का इस्तेमाल किया गया।

दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण इन बच्चों को फाँसी की सजा देने के लिए ईरानी सरकार हथकंडे अपना रही है। नाबालिगों को फाँसी देने के मामले में ईरानी दुनिया में नंबर वन है। फिलहाल 200 नाबालिगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 300 नाबालिग सरकारी फायरिंग में घायल हुए हैं। इन प्रदर्शनों में अब तक 60 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें 12 लड़कियाँ भी शामिल हैं।

बुर्के से भीतर से निकला इमरान, पुलिस को देख कर भाग रहा था: बंदूक और कारतूस भी बरामद, महिलाओं के बीच घुस जाता था जेबकतरा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में पुलिस ने बुर्का पहने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम इमरान है। इमरान के पास से अवैध तमंचा और 1 कारतूस भी बरामद हुआ है। बुर्का पहना इमरान पुलिस को देख कर तेजी से भागने लगा था, जिसके बाद पुलिस को शक हुआ। आरोपित का चालान कर के अदालत भेज दिया गया है। घटना शुक्रवार (2 दिसम्बर 2022) की है।

यह घटना अमरोहा के कोतवाली नगर क्षेत्र की है। इस मामले में शिकायत खुद पुलिस सब इंस्पेक्टर शेर सिंह थाना ने दर्ज करवाई है। दरोगा शेर सिंह के मुताबिक, घटना के दिन वो अपने साथी कॉन्स्टेबल सुमित के साथ गश्त कर रहे थे। इस दौरान महबूब पेट्रोल पंप के पास खड़ा एक व्यक्ति उन्हें देख कर तेज कदमों से चलने लगा। इस हरकत से पुलिस को शक हुआ। पुलिस ने आरोपित से रुकने के लिए कहा, लेकिन उसने रुकने की बजाए और तेज दौड़ना शुरू कर दिया। आखिरकार पुलिस ने उसका पीछा किया।

सब इंस्पेक्टर शेर सिंह के मुताबिक, थोड़ी ही देर में संदिग्ध को खदेड़ कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपित ने खुद को इमरान और अपने अब्बा का नाम इरफ़ान बताया। इमरान अमरोहा के इस्लाम नगर का रहने वाला है। जब उसकी तलाशी ली गई तो उसके पास से एक 315 बोर का तमंचा और एक जिन्दा कारतूस भी बरामद हुआ। इसे आरोपित ने अपनी पैंट के अंदर छिपा कर रखा हुआ था। पुलिस ने अवैध हथियार और कारतूस को जब्त कर लिया।

इसी शिकायत में आगे बताया गया है कि इमरान की गिरफ्तारी के दौरान आसपास से गुजर रहे लोगों को गवाही के लिए कहा गया। पुलिस की इस माँग को लोगों ने तमाम मजबूरियाँ बता कर मना कर दिया। आखिरकार इमरान को कस्टडी में ले कर थाने लाया गया। उसके घर वालों को पुलिस द्वारा सूचित भी कर दिया गया। आरोपित पर 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई और उसे आगे की कार्रवाई के लिए अदालत भेज दिया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित इमरान शातिर जेबकतरा है। वो जेब काटने के लिए बुर्का पहने हुए था। वो बुर्के में महिलाओं के बीच घुस कर उनकी पर्स आदि छीनने की फिराक में था।

प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए अब पेशाब-खून की जगह थूक से चल जाएगा काम, 10 मिनट में रिजल्ट: इजरायल के वैज्ञानिकों की खोज

इजरायली स्टार्टअप सैलिगोंस्टिक्स के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जिसके उपयोग से महिलाओं को प्रेंगनेंसी टेस्ट करने के लिए पेशाब और खून की आवश्यकता नहीं होगी। दरअसल, कंपनी ने ‘सैलीस्टिक’ नामक एक प्रेगनेंसी किट बनाई है। यह किट सलाइवा (लार) का उपयोग कर 10 मिनट में प्रेगनेंसी रिपोर्ट देती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैलिग्नॉस्टिक्स कंपनी के वैज्ञानिकों ने COVID-19 (कोरोना वायरस) की जाँच के लिए बनाए जाने वाली किट की तकनीक के आधार पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट तैयार की है। अगले साल, यानी साल 2023 की पहली तिमाही में यह किट दुनिया भर के कई बाजारों में उपलब्ध होगी। ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैलीस्टिक टेस्ट किट साल 2023 में यूरोप, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाजारों में उपलब्ध होगी। हालाँकि, किट भारत में कब तक आएगी यह कह पाना मुश्किल है।

इस प्रेगनेंसी किट को लेकर सैलिग्नॉस्टिक्स कंपनी के एक अन्य सह-संस्थापक गाइ क्रिफ का कहना है कि “इंसान का सलाइवा (लार) कई तरह की मेडिकल कंडीशंस में तेजी से डायग्नोज करने में सहायक होता है। यह हार्मोन, वायरस और यहाँ तक ​​​​कि बीमारियों का पता लगाने का एकमात्र आसान और साफ-सुथरा तरीका है। सैलीस्टिक का उपयोग कर हम इन्हीं डायग्नोज क्षमताओं का लाभ उठाएँगे। यह किट प्रेगनेंसी के दौरान खून और पेशाब के नमूनों की आवश्यकता को पूरी तरह से खत्म कर देगी।”

गाइ क्रिफ ने यह भी कहा है कि ऐसा पहली बार होगा जब कोई कपल एक साथ बैठकर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। इस किट की अवधारणा और तकनीक बेहद आधुनिक है। साथ ही, इसके काम करने का तरीका अब तक मौजूद तरीकों से पूरी तरह अलग है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वे में सामने आया है कि प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सलाइवा (लार) का उपयोग करने वाली यह विधि लोकप्रिय होगी। सर्वे में 70 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे पेशाब आधारित किट की जगह सलाइवा वाले प्रेगनेंसी किट का उपयोग करेंगीं।

प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सैलीस्टिक का इस्तेमाल करने वाली एक महिला का कहना है, “अपने पार्टनर के साथ प्रेग्नेंसी टेस्ट करना बेहद खुशी की बात है। प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए बाथरूम जाने का विचार मुझे पसंद नहीं है। इसके लिए, पेशाब का उपयोग करना फिजूल है।”

इस प्रेंग्नेंसी किट का उपयोग करना बेहद आसान होगा। अब तक उपलब्ध तकनीक में महिलाओं को प्रेगनेंसी जानने के लिए पेशाब या खून का इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन, ‘सैलीस्टिक’ किट का उपयोग करने के महिलाओं को इस किट के एक हिस्से को थर्मामीटर की तरह अपने मुँह पर रखना होगा। इसके बाद, इसे एक प्लास्टिक ट्यूब में रखना होगा। जहाँ, 10 मिनट से भी कम समय में प्रेगनेंसी रिपोर्ट सामने आ जाएगी।

फारुख को संध्या पर था शक, बीच सड़क पर ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश: धारदार हथियार से बोल दिया हमला, केरल पुलिस ने कहा – रिश्ते में अनबन का मामला

केरल के कोच्चि में एक प्रवासी महिला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। संध्या नाम की पीड़िता मूल रूप से पश्चिम बंगाल की बताई जा रही है, जो काम की तलाश में कोच्चि आई थी। हमलावर का नाम फारुख है। हमलावर और पीड़ित पहले से परिचित बताए जा रहे हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर के फरार आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। पीड़िता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना शनिवार (3 दिसम्बर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ब्यूटी पार्लर में काम करती है। घटना के दौरान पीड़िता कलूर इलाके में आज़ाद रोड पर अपने एक परिचित के साथ टहल रही थी। इस दौरान बाइक से आए फारुख ने पीड़िता पर चाकुओं से हमला कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमले से पहले कुछ देर तक फारुख और संध्या में बहस हुई थी। बताया जा रहा है कि फारुख संध्या की गर्दन काटना चाह रहा था लेकिन घटनास्थल पर मौजूद एक तीसरे व्यक्ति ने बीच बचाव किया। इस बचाव में संध्या के दोस्त को भी हाथ में घाव हो गया है।

हमले के बाद फारुख बाइक ले कर फरार हो गया। इस दौरान उसने हमले में इस्तेमाल चाकू मौके पर ही छोड़ दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने घायल संध्या को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ से उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस के पीड़िता का बयान दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन काफी चोट लगने के कारण ये सम्भव नहीं हो पाया। इस दौरान महिला के साथ मौजूद उसके दोस्त के बयान दर्ज किए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि हमलावर और पीड़िता पूर्व से परिचित हैं। इन दोनों के रिश्तों में कुछ अनबन हुई जिसके बाद फारुख ने इस घटना को अंजाम दिया है। माना जा रहा है कि फारुख को संध्या के किसी और युवक के साथ रिश्तों का शक था। फारुख मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है। वह कोच्चि में एक सैलून में काम करता था। उसके दोस्त ने बताया कि पिछले कुछ समय से फारुख काफी अपसेट था।