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राजस्थान में अब कॉन्ग्रेसी भी सुरक्षित नहीं: पूर्व मंत्री की बेटी अगवा, पिता को कॉल कर कहा था- कुछ लड़के पीछा कर रहे

अशोक गहलोत के शासनकाल में राजस्थान की कानून-व्यवस्था दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। अब राजधानी जयपुर से कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री गोपाल केसावत की बेटी को अगवा करने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि लड़की ने पिता को कॉल कर अपना पीछा किए जाने की जानकारी भी दी थी। घटना सोमवार (21 नवंबर 2022) की है। खबर लिखे जाने तक लड़की का सुराग नहीं लगा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व मंत्री गोपाल केसावत की 21 वर्षीया बेटी अभिलाषा घटना के दिन सब्ज़ी लेने घर से बाहर निकली थी। शाम को लगभग 5 बजे उसने पापा को कॉल कर बताया कि कुछ लड़के उसका पीछा कर रहे हैं। उसने पिता से जल्दी आने को कहा। पुलिस को दी गई शिकायत में केसावत ने कहा है कि जब वे बेटी की बताई जगह पर बेटे को लेकर पहुँचे तो वह वहाँ नहीं मिली।

पूर्व मंत्री के अनुसार उन्होंने बेटी को कई जगहों पर तलाशा। लेकिन वो नहीं मिली। आखिरकार प्रताप नगर थाने जाकर उन्होंने बेटी के अपहरण का केस दर्ज करवाया। इस मामले में SHO प्रताप नगर भजनलाल के मुताबिक केस दर्ज कर के पुलिस CCTV फुटेज खँगाल रही है। इस दौरान पूर्व मंत्री ने बेटी की तलाश जारी रखी। इस खोजबीन के दौरान उन्हें मंगलवार (22 नवम्बर 2022) को बेटी की स्कूटी जयपुर एयरपोर्ट के पास लावारिस हालत में मिली।

पूर्व मंत्री का कहना है कि बेटी ने उन्हें अंतिम बार सोमवार शाम 6;05 पर कॉल किया था। उसके बाद से उसका फोन लगातार स्विच ऑफ बता रहा है। इस घटना के बाद भाजपा ने राजस्थान के लॉ एन्ड ऑर्डर पर सवाल खड़ा किया है। भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भरद्वाज ने राजस्थान मॉडल में सरकार के ही लोगों के असुरक्षित होने की बात कही है।

बिटकॉइन में डील करता था मंगलुरु में धमाका करने वाला आतंकी मोहम्मद शरीक, साथियों को क्रिप्टो में भेजता था पैसे: ‘प्रेम राज’ बन सीख रहा था मोबाइल रिपेयरिंग

कर्नाटक के मंगलुरु में शनिवार (19 नवंबर, 2022) को हुए बम ब्लास्ट मामले में एक के बाद कई खुलासे होते जा रहे हैं। जाँच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक मैसूर में एक मोबाइल रिपेयरिंग ट्रेनिंग सेंटर में रिपेयरिंग का काम सीख रहा था। साथ ही, यह भी खुलासा हुआ है कि वह बिटकॉइन ट्रेडिंग करता था और अपने साथियों को क्रिप्टो करेंसी भेजता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती जाँच में सामने आया है कि मोहम्मद शरीक मैसूर में फर्जी आधार कार्ड के आधार पर किराए के मकान में रह रहा था। इस मामले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार ने कहा है कि सितंबर 2022 में शरीक के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह शिवमोग्गा से भाग कर मैसूर में किराए पर घर लेकर रह रहा था। जहाँ वह एक मोबाइल रिपेयरिंग ट्रेनिंग सेंटर में काम सीख रहा था।

वहीं, रिपेयरिंग सेंटर के मालिक का कहना है कि उनके ट्रेनिंग सेंटर में शरीक ने खुद को ‘प्रेम राज’ बताया था। इसके लिए उसने आधार कार्ड भी दिखाया था। उन्होंने आगे कहा है कि मोहम्मद शरीक ने उन्हें बताया था कि उसकी नौकरी एक कॉल सेंटर में लग गई है। लेकिन, उनकी जॉइनिंग होने में 28 दिन का समय है। इसलिए, वह घर में खाली बैठने की जगह मोबाइल रिपेयरिंग सीखना चाहता है।

रिपेयरिंग सेंटर के मालिक ने यह भी कहा है कि उनके संस्थान में 45 दिनों का रिपेयरिंग कोर्स होता है। लेकिन, शरीक 20-21 दिन ही उनके यहाँ आया होगा। इस दौरान भी वह ट्रेनिंग सेंटर एक दिन आता था और फिर उसके अगले 1 या दो दिन नहीं आता था।

मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर के मालिक के इस बयान के आधार पर फिलहाल यह अंदाजा लगाया जाना बेहद आसान है कि बम धमाके का आरोपित मोहम्मद शरीक बम बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सर्किट व अन्य साधनों में होने वाली सोल्डरिंग (टाँका) सीखने के लिए ही रिपेयरिंग सेंटर जाता था। हालाँकि, पूरे मामले का खुलासा गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक व उसके अन्य सहयोगियों से पूछताछ और पुलिस की जाँच के बाद ही हो सकेगा।

वहीं एक अन्य रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि मोहम्मद शरीक बिटकॉइन में ट्रेडिंग करता था और इससे कमाए हुए पैसे को क्रिप्टो करेंसी के द्वारा अपने सहयोगियों को भेजता था। इसका सीधा मतलब है कि आतंकी गतिविधियों में क्रिप्टो करेंसी का उपयोग हो रहा है। इससे पहले मंगलुरु बम ब्लास्ट में गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक को लेकर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शरीक ऑटो में बैठने के बाद खुद को हिंदू बता रहा था, ताकि उस पर किसी को शक न हो। इसके लिए, उसने एक आधार कार्ड दिखाया था, जिस पर हिंदू नाम था। यह आधार कार्ड उसने रेलवे कर्मचारी से चुराया था।

के. सुधाकर ने यह भी कहा था कि पुलिस हर एंगल से मामले की जाँच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मोहम्मद शरीक के संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों, बैन किए गए संगठनों या स्लीपर सेल से तो नहीं है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक की सीमा केरल से लगती है। इसलिए, स्लीपर सेल से जुड़े होने की भी आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा था कि बीते महीने तमिलनाडु के कोयंबटूर में भी ऐसा ही बम धमाका हुआ था। तब भी आतंकियों ने मंदिर के पास ब्लास्ट करने की साजिश रची थी। पुलिस ने मोहम्मद शरीक के मूवमेंट को ट्रेस किया है जिसमें सामने आया है कि उसने कोयंबटूर में एक व्यक्ति से मुलाकात की थी।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक ऑटो में बैठकर पंपवेल एरिया में जाना चाहता था, जहाँ वह अपने साथ लिए हुए कुकर बम (विस्फोटक) को नगौरी के भीड़-भाड़ इलाके में प्लांट करना चाहता था। हालाँकि, ऑटो में बैठने के थोड़ा देर बाद ही विस्फोट हो गया।

यही नहीं, शुरुआती जाँच के बाद पुलिस ने कहा है कि शरीक ने कोयंबटूर से किसी और के नाम पर एक सिम खरीदा था। इस सिम कार्ड के टावर लोकेशन की जाँच से सामने आया है कि वह तमिलनाडु के इलाकों में घूम रहा था। शरीक की फोन डिटेल निकाली जा रही है, जिससे उसके साथियों के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।

खाड़ी देशों से आ रहा था PFI को धन, ‘चंदे’ के लिए संगठित ढाँचा तैयार था: ED की चार्जशीट में खुलासा, कोर्ट ने लिया संज्ञान

प्रतिबंधित कट्टर इस्लामिक संगठन पीएफआई (PFI) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी के अनुसार प्रतिबंधित संगठन को फंड का जुगाड़ करने में खाड़ी देशों से मदद मिल रही थी। इस मामले को लेकर ईडी ने पिछले हफ्ते पटियाला हाउस कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विशेष अदालत के सामने चार्जशीट दायर की थी। ईडी के इस आरोप पत्र पर अब अपर कोर्ट ने संज्ञान लिया है, जिसके बाद ईडी ने अदालत को जानकारी दी कि प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने चंदा एकत्र करने के लिए खाड़ी देशों में ‘संगठित’ ढाँचा तैयार किया है।

ईडी ने कोर्ट को जानकारी दी कि पीएफआई ने देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए देश से विदेश तक कई संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ साझेदारी की थी। उनके माध्यम से प्रतिबंधित संगठन गैर कानूनी तरीके से धन जुटाता था और जुटाई गई रकम पीएफआई के बैंक खातों में चंदे के रूप में दिखा कर जमा की जाती थी। बाद में इस धन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में किया जाता था।

ईडी ने किनके खिलाफ दायर किया था आरोप पत्र

ईडी ने परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीत के खिलाफ सुनवाई शुरू करने के लिए 19 नवंबर 2022 को आरोप पत्र दायर किया। इन आरोपितों को 22 सितंबर को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विभिन्न राज्य पुलिस इकाइयों की मदद से देश भर में बड़े स्तर पर हुई छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। उस छापेमारी में पीएफआई से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल तीनों आरोपित तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

अहमद, इलियास और मुकीत पर क्या हैं आरोप ?

ईडी ने जानकारी दी है कि अहमद पीएफआई की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष था और वह संगठन के लिए धन उगाही करने वाली गतिविधियों की निगरानी करता था। इसके अलावा वह जनसंपर्क का काम भी देखता था। वहीं मोहम्मद इलियास दिल्ली पीएफआई का महासचिव था। वह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पीएफआई और संबंधित संगठनों के लिए धन जुटाने का काम करता था। इलियास ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के उम्मीदवार के रूप में दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था।

आपको बता दें कि परवेज अहमद और मोहम्मद इलियास दोनों को दिल्ली पुलिस ने फरवरी, 2020 के एंटी हिन्दू दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं अब्दुल मुकीत, दिल्ली पीएफआई का कार्यालय सचिव था और पीएफआई के धन जुटाने की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। वह फर्जी नकद दान पर्ची भी तैयार करता था।

बैन किया जा चुका है कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन

भारत सरकार ने हाल ही में आतंकवादियों से संबंध होने और सांप्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप में पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया था। पीएचआई की संबद्ध संस्थाओं- रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल वीमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन-केरल को भी प्रतिबंधित संगठनों की सूची में रखा गया है।

भगवा पिच पर ‘सर जडेजा’ की बैटिंग, सोशल मीडिया में घृणा की बॉलिंग: पत्नी BJP से लड़ रही है चुनाव, रवींद्र को ट्रॉल कर रहे मुस्लिमों को फैंस ने लताड़ा

भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की पत्नी रिवाबा जडेजा (Rivaba Jadeja) को भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election 2022) में जामनगर (उत्तर) से अपना उम्मीदवार बनाया है। रवींद्र जडेजा भी पूरे दमखम के साथ भगवा पिच पर उतरकर लोगों से पत्नी रिवाबा के लिए वोट माँग रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया ट्रेंड देख कर ऐसा लगता है कि इस वजह से वामपंथी और इस्लामवादी जडेजा से नफरत करने लग गए हैं।

अज़ीम ने लिखा, “यही कारण है कि भाजपा और कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता भी अब आम आदमी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। क्योंकि AAP एकमात्र पार्टी है, जिसमें कार्यकर्ताओं को केवल दरी बिछाने जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगाने के लिए नहीं रखा जाता है। इस पर स्वप्नील मिश्रा लिखते हैं कि AAP गुजरात में 10 सीट भी नहीं जीत रही है लोल।

शेख लिखता है, “देख रहे हो बिनोद, कैसे क्रिकेटर्स को भी राजनीति में उतारा जा रहा है क्रिकेट ग्राउंड से।” इस पर एक यूजर ने कहा कि रवींद्र जडेजा नहीं, बल्कि उनकी पत्नी राजनीति में आई हैं।

सोशल मीडिया पर जडेजा के फैंस ने उन्हें और उनकी पत्नी को घेरने वालों को करारा जवाब दिया। जडेजा का विरोध करने वालों में राहुल गाँधी के समर्थक भी थे। एक ने राहुल गाँधी की डीपी लगाने वाले ट्रॉल को कहा कि जब उनकी पत्नी बड़े अंतर से जीतेंग, तब अब जाकर एक कोने में रोओगे।

बता दें कि गुजरात की जामनगर उत्तर सीट से बीजेपी ने क्रिकेटर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की पत्नी रिवाबा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं रिवाबा (Rivaba Jadeja) की ननद नैना जडेजा कॉन्ग्रेस की तरफ से चुनाव प्रचार कर रही हैं। 14 नवंबर, 2022 को रिवाबा ने नामांकन भरा था। इस दौरान रवींद्र जडेजा भी उनके साथ थे। नामांकन के बाद से ही मुस्लिम ट्रॉल्स सोशल मीडिया पर रवींद्र जडेजा को घेर रहे हैं। जबकि वह नहीं, उनकी पत्नी चुनावी राजनीति की पिच पर उतरी हैं।

मुस्लिम ट्रॉल्स कह रहे हैं कि आप ग्राउंड में अच्छा खेलते हो, लेकिन पॉलिटिक्स ग्राउंड में आपकी हार पक्की है। गुजरात विधानसभा चुनाव में दो चरणों में 1 और 5 दिसंबर को मतदान होगा और मतगणना 8 दिसंबर 2022 को होगी। दो चरणों में 33 जिलों की सभी 182 सीटों पर वोट डाले जाएँगे।

‘मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश और गणेश को नहीं मानूँगा…’: सामूहिक विवाह​ समारोह में धर्मांतरण, नवविवाहित जोड़ों को दिलाई हिंदू विरोधी शपथ

राजस्थान में सामूहिक विवाह सम्मेलन में नए जोड़ों को हिंदू विरोधी शपथ दिलाने का मामला सामने आया है। यह विवाह सम्मेलन भरतपुर में हुआ बताया जा रहा है। इसका वीडियो वायरल हो रहा है।

वीडियो में 11 नवविवाहित जोड़ों को शपथ दिलाई जा रही है। इसमें कहा जा रहा है, “मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश और गणेश को नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा।” इस दौरान कई अधिकारी भी मौजूद थे। विश्व हिंदू परिषद ने इस शपथ पर आपत्ति जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भरतपुर के कुम्हेर कस्बे में रविवार (20 नवंबर 2022) को संत रविदास सेवा समिति की ओर से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया था। समिति की ओर से यह पाँचवाँ आयोजन था। सबसे पहले 11 जोड़ों का बौद्ध धर्म में कन्वर्ट करवाया गया। फिर इसके बाद सभी विवाहित जोड़ों को शपथ दिलाई गई।

शपथ में कहा गया, “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ईश्वर नहीं मानूँगा। उनकी पूजा नहीं करूँगा। राम और कृष्ण को ईश्वर नहीं मानूँगा। उनकी पूजा नहीं करूँगा। गौरी-गणपति आदि हिंदू धर्म के किसी देवी-देवता को नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा। ईश्वर ने अवतार लिया है इस पर मेरा विश्वास नहीं है। मैं ऐसा कभी नहीं मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं। ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूँ। मैं बौद्ध धर्म के विरोध में कभी कोई बात नहीं करूँगा।”

मुहिम चलाकर कार्रवाई करेंगे: विहिप

इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद के भरतपुर जिला अध्यक्ष लाखन सिंह ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। इस कार्यक्रम में कुम्हेर डीग के अधिकारी भी मौजूद थे। उनके जाने के बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में खुले मंच से विवादित शपथ दिलवाई गई। यह गलत है। यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। कड़े शब्दों में इसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, “विश्व हिंदू परिषद का अध्यक्ष होने के नाते मैं अपील करता हूँ कि प्रशासन इस तरफ ध्यान दे। वरना हम मुहिम चलाकर कार्रवाई करेंगे, विरोध करेंगे तो ऐसे लोग ही जिम्मेदार होंगे।”

भरतपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत सिंह फौजदार ने इस विवादित शपथ को कानून के खिलाफ बताया है। उनके मुताबिक यह हिंदू मैरिज एक्ट और हिंदू मेंटेनेंस एंड सक्सेशन एक्ट के खिलाफ है। यह असंवैधानिक है। ऐसी शपथ का संविधान में कोई भी उल्लेख नहीं है।

गौरतलब है कि अक्टूबर में हिंदू विरोधी शपथ इसी तरह दिल्ली में दिलाई गई थी। उस कार्यक्रम में आप नेता राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल थे। इसका वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें केजरीवाल सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था। इसी तरह नवंबर में छत्तीसगढ़ के राजनंदगाँव की कॉन्ग्रेस मेयर हेमा देशमुख भी इसी तरह के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं थी।

गुजरात में कॉन्ग्रेस को झटका: BJP में शामिल हुईं पूर्व MLA, बताया- टिकट के बदले माँग रहे थे ₹1 करोड़

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। देहगाम सीट से पूर्व विधायक कामिनी बा राठौड़ ने मंगलवार (22 नवंबर 2022) को कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके साथ ही कामिनी बा (Kamini Ba Rathod) ने कॉन्ग्रेस के खिलाफ गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

देहगाम की पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि चुनाव में टिकट देने के लिए उनसे पैसे माँगे गए थे। गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को लिखे पत्र में कामिनी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

अपनी राजनीतिक पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कामिनी बा ने रिपब्लिक टीवी को बताया कि गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर के एक एजेंट ने उन्हें फोन किया और पार्टी टिकट के लिए 1 करोड़ रुपए की माँग की। पूर्व विधायक ने आगे दावा किया कि उन्हें यह भी कहा गया था कि अगर वह कीमत नहीं चुकाती हैं तो वह दहेगाम सीट से चुनाव नहीं लड़ पाएँगी। कामिनी बा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में दहेगाम सीट पर 2297 मतों के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 के चुनाव में उन्हें भाजपा के बलराजसिंह चौहान से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने कहा, “11 नवंबर को मुझे फोन आया। एक व्यक्ति ने मुझसे गुजराती में पूछा- कहाँ हो? कहाँ जा रही हो? क्यों भाग रही हो? टेंशन मत लो। टिकट मिल जाएगा। आपका सर्वे ठीक है। सभी स्थानीय पार्षद आपके साथ हैं। इस पर मैंने उनसे कहा कि मुझे पता चला है कि गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर अलग तरह से सोचते हैं और वो मुझे टिकट नहीं देना चाहते। सभी नेताओं ने मुझसे कहा था कि हर कोई आपके साथ है और आपको टिकट जरूर मिलेगा।”

कॉन्ग्रेस की पूर्व नेता ने आगे कहा, “इसके बाद मुझे 12 नवंबर को फोन आया कि आपको टिकट देने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपको टिकट चाहिए तो इसके लिए आपको एक करोड़ रुपए देने होंगे। बाद में, जो व्यक्ति मुझसे गुजराती में बात कर रहा था, वह व्हाट्सएप कॉल कर रहा था और मुझे अपना फैसला जल्दी बताने के लिए कह रहा था।”

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव में दो चरणों में 1 और 5 दिसंबर को मतदान होगा और मतगणना 8 दिसंबर 2022 को होगी। दो चरणों में 33 जिलों की सभी 182 सीटों पर वोट डाले जाएँगे।

इंडोनेशिया में भूकंप ने मचाई तबाही, अब तक 268 की मौत: मदरसों-मस्जिदों को भारी नुकसान, अस्पतालों में कम पड़ गई है जगह

सोमवार (21 नवंबर, 2022) को इंडोनेशिया (Indonesia) में आए भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है। भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इडोनेशियाई सरकार ने अब तक 268 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। वहीं सैकड़ों की संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। यूएसजीएस के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 आँकी गई है।

भूकंप और उसके बाद आए झटकों की वजह से दर्जनों मकान गिर गए। अपनी जान बचाने के लिए सड़कों और गलियों में भाग रहे लोगों में से कई घायल और खून से लथपथ नजर आए। भूकंप का केंद्र राजधानी जकार्ता से 100 किलोमीटर दूर पश्चिम जावा प्रांत के सियांजुर क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई में था। बता दें कि हाल ही में इंडोनेशिया में जी-20 देशों का सम्मेलन आयोजित हुआ था।

मरने वालों में ज्यादातर बच्चे शामिल

जावा के गवर्नर रिदवान कामिल ने जानकारी दी है कि मरने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि भूकंप के वक्त पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई खत्म होने के बाद इस्लामी स्कूल में तालीम लेने पहुँचे थे। भूकंप के केंद्र सियांजुर में सबसे बड़ी संख्या में इस्लामी आवासीय स्कूल और मस्जिद हैं। कामिल ने कहा, “भूकंप की वजह से कई इस्लामी स्कूलों में हादसे हुए हैं। इन हादसों में बच्चों की दर्दनाक मौतें हुई हैं।” बताया यह भी जा रहा है कि अब भी बड़ी संख्या में लोग मलबों में दबे हुए हैं। लोग घायल अवस्था में अपनों की तलाश कर रहे हैं।

घायलों को अस्पताल में नहीं मिल रही जगह

भूकंप के बाद बड़ी संख्या में घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों की संख्या अधिक होने के कारण बहुत सारे लोगों का इलाज बाहर किया जा रहा है। सियांजुर में अस्पताल की पार्किंग में घायलों को रखा गया है। कुछ को अस्थायी टेंट में जगह मिली तो कुछ फुटपाथ पर ही लेटे नज़र आए। इतना ही नहीं स्वास्थ्य कर्मियों ने टॉर्च के प्रकाश में मरीजों को टाँके लगाए।

फुटपाथ पर इलाज कराने को मजबूर भूकंप प्रभावित (फोटो साभार KhaledBeydoun ट्विटर हैंडल)

बताया जा रहा है कि इस आपदा के बाद लगभग 13 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। हालाँकि, अभी भूकंप से होने वाली तबाही के ऑफिशियल आँकड़े आने बाकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर आए भूकंप से जान-माल के नुकसान पर दुख जताया। पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर के इस हादसे पर दुःख जताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “इंडोनेशिया में भूकंप से जान-माल के नुकसान से दुखी हूँ। पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। दुख की इस घड़ी में भारत इंडोनेशिया के साथ खड़ा है।”

इंडोनेशिया में आती रहती हैं प्राकृतिक आपदाएँ

इंडोनेशिया की आबादी 27 करोड़ से अधिक है और ये मुल्क भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी से अक्सर प्रभावित होता रहता है। इस साल फरवरी में पश्चिम सुमात्रा में 6.2 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई थी और 460 से ज्यादा लोग घायल हो हुए थे। जनवरी 2021 में पश्चिम सुलावेसी प्रांत में 6.2 तीव्रता के भूकंप से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 6,500 लोग घायल हो गए थे।

2004 में हिंद महासागर में आए एक शक्तिशाली भूकंप और सुनामी ने एक दर्जन देशों में लगभग 2 लाख 30 हजार लोगों की जान ली थी, जिनमें से अधिकतर इंडोनेशिया में थे।

‘अल्लाहु अकबर, कतर में 500 ने कबूला इस्लाम’: FIFA वर्ल्ड कप के बीच ISIS समर्थक माजिद फ्रीमैन का दावा, मीडिया में खबर नहीं

लेस्टर में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान फेक न्यूज फैलाने वाले ‘द गार्जियन के सहयोगी’ माजिद फ्रीमैन ने फीफा वर्ल्ड कप को लेकर एक नई बात फैलाई है। माजिद ने 22 नवंबर को दावा किया है कि कतर में वर्ल्ड कप देखने आए लोगों में से 500 लोगों ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया। अपने ट्वीट में उसने कहा, “अल्लाहु अकबर! हमने सुना है कि कतर में हाल में 500 लोगों ने इस्लाम स्वीकारा।”

अपने ट्वीट में फ्रीमैन ने मेक्सिकन व्यक्ति की वीडियो भी शेयर की और दावा किया कि वो इस्लाम कबूल रहा है। उसने लिखा, “दुनिया भर के हजारों फैन यहाँ हैं। उन्हें भी इस्लाम की खूबसूरती देखने का मौका मिले और अल्लाह उन्हें दिशा दिखाए।”

बता दें कि एक ओर जहाँ द गार्जियन के माजिद फ्रीमैन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ऐसा दावा करके सबको चौंका दिया है। वहीं मीडिया में कहीं भी इस्लामी धर्मांतरण से जुड़ी खबर नहीं है। द गार्जियन तक में इसका कोई जिक्र नहीं है जिसे कुछ दिन पहले नाइजीरिया की साइट ‘मुस्लिम वेबसाइट’ ने सबसे हिजाब फ्रेंडली मीडिया हाउस कहा था। इसी मीडिया हाउस ने राणा अयूब को ग्लोबल मुस्लिम मीडिया पर्सन 2021 का अवार्ड दिया था।

मालूम हो कि फ्रीमैन अकेला शख्स नहीं है जो इस तरह फीफा वर्ल्ड कप की आड़ में हुए धर्मांतरण की बातें कर रहा हो। एक ट्विटर यूजर अबू सिद्दीक ने भी ट्वीट करके दावा किया है कि कतर में फीफा वर्ल्ड कप देखने आए 558 लोगों का धर्मांतरण हुआ।

अबू सिद्दीक ने लिखा, “कतर में डॉ जाकिर नाइक शेख और उनकी टीम के आने से जिस तरह की चीजें हो रही हैं, यूरोपीय लोग एक नई रौशनी देखेंगे और इस्लाम स्वीकारेंगे।”

इसी तरह एक 5pillarsUK के डिप्टी एडिटर दिली हुसैन ने कहा भी अपने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि कम से कम 558 लोगों ने कतर में इस्लाम स्वीकारा है।

बता दें कि माजिद फ्रीमैन के ऊपर आईएसआईएस समर्थक होने के आरोप लगते रहे हैं। वह ब्रिटिश आईएसआईएस आतंकी इफ्तेखर जमान के लिए दुआ पढ़ने की अपील करता भी देखा जा चुका है। इसके अलावा उसने अलकायदा आतंकियों को भी शहीद कहकर अपना प्रेम उनके प्रति दिखाया था। उससे पुलिस ने पूछताछ भी की थी लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उसपर कोई मामला नहीं चला। माजिद को लेकर यह भी जानकारी है कि उसने यूरोपीय मुस्लिमों को सीरिया में जिहाद करने को कहा और अपने फेसबुक-ट्विटर के जरिए अलकायदा आतंकी को श्रद्धांजलि भी दी थी। इतना ही नहीं अभी बीते दिनों लेस्टर में जो हिंसा हुई उस समय भी माजिद ने झूठ फैलाकर हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथियों को भड़काया था।

नोट: ये लेख मूलत: अंग्रेजी में है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

‘जेल में मसाज’ के बाद सत्येंद्र जैन ने कोर्ट में ड्राई फ्रूट्स-सलाद के लिए लगाई अर्जी, कहा- इनके बिना प्रोटीन और आयरन की हो जाएगी कमी

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। जेल में ‘मसाज सुविधा’ लेने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के इस नेता ने अब ‘धार्मिक आहार’ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। ड्राई फ्रूट्स और सलाद मुहैया कराने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जैन ने सीबीआई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि जेल प्रशासन उन्हें मिश्रित बीज, फल, खजूर, सूखे मेवे, सलाद सहित उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुनियादी चीजें नहीं उपलब्ध करवा रही है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि वह पिछले छह महीने से धार्मिक उपवास पर हैं। इसलिए उन्हें ड्राई फ्रूट्स और अन्य फल खाने की आवश्यकता है। यदि उपवास के दौरान ये चीजें नहीं दी जाएँगी तो उनके शरीर में प्रोटीन और आयरन की कमी हो जाएगी।

जैन ने याचिका में यह भी कहा है कि वह बिना मंदिर गए भोजन नहीं करते। हर दिन पहले मंदिर जाते हैं, उसके बाद ही खाना खाते हैं। लेकिन, उनके मंदिर जाने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा है कि बिना मंदिर गए वह भोजन, अनाज और दुग्ध उत्पादों का सेवन नहीं करते। पिछले 2 दिन से उन्हें फल और सलाद नहीं दिया जा रहा, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इससे पहले, जैन के जेल में ‘मसाज सुविधा’ लेने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन को जिस शख्स से जेल में मसाज कराते हुए देखा गया था, वह नाबालिग से रेप का आरोपित बताया जा रहा है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, तिहाड़ जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सत्येंद्र जैन की मालिश करने वाले कैदी का नाम रिंकू है। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं है। रिंकू एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। उस पर पॉक्सो (POCSO) की धारा 6 और IPC की धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज है।

भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी इस मामले में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “सत्येंद्र जैन को मालिश और चंपी देने वाला शख्स असल में रेपिस्ट था। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि रेपिस्ट था। उन्होंने सही मायने में तिहाड़ को थाईलैंड में बदल दिया है।”

पिछले दिनों जेल में बंद सत्येंद्र जैन की मसाज का वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति उनकी मालिश करता हुआ दिख रहा था। आम आदमी पार्टी ने इस मामले पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसे सत्येंद्र जैन की बीमारी बताते हुए फिजियोथेरेपी बताया था। AAP के इस फिजियोथेरेपी वाले दावे को तिहाड़ जेल प्रशासन और भारतीय फिजियोथेरेपी एसोशिएशन ने सामूहिक रूप से नकार दिया था।

टुकड़े कर खेत में गाड़ दिया, सभी 9 आरोपित बेल पर बाहर: जैसे आफताब के ‘प्रेम’ में मारी गई श्रद्धा, वैसे ही शाकिब के ‘लव जिहाद’ की भेंट चढ़ी थी एकता

जैसे आज पूरा देश श्रद्धा वालकर (Shraddha Walker Murder Case) की निर्मम हत्या से सन्न है, ऐसे ही करीब दो साल पहले एकता देशवाल (Ekta Deshwal Murder Case) की हत्या ने झकझोर दिया था। जैसे आफताब पूनावाला ने श्रद्धा के 35 टुकड़े कर जंगल में फेंक दिए, वैसे ही शाकिब ने अपने परिजनों संग एकता के टुकड़े कर खेत में गाड़ दिया था। जैसे करीब आठ महीने बाद श्रद्धा की हत्या किए जाने का खुलासा हुआ है, वैसे ही कई दिनों तक एकता की हत्या किए जाने की बात आरोपितों के अलावा किसी को मालूम नहीं थी। ताजा खबर यह है कि एकता देशवाल मर्डर केस के सभी 9 आरोपित जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं।

पंजाब के लुधियाना की रहने वाली एकता देशवाल की हत्या मेरठ में 5 जून 2019 को हुआ थी। लेकिन खुलासा 13 जून 2019 को तब हुआ, जब गन्ने के एक खेत से कुत्ते को इंसान का हाथ मुँह में लेकर भागते हुए ईश्वर पंडित ने देखा। खेत की खुदाई हुई तो एकता की लाश मिली। लाश को कई टुकड़ों में काट कर खेत में दफना दिया गया था। लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इस केस में ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। एकता के परिजनों ने ऑपइंडिया से बातचीत में अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देकर खुद को इस केस में हुई प्रगति से अनभिज्ञ बताया।

घर वालों को नहीं है केस की जानकारी

ऑपइंडिया से बात करते हुए एकता की माँ से सीमा देशवाल ने खुद को केस की स्थिति से अनजान बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक हालात खराब होने और मेरठ काफी दूर होने की वजह से वो केस की पैरवी नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि DNA सैम्पल देने के बाद से उन्हें कभी कोई भी कागज कोर्ट या पुलिस की तरफ से आज तक प्राप्त नहीं हुआ है। एकता की माँ के मुताबिक उनके घर का सारा सोना बेटी के माध्यम से शाकिब ने हड़प लिया जो अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि एकता की हत्या के बाद से उन्हें मुस्लिमों से डर लगने लगा है।

CJM की कोर्ट में केस

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO दौराला आर के पचौरी ने बताया कि एकता का केस चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में है। 2 दिसंबर 2022 को इस केस में अगली सुनवाई की डेट लगी है। यहाँ से केस जिला जज की अदलात में जाएगा जिसके बाद इसे सुनने वाले सेशन जज का निर्धारण होगा। उन्होंने बताया कि वादी यानि एकता की माँ आदि को गवाही के समय पर उन्हें बुलाया जाएगा। सरकारी वकील इस केस में एकता की तरफ से लगातार पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि मामले में आरोपित सभी 9 लोग जमानत पा चुके हैं।

सबसे पहले इशमत को मिली जमानत

ऑपइंडिया से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में सबसे पहले महिला आरोपित इशमत को जमानत मिली। इशमत की जमानत सेशन कोर्ट से ख़ारिज हो गई थी, जिसे इलाहांबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। यहाँ पर 10 जुलाई 2020 को सुनवाई हुई जिसमें उच्च न्यायालय में जस्टिस सिद्धार्थ की बेंच ने जमानत का आधार अरोपिता का आपराधिक इतिहास न होने के साथ उनके पास से कोई मजबूत बरामदगी न होना बताया गया है। इसी आधार पर बाद में मुशर्रत को भी जमानत मिली थी। इन दोनों की जमानत के बाद मुस्तकीम ने भी इलाहबाद हाई कोर्ट का रुख किया था और उसे भी 3 सितम्बर 2020 को जमानत मिल गई थी।

केस के मुख्य आरोपित शाकिब की जमानत याचिका पर इलाहबाद हाई कोर्ट में सुनवाई 13 जनवरी 2021 को हुई थी। यह सुनवाई जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेच में हुई थी। अपने बचाव में शकिब ने मृतका के अपनी मर्जी से अपने साथ भागने और ख़ुशी से रहने की दलील दी थी। इसी के साथ शाकिब ने कोर्ट को बताया था कि उसको जेल केवल पुलिस कस्टडी में उसके इकबालिया बयान के आधार पर भेजा गया है जो उससे दबाव में लिया गया था। शकिब ने भी अपना कोई आपराधिक इतिहास न होने की जानकारी कोर्ट में दाखिल की थी।

कोर्ट ने शाकिब की दलीलों से सहमति जताते हुए पुलिस के पास शाकिब को जेल में रखने लायक कोई ठोस सबूत न होने के तर्क को आधार बना कर उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे। शाकिब की जमानत में उस से पहले रिहा हुई इशमत के साथ मुस्तकीम और मुशर्रत की जमानत ने भी आधार का काम किया था। मुख्य आरोपित शकिब के रिहा होने के बाद बाकी 5 आरोपित भी अलग-अलग तारीखों पर जमानत पर बाहर आ गए।

क्या है मामला

गौरतलब है कि इस हत्या का खुलासा हुआ था तो यह जानकारी सामने आई थी कि 5 जून 2019 को ईद का दिन था। शाकिब एकता को घुमाने के बहाने बाहर ले गया। रात करीब 9 बजे उसने अपने परिवार की मदद से कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर एकता को पिला दी थी। उसके भाई मुसर्रत, पिता मुस्तकीम, भाभी रेशमा पत्नी नवेद, इस्मत पत्नी मुसर्रत एवं गाँव के साथी अयान के साथ सुनसान इलाके में बेहोश एकता को ले गए।

मेरठ पुलिस के सामने दिए बयान के अनुसार रेशमा ने एकता के सभी कपड़े उतार दिए। इसके बाद सभी ने मिलकर उसके हाथ, पैर और सिर अलग-अलग कर दिए। पुलिस ने बताया कि शाकिब ने पीड़िता का हाथ इसलिए काट दिया था, क्योंकि उस पर उसके नाम का टैटू था। धड़ को सबी अहमद के गन्ने के खेत में गड्ढा खोदकर दबा दिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने लाश के ऊपर नमक छिड़क दिया था, ताकि वो जल्द से जल्द गल जाए। हाथ, पैर और सिर को गाँव के तालाब में फेंक दिया था। यह बात भी सामने आई थी कि हत्या के बाद भी एकता का सोशल मीडिया अकाउंट शाकिब चला रहा था।